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दालों के उत्पादन में प्रथम, खाद्यान्न में द्वितीय और तिलहन में तीसरे स्थान पर मध्यप्रदेश

कृषि के क्षेत्र में मध्यप्रदेश स्थापित कर रहा है नये कीर्तिमान दालों के उत्पादन में प्रथम, खाद्यान्न में द्वितीय और तिलहन में तीसरे स्थान पर मध्यप्रदेश किसानों के हर सुख-दुख में साथ है मध्यप्रदेश सरकार भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में कृषि विकास और किसान कल्याण में मध्यप्रदेश सरकार प्राण-प्रण से जुटी हुई है। मध्यप्रदेश उत्पादक गतिविधियों में नवाचार कर रहा है। सरकार किसानों के हर सुख-दुख में उनके साथ खड़ी है। प्रदेश ने कृषि क्षेत्र में नये कीर्तिमान स्थापित किये हैं। उत्पादन में रिकार्ड दर्ज कर प्रदेश को अनेक अवार्ड हासिल हुए हैं। म.प्र. दालों के उत्पादन में प्रथम स्थान पर, खाद्यान उत्पादन में द्वितीय स्थान पर और तिलहन उत्पादन में तृतीय स्थान पर है। प्रदेश में त्रि-फसली क्षेत्र में भी तेजी से वृद्धि हो रही है। प्रदेश में नरवाई जलाने की घटनाओं में कमी (हतोत्साहित) करने के लिए प्रदेश में प्रभावी कार्यवाही की गई है। किसानों के सम्मान के साथ प्रोत्साहन भी राज्य सरकार द्वारा रबी 2024-25 में उपार्जित गेहूँ पर राशि रूपये 175 प्रति क्विटंल प्रोत्साहन राशि प्रदाय की गई। प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी द्वारा फरवरी 2025 में लगभग 83.50 लाख से अधिक किसानों को करीब 1770 करोड़ रूपये किसान सम्मान निधि सिंगल क्लिक से अंतरित की गई। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा मुख्यमंत्री किसान कल्याण योजना के अंतर्गत 81 लाख से अधिक किसानों के खातों में 1624 करोड़ रूपये सिंगल क्लिक के माध्यम से जमा की गई। पहली बार समर्थन मूल्य पर सोयाबीन की खरीदी प्रदेश में पहली बार भारत सरकार की प्राईस सर्पोट स्कीम अंतर्गत सोयाबीन का उपार्जन किया गया, जिसमें 2,12,568 कृषकों से कुल 6.22 लाख मीट्रिक टन मात्रा का उपार्जन किया गया है, जिसके न्यूनतम समर्थन मूल्य की राशि 3043.04 करोड़ है। अन्न के उत्पादन को बढावा देने के लिए रानी दुर्गावती अन्न प्रोत्साहन योजना लागू की है, जिसके तहत किसानों को 3900 रूपये प्रति हैक्टेयर डी.बी.टी. के माध्यम से प्रदान किया जायेगा। किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य के साथ फसल बीमा योजना, किसान क्रेडिट कार्ड, स्वाईल हेल्थ कार्ड और सिंचाई सुविधाओं में वृद्धि का लाभ भी मिल रहा है। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के अंतर्गत फसल के नुकसान का समय पर आकलन एवं राहत राशि का वितरण किसानों को मिल रहा है। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में नामांकन एवं दावा प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने, एनसीआईपी पोर्टल के साथ भूमि रिकॉर्ड को सफलता पूर्वक एकीकृत करने और पोर्टल को किसान अनुकूल बनाने के लिए मध्यप्रदेश को 'उत्कृष्टता प्रमाण पत्र' प्रदान किया गया है। नमो ड्रोन दीदी योजनांतर्गत मध्यप्रदेश में 89 दीदियों को स्वाबलंबी बनाया गया है। नमो ड्रोन से 4200 हेक्टेयर क्षेत्र में तरल उरर्वरक का छिड़काव कर दीदियों ने 21.22 लाख रूपये की शुद्ध आय प्राप्त की है। वर्ष 2025-26 में 1066 दीदिओं को योजनांर्तगत लाभान्वित किया जा रहा है। नरवाई प्रबंधन से संबंधित कृषि यंत्र पर 412 करोड़ का अनुदान कृषकों द्वारा फसल अवशेष (पराली) जलाने से रोकने के लिये शासन द्वारा कई कदम उठाये गये है, जिसमें प्रदेश स्तर पर 46,800 से अधिक नरवाई प्रबंधन से संबंधित कृषि यंत्र अनुदान पर वितरित करते हुए 412 करोड़ रूपये की अनुदान राशि जारी की गई है। कौशल विकास केन्द्रों के माध्यम से किसान ड्रोन पायलट प्रशिक्षण एवं ड्रोन तकनीशियन का प्रशिक्षण प्रदान कराया जा रहा है। प्रशिक्षण में 50 प्रतिशत शुल्क का भुगतान म.प्र. शासन द्वारा वहन किया जा रहा है। अब तक 412 युवाओं को ड्रोन पायलट का प्रशिक्षण तथा 33 प्रशिक्षणार्थियों को ड्रोन तकनीशियन का प्रशिक्षण प्रदान किया गया। 4730 कस्टम हायरिंग केन्द्रों से कृषक हो रहे लाभान्वित कृषकों को सस्ते दर पर यंत्र उपलब्ध कराने एवं ग्रामीण युवाओं को स्वावलंबी बनाये जाने के लिये सरकार के संकल्प के अनुसार हर वर्ष 1000 कस्टम हायरिंग केन्द्र स्थापित किये जा रहे है। अब तक 4730 कस्टम हायरिंग केन्द्र प्रदेश स्तर पर स्थापित है जिससे कृषकों को लाभ मिल रहा है। कस्टम हायरिंग के 25 लाख रूपये तक के प्रोजेक्ट पर 40 प्रतिशत अधिकतम 10 लाख रूपये का अनुदान दिया जाता है। प्रदेश में अपेडा अन्तर्गत 11.48 लाख हेक्टयर फसल उत्पादन क्षेत्र एवं वनोपज संग्रहण क्षेत्र सहित कुल 20.55 लाख हेक्टयर जैविक क्षेत्र पंजीकृत है। "एक जिला एक उत्पाद" अंतर्गत कृषि संबंधी 6 उत्पाद कोदो-कुटकी-अनूपपुर, डिंडौरी, मंडला, सिंगरौली, तुअर दाल- नरसिंहपुर, चना-दमोह, बासमति चावल-रायसेन, चिन्नोर चावल-बालाघाट, सरसों-भिण्ड एवं मुरैना जिले शामिल किये गये है। फार्म गेट एप के तहत किसान अपनी उपज का विवरण, फोटो मोबाइल एप्लिकेशन पर डाल कर मंडी मे पंजीकृत व्यापारियों के साथ मोल भाव कर सकता है। सौदा तय होने पर किसान की सहमति प्राप्त कर व्यापारी सीधे किसान के गाँव / खेत से उपज उठा लेता है। इससे भौतिक रूप से माल के परिवहन की आवश्यकता नहीं रहती और माल न बिकने की अनिश्चितता को समाप्त करता है। मंडी के माध्यम से किसान को मंडी अनुबंधित व्यापारी का चयन कर खेत/गोदाम पर ही फसल बेचने की सुविधा है। रानी दुर्गावती अन्न प्रोत्साहन योजना रानी दुर्गावती अन्न प्रोत्साहन योजना में किसानों को एक हजार रुपये प्रति क्विंटल की दर से अधिकतम 3 हजार 900 रुपये प्रति हेक्टेयर की सहायता दी जा रही है। शून्य प्रतिशत ब्याज पर अल्पकालीन फसल ऋण के लिए इस वर्ष 600 करोड़ रुपये की राशि का प्रावधान किया गया है। विगत वर्ष किसानों को समर्थन मूल्य पर उपार्जित गेहूँ पर प्रति क्विंटल 125 रुपये का बोनस प्रदाय किया गया।  

मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं के सुदृढ़ीकरण में महत्वपूर्ण कदम

सोनोग्राफी सेवाओं के लिए 87 मेडिकल ऑफिसर हुए अधिकृत मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं के सुदृढ़ीकरण में महत्वपूर्ण कदम भोपाल  उप मुख्यमंत्री  राजेन्द्र शुक्ल ने कहा है कि प्रदेश में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ बनाने की दिशा में यह एक ऐतिहासिक उपलब्धि है कि 11 वर्षों के सतत् विभागीय प्रयासों और समर्पित कार्य के बाद पीसीपीएनडीटी अधिनियम के अंतर्गत कम्पिटेंसी बेस्ड टेस्ट के परिणाम घोषित किए गए हैं। मध्यप्रदेश आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय, जबलपुर द्वारा घोषित परिणामों में 87 चिकित्सक (मेडिकल ऑफिसर्स) ने सफलता प्राप्त की है। अब ये सभी पात्र चिकित्सक सोनोग्राफी (अल्ट्रासाउंड) के क्षेत्र में वैध रूप से चिकित्सकीय सेवाएं प्रदान कर सकेंगे। उप मुख्यमंत्री  शुक्ल ने कहा कि यह उपलब्धि प्रदेश की मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने में अत्यंत सहायक सिद्ध होगी। प्रशिक्षित एवं प्रमाणित चिकित्सक ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में गुणवत्तापूर्ण अल्ट्रासाउंड सेवाएं उपलब्ध कराकर गर्भवती महिलाओं की एएनसी जांच सेवाओं को सशक्त करेंगे। उप मुख्यमंत्री  शुक्ल ने सफल हुए सभी चिकित्सकों को बधाई देते हुए उनसे अपेक्षा की कि वे इस उपलब्धि को समाजसेवा का माध्यम बनाते हुए प्रदेश के प्रत्येक कोने में सेवा की भावना से कार्य करें। उन्होंने कहा कि आप सभी चिकित्सक प्रदेश की स्वास्थ्य सुरक्षा के अग्रदूत हैं, आपकी सेवा भावना और दक्षता से ही ‘स्वस्थ मध्यप्रदेश’ के लक्ष्य को प्राप्त किया जा सकेगा। उन्होंने प्रशिक्षण एवं परीक्षा प्रक्रिया में सहयोग देने वाले सभी अधिकारियों, विशेषज्ञों और संस्थानों की सराहना की है।  

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने 1 नवंबर मध्यप्रदेश स्थापना दिवस समारोह के संबंध में दिए निर्देश

आत्मनिर्भर भारत और आत्मनिर्भर मध्यप्रदेश के लिए हुए प्रयासों को प्रमुखता से करें प्रदर्शित राजधानी के साथ संभाग और जिला स्तर पर भी हों भव्य कार्यक्रम   भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि 1 नवंबर मध्यप्रदेश स्थापना दिवस उद्योग एवं रोजगार वर्ष की थीम पर मनाया जाए। आत्मनिर्भर भारत और आत्मनिर्भर मध्यप्रदेश को लेकर हुए नवाचारों और विशेष गतिविधियों का प्रभावी रूप से प्रस्तुतीकरण किया जाए। 'रोजगार के मंदिर हैं उद्योग' की थीम के साथ कौशल उन्नयन, तकनीकी शिक्षा, उद्यमशीलता के विकास सहित युवाओं को रोजगार और आत्मनिर्भरता से जोड़ने वाली सभी गतिविधियों का स्थापना दिवस संबंधी कार्यक्रमों में प्रभावी और आकर्षक प्रस्तुतीकरण किया जाए।  साथ ही प्रदेश में धार्मिक, सांस्कृतिक और पर्यटन गतिविधियों से अर्थव्यवस्था में आई गतिशीलता पर भी प्रस्तुतीकरण हों। स्थापना दिवस पर बीते दो वर्षों में हुए नवाचारों को भी प्रदर्शित किया जाए। स्थापना दिवस को राज्य उत्सव के रूप में मनाया जाए। भोपाल में होने वाले राज्य स्तरीय कार्यक्रम के साथ सभी जिला और संभागीय मुख्यालयों पर भी भव्य कार्यक्रम आयोजित हों। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने 1 नवंबर मध्यप्रदेश स्थापना दिवस समारोह के संबंध में मंत्रालय में सोमवार को हुई बैठक में यह निर्देश दिए। प्रसिद्ध पार्श्व गायक श्री जुबिन नौटियाल एक नवम्बर को देंगे प्रस्तुति बैठक में बताया गया कि मध्यप्रदेश स्थापना दिवस 1 नवंबर को भोपाल में होने वाले राज्य स्तरीय कार्यक्रम में प्रसिद्ध पार्श्व गायक श्री जुबिन नौटियाल प्रस्तुति देंगे। लाल परेड ग्राउंड में होने वाले इस कार्यक्रम में श्रीकृष्ण के भक्ति पदों की प्रस्तुति के साथ ही विरासत से विकास की थीम पर ड्रोन-शो होगा। साथ ही आतिशबाजी भी होगी। मध्यप्रदेश स्थापना दिवस पर दो और तीन नवंबर को राज्य स्तरीय कार्यक्रम में लाल परेड ग्राउंड पर महानाट्य -सम्राट विक्रमादित्य की प्रस्तुति होगी। साथ ही दो एवं तीन नवम्बर को सुगम संगीत की प्रस्तुतियां भी होंगी। औद्योगिक विकास और अर्थव्यवस्था की उपलब्धियां भी होंगी प्रदर्शित मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि स्थापना दिवस समारोह की गतिविधियों में विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं और विकास कार्यों के हितग्राहियों को भी शामिल किया जाए। उनके सम्मेलन और रैलियां आयोजित हों। साथ ही जिलों में प्रमुख उद्योगपतियों और प्रदेश की अर्थव्यवस्था में योगदान देने वाले व्यक्तियों और समूहों की उपलब्धियों को भी शामिल किया जाए। प्रदेश के सभी अंचलों में समान रूप से गतिविधियां हों, हर जिला अपनी प्रगति और उपलब्धियों जिला स्तर पर प्रस्तुत करे। साथ ही स्व-सहायता समूह और आईटीआई, पॉलिटेक्निक सहित अन्य संस्थाओं द्वारा युवाओं, महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए किए गए प्रयासों, कृषक संगठनों द्वारा किसान कल्याण के लिए संचालित गतिविधियों के प्रदर्शन को भी समारोह का हिस्सा बनाया जाए। विभिन्न विषयों पर प्रदर्शनियों के साथ लगेगा देशज व्यंजनों का मेला बैठक में बताया गया कि स्थापना दिवस पर जननायकों के जीवन और अवदान पर भोपाल और जिला मुख्यालयों पर प्रदर्शनी आयोजित की जाएगी। इसके साथ 'एक जिला-एक उत्पाद', सम्राट विक्रमादित्य और अयोध्या, सम्राट विक्रमादित्य के सील और सिक्के, मंदिर स्थापत्य तथा भारतीय ऋषि परम्परा पर प्रदर्शनियों को आयोजन किया जाएगा। इसी क्रम में एक से 3 नवम्बर तक वन मेला, ड्रोन टैक वर्कशॉप और एक्सपो, मध्यप्रदेश की पारंपरिक कला प्रदर्शनी, प्रदेश में विरासत से विकास, प्रदेश की बावड़ियों, भोज और भोपाल आदि विषय पर प्रदर्शनी और देशज व्यंजनों का मेला भी आयोजित किया जाएगा। बैठक में मुख्य सचिव श्री अनुराग जैन, अपर मुख्य सचिव श्री संजय दुबे, श्री नीरज मंडलोई, श्री संजय शुक्ला, श्री शिवशेखर शुक्ला, प्रमुख सचिव श्री राघवेंद्र सिंह और मुख्यमंत्री के संस्कृति सलाहकार श्री श्रीराम तिवारी उपस्थित थे।  

शिक्षक बनने का मौका! MP SET 25 अक्टूबर से खुलेंगे आवेदन, सिर्फ NET सिलेबस मान्य

इंदौर मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग (एमपीपीएससी) ने राज्य पात्रता परीक्षा (सेट) 2025 के लिए दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं। परीक्षा के लिए आयोग ने कोई अलग से सिलेबस तय नहीं किया है, बल्कि यूजीसी की नेट परीक्षा का पाठ्यक्रम ही मान्य किया गया है। उम्मीदवार इसी सिलेबस के आधार पर परीक्षा की तैयारी कर सकते हैं। अधिकारियों के मुताबिक राज्य पात्रता परीक्षा के माध्यम से अभ्यर्थियों को राज्य के कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में सहायक प्राध्यापक पद के लिए पात्रता होंगे। विशेषज्ञों के मुताबिक सेट परीक्षा में दो पेपर होंगे। पहला पेपर सभी अभ्यर्थियों के लिए अनिवार्य होगा, जिसमें शिक्षण एवं शोध योग्यता, बोधगम्यता, संचार, तार्किक तर्क, डेटा व्याख्या, आईसीटी, लोग एवं विकास, पर्यावरण तथा उच्च शिक्षा प्रणाली जैसे 10 विषयों से प्रश्न पूछे जाएंगे। यह पेपर अभ्यर्थियों की सामान्य योग्यता और समझ की जांच करेगा। दूसरा पेपर उम्मीदवार के चुने हुए विषय पर आधारित होगा, जिसमें स्नातकोत्तर स्तर के पाठ्यक्रम से प्रश्न पूछे जाएंगे।   11 जनवरी 2025 को परीक्षा का आयोजन परीक्षा का आयोजन 11 जनवरी 2025 को किया जाएगा। दोनों पेपर एक ही दिन तीन घंटे में होंगे। आयोग ने दोनों प्रश्न पत्रों के कुल 300 अंक रखे गए हैं। पहले पेपर में 50 प्रश्न होंगे, जिनके कुल 100 अंक होंगे, जबकि दूसरे पेपर में 100 प्रश्न होंगे, जो 200 अंकों के होंगे। हर सही उत्तर के लिए 2 अंक मिलेंगे और गलत उत्तर पर कोई नेगेटिव मार्किंग नहीं होगी। परीक्षा हिन्दी और अंग्रेजी दोनों माध्यमों में दी जा सकेगी। आवेदन प्रक्रिया 25 अक्टूबर से शुरू एमपीपीएससी ने आवेदन प्रक्रिया 25 अक्टूबर से 20 नवंबर 2025 तक रखी है। इस वर्ष परीक्षा 31 विषयों में आयोजित की जाएगी। परीक्षा के लिए प्रदेशभर में 12 परीक्षा केंद्र बनाए गए हैं। इसमें भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर, रीवा, सतना, सागर, उज्जैन, शहडोल, खरगोन, रतलाम और नर्मदापुरम शामिल है।

मंत्री तोमर ने कहा- सिंहस्थ के कार्य निर्धारित समय-सीमा में पूर्ण करें एम.पी. ट्रांसको

भोपाल   मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देश पर ऊर्जा मंत्री श्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने मुख्यालय जबलपुर में मध्यप्रदेश पॉवर ट्रांसमिशन कंपनी (एम.पी. ट्रांसको) द्वारा सिंहस्थ-2028 के लिये किये जा रहे कार्यों की समीक्षा की। समीक्षा में ऊर्जा मंत्री श्री तोमर को एम.पी. ट्रांसको के प्रबंध संचालक सुनील तिवारी ने वर्तमान कार्यों की प्रगति से अवगत कराया। मंत्री श्री तोमर ने निर्देश दिये कि सिंहस्थ-2028 प्रदेश सरकार की प्रमुख प्राथमिकताओं में से एक है, सिंहस्थ के कार्यों की नियमित निगरानी रखी जायें और तय समय सीमा व उच्च गुणवत्ता के साथ सभी कार्य पूरे किये जाये। एम.पी. ट्रांसको उज्जैन में कर रही है यह कार्य मंत्री श्री तोमर ने सिंहस्थ-2028 में उज्जैन में निर्वाध विद्युत आपूर्ति के लिये पहले चरण में निर्माणधीन 132 के.व्ही. सब स्टेशन चिंतामन एवं 132 के.व्ही. सब स्टेशन त्रिवेणी बिहार के निर्माण कार्यों की प्रगति जानी। इसके अलावा एम.पी. ट्रांसकों 220 के.व्ही. सब स्टेशन शंकरपुरा में वर्तमान 20 एम.व्ही.ए. क्षमता के अपग्रेड कर 50 एम.व्ही.ए. क्षमता का तथा अपने 400 के.व्ही. सब स्टेशन ताजपुर में 50 एम.व्ही.ए. क्षमता का नया ट्रांसफार्मर स्थापित कर रही है। जिनकी कार्य प्रगति के बारे मे भी ऊर्जा मंत्री ने जानकारी प्राप्त कर आवश्यक निर्देश दिये।  

घर का सोना-चांदी असली है या नहीं? जानें तुरंत जांचने के आसान तरीके

भोपाल  आपके घर में सोना-चांदी होगा या फिर दिवाली और धनतेरस जैसे त्योहार सामने आ रहे हैं, ऐसे में आपके दिमाग में जरूर आ रहा होगा. जो सोना हम खरीद रहे हैं, क्या यह असली है या फिर नकली? क्या हमें बेवकूफ तो नहीं बनाया जा रहा है? सोने-चांदी खरीदते समय यह प्रश्न हर कस्टमर के दिमाग में जरूर होता है, लेकिन अब इसकी पहचान चुटकियों में हो जाएगी. हालांकि सोने और चांदी जानने की कई विधियां आपने सोशल मीडिया पर देखी होगी. लेकिन उन विषयों विधियों पर बिल्कुल भी विश्वास न करें. क्योंकि सोने और चांदी की सबसे अच्छी पहचान हॉलमार्क के अलावा कुछ भी नहीं हो सकती. ऐसा हम नहीं ऐसा सराफा के एक्सपर्ट्स कहते हैं. 6 अंक का डिजिट बताता है सोने की शुद्धता एक्सपर्ट अभिजीत जैन के मुताबिक, सोना खरीदते समय BIS का लोगो जरूर देखें. यह लोगों सोने की शुद्धता को बताता है. सोने की शुद्धता का कैरेट और नंबर को देखना चाहिए. जहां 22K 218 जैसे नंबर लिखे होते हैं. यह 6 अंक के डिजिट एचयूआईडी नंबर कहलाते हैं. यदि इस नंबर को BIS केयर ऐप में डाला जाए. तब सारी जानकारी जेवर से संबंधित मिल जाती है कि आपने कौन सा जेवर खरीदा है और इसकी शुद्धता के साथ इसे कब बनाया गया है. कम रेट होने पर हो जाएं अलर्ट इसके अलावा चांदी के निशान में भी BIS के निशान होते हैं, जिसमें 975 जैसे अंक लिखे होते हैं. जिसका मतलब होता है कि आपके द्वारा ली गई चांदी 97.5% शुद्ध चांदी है. उन्होंने बताया सोने और चांदी को पहचानने का यह तरीका सबसे बेस्ट होता है, इसके अलावा कोशिश करनी चाहिए, मार्केट में अच्छी छवि वाले सराफा व्यापारी से ही सोने-चांदी को खरीदना चाहिए. उन्होंने बताया हॉलमार्क देखना जरूरी होता है क्योंकि मार्केट में अधिकांश 22 कैरेट, 18 कैरेट और 20 कैरेट के जेवर आते हैं. जहां 22 कैरेट के सोने को 18 कैरेट का बताकर कुछ दुकान दर कम रेट में बेच देते हैं. इसीलिए कम रेट होने पर हॉलमार्क जरूर देखना चाहिए. घरों में इस तरह अपनाई जा सकती है ट्रिक  हालांकि, घरों में भी सोने और चांदी का परीक्षण किया जा सकता है, लेकिन इसकी गारंटी नहीं होती. जैसे चुंबक का उपयोग कर सोने का परीक्षण किया जा सकता है. अगर सोना चिपकता है तो उसमें मिलावट हो सकती है. इतना ही नहीं असली सोने को, पानी में भरें बर्तन में डालें. अगर यह तुरंत डूब जाता है तो यह असली है. जबकि सोना धीरे-धीरे डूबता है या फिर तैरता है, तब सोना नकली हो सकता है. चांदी के परीक्षण में चांदी पर बर्फ का एक टुकड़ा रखें. अगर बर्फ बहुत जल्दी पिघलती है, तो चांदी असली है. इसके साथ ही चांदी के सिक्के को जमीन पर गिराए, अगर घंटी जैसी आवाज आती है. तो वह असली चांदी हो सकती है.  

मध्य प्रदेश में हज 2026 के लिए महिला महरम कोटे में 500 सीटें जारी

भोपाल  मप्र सहित देश भर से 500 महिलाएं अगले साल महरम कोटे से हज के मुकद्दस सफर पर जाएंगी। इसके लिए ऑन लाइन आवेदन शुरू हो गए हैं। अंतिम तिथि 31 अक्टूबर तय की गई है। इस संबंध में केंद्रीय हज कमेटी द्वारा दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं।  इस सुविधा के लिए वे ही महिलाएं आवेदन के लिए पात्र होंगी, जिनके परिजन में से पहले किसी का हज यात्रा के लिए चयन हो चुका है। अब उन महिलाओं के पास पोर्ट भी बन गए हैं। आवेदन हज कमेटी की वेबसाइट पर किए जा सकेंगे। इसके लिए 2026 दिसंबर तक का वेलिड पासपोर्ट अनिवार्य है। आवेदन अधिक आने पर हज कमेटी द्वारा कुर्रा निकाला जाएगा।  

देश का नया स्पोर्ट्स साइंस हब बनेगा भोपाल, जल्द शुरू होगा हाई-परफॉर्मेंस सेंटर

भोपाल  मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में खेलों की दुनिया को एक नई दिशा देने की तैयारी चल रही है। नाथू बरखेड़ा में लगभग 25 करोड़ रुपये की लागत से एक अत्याधुनिक स्पोर्ट्स साइंस एवं हाई-परफॉर्मेंस सेंटर की स्थापना हो रही है, जो खिलाड़ियों की वैज्ञानिक पद्धतियों पर आधारित तैयारी को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाएगा। यह केंद्र मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की विशेष पहल पर विकसित किया जा रहा है, जो स्वयं खेलों के प्रति गहरी रुचि रखते हैं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का मानना है कि आज के समय में केवल पारंपरिक अभ्यास पर्याप्त नहीं है, बल्कि खिलाड़ियों को मानसिक, शारीरिक और तकनीकी रूप से भी सशक्त बनाना जरूरी है। खेल विशेषज्ञों का कहना है कि कई बार प्रतिभावान खिलाड़ी सिर्फ तकनीकी गलतियों, मानसिक दबाव या बार-बार लगने वाली चोटों के कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर तक नहीं पहुंच पाते। इन चीजों पर रहेगा विशेष ध्यान इस नए सेंटर में वैज्ञानिकों, मनोवैज्ञानिकों, पोषण विशेषज्ञों, फिजियोथेरेपिस्टों और डेटा एनालिस्ट्स की विशेषज्ञ टीम खिलाड़ियों की कमजोरी और जरूरतों के हिसाब से व्यक्तिगत प्रशिक्षण योजनाएं तैयार करेगी। यहां बॉयोमेकेनिक्स, स्पोर्ट्स न्यूट्रिशन, मेंटल कंडीशनिंग और डेटा आधारित परफॉर्मेंस एनालिसिस पर खास फोकस रहेगा। नेशनल स्पोर्ट्स साइंस हब यह पहल न केवल मध्य प्रदेश के खिलाड़ियों को ओलंपिक और एशियाई खेलों जैसे अंतरराष्ट्रीय मंचों पर बेहतर प्रदर्शन के लिए तैयार करेगी, बल्कि भोपाल को देश का नेशनल स्पोर्ट्स साइंस हब बनाने की दिशा में भी एक बड़ा कदम साबित होगी। भारत को वैश्विक खेल शक्ति बनाने के इस संकल्प में यह सेंटर एक मील का पत्थर साबित हो सकता है। 

भोपाल पुलिस के लिए नया नियम: मौके पर जाने से पहले पहनना होगा बॉडी कैमरा

भोपाल  बहुचर्चित डीएसपी के साले उदित गायकी की मौत के बाद पुलिस प्रशासन ने बड़ा फैसला लिया है। राजधानी भोपाल के साथी थानों में तैनात पुलिस जवान के हर कदम और कार्रवाई पर कैमरे की नजर होगी। रात में किसी भी तरह की सूचना पर इस कैमरा को पहनकर ही घटना स्थल पर जाना अनिवार्य है। पुलिस कमिश्नर हरिनारायण चारी मिश्र ने बताया कि शहर के गश्ती जवानों को बॉडी कैमरा(Bhopal Police) और रिकॉर्डिंग डिवाइस से लैस करने का आदेश जारी किया है। इसके लिए 200 कैमरों का ऑर्डर दिया जा चुका है। कंट्रोल रूम से सीधे होगी कंट्रोलिंग पुलिस कमिश्नर ने बताया कि शुरुआत में यह कैमरे रात में गश्त करने वाली टीमों को दिए जाएंगे। जवानों की वर्दी की जेब और कंधे पर कैमरा लगाया जाएगा, जो वीडियो और ऑडियो की रिकॉर्डिंग करेगा। किसी भी घटना, कार्रवाई के दौरान कैमरा ऑटोमेटिक चालू रहेगा। जिसकी कंट्रोलिंग कंट्रोल रूम से रहेगा। अब पुलिसिंग कार्रवाई में पारदर्शी रहें। पुलिस पर नहीं उठेंगे सवाल पुलिस प्रशासन ने यह कदम इसलिए उठाया कि पुलिसिंग में पारदर्शिता लाना है। उदित की मौत के बाद पुलिस की कार्यशैली पर उठे सवालों पर अब पुलिस पर लोगों के भरोसे को और मजबूत करेगा। गश्त के दौरान होने वाली कार्रवाई कैमरे में रेकॉर्ड होगी। इससे घटना या शिकायत के मामले में फुटेज साक्ष्य के रूप में काम करेगा। यह शहर के सभी थानों और विशेष इकाइयों में लागू करेंगे, साथ ही पुलिसकर्मियों को कैमरा ऑपरेट करने की ट्रेनिंग दी जाएगी। नई व्यवस्था लागू की जाएगी इससे जवानों की कार्यप्रणाली में अनुशासन बढ़ेगा और जनता के साथ व्यवहार में भी सुधार आएगा। हर बात रेकॉर्ड होगी तो झूठे आरोप की बात नहीं रहेगी। नई व्यवस्था लागू होने के बाद भोपाल चुनिंदा शहरों में शामिल हो जाएगा। यह सिस्टम से पुलिस की कार्रवाई में पारदर्शिता रहेगी।- हरिनारायण चारी मिश्र, पुलिस कमिश्नर

तमिलनाडु सरकार के रवैये से धीमी पड़ी जांच? कोल्ड्रिफ कांड में SIT की रफ्तार थमी

 छिंदवाड़ा  जहरीले कोल्ड्रिफ कफ सीरप के सेवन से 24 बच्चों की मौत के मामले में 10 अक्टूबर को गठित विशेष एसआईटी टीम लगातार जांच कर रही है। लेकिन जांच की रफ्तार धीमी है। इस जांच में दवा निर्माता कंपनी की फैक्ट्री वाले राज्य तमिलनाडु की सरकार के असहयोग पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। छिंदवाड़ा के सांसद बंटी विवेक साहू ने सीधे तौर पर आरोप लगाया है कि तमिलनाडु सरकार जांच में अपेक्षित सहयोग नहीं कर रही है। जानकारी के अनुसार, इस असहयोग के चलते एसआईटी द्वारा तमिलनाडु के फूड सेफ्टी एंड ड्रग डिपार्टमेंट को नोटिस जारी किया गया है। इस नोटिस में श्रीसन फार्मा (दवा निर्माता कंपनी) के रिकॉर्ड, ऑडिट और कॉम्प्लायंस की जानकारी मांगी गई है। एसआईटी यह पता लगाना चाहती है कि बच्चों की मौत का मामला सामने आने से पहले तमिलनाडु के ड्रग कंट्रोल अधिकारियों ने कब और किस तरह के निरीक्षण किए थे। हालांकि अधिकारियों ने नोटिस जारी करने की पुष्टि नहीं की है। दूषित बैच बाजार में आने से पहले पता लगा लेना चाहिए था मध्य प्रदेश पुलिस और सरकार का मानना है कि यह त्रासदी तमिलनाडु स्थित दवा फैक्ट्री हुई लापरवाही के कारण हुई है और वहां के अधिकारियों को दवा दूषित बैच बाजार में आने से पहले ही इसका पता लगा लेना चाहिए था। मध्य प्रदेश पुलिस की एसआईटी टीम ने तमिलनाडु से श्रीसन फार्मा के मालिक जी. रंगनाथन और महिला लैब तकनीशियन के. महेश्वरी को गिरफ्तार किया है। जांच दल अब नियामक ढांचे के भीतर व्यक्तिगत जवाबदेही पर ध्यान केंद्रित कर रहा है, खासकर इस बात की जांच कर रहा है कि क्या तमिलनाडु के ड्रग कंट्रोल अधिकारियों ने केवल कागजी कार्रवाई पर निरीक्षण किया था, न कि भौतिक सत्यापन पर।