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सामान्य मौसम में भी भोपाल-Delhi रेल यात्री परेशान, ज्यादातर ट्रेनें चल रहीं देरी से

भोपाल रानी कमलापति रेलवे स्टेशन से दिल्ली जाने व आने वाली ट्रेनों की समयबद्धता लगातार बिगड़ती जा रही है। हालत यह है कि जिन ट्रेनों को कभी स्पेशल ट्रेन की श्रेणी में रखा गया था, वे अब सामान्य मौसम में भी देर से पहुंच रही हैं। कई ट्रेनों की औसत देरी एक से डेढ़ घंटे तक दर्ज की जा रही है, जिससे यात्री खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं। साथ ही रेलवे पर उनका भरोसा भी खत्म हो रहा है। वहीं, इन सबके बीच, वंदे भारत एक्सप्रेस अपने निर्धारित समय पर पहुंच रही है। इससे कुछ यात्री खुश भी हैं। लेकिन सवाल यह उठता है कि जब वंदे भारत जैसी ज्यादा किराये वाली ट्रेन समय पर आ रही है तो अन्य ट्रेनों को लेट क्यों किया जा रहा है। अभी तो सामान्य मौसम है, तब यह हाल है, सर्दियों में कोहरे के दौरान देरी का अंतर और बढ़ेगा। ऐसे में रानी कमलापति से दिल्ली मार्ग पर यात्रा करने वाले यात्रियों को पहले से ही अपने कार्यक्रमों की योजना बनानी पड़ेगी।   वहीं, रेलवे के बहानों की लिस्ट लंबी है, उनके अनुसार, ट्रेनों के देर से आने की प्रमुख वजहों में ट्रैक पर बढ़ता ट्रैफिक, मेंटेनेंस कार्यों के कारण ब्लाक लेना, और कुछ रूटों पर पुराने सिग्नलिंग सिस्टम का उपयोग शामिल है। इसके अलावा, समयपालन की निगरानी में कमी और संचालन के समन्वय में ढिलाई भी स्थिति को और बिगाड़ रही है। सुधार की जरूरत रेल विशेषज्ञों का कहना है कि यदि बाकी ट्रेनों में भी वंदे भारत जैसी तकनीकी दक्षता और मानिटरिंग व्यवस्था लागू की जाए, तो समयपालन में बड़ा सुधार लाया जा सकता है। रेलवे को अब ट्रैक और सिग्नलिंग सिस्टम के आधुनिकीकरण के साथ-साथ ऑपरेशनल जवाबदेही को प्राथमिकता देने की जरूरत है।   ट्रेनों के लेट होने की वजह तीसरी रेलवे लाइन के निर्माण या मेंटेनेंस कार्य के चलते। सिग्नलिंग या ट्रैक खराबी होना। यात्रियों द्वारा अनावश्यक चेन पुलिंग करना। प्लेटफार्म की कमी और भीड़भाड़ होना। इंफ्रास्ट्रक्चर और तकनीकी संसाधनों की कमी। ऐसे हो सकता है सुधार भोपाल-दिल्ली रूट पर तीसरी रेल लाइन का कार्य जल्द पूरा किया जाए। सिग्नल सिस्टम को आधुनिक और स्वचालित बनाया जाए। चेन पुलिंग की घटनाओं पर सख्त कार्रवाई हो। प्लेटफार्म की संख्या और क्षमता बढ़ाई जाए। रियल-टाइम मानिटरिंग और बेहतर ट्रैफिक समन्वय किया जाए। आउटर पर ट्रेनों के अनावश्यक ठहराव को कम किया जाए।  

मजाक में जान पर खेल! MP की 108 एंबुलेंस सेवा को मिले 5 लाख से ज्यादा फर्जी कॉल

भोपाल भोपाल सहित पूरे मध्य प्रदेश में 108 एबुंलेंस सेवा फर्जी फोन कॉल्स से परेशान है। पिछले छह महीनों में करीब 5.72 लाख कॉल ऐसे आए जो सिर्फ मजाक, टाइमपास या शरारत के लिए किए गए थे। इससे न सिर्फ कॉल सेंटर का स्टाफ उलझा रहा, बल्कि एंबुलेंस के 1500 घंटे भी बर्बाद हो गए। कुछ लोग गर्लफ्रेंड से ब्रेकअप का दुख एंबुलेंस कॉल सेंटर को सुनाते हैं, तो कुछ सिर्फ मजे के लिए बार-बार फोन करते हैं। सेवा संचालित करने वाली एजेंसी जय अंबे हेल्थकेयर के सीनियर मैनेजर तरुण सिंह परिहार ने बताया कि अब ऐसे कालर्स के खिलाफ सीधे एफआईआर दर्ज की जाएगी, क्योंकि इनकी हरकतें कई बार गंभीर मरीजों की मदद में देरी कर देती हैं।   एंबुलेंस बुलाकर गायब हो जाते हैं कोलार रोड का एक मामला इसका ताजा उदाहरण है। एक व्यक्ति ने कॉल कर कहा कि हालत खराब है। 15 मिनट में एंबुलेंस उसके घर पहुंची, लेकिन वहां कोई नहीं मिला। जब टीम ने काल किया तो उसने कहा कि अब जरूरत नहीं है। ऐसे झूठे कॉल हर दिन आते हैं और एंबुलेंस का कीमती समय खराब होता है। कॉलर्स की पहचान के लिए स्टडी शुरू कॉल सेंटर के मुताबिक कई नंबर ऐसे हैं, जो 150 से 200 बार फर्जी काल करते हैं। इनमें बच्चे, नशेड़ी युवक शामिल हैं। ये काल सेंटर में बैठी महिला स्टाफ को परेशान करते हैं। कंपनी अब ऐसे नंबर ट्रैक कर रही है, ताकि आगे सीधे कानूनी कार्रवाई की जा सके। इसके लिए एक विशेष स्टडी शुरू की गई है। कैसे प्रभावित हो रही है सेवा झूठे फोन कॉल के कारण काल सेंटर की लाइनें कुछ सेकंड के लिए ब्लाक हो जाती हैं। इसी दौरान किसी असली मरीज की कॉल मिस हो जाती है। कई बार एंबुलेंस को 50 से 60 किलोमीटर तक बेकार दौड़ना पड़ता है। तरुण सिंह परिहार के मुताबिक एक फर्जी कॉल किसी जरूरतमंद की जान पर भारी पड़ सकता है। जब तक एंबुलेंस वापस लौटती हैं, तब तक किसी और को तुरंत मदद की जरूरत पड़ जाती है।  

मध्यप्रदेश में 3 रूटों पर उड़ी हेली सेवा, पर्यटन को मिलेगी नई उड़ान!

भोपाल मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने 70वें स्थापना दिवस के मौके पर शनिवार को राज्य की पहली ‘पर्यटन हेलीकॉप्टर सेवा’ की शुरुआत की। इसका मकसद बड़े शहरों और धार्मिक स्थलों को जोड़कर पर्यटन को बढ़ावा देना है। अधिकारियों के मुताबिक, यह देश में किसी राज्य द्वारा शुरू की गई अपनी तरह की पहली सेवा है। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने भोपाल के राजा भोज अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे पर ‘पीएम श्री टूरिज्म हेलीकॉप्टर सर्विस’ को हरी झंडी दिखाते हुए कहा कि सरकार का मकसद हवाई यात्रा को सिर्फ परिवहन का एक जरिया नहीं बल्कि एक मजेदार अनुभव बनाना है। उन्होंने कहा कि हम सिर्फ जगहों को ही नहीं, बल्कि दिलों और अनुभवों को भी जोड़ रहे हैं। यह परियोजना राज्य के 70वें स्थापना दिवस समारोह के साथ शुरू की गई। नई ‘पर्यटन हेलीकॉप्टर सेवा’ की 3 रूटों पर शुरुआत मुख्यमंत्री ने कहा कि नई ‘पर्यटन हेलीकॉप्टर सेवा’ शुरुआती चरण में तीन क्षेत्रों – भोपाल-पचमढ़ी-मढ़ई, इंदौर-उज्जैन-ओंकारेश्वर और जबलपुर-कान्हा-बांधवगढ़ – सहित प्रमुख पर्यटन स्थलों को जोड़ेगी। यह सेवा पर्यटकों का समय बचाएगी और उन्हें एक दिन में कई जगहों को घूमने में मदद करेगी। मुख्यमंत्री यादव ने कहा कि इस पहल से ग्रामीण रोजगार, ‘होम-स्टे’ कारोबार और स्थानीय हस्तशिल्प को बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने यह भी बताया कि राज्य सरकार ने पहले ही एयर एम्बुलेंस सेवा और राज्य के अंदर हवाई संपर्क शुरू कर दिया है, जिसमें उनकी सरकार के सत्ता में आने के बाद तीन हवाई अड्डे – रीवा, सतना और दतिया – चालू हो गए हैं। 2030 तक पर्यटकों की संख्या दोगुनी करने में मिलेगी मदद यादव ने कहा कि हेलीकॉप्टर सेवा पर्यटन आधारित अर्थव्यवस्था को काफी बढ़ावा देगी और 2030 तक पर्यटकों की संख्या दोगुनी करने में मदद करेगी। उन्होंने यह भी घोषणा की कि महाकालेश्वर मंदिर के लिए मशहूर शहर उज्जैन में एक नया एयरपोर्ट बनाया जाएगा। हफ्ते में पांच दिन मिलेगी हेलीकॉप्टर सेवा पर्यटन मंत्री धर्मेंद्र सिंह लोधी ने कहा कि मुख्यमंत्री मोहन यादव के नेतृत्व में मध्य प्रदेश का टूरिज्म सेक्टर नई ऊंचाइयां छू रहा है। यह हेलीकॉप्टर सेवा ट्रांस भारत एविएशन और जेट सर्व एविएशन प्राइवेट लिमिटेड के जरिए पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप मॉडल के तहत हफ्ते में पांच दिन चलेगी। चॉपर सर्विस के तहत रेगुलर ऑपरेशन 20 नवंबर से शुरू होंगे और इसमें ट्रांसपोर्ट, रहने की जगह और गाइडेड विजिट सहित एंड-टू-एंड यात्रा का अनुभव मिलेगा।  

मोहन भागवत ने आदेश दिया: RSS के स्वयंसेवक एसआइआर में करेंगे सक्रिय योगदान

RSS स्वयंसेवक एसआइआर में देंगे सहयोग, मोहन भागवत ने जारी किया निर्देश मोहन भागवत ने आदेश दिया: RSS के स्वयंसेवक एसआइआर में करेंगे सक्रिय योगदान एसआइआर में RSS का हाथ: स्वयंसेवक करेंगे सहयोग, मोहन भागवत ने लिया निर्णय जबलपुर  राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की अखिल भारतीय कार्यकारी मंडल की बैठक में दूसरे दिन देश के विभिन्न राज्यों में शुरू हुए विशेष सघन पुनरीक्षण (एसआइआर) अभियान में सहयोग करने पर चर्चा हुई। राष्ट्रहित से जुड़े मुद्दे पर स्वयंसेवकों को बढ़-चढ़कर हिस्सा लेने को कहा गया ताकि घुसपैठियों की पहचान उजागर हो सके। खासतौर पर रोहिंग्या और बांग्लादेशी घुसपैठ को लेकर संघ चिंतित है। शुक्रवार को बैठक तीन सत्रों में हुई, जिसमें पंच परिवर्तन के विषयों समेत जनसंख्या असंतुलन, गो हत्या जैसे मामलों पर बात की गई। बैठक में सरसंघचालक डा. मोहन भागवत और सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले की मौजूदगी में प्रस्तावों पर चर्चा हुई। संघ ने साफ किया कि पंच परिवर्तन का विषय व्यापक है, जिसका कार्य होना है। इसके जरिए मजबूत राष्ट्र और समाज का निर्माण संभव है। पंच परिवर्तन के पांच आयाम के बल पर समाज में सकारात्मक और स्थायी बदलाव संभव है। बैठक में सरकार्यवाह द्वारा श्री गुरुतेगबहादुर के 350वें बलिदान दिवस और भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती पर वक्तव्य जारी किए गए।स्वदेशी पर दें जोरराष्ट्र को सशक्त बनाने के लिए संघ ने पंच परिवर्तन के चौथे मूल स्व-भाव जागरण के तहत विशेष अभियान चलाने पर जोर दिया। प्रस्ताव में तय हुआ कि स्वदेशी उत्पादों को गौरव से जोड़कर लोगों को भी प्रेरित किया जाए ताकि देश का पैसा देश में रहे। ये हैं पंच परिवर्तन के मूल सामाजिक समरसता: मंदिर, श्मशान और जलस्त्रोत जैसे सार्वजनिक स्थान सभी के लिए समान हों। जाति और भेदभाव की दीवारों को मिटाकर, समाज को एक परिवार के रूप में जोड़ना ही इसका मुख्य लक्ष्य है। कुटुंब प्रबोधन: व्यस्त जिंदगी में परिवार टूट रहे हैं। संघ चाहता है कि परिवारों में मूल्य आधारित जीवन, आपसी सम्मान और संवाद कायम रहे, ताकि अगली पीढ़ी को अच्छे संस्कार मिलें। पर्यावरण संरक्षण: पौधारोपण, जल संरक्षण और प्लास्टिक के कम उपयोग जैसी पहल को बढ़ावा देना। लक्ष्य है हर व्यक्ति में पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी और प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता पैदा करना। स्व-भाव जागरण: लोग आत्मनिर्भर बनें और भारतीय संस्कृति पर गर्व करें। विदेशी प्रभाव से हटकर देशी उत्पादों को अपनाना और अपनी परंपराओं को सम्मान देना ही सच्चा राष्ट्र गौरव है। नागरिक कर्तव्य: कर भुगतान, सार्वजनिक संपत्ति की सुरक्षा और स्वच्छता जैसे कर्तव्यों पर जोर दिया गया है। संघ का मानना है कि देश तब आगे बढ़ता है जब हर नागरिक अपने कर्तव्य को समझकर निभाता है।  

सगाई से पहले उठा बवाल! दुल्हन के पिता भागे दूल्हे की मां के साथ, दोनों परिवारों में मचा हंगामा

उज्जैन  उज्जैन जिले में एक अनोखा मामला सामने आया है, जहां एक अधेड़ व्यक्ति और उसकी होने वाली समधन के बीच प्रेम संबंध हो गए। दोनों ने अपने परिवारों को छोड़कर साथ रहने का फैसला किया है। यह मामला तब सामने आया जब सगाई की तैयारियां चल रही थीं और दुल्हन का पिता लड़के की मां को भगा ले गया। दोनों की प्रेम कहानी का खुलासा 8 दिन बाद हुआ जब पुलिस ने महिला को खोज निकाला और फिर अधेड़ को भी पकड़ा गया। अब दोनों परिवार को छोड़कर साथ रहने पर अड़ गए हैं। अधेड़ उम्र में प्यार यह मामला युवाओं से जुड़ा नहीं है, बल्कि अधेड़ उम्र के लोगों के बीच पनपा है। एक व्यक्ति अपनी बेटी के लिए दामाद देखने गया था, लेकिन इस दौरान उसकी मुलाकात दूल्हे की मां से हुई और दोनों के बीच प्रेम संबंध स्थापित हो गए। जो लोग कभी रिश्ते में समधी-समधन बनने वाले थे, वे अब खुद को पति-पत्नी बता रहे हैं। सगाई तय होने के बाद भागे दोनों दोनों की प्रेम कहानी का खुलासा भी काफी नाटकीय ढंग से हुआ। लड़का और लड़की देखने के बाद जब शादी की बातचीत अंतिम चरण में थी और सगाई तय हो गई थी, उसी बीच लड़की का पिता लड़के की मां को भगा ले गया। इस घटना के आठ दिन बाद दोनों के बारे में पता चला। पुलिस ने गुरुवार को महिला को खोज निकाला, जिसके बाद अधेड़ व्यक्ति को भी पकड़ा गया। 8 दिन पहले लापता हुई महिला जानकारी के अनुसार, बड़नगर रोड स्थित ऊंटवासा गांव की 45 वर्षीय महिला आठ दिन पहले बड़नगर से लापता हो गई थी। महिला के बेटे ने गुमशुदगी दर्ज करवाई थी, जिसके बाद पुलिस उसकी तलाश कर रही थी। खोजबीन के दौरान गुरुवार को महिला चिकली गांव में मिली। महिला को थाने लाकर पूछताछ की गई, जहां यह पता चला कि महिला के बड़े बेटे की शादी चिकली गांव के 50 वर्षीय किसान की बेटी से तय हुई थी। घर में चल रही थीं तैयारियां दोनों परिवारों में सगाई की तैयारियां चल रही थीं। इसी दौरान दूल्हे की मां और दुल्हन के पिता के बीच प्रेम संबंध हो गए। इस वजह से बच्चों की सगाई से पहले ही एक-दूसरे के होने वाले समधी-समधन एक साथ भाग गए। वहीं, अधेड़ किसान अपनी महिला के मिलने के बाद परिवार ने उसे बहुत समझाया, लेकिन वह अपने प्रेमी किसान के साथ जाने पर अड़ गई।  

मुख्यमंत्री मोहन यादव का संकल्प: विजन-2047 के साथ मध्य प्रदेश को बनाएंगे विकास का टीम लीडर

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने रवींद्र भवन में आयोजित समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि “विजन-2047 को लेकर हमारा लक्ष्य आगामी 25 वर्षों का रोडमैप तैयार करना है, जिससे मध्यप्रदेश देश के विकास का टीम लीडर बन सके। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश 69 वर्ष पूरे कर चुका है और अब 70वें वर्ष में प्रवेश कर रहा है। वर्ष 1956 में मध्यभारत, मालवा-चंबल, सेंट्रल प्रोविंस-बरार, महाकौशल और विंध्य को मिलाकर मध्यप्रदेश का गठन हुआ था। मुख्यमंत्री ने कहा कि “देश के दिल” के रूप में मध्यप्रदेश का हृदय मजबूत और संपन्न होगा तो पूरा देश स्वस्थ रहेगा। डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में पहले से 8 एयरपोर्ट हैं और 9वें एयरपोर्ट का शिलान्यास एयरपोर्ट अथॉरिटी के विपिन कुमार ने किया है। मध्यप्रदेश देश का एकमात्र राज्य है, जिसने सभी सेक्टरों में एक साथ हवाई सेवा शुरू करने के लिए एमओयू किए हैं। उन्होंने बताया कि मध्यप्रदेश में देश के सबसे ज्यादा टाइगर और लेपर्ड हैं। विकास के क्षेत्र में प्रदेश प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में कदम से कदम मिलाकर आगे बढ़ रहा है। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने ‘एमपी ई-सेवा पोर्टल’ और ‘इन्वेस्ट एमपी-3 पोर्टल’ का लोकार्पण किया। साथ ही सिंहस्थ-2028 की तैयारियों का उल्लेख करते हुए कहा कि 30 किलोमीटर के घाट क्षेत्र में 24 घंटे के भीतर 5 करोड़ श्रद्धालु स्नान कर सकेंगे। मुख्यमंत्री ने बताया कि रीजनल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव के माध्यम से 6 लाख करोड़ रुपए के एमओयू हुए हैं, जबकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भोपाल में हुई जीआईएस के दौरान 24 लाख करोड़ रुपए के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए। इनमें से 8.44 लाख करोड़ के प्रस्तावों को मंजूरी मिल चुकी है, जिससे 6 लाख लोगों को रोजगार मिलेगा। एमएसएमई क्षेत्र में 23,853 करोड़ के निवेश से लगभग 8 लाख लोगों को रोजगार मिला है। दो साल में 60 हजार सरकारी पदों पर नियुक्तियां दी गई हैं। डॉ. यादव ने कहा कि “मध्यप्रदेश नदियों का मायका है, थोड़ा पानी दूसरे राज्यों में भी चला जाए तो कोई आपत्ति नहीं। जल का बंटवारा सिर्फ राज्यों के बीच नहीं, बल्कि हमारे करोड़ों किसानों के लिए है।” उन्होंने बताया कि आदिवासी अंचलों में कपास किसानों के उत्थान के लिए पीएम मित्रा पार्क का लोकार्पण किया गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का हर एक रुपया जनता के हित में उपयोग होना चाहिए। अंत में उन्होंने घोषणा की कि प्रदेश की सभी 230 विधानसभा क्षेत्रों में एक स्टेडियम और एक हेलीपैड का निर्माण चरणबद्ध रूप से किया जाएगा, जिससे खेल और कनेक्टिविटी दोनों को बढ़ावा मिल सके।

भोपाल : 20 सालों में बना देश का अग्रणी राज्य

भोपाल . डॉ. मोहन यादव। मध्यप्रदेश आज अपनी स्थापना के 70वें वर्ष में प्रवेश कर रहा है। एक नवंबर 1956 को अस्तित्व में आये मध्यप्रदेश में विकास की नई यात्रा विगत दो दशकों से आरंभ हुई, जो प्रदेश को देश में अग्रणी राज्य बनाने की संभावनाओं तक पहुंच गई है। यह सुखद संयोग है कि आज देवउठनी ग्यारस के पावन अवसर पर राज्योत्सव का आयोजन किया जा रहा है। हमारे तीज, त्यौहार और परंपराएं हमारी संस्कृति का आधार हैं। उत्सव के आनंद से ही भविष्य निर्माण के भाव निर्मित होते हैं। मुझे यह बताते हुए प्रसन्नता है कि प्रदेश में सभी त्यौहारों को व्यापक स्वरूप में मनाया जा रहा है। अपने त्यौहारों का सांस्कृतिक संदर्भ ही हमें पुरातन से नूतन की प्रेरणा देता है। हमारे लिए गर्व की बात है कि भारत का ह्दय मध्यप्रदेश वन, जल, अन्न, खनिज, शिल्प, कला, संस्कृति, उत्सव और परंपराओं से समृद्ध है। हमें मां नर्मदा, चंबल, पार्वती, शिप्रा नदियों का सान्निध्य और बाबा महाकाल का आशीर्वाद प्राप्त है। यह भगवान परशुराम की जन्मस्थली, भगवान श्रीकृष्ण की शिक्षास्थली और आदि शंकराचार्य जी की तपोस्थली है। मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम ने चित्रकूट में लंबा समय व्यतीत किया है। इतिहास प्रसिद्ध राजा नल, भर्तृहरि, विक्रमादित्य की जन्म स्थली भी मध्यप्रदेश रही है। सम्राट विक्रमादित्य ने ही शकों के आतंक से भारत को मुक्त किया था। संसार की पहली वैज्ञानिक कालगणना "विक्रम संवत्" का आरंभ भी मध्यप्रदेश के उज्जैन से हुआ था। मुझे बताते हुए प्रसन्नता है कि हम अपने ऐतिहासिक गौरव की दिव्यता और प्राकृतिक भव्यता के साथ विरासत से विकास की ओर कदम बढ़ा रहे हैं। हमारे यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने भारत को विश्व में सर्वश्रेष्ठ बनाने के लिए विकसित भारत निर्माण का संकल्प दिया है। प्रधानमंत्री जी के नेतृत्व में हमारा देश विश्व की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की ओर अग्रसर है। प्रधानमंत्री जी के इस संकल्प को साकार करने और विकसित भारत निर्माण के लिए मध्यप्रदेश में निरंतर प्रयास किये जा रहे हैं। प्रदेश में उद्योग वर्ष मनाने के साथ राज्योत्सव की थीम 'उद्योग और रोज़गार' रखी गई है। इसमें प्रदेश के सतत विकास, सांस्कृतिक समृद्धि और जनभागीदारी का भाव है। यशस्वी प्रधानमंत्री जी की प्रेरणा से हमें निवेश और औद्योगिक विकास की यात्रा को परिणाम में बदलने का अवसर प्राप्त हो रहा है। विविधता से समृद्ध मध्यप्रदेश के हर क्षेत्र की अपनी विशेषता, क्षमता और दक्षता है, जिसमें अनंत संभावनाएं हैं। इसी को केन्द्र में रखकर हमने प्रदेश में रीजनल इन्वेस्टर्स समिट का नवाचार किया। मुझे यह बताते हुए प्रसन्नता है कि प्रदेश के हर क्षेत्र का कौशल और उद्योग इसमें शामिल हुआ है। व्यापार को सरल बनाने और निवेशकों से सीधे संवाद के लिए हमने मार्च 2024 से उज्जैन से निवेश यात्रा शुरू की और फिर जबलपुर, ग्वालियर, सागर, रीवा, शहडोल, नर्मदापुरम, मुंबई, कोयंबटूर, बेंगलुरु, पुणे, दिल्ली, यूके, जर्मनी, जापान, दुबई तक इसे विस्तार दिया। विभिन्न सम्मेलनों, राष्ट्रीय अंतर्राष्ट्रीय रोड-शो के माध्यम से मध्यप्रदेश के निवेश में कई गुना वृद्धि हुई है। निवेशकों को एक सक्षम, सरल और सुरक्षित वातावरण प्रदान किया गया है। प्रदेश में इनोवेशन हब, स्टार्टअप पॉलिसी, फंडिंग सपोर्ट और इन्क्यूबेशन नेटवर्क स्थापित कर देश की स्टार्टअप क्रांति को गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई जा रही है। मुझे यह बताते हुए खुशी है कि मध्यप्रदेश ने पिछले एक वर्ष में औद्योगिक निवेश के क्षेत्र में कई ऐतिहासिक उपलब्धियां प्राप्त की हैं। ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट में घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय निवेशकों ने प्रदेश में निवेश के प्रति गहरी रुचि दिखाई है। खनिज कॉन्क्लेव में प्रदेश को 56 हजार करोड़ से अधिक के निवेश प्रस्ताव मिले, जो खनिज नीति और प्रशासनिक सरलता का परिणाम हैं। आईटी पार्क, इलेक्ट्रॉनिक निर्माण इकाइयां और नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में भी निवेश को प्रोत्साहन मिला है। मुझे यह बताते हुए हर्ष है कि प्रदेश एक ऐसे परिवर्तनकाल से गुजर रहा है जहां निवेश, नवाचार और रोज़गार आधार स्तंभ हैं। लगभग दो वर्षों में प्रदेश ने उद्योग, कृषि, दुग्ध उत्पादन, पर्यावरण, ऊर्जा और सामाजिक सशक्तिकरण के क्षेत्र में अनेक ऐतिहासिक उपलब्धियाँ अर्जित की हैं। भारत के समग्र विकास के लिए प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने हमें गरीब, युवा, अन्नदाता और नारी (GYAN) के सम्मान का मंत्र दिया है। विकास के इन आधार स्तंभ के अनुरूप प्रदेश विकास और कल्याण के लिए युवा शक्ति, गरीब कल्याण, किसान कल्याण और नारी सशक्तिकरण मिशन के तहत कार्य किया जा रहा है। गरीब कल्याण मिशन में स्वरोज़गार और सामाजिक सुरक्षा योजनाओं, आवास, शिक्षा एवं स्वास्थ्य की सुविधा आदि की दिशा में कार्य किया जा रहा है। मध्यप्रदेश कौशल विकास मिशन और स्टार्टअप नीति 2025 ने युवाओं को जॉब सीकर से जॉब क्रिएटर में परिवर्तित किया है। कौशल विकास मिशन के माध्यम से युवाओं को उद्योग-आधारित प्रशिक्षण दिया जा रहा है। रोज़गार मेले, अप्रेंटिसशिप कार्यक्रम और डिजिटल स्किल सर्टिफिकेशन जैसे प्रयास युवाओं को रोज़गार से जोड़ रहे हैं। रोज़गार सृजन हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। शासकीय और निजी क्षेत्रों में युवाओं के लिए स्थायी, कुशल और सम्मानजनक अवसर उपलब्ध किये जा रहे हैं। मध्यप्रदेश देश का पहला राज्य है जिसने शासकीय भर्ती का कैलेण्डर जारी किया और उसके अनुरूप भर्ती प्रक्रिया भी आरंभ हो गई है। कृषि क्षेत्र को नवाचार के साथ सशक्त बनाने की दिशा में एक नई क्रांति का सूत्रपात हुआ है। प्रदेश सरकार ने ड्रोन आधारित फसल निरीक्षण, स्मार्ट सिंचाई प्रणाली और कृषि उत्पाद मूल्य संवर्धन पर विशेष फोकस किया है। प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना और मुख्यमंत्री खेत-तालाब योजना सहित अन्य प्रयासों से किसानों के लिए सिंचाई क्षेत्र बढ़ाने का लगातार प्रयत्न किया जा रहा है। केन-बेतवा और पार्वती-कालीसिंध-चंबल लिंक परियोजना से प्रदेश के किसानों को सिंचाई और पानी की सुविधा व्यापक स्तर पर उपलब्ध होगी। प्रदेश में सिंचाई का रकबा 52 लाख हेक्टेयर से अधिक हो चुका है। इसे दोगुना करने का लक्ष्य है। आगामी 3 वर्षों में सिंचाई क्षेत्र का रकबा 100 लाख हेक्टेयर करने की योजना है। कृषि उपज का प्रत्यक्ष भुगतान, ऑनलाइन मंडी व्यवस्था और जैविक खेती के प्रोत्साहन ने अन्नदाताओं की आय में वृद्धि की है। मध्यप्रदेश गेहूं, सोयाबीन, चना और मसालों के उत्पादन में अग्रणी प्रदेश हैं। महिला सशक्तिकरण को आर्थिक स्वावलंबन से जोड़ने की दिशा में नारी शक्ति मिशन परिवर्तनकारी सिद्ध हो रहा है। लाड़ली बहना योजना … Read more

किन्नर विधायक को ठहरने नहीं दिया! — MP के गेस्ट हाउस में SDM की हरकत पर मचा बवाल

दतिया  यह किसी विडंबना से कम नहीं कि जिस अखिल भारतीय किन्नर महासम्मेलन की वे मुख्य अतिथि थीं, उसी सम्मेलन में शामिल होने आईं देश की पहली किन्नर विधायक शबनम मौसी को ठहरने की जगह नहीं मिली। शबनम मौसी को दतिया के रेस्ट हाउस में ठहरने की अनुमति नहीं दी गई, जिसके चलते उन्हें कई घंटे असुविधा झेलनी पड़ी। जानकारी के अनुसार, शबनम मौसी 22 से 31 अक्टूबर तक रामजी वाटिका में आयोजित किन्नर महासम्मेलन में शामिल होने दतिया पहुंचीं थीं। उन्होंने एसडीएम संतोष तिवारी से विश्राम गृह में रुकने की अनुमति मांगी, लेकिन एसडीएम ने अधिकृत लेटर पैड पर आवेदन की मांग की। शबनम मौसी ने बताया कि वे पूर्व विधायक हैं और वर्तमान में उनके पास कोई अधिकृत लेटर पैड नहीं है। उन्होंने सादे कागज पर हस्ताक्षर सहित आवेदन देने की बात कही, लेकिन अनुमति नहीं दी गई। कई घंटे तक प्रयासों के बावजूद जब रेस्ट हाउस में प्रवेश नहीं मिला, तब स्थानीय कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती के हस्तक्षेप के बाद उन्हें रेस्ट हाउस में ठहरने की अनुमति दी गई। गौरतलब है कि शबनम मौसी वर्ष 2000 में मध्य प्रदेश के शहडोल से देश की पहली किन्नर विधायक चुनी गई थीं। वे सामाजिक समानता और तीसरे लिंग के अधिकारों की आवाज़ बनकर लंबे समय से सक्रिय हैं। इस पूरे प्रकरण पर एसडीएम संतोष तिवारी का कहना है कि शबनम मौसी द्वारा विधिवत लेटर पैड या पहचान पत्र प्रस्तुत नहीं किया गया था। ऐसे में नियमों के तहत रेस्ट हाउस खुलवाना संभव नहीं था। बाद में जानकारी मिलने पर उन्हें ठहरने की अनुमति दे दी गई।  

जनरल द्विवेदी बोले सतना में: ऑपरेशन सिंदूर जारी, धार्मिक स्थलों पर हमले से हमेशा बचते हैं

सतना  थल सेनाध्यक्ष जनरल उपेंद्र द्विवेदी शनिवार को सतना के कृष्ण नगर स्थित सरस्वती उच्चतर माध्यमिक विद्यालय पहुंचे. यहां पर वह छात्र-छात्राओं के परिचर्चा कार्यक्रम में शामिल हुए. इस दौरान उनका विद्यालय प्रबंधन द्वारा शॉल, श्रीफल और मोमेंटो देकर सम्मान किया गया. जनरल उपेंद्र द्विवेदी इसी विद्यालय के पूर्व छात्र भी हैं. यहां उन्होंने कक्षा चौथी तक पढ़ाई की. उनकी यादें इस विद्यालय से जुड़ी हैं. स्कूल पहुंचकर अपने बचपन को याद किया थल सेनाध्यक्ष जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने ऑपरेशन सिंदूर को बड़ा और कामयाब अभियान बताया. उन्होंने विद्यालय में अध्ययन करने का अनुभव साझा किया. इसके साथ ही सतनावासियों के लिए संदेश दिया "आप चाहे वर्दी में हों या सिविल ड्रेस में हों, राष्ट्रप्रेम और देश निर्माण के लिए लगातार कार्य करते रहिए. विकसित भारत में हम सबको साथ मिलकर मेहनत करनी है. तब जाकर विकसित भारत का सपना 2047 में साकार हो सकेगा. " ऑपरेशन सिंदूर से देश एकजुट जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने कहा "ऑपरेशन सिंदूर का नाम ही पूरे देश को एक साथ जोड़ देता है. भारतीय संस्कृति में सिंदूर का बहुत महत्व है. जब बहन या बेटी सिंदूर लगाती है तो वह हमेशा अपने सैनिकों को याद करती है. जो सरहद पर दिन-रात तैनात रहते हैं. ऑपरेशन सिंदूर इसलिए सफल हुआ, क्योंकि हमने सैद्धांतिक और टेक्निकल कंबाइंड करके लड़ाई की. इस दौरान हमने ये भी तय किया कि किसी नागरिक का नुकसान न हो. केवल आतंकियों के खिलाफ ये मुहिम थी."  आर्मी चीफ बोले- ऑपरेशन सिंदूर ने देश को बांधा आर्मी चीफ उपेंद्र द्विवेदी ने ऑपरेशन सिंदूर को लेकर कहा, इस अभियान ने पूरे देश को एक सूत्र में बांधा। सिद्धांत और तकनीक के संयोजन से मिशन सफल हुआ। पाकिस्तान को साफ संदेश दिया कि हम धर्म युद्ध के अनुयायी हैं और आगे भी यही नीति अपनाएंगे। 'स्कूल से मिली निर्णय लेने की क्षमता' उन्होंने कहा कि स्कूल के दिनों में सीखी निर्णय क्षमता ने उन्हें सेना में कई सफलताएं दिलाईं। चौथी कक्षा में यहीं से निर्णय लेने की क्षमता मिली, इसी ने ऑपरेशन सिंदूर में निर्णायक सफलता दिलाई। उन्होंने आगे बताया कि यह वही स्कूल है, जिसने उनके व्यक्तित्व और राष्ट्र सेवा के संकल्प को मजबूत किया। आर्मी चीफ ने छात्रों को सफलता का मंत्र दिया जनरल द्विवेदी ने छात्रों से कहा, सफलता की नींव विद्यार्थी जीवन में ही रखी जाती है। उन्होंने सफलता का मंत्र Three-A (Attitude, Adaptibility, Ability) बताया। उन्होंने कहा कि Attitude से सकारात्मक दृष्टिकोण और पॉजिटिविटी आती है। Adaptibility से आप अपने अंदर समय के साथ बदलाव ला सकते हैं और Ability आपको हर क्षेत्र में सफलता दिलाएगी। उन्होंने कहा कि कठिन परिश्रम करने वाला ही भविष्य में देश का निर्माण करता है। आप वर्दी में हों या सिविल ड्रेस में, राष्ट्र सेवा में अपना योगदान दें। यह देश हमारा है। जब हम सब मिलकर काम करेंगे तभी 2047 का विकसित भारत बनेगा। सरस्वती स्कूल के अनुभव शेयर किए अपने स्कूल सरस्वती उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में अध्ययन करने के अनुभव के बारे में जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने बताया "जब आप बालक होते हैं और छोटे होते हैं तो आप उस उम्र में जो भी सीखते हैं, वह आपके साथ जिंदगी भर रहता है. यह स्कूल किस तरीके से आगे बढ़ गया है, यहां से कितने आईपीएस, आईएएस, फौजी और कितने डॉक्टर और इंजीनियर निकले हैं, ये सब देख रहे हैं." वहीं, थल सेनाध्यक्ष के दौरे को देखते हुए सेना की टीमों ने डॉग स्क्वाड सहित अत्याधुनिक मशीनरी के साथ सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लिया. इस दौरान उनके बारे में महापौर योगेश ताम्रकार ने भी उन्हें सहपाठी बताया. 

रतलाम में धर्मांतरण मामले में SIT जांच, केरल से पास्टर को हर महीने मिलती थी 60 हजार सैलरी; रिमांड में उगले राज

रतलाम  इलाज के बहाने धर्मांतरण कराने के आरोपों से जुड़े रतलाम केस में अब जांच का दायरा बढ़ा दिया गया है। पुलिस अधीक्षक अमित कुमार ने इस मामले में विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया है। जांच के दौरान सामने आया है कि झाबुआ से पकड़े गए पास्टर गॉडविन को केरल स्थित संस्था से हर महीने ₹60,000 सैलरी मिलती थी, जिसमें से वह ₹4,000 से ₹5,000 मुख्य आरोपी विक्रम सिंह के खाते में भेजता था। दो दिन की पुलिस रिमांड पूरी होने के बाद कोर्ट ने पास्टर गॉडविन को न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया है।  केरल की संस्था से जुड़ा था पास्टर गॉडविन पुलिस पूछताछ में पता चला कि गॉडविन झाबुआ जिले के मोहनपुरा में एक चर्च का पास्टर था, जो 'चर्च ऑफ साउथ इंडिया' नामक संस्था से जुड़ा है। यह संस्था केरल की राजधानी त्रिवेंद्रम में स्थित है। पास्टर का काम धार्मिक प्रचार, प्रार्थना आयोजन और चर्च की गतिविधियों की देखरेख करना था। संस्था द्वारा उसे हर महीने वेतन दिया जाता था।  मुख्य आरोपी विक्रम को भेजता था रकम गॉडविन ने स्वीकार किया कि वह विक्रम सिंह के खाते में पैसे भेजता था, लेकिन उसका दावा है कि यह “मदद” के रूप में भेजे गए थे। पुलिस इस दावे से संतुष्ट नहीं है और पैसों के लेन-देन के पीछे के वास्तविक उद्देश्य की जांच कर रही है।  CSP सत्येंद्र घनघोरिया की अगुवाई में SIT धर्मांतरण के इस मामले की गहराई तक जांच के लिए SP अमित कुमार ने 6 सदस्यीय SIT गठित की है, जिसका नेतृत्व CSP सत्येंद्र घनघोरिया करेंगे। टीम में नामली थाना प्रभारी गायत्री सोनी, औद्योगिक थाना प्रभारी सत्येंद्र रघुवंशी, सायबर सेल और अन्य अधिकारी शामिल हैं। यह टीम अब तक हुई पूरी जांच की समीक्षा करेगी और आवश्यकतानुसार केरल जाकर साक्ष्य जुटाएगी।  इलाज के बहाने धर्मांतरण का आरोप 5 सितंबर को शिवशक्ति नगर (रतलाम) में कई ग्रामीणों को “इलाज” के नाम पर एक जगह लाया गया था। सूचना मिलने पर बजरंग दल और हिंदू जागरण मंच ने पुलिस को बुलाया। पुलिस ने मौके से तीन लोगों को गिरफ्तार किया था, जबकि मुख्य आरोपी विक्रम सिंह को अगले दिन पकड़ा गया। छापे के दौरान पुलिस को क्रॉस, बाइबल और प्रार्थना के वीडियो मिले थे, जिससे धर्मांतरण की गतिविधियों की पुष्टि हुई थी।  पास्टर का नाम बैंक जांच में आया सामने मुख्य आरोपी विक्रम के बैंक खातों की जांच में गॉडविन का नाम सामने आया था। इसी आधार पर पुलिस ने उसे झाबुआ से गिरफ्तार किया और रिमांड पर लेकर पूछताछ की।  यह था पूरा मामला रतलाम के थाना औद्योगिक क्षेत्र के शिवशक्ति नगर में 5 सितंबर को बड़ी संख्या में ग्रामीण लोग मिले थे। आरोप लगा था कि इन्हें इलाज के बहाने धर्मांतरण के लिए लाया गया था। बजरंग दल और हिंदू जागरण मंच ने पुलिस को इसकी सूचना दी थी। मौके से पुलिस ने तीन लोगों को गिरफ्तार किया था, जबकि मुख्य आरोपी अगले दिन पकड़ाया था। सभी के खिलाफ धर्मांतरण करने का केस दर्ज किया गया था। मुख्य आरोपी के खाते से जुड़ा पास्टर का नाम जब पुलिस ने मुख्य आरोपी के बैंक खातों की जांच की, तो झाबुआ के मोहनपुरा चर्च के पास्टर गॉडविन का नाम सामने आया था। इसके बाद पुलिस उसे पकड़ कर लाई थी। दो दिन के रिमांड के बाद कोर्ट ने उसे भी जेल भेज दिया है। छापे में मिला था धार्मिक साहित्य और वीडियो शिवशक्ति नगर में कार्रवाई के दौरान पुलिस को क्रॉस टंगा मिला, बाइबल मिली और इलाज के बहाने प्रार्थना करवाने का वीडियो भी सामने आया था। इसी आधार पर धर्मांतरण की गतिविधि की पुष्टि हुई। इनके खिलाफ दर्ज हुआ था केस     जगदीश (30) पिता शम्भूलाल निनामा निवासी रिछखोरा थाना सरवन हाल मुकाम गंगासागर रतलाम। (नर्सिंग स्टूडेंट)     मांगीलाल (35) पिता शंकरलाल निनामा साल निवासी सागवा थाना बिलकुंआ जिला बांसवाडा (राजस्थान)     गुड्डु उर्फ गुड्डा (18 साल 07 माह) पिता बालू मईडा निवासी गेणी थाना शिवगढ जिला रतलाम।     विक्रम सिंह (35) पिता शम्भूलाल उर्फ शम्भू निनामा निवासी रिछखोरा थाना सरवन हाल मुकाम शिव नगर रतलाम।