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ग्वालियर में बिजली कनेक्शन काटने पर कर्मचारियों और ग्रामीणों में चले लाठी-डंडे

ग्वालियर. लाल टिपारा गांव में बिजली बिल की बकाया राशि वसूली को लेकर विवाद इतना बढ़ गया कि मामला फायरिंग और मारपीट तक पहुंच गया। घटना में दोनों पक्षों के कई लोग घायल हो गए। मुरार थाना पुलिस ने एक-दूसरे की शिकायत पर दोनों पक्षों के खिलाफ अलग-अलग मामले दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। वसूली के लिए पहुंचे थे मुरार थाना पुलिस के अनुसार बिजली कंपनी के कर्मचारी धीरज यादव और अन्य स्टाफ लाल टिपारा गांव में बकाया बिजली बिल की वसूली के लिए पहुंचे थे। इस दौरान बकायादारों से कर्मचारियों की कहासुनी हो गई। विवाद के बाद कर्मचारी धीरज यादव मौके से चले गए। कहासुनी की सूचना मिलने पर धीरज यादव का बेटा सुमित यादव, भतीजा नीतेश यादव और साथी आशिक खान मौके पर पहुंचे। आरोप है कि इन लोगों ने स्थानीय रहवासी रवि शर्मा, अंकुश शर्मा और दिनेश पाल पर हमला कर दिया। इस दौरान कट्टे से फायरिंग की गई और मारपीट में तीनों लोग घायल हो गए। रवि शर्मा की शिकायत पर पुलिस ने सुमित यादव, नीतेश यादव और आशिक खान के खिलाफ मामला दर्ज किया है। वहीं सुमित यादव की रिपोर्ट पर भी पुलिस ने अलग से प्रकरण दर्ज किया है। आरोप है कि हमला करने वाले युवकों का संबंध बदमाश कपिल यादव से भी है। कर्मचारियों पर भी जानलेवा हमले की शिकायत सहायक प्रबंधक आनंद चौरसिया ने थाने में आवेदन दिया कि स्टाफ धीरज यादव और रमाकांत मुदगल के साथ लाल टिपारा गांव में बकाया राशि वसूली के लिए गए थे। वसूली के दौरान राजकुमार शर्मा, पुरुषोत्तम शर्मा, फकीर चंद और लखन तोमर के बिजली कनेक्शन बकाया राशि के चलते काटे गए। इससे नाराज होकर इन लोगों ने बिजली कंपनी के कर्मचारियों पर पत्थर और लाठियों से हमला कर दिया। सहायक प्रबंधक आनंद चौरसिया ने आरोपितों के खिलाफ शासकीय कार्य में बाधा डालने और शासकीय कर्मचारियों से मारपीट करने की शिकायत दर्ज कराई है। गोली चलाई फिर सिर पर बट से मारा विवाद की स्थिति बनते ही मौके पर अफरा-तफरी मच गई। जिन युवकों से मुंहवाद हुआ उनके साथ जमकर मारपीट की गई। सुमित यादव और उसके साथियों ने पहले कट्टे से फायर किया और फिर उसी कट्टे के बट से युवक के सिर पर एक के बाद एक कई वार किए, जिससे युवक घायल हो गया। इस पूरी घटना का वीडियो भी बहुप्रसारित हुआ है, जिसमें हमलावर कट्टे से वार करते और स्थानीय लोग बीच बचाव करते दिखाई दे रहे हैं। पुलिस का कहना है कि सभी मामलों की जांच की जा रही है और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

मध्य प्रदेश में सरकारी बंगला खाली नहीं कर रहे अधिकारी और नेता, नोटिस से दी बेदखली की चेतावनी

 भोपाल मध्यप्रदेश में सत्ता तो बदल गई, लेकिन सरकारी बंगलों पर जमे रसूखदार अब तक अपनी कुर्सी छोड़ने को तैयार नहीं थे. अब मोहन सरकार ने साफ संदेश दे दिया है कि पद गया, तो बंगला भी छोड़ना पड़ेगा. नियम सबके लिए बराबर हैं, चाहे वह अपनी ही पार्टी का कितना बड़ा नेता क्यों न हो. पात्रता समाप्त होने के बावजूद सरकारी आवासों पर कब्जा जमाए पूर्व मंत्रियों, पूर्व सांसदों और आईएएस अफसरों के खिलाफ सरकार ने सख़्त रुख अपनाते हुए बंगला खाली करने के नोटिस भेजे हैं. संपदा संचालनालय ने ऐसे सभी नामों पर नोटिस जारी कर दिए हैं, जो सालों से नियमों को ताक पर रखकर सरकारी बंगलों का सुख भोग रहे थे. बीजेपी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष स्वर्गीय प्रभात झा के परिवार को भोपाल के 74 बंगले क्षेत्र में स्थित बी-टाइप आवास खाली करने के लिए 13 जनवरी तक का नोटिस दिया गया है. नोटिस में दो टूक चेतावनी भी दी गयी है कि समय पर बंगला खाली नहीं हुआ, तो प्रशासन बल प्रयोग कर बेदखली करेगा.  सुधीर कुमार कोचर को दो साल पहले सरकार ने दमोह का कलेक्टर बनाया था। इसके लिए पहले वह मंत्रालय में पदस्थ थे। तब उन्हें भोपाल में शासकीय आवास आवंटित किया गया था, लेकिन अब तक उसे उन्होंने खाली नहीं किया है। जबकि, नियमानुसार अधिकतम छह माह वह इसे रख सकते थे। कोचर इस तरह नियम विरुद्ध तरीके से आवास रखने वाले एक मात्र अधिकारी नहीं हैं। उन जैसे कई अधिकारी हैं। यही स्थिति नेताओं की भी है, जिसमें दिवंगत भाजपा नेता प्रभात झा और पूर्व मंत्री रामपाल सिंह भी हैं। झा के स्वजन को नोटिस देकर सात दिनों में आवास खाली करने के लिए कहा गया है। संपदा संचालनालय के अधिकारियों का कहना है कि भोपाल में सरकारी आवासों की कमी बनी रहती है। इसका बड़ा कारण यह है कि जिन लोगों को एक बार आवास आवंटित हो जाते हैं, वे आसानी से खाली नहीं करते हैं। नियमानुसार अधिकारी का जब यहां से तबादला हो जाता है तो उसे आवास खाली कर देना चाहिए। इसके लिए अधिकतम छह माह का समय दिया जाता है। आमतौर पर इस अवधि में कम ही आवास रिक्त होते हैं, जबकि दूसरे अधिकारी स्थानांतरित होकर आ जाते हैं। इनके लिए आवास की व्यवस्था करने में परेशानी होती है। भोपाल के बाहर पदस्थ हैं, पर बंगला नहीं किया खाली जैसे दमोह कलेक्टर बनाकर सुधीर कुमार कोचर को भेजा गया पर उन्होंने अब तक आवास रिक्त नहीं किया। रत्नाकर झा भी भोपाल के बाहर पदस्थ हैं लेकिन आवास पर कब्जा बना हुआ है। महीप तेजस्वी राजगढ़ कलेक्टर हैं तो सुधीर कुमार शाही सेवानिवृत्त हो चुके हैं। अधिकारियों की तरह नेता भी हैं जो एक बार आवास आवंटित होने के बाद रिक्त नहीं करते हैं। भाजपा नेता प्रभात झा को 74 बंगले में आवास आवंटित हुआ था। उनके निधन के बाद अब भी कब्जा स्वजन के पास है। इसी तरह पूर्व मंत्री रामपाल सिंह विधानसभा चुनाव हार गए लेकिन शिवाजी नगर में आवास रखे हुए हैं। संगठन के कई नेता विधायकों के नाम पर बी और सी श्रेणी के आवास आवंटित कराकर रह रहे हैं। संपदा के सूत्रों का कहना है कि इनमें से कुछ नेताओं को नोटिस देकर आवास खाली करने के लिए कहा गया है। साथ ही यह चेतावनी भी दी है कि यदि आवास खाली नहीं किए जाते हैं तो फिर बल प्रयोग किया जाएगा।

नक्सलियों के कॉरिडोर वाले जंगल अब होंगे जंगली भैंसों का निवास, नई योजना शुरू

बालाघाट मध्य भारत के पूर्वी हिस्से में फैली घनी जंगल की एक विशाल पट्टी, जिसे पहले नक्सली समूह अपनी विस्तार योजना के लिए मार्ग के रूप में इस्तेमाल करते थे, अब जंगली भैंसों (Wild Buffalo) का घर बनने जा रही है, जो मध्य प्रदेश में करीब 100 साल पहले विलुप्त हो चुकी थीं। यह जंगल कान्हा टाइगर रिज़र्व के सुपखर रेंज में स्थित है, जो बालाघाट और मंडला जिलों में फैला है। योजना के तहत असम से जंगली भैंसों का पहला दल फरवरी-मार्च 2026 तक मध्य प्रदेश पहुंच जाएगा।  दोनों भाजपा शासित राज्य, असम और मध्य प्रदेश, ने हाल ही में वन्यजीव आदान-प्रदान कार्यक्रम पर सहमति जताई है। इस कार्यक्रम के तहत जंगली भैंसों के साथ-साथ गैंडा, नाग, बाघ और मगरमच्छ भी एक राज्य से दूसरे राज्य में भेजे जाएंगे। दोनों राज्यों के मुख्यमंत्री, हिमंता बिस्वा शर्मा और डॉ. मोहन यादव, के बीच हुई बैठक में तय हुआ कि 50 जंगली भैंसों को तीन वर्षों में असम से मध्य प्रदेश लाया जाएगा, जबकि गैंडे और तीन नाग भोपाल के वन विहार नेशनल पार्क में रहेंगे। असम को मध्य प्रदेश से एक बाघ जोड़ी और छह मगरमच्छ मिलेंगे। फरवरी-मार्च में 10 से 15 भैंस का पहला समूह  कान्हा टाइगर रिज़र्व में जंगली भैंसों के पुनर्वास का निर्णय इसलिए लिया गया क्योंकि यह क्षेत्र लंबे घास के मैदान, जल स्रोतों की उपलब्धता और न्यूनतम मानव हस्तक्षेप के लिहाज से सबसे उपयुक्त है। वन्यजीव संस्थान (WII) की विस्तृत वैज्ञानिक अध्ययन रिपोर्ट में भी सुपखर रेंज को जंगली भैंसों के लिए सबसे अनुकूल माना गया। कान्हा टाइगर रिज़र्व के अधिकारियों ने बताया कि ऐतिहासिक रूप से यह क्षेत्र जंगली भैंसों का प्राकृतिक आवास रहा है। सुपखर रेंज के जंगलों में सुरक्षित एन्क्लोजर बनाने का काम तेजी से चल रहा है, ताकि फरवरी-मार्च में आने वाली पहली बैच (10-15 भैंस) को सुरक्षित रखा जा सके।  नक्सली समूह केबी डिवीजन के विस्तार के मार्ग था  राज्य पुलिस के एंटी-नक्सल विभाग के सूत्रों के अनुसार, “सुपखर रेंज का यह हिस्सा पहले नक्सली समूह KB डिवीजन के लिए मंडला, डिंडोरी, उमरिया और अनुपपुर जिलों तक विस्तार के लिए मार्ग था, लेकिन दिसंबर 2025 की पहली सप्ताह में एमएमसी जोन के सक्रिय नक्सलियों की मौत और आत्मसमर्पण के बाद खाली है। अब अब वन विभाग के प्रोजेक्ट्स जैसे जंगली भैंसों का पुनर्वास शुरू करने के लिए स्थिति अनुकूल है।   

मध्य प्रदेश कर्मचारी चयन मंडल की परीक्षाओं में होगी कड़ी सुरक्षा: एंट्री से पहले आइरिस और फिंगरप्रिंट जांच, AI से बनेगा प्रश्नपत्र

भोपाल मध्य प्रदेश कर्मचारी चयन मंडल (ईएसबी) की इस साल होने वाली परीक्षाओं में सुरक्षा के काफी प्रबंध रहेंगे। सभी परीक्षाओं में अभ्यर्थियों की पहचान का सत्यापन आधार आधारित फेस (चेहरे), आइरिस (आंखों की पुतली) स्कैन और फिंगर (अंगुलियों की छाप) प्रणाली से किया जाएगा। इससे ऐसे लोगों की पहचान की जाएगी, जो दूसरे के नाम पर परीक्षा देने बैठते हैं। इसके लिए ईएसबी परीक्षा केंद्रों पर आइरिस स्कैन और फेस रिकोग्निशन मशीनें लगाएगा। परीक्षा केंद्रों पर अधिक संख्या में सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे। नकल रोकने के लिए जैमर भी लगाए जाएंगे। इस संबंध में ईएसबी ने दिशा-निर्देश भी जारी कर दिए हैं। इस बार ईएसबी प्रश्नपत्र तैयार करने और परीक्षा केंद्रों के चयन में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) की भी सहायता लेगा। इस वर्ष विभिन्न सरकारी विभागों में करीब 15 हजार पदों के लिए 16 भर्ती परीक्षाएं आयोजित की जाएंगी। ये भर्तियां पुलिस, शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य अहम विभागों में रिक्त पड़े पदों को भरने के लिए की जाएंगी। बता दें, कि ये कदम वर्ष 2023 की आरक्षक भर्ती परीक्षा में हुई अनियमितताओं के बाद उठाया गया है, जब अभ्यर्थियों ने आधार के बायोमेट्रिक पहचान में धोखाधड़ी कर परीक्षा पास कर ली थी। शारीरिक दक्षता परीक्षा के दौरान ऐसे कुछ अभ्यर्थी पकड़े गए थे। फर्जी अभ्यर्थी की पहचान हो सकेगी अधिकारियों ने बताया कि आइरिस स्कैन को अंगुलियों के निशान से कहीं अधिक सुरक्षित माना जाता है। यह एक ऐसी बायोमेट्रिक तकनीक है जो सटीक होती है। इसका सबसे बड़ा कारण यह है कि हर व्यक्ति की आंख की पुतली का पैटर्न बेहद अनोखा और जटिल होता है, जिसे बदला नहीं जा सकता है। इसी तरह फेस रिकोग्निशन भी सुरक्षित माना जा रहा है। तीन एजेंसियां करेंगी काम एआई के माध्यम से पुलिस भर्ती परीक्षा को संपन्न कराया जाएगा। इसमें केंद्र के निर्धारण से लेकर प्रश्नपत्र तैयार करने, परीक्षा केंद्रों पर निगरानी और परीक्षार्थियों की जांच सब कुछ एआई के माध्यम से होगा। एआई चार प्रकार से डाटा विश्लेषण कर ईएसबी को भेजेगा। इसमें परीक्षार्थियों द्वारा हल किए गए सवालों पर साफ्टवेयर के माध्यम से नजर रखी जाएगी कि एक विद्यार्थी एक प्रश्न कितने देर में हल कर रहा है। परीक्षार्थी किस प्रश्न पर कितनी देर रुका, प्रश्नों को हल करने में कितना समय लगा, कितनी देर वह खाली बैठा रहा। इसके आधार पर संदिग्ध की पहचान हो सकेगी। अगर अभ्यर्थी सिर्फ 15 से 20 मिनट में जवाब दे देता है तो एआइ मंडल को रेड अलर्ट भेजेगा। तीन एजेंसियां मिलकर परीक्षा संपन्न कराएंगी।

मध्यप्रदेश स्टार्टअप समिट-2026 की शुरुआत रविवार से, रवीन्द्र भवन में होगा आयोजन

दो दिवसीय मध्यप्रदेश स्टार्टअप समिट-2026 रविवार से रवीन्द्र भवन में देश और प्रदेश का टेलेंट देगा विकसित भारत का संदेश, दो दिन होंगे अनेक सत्र प्रदर्शनी में दिखेगी मौजूदा और भविष्य के म.प्र. की उत्कृष्ट उद्यमशीलता की झांकी भोपाल  मध्यप्रदेश स्टार्टअप समिट 2026 का आयोजन 11 एवं 12 जनवरी 2026 को रवींद्र भवन, भोपाल में होगा। यह दो दिवसीय स्टार्टअप समिट शिखर सम्मेलन देशभर के स्टार्टअप्स, निवेशकों, इनक्यूबेटर्स, उद्योग जगत के प्रतिनिधियों, नीति-निर्माताओं, एफपीओ, एमएसएमई एवं स्टार्टअप इकोसिस्टम से जुड़े साझेदारों को एक साझा मंच पर लाएगा। समिट के माध्यम से राज्य के तेज़ी से विकसित होते स्टार्टअप इकोसिस्टम, नीति-आधारित सुधारों, निवेश अवसरों एवं प्रेरक सफलता कहानियों को प्रदर्शित किया जाएगा। साथ ही नेटवर्किंग, सीखने एवं सहयोग के लिए उच्च प्रभाव वाला मंच प्रदान किया जाएगा। प्रथम दिवस : क्षमता निर्माण, एफपीओ एवं स्टार्टअप पिचिंग सत्र समिट के पहले दिन का फोकस ज्ञान-साझाकरण एवं स्टार्टअप सहभागिता के माध्यम से स्टार्टअप इकोसिस्टम को सुदृढ़ करने पर रहेगा। सत्र की दिन की शुरुआत “इन्क्यूबेटर सस्टेनेबिलिटी” पर इन्क्यूबेटर मास्टर क्लास से होगी, जिसमें NSRCEL–IIM बैंगलोर, ISBA, IIM इंदौर तथा देश के अग्रणी इन्क्यूबेटर्स के विशेषज्ञ सहभागिता करेंगे। इसके बाद एग्री एफपीओ को स्टार्टअप के रूप में विकसित करने एवं वैल्यू चेन परिवर्तन विषय पर पैनल चर्चा आयोजित की जाएगी, जिसमें नवाचार, इम्पैक्ट फंडिंग एवं स्केलेबल एग्री-उद्यमिता मॉडल्स पर विचार विमर्श होगा। दोपहर पश्चात स्टार्टअप पिचिंग सत्र (क्वालिफायर राउंड) आयोजित किया जाएगा, जिसमें चयनित स्टार्टअप्स निवेशकों एवं मेंटर्स के समक्ष अपने विचार प्रस्तुत करेंगे। द्वितीय दिवस : पिचिंग फाइनल्स, उद्घाटन सत्र एवं सेक्टोरल संवाद सत्र समिट के दूसरे दिन की शुरुआत स्टार्टअप पिचिंग फाइनल्स से होगी, जिसमें उच्च संभावनाओं वाले स्टार्टअप्स का चयन किया जाएगा। इस दिन यानि 12 जनवरी सोमवार को उद्घाटन मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा किया जाएगा। साथ ही देश के प्रतिष्ठित उद्यमियों एवं निवेशकों —अमन गुप्ता (को-फाउंडर बोट), अंकित अग्रवाल (फाउंडर एवं सीईओ इशयोरेंस देखो) एवं विनीत राय (फाउंडर आविष्कार ग्रुप) का संबोधन भी होगा। इस अवसर पर प्रदर्शनी भी आयोजित होगी। इस अवसर पर स्टार्टअप अवॉर्ड्स, एमपी स्टार्टअप इंस्पायरिंग स्टोरीज़ संकलन का विमोचन, सिंगल-क्लिक इंसेंटिव पहल तथा राष्ट्रीय संस्थानों के साथ रणनीतिक एमओयू भी संपादित किए जाएंगे। दोपहर बाद सेक्टोरल सत्रों एवं फायरसाइड चैट्स के माध्यम से रियल ग्रोथ मैट्रिक्स, महिला उद्यमिता, स्टार्टअप्स एवं ओडीओपी एमएसएमई के लिए सोशल मीडिया व इन्फ्लुएंसर मार्केटिंग, तथा वैश्विक विस्तार रणनीतियों जैसे विषयों पर गहन चर्चा की जाएगी। कार्यक्रम में भाग लेने के लिए इच्छुक प्रतिभागी लिंक https://startup.mp.gov.in/event/ पर पंजीकरण कर सकते हैं।  

भागीरथपुरा दूषित पानी कांड से इंदौर का पर्यटन प्रभावित, टूर कैंसल, अंतरराष्ट्रीय छवि और व्यवसाय को नुकसान

 इंदौर  इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पेयजल से हुई 18 मौतों की चर्चा अब देश के साथ-साथ विदेशों में भी होने लगी है। विदेशी मीडिया में सुर्खियां बनने के कारण इसका सीधा असर इंदौर के पर्यटन क्षेत्र पर दिखाई दे रहा है। हाल ही में इंदौर के दो बड़े टूर निरस्त हो गए हैं और जो पर्यटक शहर आ रहे हैं, वे भी यहां के पानी की गुणवत्ता को लेकर चिंतित नजर आते हैं। आमतौर पर महेश्वर और ओंकारेश्वर जाने वाले पर्यटक इंदौर भी घूमने आया करते हैं, लेकिन  उनकी संख्या में काफी गिरावट दर्ज की गई है। इसके साथ ही कांग्रेस ने भी इंदौर के स्वच्छता अवार्डों की विश्वसनीयता पर सवाल उठाना शुरू कर दिया है। भागीरथपुरा में 26 दिसंबर से मरीजों के आने का सिलसिला शुरू हुआ था, जिसके बाद मौतों की खबरें सामने आईं। इंदौर को देश का सबसे स्वच्छ शहर माना जाता है, लेकिन दूषित पानी की इस घटना ने शहर की छवि को प्रभावित किया है। कांग्रेस ने इस विषय को राजनीतिक मुद्दा बनाया है, जिससे पर्यटन क्षेत्र पर नकारात्मक प्रभाव पड़ा है। इंदौर ट्रेवल्स एजेंट एसोसिएशन के अध्यक्ष हेमेंद्र सिंह जादौन के अनुसार, मॉरीशस से अधिकारियों का एक दल जनवरी के पहले सप्ताह में इंदौर आने वाला था, जिसे रद्द कर दिया गया। इसी तरह बेंगलुरु से मध्य प्रदेश भ्रमण पर आने वाले एक समूह ने भी अपनी बुकिंग निरस्त करा दी है। दिसंबर और जनवरी के महीने पर्यटन के लिहाज से महत्वपूर्ण होते हैं, लेकिन इस बार पर्यटकों की आमद कम है। भागीरथपुरा मुद्दे पर मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने स्वीकार किया कि गंदे पानी के कारण हुई ये मौतें एक बड़ा सबक हैं। उन्होंने बताया कि बस्ती में पेयजल लाइन बिछाने के प्रस्ताव लंबे समय से लंबित थे, जिन्हें समय पर लागू करने में विफलता हाथ लगी। विजयवर्गीय के अनुसार, वर्षों की मेहनत से शहर ने जो पहचान बनाई थी, इस घटना से उस पर दाग लगा है। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि इंदौर इस दुखद घटना को लेकर बैठा नहीं रह सकता। इंदौर की प्रगति हमेशा सामूहिकता से हुई है और इस हादसे के बाद शहर का गौरव वापस लौटाने के लिए नए सिरे से संकल्प लिया जाएगा।    

महाकाल की नगरी में 14-18 जनवरी तक होगा सांस्कृतिक समागम, शिव-भक्ति और अंतरराष्ट्रीय कलाकारों की मौजूदगी

उज्जैन  बाबा महाकाल की नगरी में 14 से 18 जनवरी तक सांस्कृतिक समागम, शिव-भक्ति और वैश्विक कलाकारों के संगम का केंद्र बनेगी। श्रीमहाकाल महोत्सव देश और दुनिया में उज्जैन की सांस्कृतिक पहचान को नई ऊंचाई देगा और लोक एवं शास्त्रीय कला के बीच अनूठा संवाद स्थापित करेगा। इसका शुभारंभ मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव करेंगे। पहले दिन पार्श्व गायक शंकर महादेवन (Singer Shankar Mahadevan) अपने बेटों सिद्धार्थ और शिवम् के साथ प्रस्तुति देंगे। मुख्यमंत्री के संस्कृति सलाहकार और वीर भारत न्यास के न्यासी सचिव श्रीराम तिवारी ने बताया कि महाकाल की नगरी में आयोजित महोत्सव देश-दुनिया के सांस्कृतिक मानचित्र पर उज्जैन को नई ऊंचाई देगा। महोत्सव की विशेषता यह है कि इसमें शास्त्रीय और लोक, परंपरा और आधुनिकता, देशज और वैश्विक सभी धाराएं एक साथ प्रवाहित होंगी। महोत्सव में 7 राज्यों के मुख्यमंत्रियों के आने की संभावना है। सीएम डॉ. मोहन यादव (CM Mohan Yadav) के साथ उत्तराखंड के पुष्कर सिंह धामी, आंध्रप्रदेश के चंद्रबाबू नायडू, महाराष्ट्र के देवेन्द्र फडणवीस, गुजरात के भूपेन्द्र पटेल, उत्तर प्रदेश के योगी आदित्यनाथ, झारखंड के हेमंत सोरेन और तमिलनाडु के एमके स्टालिन को आमंत्रित किया गया है।  अंतरराष्ट्रीय सहभागिता महोत्सव की विशेषता यह रहेगी कि इंडोनेशिया और श्रीलंका के नाट्य दल सहभागिता करेंगे। इससे भारत की प्राचीन सांस्कृतिक कड़ियों का पुनस्मरण होगा और यह सिद्ध होगा कि भारत की सभ्यता केवल भौगोलिक सीमाओं तक सीमित नहीं, बल्कि वैश्विक भूभाग में सांस्कृतिक सेतु निर्मित किए हैं। संगीत और प्रस्तुति पार्श्व गायक शंकर महादेवन अपने बेटों सिद्धार्थ और शिवम् की त्रयी शिव-भक्ति और भारतीय संगीत की ऊंचाइयों को स्वर देगी। सोना महापात्रा की भावपूर्ण प्रस्तुति, द ग्रेट इंडियन क्वायर, विपिन अनेजा और श्रेयस शुक्ला जैसे कलाकार महोत्सव को समकालीन सृजन का सशक्त स्वर देंगे। लोक कला का महत्वपूर्ण आयाम तिवारी ने बताया कि महोत्सव का विशेष आयाम है जनजातीय लोक कला। प्रतिदिन उज्जैन के विभिन्न स्थलों से कला यात्राएं निकलेंगी, जो रंगों, वाद्यों और नृत्य की लय के साथ श्रीमहाकाल महालोक परिसर तक पहुंचेगी। यह केवल मार्ग की यात्रा नहीं, बल्कि पीढ़ियों से संचित परंपराओं को वर्तमान से जोड़ने का माध्यम होगी। महोत्सव वीर भारत न्यास, श्रीमहाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति, संस्कृति संचालनालय, जनजातीय लोक कला एवं बोली विकास अकादमी, त्रिवेणी संग्रहालय, कृषि उद्योग विकास परिषद, उज्जैन विकास प्राधिकरण, जिला प्रशासन और नगर निगम की सहभागिता में आयोजित किया जा रहा है।

रविवार को एमपी में 1100 ट्रैक्टरों के साथ सीएम मोहन यादव का किसान मेगा शो, जंबूरी मैदान में होगा सम्मेलन

भोपाल   मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में आज  11 जनवरी को सीएम मोहन यादव किसानों के बीच मेगा शो करेंगे। इस आयोजन में भोपाल और आसपास के एक दर्जन जिलों से करीब 1100 ट्रैक्टरों के साथ किसान राजधानी पहुंचेंगे। पहले चरण में भोपाल- इंदौर बायपास पर किसानों की विशाल रैली निकाली जाएगी, जिसमें सीएम मोहन यादव शामिल होंगे। इसके बाद जम्बूरी मैदान में किसान सम्मेलन आयोजित होगा, जहां मुख्यमंत्री कृषि वर्ष 2026 की औपचारिक घोषणा करेंगे। जंबूरी मैदान पर होगा किसानों का जुटान मप्र की मोहन सरकार इस साल 2026 को कृषि कल्याण वर्ष के तौर पर मना रही है। भोपाल के जंबूरी मैदान पर 11 जनवरी को एक बड़ा किसान सम्मेलन होगा। इस सम्मेलन में सीएम डॉ मोहन यादव कृषि कल्याण वर्ष 2026 की औपचारिक शुरुआत करेंगे। सीएम मोहन यादव का मेगा शो कार्यक्रम के अनुसार मुख्यमंत्री हेलीकॉप्टर से भोपाल-इंदौर बायपास स्थित एक निजी कॉलेज परिसर में उतरेंगे। यहां से वे सीधे किसानों की रैली में शामिल होंगे और ट्रैक्टर रैली के साथ जम्बूरी मैदान तक पहुंचेंगे। आयोजन स्थल तक मुख्यमंत्री का किसानों के साथ सड़कों पर उतरना सरकार की किसान केंद्रित नीति का बड़ा राजनीतिक और प्रशासनिक संदेश माना जा रहा है। यह इसलिए भी किया जा रहा है कि इस वर्ष किसानों और कृषि पर सरकार को पूर्व से ज्यादा फोकस होगा। रैली में प्रदेश के विभिन्न जिलों से आए किसान अपने-अपने ट्रैक्टरों के साथ हिस्सा लेंगे। ट्रैफिक प्रबंधन और सुरक्षा को लेकर प्रशासन विशेष इंतजाम कर रहा है ताकि शहर की यातायात व्यवस्था प्रभावित न हो। सीएम बताएंगे कृषि वर्ष 2026 का रोडमैप जम्बूरी मैदान में होने वाले किसान सम्मेलन में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव कृषि वर्ष 2026 को लेकर सरकार की रूपरेखा प्रस्तुत कर सकते हैं। सम्मेलन में मुख्यमंत्री सरकार के आगामी तीन वर्षों के कृषि और कृषकों पर आधारित लक्ष्य भी सार्वजनिक कर सकते हैं। इन लक्ष्यों का मुख्य फोकस किसानों की आय में वृद्धि, आधुनिक कृषि तकनीकों के विस्तार, कृषि आधारित उद्योगों को बढ़ावा देने और ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार सृजन पर रहेगा। सम्मेलन में प्राकृतिक खेती, सिंचाई सुविधाओं के विस्तार, फसल विविधीकरण और मूल्य संवर्धन जैसे विषयों पर भी सरकार की योजनाओं का खाका रखा जा सकता। इस मौके पर मुख्यमंत्री किसानों से सीधा संवाद भी कर सकते हैं। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने साफ कहा है कि लक्ष्य सिर्फ आयोजन नहीं, बल्कि किसानों की आय बढ़ाना, रोजगार सृजन और कृषि को ग्लोबल मार्केट से जोड़ना है। इसके लिए 3 साल का रोडमैप तय कर गतिविधियां चलाई जाएंगी। खेती से जुड़े सभी विभाग कृषि, सहकारिता, पशुपालन, उद्यानिकी, खाद्य प्रसंस्करण, मत्स्य और ऊर्जा आपसी समन्वय से काम करेंगे। ब्राजील-इजराइल तक ट्रेनिंग लेने जाएंगे किसान किसानों की क्षमता बढ़ाने के लिए राज्य और संभाग स्तर पर प्रशिक्षण और एक्सपोजर विजिट कराई जाएंगी। सरकार किसानों को देश के उन्नत कृषि राज्यों के साथ-साथ इजराइल और ब्राजील जैसे देशों में आधुनिक खेती, पशुपालन और तकनीकी नवाचार देखने भेजेगी। किसानों की आय बढ़ाने का सीधा प्लान सरकार ने 2026 को कृषि वर्ष घोषित करते हुए साफ किया है कि हर योजना का अंतिम लक्ष्य किसानों की आमदनी बढ़ाना होगा। इसके लिए कृषि गतिविधियों को तीन साल के लक्ष्य के साथ संचालित किया जाएगा। खेती को सिर्फ उत्पादन तक सीमित न रखकर बाजार, प्रोसेसिंग और एक्सपोर्ट से जोड़ा जाएगा, ताकि किसान को उपज का बेहतर दाम मिल सके। मशीन, तकनीक और सिंचाई पर फोकस खेती की लागत घटाने और उत्पादन बढ़ाने के लिए कृषि यंत्रीकरण को बढ़ावा दिया जाएगा। माइक्रो इरिगेशन सिस्टम को प्रोत्साहित कर पानी की बचत के साथ उपज बढ़ाने की योजना है। किसानों को नई तकनीकों से जोड़ने के लिए एग्री स्टेक और डिजिटल कृषि को जमीनी स्तर पर लागू किया जाएगा। कृषि वर्ष 2026 के प्रमुख उद्देश्य किसानों की आय में वृद्धि: खेती को लाभकारी, टिकाऊ और तकनीक आधारित रोजगार मॉडल में बदलना। कृषि आधारित उद्योगों का विकास: खाद्य प्रसंस्करण, डेयरी, मत्स्य पालन और उद्यानिकी को बढ़ावा देना। नवाचार और आधुनिक तकनीक: ड्रोन सेवाएं, हाइड्रोपोनिक्स, एग्री-स्टेक, किसान उत्पादक संगठन (FPO) प्रबंधन से युवाओं को जोड़कर रोजगार सृजन। प्राकृतिक खेती और संतुलित उर्वरक उपयोग: मृदा स्वास्थ्य परीक्षण, पर्यावरण अनुकूल खेती और रासायनिक उर्वरकों के संतुलित प्रयोग को प्रोत्साहन। 

625 KM लंबा ‘टाइगर टूरिज्म कॉरिडोर’ बनेगा MP में, पेंच, कान्हा, बांधवगढ़ और पन्ना को जोड़ने वाली सड़कें

 भोपाल टाइगर स्टेट' मध्यप्रदेश अब वन्यजीव प्रेमियों के लिए दुनिया का सबसे केंद्र बनेगा. राज्य सरकार पेंच से कान्हा, कान्हा से बांधवगढ़ और बांधवगढ़ से पन्ना को जोड़ने के लिए 625 किलोमीटर लंबे मार्गों को अपग्रेड करेगी. इस प्रोजेक्ट पर 5000 करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे. मुख्यमंत्री मोहन यादव ने दिल्ली-एनसीआर से मध्यप्रदेश की दूरी कम करने और औद्योगिक विकास के लिए कई मेगा प्रोजेक्ट्स का रोडमैप शेयर किया है. इसके तहत ग्वालियर-चंबल क्षेत्र के लिए 12 हजार करोड़ रुपए की अटल पथ योजना उत्तरप्रदेश और दिल्ली-एनसीआर को जोड़ेगी. इससे मध्यप्रदेश से दिल्ली की दूरी घटकर मात्र 3 से 4 घंटे रह जाएगी. इसके अलावा, 9 हजार 716 करोड़ की लागत से बनने वाला भोपाल-जबलपुर ग्रीन फील्ड एक्सप्रेस-वे प्रदेश के दो बड़े केंद्रों को जोड़ेगा. इन सड़कों के विकास से मध्यप्रदेश की पहुंच बंदरगाहों तक आसान होगी, जिससे व्यापार और उद्योगों को रफ्तार मिलेगी. मुख्यमंत्री ने बताया कि विकास कार्यों में क्वालिटी और रफ्तार के लिए केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के साथ रोडमैप तैयार किया गया है. सिंहस्थ-2028 को ध्यान में रखते हुए अधिकांश सड़क परियोजनाओं को दिसंबर 2027 तक पूर्ण करने का लक्ष्य है. खंडवा बायपास, जबलपुर रिंग रोड, इंदौर-हरदा और रीवा बायपास के कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए गए हैं. पड़ोसी राज्यों को सौगात श्योपुर के कूनो नेशनल पार्क में चीतों की सफल बसाहट के बाद अब राजस्थान और उत्तरप्रदेश के पर्यटकों की संख्या भी बढ़ी है. मुख्यमंत्री के अनुसार, भौगोलिक स्थिति के कारण यह टाइगर कॉरिडोर पड़ोसी राज्यों के पर्यटकों के लिए भी एक बड़ी सौगात साबित होगा.

मध्य प्रदेश में अधिकारियों के तबादले: कलेक्टर से लेकर सचिव स्तर तक के अधिकारियों को मिलेगा पदोन्नति और रिपोर्ट कार्ड

 भोपाल  मंत्रालय से लेकर मैदानी स्तर तक के अधिकारियों का रिपोर्ट कार्ड मुख्य सचिव कार्यालय और सामान्य प्रशासन विभाग तैयार कर रहा है। एक जनवरी को कई अधिकारी पदोन्नत किए गए लेकिन इनकी पदस्थापना यथावत रखी गई है। 15 जनवरी को मुख्य सचिव अनुराग जैन ने कलेक्टर, कमिश्नर, नगर निगम आयुक्त, जिला पंचायत और स्मार्ट सिटी के मुख्य कार्यपालन अधिकारियों की कांफ्रेंस बुलाई है। इसमें मैदानी अधिकारियों के कामकाज का आकलन होगा। इसके बाद तबादलों का सिलसिला प्रारंभ हो जाएगा। हालांकि, कलेक्टर और जिला पंचायतों के मुख्य कार्यपालन अधिकारी 21 फरवरी तक नहीं बदले जाएंगे, क्योंकि प्रदेश में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण का काम चल रहा है। कई अधिकारियों को दो साल से ज्यादा हो गए मध्य प्रदेश में कलेक्टर से लेकर सचिव स्तर के अधिकारियों को पदोन्नत किया गया है। सभी को पदोन्नति अभी वर्तमान पदों को उच्च पद के समकक्ष घोषित कर दे दी गई है। कई अधिकारियों को एक स्थान पर पदस्थ रहते दो वर्ष से अधिक हो चुके हैं। इनके स्थान पर नए अधिकारी पदस्थ किए जाएंगे। वहीं, मंत्रालय में कुछ अपर सचिव को सचिव बनाया गया है। इनकी पदस्थापना भी होनी है। इसे देखते हुए मुख्य सचिव कार्यालय और सामान्य प्रशासन विभाग अपने-अपने स्तर पर तैयारी कर रहा है। सूत्रों का कहना है कि 15 जनवरी को कलेक्टर कांफ्रेंस होगी। कुछ अधिकारियों की पदस्थापना में परिवर्तन होगा इसके लिए 85 बिंदुओं पर जिलेवार रिपोर्ट तैयार कराई जा रही है। इससे कलेक्टरों के कामकाज का आकलन होगा। यही आगामी पदस्थापना का आधार भी बनेगा। चूंकि, 21 फरवरी तक मतदाता सूची के पुनरीक्षण का कार्य चलेगा। इस अवधि में कलेक्टर और जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारियों को हटाने के लिए चुनाव आयोग की अनुमति लगेगी और तीन नामों का पैनल भेजना होगा, इसलिए जल्दबाजी नहीं की जाएगी। मंत्रालय स्तर पर कुछ अधिकारियों की पदस्थापना में परिवर्तन अवश्य किया जाएगा। इसमें अपर मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव, सचिव और अपर सचिव स्तर के अधिकारी शामिल होंगे।