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ED का बड़ा एक्शन: अल-फलाह यूनिवर्सिटी के परिसर पर PMLA के तहत कुर्की की तैयारी

 फरीदाबाद   दिल्ली ब्लास्ट से जुड़े आतंकी मॉड्यूल मामले में फरीदाबाद स्थित अल-फलाह यूनिवर्सिटी की समस्याएं और गहराती दिख रही हैं। न्यूज एजेंसी के अनुसार, प्रवर्तन निदेशालय (ED) मनी लॉन्ड्रिंग रोधी कानून (PMLA) के तहत यूनिवर्सिटी परिसर को अस्थायी रूप से कुर्क करने की तैयारी कर रहा है। जांच एजेंसियों का कहना है कि यूनिवर्सिटी से जुड़े कुछ लोगों की भूमिका दिल्ली ब्लास्ट के मामले में सामने आई है, जिसके बाद संस्थान को कथित तौर पर आतंकी नेटवर्क का केंद्र मानते हुए जांच तेज कर दी गई है। NIA की कार्रवाई, कई गिरफ्तार दिल्ली ब्लास्ट केस में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने यूनिवर्सिटी से जुड़े डॉक्टर शाहीन सईद और डॉ. मुजम्मिल को गिरफ्तार किया है। डॉ. मुजम्मिल पर विस्फोटक जुटाने और डॉ. शाहीन सईद पर आर्थिक मदद देने का आरोप है। इसके अलावा, एजेंसी ने अन्य कर्मचारियों से भी पूछताछ और गिरफ्तारियां की हैं। फंडिंग और निर्माण लागत की जांच प्रवर्तन निदेशालय इस बात की जांच कर रहा है कि अल-फलाह यूनिवर्सिटी के निर्माण में लगा धन कहीं “प्रोसीड्स ऑफ क्राइम” से तो नहीं जुटाया गया। ईडी ने इस मामले में यूनिवर्सिटी के चेयरमैन जवाद अहमद सिद्दीकी को दिल्ली ब्लास्ट के बाद गिरफ्तार किया था। ईडी का दावा है कि यूनिवर्सिटी ने खुद को यूजीसी और एनएएसी से मान्यता प्राप्त बताकर छात्रों को गुमराह किया, जबकि आवश्यक मान्यताएं मौजूद नहीं थीं। इसके बावजूद यहां छात्रों को दाखिला देकर पढ़ाई कराई गई और भारी फीस वसूली गई। 415.10 करोड़ की अवैध कमाई का आरोप ईडी ने अदालत को बताया है कि यूनिवर्सिटी ट्रस्ट के नाम पर विदेशों से फंडिंग ली गई और कथित तौर पर झूठी मान्यताओं के आधार पर छात्रों व उनके परिजनों से फीस वसूली गई। एजेंसी के अनुसार, इस तरीके से ट्रस्ट ने लगभग 415.10 करोड़ रुपये की अवैध कमाई की। जांच के दौरान ईडी को कई वित्तीय अनियमितताएं भी मिली हैं। इनमें एक ही पते पर 9 शेल कंपनियों का पंजीकरण, अलग-अलग कंपनियों में एक ही मोबाइल नंबर का इस्तेमाल और EPFO रिकॉर्ड का अभाव शामिल है। PMLA के तहत कुर्की संभव न्यूज एजेंसी के मुताबिक, ईडी PMLA के तहत उन इमारतों को अस्थायी रूप से कुर्क कर सकती है, जिनका निर्माण कथित तौर पर गैरकानूनी फंडिंग से किया गया है। फिलहाल ईडी और एनआईए दोनों एजेंसियां मामले की गहन जांच कर रही हैं और आने वाले दिनों में अल-फलाह यूनिवर्सिटी के खिलाफ कार्रवाई और तेज होने की संभावना जताई जा रही है।

बिजली निगम सुधारेगा लाइनमैन-असिस्टैंट फोरमैन का व्यवहार

चंडीगढ़. हरियाणा के बिजली निगम कर्मियों के कम्यूनिकेशन स्किल को सुधार के लिए अब उन्हें ट्रेनिंग दी जाएगी। पंचकूला के हरियाणा पावर ट्रेनिंग इंस्टीच्यूट में लाइनमैन और असिस्टैंट फोरमैन को 2 दिन क्लास लेने के लिए बुलाया गया है। हरियाणा पावर ट्रेनिंग इंस्टीच्यूट के निर्देश पर उत्तरी हरियाणा बिजली वितरण निगम ने अपने तहत आने वाले हर जिले से 1-1 कर्मचारी को ट्रेनिंग पर भेजने का फैसला लिया है। 10 जिलों से पंचकूला में 10 लाइनमैन-असिस्टैंट फोरमैन को भेजा जाएगा। पंचकूला के ट्रेनिंग इंस्टीच्यूट में 15 व 16 जनवरी को सुबह साढ़े 9 से शाम 5 बजे तक इनकी वर्कशॉप रहेगी। ट्रेनिंग इंस्टीच्यूट में इन कर्मियों को मोटिवेशन, प्रोफैशनल व्यवहार, समय प्रबंधन, उचित कम्यूनिकेशन स्किल, तनाव प्रबंधन, फर्स्ट एड, हीट स्ट्रैस, कार्यस्थल पर शराब और ड्रग्स का सेवन, सर्विस रूल्स, उच्चाधिकारियों के साथ बातचीत का तौर-तरीकों के बारे में समझाया जाएगा। अगर नामित किए गए कर्मियों में से कोई कर्मचारी ट्रेनिंग में हिस्सा नहीं लेता है तो उसके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई के साथ-साथ ट्रेनिंग कार्यक्रम के खर्च का हिस्सा उसकी सैलरी से काटा जाएगा। इतना ही नहीं, संबंधित कर्मचारी के ऑफिसर इंचार्ज के खिलाफ भी इसी प्रकार की कार्रवाई होगी। वहीं किसी आपात स्थिति में ट्रेनिंग केंद्र को सूचना देने के साथ ही दूसरे कर्मचारी को ट्रेनिंग कार्यक्रम में हिस्सा लेने के लिए भेजने के निर्देश भी दिए गए हैं।

मुख्यमंत्री सैनी बोले- ‘गुरुओं ने सदैव भलाई के लिए कुर्बानियां दीं’

चंडीगढ़. मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने पंजाब दौरे के दौरान ऐतिहासिक गुरुद्वारा चरण कंवल साहिब, माछीवाड़ा, लुधियाना पहुंचकर माथा टेका और गुरु साहिब का आशीर्वाद प्राप्त किया। मुख्यमंत्री ने मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि इस पवित्र स्थल पर आकर वे स्वयं को अत्यंत गौरवान्वित महसूस कर रहे हैं। यह वही ऐतिहासिक स्थान है जहां दसवें गुरु श्री गुरु गोविंद सिंह जी ने आकर कठोर तपस्या की थी और देश व समाज को धर्म, साहस और मानवता की शिक्षा दी थी। उन्होंने कहा कि गुरुओं ने सदैव समाज और देश की भलाई के लिए संघर्ष किया और महान बलिदान दिए। हमें उनकी शिक्षाओं और उनके दिखाए मार्ग पर चलते हुए राष्ट्र सेवा करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि जिस ऐतिहासिक गुरुद्वारा साहिब में श्री गुरु गोविंद सिंह जी के चरण पड़े और उन्होंने यहां रहकर समाज को दिशा दी, ऐसे पावन स्थल को नजदीक से देखने और शीश नवाने का अवसर मिलना उनके लिए सौभाग्य की बात है। एक सवाल के जवाब में मुख्यमंत्री ने कहा कि अगर गुरुओं ने कुर्बानियां न दी होतीं, तो आज हमारा इतिहास कुछ और ही होता। गुरुओं ने किसी एक वर्ग के लिए नहीं बल्कि सर्व समाज और पूरे देश के लिए संघर्ष किया और बलिदान दिया। उनकी शिक्षाओं को आत्मसात कर आगे बढ़ना चाहिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि समय-समय पर उन्हें गुरुओं की पवित्र भूमि पर आने का अवसर मिलता रहा है। एक अन्य प्रश्न पर नायब सिंह सैनी ने कहा कि कुछ लोग अपनी राजनीति चमकाने के लिए गलत बयानबाजी करते हैं, जो बिल्कुल अनुचित है। गुरुओं को लेकर ऐसी भाषा न तो बोलनी चाहिए और न ही सोचनी चाहिए। उन्होंने बिना किसी का नाम लिए कहा कि विपक्ष के कुछ नेताओं द्वारा इस प्रकार की बातें करना निंदनीय है। इस अवसर पर राज्यसभा सांसद सतनाम सिंह संधू, मुख्यमंत्री के ओएसडी डॉ. प्रभलीन सिंह, गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी प्रधान जसबीर सिंह, हेड ग्रंथी ज्ञानी हरचरण सिंह भी मौजूद रहे। इसके उपरांत मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने प्राचीन श्री मुक्तेश्वर शिव मंदिर (मुक्तिधाम) चहिला में जाकर पूजा अर्चना कर जलाभिषेक किया और देशवासियों की समृद्धि की कामना करते हुए ईश्वर का आशीर्वाद प्राप्त किया।

हरियाणा के संसद की पुस्तक में बताई ‘मोदी युग में भारत का आर्थिक सशक्तिकरण’ की यात्रा

चंडीगढ़/नई दिल्ली/हमीरपुर. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में डिजिटल कनेक्टिविटी के क्षेत्र में गांवों और शहरों के बीच की दूरी काफी हद तक समाप्त हुई है। वर्ष 2015 से 2021 के बीच ग्रामीण इंटरनेट उपयोग में 200 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। वर्ष 2024 तक देश के 95.15 प्रतिशत गांवों में इंटरनेट की पहुंच हो चुकी है और करीब 40 करोड़ ग्रामीण नागरिक इंटरनेट सुविधा का उपयोग कर रहे हैं। देश में कुल 954.40 मिलियन इंटरनेट उपभोक्ताओं में से 398.35 मिलियन उपभोक्ता ग्रामीण क्षेत्रों से हैं। भारतनेट परियोजना के तहत 2.13 लाख ग्राम पंचायतों को ऑप्टिकल फाइबर कनेक्टिविटी से जोड़ा गया है। पिछले तीन वर्षों में ग्रामीण इलाकों में डिजिटल लेनदेन में 200 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि हुई है। यह जानकारी राज्यसभा सदस्य सिकंदर कुमार द्वारा लिखित पुस्तक “मोदी युग में भारत का आर्थिक सशक्तिकरण” में दी गई है, जिसका विमोचन दिसंबर माह में उपराष्ट्रपति श्री सी.पी. राधाकृष्णन ने किया था। मोदी शासन में मेट्रो नेटवर्क वर्ष 2014 में 248 किलोमीटर से बढ़कर वर्ष 2025 में 1,013 किलोमीटर से अधिक हो गया है। 11 राज्यों के 23 शहरों में मेट्रो परियोजनाएं शुरू की गई हैं। वर्ष 2013-14 में जहां प्रतिदिन 28 लाख यात्री मेट्रो का उपयोग करते थे, वहीं अब यह संख्या बढ़कर 1.12 करोड़ हो गई है। मेट्रो लाइन शुरू होने की गति नौ गुना बढ़ी है। प्रधानमंत्री जनधन योजना के तहत अब तक 53.13 करोड़ बैंक खाते खोले जा चुके हैं, जिनमें से 55.6 प्रतिशत खाते महिलाओं के हैं, जबकि 66.6 प्रतिशत खाते ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में हैं। ग्रामीण परिवारों को ओवरड्राफ्ट के रूप में 23,000 करोड़ रुपये से अधिक की सहायता दी गई है। पुस्तक में बताया गया है कि राष्ट्रीय राजमार्गों की लंबाई वर्ष 2014 में 91,287 किलोमीटर से बढ़कर 2024 में 1,46,195 किलोमीटर हो गई है। सरकार का लक्ष्य वर्ष 2047 तक 60,000 किलोमीटर ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे विकसित करने का है। स्मार्ट सिटी मिशन के तहत कुल 7,948 परियोजनाओं में से जुलाई 2023 तक 74 प्रतिशत परियोजनाएं पूरी की जा चुकी हैं। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के अंतर्गत 11 करोड़ से अधिक किसानों को 3.7 लाख करोड़ रुपये सीधे बैंक खातों में ट्रांसफर किए गए हैं। देश में कृषि निर्यात वर्ष 2013-14 के 1.94 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 2023-24 में 4.12 लाख करोड़ रुपये हो गया है। दूध उत्पादन के क्षेत्र में भारत ने उल्लेखनीय प्रगति की है। वर्ष 2014-15 में 146.3 मिलियन टन दूध उत्पादन के मुकाबले 2023-24 में यह बढ़कर 239.2 मिलियन टन हो गया है। प्रति व्यक्ति दूध उपलब्धता 319 ग्राम प्रतिदिन से बढ़कर 471 ग्राम हो गई है। पेट्रोल में इथेनॉल मिश्रण से पिछले दस वर्षों में 1,13,007 करोड़ रुपये की विदेशी मुद्रा की बचत हुई है। भारत सौर ऊर्जा के क्षेत्र में दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा उत्पादक देश बन गया है। प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के तहत मार्च 2027 तक एक करोड़ घरों को प्रति माह 300 यूनिट मुफ्त बिजली उपलब्ध कराई जाएगी। हरित हाइड्रोजन मिशन के अंतर्गत वर्ष 2030 तक 50 लाख टन उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है, जिससे लाखों रोजगार के अवसर सृजित होंगे। रक्षा क्षेत्र में भारत का निर्यात वित्त वर्ष 2016 के 113 मिलियन डॉलर से बढ़कर 2025 में 2.8 बिलियन डॉलर हो गया है। वर्ष 2030 तक रक्षा निर्यात को 5 बिलियन डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है।

रेवाड़ी में पुलिस और बदमाशों की मुठभेड़

रेवाड़ी (हरियाणा). देर रात मीरपुर यूनिवर्सिटी के पास पुलिस और बदमाशों के बीच हुई मुठभेड़ में दो बदमाशों के पैर में गोली लगी है। पुलिस ने दोनों को मौके से गिरफ्तार कर उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती कराया है। आरोपी किसी बड़ी आपराधिक वारदात को अंजाम देने की फिराक में थे। एनकाउंटर में घायल बदमाश रोहतक के आनंदपुर निवासी विकास उर्फ मोटू और रेवाड़ी के गोलकगढ़ निवासी हर्ष उर्फ पोपला है। हर्ष उर्फ पोपला पर पुलिस ने पांच हजार रुपये का इनाम घोषित कर रखा था। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार दोनों बदमाश अक्टूबर 2025 में सिटी थाना रेवाड़ी में दर्ज हत्या, शस्त्र अधिनियम और संगठित अपराध से जुड़े गंभीर मामले में नामजद आरोपी हैं। पुलिस ने इस कार्रवाई के दौरान जींद जिले के गुड़ा खेड़ा निवासी रितिक और गोकलगढ़ निवासी नीरज उर्फ अज्जू को भी गिरफ्तार किया है। बताया जा रहा है कि बदमाश एक कार में सवार होकर इलाके में किसी बड़ी वारदात की योजना बना रहे थे। इसी दौरान पुलिस को गुप्त सूचना मिली, जिसके आधार पर तुरंत टीम गठित कर मीरपुर यूनिवर्सिटी के पास नाकाबंदी कर दी गई। पुलिस के अनुसार, जैसे ही बदमाशों की कार को रोका गया, उन्होंने खुद को घिरा देख पुलिस पर फायरिंग शुरू कर दी। जवाबी कार्रवाई करते हुए पुलिस ने भी गोलियां चलाईं। इस दौरान हर्ष और विकास के पैर में गोली लगी, जिससे वे मौके पर ही गिर पड़े। इसके बाद पुलिस ने स्थिति पर काबू पाते हुए चारों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। घायल बदमाशों को तुरंत अस्पताल पहुंचाया गया, जहां पुलिस सुरक्षा के बीच उनका इलाज चल रहा है। पुलिस का कहना है कि दोनों की हालत खतरे से बाहर है। घटनास्थल से हथियार और कार को कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी गई है। पूछताछ के दौरान कई अहम खुलासे होने की उम्मीद गिरफ्तार बदमाश लंबे समय से आपराधिक गतिविधियों में शामिल रहे हैं और इनसे पूछताछ के दौरान कई अहम खुलासे होने की उम्मीद है। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि यह गिरोह संगठित तरीके से अपराध को अंजाम देता था और रेवाड़ी व आसपास के जिलों में वारदात की तैयारी कर रहा था।

हरियाणा CM नायब सैनी पहुंचे लुधियाना

लुधियाना. हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी आज लुधियाना दौरे पर हैं। यहां उन्होंने आज गुरुद्वारा चरण कंवल साहिब में माथा टेका और प्रसाद ग्रहण किया। इस दौरान उन्होंने प्रदेश की शांति, सुख-समृद्धि और जनता के कल्याण की कामना की। उन्होंने गुरुद्वारा साहिब के इतिहास की जानकारी ली। मौके पर ग्रामीण क्षेत्र के भाजपा नेता और कार्यकर्ता मौजूद रहे। मुख्यमंत्री नायब सैनी ने कहा कि गुरु गोबिंद सिंह जी की तपोभूमि पर नतमस्तक होना उनके लिए सौभाग्य की बात है। उन्होंने कहा कि गुरुओं के बलिदान और शिक्षाएं देश और समाज के लिए अमूल्य हैं और इन्हीं के कारण आज लोग स्वतंत्रता के साथ जीवन जी पा रहे हैं। उन्होंने माछीवाड़ा साहिब के ऐतिहासिक महत्व का उल्लेख करते हुए कहा कि जिस स्थान पर गुरु महाराज ने समाज को दिशा दी, वहां पहुंचना उनके लिए विशेष अनुभव रहा। मुख्यमंत्री ने कहा कि कुछ लोग धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाकर राजनीति करना चाहते हैं, लेकिन गुरुओं के त्याग और संघर्ष के प्रति गलत सोचना भी अपराध के समान है। उन्होंने कहा कि गुरुओं और उनके परिवारों ने देश के लिए जो कुर्बानियां दी हैं, उन्हें हमेशा याद किया जाएगा। इसके बाद मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी समराला की न्यू अनाज मंडी, चावा रोड में भाजपा कार्यकर्ताओं की रैली को संबोधित करेंगे। कार्यक्रम में भाजपा के वरिष्ठ नेता भी शामिल होंगे। मुख्यमंत्री के दौरे को लेकर प्रशासन ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं।

भ्रष्टाचार मामलों में हरियाणा में अब जांच से पहले अनुमति लेना जरूरी

चंडीगढ़. अब सरकारी अधिकारी व कर्मचारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोपों पर जांच एजेंसी सीधे कार्रवाई नहीं कर सकेगी। पहले उच्च अधिकारी से स्वीकृति जरूरी होगी। मगर रंगे हाथ पैसे लेने वाले वाले मामलों में पहले की तरह कार्रवाई जारी रहेगी। हरियाणा सरकार ने अधिकारियों व कर्मचारियों से संबंधित भ्रष्टाचार के मामलों में जांच के लिए नई मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) लागू की है। इसके तहत भ्रष्टाचार की शिकायत मिलने पर अब सरकारी अधिकारी व कर्मचारी के खिलाफ जांच या पूछताछ से पहले सक्षम प्राधिकारी की मंजूरी लेना अनिवार्य कर दिया गया है। हालांकि यह फैसला उन मामलों में लागू नहीं होगा, जहां अधिकारी व कर्मचारी रंगे हाथ पकड़े जाएंगे। भ्रष्टाचार के मामलों में जांच के लिए केंद्र सरकार ने हरियाणा समेत सभी राज्यों को नए दिशा-निर्देश जारी किए थे। इन निर्देशों का अध्ययन करने के बाद हरियाणा सरकार ने सभी विभागों को जांच से संबंधित एसओपी लागू करने के निर्देश दिए हैं। अब ऐसे मामलों में जांच के लिए भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 की धारा 17ए की पालना जरूरी है। यह एसओपी उन सभी लंबित मामलों में भी लागू होगी, जिसमें अभी तक धारा 17ए के तहत अनुमति नहीं ली गई है। जांच की अनुमति मुख्य सचिव के स्तर पर ही दी जाएगी। वहीं, दूसरी एजेंसी के मामलों में संबंधित अधिकारी के प्रशासनिक विभाग को ही सक्षम प्राधिकारी माना जाएगा। नई एसओपी का मकसद यही है कि किसी भी अधिकारी को बेवजह प्रताड़ित न किया जाए। पुख्ता सबूत के बाद ही कार्रवाई को आगे बढ़ाया जाए। एसओपी में यह भी प्रावधान किया गया है कि शिकायत की पहले जांच की जाएगी। उसके बाद संबंधित अधिकारी से पूछताछ व जांच के लिए अनुमति मांगी जाएगी। सिंगल विंडो के जरिये ही अनुमति ली जाएगी। तीन महीने में अनुमति पर लेना होगा फैसला नई एसओपी में यह भी तय कर दिया गया है कि जांच की अनुमति पर फैसला तीन महीने के भीतर लेना होगा। विशेष परिस्थितियों में एक महीने का समय बढ़ाया जा सकता है, मगर इस बारे में लिखित में बताना होगा। वहीं, एसओपी में यह भी निर्देश दिया गया है कि तृतीय व चतुर्थ श्रेणी के कर्मियों के भ्रष्टाचार के मामलों में जांच की अनुमति की जिम्मेदारी प्रशासनिक अधिकारी निचले अधिकारी को सौंप सकते हैं। मगर एसओपी के अनुपालन की जिम्मेदारी संबंधित प्रशासनिक विभाग की रहेगी।

हरियाणा में हर चौथा बिजली उपभोक्ता डिफाल्टर

चंडीगढ़. हरियाणा में बिजली उपभोक्ताओं की संख्या लगातार बढ़ रही है लेकिन इसके साथ ही बिजली बिलों का बकाया भी गंभीर संकट का रूप लेता जा रहा है। राज्य में लगभग हर चौथा बिजली उपभोक्ता डिफाल्टर की श्रेणी में आ चुका है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक प्रदेश में कुल 83.40 लाख से अधिक बिजली कनेक्शन हैं। इनमें से 22.50 लाख उपभोक्ताओं पर 7,742 करोड़ रुपये से ज्यादा का बिजली बिल बकाया है। अक्तूबर 2025 तक के आंकड़ों के अनुसार डिफाल्टर उपभोक्ताओं में 15.98 लाख कनेक्टेड हैं। इन पर 3,873.98 करोड़ रुपये बकाया है जबकि 6.52 लाख डिस्कनेक्टेड उपभोक्ताओं पर 3,868.17 करोड़ रुपये की राशि लंबित है। इसका सीधा अर्थ है कि बड़ी संख्या में कनेक्शन काटने के बावजूद बकाया राशि की वसूली नहीं हो पा रही है। डीएचबीवीएन पर सबसे ज्यादा दबाव वितरण निगमों में दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम (डीएचबीवीएन) पर सबसे अधिक बकाया है। डीएचबीवीएन के 12.95 लाख डिफाल्टर उपभोक्ताओं पर 4,817.81 करोड़ रुपये लंबित हैं। वहीं उत्तर हरियाणा बिजली वितरण निगम (यूएचबीवीएन) में 9.55 लाख डिफाल्टरों पर 2,924.32 करोड़ रुपये का बिल बकाया है। ग्रामीण घरेलू उपभोक्ता सबसे बड़े डिफाल्टर श्रेणीवार आंकड़े बताते हैं कि सबसे ज्यादा बकाया घरेलू ग्रामीण उपभोक्ताओं पर है। ग्रामीण घरेलू श्रेणी के 11.17 लाख उपभोक्ताओं पर अकेले 4,282.12 करोड़ रुपये बकाया हैं। इसके मुकाबले घरेलू शहरी उपभोक्ताओं पर 959.07 करोड़ रुपये, औद्योगिक उपभोक्ताओं पर 1,087.78 करोड़ रुपये और व्यावसायिक उपभोक्ताओं पर 749.98 करोड़ रुपये बकाया है। कृषि उपभोक्ताओं पर 200.59 करोड़ रुपये और सरकारी विभागों के 23,672 कनेक्शनों पर भी 418.06 करोड़ रुपये की राशि अटकी हुई है। बिजली निगमों की सेहत पर असर इतनी बड़ी डिफाल्टिंग राशि से बिजली वितरण निगमों की आर्थिक स्थिति कमजोर हो रही है। इसका असर बिजली ढांचे के सुधार, नए निवेश और उपभोक्ताओं को निर्बाध आपूर्ति पर पड़ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि बकाया वसूली के लिए ठोस नीति नहीं बनाई गई तो नुकसान अंततः ईमानदार उपभोक्ताओं पर बढ़ी हुई दरों के रूप में पड़ेगा। दरें तय करने से पहले चुनौती गौरतलब है कि आठ जनवरी को हरियाणा विद्युत विनियामक आयोग नई बिजली दरों को लेकर जन सुनवाई कर रहा है। ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि क्या आयोग दरें बढ़ाने से पहले बकाया वसूली को लेकर बिजली निगमों को सख्त और स्पष्ट दिशानिर्देश देगा या फिर बोझ आम उपभोक्ताओं पर ही डाला जाएगा। कई मामले न्यायालयों में भी लंबित बिजली बकाया से जुड़े कई मामले न्यायालयों में भी लंबित हैं और इन पर तेजी से कार्रवाई के लिए विभाग को निर्देश दिए जा चुके हैं। सरकारी भवनों और संस्थानों में बकाया राशि के सवाल पर उन्होंने कहा कि सरकारी व अन्य सभी भवनों में बिजली की बकाया राशि की वसूली सख्ती से की जाएगी और भुगतान में आनाकानी होने पर कानून अनुसार कार्रवाई होगी। -अनिल विज, ऊर्जा मंत्री, हरियाणा।

फरीदाबाद में कुत्ते-बिल्लियों ने बीते साल 32 हजार 60 लोगों पर किया था हमला

फरीदाबाद. शहर के कुत्ते कटकने होते जा रहे है। इस पर न तो नगर निगम अंकुश लगा पा रहा है और न ही पशुपालन विभाग। आलम यह है कि फरीदाबाद के बीके अस्पताल में हर रोज 70 से 80 मामले कुत्ते या बंदरों के काटने के सामने आ रहे है। इतना ही नहीं हर महिने करीब 5 से 6 लोगों को बिल्लियां भी काटकर जख्मी कर रही हैं। लेकिन चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की ओर से एंटी रैबीज इंजेक्शन की डोज तक कम पड़ जाती हैं। इसे देखते हुए इस बार विभाग ने छह महीने का एडवांस स्टॉक बीके अस्पताल में जमा कर दिया है। जबकि पहले मरीजों को बाजार में निजी मेडिकल सेंटरों से जाकर 350 से 380 रुपए का इंजेक्शन की एक डोज लगवानी पड़ रही थी। अस्पताल में दवा उपलब्ध होने से मरीजों को कुछ राहत जरूर मिली है। लेकिन आंकडे बताते हैं कि कुत्तों, बिल्ली और बंदरों के काटने के सर्वाधिक हमले बच्चों और बुर्जुगों पर ज्यादा हुए हैं। बीते साल 32 हजार 60 लोगों को काटने के मामले सामने आ चुके हैं। साल के अप्रैल माह में सर्वाधिक 2680 लोग कुत्तों के हमले से जख्मी हुए हैं। जो अपने आप में ही चौंकाने वाला आंकडा है । जबकि यह आंकड़ा वर्ष 2019 में 22022 या था। ऐसे में जीत सालों से यह आकड़ा 10 हजार 48 ज्यादा है। यह बडी विकट स्थिति। हैं कि साल दर साल कुते काटने के मामले बढ़ते जा रहे हैं। बीते साल में चार महीने तो ऐसे रहे जब मरीजों को बीके अस्पताल में एंटी रैबीज इंजेक्शन ही नहीं मिले। इसमें फरवरी, मार्च, जून, जुलाई। लेकिन इस स्थिति से बचने के लिए इस बार स्वास्थ्य विभाग ने एडवांस में ही छह माह का एंटी रैबीज इंजेक्शनकी डोज उपलब्ध रखी है। कुत्तों के काटने के मामलों में 32 हजार 60 मरीजों में ऐसे मरीज भी शामिल हैं जिन्हें कुत्तों के अलावा बंदरों और बिल्ली ने भी काटा है। यानि फरीदाबाद में औसतन हर साल कुत्तों के काटने के 26 हजार अधिक मामले सामने आ रहे हैं। जवकि यह आंकडा वर्ष 2019 में 22 हजार 22 रहा था। साल दर साल यह आंकड़ा बढ़ता जा रहा है। इसके बावजूद नगर निगम कुत्तों को पकड़ने और पशुपालन विभाग कुत्तों की नसबंदी करने के प्रति कोई पुरुता कदम नहीं उठा रहा है। पिछले दिनों सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद नगर निगम ने दावे किए थे कि कुत्तों के लिए शेल्टर होम बनाए जाएंगे और शहर में कुत्ता पकड़ने का अभियान तेज किया जाएगा। लेकिन यह सब खानापूर्ति में ही सिमट कर रह गया है। शुरूआती कुछ हफ्तों में शहर में कुत्ता पकड़कर नसबंदी एवं शेल्टर होम भेजने की कार्रवाई की गई। लेकिन अब यह पूरी तह से बंद है। स्वास्थ्य विभाग के चीफ फॉर्मासिस्ट शैलेन्द्र की माने तो वर्ष 2025 में जनवरी में 2235, फरवरी में 2553 में, मार्च में 2372, अप्रैल में 2680, मई में 2586, जून में 2373, जुलाई में 2603, अगस्त में 2469, सितम्बर में 2511, अक्टूबर में 2386, नवम्बर 2300 और दिसम्बर में 2620 लोगों कुत्तों के शिकार हुए हैं। स्वास्थ्य विभाग की माने तो इतने ही मामले निजी अस्पतालों में भी पहुंचने हैं। ऐसे में निजी अस्पतालों के आंकड़ों को जोड़ दिया जाए तो कुत्ता काटने के करीब 60 हजार से अधिक मामले फरीदाबाद शहर में आ रहे हैं। जो चौंकाने वाली संख्या है। क्या कहते हैं शहर के जाने माने फिजीशियन वीके अस्पताल के फिजीशियन डॉ. मोहित अग्रवाल व योगेश गुप्ता की माने तो कुत्ता काटने के रोगी को पानी से डर लगता है इसे हाईड्रोफोबिया हो जाता है। कुते के काटने पर उसका लार खून में मिल जाता है और यह धीरे धीरे मस्तिष्क में पहुंच जाता है। इसका डोज 0.3.7-14-30 के हिसाब से दिया जाता है। कुतों ये होने वाले रैबीज गैंग के जहर का असर मस्तिष्क पर पड़ता है। चिकित्सकों के अनुसार जब किसी की कोई भी कुत्ता काट लें तो उसके 24 घंटे के बाद एआरबी का इंजेक्शन लगवा लेना जरूरी होता है। चिकित्सकों की माने तो सर्दियों में कुर्ती, बंदर और बिल्ली के काटने के मामले बढ़ जाते हैं।

हरियाणा में सोनीपत की 14 प्रदूषणकारी इकाइयां तुरंत बंद करने का आदेश

चंडीगढ़. वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) ने राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में वायु प्रदूषण को तेजी से कम करने के लिए सख्त कदम उठाते हुए 16 औद्योगिक इकाइयों को तुरंत बंद करने के आदेश जारी किए हैं। ये इकाइयां गंभीर और बार-बार होने वाले पर्यावरण नियमों के उल्लंघन के दोषी पाई गईं। निरीक्षण के दौरान पता चला कि इन इकाइयों ने संचालन की सहमति (सीटीओ) और स्थापना की अनुमति (सीटीई) के बिना काम किया, वायु प्रदूषण नियंत्रण उपकरण (एपीसीडी) नहीं लगाए या उन्हें ठीक से नहीं चलाया, प्रतिबंधित ईंधन का इस्तेमाल किया, ग्रेप की रोक अवधि में भी संचालन जारी रखा, डीजल जनरेटर सेट के नियमों की अनदेखी की तथा औद्योगिक प्रक्रियाओं से खुला धुआं और उत्सर्जन किया। सीएक्यूएम के एक अधिकारी के अनुसार, इन 16 इकाइयों में से 14 हरियाणा के सोनीपत जिले में, एक उत्तर प्रदेश (एनसीआर) में और एक राजस्थान (एनसीआर) में स्थित हैं। उन्होंने स्पष्ट किया है कि ये इकाइयां तब तक बंद रहेंगी, जब तक वे सभी आवश्यक पर्यावरणीय नियमों और मानकों का पूरा पालन नहीं कर लेतीं। सीएक्यूएम ने चेतावनी दी है कि गैर-अनुपालन बिल्कुल बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और दोषी इकाइयों के खिलाफ बंद करने के अलावा जुर्माना तथा अन्य कानूनी कार्रवाई भी की जाएगी। आयोग ने एनसीआर में स्थित सभी औद्योगिक इकाइयों से अपील की है कि वे पर्यावरण नियमों का कड़ाई से पालन करें, प्रदूषण नियंत्रण उपकरणों को ठीक से स्थापित और संचालित रखें और हर समय अनुपालन सुनिश्चित करें।