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फर्जी दस्तावेज़ से भर्ती: इंदौर पीटीसी में बड़ा खुलासा, 14 नवआरक्षक हिरासत में

इंदौर   पुलिस प्रशिक्षण केंद्र (पीटीसी) इंदौर में प्रशिक्षण ले रहे 14 नवआरक्षकों ने परीक्षा देने की अनुमति लेने के लिए फर्जीवाड़ा किया। इनमें 13 महिलाएं शामिल हैं। नवआरक्षकों ने किसी और के स्वीकृत आवेदन में फर्जी तरीके से अपना नाम जोड़कर प्रस्तुत किया, जो मंजूर भी हो गया। यह मामला लगभग डेढ़ माह पहले सामने आया, जब पीटीसी प्रभारी एसपी ने गड़बड़ी पकड़ी और इसकी रिपोर्ट पुलिस मुख्यालय को भेजी। जांच एडीजी प्रशिक्षण राजाबाबू सिंह के निर्देश पर पुलिस मुख्यालय के एआइजी से कराई गई। जांच में गड़बड़ी साबित होने पर सभी 14 नवआरक्षकों को प्रशिक्षण से बाहर कर उनके संबंधित जिलों में भेज दिया गया है। इनके खिलाफ विभागीय जांच शुरू कर दी गई है। जांच पूरी होने के बाद एफआईआर दर्ज कर सेवा समाप्त भी की जा सकती है। विभागीय जांच इधर, ट्रेनिंग स्कूल में पदस्थ दो डीएसपी समेत पांच अधिकारियों और कर्मचारियों पर भी विभागीय जांच की जा रही है। इन पर आरोप है कि उन्होंने इस फर्जीवाड़े को अनदेखा किया। जांच में यह साफ होगा कि उन्होंने किस स्तर पर लापरवाही की।

ब्रिज विवाद में हाईकोर्ट का कटाक्ष, जिम्मेदारों पर सवाल: किसी का तो सिर कटेगा

जबलपुर बलि का बकरा बाहर हो गया अब किसी न किसी का तो सर कटेगा, यह तल्ख टिप्पणी की है मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की डबल बेंच ने. भोपाल के ऐशबाग में 90 डिग्री ब्रिज के मामले में कोर्ट ने सुनवाई करते हुए मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की युगलपीठ ने बड़ा आदेश दिया है. कोर्ट ने ठेकेदार को ब्लैक लिस्ट किए जाने के आदेश को वापस लेने के निर्देश भी दिए हैं. याचिका में कहा गया था कि भोपाल के ऐशबाग में बरखेड़ी फाटक पर रेल ओवर ब्रिज बनाने का ठेका उसे 1 मार्च 2023 को मिला था. पुल पर 90 डिग्री का कोण बनने पर पीडब्ल्यूडी के मुख्य अभियंता ने 4 जुलाई 2025 को टेंडर निरस्त कर याचिकाकर्ता को एक साल के लिए ब्लैक लिस्ट कर दिया था. याचिकाकर्ता ने दावा किया है कि उसे लोक निर्माण विभाग के द्वारा जो ड्राइंग और डिजाइन दी गई थी उसी के मुताबिक ही निर्माण किया गया. लेकिन इस मामले में विभाग की किरकिरी होने के बाद उसे ही ब्लैक लिस्ट कर अधिकारियों ने अपना दामन बचा लिया है. जांच के बाद मौलाना आजाद राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान मैनिट के वरिष्ठ प्रोफेसर ने अपनी जांच रिपोर्ट हाईकोर्ट के समक्ष प्रस्तुत की थी. रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया कि पुल का मोड़ वास्तव में 90 डिग्री का नहीं है, बल्कि 118 से 119 डिग्री के बीच का है. मैनिट प्रोफेसर की रिपोर्ट में कहा गया कि ब्रिज की ज्यामिति सोशल मीडिया में दिखाई जा रही तस्वीरों से अलग है. पुल का एंगल अधिक तीखा न होकर थोड़ा विस्तृत है. इसके बावजूद संरचना को लेकर जनसुरक्षा की आशंकाएं और तकनीकी खामियों पर सवाल बने हुए हैं. 7 इंजीनियर हुए थे सस्पेंड विवाद गहराने के बाद मध्यप्रदेश सरकार ने जांच समिति गठित की और 28 जून को पीडब्ल्यूडी के सात इंजीनियर को निलंबित किया. एक सेवानिवृत्त अधीक्षण अभियंता पर विभागीय जांच बैठाई गई. मुख्यमंत्री मोहन यादव ने उस समय घोषणा की थी कि निर्माण एजेंसी और डिजाइन सलाहकार को ब्लैकलिस्ट किया जाएगा और पुल में सुधार कार्य के लिए समिति बनाई जाएगी. वही लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह ने कहा कि दुनिया भर में कई जगह भौगोलिक परिस्थिति को देखते हुए तीखे मोड़ वाले पुल बनाए जाते हैं. भोपाल के इस फ्लाईओवर के मामले में तकनीकी कठिनाई केवल एंगल की वजह से नहीं, बल्कि अलग-अलग एजेंसियों के बीच तालमेल की कमी के कारण भी हुई. मंत्री ने आश्वासन दिया कि विभाग की ओर से हाईकोर्ट को सभी बिंदुओं पर स्पष्ट जवाब प्रस्तुत किया जाएगा. गौरतलब है कि पिछली सुनवाई के दौरान ही हाईकोर्ट के निर्देश पर मैनिट के प्रोफेसर डॉ एमएस होरा, प्रोफेसर डॉक्टर नितिन डिंडोरकर, प्रोफेसर डॉक्टर एसके कटियार, प्रोफेसर डॉक्टर पीके अग्रवाल और असिस्टेंट प्रोफेसर डॉक्टर प्रियमित्र मुनोथ ने 2 और 3 सितंबर को पीडब्ल्यूडी के आत्मराम मोरे, एसडीओ ब्रिज रंजीत सिंह और सब इंजीनियर सत्यम चौधरी के साथ पुल के विवादित हिस्से की जांच की थी. 28 अक्टूबर को होगी सुनवाई कमेटी ने ठेकेदार पुनीत चड्ढा को क्लीन चिट देते हुए कहा था कि उसने ड्राइंग के अनुसार ही निर्माण किया. याचिका की सुनवाई करते हुए मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की युगलपीठ ने तल्ख टिप्पणी करते हुए ठेकेदार की तुलना बलि के बकरे से की है. कोर्ट ने कहा है कि अब बलि का बकरा बाहर हो गया है अब किसी न किसी का सिर तो कटेगा. हाई कोर्ट ने अब पूरे मामले की सुनवाई 28 अक्टूबर को निर्धारित की है.  

पिता-पुत्री के रिश्ते को कलंकित करने वाले पिता को तिहरी उम्रकैद

  इंदौर  इंदौर जिला कोर्ट ने 12 वर्षीय बालिका से रेप करने वाले पिता (35) को कठोर दंड देते हुए तिहरे आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। कोर्ट ने फैसले में टिप्पणी की कि आरोपी ने पिता-पुत्री जैसे पवित्र रिश्ते को कलंकित किया है, इसलिए न्यूनतम दंड विधिपूर्ण नहीं है। तलाक के बाद बेटी पिता के पास थी 21 जुलाई 2024 को पीड़िता की मां ने थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। महिला ने बताया कि 2012 में उसने आरोपी से प्रेम विवाह किया था। विवाह से उन्हें दो संतानें हुईं- 12 वर्षीय बेटी (पीड़िता) और 6 वर्षीय बेटा। वर्ष 2020 में तलाक हो गया, जिसके बाद बेटी पिता के साथ और बेटा मां के साथ रहने लगा। अकेले होने पर पिता गलत काम करते 21 जुलाई 2024 को बालिका अपनी मुंहबोली मौसी के पास रोते हुए पहुंची और आपबीती सुनाई। उसने बताया कि पिता घर पर अकेले होने पर कई बार उसके साथ गलत काम करते हैं। पहली बार यह घटना दो वर्ष पहले नए घर में हुई थी और हाल ही में 15 दिन पहले भी दोबारा रेप किया गया। बालिका ने बताया कि उसने दो-तीन बार दादी को भी इस बारे में बताया था, लेकिन उन्होंने ध्यान नहीं दिया। इसके बाद पड़ोस में रहने वाली मुंह बोली मौसी ने नानी को फोन कर पूरी घटना बताई। जिसके बाद नानी ने बेटी (बालिका की मां) को बुलाया और थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई। मामले की एक साल तक चली सुनवाई मामले की सुनवाई एक साल तक चली। प्रभारी डीपीओ राजेंद्र सिंह भदौरिया ने बताया कि जिला अदालत ने 18 सितंबर 2025 को फैसला सुनाया। कोर्ट ने आरोपी को पॉक्सो अधिनियम की धारा 5(एल)/6, 5(एन)/6 और 5(एम)/10 में दोषी पाते हुए तीन अलग-अलग आजीवन कारावास की सजा सुनाई। साथ ही 15 हजार रुपए का अर्थदंड भी लगाया गया। शासन की ओर से विशेष लोक अभियोजक सुशीला राठौर ने पैरवी की। पीड़ित प्रतिकर योजना के तहत बालिका को शारीरिक व मानसिक क्षति को देखते हुए 3 लाख रुपए दिलाने की अनुशंसा भी की है।

मध्य प्रदेश के 418 शहरों में होगा 2 लाख करोड़ का विकास, जनजीवन होगा बेहतर

भोपाल  एमपी में शहरों के विकास के लिए सड़कों पर सबसे ज्यादा जोर दिया जा रहा है। सड़कें अर्थव्यवस्था की धुरी बन चुकी हैं जोकि शहरों के सभी क्षेत्रों को एक क्रम में जोड़ती हैं। सड़क निर्माण और उनकी गुणवत्ता के लिए नगरीय निकायों के इंजीनियर पूरा प्रयत्न कर रहे हैं पर टेक्नोलॉजी में आ रहे नित ​नए बदलावों के साथ उन्हें अपनी कार्य प्रणाली में बदलाव की जरूरत है। इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग ने सस्टेनेबल रोड इंफ्रास्ट्रक्चर विषय पर कार्यशाला आयोजित की। यहां नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के आयुक्त संकेत भोंडवे ने कहा कि शहरों की सड़कों से विकास को रफ्तार मिलती है। उन्होंने इसके लिए गुणवत्तापूर्ण सड़कों की जरूरत जताई। कार्यशाला में बताया गया कि प्रदेश के नगरीय निकायों में विभिन्न योजनाओं के अंतर्गत 2 लाख करोड़ के विकास कार्य किए जाएंगे। भोपाल की आरसीव्हीपी नरोन्हा प्रशासन अकादमी में शुक्रवार को आईआईटी इंदौर, रूड़की, MORTH, CRRI & RODIC के विषय-विशेषज्ञों ने सड़क निर्माण के नए सिस्टम व सड़कों की गुणवत्‍ता सुनिश्चित करने के कई तथ्य बताए। सस्टेनेबल रोड इंफ्रास्ट्रक्चर पर हुई कार्यशाला प्रदेश के 600 इंजीनियरों की क्षमतावर्धन भी की गई। सड़क निर्माण कार्य से जुड़े विषय विशेषज्ञों ने कार्यशाला को संबोधित किया। इनमें RODIC के आरएस महालहा और एचसी अरोरा ने डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट, टेंडर प्रोसेस पर प्रस्तुतिकरण दिया। कंस्ट्रक्शन टेक्निक, क्वॉलिटी कंट्रोल, टेस्टिंग लैब की प्रक्रिया, डिजिटल प्रोजेक्ट मेनेजमेंट, रीयल टाइम मॉनिटरिंग, नगर सड़कों की सुरक्षा, सड़क निर्माण में वेस्ट मटेरियल के उपयोग के बारे में जानकारी दी गई। प्रमुख अभियंता प्रदीप मिश्रा ने प्रदेश की नगरीय अधोसंरचना की जानकारी दी। आयुक्त संकेत भोंडवे ने कार्यशाला को संबोधित करते हुए बताया कि प्रदेश में करीब ढाई करोड़ की आबादी शहरी क्षेत्र में रहती है। यहां की सड़कों पर यातायात का काफी दबाब है। इन सड़कों पर नगरीय क्षेत्र की अन्य अधोसंरचनाओं का भी प्रभाव पड़ता है इसलिये सड़कों की बेहतर गुणवत्ता जरूरी है।   एमपी पुलिस में निकली ‘7500 पदों’ पर सीधी भर्ती, जानें कब से शुरु होंगे आवेदन कार्यशाला में एक अहम तथ्य सामने आया। यहां बताया गया कि प्रदेश के सभी 418 शहरों में राज्य और केंद्र सरकार की अनेक योजनाएं चल रहीं हैं। इन नगरीय निकायों की नगरीय प्रशासन विकास एवं आवास विभाग के अंतर्गत आगामी 5 वर्षों में कायापलट कर दी जाएगी। इस दौरान सभी शहरों में कुल 2 लाख करोड़ रूपए के काम होंगे। केंद्र सरकार की अमृत, स्वच्छ भारत मिशन एवं प्रधानमंत्री आवास योजना, जलप्रदाय, सीवरेज, हरित क्षेत्र विकास और यूज्ड वाटर मेनेजमेंट आदि योजनाएं से प्रदेश के नगरीय निकायों को संवारा जा रहा है। कुल 418 नगरीय निकाय बता दें कि एमपी में नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के अंतर्गत कुल 418 नगरीय निकाय हैं। इनमें 5 छावनी परिषदें भी शामिल हैं। नगर निगम- 6 नगर पालिका- 99 न​गर परिषदें- 298 छावनी परिषदें- 5 योग- 418

अध्यक्ष हार्डिया ने छात्रवृत्ति बढ़ाने का प्रस्ताव भेजने के दिए निर्देश

भोपाल  मध्यप्रदेश विधानसभा में पिछड़ा वर्ग कल्याण संबंधी विधानसभा समिति की बैठक शुक्रवार को हुई। बैठक की अध्यक्षता  महेन्द्र हार्डिया ने की। समिति के अध्यक्ष  हार्डिया ने कक्षा 6वीं से 8वीं तक की छात्रवृत्ति राशि बढ़ाकर ₹100 प्रतिमाह करने और छात्रावास में रहने वाले छात्र-छात्राओं को मिलने वाली राशि को बढ़ाकर ₹1500 करने का प्रस्ताव भेजने के निर्देश दिए। समिति सदस्य  मनोज चौधरी ने विभाग द्वारा संचालित योजनाओं से संबंधित विस्तृत जानकारी मांगी। उन्होंने छात्रावास योजना को जिला स्तर के साथ ब्लॉक एवं नगर पंचायत स्तर पर भी संचालित करने के लिये कार्य योजना बनाने का सुझाव दिया। समिति सदस्य  संदीप जायसवाल ने विभिन्न विभाग में पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षित पदों की विस्तृत जानकारी मांगी। उन्होंने आउटसोर्स भर्ती में भी पिछड़ा वर्ग के आरक्षण को लागू करने की मांग रखी। बैठक में पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के प्रमुख सचिव डॉ. ई. रमेश कुमार ने सभी आवश्यक जानकारी दीं।  

प्रमुख ग्लोबल शूटिंग हब के रूप में स्थापित हो रहा मध्यप्रदेश: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

ऑस्कर नॉमिनेशन ने बढ़ाया प्रदेश का मान: मुख्यमंत्री डॉ. यादव भोपाल और आस पास के क्षेत्रों में की गई फिल्म ‘होमबाउंड’ की पूरी शूटिंग वर्ष 2024 में फिल्म लापता लेडीज पहुंची थी ऑस्कर भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश ने एक बार फिर अंतर्राष्ट्रीय सिनेमा मंच पर अपनी मजबूत पहचान दर्ज कराई है। वैश्विक स्तर पर सराही गई फिल्म 'लापता लेडीज' के बाद, अब राज्य में शूट हुई फीचर फिल्म 'होमबाउंड' को 98वें अकादमी अवॉर्ड्स (ऑस्कर 2026) की बेस्ट इंटरनेशनल फीचर फिल्म श्रेणी में भारत की आधिकारिक प्रविष्टि के रूप में चयनित किया गया है। गतवर्ष फिल्म लापता लेडीज को भी ऑस्कर के लिए नॉमिनेट किया गया था। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इस गौरवपूर्ण उपलब्धि पर फिल्म की पूरी टीम को बधाई दी है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हमारे प्रदेश में शूट हुई फिल्म होमबाउंड को ऑस्कर के लिए चुना गया है। यह न केवल फिल्म जगत के लिए, बल्कि पूरे मध्यप्रदेश के लिए एक अभूतपूर्व गौरव का क्षण है। मध्यप्रदेश फिल्म पर्यटन नीति-2025 ने सिंगल विंडो सिस्टम, पारदर्शी प्रक्रिया और अनुमतियों को कम एवं सरल कर फिल्मांकन को आसान बनाया है। साथ ही आकर्षक वित्तीय प्रोत्साहन भी उपलब्ध कराए हैं। होमबाउंड का मध्यप्रदेश में फिल्माया जाना और उसका अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित होना इस बात का प्रमाण है कि मध्यप्रदेश तेजी से एक प्रमुख ग्लोबल शूटिंग हब के रूप में स्थापित हो रहा है। यह सफलता हमारे प्रदेश की समृद्ध संस्कृति, प्राकृतिक सौंदर्य और कला के प्रति समर्पण को दर्शाती है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि यह उपलब्धि प्रदेश के उन सभी युवा फिल्म निर्माताओं के लिए प्रेरणा बनेगी जो अपने सपनों को पंख देना चाहते हैं। फिल्म होमबाउंड का चयन भारतीय सिनेमा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हो सकता है, जो मध्यप्रदेश की कलात्मक और सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत करेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विश्वास जताया कि होमबाउंड ऑस्कर में भी शानदार सफलता हासिल करेगी और भारत के साथ मध्यप्रदेश का नाम रोशन करेगी। फिल्म होमबाउंड की पूरी शूटिंगवर्ष 2024 में एक बड़ा हिस्सा मध्यप्रदेश के भोपाल और आसपास के क्षेत्र में प्राकृतिक, सांस्कृतिक और शहरी परिवेश में शूट किया गया है। फिल्म की अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर प्रशंसा राज्य की फिल्म अनुकूल नीतियों और फिल्म की कहानी के अनुसार उपयुक्त लोकेशनों की सफलता का प्रमाण है। गौरतलब है कि होमबाउंड फिल्म, धर्मा प्रोडक्शन के बैनर तले बनी है। मध्यप्रदेश में शूट होने वाली यह उनकी 5वीं फिल्म है। फिल्म के निर्माता करण जौहर हैं। निर्देशक  नीरज घेवान हैं। इससे पहले उनके निर्देशन में बनी “मसान” फिल्म को भी दर्शकों ने खूब सराहा था। 'होमबाउंड' में कलाकार ईशान खट्टर, विशाल जेठवा और जान्हवी कपूर मुख्य भूमिका में हैं।   नई टूरिज्म पॉलिसी ने फिल्मांकन किया आसान मध्यप्रदेश की नई फिल्म टूरिज्म पॉलिसी ने निर्माता–निर्देशकों का काम आसान किया है। सिंगल विंडो सिस्टम के जरिए अनुमति प्राप्त करने की प्रक्रिया आसान हुई है, वहीं सब्सिडी से निर्माता–निर्देशकों को प्रोत्साहन मिला है। मध्यप्रदेश की फिल्म टूरिज्म पॉलिसी के बाद प्रदेश में 350 से अधिक फिल्में और वेबसीरीज शूट हो चुकी हैं। अब तक 12 हिंदी फिल्में, 1 तेलुगु फिल्म और 6 वेब सीरीज को 24 करोड़ रुपये से अधिक का वित्तीय अनुदान दिया जा चुका है। भारत सरकार द्वारा मध्यप्रदेश को “मोस्ट फिल्म फ्रेंडली स्टेट” के अवॉर्ड से भी सम्मानित किया गया है।  

करियर का मौका: एमपी में नई ट्रेनिंग कोर्स से मिलेगा रोजगार, एलएंडटी और आरजीपीवी का समझौता

भोपाल  देशभर की तरह मध्यप्रदेश में भी लाखों युवा बेरोजगार हैं। ये युवा प्रतिभावान होने के साथ ही उच्च शिक्षित भी हैं पर उन्हें नौकरियां नहीं मिल रही। दरअसल रोजगार परक कोर्स नहीं किए जाने के कारण ये दिक्कत आती है। प्राइवेट कंपनियों और उद्योगपतियों का कहना है कि युवा उच्च शिक्षा जरूर लेते हैं पर उनमें उद्योगों के लिए आवश्यक तकनीकी कौशल का अभाव पाया जाता है। एमपी में अब यह दिक्कत दूर करने की पहल की गई है। प्रदेश के तकनीकी संस्थानों से निकलनेवाले युवाओं और उद्योगों, कंपनियों के लिए जरूरी कौशल के बीच की खाई पाटने के लिए अहम करार किया गया है। प्रदेश के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग, मध्यप्रदेश स्टेट इलेक्ट्रॉनिक्स डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (एमपीएसईडीसी), राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (आरजीपीवी) और एलएंडटी एजूटेक के बीच एक एमओयू किया गया है। इसके अंतर्गत प्रदेश में एलएंडटी द्वारा विकसित स्पेशल कोर्स लांच किए जा रहे हैं। कोर्स पूरा करने पर स्टूडेंट को सर्टिफिकेट मिलेंगे जोकि युवाओं को तुरंत नौकरी दिला सकेंगे। मध्यप्रदेश के विश्वविद्यालयीन कोर्स को उद्योगों, कंपनियों की वास्तविक मांगों से जोड़कर इंड्स्ट्री-रेडी इंजीनियर तैयार करने की पहल की गई है। प्रदेश में हर साल 50 हजार से ज्यादा इंजीनियरिंग और अन्य तकनीकी स्नातक नौकरी बाजार में आ रहे हैं। अकादमिक-औद्योगिक तालमेल की जरूरत को देखते हुए एलएंडटी एजूटेक द्वारा विशेष पाठ्यक्रम बनाए गए हैं। पायलट प्रोेजेक्ट के रूप में इन्हें आरजीपीवी के माध्यम से लांच किया गया है। इन पाठ्यक्रमों के अंतर्गत तकनीकी मानव संसाधनों को वास्तविक परियोजनाओं, वर्चुअल लैब और इंडस्ट्री-लीडरशिप एनेबल्ड सत्रों के माध्यम से सक्षम बनाया जा रहा है। आरजीपीवी के कुलगुरू प्रो. राजीव त्रिपाठी, एमपीएसईडीसी, निवेश संवर्धन प्रभारी अवंतिका वर्मा और एलएंडटी एजूटेक टीम लीड राजा पांचाल ने एमओयू पर हस्ताक्षर किए हैं।  

जल्द शुरू होगा सिक्स लेन ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे का निर्माण, मिट्टी जांच का काम हुआ पूरा

ग्वालियर ग्वालियर से आगरा के बीच 4613 करोड़ रुपये की लागत से प्रस्तावित सिक्स लेन एक्सेस कंट्रोल ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस वे के निर्माण का ठेका लेने वाली कंपनी जीआर इंफ्राप्रोजेक्ट्स ने मृदा परीक्षण का काम पूरा कर लिया है। गत अप्रैल माह में कंपनी को ठेका मिल गया था और उसे छह माह का समय संसाधन जुटाने के साथ ही अन्य औपचारिकताएं पूरी करने के लिए दिया गया था। अब कंपनी अक्टूबर माह में उत्तर प्रदेश, राजस्थान और मध्य प्रदेश में अपने तीन बेस कैंप तैयार करेगी और तीन ही स्थानों से एक्सप्रेस वे के निर्माण की शुरूआत की जाएगी। फोरलेन हाईवे का होगा निर्माण हालांकि निर्माण कार्य नवंबर माह से शुरू होगा और 30 माह के अंदर कंपनी को यह काम पूरा करना होगा। नए एक्सप्रेस वे के निर्माण के साथ ही कंपनी द्वारा वर्तमान फोरलेन हाईवे के पुनर्निर्माण का कार्य भी किया जाएगा। इस प्रोजेक्ट का ठेका लेने वाली जीआर इंफ्रा कंपनी को अक्टूबर तक का समय निर्माण कार्य के लिए दिया गया है। इस बीच कंपनी ने आगरा, धौलपुर, मुरैना जिलों में साइल टेस्टिंग (मृदा परीक्षण) का काम पूरा कर लिया है, ताकि निर्माण कार्य शुरू होने पर कोई अड़चन ना आए। इसके अलावा अलाइनमेंट ठीक रहे और सारे पुल-पुलियों का काम बेहतर तरीके से हो सके, इसके लिए कंपनी द्वारा तीन राज्यों उत्तर प्रदेश, राजस्थान और मध्य प्रदेश में एक साथ काम की शुरूआत की जाएगी। इसके लिए कंपनी द्वारा तीन बेस ऑफिस भी तैयार किए जाएंगे। काम की शुरूआत भी जल्द ही जाएगी वर्तमान में धौलपुर में एक बेस ऑफिस का काम लगभग अंतिम चरण में है। यहां जमीन पर बाउंड्रीवॉल तैयार कर ली गई है और अंदर अस्थायी कैंप कार्यालय बनाया जाएगा। इसके अलावा भूमि के अधिग्रहण के बदले मुआवजा वितरण की प्रक्रिया भी लगभग पूरी होने को है। भूमि अधिग्रहण पूरा हो जाने के बाद एनएचएआइ को पजेशन दिया जाएगा। सरकारी रिकार्ड में भी एनएचएआइ के नाम पर एंट्री की प्रक्रिया की जाएगी। ऐसे में अक्टूबर तक कंपनी को जमीन भी एनएचएआइ उपलब्ध करा पाएगा। एनएचएआइ के अधिकारियों के अनुसार कंपनी ने बेस ऑफिस बनाने शुरू कर दिए हैं और काम की शुरूआत भी जल्द ही जाएगी। ग्वालियर व मुरैना में भी बनेंगे कार्यालय कंपनी को नए एक्सप्रेस वे के साथ ही वर्तमान हाईवे की मरम्मत का भी काम करना है। ये हाईवे निरावली रायरू तक आता है। इसके अलावा नए एक्सप्रेस वे का अलाइनमेंट भी सुसेरा गांव के पास होगा। ऐसे में कंपनी द्वारा ग्वालियर व मुरैना में भी कार्यालय बनाए जाएंगे ताकि एक ही स्थान से दोनों प्रोजेक्टों की निगरानी व संचालन में दिक्कत ना आए।  31 पुल तैयार होंगे, छह फ्लाइओवर व एक आरओबी बनेगा इस पूरे प्रोजेक्ट के अंतर्गत 31 पुल तैयार किए जाएंगे। इसमें आठ बड़े पुल और 23 छोटे पुल शामिल हैं। इसके अलावा 192 कलवर्ट यानी पुलिया भी तैयार की जाएंगी। इसके अलावा छह फ्लाइओवर और एक रेल ओवरब्रिज भी तैयार किया जाएगा। ये ओवरब्रिज जाजऊ स्टेशन के पास बनाया जाएगा। इसके अलावा चंबल नदी पर 300 मीटर लंबा हैंगिंग ब्रिज बनाया जाएगा। इस ब्रिज का कोई भी पिलर नदी में खड़ा नहीं किया जाएगा, बल्कि नदी के किनारों पर पिलर तैयार होंगे। नदी के ऊपर पूरा पुल झूलता रहेगा। ये है प्रोजेक्ट ग्वालियर से आगरा के बीच 88.400 किलोमीटर लंबे ग्रीन फील्ड एक्सप्रेस वे का निर्माण किया जाएगा। इस एक्सप्रेस वे का एनएच नंबर 719डी रखा गया है। एक्सप्रेस वे बनने के बाद आगरा से ग्वालियर पहुंचने में एक से सवा घंटा लगेगा। इस एक्सप्रेस वे के निर्माण का ठेका जीआर इंफ्रा कंपनी को दिया गया है।  

नवाचारों के हब बनेंगे टियर-2 शहर, मजबूत होगा औद्योगिक ईकोसिस्टम

आरजीपीवी-एलएंडटी एजूटेक की साझेदारी से तैयार होंगे इंडस्ट्री-रेडी इंजीनियर्स नवाचारों के हब बनेंगे टियर-2 शहर, मजबूत होगा औद्योगिक ईकोसिस्टम एमपीएसईडीसी, आरजीपीवी और एलएंडटी एजूटेक के बीच हुआ एमओयू भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के मार्गदर्शन में प्रदेश के तकनीकी संस्थानों से तैयार होने वाले मानव संसाधन और उद्योगों के लिए आवश्यक तकनीकी कौशल के बीच की खाई पाटने के लिये निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। इसी श्रृंखला में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग,मध्यप्रदेश स्टेट इलेक्ट्रॉनिक्स डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (एमपीएसईडीसी), राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (आरजीपीवी) और एलएंडटी एजूटेक के बीच एक एमओयू किया गया है। समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर के बाद अब तकनीकी कौशल और औद्योगिक प्रशिक्षण में नवाचार की दृष्टि से एलएंडटी द्वारा विकसित विशेष पाठ्यक्रम आरजीपीवी के माध्यम से प्रदेश के इंजीनियंरिंग संस्थानों में लाँच किये जा रहे हैं। इससे आने वाले वर्षों में प्रदेश में औद्योगिक-ईकोसिस्टम सशक्त बनेगा। साथ ही भोपाल, इंदौर, ग्वालियर और जबलपुर जैसे टियर-2 शहर नवाचार के नए केंद्र बनेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में विगत वर्षों में प्रदेश के विश्वविद्यालयीन पाठ्यक्रमों को उद्योग की वास्तविक मांगों से जोड़कर इंड्स्ट्री-रेडी इंजीनियर तैयार करने की पहल की गई है। प्रदेश में प्रति वर्ष 50 हजार से अधिक इंजीनियरिंग और अन्य तकनीकी स्नातक नौकरी बाजार में आ रहे हैं। अकादमिक-औद्योगिक तालमेल को आवश्यक मानते हुए एलएंडटी एजूटेक द्वारा विशेष रूप से विकसित पायलट पाठ्यक्रम आरजीपीवी के माध्यम से लाँच किये गये हैं। इन पाठ्यक्रमों के अंतर्गत तकनीकी मानव संसाधनों को वास्तविक परियोजनाओं, वर्चुअल लैब और इंडस्ट्री-लीडरशिप एनेबल्ड सत्रों के माध्यम से सक्षम बनाया जा रहा है। आरजीपीवी के कुलगुरू प्रो. राजीव त्रिपाठी, एमपीएसईडीसी, निवेश संवर्धन प्रभारी अवंतिका वर्मा और एलएंडटी एजूटेक टीम लीड राजा पांचाल ने एमओयू पर हस्ताक्षर किये है। एलएंडटी एजुटेक तकनीकी और शैक्षणिक सामग्री तथा ट्रेनर-सपोर्ट प्रदान करेगी, आरजीपीवी अकादमिक समन्वय एवं विद्यार्थी चयन में भूमिका निभाएगा और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग वित्तीय व तकनीकी व्यवस्था की जिम्मेदारी संभालेगा। एलएंडटी एजूटेक आरजीपीवी में दो पायलट कोर्स आरम्भ करेगी जो पांचवें सेमेस्टर से पढ़ाये जाएंगे। इनमें ‘डेटा हैंडलिंग के लिए पायथन’ और फ्रंट-एंड यूआई/यूएक्स शामिल हैं। एलएंडटी एजूटेक के पायलट पाठ्यक्रम के प्रारम्भिक बैच में 100 विद्यार्थियों को प्रवेश दिया जायेगा। पाठ्यक्रम में 75 घंटे का संरचित कार्यक्रम शामिल होगा। विद्यार्थियों को ‘ऑनलाइन कंटेंट + लाइव एक्सपर्ट सेशंस + प्रोजेक्ट-आधारित लर्निंग + वर्चुअल लैब’ से प्रशिक्षण दिया जायेगा। इस पाठ्यक्रम को सफलतापूर्वक पूरा करने वाले पात्र विद्यार्थियों को ई-सर्टिफिकेट प्रदान किए जाएंगे। पाठ्यक्रम में उद्योगों की आवश्यकताओं के अनुरूप ऑन-द-जॉब प्रशिक्षण से विद्यार्थियों की तकनीकी दक्षता और व्यावहारिक अनुभव बढ़ाया जायेगा। प्रारंभिक बैच में आरजीपीवी में चयनित विद्यार्थियों को शामिल किया जायेगा। फैकल्टी डेवलपमेंट वर्कशॉप, इंडस्ट्री-इंटर्नशिप मॅचमेकिंग, एडवांस्ड स्पेशलाइजेशन मॉड्यूल और राज्यस्तरीय रोलआउट टाइमलाइन। एमपीएसईडीसी द्वारा नियमित प्रगति रिपोर्ट और परिणामों का विश्लेषण किया जाएगा ताकि नीतिगत स्तर पर उपयुक्त निर्णय लिए जा सकें। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग ने स्पष्ट किया है कि यह एक पायलट पाठ्यक्रम है, परिणाम सकारात्मक आने पर इसे प्रदेश के दूसरे टेक्निकल विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में भी लागू किया जाएगा। प्रशिक्षण के दौरान विद्यार्थियों के मूल्यांकन में परियोजना-आधारित आकलन, ऑनलाइन टेस्ट, प्रशिक्षक-आधारित फीडबैक और वर्चुअल लैब प्रोजेक्ट की प्रस्तुति शामिल की जायेगी। पाठ्यक्रम पूर्ण होने पर एलएंडटी एजूटेक तथा आरजीपीवी के सम्मिलित मानदंडों के अनुरूप ई-सर्टिफिकेट जारी किए जाएँगे।    

8589 पदों पर पुलिस भर्ती: परीक्षा से पहले होगी कड़ी जांच, टैटू वाले candidates रखें सतर्क

भोपाल  मध्य प्रदेश में 2022 में पटवारी भर्ती परीक्षा और 2023 में हुई पुलिस आरक्षक भर्ती परीक्षा में गड़बड़ी को लेकर बड़े सवाल उठे थे. एक बार फिर मध्य प्रदेश कर्मचारी चयन मंडल द्वारा 8589 पदों पर पुलिस भर्ती कराई जा रही है. पिछली परीक्षाओं में हुई गड़बड़ी से बड़ा सबक लेते हुए मध्य प्रदेश कर्मचारी चयन मंडल इस बार खास सर्तकता बरत रहा है. गड़बडी रोकने के लिए अभ्यार्थियों को कड़ी सुरक्षा व्यवस्था से गुजरना होगा. मुन्नाभाईयों पर नकेल कसने के लिए इस बार सिर्फ आधार वेरिफिकेशन और थंप इंप्रेशन से काम नहीं चलेगा, बल्कि एआई तकनीक से अभ्यर्थियों के चेहरे का मिलान भी किया जाएगा. उधर फिजिकल के लिए भी पुलिस मुख्यालय नियम तैयार कर रहा है. इस बार शरीर पर टैटू बनवाने वालों को भर्ती प्रक्रिया से अलग किया जा सकता है. अब सिर्फ फिंगर प्रिंट से नहीं चलेगा काम मध्य प्रदेश पुलिस भर्ती परीक्षा में सिर्फ आधार कार्ड और फिंगर प्रिंट मिलान से ही काम नहीं चलेगा. इसके अलावा कई सुरक्षा फीचर्स का उपाए इस बार किया जाएगा. मध्य प्रदेश में 2023 में पुलिस भर्ती परीक्षा से सबक लेकर यह किया गया है. 2023 में पुलिस भर्ती परीक्षा में मुन्नाभाई फिल्म की तर्ज पर भर्ती में फर्जीवाड़ा किया गया था. अभ्यर्थियों ने अपने स्थान पर मुन्नाभाईयों को परीक्षा में बैठाकर एग्जाम पास किया था. इस परीक्षा में शामिल होने वाले एग्जाम सेंटर पहुंचने वाले अभ्यर्थियों के थंब इंप्रेशन का मिलान किया गया था, लेकिन कई अभ्यर्थियों ने सांठगांठ कर आधार कार्ड में फिंगर प्रिंट ही अपडेट करा लिए और अपने स्थान पर मुन्नाभाई को परीक्षा केन्द्र में पहुंचा दिया. हालांकि जब ज्वाइनिंग का मौका आया तो फर्जीवाड़ा पकड़ में आ गया. 2022 में हुई पटवारी परीक्षा को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े हुए थे. इसमें मेरिटी लिस्ट के 10 में से 7 टॉपर एक ही सेंटर से परीक्षा देने वाले थे. दो परीक्षाओं के बाद यह लिया निर्णय मध्य प्रदेश में अब हो रही 8589 पदों पर भर्ती को लेकर एमपी कर्मचारी चयन मंडल ने 3 बड़े बदलाव किए हैं, ताकि मुन्नाभाईयों को परीक्षा में बैठने से रोका जा सके. पुलिस भर्ती परीक्षा में इस बार सिर्फ आधार कार्ड, फिंगर प्रिंट मिलान से काम नहीं चलेगा. परीक्षा सेंटर पर पहुंचने वाले अभ्यर्थियों का आधार कार्ड में लगाए गए फोटो से अभ्यर्थियों के चेहरे का मिलान किया जाएगा. इसके लिए सभी सेंटर पर फेस रिकग्नीशन कैमरे लगाए जाएंगे. परीक्षा सेंटर पर पहुंचने वाले सभी अभ्यर्थियों के फिंगर प्रिंट का मिलान तो होगा ही, साथ ही अभ्यर्थियों की आंखों की पुतली के पैटर्न का भी मिलान करेगा, ताकि यदि कोई फिंगर प्रिंट चैंज भी करा ले, तो आंखों की पुतली से उसे पकड़ा जा सके. इस बार परीक्षा सेंटर बनाने में भी विशेष सर्तकता बरती जा रही है. इस बार 11 प्रमुख शहरों में ही परीक्षा केन्द्र बनाए जाएंगे. भोपाल, इंदौर, जबलपुर, खंडवा, नीमच, रतलाम, रीवा, सागर, सतना, सीधी और उज्जैन में ही ऑनलाइन परीक्षा केन्द्र बनाए जाएंगे. पूर्व में विवादित हो चुके शहरों में परीक्षा केन्द्र नहीं बनाए गए हैं. मध्य प्रदेश कर्मचारी चयन मंडल के संचालक साकेत मालवीय कहते हैं कि "परीक्षा पारदर्शी तरीके से हो, इसके लिए इस बार आंखों की पुतली की स्कैनिंग और एआई के उपयोग जैसे कई कदम उठाए जा रहे हैं." टैटू बनवाने से बचें अभ्यर्थी उधर पुलिस भर्ती की लिखित परीक्षा के बाद अभ्यर्थियों को फिजिकल टेस्ट से भी गुजरना होगा. इसमें अभ्यर्थियों का मेडिकल टेस्ट और फिजिकल टेस्ट भी होगा. इसमें ऐसे उम्मीदवारों को परेशानी आ सकती है, जिनके शरीर पर किसी तरह के फैशनेबल टैटू बने होंगे. आमतौर पर नवरात्री में गरबा जैसे आयोजन में हिस्सा लेने के पहले युवा शरीर पर आकर्षक टैटू बनवा लेते हैं. पुलिस भर्ती में सिलेक्शन में ऐसे टैटू परेशानी बन सकते हैं. एडीजी चयन एवं भर्ती शाहिद अबसार कहते हैं कि "सेना में आमतौर पर नियम होता है कि शरीर पर किसी तरह का टैटू आदि नहीं होना चाहिए, जो उनके शिष्टाचार के नियम को तोड़े. मध्य प्रदेश पुलिस में भी शिष्टाचार का विशेष ध्यान रखा जाता है. पुलिस भर्ती को लेकर शासन स्तर से इसको लेकर नियम आए तो ऐसे अभ्यर्थियों को समस्या हो सकती है."