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500 रुपए में घर पर बार खोलने का मौका, भोपाल में नए साल के लिए जारी होम बार लाइसेंस

भोपाल मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में इस बार नए साल का स्वागत बेहद खास और 'नशे' की कानूनी अड़चनों से मुक्त होने जा रहा है। आबकारी विभाग ने शौकीनों के लिए एक शानदार सौगात पेश की है। इसकी मदद से मात्र 500 रुपये की मामूली फीस चुकाकर अपने घर को ही एक दिन के लिए वैध 'बार' में तब्दील कर सकते हैं। न्यू ईयर से पहले आबकारी की यह गाइडलाइन आई है। गाइडलाइन के बाद 31 दिसंबर की रात दोस्तों के साथ जाम छलकाने की प्लानिंग कर रहे लोगों के लिए यह राहत भरी खबर है। अब घर की छत या ड्राइंग रूम में होने वाली पार्टी पर पुलिस या आबकारी विभाग का छापा पड़ने का डर खत्म हो जाएगा। सहायक आबकारी आयुक्त वीरेंद्र सिंह धाकड़ द्वारा जारी यह नई गाइडलाइन न केवल निजी पार्टियों को कानूनी कवच दे रही है, बल्कि बड़े आयोजनों के लिए भी इसमें स्पष्ट रास्ते खोले गए हैं। इतनी आसान है लाइसेंस प्रक्रिया विभाग ने लाइसेंस लेने की पूरी प्रक्रिया को इतना आधुनिक और सरल बना दिया है। इससे आपको सरकारी दफ्तरों की धूल फांकने की कतई जरूरत नहीं पड़ेगी। बस अपने मोबाइल से 'Eaabkari' पोर्टल या ऐप पर जाइए। ओटीपी के जरिए लॉग-इन कीजिए और पलक झपकते ही आपका 'वन-डे लाइसेंस' आपके हाथ में होगा। इतनी कीमत पर मिलेगा लाइसेंस दरअसल, घर की निजी महफिल के लिए महज 500 रुपये का शुल्क है। वहीं, मैरिज गार्डन या सामुदायिक भवनों में होने वाले सार्वजनिक कार्यक्रमों के लिए यह फीस 5 हजार रुपये है। इसके अलावा लॉजिंग सुविधा वाले होटलों के लिए 10 हजार रुपये निर्धारित की गई है। पार्टी के लिए अलग है नियम हालांकि, अगर आप इस जश्न को बड़े व्यावसायिक स्तर पर ले जाने की सोच रहे हैं, तो नियमों का दायरा थोड़ा बढ़ जाता है। यदि पार्टी में एंट्री टिकट के जरिए दी जा रही है, तो 500 लोगों की भीड़ तक आपको 25 हजार रुपये देने होंगे। वहीं, 5 हजार से ज्यादा की भीड़ होने पर 2 लाख रुपये तक का लाइसेंस शुल्क चुकाना होगा। विभाग ने स्पष्ट किया है कि जिस स्थान के लिए अनुमति ली गई है, शराब का सेवन केवल वहीं तक सीमित रहना चाहिए। सामान्य तौर पर परिवहन के लिए बोतलों की संख्या सीमित है, लेकिन इस ऑनलाइन आवेदन में आप अपनी डिमांड के अनुसार स्टॉक की जानकारी पहले ही दे सकते हैं। भोपाल में करीब 350 से अधिक होटल और ढाबा संचालकों के साथ-साथ हजारों आम नागरिकों के लिए यह व्यवस्था नए साल के जश्न को और भी बेखौफ और यादगार बनाने वाली है।  

वीर बाल दिवस आज: प्रदेशभर के स्कूलों में आयोजित होंगे विशेष कार्यक्रम

प्रदेश के स्कूलों में आज 26 दिसम्बर को मनाया जायेगा वीर बाल दिवस स्कूलों में होंगी चित्रकला एवं लेखन प्रतियोगिताएँ मंत्री सिंह ने की प्रतियोगिता में बच्चों की अधिक से अधिक संख्या में शामिल होने की अपील नई दिल्ली में होने वाले राष्ट्रीय कार्यक्रम का होगा सजीव प्रसारण भोपाल  प्रदेश के स्कूलों में 26 दिसम्बर को वीर बाल दिवस मनाया जायेगा। इसके लिये स्कूल शिक्षा विभाग ने समस्त जिला शिक्षा अधिकारियों को निर्देश जारी किये हैं। स्कूल शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह ने स्कूल के बच्चों से इस दिन होने वाली गतिविधियों में अधिक से अधिक संख्या में शामिल होने की अपील की है। साहिबजादा जोरावर सिंह और साहिबजादा फतेह सिंह द्वारा दिये गये सर्वोच्च बलिदान के संबंध में प्रतिवर्ष 26 दिसम्बर को वीर बाल दिवस मनाया जाता है। यह दिवस भारत के भविष्य की नींव माने जाने वाले बच्चों को सम्मानित करने के लिये समर्पित एक राष्ट्रीय उत्सव है। इस पहल का उद्देश्य युवा प्रतिभाओं का पोषण करना, रचनात्मकता को बढ़ावा देना और उन्हें विकसित भारत के सपने में योगदान देने के लिये प्रेरित करना है। राष्ट्रीय स्तर के कार्यक्रम का होगा सजीव प्रसारण वीर बाल दिवस का राष्ट्रीय स्तर का कार्यक्रम 26 दिसम्बर, 2025 को दोपहर 12:30 बजे भारत मण्डपम नई दिल्ली में किया जा रहा है। यह कार्यक्रम प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में महिला एवं बाल विकास मंत्रालय नई दिल्ली द्वारा किया जा रहा है। राष्ट्रीय स्तर के कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी उपस्थित रहेंगे। कार्यक्रम का सजीव प्रसारण (लाइव वेबकास्ट) http://pmindiawebcast.nic.in/ पर किया जायेगा। जिला शिक्षा अधिकारियों को निर्देश दिये गये हैं कि इस लिंक की सूचना सभी सरकारी और प्रायवेट स्कूलों में दी जाये, जिससे स्कूल के विद्यार्थी इस कार्यक्रम का सीधा प्रसारण देख सकें। जिला शिक्षा अधिकारियों को दिये गये निर्देश में कहा गया है कि इससे जुड़ी जानकारी dpividhya admin और ramsa admin Whats App Group पर भी साझा की गई है। वीर बाल दिवस पर होने वाली प्रतियोगिताएँ स्कूल शिक्षा विभाग ने स्कूलों में आयु समूह के अनुसार विभिन्न प्रतियोगिताएँ आयोजित करने का निर्णय लिया है। आयु वर्ग 3-6 वर्ष के लिये चित्रकारी, पेंटिंग, खेल गतिविधियाँ एवं कहानी सुनाना और आयु वर्ग 6-10 वर्ष के लिये चित्रकला, निबंध लेखन एवं कहानी सुनाना प्रमुख हैं। इसके लिये जो विषय तय किये गये हैं, उनमें मेरे सपनों का भारत, वह भारत जो मैं देखना चाहता हूँ, दूसरों की मदद करना मेरी महाशक्ति है, मेरी संस्कृति के रंग और मेरे आसपास के नायक, जिनमें शिक्षक, देखभालकर्ता और मित्र शामिल हैं। स्कूलों में आयु वर्ग 11-18 वर्ष के लिये निबंध, कविताएँ, वाद-विवाद और डिजिटल प्रतियोगिता शामिल हैं। इनके लिये जो विषय तय किये गये हैं, उनमें 'राष्ट्र निर्माण में बच्चों की भूमिका', 'विकसित भारत के लिये मेरा दृष्टिकोण', 'विकसित भारत बनाने में बच्चों की भूमिका', 'विकासशील भारत को आकार देने में बच्चों की भूमिका', 'साहस और करुणा, एक नायक क्या बनाता है', 'भारत के इतिहास में वीरता की कहानियाँ', 'डिजिटल इण्डिया में युवाओं के लिये अवसर', 'स्वच्छ भारत-स्वस्थ भारत', 'बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ', 'प्रत्येक बालिका को सशक्त बनाना' शामिल हैं। इसके अलावा आत्मनिर्भर भारत-नवाचार में युवाओं की अग्रणी भूमिका, 'वोकल फॉर लोकल', 'भारत की पारम्परिक शिल्प-कलाओं का उत्सव मनाना', 'स्किल इण्डिया मिशन' और 'अमृतकाल में कल के भारत निर्माण में युवाओं की भूमिका' को शामिल किया गया है। शिक्षकों को इन प्रतियोगिताओं मे  

MP सरकार का बड़ा कदम: 15 लाख कर्मचारियों को साल 2026 से आयुष्मान योजना जैसी स्वास्थ्य सुविधा

 भोपाल  प्रदेश सरकार राज्य के 15 लाख से अधिक कर्मचारियों को नए साल 2026 में आयुष्मान जैसी स्वास्थ्य सुविधा योजना देने की तैयारी कर रही है।प्रस्ताव बना लिया गया है। इसमें कर्मचारियों को हरियाणा और राजस्थान की तरह कैशलेस इलाज की सुविधा मिलेगी। कुछ राशि उनके वेतन से अंशदान के तौर पर काटी जाएगी, शेष राशि सरकार जमा कराएगी। कर्मचारी संगठनों के सुझाव पर बनाई योजना मुख्यमंत्री आयुष्मान स्वास्थ्य बीमा योजना के नाम से प्रस्तावित यह योजना राज्य सरकार ने कर्मचारी संगठनों के सुझाव पर बनाई है। इसके लिए भी आयुष्मान भारत की तरह प्रदेश और प्रदेश के बाहर के निजी अस्पतालों से अनुबंध किया जाएगा। कर्मचारी संगठन लंबे समय से कैशलेस उपचार सुविधा की मांग कर रहे हैं, जो जल्द ही उन्हें मिल सकती है। 10 लाख रुपये तक फ्री इलाज का प्रस्ताव प्रस्तावित योजना में प्रदेश के अधिकारियों और कर्मचारियों के साथ सेवानिवृत्त कर्मियों के परिवारों को सामान्य इलाज के लिए पांच लाख रुपये और गंभीर बीमारी होने पर दस लाख रुपये तक की निश्शुल्क चिकित्सा और ओपीडी सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। वेतन और पेंशन से कितना देना होगा अंशदान इसमें कर्मचारियों के वेतन और पेंशन से 250 से 1000 रुपये तक मासिक अंशदान लिया जाएगा। शेष राशि सरकार मिलाएगी। बता दें कि सरकार ने फरवरी 2020 में प्रदेश के कर्मचारियों के लिए फ्री इलाज की घोषणा की थी। इसका आदेश भी जारी हुआ था, लेकिन योजना शुरू नहीं की जा सकी। उत्तराखंड सरकार इसी तरह की योजना संचालित कर रही है। इन कर्मचारियों को मिलेगा लाभ स्थायी, अस्थायी, संविदा, शिक्षक संवर्ग, सेवानिवृत्त कर्मचारी, नगर सैनिक, कार्यभारित, राज्य की स्वशासी संस्थाओं में कार्यरत कर्मचारी, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, सहायिका, मिनी आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, पंचायत सचिव, ग्राम रोजगार सहायक, आशा एवं उषा कार्यकर्ता, आशा सुपरवाइजर और कोटवार और आउटसोर्स स्वास्थ्य सुविधा का लाभ ले पाएंगे। इन कर्मचारियों की संख्या 15 लाख से अधिक है। अभी खुद कराते हैं इलाज प्रदेश में अभी कर्मचारी और पेंशनर्स इलाज का सारा खर्च खुद उठाते हैं और बाद में विभाग के माध्यम से खर्च की प्रतिपूर्ति के लिए आवेदन करते हैं। यह प्रस्ताव कैबिनेट तक जाता है और सरकार बाद में केंद्रीय स्वास्थ्य योजना (सीजीएचएस) की दरों के अनुसार भुगतान करती है, लेकिन कई बार गंभीर बीमारी पर अधिक व्यय होने के कारण पूरा खर्च कवर नहीं होता, जिसके चलते कर्मचारियों को स्वयं ही इलाज का खर्च वहन करना होता है।     हम तो लंबे समय से कर्मचारियों के स्वास्थ्य बीमा की मांग करते आ रहे हैं, लेकिन सरकार की ओर से इस दिशा में कोई पहल नहीं की गई। कई पेंशनर ऐसे हैं जो अपना जीवन यापन भी ठीक तरह से नहीं कर पाते, इलाज कराना तो बहुत दूर की बात है। सरकार को शीघ्र निर्णय लेकर इसे लागू करना होगा। सभी को स्वास्थ्य सुविधा मिलनी चाहिए।     -सुधीर नायक, मंत्रालय सेवा अधिकारी, कर्मचारी संघ  

अटल बिहारी वाजपेयी का सपना साकार: बुंदेलखंड में शुरू हुआ देश का पहला केन-बेतवा लिंक प्रोजेक्ट

 छतरपुर  पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने देश की नदियों को जोड़ने का जो सपना देखा था, वह बुंदेलखंड की धरती पर देश की पहली नदी जोड़ो केन-बेतवा लिंक परियोजना के रूप में साकार हो रहा है। 44 हजार 605 करोड़ रुपये की इस परियोजना के पहले चरण में छतरपुर जिले में करीब 3700 करोड़ रुपये की लागत से ढोड़न बांध बनाया जा रहा है। एक साल पहले प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अटलजी की जयंती पर खजुराहो में इस परियोजना का शिलान्यास किया था। हैदराबाद की नागार्जुन कंस्ट्रक्शन कंपनी प्रोजेक्ट पर काम कर रही है। प्रस्तावित बांध 77 फीट ऊंचा और 2031 मीटर लंबा होगा। इसके बाद मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के 14 जिलों तक नहरों का जाल बिछाया जाएगा। बुंदेलखंड के लिए मील का पत्थर मानी जा रही इस परियोजना को पूरा करने के लिए आठ साल का समय तय किया गया है। छतरपुर और पन्ना जिलों के 14 गांव डूब क्षेत्र में आ रहे हैं। भू-अर्जन का काम लगभग पूरा हो चुका है। अभी यह है स्थिति पन्ना टाइगर रिजर्व क्षेत्र से ढोड़न, पलकुआं सहित भरकुआं, कुपी, मैनारी, गहदरा, कटहरी बिलहटा, मझौली आदि गांवों के कई परिवार सरकार से मुआवजा मिलने के बाद बमीठा और छतरपुर में बस गए हैं। पहाड़ी क्षेत्र में अब निर्माण कार्य तेज हो गया है। बदहाल रास्तों पर सड़कें बना दी गई हैं और बांध का बेस तैयार किया जा रहा है। पन्ना-दमोह में रकबा बढ़ाने की रिपोर्ट हो रही तैयार परियोजना के तहत पन्ना और दमोह जिलों में सिंचाई रकबा बढ़ाया जा रहा है। इसके लिए मैपिंग और डीपीआर तैयार की जा रही है। अभी करीब 90 हजार हेक्टेयर सिंचाई रकबा तय था, जिसे बढ़ाकर ढाई लाख हेक्टेयर करने की तैयारी है। केन और बेतवा नदियों को जोड़ने के लिए 218 किलोमीटर लंबी कैनाल बनाई जाएगी। इससे छोटी नहरों को जोड़ा जाएगा। माइनर नहरें पाइपलाइन के रूप में जमीन के अंदर बनाई जाएंगी। बांध में 2853 अरब लीटर जल का भंडारण किया जाएगा। मध्य प्रदेश की 44 लाख और उत्तर प्रदेश की 21 लाख आबादी को पेयजल की सुविधा मिलेगी। 12 लाख 50 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर भूमि का मुआवजा दिया गया है। करीब 4800 परिवार डूब क्षेत्र में आ रहे हैं। काम लगभग पूरा पार्थ जैसवाल, कलेक्टर, छतरपुर का कहना है कि "भू-अर्जन का काम लगभग पूरा हो गया है। ढोड़न बांध का काम तेजी से चल रहा है। जल्द ही परिवारों का विस्थापन कराया जाएगा। यह परियोजना पूरे बुंदेलखंड के लिए मील का पत्थर साबित होगी।"

बसामन मामा प्राकृतिक खेती प्रकल्प विंध्य के किसानों के लिए बनेगा मार्गदर्शक

प्रदेश में दुग्ध उत्पादन को 9 से बढ़ाकर किया जायेगा 20 प्रतिशत तक केंद्र सरकार द्वारा प्रारंभ की जा रही हैं वृहद स्तर पर प्रयोगशालाएं केंद्रीय मंत्री श्री शाह और मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने रीवा में कृषक सम्मेलन को किया संबोधित भोपाल  केंद्रीय गृह और सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने कहा कि भारत रत्न से सम्मानित पूर्व प्रधानमंत्री स्व. अटल बिहारी वाजपेयी के सार्वजनिक जीवन में शुचिता और पारदर्शिता का स्थान सर्वोपरि रहा है। उन्होंने कहा कि स्व. वाजपेयी ने सुशासन की स्थापना के लिये अपने कार्यों से नये आयाम स्थापित किये। उन्होंने जो कहा उसे धरातल साकार करके दिखाया। केन्द्रीय मंत्री श्री शाह ने कहा कि भारतीय राजनीति में स्व. वाजपेयी का स्थान और योगदान दोनों ही अद्वितीय है। उन्होंने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री स्व. वाजपेयी को रीवा से सदैव विशेष लगाव रहा। केन्द्रीय मंत्री श्री शाह रीवा में बसामन मामा गौ वन्य विहार अभयारण्य में प्राकृतिक खेती के प्रकल्प का शुभारंभ कर कृषक सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि बसामन मामा प्राकृतिक खेती प्रकल्प विंध्य के किसानों के लिये मार्गदर्शक बनेगा। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने संबोधित करते हुये कहा कि केन्द्रीय सहकारिता एवं गृह मंत्री श्री शाह के मार्गदर्शन में मध्यप्रदेश के किसानों की आय को बढ़ाने के लिये राज्य सरकार द्वारा समन्वित तरीके से सतत समग्र प्रयास किये जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश में दूध के उत्पादन को 9 प्रतिशत से बढ़ाकर 20 प्रतिशत तक किया जायेगा। केंद्रीय गृह और सहकारिता मंत्री श्री शाह और मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने हितग्राहियों को हितलाभ एवं संकल्प पत्रों को वितरण किया। केंद्रीय मंत्री श्री शाह ने कहा कि मध्यप्रदेश का रीवा क्षेत्र धीरे-धीरे विकसित क्षेत्र बन रहा है। आज एशिया का सबसे बड़ा सोलर प्लांट रीवा में है। रीवा से जबलपुर तक सड़कों के जाल सहित इंदौर और दिल्ली के लिये वायु सेवा का भी विस्तार हुआ है। अब रीवा एयरपोर्ट से इंदौर और दिल्ली के लिए 24 घंटे हवाई सेवा उपलब्ध है। रीवा में बसावन मामा गौवंश वन्य विहार के रूप में अनुकरणीय प्रकल्प तैयार किया गया है। यहां गोबर से बने खाद से प्राकृतिक खेती की जा रही है। एक एकड़ में सवा लाख रुपए की आय देने का यह प्रयोग छोटे किसानों को बड़ा लाभ प्रदान करेगा। किसान इस मॉडल को अपनाएंगे तो उनकी आय बढ़ेगी। राज्य सरकार प्रगतिशील किसानों को इस परंपरागत मॉडल से अवगत कराने के लिये उनका भ्रमण कराये। उन्होंने कहा कि एक देशी गाय से 21 एकड़ रकबे में प्राकृतिक खेती होती है। किसान ही अन्नदाता है। अन्नदाता को प्राकृतिक खेती के लिये प्रेरित करने के साथ ही प्रोत्साहित करने के समग्र प्रयास हम सबको समन्वित तरीके से करना है। उन्होंने चिंता व्यक्त करते हुये कहा कि अनाज के उत्पादन में रासायनिक खाद और कीटनाशकों के अत्यधिक प्रयोग के कारण कई तरह की बीमारियां बढ़ रही हैं। इससे बचाव के लिये जरूरी है कि हम सभी प्राकृतिक के संवर्धन में अपना योगदान दें। केंद्रीय मंत्री श्री शाह ने कहा कि प्राकृतिक खेती को अपनाने से उत्पादन कम नहीं होता है। मैंने स्वयं अपने खेतों में प्राकृतिक खेती को अपनाया है। प्रधानमंत्री श्री मोदी के नेतृत्व में सहकारिता मंत्रालय के अंतर्गत वृहद स्तर पर प्राकृतिक खेती की उपज के प्रमाणीकरण का कार्य किया जा रहा है। केंद्र सरकार ने प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिये प्राकृतिक खेती के माध्यम से उत्पादित उपज के सर्टिफिकेशन, पैकेजिंग और मार्केटिंग की व्यवस्था की है। आगामी समय में देश में 400 से अधिक प्रयोगशालाएं किसान को प्राकृतिक खेती से संबंधित प्रमाण-पत्र प्रदान करेंगी। इन सभी प्रयासों से प्राकृतिक खेती अपनाने वाले किसानों की आय डेढ़ गुना तक बढ़ जाएगी। दुनियाभर में प्राकृतिक खेती का बड़ा बाजार है। आर्गेनिक अनाज खाने से स्वास्थ्य अच्छा रहता है। भूमि परीक्षण से सर्टिफिकेशन, उपज का परीक्षण, बेहतर पैकेजिंग और मार्केटिंग किसानों को उपज का बेहतर मूल्य दिलाएंगी। हम किसानों की आय को बढ़ाने के लिए समुचित प्रयास प्राथमिकता से कर रहे हैं। निदर्शन फॉर्म आने वाले समय में प्राकृतिक खेती के लिए किसानों का मार्गदर्शन करेंगे। केंद्रीय मंत्री श्री शाह ने कहा कि प्रकृति की अनेक प्रकार से सेवा हो सकती है। हमें बसावन मामा की स्मृति में पीपल के वृक्ष रोपित करने का संकल्प लेना चाहिए। दु्निया से चले जाने के बाद भी यह पीपल वृक्ष लोगों को ऑक्सीजन देता रहेगा। पीपल का वृक्ष लगाना पुण्य कार्य है, जिसमें स्वयं भगवान विष्णु का वास होता है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कृषकों से प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिये बढ़-चढ़कर सहभागिता करने का आहवान किया। उन्होंने बताया कि बसावन मामा गौवंश वन्य विहार के भ्रमण के दौरान केंद्रीय मंत्री श्री शाह के द्वारा 35 साल पहले गुजरात में जैविक खेती संवर्धन के लिये जानकारी मिली। उन्होंने कहा कि केन्द्रीय मंत्री श्री शाह के द्वारा 35 साल पहले शुरू किये गये कार्य को राज्य सरकार आगे बढ़ाने में कोई कसर नहीं रखेगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार किसान कल्याण के लिए निरंतर कार्य कर रही है। केंद्रीय गृह मंत्री श्री शाह के मार्गदर्शन में सहकारिता के माध्यम से किसानों की आय बढ़ाई जा रही है। प्रदेश के किसानों की आय को बढ़ाने के लिये उन्हें दुग्ध उत्पादन के लिये भी प्रेरित किया जा रहा है। इसके लिये डॉ. भीमराव अम्बेडकर कामधेनु योजना से किसानों को लाभांवित किया जा रहा है। प्रदेश में दुग्ध उत्पादन बढ़ाने के लिए नेशनल डेयरी डेवलपमेंट बोर्ड से एमओयू किया गया है। इससे किसानों को सीधे लाभ मिलेगा। राज्य सरकार दूध उत्पादन बढ़ाने के लिए नस्ल सुधार जैसे अनेक कार्य भी कर रही है। राज्य सरकार दूध उत्पादन बढ़ाने के लिए नस्ल सुधार जैसे अनेक कार्य भी कर रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य में दूध खरीद का आंकड़ा निरंतर बढ़ रहा है। साल भऱ में प्रति दुग्ध संघ दूध खरीदी में 25 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। राज्य सरकार ने प्रदेश स्तर पर कुल दुग्ध उत्पादन को 9 प्रतिशत से बढ़ाकर 20 प्रतिशत तक करने का लक्ष्य रखा है। मुख्यमंत्री डॉ यादव ने कहा कि गौमाताओं के संरक्षण के लिए प्रति गाय आहार अनुदान को 20 से बढ़ाकर 40 रुपए किया गया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि अटलजी … Read more

मौत के मुंह से लौटा कुनाल: 115 दिन की लड़ाई, जहरीले सीरप ने उजाड़ दी जिंदगी

छिंदवाड़ा जहरीले कफ सीरप ‘कोल्ड्रिफ’ के जानलेवा कहर के बीच जाटाछापर निवासी पांच वर्षीय कुनाल यदुवंशी की कहानी एक चमत्कार से कम नहीं है। अब तक इस सीरप से 25 बच्चों की जान जा चुकी है, लेकिन कुनाल उन तीन खुशनसीब बच्चों में से एक है, जो मौत को मात देकर 115 दिनों के संघर्ष के बाद घर लौटा है। हालांकि, इस लंबी लड़ाई ने मासूम और उसके परिवार को गहरे जख्म दिए हैं, जिनका असर आज भी साफ नजर आ रहा है। गलत इलाज और किडनियों पर प्रहार कुनाल के संघर्ष की शुरुआत बीते 24 अगस्त को हुई थी, जब उसे सामान्य बुखार आने पर स्वजन स्थानीय डॉक्टर प्रवीण सोनी के पास ले गए थे। डॉक्टर द्वारा दी गई दवा और ‘कोल्ड्रिफ’ सीरप पीने के बाद कुनाल की हालत सुधरने के बजाय तेजी से बिगड़ने लगी। गहन जांच के बाद यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ कि जहरीले सीरप के साइड इफेक्ट के कारण बच्चे की दोनों किडनियां पूरी तरह काम करना बंद कर चुकी हैं। 115 दिनों का संघर्ष और डायलिसिस का दर्द हालात गंभीर होने पर कुनाल को 30 अगस्त को नागपुर रेफर किया गया। पिता टिक्कू यदुवंशी उसे लेकर एम्स समेत नागपुर के विभिन्न अस्पतालों के चक्कर काटते रहे। इस दौरान मासूम कुनाल को करीब डेढ़ महीने तक रोजाना डायलिसिस के असहनीय दर्द से गुजरना पड़ा। डॉक्टरों के अनुसार, सीरप का जहर इतना घातक था कि बचने की उम्मीद बेहद कम थी, लेकिन परिवार की दुआओं और कड़े चिकित्सकीय प्रबंधन के चलते 115 दिनों बाद सोमवार रात उसे अस्पताल से छुट्टी मिल गई। घर वापसी पर लाचारी और दवाओं का दुष्प्रभाव कुनाल घर तो लौट आया है, लेकिन उसकी मुस्कान अब भी गायब है। जहरीले सीरप के दुष्प्रभाव के कारण उसकी आंखों का पानी सूख गया है, जिससे फिलहाल उसे दिखाई नहीं दे रहा है। इसके अलावा उसे चलने-फिरने में भी भारी परेशानी हो रही है। स्वजन की आंखों में खुशी और गम के मिले-जुले आंसू हैं; उन्हें उम्मीद है कि जिस हौसले से कुनाल ने मौत को हराया है, वह जल्द ही पूरी तरह स्वस्थ होकर चलने भी लगेगा। मुआवजे की मांग और दोषियों को फांसी की सजा कुनाल के पिता टिक्कू यदुवंशी ने इस लापरवाही के खिलाफ सरकार से कड़ा रुख अपनाने की मांग की है। उन्होंने कहा कि इलाज में करीब साढ़े आठ लाख रुपये खर्च हुए हैं, जिसमें से आधी सहायता मिल पाई है। पिता ने मांग की है कि सरकार सभी प्रभावित परिवारों को एक-एक करोड़ रुपये का मुआवजा दे और मासूमों की जान से खेलने वाले दोषियों को फांसी की सजा दी जाए। इस बीच सांसद विवेक बंटी साहू ने कुनाल के स्वस्थ होने पर खुशी जाहिर करते हुए आश्वासन दिया है कि सरकार बच्चों के इलाज का पूरा खर्च वहन कर रही है।

MP में SIR विवाद: भाजपा प्रवक्ता हितेष वाजपेयी का वोटर लिस्ट से नाम गायब, सियासी हलचल तेज

भोपाल मतदाता सूची के शुद्धीकरण के लिए चुनाव आयोग द्वारा किए गए विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआइआर) में 42 लाख से अधिक नाम सूची से हटाए गए हैं। भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता डा.हितेष वाजपेयी ने स्थान परिवर्तन के लिए निर्धारित फार्म आठ आनलाइन जमा किया पर उनका नाम प्रारूप सूची से हटा दिया गया। बूथ लेवल आफिसर (बीएलओ) ने उन्हें अनुपस्थित श्रेणी की सूची में डाल दिया। इसी तरह प्रदेश कांग्रेस के प्रवक्ता मिथुन अहिरवार का गणना पत्रक जमा हुआ। बीएलओ ने पावती भी दी पर उनका नाम भी सूची में नहीं आया। अब कहा जा रहा है कि फार्म छह भर दें, नाम सूची में जुड़ जाएगा। ऐसे एक-दो नहीं बल्कि कई प्रकरण सामने आ रहे हैं। उधर, मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी कार्यालय के अधिकारियों का कहना है कि 27 अक्टूबर 2025 को सूची फ्रीज कर दी गई थी।  प्रारूप मतदाता सूची में 5.31 करोड़ मतदाताओं के नाम आए और 42 लाख से अधिक नाम मृत, अनुपस्थित, स्थायी रूप से स्थानांतरित और दोहरी प्रविष्ट होने के कारण हटाए गए। जो नाम हटाए, उनमें कुछ को लेकर आपत्ति सामने आ रही है। भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता हितेष वाजपेयी ने बताया कि उन्होंने आवास परिवर्तित किया है और नियमानुसार फार्म आठ ऑनलाइन भरकर सूचना चुनाव आयोग को दी। एसआइआर के प्रक्रिया के दौरान बूथ लेवल एजेंट ने संपर्क नहीं किया। जब चर्चा की तो बताया कि कि आप सूची में दर्ज स्थान पर नहीं पाए गए इसलिए आपका गणना पत्रक अनुपस्थित की श्रेणी में दर्ज कर दिया है। आप नाम जुड़वाने के लिए फार्म छह भर दीजिए। जबकि, वह फर्म आठ भर चुके हैं यानी स्थान परिवर्तन की प्रक्रिया कर चुके हैं इसलिए उन्हें नए स्थान पर गणना पत्रक मिलना चाहिए था। इसी तरह कांग्रेस के प्रदेश प्रवक्ता मिथुन अहिरवार ने बताया कि वह आनंद नगर से अवधपुरी शिफ्ट हुए हैं। वहां बूथ लेवल आफिसर ने गणना पत्रक दिए। हमनें 2003 के एसआइआर की जानकारी के साथ उसे भर दिया। इसकी पावती भी बीएलओ ने दी लेकिन जब प्रारूप सूची देखी तो उसमें नाम ही नहीं है। प्रदेश कांग्रेस के महामंत्री संजय कामले का कहना है कि हमारे बूथ पर भी कुछ ऐसे नाम सूची में शामिल हैं, जो स्थायी रूप से स्थानांतरित हो चुके हैं। अब हम आपत्ति कर रहे हैं लेकिन सवाल यह है कि जब 22 लाख से अधिक मतदाता स्थायी रूप से स्थानांतरित की श्रेणी में रखे गए हैं तो फिर ये नाम शामिल कैसे हुए। संयुक्त मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी आरपीएस जादौन का कहना है कि एसआइआर का काम पूरी पारदर्शिता के साथ हुआ है। बूथ लेवल आफिसरों ने मतदाताओं से संपर्क भी किया। दो बार अवधि बढ़ी, तब और सघनता से जो मतदाता नहीं मिले, उनका पता करने का प्रयास किया गया। आनलाइन फार्मों के बारे में निराकरण दावा-आपत्ति की प्रक्रिया पूरी होने के बाद होगा। निर्धारित प्रक्रिया अनुसार यदि फार्म होंगे तो निश्चित ही अंतिम सूची में नाम आएंगे।

ई-जीरो एफआईआर व्यवस्था से सायबर अपराध पर कसेगा शिकंजा

‘सुशासन दिवस’ पर मध्यप्रदेश पुलिस की अभिनव पहल डिजिटल युग में न्याय प्रक्रिया को मिली गति भोपाल  पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न स्व. अटल बिहारी वाजपेयी जी के जन्मदिवस को ‘सुशासन दिवस’ के रूप में मनाए जाने की परंपरा के अनुरूप, मध्यप्रदेश पुलिस ने सुशासन को सशक्त करने की दिशा में नवाचार के रूप में ‘ई-जीरो एफआईआर’ व्यवस्था प्रारंभ की है। यह व्यवस्था 01 लाख रुपये से अधिक की सायबर वित्तीय धोखाधड़ी के मामलों में लागू की गई है। ‘ई-जीरो एफआईआर’ व्यवस्था प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के ‘सायबर सुरक्षित भारत’ विज़न के अनुरूप है, जिसका उल्लेख उन्होंने अक्टूबर 2024 में ‘मन की बात’ कार्यक्रम में किया था। केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह के मार्गदर्शन में देशभर में सायबर अपराध से निपटने के लिये ऐतिहासिक एवं तकनीक-आधारित कदम उठाए जा रहे हैं। मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा ई-जीरो एफआईआर प्रणाली के क्रियान्वयन से यह स्पष्ट होता है कि तकनीक के माध्यम से न्याय प्रक्रिया को तेज और आम नागरिकों के लिए अधिक सरल, सुलभ और प्रभावी बनाया जा सकता है। मध्यप्रदेश में लागू यह प्रणाली पुलिस को अपराधियों से एक कदम आगे रखने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगी। प्रदेश में बढ़ते सायबर अपराधों को गंभीरता से लेते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने तकनीक के दुरुपयोग से जनता की गाढ़ी कमाई लूटने वाले अपराधियों पर प्रभावी अंकुश लगाने के स्पष्ट निर्देश दिए थे। मुख्यमंत्री का मानना है कि जिस प्रकार स्वच्छता को हमने अपनी संस्कृति बनाया है, उसी प्रकार सायबर स्वच्छता को भी जन-आंदोलन बनाना होगा। प्रदेश में ई-जीरो एफआईआर व्यवस्था का संचालन पुलिस महानिदेशक श्री कैलाश मकवाणा के निर्देशन एवं अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक श्री ए. साई मनोहर के मार्गदर्शन में किया जा रहा है। इस व्यवस्था का उद्देश्य पुलिस को अधिक तेज, तकनीक-सक्षम और नागरिक-केंद्रित बनाना है। सायबर वित्तीय धोखाधड़ी पर प्रभावी प्रहार सायबर वित्तीय धोखाधड़ी आज पुलिस के समक्ष एक बड़ी चुनौती बनकर उभरी है। कई बार पीड़ित की जीवनभर की कमाई कुछ ही क्षणों में अपराधियों के हाथों में चली जाती है, जिससे वह स्वयं को असहाय महसूस करता है। इसी पीड़ा को समझते हुए गृह मंत्रालय द्वारा ‘ई-जीरो एफआईआर’ की अवधारणा लागू की गई है, ताकि तकनीक को अपराधियों के विरुद्ध प्रभावी हथियार बनाया जा सके। कानूनी आधार : BNSS और डिजिटल परिवर्तन जुलाई 2024 से लागू हुए नए आपराधिक कानून ‘भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता’ (बीएनएसएस) नागरिक-केंद्रित हैं। इनका मूल उद्देश्य ‘दंड नहीं, बल्कि न्याय’ पर फोकस रहना है। बीएनएसएस की धारा 173 के अंतर्गत ‘जीरो एफआईआर’ को कानूनी मान्यता प्रदान की गई है, जिससे नागरिक देश में कहीं से भी, किसी भी क्षेत्राधिकार में घटित अपराध के लिए, इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से शिकायत दर्ज करा सकते हैं। ई-जीरो एफआईआर: एक क्रांतिकारी व्यवस्था ‘ई-जीरो एफआईआर’ सायबर वित्तीय धोखाधड़ी—विशेषकर ₹1 लाख से अधिक की हानि के मामलों में एफआईआर दर्ज करने की प्रक्रिया को अत्यंत तेज बनाती है। इसका मुख्य उद्देश्य क्षेत्राधिकार संबंधी बाधाओं को समाप्त कर जांच प्रक्रिया को तत्काल प्रारंभ करना है। यह प्रणाली तीन प्रमुख डिजिटल मंचों का एकीकरण करती है। नेशनल सायबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (एनसीआरपी), I4सी (भारतीय सायबर अपराध समन्वय केंद्र) और क्राइम एंड क्रिमिनल ट्रैकिंग नेटवर्क एंड सिस्टम (सीसीटीएनएस)। ई-जीरो एफआईआर पंजीकरण की 5-चरणीय प्रक्रिया शिकायत दर्ज करना – पीड़ित 1930 हेल्पलाइन या NCRP पोर्टल पर शिकायत करता है। ₹1 लाख से अधिक की धोखाधड़ी होने पर डेटा सीधे भोपाल स्थित केंद्रीय सायबर पुलिस हब को भेजा जाता है। ऑटोमैटिक जनरेशन – सीसीटीएनएस सर्वर के माध्यम से शिकायत स्वतः ‘ई-जीरो एफआईआर’ में परिवर्तित हो जाती है। पीड़ित को तुरंत ‘ई-जीरो एफआईआर’ नंबर उपलब्ध कराया दिया जाता है। समीक्षा एवं हस्तांतरण – राज्य स्तरीय सायबर पुलिस स्टेशन द्वारा समीक्षा कर प्रकरण संबंधित क्षेत्रीय पुलिस स्टेशन को भेजा जाता है। नियमित एफआईआर में परिवर्तन – शिकायतकर्ता को 3 दिन के अंदर नजदीकी सायबर पुलिस स्टेशन में ‘ई-जीरो एफआईआर’ को नियमित एफआईआर में परिवर्तित कराना होता है। सायबर अपराध में ‘गोल्डन ऑवर’ का महत्व सायबर अपराध में धोखाधड़ी के बाद के पहले 2 घंटे को ‘गोल्डन ऑवर’ माना जाता है। यदि पीड़ित तुरंत 1930 पर संपर्क करता है, तो I4C एवं बैंकों के सहयोग से अपराधी के खाते में राशि पहुंचने से पहले ही उसे फ्रीज किया जा सकता है। ई-जीरो एफआईआर के माध्यम से आईपी लॉग, ट्रांजैक्शन आईडी जैसे महत्वपूर्ण डिजिटल साक्ष्य तत्काल और कानूनी रूप से सुरक्षित किए जाते हैं। ‘ई-जीरो एफआईआर’ व्यवस्था के प्रमुख लाभ ‘ई-जीरो एफआईआर’ व्यवस्था देश में कहीं से भी कहीं भी हुई सायबर या वित्तीय धोखाधड़ी की शिकायत शिकायत दर्ज करने की सुविधा उपलब्ध कराती है। इससे क्षेत्राधिकार संबंधी बाधाओं से मुक्ति मिलती है, केस की स्थिति ऑनलाइन देखने की सुविधा मिलती है, शीघ्र एफआईआर से बैंकिंग चैनल सक्रिय, हो जाते हैं, राशि वापसी की संभावना अधिक हो जाती है साथ ही पोर्टल पर सीधे स्क्रीनशॉट और रसीदें अपलोड करने की सुविधा मिलने से आवश्यक दस्तावेज हमेशा उपलब्ध बने रहते हैं।  

निर्यात एवं एक जिला-एक उत्पाद पर हुई कार्यशाला

भोपाल  ग्वालियर में आयोजित हुई "मध्यप्रदेश अभ्युदय ग्रोथ समिट" में निर्यात को प्रोत्साहित करने, राज्य के उत्पादों को वैश्विक बाजार से जोड़ने तथा “एक जिला-एक उत्पाद” योजना पर कार्यशाला हुई। कार्यशाला में सरकार, निर्यात प्रोत्साहन परिषदों, वित्तीय संस्थानों, उद्योग जगत तथा एमएसएमई क्षेत्र से जुड़े प्रतिनिधियों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। कार्यशाला में पद्मश्री डॉ. मिलिंद कांबले संस्थापक चेयरमैन डीआईसीसीआई ने सामाजिक रूप से समावेशी उद्यमिता, स्टार्ट-अप्स एवं एमएसएमई के सशक्तिकरण तथा निर्यात से रोजगार सृजन की संभावनाओं को रेखांकित किया। उन्होंने ओडीओपी पहल को स्थानीय उत्पादों को वैश्विक पहचान दिलाने का प्रभावी माध्यम बताया। एमपीआईडीसी के प्रबंध संचालक श्री चन्द्रमौली शुक्ला ने मध्यप्रदेश को एक उभरते हुए औद्योगिक और निर्यात हब के रूप में स्थापित करने के लिये राज्य सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयासों, बुनियादी ढांचे के विकास तथा निवेश अनुकूल नीतियों पर प्रकाश डाला। महानिदेशक एसईपीसी डॉ. अभय सिन्हा ने “वैश्विक बाजार में मध्यप्रदेश की स्थिति” विषय पर अपने विचार व्यक्त किये। उन्होंने राज्य के प्रमुख निर्यात क्षेत्रों, अंतर्राष्ट्रीय मांग, गुणवत्ता मानकों तथा बाजार विस्तार की रणनीतियों पर विस्तार से चर्चा की। कार्यशाला में अतिरिक्त महानिदेशक एफआईईओ श्री सुविद शाह ने मुक्त व्यापार समझौतों (एफटीए) की उपयोगिता, टैरिफ जोखिमों को कम करने तथा निर्यातकों को मिलने वाले लाभों की व्यावहारिक जानकारी साझा की। इंजीनियरिंग क्षेत्र में निर्यात की संभावनाओं पर अतिरिक्त कार्यकारी निदेशक ईईपीसी इंडिया श्री रजत श्रीवास्तव ने राज्य की औद्योगिक क्षमताओं, वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में भागीदारी और तकनीकी उन्नयन की आवश्यकता पर जोर दिया। एक्सिस बैंक के श्री आनंद सिंह, उप महाप्रबंधक एवं क्षेत्रीय प्रमुख ने निर्यात वित्त पोषण, क्रेडिट सहायता, जोखिम प्रबंधन तथा बैंक की विभिन्न योजनाओं के बारे में विस्तृत जानकारी दी। क्षेत्र-विशेष सत्रों में श्री तिलक खिंदर, प्रबंध निदेशक, रतन ब्रदर्स समूह ने मध्य प्रदेश से खेल सामग्री एवं एक्सेसरीज़ के निर्यात की अपार संभावनाओं को रेखांकित किया। समिट में श्री आशीष जायसवाल, स्पाइसेज़ बोर्ड ने मसालों के उत्पादन, गुणवत्ता प्रमाणन, ब्रांडिंग और अंतर्राष्ट्रीय बाजारों में निर्यात के अवसरों पर महत्वपूर्ण जानकारी साझा की। कार्यशाला में ओडीओपी उत्पादों के माध्यम से स्थानीय कारीगरों, किसानों, एमएसएमई इकाइयों और उद्यमियों को निर्यात से जोड़ने पर विशेष बल दिया गया। समिट में निर्यात से जुड़ी व्यावहारिक चुनौतियों और समाधानों पर चर्चा हुई।  

केंद्रीय गृह मंत्री शाह एवं मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने निवेश से रोजगार-अटल संकल्प विषय पर लगी प्रदर्शनी का किया अवलोकन

भोपाल  मध्यप्रदेश की ऐतिहासिक धरा ग्वालियर में पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न स्व. अटल बिहारी वाजपेयी की 101वीं जयंती पर “अभ्युदय मध्यप्रदेश ग्रोथ समिट” स्थल पर “निवेश से रोजगार-अटल संकल्प” विषय पर प्रदर्शनी लगाई गई। समिट के मुख्य अतिथि केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह एवं मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रदर्शनी का अवलोकन किया। समिट में केन्द्रीय मंत्री श्री ज्योतिरादित्य सिंधिया, विधानसभा अध्यक्ष श्री नरेन्द्र सिंह तोमरऔर वरिष्ठ विधायक एवं प्रदेश अध्यक्षश्री हेमन्त खंडेलवाल सहित अन्य जनप्रतिनिधिगण भी उनके साथ थे। पूर्व प्रधानमंत्री स्व. वाजपेयी की राष्ट्रप्रेम को समर्पित जीवन यात्रा प्रदर्शित यह प्रदर्शनी स्व. वाजपेयी अटल जी की राष्ट्र प्रेम को समर्पित जीवन यात्रा और राष्ट्र निर्माण में उनके अमूल्य योगदान को अत्यंत जीवंत रूप में प्रस्तुत कर रही थी। पूर्व प्रधानमंत्री स्व. वाजपेयी की कविताओं, ओजस्वी भाषणों और उनकी राजनीतिक यात्रा के माध्यम से उनकी दूरदर्शिता, एकात्म मानववाद की विचारधारा तथा भारत को एक विकसित राष्ट्र बनाने के उनके संकल्प को प्रभावशाली ढंग से दर्शाया गया।इसमें पोखरण परमाणु परीक्षण और गोल्डन क्वाड्रिलेटरल जैसी ऐतिहासिक उपलब्धियों को भी प्रदर्शित किया गया। साथ ही देश की मजबूती व विकास में पूर्व प्रधानमंत्री स्व. वाजपेयी की भूमिका को रेखांकित कर रहे थे। औद्योगिक प्रगति को भी दर्शाया प्रदर्शनी में मध्यप्रदेश की औद्योगिक प्रगति और आर्थिक विकास को भी प्रदर्शित किया गया। इसमें राज्य की प्रमुख औद्योगिक परियोजनाओं जैसे सिंगाजी थर्मल पॉवर प्रोजेक्ट, मालनपुर भिंड की इलेक्जर पीवीसी प्लाइवुड इकाई, पीथमपुर ऑटो हब और भोपाल फूड पार्क भी प्रदर्शित किये गये है। इसके साथ ही ड्रोन टेक्नोलॉजी और एग्रीटेक जैसे क्षेत्रों में कार्यरत सफल स्टार्ट-अप्स की कहानियों के माध्यम से नवाचार, उद्यमशीलता और युवाओं के लिए उपलब्ध अवसरों को भी प्रदर्शित किया गया। वन डिस्ट्रिक्ट-वन प्रोडक्ट भी किये गए प्रदर्शित प्रदर्शनी में वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट योजना ओडीओपी में मंदसौर की अफीम, मैहर का हस्तशिल्प, छिंदवाड़ा का टिंकीरा चावल जैसे उत्पादों को प्रदर्शित किया गया। साथ ही जीआई टैग प्राप्त उत्पादों में विदिशा का लहसुनिया लाल चना, बालाघाट का काकड़ हाट चावल, मुरैना की सरसों से बने स्थानीय उत्पाद एवं मुरैना की जीआई टैग गजक तथा दतिया का प्रसिद्ध जीआई टैग बेलमेटल वर्क शामिल किया गया। समिट की प्रदर्शनी निवेशमें रोजगार से जोड़ने के अटल संकल्प को सशक्त रूप में प्रस्तुत किया गया।औद्योगिक विकास, नवाचार और स्थानीय उत्पादों के संवर्धन से सतत और समावेशी विकास की दिशा में निरंतर अग्रसरहोते मध्यप्रदेश को प्रदर्शित किया गया है।