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इलाज में लापरवाही का आरोप, छिंदवाड़ा अस्पताल में महिला की मौत से मचा हड़कंप

छिंदवाड़ा छिंदवाड़ा जिला अस्पताल में पेट दर्द और घबराहट के बाद भर्ती कराई गई महिला की इलाज के दौरान मौत हो गई। मौत को लेकर स्वजनों ने जमकर हंगामा कर दिया। परिजनों ने डॉक्टरों पर गंभीर आरोप लगाए है। परिजनों का कहना है की पहले तो नर्स ने इलाज किया। उसके बाद डॉक्टर पहुंचे। उन्होंने जांच कर पर्ची में दवा लिख दी। रात भर एक के बाद एक लगातार ग्लूकोज की बॉटल लगाते गए, लेकिन मरीज को आराम नहीं लगा। जब डियूटी नर्स को मरीज की गंभीर हालात के बारे में बताया और कहा कि हमारे मरीज को रेफर कर दीजिए। पहले तो उन्होंने हमारे साथ अभद्रता की। उन्होंने रेफर करने में घंटे लगाए। इस दौरान मरीज ने सुबह 9 बजे दम तोड़ दिया। परिजनों का कहना है जब तक प्रशासन और डॉक्टर मौके पर नहीं आएगा हम अस्पताल के सामने शव रखकर प्रदर्शन करेंगे। परिजनों ने स्पष्ट कहा है कि डॉक्टरों की और नर्सों की लापरवाही पर कार्रवाई होना चाहिए। इसके बाद मौके पर पुलिस प्रशासन पहुंचा। पुलिस प्रशासन ने परिजनों को समझाइस दी। इधर सिविल सर्जन और आरएमओ भी मौके पर पहुंच गए। उन्होंने पीड़ित परिजनों की पूरी बात सुनी। इसके बाद पीड़ित परिजन पीएम के लिए राजी हुए। हालांकि परिजनों का कहना है कि जब तक कलेक्टर एसडीएम मौके पर आकर नहीं मिलते तब तक हम सब का पीएम नहीं करवाएंगे। पीएम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के असली कारणों का खुलासा हो सकेगा। गांव में उल्टी दस्त का प्रकोप अमरवाड़ा के ग्राम रजोला में 10 दिन पूर्व दूषित पानी पीने से 200 से अधिक ग्रामीण उल्टी दस्त का शिकार हुए थे इसके बाद मौके पर प्रशासन और स्वास्थ्य अमला पहुंचा था। स्वास्थ्य अमले ने इलाज कर खाना पूर्ति कर दी। धनराज चंद्रवंशी का आरोप है कि गांव में आज भी उल्टी दस्त का प्रकोप है प्रशासन ने कोई इलाज नहीं करवाया है और हमारी जो मरीज की मौत हुई है वह उल्टी दस्त के कारण हुई है।

क्रिकेट सिटी में कलंक! विदेशी महिला खिलाड़ियों के साथ बदसलूकी से सन्न हुआ इंदौर

इंदौर जिस इंदौर की पहचान मां अहिल्या की नगरी के रूप में होती है, जिस शहर की पहचान देश स्वच्छता के कारण हो, उस शहर पर अकील खान नाम के मनचले की हरकतों बदनामी के छींटे डाल दिए। इंदौर की सराफा चौपाटी पर आधी रात को महिलाएं बिना किसी संकोच के पारंपरिक भोजन का स्वाद लेने पहुंचती हों, वहां दिनदहाड़े आस्ट्रेलियाई महिला क्रिकेटरों से छेड़छाड़ से पूर्व अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी सहित पूरा शहर स्तब्ध है। उनमें घटनाक्रम को लेकर रोश भी है। भारतीय टीम की पूर्व कप्तान और मप्र क्रिकेट संगठन की प्रबंधकारिणी सदस्य संध्या अग्रवाल दुखी हैं। कहती हैं, इंदौर बहुत शालीन शहर है। देश-दुनिया में इसका बड़ा नाम है। यहां सफलता के साथ सभी मैचों का आयोजन हुआ। खिलाड़ियों ने प्रशंसा की, लेकिन एक घटना ने नाम खराब किया। एक व्यक्ति की हरकत ने शहर का नाम बदनाम किया।   यह भी गौर किया जाना चाहिए कि क्या दोनों खिलाड़ियों ने सुरक्षा प्रोटोकाल का पालन किया था और वे टीम प्रबंधन या सुरक्षा अधिकारी को जानकारी देकर गई थीं। पूर्व अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटर बिंदेश्वरी गोयल ने कहा- इंदौर की पहचान महिला सशक्तीकरण के लिए होती है। मां अहिल्या ने यहीं पर पहली बार महिला सेना का गठन किया था। यह बहुत दुखद घटना है। इंदौर में ऐसा कभी नहीं हुआ। इससे खिलाड़ियों के मन में शहर की खराब छवि बनती है, जबकि हमारा इंदौर ऐसा नहीं है। एक व्यक्ति की हरकत से पूरे शहर के बारे में धारणा नहीं बनना चाहिए। घटना की आलोचना होनी चाहिए पूर्व अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटर चित्रा बाजपेयी कहती हैं, इंदौर महिलाओं के लिए सुरक्षित शहर है। ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ियों के साथ हुई घटना दुखद है और इसकी आलोचना होना चाहिए। एक मनचले की हरकत ने सभी को स्तब्ध किया है। इस घटना ने हमें सोचने पर विवश किया है कि महिलाओं के प्रति सम्मान का भाव जगाना जरूरी है। इंदौर में सिर्फ महिला क्रिकेटर ही नहीं, विभिन्न खेलों की राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय महिला खिलाड़ी भी आस्ट्रेलियाई खिलाड़ियों के साथ हुए व्यवहार से आहत हैं। हॉट स्पॉट पर हुई छेड़छाड़ की घटना घटना रोबोट चौराहे से थोड़ी दूर की है। इस स्थान को पुलिस ने हॉट स्पॉट के रूप में घोषित किया था। सब्जी मंडी के पास तो खजराना पुलिस चेकिंग अभियान भी चला चुकी है। विदेशी खिलाड़ियों के आगमन के बाद भी पुलिस की अनुपस्थिति निगरानी सिस्टम पर सवाल खड़े कर रही है। डीसीपी जोन-2 अमरेंद्र सिंह के अनुसार आरोपित से पूछताछ की जा रही है। जवानों के भरोसे ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ी इंटेलिजेंस एडीसीपी प्रमोद सोनकर ने 17 अक्टूबर को ड्यूटी चार्ट तैयार करवाया था। इसमें विजय नगर एसीपी आदित्य पटले को पर्यवेक्षण अधिकारी बनाया गया था। पटले का स्थानांतरण हो चुका है। उनके स्थान पर राजकुमार सराफ प्रभारी एसीपी हैं। रेडिसन ब्लू होटल में खिलाड़ियों की सुरक्षा के लिए दोपहर दो बजे से रात दस बजे तक एएसआई आरएस मावई, प्रधान आरक्षक शीतलराव और महिला आरक्षक आयुषी की ड्यूटी लगाई गई थी। दूसरी शिफ्ट में एएसआई किशोर खेड़ेकर और आरक्षक प्रमोद व अर्पिता की ड्यूटी लगाई गई थी। रेडिसन ब्लू होटल विजयनगर थाना अंतर्गत आता है। थाना प्रभारी चंद्रकांत पटेल ने विदेशी खिलाड़ियों की सुरक्षा में गंभीरता नहीं दिखाई। सेल्फी लेने के बहाने छेड़छाड़ पुलिस सूत्रों ने बताया अकील ने आस्ट्रेलियाई खिलाड़ियों के साथ सेल्फी लेने के बहाने छेड़छाड़ की है। हालांकि खिलाड़ियों ने कथनों में इससे इन्कार किया है। पुलिस का दावा है कि आरोपित ने एक खिलाड़ी के साथ हरकत की थी। पुलिस ने घटना के सीसीटीवी फुटेज भी ले लिए हैं।  

तीन ट्रैक्टर थाने में, अवैध रेत का मामला तूल पकड़ता ही दबंगों ने छीना!

छतरपुर रेत से भरे तीन ट्रैक्टरों को पकड़े जाने के बाद उनको थाने में रखवा दिया गया था लेकिन बाद में दबंग आए और ट्रैक्टरों को ले गए। प्रशासन की कार्रवाई पर दबंगों के भारी पड़ने के बाद कलेक्टर ने मामले को गंभीरता से ले लिया है और ट्रैक्टर छोड़े जाने के मामले में एसडीएम अखिल राठौर को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। इधर जिन ट्रैक्टरों को दबंग थाने से ले गए थे उनमें दो यादवों और एक तिवारी का ट्रैक्टर बताया गया है। बताया गया है जब मामले को गंभीरता से लिया गया और कलेक्टर के नोटिस के बाद फिर से तीन और ट्रैक्टरों को पकड़ लिया गया है और थाने में रखवा दिया गया है। कलेक्टर ने एसडीएम को कारण बताओ नोटिस जारी कर तत्काल रूप से लिखित स्पष्टीकरण मांगा है।   साथ ही अपर कलेक्टर की अध्यक्षता में जांच टीम गठित कर पूरे मामले की रिपोर्ट मांगी है। प्रशासन की कार्रवाई के बाद ट्रैक्टरों को छुड़ा ले जाने का या कोई पहला मामला नहीं इससे पहले भी दो बार पुलिस और माइनिंग की कार्रवाई के दौरान दबंग भारी पड़े और ट्रैक्टरों को छुड़ाकर ले गए थे लेकिन यह मामला इसलिए और गंभीर हो जाता है कि जिन ट्रैक्टरों को पकड़ा गया और थाने में रखवा दिया गया उनको नेताओं के दबाव में जाकर छोड़ दिया गया। अब इस मामले को लोगों ने सोशल मीडिया पर ट्रोल करना शुरू कर दिया है लोगों का कहना है कि प्रशासनिक व्यवस्था पर दबंग भारी पड़ रहे हैं। कलेक्टर द्वारा गठित विशेष टीम इस मामले की जांच कर रही है। इस संबंध में एसडीएम अखिल राठौर का कहना है कि तीन ट्रैक्टरों को पकड़ा गया है और उनको थाने में रखवा दिया गया है। दोषियों पर इसमें कार्रवाई की जाएगी। इधर मामले को लेकर सिविल लाइन थाना प्रभारी सतीश सिंह का कहना है कि यह माइनिंग और राजस्व अधिकारियों की करवाई है इस संबंध में वही जवाब दे सकते हैं।

मैहर के 12 लोग बंधुआ मजदूरी के जाल से बचाए गए, अब घर में खुशहाल जीवन

मैहर महाराष्ट्र राज्य के जालना जिले में एक महीने से फंसे मैहर जिले के 12 मजदूरों को सुरक्षित उनके घर वापसी कराई गई। घर से काम की तलाश में निकले 12 मजदूर महाराष्ट्र के जालना जिले में बंधुआ मजूदर के रूप में बंधक बना लिए गए थे। जिनकी कलेक्टर रानी बाटड के निर्देशन में श्रम विभाग और पुलिस की तत्पर कार्रवाई से राहतभरी वापसी संभव हो सकी। मजदूरों की वापसी पर उनके परिवारों की आंखें खुशी से छलक उठीं दीपावली में जैसे घर में फिर से उजाला लौट आया। मैहर प्रशासन की तत्परता और समन्वय से न केवल 12 परिवारों के दीप जल उठे, बल्कि यह संदेश भी गया कि किसी भी नागरिक की सुरक्षा से समझौता नहीं किया जाएगा। 12 अगस्त को निकले थे घर से जिला प्रशासन से प्राप्त जानकारी के अनुसार, मैहर के कोठी क्षेत्र के ये 12 मजदूर अगस्त माह में काम की तलाश में महाराष्ट्र के जालना जिले पहुंचे थे। वहां सुखापुड़ी गांव के एक व्यक्ति आबा ने उन्हें संतरे तोड़ने का काम दिया। शुरू में सब कुछ सामान्य रहा, परंतु दीपावली के पहले जब मजदूरों ने घर लौटने की इच्छा जताई तो उन्हें रोक दिया गया। मजदूरों के अनुसार, आबा ने कहा कि संतरे के बाद गन्ना काटने के बाद ही वापस जा सकते हो। विरोध करने पर उन्हें धमकाया गया और उन पर कड़ी निगरानी रखी जाने लगी। भय के माहौल में मजदूरों ने छिपकर अपने घरवालों को पूरी जानकारी दी। स्वजनों को दी सूचना तब मिली मदद मजदूरों द्वारा जब अपने स्वजनों को इस बात कि सूचना दी तब उनके स्वजनों ने इन बात कि जानकारी कलेटर को दी। जिस पर कलेक्टर रानी बाटड ने तत्काल श्रम निरीक्षक नरेश पटेल और पुलिस टीम को महाराष्ट्र प्रशासन से संपर्क करने के निर्देश दिए। दोनों राज्यों की सयुक्त कार्रवाई से मिली मुक्ति दोनों राज्यों की संयुक्त कार्रवाई के बाद मजदूरों को सुरक्षित छुड़ाया गया। सभी श्रमिक ट्रेन से इटारसी होते हुए मैहर पहुंचे, जहां श्रम निरीक्षक ने उनका स्वागत किया और पूरी घटना की रिपोर्ट तैयार की। श्रम निरीक्षक नरेश पटेल ने बताया कि सभी मजदूर फिलहाल सुरक्षित हैं और उनके बयान दर्ज किए जा रहे हैं। पुलिस अब इस पूरे मामले की विस्तृत जांच में जुटी है, ताकि भविष्य में इस तरह के मानव शोषण की घटनाओं पर अंकुश लगाया जा सके।

रिनिया गांव में हत्या के बाद बवाल, गुस्साए परिजनों ने आरोपी के घर में की तोड़फोड़, कार फूंकी

भिंड भिंड जिले के दबोह थाना क्षेत्र के ग्राम रिनिया में शनिवार शाम लगभग 7 बजे पैसों के लेन-देन को लेकर दो पक्षों में विवाद इतना बढ़ गया कि मामला खूनी संघर्ष में बदल गया। आरोप है कि रणवीर कौरव, अंशु कौरव, प्रहलाद कौरव, राजीव कौरव और कुंवर सिंह कौरव (सभी निवासी रिनिया) ने लाठी-डंडों और सरियों से हमला कर दिया। इस हमले में 35 वर्षीय अली उर्फ रुद्र जाटव पुत्र रामलाल जाटव निवासी रिनिया और उसका मामा गंभीर रूप से घायल हो गए। घटना के बाद आक्रोशित युवक के परिजनों ने आरोपी के घर में तोड़फोड़ कर बाहर रखी कार में आग लगा दी। इससे गांव में तनाव की स्थिति बनी हुई है।   घटना के बाद स्वजन दोनों घायलों को निजी वाहन से इलाज के लिए ग्वालियर ले जा रहे थे, लेकिन रास्ते में अली की मौत हो गई। मामा की हालत गंभीर बताई जा रही है, जिसका इलाज ग्वालियर में जारी है। मामा को घटना का मुख्य चश्मदीद बताया जा रहा है। रविवार सुबह मृतक के परिजन शव को लेकर थाना दबोह पहुंचे, जहां पुलिस ने बीएनएस व एस/एसटी एक्ट की धाराओं के तहत मामला दर्ज कर जांच प्रारंभ कर दी है। रविवार सुबह एएसपी संजीव पाठक ने घटना स्थल का निरीक्षण किया। एएसपी पाठक ने बताया कि शव को पोस्टमार्टम के लिए अस्पताल भेजा गया है तथा आरोपियों की तलाश की जा रही है। फिलहाल क्षेत्र में कानून व्यवस्था सामान्य बनी हुई है।  

नेटवर्क न होने पर शिक्षक ने पेड़ पर चढ़कर लगाई ई-अटेंडेंस, देखिए अनोखा तरीका

अगार मालवा  मध्यप्रदेश के आगर-मालवा जिले से हैरान करने वाली तस्वीर सामने आई है। जहां शिक्षकों की ई-अटेंडेंस लगाने के लिए पेड़ पर चढ़ना पड़ रहा है। मोबाइल नेटवर्क न होने की वजह से रोजाना परेशानियों का सामना करना पड़ता है। जिससे अटेडेंस प्रभावित हो रही है। दरअसल, सरकार ने शिक्षकों को ई-अटेंडेंस अनिवार्य कर दिया है। जिससे बड़ौद और उसके आसपास के गांवों मे नेटवर्क की समस्या आ रही है। नेटवर्क नहीं मिलने से ऐप ठीक तरह से काम नहीं करता। जिसके लिए कई बार शिक्षकों को पेड़ पर चढ़कर तो कई बार छतों पर चढ़कर ई-अटेंडेंस लगानी पड़ती है। ताकि वह अपनी उपस्थिति दर्ज कर सकें। नेटवर्क के कारण आ रही समस्याएं शिक्षकों ने बताया कि स्कूल परिसर में होने के बावजूद भी ऐप में लोकेशन दूसरी दिखती है। नेटवर्क भी नहीं आता, जिसके कारण अलग-अलग लोकेशन दिखाई देती है। कभी-कभी तो अटेंडेंस भी दर्ज नहीं हो पाती। जिससे विभागीय पोर्टल पर अनुपस्थित दिखाई देता है। ग्रामीण इलाकों में नेटवर्क बड़ी चुनौती ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी मोबाइल नेटवर्क की समस्या लोगों के लिए बड़ी परेशानी बनी हुई है। कई गांवों में कमजोर सिग्नल के कारण लोग डिजिटल दुनिया से वंचित हैं। शिक्षकों को ई-अटेंडेंस, ऑनलाइन पढ़ाई, डिजिटल भुगतान और सरकारी योजनाओं से जुड़ी सेवाओं में दिक्कतें आ रही हैं। 

पीएम मोदी के ड्रीम प्रोजेक्ट की नई डेडलाइन, संत रविदास मंदिर की फिनिशिंग अधूरी

सागर  सागर जिले के बडतूमा में निर्माणाधीन 101 करोड़ की लागत से बन रहा संत रविदास मंदिर एवं संग्रहालय का काम जारी है. जिस विधानसभा क्षेत्र में ये मंदिर बन रहा है, वहां के भाजपा विधायक प्रदीप लारिया का दावा है कि अगली रविदास जयंती यानि फरवरी माह में मंदिर का लोकार्पण करने का लक्ष्य है. उम्मीद है कि जनवरी में काम पूरा हो जाएगा और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी इसका लोकार्पण करेंगे. संत रविदास मंदिर बडतूमा में निर्माणाधीन ये मंदिर सागर की नरयावली विधानसभा क्षेत्र के बडतूमा में निर्माणाधीन है. इसका करीब 70 फीसदी काम हो चुका है. निर्माण एजेंसी का वादा किया है कि मंदिर जनवरी तक बनकर तैयार हो जाएगा. हालांकि बजट की कमी की चर्चा काम में देरी के लिए जिम्मेदार मानी जा रही है. वहीं, विधायक प्रदीप लारिया का कहना है कि ऐसी कोई समस्या नहीं है. हम चाहते हैं कि फरवरी में रविदास जयंती पर प्रधानमंत्री मंदिर का लोकार्पण करने एक बार फिर सागर आएं. 12 एकड़ में बन रहा रविदास मंदिर संत रविदास मंदिर 101 करोड़ रुपए की लागत से बन रहा है. मंदिर और संग्रहालय का भूमिपूजन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 2023 में किया था. संत रविदास के विचार, दर्शन और अध्यात्म्य को एक परिसर में स्थान देने मध्य प्रदेश सरकार का संस्कृति विभाग संत रविदास मंदिर और संग्रहालय का निर्माण कर रहा है. 12 एकड़ परिसर में ये भव्य मंदिर और संग्रहालय बनाया जा रहा है. राजस्थान के धौलपुर के वंशीपहाडपुर के लाल पत्थरों से मंदिर का निर्माण कार्य चल रहा है. अगस्त 2025 में पूरा होना था निर्माण कार्य संत रविदास मंदिर का निर्माण कार्य पूरा करने का लक्ष्य अगस्त 2025 रखा गया था. पिछले कुछ दिनों से मंदिर का काम बंद पड़ा था. हालांकि निर्माण एंजेसी पर्यटन निगम का कहना है "मंदिर का 70 फीसदी काम पूरा हो चुका है और सिर्फ फिनिशिंग का काम बाकी है." लेकिन मंदिर निर्माण अपने तय समय अगस्त माह तक पूरा नहीं हो पाया. इस मामले में विधायक प्रदीप लारिया ने पिछले दिनों निर्माण एजेंसी और पर्यटन विभाग के अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की थी. संत रविदास मंदिर अगले साल के मार्च तक काम पूरा होगा     101 करोड़ की लागत से आकार ले रहा पीएम मोदी का सपना, राजस्थान के शाही पत्थरों से हो रही सजावट     "न राम, ना रविदास, कांग्रेस को दोनों मंदिरों से नफरत, इसलिए निर्माण का विरोध"- मोदी का चौतरफा वार क्या खास है संत रविदास मंदिर और संग्रहालय में नरयावली विधानसभा की मकरोनिया नगर पालिका के बडतूमा में 55 वर्गफीट जगह पर नागरशैली में मुख्य मंदिर बनाया जा रहा है. इसमें गर्भगृह, अंतराल मंडप और अर्धमंडप का निर्माण हो रहा है. इसके अलावा यहां पर रविदास के जीवन का वर्णन दीवार पर कलाकृति (म्युरल स्कल्प्चर) के जरिए किया जा रहा है. संत रविदास के दर्शन को प्रदर्शित करने कुल 14 हजार वर्गफीट क्षेत्रफल में व्य़ाख्या संग्रहालय ( इंटरप्रिटेशन म्यूजियम)     प्रथम गैलरी – संत रविदास की जीवनगाथा का प्रदर्शन     द्वितीय गैलरी – संत रविदास का भक्ति मार्ग और निर्गुण पंथ में योगदान     तृतीय गैलरी – संत रविदास का दर्शन और रविदासिया पंथ     चतुर्थ गैलरी– संत रविदास के साहित्य का विवरण     विशाल जलकुंड का निर्माण, जिसके चारों तरफ शानदार बगीचा, आकर्षक  नक्काशी के साथ संत रविदास के दर्शन और जीवन से जुडी मूर्तियों की स्थापना     10 हजार वर्गफीट का पुस्तकालय, जहां संत रविदास के कृतित्व, शिक्षा, अध्यात्मय की पुस्तकें होगीं     फूलों की पंखुड़ियों की तरह संगत सभाखंड का आकर्षक भवन, जिसमें संत रविदास और अन्य धर्म के दर्शन, शिक्षा आध्यात्म्य से प्रेरित संगोष्ठी, कार्यशाला, प्रवचन, आख्यान और सम्मेलन होंगे.     संत रविदास परिसर में देश-विदेश से आने वाले श्रृद्धालुओं के लिए विशाल भक्त निवास 12 हजार 500 वर्गफीट में बनाया जा रहा है. 15 एसी कमरे, अटैल बाथरूम वाले और एक साथ 50 व्यक्तियों की क्षमता वाला आवासगृह भी होगा.     परिसर में 15 हजार वर्गफीट का अल्पाहार गृह का निर्माण किया जा रहा है. तंबू के आकार वाले गृह में बैठने की व्यवस्था.

इंदौर से यूरोप और अफ्रीका के लिए रोजाना कनेक्टेड फ्लाइट्स, देश के अन्य शहरों के लिए भी नई फ्लाइट्स

इंदौर   इंदौर से शारजाह सहित दुबई और अन्य देशों के लिए बढ़ते एयर ट्रैफिक के चलते एयर इंडिया ने बड़ा कदम उठाया है. इंदौर से शारजाह चलने वाली फ्लाइट अब रोज उड़ेगी. रविवार 26 अक्टूबर से यह फ्लाइट अब सातों दिन उड़ान भरेगी. इसके अलावा देश के अन्य शहरों की कनेक्टिविटी के लिए भी इंदौर से लगातार फ्लाइट संख्या में वृद्धि हो रही है. विंटर शेड्यूल में अब इंदौर से जोधपुर, उदयपुर, जम्मू और नासिक के लिए भी नई फ्लाइट शुरू हो रही है. इंदौर से शारजाह फ्लाइट की टाइमिंग इंदौर से शारजाह फ्लाइट सप्ताह में 4 दिन उड़ान भरती थी. इस फ्लाइट को डिमांड के चलते विंटर शेड्यूल में सातों दिन के लिए किया गया है. इंदौर से यह फ्लाइट सुबह 9:25 बजे उड़ान भरकर 11:20 पर शारजाह पहुंचेगी. इसी तरह शारजाह से उड़ान भरकर यह फ्लाइट शाम 5:05 पर इंदौर पहुंचेगी. इंदौर एयरपोर्ट से देश के विभिन्न टूरिस्ट डेस्टिनेशन और शहरों के लिए बढ़ती फ्लाइट संख्या के साथ अब इंदौर से जोधपुर, उदयपुर, जम्मू और नासिक के लिए भी नई फ्लाइट शुरू हो रही है. इसके अलावा विंटर शेड्यूल में विभिन्न डेस्टिनेशन के लिए जो फ्लाइट पहले से चल रही हैं, उनकी संख्या भी बढ़ाई जा रही है. इंदौर से जोधपुर फ्लाइट का टाइमटेबल इंदौर से जोधपुर के लिए अब प्रतिदिन हवाई सेवा उपलब्ध होगी, जो सुबह 11:40 डिपार्चर होकर 1:10 पर जोधपुर पहुंचेगी. इसी प्रकार जोधपुर से 1:30 बजे उड़ान भरकर दोपहर 2:50 पर इंदौर लैंड करेगी. इंदौर से उदयपुर के लिए फ्लाइट सोमवार, बुधवार, शुक्रवार, रविवार को रहेगी. इसकी टाइमिंग दोपहर 1:30 टेकऑफ होकर 2:30 बजे उदयपुर पहुंचेगी. उदयपुर से 2:50 को टेकऑफ होकर 4:15 बजे इंदौर पहुंचेगी. इंदौर से जम्मू हवाई सेवा इस प्रकार है इसी प्रकार जम्मू की फ्लाइट सोमवार बुधवार, शुक्रवार और रविवार को चलेगी, जो सुबह 9:00 बजे उड़ान भरकर 11:05 पर जम्मू पहुंचेगी और जम्मू से 11:30 बजे उड़ान भरकर दोपहर 1:35 पर इंदौर लैंड करेगी. नासिक की फ्लाइट मंगलवार, गुरुवार और शनिवार चलेगी, जो 1:30 बजे उड़ान भरकर 2:40 पर नासिक पहुंचेगी और नासिक से 3:00 बजे उड़ान भरकर 4:30 बजे इंदौर लैंड करेगी. यूरोपियन व अफ्रीकन देशों के लिए वाया शारजाह फ्लाइट ट्रैवल एसोसिएशन ऑफ़ इंडिया के अध्यक्ष हेमेंद्र सिंह जादौन के मुताबिक "इंदौर से देश के विभिन्न टूरिस्ट डेस्टिनेशन के अलावा इंटरनेशनल ट्रैफिक इसलिए भी बढ़ रहा है, क्योंकि इंदौर से सीधे इंटरनेशनल फ्लाइट की व्यवस्था है. यहां से यात्री उड़ान भरकर शारजाह और दुबई के रास्ते आसानी से यूरोपीय देशों के अलावा अफ्रीका, कनाडा और अमेरिका की ओर इंटरनेशनल उड़ान भर सकते हैं. इंदौर से इंटरनेशनल फ्लाइंग की सुविधा होने से यात्रियों को सीधे इंटरनेशनल बैगेज की सुविधा मिल जाती है, जिससे वह अपने 25 किलो तक का लगेज फ्लाइट के साथ ले जा सकते हैं." लगैज का डोमेस्टिक खर्च कम हो जाता है इसके अलावा यदि मध्य प्रदेश के अन्य शहरों से इंटरनेशनल फ्लाइट लेना हो तो आमतौर पर दिल्ली या मुंबई का रुख करना पड़ता है, जिस कारण यात्रियों के रूट में एक अन्य स्थान पर फ्लाइट चेंज करने से असुविधा होती है. वहीं लगैज का डोमेस्टिक खर्च भी बढ़ जाता है. इस कारण लोग इंदौर से इंटरनेशनल फ्लाइट लेकर यात्रा करना पसंद करते हैं. इंदौर सांसद एवं अध्यक्ष इंदौर एयरपोर्ट परामर्शदात्री समिति शंकर लालवानी ने बताया "नया विंटर शेड्यूल इंदौर के लिए खुशिया लेकर आया है."

राजधानी भोपाल में आतंकियों और मादक पदार्थ तस्करों की सक्रियता, पिछले 3 साल में कई विदेशी संदिग्ध गिरफ्तार

भोपाल  मध्य प्रदेश की राजधानी अब आतंकियों और मादक पदार्थ तस्करों का पनाहगाह बनती जा रही है। बीते तीन वर्षों में भोपाल से सीरिया से लेकर बांग्लादेश तक के कई संदिग्ध आतंकियों को गिरफ्तार किया गया है, जो देश विरोधी ताकतों के साथ मिलकर आतंक फैलाने की साजिश रच रहे थे। आशंका है कि सिमी के बाद अन्य प्रतिबंधित संगठन यहां से अपने नेटवर्क का विस्तार करने के प्रयास में जुटे हुए हैं।  राजधानी को शांति का टापू माना जाता है, लेकिन अब यह आतंकियों और मादक पदार्थ तस्करों का पनाहगाह बनती जा रही है। पिछले तीन साल में शहर से सीरिया से लेकर बांग्लादेश तक के कई संदिग्ध आतंकी गिरफ्तार किए जा चुके हैं, जो देश विरोधी ताकतों के साथ मिलकर साजिश रच रहे थे। अब यह साफ है कि भोपाल आतंकियों के लिए एक सेफ जोन बनता जा रहा है। जेएमबी और एचयूटी के आतंकी पकड़े गए सिमी के बाद अन्य प्रतिबंधित संगठनों ने भी यहां अपने नेटवर्क फैलाए। जमात-उल-मुजाहिदीन बांग्लादेश (जेएमबी) के आतंकियों ने भोपाल में पनाह ली, लेकिन इंटेलिजेंस की सक्रियता से उनका मॉड्यूल ध्वस्त किया गया। इसके बाद एनआईए ने शाहजहांनाबाद से पीएफआई और हिज्ब-उत-तहरीर (एचयूटी) के सदस्यों को गिरफ्तार किया। पुलिस और एजेंसियों की जांच में यह भी सामने आया कि कुछ युवक सीधे आईएसआईएस से संपर्क में थे। भोपाल से ISIS आतंकी कैसे हुआ गिरफ्तार, जानिए पूरा मामला दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने ISIS (इस्लामिक स्टेट) के एक खतरनाक मॉड्यूल को ध्वस्त करते हुए भोपाल के करोंद इलाके से 21 वर्षीय आतंकी सैयद अदनान उर्फ अबू (अदनान खान) को गिरफ्तार किया, जबकि दिल्ली के सादिक नगर से 20 वर्षीय अदनान खान उर्फ अबू मुहरिब को पहले ही पकड़ लिया गया था। दोनों ने मिलकर दिल्ली के भीड़भाड़ वाले मॉल और पब्लिक पार्क में IED (इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस) से फिदायीन (सुसाइड) हमला करने की प्लानिंग की थी। गिरफ्तारी के बाद खुलासा हुआ कि अदनान (भोपाल वाला) के लैपटॉप से फिदायीन ट्रेनिंग के वीडियो बरामद हुए, जिसमें सीरियाई-तुर्की बॉर्डर पर बैठे एक हैंडलर के निर्देश थे।  अदनान ने पहले भी ज्ञानवापी मस्जिद सर्वे के जज को सोशल मीडिया पर धमकी दी थी। यह गिरफ्तारी न केवल दिल्ली को बचाने वाली है, बल्कि ISIS की ऑनलाइन रेडिकलाइजेशन की गहराई को उजागर करती है। आइए, इस सनसनीखेज मामले की पूरी परतें खोलते हैं-गिरफ्तारी से लेकर साजिश, खुलासे और पुलिस की कार्रवाई तक। साजिश का खुलासा: 'दिवाली पर IED ब्लास्ट', दिल्ली के मॉल-पार्क थे निशाना दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल को 16 अक्टूबर 2025 को खुफिया इनपुट मिला कि ISIS का एक छोटा मॉड्यूल दिल्ली में बड़े हमले की तैयारी कर रहा है। शुरुआत दिल्ली के सादिक नगर से हुई, जहां 20 वर्षीय अदनान खान उर्फ अबू मुहरिब (जिसका पिता सरकारी कर्मचारी है) को गिरफ्तार किया गया। पूछताछ में उसने भोपाल कनेक्शन उजागर किया, जिसके बाद 18 अक्टूबर सुबह 4 बजे स्पेशल सेल की टीम भोपाल पहुंची। निशातपुरा थाना क्षेत्र के इंडस रीजेंसी अपार्टमेंट के मकान नंबर A-46 पर छापा मारा गया, जहां 21 वर्षीय सैयद अदनान उर्फ अबू को उसके परिवार के साथ सोते हुए पकड़ा गया। अदनान भोपाल में CA की तैयारी कर रहा था, लेकिन छह साल से परिवार के साथ रहते हुए ISIS की गतिविधियों में लिप्त था। पुलिस की बड़ी चूक आतंकियों की मौजूदगी के बावजूद पुलिस और खुफिया एजेंसियां सतर्क नहीं दिखीं। सबसे बड़ी विफलता यह रही कि शहर में किरायेदारों का सत्यापन ठीक से नहीं हुआ। इसी कमी का फायदा आतंकियों ने उठाया और घनी बस्तियों में पनाह ले ली। ऐशबाग और करोंद में ठिकाना मार्च 2022 में एटीएस ने ऐशबाग से जेएमबी के आतंकियों को पकड़ा था। पूछताछ में पता चला कि ऐशबाग की घनी बस्ती में किराए पर मकान लेना आसान है और वहां नजर रखना मुश्किल है। यहां तीन साल तक आतंकी छिपे रहे, लेकिन पुलिस और इंटेलिजेंस को भनक तक नहीं लगी। अब तक ऐशबाग से करीब दस संदिग्ध गिरफ्तार किए जा चुके हैं। वहीं करोंद इलाके में जेएमबी के मददगारों और आईएसआईएस से जुड़े आतंकियों की गिरफ्तारी ने सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है।  

मध्य प्रदेश में भावांतर योजना के तहत सागर की मंडियों में सोयाबीन खरीदी, CCTV से होगी मॉनिटरिंग

सागर   मध्य प्रदेश में सोयाबीन की खरीदी भावांतर योजना के तहत किया जाना है. पहली बार भावांतर योजना से सोयाबीन की खरीदी को लेकर किसानों के मन में तरह-तरह की आशंकाएं हैं. इन सब आशंकाओं को ध्यान रखते हुए कलेक्टर संदीप जी आर ने जिले की सभी कृषि मंडियों में तत्काल सीसीटीवी कैमरे लगाने और स्मार्ट सिटी के सिटी कमांड कंट्रोल सेंटर से मॉनीटरिंग किए जाने के निर्देश दिए हैं. कलेक्टर ने सभी राजस्व अधिकारियों को तत्काल सीसीटीवी लगाने को कहा. गड़बड़ी करने वालों पर सख्त होगी कार्यवाही भावांतर योजना के तहत पहली बार सोयाबीन की खरीदी हो रही है. जिसको लेकर तरह-तरह की चर्चाएं और आशंकाएं किसानों ने समय-समय पर कलेक्टर के समक्ष अपनी बात रखी. इन बातों को ध्यान रखते हुए कलेक्टर संदीप जी आर ने कहा है कि, ''किसानों की सुविधा के लिए भावांतर योजना शासन की महत्वाकांक्षी योजना है. योजना के तहत किसानों को कोई समस्या का सामना न करना पड़े और समय पर सोयाबीन का खरीदी के साथ सभी व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जा सके, इसके लिए सभी कृषि मंडियों में सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएं. जिससे किसानों की फसल सुरक्षित रहे और गड़बड़ी करने वालों पर सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके.'' किसान सोयाबीन लेकर मंडी आएं कलेक्टर संदीप जी आर ने किसानों से अपील की है कि, वह अपने सोयाबीन की उपज को बेंचने के लिए कृषि उपज मंडियों में पहुंचे और भावांतर योजना के अंतर्गत फसल बेंचे. समय-समय पर किसानों ने अपनी आशंकाओं और समस्याओं के बारे में बताया था. जिनको लेकर तमाम तरह की व्यवस्थाएं करने की कोशिश की है. पात्र किसानों ने पंजीयन कराये जाने के बाद भावांतर योजना के माध्यम से खरीदी शुरू हो चुकी है. किसान मंडी में अपना पंजीयन क्रमांक, आधार क्रमांक लेकर आए. क्या है भावांतर योजना मध्य प्रदेश सरकार ने किसानों को उनकी फसल का उचित दाम दिलाने के लिए भावांतर योजना शुरू की है. इस योजना का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसानों को उनके उत्पाद, खासकर सोयाबीन, का सही मूल्य मिले. केंद्र सरकार ने सोयाबीन का न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) ₹5328 प्रति क्विंटल तय किया है. यानी किसानों को उनकी उपज का इतना दाम तो निश्चित रूप से मिलेगा ही. अब तक 61,970 किसान इस योजना के तहत अपना रजिस्ट्रेशन करा चुके हैं. पहले सरकार गेहूं और अन्य फसलों के किसानों को बेहतर मूल्य दिलाने के प्रयास कर चुकी है, और अब विशेष ध्यान सोयाबीन उत्पादक किसानों पर दिया जा रहा है ताकि उन्हें बाजार में उचित लाभ मिल सके.