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मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा- दुग्ध उत्पादन तथा प्रोसेसिंग में औद्योगिक गतिविधियों के विस्तार और रोजगार की अपार संभावनाएं

किसानों की आय बढ़ाने में दुग्ध उत्पादन की महत्वपूर्ण भूमिका सांची ब्राण्ड का अधिक से अधिक विस्तार किया जाए पीपीपी मोड पर दुग्ध उत्पादन गतिविधियों का विस्तार हो मध्यप्रदेश स्टेट को-ऑपरेटिव डेयरी फेडरेशन तथा राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड के मध्य हुए एग्रीमेंट के अंतर्गत गठित राज्य स्तरीय संचालन समिति की बैठक हुई भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रदेश के दुग्ध उत्पादन को औद्योगिक गतिविधियों के विस्तार का भी आधार बनाया जाए। दुग्ध उत्पादन तथा उसकी प्रोसेसिंग व मार्केटिंग में रोजगार की अपार संभावनाएं हैं। इसके साथ ही दुग्ध उत्पादन कृषकों की आय बढ़ाने में भी प्रभावी रूप से सहायक है। सभी जिलों में समन्वित रूप से गतिविधियों संचालित करते हुए सांची ब्राण्ड का अधिक से अधिक विस्तार किया जाए। सांची प्रोडेक्ट्स की ब्राण्डिंग में गोवंश और गोपाल को शामिल किया जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने यह निर्देश मध्यप्रदेश स्टेट को-ऑपरेटिव डेयरी फेडरेशन तथा राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड के मध्य हुए एग्रीमेंट के अंतर्गत गठित राज्य स्तरीय संचालन समिति की बैठक में दिए। मुख्यमंत्री निवास स्थित समत्व भवन में हुई बैठक में वरिष्ठ विधायक श्री हेमंत खण्डेलवाल, अपर मुख्य सचिव श्री नीरज मंडलोई, अपर मुख्य सचिव श्री मनीष रस्तोगी, प्रमुख सचिव पशुपालन एवं डेयरी विकास श्री उमाकांत उमराव तथा राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड के पदाधिकारी उपस्थित थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि किसानों की आय बढ़ाने में दुग्ध उत्पादन की महत्वपूर्ण भूमिका को देखते हुए दुग्ध उत्पादन को प्रोत्साहित करने के लिए किसानों की दक्षता और क्षमता बढ़ाने के उद्देश्य से ग्राम स्तर तक गतिविधियां संचालित की जाएं। यह सुनिश्चित करना भी आवश्यक है कि दुग्ध संकलन व्यवस्था की मजबूत निगरानी हो। दूध खरीदी की कीमतें उत्पादकों के लिए लाभप्रद हों और खरीदी व्यवस्था में पारदर्शिता सुनिश्चित हो तथा दुग्ध उत्पादकों को उनका भुगतान नियमित रूप से समय-सीमा में प्राप्त हो। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में पीपीपी मोड पर निजी भागीदारी और डेयरी सहकारी समितियों के समन्वय से दुग्ध उत्पादन गतिविधियों का विस्तार किया जाए। इससे सम्पूर्ण प्रदेश में उद्यमशीलता को प्रोत्साहन प्रदान करने, किसानों की आय बढ़ाने और प्रदेश की अर्थव्यवस्था को गति देने में मदद मिलेगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश की औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों में डेयरी टेक्नोलॉजी पर केन्द्रित प्रशिक्षण और पाठ्यक्रम आरंभ किए जाएं। इससे डेयरी प्लांट संचालन में मदद मिलेगी और युवाओं को स्थानीय स्तर पर रोजगार भी उपलब्ध होगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव की अध्यक्षता में हुई बैठक में बताया गया कि राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड द्वारा कार्यभार ग्रहण करने के पश्चात सांची ब्राण्ड के प्रति लोगों का विश्वास बढ़ा है तथा सांची डेयरी शुरू करने की मांग कई स्थानों से आ रही है। दुग्ध उत्पादकों को दूध मूल्य के नियमित एवं समय पर भुगतान के लिए 10 दिन का रोस्टर तय किया गया है। दुग्ध संघों द्वारा दूध खरीदी मूल्यों में 2 रूपए 50 पैसे से 8 रूपए 50 पैसे प्रति लीटर की वृद्धि की गई है। अब तक 1241 नई दुग्ध सहकारी समितियों का गठन किया गया है तथा 635 निष्क्रिय दुग्ध समितियों को क्रियाशील बनाया गया है। सम्पूर्ण डेयरी वेल्यू चैन का डिजीटाईजेशन करने के लिए भोपाल, ग्वालियर, उज्जैन, बुंदेलखंड तथा जबलपुर दुग्ध संघों में सॉफ्टवेयर क्रियान्वित किया गया है। दुग्ध संकलन के लिए इंदौर दुग्ध संघ से मोबाइल ऐप की व्यवस्था लागू की गई है। जिससे दूध की मात्रा, गुणवत्ता और मूल्य की जानकारी तत्काल प्राप्त होती है। बैठक में बताया गया कि वर्ष 2029-30 तक 26 हजार गांवों तक डेयरी सहकारी कवरेज का विस्तार करने प्रतिदिन 52 लाख कि.ग्रा. दुग्ध संकलन करने, प्रतिदिन 35 लाख लीटर दुग्ध विक्रय और 63.3 लाख लीटर प्रतिदिन प्रसंस्करण क्षमता का लक्ष्य लेकर गतिविधियां संचालित की जा रही हैं।  पिछले 2 वर्ष से बंद शिवपुरी डेयरी संयंत्र को प्रारंभ करने के लिए प्रक्रिया आरंभ की गई है। जबलपुर में स्थापित 10 मेट्रिक टन क्षमता के पनीर प्लांट को पुन: आरंभ करने के लिए 5 करोड़ रूपए का निवेश किया जाएगा। इंदौर में स्थापित 30 मेट्रिक टन क्षमता का दूध पाउडर संयंत्र प्रारंभ किया गया है। इसके माध्यम से 3 लाख लीटर दूध का प्रतिदिन प्रसंस्करण किया जा रहा है। ग्वालियर डेयरी संयंत्र के सुदृढ़ीकरण की प्रक्रिया भी आरंभ की गई है। बैठक में राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड के चेयरमेन श्री मीनेश शाह, कार्यकारी निर्देशक, श्री एस. रघुपति, महाप्रबंधक श्री जिगनेश शाह, एमपी स्टेट को-ऑपरेटिव डेयरी फेडरेशन के प्रबंध संचालक डॉ. संजय गोस्वामी, ग्रुप हेड श्री असीम निगम, ग्रुप हेड, डॉ. शुभंकर नंदा, पशुपालन एवं डेयरी विभाग के संचालक डॉ. पी.एस. पटेल, तथा अन्य अधिकारी उपस्थित थे।  

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने वैज्ञानिक डॉ. विक्रम साराभाई की पुण्यतिथि पर किया नमन

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने महान वैज्ञानिक, पद्म विभूषण डॉ. विक्रम साराभाई की पुण्यतिथि पर विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित की है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि डॉ. साराभाई ने अंतरिक्ष अनुसंधान के क्षेत्र में देश को विश्व पटल पर स्थापित किया और महत्वपूर्ण संस्थानों की स्थापना की। डॉ. साराभाई द्वारा विज्ञान के माध्यम से की गई राष्ट्र की सेवा सदैव अविस्मरणीय रहेगी।  

प्रदेश में सिंचाई के रकबे में हो रही है निरंतर वृद्धि : जल संसाधन मंत्री सिलावट

माइक्रो सिंचाई पद्धति में मध्यप्रदेश देश में अग्रणी राज्य जल संरक्षण एवं संवर्धन के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य के लिये म.प्र. को मिला राष्ट्रीय जल अवार्ड भोपाल  जल संसाधन मंत्री श्री तुलसी सिलावट ने कहा है कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की किसानों की खुशहाली की परिकल्पना अनुसार मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के कुशल नेतृत्व में मध्यप्रदेश में गत दो वर्षों में सिंचाई क्षमता में अभूतपूर्व बढ़ोतरी हुई है। किसानों की तरक्की और खुशहाली हमारी सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। कृषि के अतिरिक्त पेयजल, उद्योगों, विद्युत उत्पादन आदि के लिए जल की उपलब्धता कराये जाने हेतु प्रयासरत हैं। प्रदेश में सिंचाई के रकबे में निरंतर वृद्धि हो रही है। माइक्रो सिंचाई पद्धति में मध्यप्रदेश देश में अग्रणी राज्य है। जल संरक्षण एवं संवर्धन क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य के लिये म.प्र. को राष्ट्रीय जल अवार्ड मिला है। यह जानकारी जल संसाधन मंत्री श्री तुलसीराम सिलावट ने मंगलवार को 2 वर्ष की विभागीय उपलब्धियों पर आयोजित पत्रकारवार्ता में दी। अपर मुख्य सचिव जल संसाधन डॉ. राजेश राजौरा उपस्थित थे। मंत्री श्री सिलावट ने कहा कि यह मध्यप्रदेश का सौभाग्य है कि यहां स्व. प्रधानमंत्री युगदृष्टा श्री अटल बिहारी वाजपेई के नदी जोड़ो के सपने को साकार करने का कार्य प्रारंभ हुआ। प्रधानमंत्री श्री मोदी ने केन-बेतवा बहुउद्देशीय नदी जोड़ो राष्ट्रीय परियोजना का प्रदेश में शुभारंभ किया। इस परियोजना से बुंदेलखंड क्षेत्र की तस्वीर एवं तकदीर बदल जाएगी। हमारे राज्य को उक्त परियोजना से न केवल सिंचाई अपितु पेयजल एवं विद्युत उत्पादन का लाभ भी मिलेगा। प्रदेश की दूसरी महत्वपूर्ण नदी जोड़ो परियोजना है संशोधित पार्वती – कालीसिंध -चंबल लिंक राष्ट्रीय परियोजना। इससे प्रदेश के बड़े हिस्से में सिंचाई, पेयजल, उद्योगों आदि के लिए पर्याप्त मात्रा में जल उपलब्ध हो सकेगा। मध्यप्रदेश में आकार ले रही तीसरी महत्वपूर्ण परियोजना तापी बेसिन मेगा रिचार्ज परियोजना है, जो कि विश्व में अपने आप में एक बहुत अनूठा प्रयास है। तापी बेसिन मेगा रिचार्ज परियोजना अंतर्गत वर्षा के दौरान तापी नदी के अतिरिक्त जल को नियंत्रित तरीके से भू-जल भरण के लिए उपयोग किया जाकर भू-जल स्तर में वृद्धि की जाएगी। परियोजना के क्रियान्वयन के लिये मध्यप्रदेश एवं महाराष्ट्र राज्यों के मध्य 10 मई 2025 को सहमति बनी। मंत्री श्री सिलावट ने कहा कि हमारे लिए हमारे बांधों की सुरक्षा सर्वाधिक महत्वपूर्ण है। बांधों की सुरक्षा के लिये बांध सुरक्षा अधिनियम 2021 के प्रावधानों को लागू करने के लिये विशेषज्ञ समिति का गठन करने वाला मध्यप्रदेश, देश में अग्रणी राज्य है। बांधों की सुरक्षा के लिये ड्रिप परियोजना के अंतर्गत विश्व बैंक के सहयोग से आगामी 5 वर्षों में विभिन्न बांधों की मरम्मत के कार्य कराये जायेंगे। जल संसाधन मंत्री ने कहा कि मध्यप्रदेश में प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की "पर ड्रॉप मोर क्रॉप" की अवधारणा को मूर्त रूप देने के लिए निरंतर प्रयास किये जा रहे हैं। सिंचाई प्रबंधन में मध्यप्रदेश देश में सर्वोच्च स्थान पर है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के कुशल नेतृत्व में हमारा प्रदेश विकसित राज्य बनने की दिशा में तीव्र गति से आगे बढ़ रहा है। सिंहस्थ-2028 मंत्री श्री सिलावट ने बताया कि उज्जैन शहर पवित्र मोक्षदायिनी क्षिप्रा नदी के दोनों तटों पर बसा है। उज्जैन शहर का पौराणिक और धार्मिक महत्व है। प्रत्येक 12 वर्ष में क्षिप्रा नदी के दोनों तटों पर सिंहस्थ (कुंभ) पर्व पर मेला का आयोजन होता है। सिंहस्थ 2028 से संबंधित सभी कार्यों (कुल राशि रू. 02 हजार 396 करोड़) की स्वीकृति समय सीमा में प्राप्त कर, सिंहस्थ 2028 के पूर्व दिसंबर 2027, तक पूर्ण किया जाना लक्षित है। सिंहस्थ 2028 के आयोजन हेतु क्षिप्रा नदी को निर्मल-अविरल एवं निरंतर प्रवहमान बनाकर श्रद्धालुओं की भावनाओं के अनुरूप मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में विभिन्न धार्मिक पर्वो पर अनुष्ठान हेतु पर्याप्त स्वच्छ जल उपलब्ध कराये जाने के लिये विभाग द्वारा विभिन्न कार्य कराये जा रहे हैं। 1. उज्जैन जिले की कान्ह नदी पर कान्ह डायवर्शन क्लोज डक्ट परियोजना (क्षिप्रा शुद्धीकरण)     लागत राशि रू. 919.94 करोड़     अनुबंधित राशि रू. 866.37 करोड़     कट एण्ड कवर की लंबाई 18.15 किलोमीटर     खुदाई कार्य 9.5 किलोमीटर में प्रगतिरत     लेइंग कार्य 2.5 किलोमीटर में पूर्ण शेष प्रगतिरत     टनल की लंबाई 12 किलोमीटर     खुदाई कार्य 6.35 किलोमीटर में पूर्ण शेष प्रगतिरत     भू अर्जन की स्थिति (शासकीय 12.9 हेक्टेयर, निजी 2.49 हेक्टेयर) पूर्ण     कार्य पूर्ण करने की तिथि सितम्बर 2027 2. उज्जैन जिले की सेवरखेडी-सिलारखेडी मध्यम सिंचाई परियोजना (नदी एवं जल निकायों का विकास)     लागत राशि रू. 614.53 करोड़।     परियोजना के तहत उज्जैन जिले के ग्राम सेवरखेड़ी में क्षिप्रा नदी पर बैराज का निर्माण कर पम्पिंग के माध्यम से प्रस्तावित सिलारखेडी जलाशय में जल एकत्रित कर आवश्यकता अनुसार क्षिप्रा नदी में प्रवाहित किया जायेगा।     परियोजना से उज्जैन शहर को पेयजल एवं विभिन्न धार्मिक पर्वो पर श्रद्धालुओं की भावनाओं के अनुरूप निर्मल अविरल जल उपलब्ध कराया जायेगा। कार्य आरंभ कर वर्ष 2027 तक पूर्ण किया जाना लक्षित है।     अनुबंधित राशि रू. 445.40 करोड़ 3. क्षिप्रा नदी के दोनों किनारों पर 30 किलोमीटर घाट निर्माण लागत रू. 778.91 करोड।     अनुबंधित राशि रू. 563.28 करोड़     भू-अर्जन की स्थिति (शासकीय भूमि 12.71 हेक्टेयर, निजी भूमि 36.99 हेक्टेयर)     घाट की कुल लंबाई 29.21 किलोमीटर     खुदाई कार्य 18.6 किलोमीटर में प्रगतिरत।     सीमेंट कॉकीट कार्य 4.3 किलोमीट

विद्युत कंपनियों के मुख्यालय शक्त‍िभवन में हुआ अग्न‍िशमन प्रशिक्षण और मॉकड्रि‍ल

भोपाल  एमपी पावर मैनेजमेंट कंपनी के सुरक्षा विभाग और सिविल संभाग शक्त‍िभवन के द्वारा विद्युत कंपनियों के मुख्यालय शक्त‍िभवन जबलपुर के विभिन्न ब्लॉक में अग्न‍िशमन यंत्रों का प्रशिक्षण देते हुए मॉकड्रि‍ल की गई। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम व मॉकड्रि‍ल में विद्युत कंपनियों में कार्यरत अभियंता, महिला-पुरूष कार्मिक व सुरक्षा सैनिक शामिल हुए। मॉकड्रि‍ल में कॉर्बन डॉइऑक्साइडयुक्त (co2) अग्न‍िशमन यंत्र का जीवंत उपयोग करते हुए उसे संचालित करने का तरीका बताया गया। समय-समय पर दिया जाता है कार्मिकों को प्रशिक्षण अधीक्षण अभियंता सिविल मुख्यालय धर्मेन्द्र वर्मा ने जानकारी दी कि शक्त‍िभवन के प्रत्येक कार्यालय में co2 युक्त अग्न‍िशमन यंत्र उपुयक्त स्थान में लगाए गए हैं। इन यंत्रों की प्रतिवर्ष जांच कर के भरा जाता है। उन्होंने जानकारी दी कि समय-समय पर शक्त‍िभवन में कार्यरत कार्मिकों को इन अग्न‍िशमन यंत्र का उपयोग करने के तरीके का प्रशिक्षण दिया जाता है, जिससे कि वे आपातकालीन परि‍स्थि‍ति में स्वत: इसका उपयोग कर पाएं। क्यों किया जाता है कार्बन डॉइऑक्साइड का उपयोग अधीक्षण अभियंता सि‍विल धर्मेन्द्र वर्मा ने जानकारी दी कि वर्तमान में अग्न‍िशमन यंत्र में कार्बन डॉइऑक्साइड का उपयोग आग बुझाने में किया जाता है। यह न तो जलती है और न ही जलने में मदद करती है। यह हवा से भारी भी होती है। यह ऑक्सीजन की आपूर्ति बंद करके जलने वाले पदार्थ को रोकती है।  

समाधान योजना का प्रथम चरण 31 दिसंबर तक, सरचार्ज में सौ फीसदी तक छूट का अंतिम दिन

भोपाल ऊर्जा मंत्री श्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने कहा है कि विगत 3 नवंबर से शुरू हुई समाधान योजना 2025-26 में सौ फीसदी तक छूट का लाभ लेने के लिए आज अंतिम दिन है। योजना का लाभ लाखों बकायादार उपभोक्‍ता उठा रहे हैं। उन्होंने उपभोक्‍ताओं से अपील की है कि तीन माह से अधिक के बकायादार उपभोक्‍ता योजना के प्रथम चरण में अंतिम दिन अपना बकाया बिल एकमुश्‍त जमा करके सौ फीसदी तक सरचार्ज माफी का लाभ उठा सकते हैं। मध्य प्रदेश सरकार की समाधान योजना 2025-26 का प्रथम चरण चल रहा है, जो‍कि 31 दिसंबर 2025 को समाप्‍त हो रहा है, अभी आज का दिन शेष है। इस दौरान बकायादार उपभोक्‍ताओं को सरचार्ज में अधिकतम छूट का लाभ मिल रहा है। हालांकि 1 जनवरी से 28 फरवरी 2026 तक दूसरा चरण चलेगा, लेकिन उसमें सरचार्ज माफी का प्रतिशत कम हो जाएगा इसलिए प्रथम चरण में आज ही योजना में शामिल होकर अधिकतम लाभ उठाएं। अब तक मध्‍य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के 2 लाख 90 हजार 786 बकायादार उपभोक्‍ताओं ने अपना पंजीयन कराकर लाभ लिया है। मध्‍य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के खाते में 304 करोड़ 62 लाख से अधिक की मूल राशि जमा हुई है,  जबकि  161  करोड़  39 लाख का सरचार्ज माफ किया गया है। समाधान योजना 2025-26 : एक नजर में समाधान योजना 2025-26 का उद्देश्य 3 माह से अधिक अवधि के उपभोक्ताओं को बकाया विलंबित भुगतान के सरचार्ज पर छूट प्रदान करना है। यह योजना जल्दी आएं, एकमुश्‍त भुगतान कर ज्यादा लाभ पाएं के सिद्धांत पर आधारित है। इस योजना में उपभोक्ता को प्रथम चरण में एकमुश्‍त भुगतान करने पर सबसे अधिक लाभ होगा जबकि द्वितीय चरण के दौरान छूट का प्रतिशत क्रमशः कम होता जाएगा। यह योजना दो चरणों में प्रारंभ होकर प्रथम चरण की शुरुआत 3 नवंबर से 31 दिसंबर 2025 तक रहेगी जिसमें 60 से लेकर 100 प्रतिशत तक सरचार्ज माफ किया जाएगा। इसी तरह द्वितीय और अंतिम चरण में जो कि एक जनवरी से 28 फरवरी 2026 तक लागू रहेगी, इसमें 50 से 90 फ़ीसदी तक सरचार्ज माफ किया जाएगा। प्रथम चरण में एकमुश्‍त राशि जमा कराने पर अधिकतम लाभ होगा। समाधान योजना 2025-26 का लाभ उठाने के लिए उपभोक्ताओं को म.प्र. मध्‍य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी भोपाल हेतु portal.mpcz.in पर पंजीयन कराना होगा। कंपनी के उपाय एप एवं कॉमन सर्विस सेंटर (सीएससी) तथा एमपी ऑनलाइन पर भी पंजीयन की सुविधा उपलब्‍ध है। पंजीयन के दौरान अलग-अलग उपभोक्ता श्रेणी के लिए पंजीयन राशि निर्धारित की गई है। घरेलू एवं कृषि उपभोक्ता कुल बकाया राशि का 10 प्रतिशत तथा गैर घरेलू और औद्योगिक उपभोक्ता कुल बकाया राशि का 25 प्रतिशत भुगतान कर पंजीयन कराकर योजना में शामिल होकर लाभ उठा सकते हैं। विस्तृत विवरण तीनों कंपनियों की वेबसाइटों पर भी देखा जा सकता है साथ ही विद्युत वितरण केंद्र में पहुंचकर भी योजना के संबंध में जानकारी ले सकते हैं।

विद्युत के क्षेत्र में प्रदेश ने नए-नए आयाम किए हैं स्थापित : उप मुख्यमंत्री देवड़ा

ग्राम रानीखेड़ी में 33/11 के.व्ही. विद्युत उप केन्द्र निर्माण का भूमि पूजन किया भोपाल उप मुख्यमंत्री श्री जगदीश देवड़ा ने मंगलवार को मल्हारगढ़ विधानसभा क्षेत्र के ग्राम रानीखेड़ी में 33/11 के.व्ही. विद्युत उप केन्द्र निर्माण कार्य का भूमि पूजन किया। यह विद्युत उप केन्द्र लगभग 3 करोड़ 25 लाख रुपए की लागत से निर्मित किया जाएगा। उप मुख्यमंत्री श्री देवड़ा ने कहा कि प्रदेश सरकार द्वारा विद्युत के क्षेत्र में निरंतर नवाचार करते हुए नए-नए आयाम स्थापित किए गए हैं। विद्युत उत्पादन क्षमता में लगातार वृद्धि की जा रही है, जिससे प्रदेश आत्मनिर्भरता की ओर तेजी से अग्रसर हो रहा है। उन्होंने कहा कि बढ़ती मांग को ध्यान में रखते हुए नए विद्युत ग्रिड एवं उप केन्द्रों का निर्माण किया जा रहा है, जिससे ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में निर्बाध विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित हो सके। उप मुख्यमंत्री श्री देवड़ा ने कहा कि सरकार नवकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में भी विशेष रूप से कार्य कर रही है। सौर ऊर्जा सहित अन्य नवीकरणीय स्रोतों से विद्युत उत्पादन को बढ़ावा दिया जा रहा है। उन्होंने बताया कि किसानों को सौर ऊर्जा से विद्युत उत्पादन के लिए विभिन्न योजनाओं का लाभ दिया जा रहा है, जिससे किसान अपनी खेती के साथ-साथ ऊर्जा उत्पादन में भी सहभागी बन रहे हैं। उन्होंने कहा कि खेतों पर सौर पंप एवं सौर संयंत्रों के माध्यम से किसानों को लगातार विद्युत आपूर्ति उपलब्ध हो रही है, जिससे सिंचाई व्यवस्था सुदृढ़ हुई है और कृषि उत्पादन में वृद्धि हो रही है। इससे किसानों की आय में भी बढ़ोतरी हो रही है। उप मुख्यमंत्री श्री देवड़ा ने कहा कि ग्राम रानीखेड़ी में प्रस्तावित 33/11 के.व्ही. विद्युत उप केन्द्र के निर्माण से आसपास के ग्रामों में विद्युत आपूर्ति की गुणवत्ता में सुधार होगा, वोल्टेज की समस्या से राहत मिलेगी तथा ग्रामीणों को निर्बाध और पर्याप्त विद्युत आपूर्ति उपलब्ध हो सकेगी। इस अवसर पर जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती दुर्गा विजय पाटीदार, जनपद पंचायत अध्यक्ष सहित जनप्रतिनिधिगण, अधिकारी एवं बड़ी संख्या में ग्रामीणजन उपस्थित रहे।  

अनुसूचित जाति वर्ग के समग्र कल्याण के लिए सरकार कर रही प्रभावी कार्य : मंत्री चौहान

छात्रवृत्ति योजनाओं से मिल रही शिक्षा को मजबूती स्वरोजगार योजनाओं से हो रहा आर्थिक सशक्तिकरण शौर्य संकल्प प्रशिक्षण योजना की जाएगी प्रारंभ योजनाओं के ऑनलाइन संचालन के लिए एकीकृत विभागीय पोर्टल किया जाएगा विकसित भोपाल अनुसूचित जाति कल्याण मंत्री श्री नागर सिंह चौहान ने कहा है कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश सरकार अनुसूचित जाति वर्ग के समग्र कल्याण के लिये शिक्षा, रोजगार, अधोसंरचना विकास एवं सामाजिक न्याय के क्षेत्र में निरंतर प्रभावी कार्य कर रही है। ऐतिहासिक असमानताओं से उत्पन्न घटनाओं की रोकथाम एवं त्वरित निराकरण के लिए भी राज्य सरकार सतत प्रयासरत है। मध्यप्रदेश में लगभग 15.6 प्रतिशत (1 करोड़ 13 लाख) जनसंख्या अनुसूचित जाति वर्ग से संबंधित है। प्रदेश में अनुसूचित जाति वर्ग की 48 जातियाँ सूचीबद्ध हैं। मंत्री श्री चौहान मंगलवार को अनुसूचित जाती कल्याण विभाग की दो वर्ष की उपलब्धियों एवं आगामी कार्ययोजना पर पत्रकारों से चर्चा कर रहे थे।इस दौरान प्रमुख सचिव श्री ई. रमेश कुमार, आयुक्त श्री सौरभ के सुमन सहित विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे। छात्रावास संचालन प्रदेश में अनुसूचित जाति वर्ग के विद्यार्थियों के लिए 1913 छात्रावास संचालित हैं, जिनमें 95,317 सीटें निर्धारित हैं। पूर्व में जहां छात्रावासों की उपयोगिता 80 प्रतिशत से कम थी, वहीं वर्तमान में 86,356 सीटें (90 प्रतिशत से अधिक) भरी जा चुकी हैं। आगामी समय में 100 प्रतिशत सीट उपयोग का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। छात्रावास भवन निर्माण प्रदेश में 326 भवन-विहीन छात्रावासों में से 63 नवीन भवन स्वीकृत किए गए थे, जिनमें से 33 भवनों का निर्माण पूर्ण हो चुका है तथा 30 भवन निर्माणाधीन हैं।इस वित्तीय वर्ष में 80 से अधिक नए छात्रावास भवन स्वीकृत करने की योजना है। आगामी 3 वर्षों में सभी भवन-विहीन छात्रावासों का निर्माण कार्य पूर्ण कराया जाएगा। सभी छात्रावासों को आदर्श छात्रावास के रूप में विकसित किया जाएगा, जिनमें वाई-फाई, ई-लाइब्रेरी, उन्नत रसोईघर तथा रेस्को मॉडल पर सोलर सिस्टम की सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। छात्रवृत्ति कक्षा 1 से उच्च शिक्षा तक अनुसूचित जाति वर्ग के विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति प्रदान की जा रही है। राज्य सरकार द्वारा ₹8 लाख वार्षिक आय सीमा तक के विद्यार्थियों को योजना का लाभ दिया जा रहा है। शासकीय संस्थानों में अध्ययनरत विद्यार्थियों के लिए आय सीमा का बंधन समाप्त कर दिया गया है। पिछले दो वर्षों में 49.47 लाख विद्यार्थियों को 2224 करोड़ रुपये की छात्रवृत्ति वितरित की गई है। राष्ट्रीय स्तर के संस्थानों आईआईएम,आईआईटी,ऐनआईटी एवं एनएलआईयू में अध्ययनरत 1819 विद्यार्थियों को 6.26 करोड़ रुपये की छात्रवृत्ति प्रदान की गई है। विदेश अध्ययन छात्रवृत्ति विदेश में अध्ययन के लिए भी छात्रवृत्ति योजना संचालित की जा रही है जिसमें प्रतिवर्ष 50 विद्यार्थियों को स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों के लिए चयनित किए जाने का प्रावधान है। वर्तमान में अनुसूचित जाति वर्ग के 24 विद्यार्थी इस योजना के अंतर्गत विदेशों में अध्ययनरत हैं। इस वर्ष में 31 नवीन विद्यार्थियों का चयन किया गया है, जबकि 12 विद्यार्थी प्रतीक्षा सूची में हैं। योजना को अधिक सरल, प्रभावी एवं उपयोगी बनाने के उद्देश्य से इसके नियमों में सुधार किया जा रहा है तथा चयन प्रक्रिया को और अधिक वस्तुनिष्ठ एवं पारदर्शी बनाया जा रहा है।इस योजना में प्रति विद्यार्थी प्रति वर्ष अधिकतम 50,000 अमेरिकी डॉलर (लगभग 45 लाख रुपये) तक की राशि शुल्क एवं भत्तों के रूप में प्रदान की जाती है। दो वर्ष की अवधि में प्रति विद्यार्थी लगभग 90 लाख रुपये तक की सहायता का प्रावधान है। आवास सहायता योजना घर से बाहर अध्ययनरत अनुसूचित जाति वर्ग के विद्यार्थियों को आवास सहायता प्रदान की जा रही है। गत वर्ष 1.48 लाख से अधिक आवेदकों को लगभग राशि 130 करोड़ रुपये की सहायता दी गई। वर्ष 2025-26 में योजना के लिए 200 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। दिल्ली में अध्ययनरत विद्यार्थियों के लिए दिल्ली छात्र गृह योजना के अंतर्गत सीट क्षमता 50 से बढ़ाकर 300 प्रति वर्ष तथा शिष्यावृत्ति राशि 10,000 रुपये प्रतिमाह की जाएगी। ज्ञानोदय विद्यालय अनुसूचित जाति वर्ग के विद्यार्थियों के लिए प्रदेश के 10 संभागीय मुख्यालयों में ज्ञानोदय विद्यालय संचालित किए जा रहे हैं, जहां सीबीएसई पाठ्यक्रम के अंतर्गत शिक्षा दी जा रही है। प्रत्येक विद्यालय में 640 विद्यार्थियों की क्षमता है। इसके अतिरिक्त 4 नए ज्ञानोदय विद्यालय स्वीकृत कर उनके भवन निर्माण प्रारंभ किए जाएँगे। परीक्षा पूर्व प्रशिक्षण केंद्र एवं सिविल सेवा प्रोत्साहन योजना अनुसूचित जाति वर्ग के युवाओं को सिविल सेवा सहित अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए 07 परीक्षा पूर्व प्रशिक्षण केंद्र संचालित किए जा रहे हैं जिसमे निशुल्क कोचिंग दी जा रही है। पिछले दो वर्ष में इन केन्द्रों में 168 अभ्यर्थी विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में चयनित हुए।साथ ही प्रदेश में पिछले वर्ष में विभिन्न स्तरों पर चयनित 271 अभ्यर्थियों को राशि 41 लाख रुपये की प्रोत्साहन राशि वितरित की गई। स्वरोजगार योजनाएँ संत रविदास स्वरोजगार योजना एवं डॉ. भीमराव अंबेडकर आर्थिक कल्याण योजना के अंतर्गत 10 हजार से 50 लाख रुपये तक का ऋण प्रदान किया जा रहा है, जिस पर ब्याज अनुदान की सुविधा दी जाती है। पिछले दो वर्षों में दस हजार से अधिक युवाओं को लगभग 164 करोड़ रुपये का बैंक ऋण उपलब्ध कराया गया है। आगामी 3 वर्षों में 21 हजार से अधिक युवाओं को स्वरोजगार के लिए ऋण की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी।  

हनुवंतिया में नववर्ष का उल्लास, ‘एक्वा सेरेनेड’ थीम पर जल महोत्सव का हुआ भव्य शुभारंभ

मध्य प्रदेश टूरिज्म बोर्ड एवं ईज़ माय ट्रिप डॉट कॉम का संयुक्त आयोजन बुकिंग एवं जानकारी के लिए मोबाइल नंबर 7834985081 पर करे संपर्क भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के हनुवंतिया को वैश्विक पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने के विजन अनुसार पर्यटन विभाग सतत प्रयास कर रहे है। इसी क्रम मे प्रसिद्ध जल पर्यटन स्थल हनुवंतिया में जल महोत्सव का भव्य शुभारंभ मंगलवार, 30 दिसंबर को हुआ। नर्मदा बैकवॉटर के सुरम्य और शांत वातावरण में आयोजित यह महोत्सव नववर्ष के स्वागत के साथ पर्यटन, संस्कृति और उत्सव का अद्भुत संगम बनकर सामने आया। पर्यटन, संस्कृति एवं धार्मिक न्यास और धर्मस्व राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री धर्मेंद्र भाव सिंह लोधी के मार्गदर्शन और अपर मुख्य सचिव पर्यटन, संस्कृति, गृह एवं धार्मिक न्यास और धर्मस्व श्री शिव शेखर शुक्ला के कुशल नेतृत्व में ‘एक्वा सेरेनेड इन हनुवंतिया’ थीम आधारित नववर्ष उत्सव की औपचारिक शुरुआत की गई। इस अवसर पर खंडवा जिले की अतिरिक्त कलेक्टर श्रीमती सृष्टि देशमुख ने फीता काटकर जल महोत्सव का शुभारंभ किया। इस आयोजन ने पूरे क्षेत्र को उल्लास, आनंद और उत्सव के रंगों से सराबोर कर दिया। हनुवंतिया क्षेत्र प्राकृतिक दृष्टि से अत्यंत समृद्ध है। लगभग 95 वर्ग किलोमीटर में फैला विशाल जलाशय, 90 से अधिक द्वीप, शांत वातावरण और जैव विविधता इसे विशिष्ट बनाते हैं। यही कारण है कि हनुवंतिया आज पर्यटन, निवेश और नवाचार का एक प्रमुख केंद्र बनकर उभरा है। 17 एकड़ में फैली टेंट सिटी, 104 स्विस कॉटेज जल महोत्सव के अंतर्गत विकसित टेंट सिटी लगभग 17 एकड़ क्षेत्र में फैली हुई है, जिसमें कुल 104 स्विस कॉटेज टेंट स्थापित किए गए हैं। इनमें डीलक्स एवं लग्ज़री श्रेणी के टेंट शामिल हैं, जो पर्यटकों को प्रकृति के बीच सुरक्षित, आरामदायक और आधुनिक ठहराव का अनुभव प्रदान कर रहे हैं। 100 दिनों तक चलेंगी रोमांचक गतिविधियां इस वर्ष भी 30 दिसंबर से प्रारंभ हुए जल महोत्सव के अंतर्गत 100 दिनों तक निरंतर विभिन्न रोमांचक गतिविधियों का संचालन किया जाएगा। जल महोत्सव के दौरान पर्यटकों के लिए भूमि, जल और वायु आधारित गतिविधियों की विस्तृत श्रृंखला उपलब्ध कराई गई है, जिनमें स्पीड बोटिंग, जेट स्की, कयाकिंग, वाटर पैरासेलिंग, बनाना राइड, ज़िपलाइन, एटीवी राइड, साइकलिंग, ट्रेकिंग और टेथर्ड हॉट एयर बैलून जैसी गतिविधियाँ शामिल हैं। इसके साथ ही योग, नेचर वॉक, वेलनेस गतिविधियां और परिवारों के लिए सुरक्षित मनोरंजन विकल्प भी उपलब्ध कराए गए हैं, जिससे यह आयोजन हर आयु वर्ग के पर्यटकों के लिए उपयुक्त बन गया है। लोक कला, संस्कृति और स्थानीय स्वादों का मंच जल महोत्सव मध्य प्रदेश की लोक कला, लोक संगीत, जनजातीय संस्कृति, शिल्प और पारंपरिक व्यंजनों को राष्ट्रीय मंच प्रदान करता है। स्थानीय शिल्पकारों, कलाकारों, स्वयं सहायता समूहों और युवाओं की सक्रिय भागीदारी इस आयोजन की आत्मा रही, जिससे स्थानीय समुदाय को प्रत्यक्ष रूप से लाभ मिला। नववर्ष पर एक्वा सेरेनेड का विशेष आकर्षण नववर्ष अवसर पर हनुवंतिया में एक्वा सेरेनेड इन हनुवंतिया (Aqua Serenade in Hanuwantiya) थीम के अंतर्गत विशेष आयोजन किया गया, जिसमें 30 दिसंबर से सांस्कृतिक संध्याएं, गाला नाइट, लाइट एंड साउंड शो, जल आधारित प्रस्तुतियां और उत्सवपूर्ण वातावरण ने पर्यटकों को आकर्षित किया। सुरक्षा और सुविधाओं की व्यवस्था जल महोत्सव में पर्यटकों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई। प्रशिक्षित स्टाफ की तैनाती, वाटर सेफ्टी उपकरण, लाइफ जैकेट्स, मेडिकल सुविधा, फायर सेफ्टी, सीसीटीवी निगरानी और नियंत्रित प्रवेश व्यवस्था सुनिश्चित की गई। पर्यटक अपनी सुविधा अनुसार विभिन्न पैकेज विकल्पों में बुकिंग कर सके। बुकिंग एवं जानकारी के लिए मोबाइल क्रमांक +91 78349 85081 पर संपर्क किया जा सकता है।  

देश को ऊंचाई पर बनाए रखने का कार्य नई पीढ़ी करेगी : उप मुख्यमंत्री शुक्ल

विद्यार्थियों को साइकिल का किया वितरण भोपाल  उप मुख्यमंत्री श्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा कि आज के बच्चे कल का भविष्य हैं। हमारा देश तेजी से आगे बढ़ रहा है। देश को ऊंचाई पर बनाए रखने का कार्य नई पीढ़ी को ही करना है। उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने शासकीय मार्तण्ड क्रमांक दो विद्यालय में कक्षा 9वीं के विद्यार्थियों को साइकिल का वितरण किया। उन्होंने दो करोड़ रुपए की लागत से बनाए जाने वाले 12 अतिरिक्त कमरों के निर्माण कार्य का भूमिपूजन भी किया। उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने कहा कि गुरूजनों का दायित्व है कि वह बच्चों को शिक्षा के साथ संस्कार दें। शिक्षकों में प्रतिस्पर्धा होनी चाहिए कि उनके विद्यार्थी आगे बढ़ें। बच्चों की प्रतिभा को पहचानें और उनको विकसित करने में अपनी भूमिका का निर्वाह करें। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों में आत्मविश्वास की भावना जागृत करना आवश्यक है। इसके साथ उन्हें संवेदनशील भी बनाना चाहिए ताकि देश व समाज के लिए वह अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन कर सके। उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने कहा कि शिक्षा के स्तर को बेहतर बनाने के लिए कई योजनाएं व कार्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं। उन्होंने विद्यार्थियों को उनके उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दीं। नगर निगम अध्यक्ष श्री व्यंकटेश पाण्डेय सहित स्थानीय जनप्रतिनिधि, विभागीय अधिकारी, शिक्षक एवं छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।  

मुख्यमंत्री ने प्रबुद्ध महिलाओं, आजीविका मिशन से जुड़ी महिलाओं और ड्रोन दीदीयों से की आत्मीय चर्चा

भाई के घर (मुख्यमंत्री निवास) आई बहनों को मिला सम्मान भाई के साथ बहनें मनायेंगी आगामी त्योहार जमीन से आसमान तक सफलतापूर्वक बहनें हैं नंबर वन भाई का वादा, बहनों को मिलेगा और भी ज्यादा सरगम के सुरों ने बांधा समां, मुख्यमंत्री ने दिये 51 हजार रूपये  राज्य सरकार की प्राथमिकता मातृ शक्ति का सशक्तिकरण मुख्यमंत्री निवास पर हुआ "सशक्त और समर्थ नारी" संवाद कार्यक्रम भोपाल   मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में मध्यप्रदेश सरकार प्रदेश की सभी माताओं-बहनों के सम्मान और सशक्तिकरण के लिए कार्य कर रही है। केंद्र सरकार ने देश की संसद में आधी आबादी को 33 प्रतिशत आरक्षण दिया है। प्रदेश के नगरीय निकायों और शासकीय सेवाओं में भी 35 प्रतिशत स्थान महिलाओं के लिए आरक्षित हैं। प्रधानमंत्री श्री मोदी के नेतृत्व में बहनें आज भारतीय सेनाओं में भी शीर्ष पद प्राप्त करते हुए आगे बढ़ रही हैं। प्रदेश की बहनें आर्थिक-सामाजिक रूप से संपन्न और आत्मविश्वास से भरी हों, इस उद्देश्य से हमारी सरकार ने अनेक कल्याणकारी योजनाओं की शुरुआत की है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में महिलाओं को उद्योग स्थापित करने के लिए सब्सिडी दी जाती है। साथ ही अधिक से अधिक बहनें संपत्ति की मालिक बनें, इसके लिए रजिस्ट्री में अतिरिक्त 2 प्रतिशत छूट का लाभ प्रदान किया जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मंगलवार को 'सशक्त नारी-समर्थ नारी' संवाद कार्यक्रम के अंतर्गत मुख्यमंत्री निवास पधारी प्रबुद्ध महिलाओं, आजीविका मिशन से जुड़ी महिलाओं तथा ड्रोन दीदीयों से आत्मीय चर्चा में यह विचार व्यक्त किए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बहनों के साथ समूह चित्र भी खिंचवाया। बालिका सरगम कुशवाह ने मधुर देशभक्ति गीत प्रस्तुत किया, मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बेटी सरगम को 51 हजार रूपए की राशि सम्मान और प्रोत्साहन स्वरूप देने की घोषणा की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि बहन-बेटियों से इस प्रकार संवाद का क्रम आगामी माहों में भी जारी रहेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आज महिलाएँ नहीं बहने मेरे घर आयी है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव की आत्मीयता ने बहनों को भाव विभोर कर दिया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अपनी सफलता के लिये बड़ी बहन श्रीमती कलावती यादव को श्रेय देते हुए कहा कि बड़ी बहन ने ही उन्हें राजनीति में आने के लिए प्रेरित करने के साथ आवश्यक सहयोग व प्रोत्साहन प्रदान किया। मां और बहन के संस्कार, प्रेम और उनके द्वारा दी गई हिम्मत ही उनके आगे बढ़ने का आधार बनी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हमारे परिवार में बहू भी बेटी समान है, और दोनों ही दुलार, स्नेह और सम्मान की बराबर की हकदार हैं। सनातन संस्कृति मातृ सत्ता पर आधारित संस्कृति है। मां ही हम सभी के जीवन मे पहली गुरु होती है। विश्व में भारत ही ऐसा राष्ट्र है, जहां देश को माता के भाव से जोड़ा जाता है। जैसे मां के आंचल में सुख और सुरक्षा का भाव आता है, वैसे ही देश की सत्ता से भी आम आदमी को सुख और सुरक्षा का एहसास हो, यही हमारा उद्देश्य है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में विकास के साथ विरासत को संरक्षण प्रदान करते हुए गतिविधियां संचालित की जा रही है। राज्य में औद्योगिक विकास के साथ-साथ चिकित्सा सुविधाओं को विस्तार दिया जा रहा है। प्रदेश में जन-निजी भागीदारी (पीपीपी मोड) पर मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल खोलने के लिए लीज पर 25 एकड़ भूमि तक उपलब्ध कराई जा रही है। मध्यप्रदेश देश में यह नवाचार करने वाला पहला राज्य है। प्रदेश में मेडिकल कॉलेजों की संख्या में लगातार वृद्धि हो रही है।। राज्य सरकार आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के मेधावी विद्यार्थियों की एमबीबीएस की 70 से 80 लाख रुपए तक फीस भर रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में देहदान और अंगदान को प्रोत्साहन देने के लिए गार्ड ऑफ ऑनर देने की परंपरा शुरू की गई है। इसका सकारात्मक प्रभाव हुआ है। हमारी सरकार ने ऐलोपैथी के साथ-साथ आयुर्वेदिक एवं पैरामेडिकल क्षेत्र में शिक्षा एवं रोजगार के अवसरों को बढ़ाया है।    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेश में महिला उद्यमियों के स्टार्ट-अप में उपलब्ध अवसरों पर चर्चा करते हुए कहा कि मध्यप्रदेश वह राज्य है, जो औद्योगिक विकास में सबसे तेज गति से आगे बढ़ रहा है। प्रदेश स्टार्ट-अप्स शुरू करने में अग्रणी हैं। राज्य सरकार ने बीते 2 वर्षों से लगातार स्टार्ट-अप्स को प्रोत्साहित कर रही है। इनमें अधिकांश का नेतृत्व प्रदेश की महिला उद्यमी कर रही हैं। राज्य सरकार सूक्ष्म उद्योग, लघु एवं कुटीर उद्योग से लेकर हैवी इंडस्ट्री तक महिलाओं को हर संभव सहयोग प्रदान कर रही है। प्रदेश में लागू की गईं 18 नई नीतियों में महिलाओं को केंद्र में रखा गया है। गुजरात मॉडल पर औद्योगिक विकास को गति देने के लिए भोपाल में पहली बार जीआईएस का आयोजित की गई। उससे पहले संभाग स्तर पर रीजनल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव की गईं। इन सभी प्रयासों से राज्य को मिले बंपर निवेश और औद्योगिक विकास की संभावनाओं का लाभ महिलाओं को भी मिल रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि विगत 2 वर्षों में राज्य सरकार ने महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए अनेक कार्य किए हैं। इसका प्रभाव सभी क्षेत्रों में दिख रहा है। लाड़ली बहना योजना से घरों के वातावरण में बदलाव आया है। महिलाओं के आर्थिक स्वावलंबन के साथ-साथ उनका आत्मविश्वास और आत्मसम्मान बढ़ा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश के कई जिलों में कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक (एसपी) का दायित्व महिलाएं निभा रही हैं।   अनूठा आयोजन – सीधा संवाद प्रदेश की विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य कर रही बहनों से मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सीधा संवाद किया। इस अनूठे आयोजन में स्वास्थ्य, शिक्षा, टेक्सटाइल, व्यापार और अन्य क्षेत्रों में सक्रिय बहनों ने अपने अनुभव, चुनौतियां और नवाचार साझा किए। संवाद की शुरुआत में मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि यह केवल संवाद नहीं, बल्कि समाज की उस जीवंत परंपरा का विस्तार है जिसमें बहनें जमीन से आसमान तक हर कदम आगे बढ़ते हुए सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक जिम्मेदारियों का निर्वहन कर रही हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश में आज नारी शक्ति केवल भागीदार नहीं, बल्कि नेतृत्व की सक्रिय भूमिका में है। माँ के दिये संस्कार हैं हमारी धरोहर मुख्यमंत्री डॉ.  यादव ने बहनों से … Read more