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शेखावाटी में गोल्ड लोन घोटाले का मास्टरमाइंड निकला करोड़पति

झुंझुनूं. झुंझुनूं के नवलगढ़ स्थित पीएनबी बैंक शाखा में सामने आया घोटाला बैंकिंग सेक्टर के सबसे बड़े घोटालों में से एक बताया जा रहा है। 6.50 करोड़ रुपए के गोल्ड लोन घोटाले मामले में पुलिस ने मुख्य आरोपी बैंक के तत्कालीन मुख्य प्रबंधक अमित जांगिड़ और बीसी संतोष सैनी गिरफ्तार कर लिया है। हैरान करने वाली बात यह है कि मास्टरमाइंड करोड़ों की संपत्ति का मालिक निकला, जिसने घोटाले की रकम से आलीशान मकान, जमीन और महंगी कारें खरीदी। गोल्ड लोन घोटाले के मास्टरमाइंड अमित जांगिड़ के पास अकूत संपत्ति के सबूत मिले हैं। अमित के पास सीकर के पॉश इलाके में 3 मंजिला निर्माणाधीन मकान, सीथल गांव में बड़ा डेयरी फार्म है। जिसमें 100 से अधिक देशी व विदेशी नस्ल की गाय पाल रखी हैं। उसके पास 2 महंगी कार, एक बुलेट मोटरसाइकिल और डेयरी में 2 पिकअप गाड़ी भी मिली। अमित जांगिड़ ने पत्नी के नाम गुढ़ा में जमीन खरीद रखी है। पुलिस द्वारा दी गई जानकारी के अलावा अमित जांगिड़ के पास अन्य संपत्ति की जानकारी भी मिली। जिसमें उसने अपनी डेयरी वाली जमीन के पास 5 वर्ष पूर्व 15 बीघा जमीन खरीदी, गांव में ही एक दूसरी जगह 11 बीघा जमीन खरीदी और इस जमीन पर ट्यूबवैल भी बनवा रखा है। इसके अलावा सीथल में ही 2 साल पूर्व 7 बीघा जमीन और भी खरीदने की जानकारी मिली है। पुलिस इसकी भी जांच कर रही है। महिला मित्र को दिया सोना झुंझुनूं पुलिस अधीक्षक बृजेश ज्योति उपाध्याय ने बताया कि मुख्य आरोपी अमित जांगिड़ ने बीसी संतोष सैनी के जरिए लोगों के नाम फर्जी गोल्ड लोन खाते खोले। इसके लिए संतोष सैनी को मोटी रकम व गोल्ड का लालच दिया। अमित जांगिड़ ने अपनी महिला मित्र को बैंक में जमा सोना देकर अन्य बैंकों से गोल्ड लोन भी दिलवा रखा था। ऐसे पकड़ा गाया मुख्य आरोपी मुख्य आरोपी अमित पुलिस को मथुरा रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म पर पटरी के पास बैठा मिला। शक होने पर पूछताछ की तो उसने अपना नाम पवन जांगिड़ निवासी श्रीगंगानगर बताया। सख्ती से पूछताछ करने पर सही नाम पता बताया। उसने खुद का 4 करोड़ का बीमा करवा रखा था। वह रेल के आगे कूदकर आत्महत्या करने की योजना बना रहा था। गिरफ्तारी के समय अमित जांगिड़ के पास जहरीला पदार्थ भी मिला है। इससे पहले दिन वह वृ़ंदावन में था। पत्नी ने दर्ज करवाई थी गुमशुदगी की ​रिपोर्ट बताया जा रहा है कि आरोपी अमित को 28 जनवरी को मंडल कार्यालय हनुमानगढ़ में पेश होना था लेकिन वह वहां पहुंचा नहीं और फरार हो गया। इसके बाद अमित की पत्नी ने 30 जनवरी को गुढ़ा थाने में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई थी।

जयपुर-पचपदरा ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे को मंजूरी

जयपुर. राजस्थान के औद्योगिक और इंफ्रास्ट्रक्चर विकास में बड़ा बदलाव जयपुर से पचपदरा तक प्रस्तावित ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे से होने जा रहा है। लगभग 350 से 400 किलोमीटर लंबे इस एक्सप्रेस-वे से पचपदरा रिफाइनरी को प्रदेश की राजधानी से सीधी कनेक्टिविटी मिलेगी, जिससे पश्चिमी राजस्थान में यात्रा सुगम होगी और लॉजिस्टिक ट्रांसपोर्ट को मजबूत आधार मिलेगा। इस परियोजना की अनुमानित लागत लगभग 11,492 करोड़ रुपए है। यह एक्सप्रेस-वे जयपुर से शुरू होकर किशनगढ़ (अजमेर), पाली और जोधपुर होते हुए बालोतरा जिले के पचपदरा तक पहुंचेगा। परियोजना को केंद्र सरकार से मंजूरी मिल चुकी है। फिलहाल, भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया जारी है तथा डीपीआर तैयार की जा रही है। संभावना है कि यह मार्ग जोधपुर-पाली क्षेत्र से होकर निकलेगा, जिससे रोहट में प्रस्तावित दिल्ली-मुंबई इंडस्ट्रियल कॉरिडोर (डीएमआईसी) के पश्चिमी राजस्थान हिस्से को बेहतर कनेक्टिविटी मिलेगी। रिफाइनरी और पेट्रोकेमिकल हब को सीधा लाभ इस एक्सप्रेस-वे का सबसे बड़ा लाभ पचपदरा रिफाइनरी और प्रस्तावित पेट्रोकेमिकल हब को मिलेगा। रिफाइनरी को कच्चे माल की आपूर्ति और तैयार उत्पादों के परिवहन के लिए सीधा व सुरक्षित कॉरिडोर मिलेगा, जिससे लॉजिस्टिक लागत में कमी आएगी। यह एक्सप्रेस-वे दिल्ली-मुंबई इंडस्ट्रियल कॉरिडोर और अमृतसर-जामनगर एक्सप्रेस-वे से भी जुड़ेगा, जिससे राजस्थान की औद्योगिक कनेक्टिविटी राष्ट्रीय स्तर पर मजबूत होगी। एक्सपोर्ट की राह होगी आसान इस मार्ग के बनने से जयपुर-जोधपुर-बालोतरा की यात्रा समय में लगभग दो से तीन घंटे की कमी आने की संभावना है। हालांकि, सबसे बड़ा लाभ निर्यात क्षेत्र को होगा। एक्सप्रेस-वे को जामनगर-अमृतसर भारतमाला कॉरिडोर से जोड़े जाने के बाद सड़क और कंटेनर रेल मार्ग से भी तेज और आसान तरीके से कांडला पोर्ट तक पहुंच सकेंगे। डीएमआईसी जोधपुर-पाली रोड से जुड़ाव के कारण आगामी औद्योगिक विकास की संभावनाएं भी बढ़ेंगी। जोधपुर में प्रस्तावित नई रिंग रोड के समीप से एक्सप्रेस-वे गुजरने से ट्रांसपोर्टेशन और औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा। बेहतर लॉजिस्टिक मॉडल, कनेक्टिविटी बढ़ेगी उत्पादों की ट्रांसपोर्टेशन सुगम होगी इस परियोजना से एक्सपोर्ट योग्य उत्पादों की ट्रांसपोर्टेशन सुगम होगी और गुजरात तक की रफ्तार बढ़ेगी। नए औद्योगिक क्षेत्र और रिंग रोड के साथ यह एक्सप्रेस-वे रोजगार के नए द्वार भी खोलेगा। -कुशल प्रजापत, सिविल इंजीनियर फैक्ट फाइल… 350 से 400 किलोमीटर लगभग कुल लंबाई 11,492 करोड़ रुपए लगभग अनुमानित लागत 05 जिले जुड़ेंगे 2 से 3 घंटे की यात्रा समय में कमी

प्रेमी और दोस्तों के साथ मिलकर नवविवाहिता ने की पति की हत्या

श्रीगंगा नगर. इंदौर के ट्रांसपोर्ट कारोबारी राजा रघुवंशी हत्याकांड को लोग अभी भूल भी नहीं पाए थे कि राजस्थान के श्रीगंगानगर से ऐसा ही सनसनीखेज मामला सामने आ गया है। जहां एक महिला ने शादी के तीन महीने बाद ही अपने प्रेमी के साथ मिलकर पति की निर्मम हत्या कर दी। इस घटना ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है। रावला थाना पुलिस ने आशीष सांसी हत्या मामले में मृतक की पत्नी अंजू उर्फ अंजली, प्रेमी संजय उर्फ संजू सहित चारों आरोपियों को गिरफ्तार किया है। जिन्हें कोर्ट में पेश कर रिमांड पर लिया गया है। पुलिस आरोपियों से हत्या में प्रयुक्त धारदार हथियार, मफलर और अन्य सामान की बरामदगी को लेकर पूछताछ में जुटी हुई है। सोनम की तरह अंजली ने रची साजिश सोनम की तरह ही श्रीगंगानगर में अंजली ने खौफनाक साजिश रची। सोनम शादी के 10 दिन बाद ही पति राजा रघुवंशी के साथ हनीमून पर गई थी, जहां पर उसने प्रेमी राज के साथ मिलकर राजा रघुवंशी की हत्या की थी। वैसे ही राजस्थान में अंजली ने शादी के तीन महीने बाद पति आशीष की हत्या की प्लानिंग बनाई। पति को विश्वास में लेकर वह शाम के समय घूमने के लिए गई। जहां पर अंजली ने अपने प्रेमी संजय के साथ मिलकर पति आशीष की हत्या कर दी। अंजली के चाचा बोले- भतीजी के मिले फांसी की सजा आशीष के परिजनों के साथ-साथ अंजली के चाचा ने सभी आरोपियों को फांसी की सजा देने की मांग की है। अंजली के चाचा रवि कुमार का कहना है कि हमारी औलाद की वजह से एक परिवार बिखर गया। हमें अंदाजा तक नहीं था कि अंजली ऐसा कदम उठाएगी। तीन महीने पहले ही उसकी आशीष से शादी हुई थी। भतीजी सहित हत्या के सभी आरोपियों को फांसी दी जाए। चाचा रवि ने कहा कि इस हत्याकांड के बाद से ही अंजली की मां व अन्य रिश्तेदार आशीष के घर पर ही हैं। अंजली के पिता की 12 साल पहले मौत हो गई थी। ऐसे में उसकी मां ने ही उसे पढ़ाया। अंजू घर पर रहकर ही एमकॉम की पढ़ाई कर रही थी। लेकिन, भतीजी की करतूत से पूरा परिवार शर्मिंदा है। ऐसे हुआ था चौंकाने वाला खुलासा पुलिस ने अंजली की कॉल डिटेल खंगाली तो पता चला कि प्रेमी संजय से उसकी लगातार बात हो रही थी। दोनों लंबे समय से एक दूसरे के संपर्क में थे। पुलिस ने संजय को हिरासत में लेकर पूछताछ की तो चौंकाने वाला सच सामने आया। पूछताछ में सामने आया कि कुछ दिन पहले ही अंजली ने पीहर सादुलशहर में संजय के साथ मिलकर पति की हत्या की प्लानिंग बनाई थी। योजना के तहत अंजली दोबारा ससुराल लौटी और रोज की तरह पति के साथ रात में घूमने जाने लगी। 30 जनवरी की रात अंजली ने आशीष को बहाने से सूनसान सड़क पर ले जाकर पहले से झाड़ियों में छिपे आरोपियों को इशारा किया। इसके बाद आरोपियों ने डंडों से सिर पर वार कर उसे बेहोश किया और मफलर से गला घोंटकर हत्या कर दी। थाने में दर्ज हुई थी ये रिपोर्ट 31 जनवरी को रावला थाने में दर्ज रिपोर्ट के मुताबिक चक एक केएलएम निवासी बजीरचंद ने बताया था कि 30 जनवरी की रात उसका भतीजा आशीष अपनी पत्नी के साथ घूमने निकला। तभी अज्ञात वाहन की टक्कर से वह गंभीर घायल हो गया। जिसकी अस्पताल में उपचार के दौरान मौत हो गई। लेकिन, जब पुलिस ने जांच शुरू की तो मृतक के शरीर पर चोट के निशान पाए गए। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में सिर पर गंभीर चोट और गला घोंटने के निशान मिलने पर स्पष्ट हुआ कि आशीष की हत्या हुई है।

पंचायत चुनाव में ‘दो संतान’ और ‘शैक्षिक अनिवार्यता’ होगी लागू?

जयपुर. राजस्थान में होने वाले नगरीय निकाय और पंचायत चुनावों को लेकर उम्मीदवारों के बीच पात्रता नियमों को लेकर काफी असमंजस बना हुआ था। खास तौर से चर्चा थी कि राज्य सरकार दो से अधिक संतान वाले उम्मीदवारों को चुनाव लड़ने की अनुमति दे सकती है और शैक्षणिक योग्यता को भी अनिवार्य बना सकती है। हालांकि, राज्य सरकार ने अब आधिकारिक तौर पर साफ कर दिया है कि निकट भविष्य में पात्रता नियमों में किसी बड़े बदलाव की कोई योजना नहीं है। सरकार के पास फिलहाल नियमों में संशोधन का कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है, जिसका मतलब साफ़ है कि अनपढ़ या कम पढ़े-लिखे लोग भी पूर्व की भांति चुनाव लड़ सकेंगे। रतनगढ़ विधायक पूसाराम गोदारा के सवाल का लिखित जवाब देते हुए स्वायत्त शासन विभाग (DLB) ने स्पष्ट किया कि राजस्थान नगरपालिका अधिनियम, 2009 की धारा 21 के तहत पार्षदों या निकाय चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों के लिए किसी भी न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता का प्रावधान नहीं है। दो संतान नीति : 'प्रक्रिया में है, पर लागू नहीं' दो संतान नीति को हटाने पर विचार-विमर्श लंबे समय से चल रहा है। यह मामला अभी प्रक्रिया (Under Process) में है। कैबिनेट ने अभी तक इस संबंध में कोई बिल पास नहीं किया है और न ही कोई नया नियम लागू हुआ है। गौरतलब है कि पिछले कुछ समय से चर्चा थी कि सरकार 27 नवंबर 1995 के बाद तीसरी संतान होने पर चुनाव लड़ने की पाबंदी को हटा सकती है।  पक्ष और विपक्ष में छिड़ी नई बहस सरकार के इस स्पष्टीकरण के बाद प्रदेश के राजनीतिक गलियारों में मिली-जुली प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। विरोध में स्वर: पूर्व पार्षद दशरथ सिंह शेखावत ने सरकार के इस रुख की आलोचना की है। उनका कहना है कि 21वीं सदी में सरकार को पीछे की ओर नहीं मुड़ना चाहिए। कम संतान वाले जनप्रतिनिधि समाज के लिए उदाहरण होते हैं। साथ ही, उन्होंने निकायों के संचालन के लिए शैक्षणिक योग्यता न होने को भी गलत बताया। समर्थन में तर्क: पूर्व मेयर ज्योति खंडेलवाल ने इस रुख का स्वागत करते हुए कहा कि शैक्षणिक योग्यता अनिवार्य न होने से अधिक लोगों को लोकतंत्र में भागीदारी मिलेगी। विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों में जहाँ दो से अधिक बच्चे होना सामान्य बात थी, वहाँ नियमों में ढील मिलने से कई योग्य उम्मीदवार चुनाव लड़ पाएंगे। भविष्य की संभावनाएं और कानूनी पेच हालांकि सरकार ने अभी संशोधनों को लागू करने से इनकार किया है, लेकिन स्वायत्त शासन मंत्री झाबर सिंह खर्रा के पूर्व के बयानों से संकेत मिलते हैं कि धारा 24 में संशोधन का प्रस्ताव विधि विभाग के पास भेजा गया है। यदि भविष्य में इसे कैबिनेट की मंजूरी मिलती है, तो इसे विधानसभा में विधेयक के रूप में लाया जा सकता है। लेकिन वर्तमान स्थिति यही है कि आगामी चुनावों में पुराने नियम ही प्रभावी रहेंगे। उम्मीदवारों के लिए क्या है संदेश? निकाय चुनावों की तैयारी कर रहे दावेदारों के लिए यह खबर महत्वपूर्ण है। फिलहाल वे लोग जिनके दो से अधिक बच्चे हैं, उन्हें राहत के लिए अभी और इंतजार करना होगा। वहीं, वे उम्मीदवार जो इस उम्मीद में थे कि शैक्षणिक योग्यता लागू होने से उनके प्रतिद्वंद्वी बाहर हो जाएंगे, उन्हें भी अब चुनावी मैदान में सीधी टक्कर के लिए तैयार रहना होगा। पिछले कुछ समय से 2 बच्चों की नीति को हटाने पर चर्चा चल रही है। फिलहाल यह अपेक्षित है और प्रक्रियाधीन है-रवि जैन, सचिव, डीएलबी

हाईवे किनारे बने अवैध निर्माणों पर चलेगा ‘पीला पंजा’

जयपुर. राजस्थान में नेशनल हाईवे के किनारे बसे अवैध निर्माणों पर अब भजनलाल सरकार का 'पीला पंजा' चलने को तैयार है। राजस्थान हाईकोर्ट के कड़े रुख के बाद राजस्थान सरकार ने हाईवे की बिल्डिंग लाइन और कंट्रोल लाइन के भीतर हुए तमाम अवैध निर्माणों को जमींदोज करने का बड़ा फैसला लिया है। राजस्थान हाईकोर्ट के सख्त रुख के बाद सार्वजनिक निर्माण विभाग के एडिशनल चीफ सेक्रेटरी ने प्रदेश के सभी जिला कलक्टरों को इस संबंध में सख्त निर्देश जारी कर दिए हैं। इस आदेश के बाद प्रदेशभर में हाईवे किनारे संचालित अवैध होटल, ढाबे और रेस्टोरेंट संचालकों में हड़कंप मच गया है। प्रशासनिक तैयारी तेज सूत्रों के अनुसार जिला प्रशासन और पीडब्ल्यूडी अब हाईवे सीमा का सीमांकन शुरू करने की तैयारी में है। जल्द ही अवैध निर्माण को चिन्हित कर उन्हें हटाने के नोटिस जारी किए जा सकते हैं। इस बड़ी कार्रवाई की आहट ने क्षेत्र के 'अतिक्रमणकारियों' की नींद उड़ा दी है। हाईकोर्ट का सख्त रुख: सड़क सुरक्षा सर्वोपरि हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि हाईवे के किनारे बेतरतीब और अवैध निर्माण सड़क दुर्घटनाओं का सबसे बड़ा कारण बन रहे हैं। अनियंत्रित एंट्री-एग्जिट और अवैध कब्जों की वजह से आए दिन होने वाले हादसों में लोगों की जान जा रही है। अदालत ने सड़क सुरक्षा को देखते हुए सरकार को निर्देश दिए हैं कि इन अवैध ढांचों के खिलाफ बिना किसी रियायत के कठोर कदम उठाए जाएं। 75 मीटर के दायरे में बने निर्माण हटेंगे इसके बाद पीडब्ल्यूडी की ओर से आदेश जारी किया गया है। जिसमें कहा गया है कि नेशनल हाईवे के सेंटर पॉइंट से 75 मीटर की दूरी तक किसी भी तरह का कॉमर्शियल या आवासीय निर्माण कानूनी रूप से मान्य नहीं होगा। इस दायरे में आने वाले सभी अवैध होटल, ढाबे, दुकानें, सर्विस सेंटर और भवन हटाए जाएं। क्या है नया नियम? नेशनल हाईवे के सेंटर पॉइंट (मध्य बिंदु) से 75 मीटर की दूरी तक अब किसी भी प्रकार का निर्माण (व्यावसायिक या आवासीय) अवैध माना जाएगा। इस 75 मीटर के दायरे में आने वाले सभी होटल, ढाबे, दुकानें, शोरूम, गैराज और अन्य पक्के निर्माण हटाए जाएंगे।

RPSC अब हर परीक्षा के नंबर करेगा सार्वजनिक

जयपुर. राजस्थान की प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता लाने की दिशा में भजनलाल सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। राजस्थान लोक सेवा आयोग ने अब उम्मीदवारों के प्राप्तांकों को लेकर चली आ रही गोपनीयता की दीवार को गिरा दिया है। आयोग ने निर्णय लिया है कि अब हर भर्ती परीक्षा के सफल अभ्यर्थियों के नंबर सार्वजनिक किए जाएंगे। प्रदेश की सबसे बड़ी और प्रतिष्ठित आरएएस (RAS) भर्ती-2023 इस नई व्यवस्था की पहली गवाह बनी है। आयोग ने न केवल परिणाम जारी किए, बल्कि चयनित अभ्यर्थियों के मुख्य परीक्षा और इंटरव्यू के अंक भी आधिकारिक वेबसाइट पर अपलोड कर दिए हैं। इससे पहले अभ्यर्थियों को अपने व्यक्तिगत अंकों के लिए एक लंबी प्रक्रिया और समय का इंतजार करना पड़ता था। पारदर्शिता कैसे बढ़ाएगा RPSC का फैसला? RPSC सचिव रामनिवास मेहता के अनुसार, आयोग की कार्यप्रणाली में यह बदलाव केवल RAS तक सीमित नहीं रहेगा। भविष्य में होने वाली सभी परीक्षाओं और वर्तमान में प्रक्रियाधीन भर्तियों के अंक भी इसी तरह सार्वजनिक किए जाएंगे। इस निर्णय के पीछे मुख्य उद्देश्य भर्ती प्रक्रिया में युवाओं का विश्वास बहाल करना और पारदर्शिता सुनिश्चित करना है। अभ्यर्थियों को क्या होंगे सीधे फायदे? अभ्यर्थियों को अब अपनी मेरिट और स्कोर के लिए भटकना नहीं पड़ेगा। छात्र यह समझ पाएंगे कि वे किस विषय में मजबूत रहे और इंटरव्यू में उनका प्रदर्शन कैसा रहा। नंबर सार्वजनिक होने से चयन प्रक्रिया पर उठने वाले सवालों और आशंकाओं पर विराम लगेगा। आयोग अब सिर्फ कट-ऑफ नहीं बताएगा, बल्कि हर सफल उम्मीदवार की मेहनत का पूरा हिसाब (मार्क्स) वेबसाइट पर देगा। स्टूडेंट्स को अब क्या ध्यान रखना चाहिए? शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस मार्कशीट के बाद अब उम्मीद जगी है कि RPSC उत्तर पुस्तिकाओं के पुनर्मूल्यांकन और आंसर-की विवादों को सुलझाने के लिए भी कुछ ऐसे ही कड़े और पारदर्शी कदम उठाएगा।

जोधपुर में थाईलैंड की राजकुमारी मेजर नारीरत्ना का होगा शाही स्वागत

जोधपुर. थाईलैंड की राजकुमारी सिरिवन्नवारी नारीरत्ना 8 फरवरी से जोधपुर के दो दिवसीय दौरे पर रहेंगी। वे विशेष विमान से जोधपुर पहुंचेंगी। राजकुमारी के आगमन को लेकर जिला प्रशासन और संबंधित विभागों ने व्यापक तैयारियां शुरू कर दी हैं। सुरक्षा, आवागमन, ठहराव और भ्रमण को लेकर अलग-अलग अधिकारियों को जिम्मेदारी सौंपी गई है। राजकुमारी के शाही स्वागत को लेकर प्रशासन पूरी तरह अलर्ट है। एयरपोर्ट से लेकर उनके ठहरने और भ्रमण स्थलों तक विशेष इंतजाम किए जा रहे हैं। सुरक्षा व्यवस्था के साथ-साथ यातायात व्यवस्था को भी सुचारु रखने के निर्देश दिए गए हैं। राजकुमारी के स्वागत में पारंपरिक और शाही अंदाज अपनाया जाएगा। खुदका लग्जरी फैशन ब्रांड राजकुमारी सिरिवन्नवारी नारीरत्ना अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक प्रसिद्ध फैशन डिजाइनर के रूप में जानी जाती हैं। उनका खुद का लग्जरी फैशन ब्रांड है, जो दुनिया के कई देशों में लोकप्रिय है। फैशन के क्षेत्र में उनके डिजाइन और कलेक्शन को खास पहचान मिली हुई है। सेना में मेजर पद पर कार्यरत राजकुमारी सिरिवन्नवारी केवल फैशन तक सीमित नहीं हैं। वे थाईलैंड की शाही सेना में मेजर के पद पर भी कार्यरत हैं। इसके अलावा वे एक कुशल घुड़सवार हैं और खेल, कला व संस्कृति के क्षेत्र में उनकी गहरी रुचि है। दुनिया की सबसे अमीर राजकुमारियों में शामिल राजकुमारी सिरिवन्नवारी नारीरत्ना को दुनिया की सबसे अमीर राजकुमारियों की सूची में भी शामिल किया जाता है। उनकी संपत्ति अरबों में बताई जाती है। राजस्थान और आगरा का भी करेंगी भ्रमण राजकुमारी भारत के 5 दिवसीय दौरे पर आई हैं। इस दौरान वे राजस्थान के विभिन्न शहरों के साथ-साथ आगरा का भी भ्रमण करेंगी। जोधपुर प्रवास के दौरान वे ऐतिहासिक धरोहरों, सांस्कृतिक स्थलों और शाही विरासत से रूबरू होंगी।

बीजेपी विधायक का तंज- राजस्थान में 200 जिले बना देते गहलोत

जयपुर. राजस्थान विधानसभा में राज्यपाल के अभिभाषण पर बहस के आखिरी दिन जमकर हंगामा ​हुआ। केकड़ी से बीजेपी विधायक शत्रुघ्न गौतम ने गुरुवार को पूर्व सीएम अशोक गहलोत पर तीखे तंज कसे। उन्होंने कहा कि गहलोत ने जाते-जाते बिना सोचे समझे राजस्थान में नए जिले बना दिए। गहलोत को अगर कोई यह गारंटी दे देता कि सरकार रिपीट हो जाएगी, तो वे 200 जिले बना देते। राज्यपाल के अभिभाषण पर बहस के दौरान भाजपा विधायक शत्रुघ्न गौतम ने कहा कि कांग्रेस सरकार ने हर क्षेत्र में बंटाधार किया। शिक्षा को नाथी का बाड़ा किसने बनाया? गहलोत ने जाते-जाते जिले बना दिए, उन्हें अगर जिले ही बनाने थे साल 2019 में बनाते। लेकिन, जब लगा कि हमारे नेता नहीं जीतेंगे तो व​हां-वहां बिना सोचे समझो जिले बना दिए। उन्होंने कहा कि गहलोत राज में केकड़ी, मालपुरा, शाहपुरा, दूदू को जिला बना दिया। लेकिन, क्या हुआ जीत पाए? गहलोत को अगर कोई यह गारंटी दे देता कि सरकार रिपीट हो जाएगी ते वे 200 जिले बना देते। दूदू को नया प्रदेश ही बना देते। जयपुर की खराब ट्रैफिक व्यवस्था को लेकर कांग्रेस पर हमला बीजेपी विधायक शत्रुघ्न गौतम ने जयपुर में पुलिस कमिश्नरेट के बाद भी खराब ट्रैफिक व्यवस्था को लेकर भी कांग्रेस पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने मुंबई पुलिस से ज्यादा ताकतवर जयपुर में कमिश्नरेट बनाया। विधानसभा में इसलिए हुआ हंगामा इस पर कांग्रेस विधायक रोहित बोहरा ने टोकते हुए कहा कि तत्कालीन भाजपा सरकार के समय गुलाबचंद कटारिया गृह मंत्री थे, उनकी सिफारिश से ही जयपुर में पुलिस कमिश्नरेट बना था। बीच में टोकने पर संसदीय कार्यमंत्री ने आपत्ति जताई तो सदन में हंगामा शुरू हो गया।

राजस्थान में खेत-तबेलों और फार्महाउसों में बन रही MD ड्रग्स

जयपुर. राजस्थान में एमडी ड्रग्स का अवैध कारोबार खतरनाक स्तर तक पहुंच चुका है। पुलिस कार्रवाई में तीन महीनों के दौरान हर छठे दिन एक ड्रग्स फैक्टरी का खुलासा हो रहा है। बाड़मेर, जोधपुर, झुंझुनूं, प्रतापगढ़, चित्तौड़गढ़ और झालावाड़ जैसे जिलों में खेतों, तबेलों, फार्महाउसों और झोपड़ियों में एमडी ड्रग्स बनाने की फैक्ट्रियां पकड़ी गई हैं। इन ठिकानों से करोड़ों रुपए की एमडी ड्रग्स, केमिकल और उपकरण जब्त किए गए। हालांकि, लगातार हो रही इन कार्रवाइयों के बावजूद कई बड़े सरगना अब भी फरार हैं। राजस्थान में नशे के बढ़ते नेटवर्क को लेकर विधानसभा और संसद में भी चिंता जताई गई है। लगातार कार्रवाई 7 दिसंबर 2025: जोधपुर जिले के सोइंतरा गांव में खेत पर चल रही एमडी लैब पकड़ी गई। बड़ी मात्रा में केमिकल जब्त हुए और छह आरोपी गिरफ्तार किए गए। 15 दिसंबर 2025: झुंझुनूं के नांद का बास गांव में खेतों के बीच बने मुर्गी फार्म से एमडी ड्रग्स की बड़ी फैक्टरी सामने आई। 10 किलो एमडी और करीब 100 करोड़ की सामग्री जब्त की गई। एक गिरफ्तारी के बाद नेटवर्क की आगे जांच नहीं हो सकी। 19 दिसंबर 2025: बाड़मेर के आदर्श चवा स्थित करेली नाड़ी में खेत से 40 किलो तैयार एमडी ड्रग्स बरामद हुई। साथ ही करीब 50 करोड़ रुपए के उपकरण और केमिकल जब्त किए गए। दो गिरफ्तार। 29 दिसंबर 2025: प्रतापगढ़ के हतुनिया क्षेत्र के जंगल में झोपड़ी में एमडी फैक्टरी का सेटअप मिला। मौके से 28.54 ग्राम एमडी बरामद हुई। एक आरोपी पकड़ा गया, जबकि सरगना अब तक फरार है। जनवरी 2026 में तेज हुई कार्रवाई 13 जनवरी, 2026: डीडवाना-कुचामन जिले में कोटपूतली-कुचामन स्टेट हाईवे पर ट्रक में मुर्गी दाने के बीच छिपाकर ले जाई जा रही 270 किलो एमडीएमए (कीमत करीब 81 करोड़) जब्त की गई। छह गिरफ्तार। 14 जनवरी 2026: चित्तौड़गढ़ के सुरजना गांव में बाड़ेनुमा मकान से ड्रग्स बनाने की फैक्टरी पकड़ी गई। 107 ग्राम एमडी, 5.8 किलो नशीला पदार्थ, 200 किलो केमिकल और उपकरण जब्त कर दो आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। 17 जनवरी, 2026: झालावाड़ के भवानीमंडी क्षेत्र के आमलियाखेड़ा गांव में तबेले की आड़ में चल रही एमडी फैक्टरी पकड़ी गई। दो किलो एमडी, 130 लीटर केमिकल (कीमत करीब 25 करोड़) मिले। तीन आरोपी फरार, पुलिस ने फैक्टरी ध्वस्त कर दी। 28 जनवरी, 2026: झालावाड़ के घाटाखेड़ी में एक मकान से दो किलो एमडी, एक किलो स्मैक और 15 किलो प्रतिबंधित केमिकल जब्त किए गए। दो आरोपी गिरफ्तार। 30 जनवरी, 2026: जोधपुर के सोयला गांव स्थित फार्महाउस पर एमडी लैब पकड़ी गई। 200 किलो एमडी बनाने का केमिकल और उपकरण बरामद हुए। तीन आरोपी अब तक फरार। 2 फरवरी, 2026: प्रतापगढ़ में किराणा दुकान की आड़ में चल रही एमडी फैक्टरी पकड़ी गई। 106 ग्राम एमडी, करीब 115 किलो केमिकल और पूरा सेटअप मिला। आरोपी फरार है, अवैध निर्माण ध्वस्त किया गया।

अलवर में बन रहा नीचे बना अंडरपास वाला पहला फोरलेन ओवरब्रिज

अलवर. राजस्थान के अलवर जिले में मेवात नगर डबल फाटक पर निर्माणाधीन ओवरब्रिज का स्वरूप दिखने लगा है। यहां पिलर्स के निर्माण के बाद कास्टिंग का काम शुरू हो गया है। यह अलवर शहर का पहला फोरलेन पुल होगा, जिसके नीचे अंडरपास भी बनाया जा रहा है, जिससे छोटे वाहनों को सहूलियत मिलेगी। इसके निर्माण पर 62 लाख की लागत आएगी। 2 साल से चल रहा ओवरब्रिज का काम बता दें कि अलवर शहर में हसन खां मेवात नगर डबल फाटक पर पिछले दो साल से ओवरब्रिज बनने का काम चल रहा है। पुल बनाने के काम पीडब्ल्यूडी की देखरेख में हो रहा है। माना जा रहा है कि इस वर्ष शहरवासियों का ओवरब्रिज पर आवागमन शुरू हो जाएगा। लाखों लोगों को मिलेगी राहत इस फाटक से हर दिन 15 हजार से ज्यादा वाहन निकलते हैं। भिवाड़ी मार्ग से शहर आने वाले वाहन चालकों के साथ—साथ फाटक के नजदीकी क्षेत्रों के लोग भी यहीं से निकलते है। यहां से हर दिन 30 से ज्यादा ट्रेनें गुजरती हैं। ऐसे में यहां अक्सर जाम के हालात बन जाते हैं। लेकिन, फोरलेन ओवरब्रिज बनने के बाद लाखों लोगों को राहत मिलेगी। फोरलेन ओवरब्रिज के नीचे अंडरपास भी बनेगा फोरलेन ओवरब्रिज के नीचे से अंडरपास भी बनेगा। अलवर का यह पहला पुल होगा, जिसके नीचे अंडरपास भी होगा। छोटे वाहनों के लिए अंडरपास की सुविधा होगी और बड़े वाहनों के लिए पुल रहेगा।