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मोहन सरकार का बड़ा ऐलान! मानसून सत्र में पेश होगा यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) बिल

भोपाल  मध्य प्रदेश में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) को लेकर सरकार की तैयारियां तेज हो गई हैं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने संकेत दिए हैं कि आगामी मानसून सत्र में यूसीसी का प्रस्ताव विधानसभा में लाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि सरकार कॉमन सिविल कोड की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है और प्रयास रहेगा कि इसी सत्र में इसे पारित कराया जाए। खुद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस बात की पुष्टि करते हुए बड़ा बयान दिया है। सीएम ने कहा कि इसी मानसून सत्र में यूसीसी का प्रस्ताव विधानसभा में लाया जा रहा है और महाकाल चाहेंगे तो इसी सत्र में यह प्रस्ताव पारित भी हो जाएगा। उत्तराखंड और गुजरात के बाद अब मध्य प्रदेश भी इस कानून को लागू करने की दिशा में तेजी से कदम बढ़ा रहा है। बता दें कि मानसून सत्र 20 जुलाई से शुरू हो रहा है। विधानसभा में यूसीसी प्रस्ताव लाने को लेकर भाजपा विधायक रामेश्वर शर्मा ने भी सरकार के इस कदम का समर्थन किया है। उन्होंने अपने बयान में कहा कि यह पूरे हिंदुस्तान की डिमांड है और यह कानून देश की सुरक्षा के लिए बेहद जरूरी है। इसके साथ ही विधायक रामेश्वर शर्मा ने जोर देकर कहा कि इस कानून के लागू होने से जनसंख्या पर भी नियंत्रण लगेगा। उन्होंने आगे कहा कि देश के कई राज्यों ने इसे लागू करने की पहल की है और अब मध्य प्रदेश में भी इसकी पूरी तैयारी कर ली गई है। मध्य प्रदेश में यूसीसी कमेटी का गठन और प्रस्तावों की समय-सीमा मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की मंशा के अनुरूप मध्य प्रदेश में समान नागरिक संहिता की व्यवहारिकता जांचने और इसका मसौदा तैयार करने के लिए सरकार ने एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया है। मध्य प्रदेश सरकार के विधि और विधायी कार्य विभाग द्वारा इस 6 सदस्यीय हाई-लेवल कमेटी का गठन इसी वर्ष 27 अप्रैल को किया गया था। इस समिति की अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट की सेवानिवृत्त न्यायाधीश जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई कर रही हैं, जबकि समिति में रिटायर्ड आईएएस अधिकारी शत्रुघ्न सिंह, कानूनी विशेषज्ञ अनूप नायर, शिक्षाविद् गोपाल शर्मा और सामाजिक कार्यकर्ता बुद्धपाल सिंह को शामिल किया गया है। राज्य का दौरा कर लोगों से ली राय कमेटी ने राज्य के विभिन्न हिस्सों का दौरा कर समाज के सभी वर्गों से राय ली और आम नागरिकों के सुझाव ऑनलाइन दर्ज करने के लिए एक आधिकारिक वेब पोर्टल भी शुरू किया था। जनता और विभिन्न संगठनों से यूसीसी को लेकर प्रस्ताव और सुझाव लेने की अवधि 15 मई से शुरू होकर 15 जून तक तय की गई थी। हालांकि, अभी भी पब्लिक को एसएसएम भेजकर ऑनलाइन सुझाव मंगाए जा रहे हैं कमेटी को गठन के बाद 60 दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट और ड्राफ्ट बिल सरकार को सौंपने का निर्देश दिया गया था। जनता के सुझावों और अलग-अलग वर्गों से संवाद के बाद अब इस ड्राफ्ट को अंतिम रूप दिया जा रहा है। सरकार का लक्ष्य है कि आगामी मानसून सत्र में इसे विधानसभा पटल पर रखकर पारित कराया जाए और इस साल दिवाली तक मध्य प्रदेश में समान नागरिक संहिता को पूरी तरह लागू कर दिया जाए। 20 जुलाई से शुरू होगा पांच दिवसीय मानसून सत्र मध्यप्रदेश विधानसभा का मानसून सत्र 20 जुलाई 2026 से शुरू होकर 24 जुलाई 2026 तक चलेगा। पांच दिवसीय इस सत्र के लिए अधिसूचना जारी कर दी गई है। इसके साथ ही विधायकों द्वारा प्रश्न, ध्यानाकर्षण प्रस्ताव और अन्य संसदीय सूचनाएं देने की प्रक्रिया भी शुरू हो जाएगी। सत्र का सबसे महत्वपूर्ण एजेंडा वित्तीय वर्ष 2026-27 का पहला अनुपूरक बजट माना जा रहा है। सरकार अधोसंरचना विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य, ग्रामीण विकास और जनकल्याणकारी योजनाओं के लिए अतिरिक्त वित्तीय प्रावधानों का प्रस्ताव सदन में रख सकती है। इससे विभिन्न विभागों को अतिरिक्त संसाधन उपलब्ध होने की संभावना है। ग्रामीण क्षेत्रों में संपत्ति अधिकारों को मजबूत करने के उद्देश्य से संचालित स्वामित्व योजना भी इस सत्र में चर्चा का प्रमुख विषय बन सकती है। सरकार इस योजना से जुड़े कानूनी और प्रशासनिक प्रावधानों में आवश्यक संशोधनों पर विचार कर रही है, जिससे बड़ी संख्या में ग्रामीण परिवारों को लाभ मिलने की उम्मीद है।  इस पांच दिवसीय सत्र में विभिन्न महत्वपूर्ण शासकीय कार्यों का संपादन किया जाएगा। सत्र के लिए अशासकीय विधेयकों की सूचनाएं 24 जून 2026 तक तथा अशासकीय संकल्पों की सूचनाएं 9 जुलाई 2026 तक विधानसभा सचिवालय में प्रस्तुत की जा सकेंगी। वहीं, स्थगन प्रस्ताव, ध्यानाकर्षण प्रस्ताव तथा नियम 267-क के अंतर्गत सूचनाएं 14 जुलाई 2026 से विधानसभा सचिवालय में प्रतिदिन प्रातः 11 बजे से अपराह्न 4 बजे तक प्राप्त की जाएंगी। उल्लेखनीय है कि मध्यप्रदेश की 16वीं विधानसभा का यह 11वां सत्र होगा।  सदन में यूसीसी को लेकर हो सकती है चर्चा  समान नागरिक संहिता (यूसीसी) को लेकर भी सत्र के दौरान चर्चा होने की संभावना है। राज्य सरकार द्वारा गठित समिति प्रदेशभर से सुझाव प्राप्त कर रही है। सुझावों के परीक्षण के बाद समिति अपना प्रारूप (ड्राफ्ट) सरकार को सौंपेगी। इसके आधार पर आगे की प्रक्रिया तय की जाएगी। हालांकि यूसीसी विधेयक इसी सत्र में आएगा या नहीं, इस पर अभी अंतिम निर्णय होना बाकी है। इसके अलावा नई शिक्षा नीति के अनुरूप उच्च शिक्षा से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण विधेयक भी विधानसभा में प्रस्तुत किए जा सकते हैं। वहीं प्रदेश में अवैध कॉलोनियों के नियमितीकरण को लेकर तैयार किए जा रहे मसौदे को भी सदन के समक्ष रखा जा सकता है। यदि प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है तो बड़ी संख्या में नागरिकों को राहत मिलने की संभावना है।  वहीं, विपक्ष इस सत्र में राज्यसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस नेता मीनाक्षी नटराजन का नामांकन निरस्त होने के मुद्दे के साथ-साथ किसानों की समस्याओं, बिजली-पानी की स्थिति, बेरोजगारी, महंगाई और कानून-व्यवस्था जैसे विषयों को लेकर सरकार को घेरने की रणनीति बनाने पर काम कर सकती है। दूसरी ओर सरकार अपनी विकास योजनाओं, निवेश, रोजगार सृजन और जनकल्याणकारी उपलब्धियों को सदन में प्रमुखता रखने की योजना बना सकती है। इस मानसून सत्र में कई अहम मुद्दों पर चर्चा, बहस और महत्वपूर्ण निर्णय देखने को मिल सकते हैं।    यूसीसी पर अंतिम तैयारी में सरकार प्रदेश में यूसीसी लागू करने के लिए गठित उच्च स्तरीय समिति लगातार विभिन्न जिलों में जाकर लोगों और … Read more

भोपाल में राष्ट्रीय कार्यशाला: मध्यप्रदेश में नवीकरणीय ऊर्जा विस्तार और तकनीकी चुनौतियों पर मंथन

मध्यप्रदेश में विकेंद्रीकृत नवकरणीय ऊर्जा के विस्तार और तकनीकी चुनौतियों के समाधान पर भोपाल में राष्ट्रीय कार्यशाला संपन्न अंतर्राष्ट्रीय विशेषज्ञों ने साझा किए नवाचार एवं रणनीतियां भोपाल नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा विभाग के अपर मुख्य सचिव मनु श्रीवास्तव ने कहा कि मध्यप्रदेश स्वच्छ एवं सतत ऊर्जा के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है और विकेंद्रीकृत नवीकरणीय ऊर्जा प्रणालियां ऊर्जा सुरक्षा के साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी सशक्त बनाने का माध्यम बनेंगी। उन्होंने कहा कि तकनीकी नवाचार, नीति समर्थन और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग के माध्यम से राज्य में हरित ऊर्जा के विस्तार को नई गति मिलेगी। मध्य प्रदेश ऊर्जा विकास निगम लिमिटेड के प्रबंध निदेशक अमनबीर सिंह बैंस ने कहा कि आधुनिक तकनीकों और प्रभावी ग्रिड प्रबंधन के माध्यम से विकेंद्रीकृत नवकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं का सफल क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जा सकता है तथा इससे राज्य की स्वच्छ ऊर्जा क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। इस अवसर पर अतिथियों ने पुस्तक विमोचन भी किया। “मध्यप्रदेश में विकेंद्रीकृत नवकरणीय ऊर्जा परिनियोजन को आगे बढ़ाना” विषय पर भोपाल में आयोजित कार्यशाला में ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों, परियोजना विकासकर्ताओं, शोधकर्ताओं, डिस्कॉम प्रतिनिधियों तथा सरकारी एवं निजी संस्थानों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। जर्मनी की अंतर्राष्ट्रीय जलवायु पहल (आईकेआई), नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा विभाग, मध्यप्रदेश शासन तथा मध्य प्रदेश ऊर्जा विकास निगम लिमिटेड के संयुक्त सहयोग से आयोजित इस कार्यशाला में मध्यप्रदेश में विकेंद्रीकृत नवीकरणीय ऊर्जा के विस्तार एवं तकनीकी सहयोग को सुदृढ़ बनाने पर विशेष बल दिया गया। कार्यशाला में मध्यप्रदेश में एग्रीफोटोवोल्टिक्स पर व्यापक कानूनी एवं व्यवहार्यता मूल्यांकन रिपोर्ट का विमोचन किया गया। इसके साथ ही सौर ऊर्जा संयंत्रों के प्रदर्शन विश्लेषण, रिएक्टिव पावर मापन, रिले एवं ट्रांसफार्मर समन्वय, 11 केवी ग्रिड इंजेक्शन से जुड़ी चुनौतियों तथा मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) के प्रभावी क्रियान्वयन सहित विभिन्न तकनीकी विषयों पर विस्तृत विचार-विमर्श हुआ।कार्यशाला में जर्मनी के संघीय आर्थिक सहयोग एवं विकास मंत्रालय, जर्मन दूतावास, जीआईजेड इंडिया तथा केएफडब्ल्यू डेवलपमेंट बैंक के वरिष्ठ प्रतिनिधियों की गरिमामयी उपस्थिति रही। कार्यशाला में विशेषज्ञों ने मध्यप्रदेश में स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में अंतर्राष्ट्रीय सहयोग, तकनीकी नवाचार और संस्थागत समन्वय को और अधिक सुदृढ़ बनाने पर बल दिया।  

‘डॉ. पाठक जैसे गुरु मिलना सौभाग्य’, विज्ञान जगत में उनकी उपलब्धियों पर गर्व जताया

डॉ. पाठक जैसे विरले शिक्षकों का शिष्य होना सौभाग्य की बात, विज्ञान के क्षेत्र में उनकी उपलब्धियां हम सभी के लिए गर्व का विषय' मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अपने गुरू को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से दी बधाई भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव शिक्षक दिवस के अतिरिक्त अन्य अवसरों पर भी अपने गुरूजनों के प्रति सदैव सम्मान व्यक्त करते रहे है। उन्होंने आज अपने शिक्षक रहे डॉ. जेपीएन पाठक के 80 वें जन्म दिन पर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग द्वारा बधाई दी और सम्मान व्यक्त किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने उज्जैन निवासी अपने गुरू डॉ. पाठक को जन्म दिन की वर्षगांठ पर बधाई देते हुए इन शब्दों में अपनी भावना व्यक्त की- "मुझे मुख्यमंत्री के रूप में प्रतिदिन अनेक कार्यक्रमों में शामिल होने का अवसर मिलता है। लेकिन आज का यह अवसर एक भावुक क्षण भी है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अपने गुरू डॉ. पाठक की जिजीविषा का उल्लेख करते हुए कहा कि आपको एक युवा की तरह देखकर ऊर्जा मिलती है और आपके स्नेह तथा सकारात्मकता के भाव से ऐसा अनुभव होता हैं, मानो हम अपने साइंस कालेज की कक्षा में बैठे हों और आप पढ़ा रहे हों। आपके पढ़ाने का विशेष तरीका था। आप जैसे विरले शिक्षकों का शिष्य होना सौभाग्य की बात है। आप सदैव मुस्कुराते रहें और सभी का मार्गदर्शन करते रहें, आपका आशीर्वाद हम पर बना रहे।" मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि डॉ. पाठक की वैज्ञानिक उपलब्धियां महत्वपूर्ण हैं। वे अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों में भागीदारी करते रहे हैं, जिस पर उनके विद्यार्थियों को गर्व है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इस अवसर पर डॉ. पाठक से जुड़े कुछ संस्मरण भी साझा किए और अन्य गुरुजन को भी याद किया जिनकी शिक्षा आज भी जीवन में उपयोगी है। उनकी दी हुई शिक्षा संस्कार और साहस देने वाली शिक्षा थी। उन्होंने छात्र संघ को सशक्त बनाने में सहयोग दिया और प्रज्ञा पत्रिका के माध्यम से मार्गदर्शन दिया। मुख्यमंत्री डॉ यादव ने कहा कि गुरुजी डॉ. पाठक ने सदैव विद्यार्थियों की युवा शक्ति को महत्व दिया। डॉ. पाठक से वर्चुअल मीटिंग के अवसर पर मध्यप्रदेश गृह निर्माण और अधोसंरचना मंडल के अध्यक्ष श्री ओम जैन के साथ ही अन्य जनप्रतिनिधि और डॉ. पाठक के अन्य शिष्य उपस्थित थे।      

इंदौरवासियों के लिए बड़ी सौगात, मेट्रो का सफर अब शहीद पार्क तक पहुंचने के करीब

इंदौर मध्य प्रदेश के आर्थिक नगर इंदौर मेट्रो के व्यावसायिक संचालन को लेकर लंबे समय से चल रहा इंतजार अब खत्म होने की ओर है। सुपर कॉरिडोर से शहीद पार्क (मालवीय नगर) स्टेशन तक मेट्रो के कमर्शियल रन की तारीख पर आज फैसला हो सकता है। माना जा रहा है कि, एसीएस और मेट्रो परियोजना से जुड़े वरिष्ठ अधिकारी संजय दुबे के इंदौर दौरे के दौरान होने वाली बैठक में शुभारंभ की तारीख को अंतिम रूप दिया जा सकता है। मेट्रो प्रबंधन और प्रशासनिक स्तर पर तैयारियां लगभग पूरी हो चुकी हैं। सुपर कॉरिडोर से मालवीय नगर स्टेशन तक के कॉरिडोर को पहले ही कमिश्नर ऑफ मेट्रो रेलवे सेफ्टी (सीएमआरएस) की हरी झंडी मिल चुकी है। इसके बाद उम्मीद थी कि, जून के मध्य में ही यात्रियों के लिए मेट्रो का संचालन शुरू हो जाएगा, लेकिन तारीख को लेकर लगातार असमंजस बना रहा। 20 जून को कमर्शियल रन की संभावना सूत्रों के मुताबिक, पहले 18 जून को कमर्शियल रन का प्रस्ताव निर्धारित था। बाद में संभावित राजनीतिक और प्रशासनिक व्यस्तताओं को देखते हुए इसे आगे बढ़ाकर 20 जून करने पर विचार किया गया। अब एक बार फिर अंतिम तारीख को लेकर मंथन चल रहा है। हालांकि, मेट्रो अधिकारियों ने 20 जून को ध्यान में रखकर अपनी तैयारियां लगभग पूरी कर ली हैं। शासन स्तर पर होगी तारीख की घोषणा अधिकारियों का कहना है कि स्टेशन, सुरक्षा व्यवस्था, परिचालन स्टाफ और यात्री सुविधाओं से जुड़े सभी इंतजाम तय समय सीमा के अनुसार किए जा रहे हैं। जैसे ही शासन स्तर से तारीख की औपचारिक घोषणा होगी, उद्घाटन कार्यक्रम और संचालन संबंधी विस्तृत जानकारी सार्वजनिक कर दी जाएगी। सुपर कॉरिडोर तक ही चल रहा संचालन अब आज होने वाली बैठक पर नजरें टिकी हैं। शहर की बहुप्रतीक्षित मेट्रो परियोजना का पहला चरण सुपर कॉरिडोर पर टीसीएस चौराहा तक चल रहा है। आगे चलने से विजय नगर और मालवीय नगर क्षेत्र के यात्रियों को तेज, सुरक्षित और आधुनिक सार्वजनिक परिवहन का विकल्प मिलेगा। 12 घंटे मिलेगी इंदौर में मेट्रो ट्रेन की सुविधा इंदौर में मेट्रो ट्रेन का 17 किलोमीटर हिस्से में संचालन 20 जून से होने जा रहा है। शहरवासियों को भी मेट्रो के संचालन का इंतजार है। हर दिन मेट्रो में 50 हजार से ज्यादा यात्री सफर कर सकेंगे। मेट्रो का संचालन सुबह 8 बजे से रात 8 बजे तक 12 घंटे के लिए होगा और दिनभर में 50 से ज्यादा फेरे लगाए जाएंगे। सुपर कॉरिडोर से रेडिसन चौराहे तक के रूट के लिए अलग-अलग किराया रहेगा। न्यूनतम किराया 20 रुपये निर्धारित किया गया है। दूरी के अनुसार किराया भी बढ़ेगा। अधिकतम किराया 80 रुपये तक हो सकता है। गांधी नगर से रेडिसन चौराहा तक इतनी कीमत चुकानी होगी। पहले दो स्टेशनों तक 20 रुपये, जबकि अधिक दूरी के लिए 30, 40 रुपये और उससे अधिक का किराया होगा। 20 जून को केंद्रीय मंत्री मोहन लाल खट्टर और मुख्यमंत्री मोहन यादव मेट्रो के दूसरे चरण के संचालन का शुभारंभ करेंगे। यह होगा रूट अभी तक मेट्रो ट्रेन गांधी नगर डिपो से टीसीएस चौराहा तक जाती थी, लेकिन इस रूट पर काफी कम यात्री मिलते थे। अब मेट्रो गांधी नगर, एमआर-10 स्टेशन, चंद्रगुप्त मौर्य प्रतिमा, बापट चौराहा, मेघदूत चौराहा, विजय नगर चौराहा और रेडिसन चौराहे के बीच चलेगी। यह दूरी 20 से 30 मिनट में तय होगी। मेट्रो ट्रेन के चलने से कॉलेज और आईटी कंपनियों में काम करने वाले कर्मचारियों को सबसे ज्यादा फायदा होगा, क्योंकि सुपर कॉरिडोर पर फिलहाल लोक परिवहन के ज्यादा विकल्प नहीं हैं। 80 की स्पीड से चलेगी मेट्रो ट्रेन 17 किलोमीटर लंबे रूट पर 80 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से मेट्रो चलेगी। गांधी नगर से रेडिसन चौराहे तक आने में मेट्रो को 30 मिनट का समय लगेगा। ट्रेन छह स्टेशनों पर रुकेगी। पहले चरण में मेट्रो ट्रेन का संचालन खजराना चौराहा तक होगा। उसके बाद मेट्रो ट्रेन अंडरग्राउंड होगी। उसका काम भी अभी शुरू नहीं हो पाया है। साढ़े चार सौ यात्रियों की क्षमता 20 से ज्यादा मेट्रो ट्रेनों का संचालन होगा। एक ट्रेन में साढ़े चार सौ यात्री सवार हो सकेंगे। बैठने के अलावा खड़े रहकर सफर करने में भी आसानी होगी। ट्रेन के भीतर लगे पोल में चार ग्रिप दी गई हैं, जिन्हें यात्री पकड़कर सफर कर सकते हैं। मेट्रो ट्रेन बाहरी और आंतरिक रूप से सीसीटीवी कैमरों से लैस होगी। मेट्रो की खास बातें     मेट्रो की अधिकतम गति 80 किमी/घंटा होगी।     ट्रेनें छह स्टेशनों पर रुकेंगी।     सभी कोच अंदर और बाहर से CCTV कैमरों से लैस होंगे।     खड़े यात्रियों की सुविधा के लिए पोल पर चार-चार ग्रिप उपलब्ध होंगी।

खजराना गणेश मंदिर के लिए फाइनल हुआ खास डिजाइन, 5 प्रतिमाओं को पहनाए जाएंगे स्वर्ण मुकुट

इंदौर  विश्व प्रसिद्ध इंदौर के खजराना गणेश मंदिर में श्रद्धालु लगातार दिल खोलकर दान कर रहे हैं. दानपेटियों में नगदी के अलावा सोना-चांदी भी भक्त दान कर रहे हैं. इसके अलावा कई भक्त मंदिर प्रबंधन समिति को सीधा सोना दान कर रहे हैं. ये स्वर्ण दान उस अभियान में कारगर साबित होने वाला है, जिसके तहत गर्भगृह में भगवान गणेश के साथ ही रिद्धि-सिद्धि भी स्वर्ण मुकुट धारण करेंगी. इसके अलावा गर्भगृह में शुभ और लाभ की प्रतिमाओं को भी सोने का मुकुट सुशोभित किया जाएगा।  स्वर्ण मुकुट अभियान: अभी ढाई किलो सोना और चाहिए अभी तक खजराना मंदिर प्रबंधन समिति को करीब साढ़े 5 किलो सोना दान में मिल चुका है. टारगेट 8 किलो सोना जुटाने का है. इस सोने से 5 स्वर्ण मुकुट बनाए जाने हैं. 3 दिन पहले ही एक श्रद्धालु ने दो तोला सोना भगवान गणेश को अर्पित किया है. अभी 5 स्वर्ण मुकुट बनाने के लिए करीब ढाई किलो सोने की और जरूरत है. अभी खजराना गणेश को 1 किलो सोने का मुकुट तिल चतुर्थी, गणेश चतुर्थी पर पहनाया जाता है. योजना के अनुसार नए मुकुट के साथ एक किलो का स्वर्ण छत्र, मां रिद्धि-सिद्धि के मुकुट 600-600 ग्राम के नए के बनेंगे. लाभ-शुभ के मुकुट 100-100 ग्राम के नए बनवाए जाएंगे।  श्रद्धालु दानपेटी में अर्पित करते हैं सोने की ज्वैलरी खजराना गणेश मंदिर में पूरे देश से श्रद्धालु पहुंचते हैं और अपनी श्रद्धा के अनुसार यहां दान करते हैं. विदेश में रहने वाले बप्पा के भक्त भी दानराशि भेजते हैं. हाल ही में दान पेटियां जब खोली गईं और काउंटिंग की गई तो ये राशि करीब 1.78 करोड़ निकली. दान पेटियों में सोना, चांदी, हीरे जड़े आभूषण भी मिले. नगद राशि को मंदिर के विकास में इस्तेमाल किया जाता है. भक्तों के लिए सुविधाए विकसित की जाती हैं।  दानपेटी और प्रत्यक्ष रूप से मिले सोने को सहेजकर रखा जाता है, क्योंकि इसी सोने से स्वर्ण मुकुट बनने हैं. गणेश चतुर्थी पर खजराना गणेश मंदिर में भगवान गणपति का 5 करोड़ के गहनों से श्रृंगार किया गया. सिर पर हीरे मोती से जड़ा सोने का मुकुट धारण किए हुए खजराना गणेश सुसज्जित हुए, बप्पा का मनमोहक श्रृंगार देख भक्त भावविभोर हो गए थे।  सोने के रेट बढ़ने का असर भी दिखा हालांकि बीते एक से डेढ़ साल के अंदर सोने के बेतहाशा बढ़ते रेट के कारण दान में कुछ कमी आई है. लेकिन इसके बाद भी भक्तों के साथ ही मंदिर प्रबंधन समिति को भरोसा है कि 8 किलो सोना इकट्ठा करने का टारगेट बहुत जल्द पूरा होगा. खजराना गणेश मंदिर के पंडित अशोक भट्ट बताते हैं "गर्भगृह स्थित भगवान गणेश महाराज के साथ ही रिद्धि, सिद्धि, शुभ और लाभ की प्रतिमाओं के लिए नए स्वर्ण मुकुट तैयार करने की प्लानिंग है. स्वर्ण मुकुट की स्पेशल डिजाइन तैयार हो चुकी है. इस काम के लिए लक्ष्य के अनुसार कुल 8 किलो सोना चाहिए।  डेढ़ हजार लोगों को रोजाना मुफ्त भोजन खजराना गणेश मंदिर में आने वाली दानराशि का इस्तेमाल केवल मंदिर के विस्तार व विकास के लिए नहीं होता बल्कि यहां अन्न क्षेत्र में रोजाना करीब डेढ़ हजार लोगों को मुफ्त में भोजन कराया जाता है. इसके साथ ही गरीब व असहाय लोगों के इलाज पर राशि खर्च की जाती है. इस कार्य में पूरा इंदौर शहर साथ देता है। 

मध्य प्रदेश में बन रहे 6 मेगा कॉरिडोर, जानिए आपके जिले को क्या होगा फायदा

 भोपाल  ग्वालियर और नागपुर शहरों को सिक्सलेन हाइवे से जोड़ने के लिए नए कारीडोर का सर्वे तेजी से चल रहा है. इस कॉरिडोर को केंद्र सरकार द्वारा सहमति मिलने के बाद सरकार द्वारा फिजिबिलिटी सर्वे कराया जा रहा है. जिसमें ये देखा जाएगा कि इस कॉरिडोर पर कैसा ट्रैफिक रहेगा. फिलहाल ये तय किया गया है कि 40 हजार करोड़ की लागत से 569 किमी लंबा सिक्सलेन हाइवे बनाया जाएगा, जो मध्य प्रदेश के 9 जिलों से गुजरेगा. इन सभी जिलों में सिक्सलेन कॉरिडोर के किनारे इंडस्ट्रियल क्लस्टर की स्थापना की जाएगी, जो इन जिलों के व्यवसाय में पंख लगाएंगे।   मध्य प्रदेश की सड़कों पर रफ्तार और विकास का एक नया अध्याय शुरू होने जा रहा है। सूबे के सभी 55 जिलों की तस्वीर बदलने और उनके बीच की दूरी को कम करने के लिए सरकार एक मेगा इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट पर काम कर रही है। राज्य में 6 नए इकोनॉमिक कॉरिडोर (आर्थिक गलियारे) तैयार किए जा रहे हैं, जो करीब 3,300 किलोमीटर लंबे होंगे। लगभग 36,483 करोड़ रुपये के भारी-भरकम बजट से बनने वाले इन एक्सप्रेस-वे ग्रिड का निर्माण कार्य साल 2028 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। यह महापरियोजना न केवल सफर को आसान बनाएगी, बल्कि विंध्य, बुंदेलखंड, मालवा-निमाड़ और नर्मदा अंचल की आर्थिक रीढ़ को भी मजबूत करेगी। बालाघाट से बैतुल तक और बिलासपुर-रायपुर से होते हुए गुजरात सीमा तक कनेक्टिविटी का यह जाल प्रदेश के औद्योगिक और व्यापारिक विकास को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा। आइए जानते हैं कि मध्य प्रदेश को रफ्तार देने वाले ये छह इकोनॉमिक कॉरिडोर कौन से हैं और इनसे प्रदेश को क्या लाभ होगा: 1. मालवा-निमाड़ विकासपथ (कुल लंबाई: 450 किमी) मालवा और निमाड़ अंचल को आर्थिक रूप से और समृद्ध बनाने के लिए इस कॉरिडोर को 7,972 करोड़ रुपये की लागत से तैयार किया जा रहा है। इसके तहत गरोठ से उज्जैन के बीच 136 किलोमीटर और इंदौर से बुरहानपुर के बीच 215 किलोमीटर का रूट शामिल है। साल 2027 तक पूरा होने वाला यह मार्ग मंदसौर, उज्जैन, इंदौर, खंडवा और बुरहानपुर जैसे प्रमुख व्यावसायिक केंद्रों को सीधे जोड़ेगा। 2. विंध्य एक्सप्रेस-वे (कुल लंबाई: 676 किमी) करीब 3,809 करोड़ रुपये के बजट से बनने वाला यह एक्सप्रेस-वे राजधानी भोपाल से शुरू होकर प्रदेश के 10 जिलों से गुजरेगा। इसमें सागर, दमोह, कटनी और रीवा जैसे बड़े शहर शामिल हैं। इसके पूरी तरह चालू हो जाने के बाद भोपाल से रीवा और ऊर्जा धानी सिंगरौली तक का सफर बेहद आसान और बेहद कम समय में तय होने लगेगा। 3. बुंदेलखंड विकासपथ (कुल लंबाई: 330 किमी) बुंदेलखंड क्षेत्र के पिछड़ेपन को दूर करने और स्थानीय रोजगार को बढ़ावा देने के लिए यह 330 किलोमीटर लंबा कॉरिडोर बनाया जा रहा है। लगभग 3,357 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाला यह पथ भोपाल, रायसेन, विदिशा, सागर और छतरपुर को आपस में जोड़ेगा, जिससे पर्यटन और व्यापार दोनों को रफ्तार मिलेगी। 4. अटल प्रगतिपथ (कुल लंबाई: 299 किमी) चंबल अंचल के विकास को रफ्तार देने के लिए 299 किलोमीटर लंबे अटल प्रगतिपथ की रूपरेखा तैयार की गई है। यह कॉरिडोर दिल्ली-मुंबई इंडस्ट्रियल कॉरिडोर से शुरू होकर बुंदेलखंड कॉरिडोर से जाकर मिल जाएगा। इससे श्योपुर, मुरैना और भिंड जैसे चंबल के जिलों को सीधा फायदा होगा और यहां नए उद्योगों के रास्ते खुलेंगे। 5. नर्मदा प्रगतिपथ (कुल लंबाई: 867 किमी) नर्मदा नदी के समानांतर बनने वाला यह कॉरिडोर इस पूरी योजना का सबसे लंबा (867 किलोमीटर) हिस्सा है। यह मार्ग झाबुआ, धार, इंदौर, देवास, सीहोर, रायसेन, नरसिंहपुर, जबलपुर और डिंडौरी जैसे जिलों को एक सूत्र में पिरोएगा। इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह छत्तीसगढ़ के रायपुर और बिलासपुर को मध्य प्रदेश के रास्ते सीधे गुजरात की सीमाओं से जोड़ देगा। 6. मध्यभारत विकासपथ (कुल लंबाई: 746 किमी) यह कॉरिडोर विशेष रूप से मध्य प्रदेश की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहरों को दुनिया के सामने लाने के लिए डिजाइन किया गया है। 746 किलोमीटर लंबा यह मार्ग भीमबैठका, भोजपुर, सांची, उदयगिरी, चंदेरी, ओरछा और दतिया जैसे विश्व प्रसिद्ध पर्यटन स्थलों को जोड़ेगा। इसके अलावा, इस कॉरिडोर के जरिए मुरैना से लेकर बैतुल तक सीधी और निर्बाध कनेक्टिविटी मिल सकेगी।  

Monsoon 2026 Update: मध्य प्रदेश में मानसून की दस्तक तय, कई जिलों में बारिश और आंधी का अलर्ट

भोपाल  मध्य प्रदेश में मौसम ने फिर करवट ली है। IMD ने अगले 5 दिनों के लिए प्रदेश के कई जिलों में गरज-चमक, बारिश, वज्रपात और 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने का अलर्ट जारी किया है। मौसम विभाग के अनुसार मानसून लगातार आगे बढ़ रहा है और उसके प्रभाव से प्रदेश में व्यापक वर्षा गतिविधियां देखने को मिल सकती हैं। MP में मानसून का इंतजार अब अंतिम चरण में दिखाई दे रहा है। आईएमडी के अनुसार सोमवार को प्रदेश का वातावरण तेजी से मानसूनी स्वरूप ग्रहण कर रहा है। रात के तापमान में गिरावट, हवा में बढ़ती नमी और अधिकांश क्षेत्रों में हो रही बारिश संकेत है कि मानसून के आगमन के लिए परिस्थितियां अनुकूल बन रही हैं। प्रदेश के अधिकांश जिलों में न्यूनतम तापमान सामान्य से कम दर्ज किया गया। राजधानी भोपाल में न्यूनतम तापमान 20.8 डिग्री सेल्सियस रहा, जो सामान्य से लगभग 5 डिग्री कम है। राजगढ़, दमोह, शिवपुरी और ग्वालियर जैसे जिलों में भी रात का तापमान सामान्य से 3 से 4 डिग्री नीचे दर्ज हुआ। यह स्थिति बताती है कि बादलों और नमी की उपस्थिति के कारण वातावरण में शीतलता बनी हुई है। शिवपुरी में सबसे अधिक बारिश दर्ज पिछले 24 घंटों में शिवपुरी में 20.1 मिमी वर्षा दर्ज की गई, जो प्रदेश में सर्वाधिक रही। इसके अलावा मालांजखंड, ग्वालियर, जबलपुर और गुना में भी बारिश रिकॉर्ड की गई। हालांकि वर्षा अभी पूरे प्रदेश में एक समान नहीं हुई है, लेकिन यह स्पष्ट संकेत है कि वातावरण में पर्याप्त नमी और अस्थिरता मौजूद है।     अगले 5 दिनों तक प्रदेश के कई हिस्सों में बारिश और आंधी की संभावना।     कुछ जिलों में 50-60 किमी/घंटा की रफ्तार से चल सकती हैं तेज हवाएं।     भोपाल, विदिशा, रायसेन, राजगढ़, नर्मदापुरम, बैतूल, हरदा समेत कई जिले अलर्ट पर।     ग्वालियर, चंबल, सागर और रीवा संभाग के कई जिलों में भी मौसम बदलेगा।     मानसून महाराष्ट्र, तेलंगाना और छत्तीसगढ़ के कई हिस्सों में आगे बढ़ चुका है। प्रदेश के किन इलाकों में रहेगा ज्यादा असर मौसम विभाग के अनुसार 16 से 20 जून के बीच भोपाल, विदिशा, रायसेन, राजगढ़, नर्मदापुरम, बैतूल, हरदा, छिंदवाड़ा, सिवनी, मंडला, बालाघाट, जबलपुर, डिंडोरी, उमरिया, कटनी, शहडोल, अनूपपुर, पन्ना, छतरपुर, टीकमगढ़, निवाड़ी, दमोह, सागर और आसपास के जिलों में गरज-चमक के साथ बारिश होने की संभावना है। दिन-रात के तापमान में 2 से 5 डिग्री गिरावट बारिश की गतिविधियों के चलते प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में अधिकतम तापमान में 2 से 5 डिग्री सेल्सियस तक की गिरावट दर्ज की गई है। कई जिलों में मौसम सुहावना बना हुआ है। खरीफ फसलों के लिए वरदान साबित होगी बारिश मौसम विशेषज्ञों के अनुसार यदि अगले कुछ दिनों तक समुद्री नमी का प्रवाह इसी तरह बना रहता है तो मध्यप्रदेश के अधिकांश हिस्सों में मानसून का तेजी से विस्तार हो सकता है। किसानों से लेकर आम नागरिकों तक सभी की निगाहें अब उस पहली व्यापक मानसूनी बारिश पर टिकी हैं, जो गर्मी से राहत देने के साथ खरीफ फसलों के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण साबित होगी। मौसम विभाग की सलाह     खराब मौसम के दौरान पेड़ों और कमजोर संरचनाओं से दूर रहें।     बिजली चमकने पर खुले मैदान में न जाएं।     किसान फसलों की सुरक्षा के लिए आवश्यक इंतजाम करें।     तेज हवा और बारिश के दौरान अनावश्यक यात्रा से बचें।

मध्यप्रदेश में विकेंद्रीकृत नवकरणीय ऊर्जा के विस्तार और तकनीकी चुनौतियों के समाधान पर भोपाल में राष्ट्रीय कार्यशाला संपन्न

भोपाल  नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा विभाग के अपर मुख्य सचिव  मनु वास्तव ने कहा कि मध्यप्रदेश स्वच्छ एवं सतत ऊर्जा के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है और विकेंद्रीकृत नवीकरणीय ऊर्जा प्रणालियां ऊर्जा सुरक्षा के साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी सशक्त बनाने का माध्यम बनेंगी। उन्होंने कहा कि तकनीकी नवाचार, नीति समर्थन और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग के माध्यम से राज्य में हरित ऊर्जा के विस्तार को नई गति मिलेगी। मध्य प्रदेश ऊर्जा विकास निगम लिमिटेड के प्रबंध निदेशक  अमनबीर सिंह बैंस ने कहा कि आधुनिक तकनीकों और प्रभावी ग्रिड प्रबंधन के माध्यम से विकेंद्रीकृत नवकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं का सफल क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जा सकता है तथा इससे राज्य की स्वच्छ ऊर्जा क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। इस अवसर पर अतिथियों ने पुस्तक विमोचन भी किया। “मध्यप्रदेश में विकेंद्रीकृत नवकरणीय ऊर्जा परिनियोजन को आगे बढ़ाना” विषय पर भोपाल में आयोजित कार्यशाला में ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों, परियोजना विकासकर्ताओं, शोधकर्ताओं, डिस्कॉम प्रतिनिधियों तथा सरकारी एवं निजी संस्थानों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। जर्मनी की अंतर्राष्ट्रीय जलवायु पहल (आईकेआई), नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा विभाग, मध्यप्रदेश शासन तथा मध्य प्रदेश ऊर्जा विकास निगम लिमिटेड के संयुक्त सहयोग से आयोजित इस कार्यशाला में मध्यप्रदेश में विकेंद्रीकृत नवीकरणीय ऊर्जा के विस्तार एवं तकनीकी सहयोग को सुदृढ़ बनाने पर विशेष बल दिया गया। कार्यशाला में मध्यप्रदेश में एग्रीफोटोवोल्टिक्स पर व्यापक कानूनी एवं व्यवहार्यता मूल्यांकन रिपोर्ट का विमोचन किया गया। इसके साथ ही सौर ऊर्जा संयंत्रों के प्रदर्शन विश्लेषण, रिएक्टिव पावर मापन, रिले एवं ट्रांसफार्मर समन्वय, 11 केवी ग्रिड इंजेक्शन से जुड़ी चुनौतियों तथा मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) के प्रभावी क्रियान्वयन सहित विभिन्न तकनीकी विषयों पर विस्तृत विचार-विमर्श हुआ।कार्यशाला में जर्मनी के संघीय आर्थिक सहयोग एवं विकास मंत्रालय, जर्मन दूतावास, जीआईजेड इंडिया तथा केएफडब्ल्यू डेवलपमेंट बैंक के वरिष्ठ प्रतिनिधियों की गरिमामयी उपस्थिति रही। कार्यशाला में विशेषज्ञों ने मध्यप्रदेश में स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में अंतर्राष्ट्रीय सहयोग, तकनीकी नवाचार और संस्थागत समन्वय को और अधिक सुदृढ़ बनाने पर बल दिया।  

आंगनवाड़ी दीदी के प्रयास से कुपोषण के चक्रव्यूह से बाहर आई मासूम माहिका

भोपाल  जब सरकारी प्रयास और एक माँ का संकल्प आपस में मिलते हैं, तो कुपोषण जैसी गंभीर चुनौती को भी मात दी जा सकती है। महिला एवं बाल विकास विभाग के जमीनी प्रयासों और 'पोषण पखवाड़ा' अभियान की सफलता की एक बेहद भावुक और प्रेरक कहानी ग्वालियर जिले से सामने आई है। यहाँ के शहरी परियोजना-01 के अंतर्गत आने वाले पीएचई कॉलोनी (सेक्टर 3, वार्ड 7) आंगनबाड़ी केंद्र की सजगता से 'सैम' (SAM – Severe Acute Malnutrition) यानी गंभीर कुपोषण की शिकार एक मासूम बच्ची अब पूरी तरह स्वस्थ और सामान्य श्रेणी में आ चुकी है। इस सफलता ने न केवल एक परिवार को खुशियाँ लौटाई हैं, बल्कि पूरे प्रदेश के लिए कुपोषण के खिलाफ जंग में एक अनूठा उदाहरण पेश किया है। ग्वालियर की पीएचई कॉलोनी में रहने वाली  मोना के घर 14 मार्च 2025 को बेटी माहिका का जन्म हुआ था। जन्म के कुछ महीनों बाद ही माहिका का स्वास्थ्य बिगड़ने लगा और वह शारीरिक रूप से कमजोर होने लगी। जनवरी 2026 में जब आंगनबाड़ी केंद्र पर उसका वजन और लंबाई मापी गई, तो आंकड़े बेहद चिंताजनक थे। महज 5 किलो 500 ग्राम वजन और 68 सेंटीमीटर लंबाई के साथ माहिका 'सैम' (गंभीर कुपोषण) की श्रेणी में जा चुकी थी। एक माँ के लिए अपनी संतान को इस हालत में देखना किसी सदमे से कम नहीं था। माहिका की इस गंभीर स्थिति को देखते हुए आंगनबाड़ी कार्यकर्ता  माधुरी राजावत ने तुरंत मोर्चा संभाला। उन्होंने 19 जनवरी 2026 को माहिका को विशेष 'C-SAM' कार्यक्रम के तहत पंजीकृत किया और उस पर विशेष ध्यान देना शुरू किया। इस पूरी मुहिम में बड़ा बदलाव तब आया जब अप्रैल माह में आयोजित 8वें पोषण पखवाड़े के दौरान परियोजना अधिकारी डॉ. मनोज गुप्ता और सेक्टर पर्यवेक्षक  सुमन पांडे ने खुद इस मामले में गहरी रुचि ली। कार्यक्रम में आंगनबाड़ी टीम ने केंद्र पर आए हितग्राहियों को परामर्श देते हुए भोजन में मोटे अनाज, मौसमी सब्जियों, फलों और 'तिरंगा भोजन' के महत्व को समझाया। इसके साथ ही 6 माह से 2 वर्ष के बच्चों के लिए नियमित स्तनपान के साथ दिन में तीन से चार बार ऊपरी आहार देने की सलाह दी गई। इस आयोजन में माहिका की माँ मोना भी सम्मिलित हुईं और उन्होंने वहाँ दी गई हर सीख को गहराई से समझा। विभागीय अधिकारियों और आंगनबाड़ी कार्यकर्ता की टीम ने माहिका के घर जाकर गृहभेंट की और परिवार का हौसला बढ़ाया। आंगनबाड़ी केंद्र से मिली सीख को  मोना ने पूरी निष्ठा से अपने जीवन में लागू किया। उन्होंने आंगनबाड़ी से मिलने वाले टेक होम राशन (THR) का सही उपयोग कर अपनी बेटी के लिए नियमित रूप से पौष्टिक हलवा और खिचड़ी बनाना शुरू किया। पोषण के साथ माँ ने माहिका के मानसिक विकास पर भी ध्यान दिया, जिसके तहत उन्होंने बच्ची के साथ खेलना, उसे कविताएं सुनाना और स्वच्छता का विशेष ध्यान रखना प्रारंभ किया। सघन प्रयास के बाद प्रत्येक सप्ताह माहिका की ग्रोथ मॉनिटरिंग की जाने लगी, जिसके सुखद परिणाम अब सामने आ चुके हैं। विभागीय अधिकारियों के मार्गदर्शन और माँ की अथक मेहनत से वर्तमान में माहिका का वजन और लंबाई दोनों ही पूरी तरह से सामान्य श्रेणी में आ चुके हैं। मासूम माहिका के स्वास्थ्य में आया यह क्रांतिकारी सुधार देखकर उसके माता-पिता और पूरे परिवार की खुशी का ठिकाना नहीं है। आंगनबाड़ी दीदी की इस ममतामयी पहल और विभाग की मुस्तैदी ने यह साबित कर दिया है कि सही पोषण, सही देखभाल और निरंतर निगरानी से हर आंगन को खुशहाल बनाया जा सकता है।    

मुरैना के डायल-112 हीरोज कुएँ में गिरकर घायल हुए 45 वर्षीय व्यक्ति को पहुँचाया अस्पताल

भोपाल  मुरैना जिले के थाना कैलारस क्षेत्र में डायल-112 जवानों की तत्परता एवं मानवीय संवेदनशीलता से कुएँ में गिरकर घायल हुए 45 वर्षीय व्यक्ति को सुरक्षित बाहर निकालकर समय पर अस्पताल पहुँचाया गया। त्वरित सहायता के कारण घायल व्यक्ति को शीघ्र चिकित्सकीय उपचार उपलब्ध कराया जा सका। 16 जून को राज्य स्तरीय पुलिस कंट्रोल रूम डायल-112 भोपाल को सूचना प्राप्त हुई कि थाना कैलारस क्षेत्र अंतर्गत डोंगरपुर नरवुआ के पास एक व्यक्ति कुएँ में गिर गया है तथा उसे तत्काल पुलिस सहायता की आवश्यकता है। सूचना प्राप्त होते ही कैलारस थाना क्षेत्र में तैनात डायल-112 वाहन को तत्काल मौके के लिए रवाना किया या। डायल-112 स्टाफ आरक्षक  विजयपाल गुर्जर एवं पायलट  संतोषी ने मौके पर पहुंचकर पाया कि 45 वर्षीय व्यक्ति कुएँ में गिर जाने से गंभीर रूप से घायल हो गया था। डायल-112 जवानों ने त्वरित कार्यवाही करते हुए स्थानीय लोगों की सहायता से घायल व्यक्ति को सुरक्षित कुएँ से बाहर निकाला और एफआरव्ही वाहन से शासकीय अस्पताल कैलारस पहुँचाकर भर्ती कराया। डायल-112 की समयबद्ध एवं संवेदनशील कार्यवाही से घायल व्यक्ति को समय पर चिकित्सा सुविधा मिल सकी। डायल-112 हीरोज श्रृंखला की यह घटना दर्शाती है कि डायल-112 सेवा केवल आपातकालीन सहायता प्रदान करने तक सीमित नहीं है, बल्कि हर संकट की घड़ी में मानवीय संवेदनाओं के साथ नागरिकों की सुरक्षा एवं जीवन रक्षा के लिए निरंतर तत्पर है।