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RPSC to get a new chairman soon: Four names under consideration, preparations for a major decision intensify

जयपुर राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) को जल्द नया अध्यक्ष (New Chairman) मिल सकता है. पूर्व अध्यक्ष यूआर साहू का कार्यकाल 19 जून को पूरा होने के बाद से आयोग का अध्यक्ष पद खाली है. ऐसे में राज्य सरकार ने नए अध्यक्ष की नियुक्ति की प्रक्रिया तेज कर दी है. सूत्रों के मुताबिक, अध्यक्ष पद के लिए चार वरिष्ठ अधिकारियों के नामों पर गंभीरता से मंथन चल रहा है. इनमें दो वर्तमान में कार्यरत और दो सेवानिवृत्त वरिष्ठ अधिकारियों के नाम शामिल बताए जा रहे हैं. हालांकि सरकार की ओर से अभी तक किसी नाम की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है. फिलहाल आयोग के वरिष्ठ सदस्य लेफ्टिनेंट कर्नल केसरी सिंह राठौड़ को कार्यवाहक अध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी गई है ताकि आयोग की नियमित प्रशासनिक और भर्ती संबंधी गतिविधियां प्रभावित न हों. लेकिन सरकार स्थायी अध्यक्ष की नियुक्ति जल्द करना चाहती है. सरकार क्यों जल्द करेगी अध्यक्ष पर फैसला इस नियुक्ति को लेकर सरकार की जल्दबाजी की बड़ी वजह आगामी भर्ती परीक्षाएं हैं. आने वाले समय में आरएएस भर्ती-2026 समेत कई महत्वपूर्ण भर्तियों की प्रक्रिया शुरू होनी है. इसके अलावा विभिन्न विभागों में लंबित और प्रस्तावित भर्तियों को भी समयबद्ध तरीके से आगे बढ़ाना है. ऐसे में आयोग में नियमित अध्यक्ष का होना जरूरी माना जा रहा है. कैसे अध्यक्ष की हो रही तलाश बताया जा रहा है कि सरकार ऐसे अधिकारी कि तलाश में है, जिसके पास लंबा प्रशासनिक अनुभव हो और जो भर्ती प्रक्रिया की जटिलताओं को समझते हुए आयोग की कार्यप्रणाली को अधिक पारदर्शी और प्रभावी बना सके. पिछले कुछ वर्षों में भर्ती परीक्षाओं और पेपर लीक जैसे मामलों के कारण आयोग लगातार चर्चा में रहा है. ऐसे में नए अध्यक्ष के सामने आयोग की विश्वसनीयता को और मजबूत करने की चुनौती भी होगी. सीएम लगाएंगे अंतिम मुहर अध्यक्ष पद को लेकर दिल्ली से जयपुर तक लॉबिंग भी तेज हो गई है. प्रशासनिक और राजनीतिक स्तर पर कई नामों को लेकर चर्चा चल रही है. लेकिन मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ऐसे अधिकारी के नाम पर अंतिम मुहर लगाना चाहते हैं, जिसकी प्रशासनिक छवि बेदाग रही हो और जिसे भर्ती प्रक्रिया तथा सुशासन का व्यापक अनुभव हो. सरकार ऐसे चेहरे की तलाश में है, जिसकी नियुक्ति से आयोग की विश्वसनीयता और पारदर्शिता को लेकर सकारात्मक संदेश जाए. राजस्थान लोक सेवा आयोग राज्य की सबसे बड़ी भर्ती एजेंसी है. आयोग के माध्यम से आरएएस, राजस्थान प्रशासनिक सेवाओं, शिक्षा, तकनीकी सेवाओं और विभिन्न विभागों की भर्ती परीक्षाएं आयोजित की जाती हैं. लाखों अभ्यर्थियों का भविष्य आयोग की कार्यप्रणाली और समयबद्ध भर्ती प्रक्रिया पर निर्भर करता है. संवैधानिक प्रावधानों के अनुसार, राजस्थान लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति राज्यपाल करते हैं. अध्यक्ष का कार्यकाल छह वर्ष या 62 वर्ष की आयु, जो भी पहले हो, तक होता है.

राजस्थान में शिक्षा, स्वास्थ्य और शहरी विकास पर मंत्रिमंडलीय उप-समिति की अहम बैठक

 जयपुर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में राज्य सरकार प्रदेश के चहुंमुखी विकास, जन-सुविधाओं के विस्तार और संस्थागत सुदृढ़ीकरण के लिए निरंतर नीतिगत निर्णय ले रही है। इसी क्रम में मंगलवार को शासन सचिवालय में मंत्रिमंडलीय उप-समिति की बैठक आयोजित की गई। बैठक में प्रदेश के विभिन्न जिलों में सार्वजनिक हित, उच्च शिक्षण संस्थान, स्वास्थ्य सेवाएं, सामाजिक कल्याण एवं औद्योगिक केंद्रों की स्थापना के लिए रियायती दरों पर भूमि आवंटन के विभिन्न प्रकरणों पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया।  उपमुख्यमंत्री डॉ. प्रेमचंद बैरवा की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री गजेंद्र सिंह, शिक्षा मंत्री मदन दिलावर, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री अविनाश गहलोत तथा  नगरीय विकास एवं आवासन राज्य मंत्री(स्वतंत्र प्रभार) झाबर सिंह खर्रा सहित संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।  भूमि आवंटन प्रकरणों की हुई विस्तृत समीक्षा  बैठक में जनहित, शिक्षा, स्वास्थ्य, सामाजिक कल्याण एवं शहरी आधारभूत सुविधाओं के विस्तार से संबंधित बिंदुओं की समीक्षा की गई। समिति ने पात्र प्रकरणों में नियमानुसार आवश्यक कार्यवाही सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। शैक्षणिक एवं सामाजिक सरोकार से जुड़े संस्थानों के भूमि आवंटन प्रकरणों को प्राथमिकता से आगे बढ़ाने पर भी सहमति व्यक्त की गई।  स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार पर जोर  बैठक में स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार, विशेषीकृत चिकित्सा सुविधाओं की उपलब्धता तथा आमजन को बेहतर उपचार सुविधाएं उपलब्ध कराने से संबंधित प्रस्तावों की समीक्षा की गई। समिति ने राज्य सरकार से लाभ प्राप्त संस्थाओं द्वारा  जनकल्याणकारी योजनाओं का अधिकतम लाभ आमजन तक पहुंचाने तथा स्वास्थ्य संस्थानों में राज्य सरकार की विभिन्न चिकित्सा सहायता योजनाओं जैसे मा और आरजीएचएस के प्रभावी क्रियान्वयन के निर्देश दिए।  शहरी विकास एवं नागरिक सुविधाओं पर निर्देश  समिति ने औद्योगिक एवं व्यापारिक संगठनों के भवन निर्माण में पेनल्टी पर छूट जैसे प्रकरणों पर एवं शेष प्रकरणों के समाधान के लिए प्रक्रियाओं में आवश्यक सरलीकरण, किश्तों में भुगतान की सुविधा तथा नियमानुसार ग्रेस पीरियड उपलब्ध कराने के सुझावों पर भी सकारात्मक विचार-विमर्श किया गया।  शहरी विकास से जुड़े विषयों पर समिति ने शहरी सेवा अभियान के अंतर्गत पट्टों सहित विभिन्न लाभों के वितरण में तेजी लाने, लंबित प्रकरणों के अधिकाधिक निस्तारण तथा नागरिकों को राहत प्रदान करने के लिए उपलब्ध प्रावधानों का प्रभावी उपयोग सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।  पारदर्शी नगरीय कराधान व्यवस्था के निर्देश  समिति ने नगरीय कराधान एवं शुल्क निर्धारण से संबंधित विषयों की समीक्षा करते हुए पारदर्शी एवं व्यावहारिक व्यवस्था विकसित करने के लिए आवश्यक प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश दिए तथा पात्रता के निर्धारित प्रावधानों का पूर्ण पालन सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया।  आरक्षित दरों से छूट के प्रकरणों पर विचार  बैठक में विभिन्न संस्थागत, शैक्षणिक, सामाजिक एवं सार्वजनिक उपयोग के भूमि आवंटन प्रकरणों में आरक्षित दरों से छूट के मामलों पर भी विचार किया गया। समिति ने जनहित एवं लोककल्याण की भावना को ध्यान में रखते हुए पात्र प्रकरणों को प्राथमिकता से निस्तारित करने पर सहमति व्यक्त की।  उपमुख्यमंत्री डॉ. प्रेमचंद बैरवा ने कहा कि राज्य सरकार प्रदेश में शिक्षा, स्वास्थ्य, सामाजिक विकास तथा शहरी आधारभूत संरचना को सुदृढ़ करने के लिए पूर्णतः प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि विभिन्न संस्थागत एवं जनोपयोगी परियोजनाओं के माध्यम से आमजन को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने तथा विकास कार्यों को गति देने के लिए आवश्यक निर्णय समयबद्ध रूप से लिए जा रहे हैं।

राजस्थान यूनिफॉर्म सिविल कोड: शादी, तलाक और संपत्ति नियमों में बड़े बदलाव की संभावना

जयपुर जयपुर की एक बुजुर्ग महिला वर्षों से अपने पैतृक घर के एक हिस्से पर हक की लड़ाई लड़ रही है। दूसरी तरफ, एक युवती अदालतों के चक्कर काटते हुए यह साबित करने में लगी है कि शादी के बाद भी उसे बराबरी का अधिकार मिलना चाहिए। कहीं एक महिला अपने पति की दूसरी शादी के खिलाफ न्याय चाहती है, तो कहीं लिव-इन रिलेशनशिप में रहने वाला एक जोड़ा सामाजिक पहचान की तलाश में है। अब राजस्थान में यूनिफॉर्म सिविल कोड यानी समान नागरिक संहिता की तैयारी के साथ इन तमाम कहानियों का भविष्य बदल सकता है। सरकार ने बढ़ाया पहला बड़ा कदम राज्य सरकार ने यूसीसी लागू करने की दिशा में कदम बढ़ा दिए हैं। सुप्रीम कोर्ट की पूर्व न्यायाधीश रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता में गठित कमेटी कानून का मसौदा तैयार करेगी। लेकिन यह सिर्फ एक नया कानून नहीं होगा, बल्कि राजस्थान के करोड़ों लोगों की निजी जिंदगी को प्रभावित करने वाला सबसे बड़ा सामाजिक बदलाव साबित हो सकता है। शादी के नियमों में बड़ा बदलाव अगर यूसीसी लागू होती है तो सबसे बड़ा असर विवाह व्यवस्था पर दिखाई देगा। प्रदेश में किसी भी धर्म का व्यक्ति एक से ज्यादा शादी नहीं कर सकेगा। अभी अलग-अलग धर्मों के लिए अलग-अलग व्यक्तिगत कानून लागू हैं, लेकिन नए कानून के बाद विवाह के नियम एक समान हो सकते हैं। इसका मतलब यह होगा कि शादी केवल सामाजिक या धार्मिक रस्म नहीं रहेगी, बल्कि कानूनी रूप से पंजीकृत संबंध बन जाएगी। महिलाओं को मिल सकती है नई ताकत विशेषज्ञ मानते हैं कि इससे महिलाओं की स्थिति मजबूत होगी। आज भी कई मामलों में महिलाएं दूसरी शादी, भरण-पोषण और वैवाहिक अधिकारों को लेकर लंबी कानूनी लड़ाई लड़ती हैं। एक समान कानून इन विवादों को कम कर सकता है। महिलाओं को अपने अधिकारों के लिए अलग-अलग कानूनों की व्याख्या पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। बेटियों के अधिकारों की नई कहानी यूसीसी का दूसरा बड़ा प्रभाव संपत्ति के अधिकारों पर पड़ सकता है। राजस्थान के ग्रामीण इलाकों में आज भी कई परिवारों में बेटियों को पैतृक संपत्ति में बराबरी का हिस्सा देने को लेकर अनिच्छा दिखाई देती है। हालांकि कानून पहले से अधिकार देता है, लेकिन व्यवहार में स्थिति अलग है। यूसीसी लागू होने के बाद संपत्ति के उत्तराधिकार को लेकर एक समान व्यवस्था बनने की संभावना है, जिससे बेटा और बेटी दोनों के अधिकारों को और स्पष्ट कानूनी मजबूती मिल सकती है। लिव-इन रिलेशनशिप भी आएंगे कानूनी दायरे में लिव-इन रिलेशनशिप को लेकर भी बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। प्रस्तावित व्यवस्था के अनुसार ऐसे संबंधों का रजिस्ट्रेशन अनिवार्य किया जा सकता है। समर्थकों का कहना है कि इससे महिलाओं और बच्चों के अधिकार सुरक्षित होंगे, जबकि आलोचक इसे निजी जीवन में सरकारी दखल के रूप में देखते हैं। लेकिन इतना तय है कि पहली बार ऐसे रिश्ते कानूनी बहस के केंद्र में आ जाएंगे। शादी और तलाक का रिकॉर्ड बनेगा जरूरी शादी और तलाक का अनिवार्य पंजीकरण भी आम लोगों की जिंदगी में बड़ा बदलाव लाएगा। आज भी प्रदेश में हजारों विवाह केवल सामाजिक और धार्मिक स्तर पर संपन्न होते हैं, जिनका कोई आधिकारिक रिकॉर्ड नहीं होता। बाद में संपत्ति, पहचान, भरण-पोषण या वैवाहिक विवादों के दौरान यही सबसे बड़ी समस्या बन जाती है। रजिस्ट्रेशन अनिवार्य होने से ऐसे विवादों में कमी आ सकती है परंपराओं और कानून के बीच संतुलन की चुनौती हालांकि यूसीसी का रास्ता पूरी तरह आसान नहीं होगा। राजस्थान की सामाजिक संरचना बेहद विविध है। यहां अलग-अलग धर्म, समुदाय और परंपराएं सदियों से साथ-साथ चलती रही हैं। ऐसे में नया कानून लागू होने पर कई सवाल भी उठेंगे। क्या सभी समुदाय इसे समान रूप से स्वीकार करेंगे? क्या पारंपरिक रीति-रिवाजों और आधुनिक कानूनी व्यवस्था के बीच संतुलन बन पाएगा? यही वह चुनौती है जिस पर गठित कमेटी को सबसे ज्यादा काम करना होगा। जनजातीय समुदायों के लिए अलग व्यवस्था संभव सरकार ने संकेत दिए हैं कि स्थानीय जनजातीय समुदायों को उनकी सांस्कृतिक और संवैधानिक विशेषताओं के आधार पर नए कानून के दायरे से बाहर रखा जा सकता है। यदि ऐसा होता है तो राजस्थान में यूसीसी का स्वरूप अन्य राज्यों से कुछ अलग भी हो सकता है। दूसरे राज्यों के अनुभवों पर भी नजर उत्तराखंड पहले ही यूसीसी लागू कर चुका है। गुजरात और असम भी इस दिशा में आगे बढ़ चुके हैं। अब राजस्थान इस बहस का नया केंद्र बनने जा रहा है। लेकिन यहां सवाल सिर्फ कानून का नहीं है। सवाल उन महिलाओं का है जो बराबरी चाहती हैं। उन बेटियों का है जो अपने हिस्से का सम्मान मांगती हैं। उन परिवारों का है जो वर्षों से अलग-अलग कानूनी व्यवस्थाओं के बीच उलझे हुए हैं। विधानसभा से घर-घर तक पहुंचेगी बहस आने वाले महीनों में जब कमेटी अपनी रिपोर्ट देगी और विधानसभा में इस पर बहस होगी, तब सिर्फ एक विधेयक पर चर्चा नहीं होगी। चर्चा इस बात पर होगी कि क्या राजस्थान अपनी सामाजिक संरचना में एक ऐसा बदलाव स्वीकार करने के लिए तैयार है, जो लोगों के निजी जीवन, पारिवारिक रिश्तों और अधिकारों की परिभाषा को नए सिरे से लिख सकता है। एक कानून से कहीं बड़ी कहानी फिलहाल यूसीसी एक प्रस्ताव है, लेकिन इसकी आहट ने प्रदेश में एक नई बहस शुरू कर दी है। यह बहस अदालतों से निकलकर घरों तक पहुंच चुकी है। और शायद यही इसकी सबसे बड़ी कहानी है। आने वाले समय में यह तय होगा कि यूसीसी केवल कानून बनकर रह जाती है या फिर राजस्थान के सामाजिक इतिहास में एक नए अध्याय की शुरुआत करती है।

पांचना बांध जल विवाद पर सियासत तेज, 10 पुलिस अधिकारी तैनात

 जयपुर राजस्थान के पांचना बांध का मुद्दा गरमाता जा रहा है. इसे लेकर अब सियासत भी शुरू हो गई है. जिसके बाद विवाद बढ़ता जा रहा है. विवाद को देखते हुए अब सरकार भी सावधानी बरत रही है. पांचना बांध जल विवाद को लेकर प्रस्तावित धरना, प्रदर्शन और रेल रोको आंदोलन के मद्देनज़र पुलिस मुख्यालय अलर्ट मोड पर आ गया है. कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए 10 वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों की विशेष ड्यूटी लगाई गई है. अतिरिक्त महानिदेशक पुलिस (कानून-व्यवस्था) की ओर से जारी आदेश के अनुसार सभी अधिकारियों को 23 जून 2026 को दोपहर तक आईजी भरतपुर रेंज को रिपोर्ट करना होगा. ड्यूटी के दौरान अधिकारियों को सरकारी वाहन के उपयोग की भी अनुमति दी गई है. जयपुर-जोधपुर रेंज के कई बड़े अधिकारी तैनात ड्यूटी पर लगाए गए अधिकारियों में जयपुर पुलिस मुख्यालय, जयपुर कमिश्नरेट, कोटा शहर और जोधपुर रेंज में तैनात अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक, उप पुलिस अधीक्षक और सहायक पुलिस आयुक्त स्तर के अधिकारी शामिल हैं. पांचना बांध के पानी को लेकर चल रहे विवाद और प्रस्तावित रेल रोको आंदोलन को देखते हुए पुलिस मुख्यालय ने एहतियात के तौर पर यह कदम उठाया है, ताकि किसी भी स्थिति में कानून-व्यवस्था प्रभावित न हो. कई गांव दो पक्षों में बंटे बता दें, पिछले एक महीने से पांचना बांध पर कई गांव के लोग पहरा देकर पानी रोकने पर अड़े हुए हैं. जबकि कई गांव के किसान कोर्ट के आदेश का हवाला देकर पानी छोड़ने की मांग कर रहे हैं. दो पक्षों के बीच अब यह विवाद गहराता जा रहा है. इस मामले में इसी साल मई महीने में हाई कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिए थे कि बांध का पानी जल्द ही कमांड एरिया में छोड़ा जाए. लेकिन इसके बावजूद आदेश पर काम नहीं हुआ है. पांचना बांध पर सियासत भी तेज दूसरी ओर सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों आमने सामने खड़े हैं. पांचना बांध को लेकर गहलोत सरकार पर निशाना साध रहे हैं. जबकि बीजेपी की ओर से मदन दिलावर पिछली कांग्रेस सरकार पर निशाना साध रहे हैं और कह रहे हैं कि जब गहलोत की 5 साल की सरकार थी तो उन्होंने इस विवाद को क्यों नहीं सुलझाया. लेकिन बीजेपी सरकार इसका स्थायी समाधान निकालेगी.

राजस्थान सरकार का बड़ा कदम, समान नागरिक संहिता का प्रारूप होगा तैयार

जयपुर संसदीय कार्य मंत्री जोगाराम पटेल और गृह राज्य मंत्री जवाहर सिंह बेढम ने सोमवार को शासन सचिवालय में आयोजित प्रेस वार्ता में कहा कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में राजस्थान तेजी से समान नागरिक संहिता (यूनिफार्म सिविल कोड) की ओर अग्रसर है। इसमें सभी नागरिकों के लिए समान नागरिक कानून होंगे। राज्य सरकार ने विधेयक का प्रारूप तैयार करने हेतु उच्च स्तरीय समिति का गठन किया है। पटेल ने बताया कि संवैधानिक भावना को ध्यान में रखते हुए मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में आयोजित मंत्रिमण्डल की बैठक में 14 अप्रैल, 2026 को राज्य में इस विषय पर सार्थक कार्यवाही करने का निर्णय लिया था। इसके अंतर्गत आदिवासी समुदाय के रीति-रिवाज को सुरक्षित रखा जाएगा और उन्हें संवैधानिक सुरक्षा मिलेगी। इससे प्रदेश को नई दशा और दिशा मिलेगी।   उन्होंने बताया कि संविधान के भाग 4 में वर्णित राज्य की नीति के निर्देशक तत्वों के अंतर्गत अनुच्छेद 44 के प्रावधानों के मद्देनजर राज्य सरकार ने राज्य में समान नागरिक संहिता लागू करने की दिशा में ऐतिहासिक कदम उठाया है। अनुच्छेद 44 में उल्लेख है कि राज्य, भारत के समस्त राज्य क्षेत्र में नागरिकों के लिए एक समान सिविल संहिता (Uniform Civil Code-UCC) प्राप्त कराने का प्रयास करेगा। बेढम ने बताया कि ‘राजस्थान समान नागरिक संहिता, 2026’ (The Rajasthan Uniform Civil Code, 2026) के विधेयक का प्रारूप तैयार करने हेतु उच्चतम न्यायालय की सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता में एक समिति गठित की गई है। समिति के अन्य सदस्य सेवानिवृत्त आई.ए.एस. शत्रुघ्न सिंह, राजस्थान उच्च न्यायालय के अतिरिक्त महाधिवक्ता बसंत सिंह छाबा, राजकीय विधि महाविद्यालय, श्रीगंगानगर के सेवानिवृत्त प्राचार्य रामस्वरूप अग्रवाल और डॉ. शुचि चौहान बनाये गये हैं। अतिरिक्त मुख्य सचिव (गृह) को समिति का सदस्य सचिव नियुक्त किया गया है। उन्होंने बताया कि समान नागरिक संहिता के विधेयक के प्रारूप को समावेशी और पारदर्शी बनाने के लिए समिति संभाग स्तर पर जन-संवाद को प्राथमिकता देगी। वेबसाइट के माध्यम से राज्य के आम नागरिक अपने बहुमूल्य सुझाव सीधे समिति तक पहुंचा सकेंगे। समान नागरिक संहिता में विवाह और तलाक का अनिवार्य पंजीकरण, बहुविवाह पर पूर्ण रोक समान नागरिक संहिता का प्रमुख ध्येय देश या राज्य में रहने वाले सभी नागरिकों के लिए एक समान नागरिक कानून लागू करना है, चाहे वे किसी भी धर्म, जाति या समुदाय के हों। वर्तमान में शादी, तलाक, संपत्ति के उत्तराधिकार, गोद लेने और भरण-पोषण जैसे मामलों में अलग-अलग व्यक्तिगत कानूनों का पालन होता है। यूसीसी लागू होने से ये विसंगतियां समाप्त होंगी। इसका मुख्य उद्देश्य अलग-अलग पर्सनल लॉ में महिलाओं के साथ होने वाले भेदभाव को समाप्त कर उन्हें लैंगिक समानता और पुरुषों के बराबर अधिकार दिलाना है। इसके तहत विवाह और तलाक का अनिवार्य पंजीकरण, बहुविवाह पर पूर्ण रोक, लिव-इन रिलेशनशिप का अनिवार्य रजिस्ट्रेशन तथा पैतृक संपत्ति में बेटा-बेटी दोनों को समान अधिकार जैसे प्रमुख बदलाव शामिल हैं। राज्य सरकार समिति के माध्यम से राज्य की आवश्यकताओं और सामाजिक ताने-बाने के अनुरूप एक आदर्श और प्रगतिशील कानून का प्रारूप तैयार करने के लिए प्रतिबद्ध है।  

प्रसूताओं पर संकट के बीच मंत्री गजेंद्र सिंह की टिप्पणी, कहा- दर्द से बचने की चाह से बढ़ रहे सीजेरियन

जोधपुर  राजस्थान में प्रसूताओं की तबीयत बिगड़ने के मामलों को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच चिकित्सा मंत्री गजेंद्र सिंह खीमसर ने एक बार फिर बड़ा बयान दिया है. कोटा, बीकानेर और अब जोधपुर में सामने आए मामलों पर उन्होंने कहा कि सभी मामले अलग-अलग प्रकृति के हैं और इन्हें एक-दूसरे से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए. उन्होंने दावा किया कि प्रभावित महिलाओं में से छह की हालत बिल्कुल ठीक है, जबकि एक महिला को बेहतर उपचार के लिए एम्स रेफर किया गया है. चिकित्सा मंत्री ने सिजेरियन डिलीवरी के बढ़ते मामलों पर कहा कि आज की युवा पीढ़ी प्रसव पीड़ा नहीं चाहती, इसलिए सिजेरियन डिलीवरी के मामलों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है. मंत्री के इस बयान को लेकर एक बार फिर बवाल मच गया है।  चिकित्सा मंत्री यहीं नहीं रूके, उन्होंने यह भी कहा कि कई बार मरीज गंभीर हालत में रेफर होकर बड़े अस्पतालों में पहुंचते हैं. लोग विभिन्न अस्पतालों में इलाज के दौरान धक्के खाते हुए आखिरकार मेडिकल कॉलेजों तक पहुंचते हैं, ऐसे में हर मामले की परिस्थितियां अलग होती हैं. उन्होंने दावा किया कि मातृ मृत्यु दर मात्र एक प्रतिशत है. मंत्री ने कहा कि कोटा मामले में ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन में गड़बड़ी मिलने के बाद निजी खरीद 25 प्रतिशत तक कम करने के निर्देश दिए गए हैं. उन्होंने बताया कि जोधपुर में कोई महिला गंभीर नहीं है और अब तक की जांच में संक्रमण बड़ा कारण सामने नहीं आया है. किडनी फेलियर के कारणों की अलग-अलग स्तर पर जांच की जा रही है।  रेफर की गई दो महिलाओं में से एक की हालत गंभीर इधर, जोधपुर के पावटा स्थित सेटेलाइट अस्पताल में सिजेरियन डिलीवरी के बाद प्रसूताओं की तबीयत बिगड़ने के मामले को लेकर प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह सक्रिय हो गया है. मिली जानकारी के अनुसार, एमडीएम अस्पताल में रेफर की गई दो महिलाओं में से एक की हालत अभी भी गंभीर बनी हुई है, जबकि अन्य छह महिलाओं का उपचार सेटेलाइट अस्पताल में जारी है. डॉक्टरों की टीम लगातार उनकी निगरानी कर रही है।  प्रारंभिक जांच में किडनी संक्रमण की आशंका है  एसएन मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. बी.एस. जोधा के अनुसार, आठ महिलाओं में से एक महिला को अत्यधिक रक्तस्राव (ब्लीडिंग) हुआ था, जबकि दूसरी महिला डायबिटीज की मरीज है और उसका ब्लड प्रेशर काफी कम हो गया था. प्रारंभिक जांच में किडनी संक्रमण की आशंका भी जताई जा रही है. संक्रमण के संदेह के चलते अस्पताल के ऑपरेशन थिएटर को फिलहाल बंद कर दिया गया है और पूरे मामले की जांच शुरू कर दी गई है. स्वास्थ्य विभाग ने स्थिति पर लगातार नजर बनाए रखी है तथा प्रभावित महिलाओं के उपचार के लिए विशेष चिकित्सकीय टीम तैनात की गई है।  जिला कलेक्टर ने बुलाई उच्च स्तरीय बैठक मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला कलेक्टर आलोक रंजन ने उच्च स्तरीय बैठक बुलाई. बैठक में डॉ. एस.एन. मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. बी.एस. जोधा, सेटेलाइट अस्पताल के पीएमओ कुलबीर सिंह तथा अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने हिस्सा लिया. बैठक में पूरे घटनाक्रम की विस्तृत समीक्षा की गई और अब तक की जांच रिपोर्ट तथा उपचार व्यवस्थाओं की जानकारी ली गई।      कोटा और बीकानेर के बाद अब जोधपुर के पावटा जिला अस्पताल में सिजेरियन प्रसव के बाद 8 प्रसूताओं की तबीयत बिगड़ने और दो माताओं की हालत गंभीर होने का समाचार बेहद चिंताजनक है।     प्रसूताओं को सेप्टीसीमिया होना और किडनी खराब होने जैसी गंभीर स्थिति पैदा होना चिकित्सा व्यवस्था में आई भारी… पूर्व सीएम गहलोत ने निष्पक्ष और गहन जांच की मांग की पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा कि कोटा और बीकानेर के बाद अब जोधपुर के पावटा जिला अस्पताल में सिजेरियन प्रसव के बाद 8 प्रसूताओं की तबीयत बिगड़ने और दो महिलाओं की हालत गंभीर होने की खबर बेहद चिंताजनक है. प्रसूताओं में सेप्टीसीमिया और किडनी संबंधी गंभीर समस्याएं सामने आना चिकित्सा व्यवस्था की खामियों और संभावित लापरवाही की ओर इशारा करता है. सबसे गंभीर बात यह है कि एक ओर शहर में सरकारी कार्यक्रमों और वीआईपी दौरों की तैयारियों पर जोर दिया जा रहा था, वहीं दूसरी ओर माताओं-बहनों की जान जोखिम में पड़ रही थी. ऐसे मामलों ने स्वास्थ्य व्यवस्थाओं की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं. पूरे मामले की निष्पक्ष और गहन जांच कर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की आवश्यकता है, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।  भाजपा प्रदेशाध्यक्ष ने कहा- मरीजों की सुरक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता पावटा सेटेलाइट अस्पताल में प्रसूता की तबीयत बिगड़ने के मामले पर भाजपा प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ ने चिंता जताई है. उन्होंने कहा कि यह घटना दुर्भाग्यपूर्ण और चिंताजनक है. मामले की जांच जारी है तथा सरकार पूरे घटनाक्रम पर गंभीरता से नजर बनाए हुए है. राठौड़ ने स्पष्ट कहा कि यदि जांच में किसी स्तर पर लापरवाही सामने आती है तो उसे किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. दोषियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी. उन्होंने कहा कि मरीजों की सुरक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है और स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं. भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए चिकित्सा व्यवस्था को और अधिक चाक-चौबंद बनाया जाएगा।  राजस्थान की स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर कांग्रेस ने भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला है. भगवान भरोसे चल रही है प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था  राजस्थान की स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर कांग्रेस ने भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला है. कांग्रेस ने नेता टीकाराम जुली का कहना है कि कोटा में प्रसूताओं की मौत, बीकानेर में चिकित्सीय लापरवाही और अब जोधपुर में सिजेरियन ऑपरेशन के बाद 8 महिलाओं की तबीयत बिगड़ने की घटनाएं बेहद गंभीर हैं. पार्टी ने आरोप लगाया कि प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था भगवान भरोसे चल रही है और माताओं-बहनों की जान जोखिम में है. कांग्रेस ने कहा कि सरकार जवाबदेही तय करने के बजाय अपनी विफलताओं को छिपाने में लगी है. पार्टी ने मुख्यमंत्री से सवाल किया कि अस्पतालों में बार-बार ऐसी घटनाएं क्यों हो रही हैं, दोषियों पर कार्रवाई कब होगी और प्रदेश की जनता को सुरक्षित व भरोसेमंद स्वास्थ्य सेवाएं आखिर कब मिलेंगी।  कांग्रेस नेता खाचरियावास ने मंत्री के बयान को बताया महिलाओं का अपमान चिकित्सा मंत्री … Read more

भजनलाल सरकार का विशेष अभियान जारी, हजारों हैंडपंप और पाइपलाइन दुरुस्त कर लोगों को राहत

जयपुर  मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में राज्य सरकार प्रदेश के प्रत्येक नागरिक तक पर्याप्त, स्वच्छ एवं निर्बाध पेयजल उपलब्ध कराने के संकल्प को धरातल पर उतारने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। मुख्यमंत्री के निर्देशों पर जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग (पीएचईडी) द्वारा संचालित विशेष राज्यव्यापी अभियानों ने भीषण गर्मी के दौरान जल संकट के समाधान में उल्लेखनीय सफलता हासिल की है। इन अभियानों के माध्यम से हजारों पेयजल समस्याओं का त्वरित समाधान कर लाखों लोगों को राहत पहुंचाई गई है तथा जलापूर्ति व्यवस्थाओं को नई मजबूती मिली है। मुख्यमंत्री की सतत मॉनिटरिंग, त्वरित निर्णय क्षमता और जनहित के प्रति प्रतिबद्ध दृष्टिकोण के चलते विभाग ने जलापूर्ति व्यवस्थाओं को सुदृढ़ बनाने, शिकायतों के त्वरित निस्तारण तथा जल स्रोतों के संरक्षण के क्षेत्र में प्रभावी कार्य किए हैं। इसके सकारात्मक परिणाम प्रदेशभर में देखने को मिले हैं और पेयजल सेवाओं की गुणवत्ता एवं उपलब्धता में उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया गया है। एक ही दिन में 2,385 पेयजल समस्याओं का समाधान शनिवार को आयोजित नवें विशेष राज्यव्यापी अभियान के दौरान विभागीय टीमों ने शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में जल स्रोतों, पाइपलाइन नेटवर्क तथा जलापूर्ति व्यवस्थाओं का व्यापक निरीक्षण कर त्वरित सुधारात्मक कार्रवाई की। अभियान के तहत 597 खराब हैंडपंपों को पुनः चालू किया गया, 512 पाइपलाइन लीकेज दुरुस्त किए गए, 165 प्रेशर संबंधी समस्याओं का समाधान किया गया तथा 161 क्षेत्रों में बाधित जलापूर्ति बहाल की गई। इसके अतिरिक्त कम जलापूर्ति, अल्प अवधि की सप्लाई एवं प्रदूषित जल संबंधी शिकायतों का भी प्रभावी निस्तारण किया गया। कुल मिलाकर एक ही दिन में 2,385 पेयजल संबंधी कार्य पूर्ण कर विभाग ने अपनी कार्यकुशलता और जनसेवा के प्रति प्रतिबद्धता का परिचय दिया। 2,357 शिकायतों का मौके पर ही निस्तारण नवें अभियान के दौरान तकनीकी टीमों ने समन्वित एवं त्वरित कार्रवाई करते हुए लगभग 2,357 शिकायतों का मौके पर ही समाधान किया। इससे प्रभावित क्षेत्रों में लोगों को तत्काल राहत मिली तथा पेयजल संबंधी समस्याओं का त्वरित निवारण सुनिश्चित हो सका नौ अभियानों में 24 हजार से अधिक कार्य, पेयजल व्यवस्था हुई और मजबूत 5 अप्रैल से 20 जून तक संचालित नौ विशेष राज्यव्यापी अभियानों के दौरान प्रदेशभर में 24,781 पेयजल संबंधी कार्य सफलतापूर्वक संपन्न किए गए। इनमें 5,081 हैंडपंपों की मरम्मत, 3,360 पाइपलाइन लीकेज की दुरुस्ती, 1,610 प्रेशर संबंधी समस्याओं का समाधान तथा 1,816 बाधित जलापूर्ति मामलों का निस्तारण शामिल है। इसके अतिरिक्त 8,684 अन्य सुधारात्मक कार्यों के माध्यम से पेयजल व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़, प्रभावी एवं भरोसेमंद बनाया गया है। इन प्रयासों से विशेष रूप से ग्रामीण एवं दूरस्थ क्षेत्रों में पेयजल उपलब्धता में सुधार हुआ है तथा हजारों परिवारों को भीषण गर्मी के दौरान राहत मिली है। अवैध जल उपयोग के खिलाफ प्रभावी अभियान जल संरक्षण और संसाधनों के समुचित प्रबंधन को प्राथमिकता देते हुए विभाग ने अवैध जल उपयोग के विरुद्ध भी व्यापक अभियान चलाया है। नवें अभियान के दौरान 332 अवैध जल कनेक्शन हटाए गए, जिनमें होटल, ढाबों एवं कृषि कार्यों में उपयोग किए जा रहे कनेक्शन शामिल थे। अब तक विशेष अभियानों के दौरान कुल 2,518 अवैध जल कनेक्शन हटाए जा चुके हैं। इस कार्रवाई से जल की बर्बादी पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित हुआ है तथा आमजन के लिए उपलब्ध जल संसाधनों की सुरक्षा सुनिश्चित हुई है। 30 जून तक जारी रहेंगे विशेष अभियान मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा के निर्देशानुसार प्रदेशभर में पेयजल व्यवस्थाओं को और अधिक सुदृढ़ बनाए रखने के लिए विशेष राज्यव्यापी अभियान 30 जून तक निरंतर संचालित किए जाएंगे। इन अभियानों का उद्देश्य प्रत्येक घर तक स्वच्छ, पर्याप्त एवं निर्बाध पेयजल उपलब्ध कराना तथा गर्मी के मौसम में किसी भी नागरिक को पेयजल संकट का सामना न करना पड़े।

जैसलमेर जासूसी मामला: 2 साल से पाक हैंडलर्स के संपर्क में था आरोपी, कोर्ट ने बढ़ाई रिमांड

जयपुर पाकिस्तान के लिए जासूसी करने के आरोपी मुश्ताक को आज 5 दिन की रिमांड पूरी होने के बाद कोर्ट में पेश किया गया. कोर्ट में सीआईडी इंटेलिजेंस ने 3 दिन की रिमांड मांगी. कोर्ट ने इसे स्वीकार करते हुए तीन की रिमांड दी है. स्पेशल पीपी सुदेश सतवान ने बताया कि कोर्ट से 3 दिन की और रिमांड मांगी है, ज‍िससे आरोपी की कॉल डिटेल, रिकॉर्ड और बैंक खातों के बारे में विस्तृत पूछताछ की जा सके. आरोपी 2 साल से पाक हैंडलर्स के संपर्क में था, ऐसे में हर एंगल से पूछताछ की जा रही है. 5 दिन के रिमांड पर पूछताछ उन्होंने बताया कि सीआईडी ने 5 दिन की रिमांड पर आरोपी से जैसलमेर में जहां रहा. जहां के फोटो और वीडियो उसने शेयर किए हैं.  जांच एजेंसी ने वहां ले जाकर, उससे पूछताछ की है. उन सभी जगहों पर ले जाकर तफ्तीश की गई है. सीआईडी हर एंगल से जांच कर रही   सीआईडी हर एंगल से मामले की जांच कर रही है. एजेंसी को शक है कि शायद कोई अन्य स्थानीय लोग भी इस पूरे मामले में उसका सहयोग कर रहे थे. साथ ही, ऑपरेशन सिंदूर के वक्त भी कोई जानकारी उसने साझा की है क्या, इस मामले में भी जांच हो रही है.   पाकिस्तानी हैंडलर्स के संपर्क में था अभी तक कि जांच में सामने आया है कि आरोपी पिछले दो साल से पाकिस्तानी हैंडलर्स के संपर्क में था, और उनके निर्देश पर उसने एक चाय की दुकान खोली थी, जहां लाइव फीड कैमरे लगाने की तैयारी भी की जा रही थी.   BSF की गतिविधियों पर नजर रखता था मुश्ताक सेना और बीएसएफ की गतिविधियों पर नजर रखता था, और गूगल मैप कैम के जरिए सटीक लोकेशन के साथ फोटो और वीडियो साझा करता था. उसके फोन में खालिद और नजीर अहमद नाम से सेव दो मोबाइल नंबर मिले हैं, जो पाकिस्तान में रहकर एजेंट ट्रेनिंग का काम करते हैं.   सीआईडी इंटेलिजेंस जांच कर रही देश की राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े इस मामले में सीआईडी इंटेलिजेंस लगातार जांच कर रही है. बड़े सवाल यही है कि वह क्या कुछ अभी तक पाक हैंडल्स को भेज चुका है? क्या और स्थानीय लोग भी इस पूरे मामले में उसके साथ शामिल थे? आखिर किस तरह पाक हैंडलर्स लगातार स्थानीय नागरिक से संपर्क कर उन्हें फंसा रहे हैं?

व्यापार को बढ़ावा देने के लिए बड़ा फैसला, 123 शहरों में दुकानों को 24×7 संचालन की अनुमति

जयपुर राजस्थान की भजनलाल सरकार ने प्रदेश में व्यापार रोजगार और कारोबारी गतिविधियों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से एक बड़ा फैसला लिया है. सरकार ने राजस्थान दुकान एवं वाणिज्यिक प्रतिष्ठान अधिनियम में संशोधन की अधिसूचना जारी कर दी गई है. इस नए संशोधन के लागू होने के बाद प्रदेश के 123 चिह्नित शहरों में दुकानों और वाणिज्यिक प्रतिष्ठान( शॉपिंग मॉल्स) को 24 घंटे तक संचालित करने की अनुमति मिल जाएगी.संशोधन से पहले दुकानों और प्रतिष्ठानों में कर्मचारियों के लिए काम करने की दैनिक समय-सीमा 9 घंटे निर्धारित थी।हालांकि, बाद में हुए संशोधनों के जरिए दैनिक काम की सीमा को 9 से बढ़ाकर 10 घंटे किया गया था. लंबे समय से व्यापारी कर रहे थे 24 घंटे बाजार खोलने की मांग प्रदेश के व्यापारी लंबे समय से 24 घंटे बाजार खोलने की अनुमति की मांग कर रहे थे. सरकार के इस फैसले को व्यापार, रोजगार और शहरी अर्थव्यवस्था के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है. हालांकि, संशोधित व्यवस्था के साथ कर्मचारियों के हितों की सुरक्षा के लिए भी कई शर्तें लागू की गई हैं. कर्मचारियों के हितों का रखना होगा ध्यान बाजारों को 24 घंटे खोलने की छूट देने के साथ सरकार ने प्रत्येक कर्मचारी को सप्ताह में एक दिन साप्ताहिक अवकाश देना अनिवार्य होगा. किसी भी कर्मचारी से प्रतिदिन 10 घंटे और सप्ताह में 48 घंटे से अधिक काम नहीं कराया जा सकेगा. निर्धारित सीमा से अधिक काम लेने पर अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार ओवरटाइम का भुगतान करना होगा. सरकार ने अधिसूचना में साफ स्पष्ट किया है कि यदि कोई दुकान या वाणिज्यिक प्रतिष्ठान इन शर्तों का उल्लंघन करता है तो उसका पंजीकरण रद्द किया जा सकता है. शराब की दुकानों और नाइट क्लबों के समय को लेकर अटकलें तेज इस फैसले के बाद प्रदेश के राजनीतिक और कारोबारी गलियारों में एक नई बहस भी छिड़ गई है.  क्या सरकार आने वाले दिनों में शराब की दुकानों और नाइट क्लबों के संचालन समय में भी ढील देने पर विचार कर रही है? हालांकि, आबकारी विभाग या सरकार के किसी भी आधिकारिक स्तर से इस संबंध में कोई घोषणा नहीं की गई है.

बड़े भवनों में सोलर पैनल और ईवी चार्जिंग अनिवार्य, राजस्थान सरकार का नया ग्रीन नियम

जयपुर राजस्थान में भवन निर्माण सेक्टर में ऊर्जा दक्षता (एनर्जी एफिशिएंसी) और पर्यावरण संरक्षण पर जोर दिया जाएगा. मॉल, होटल, कॉमर्शियल कॉम्पलेक्स हो या मल्टीस्टोरी बिल्डिंग, इन्हें ऊर्जा बचाने वाले और पर्यावरण अनुकूल बनाया जाएगा. राजस्थान सरकार ने एनर्जी कंजर्वेशन और सस्टेनेबल बिल्डिंग कोड-2026 लागू करने की तैयारी पूरी कर ली है. इसके लागू होने के बाद बिजली बचाने, सोलर एनर्जी अपनाने और पर्यावरण-अनुकूल सुविधाएं विकसित करने में मदद मिलेगी. यही नहीं, इन नियमों का पालन करने के बाद भवन में अतिरिक्त निर्माण की अनुमति भी मिल जाएगी.    योजना के बारे में समझिए राजस्थान अक्षय ऊर्जा निगम योजना पर काम कर रहा है. ऊर्जा मंत्री हीरालाल नागर ने इसे अंतिम रूप देने के निर्देश दिए है. इसके तहत छत का आधा हिस्सा सोलर प्लांट के लिए रखना होगा. बड़े भवनों में ईवी चार्जिंग स्टेशन और अलग पार्किंग अनिवार्य होगा. साथ ही उल्लंघन करने पर भवन मालिकों को जुर्माना भी भरना पड़ सकता है.   इन कर्मशियल बिल्डिंग पर लागू होगा नियम ऊर्जा मंत्री हीरालाल नागर ने समीक्षा बैठक में बताया कि यह कोड मुख्य रूप से उन व्यावसायिक भवनों पर लागू होगा, जिनका बिल्ड अप एरिया 2000 वर्ग मीटर या कनेक्टेड लोड 100 किलोवाट या उससे अधिक हो. कनेक्टेड डिमांड 120 केवीए या उससे अधिक हो. पहली बार मिलेगी ऐसी छूट पर्यावरण-अनुकूल निर्माण को प्रोत्साहित करने के लिए नियमों में पहली बार विशेष वित्तीय व तकनीकी लाभ प्रस्तावित किए गए हैंय कोड के प्लस मानकों का पालन करने वाले भवनों को 5 प्रतिशत और सुपर बिल्डिंग कोड मानकों को पूरा करने वाले भवनों को 10 प्रतिशत अतिरिक्त बिल्ट एरिया रेश्यो दिए जाने का प्रावधान है. इसे और अधिक व्यावहारिक और प्रभावी बनाने के लिए बहुमूल्य सुझाव भी मांगे गए हैं.