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मध्यप्रदेश विधानसभा का विशेष सत्र 17 दिसंबर को, ‘विकसित और आत्मनिर्भर मध्यप्रदेश’ के विज़न पर चर्चा

विकसित, आत्मनिर्भर और समृद्ध मध्यप्रदेश के विज़न पर मध्यप्रदेश विधानसभा का एक दिवसीय विशेष सत्र 17 दिसम्बर को राज्यपाल पटेल करेंगे विधानसभा की सात दशक की यात्रा एवं मध्यप्रदेश सरकार के दो वर्ष के कार्यों पर केन्द्रित प्रदर्शनी का शुभारंभ भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में राज्य सरकार की दो वर्ष की ऐतिहासिक उपलब्ध‍ियों पर विधान सभा का एक दिवसीय विशेष सत्र 17 दिसम्बर को आयोजित किया जा रहा है। इस अवसर पर विधानसभा में मध्यप्रदेश विधानसभा की 7 दशक की यात्रा एवं मध्‍यप्रदेश सरकार के दो वर्ष के कार्यों पर केन्द्रित विशेष प्रदर्शनी भी लगाई जा रही है, जिसका शुभारंभ राज्यपाल मंगुभाई पटेल करेंगे। विधानसभा अध्यक्ष नरेन्द्र सिंह तोमर ने बताया कि 17 दिसंबर का दिन मध्यप्रदेश विधानसभा के इतिहास में महत्वपूर्ण है। इसी दिन मध्यप्रदेश विधानसभा की प्रथम बैठक हुई थी। इस विशेष सत्र में सभी सदस्य विकसित मध्यप्रदेश के विजन को धरातल पर उतारने के लिए क्या कदम उठाना चाहिए इस पर अपने विचार व्यक्त करेंगे। तोमर ने कहा कि आज हमारा प्रदेश विकासशील राज्यों में गिना जाता है। हम सक्षम हैं, अनेक क्षेत्रों में प्रदेश ने नए कीर्तिमान स्थापित किए हैं। लेकिन आने वाले कल में हम विकसित मध्यप्रदेश के निर्माण का लक्ष्य रखते हैं। इसलिए हमारी पीढ़ी का यह दायित्व है कि इस दिशा में हम चिंतन भी करें और सटीक कदम भी उठाएं। राज्‍य पुर्नगठन आयोग की अनुशंसा पर 1 नवम्‍बर, 1956 को मध्‍यप्रदेश राज्‍य का गठन हुआ था। मध्‍यप्रदेश विधान सभा के प्रथम सत्र की अवधि 17 दिसम्‍बर, 1956 से 17 जनवरी, 1957 थी, सत्र की पहली बैठक 17 दिसंबर 1956 को आहूत हुई थी। तब से अब तक 16 विधानसभा गठित हो चुकी हैं। वर्तमान में 16 वीं विधानसभा कार्यरत है। प्रदेश के विकास एवं आमजन के कल्याण में मध्यप्रदेश विधानसभा एवं सदस्यों का सदैव सक्रिय योगदान एवं भूमिका रही है। प्रथम विधानसभा से अब तक विधानसभा के 19 अध्यक्ष आसंदी पर रहे हैं। 17 दिसंबर 2025 को आहूत एक दिवसीय विशेष सत्र में मध्यप्रदेश को विकसित, आत्मनिर्भर और समृद्ध बनाने पर चर्चा होगी। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में संपूर्ण राष्ट्र “विकसित भारत” के संकल्प की सिद्धी की ओर अग्रसर है। विकसित भारत के लिए विकसित मध्यप्रदेश आवश्यक है और इसमें विधायिका की अपनी भूमिका और दायित्व है। प्रदेश को विकसित, आत्मनिर्भर और समृद्ध बनाने के इसी विज़न पर सदन में चर्चा होगी। 17 दिसंबर को प्रातः 10.00 बजे राज्यपाल मंगुभाई पटेल विधानसभा परिसर में विधानसभा की 7 दशक की यात्रा पर चित्र प्रदर्शनी का शुभारंभ करेंगे। इस ऐतिहासिक चित्र प्रदर्शनी मे 136 चित्र लगाये गये है। इसमें कुछ दुर्लभ चित्र भी सम्मिलित हैं। ये चित्र प्रथम विधानसभा से वर्तमान सोलहवीं विधानसभा के विभिन्न महत्वपूर्ण अवसरों के हैं। यह प्रदर्शनी विशेषकर विद्यार्थियों के साथ विशिष्‍ष्‍ट जनों एवं आम नागारिकों के लिए भी खुली रहेगी, 18 से 25 दिसंबर के बीच विधानसभा में प्रवेश पत्र बनवा कर प्रदर्शनी देख सकते हैं। प्रवेश पत्र के लिए आधार कार्ड/विद्यालय/महाविद्यालय का परिचय पत्र भी लाना आवश्यक रहेगा। इस प्रदर्शनी के साथ मध्यप्रदेश सरकार के विकास कार्यों के भी छाया चित्र लगाए गए है, जिसमें प्रदेश सरकार के 2 वर्ष के कामकाज का लेखा−जोखा रखा गया है। यह ऐतिहासिक प्रदर्शनी मध्यप्रदेश के 5 हजार से अधिक जनप्रतिनिधियों के योगदान को भी याद कराती है। इस अवसर पर विधानसभा अध्यक्ष नरेन्द्र सिंह तोमर, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार, मंत्रिगण, सदस्यगण, पूर्व विधायक एवं अन्य गणमान्य जन उपास्थित रहेंगे।  

यातायात में क्रांति: MP में 460 करोड़ से 7 ब्रिज-बायपास का निर्माण, जाम होगा खत्म

मुरैना  मुरैना शहर सहित अंबाह, पोरसा कस्बों में भारी यातायात और ट्रैफिक जाम की समस्या से निजात पाने के लिए 460 करोड़ रुपए की लागत से 7 पुल और 27 किमी लंबे तीन बायपास एनएचएआई बनवा रही है। मुरैना-भिंड राष्ट्रीय राजमार्ग (Morena-Bhind Highway NH-552) पर निर्माणाधीन 6.6 किमी लंबे अंबाह बायपास का करीब 75 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है। बायपास के चालू होते ही भारी वाहनो का बड़ा हिस्सा शहर में प्रवेश किए बिना बाहर से ही गुजर जाएगा, जिससे बाजार, स्कूल-कॉलेज क्षेत्र और प्रमुख चौराहों पर जाम व दुर्घटनाओ में कमी आएगी। (mp news) ट्रैफिक दबाव घटेगा लोनिवि के अनुसार निर्माण कार्य निर्धारित समय से तेज गति से चल रहा है और लक्ष्य रखा गया है कि अगस्त-सितंबर 2026 तक बायपास को पूरी तरह यातायात के लिए खोल दिया जाए। शहरवासी इसे सुरक्षित आवागमन और विकास की दिशा में एक अहम उपलब्धि मान रहे है। बायपास शुरू होने से शहरों में ट्रैफिक दबाव घटेगा और आमजन को सुगम आवागमन मिलेगा।   संरचना लगभग तैयार, फिनिशिंग कार्य जारी बायपास निर्माण का ढांचा अब स्पष्ट दिखाई देने लगा है। मिट्टी भराई, लेवलिंग, सबग्रेड, जीएसबी और डीबीएम की अधिकांश परते तैयार हो चुकी है। कई स्थानों पर पुलिया और कलवर्ट बनकर तैयार है। डायवर्सन पर खतरे, 90 डिग्री मोड़ बने चिंता एक ओर बायपास निर्माण (Bypaas Road) से राहत की उम्मीद है, वहीं दूसरी ओर निर्माणाधीन पुलों के नीचे बनाए गए डायवर्सन यात्रियों के लिए परेशानी का सबब बन रहे हैं। कई स्थानों पर डायवर्सन 90 डिग्री के तीखे मोड़ पर बने हैं, जिससे आमने-सामने से वाहनों के टकराने की स्थिति बन रही है। धूल का गुबार इतना अधिक है कि चार पहिया वाहनों को दिन में भी हेडलाइट जलानी पड़ रही है। नियमों के अनुसार धूल नियंत्रण के लिए लगातार पानी का छिड़‌काव होना चाहिए, लेकिन अधिकांश स्थानों पर यह नहीं किया जा रहा है।   आवश्यक निर्देश दिए बायपास के पूर्ण होने के बाद शहर को ट्रैफिक जाम की समस्या से राहत मिलेगी। निर्माण कार्य में यदि कहीं भी कोई अनियमितता सामने आती है, तो संबंधित इंजीनियर और ठेकेदार को आवश्यक निर्देश दिए जा रहे हैं। – रामनिवास सिकरवार, एसडीएम अंबाह अंबाह बायपास की तेज रफ्तार एनएच-552 पर मुरैना, अंबाह और पोरसा में करीब 27 किमी लंबे तीन बायपास और 7 पुलों का निर्माणपूरी परियोजना पर लगभग 460 करोड़ रुपए खर्च। तीनों बायपास में अंबाह बायपास की प्रगति सबसे तेज है। इंजीनियरों के मुताबिक समतल भू-भाग और भूमि उपलब्धता में कम अड्चन आने से यहां काम में आई तेजी।   

नए साल पर रेलवे का बड़ा फैसला: 25 ट्रेनों की टाइमिंग बदली, देखें नई सूची

भोपाल  भारतीय रेलवे नए साल यानी 1 जनवरी 2026 से ट्रेनों के समय में बड़ा बदलाव करने जा रहा है। जिसमें भोपाल रेल मंडल की कुल 25 ट्रेनों के समय में बदलाव किया जाएगा, जिससे कई ट्रेनों के मार्ग और गति में बदलाव देखने को मिलेगा। यात्रियों की सुविधा के लिए रेलवे ने पहले से ही समय-सारणी जारी कर दी है। देखें ये है टाइम टेबल 12185 रानी कमलापति–रीवा एक्सप्रेस पहले रात 10:00 बजे प्रस्थान करती थी, अब रात 9:55 बजे करेगी। 22145 भोपाल–रीवा एक्सप्रेस पहले 11:05 PM बजे रात में प्रस्थान करती थी अब 11:00 PM पर करेगी 19324 भोपाल–डॉ. अंबेडकर नगर एक्सप्रेस पहले 5:00 PM और अब 5:10 PM 14814 भोपाल–जोधपुर एक्सप्रेस पहले: 4:55 PM अब 4:40 PM 12197 भोपाल–ग्वालियर एक्सप्रेस पहले 3:15 PM अब: 3:10 PM 19712 भोपाल–जयपुर एक्सप्रेस पहले 4:35 PM अब 4:30 PM 22172 रानी कमलापति–पुणे एक्सप्रेस पहले 3:50 PM अब 3:40 PM 01665 रानी कमलापति–अगरतल्ला स्पेशल पहले 3:40 PM अब 3:20 PM गंतव्य स्टेशन पर पहुंचने का भी समय बदला 12185 रानी कमलापति–रीवा पहले 8:00 AM अब 7:55 AM 11272 भोपाल–इटारसी पहले 12:30 PM अब: 1:15 PM 11602 कटनी–बीना पहले 7:05 PM अब: 8:00 PM 18236 बिलासपुर–भोपाल पहले 5:18 PM अब 5:00 PM 51884 ग्वालियर–बीना पहले 4:25 PM अब: 4:20 PM 11603 कोटा–बीना पहले 4:55 PM अब 4:50 PM इटारसी स्टेशन और अन्य मध्यवर्ती स्टेशनों में समय में बदलाव 18234 बिलासपुर–इंदौर पहले 1:25 AM / 1:40 AM और अब 1:35 AM / 1:40 AM 12577 दरभंगा–मैसूर पहले 12:35 PM / 12:45 PM और अब 12:20 PM / 12:30 PM 22351 सहरसा–बेंगलुरु पहले 12:35 PM / 12:45 PM और अब 12:20 PM / 12:30 PM 22353 पटना–बेंगलुरु पहले 12:35 PM / 12:45 PM और अब 12:20 PM / 12:30 PM 22642 निजामुद्दीन–कन्याकुमारी पहले 12:35 PM / 12:45 PM और अब 12:20 PM / 12:30 PM   संत हिरदाराम नगर स्टेशन से जाने वाली ट्रेनों में बदलाव 17606 भगत की कोठी–कचीगुड़ा पहले 4:30 PM / 4:35 PM और 4:25 PM / 4:30 PM 18234 बिलासपुर–इंदौर पहले 4:28 AM / 4:30 AM और 4:53 AM / 4:55 AM 19339 दाहोद–भोपाल पहले 3:20 PM / 3:22 PM और 3:30 PM / 3:32 PM बीना स्टेशन 12185 रानी कमलापति–रीवा, पहले 12:30 AM / 12:35 AM और अब: 12:25 AM / 12:30 AM रूठियाई स्टेशन 14814 भोपाल–जोधपुर, पहले: 11:15 PM / 11:20 PM और अब 11:25 PM / 11:30 PM  

तानसेन समारोह-2025: विश्वविख्यात संगीतज्ञ पं. राजा काले एवं पं. तरुण भट्टाचार्य तानसेन अलंकरण से विभूषित

तानसेन समारोह-2025 कला व संस्कृति के संरक्षण के साथ प्रदेश सरकार विकास पथ पर अग्रसर : मुख्यमंत्री डॉ. यादव विश्वविख्यात संगीतज्ञ पं. राजा काले एवं पं. तरुण भट्टाचार्य तानसेन अलंकरण से विभूषित साधना परमार्थिक संस्थान समिति मण्डलेश्वर एवं रागायन संगीत समिति ग्वालियर को मिला राजा मानसिंह तोमर सम्मान मुख्यमंत्री डॉ. यादव के वर्चुअल मुख्य आतिथ्य में 101वे तानसेन संगीत समारोह का भव्य शुभारंभ मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा भारतीय शास्त्रीय संगीत के शिखर पुरुष थे तानसेन संस्कृति मंत्री लोधी ने की कार्यक्रम की अध्यक्षता एवं ऊर्जा मंत्री तोमर बतौर विशिष्ट अतिथि हुए शामिल ग्वालियर संगीतधानी ग्वालियर में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के वर्चुअल मुख्य आतिथ्य में आयोजित हुए तानसेन समारोह में शास्त्रीय संगीत के प्रख्यात गायक पं. राजा काले मुम्बई को वर्ष 2024 एवं विश्व विख्यात संतूर वादक पं. तरुण भट्टाचार्य कोलकाता को वर्ष 2025 के तानसेन अलंकरण से विभूषित किया गया। इसी तरह मण्डलेश्वर की साधना परमार्थिक संस्थान समिति को वर्ष 2024 एवं ग्वालियर की रागायन संगीत समिति को वर्ष 2025 के राजा मानसिंह तोमर सम्मान से अलंकृत किया गया। साधना परमार्थिक संस्था की ओर से श्रीमती प्रेरणा कोल्हटकर एवं रागायन संस्था की ओर से महंत रामसेवकदास जी महाराज ने सम्मान प्राप्त किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सभी सम्मानित मूर्धन्य संगीत साधकों को बधाई एवं शुभकामनायें दीं। साथ ही कहा कि मध्यप्रदेश सरकार कला, संस्कृति का संरक्षण करते हुए विकास के पथ पर अग्रसर है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में मध्यप्रदेश में सांस्कृतिक अभ्युदय हो रहा है। ऐतिहासिक ग्वालियर दुर्ग से पूरी दुनिया को शून्य का परिचय करा रहे “चतुर्भुज मंदिर” की थीम पर तानसेन समाधि परिसर में बने भव्य एवं आकर्षक मंच पर सोमवार की सांध्य बेला में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के वर्चुअल मुख्य आतिथ्य में शास्त्रीय संगीत के क्षेत्र में देश एवं दुनिया के सर्वाधिक प्रतिष्ठित महोत्सव तानसेन समारोह का भव्य शुभारंभ हुआ। समारोह की अध्यक्षता संस्कृति, पर्यटन, धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) धर्मेन्द्र सिंह लोधी ने की। ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर एवं विधायक मोहन सिंह राठौर बतौर विशिष्ट अतिथि मंचासीन थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने शुभारंभ समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि संगीत की नगरी ग्वालियर में आयोजित होने वाला तानसेन संगीत समारोह प्रदेश व देश का सबसे प्रतिष्ठित समारोह है। संगीत सम्राट तानसेन भारतीय शास्त्रीय संगीत के शिखर पुरुष थे। तानसेन की सुर और तान ने ग्वालियर को दुनिया में अलग पहचान दिलाई। गान महिर्षि तानसेन ने अपने गुरू स्वामी हरिदास जी के साधिन्य में संगीत की बारीकियां सीखकर ध्रुपद गायिकी सहित शास्त्रीय संगीत को नए आयाम दिए। तानसेन की ख्याति ऐसी थी कि उन्हें अकबर ने अपने नवरत्नों में शामिल किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि वैदिक काल से शास्त्रीय संगीत हमारे जीवन और संस्कृति का हिस्सा रहा है। सामवेद इसका साक्षी है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में मध्यप्रदेश में कला व संस्कृति को नए आयाम मिल रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत अपनी अद्वितीय छाप छोड़ रहा है। आज पूरी दुनिया भारत की ओर देख रही है। वैभवशाली सांस्कृतिक परंपरा की सतत यात्रा है तानसेन समारोह – संस्कृति मंत्री लोधी संस्कृति एवं पर्यटन राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) धर्मेन्द्र सिंह लोधी ने कहा कि तानसेन समारोह उस वैभवशाली सांस्कृतिक परंपरा की सतत यात्रा है, जिसमें पिछले 101 वर्षों से संगीत की आत्मा, रागों की अनुभूति और स्वर की साधना एक सामूहिक तपस्या बनकर प्रवाहमान हो रही है। यह समारोह हमें याद दिलाता है कि संगीत हमारी परंपरा, हमारी जड़ों व हमारी आत्मा का संवाद है। उन्होंने कहा हमारे लिए खुशी की बात है कि ग्वालियर की पुण्य धरा पर आयोजित तानसेन समारोह में आने का अवसर मिला है। तानसेन महोत्सव में जब संगीत के सुर गूंजते हैं तब हम केवल आनंदित ही नहीं होते बल्कि हमें भारतीयता, विवेक और आध्यात्मिक शक्ति का आभास भी होता है। उन्होंने यह भी कहा कि ऐसी मान्यता है कि स्वर ही ब्रम्ह है और ब्रम्ह ही सत्य है। इसी सत्य को तानसेन ने अपने जीवन, तप और संगीत के स्वरों में मूर्तरूप प्रदान किया। मंत्री लोधी ने इस अवसर पर तानसेन अलंकरण व राजा मानसिंह तोमर सम्मान से विभूषित साधकों का मध्यप्रदेश सरकार की ओर से हार्दिक स्वागत व अभिनंदन कर उन्हें बधाई दी। ग्वालियरवासियों के लिये आज गौरव का दिन : ऊर्जा मंत्री तोमर ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने कहा कि ग्वालियरवासियों के लिये आज गौरव का दिन है। खुशी की बात है कि ग्वालियर की धरा पर देश व दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित समारोहों में से एक तानसेन समारोह का आयोजन हो रहा है। उन्होंने सम्मानित कलाकारों का अभिनंदन किया और बधाई दी। कार्यक्रम में विधायक मोहन सिंह राठौर ने भी विचार व्यक्त किए। तानसेन अलंकरण से विभूषित प्रख्यात शास्त्रीय गायक पं. राजा काले ने ग्वालियर घराने के मूर्धन्य संगीतज्ञ एवं अपने गुरू राजा भैया पूछवाले को याद किया। साथ ही ग्वालियर घराने की भाव सौंदर्य युक्त गायिकी को यह सम्मान समर्पित किया। उन्होंने तानसेन अलंकरण प्रदान करने के लिये मध्यप्रदेश सरकार के प्रति आभार भी जताया। इनकी रही मौजूदगी शुभारंभ समारोह में अतिरिक्त मुख्य सचिव एवं प्रमुख सचिव संस्कृति शिवशेखर शुक्ला भी शामिल हुए। यहां मुख्य मंच पर संभाग आयुक्त मनोज खत्री, कलेक्टर श्रीमती रुचिका चौहान, नगर निगम आयुक्त संघ प्रिय, संस्कृति संचालक एन पी नामदेव व उस्ताद अलाउद्दीन खाँ संगीत, कला अकादमी प्रकाश सिंह ठाकुर एवं दीपक शर्मा मंचासीन थे। सम्मान राशि, प्रशस्ति पत्र व शॉल-श्रीफल भेंट कर किया सम्मान राष्ट्रीय तानसेन अलंकरण के रूप में ब्रम्हनाद के दोनों शीर्षस्थ साधकों को आयकर मुक्त पाँच – पाँच लाख रूपए की सम्मान राशि, प्रशस्ति पट्टिका व शॉल-श्रीफल भेंट किए गए। मध्यप्रदेश सरकार द्वारा संगीत सम्राट तानसेन के नाम से स्थापित यह सम्मान भारतीय शास्त्रीय संगीत के क्षेत्र में सर्वोच्च राष्ट्रीय संगीत सम्मान है। इसी तरह संगीत एवं कला के संरक्षण व संवर्धन के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य कर रहीं दोनों संस्थाओं को भी पाँच – पाँच लाख रूपए की सम्मान राशि, प्रशस्ति पट्टिका व शॉल-श्रीफल भेंट कर सम्मानित किया गया। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की वर्चुअल मौजूदगी में आरंभ में अतिथियों ने दीप प्रज्ज्वलन कर इस साल के तानसेन समारोह का शुभारंभ किया। कलाकारों के सम्मान में प्रशस्ति वाचन संस्कृति संचालक एन पी नामदेव ने किया। अंत में निदेशक अलाउद्दीन खाँ … Read more

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा- नक्सल-मुक्त मध्यप्रदेश, अब विकास को मिलेगी नई रफ्तार

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश ने लगभग 35 साल नक्सलवाद का दंश झेला। यह एक बड़ी चुनौती थी, पर राज्य सरकार की पुनर्वास नीति और नक्सल विरोधी अभियान में शामिल जवानों की प्रतिबद्धता से 11 दिसंबर 2025 को नक्सलवाद प्रदेश के नक्शे से पूरी तरह मिटा दिया गया। यह दिन प्रदेश में एक स्वर्णिम अध्याय के रूप में लिखा जाएगा। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह के मार्गदर्शन में मध्यप्रदेश की धरती से नक्सलवाद को समूल खत्म करना हमारी सरकार की सबसे बड़ी उपलब्धि है। नक्सलवाद और लाल आतंक देश के हर हिस्से में विकास आधारित गतिविधियों में बाधक था। इससे आम नागरिकों में इसके कारण भय का माहौल होता था। ऐसे में नक्सलियों और नक्सलवाद को जड़ से उखाड़ फेंकना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता रही। पुलिस के अधिकारी-कर्मचारियों ने बालाघाट में अंतिम दो नक्सलियों का आत्मसमर्पण कराया और मध्यप्रदेश ने लाल सलाम को आखिरी सलाम कर दिया। अब इससे प्रभावित क्षेत्रों में विकास को एक नई दिशा और एक नई रफ्तार मिलेगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य में विकास को गति देने के लिए मध्यप्रदेश में दशकों से चली आ रही नक्सलवाद की समस्या से खत्म करना अति आवश्यक था। मध्यप्रदेश ने केंद्रीय गृह मंत्री श्री शाह द्वारा देश से नक्सलवाद के खात्मे के लिए तय डेडलाइन से करीब साढ़े तीन महीने पहले ही यह ऐतिहासिल उपलब्धि हासिल कर ली है। नक्सलवादियों के एमएमसी जोन (महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश एवं छत्तीसगढ़) में 42 दिन में 42 नक्सलवादियों ने समर्पण कर विकास की धारा से जुड़ना स्वीकार किया है। वहीं, प्रदेश में वर्ष 2025 में 10 हार्डकोर माओवादियों को मुठभेड़ में ढेर कर दिया गया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इस सफलता का श्रेय राज्य के बहादुर पुलिस अधिकारी और केंद्रीय सुरक्षाबलों को दिया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हमारी सरकार ने आत्मसमर्पण करने वाले सभी नक्सलियों के पुनर्वास के लिए विशेष योजना बनाई है। साथ ही प्रदेश में अब एक ऐसा तंत्र भी विकसित किया जाएगा, जिससे दोबारा मध्यप्रदेश की धरती पर नक्सलवादी या अन्य अतिवादी मूवमेंट खड़े न हो पाएं। इसके लिए सभी पड़ोसी राज्यों के साथ भी जरूरी समन्वय किया जा रहा है। उल्लेखनीय है कि मध्यप्रदेश में वर्ष 1988-90 से नक्सली गतिविधियों की शुरुआत हुई थी। नक्सलियों ने आम नागरिकों को डरा-धमकाकर परेशान किया और सरकार के विकास कार्यों में भी रुकावटें डालीं। नक्सली पुलिस की बसों को भी आग के हवाले कर देते थे। नक्सलियों ने विपक्षी दल की सरकार में मंत्री रहे श्री लिखीराम कावरे की बालाघाट जिले में उनके घर से निकालकर सरेआम हत्या कर दी थी। प्रदेश में 35 सालों के लंबे समय तक नक्सलियों से संघर्ष जारी रहा, जिसमें कई आम नागरिक और पुलिस व सुरक्षाबलों के जवानों को अपने प्राण गंवाने पड़े। नक्सलवाद उन्मूलन अभियान के कुछ प्रमुख तथ्य     मध्यप्रदेश में वर्ष 1988 से 1990 के बीच नक्सल गतिविधियों की शुरुआत हुई थी। प्रदेश में मंडला, डिंडौरी और बालाघाट नक्सल प्रभावित जिले रहे।     राज्य सरकार ने नक्सल प्रभावित जिले बालाघाट, मंडला और डिंडौरी के लिए विशेष सहयोगी  दस्ते के 850 पद स्वीकृत किए।     नक्सलियों को हथियार डालकर जीवन से जुड़ने का अवसर देने के लिए राज्य सरकार ने 'पुनर्वास  से पुनर्जीवन' अभियान प्रारंभ किया।     सरकार की इसी पुनर्वास नीति से प्रभावित होकर दिसंबर 2025 में करीब 2.36 करोड़ रुपए की इनामी राशि वाले 10 नक्सलियों ने पुलिस लाईन, बालाघाट में सरेंडर कर दिया।     11 दिसंबर 2025 को मध्यप्रदेश ने 35 वर्षों से चले आ रहे लाल आतंक को समाप्त कर नक्सल मुक्त बनने की ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की।     वर्ष 2025 में नक्सल विरोधी अभियानों में 16 मुठभेड़ों/एक्सचेंज ऑफ फायर में 13 हार्डकोर नक्सली मारे गए और एक की गिरफ्तारी हुई।     जून 2025 में बालाघाट में हुई मुठभेड़ में 4 नक्सली मारे गए, इनमें 3 महिलाएं शामिल थीं। इनके  कब्जे से ऑटोमैटिक हथियार और भारी मात्रा में गोला-बारूद भी बरामद किया गया।     मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बालाघाट पहुंचकर नक्सलियों का खात्मा करने वाले पुलिस के सिपाहियों और अधिकारियों को पदोन्नति देकर सम्मानित किया।     नक्सल विरोधी अभियान में राज्य पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा बलों के जवानों ने अदम्य साहस और वीरता का प्रदर्शन कर नक्सलवाद की दशकों से चली आ रही समस्या का सफाया कर दिया।  

इनकम टैक्स रिटर्न भरने का अलर्ट: डेडलाइन मिस की तो देना होगा जुर्माना

भोपाल  वित्तीय वर्ष 2024-25 के लिए आयकर रिटर्न भरने में जो लोग चूक गए है, उनके लिए 31 दिसंबर आखिरी मौका है। आइटीआर में गलती हो गई है तो इसे सुधारा जा सकता है। इस तारीख तक ब्याज और लेट फीस के साथ विवरणी प्रस्तुत की जा सकती है। इसके बाद 25 प्रतिशत अतिरिक्त कर के साथ ही करदाता आयकर विवरणी प्रस्तुत कर पाएंगे। आयकर नियमों के अनुसार जो करदाता पूर्व में आयकर विवरणी प्रस्तुत नहीं कर पाए है वह इस तारीख तक ब्याज एवं लेट फीस के साथ विवरणी प्रस्तुत कर सकते है। 31 दिसंबर है आखिरी तारीख विभाग द्वारा करदाताओं को मैसेज और ईमेल के द्वारा भी विवरणी प्रस्तुत करने के लिए बताया जा रहा है। साथ ही जिन करदाताओं के बड़े वित्तीय लेनदेन किए है उनकी जानकारी विभाग के पास है। ऐसे करदाताओं को भी विवरणी प्रस्तुत करने के लिए सूचना दी जा रही है। इस बारे में टैक्स ला बार एसोसिएशन, भोपाल के अध्यक्ष एडवोकेट मृदुल आर्य बताते है कि पूर्व में 31 मार्च तक आयकर विवरणी प्रस्तुत की जा सकती थी परंतु अब सरकार ने इसे 31 दिसंबर तक सीमित कर दिया है।   टैक्सपेयर्स को भेजे जा रहे है मैसेज साथ ही जिन टैक्सपेयर्स ने फर्जी कटौती और छूट के लिए दावे किए हैं, उनसे अपने आईटीआर अपडेट करने की अपील की गई है। इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने इस सिलसिले में गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों और धर्मार्थ संस्थानों से संबंधित गलत दावों के लिए टैक्सपेयर्स को टेक्स्ट मैसेज और ईमेल के जरिए आगाह करना शुरू कर दिया है। रुक सकता है रिफंड आयकर नियमों के अनुसार, आप अपना रिटर्न आसानी से भर सकते हैं। हालांकि, हर रिटर्न को दोबारा फाइल नहीं किया जा सकता इसलिए नियमों को समझना बेहद जरूरी है, वरना आपका रिफंड रुक सकता है और जुर्माना भी लग सकता है।  

केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के आगमन को लेकर सुरक्षा सख्त, 25 दिसंबर को कई मार्ग बंद

ग्वालियर  केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के प्रस्तावित ग्वालियर दौरे को लेकर जिला प्रशासन और पुलिस महकमे ने व्यापक सुरक्षा व यातायात व्यवस्था की रूपरेखा तैयार कर ली है। 25 दिसंबर को प्रस्तावित इस वीआईपी विजिट के दौरान शहर में चाक चौबंद सुरक्षा व्यवस्था रहेगी और कई प्रमुख मार्गो पर यातायात डायवर्ट किया जाएगा। हालांकि, केंद्रीय गृहमंत्रालय से अभी औपचारिक कार्यक्रम जारी होना शेष है, लेकिन प्रशासनिक स्तर पर तैयारियां तेज कर दी गई हैं। जानकारी के अनुसार केंद्रीय गृहमंत्री वायुसेना के विशेष विमान से ग्वालियर एयरबेस पर पहुंचेंगे और वहां से सीधे मेला मैदान में आयोजित कार्यक्रम में शामिल होंगे। एयरबेस से कार्यक्रम स्थल तक पूरे मार्ग पर जमीन से लेकर हाइराइज इमारतों तक सुरक्षा निगरानी की जाएगी। गृहमंत्री के आगमन से पहले शहर में भारी वाहनों के प्रवेश पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा। यह रहेगा वीआईपी रूट एयरबेस से निकलने के बाद वीआईपी काफिला एयरपोर्ट तिराहा, दीनदयालनगर, पिंटो पार्क, गोला का मंदिर, दूध डेयरी, भाऊसाहब पोतनीस एनक्लेव के सामने से होते हुए मेला मैदान पहुंचेगा।   -भिंड से ग्वालियर आने वाले वाहन बरेठा चौकी, बड़ागांव, हुरावली मार्ग से शहर में प्रवेश करेंगे। -मुरैना से आने वाला यातायात चार शहर का नाका से शहर में प्रवेश करेगा और वापसी भी इसी मार्ग से होगी। -मुरार से भिंड जाने वाले वाहन सात नंबर चौराहा, बरेठा चौकी मार्ग का उपयोग करेंगे। -वीआईपी विजिट के दौरान गोला का मंदिर चौराहा, सात नंबर चौराहा और सूर्य नमस्कार तिराहा से मेला मैदान की ओर जाने वाले मार्ग पर सामान्य वाहनों का प्रवेश प्रतिबंधित रहेगा। सीएम विजिट की तैयारी, डायवर्ट होगा यातायात शहर में तानसेन समारोह में शामिल लिए डा.मोहन यादव सोमवार को ग्वालियर आ सकते हैं। उनके प्रवास को देखते हुए शहर की यातायात व्यवस्था को बदला गया है। यातायात पुलिस अधिकारियों का कहना है सीएम डॉ. मोहन यादव के शहर आगमन के दौरान भारी वाहनों की शहर में एंट्री बंद रहेगी। -रेलवे स्टेशन से हजीरा जाने वाले वाहन तानसेन रोड से नए आरओबी होकर रेसकोर्स रोड से गोला का मंदिर के रास्ते जाएंगे। -पुरानी छावनी से रेलवे स्टेशन आने वाले संजयनगर पुल से बिरलानगर होकर रेलवे स्टेशन आएंगे। -चार शहर का नाका से हजीरा आने वाले वाहन घोड़ा चौक होकर आएंगे। घासमंडी, किलागेट से हजीरा जाने वाले वाहन सेवानगर, रमटापुरा पुल, तानसेन नगर से लोको होकर जाएंगे। सेवानगर, किलागेट से हजीरा से मल्लगढ़ा जाने के लिए किलागेट से वाहन बाबा कपूर, काशीनरेश की गली से सागरताल होकर जाएंगे।  

मुख्यमंत्री डॉ. यादव 17 दिसम्बर को करेंगे मेले का शुभारंभ

"समृद्ध वन खुशहाल जन थीम पर होगा मेला 200 आयुर्वेदिक चिकित्सक एवं विशेषज्ञ देंगे नि:शुल्क चिकित्सा परामर्श मेले में होंगे 350 स्टॉल भोपाल  अंतर्राष्ट्रीय वन मेला अपने आप में एक अनूठा आयोजन है। मेले में लघु वनोपज एवं औषधीय पौधों के क्षेत्र की गतिविधियों, उत्पादों एवं अवसरों को प्रदर्शित करने एवं इससे जुड़े संग्राहकों, उत्पादकों, व्यापारियों, उद्यमियों, वैज्ञानिकों, प्रशासकों और नीति निर्धारकों के बीच संवाद स्थापित करने के लिये व्यापक मंच उपलब्ध होता है। वन राज्य मंत्री श्री दिलीप सिंह अहिरवार पलाश होटल में वन मेले की पत्रकार वार्ता को संबोधित कर रहे थे। वन मंत्री श्री अहिरवार ने बताया कि मेले का शुभारंभ 17 दिसम्बर को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव करेंगे। उन्होंने कहा कि 'समृद्ध वन खुशहाल वन' की थीम पर अंतर्राष्ट्रीय वन मेला 17 से 23 दिसम्बर तक लाल परेड मैदान में लगेगा। मेले में 350 स्टॉल लगाये जा रहे हैं। मेले में प्रदेश के जिला यूनियन, वन, वन धन केन्द्र, जड़ी-बूटी संग्राहक, उत्पादक, आयुर्वेदिक औषधि निर्माता, परम्परागत भोजन सामग्री के निर्माता एवं विक्रेतागण अपने उत्पादों का प्रदर्शन और विक्रय करेंगे। मेले में 10 शासकीय स्टॉल, 24 अन्य राज्यों के स्टॉल, 16 प्रदर्शनी के स्टॉल, 136 प्रायवेट स्टॉल, 26 फूड स्टॉल, जिनमें अलीराजपुर का दालपुनिया, बाँधवगढ़ की गोंडी व्यंजन का स्वाद मिलेगा। इसके अलावा 50 ओपीडी स्टॉल और एक किड्स जोन भी होगा। वन मंत्री श्री अहिरवार ने कहा कि 200 आयुर्वेदिक पद्धति के चिकित्सकों एवं विशेषज्ञों द्वारा मेले में नि:शुल्क चिकित्सीय परामर्श प्रदान किया जायेगा। उन्होंने बताया कि मेले में सांस्कृतिक कार्यक्रमों के आयोजन में ऑर्केस्ट्रा, नुक्कड़ नाटक, लोक नृत्य, स्कूली छात्र-छात्राओं के लिये चित्रकला, फैंसी ड्रेस और गायन के कार्यक्रम होंगे। इसके अलावा 17 दिसम्बर को शाम परम्परागत नृत्य डिण्डोरी की प्रस्तुति, 18 दिसम्बर की शाम ऑर्केस्ट्रा अंचल शर्मा ग्रुप की प्रस्तुति, 19 दिसम्बर की शाम विरासत सूफी की म्यूजिकल प्रस्तुति, 20 दिसम्बर को एक शाम वन विभाग के नाम (फॉरेस्ट मेलोडी) द्वारा सरगम म्यूजिकल ग्रुप, 21 दिसम्बर की शाम ख्याति प्राप्त सिंगर श्री नीरज श्रीधर, बॉम्बे वाइकिंग्स की म्यूजिकल प्रस्तुति, 22 दिसम्बर की शाम मानसरोवर द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रम और 23 दिसम्बर की शाम परम्परागत नृत्य, झाबुआ की प्रस्तुति होगी। वन मंत्री श्री अहिरवार ने बताया कि वन मेले में 19 एवं 20 दिसम्बर को अंतर्राष्ट्रीय कार्यशाला का भी आयोजन किया जायेगा। इसमें देश के 17, नेपाल के 2 एवं भूटान के एक प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं। कार्यशाला आईआईएफएम के समन्वय से आयोजित होगी। इस अवसर पर अपर मुख्य सचिव वन श्री अशोक बर्णवाल, प्रधान मुख्य वन संरक्षक श्री व्ही.एन. अम्बाडे और प्रबंध संचालक राज्य वनोपज संघ डॉ. समिता राजौरा उपस्थित रहे। 

17 दिसंबर को विधानसभा का विशेष सत्र, स्पीकर बोले- सदस्य विकास के मुद्दे पर करेंगे चर्चा, कांग्रेस ने बुलाई विधायक दल की बैठक

भोपाल मध्य प्रदेश विधानसभा का एक दिवसीय विशेष सत्र 17 दिसंबर को होगा। विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा- 17 दिसंबर को पहली विधानसभा हुई थी इस अवसर पर इस बार विशेष सत्र का आयोजन किया जाएगा।सभी सदस्य विकसित मध्यप्रदेश पर चर्चा करेंगे। विकसित मध्यप्रदेश की लक्ष्य की प्राप्ति के लिए चर्चा की जाएगी। निष्कर्ष के आधार पर आगे बढ़ा जाएगा। यह काफी ज्यादा प्रभावकारी साबित होगा। कांग्रेस विधायक दल की बैठक आज  मध्यप्रदेश विधानसभा के विशेष सत्र को लेकर कांग्रेस ने विधायक दल की बैठक बुलाई है। कांग्रेस विधायक दल की बैठक आज  शाम 7.30 नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार के निवास पर होगी। विकास के वास्तविक चुनौती पर चर्चा बैठक में प्रदेश की आर्थिक स्थिति, किसान, युवाओं, महिलाओं, आदिवासियों, दलित पिछड़ों और कमजोर वर्गों से जुड़े मुद्दों के साथ विकास के वास्तविक चुनौती पर चर्चा की जाएगी। विशेष सत्र में मध्य प्रदेश को विकसित आत्मनिर्भर और समृद्ध राज्य बनाने के विषय पर विस्तृत चर्चा प्रस्तावित है। 17 दिसंबर को विधानसभा का एक दिवसीय विशेष सत्र होना है। 

लाड़ली बहनों के लिए 3 हजार की सहायता, विधानसभा चुनाव से पहले राशि बढ़ाने की योजना, 60+ महिलाओं के लिए नई स्कीम भी

भोपाल  एक तरफ मप्र के कैबिनेट मंत्री विजय शाह का लाड़ली बहनों को लेकर दिया बयान सुर्खियों में है तो दूसरी तरफ बीजेपी आने वाले तीन सालों में महिलाओं को साधने के लिए एक डिटेल रोडमैप बना रही है। बीजेपी की कोशिश है कि 2027 में होने वाले निकाय चुनाव तक कुछ राशि को और भी बढ़ाया जायेगा।  वहीं सूत्रों का कहना है कि 60 साल से ज्यादा उम्र की महिलाओं के लिए सरकार एक नई स्कीम लॉन्च कर सकती है। इस स्कीम में महिलाओं को कितना पैसा मिलेगा अभी इस पर विचार किया जा रहा है। साथ ही महिलाओं के स्व सहायता समूहों को भी सशक्त करने की तैयारी है। दरअसल, राजनीतिक दलों को सत्ता के दरवाजे तक पहुंचाने में महिलाएं एक नया पावर सेंटर बनकर उभरी हैं। मप्र, महाराष्ट्र, दिल्ली के बाद अब बिहार का चुनाव इसका ताजा उदाहरण है जहां एनडीए ने महिलाओं को स्वरोजगार के लिए 10 हजार रु. देने का वादा किया । बिहार में एनडीए की जीत में इस स्कीम को गेमचेंजर माना गया है। जानकार भी मानते हैं कि अब बीजेपी के लिए अब सत्ता की चाबी किसानों से कहीं ज्यादा महिलाओं के हाथ में है। जो राजनीतिक रूप से ज्यादा वफादार मानी जाती हैं। यही कारण है कि सरकार के बजट का एक बड़ा हिस्सा भी महिलाओं के लिए ही है। आखिर किस तरह से आने वाले दिनों में महिलाएं राजनीति की दिशा बदलने वाली है।  1.सप्लीमेंट्री बजट का 28 फीसदी महिला-किसानों को किसी भी सरकार की वास्तविक प्राथमिकताएं उसकी घोषणाओं में नहीं, बल्कि उसके बजट आवंटन में सबसे साफ रूप से झलकती हैं। मध्य प्रदेश की डॉ. मोहन यादव सरकार ने शीतकालीन सत्र में जो 13,476 करोड़ रुपए का अतिरिक्त बजट पेश किया, वह इस नई रणनीति का पहला और सबसे बड़ा सबूत है। इस भारी-भरकम राशि का लगभग 28% हिस्सा सिर्फ दो योजनाओं पर केंद्रित था। पहला, महिलाओं के लिए 'लाड़ली बहना योजना' जिसके लिए बजट में 1,794 करोड़ रु. का प्रावधान किया और दूसरा किसानों के लिए समर्थन मूल्य पर खरीदी, जिसके लिए 2,001 करोड़ रु. का प्रावधान किया गया। हालांकि, यह तो सिर्फ एक बानगी है। जब कुल बजट के आंकड़े देखते हैं, तो तस्वीर और भी साफ हो जाती है-     महिला एवं बाल विकास (जेंडर बजट): इस क्षेत्र का कुल बजट 1.23 लाख करोड़ का है। इसमें से 49,573 करोड़ सीधे तौर पर योजनाओं पर खर्च हो रहे हैं। इस विशाल राशि का सबसे बड़ा हिस्सा 'लाड़ली बहना योजना' का है, जिस पर अकेले 22 हजार करोड़ रुपए खर्च किए जा रहे हैं। यह वह राशि है जो प्रदेश की 1.26 करोड़ महिलाओं के बैंक खातों में हर महीने सीधे पहुंचती है। इसके अलावा लाड़ली लक्ष्मी योजना (1,183 करोड़ रु.) और अन्य योजनाएं भी शामिल हैं, जो महिला केंद्रित हैं।     कृषि एवं किसान कल्याण: पहली नजर में इस सेक्टर का कुल बजट 1.27 करोड़ रुपए है, जो महिलाओं के बजट से थोड़ा अधिक दिखता है। मगर, जब हम योजनाओं पर सीधे खर्च की बात करते हैं, तो यह आंकड़ा घटकर 20,426 करोड़ रुपए रह जाता है। इसमें भी अटल कृषि ज्योति योजना (13,909 करोड़ रुपए) जैसी योजनाएं शामिल हैं, जो किसानों को सीधे नकद फायदा देने के बजाय बिजली सब्सिडी जैसी अप्रत्यक्ष सहायता प्रदान करती हैं। मुख्यमंत्री किसान कल्याण योजना के तहत किसानों को 5,220 करोड़ रुपए की सीधी आर्थिक सहायता दी जाती है। यह तुलना साफ करती है कि भले ही कृषि का कुल बजट बड़ा दिखे, लेकिन व्यक्तिगत स्तर पर, सीधा नकद हस्तांतरण (DBT) के माध्यम से महिलाओं पर किया जा रहा निवेश कहीं अधिक बड़ा, टारगेटेड और राजनीतिक रूप से असरदार है। जानकारों के मुताबिक बीजेपी यह समझ चुकी है कि सब्सिडी का अप्रत्यक्ष फायदा अक्सर राजनीतिक वफादारी में तब्दील नहीं होता, लेकिन खाते में आने वाली नकदी एक सीधा और भावनात्मक संबंध बनाती है। 2. जब 'लाड़ली बहनों' ने ईवीएम में किया कमाल महिलाओं के लिए बजट बढ़ाने के पीछे चुनाव में अप्रत्याशित फायदा भी है। यह केवल राजनीतिक पंडितों का अनुमान नहीं, बल्कि विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) की एक विस्तृत रिसर्च रिपोर्ट 'लाड़ली बहना योजना' को मध्य प्रदेश में बीजेपी की जीत का सबसे प्रमुख और निर्णायक फैक्टर बता चुकी है। SBI ने अपनी रिपोर्ट में 2 पॉइंट्स को महत्वपूर्ण बताया है..     गेम-चेंजर इफेक्ट: रिपोर्ट के अनुसार, जिन सीटों पर जीत का अंतर 10,000 वोटों से कम था, वहां बीजेपी की जीत की संभावना केवल 28% थी। लेकिन 'लाड़ली बहना इफेक्ट' के कारण यह संभावना बढ़कर 100% हो गई। यानी, इस योजना ने हारी हुई बाजी को जीत में बदल दिया।     महिला वोटर ही भविष्य: रिपोर्ट ने यह भी भविष्यवाणी की है कि 2029 के बाद भारत के सभी चुनावों में महिला मतदाता ही निर्णायक भूमिका निभाएंगी। चुनाव आयोग के आंकड़े भी इसी कहानी की पुष्टि करते हैं। 2018 की तुलना में 2023 में महिला मतदाताओं की भागीदारी में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।     महिला मतदान में उछाल: 2018 में जहां 74.03% महिलाओं ने वोट दिया था, वहीं 2023 में यह आंकड़ा बढ़कर 76.03% हो गया। यह 2% की वृद्धि उन सीटों पर निर्णायक साबित हुई जहां जीत-हार का अंतर कम था।     बढ़ता लिंगानुपात: चुनावी मैदान में महिला मतदाताओं का लिंगानुपात 2018 में प्रति 1000 पुरुषों पर 917 था, जो 2023 में बढ़कर 945 हो गया। लोकनीति-CSDS का सर्वे इस चुनावी व्यवहार की और भी गहरी परतें खोलता है। सर्वे के अनुसार, बीजेपी को 47% महिलाओं ने वोट दिया, जबकि कांग्रेस को 43%। लेकिन सबसे दिलचस्प आंकड़ा योजना के लाभार्थियों का है-     'लाड़ली बहना' की लाभार्थी: योजना का लाभ पाने वाली 81% महिलाओं में से 48% ने बीजेपी को वोट दिया।     योजना से वंचित महिलाएं: जिन्हें इस योजना का लाभ नहीं मिला, उनमें से 53% ने कांग्रेस को वोट दिया। यह आंकड़ा साबित करता है कि यह योजना सीधे तौर पर वोटों में तब्दील हुई। इतना ही नहीं, जिन 29% महिलाओं ने आखिरी समय में अपना वोटिंग का फैसला किया, उनमें से 48% ने ईवीएम पर बीजेपी का बटन दबाया। यह दर्शाता है कि चुनाव से ठीक पहले खाते … Read more