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एसआईआर के कार्य को गंभीरता के साथ चुनावी मोड पर करें: आयोग निदेशक श्रीमती सक्सेना

भारत निर्वाचन आयोग की निदेशक श्रीमती सक्सेना और सचिव श्री विनोद कुमार ने मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी एवं जिला निर्वाचन अधिकारियों के साथ की बैठक जल्द से जल्द डिजिटलाइजेशन का कार्य पूरा करने के दिए निर्देश भोपाल  भारत निर्वाचन आयोग की निदेशक श्रीमती शुभ्रा सक्सेना एवं सचिव श्री विनोद कुमार ने रविवार को मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी एवं सभी जिलों के कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारियों और अतिरिक्त जिला निर्वाचन अधिकारी बने नगर निगम के कमिश्नर के साथ वर्चुअल बैठक की। इस दौरान प्रदेश में चल रहे मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) 2026 के प्रगति की जिलेवार समीक्षा की और आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। आयोग की निदेशक श्रीमती शुभ्रा सक्सेना ने कहा कि एसआईआर के कार्य को सभी कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी गंभीरता से लें। चुनावी मोड पर कार्य करें। लापरवाही न करें। बैठक के दौरान आयोग की निदेशक श्रीमती सक्सेना ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण के दौरान मतदाताओं को बांटे जा रहे गणना पत्रक, मैपिंग और डिजिटलाइजेशन के कार्य की समीक्षा की और बेहतर कार्य करने वाले जिलों की प्रशंसा की। सभी जिलों के कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी, अतिरिक्त जिला निर्वाचन अधिकारी कमिश्नर नगर पालिक निगम को जल्द से जल्द डिजिटलाइजेशन का कार्य पूरा करने के निर्देश दिए। साथ ही कहा कि सभी जिले कार्ययोजना बनाकर कार्य करें। प्रत्येक दिन बीएलओ के कार्य की समीक्षा करें और बीएलओ से स्वयं संवाद करें एवं कार्य में आ रही कठिनाइयों का त्वरित निदान करें। सहयोग के लिए वालेंटियर्स को लगाएं। कलेक्टर मैदानी स्तर पर जाकर एसआईआर कार्य की प्रगति देखें। आयोग द्वारा प्रतिदिन आपके कार्य की निगरानी और समीक्षा की जा रही है। मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी श्री संजीव कुमार झा ने सभी कलेक्टर्स को जिला स्तर पर कंट्रोल रूम बनाकर प्रतिदिन समीक्षा और मॉनिटरिंग करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि प्रतिदिन 10% से अधिक गणना पत्रक के डिजिटलाइजेशन के कार्य का लक्ष्य तय करें। एक सप्ताह के अंदर सभी कार्य पूरा करें। बैठक के दौरान संयुक्त मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी श्री रामप्रताप सिंह जादौन, उप मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी श्री संजय श्रीवास्तव, श्रीमती सुरभि तिवारी, श्री राजेश यादव सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे।  

गौ-अभयारण्य के विकास से जुड़े निर्माण कार्य समय पर पूरा करें: उप मुख्यमंत्री शुक्ल

बसामन मामा गौ-अभयारण्य का किया भ्रमण भोपाल  उप मुख्यमंत्री श्री राजेन्द्र शुक्ल ने बसामन मामा गौ-अभयारण्य का भ्रमण किया और गौ-अभयारण्य में गायों की सेवा के लिए की गई व्यवस्थाओं का जायजा लिया। उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने गौवंश की सेवा करते हुए गायों को गुड़ और चना खिलाया तथा गौ पूजा की। गौशाला के प्रशासनिक भवन में आयोजित बैठक में उप मुख्यमंत्री ने निर्माण कार्यों की प्रगति की समीक्षा की। उन्होंने कहा कि बसामन मामा गौ-अभयारण्य प्रदेश का पहला गौ-अभयारण्य है। इसमें लगभग आठ हजार गौवंश को आश्रय दिया गया है। इसके विकास से जुड़े निर्माण कार्यों को तय समय-सीमा में पूरे कराएं। उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल नेकहा कि गौ-अभयारण्य निराश्रित और असहाय गायों को आश्रय देने के साथ गोबर से खाद तथा अन्य उत्पाद बनाने के केन्द्र के रूप में भी विकसित हो रहा है। गायों को ठंड से बचाने के लिए भी समुचित प्रबंध करें। पशु चिकित्सक नियमित रूप से गायों के स्वास्थ्य की जाँच करें। बैठक में पूर्व विधायक श्री के.पी. त्रिपाठी, रेडक्रॉस समिति के अध्यक्ष डॉ. प्रभाकर चतुर्वेदी, एसडीएम सिरमौर दृष्टि जायसवाल, सेवानिवृत्त संयुक्त संचालक डॉ. राजेश मिश्रा तथा अन्य संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे।  

मध्यप्रदेश के पहले 132 के.व्ही. सबस्टेशन ज्योति नगर उज्जैन ने पूरे किए 65 वर्ष

पांच सिंहस्थ सहित शहर को दी निर्बाध विद्युत आपूर्तिः छठे सिंहस्थ के लिये भी तैयार भोपाल  ऊर्जा मंत्री श्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने जानकारी दी है कि उज्जैन की ऐतिहासिक एवं धार्मिक महत्ता को देखते हुए सिंहस्थ-2028 के लिए शहर की विद्युत पारेषण प्रणाली को और अधिक सुदृढ़, आधुनिक और विश्वसनीय बनाने के लिए विशेष पहल की जा रही है। मध्यप्रदेश में सबसे पहले स्थापित 132 के.वी. सबस्टेशन — "ज्योति नगर उज्जैन'' के अपनी गौरवशाली यात्रा के 65 वर्ष पूर्ण करने पर इस सब स्टेशन को सिंहस्थ 28 के लिए विशेष तौर पर तैयार किया जा रहा है । ॥। वर्ष 1960 में प्रारंभ हुआ यह सब स्टेशन राज्य के ट्रांसमिशन नेटवर्क के विकास की दिशा में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर सिद्ध हुआ है। यह न केवल उज्जैन की बढ़ती ऊर्जा आवश्यकताओं का सशक्त आधार रहा है, बल्कि प्रदेश के ट्रांसमिशन नेटवर्क की नींव रखने वाले प्रमुख केंद्रों में से एक है। इस सब स्टेशन ने विगत पांच सिंहस्थ में उज्जैन को निर्बाध विद्युत आपूर्ति प्रदान कर अपनी तकनीकी दक्षता और विश्वसनीयता सिद्ध की है तथा अब आगामी छठे सिंहस्थ 2028 के लिए भी पूरी तरह तैयार है। सिंहस्थ सर्वोच्च प्राथमिकता में ऊर्जा मंत्री श्री तोमर ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में एम.पी. ट्रांसको सिंहस्थ 2028 की तैयारियों को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रहा है। उज्जैन के इस ऐतिहासिक पहले 132 के.वी. सबस्टेशन का तकनीकी उन्नयन, आधुनिकीकरण और रखरखाव निरंतर किया जा रहा है जिससे सिंहस्थ के दौरान निर्बाध विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित रहे। 1960 से सतत क्रियाशील 17 नवंबर 1960 मे स्थापना के समय इस सब स्टेशन पर 132/66/11 के.वी. 30 एम.वी.ए. क्षमता के दो ट्रांसफॉर्मर एवं 132/33 के.वी. 20 एम.वी.ए. क्षमता का एक ट्रांसफॉर्मर स्थापित था। क्षेत्र में वोल्टेज स्थिरीकरण के उद्देश्य से वर्ष 1967 में 30 एम.वी.ए.आर. क्षमता का मित्सुबिशी (जापान) निर्मित कंडेंसर लगाया गया, जो वर्ष 2004 तक कार्यरत रहा। आरंभिक वर्षों में इस सबस्टेशन को गांधीसागर जल विद्युत संयंत्र से सीधे 132 के.वी. फीडर द्वारा विद्युत आपूर्ति प्राप्त होती थी। इसके माध्यम से उस समय की प्रमुख औद्योगिक इकाइयों — विनोद मिल, इसको स्टेंट इंडस्ट्रीज़ इंदौर, टेक्सटाइल यूनिट्स, पाइप फैक्टरी उज्जैन तथा नगर क्षेत्र को विद्युत प्रदाय किया जाता था। खेडापति फीडर के माध्यम से होती रही है सिंहस्थ मे विद्युत आपूर्ति इस सबस्टेशन से 66 के.वी. फीडर के माध्यम से नागदा ग्रेसीम सहित नागदा क्षेत्र को तथा 33 के.वी. फीडर द्वारा राजगढ़, सरदारपुर, बड़नगर एवं बदनावर क्षेत्रों को भी विद्युत आपूर्ति की जाती रही है। विशेष रूप से 33 के.वी. खेड़ापति फीडर के माध्यम से सिंहस्थ क्षेत्र एवं उज्जैन कमिश्नरी सहित नगर जलापूर्ति के लिये विद्युत प्रदाय होता रहा है। वर्तमान में इस सबस्टेशन की कुल स्थापित क्षमता 103 एम.वी.ए. (63 एम.वी.ए. + 40 एम.वी.ए.) है। 132 के.वी. सबस्टेशन ज्योति नगर आज भी उज्जैन शहर की विद्युत आपूर्ति व्यवस्था का एक अभिन्न एवं ऐतिहासिक केंद्र है, जिसने दशकों से विश्वसनीयता, सेवा और निरंतरता का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत किया है।  

मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा किसानों की मोटर पंप चोरी पर बड़ी कार्रवाई

सतना, राजगढ़ और खरगोन जिलों में सक्रिय गैंग का पर्दाफाश – कुल 22 मोटर पंप तथा अन्य संपत्ति जप्त भोपाल किसानों द्वारा सिंचाई कार्य के लिए उपयोग की जा रही मोटर पंप की चोरी की घटनाओं के मद्देनजर पूरे प्रदेश में विशेष सतर्कता और निगरानी अभियान चलाया जा रहा है। इसी अभियान के तहत विभिन्न जिलों की पुलिस टीमों ने त्वरित प्रभावी कार्रवाई करते हुए सक्रिय चोरी गिरोहों का पर्दाफाश किया तथा कुल 22 मोटर पंप और अन्य संपत्ति बरामद करते हुए कई आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। सतना जिला – 12 मोटर पंप बरामद थाना कोठी पुलिस ने लगातार हो रही मोटर पंप चोरी की घटनाओं को गंभीरता से लेते हुए विशेष टीम गठित की। घटनास्थलों की बारीकी से जांच, सीसीटीवी फुटेज, तकनीकी साक्ष्य और मुखबिर सूचना के आधार पर एक सक्रिय गिरोह के 4 सदस्यों को गिरफ्तार किया।गिरफ्तार आरोपियों की निशानदेही पर कुल 12 मोटर पंप बरामद किए गए, जो किसी एक जिले में की गई सबसे बड़ी बरामदगी है। राजगढ़ जिला – 8 मोटर पंप और 1 मोटरसाइकिल जप्त राजगढ़ पुलिस ने किसानों की मोटर चोरी की घटनाओं पर त्वरित कार्रवाई कर तकनीकी विश्लेषण और गोपनीय सूचना के आधार पर 5 आरोपियो को गिरफ्तार कर चोरी गई 8 मोटरें और एक मोटरसाइकिल बरामद की है। खरगोन जिला – 2 मोटर पंप और 1 मोटरसाइकिल जप्त थाना करही पुलिस ने 24 घंटे के भीतर मोटर पंप चोरी का खुलासा कर दो आरोपियों को गिरफ्तार किया। पूछताछ में मिली जानकारी के आधार पर 2 मोटर पंप बरामद किये गये। मध्यप्रदेश पुलिस ने किसानों से अपील की है कि वे अपने खेतों में लगे मोटर पंपों की सुरक्षा के लिए उचित एहतियाती उपाय करें और संदिग्ध गतिविधियों की सूचना तुरंत पुलिस को दें। मध्यप्रदेश पुलिस किसानों की संपत्ति की सुरक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।  

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मक्सी में किया 8174 करोड़ रुपए लागत वाली 6 औद्योगिक इकाइयों का भूमिपूजन एवं लोकार्पण

उज्जैन-शाजापुर की भूमि पर बनेंगे हरित ऊर्जा उपकरण मध्यप्रदेश अग्रसर है समृद्धि और प्रगति की अनवरत यात्रा पर बहनों के आर्थिक कल्याण के लिए हमने जो वादा किया, उसे पूरा भी किया गीता जयंती भी हर्ष और आनंद से मनाएंगे, सभी नगरों में गीता भवन भी बनाएंगे उज्जैन और शाजापुर हैं जुड़वा भाई, उज्जैन के विकास का लाभ मिल रहा शाजापुर को भी 487 करोड़ लागत वाले 20 विकास कार्यों का किया लोकार्पण एवं भूमिपूजन सरदार वल्लभ भाई पटेल सांदीपनि विद्यालय के नवीन भवन का किया लोकार्पण शाजापुर जिले के 60 हजार किसानों को अंतरित की 39.50 करोड़ रुपए राहत राशि लखुन्दर सिंचाई परियोजना को दी मंजूरी बेरछा-झोकरा-मक्सी सड़क मार्ग का उन्नयन कार्य किया मंजूर लखुंदर नदी पर 20 करोड़ रुपए की लागत से बनेगा उच्चस्तरीय पुल   भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मालवा क्षेत्र, जो अपनी मीठी संस्कृति और उर्वर भूमि के लिए मशहूर है, अब ग्रीन एनर्जी का हब बनने जा रहा है। यह क्षेत्र विकास के नए संकल्पों के साथ नई ऊर्जा और उमंग से प्रदीप्त हो रहा है। शाजापुर जो सोने और नमकीन के लिए जाना जाता है, अब अपनी औद्योगिक प्रगति के लिए भी पहचाना जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि बाबा महाकाल की कृपा से उज्जैन-शाजापुर की पुण्यधरा हरित ऊर्जा उत्पादन में उपयोग होने वाले सभी उपकरणों का प्रोडक्शन सेंटर बनने जा रही है। उन्होंने कहा कि मक्सी नगर अब सेंट्रल इंडिया के ग्रीन मैनुफैक्चरिंग हब के रूप में विकसित होकर अपनी नई पहचान कायम करेगा। इससे यहां के किसानों को अपने ही क्षेत्र में प्रोसेसिंग, पैकेजिंग और भंडारण की भी सुविधा मिलेगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव रविवार को शाजापुर जिले के औद्योगिक प्रक्षेत्र मक्सी के दशहरा मैदान में विभिन्न औद्योगिक इकाइयों के भूमिपूजन एवं लोकार्पण कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मक्सी नगर में करीब 8174 करोड़ रुपए की लागत से बनने वाली 6 औद्योगिक इकाइयों का भूमिपूजन एवं लोकार्पण किया। इसमें चार इकाइयों का भूमिपूजन एवं दो इकाइयों का लोकार्पण शामिल है। मुख्यमंत्री ने करीब 384 करोड़ रुपए से अधिक की लागत से उज्जैन से मक्सी तक निर्मित होने वाली करीब 38.95 किलोमीटर लम्बी फोर लेन रोड़ निर्माण कार्य का भूमिपूजन भी किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश में अपनी पावन परम्पराओं की चमक, प्रगति एवं समृद्धि की नई रौशनी और विकसित भविष्य की आहट सुनाई दे रही है। हम प्रदेश के युवाओं के सपनों में विकास के नए रंग भर रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में डबल इंजन सरकार की सरकार में हमारा मध्यप्रदेश समृद्धि और प्रगति की अनवरत यात्रा पर अग्रसर है। आज मक्सी औद्योगिक क्षेत्र में हुआ विभिन्न नवीन औद्योगिक इकाइयों के भूमिपूजन की एक-एक ईंट मालवा क्षेत्र की नई ऊर्जा और विकास का आधार बनेगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि बहुतजल्द यह भूमि न केवल आध्यात्मिक प्रकाश में आलोकित होगी, बल्कि औद्योगिक ऊर्जा से भी दमकेगी। पार्वती-कालीसिंध नदी जोड़ो लिंक परियोजना का लाभ भी क्षेत्र को मिलेगा। आज मक्सी की इस ऊर्वर भूमि पर विकास का जो बीज बोया जा रहा है, वह आने वाले वर्षों में हजारों युवाओं के जीवन में समृद्धि लेकर आएगा। उन्होंने कहा कि आज शाजापुर जिले को डबल गिफ्ट मिल रहा है। औद्योगिक इकाइयों की स्थापना के साथ शाजापुर को कई विकास कार्यो की सौगातें भी दी जा रही हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि आज यहां 487 करोड़ 36 लाख रुपये की लागत से 20 विकास कार्यों का लोकार्पण और भूमिपूजन सम्पन्न हुआ है। छह औद्योगिक इकाइयों के भूमिपूजन और लोकार्पण से यहां 8174 करोड़ रुपये से अधिक का पूंजी निवेश आएगा। इससे इस क्षेत्र के 15 हज़ार से अधिक लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार मिलेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश शांति, समरसता, सुशासन, औद्योगीकरण के साथ-साथ लोकतांत्रिक परम्पराओं के सहज स्थापन का केंद्र बन चुका है। हमारे यहां सब मिलकर साल भर होली-दीवाली मनाते हैं। हमारी बहनें हर महीने भाईदूज और रक्षाबंधन मनाती हैं। उन्होंने कहा कि जैसी नीयत, वैसी बरकत। बहनों के आर्थिक कल्याण के लिए हमने जो कहा वह किया। जो वादा किया था, वह पूरा करके भी दिखा दिया है। उन्होंने कहा कि लाड़ली बहना योजना के तहत 1500 रुपए की मासिक आर्थिक सहायता के अलावा हमारी सरकार रोजगार आधारित उद्योगों में रोजगार पाने वाली कामकाजी बहनों को हर महीने 5 हजार रुपए की अतिरिक्त प्रोत्साहन राशि देगी। उनके नियोक्ता की तरफ से जो मासिक वेतन मिलेगा, सो अलग। उन्होंने कहा कि किसानों की आय बढ़ाने के लिए हम हर जरूरी प्रयास कर रहे हैं। प्रदेश में दुग्ध उत्पादन को हम 20 प्रतिशत तक लेकर जाएंगे। गाय पालने वाले लोगों को हम 40 रुपए प्रति गौमाता अनुदान देंगे। हम गीता जयंती भी हर्ष और आनंद के साथ मनाएंगे। साथ ही प्रदेश के सभी नगरों में गीता भवन भी बनाएंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि उज्जैन और शाजापुर जुड़वा भाईयों की तरह हैं। उज्जैन में हो रहे विकास का लाभ शाजापुर को भी बराबर मिल रहा है। इन दिनों शाजापुर जिले में विकास का नया सैलाब आ रहा है। शुजालपुर में आयुर्वेदिक कॉलेज और शाजापुर में मेडिकल कॉलेज बनने जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी सरकार ने 15 नवम्बर को राष्ट्रीय जनजातीय गौरव दिवस मनाया है। प्रदेश के जनजातीय भाईयों के कल्याण के लिए हम कोई कमी नहीं रखेंगे। उन्होंने कहा कि अब जनजातीय कार्य विभाग के अधीर कन्या शिक्षा परिसर/आश्रम/छात्रावास महारानी दुर्गावती के नाम से जाने जाएंगे।  उज्जैन, शाजापुर और देवास बन रहा है नया औद्योगिक सर्किट मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि उज्जैन, देवास और शाजापुर मिलकर अब मध्यप्रदेश की नई औद्योगिक त्रिवेणी बन रहे हैं। यहां निवेश, इंडस्ट्री, उपजाऊ भूमि और स्किल्ड वर्कफोर्स भी उपलब्ध है। उज्जैन-देवास-शाजापुर कॉरिडोर की सबसे बड़ी ताकत इसकी ऑल टाइम कनेक्टिविटी है। यह क्षेत्र केवल औद्योगिक भूमि का समूह नहीं रहा, बल्कि ग्रीन एनर्जी, मैन्युफैक्चरिंग, एमएसएमई, सप्लाई चेन, खाद्य प्रसंस्करण और ऊर्जा उपकरणों के निर्माण का तेज़ी से उभरता हुआ क्लस्टर बन चुका है। उन्होंने कहा कि शाजापुर के मक्सी नगर में 88 हेक्टेयर क्षेत्रफल में एक बहुउद्देशीय औद्योगिक क्षेत्र विकसित किया गया है। यहां की 60 से अधिक सक्रिय औद्योगिक इकाइयां स्थानीय रोज़गार का बड़ा आधार बन … Read more

इंदौर रेल पुलिस का यात्रियों की सुरक्षा में नवाचार

हमारी सवारी भरोसे वाली एवं पटरी की पाठशाला अभियानों का शुभारंभ तकनीक, जनसहभागिता और सकारात्मक पुलिसिंग का उत्कृष्ट संगम भोपाल  इंदौर पुलिस द्वारा रेलवे यात्रियों की सुरक्षा, सुविधा, विश्वास और जागरूकता को नई दिशा देने हेतु तैयार किए गए दो महत्त्वपूर्ण अभियानों— “हमारी सवारी भरोसे वाली” एवं “पटरी की पाठशाला” का 14 नवम्बर 2025 को रानी लक्ष्मीबाई रेलवे स्टेशन, इंदौर में भव्य शुभारंभ किया गया। इस कार्यक्रम का लोकार्पण विशेष पुलिस महानिदेशक (रेलवे) श्री रवि कुमार गुप्ता द्वारा ऑनलाइन माध्यम से किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि पूर्व डीन, IMS, DAVV एवं विख्यात मोटिवेशनल स्पीकर श्री प्रभुनारायण मिश्रा, विशिष्ट अतिथि उप पुलिस महानिरीक्षक (पीएसओ टू डीजीपी मप्र) श्री विनीत कपूर तथा उप पुलिस महानिरीक्षक (रेलवे) श्री पंकज श्रीवास्तव  उपस्थित रहे। “हमारी सवारी भरोसे वाली” — तकनीक आधारित सुरक्षित यात्रा का नया मानक इस अभियान के तहत स्टेशन परिसर में संचालित सभी ऑटो चालकों का सत्यापन कर उनका पूरा विवरण ऑनलाइन डेटाबेस से जोड़ा जा रहा है। प्रत्येक सत्यापित ऑटो पर लगाए गए क्यूआर कोड को स्कैन करते ही यात्री ड्राइवर की पहचान, वाहन विवरण और सत्यापन स्थिति देख सकेंगे। शिकायत, संदिग्ध गतिविधि अथवा सामान छूटने जैसी स्थिति में भी त्वरित पहचान संभव होगी, जिससे यात्रियों में सुरक्षा और भरोसा दोनों बढ़ेगा। “पटरी की पाठशाला” — बच्चों, महिलाओं और समुदाय में सुरक्षा जागरूकता का प्रभावी प्रयास यह अभियान रेलवे यात्रियों और आसपास के नागरिकों में सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाने के साथ-साथ समाज में नैतिकता और जिम्मेदारी की भावना को सशक्त बनाने की दिशा में केंद्रित है। इसका प्रमुख उद्देश्य रेलवे यात्रियों को सुरक्षा संबंधी जानकारी प्रदान करना, बच्चों में अनुशासन और नैतिक मूल्यों का समावेश करना, महिला सुरक्षा एवं साइबर अपराध से बचाव की जानकारी देना, नशामुक्त समाज की स्थापना की प्रेरणा देना तथा नागरिकों को पुलिस के सहभागी के रूप में जोड़ना है। अभियान में घर–घर पहुंचकर सुरक्षा संबंधी जानकारी दी जा रही है, जबकि बच्चों के लिए विशेष कक्षाओं में कहानी, पोस्टर और गतिविधियों के माध्यम से गुड टच–बैड टच, चलती ट्रेन में चढ़ने–उतरने से बचाव और ट्रैक पार करने के जोखिमों पर मार्गदर्शन दिया जाएगा। स्टेशन क्षेत्र में जोखिमपूर्ण गतिविधियों में लगे बच्चों की पहचान कर उनके पुनर्वास और शिक्षा के प्रयास किए जा रहे हैं। महिला सुरक्षा और साइबर अपराध बचाव के लिए संवादात्मक सत्र आयोजित होंगे, जिनमें आत्मरक्षा, सुरक्षित ऑनलाइन व्यवहार तथा महत्त्वपूर्ण हेल्पलाइन नंबर—112 (आपातकालीन सेवा), 1091 (महिला हेल्पलाइन), 1098 (चाइल्डलाइन), 139 (रेलवे हेल्पलाइन), 1930 (साइबर अपराध रिपोर्टिंग)—की जानकारी प्रदान की जाएगी। अभियान के संदेश को अधिक व्यापक स्तर पर पहुंचाने के लिए नुक्कड़ नाटक, रैली, पोस्टर एवं फ्लेक्स आदि प्रचार माध्यमों का प्रयोग किया जाएगा। इस अभियान के आयोजन से आमजन में सुरक्षा, जागरूकता एवं जिम्मेदारी की भावना का विकास होगा तथा पुलिस और नागरिकों के बीच सहयोग की नई मिसाल स्थापित होगी। संपूर्ण आयोजन पुलिस अधीक्षक रेल, इंदौर श्री पद्म विलोचन शुक्ला के नेतृत्व में सम्पन्न हुआ। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि जीआरपी इंदौर का उद्देश्य तकनीक, जनभागीदारी और सकारत्मक पुलिसिंग के माध्यम से रेल यात्रियों की सुरक्षा को नए मानकों पर स्थापित करना है। ‘हमारी सवारी भरोसे वाली’ और ‘पटरी की पाठशाला’ आने वाले समय में रेलवे क्षेत्र में सुरक्षा और जागरूकता के मॉडल अभियानों के रूप में उभरेंगे। कार्यक्रम में उपस्थित जनों ने इन अभियानों को “यात्री सुरक्षा की दिशा में ऐतिहासिक कदम”, “समय की आवश्यकता” और “पुलिस–जनसहयोग का उदाहरणीय मॉडल” बताते हुए इसकी सराहना की। कार्यक्रम का संचालन सेवानिवृत्त मुख्य लिपिक श्री राधेश्याम परमार एवं उनि (अ) श्रीमती पूनम शर्मा ने किया। 

SBIOA भोपाल अंचल का आंचलिक सम्मेलन सम्पन्न

संगठन से संस्कार तक थीम के साथ एकता, समर्पण और अनुशासन का सशक्त संदेश भोपाल स्टेट बैंक ऑफ इंडिया ऑफिसर्स एसोसिएशन (SBIOA) भोपाल अंचल का आंचलिक सम्मेलन 2025 रविवार को पंडित खुशीलाल शर्मा आयुर्वेद कॉलेज ऑडिटोरियम में उत्साह, गरिमा और संगठनात्मक शक्ति के साथ सम्पन्न हुआ। सम्मेलन का मुख्य विषय “संगठन से संस्कार तक – शक्ति, एकता और समर्पण” रहा, जिसने पूरे आयोजन को एक अनूठी ऊर्जावान दिशा प्रदान की। विशिष्ट अतिथि और पदाधिकारियों का सम्मान कार्यक्रम की शुरुआत विशिष्ट अतिथि श्री निरंजन बी. व्यंगंकर, डीआईजी साइबर स्टेट मध्य प्रदेश पुलिस के सम्मान से हुई। इसके पश्चात सर्कल के विशिष्ट पदाधिकारियों, भोपाल सर्कल अध्यक्ष एवं महासचिव का सम्मान किया गया। SBIOA भोपाल मॉड्यूल अध्यक्ष श्री क्षितिज तिवारी ने कार्यक्रम में उपस्थित सभी अतिथियों, सदस्यों और अधिकारियों का औपचारिक स्वागत किया। दीप प्रज्वलन के साथ सम्मेलन का शुभारंभ भारतीय परंपरा का निर्वाह करते हुए मंचासीन अतिथियों द्वारा दीप प्रज्वलन किया गया। दीप प्रज्वलन ने सम्मेलन को सकारात्मक ऊर्जा और शुभारंभ की पवित्रता से भर दिया। मां सरस्वती-वंदना के उच्चारण ने पूरे सभागार में आध्यात्मिक वातावरण निर्मित किया।  गीत, कविताएँ और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से भाव-विभोर हुआ सभागार मुख्य कार्यक्रम से पूर्व साथियों ने गीत, कविताएँ और सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ दीं। उनकी प्रस्तुतियों ने • वातावरण को भावनाओं से भर दिया, • एकता की भावना को जीवंत किया, • और दर्शकों को बार–बार तालियाँ बजाने पर मजबूर कर दिया। यह सांस्कृतिक आयाम सम्मेलन की आत्मा जैसा प्रतीत हुआ। सम्मेलन के उद्देश्य पर मॉड्यूल DGS का वक्तव्य,मॉड्यूल उप महासचिव श्री सुबीन सिन्हा ने कार्यक्रम के उद्देश्य को स्पष्ट करते हुए कहा—“यह सम्मेलन संगठन की दिशा तय करने, चुनौतियों को समझने और सामूहिक समाधान खोजने का अत्यंत महत्वपूर्ण मंच है। संगठन की मजबूती हमारे समन्वय और अनुशासन में निहित है।” साइबर सुरक्षा पर उपयोगी मार्गदर्शन विशिष्ट अतिथि DIG साइबर श्री निरंजन व्यंगंकर ने तेजी से बढ़ते साइबर खतरों पर विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने कहा—“बैंकिंग अधिकारियों के लिए साइबर सुरक्षा अब अनिवार्य कौशल है। जागरूकता और सतर्कता ही सुरक्षित बैंकिंग की नींव है।” उन्होंने नवीनतम साइबर ठगी के तरीके और उनसे बचाव के प्रभावी उपाय भी साझा किए। सर्कल अध्यक्ष ने उपलब्धियाँ साझा कीं सर्कल अध्यक्ष श्री अनिल श्रीवास्तव ने संगठन द्वारा किए गए कार्यों, कल्याणकारी पहलों और समस्याओं के समाधान पर प्रकाश डालते हुए कहा— “सदस्यों के हितों और सुविधाओं को मजबूत बनाना हमारी प्राथमिकता है। टीमवर्क और संवाद की इस संस्कृति ने हमें लगातार सशक्त किया है।” सर्कल महासचिव का एकता और SOP आधारित कार्य पर जोर सर्कल महासचिव श्री संजीव मिश्रा ने अपने उद्बोधन में कहा—“संगठन की शक्ति उसकी एकता में है। SOP आधारित कार्य संस्कृति ही हमें पेशेवर मजबूती, सुरक्षित निर्णय और सम्मान दिलाती है।” उन्होंने सभी सदस्यों का आह्वान किया कि वे • अनुशासन, • पारदर्शिता • और टीम भावना के साथ संगठन को और ऊँचाइयों पर ले जाएँ। सेवा संगठन, OBC संगठन एवं AIBOC की उपस्थिति कार्यक्रम में सेवा संगठन, ओबीसी संगठन तथा AIBOC मध्यप्रदेश की टीम के स्टेट सेक्रेटरी श्री दिनेश झा की गरिमामयी उपस्थिति रही।इन संगठनों की सहभागिता ने सम्मेलन की व्यापकता और एकजुटता को और प्रबल किया। आभार प्रस्ताव कार्यक्रम का समापन SBIOA सर्कल DGS श्री रजनीश पौराणिक के आभार प्रस्ताव से हुआ।उन्होंने कहा—“यह सम्मेलन संगठन की एकता, अनुशासन और सामूहिक सोच का सशक्त प्रमाण है। सभी की सहभागिता ही हमारी वास्तविक पूँजी है।” लंच एवं स्मृति-उपहार सम्मेलन के उपरांत सभी के लिए लंच एवं स्मृति-उपहार की व्यवस्था की गई, जिससे कार्यक्रम का समापन सौहार्द व संतोष के वातावरण में हुआ। सम्मेलन का सार — “एकजुट संगठन ही सुरक्षित बैंकिंग और उज्ज्वल भविष्य की सबसे मजबूत नींव है।”

भावांतर योजना में सोयाबीन का मॉडल रेट 4234 रुपए, सीएम डॉ. यादव ने दी बड़ी जानकारी

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि भावांतर योजना 2025 के अंतर्गत सोयाबीन विक्रेता किसानों के लिए आज 16 नवंबर को रेकॉर्डेड 4234 रुपए प्रति क्विंटल का मॉडल रेट जारी हुआ है। यह मॉडल रेट उन किसानों के लिए है जिन्होंने अपनी सोयाबीन की उपज मंडी प्रांगणों में विक्रय की है। इस मॉडल रेट के आधार पर ही भावांतर की राशि की गणना की जाएगी। सोयाबीन के मॉडल रेट में लगातार वृद्धि जारी है। पहला मॉडल रेट 7 नवंबर को 4020 रुपए प्रति क्विंटल जारी किया गया था। इसी तरह 8 नवंबर को 4033 रुपए, 9 और 10 नवंबर को 4036 रुपए, 11 नवंबर को 4056 रुपए, 12 नवंबर को 4077 रुपए, 13 नवंबर को 4130 रुपए, 14 नवंबर को 4184 रुपए तथा 15 नवंबर को 4225 रुपए प्रति क्विंटल का मॉडल रेट जारी हुआ था।  

राज्यपाल और मुख्यमंत्री से करेंगे मुलाकात, निवेश संगोष्ठी और सांस्कृतिक कार्यक्रमों में होंगे शामिल

भोपाल   आसियान देशों के उच्च स्तरीय राजनयिकों का प्रतिनिधिमंडल 18 से 20 नवंबर तक तीन दिवसीय भोपाल प्रवास के दौरान कई कार्यक्रमों में शामिल होंगे। इस भ्रमण का उद्देश्य मध्यप्रदेश और आसियान देशों के बीच आर्थिक, औद्योगिक, निवेश और सांस्कृतिक सहयोग को सुदृढ़ बनाना है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव से भेंट में औद्योगिक सहयोग पर चर्चा मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से प्रतिनिधिमंडल 18 नवंबर को भेंट करेंगा। बैठक राज्य सरकार के निवेश-अनुकूल वातावरण, औद्योगिक नीति और आसियान देशों के साथ साझेदारी को लेकर केंद्रित रहेगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव प्रदेश में तेजी से विकसित हो रहे औद्योगिक परिदृश्य, आईटी, मैन्युफैक्चरिंग, एग्री-प्रोसेसिंग, पर्यटन और नवकरणीय ऊर्जा क्षेत्रों में निवेश की संभावनाओं पर विचार-विमर्श करेंगे। प्रतिनिधिमंडल प्रदेश सरकार द्वारा आयोजित रात्रिभोज में शामिल होगा। जिसमें दोनों पक्षों के बीच आपसी सहयोग और आर्थिक संबंधों को सुदृढ़ करने पर चर्चा भी होगी। राज्यपाल से शिष्टाचार भेंट और निवेश संगोष्ठी में सहभागिता राज्यपाल श्री मांगूभाई पटेल से प्रतिनिधिमंडल 19 नवंबर को शिष्टाचार भेंट करेगा। इसके बाद होटल कोर्टयार्ड मैरियट में ट्रेड एंड इन्वेस्टमेंट सेमिनार में शिरकत करेंगे। सेमिनार में राज्य के उद्योगपति, चैंबर्स ऑफ कॉमर्स के प्रतिनिधि और प्रमुख निवेशक शामिल होंगे। इसमें मध्यप्रदेश के औद्योगिक विकास, इन्फ्रास्ट्रक्चर, लॉजिस्टिक नेटवर्क और निवेश-अनुकूल नीतियों की प्रस्तुति दी जाएगी। मध्यप्रदेश की सांस्कृतिक समृद्धि से होंगे रूबरू प्रतिनिधिमंडल अपने भ्रमण के दूसरे दिन 19 नवंबर को साँची और भीमबेटका जैसे यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल विश्व प्रसिद्ध स्थलों का भ्रमण करेगा। इससे उन्हें मध्यप्रदेश की प्राचीन सांस्कृतिक परंपरा, बौद्ध कला और ऐतिहासिक धरोहरों से परिचित होने का अवसर मिलेगा। भ्रमण के तीसरे दिन 20 नवंबर को प्रतिनिधिमंडल भोपाल स्थित इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मानव संग्रहालय और जनजातीय संग्रहालय का भी अवलोकन करेगा। राज्य सरकार का यह प्रयास प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के ‘एक्ट ईस्ट पॉलिसी’ के अनुरूप है, जिसके माध्यम से भारत और दक्षिण-पूर्व एशिया के बीच आर्थिक, निवेश और सांस्कृतिक संबंधों को और मजबूत किया जा रहा है। मध्यप्रदेश, अपनी रणनीतिक भौगोलिक स्थिति, मजबूत औद्योगिक आधार, निवेश-अनुकूल नीतियों और तेजी से विकसित होते बुनियादी ढांचे से आसियान देशों के लिए आकर्षक निवेश गंतव्य बनकर उभर रहा है। यह दौरा मध्यप्रदेश और आसियान देशों के बीच दीर्घकालीन सहयोग की दिशा में ठोस कदम साबित होगा और दोनों पक्षों के बीच औद्योगिक, व्यापारिक और सांस्कृतिक साझेदारी को नई गति देगा। उल्लेखनीय है कि आसियान (एसोसिएशन ऑफ साउथ ईस्ट एशियन नेशन्स) दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों का एक क्षेत्रीय संगठन है। इसका उद्देश्य सदस्य देशों के बीच आर्थिक सहयोग, व्यापार, सुरक्षा, सांस्कृतिक संबंध और क्षेत्रीय स्थिरता को मजबूत करना है। आसियान में 10 देश सदस्य हैं, जिनमें इंडोनेशिया, मलेशिया, सिंगापुर, थाईलैंड, फिलीपींस, वियतनाम, म्यांमार, कम्बोडिया,लाओस और ब्रुनेई शामिल हैं।  

भारत का फूड-बास्केट बना MP: कृषि विकास में रचा नया कीर्तिमान

भोपाल  कभी 'बीमारू राज्य' और विकास की दौड़ में पिछड़ा माना जाने वाला मध्यप्रदेश आज आत्मनिर्भरता, कृषि समृद्धि और तीव्र आर्थिक विकास का प्रतीक बन चुका है। यह परिवर्तन मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के दूरदर्शी नेतृत्व, सरकार की योजनाबद्ध नीतियों और किसानों की अटूट मेहनत का परिणाम है। मध्यप्रदेश अब न केवल विकास दर में अग्रणी है, बल्कि खाद्यान्न उत्पादन में भी देश में नई पहचान बना चुका है। यही कारण है कि भारत का हृदय प्रदेश अब देश का नया 'फूड-बास्केट' कहलाने लगा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव का कहना है कि मध्यप्रदेश ने कृषि और उससे सम्बद्ध क्षेत्रों में जो आशातीत प्रगति की है, उसमें हमारे अन्नदाताओं की महती भूमिका है। बीते वर्षों में मध्यप्रदेश ने कृषि उत्पादन, सिंचाई विस्तार और किसानों की आय वृद्धि के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल कर देश का नया 'फूड बास्केट' बनने का गौरव प्राप्त किया है। राज्य की विकास दर अब डबल डिजिट में पहुंच चुकी है, जिसमें कृषि एवं सम्बद्ध क्षेत्रों का सबसे बड़ा योगदान है। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार ने खेती को लाभ का व्यवसाय बनाने का संकल्प लिया है। सिंचाई सुविधाओं का विस्तार, पर्याप्त बिजली आपूर्ति, न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीदी, भावांतर भुगतान योजना और कृषि यंत्रीकरण ने किसानों से जीवन में खुशहाली आ रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि आज मध्यप्रदेश गेहूं, चना, मसूर, सोयाबीन और तिलहन उत्पादन में देश में अग्रणी बन चुका है। पंजाब और हरियाणा जैसे परम्परागत कृषि सम्पन्न राज्यों को कई फसलों के उत्पादन में पीछे छोड़ना राज्य के किसानों की मेहनत और सरकार की संवेदनशील नीतियों का ही परिणाम है। हमने कृषि के साथ-साथ डेयरी, पशुपालन, मत्स्य पालन और खाद्य प्रसंस्करण के क्षेत्रों में भी राज्य ने नई ऊंचाइयां हासिल की हैं। वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट (ODOP), एग्रो एंड फूड प्रोसेसिंग इकाइयां और कोल्ड स्टोरेज चेन जैसे अनेक कदम किसानों को उनके उत्पादों का बेहतर मूल्य दिलाने में मददगार सिद्ध हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि हमारा लक्ष्य बिल्कुल स्पष्ट है – हर खेत तक पानी, हर किसान तक प्रगति और हर घर तक समृद्धि। मध्यप्रदेश का किसान अब सिर्फ़ अन्नदाता नहीं, बल्कि खाद्यान्न उत्पादन में आत्मनिर्भर भारत का निर्माणकर्ता बन चुका है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने किसानों, कृषि वैज्ञानिकों और राज्य के पूरे कृषि अमले को इस राष्ट्रीय उपलब्धि की ओर बढ़ने के लिए बधाई दी है। उन्होंने कहा कि आने वाले वर्षों में मध्यप्रदेश देश की खाद्य सुरक्षा को सशक्त करेगा, बल्कि वैश्विक कृषि मानचित्र पर भी अपनी विशिष्ट पहचान स्थापित करेगा। कृषि समृद्ध प्रदेश बनने की कहानी कभी सीमित सिंचाई साधनों, अस्थिर बिजली आपूर्ति और अपर्याप्त अवसंरचना के कारण मध्यप्रदेश की कृषि अर्थव्यवस्था घाटे में चल रही थी। किसानों की आमदनी सीमित थी और ग्रामीण जीवन में भी कुछ कठिनाइयां थीं। परंतु बीते दो दशकों में परिदृश्य पूरी तरह बदल गया है। सरकार ने कृषि और ग्रामीण विकास को अपनी नीतियों के केंद्र में रखकर जो कार्य किया, उसने राज्य की तस्वीर ही बदल दी। हाल ही में हुए आर्थिक सर्वेक्षण में मध्यप्रदेश ने 24 प्रतिशत की विकास दर दर्ज की है, जो राष्ट्रीय विकास औसत से कहीं अधिक है। यह प्रगति बताती है कि मध्यप्रदेश अब आत्मनिर्भरता की ओर तेजी से बढ़ रहा है। कृषि विकास में आई नई क्रांति मध्यप्रदेश में सबसे ज्यादा विकास कृषि क्षेत्र में देखा गया है। बीते वर्षों में राज्य सरकार ने कृषि को सिर्फ़ आजीविका का साधन नहीं, बल्कि समृद्धि का आधार बनाने का संकल्प लिया। किसानों को फसल उत्पादन की लागत में राहत देने, खेती को लाभकारी बनाने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए कई योजनाएं लागू की गईं। कृषक कल्याण मिशन के जरिए किसानों की आमदनी बढ़ाने के लिए सभी जतन किए जा रहे हैं। भावांतर भुगतान योजना, प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि, फसल बीमा योजना तथा न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर फ़सल खरीदी और इस खरीदी पर बोनस राशि भी देने जैसे प्रयासों ने किसानों को आर्थिक सुरक्षा प्रदान की है। इसके अलावा उन्नत कृषि उपकरणों पर सब्सिडी और प्राकृतिक एवं जैविक खेती को बढ़ावा देने की कोशिशों ने भी खेती-किसानी को और अधिक रूचिकर, उत्पादक और टिकाऊ बनाया है। राज्य में सिंचाई सुविधाओं का खेत तक विस्तार भी एक मील का पत्थर साबित हुआ है। नर्मदा घाटी विकास परियोजना, पार्वती-कालीसिंध-चंबल नदियों को आपस में जोड़ने और केन-बेतवा राष्ट्रीय नदी लिंक जैसी परियोजनाओं से लाखों हेक्टेयर कृषि क्षेत्र को सिंचाई सुविधा के दायरे में लाने के प्रयास किए जा रहे हैं। वहीं, ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति के सुदृढ़ीकरण से रबी सीजन में फसलों की उत्पादन क्षमता कई गुना बढ़ गई है। खेती-किसानी की बदलती परिभाषा मध्यप्रदेश के किसान अब पारम्परिक खेती तक सीमित नहीं हैं। वे नई तकनीकों और आधुनिक कृषि पद्धतियों को अपनाकर उत्पादन और गुणवत्ता दोनों में सुधार ला रहे हैं। ड्रिप इरिगेशन, ऑर्गेनिक फार्मिंग, मल्टीक्रॉपिंग और फसल विविधीकरण जैसे नवाचारों ने कृषि को एक व्यावसायिक रूप दिया है। प्रदेश में कृषि विश्वविद्यालयों, अनुसंधान केंद्रों और कृषि विज्ञान केंद्रों की सक्रिय भूमिका ने किसानों को नवीनतम जानकारी सहित प्रशिक्षण भी उपलब्ध कराया है। अब किसान बाजार की मांग के अनुसार फसलें पैदा कर रहे हैं और निर्यात की दिशा में भी कदम बढ़ा रहे हैं। कृषि से औद्योगिक विकास तक मध्यप्रदेश की तेज कृषि विकास दर देखकर ऐसा प्रतीत होता है कि आने वाले वर्षों में मध्यप्रदेश कृषि आधारित उद्योगों और एग्रो प्रोसेसिंग का केंद्र बनने जा रहा है। राज्य में खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों, कोल्ड स्टोरेज और लॉजिस्टिक हब के निर्माण से कृषि उत्पादों के निर्यात की संभावना बढ़ेगी। सरकार की वन डिस्ट्रिक्ट 'वन प्रोडक्ट' (ODOP) योजना भी इस दिशा में मददगार सिद्ध हो रही है। यह किसानों की आय दोगुनी करने की दिशा में तो कारगर है ही, ग्रामीण रोजगार को भी यह योजना स्थायी बना रही है। नया मध्यप्रदेश, नया आत्मविश्वास मध्यप्रदेश आज बड़े आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ रहा है। अब यह राज्य विकास के नए अध्याय लिख रहा है। गांव से शहर तक, खेत से बाजार तक, फ़ार्म टू लैब हर जगह परिवर्तन की एक नई लहर महसूस की जा रही है। प्रदेश के किसान अब सिर्फ अन्नदाता नहीं रहे, बल्कि “राष्ट्र निर्माता” और ऊर्जादाता भी बन रहे हैं। किसानों को उनके खेत में सोलर पम्प लगाने के … Read more