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हरियाणा के पूर्व सीएम भूपेंद्र हुड्डा के खिलाफ इंडस्ट्रियल प्लॉट आवंटन मामले में केस प्रक्रिया शुरू

पंचकूला हरियाणा की राजनीति में एक बार फिर बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। CLP लीडर भूपेंद्र सिंह हुड्डा की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं, क्योंकि औद्योगिक भूखंड आवंटन मामले में उनके खिलाफ केस चलाने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। जानकारी के अनुसार, यह मामला औद्योगिक प्लॉट के आवंटन से जुड़ा हुआ है, जिसमें अनियमितताओं के आरोप लगाए गए थे। अब इस मामले में कार्रवाई आगे बढ़ाई गई है और केस चलाने की अनुमति मिल गई है। बताया जा रहा है कि इस मामले में HUDA (हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण) के दो अधिकारियों के नाम भी शामिल हैं, जिससे मामला और गंभीर हो गया है। इस घटनाक्रम के बाद राज्य की राजनीति में हलचल तेज हो गई है और विपक्ष भी इस मुद्दे को लेकर सक्रिय हो सकता है। फिलहाल जांच एजेंसियां मामले की आगे की प्रक्रिया में जुटी हुई हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है। पंचकूला औद्योगिक भूखंड आवंटन मामले में ईडी की अभियोग शिकायत में हुड्डा को मुख्य साजिशकर्ता के रूप में शामिल किया गया है। एजेंसी ने आरोप लगाया कि उसने अवैध आवंटन की वास्तव में योजना बनाई और चयनित आवंटियों के हित में पात्रता मानदंडों में बदलाव किया। आरोपी आवंटियों को हुडा से जोड़ते हुए, ईडी ने कहा कि रेनू हुड्डा और नंदिता हुड्डा उनके पैतृक गांव सांघी की रहने वाली थी। कंवर प्रीत सिंह संधू उनके सहपाठी डीडी संधू के बेटे थे। मोना बेरी उनके ओएसडी बलदेव राज बेरी की बहू थी। डॉ. गणेश दत्त रतन उनके साथ टेनिस खेलते थे और प्रदीप कुमार उनके निजी सचिव सिंह राम के बेटे थे। ईडी ने आगे दावा किया कि आवंटन पाने वाले अशोक वर्मा के ससुर, अशोक काका, कांग्रेस शासन के दौरान एचएएफईडी के अध्यक्ष थे और हुड्डा उन्हें जानते थे। अमन गुप्ता के पिता रमेश गुप्ता थानेसर के पूर्व विधायक थे और हुड्डा से अच्छी तरह परिचित थे। लेफ्टिनेंट कर्नल ओपी दहिया (रिटायर) पूर्व कांग्रेस विधायक करण दलाल के रिश्तेदार हैं। डागर कात्याल के पिता सुनील कात्याल हरियाणा सेवा अधिकार आयोग में आयुक्त रह चुके थे और हुड्डा उन्हें जानते थे। मनजोत कौर न्यायमूर्ति एमएस सुल्लर (रिटायर) की बहू हैं, जो हुड्डा की परिचित थी। सिद्धार्थ भारद्वाज के पिता संजीव भारद्वाज 2004 में एचपीसीसी सचिव थे, 2005 में पार्टी छोड़ दी और 2016 में फिर से पार्टी में शामिल हो गए।

हरियाणा बीजेपी ने निकाय चुनाव को लेकर बनाया ‘मिशन मोड’ प्लान

पंचकूला  हरियाणा बीजेपी के प्रदेश कार्यालय 'पंचकमल' में आज कोर ग्रुप की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। करीब दो घंटे तक चली इस बैठक की अध्यक्षता प्रदेश अध्यक्ष मोहनलाल बड़ौली ने की। बैठक में आगामी निकाय चुनावों की रणनीति, संगठन के आगामी कार्यक्रमों और राजनीतिक मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई। निकाय चुनाव के लिए 'मिशन मोड' में बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष मोहनलाल बड़ौली ने स्पष्ट किया कि पार्टी निकाय चुनावों को लेकर पूरी तरह तैयार है। प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि चुनाव के लिए निकाय चुनाव वाले क्षेत्रों के लिए एक विशेष कमेटी बनाई जाएगी। यह कमेटी 16 से 18 अप्रैल तक संबंधित निगम, परिषद और पालिकाओं का दौरा करेगी। इस बीच कमेटी स्थानीय विधायकों, वरिष्ठ नेताओं और पदाधिकारियों से मुलाकात कर संभावित उम्मीदवारों के नाम पर चर्चा करेगी और अपनी रिपोर्ट सौंपेगी। उम्मीदवारों के नामों पर अंतिम मुहर लगाने के लिए 20 अप्रैल को प्रदेश चुनाव समिति की बैठक बुलाई गई है। संगठनात्मक चर्चा और विपक्षी घेराबंदी बैठक के बाद वरिष्ठ बीजेपी नेता और पूर्व वित्त मंत्री कैप्टन अभिमन्यु ने बताया कि बैठक में 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम', पीएम के 'मन की बात' कार्यक्रम और डॉ. भीमराव अंबेडकर जयंती के आयोजनों पर भी मंथन हुआ। पार्टी अंबेडकर जयंती को बूथ स्तर से लेकर राज्य स्तर तक बड़े उत्साह के साथ मना रही है। बैंक फ्रॉड मामला: पंचकूला नगर निगम के 160 करोड़ रुपये के बैंक फ्रॉड पर बड़ौली ने कहा कि सरकार को पूरा पैसा ब्याज समेत वापस मिल चुका है और विपक्ष के पास अब कोई मुद्दा नहीं बचा है। कैप्टन अभिमन्यु का विपक्ष पर तीखा हमला कैप्टन अभिमन्यु ने मंडियों में फसल खरीद की व्यवस्था को लेकर कांग्रेस और भूपेंद्र सिंह हुड्डा पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने याद दिलाया कि 2014 से पहले हुड्डा सरकार में किसानों को दो-दो रुपये के चेक मिलते थे और खाद के लिए थानों से पर्चियां कटवानी पड़ती थीं। आज किसानों के खातों में 24 से 48 घंटे के भीतर सीधे पैसा (DBT) पहुंच रहा है, जो पहले के समय में सपना था। कैप्टन ने कहा कि कहा कि विपक्ष केवल विरोध के लिए विरोध कर रहा है, जबकि केंद्र सरकार महिला सशक्तिकरण के लिए ऐतिहासिक कदम उठा रही है।  

Haryana Police Update: 22 HPS अधिकारियों का IPS में प्रमोशन तय, मुख्य सचिव ने दी हरी झंडी

चंडीगढ़. हरियाणा पुलिस सेवा के 22 अफसरों को जल्द ही आईपीएस.में प्रमोशन का तोहफा मिल जाएगा। इसके लिए सरकार स्तर पर कवायद तेज हो गई है। इस बार प्रमोशन की डीपीसी संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) मुख्यालय के बजाए चंडीगढ़ में हो सकती है। बताया गया कि मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी ने खराब स्वास्थ्य कारणों से दिल्ली की मीटिंग में शामिल नहीं होने का अनुरोध आयोग से किया था। जिस पर आयोग ने चंडीगढ़ में मीटिंग करने की अपनी सहमति दे दी है। दरअसल डीपीसी में मुख्य सचिव की मौजूदगी जरूरी होती है। सूत्रों की माने, तो इसी सप्ताह डीपीसी की बैठक हो सकती है। मीटिंग में आयोग की ओर से सचिव सहित कुछ नामित सदस्य आते हैं। जिसमें मुख्य सचिव और एसीएस होम सुधीर राजपाल मौजूद रहेंगे। IPS बनने का इन अफसरों को मौका महीनों पहले मुख्य सचिव की ओर से 22 अफसरों को इंटेग्रिटी सर्टीफिकेट जारी किए गए थे। इनमें मुकेश कुमार, ध्यान सिंह पुनिया, धर्मवीर सिंह, चलजिंद्र सिंह, जयबीर सिंह, कुशाल सिंह, राजकुमार वालिया, ताहिर हुसैन, नरेंद्र सिंह, रविंद्र कुमार, राजेश कुमार, ममता खर्ब, रविंद्र विजय सिंह, सिद्वार्थ ढांडा, करण गोयल, संदीप कुमार, पूनम, भारती डबास, अमित दहिया, ऊषा देवी और जितेंद्र गहलावत सहित शामिल हैं।

Housing Scheme Update: 13 करोड़ की पहली किश्त जारी, हजारों गरीब परिवारों को मिलेगा लाभ

पंचकूला. हरियाणा के विभिन्न शहरों में 2646 गरीब परिवारों को जल्द ही प्रधानमंत्री आवास योजना-शहरी (पीएमएवाई-यू) 2.0 के तहत मकान मिलेंगे। मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी की अध्यक्षता में मंगलवार को आयोजित राज्य स्तरीय स्वीकृति एवं निगरानी समिति (एसएलएसएमसी) की बैठक में 51 शहरी स्थानीय निकायों के 2409 लाभार्थियों की परियोजनाओं को मंजूरी दी गई। इसी दौरान नौ अन्य शहरी स्थानीय निकायों में 237 अतिरिक्त लाभार्थियों की परियोजनाओं को भी स्वीकृति प्रदान की गई। इस प्रकार कुल 60 शहरी स्थानीय निकायों में गरीब परिवारों के लिए आवासीय परियोजनाएं स्वीकृत की गई हैं। सभी के लिए आवास विभाग के आयुक्त एवं सचिव मोहम्मद शाइन ने बताया कि केंद्र सरकार के यूनिफाइड वेब पोर्टल के माध्यम से अब तक एक लाख 69 हजार 483 आवेदकों ने आवास मांगे हैं। इनमें से 97 हजार 584 आवेदन बेनिफिशियरी लेड कंस्ट्रक्शन (बीएलसी) श्रेणी में हैं, जबकि 71 हजार 899 आवेदन अफोर्डेबल हाउसिंग इन पार्टनरशिप (एएचपी) श्रेणी में हैं। 46902 आवेदनों का हुआ सत्यापन बीएलसी श्रेणी के अंतर्गत अब तक 46 हजार 902 आवेदनों का सत्यापन किया जा चुका है। इनमें से 17 हजार 465 आवेदन स्वीकृत और 29 हजार 437 आवेदन अस्वीकृत किए गए हैं। इसके अलावा 12 हजार 552 मकानों की जियो टैगिंग भी की जा चुकी है, जो लाभार्थियों को केंद्रीय सहायता जारी करने के लिए एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया है। पीएमएवाई-यू 2.0 के तहत 17 हजार 430 लाभार्थियों की आवास परियोजनाओं को केंद्र सरकार द्वारा मंजूरी दी जा चुकी है। यह मंजूरी पिछले साल 20 मार्च और 15 अक्टूबर को बैठकों में दी गई। केंद्र सरकार द्वारा 2174 मकानों के लिए केंद्रीय हिस्से की पहली किस्त के रूप में 13 करोड़ रुपये जारी किए जा चुके हैं। पीएमएवाई यू 2.0 के तहत मिलेंगे ढाई लाख रुपये पीएमएवाई-यू 2.0 के बीएलसी घटक के तहत पात्र लाभार्थियों को पक्का मकान बनाने के लिए ढाई लाख रुपये दिए जाते हैं, जिसमें डेढ़ लाख केंद्र सरकार और एक लाख राज्य सरकार देती है। मकान का न्यूनतम कार्पेट एरिया 30 वर्ग मीटर तथा अधिकतम 45 वर्ग मीटर निर्धारित किया गया है। इसके अलावा सभी 87 शहरी स्थानीय निकायों और तीन शहरी विकास प्राधिकरणों में 32 सिटी लेवल टेक्निकल सेल क्लस्टर स्थापित करने का प्रस्ताव है।

Punjab Crime: इंस्टाग्राम वीडियो ने खोली ‘चिट्टे’ नेटवर्क की पोल, लुधियाना में हड़कंप

लुधियाना. लुधियाना के मॉडल टाउन स्थित मनहोर नगर मंडी एक बार फिर सुर्खियों में है, जहां कथित तौर पर ‘चिट्टे’ (नशे) के कारोबार का मामला सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो के बाद गरमा गया है। इंस्टाग्राम पर परमिंदर काका द्वारा सांझा की गई वीडियो तेजी से फैल रही है, जिसमें इलाके में खुलेआम नशे के व्यापार के आरोप लगाए गए हैं। वीडियो सामने आने के बाद स्थानीय निवासियों में भारी रोष देखने को मिल रहा है। लोगों का कहना है कि इस इलाके में लंबे समय से नशे का कारोबार धड़ल्ले से चल रहा है, इलाके में तस्करों के हौसले बुलंद हैं। इलाके के लोगों का कहना है कि पुलिस रेड से पहले  ही आरोपी मौके से सारा सामान हटा कर फरार हो जाते हैं। गौरतलब है कि कुछ दिन पहले भी पुलिस ने मनहोर नगर मंडी में छापेमारी की थी, लेकिन मौके से कुछ भी बरामद नहीं हुआ। परमिंदर काका ने अपनी वायरल वीडियो के माध्यम से पुलिस कमिश्नर (CP) से अपील करते हुए कहा है कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच करवाई जाए। उन्होंने मांग की है कि न केवल नशा तस्करों पर सख्त कार्रवाई हो। स्थानीय लोगों का कहना है कि नशे का यह काला कारोबार इलाके के युवाओं को बर्बादी की ओर धकेल रहा है। अभिभावकों में डर का माहौल है और वे प्रशासन से जल्द से जल्द ठोस कदम उठाने की मांग कर रहे हैं। अब सोशल मीडिया पर मामला उछलने के बाद प्रशासन पर दबाव बढ़ गया है। देखना होगा कि पुलिस इस मामले में क्या कदम उठाती है और क्या सच में इस नेटवर्क का पर्दाफाश हो पाता है या नहीं।

प्रदूषण रोकथाम,गाजियाबाद फैक्टरियों में धुएं पर नई सीमा लागू

 गाज़ियाबाद गाजियाबाद जिले की 385 फैक्टरियों की चिमनियों से निकलने वाले धुएं पर इस साल लगाम लगेगी। फैक्टरियों से निकलने वाले धुएं में सूक्ष्म कणों (पार्टिकुलेट मैटर) की मात्रा 80 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर से 50 तक लाना होगा। इसके लिए 30 सितंबर तक की समयसीमा तय की गई है। जिले के लोनी, ट्रोनिका सिटी और साहिबाबाद समेत एक दर्जन से अधिक औद्योगिक क्षेत्रों में लंबे समय से फैक्टरियों से निकलने वाला धुआं वायु प्रदूषण का बड़ा कारण रहा है। सर्दियों में तापमान गिरने के साथ यही धुआं स्मॉग में बदलकर स्थिति को और गंभीर बना देता है। इस साल बिगड़े हालातों को देखते हुए वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) ने निर्णय लिया था कि अब प्रदूषण फैलाने वाली फैक्टरियों के धुएं में पीएम की मात्रा को 80 से 50 करना है। सभी चिह्नित फैक्टरियों को नोटिस भेजे जा रहे जिले में रेड और येलो जोन वाली ऐसी 385 फैक्टरी हैं, जिनसे प्रदूषण फैलता है। इन फैक्टरियों को धुएं में 80 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर तक सूक्ष्म कण छोड़ने की अनुमति थी, जिसे अब घटाकर 50 कर दिया गया है। यानी धुएं में मौजूद महीन कणों को करीब 35 से 40 फीसदी तक कम करना होगा। यही कण सांस के जरिए शरीर में जाकर फेफड़ों और हृदय से जुड़ी बीमारियों का कारण बनते हैं। अधिकारियों ने बताया कि इसके लिए सभी चिह्नित फैक्टरियों को नोटिस भेजे जा रहे हैं। इकाइयों की ऑनलाइन निगरानी की जाएगी सभी फैक्टरियों में ऑनलाइन सतत निगरानी प्रणाली लगाने के पहले से निर्देश हैं। ऐसा न करने वाली 55 इकाईयों को बीते दिनों सील भी किया गया था। इसी प्रणाली से नए मानकों का उल्लंघन भी सीधे केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) को पता चल जाएगा। 30 सितंबर तक नए मानकों का पालन न हुआ तो एक अक्तूबर से सतत निगरानी प्रणाली के ही जरिए उल्लंघन करने वाली फैक्टरियों को चिह्नित कर कार्रवाई की जाएगी। मैदान में 16 टीमें उतारी गईं सीएक्यूएम ने जिले में नए मानकों को लागू कराने के लिए 16 टीमें उतारी हैं। ये टीमें चिह्नित फैक्टरियों में जाएंगी और चिमनी का निरीक्षण कर उद्यमियों को बताएंगी कि धुएं में पीएम की मात्रा कैसे घटाई जाए। हर फैक्टरी का उत्पादन अलग होता है और उसी के अनुसार धुएं की प्रकृति भी बदलती है। ऐसे में एक ही समाधान सभी पर लागू नहीं किया जा सकता। टीमें फैक्टरी के काम का आकलन कर उसी हिसाब से सुधार के सुझाव दे रही हैं। अंकित सिंह, क्षेत्रीय अधिकारी, यूपीपीसीबी, ''सीएक्यूएम के निर्देश पर फैक्टरियों को नोटिस भेजे जा रहे हैं कि धुएं में पीएम की मात्रा 50 तक लाने की प्रक्रिया शुरू कर दें। पालन न करने वाली इकाइयों को एक अक्टूबर से बंद कराया जाएगा।''

Haryana News: इंडस्ट्रियल प्लॉट केस में भूपेंद्र हुड्डा पर कसा शिकंजा, जांच तेज

पंचकूला. हरियाणा की राजनीति में एक बार फिर बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। CLP लीडर भूपेंद्र सिंह हुड्डा की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं, क्योंकि औद्योगिक भूखंड आवंटन मामले में उनके खिलाफ केस चलाने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। जानकारी के अनुसार, यह मामला औद्योगिक प्लॉट के आवंटन से जुड़ा हुआ है, जिसमें अनियमितताओं के आरोप लगाए गए थे। अब इस मामले में कार्रवाई आगे बढ़ाई गई है और केस चलाने की अनुमति मिल गई है। बताया जा रहा है कि इस मामले में HUDA (हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण) के दो अधिकारियों के नाम भी शामिल हैं, जिससे मामला और गंभीर हो गया है। इस घटनाक्रम के बाद राज्य की राजनीति में हलचल तेज हो गई है और विपक्ष भी इस मुद्दे को लेकर सक्रिय हो सकता है। फिलहाल जांच एजेंसियां मामले की आगे की प्रक्रिया में जुटी हुई हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है। पंचकूला औद्योगिक भूखंड आवंटन मामले में ईडी की अभियोग शिकायत में हुड्डा को मुख्य साजिशकर्ता के रूप में शामिल किया गया है। एजेंसी ने आरोप लगाया कि उसने अवैध आवंटन की वास्तव में योजना बनाई और चयनित आवंटियों के हित में पात्रता मानदंडों में बदलाव किया। आरोपी आवंटियों को हुडा से जोड़ते हुए, ईडी ने कहा कि रेनू हुड्डा और नंदिता हुड्डा उनके पैतृक गांव सांघी की रहने वाली थी। कंवर प्रीत सिंह संधू उनके सहपाठी डीडी संधू के बेटे थे। मोना बेरी उनके ओएसडी बलदेव राज बेरी की बहू थी। डॉ. गणेश दत्त रतन उनके साथ टेनिस खेलते थे और प्रदीप कुमार उनके निजी सचिव सिंह राम के बेटे थे। ईडी ने आगे दावा किया कि आवंटन पाने वाले अशोक वर्मा के ससुर, अशोक काका, कांग्रेस शासन के दौरान एचएएफईडी के अध्यक्ष थे और हुड्डा उन्हें जानते थे। अमन गुप्ता के पिता रमेश गुप्ता थानेसर के पूर्व विधायक थे और हुड्डा से अच्छी तरह परिचित थे। लेफ्टिनेंट कर्नल ओपी दहिया (रिटायर) पूर्व कांग्रेस विधायक करण दलाल के रिश्तेदार हैं। डागर कात्याल के पिता सुनील कात्याल हरियाणा सेवा अधिकार आयोग में आयुक्त रह चुके थे और हुड्डा उन्हें जानते थे। मनजोत कौर न्यायमूर्ति एमएस सुल्लर (रिटायर) की बहू हैं, जो हुड्डा की परिचित थी। सिद्धार्थ भारद्वाज के पिता संजीव भारद्वाज 2004 में एचपीसीसी सचिव थे, 2005 में पार्टी छोड़ दी और 2016 में फिर से पार्टी में शामिल हो गए।

हरियाणा का नया प्लान: बैंक्वेट हॉल से लेकर गार्डन तक, एक ही जगह पूरी शादी की व्यवस्था

गुरुग्राम हरियाणा के गुरुग्राम में वेडिंग सिटी विकसित करने की तैयार शुरू हो चुकी है। इसके लिए एचएसआईआईडीसी के प्लानिंग विंग की ओर से फाजिलवास गांव की 186 एकड़ जमीन की पहचान की गई है। मुख्यालय इस परियोजना पर काम कर रहा है। हरियाणा राज्य औद्योगिक एवं अवसंरचना विकास निगम (एचएसआईआईडीसी) की योजना के मुताबिक इन वेडिंग सिटी में सगाई से लेकर विदाई तक की सभी रस्मों के लिए एकीकृत सुविधाएं उपलब्ध होंगी। इसमें बैंक्वेट हॉल, ओपन गार्डन, कैटरिंग जोन, डेकोरेशन सेवाएं, गेस्ट हाउस, ट्रांसपोर्ट, शापिंग एरिया और मनोरंजन जोन शामिल होंगे। शादी से जुड़े हर कार्यक्रम एक ही परिसर में हो सकेगा। अधिकारियों ने कहा कि अभी गुरुग्राम में ग्लोबल सिटी विकसित किया जा रहा है। इसके बाद विजन सिटी परियोजना पर काम शुरू होगा। इसके साथ वेडिंग सिटी की तैयारियों को लेकर काम किया जा रहा है। रोजगार के अवसर पैदा होंगे एचएसआईआईडीसी प्रबंध निदेशक सुशील सरवन ने कहा कि इस परियोजना का उद्देश्य शादी जैसे बड़े आयोजनों को एक ही स्थान पर सुव्यवस्थित करना है। इससे स्थानीय कारोबार को बढ़ावा देना और रोजगार के नये अवसर पैदा करेगा। लोगों को अपने ही राज्य में डेस्टिनेशन वेडिंग के लिए रोके रखना है। यह वेडिंग सिटी वोकल फार लोकल की अवधारणा को ध्यान में रखकर तैयार किए जाएंगे, ताकि राज्य की संस्कृति को बढ़ावा मिल सके। गुरुग्राम के अलावा खरखौदा और पिंजौर में भी वेडिंग सिटी विकसित किया जाएगा। कारोबार को बढ़ावा मिलेगा वेडिंग सिटी विकसित होने से वोकल फार लोकल को सीधा लाभ मिलेगा। इसमें स्थानीय कारीगरों, बुटीक, ज्वेलर्स और सजावट को स्थायी बाजार मिलेगा। छोटे व्यापारियों को बड़े आयोजनों से जुड़ने का मौका मिलेगा। इनमें हजारों युवाओं को रोजगार मिलने की संभावना है। इवेंट मैनेजमेंट, होटल, ट्रांसपोर्ट और फूड सेक्टर में नौकरियां बढ़ेंगी। स्थानीय युवाओं को कौशल विकास के अवसर मिलेंगे। गुरुग्राम को पर्यटन को बढ़ावा मिलने की संभावना अधिक होगा। इससे स्थानीय कारोबार को बढ़ावा मिलेगा।

पंचकूला में ‘समता रन’ का आगाज: CM सैनी बोले—अंबेडकर के विचारों पर चलेगा देश

पंचकूला. पंचकूला में डॉ. बी.आर. अंबेडकर की 135वीं जयंती के उपलक्ष्य में मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने 'समता रन' को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस अवसर पर उन्होंने उपस्थित जनसमूह को संबोधित कर कहा कि बाबा साहेब ने भारतीय संविधान के माध्यम से देश के सम्मान और गरिमा को सुरक्षित किया है। मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा कि डॉ. अंबेडकर का मूल मंत्र प्रत्येक व्यक्ति को समान सम्मान दिलाना था और हरियाणा सरकार उनके इन्हीं आदर्शों एवं संवैधानिक मूल्यों को जमीन पर लागू करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। दौड़ शुरू करने से पहले मुख्यमंत्री नायब सैनी ने कहा कि "बाबा साहेब ने न केवल हमें संविधान दिया, बल्कि उन्होंने हमारे देश के सम्मान और गरिमा को भी सुरक्षित किया। उनका संदेश साफ था, भारत में हर व्यक्ति को समान सम्मान मिलना चाहिए। आज की यह दौड़ उसी प्रतिबद्धता की याद दिलाती है।"

अकुशल से लेकर कुशल श्रमिकों तक को राहत, जानिए हरियाणा का नया वेतन ढांचा

गुरुग्राम  हरियाणा सरकार ने राज्य में सभी तरह के कामों में लगे अकुशल मजदूरों के लिए न्यूनतम मजदूरी की मूल दरों में संशोधन किया है। ये नई दरें 1 अप्रैल, 2026 से लागू होंगी। हरियाणा सरकार की एक अधिसूचना के अनुसार, यह संशोधन 'मजदूरी संहिता, 2019' (Code on Wages, 2019) के प्रावधानों के तहत किया गया है। यह संशोधन, मजदूरी के स्तर की समीक्षा के लिए गठित समिति द्वारा दी गई सिफ़ारिशों के आधार पर किया गया है। नोटिफिकेशन में आगे कहा गया है कि ऊपर बताए गए न्यूनतम वेतन की दरें मूल न्यूनतम वेतन दरें हैं, जिन्हें एम्प्लॉयर द्वारा भत्तों के रूप में अलग-अलग हिस्सों में बांटने की अनुमति नहीं है। कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स नंबर में होने वाली बढ़ोतरी या कमी का 100% समायोजन (न्यूट्रलाइजेशन) आनुपातिक आधार पर किया जाएगा। वेतन में आगे का समायोजन 'कोड ऑन वेजेस रूल्स, 2026' में बताए अनुसार किया जाएगा। अब तय/संशोधित की जा रही न्यूनतम वेतन दरें इस लिंकेज के कारण प्रभावित नहीं होंगी, यानी वेतन उन दरों से नीचे नहीं गिरेगा जो अब तय/संशोधित की जा रही हैं। 1 अप्रैल, 2026 से हरियाणा में न्यूनतम वेतन नोटिफिकेशन के अनुसार, न्यूनतम वेतन कौशल स्तरों (skill levels) के आधार पर तय किया गया है। नई मासिक और दैनिक वेतन दरें इस प्रकार हैं: संशोधित वेतन संरचना के तहत, हरियाणा में अकुशल श्रमिकों को न्यूनतम 15,220.71 रुपये प्रति माह वेतन मिलेगा। अर्ध-कुशल श्रमिकों के लिए, न्यूनतम वेतन 16,780.74 रुपये प्रति माह तय किया गया है। कुशल श्रमिकों को कम से कम 18,500.81 रुपये प्रति माह मिलेंगे। ये दरें उन श्रमिकों पर लागू होंगी जो वेतन कानून के दायरे में आने वाले प्रतिष्ठानों, कारखानों और ठेका श्रम व्यवस्थाओं में कार्यरत हैं। मजदूरों की श्रेणी     महीने का न्यूनतम वेतन     दैनिक न्यूनतम भुगतान अकुशल                        15,220.71                        585.41 अर्द्ध कुशल                    16,780.74                        645.41 कुशल                           18,500.81                        711.56 अत्यधिक कुशल            19,425.85                        747.14 हरियाणा में पुरुष और महिला श्रमिकों का वेतन क्या होगा? नोटिफिकेशन में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि पुरुष और महिला श्रमिकों को दिए जाने वाले वेतन में कोई अंतर नहीं होगा। एम्प्लॉयर्स को यह सुनिश्चित करना होगा कि समान कौशल और अनुभव की आवश्यकता वाले समान श्रेणी के कार्यों के लिए समान भुगतान किया जाए। एम्प्लॉयर्स और ठेकेदारों की जिम्मेदारी स्पष्ट की गई जहां इनमें से कोई भी यदि ऊपर बताई गई मजदूरों की श्रेणियां किसी ठेकेदार या सेवा प्रदाता के माध्यम से काम पर रखी जाती हैं या नियुक्त की जाती हैं, तो उस जगह का मालिक या मुख्य नियोक्ता, ठेकेदार या सेवा प्रदाता द्वारा न्यूनतम मजदूरी दरों का भुगतान सुनिश्चित करने के लिए व्यक्तिगत रूप से ज़िम्मेदार होगा। संशोधित न्यूनतम मजदूरी का दायरा हरियाणा राज्य में किसी भी रोज़गार में काम करने वाले किसी भी मज़दूर या कर्मचारी को, उसी श्रेणी के लिए तय की गई न्यूनतम मजदूरी से कम भुगतान नहीं किया जाएगा, बशर्ते कि उनके कौशल और अनुभव समान हों। मासिक वेतन या मजदूरी की गणना कैसे की जाएगी? दैनिक मजदूरी तय करने के लिए मासिक वेतन को 26 दिनों से विभाजित किया जाएगा, लेकिन किसी भी कटौती का निर्धारण मासिक वेतन को 30 दिनों से विभाजित करके किया जाएगा, या जैसा कि संबंधित सरकार समय-समय पर निर्धारित कर सकती है।