samacharsecretary.com

जयपुर में भी किफायती सफर का मिलेगा नया विकल्प

जयपुर. राजधानी जयपुर में महंगे ऑटो-टैक्सी किराये से परेशान लोगों के लिए राहत भरी खबर है। जयपुर शहर में जल्द ही किफायती दर पर सफर का नया विकल्प मिलने जा रहा है। सहकारिता मंत्री गौतम दक ने विभाग की अनुदान मांगों पर बहस का जवाब देते हुए विधानसभा में कहा कि जयपुर में जल्द ही नई सरकारी 'भारत टैक्सी' सेवा शुरू होगी। सहकारिता मंत्री गौतम दक ने कहा कि दिल्ली की तर्ज पर मार्च-अप्रैल में जयपुर में भारत टैक्सी शुरू होगी। इस सेवा के लिए ड्राइवरों को पूरा भुगतान सुनिश्चित किया जाएगा। साथ ही लोगों को किफायती दर पर सफर की सुविधा मिलेगी। उदयपुर में सहकारी ‘बाइक ऑन रेंट’ सेवा शुरू मंत्री गौतम दक ने बताया कि उदयपुर में सहकारी ‘बाइक ऑन रेंट’ सेवा शुरू हो चुकी है, जबकि जयपुर में ‘भारत टैक्सी’ जल्द शुरू होगी। इसके अलावा केंद्र सरकार की नई पहल के तहत सहकारी समितियों को पेट्रोल पंप और गैस एजेंसी के लाइसेंस प्रदान किए जाएंगे। क्या है 'भारत टैक्सी'? 'भारत टैक्सी' एक सरकारी और सहकारी मॉडल पर आधारित ऐप है, जिसे ओला और उबर जैसी प्राइवेट कंपनियों के विकल्प के रूप में पेश किया गया है। इसका संचालन 'सहकार टैक्सी कोऑपरेटिव लिमिटेड' द्वारा किया जा रहा है। इस ऐप की सबसे बड़ी खूबी यह है कि इसमें टैक्सी चलाने वाला ड्राइवर ही इस प्लेटफॉर्म का हिस्सेदार यानी मालिक है।

3645 करोड़ के प्रोजेक्ट का 16 अप्रेल को काम होगा पूरा

चित्तौडगढ़़. जाखम प्रोजेक्ट के तहत चार जिलों को मिलने वाले पानी का इंतजार लम्बा होता जा रहा है। घोषणा के डेढ़ साल बाद भी अभी तक टेक्निकल बिड तक नहीं खुल पाई है। इसे खोलने के लिए 16 फरवरी निर्धारित की थी, जिसे बढ़ाकर 16 अप्रेल कर दिया है। उक्त प्रोजेक्ट को तीन साल में पूरा करना है, जबकि अब तक डेढ़ साल से अधिक समय गुजर चुका है। राज्य सरकार ने 20224-25 के बजट में जाखम प्रोजेक्ट की घोषणा की थी। पूरे प्रोजेक्ट पर 3645.56 करोड़ रुपए खर्च होंगे। पहले चरण में चित्तौडगढ़़ और प्रतापगढ़ जिलों के करीब 800 गांव 622 ढाणी में पाइप लाइन से पीने का शुद्ध पानी पहुंचाया जाना प्रस्तावित है। प्रथम चरण में 1692.30 करोड़ रुपए खर्च होंगे। जलदाय विभाग की ओर से इसके लिए टेण्डर आमंत्रित किए गए। टेण्डर को खोलने से पहले टेक्निकल बिड खोली जाती है। इसे खोलने के लिए 16 फरवरी 2026 निर्धारित की गई थी, लेकिन अब इसे बढ़ाकर 16 अप्रेल कर दिया है। ऐसे में अब इस पूरे प्रोसेस में देरी होने की संभावना है। उल्लेखनीय है कि तकनीकी बोली को खोलने के बाद टेण्डर खोले जाते हैं। दस्तावेजों की जांच आदि के बाद सबसे कम बोली लगाने वाली फर्म को वर्क ऑर्डर दिया जाता है। इसके बाद काम शुरू होता है। दूसरे चरण में 1953.26 करोड़ होंगे खर्च जाखम बांध पेयजल परियोजना दो चरणों में पूरी होगी। पहले चरण में चित्तौडगढ़़ और प्रतापगढ़ जिलों के करीब 800 गांव 622 ढाणी में पानी पहुंचाया जाता है। दूसरे चरण में राजसमंद और उदयपुर जिले के 1697 गांव और ढाणी में पानी पहुंचाने की योजना है। राजसमंद जिले के 790 गांव-ढाणी और उदयपुर जिले के 907 गांव-ढाणी को शामिल किया गया है। इस प्रोजेक्ट के पहले चरण में 1692.30 करोड़ एवं दूसरे चरण में 1953.26 करोड़ रुपए खर्च होंगे। टेक्निकल बिड अब अप्रेल में खुलेगी जाखम बांध पेयजल परियोजना के प्रथम चरण में चित्तौडगढ़़ और प्रतापगढ़ के लिए टेण्डर आमंत्रित किए गए हैं, इसकी टेक्निकल बिड 16 फरवरी को खोली जानी थी, जिसे अब अप्रेल में खोला जाएगा। -सुनीत कुमार गुप्ता, अधीक्षण अभियंता जनस्वास्थ्य अभियांत्री विभाग चित्तौडगढ़़

क्या सच में उदयपुर जा रहे हैं विजय और रश्मिका? शादी की अटकलों के बीच एयरपोर्ट पर हुए स्पॉट

 उदयपुर रश्मिका मंदाना और विजय देवरकोंडा की शादी की खबरें इन दिनों बी-टाउन का हॉट टॉपिक बनी हुई हैं। रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि दोनों 26 फरवरी को उदयपुर में एक प्राइवेट सेरेमनी में शादी करने वाले हैं। दोनों के इन्विटेशन कार्ड की एक फोटो भी सोशल मीडिया पर फैल रही है। हालांकि, अभी तक कपल की ओर से शादी को लेकर कोई कंफर्मेशन सामने नहीं आई है। इस बीच अब ये जोड़ा एयरपोर्ट पर नजर आया है। हालांकि, दोनों अलग-अलग दिखे, लेकिन इनके एयरपोर्ट पर नजर आते ही ये कयास लगाए जाने लगे कि दोनों उदयपुर के लिए रवाना हो रहे हैं। कैजुअल लुक में एयरपोर्ट पर दिखा कपल आज सुबह यानी शनिवार 21 फरवरी को शादी की चर्चाओं के बीच रश्मिका और विजय देवरकोंडा को एयरपोर्ट पर देखा गया है। इसके बाद ये अटकलें लगाई गईं कि दोनों शादी के लिए उदयपुर रवाना हो रहे हैं। हालांकि, अभी तक ये कंफर्म नहीं है कि दोनों कहां के लिए रवाना हुए हैं। लेकिन दोनों सेलेब्स एयरपोर्ट पर कैजुअल अंदाज में नजर आए। इस दौरान विजय देवरकोंडा जहां ओपन ब्लैक शर्ट और ब्लैक पैंट में नजर आए। वहीं रश्मिका ग्रे स्लीवलेस टी-शर्ट और ब्लैक लोअर में नजर आईं।   इस दौरान रश्मिका के माथे पर छोटी सी बिंदी भी नजर आई। दोनों ही सेलेब्स इस दौरान चेहरे पर मास्क लगाए हुए थे। गाड़ी से उतरते समये रश्मिका फोन में व्यस्त दिखीं। हालांकि, पैपराजी को देखकर उन्होंने हाय किया। इस दौरान दोनों साथ में नहीं बल्कि अलग-अलग नजर आए।  सजे हुए विजय के घर का वीडियो और कार्ड की तस्वीरें वायरल बीते दिनों सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें विजय देवरकोंडा का घर झालरों से सजा हुआ नजर आ रहा था। इस वीडियो के सामने आने के बाद दोनों की शादी को लेकर चर्चाएं और भी तेज हो गईं। वहीं दोनों के इन्विटेशन कार्ड की तस्वीरें भी सोशल मीडिया पर छाई हुई हैं। इनमें शादी की तारीख 26 फरवरी बताई जा रही है, जबकि 4 मार्च को हैदराबाद में रिसेप्शन बताया जा रहा है। हालांकि, अभी तक कपल या उनके परिवार की ओर से शादी को लेकर को आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। शादी में होगी नो फोन पॉलिसी बीते दिनों कई मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि रश्मिका और विजय ने शादी के कार्यक्रम में नो फोन पॉलिसी को लागू किया है। यानी कोई भी गेस्ट फोन लेकर फंक्शन में शामिल नहीं हो सकेगा। यहां तक कि शादी को शूट करने वाली टीम ने भी एनडीए (गैर-खुलासा समझौता) पर हस्ताक्षर किए हैं। वहीं रिपोर्ट्स में ये भी दावा किया जा रहा है कि दोनों ने शादी की सिक्योरिटी के लिए विदेशी कंपनी से डील की है।  

साध्वी की मौत का खुलासा! 18 दिन की पड़ताल में CCTV और कॉल डिटेल से सामने आया सच

 जोधपुर राजस्थान की चर्चित युवा साध्वी प्रेम बाईसा का मौत को लेकर सवालों का सैलाब उमड़ पड़ा था. क्या उनकी मौत के पीछे कोई साजिश थी? क्या उन्हें जहर दिया गया? या फिर कोई मेडिकल लापरवाही? 18 दिनों तक चली लंबी और पेचीदा जांच, 44 गवाहों के बयान, 106 लोगों की कॉल डिटेल, 100 से ज्यादा सीसीटीवी फुटेज और 37 से अधिक विसरा नमूनों की पड़ताल के बाद आखिरकार जोधपुर पुलिस ने इस राज से पर्दा उठा दिया. लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं होती. क्योंकि मौत की वजह भले सामने आ गई हो, इंजेक्शन का सच सामने आना अभी बाकी है. एक लंबी और चुनौतीपूर्ण तफ्तीश के बाद राजस्थान की मशहूर साध्वी प्रेम बाईसा के मौत के रहस्य से आखिरकार पर्दा हट ही गया. इस मामले में फाइनल ओपिनियन के लिए जोधपुर पुलिस को फॉरेंसिक साइंस लैब्रोटरी यानी एफएसएल की रिपोर्ट का इंतजार था. उस रिपोर्ट के बाद पुलिस ने इसे लेकर फिर से मेडिकल एक्सपर्ट्स से चर्चा की और आखिरकार प्रेम बाईसा की मौत के सच का खुलासा कर दिया.  28 जनवरी को हुई प्रेम बाईसा की मौत के बाद से ही इसे लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म था. प्रेम बाईसा के अनुयायी तो खैर इस मामले में इंसाफ की मांग कर ही रहे थे, खुद प्रेम बाईसा के पिता वीरमनाथ भी बार-बार इस मामले में साजिश की आशंका जताते हुए अपनी बेटी के लिए न्याय मांग रहे थे, ऐसे में पुलिस ने पहले डॉक्टरों के बोर्ड से उनके शव का पोस्टमार्टम करवाया और फिर हिस्टोपैथोलॉजिकल जांच के लिए उनके विसरा के नमूनो को स्टेट फॉरेंसिक साइंस लैब्रोटरी जयपुर भेजा, जिसकी रिपोर्ट 16वें दिन सामने आ गई और 18वें दिन जोधपुर पुलिस ने इस केस को एक तरह से कनक्लूड कर दिया. पुलिस की मानें तो साध्वी प्रेम बाईसा के साथ ना तो कोई साजिश हुई, ना उनके साथ मौत से पहले कोई सेक्सुअल ऑफेंस हुआ और ना ही उन्होंने खुदकुशी की, बल्कि उनकी मौत की वजह कार्डिएक और पल्मॉनरी अरेस्ट बनी. कार्डियो पल्मनॉरी अरेस्ट से मौत बोले तो दिल की धड़कनों का और सांस लेने की क्रिया रुकने के चलते हुई मौत. पुलिस ने साफ किया कि उन्हें पहले से फेफड़े से संबंधित बीमारी थी, ऐसे में कार्डियो पल्मनॉरी अरेस्ट जानलेवा बन गई.  वैसे तो इस मामले में कई पेच थे, लेकिन सबसे बड़ा पेच साध्वी को मौत से ऐन पहले लगाए गए इंजेक्शन का ही था. क्योंकि सामने आई खबरों के मुताबिक इंजेक्शन लगाए जाने के बाद ही उनकी तबीयत एकाएक बिगड़ी और जब तक उनके पिता और आश्रम के लोग उन्हें अस्पताल लेकर पहुंचे, तब तक उनकी जान चली गई. ऐसे में इंजेक्शन में दी गई दवाओं की जांच के साथ-साथ पुलिस के लिए उस कंपाउंडर की भूमिका की पड़ताल भी जरूरी थी. पुलिस ने इस दिशा में जांच की भी और शुरुआती तफ्तीश में उसे कंपाउंडर की लापरवाही का पता चला. आपको याद होगा कि 28 जनवरी को साध्वी की तबीयत बिगड़ने पर जोधपुर के एक कंपाउंडर देवी सिंह राजपुरोहित को आश्रम की ओर से साध्वी के इलाज के लिए बुलाया गया था और तब देवी सिंह दो दवाओं के साथ साध्वी के पास पहुंचा था. साध्वी को ये दवाएं पहले भी दी जाती रही हैं. इन दवाओं में डेक्सोना और डायनापार शामिल हैं, लेकिन गौर करने वाली बात ये है कि से शेड्यूल एच की दवाएं हैं, जिन्हें बिना किसी मेडिकल प्रैक्टिशनर यानी डॉक्टर की इजाजत या देख-रेख के बगैर दिए जाने की मनाही है. इसके बावजूद देवी सिंह राजपुरोहित ने ना सिर्फ साध्वी को इन दो दवाओं का इंजेक्शन दिया, बल्कि वो बगैर किसी प्रैस्क्रिप्शन यानी डॉक्टर की पर्ची के खुद ही ये दवाएं लेकर साध्वी के पास पहुंचा था, जो की एक गैरकानूनी हरकत है. जोधपुर पुलिस ने साफ किया कि कंपाउंडर की लापरवाही को लेकर पुलिस ने नए सिरे से मेडिकल बोर्ड से उनकी राय मांगी है, ताकि ये साफ हो सके कि क्या कपाउंडर देवी सिंह राजपुरोहित की ओर से दिया गया इंजेक्शन ही उनकी मौत की वजह बनी या नहीं? पुलिस ने कहा कि इस मामले में मेडिकल बोर्ड की राय आने के बाद ही देवी सिंह राजपुरोहित के खिलाफ आगे की कार्रवाई की जाएगी. साध्वी को 28 जनवरी को 2 इंजेक्शन लगाए गए थे. डायनापार और डेक्सोना. डायनापार यानी डाइक्लोफिनैक और डेक्सोना यानी डेक्सामेथासोन. तेज दर्द, सूजन, चोट और सर्जरी के बाद होने वाले दर्द से निजात दिलाने वाली ये दवाएं आम तौर पर एक साथ दी जाती हैं. लेकिन इसकी शर्त है कि इन्हें डॉक्टर की निगरानी में ही दिया जाना जरूरी है. क्योंकि इन्हें दी जाने में बरती गई मामूली लापरवाही भी जानलेवा साबित हो सकती है. एक्सपर्ट बताते हैं कि कभी-कभार एक ही सीरींज से डाइक्लोफिनैक और डेक्सामेथासोन का इंजेक्शन मरीज के लिए खतरनाक कार्डियोवैस्कुलर इवेंट यानी हार्टफेल की वजह बन जाती है. कई बार इन दवाओं से पेट से संबंधी समस्याएं, सिर चकराने, सिर दर्द या इनफेक्शन यानी संक्रमण का खतरा भी बढ़ जाता है. यही वजह है कि ये दवाएं सिर्फ डॉक्टर की निगरानी में ही दी जाने की बात कही जाती है. लेकिन साध्वी प्रेम बाईसा के मामले में डॉक्टर की निगरानी वाली बात की अनदेखी की गई. अब सवाल यही है कि क्या साध्वी के शरीर में इन दो दवाओं का रिएक्शन हो गया, जिसके चलती उनकी जान चली गई? पुलिस फिलहाल ये पता लगाने में जुटी है. फिलहाल इंजेक्शन लगाने वाला कपाउंडर बेशक डॉक्टर की पर्ची के मुताबिक ही इंजेक्शन लगाने की बात कह रहा है, लेकिन ये भी सच है कि वो पर्ची पुरानी थी. साध्वी ने 28 जनवरी को किसी डॉक्टर से कोई सलाह नहीं ली थी. अजमेर से प्रोग्राम कर लौटने के बाद जब साध्वी की तबीयत बिगड़ी, तो उन्होंने अपने पिता से ट्रिटमेंट करवा देने की बात कही थी. हालांकि अस्पताल जाने के पिता की पेशकश को उन्होंने ठुकरा दिया था. एफएसएल और हिस्टोपैथोलॉजिकल रिपोर्ट के सामने आने के बाद साध्वी की पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद बनी असमंजस की स्थिति भी काफी हद तक साफ हो गई है. क्योंकि इन रिपोर्ट में बताया गया है कि साध्वी के शरीर में ना तो अंदरुनी या बाहरी चोट के निशान थे और ना ही उनके शरीर में … Read more

मंगला पशु बीमा योजना में 21 हजार पशुओं का होगा बीमा

जयपुर. राजस्थान में मंगला पशु बीमा योजना पशु पालकों का 'मंगल' कर रही है। प्रथम चरण की कामयाबी के बाद अब इसका दूसरा चरण भी प्रारंभ कर दिया गया है। इस बार भी जिले में 21 हजार पशुओं का बीमा करने का लक्ष्य रखा गया है। राजस्थान सरकार ने छोटे पशुपालकों को पशु हानि से बचाने के लिए मंगला पशु बीमा योजना शुरू की है। इसके तहत पशु पालक 2 बड़े पशु गाय, भैंस अथवा 10 छोटे पशु बकरी भेड़ का निःशुल्क बीमा करवा सकते हैं। योजना के तहत बीमा का लाभ उठाने के लिए पशुपालकों को कोई प्रीमियक शुल्क भी नहीं देना पड़ेगा। जानकारी के अनुसार योजना के तहत पशु के बीमारी, प्राकृतिक आपदा व अन्य कारण से मृत्यु होने जाने पर अधिकतम 40 हजार रुपए की बीमा राशि दी जाती है। लॉटरी में चयनित पशुओं को पशुपालन विभाग हेल्थ सर्टिफिकेट जारी करता है। पहले फेज के दौरान भी विभाग को 21 हजार पशुओं का बीमा करने का लक्ष्य मिला था। जिसके तहत विभाग ने जिले में लगभग 20 हजार पशुओं का रजिस्ट्रेशन भी कराया था, लेकिन इन रजिस्ट्रेशनों में पशु पालकों के गलफत के कारण लगभग 4 से 5 हजार रजिस्ट्रेशन कैंसिल किए गए थे। यानी विभाग गत सीजन 16 हजार पशुओं का ही आंकड़ा प्राप्त कर सका था। जिसमें सबसे ज्यादा 15 हजार 383 पंजीयन भैंसों के किए गए थे। इसके बाद 2 हजार 990 गाय, 2 हजार 103 बकरी और 656 भेड़ों के रजिस्ट्रेशन किए गए थे। अभी तक 36 प्रतिशत ही कार्य गत वर्ष की तरह इस वर्ष भी विभाग को 21 हजार पशुओं का रजिस्ट्रेशन करने का लक्ष्य मिला है। जिसके तहत अभी तक जिले भर में 8,478 पशुओं का रजिस्ट्रेशन हो चुका है। जिसमें धौलपुर ग्रामीण क्षेत्र में 2,073 तो शहरी क्षेत्र में 169 पशुओं का बीमा योजना का लाभ लेने के लिए रजिस्ट्रेशन हो चुका है। इसके अलावा राजखेड़ा में ।,266, सैंपऊ में ।,177, सरमथुरा ग्रामीण में 565 तो शहरी में 46, बसेड़ी में 679, बाड़ी में 1063 मनियां में 33 पशुओं का रजिस्ट्रेशन सहित टोटल 7 हजार 71 पशुओं के पंजीयन कराया गया हैं। देखा जाए तो अभी तक लगभग 36 प्रतिशत ही कार्य हो सका है। मार्च 2026 तक रखी है समय सीमा शासन ने योजना के तहत लक्ष्य को हासिल करने के लिए मार्च तक की समय सीमा रखी है। समय सीमा को देखते हुए पशुओं के रजिस्ट्रेशन का कार्य धीमा ही लग रहा है, लेकिन हर बार की तरह इस बार भी लक्ष्य हासिल नहीं होने पर रजिस्ट्रेशन की समय सीमा को फिर बढ़ा दिया जाएगा, जिससे कि विभाग लक्ष्य को हासिल कर सके। गत वर्ष शुरू हुई मंगला पशु बीमा योजना राज्य सरकार ने मंगला पशु बीमा योजना की शुरुआत गत वर्ष की थी। मंगला पशु बीमा योजना में पशु की अकाल मृत्यु पर जनाधार कार्डधारक पशुपालक को बीमा क्लेम के रूप में 40 हजार रुपए की आर्थिक सहायता दी जाती है। सबसे बड़ी बात यह है कि योजना में पशुपालकों को किसी भी प्रकार का प्रीमियम भी नहीं देना होता है यानी योजना निःशुल्क है। मंगला पशु बीमा योजना का द्वितीय चरण प्रारंभ मंगला पशु बीमा योजना द्वितीय चरण प्रारंभ हो गया है। पहले चरण की तरह इस चरण में भी लक्ष्य को हासिल किया जाएगा। जिससे योजना का लाभ अधिक से अधिक पशुपालकों को मिल सके। डॉ. संतराम मीणा, संयुक्त निदेशक पशु चिकित्सालय धौलपुर

कोटा में 22 बीघा वन भूमि पर बने हिस्ट्रीशीटर के अवैध निर्माण ध्वस्त

कोटा. राजस्थान में अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का सिलसिला जारी है। कोटा शहर में शुक्रवार सुबह वन विभाग और पुलिस ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए रानपुर थाना क्षेत्र के हिस्ट्रीशीटर कालू भड़क के अवैध अतिक्रमण को बुलडोजर की मदद से ध्वस्त किया। टीम ने वन विभाग की जमीन पर किए गए पक्के और कच्चे निर्माण को हटाया। डीएसपी मनीष शर्मा ने बताया कि हिस्ट्रीशीटर कालू भड़क ने लंबे समय से वन विभाग की करीब 22 बीघा जमीन पर अवैध कब्जा कर रखा था। ​हिस्ट्रीशीटर ने सरकारी जमीन पर मकान, बाड़े और खेती जैसी गतिविधियाँ संचालित कर रही थी। ऐसे में कोटा शहर पुलिस और वन विभाग की संयुक्त टीम ने भारी पुलिस जाब्ते की मौजूदगी अतिक्रमण हटाया और सरकारी जमीन को अतिक्रमण मुक्त कराया। आगे भी जारी रहेगा अभियान उन्होंने कहा कि इस तरह की कार्रवाई से हार्डकोर अपराधियों और अवैध कब्जाधारियों को सख्त संदेश दिया जा रहा है कि कानून सर्वोपरि है। कानून-व्यवस्था बनाए रखने और माफिया तत्वों पर लगाम कसने के लिए यह अभियान आगे भी जारी रहेगा। अवैध हथियारों के साथ किया था गिरफ्तार गौरतलब है कि रानपुर थाना पुलिस ने हिस्ट्रीशीटर कालू भड़क को 12 फरवरी को गिरफ्तार किया था। आरोपी के कब्जे से 7 हथियार और 27 जिंदा कारतूस बरामद किए थे। इनमें दो देसी पिस्टल मय मैगजीन, चार अतिरिक्त मैगजीन तथा पांच देसी कट्टे शामिल थे।

राजस्थान के विनोद जाखड़ बने NSUI के राष्ट्रीय अध्यक्ष

जयपुर. अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी ने राजस्थान की छात्र राजनीति के कद्दावर चेहरे विनोद जाखड़ को NSUI का नया राष्ट्रीय अध्यक्ष नियुक्त किया है। यह न केवल विनोद जाखड़ के लिए, बल्कि पूरे राजस्थान के लिए गौरव का विषय है क्योंकि NSUI के 55 साल के इतिहास में पहली बार है जब कमान राजस्थान के किसी नेता को सौंपी है। विनोद जाखड़ वर्तमान में राजस्थान NSUI के प्रदेश अध्यक्ष के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे थे। प्रदेश अध्यक्ष से राष्ट्रीय अध्यक्ष तक का सफर जनवरी 2024 में विनोद जाखड़ को राजस्थान NSUI का प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया था। उनके कार्यकाल के दौरान: छात्र हितों का संघर्ष: उन्होंने राजस्थान यूनिवर्सिटी में आरएसएस (RSS) के कार्यक्रमों के विरोध से लेकर छात्रसंघ चुनाव बहाली तक कई बड़े आंदोलनों का नेतृत्व किया। जेल और संघर्ष: छात्र हितों की लड़ाई में उन्हें कई बार जेल भी जाना पड़ा, लेकिन उन्होंने अपना संघर्ष जारी रखा। शीर्ष नेतृत्व का भरोसा: राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे के 'यूथ विजन' में फिट बैठने के कारण उन्हें अब राष्ट्रीय स्तर पर यह बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई है। राजस्थान की राजनीति पर क्या होगा असर? विनोद जाखड़ की इस नियुक्ति के कई सियासी मायने निकाले जा रहे हैं: जातीय समीकरण: कांग्रेस ने एक दलित युवा को राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाकर राजस्थान और देश के अन्य राज्यों में दलित वोट बैंक को साधने की कोशिश की है। युवा नेतृत्व: राजस्थान से पहली बार किसी का इस पद पर पहुँचना, प्रदेश के अन्य युवा छात्र नेताओं के लिए दिल्ली के दरवाजे खोलने जैसा है। संघर्ष की कहानी विनोद जाखड़ की कहानी किसी फिल्म की पटकथा से कम नहीं है। जयपुर के पास एक साधारण परिवार में जन्मे विनोद के पिता पेशे से मिस्त्री (प्लास्टर का काम करने वाले) हैं। बचपन का संघर्ष: जब विनोद 7 साल के थे, उनका परिवार काम की तलाश में जयपुर शिफ्ट हो गया। शिक्षा: उन्होंने अपनी शुरुआती शिक्षा उसी स्कूल में प्राप्त की जहाँ उनके पिता मजदूरी करते थे। बाद में राजस्थान यूनिवर्सिटी से उच्च शिक्षा प्राप्त करते हुए वे छात्र राजनीति में सक्रिय हुए। दलित चेहरा: विनोद जाखड़ एससी (SC) वर्ग से आते हैं और वे राजस्थान कॉलेज के पहले दलित अध्यक्ष भी रह चुके हैं। 2018 की वो 'ऐतिहासिक' जीत विनोद जाखड़ की असली पहचान साल 2018 के राजस्थान यूनिवर्सिटी छात्रसंघ चुनाव से हुई। उस समय NSUI ने विनोद को टिकट नहीं दिया था। लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर मैदान में उतरे। उन्होंने न केवल चुनाव जीता बल्कि पूरे प्रदेश की छात्र राजनीति में अपनी साख जमा ली। जीत के बाद वे पुनः कांग्रेस और NSUI के साथ जुड़ गए।  

विवाहिता की गैंगरेप के बाद हत्या के दोषियों को मिली फांसी की सजा

दौसा. दौसा जिले के लालसोट में गैंगरेप के बाद महिला की हत्या के मामले में अपर जिला एवं सेशन न्यायाधीश न्यायालय ने शुक्रवार को दोनों दोषियों को फांसी की सजा सुनाई। मामला करीब चार साल पुराना है। जब विवाहिता ससुराल से पीहर जा रही थी, तभी आरोपियों ने अपहरण के बाद विवाहिता से सामूहिक दुष्कर्म किया और हत्या के बाद शव को कुएं में फेंक दिया था। इससे पहले कोर्ट ने गुरुवार को दोनों आरोपियों को दोषी करार देते हुए फैसला सुर​क्षित रखा था। एडीजे ऋतु चौधरी ने शुक्रवार को बड़ा फैसला सुनाते हुए दोनों दोषियों को फांसी की सजा सुनाई। न्यायालय में राज्य पक्ष से नियुक्त विशिष्ट लोक अभियोजक महावीर सिंह ने घटना को जघन्य बताते हुए कड़ी सजा की दलील रखी। बचाव पक्ष ने आरोपियों का आपराधिक रिकॉर्ड नहीं होने का हवाला देते हुए नरमी की अपील की। जज ने फैसला सुनाते हुए पढ़ी ये कविता जज ने फैसला सुनाते हुए कविता पढ़ते हुए कहा कि गूंजती है आज भी फिजा में हजारों सिसकियां, घुट-घुट कर तड़पती हैं इस समाज में बेटियां। किस्सा बलात्कार का आज फिर अखबार में छपेगा, एक बेटी के खून से आज फिर अखबार सनेगा, क्या था कसूर मेरा, क्या बेटी होना ही कसूर था मेरा। कैसे जिए इस समाज में नारी जहां दरिंदे बसते हों, भेड़ियों ने जहां इंसान के चेहरे पहने हों, आखिर कब तक नारी की इज्जत यूं तार-तार होगी, आखिर कब इस समाज की गलियां बेटियों के लिए सुरक्षित होगी। सिर झुकाएं पुलिस के साथ पहुंचे अदालत में अपने ससुराल से पीहर जा रही महिला के साथ एक जघन्य अपराध करने वाले दोनों आरोपियों को गुरुवार को न्यायालय में कड़ी सुरक्षा के बीच पेश किया गया था। इस दौरान दोनो आरोपी सिर झुकाए न्यायालय में पहुंचे और सिर झुकाएं ही खड़े रहे, कुछ देर बाद जब उन्हे दोषी करार दिया तो पुलिस उन्हे वहा से ले गई थी। नाबालिग व सीसीटीवी से खुला मामला घटना 23 अप्रैल 2022 की है। महिला जिले के एक गांव में बस से उत्तरने के बाद लापता हो गई थी। 24 अप्रेल को गुमशुदगी दर्ज हुई। जांच के दौरान सीसीटीवी फुटेज और एक नाबालिग छात्र की जानकारी के आधार पर पुलिस आरोपियों तक पहुंची। 25 अप्रैल को आरोपी कालूराम की गिरफ्तारी के बाद उसी रात कुएं से शव बरामद किया गया, जबकि दूसरे आरोपी संजू मीना को 26 अप्रैल को पकड़ा गया। विशेष अनुसंधान दल गठित कर जुलाई 2022 में चार्जशीट पेश की गई। 45 गवाहों के बयान और 145 दस्तावेज प्रस्तुत किए गए। दोनों आरोपी रामगढ़ पचवारा थाना क्षेत्र के सिसोदिया गांव के एक ही परिवार के चाचा ताऊ के लड़के हैं। यूं चला घटनाक्रम 23 अप्रेल 2022 को सुबह मृतक अपने ससुराल से हुई रवाना 23 अप्रेल 2022 को दोपहर 1 बजे सोनड़ मोड़ पर बस से उतरी 24 अप्रेल 2022 को हुआ गुमशुदगी का मामला दर्ज 25 अप्रेल 2022 को एक आरोपी कालूराम मीना गिरफ्तार 25 अप्रेल 2022 की आधी रात्रि को मृतका का शव कुएं से बरामद 26 अप्रेल 2022 को संजू मीना की गिरफ्तारी 4 मई 2022 को हुआ एसआईटी का गठन जुलाई 2022 में न्यायालय में हुई चार्जशीट पेश 19 फरवरी 2026 को दोनों आरोपियों को किया न्यायालय ने दोषी करार 20 फरवरी 2026 को दोनों दोषियों को फांसी की सजा

सीकर का लक्खी मेला: 21 फरवरी से खाटू श्याम दरबार रहेगा लगातार खुला, 18 किमी जिगजैग रास्ता तय करना होगा

सीकर/खाटू धाम राजस्थान के प्रसिद्ध खाटू श्याम मंदिर में इस बार फाल्गुन मेला (Fagun Mela Khatu Shyam 2026) की तैयारियाँ जोरों पर हैं। यह मेला, जिसे फाल्गुन लक्खी मेला भी कहा जाता है, 21 फरवरी से शुरू होकर 28 फरवरी 2026 तक चलेगा और देशभर से लाखों श्रद्धालुओं को अपनी ओर आकर्षित करेगा। खाटू श्याम मेला कब से है? इस वर्ष खाटू श्याम जी का मेला ( Khatu Shyam Ji ka Mela Kab Hai ) 21 फरवरी 2026 (शनिवार) से 28 फरवरी 2026 (शनिवार) तक आयोजित किया जाएगा। मेला फाल्गुन महीने के दौरान मनाया जाता है, जो भक्ति, संगीत, पूजा एवं उत्सव का प्रतीक है। श्रद्धालु निशान यात्रा, भजन-कीर्तन तथा विशेष पूजा-अर्चना में भाग लेते हैं। खाटू श्याम मंदिर ( Khatu Shyam Mandir ) राजस्थान के सीकर जिले में स्थित है और यह धार्मिक स्थल “हारे का सहारा” के रूप में भक्तों की आस्था का केंद्र माना जाता है। सुरक्षा व्यवस्था एसपी प्रवीण नायक नूनावत ने सुरक्षा खाका खींचते हुए बताया कि इस बार सुरक्षा व्यवस्था को हाईटेक और सख्त रखा गया है. मेले की सुरक्षा के लिए करीब 6500 पुलिसकर्मियों का भारी जाब्ता तैनात किया जाएगा. पूरे मेला क्षेत्र को 22 सेक्टरों में बांटा गया है, ताकि हर कोने पर सीधी नजर रखी जा सके. श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए 400 सीसीटीवी कैमरों और ड्रोन के जरिए पल-पल की मॉनिटरिंग की जाएगी. दर्शन व्यवस्था अधिकारियों ने मंदिर परिसर के साथ-साथ 75 फीट चौड़े दर्शन मार्ग का जायजा लिया, जहां 14 कतारों में लगकर भक्त बाबा के दरबार तक पहुंचेंगे. बता दें कि मुख्य फोकस इस बात पर है कि दर्शन के बाद श्रद्धालुओं की निकासी बिना किसी रुकावट के हो. मंदिर कमेटी के पदाधिकारियों (मंत्री मानवेंद्र सिंह और कोषाध्यक्ष रवि सिंह) ने बताया कि पेयजल, छाया और आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं के लिए विशेष इंतजाम किए गए हैं. प्रशासन और मंदिर कमेटी का साझा संकल्प निरीक्षण के दौरान एएसपी दीपक गर्ग और थानाधिकारी पवन कुमार चौबे सहित पुलिस की पूरी टीम मौजूद रही. प्रशासन और श्री श्याम मंदिर कमेटी ने स्पष्ट संदेश दिया है कि उनका एकमात्र लक्ष्य देशभर से आने वाले लाखों 'श्याम प्रेमियों' को सुरक्षित, सुव्यवस्थित और सुगम दर्शन कराना है. मेला अवधि के दौरान यातायात व्यवस्था को भी डायवर्ट किया जाएगा ताकि कस्बे में दबाव कम रहे. बाबा श्याम की नगरी अब पूरी तरह सज-धज कर अपने भक्तों के स्वागत के लिए तैयार है. राजस्व मंडल अजमेर के अध्यक्ष हेमंत गेरा ने सीकर कलेक्ट्रेट का वार्षिक निरीक्षण किया. जिला कलेक्टर मुकुल शर्मा ने उनका स्वागत किया और गार्ड ऑफ ऑनर दिया. गेरा ने परिसर के सभी कार्यालयों का दौरा किया. हर शाखा में जाकर उन्होंने कर्मचारियों से बात की. एलआर शाखा में फाइल निस्तारण, राजस्व कोर्ट के मामलों, लंबित पत्रावलियों, तामील और रिपोर्ट्स की स्थिति जांची. उन्होंने ई-फाइलों का जल्द निपटारा करने, फालतू फाइलें लटकाए नहीं रखने के निर्देश दिए. मुख्यमंत्री बजट की घोषणाओं और राजस्थान संपर्क पोर्टल के शिकायतों का समय पर समाधान करने को कहा. अतिरिक्त कलेक्टर रतन कुमार, अतिरिक्त कलेक्टर भावना शर्मा, एसडीएम निखिल कुमार सहित राजस्व अधिकारी उपस्थित थे. खाटू श्याम मेले में इस बार नई व्यवस्थाएं और सुविधाएं     इस बार प्रशासन ने मेले में भीड़ और सुरक्षा को देखते हुए कई महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं:     भीड़ नियंत्रण के लिए विशाल भक्ति मार्ग और अलग-अलग प्रवेश–निकास रूट बनाए गए हैं।     भीड़, सुरक्षा और आपातकालीन सहायता के लिए विशेष सीसीटीवी निगरानी और अतिरिक्त सुरक्षा कर्मियों की तैनाती की गई है।     मेले में VIP दर्शन की व्यवस्था हटाई गई है ताकि सभी श्रद्धालु समान रूप से दर्शन कर सकें। खाटू श्याम मेले में पहुंचने के लिए दिल्ली–जयपुर से ट्रेन और बस रूट खाटू श्याम वार्षिक मेले के लिए रेलवे और राजस्थान रोडवेज प्रशासन ने विशेष व्यवस्थाएं की हैं। मेला के दौरान यात्रा को सहज बनाने के लिए रेलवे विभाग विशेष इंतजाम किए हैं। फाल्गुन मेले का प्लान बनाने वालों के लिए खुशखबरी, शुरू हो रही हैं स्पेशल ट्रेनें खाटू श्यामजी के लिए यह है ट्रेन रूट भारतीय रेलवे ने मेले के लिए दो मुख्य विशेष ट्रेनें चलाई हैं। एक कुरुक्षेत्र से फुलेरा और दूसरी फुलेरा से दिल्ली सराय रोहिल्ला मार्ग पर, ताकि दिल्ली और आस-पास के इलाकों से श्रद्धालु आराम से पहुंचना सुनिश्चित कर सकें। इसके अलावा मेले के दौरान रोजाना कई ट्रेनें रिंगस स्टेशन तक चलेंगी, जिससे भक्तों को हर 20 मिनट में ट्रेन उपलब्ध होगी। रींगस से मंदिर तक का सफर मेले के दौरान भीड़ प्रबंधन के लिए रींगस रोड स्थित श्याम वाटिका के पीछे लगभग 40 बीघा भूमि पर तीन अतिरिक्त बैकअप ब्लॉक भी तैयार किए गए हैं. इनका उपयोग तब किया जाएगा जब लखदातार मैदान और चारण मेला मैदान में श्रद्धालुओं की संख्या क्षमता से अधिक हो जाएगी. मेले के दौरान पदयात्रियों को रींगस से खाटूधाम तक करीब 38 किलोमीटर की पैदल यात्रा करनी होगी. सुरक्षा के लिहाज से इस पूरे मार्ग को ‘नो व्हीकल्स जोन’ घोषित किया जाएगा, ताकि भक्तों को मार्ग में किसी वाहन के कारण परेशानी न हो. 18 किलोमीटर का जिगजैग मार्ग खाटू पहुँचने के बाद भी दर्शन की राह आसान नहीं होगी. प्रशासन ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए 6 ब्लॉकों के भीतर कुल 18 किलोमीटर लंबा जिगजैग मार्ग बनाया है. इस सर्पाकार मार्ग से गुजरते हुए ही भक्त मंदिर तक पहुँच पाएंगे. श्री श्याम मंदिर कमेटी ने लखदातार मैदान में रंग-रोगन, रोशनी और पेयजल जैसी सभी मूलभूत सुविधाओं का कार्य पूरा कर लिया है. मेले की सुरक्षा व्यवस्था को चाक-चौबंद रखने के लिए भारी संख्या में पुलिस बल और स्वयंसेवकों की तैनाती की जाएगी ताकि उत्सव शांतिपूर्वक संपन्न हो सके. खाटू के लिए यह है बस रूट दिल्ली और जयपुर से हीरापुरा बस स्टैंड तथा अन्य रोडवेज डिपो से खाटू धाम के लिए नियमित बस सेवाएं उपलब्ध हैं। जयपुर से रींगत होते हुए स्थानीय बसें या साझा टैक्सी से खाटू तक की यात्रा आसान रहती है। इस बार जयपुर से सभी बसें अजमेर रोड स्थित नए बस स्टैंड से संचालित हो रही हैं। मेले का ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व फाल्गुन मेला खाटू श्याम जी के प्रति श्रद्धा और भक्ति का प्रमुख उत्सव है। पुराणों के अनुसार श्याम जी हारे हुए व्यक्ति के सहारा देने वाले … Read more

प्लेटफॉर्म विस्तार के चलते उदयपुर सिटी रेलवे स्टेशन पर छह दिन बदलेगा ट्रेनों का शेड्यूल

उदयपुर उदयपुर शहर के रेलवे यात्रियों के लिए अहम खबर है। भारतीय रेलवे ने उदयपुर सिटी रेलवे स्टेशन पर प्लेटफॉर्म विस्तार का कार्य 19 फरवरी से शुरू कर दिया है। यह काम 24 फरवरी तक चलेगा। इस दौरान नॉन-इंटरलॉकिंग ब्लॉक लिया गया है, जिससे कई ट्रेनों का संचालन प्रभावित रहेगा। रेलवे द्वारा प्लेटफॉर्म नंबर 9 और 10 को उमरड़ा साइड से जोड़ने का काम किया जा रहा है। अभी प्लेटफॉर्म 9 केवल राणा प्रताप नगर साइड से जुड़ा है, जबकि प्लेटफॉर्म 10 सीधे किसी दिशा से कनेक्ट नहीं है। कार्य पूरा होने के बाद प्लेटफॉर्म 9 पर दोनों दिशाओं से ट्रेनें आ-जा सकेंगी और प्लेटफॉर्म 10 पर उमरड़ा की ओर से ट्रेनें खड़ी हो सकेंगी। इससे स्टेशन की क्षमता बढ़ेगी। ब्लॉक के दौरान अधिकांश ट्रेनें राणा प्रताप नगर रेलवे स्टेशन और मावली जंक्शन रेलवे स्टेशन से संचालित होंगी। 19 से 24 फरवरी के बीच कई ट्रेनें आंशिक रूप से रद्द रहेंगी या उनका स्टेशन बदला गया है। इनमें 59610 (चित्तौड़गढ़–उदयपुर), 59606 (बड़ी सादड़ी–उदयपुर), 59607 (उदयपुर–बड़ी सादड़ी), 19606 (उदयपुर–मदार जंक्शन) शामिल हैं। 23 फरवरी को 12963 (निजामुद्दीन–उदयपुर) और 20473 (दिल्ली–उदयपुर) राणा प्रताप नगर तक ही आएंगी। 24 फरवरी को 09721/09722 (जयपुर–उदयपुर), 20474 (उदयपुर–दिल्ली), 12964 (उदयपुर–निजामुद्दीन) सहित कई ट्रेनें उदयपुर सिटी स्टेशन नहीं आएंगी। 59835 (मंदसौर–उदयपुर) और 59836 (उदयपुर–मंदसौर) 24 फरवरी को केवल मावली तक चलेंगी। ब्लॉक के अंतिम दिन 24 फरवरी को सबसे ज्यादा असर रहेगा। 20987 (उदयपुर–असारवा) ट्रेन करीब 4 घंटे 20 मिनट की देरी से रवाना होगी, जबकि 69243 (असारवा–चित्तौड़गढ़) ट्रेन लगभग 3 घंटे 30 मिनट की देरी से चलेगी। रेलवे अधिकारियों ने यात्रियों से अपील की है कि वे यात्रा से पहले अपनी ट्रेन की स्थिति की जानकारी जरूर ले लें। प्लेटफॉर्म विस्तार कार्य पूरा होने के बाद स्टेशन पर ट्रेनों का संचालन अधिक सुगम हो जाएगा।