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कलेक्टर बनकर शिक्षक: पार्थ जैसवाल ने बच्चों को दी गणित की क्लास और किया चौंकाने वाला सवाल

छतरपुर छतरपुर कलेक्टर पार्थ जायसवाल का एक वीडियो सोशल मीडिया में तेजी से वायरल हो गया है. इस वायरल वीडियो में कलेक्टर पार्थ जैसवाल कक्षा सातवीं के छात्र राजाराम लोधी को पढ़ाते हुए नजर आ रहे हैं. इसके अलावा कलेक्टर कक्षा आठवीं के छात्र सरोज रजक से आकाश का पर्यायवाची और छात्र ज्योति आदिवासी से अश्व का पर्यायवाची भी पूछते नजर आते हैं. वीडियो में आप देख सकते हैं कि कलेक्टर पार्थ जायसवाल मैथ्स टीचर बनकर छात्र को गणित का गुणनखंड सिखाते नजर आ रहे हैं. कलेक्टर का ये अंदाज देखकर सोशल मीडिया में लोग अब उनकी प्रशंसा कर रहे हैं. शिक्षक बनकर बच्चों को पढ़ाया कलेक्टर के इस अंदाज को देखकर ऐसा लग रहा है कि मानो ये कोई कलेक्टर नहीं एक साधारण शिक्षक हैं, जो बच्चों को बहुत प्यार से समझा कर पढ़ा रहे हैं. बता दें, बीते  छतरपुर कलेक्टर पार्थ जैसवाल बड़ामलहरा अंतर्गत ग्राम वीरों के शासकीय माध्यमिक शाला का औचक निरीक्षण करने पहुंचे थे. इस दौरान जिला पंचायत सीईओ श्री नमः शिवाय अरजरिया, एसडीएम आयुष जैन, जनपद सीईओ ईश्वर सिंह वर्मा सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे. शिक्षकों से की बातचीत इस दौरान कलेक्टर पार्थ जैसवाल ने शाला में शिक्षकों की सार्थक ऐप पर और बच्चों की उपस्थिति रजिस्टर में जांची. शाला में छात्रों की संख्या कम होने पर होने पर नाराजगी भी व्यक्त की और छात्रों की उपस्थिति बढ़ाने के लिए शिक्षकों को छात्रों के अभिभावकों से संपर्क स्थापित करने के निर्देश दिए और उपस्थिति बढ़ाने के निर्देश भी दिए. कलेक्टर ने छात्रों से किया संवाद कलेक्टर ने कक्षा 7वीं और 8वीं के छात्रों के साथ संवाद भी स्थापित किया और उनको मिलने वाले दोपहर के भोजन और गणवेश के पैसे प्राप्त हो रहे या नहीं इसके बारे में छात्रों से पूछा. जिसमें छात्रों द्वारा बताया गया कि 600 रुपए खातों में गणवेश के लिए प्राप्त हो रहे है. कलेक्टर ने शिक्षकों से कहा कि छात्र शाला में ड्रेस पहनकर आएं. साथ ही कलेक्टर ने कक्षा 7वीं के छात्र राजाराम लोधी से बात करते हुए उन्हें गुणनखंड करना सिखाया और कक्षा 8वीं को छात्र सरोज रजक से आकाश का पर्यायवाची, छात्र ज्योति आदिवासी से अश्व का पर्यायवाची पूछा गया.

सुभाश्री मोदक पर आरोप: होटल में संबंध और बिजनेस पार्टनर का झांसा देकर एयरफोर्स जवान से ऐंठे 14 लाख

ग्वालियर  भारतीय वायुसेना के एक जवान से सोशल मीडिया के जरिए दोस्ती कर लाखों रुपये ठग लिया गया। महाराजपुरा एयरफोर्स स्टेशन में पदस्थ लीडिंग एयरक्राफ्ट मैन अमित ने ग्वालियर एसपी क और महाराजपुरा थाने में आवेदन देकर 14 लाख रुपए की ठगी की शिकायत दर्ज कराई है। पीड़ित ने बताया कि वह पश्चिम बंगाल की रहने वाली सुभाश्री मोदक नामक युवती के हनीट्रैप का शिकार हुआ है। पश्चिम बंगाल की युवती से हुई दोस्ती मामला फरवरी 2025 का है, जब पीड़ित की पहचान “Qwack-Qwack” नामक सोशल मीडिया ऐप के जरिए सुभाश्री से हुई थी। बातचीत बढ़ने के बाद युवती ने खुद को इवेंट ऑर्गेनाइजर बताया और निवेश पर मुनाफा देने का लालच दिया। उसके झांसे में आकर अमित ने 28 फरवरी से 11 मार्च तक अलग-अलग किश्तों में करीब तीन लाख रुपए ट्रांसफर किए। युवती ने सिलीगुड़ी में “होली इवेंट” के आयोजन का बहाना बनाकर उसे बुलाया और होटल में बुलाकर शारीरिक संबंध बनाए। सिक्योरिटी कंपनी खोलने का प्रस्ताव दिया इसके बाद आरोपी युवती ने अपने बॉस के नाम पर सिक्योरिटी कंपनी खोलने का प्रस्ताव दिया और अमित को 20 प्रतिशत पार्टनरशिप देने का झांसा दिया। अप्रैल से अगस्त 2025 के बीच वायुसैनिक ने बैंक से लोन लेकर करीब 10 लाख रुपये और भेज दिए। जब अगस्त में उसे शक हुआ तो उसने जांच की, जिससे पता चला कि युवती के खिलाफ पहले से कई धोखाधड़ी के मामले दर्ज हैं। हालांकि युवती ने उस कंपनी के नाम से शोशल मीडिया पर ग्रुप भी बनाया था। इस ग्रुप में हुई बातचीत में भी संबंधित युवक के नाम से ट्रांजेक्शन होने की बात की जा रही है। रेप केस में फंसाने की धमकी दी पीड़ित ने जब पैसे वापस मांगे तो युवती ने उसे झूठे दुष्कर्म केस में फंसाने की धमकी दी। युवक ने बताया कि युवती ने उसे यह कहकर डराया कि वो पुलिस को बताएगी कि उसे बेहोश करते युवक ने उसके साथ दुष्कर्म किया है। परेशान वायुसैनिक ने अपने परिवार को घटना बताई और 4 नवंबर को ग्वालियर पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। फिलहाल पुलिस ने शिकायत प्राप्त कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस का कहना है कि साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं और जो भी दोषी होगा उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

जवारी मंदिर के सामने बगलामुखी हवन: मूर्ति याचिका लगाने वाले राकेश दलाल ने विधि विधान से किया पूजा-अर्चन

छतरपुर  सुप्रीम कोर्ट में सीजेआई पर जूता उछालने वाले वकील राकेश किशोर इस समय खजुराहो में हैं। जिन्होंने बुधवार को मंदिर के दर्शन कर ध्यान लगाया था। गुरुवार को खजुराहो के जवारी मंदिर की मूर्ति को लेकर याचिका लगाने वाले राकेश दलाल ने जवारी मंदिर के सामने बगलामुखी हवन किया, जहां विधि विधान से पूजा अर्चना की गई है। साथ ही वकील राकेश किशोर ने खजुराहो मंदिर देखे। अब वो मातंगेश्वर महादेव की पूजा करने भी जा सकते हैं। उनकी गतिविधियों पर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण की टीम भी नजर बनाए हुए हैं। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण खजुराहो के अधिकारियों ने बताया कि जहां हवन पूजन किया गया है वह क्षेत्र प्रतिबंधित क्षेत्र के दायरे में नहीं है।

तीनों दरिंदों के खिलाफ हिम्मत दिखा छात्रा ने खुद को छुड़ाया, ग्वालियर में दिनदहाड़े किडनैपिंग की कोशिश नाकाम

ग्वालियर  ग्वालियर जिले में महिला सुरक्षा को शर्मसार कर देने वाली घटना, लेकिन साथ ही एक छात्रा की बहादुरी ने पूरे शहर को झकझोर दिया। दिनदहाड़े महिला पॉलिटेक्निक कॉलेज और महिला थाने के बीच तीन बदमाशों ने छात्रा को ऑटो में जबरन बैठाने की कोशिश की। लेकिन छात्रा ने ऐसी हिम्मत दिखाई कि आरोपी भाग खड़े हुए। घटना  सुबह 11 बजे की है जब ऑटो में सवार दो युवकों ने छात्रा का हाथ पकड़ उसे उठाने की कोशिश की। तीसरा ऑटो चालक उसे गाड़ी में बैठाने के लिए कह रहा था। छात्रा ने पूरे दम से विरोध किया और भागकर महिला पुलिस थाने की ओर दौड़ पड़ी। डर के मारे आरोपी ऑटो छोड़कर फरार हो गए। अद्भुत साहस दिखाते हुए, नाबालिग छात्रा ने खुद को उनके चंगुल से छुड़ाया और मदद के लिए महिला पुलिस थाने की ओर दौड़ी। हालांकि, मदद पहुंचने से पहले ही, आरोपी ऑटोरिक्शा छोड़कर पैदल ही भाग गए। दिनदहाड़े हुए इस घटनाक्रम से छात्रा दहशत में है। पुलिस ने केस दर्ज कर तीन आरोपितों बीरेंद्र सिंह, हरेंद्र गुर्जर और गौरव रावत को गिरफ्तार किया है। उनसे पूछताछ की जा रही है। घटना महिला थाना से चंद कदम की दूरी पर हुई। पड़ाव थाना क्षेत्र में साया होटल के पास रहने वाली 17 वर्षीय बालिका ने बताया कि वह पॉलीटेक्निक गर्ल्स कालेज में पढ़ती है। सुबह पौने 11 बजे कॉलेज जा रही थी। महिला थाने से थोड़ा आगे ऑटो खड़ा था। उसके पीछे वाली सीट पर बैठे दो युवक उसके हाथ-पैर पकड़कर जबरन बैठाने लगे और ड्राइवर को आटो चालू को कहा। पीड़िता जैसे-तैसे खुद को उनके चंगुल से छुड़ाते हुए पड़ाव चौराहे की ओर भागी। कुछ देर बाद ऑटो ड्राइवर और उसमें सवार आरोपित भी भाग गए। पुलिस ने ऑटोरिक्शा जब्त कर लिया है और आरोपियों से पूछताछ की जा रही है। पड़ाव पुलिस स्टेशन के इंस्पेक्टर शैलेंद्र भार्गव ने कहा कि हमने अज्ञात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है और सीसीटीवी फुटेज के जरिए उनकी पहचान करके तीनों को गिरफ्तार कर लिया है। घटना महिला थाने से महज 50 कदम की दूरी पर हुई और पूरी वारदात CCTV में कैद है। पुलिस ने ऑटो जब्त कर लिया है और आरोपियों को भी पुलिस ने पकड़ लिया है, जिनसे पूछताछ की जा रही है। 

विशप हाउस, ग्वालियर में धर्मांतरण जांच, 23 स्टूडेंट्स में 18 ओडिशा से; फादर का बयान – माता-पिता ईसाई

ग्वालियर ग्वालियर में एक क्रिश्चियन संस्था द्वारा संचालित एक विशप परिसर में कथित तौर पर धर्मांतरण का मामला सुलझ गया है. हिंदूवादी संगठनों ने आरोप लगाया था कि ग्वालियर के   मुरार-बड़ागांव इलाके में ईसाई मिशनरी एक सेंट जोसेफ स्कूल परिसर का संचालन करती है, उसी स्कूल परिसर में बिशप के निवास पर 26 बच्चों का धर्मांतरण कर धार्मिक शिक्षा दी जा रही है.  विश्व हिंदू परिसर (विहिप) नेता पप्पू वर्मा ने बताया कि उन्हें सूचना मिली थी कि बड़ागांव के पास क्रिश्चियन मिशनरी सेंट जोसेफ स्कूल में कुछ गरीब बच्चों को लाकर उनका धर्मांतरण कराया गया है. वह बच्चे छत्तीसगढ़, झासखंड, केरल, उड़ीसा आदि राज्यों के हैं. दरअसल, सूचना मिली थी कि चर्च के फादर की निगरानी में विशप हाउस के अंदर छात्रों को धर्मगुरु बनने का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इन छात्रों में ओडिशा, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के निवासी शामिल हैं। जिनमें से कई आदिवासी हैं। सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासन की टीम सक्रिय हुई और तत्काल विशप हाउस पहुंची। अधिकारियों ने बच्चों से संबंधित सभी रिकॉर्ड की जांच की। चर्च प्रबंधन से फंडिंग, भूमि रिकॉर्ड और अन्य महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की गई और सभी आवश्यक दस्तावेज लिए गए। इस दौरान यह जानकारी सामने आई कि विशप हाउस में कुल 23 छात्र पढ़ रहे हैं। इनमें से 18 छात्र ओडिशा, 3 मध्य प्रदेश (झाबुआ से 2, मोहना से 1) और 2 छत्तीसगढ़ से हैं। बताया जा रहा है कि प्रारंभिक जांच में धर्मांतरण की बात सामने नहीं आई है। फिर भी मामले की बारीकी से जांच की जा रही है कि कही दूर-दूर तक इसका धर्मांतरण से नाता तो नहीं है। बच्चों से जुड़े कागजात किए चेक हिंदू संगठनों की शिकायत पर जिला प्रशासन और पुलिस की टीम भी मौके पर पहुंच गई. उन्होंने वहां मौजूद विशप, स्टाफ और सभी 26 बच्चों से भी बातचीत की. वहां सभी के डॉक्युमेंट भी चेक किए. टीम को वहां धर्मांतरण जैसा कुछ नहीं मिला. वहां मिले विशप डेनियल फ्रांसिस का कहना था कि यहां सिर्फ कैथोलिक बच्चों की पढ़ाई होती है, जिन्हें भाषा की शिक्षा दी जाती है. धर्मांतरण जैसा कुछ भी नहीं है. उन्होंने हर तरह की जांच में सहयोग करने की बात कही. कई घंटे की जांच पड़ताल के बाद एसडीएम एनसी गुप्ता और मुरार के सीएसपी मनीष यादव ने बताया कि यहां धर्मांतरण के आरोप गलत और भ्रामक हैं. जांच से पता चला कि यहां पढ़ रहे सभी के माता पिता कृश्चियन हैं और ये सब कैथोलिक हैं, जिनकी पुष्टि डॉक्युमेंट से हो गई है. हाई स्कूल के बाद बच्चे अपनी स्किल डेवलपमेंट और भाषा की ट्रेनिंग के लिए पहुंचे थे. यहां बच्चों को ट्रेनिंग के दौरान हिंदी और अंग्रेजी भाषा की पढ़ाई कराते हैं. ग्वालियर अंचल में कुल 18 स्कूल संचालित हो रहे हैं. जांच में पता चला कि बड़ागांव स्थित ईसाई मिशनरी के हॉस्टल में बच्चों के परिजन भी समय-समय पर मिलने आते हैं.

दहेज न मिलने पर इंदौर में पत्नी को दिया तीन तलाक, पति ने करवाई जबरन हलाला, फिर भी नहीं रखा साथ

इंदौर  इंदौर से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है. जहां दहेज की मांग पूरी न होने पर पति ने पत्नी को तीन तलाक दे दिया और फिर जबरन हलाला करवाया. इसके बाद भी आरोपी पति ने महिला को अपने साथ रखने से इंकार कर दिया. पीड़िता ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई जिसके बाद पति और सास को हिरासत में ले लिया गया. खजराना थाना क्षेत्र की रहने वाली 29 वर्षीय फरहाना खान की शादी साल 2010 में वसीम पठान से हुई थी. फरहाना ने बताया कि शादी के बाद से ही पति वसीम और सास गुड्डो बी दहेज की मांग को लेकर उसे परेशान करते थे. उनका कहना था कि परिवार चलाने के लिए मायके से पैसे लाकर दो. तीन बच्चे होने के बाद दबाव और बढ़ गया. दहेज की मांग पूरी ना होने पर तीन तलाक  फरहाना के अनुसार अक्टूबर 2024 में वसीम ने मारपीट कर उसे तीन बार तलाक कहा और घर से निकाल दिया. उसने दो बच्चों को अपने पास रख लिया और एक बच्चा फरहाना के साथ रह गया. महिला ने परिवार के माध्यम से सुलह की कोशिश की, तब वसीम ने कहा कि मुस्लिम धर्म के अनुसार हलाला करना होगा. पुलिस ने दो आरोपियों को हिरासत में लिया  दिसंबर 2024 में वसीम ने रिश्तेदार सईद के साथ फरहाना का हलाला करवाया. इसके लिए 500 रुपये के स्टाम्प पर कागज तैयार किए गए. हलाला पूरा होने के बाद भी वसीम ने साथ रखने से साफ इंकार कर दिया. मजबूर होकर महिला ने सोमवार को खजराना थाने में शिकायत दर्ज कराई. थाना प्रभारी के अनुसार मुस्लिम विवाह संरक्षण अधिनियम के तहत केस दर्ज किया गया है और दोनों आरोपियों को हिरासत में ले लिया गया है.

जबलपुर से सिहोरा की 2 दिन की बच्ची एयर एंबुलेंस से जाएगी मुंबई, बाल हृदय योजना के तहत इलाज

जबलपुर जबलपुर से दो दिन की बच्ची को एयर एंबुलेंस से मुंबई ले जाया जा रहा है. बच्ची के दिल में छेद है और उसका इलाज मुंबई के नारायण अस्पताल में होगा. बच्ची को मुंबई तक पहुंचाने के लिए सरकारी कर्मचारियों ने बुधवार को छुट्टी के दिन भी कागजी तैयारी पूरी की. गुरुवार को दोपहर 12:00 बजे बच्ची जबलपुर से मुंबई के लिए रवाना हुई . बच्ची के परिवार की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं है लेकिन सरकार की बाल हृदय योजना के तहत उसे यह सुविधा दी जा रही है. दो दिन पहले जन्में जुड़वा बच्चे, 1 के दिल में छेद सिहोरा के रहने वाले सत्येंद्र दहिया और शशि दहिया को जबलपुर के एक निजी अस्पताल में 2 दिन पहले जुड़वा बच्चे हुए थे. जब बच्चे हुए तब तक सब कुछ ठीक-ठाक था, लेकिन कुछ ही देर में जब बच्चों का स्वास्थ्य परीक्षण किया गया तो पता लगा कि इनमें से एक बच्ची के दिल में छेद है. इस बात की जानकारी तुरंत सरकारी अस्पताल को भी पहुंचा दी गई. बाल हृदय योजना के तहत होगा इलाज मध्य प्रदेश सरकार की बाल हृदय योजना के तहत जिन बच्चों के दिल में छेद होता है, उनका इलाज राज्य सरकार करवाती है. इसके लिए राज्य सरकार ऐसे बच्चों के इलाज के साथ उनके परिवहन की व्यवस्था भी करती है. लेकिन गुरु नानक जयंती की वजह से बुधवार को अवकाश था, ऐसी स्थिति में सरकार ने एक टीम बनाई है जो छुट्टी के दिन भी आपात स्थिति में लोगों की मदद करे. इस टीम ने एक बार फिर तत्परता से काम किया और सत्येंद्र दहिया और शशि दहिया के 2 दिन की बेटी को मुंबई ले जाने के लिए एयर एंबुलेंस की व्यवस्था करवाई. मुंबई पहुंचते ही शुरु हो जाएगा इलाज स्वास्थ्य विभाग के संयुक्त संचालक डॉक्टर संजय मिश्रा ने बताया कि, ''यह एयर एंबुलेंस गुरुवार दोपहर 12:00 बजे जबलपुर से मुंबई के लिए रवाना होगी. इसके लिए पेपर वर्क पूरा कर लिया गया है और जैसे ही बच्ची मुंबई पहुंचेगी तुरंत उसका इलाज भी शुरु हो जाएगा. सत्येंद्र दहिया एक निजी कंपनी में नौकरी करते हैं और उनके लिए यह इलाज संभव नहीं था. सरकार की योजना की वजह से अब सत्येंद्र की बच्ची को जीवन भर कष्ट नहीं भोगना होगा.'' वहीं, डॉक्टर संजय मिश्रा ने बताया कि, ''यह पहला मौका है जब 2 दिन की बच्ची के लिए सरकार एयर एम्बुलेंस उपलब्ध करवाने जा रही है.'' सत्येंद्र को जिस तत्परता से मदद मिली, उसकी जरूरत हर उस आदमी को है जो सरकारी अस्पताल में इलाज करवाने के लिए जा रहा है. क्योंकि सरकारी अस्पताल में इलाज करवाने वहीं पहुंचता है जिसके पास निजी अस्पतालों में इलाज करवाने का पैसा नहीं है. स्वास्थ्य विभाग में जो कोशिश सत्येंद्र की बच्ची के लिए की है इस तरह की कोशिश यदि हर आम आदमी के लिए हो जाए तो सच में राम राज्य की कल्पना साकार हो जाएगी.

IPS प्रमोशन पर लगी ब्रेक: MP में पहली बार डीपीसी निरस्त, पांच अधिकारियों को निराशा

भोपाल राज्य पुलिस सेवा से आईपीएस संवर्ग में पदोन्नति के लिए 12 सितंबर को हुई विभागीय पदोन्नति समिति (डीपीसी) की कार्रवाई निरस्त कर दी गई है। प्रदेश में पहली बार है जब इसे निरस्त किया गया है। इसमें पांच अधिकारियों को पदोन्नत किया जाना था। बताया जा रहा है कि 1997 बैच के अधिकारी अमृत मीणा के जाति प्रमाण पत्र संबंधी दस्तावेजों में कुछ उलझन के चलते छानबीन की जा रही है। साथ ही एक अन्य दावेदार की विभागीय जांच भी चल रही है। मामले पर कोई भी बोलने के लिए तैयार नहीं डीपीसी की कार्रवाई रद होने की इन्हें ही मुख्य वजह माना जा रहा है। हालांकि, कोई भी अधिकारी इस मामले में कुछ भी बोलने को तैयार नहीं है। संघ लोक सेवा आयोग के सदस्यों की उपस्थिति में भोपाल में ही डीपीसी हुई थी, जिसमें मुख्य सचिव अनुराग जैन, डीजीपी कैलाश मकवाणा और अपर मुख्य सचिव गृह शिव शेखर शुक्ला सम्मिलित हुए थे। सामान्यत: 15 से 20 दिन में पदोन्नति की अधिसूचना जारी कर दी जाती है, पर डेढ़ माह बाद इसे रद कर दिया गया है।   डीपीसी में 15 लोगों के नामों पर विचार किया गया डीपीसी में 1997 और 1998 बैच के 15 अधिकारियों के नामों पर विचार किया गया था। इसमें सीताराम सस्त्या, अमृत मीणा, विक्रांत मुराब, सुरेंद्र कुमार जैन, आशीष खरे, राजेश रघुवंशी, निमिषा पांडेय, राजेश कुमार मिश्रा, मलय जैन, अमित सक्सेना, मनीषा पाठक, सुमन गुर्जर, संदीप मिश्रा, सव्यसाची सर्राफ और समर वर्मा का नाम शामिल था। अगले वर्ष यानी 2025 में सात अधिकारियों की पदोन्नति राज्य पुलिस सेवा से आईपीएस में होनी है, पर वर्ष 2024 की डीपीसी में देरी के चलते वर्ष 2025 में भी देरी होगी। 

मध्यप्रदेश पुलिस एक्शन मोड में: 80% बाइक सवार बिना हेलमेट, शुरू हुआ बड़ा अभियान

भोपाल प्रदेश में प्रतिवर्ष छह से सात हजार दोपहिया वाहन चालक और सवारी की सड़क दुर्घटनाओं में मौत हो रही है। इसका बड़ा कारण यह है कि लगभग 80 प्रतिशत वाहन चालक हेलमेट नहीं पहन रहे हैं। इस कारण अब पुलिस प्रदेश भर में अभियान चलाकर हेलमेट नहीं लगाने वालों के विरुद्ध कार्रवाई करेगी। छह नवंबर (गुरुवार) से इसके लिए विशेष अभियान की शुरुआत हो रही है जो लगातार चलेगा। दोपहिया वाहन पर सवार दूसरी सवारी के लिए भी हेलमेट लगाना अनिवार्य होगा। मौतों के आंकड़े इस अभियान में सबसे अधिक सख्ती भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर और उज्जैन में की जाएगी। कारण, इन जिलों में सड़क हादसे और मौतों की संख्या अधिक है। वर्ष 2024 में प्रदेश में 14,791 लोगों की मौत सड़क दुर्घटनाओं में हुई। जिसमें इंदौर शहर में 2425, ग्रामीण में 290, भोपाल शहर में 945 और ग्रामीण में 235, उज्जैन में 1536, जबलपुर में 2035 और ग्वालियर में 1049 लोगों की मौत हुई। यानी इन पांच जिलों में 8,515 लोगों की मौत हुई जो कुल मौतों का 58 प्रतिशत है।   यही कारण है कि इन जिलों में अभियान के अंतर्गत बहुत अधिक सख्ती की जानी है। DIG, पुलिस प्रशिक्षण एवं अनुसंधान संस्थान (PTRI) टीके विद्यार्थी ने बताया कि हेलमेट नहीं पहनने वाले वाहन चालकों के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी। साथ ही पीछे बैठी सवारी को भी हेलमेट पहनने के लिए समझाइश देंगे। सभी जिलों में हर दिन की कार्रवाई की जानकारी एकत्र की जाएगी। यह अभियान लगातार चलेगा।

इंदौर-जबलपुर में गणना पत्रक नहीं पहुंचे, MP में प्रशासन हुआ परेशान

भोपाल मतदाता सूची के जिस विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर पूरे देश में कांग्रेस समेत अन्य विपक्षी दल सवाल उठा रहे हैं, वह मध्य प्रदेश में बिना तैयारी के शुरू करा दिया गया। इंदौर, जबलपुर, सागर, विदिशा, राजगढ़ सहित अधिकतर जिलों में अब तक एसआईआर के फॉर्म (गणना पत्रक) ही नहीं पहुंच पाए हैं। कलेक्टर परेशान हैं क्योंकि आयोग का दबाव है कि बीएलओ को जल्दी फॉर्म बांटे जाएं। इधर, जिन प्रिंटरों (प्रकाशकों) को फॉर्म छापने का काम दिया गया है, वह इसे कर ही नहीं पाएं हैं। जिला निर्वाचन अधिकारी इसका कारण प्रिटिंग न होने और कहीं तकनीकी गलतियों को बता रहे हैं। उधर, मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी कार्यालय का कोई भी अधिकारी इस गंभीर मामले पर बोलने के लिए तैयार नहीं हैं और गेंद एक-दूसरे के पाले में डाल रहे हैं। प्रदेश में 5.74 करोड़ मतदाता हैं। इन्हें बूथ लेवल ऑफिसर (बीएलओ) को घर-घर जाकर गणना पत्रक देना है और भरवाकर वापस लेना है। यह काम चार नवंबर से चार दिसंबर तक पूरा किया जाना है।   नहीं हुआ है छपाई का काम पूरा इसके लिए आवश्यक है कि समय से बीएलओ को गणना पत्रक मिल जाएं लेकिन अभी छपाई ही पूरी नहीं हुई है। इंदौर जिले में 2,625 बूथों में से छह सौ से अधिक बूथों पर ही प्रपत्र मिल सके। कलेक्टर शिवम वर्मा का कहना है कि दो-तीन दिन में प्रपत्र की छपाई पूरी होगी। मंदसौर जिले में दूसरे दिन भी काम प्रभावित हुआ। करीब 100 मतदान केंद्रों पर ही प्रपत्र पहुंचे। उज्जैन में साढ़े तीन लाख फॉर्म बांटे हैं और जब बाकी आ जाएंगे तो उन्हें बांटा जाएगा। खंडवा के उप जिला निर्वाचन अधिकारी दिनेश सावले का कहना है कि प्रपत्र प्रिंट होने की प्रक्रिया चल रही है। जैसे-जैसे उपलब्ध होते जा रहे हैं, बीएलओ तक पहुंचाए जा रहे हैं। धार जिले में कुछ स्थानों पर तकनीकी गलतियों के कारण प्रपत्र पहुंचने में दिक्कत आई है। नीमच जिले में महज 25 प्रतिशत प्रपत्र की आपूर्ति हो सकी। रतलाम जिले में 1,297 में से 150 बूथ के ही प्रपत्र आए हैं। महाकोशल क्षेत्र की बात करें तो डिंडौरी जिले में 6,55 मतदान केंद्रों में केवल 21 बीएलओ के लिए फॉर्म आए हैं। जबलपुर, नरसिंहपुर, कटनी, दमोह में भी यही स्थिति रही। दमोह में 20 लाख फॉर्म की आवश्यकता के विरुद्ध मात्र एक लाख फॉर्म उपलब्ध हैं। कलेक्टर सुधीर कोचर का कहना है कि फॉर्म भोपाल से आने के कारण काफी परेशानी हो रही है। मंडला कलेक्टर सोमेश मिश्रा का कहना है कि अभी पूरे फॉर्म नहीं आएं हैं, जैसे-जैसे आते जा रहे हैं, वैसे-वैसे बीएलओ को वितरित किए जा रहे हैं। यही स्थिति मध्य क्षेत्र के जिलों की भी है। राजगढ़ जिले के किसी भी बीएलओ को बुधवार शाम तक गणना पत्रक ही नहीं मिल सका। जिसके कारण वे घर-घर भी नहीं पहुंचे। जिला निर्वाचन अधिकारी डा. गिरीश कुमार मिश्रा का कहना है कि फॉर्म राज्य स्तर से प्रिंट हो रहे हैं। आज 250 से ज्यादा बूथों के फॉर्म आए हैं। विदिशा जिले में मंगलवार को 1,347 मतदान केंद्रों से केवल 184 केंद्रों में ही गणना पत्रक पहुंचे थे। कलेक्टर अंशुल गुप्ता ने माना कि गणना पत्रक की कमी के कारण मतदाता गहन पुनरीक्षण के लिए पहले दिन बीएलओ घर-घर नहीं जा पाए। हरदा और सागर में भी गणना पत्रक की कमी बनी हुई है। कांग्रेस का आरोप, बिना तैयारी एसआईआर की प्रक्रिया शुरू की कांग्रेस की एसआईआर के लिए गठित कमेटी के अध्यक्ष पूर्व मंत्री सज्जन सिंह वर्मा ने आरोप लगाया कि बिना किसी तैयारी के चुनाव आयोग ने एसआईआर की प्रक्रिया शुरू कर दी है। बिना आवश्यक फॉर्म उपलब्ध कराए बीएलओ को दबाव में काम करने को कहा जा रहा है। हम इस पूरे मामले की निगरानी कर रहे हैं और चुनाव आयोग से पत्राचार कर पूछेंगे कि बिना पर्याप्त तैयारी के एसआईआर की प्रक्रिया क्यों शुरू की गई है।