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ईवी पर PUC चालान बना विवाद, पुलिस की गलती सामने आई

 नागौर कार या मोटरसाइकल का चालान कटना कोई नई बात नहीं, हर दिन अलग-अलग वजहों को लेकर कई चालान कटते हैं। लेकिन राजस्थान के नागौर जिले से चालान कटने का एक अचंभित कर देने वाला मामला सामने आया है। यहां ट्रैफिक पुलिस ने कथित तौर पर एक इलेक्ट्रिक कार का प्रदूषण का चालान काट दिया। अधिकारियों से मिली जानकारी के अनुसार, यह घटना सात अप्रैल को जिला मुख्यालय क्षेत्र में कृषि मंडी तिराहे पर हुई जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद विवाद खड़ा हो गया। अब मामले की जांच शुरू हो गई है। 1700 रुपये का चालान किया अधिकारियों के अनुसार, यातायात पुलिस के एक सहायक उपनिरीक्षक ने इलेक्ट्रिक कार को रोका और 1700 रुपये का चालान जारी कर दिया, जिसमें प्रदूषण नियंत्रण (पीयूसी) प्रमाणपत्र न होने और कार के शीशों पर काली फिल्म चढ़ी होने का हवाला दिया गया। वीडियो में चालक यह तर्क देता दिखता है कि इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) के लिए PUC सर्टिफिकेट की जरूरत नहीं होती, लेकिन पुलिसकर्मी कथित तौर पर यह कहता नजर आता है कि चालान जारी होगा, क्योंकि पीओएस मशीन में पीयूसी प्रदर्शित नहीं हो रहा। 'चालान गलती से जारी हुआ प्रतीत होता है' जिला परिवहन अधिकारी अवधेश चौधरी ने कहा कि ईवी के लिए पीयूसी प्रमाणपत्र की आवश्यकता नहीं होती और संबंधित पुलिसकर्मी को इस विषय को ठीक से समझना चाहिए था। यातायात प्रभारी शिवदेव राम ने कहा कि चालान गलती से जारी हुआ प्रतीत होता है। उन्होंने कहा कि मामले की पड़ताल की जा रही है और जांच रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई की जाएगी।

जल जीवन मिशन घोटाले में ACB की बड़ी कार्रवाई, 5 दिन की रिमांड की मांग

जयपुर जल जीवन मिशन (JJM) घोटाले में बड़ी कार्रवाई के तहत शुक्रवार को पूर्व आईएएस अधिकारी सुबोध अग्रवाल को एसीबी कोर्ट में पेश किया गया। भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ने कोर्ट से उनकी 5 दिन की पुलिस रिमांड की मांग करने की तैयारी की है, ताकि मामले में गहन पूछताछ की जा सके। इस पूरे मामले की जांच एसीबी डीआईजी डॉ. रामेश्वर सिंह के सुपरविजन में चल रही है। गिरफ्तारी के अगले दिन कोर्ट में पेशी एसीबी अधिकारियों के अनुसार, सुबोध अग्रवाल को एक दिन पहले ही गिरफ्तार किया गया था। उनके खिलाफ पहले से ही गिरफ्तारी वारंट जारी था। गुरुवार को उन्हें नई दिल्ली से हिरासत में लेकर जयपुर लाया गया, जहां औपचारिक गिरफ्तारी की गई। शुक्रवार को मेडिकल प्रक्रिया पूरी करने के बाद उन्हें कोर्ट में पेश किया गया। टेंडर घोटाले और पद के दुरुपयोग के आरोप जांच में सामने आया है कि पूर्व आईएएस अधिकारी पर टेंडर प्रक्रिया में गंभीर गड़बड़ी और पद के दुरुपयोग के आरोप हैं। एसीबी का दावा है कि फर्जी प्रमाण पत्रों के आधार पर टेंडर जारी किए गए और शर्तों में हेरफेर कर करीब 50 करोड़ रुपए तक के प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दी गई। इस घोटाले में बड़े स्तर पर वित्तीय अनियमितताओं की आशंका जताई जा रही है। 10 गिरफ्तार, 3 आरोपी अभी भी फरार इस मामले में एसीबी पहले ही 10 आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है, जबकि तीन अन्य आरोपी अभी भी फरार हैं। फरार आरोपियों के खिलाफ स्टैंडिंग वारंट जारी किए गए हैं और उनकी संपत्तियों को जब्त करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। अधिकारियों का कहना है कि जल्द ही इन आरोपियों को भी गिरफ्तार करने के प्रयास तेज किए जाएंगे। 51 दिन की तलाश, 260 ठिकानों पर छापेमारी सुबोध अग्रवाल की गिरफ्तारी एसीबी के लिए आसान नहीं रही। उन्हें पकड़ने के लिए एजेंसी ने 51 दिनों तक लगातार अभियान चलाया। इस दौरान 18 टीमों का गठन किया गया, जिन्होंने देशभर में 260 ठिकानों पर छापेमारी की। बावजूद इसके, अग्रवाल लगातार एजेंसियों से बचते रहे और फरारी के दौरान 10 से अधिक ठिकाने बदलते रहे। दिल्ली से मुंबई तक छिपने की कोशिश जांच के दौरान एसीबी को इनपुट मिले थे कि सुबोध अग्रवाल दिल्ली, गुरुग्राम, फरीदाबाद और मुंबई में छिपते रहे। इन सभी स्थानों पर लगातार दबिश दी गई, लेकिन वे पकड़ में नहीं आए। आखिरकार जब एसीबी ने कोर्ट में संदिग्ध संपत्तियों की सूची पेश की और स्थायी वारंट जारी करवाए, साथ ही कोर्ट ने उन्हें भगोड़ा घोषित किया, तो अगले ही दिन वे सामने आ गए। भगोड़ा घोषित, संपत्ति कुर्की की तैयारी एसीबी की कार्रवाई के तहत रिटायर्ड आईएएस सुबोध अग्रवाल के साथ एसई मुकेश गोयल, जितेन्द्र शर्मा और निजी व्यक्ति संजीव गुप्ता को भी भगोड़ा घोषित किया गया था। हालांकि, सुबोध अग्रवाल अब गिरफ्त में आ चुके हैं, लेकिन बाकी तीन आरोपी अब भी फरार हैं। कोर्ट के आदेश के बाद इन सभी की संदिग्ध संपत्तियों को चिह्नित कर कुर्क करने की प्रक्रिया जारी है। रिमांड मिलने पर बड़े खुलासों की उम्मीद एसीबी अधिकारियों का कहना है कि यदि कोर्ट से रिमांड मिलती है तो पूछताछ के दौरान न केवल जेजेएम घोटाले की परतें खोली जाएंगी, बल्कि यह भी पता लगाया जाएगा कि फरारी के दौरान सुबोध अग्रवाल को किन लोगों ने मदद पहुंचाई। इसके अलावा टेंडर प्रक्रिया में शामिल अन्य अधिकारियों और ठेकेदारों की भूमिका भी जांच के दायरे में लाई जाएगी। लुक आउट नोटिस जारी, विदेश भागने का खतरा गौरतलब है कि एसीबी ने फरार आरोपियों के विदेश भागने की आशंका को देखते हुए उनके खिलाफ लुक आउट नोटिस भी जारी करवा दिए थे। एजेंसी का मानना है कि इस मामले में और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं। कोर्ट के फैसले पर टिकी नजरें फिलहाल, सभी की नजरें कोर्ट के फैसले पर टिकी हैं। यदि एसीबी को रिमांड मिलती है, तो आने वाले दिनों में जेजेएम घोटाले से जुड़े कई अहम राज खुलने की संभावना है।

मनोहर थाना में जनसंवाद यात्रा, 126 करोड़ की योजनाओं का शिलान्यास

झालावाड़ राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री Vasundhara Raje ने गुरुवार को मनोहर थाना कस्बे में जनसंवाद कार्यक्रम के दौरान एक भावुक बयान देकर सभी को चौंका दिया। लोगों की समस्याएं सुनते हुए उन्होंने कहा “मेरा तो खुद का चला गया, मैं अपने आपको नहीं बचा सकी, तो तुम्हारे लिए क्या करूं?” उनके इस बयान ने सभा में मौजूद लोगों के बीच गहरी संवेदना पैदा कर दी। जनता की समस्याओं पर खुलकर बोलीं जनसंवाद के दौरान स्थानीय लोग अपनी समस्याएं लेकर उनके पास पहुंचे। किसी ने मकान नहीं मिलने की शिकायत की, तो किसी ने पेंशन और मुआवजे में देरी का मुद्दा उठाया। इस पर राजे ने कहा कि जीवन में ऐसी परेशानियां आती रहती हैं और हर परिवार इन हालातों से गुजरता है। निजी दर्द का किया जिक्र राजे ने अपने व्यक्तिगत अनुभव साझा करते हुए कहा लोग कहते हैं आपका तो सब ठीक है, हमें बचा लीजिए… लेकिन मैं खुद को नहीं बचा सकी, तो आपको कैसे बचाऊं?” उनके इस बयान ने कार्यक्रम को भावनात्मक मोड़ दे दिया और लोगों के साथ उनका जुड़ाव और गहरा नजर आया। जनसंवाद यात्रा के चौथे चरण की शुरुआत इस दौरान Dushyant Singh भी उनके साथ मौजूद रहे। मां-बेटे की जोड़ी ने ‘जनसंवाद यात्रा’ के चौथे चरण की शुरुआत कामखेड़ा बालाजी धाम से की। यात्रा शुरू करने से पहले दोनों नेताओं ने मंदिर में पूजा-अर्चना की और हनुमान चालीसा का पाठ किया। यात्रा को बताया चुनौतीपूर्ण सभा को संबोधित करते हुए राजे ने कहा कि यह यात्रा आसान नहीं है, लेकिन जनता का प्यार ही उनकी ताकत है। उन्होंने बताया कि पहले तीन चरणों में भी लोगों का जबरदस्त समर्थन मिला और उम्मीद से ज्यादा भीड़ जुटी। दुष्यंत सिंह की तारीफ राजे ने अपने बेटे की तारीफ करते हुए कहा इन्होंने तय किया कि ये अकेले चलेंगे, क्योंकि इन्हें पता है कि ये लोगों के लिए काम करते हैं।” उन्होंने कहा कि लोग उन्हें अपना मानते हैं, यही उनकी सबसे बड़ी ताकत है। 35 साल का रिश्ता बताया राजे ने झालावाड़ और बारां की जनता के साथ अपने 35 साल पुराने संबंधों का जिक्र करते हुए कहा कि यह रिश्ता सिर्फ राजनीति का नहीं, बल्कि परिवार जैसा है। उन्होंने कहा कि उनके सामने कई पीढ़ियां बड़ी हो चुकी हैं। दुष्यंत सिंह का आभार संदेश दुष्यंत सिंह ने जनता का धन्यवाद करते हुए कहा कि सफर में धूप और मुश्किलें जरूर आती हैं, लेकिन लोगों का प्यार उन्हें आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है। उन्होंने कहा कि जनता के साथ से क्षेत्र का विकास और तेज होगा। 126 करोड़ की योजनाओं का शिलान्यास कार्यक्रम के दौरान 126 करोड़ रुपए की लागत वाली 10 सिंचाई परियोजनाओं का शिलान्यास किया गया। इससे क्षेत्र में कृषि और पानी की व्यवस्था को मजबूती मिलने की उम्मीद जताई गई। महिलाओं को योजनाओं का लाभ ‘लखपति दीदी योजना’ के तहत महिलाओं को टैबलेट वितरित किए गए और कस्टम हायरिंग योजना के तहत एक महिला को ट्रैक्टर की चाबी सौंपी गई। इससे महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देने का संदेश दिया गया। स्थानीय नेताओं की मौजूदगी कार्यक्रम में मनोहर थाना विधायक गोविंद रानीपुरिया, डाग विधायक कालूराम मेघवाल, जिला अध्यक्ष हर्षवर्धन शर्मा और पूर्व जिला अध्यक्ष संजय जैन सहित कई भाजपा नेता और कार्यकर्ता मौजूद रहे। भावनाओं और राजनीति का संगम जनसंवाद यात्रा का यह चरण जहां राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण रहा, वहीं वसुंधरा राजे के भावुक बयान ने इसे मानवीय संवेदनाओं से भी जोड़ दिया। उनके शब्दों ने यह दिखाया कि राजनीति के मंच पर भी व्यक्तिगत अनुभव लोगों के दिलों को छू जाते हैं।

कामखेड़ा बालाजी मंदिर पहुंचीं वसुंधरा राजे, सांसद दुष्यंत सिंह की पदयात्रा को दिखाई हरी झंडी और कई विकास कार्यों का किया उद्घाटन

  झालावाड़ राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे गुरुवार को झालावाड़ जिले के मनोहरथाना क्षेत्र पहुंचीं, जहां उन्होंने कामखेड़ा बालाजी मंदिर में पूजा-अर्चना की, पदयात्रा को हरी झंडी दिखाई और पर्यटन से जुड़ी कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं का उद्घाटन किया। इस दौरान उनके एक बयान ने राजनीतिक हलकों में चर्चा भी तेज कर दी है। पदयात्रा को लेकर क्या बोलीं वसुंधरा राजे कामखेड़ा में आयोजित पदयात्रा को लेकर वसुंधरा राजे ने कहा कि लोग उनसे पूछ रहे हैं कि जब चुनाव नहीं है, तो पदयात्राएं क्यों की जा रही हैं। उन्होंने कहा कि पदयात्रा से आमजन के करीब जाने और उनकी छोटी-छोटी समस्याएं जानने का मौका मिलता है। उन्होंने बताया कि वे पहले भी बस यात्राएं कर चुकी हैं और यह उनकी चौथे चरण की यात्रा है। उन्होंने कार्यकर्ताओं से कहा कि यात्रा के दौरान खान-पान का ध्यान रखें, कोई बीमार न पड़े और जो भी समस्याएं सामने आएंगी, उनका समाधान प्रशासन के साथ मिलकर किया जाएगा। कामखेड़ा बालाजी मंदिर में पूजा, पदयात्रा को दिखाई हरी झंडी वसुंधरा राजे मनोहरथाना स्थित प्रसिद्ध कामखेड़ा बालाजी मंदिर पहुंचीं, जहां उन्होंने विधिवत पूजा-अर्चना कर प्रदेश और क्षेत्र की खुशहाली की कामना की। मंदिर पहुंचने पर स्थानीय जनप्रतिनिधियों, भाजपा कार्यकर्ताओं और श्रद्धालुओं ने उनका जोरदार स्वागत किया। पूजा के बाद उन्होंने जनसभा को संबोधित किया और अपने सांसद पुत्र दुष्यंत सिंह की पदयात्रा को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस दौरान क्षेत्र में उत्साह का माहौल देखने को मिला। विकास कार्यों का किया जिक्र, बदली क्षेत्र की तस्वीर अपने संबोधन में वसुंधरा राजे ने केंद्र और राज्य की डबल इंजन सरकार का उल्लेख करते हुए क्षेत्र में हुए विकास कार्यों को गिनाया। उन्होंने कहा कि पहले मनोहरथाना पहुंचने में पूरा दिन लग जाता था, लेकिन अब सड़कों और सुविधाओं में सुधार के कारण क्षेत्र की तस्वीर पूरी तरह बदल चुकी है। उन्होंने कहा कि मनोहरथाना अब पिछड़ा क्षेत्र नहीं, बल्कि तेजी से विकास करने वाला इलाका बन गया है। कामखेड़ा बालाजी मंदिर के विकास पर जताई खुशी उन्होंने कहा कि जब वे पहली बार मंदिर आई थीं, तब केवल एक चबूतरे पर मूर्ति थी, लेकिन आज मंदिर भव्य स्वरूप ले चुका है और देशभर से श्रद्धालु यहां पहुंच रहे हैं। इस मौके पर उन्होंने मनोहरथाना क्षेत्र में कई विकास योजनाओं का शिलान्यास और लोकार्पण भी किया। कार्यक्रम में विधायक, भाजपा पदाधिकारी और बड़ी संख्या में आमजन मौजूद रहे। बयान पर छिड़ी चर्चा दोपहर बाद पदयात्रा के दौरान दिए गए एक बयान को लेकर वसुंधरा राजे चर्चा में आ गईं। सभा को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि छोटे-मोटे काम होते रहते हैं, किसी को घर नहीं मिल रहा, किसी को पेंशन या मुआवजा नहीं मिल रहा। लोग उनसे शिकायत करते हैं, तो उन्होंने कहा कि “मेरे साथ भी ऐसा हुआ, मैं अपने लिए कुछ नहीं कर सकी, तो तुम्हारे लिए क्या करूं।” उन्होंने कहा कि “मेरा चला गया, मैं अपने आप को नहीं बचा सकी और लोग कहते हैं कि आप हमें बचा लीजिए।” इस बयान के बाद राजनीतिक हलकों में अलग-अलग तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। गढ़ पैलेस में ‘गागरोन दुर्ग गैलरी’ और सेल्फी पॉइंट का उद्घाटन पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने झालावाड़ के ऐतिहासिक गढ़ पैलेस स्थित राजकीय म्यूजियम में “गागरोन दुर्ग गैलरी” और गढ़ पैलेस के सामने बनाए गए आकर्षक “सेल्फी पॉइंट” का फीता काटकर उद्घाटन किया। इस दौरान उन्होंने खुद बैठकर सेल्फी भी ली। उन्होंने कहा कि झालावाड़ ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और प्राकृतिक धरोहरों से समृद्ध जिला है और इसे पर्यटन मानचित्र पर मजबूत पहचान दिलाना जरूरी है। पर्यटन को बढ़ावा देने पर जोर उन्होंने कहा कि “गागरोन दुर्ग गैलरी” जैसे प्रयास स्थानीय विरासत को संरक्षित करेंगे और देश-विदेश से पर्यटकों को आकर्षित करेंगे। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार पर्यटन सुविधाओं के विस्तार और स्थानीय कला-संस्कृति को आधुनिक माध्यमों से प्रस्तुत करने पर काम कर रही है, ताकि युवा पीढ़ी अपनी विरासत से जुड़ सके। पर्यटन से रोजगार बढ़ेगा, महिलाओं की अहम भूमिका वसुंधरा राजे ने कहा कि झालावाड़ में पर्यटन को आगे बढ़ाने में सभी लोग सहयोग कर रहे हैं, खासकर महिलाएं भी इसमें भागीदारी निभा रही हैं। उन्होंने कहा कि पर्यटन का मतलब सिर्फ घूमना नहीं, बल्कि इससे रोजगार और नौकरी के अवसर भी बढ़ते हैं। उन्होंने कहा कि झालावाड़ की ऐतिहासिक धरोहरों को देखने के लिए दूर-दूर से लोग यहां आते हैं। गागरोन दुर्ग गैलरी: इतिहास को मिला नया रूप जिला कलेक्टर अजय सिंह राठौड़ ने बताया कि पंच गौरव योजना के तहत राजकीय संग्रहालय में “गागरोन दुर्ग गैलरी” विकसित की गई है। इस गैलरी में गागरोन दुर्ग के प्रमुख स्थलों जैसे गणेश पोल, संत मिट्ठेशाह की दरगाह, नक्कारखाने का द्वार, लाल दरवाजा, जौहर कुंड, रानियों का महल, द्वारकाधीश मंदिर, भैरवपोल, कटार देव की छतरी, अचलदास खींची का खांडा, जल संरचनाएं, मधुसूदन मंदिर, खींची राजाओं का महल, कृष्ण द्वार, राम बुर्ज, अंधेरी बावड़ी और गणगौर घाट की जानकारी और चित्र प्रदर्शित किए गए हैं। गैलरी का मुख्य आकर्षण बीच में बना गागरोन दुर्ग का भव्य मॉडल है, जो पर्यटकों को किले के अंदर होने जैसा अनुभव देता है।

हाथियों की शाही दावत और महावतों का सम्मान, जयपुर में अनंत अंबानी के जन्मदिन पर पशु प्रेम का दिखा अनोखा नजारा

जयपुर जयपुर में हाथी गांव में उद्योगपति अनंत अंबानी का जन्मदिन इस बार बेहद अनोखे अंदाज में मनाया गया। इस खास मौके पर हाथियों ने 2.5 फीट ऊंचा केक काटा और 3000 किलो फलों की भव्य दावत का आनंद लिया। कार्यक्रम ने न केवल उत्साह फैलाया बल्कि पशु प्रेम और संवेदनशीलता का संदेश भी दिया। हाथियों ने फलों से बने केक काटे जन्मदिन समारोह में हाथी बाबू, हथिनी पुष्पा और चंदा ने मिलकर फलों से बने केक को काटा, जिसे देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग और पशु प्रेमी उपस्थित थे। इस केक को विशेष रूप से हाथियों की सुरक्षा और स्वास्थ्य का ध्यान रखते हुए तैयार किया गया था। 3 हजार किलो फल की भव्य दावत कार्यक्रम में हाथियों के लिए विशेष बुफे भी सजाया गया, जिसमें केले, सेब, पपीता, गन्ना, गुड़ और हरा चारा शामिल था। लगभग 3000 किलो फल और पोषक आहार का आनंद हाथियों ने भरपूर लिया। हाथी गांव विकास समिति के अध्यक्ष शफीक बल्लू खान ने बताया कि अनंत अंबानी पशुओं के प्रति बेहद संवेदनशील हैं और उनका हाथी गांव से जुड़ाव इस आयोजन को और भी खास बनाता है। महावतों का भी हुआ सम्मान साथ ही हाथी महावतों का भी सम्मान किया गया। उन्हें राशन किट, जूते, कैप और अन्य उपयोगी वस्तुएं भेंट की गईं, जो उनके योगदान को सराहने का प्रतीक हैं। उपस्थित पशु प्रेमियों ने इस आयोजन को प्रेरणादायक बताया और कहा कि बेजुबान जानवरों के साथ खुशियां साझा करना समाज में सकारात्मक संदेश फैलाता है और पशु संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाता है। कुल मिलाकर यह समारोह केवल जन्मदिन नहीं बल्कि पशु प्रेम, सेवा और मानवीय संवेदनाओं का जीवंत उदाहरण बनकर उभरा।  

विवाह कार्ड दिखाने पर तुरंत मिलेंगे कमर्शियल गैस सिलिंडर, रसद विभाग ने प्रवासियों के लिए भी शुरू की 5 किलो वाले छोटे सिलिंडर की सुविधा

सिरोही अमेरिका, ईरान और इजरायल के बीच तनाव के चलते उत्पन्न गैस संकट के बीच सिरोही जिले से राहत भरी खबर सामने आई है। रसद विभाग ने प्रवासी श्रमिकों और शादी वाले परिवारों को ध्यान में रखते हुए सिलिंडर उपलब्ध कराने के लिए विशेष व्यवस्था लागू की है, जिससे लोगों को बड़ी राहत मिलेगी। प्रवासी श्रमिकों को मिलेगा 5 किलो एफटीएल सिलिंडर प्राप्त जानकारी के अनुसार, शासन सचिव (खाद्य) अंबरीष कुमार ने निर्देश जारी किए हैं कि प्रवासी श्रमिकों को 5 किलोग्राम एफटीएल सिलिंडर उपलब्ध कराया जाए। इसमें साफ कहा गया है कि ऑयल मार्केटिंग कंपनियां केवल प्रवासी श्रमिकों को ही यह 5 किलो एफटीएल सिलेंडर उपलब्ध कराएं और इसकी जानकारी नियमित रूप से विभाग को भेजें। शादी वाले परिवारों को मिलेंगे अतिरिक्त कामर्शियल सिलिंडर आगामी दिनों में शादियों का सीजन शुरू होने वाला है। ऐसे में आयोजक परिवारों को सिलिंडर की कमी का सामना न करना पड़े, इसके लिए रसद विभाग ने विशेष योजना बनाई है। इस योजना के तहत शहरी क्षेत्रों में आयोजक परिवारों को 3 और ग्रामीण क्षेत्रों में 2 वाणिज्यिक (कमर्शियल) सिलिंडर उपलब्ध कराए जाएंगे। विवाह कार्ड दिखाना होगा जरूरी सिलिंडर प्राप्त करने के लिए उपभोक्ताओं को विवाह का कार्ड जिला रसद अधिकारी को दिखाना होगा। इसके बाद आवश्यकता के अनुसार सिलिंडर उपलब्ध कराया जाएगा। इस पूरी प्रक्रिया के लिए जिला रसद अधिकारी संबंधित सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों के जिला नोडल अधिकारियों के साथ समन्वय कर व्यवस्था सुनिश्चित करेंगे। वर्तमान में शहरी क्षेत्रों में एक बार बुकिंग के बाद दूसरी बुकिंग के लिए 21 दिन का इंतजार करना पड़ता है, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में यह अवधि 35 दिन है। इसके बावजूद भी लोगों को सिलिंडर मिलने में कई दिन लग जाते हैं, जिससे आम उपभोक्ताओं को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। अमेरिका, ईरान और इजरायल के बीच तनाव के कारण गैस आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका के बीच यह फैसला लोगों के लिए राहत लेकर आया है। खासकर प्रवासी श्रमिकों और शादी वाले परिवारों को इससे बड़ी सुविधा मिलेगी।  

रसद विभाग की बड़ी कार्रवाई, घरेलू सिलिंडरों से वाहनों में गैस भरने वाले गिरोह पर कसा शिकंजा

बांसवाड़ा राजस्थान के बांसवाड़ा शहर में रसद विभाग ने अवैध गैस रिफिलिंग के एक बड़े नेटवर्क का भंडाफोड़ किया है। रतलाम रोड स्थित एक गैरेज पर छापेमारी कर 18 गैस सिलिंडर जब्त किए गए। इनमें छह व्यावसायिक और 12 घरेलू सिलिंडर शामिल हैं। कुछ सिलिंडर पूरी तरह भरे हुए थे, जबकि कुछ आंशिक रूप से खाली पाए गए। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि यहां गैस सिलिंडरों से गैस निकालकर वाहनों में भरी जा रही थी, जो पूरी तरह गैरकानूनी है। इस कार्रवाई के बाद इलाके में हड़कंप मच गया है। मुखबिर से मिली सूचना रसद विभाग को इस अवैध कारोबार की सूचना एक मुखबिर के जरिए मिली थी। सूचना मिलते ही प्रवर्तन अधिकारी लालशंकर डामोर के नेतृत्व में टीम ने बिना देर किए गैरेज पर दबिश दी। तलाशी के दौरान गैराज से बड़ी संख्या में गैस सिलिंडर संदिग्ध स्थिति में पाए गए। गतिविधियों की पुष्टि होते ही टीम ने तत्काल सभी सिलिंडर जब्त कर लिए। मामले की जांच जारी रसद अधिकारी ओम प्रकाश जोतड़ ने बताया कि पूरे मामले की विस्तृत जांच जारी है और इस अवैध कारोबार में शामिल अन्य लोगों की पहचान की जा रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। विभाग ने आम नागरिकों से अपील की है कि यदि कहीं भी इस तरह की अवैध रिफिलिंग की जानकारी मिले तो तुरंत प्रशासन को सूचित करें।  

सीकर रोड पर जाम से फंसे VIP, लापरवाही पड़ गई भारी, पहली बार बड़े अधिकारियों पर गिरी गाज

जयपुर राजधानी जयपुर में 9 मार्च को आयोजित एक हाई-प्रोफाइल शादी समारोह अब पुलिस प्रशासन के लिए बड़ी परेशानी का कारण बन गया है। लाडनू से कांग्रेस विधायक मुकेश भाकर के विवाह समारोह के दौरान सीकर रोड पर लगे कई किलोमीटर लंबे ट्रैफिक जाम को लेकर पुलिस मुख्यालय ने सख्त रुख अपनाया है। इस मामले में एक आईपीएस अधिकारी समेत कुल 6 पुलिस अधिकारियों को जिम्मेदार मानते हुए उनसे स्पष्टीकरण मांगा गया है। बताया जा रहा है कि जयपुर पुलिस कमिश्नरेट की ओर से इस घटना को गंभीरता से लिया गया था और स्पेशल सीपी स्तर पर इसकी विस्तृत जांच करवाई गई। जांच रिपोर्ट पुलिस मुख्यालय को भेजे जाने के बाद विजिलेंस टीम ने संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी कर जवाब-तलब किया है। सूत्रों के मुताबिक, जवाब संतोषजनक नहीं मिलने पर इन अधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई भी की जा सकती है। शादी समारोह बना जाम की वजह जानकारी के अनुसार 9 मार्च को हरमाड़ा क्षेत्र में सीकर रोड स्थित एक रिसॉर्ट में विधायक मुकेश भाकर और आरजेएस अधिकारी कोमल मीणा का विवाह समारोह आयोजित हुआ था। इस समारोह में सत्ता और विपक्ष के कई बड़े नेता, वरिष्ठ ब्यूरोक्रेट्स और पुलिस के आला अधिकारी शामिल हुए थे। इसी दौरान कार्यक्रम स्थल के आसपास वाहनों का दबाव अचानक बढ़ गया, जिससे सीकर रोड पर लंबा ट्रैफिक जाम लग गया। हालात ऐसे हो गए कि कई किलोमीटर तक वाहन रेंगते नजर आए और आम लोगों के साथ-साथ कई वीआईपी मेहमान भी जाम में फंस गए। वायरलेस मैसेज के बावजूद नहीं खुला जाम सूत्रों के अनुसार, जाम की स्थिति को लेकर पुलिस कंट्रोल रूम और वायरलेस सेट पर लगातार संदेश प्रसारित किए जा रहे थे। बावजूद इसके, मौके पर ट्रैफिक व्यवस्था को सुचारू करने में काफी देरी हुई। कई वीआईपी को जाम से निकलने में लंबा समय लग गया, जिससे पुलिस व्यवस्था पर सवाल खड़े हुए। इस पूरे घटनाक्रम के बाद पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठे और मामले की जांच के आदेश दिए गए। स्पेशल कमिश्नर ने सौंपी जांच रिपोर्ट मामले की जांच स्पेशल कमिश्नर ओमप्रकाश को सौंपी गई थी। उन्होंने मौके की परिस्थितियों, ड्यूटी पर तैनात अधिकारियों की भूमिका और ट्रैफिक मैनेजमेंट की स्थिति का आकलन करते हुए विस्तृत रिपोर्ट पुलिस मुख्यालय को भेजी। रिपोर्ट में लापरवाही के बिंदुओं को चिन्हित किया गया, जिसके आधार पर विजिलेंस टीम ने कार्रवाई शुरू की है। इन अधिकारियों को माना गया जिम्मेदार पुलिस जांच में जिन अधिकारियों को प्राथमिक रूप से जिम्मेदार ठहराया गया है, उनमें एसीपी चोमू आईपीएस उषा यादव, एसीपी ट्रैफिक किशोर सिंह भदोरिया, ट्रैफिक इंस्पेक्टर मंजू चौधरी, संपत राज, नवरत्न धौलिया और हरमाड़ा थाना अधिकारी उदय सिंह शामिल हैं। इन सभी अधिकारियों से लिखित स्पष्टीकरण मांगा गया है और उनसे पूछा गया है कि ट्रैफिक प्रबंधन में चूक क्यों हुई। जांच के दौरान हुए तबादले गौरतलब है कि जांच प्रक्रिया के दौरान ही एसीपी चोमू उषा यादव का तबादला कर उन्हें हाड़ी रानी बटालियन में कमांडेंट नियुक्त किया गया है। इसके अलावा जयपुर के डीसीपी ट्रैफिक का भी ट्रांसफर किया जा चुका है। हालांकि इन तबादलों को नियमित प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा बताया जा रहा है, लेकिन इसे इस मामले से जोड़कर भी देखा जा रहा है। पहली बार उच्च अधिकारियों पर भी गिरी गाज सूत्रों के मुताबिक, यह पहला मामला है जब ट्रैफिक जाम जैसी स्थिति के लिए केवल निचले स्तर के कर्मचारियों ही नहीं, बल्कि उच्च अधिकारियों को भी जिम्मेदार ठहराया गया है। पुलिस मुख्यालय का यह कदम यह संकेत देता है कि अब ट्रैफिक प्रबंधन में किसी भी स्तर की लापरवाही को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा, चाहे वह किसी भी पद पर क्यों न हो। आगे क्या? अब सभी की नजर संबंधित अधिकारियों के जवाब पर टिकी हुई है। यदि स्पष्टीकरण संतोषजनक नहीं पाया जाता है, तो विभागीय कार्रवाई के तहत चार्जशीट, सस्पेंशन या अन्य अनुशासनात्मक कदम उठाए जा सकते हैं।

‘कचुम्बर’ और ‘ढापा’ जैसे नामों से मिलेगी मुक्ति, राजस्थान के सरकारी स्कूलों में बच्चों को मिलेगी नई पहचान

जयपुर राजस्थान में अब सिर्फ पढ़ाई ही नहीं, बच्चों की पहचान भी बदलेगी और वो भी सरकारी पहल के जरिए! जयपुर से आई इस खबर ने शिक्षा जगत के साथ-साथ आम लोगों में भी हलचल मचा दी है। क्या सरकार बच्चों के नाम तय करेगी? या ये एक सकारात्मक बदलाव की शुरुआत है? दरअसल, राजस्थान के शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने एक ऐसे अभियान की घोषणा की है, जिसने चर्चा और जिज्ञासा दोनों को जन्म दे दिया है। इस अभियान का नाम है ‘सार्थक नाम अभियान’। सुनने में यह पहल सरल लगती है, लेकिन इसके पीछे की सोच और असर कहीं ज्यादा गहरा है। नाम पर क्यों उठी ये पहल? मंत्री दिलावर के अनुसार, राज्य के कई ग्रामीण इलाकों में बच्चों के ऐसे नाम रख दिए जाते हैं जिनका कोई स्पष्ट अर्थ नहीं होता, या जो आगे चलकर बच्चे के लिए शर्मिंदगी का कारण बन सकते हैं। जैसे ‘कचुम्बर’, ‘ढापा’ जैसे नाम। सरकार का मानना है कि ऐसे नाम बच्चों में हीन भावना पैदा कर सकते हैं और उनके आत्मविश्वास को प्रभावित कर सकते हैं। इसी सोच के साथ अब शिक्षा विभाग एक कदम आगे बढ़ते हुए ऐसे बच्चों के लिए “सार्थक और सम्मानजनक” नाम सुझाएगा। कैसे चलेगा ‘सार्थक नाम अभियान’? इस योजना के तहत शिक्षा विभाग 2,000 से 3,000 अर्थपूर्ण नामों की एक सूची तैयार करेगा। इसके बाद स्कूलों के माध्यम से उन बच्चों की पहचान की जाएगी जिनके नाम को “अर्थहीन या असहज” माना जाता है। फिर शुरू होगा असली प्रोसेस अधिकारियों और शिक्षकों द्वारा माता-पिता से संवाद। उन्हें समझाया जाएगा कि उनके बच्चे के लिए एक बेहतर, अर्थपूर्ण नाम क्यों जरूरी है। हालांकि, अंतिम फैसला माता-पिता का ही रहेगा। क्या ये बदलाव आसान होगा? यहीं से कहानी में आता है असली ट्विस्ट। नाम सिर्फ एक पहचान नहीं, बल्कि परिवार, परंपरा और भावनाओं से जुड़ा होता है। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं क्या ग्रामीण परिवार अपने बच्चों के नाम बदलने के लिए तैयार होंगे? क्या यह पहल सामाजिक स्वीकृति हासिल कर पाएगी? सिर्फ नाम नहीं, शिक्षा व्यवस्था में भी बड़े बदलाव इस घोषणा के साथ ही शिक्षा मंत्री ने कई और बड़े ऐलान भी किए हर बच्चे का दाखिला सुनिश्चित: खानाबदोश (nomadic) समुदाय के बच्चों को बिना दस्तावेज के भी स्कूल में प्रवेश दिया जाएगा। टॉपर्स का सम्मान 2026 बोर्ड परीक्षा में अच्छे अंक लाने वाले छात्रों को उनके स्कूलों में सम्मानित किया जाएगा और उनकी उपलब्धियों को सोशल मीडिया व बैनर के जरिए प्रचारित किया जाएगा। एलुमनाई मीट की शुरुआत: इस साल से हर सरकारी स्कूल में वार्षिक एलुमनाई मीट होगी, ताकि पुराने छात्र स्कूल के विकास में योगदान दे सकें। प्रिंसिपल की जिम्मेदारी तय: सभी प्रिंसिपल्स को रोजाना क्लासरूम निरीक्षण का निर्देश दिया गया है। नशे पर सख्ती के संकेत: शिक्षा विभाग ऐसे कर्मचारियों की सूची तैयार करेगा जो तंबाकू, गुटखा या अन्य नशीले पदार्थों का सेवन करते हैं। बदलाव की शुरुआत या नई बहस? ‘सार्थक नाम अभियान’ एक तरफ बच्चों के आत्मसम्मान को मजबूत करने की कोशिश है, तो दूसरी तरफ यह समाज में एक नई बहस को भी जन्म दे रहा है क्या सरकार को व्यक्तिगत पहचान में दखल देना चाहिए? अब देखने वाली बात यह होगी कि यह अभियान जमीनी स्तर पर कितना सफल होता है और क्या वाकई बच्चों की पहचान को एक नई दिशा मिल पाती है या यह सिर्फ एक सरकारी पहल बनकर रह जाएगी। फिलहाल, राजस्थान में नाम को लेकर शुरू हुई यह नई कहानी आने वाले दिनों में बड़ा सामाजिक बदलाव भी ला सकती है।

बजट और सरकारी खर्च पर रहेगी पैनी नजर, जनलेखा और प्राक्कलन समितियों में पक्ष-विपक्ष के दिग्गजों को मिली जगह

जयपुर विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने चार प्रमुख वित्तीय समितियों का गठन किया है। इनमें जनलेखा समिति, प्राक्कलन समिति ‘क’, प्राक्कलन समिति ‘ख’ और राजकीय उपक्रम समिति शामिल हैं। इन सभी समितियों का कार्यकाल 31 मार्च 2027 तक रहेगा। जनलेखा समिति में अनिता भदेल, अर्जुन लाल जीनगर, प्रमोद जैन “भाया”, डॉ. विश्वनाथ मेघवाल, अजय सिंह, रामकेश, चन्द्रभान सिंह चौहान, डॉ. सुरेश धाकड़, रफीक खान, रोहित बौहरा, गुरुवीर सिंह और गोपाल शर्मा को सदस्य बनाया गया है। प्राक्कलन समिति ‘क’ में प्रताप सिंह सिंघवी, शांति धारीवाल, समाराम, हरेंद्र मिर्धा, छोटूसिंह, अर्जुन लाल, जीवाराम चौधरी, सुरेश मोदी, अमित चाचाण, मनोज कुमार (सादुलपुर) और विश्वराज सिंह मेवाड़ को शामिल किया गया है। प्राक्कलन समिति ‘ख’ में पुष्पेंद्र सिंह, शंकरसिंह रावत, गोविंद सिंह डोटासरा, हमीर सिंह भायल, पब्बाराम विश्नोई, समरजीत सिंह, मनोज कुमार (सुजानगढ़), अमीन कागजी, डॉ. सुभाष गर्ग और अरुण चौधरी को सदस्य नियुक्त किया गया है। वहीं राजकीय उपक्रम समिति में डॉ. दयाराम परमार, श्रवण कुमार, संजीव कुमार, हरिमोहन शर्मा, रीटा चौधरी, यूनुस खान, गोपाल लाल शर्मा, शत्रुधन गौतम, गोरधन, ललित मीना, अनिल कुमार शर्मा और डॉ. शैलेश सिंह को सदस्य के रूप में मनोनीत किया गया है। इस समितियों के क्या काम होते हैं- 1. जनलेखा समिति (Public Accounts Committee – PAC)     सरकार के खर्च की जांच करती है     CAG (कैग) की रिपोर्टों की समीक्षा करती है     यह देखती है कि पैसा नियमों के अनुसार खर्च हुआ या नहीं     गड़बड़ी मिलने पर जवाबदेही तय करती है 2. प्राक्कलन समिति ‘क’ और ‘ख’ (Estimates Committees)     सरकारी विभागों के बजट (अनुमान) की जांच करती हैं     यह सुझाव देती हैं कि खर्च कैसे कम और प्रभावी हो सकता है     योजनाओं की उपयोगिता और कार्यक्षमता का मूल्यांकन करती हैं     सरकार को सुधार के लिए सिफारिशें देती हैं       3. राजकीय उपक्रम समिति (Committee on Public Undertakings)     सरकारी कंपनियों और उपक्रमों के कामकाज की समीक्षा करती है     उनके वित्तीय प्रदर्शन और प्रबंधन की जांच करती है     घाटे या अनियमितताओं पर सवाल उठाती है     सुधार और बेहतर संचालन के सुझाव देती है