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रामगंजमंडी स्टेशन पर बढ़ी सतर्कता: बाबा बागेश्वर कथा को लेकर विशेष रेलवे व्यवस्थाएं लागू

कोटा बाबा बागेश्वर जी की कथा आयोजन के दौरान 23 से 25 जनवरी के बीच रामगंजमंडी रेलवे स्टेशन पर श्रद्धालुओं की संभावित भीड़ को ध्यान में रखते हुए रेलवे प्रशासन ने विशेष भीड़ प्रबंधन व्यवस्था लागू की है। इस व्यवस्था का उद्देश्य यात्रियों की सुरक्षा एवं सुविधा सुनिश्चित करना है। वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक सौरभ जैन ने बताया कि कथा अवधि के दौरान स्टेशन पर यात्रियों की आवाजाही को सुव्यवस्थित रखने के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। उन्होंने कहा कि ट्रेनों के निर्धारित प्लेटफॉर्म में किसी प्रकार का परिवर्तन नहीं किया जाएगा, ताकि यात्रियों में भ्रम की स्थिति उत्पन्न न हो। सौरभ जैन ने यह भी बताया कि यात्रियों को सही एवं समय पर जानकारी उपलब्ध कराने के लिए सार्वजनिक उद्घोषणा प्रणाली के माध्यम से नियमित एवं स्पष्ट घोषणाएं की जाएंगी। साथ ही स्टेशन परिसर में प्रवेश एवं निकास के दौरान भीड़ के प्रवाह को नियंत्रित रखने के लिए आवश्यक व्यवस्थाएं सक्रिय रखी जाएंगी। रेलवे अधिकारियों ने बताया कि स्टेशन पर तैनात टिकट जांच स्टाफ एवं रेलवे सुरक्षा बल के जवान यात्रियों एवं श्रद्धालुओं को मार्गदर्शन प्रदान करेंगे तथा भीड़ को नियंत्रित एवं सुव्यवस्थित रखने में सक्रिय भूमिका निभाएंगे। इसके साथ ही वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा स्टेशन परिसर में भीड़ की स्थिति पर लगातार निगरानी रखी जाएगी, ताकि आवश्यकता पड़ने पर त्वरित निर्णय लिए जा सकें। स्टेशन परिसर में सुरक्षा, सफाई, प्रकाश व्यवस्था, पार्किंग सुविधा, टिकट वेंडिंग मशीनों तथा बुकिंग खिड़कियों के सुचारु संचालन को सुनिश्चित किया गया है, जिससे श्रद्धालुओं एवं नियमित यात्रियों को किसी प्रकार की असुविधा न हो।

विधायिका तभी मजबूत जब जनता भरोसा करे और जवाबदेह हो– वासुदेव देवनानी

जयपुर राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने लखनऊ में 86वें अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारियों के सम्मेलन में मंगलवार को जनता के प्रति विधायिका की जवाबदेही विषय पर विधायिका को स्वयं का आत्म मूल्यांकन करने लोक और तंत्र के सेतु को सतत और सशक्त बनाने, नई चुनौतियों से मुकाबले के साथ भविष्य को प्रभावशाली बनाने के लिए दूरदर्शी उद्‌बोधन दिया। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की सबसे मजबूत नींव जनता का अडिग विश्वास होता है। यह विश्वास जनता से निरंतर संवाद, पारदर्शिता और उत्तरदायित्वपूर्ण आचरण से ही कायम रह सकता है। देवनानी ने विधायिका को भारतीय लोकतंत्र की धडकन बताया है। विधायी जनता को आकांक्षाओं का दर्पण:- देवनानी ने कहा कि विधायिका कोई स्वतंत्र सता-केंद्र नहीं, बल्कि जनता की आकांक्षाओं और अपेक्षाओं का दर्पण है। सदन में बैठने वाला प्रत्येक सदस्य केवल स्वयं का नहीं, बल्कि लाखों नागरिकों की सामूहिक आवाज का प्रतिनिधित्व करता है। उन्होंने महात्मा गांधी के विचारों का उल्लेख करते हुए कहा कि लोकतंत्र की कसौटी यह है कि समाज के अंतिम व्यक्ति तक न्याय और अधिकार पहुंचे। उन्होंने स्पष्ट किया कि जवाबदेही केवल चुनाव के समय नहीं, बल्कि सदन के प्रत्येक सत्र, प्रत्येक बहस, प्रत्येक प्रश्न और प्रत्येक विधायी हस्तक्षेप में दिखाई देनी चाहिए। एक जीवंत लोकतंत्र वही है जिसमें विधायिका जनता की समस्याओं को केवल सुनती ही नहीं, बल्कि उन्हें गहराई से महसूस कर समाधान के लिए प्रतिबद्ध रहती है। श्री देवनानी ने कहा कि संवैधानिक नैतिकता केवल कोगों पर अंकित शब्द नहीं है, बल्कि यह हमारे रोजमर्रा के विधायी कार्यों का हिस्सा होनी चाहिए। जब हम सदन में बैठते हैं, तो हमें संविधान के ट्रस्टी के रूप में व्यवहार करना चाहिए, क्योंकि हमारे हाथ में जो शक्ति है, वह जनता द्वारा दी गई पवित्र धरोहर है। अल्पमत की आवाज को दिया सम्मान, सदन की श्रेष्ठता का पैमाना:- विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने कहा कि सदन की श्रेष्ठता बहुमत की शक्ति से नहीं, बल्कि अल्पमत की आवाज को दिए गए सम्मान से तय होती है। असहमति और स्वस्थ आलोचना लोकतंत्र की मजबूती का प्रतीक हैं। उन्होंने कहा कि संवाद और वाद-विवाद ही विधायिका की जवाबदेही के मजबूत स्तंभ हैं। देवनानी ने कार्यपालिका पर प्रभावी नियंत्रण को विधायिका का प्रमुख संवैधानिक दायित्व बताया। उन्होंने कहा कि जनता के कर से एकत्रित प्रत्येक रुपये का उपयोग जनकल्याण में हो, यह सुनिश्चित करना विधायिका का परम कर्तव्य है। प्रश्नकाल, ध्यानाकर्षण प्रस्ताव और शून्यकाल को उन्होंने जनता की आवाज का सशक्त माध्यम बताया। विधायी समितियां लघु सदन है:- देवनानी ने कहा कि विधायी समितियों की भूमिका को अत्यंत महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि समितियां 'लघु सदन" के रूप में कार्य करती हैं, जहां गहन, निष्पक्ष और तकनीकी समीक्षा संभव होती है। समिति प्रतिवेदन केवल फाड़ों तक सीमित न रहें, बल्कि उन पर सदन में चर्चा हो और सरकार द्वारा की गई कार्रवाई का विवरण अनिवार्य रूप से प्रस्तुत किया जाए। उन्होंने बताया कि राजस्थान विधानसभा ने लोक लेखा समिति और प्राक्कलन समिति के माध्यम से वित्तीय अनुशासन को सुदृढ़ किया है तथा यह सुनिश्चित किया है कि समितियों की रिपोर्ट पर समयबद्ध और प्रभावी कार्रवाई हो। साथ ही सदस्यों के प्रशिक्षण, अभिमुखीकरण कार्यक्रम, बाल विधानसभा और यूथ पार्लियामेंट जैसी पहलों से भविष्य की पीढ़ी को लोकतांत्रिक मूल्यों से जोड़ा जा रहा है। आज डिजिटल जवाबदेही का युग:- राजस्थान विधानसभा ‌द्वारा उठाए गए डिजिटल नवाचारों के ऐतिहासिक कदर्मों का उल्लेख करते हुए देवनानी ने कहा कि आज डिजिटल जवाबदेही का युग है। ऑनलाइन प्रक्रियाओं, पेपरलेस व्यवस्था, यूट्यूब पर कार्यवाही के सजीव प्रसारण और राजस्थान विधानसभा के डिजिटल म्यूजियम के माध्यम से पारदर्शिता को नई ऊँचाइयों पर ले जाया गया है। यह एक प्रकार का 'सोशल ऑडिट है, जो सदन को निरंतर सजग बनाए रखता है। विधायी प्रभाव मूल्याकंन:- देवनानी ने लेजिस्लेटिव इम्पैक्ट असेसमेंट और पोस्ट-लेजिस्लेटिव ऑडिट की आवश्यकता पर भी बल दिया, ताकि कानून बनने के बाद उनके वास्तविक प्रभाव का आकलन किया जा सके। उन्होंने कहा कि जनता को नीति-निर्माण की प्रक्रिया में सहभागी बनाना ही सच्ची जवाबदेही का उच्चतम रूप है। आसन की भूमिका महत्वपूर्ण:- पीठासीन अधिकारियों की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि अध्यक्ष का आसन केवल एक रेफरी का नहीं, बल्कि संविधान के संरक्षक का होता है। नियर्मा की व्याख्या इस प्रकार होनी चाहिए कि वह चर्चा को रोकने वाली नहीं, बल्कि उसे विस्तार देने वाली हो। विधायिका को स्वयं का आत्म मूल्यांकन करना होगा, इस परिप्रेक्ष्य में उन्होंने सदनों में सदस्यों की उपस्थिति विधेयकों के विविध पहलुओं पर चर्चा और सदन के भीतर संसदीय मर्यादाओं के पालन को विचारणीय बताया। विधायिका वह पथ है जो राष्ट्र को सशक्त बनाता है:- देवनानी ने कहा कि लोकतंत्र कोई अंतिम मंजिल नहीं, बल्कि एक निरंतर यात्रा है और इस यात्रा में विधायिका जनता के विश्वास के ईंधन से चलती है। राजस्थान विधानसभा लोकतांत्रिक मूल्यों, विधायी मर्यादाओं और जनता के विश्वास की रक्षा के अपने संकल्प पर सदैव दृढ़ रहेगी। उन्होंने सम्मेलन के सफल आयोजन के लिए उत्तर प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना को बधाई दी और सभी प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया।

मतदाता सूची विवाद ने पकड़ा तूल, पूर्व पार्षद की शिकायत पर पुलिस में मामला दर्ज

जयपुर राजस्थान में चल रही विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया के दौरान आदर्श नगर विधानसभा क्षेत्र के वार्ड 89 में मतदाता सूची से नाम हटाने की कथित साजिश का मामला सामने आया है। पूर्व पार्षद अकबरद्दीन ने पुलिस थाना लालकोठी (जयपुर पूर्व) में शिकायत दर्ज कराते हुए आरोप लगाया कि उनके नाम को वोटर लिस्ट से हटाने के लिए फर्जी फॉर्म-7 भरकर झूठी घोषणा की गई। अकबरद्दीन ने बताया कि उनका नाम वार्ड 89, बूथ संख्या 107 (सांगानेरी गेट) की मतदाता सूची में EPIC नंबर MCM 3202645 के साथ दर्ज है। उन्होंने SIR प्रक्रिया के तहत नियमानुसार बीएलओ द्वारा दिया गया परिगणना प्रपत्र भी जमा कराया था। पूर्व पार्षद के अनुसार, 15 जनवरी को जब वे बूथ पर पहुंचे तो बीएलओ पुष्पा ने उन्हें बताया कि अशोक नामक व्यक्ति ने उनके नाम, मकान नंबर और EPIC नंबर का उपयोग कर फर्जी फॉर्म-7 जमा कराया। फॉर्म में झूठी घोषणा की गई कि अकबरद्दीन स्थायी रूप से स्थानांतरित हैं, जबकि वे जन्म से उसी पते पर अपने परिवार के साथ निवास कर रहे हैं। अकबरद्दीन ने बताया कि उनका मकान संख्या 188 उनके पिता द्वारा 50 वर्ष पहले खरीदा गया था और वर्षों तक वही उनका पार्षद कार्यालय भी रहा। इसके बावजूद उन्हें उनके संवैधानिक मताधिकार से वंचित करने का प्रयास किया गया। शिकायत में आरोप लगाया गया कि फॉर्म-7 भरने वाला अशोक, भाजपा BLA सुनील का भाई है और दोनों ने मिलकर आपराधिक षड्यंत्र रचा। आरोप है कि बूथ संख्या 107 पर दर्जनों फर्जी फॉर्म-7 जमा कराए गए। पूर्व पार्षद ने कहा कि आरोपियों ने जानबूझकर बीएलओ को मिथ्या सूचना और साक्ष्य दिए, जो लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 और भारतीय दंड संहिता की कई धाराओं के तहत दंडनीय है। उन्होंने पुलिस से मांग की कि दोषियों के खिलाफ तत्काल मामला दर्ज कर सख्त कार्रवाई की जाए।

राजस्थान के करौली में कुख्यात सटोरिए रशीद के घर पर चला बुलडोजर

करौली. राजस्थान में करौली के सट्टा किंग एवं मोटरसाइकिल रैली पर हुए पथराव और दंगे के मुख्य आरोपी, पूर्व सभापति रशीदा खातून के पुत्र अमीनुद्दीन खान की गिरफ्तारी के बाद मंगलवार को पुलिस ने भारी जाप्ते के साथ उसके अंबेडकर सर्किल क्षेत्र स्थित अवैध भवन और अवैध निर्माण पर बुलडोजर चलवाया। कई रास्तों को बंद किया प्राप्त जानकारी के अनुसार, कार्रवाई से पहले नजदीकी स्कूल में छुट्टी करवाकर आसपास की दुकानों एवं भवनों को एहतियातन खाली कराया गया। सुरक्षा के मद्देनजर पूरे शहर को पुलिस छावनी में तब्दील करते हुए मेला गेट, शिकारगंज सहित आसपास के कई रास्तों को बंद किया गया। शहर के मुख्य चौराहों, तिराहों और बाजार क्षेत्रों में करीब 500 पुलिसकर्मी तैनात किए गए। कई थानों का पुलिस बल मौजूद अधिकारियों ने बताया कि नगर परिषद करौली ने जांच के दौरान भवन निर्माण में अनियमितताएं पाई थीं, जिसके बाद पट्टा और निर्माण स्वीकृति को विधिवत निरस्त कर दिया गया था। पट्टा रद्द होने के बाद प्रशासन ने अवैध निर्माण हटाने की प्रक्रिया शुरू की। मौके पर अतिरिक्त जिला कलक्टर हेमराज परिडवाल, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक गुमना राम, उपखंड अधिकारी प्रेमराज मीणा और पुलिस उपाधीक्षक अनुज शुभम सहित कई थानों का पुलिस बल मौजूद रहा।

बजट सत्र से पहले देवनानी ने गहलोत और जूली को दिया खरा जवाब

जयपुर. राजस्थान विधानसभा के 28 जनवरी से शुरू हो रहे बजट सत्र से पहले प्रश्न लगाने, मंत्रियों के जवाब और सदन की कार्यवाही से जुड़े नियमों को लेकर विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने रविवार को प्रेस वार्ता की। उन्होंने दावा किया है कि विधानसभा सचिवालय की ओर से अब जारी किए गए बुलेटिन में वही प्रावधान हैं, जो वर्ष 2020 में तत्कालीन विधानसभा अध्यक्ष सी.पी. जोशी के कार्यकाल में जारी किए गए थे। देवनानी ने कहा कि इन नियमों के बारे में विस्तृत जानकारी वे सदन के भीतर ही देंगे। वासुदेव देवनानी ने पूर्व सीएम अशोक गहलोत और नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली के बयानों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि विधानसभा से जारी होते आ रहे बुलेटिन को यदि वे पढ़ते, तो शायद इस तरह के बयान नहीं आते। उन्होंने कहा कि यह धारणा बनाई जा रही है कि ये नियम पहली बार लागू हुए हैं, जबकि ऐसा नहीं है। वर्ष 2020 में जारी बुलेटिन संख्या-20 का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि मौजूदा बुलेटिन में कोई नया प्रावधान नहीं जोड़ा गया है। विस्तारित प्रश्न न हों और पांच साल से अधिक पुरानी जानकारी संभवतः नहीं मांगी जाए ये सभी नियम पहले से ही लागू हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि 2020 के बाद अब 2026 में ही इन नियमों पर आपत्ति क्यों जताई जा रही है, जबकि जूली उस समय की सरकार में कैबिनेट मंत्री थे। 90 से 95 फीसदी सवालों के जवाब समय पर मिल रहे वासुदेव देवनानी ने कहा कि जवाबदेही बढ़ाने के लिए उनके कार्यकाल में लगातार मॉनिटरिंग की गई है, जिसका नतीजा यह है कि अब 90 से 95 फ़ीसदी सवालों के जवाब समय पर मिल रहे हैं जो पहले नहीं होता था। पिछली विधानसभा में पर्ची व्यवस्था बंद कर दी गई थी। जिसे उन्होंने अध्यक्ष बनने के बाद फिर शुरू किया। उनका मकसद लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूत करना है न किसी पर पाबंदी लगाना है ‘तुच्छ’ शब्द पर भी सफाई विपक्ष की ओर से ‘तुच्छ’ शब्द पर जताई गई आपत्ति पर देवनानी ने कहा कि यह शब्द लोकसभा की व्यवस्था से लिया गया है। पिछले चार सत्रों में न तो इस पर कोई आपत्ति आई और न ही कोई चर्चा हुई। ऐसे में सवाल यह है कि क्या पहले बुलेटिन पढ़े ही नहीं गए या अब राजनीतिक आधार पर बयान दिए जा रहे हैं।

सीएम भजनलाल ने नमन कर कहा- ‘राष्ट्रधर्म की अद्वितीय मिसाल हैं महाराणा प्रताप’

जयपुर. महाराणा प्रताप मेवाड़ के शासक थे, साथ ही वे भारतीय इतिहास में शौर्य, स्वाभिमान और मातृभूमि प्रेम के प्रतीक भी हैं। आज 19 जनवरी को राजस्थान में महाराणा प्रताप की पुण्यतिथि मनाई जा रही है। इस मौके पर सीएम भजनलाल शर्मा ने कहा कि मेवाड़ मुकुट' वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप जी की पुण्यतिथि पर शत-शत नमन! उनका जीवन स्वाभिमान, स्वतंत्रता और राष्ट्रधर्म की अद्वितीय मिसाल है। नई पीढ़ी प्रेरणा ले – अशोक गहलोत महाराणा प्रताप की पुण्यतिथि पर कांग्रेस के दिग्गज नेता अशोक गहलोत ने सोशल मीडिया अकाउंट X पर लिखा कि स्वाभिमान एवं अदम्य शौर्य के प्रतीक, मातृभूमि के गौरव के लिए संपूर्ण जीवन समर्पित करने वाले महान योद्धा महाराणा प्रताप की पुण्यतिथि पर कोटि-कोटि नमन। उनके त्याग, साहस और देशभक्ति से नई पीढ़ी को प्रेरणा लेकर देश और समाज के लिए समर्पित भाव से आगे बढ़ना सीखना चाहिए। राष्ट्रभक्ति की जीवंत मिसाल – सचिन पायलट वहीं कांग्रेस के दिग्गज नेता सचिन पायलट ने सोशल मीडिया अकाउंट X पर लिखा कि शौर्य, साहस, स्वाभिमान एवं राष्ट्रभक्ति की जीवंत मिसाल, वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप की पुण्यतिथि पर उन्हें कोटि-कोटि नमन। पुण्यतिथि पर कोटि-कोटि नमन- गोविंद सिंह डोटासरा – कांग्रेस नेता गोविंद सिंह डोटासरा ने महाराणा प्रताप की पुण्यतिथि पर सोशल मीडिया अकाउंट X पर लिखा कि हूं लड्यो घणो हूं सह्यो घणो, मेवाड़ी मान बचावण नै। हूं पाछ नहीं राखी रण में, बैर्यां री खात खिडावण में।। अपने अदम्य साहस, अटूट स्वाभिमान और अप्रतिम वीरता से राजस्थान के स्वर्णिम इतिहास को गौरव प्रदान करने वाले मेवाड़ रत्न, वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप जी की पुण्यतिथि पर उन्हें कोटि-कोटि नमन। महाराणा प्रताप जी ने जीवन भर मातृभूमि की आन-बान-शान की रक्षा हेतु संघर्ष किया और विपरीत परिस्थितियों में भी कभी स्वाभिमान से समझौता नहीं किया। उनकी राष्ट्रभक्ति, पराक्रम और त्याग की अमर गाथाएं सदैव देशवासियों को प्रेरणा देती रहेंगी तथा आने वाली पीढ़ियों के लिए शौर्य और आत्मसम्मान का मार्गदर्शन करती रहेंगी।

धीरेन्द्र शास्त्री का 100 बीघा में कथा पांडाल और भोजन-पार्किंग की निःशुल्क व्यवस्था

जयपुर. रीको औद्योगिक क्षेत्र फतेहपुर रामगंजमंडी में 23 से 25 जनवरी तक श्री राम कथा और श्री गोमाता महोत्सव का आयोजन किया जाएगा। बागेश्वर धाम के आचार्य धीरेन्द्र शास्त्री रामकथा का वाचन करेंगे। कथा के प्रारंभ में दोपहर 1 बजे रामगंजमंडी नगर के प्रमुख मार्गों से होकर कलश यात्रा निकाली जाएगी। कलश यात्रा में 21,000 से अधिक महिलाएं कलश लिए शामिल होंगी। शिक्षा मंत्री मदन दिलावार ने रविवार को प्रेसवार्ता में आयोजन की पूरी जानकारी दी। दिलावर ने बताया कि 22 जनवरी को अयोध्या में भगवान राम की प्राण प्रतिष्ठा की गई थी। इसके उपलक्ष्य में 22 को ही दीपोत्सव मनाया जाएगा। कलश यात्रा में शामिल 21,000 महिलाएं एक साथ दीप प्रज्वलित कर प्रभु श्री राम की आरती करेंगी। इसके बाद 23 से 25 जनवरी तक कथा होगी। दिलावर ने बताया कि कार्यक्रम में 8 से 10 लाख लोगों के शामिल होने का अनुमान है। श्रद्धालुओं के लिए भोजन, पार्किंग की नि:शुल्क व्यवस्था की जा रही है। आयोजन 500 बीघा भू-भाग पर होगा, जिसमें कथा के लिए 100 बीघा में पांडाल सजाया जा रहा है। भोजन, पार्किंग समेत अन्य सभी व्यवस्थाएं की जाएंगी। 5000 के करीब कार्यकर्ता व्यवस्थाएं संभालेंगे। ये रहेगा खास 1000 से अधिक पुलिस कर्मी सुरक्षा व्यवस्था संभालेंगे। सीसीटीवर कैमरों से भी होगी निगरानी। 30 समितियों का गठन व्यवस्था के लिए किया गया है। 5000 के करीब कार्यकर्ता संभालेंगे जिम्मेदारी निशुल्क पार्किंग की व्यवस्था रहेगी। 15 लाख लोगों के हिसाब से व्यवस्था करने के निर्देश 8 से 10 लाख लोगों के शामिल होने की है संभावना 10-10 डॉक्टरों की टीम रहेगी तैनात। जगह जगह पानी के स्टॉल लगेंगे। कथा स्थल पर सुरक्षा की दृष्टि से थाना भी खोला जाएगा। 500 पोर्टेबल शौचालय की रहेगी व्यवस्था। 20000 स्टील बर्तन के सेट का किया जाएगा उपयोग। पॉलिथिन मुक्त होगा पूरा कार्यक्रम निर्बाध बिजली की आपूर्ति के लिए 630 केवी के दो ट्रांसफार्मर लगाए जा रहे है।

देवनानी ने भारत रिन्यूएबल एक्सपो में दिए पीएम सूर्यघर पुरस्कार

जयपुर. राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने कहा है कि आज जब पूरा विश्व संसाधनों की कमी से जूझ रहा है ऐसे में हमारी संसाधनों को पूजने वाली संस्कृति बहुत महत्वपूर्ण है। आज ऊर्जा के स्त्रोत पेट्रोल, डीजल, कोयला, पानी, शुद्ध वायु निरन्तर कम होते जा रहे हैं। ऐसे में मानवता को बचाने के लिए ऊर्जा के नए स्त्रोत काम में लिए जा रहे हैं। उनमें से एक बहुत बड़ा स्त्रोत भगवान सूर्य की ऊर्जा का उपयोग भी है और सम्पूर्ण भारत में इसका विकास तीव्र गति से हो रहा है।  स्पीकर देवनानी रविवार को यहां वी.टी. रोड ग्राउण्ड मानसरोवर में भारत रिन्यूएबल एक्सपो 2026 के समापन समारोह को सम्बोधित कर रहे थे। श्री देवनानी ने पीएम सूर्यघर पुरस्कार प्रदान किए।  स्पीकर देवनानी ने कहा कि राजस्थान क्षेत्रफल की दृष्टि से सबसे बड़ा प्रदेश होने के साथ खनिज सौर ऊर्जा की उपलब्धता वाला बड़ा प्रदेश है। सीमावर्ती जिले बाड़मेर, जैसलमेर, जोधपुर, बीकानेर, फलोदी इस क्षेत्र में कार्य करने के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। देवनानी ने कहा कि यह आयोजन केवल एक एक्सपो नहीं, बल्कि भारत के स्वच्छ ऊर्जा भविष्य की दिशा में एक मजबूत संकल्प और साझा प्रयास का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि चिन्तन-मनन और विचार करें, पूरी दुनिया जलवायु परिवर्तन और ऊर्जा सुरक्षा जैसी चुनौतियों से जूझ रही है, ऐसे समय में भारत नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्व की ओर तेजी से अग्रसर है।  स्पीकर देवनानी ने कहा है कि राजस्थान को प्रकृति ने प्रचुर सूर्य प्रकाश और विशाल भू-भाग का वरदान दिया है। यही कारण है कि आज राजस्थान देश के अग्रणी सोलर और विंड एनर्जी उत्पादक राज्यों में शामिल है। थार के मरुस्थल से लेकर राज्य के विभिन्न अंचलों तक, सोलर पार्क, विंड फार्म और हाइब्रिड प्रोजेक्ट्स न केवल ऊर्जा उत्पादन कर रहे हैं, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार और विकास के नए अवसर भी सृजित कर रहे हैं। स्पीकर देवनानी ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा बनाई गई प्रगतिशील नीतियाँ, निवेश के अनुकूल वातावरण और मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर ने राजस्थान को रिन्यूएबल एनर्जी निवेश का एक प्रमुख केंद्र बना दिया है। ग्रीन हाइड्रोजन, बैट्री स्टोरेज और ग्रीन मैन्युफैक्चरिंग जैसे उभरते क्षेत्रों में भी राजस्थान अपार संभावनाओं वाला राज्य है। समारोह में विधायक पुष्पेन्द्र सिंह राणावत सहित अनेक गणमान्य नागरिक मौजूद थे।

राम जलसेतु लिंक परियोजना में चम्बल नदी पर बन रहा 2 हजार 230 करोड़ की लागत से एक्वाडक्ट

जयपुर. मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के दूरदर्शी नेतृत्व और सतत् प्रयासों से प्रदेश की महत्वाकांक्षी राम जलसेतु लिंक परियोजना (संशोधित पार्वती-कालीसिंध-चम्बल लिंक परियोजना) मिशन मोड पर आगे बढ़ रही है। जल सुरक्षा की दिशा में मील का पत्थर साबित होने वाली परियोजना के तहत चम्बल नदी पर 2.3 किलोमीटर लम्बाई में एक्वाडक्ट का निर्माण किया जा रहा है। यह जून, 2028 तक बनकर तैयार हो जाएगा। मुख्यमंत्री शर्मा के मार्गदर्शन में परियोजना से संबंधित कार्य तीव्र गति से किए जा रहे हैं। इसके प्रथम चरण के पैकेज-2 के अंतर्गत 2 हजार 330 करोड़ रूपए की लागत से एक्वाडक्ट बनाया जा रहा है। यह चम्बल एक्वाडक्ट एक छोर में कोटा जिले की दीगोद तहसील के पीपलदा समेल गांव और दूसरे छोर में बूंदी जिले की इंद्रगढ़ तहसील के गोहाटा गांव से जुड़ेगा। इसके माध्यम से कालीसिंध पर निर्मित नवनेरा बैराज से पानी पम्प हाउस से लिफ्ट कर मेज नदी में छोड़ा जाएगा। इसके बाद मैज बैराज से पम्प हाउस व फीडर के जरिए गलवा बांध तक और वहां से बीसलपुर और ईसरदा बांध में पहुंचाया जाएगा। इस एक्वाडक्ट के बनने से आमजन को आवागमन के लिए अतिरिक्त मार्ग भी उपलब्ध होगा। 2280 मीटर लम्बे एक्वाडक्ट की आंतरिक चौड़ाई 41.25 मीटर और ऊंचाई 7.7 मीटर प्रस्तावित है। मई, 2025 में कार्य शुभारंभ के बाद से ही तेजी से कार्य किया जा रहा है। निर्माण स्थल पर कैंप एवं बैचिंग प्लांट का लगभग 90 प्रतिशत कार्य पूर्ण कर लिया गया है। एक्वाडक्ट हेतु प्रस्तावित 15 टेस्ट पाइल में से 8 टेस्ट पाइल का कार्य पूर्ण हो चुका है। कुल 5060 वर्किंग पाइल प्रस्तावित हैं, जिनमें से लगभग 860 पाइल का निर्माण पूर्ण किया जा चुका है। प्रतिदिन 15-20 पाइल का कार्य 12 रिग मशीनों की सहायता से किया जा रहा है। औसतन 500 क्यूबिक मीटर कंक्रीट कार्य प्रतिदिन किया जा रहा है। साइट पर लगातार शिफ्टों में कार्य जारी है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में ईआरसीपी को वृहद स्वरूप देते हुए राम जलसेतु लिंक परियोजना (संशोधित पार्वती-कालीसिंध-चम्बल लिंक परियोजना) (लगभग 90 हजार करोड़ रूपए) तैयार की गई है। परियोजना के प्रथम चरण में राज्य के 17 जिलों की लगभग 3 करोड़ 25 लाख आबादी को पेयजल सुविधा उपलब्ध होगी। साथ ही, सिंचाई एवं उद्योगों के लिए भी जल उपलब्ध होगा। इससे प्रदेश के आर्थिक एवं सामाजिक विकास को नई दिशा मिलेगी। उल्लेखनीय है कि वर्तमान राज्य सरकार केे गठन के तुरंत बाद मध्यप्रदेश सरकार से संवाद स्थापित कर सहमति प्राप्त की गई। जनवरी, 2024 में राम जलसेतु लिंक परियोजना (संशोधित पीकेसी योजना) का एमओयू किया। इसके बाद 17 दिसंबर, 2024 को जयपुर में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की गरिमामयी उपस्थिति में राजस्थान, मध्य प्रदेश एवं भारत सरकार के मध्य एमओए का आदान-प्रदान हुआ। यह मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की दूरदृष्टि, समन्वय क्षमता और जनकल्याण के प्रति प्रतिबद्धता का प्रत्यक्ष प्रमाण है। जल संकट के स्थायी समाधान की दिशा में यह परियोजना प्रदेश के लिए जीवनदायिनी सिद्ध होगी और मुख्यमंत्री शर्मा के नेतृत्व में राजस्थान जल आत्मनिर्भरता की ओर मजबूती से अग्रसर होगा।

कृषि मंत्री ने की सवाई माधोपुर में 150 करोड़ के अमरूद प्रोसेसिंग प्लान्ट की घोषणा की

जयपुर. सवाई माधोपुर का अमरूद आने वाले दिनों में क्षेत्र के किसानों के मीवन में मिठास और खुशहाली लाएगा। राज्य सरकार जिले में अमरूद का प्रोसेसिंग प्लान्ट लगवाएगी, जिससे देश-विदेश में इस फल और इससे बने उत्पादों की मांग बढ़ेगी और किसान की आय बढ़ेगी। देश में पहली बार आयोजित अमरूद महोत्सव इसी दिशा में प्रयासों का पहला कदम है। इसके सुखद परिणाम जल्द ही दिखने लगेंगे। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला और  कृषि एवं उद्यानिकी मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा ने सवाई माधोपुर के दशहरा मैदान में अमरूद महोत्सव का उद्घाटन किया और ये उद्गार व्यक्त किए। महोत्सव में बिरला ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की किसानों की आमदनी बढ़ाने की सोच के अनुसार काम करते हुए राज्य सरकार कृषि उत्पादन बढ़ाने, बेहतर प्रसंस्करण और विपणन  के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठा रही है। इन्ही प्रयासों की कड़ी में देश में पहली बार अमरूद महोत्सव का आयोजन किया जा रहा है। इसमें देश-प्रदेश के विभिन्न हिस्सों से किसानों, कृषि उत्पाद व्यापारियों और कृषि यंत्र एवं तकनीक से जुड़े विशेषज्ञों को साझा मंच उपलब्ध कराया गया है ताकि वे अपने अनुभवों को साझा कर इस क्षेत्र को प्रगति के पथ पर अग्रसर कर सकें। अमरूद सस्ता और स्वास्थ्य-वर्धक, महोत्सव से इसकी जानकारी बढ़ेगी –  लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि अमरूद एक सस्ता फल है लेकिन बहुत अधिक स्वास्थ्य-वर्धक है। अमरूद महोत्सव जैसे आयोजन के जरिए लोगों को इस फल के स्वास्थ्य से जुड़े लाभों के बारे में जानकारी मिलेगी। इससे बनने वाले अचार, जूस, पल्प, मिठाई आदि भी इस मेले में प्रदर्शित किए गए है। उन्होंने कहा कि यहां अमरूद के लाभ, इसकी खेती की नई तकनीक और उन्नत किस्मों तथा प्रसंस्करण की विधियों की जानकारी का आदान— प्रदान हो रहा है। डॉ. किरोडी लाल  ने सवाई माधोपुर में अमरूद का प्रोसेसिंग प्लान्ट लगाने की घोषणा की है। जब किसी कृषि उत्पाद का संवर्धन होता है, तभी किसान की वास्तविक आय बढ़ती है। इस प्रकार यह आयोजन क्षेत्र के अमरूद के किसानों की जिन्दगी बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण साबित होगा। सवाई माधोपुर का अमरूद यहीं पर खपने की जिम्मेदारी राज्य सरकार की – कृषि मंत्री डॉ. मीणा ने बताया कि राज्य सरकार जल्द ही सवाई माधोपुर में 150 करोड़ रुपये की लागत से अमरूद प्रोसेसिंग प्लान्ट स्थापित करेगी। राजस्थान में कुल 14 हजार हैक्टेयर अमरूद के बगीचों में से 11 हजार हैक्टेयर अकेले इस जिले में हैं।  सवाई माधोपुर का अमरूद यहीं पर खपने की जिम्मेदारी श्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में पूरी सरकार की है। डॉ. मीणा ने कहा कि राजस्थान में अमरूद किसानों की इस फल से आमदनी सालाना करीब 600-700 करोड़ रुपये है। सरकार का लक्ष्य किसानों की आमदनी को 1500-1600 करोड़ रुपये प्रतिवर्ष करना है। सवाई माधोपुर के किसानों को अपना फल बेचने के लिए दिल्ली, बड़ौदा आदि जगहों पर नहीं जाना पड़े, इसलिए प्रोसेसिंग यूनिट की सख्त आवश्यकता है। प्रोसेसिंग प्लान्ट लगने से आस-पास के जिलों के साथ ही पड़ोसी प्रदेशों के अमरूद के किसानों को भी लाभ होगा। राज्य सरकार आने वाले समय में सवाई माधोपुर में 600 करोड़ रुपये की लागत के विकास कार्य करवाएगी । इससे जिले में सिंचाई के लिए भी अतिरिक्त पानी उपलब्ध हो सकेगा। उन्होंने कहा कि इस वर्ष मानसून के दौरान ग्रामीण क्षेत्रों में फसलों का काफी नुकसान हुआ। इससे बचाव के लिए सूरवाल बांध के पानी को बनास नदी में छोड़ने के लिए 110 करोड़ रुपये की लागत से एक चैनल बनाया जाएगा। किसान एक दूसरे से संवाद करें, योजनाओं का लाभ लें — डॉ. मीणा ने  महोत्सव में आए किसानों और अन्य प्रतिभागियों से इस आयोजन का अधिक से अधिक लाभ उठाने की अपील की। उन्होंने कहा कि किसान कृषि यंत्रों, बागवानी, उत्पादों के प्रसंस्करण से जुड़े उद्यमियों और वैज्ञानिकों आदि के साथ संवाद करें और यहां लगी लगभग 250 स्टॉल्स को देखकर एक दूसरे से उन्नत कृषि की तकनीकी और किस्मों के महत्व पर संवाद करें। उन्होंने राज्य तथा केन्द्र सरकार की कृषि एवं पशुपालन से जुड़ी योजनाओं, विशेषकर फसल बीमा और मंगला पशु बीमा योजना का लाभ लेने का भी सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि केन्द्र सरकार की “पर ड्रॉप, मोर क्रॉप” योजना के जरिए राजस्थान में सिंचित क्षेत्र को 25 प्रतिशत तक बढ़ाने का लक्ष्य है। डूंगरी बांध से सवाई माधोपुर में सबसे अधिक सिंचाई क्षेत्र बढेगा- डॉ. किरोड़ी लाल ने कहा कि ईआरसीपी, जिसे अब संशोधित पीकेसी (पार्वती-कालीसिंध-चम्बल) योजना कहा जाता है, का सबसे अधिक लाभ सवाई माधोपुर जिले को होगा। योजना से 17 जिलों में पीने का पानी उपलब्ध होगा और सिंचाई क्षेत्र में 4.03 लाख हैक्टेयर की वृद्धि होगी। 15 प्रतिशत पानी उद्योगों के लिए भी उपलब्ध होगा। सवाई माधोपुर-करौली में सिंचित क्षेत्र बढ़कर 1.60 लाख हैक्टेयर हो जाएगा। उन्होंने कहा कि डूंगरी बांध से केवल 9 गांव विस्थापित होंगे और उन गांवों की पूरी आबादी को सुव्यवस्थित घर, बिजली, पानी सहित सभी सुविधाएं उपलब्ध होगी। डॉ. मीणा ने बताया कि डूंगरी बांध इस परियोजना का सबसे बड़ा बांध है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सरकार ने इस योजना के लिए 90 हजार करोड़ रुपये का बजट रखा है। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला और कृषि मंत्री डॉ. मीणा ने विभिन्न स्टॉल पर अमरूदों की किस्मों, इससे बने उत्पादों और नई कृषि तकनीकों के बारे में किसानों, उद्यमियों तथा वैज्ञानिकों से जानकारी ली और उनके विशिष्टताओं पर चर्चा की। उद्घाटन कार्यक्रम में जिला कलक्टर काना राम, पूर्व विधायक मानसिंह गुर्जर,अतिरिक्त निदेशक कृषि देशराज ने भी महोत्सव के उद्देश्य के बारे में जानकारी दी। स्थानीय पद दंगल कलाकारों ने अपने पारंपरिक अंदाज में सभी अतिथियों का संगीत— नृत्य से स्वागत किया।