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Haryana Election Update: NOTA का असर खत्म, हारकर भी जीत सकता है रनर-अप उम्मीदवार

चंडीगढ़. स्थानीय निकायों के चुनाव में अगर नोटा (उपरोक्त में से कोई नहीं) सर्वाधिक वोट लेता है तो भी जीत नहीं पाएगा। ऐसी स्थिति में दूसरे स्थान पर रहने वाले प्रत्याशी को विजेता घोषित कर दिया जाएगा। नवंबर 2018 में जारी व्यवस्था को राज्य निर्वाचन आयुक्त देवेंद्र सिंह कल्याण ने निरस्त कर दिया है। निकाय चुनाव में पिछली बार की तरह ईवीएम (इलेक्ट्रानिक वोटिंग मशीन) पर सबसे अंत में नोटा का बटन रहेगा। लेकिन नोटा के पास इस बार चुनाव रद कराने की क्षमता नहीं होगी। राज्य चुनाव आयुक्त देवेन्द्र सिंह कल्याण ने विगत 7 अप्रैल को नया आदेश जारी कर 2018 में तत्कालीन राज्य निर्वाचन आयुक्त डॉ. दलीप सिंह द्वारा जारी पिछले आदेश को निरस्त कर दिया है। तब व्यवस्था की गई थी कि चुनावों में नोटा को कल्पित चुनावी प्रत्याशी माना जाएगा और उसके पक्ष में पड़े सभी वोट को रिकार्ड पर लिया जाएगा। अगर नोटा के पक्ष में डाले गए वोट अन्य प्रत्याशियों से अधिक हैं तो किसी भी प्रत्याशी को उस वार्ड से निर्वाचित घोषित नहीं किया जाएगा। आयोग द्वारा उस चुनावी क्षेत्र में वह चुनाव रद कर दोबारा चुनाव करवाया जाएगा जिसमें पिछला चुनाव लड़ने वाले प्रत्याशियों को शामिल होने नहीं दिया जाएगा। यानी कि केवल नए प्रत्याशी ही चुनाव लड़ सकते थे। हालांकि दूसरी बार के चुनाव में भी नोटा को सर्वाधिक वोट मिलने की स्थिति में दूसरे नंबर के प्रत्याशी को विजयी घोषित करने की व्यवस्था की गई थी। पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट के एडवोकेट हेमंत कुमार ने बताया कि नए आदेश में स्पष्ट किया गया है कि अब अगर किसी स्थानीय चुनाव में नोटा को सर्वाधिक वोट मिलते हैं, तो भी चुनाव रद नहीं होगा। नोटा के बाद दूसरे नंबर पर सर्वाधिक वोट लेने वाले उम्मीदवार को निर्वाचित घोषित कर दिया जाएगा। नोटा को डाले गए वोटों को चुनाव लड़ रहे उम्मीदवारों द्वारा जमानत राशि बचाने के लिए जरूरी न्यूनतम 12.5 प्रतिशत वोटों की गणना में भी शामिल नहीं किया जाएगा। सुप्रीम कोर्ट के तीन जजों की बेंच द्वारा सितंबर 2013 में दिए गए एक निर्णय पीयूसीएल बनाम भारत सरकार में चुनावों में नोटा के विकल्प का प्रविधान डालने बारे भारतीय चुनाव आयोग को निर्देश तो दिया था, परंतु उसमें ऐसा कुछ नही था जैसा कि हरियाणा निर्वाचन आयोग ने नवंबर 2018 से व्यवस्था लागू कर रखी थी।

पंचकूला में अंबेडकर जयंती पर समता रन मैराथन, सीएम सैनी ने दी शुरुआत और समाज को दिया महत्वपूर्ण संदेश

पंचकूला बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर की जयंती के अवसर पर हरियाणा के पंचकूला में मंगलवार को 'समता रन' मैराथन का आयोजन किया गया। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने मैराथन को झंडी दिखाई। इस कार्यक्रम में हरियाणा सरकार के कई मंत्री और विधायकों ने हिस्सा लिया। मुख्यमंत्री सैनी ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि बाबा साहेब शिक्षा को सबसे बड़ा हथियार मानते थे। उन्होंने हमें यह संदेश दिया और कहा कि 'शिक्षित बनो, संगठित बनो और संघर्ष करो।' हमें इन शब्दों को अपने जीवन में अपनाना चाहिए। सीएम योगी ने कहा कि शिक्षा, जागरुकता और एकता के माध्यम से समाज में सकारात्मकता और परिवर्तन लाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि मैराथन में भाग लेने वाले सभी प्रतिभागियों को शुभकामनाएं देता हूं। आप इस मैराथन में पूरे उत्साह और ऊर्जा के साथ दौड़े। सीएम सैनी ने कहा, "समाज में समानता और न्याय के संदेश के फैलाने का एक संदेश हमें देना चाहिए। यह दौड़ सिर्फ आपके पैरों की गति नहीं, बल्कि आपके विचारों की शक्ति को भी प्रदर्शित करेगी।" मुख्यमंत्री सैनी ने आगे कहा, "मैं एक बार फिर बाबासाहेब को नमन करता हूं। सभी से आह्वान करता हूं कि उनके दिखाए हुए मार्ग पर हम निरंतर आगे बढ़ते रहें। हम सभी मिलकर एक ऐसे भारत का निर्माण करें, जो समता, न्याय और बंधुत्व के मूल्यों पर आधारित हो। इसी विश्वास और संकल्प के साथ हम सभी मिलकर समता मैराथन को सफल बनाएं और समाज में सकारात्मक बदलाव की एक नई शुरुआत करें। इससे पहले, मुख्यमंत्री नायब सैनी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर पोस्ट के जरिए भीमराव अंबेडकर को श्रद्धांजलि दी। उन्होंने लिखा, "भारतीय संविधान निर्माता एवं सामाजिक समरसता के प्रतीक भारत रत्न बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर जी की जयंती पर उन्हें कोटि-कोटि नमन। बाबासाहेब की ओर से स्थापित सामाजिक न्याय और समानता की सुदृढ़ नींव आज भी राष्ट्र को एकजुट, सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में हमारा मार्गदर्शन कर रही है।"

स्पोर्ट्स में हरियाणा की नई रणनीति: टैलेंट हंट के जरिए ओलंपिक तक पहुंचाने की तैयारी – गौरव गौतम

चंडीगढ़. हरियाणा सरकार द्वारा खिलाड़ियों के लिए अच्छी योजनाएं निर्धारित करने का लक्ष्य निर्धारित होगा जिसको लेकर लगातार खेल विभाग के अधिकारियों को मंत्री गौरव गौतम की तरफ से दिशा निर्देश दिए जा रहे हैं। देश और प्रदेश में खेलों के भविष्य को मजबूत बनाने के लिए सरकार और खेल संस्थाएं अब युवा खिलाड़ियों पर विशेष ध्यान दे रही हैं। नई योजनाओं के तहत स्कूल और जिला स्तर से ही प्रतिभाओं को पहचानकर उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाने की रणनीति बनाई जा रही है। भारत में खेल संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए कई नई पहलें शुरू की गई हैं, जिनका मुख्य उद्देश्य युवाओं को शुरुआती स्तर से ही सही प्रशिक्षण और संसाधन उपलब्ध कराना है। ‘टैलेंट सर्च प्रोग्राम’ के जरिए गांव और छोटे शहरों से उभरते खिलाड़ियों को चिन्हित किया जा रहा है। खेल मंत्रालय द्वारा संचालित योजनाओं में खिलाड़ियों को बेहतर कोचिंग, आधुनिक सुविधाएं और आर्थिक सहायता प्रदान की जा रही है। इसके साथ ही स्कूलों और कॉलेजों में खेल को अनिवार्य बनाने पर भी जोर दिया जा रहा है, ताकि अधिक से अधिक युवा इसमें भाग ले सकें। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सही दिशा में निवेश और मार्गदर्शन जारी रहा, तो आने वाले वर्षों में भारत अंतरराष्ट्रीय खेल प्रतियोगिताओं में बेहतर प्रदर्शन कर सकता है। ओलंपिक 2036 को ध्यान में रखते हुए अभी से युवा खिलाड़ियों की तैयारी शुरू कर दी गई है। युवा खिलाड़ियों पर बढ़ता फोकस न केवल देश के खेल भविष्य को मजबूत करेगा, बल्कि नई पीढ़ी को फिट और अनुशासित जीवनशैली अपनाने के लिए भी प्रेरित करेगा।

हाईकोर्ट की सख्ती: निजी कंपनी पर 3 लाख का जुर्माना, याचिका खारिज

 चंडीगढ़  पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने न्यायिक प्रक्रिया के दुरुपयोग पर कड़ा रुख अपनाते हुए एक निजी निर्माण कंपनी पर तीन लाख का जुर्माना लगाया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि अब समय आ गया है जब केवल सरकारी अधिकारियों पर ही नहीं, बल्कि निराधार और फालतू याचिकाएं दायर करने वाले निजी पक्षकारों पर भी सख्त कार्रवाई की जाए। यह आदेश जस्टिस सुदीप्ति शर्मा की पीठ ने एम/एस वी के कंस्ट्रक्शन द्वारा दायर अवमानना याचिका को खारिज करते हुए सुनाया। कंपनी ने आरोप लगाया था कि रोहतक-बावल राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजना का कार्य पूरा करने के बावजूद उसके बिलों का भुगतान नहीं किया गया और संबंधित अधिकारियों के खिलाफ अवमानना कार्रवाई की जाए।हालांकि सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि यह याचिका उसी मामले में दूसरी अवमानना याचिका है। इससे पहले 2023 के आदेश के अनुपालन न होने पर एक अवमानना याचिका दायर की गई थी, जिसे मई 2025 में यह कहते हुए निपटा दिया गया था कि संबंधित प्राधिकरण ने याचिकाकर्ता की शिकायत पर निर्णय ले लिया है।अदालत ने कहा कि इसके बावजूद दोबारा अवमानना याचिका दायर करना न्यायिक प्रक्रिया का “स्पष्ट दुरुपयोग” है। कोर्ट ने टिप्पणी की कि इस प्रकार की याचिकाएं न केवल अदालत के बहुमूल्य समय की बर्बादी करती हैं, बल्कि सरकारी अधिकारियों को अनावश्यक रूप से परेशान भी करती हैं। पीठ ने अपने आदेश में कहा कि अवमानना क्षेत्राधिकार का प्रयोग अत्यंत सावधानी और विवेक के साथ किया जाना चाहिए और केवल उन्हीं मामलों में किया जाना चाहिए, जहां आदेश की जानबूझकर अवहेलना स्पष्ट रूप से सिद्ध हो। इसे व्यक्तिगत द्वेष निकालने या अधिकारियों को परेशान करने के साधन के रूप में इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। अदालत ने यह भी कहा कि सामान्यत जब अधिकारी कोर्ट के आदेशों का पालन नहीं करते, तो उन पर जुर्माना लगाया जाता है और यह राशि उनके वेतन से वसूली जाती है। लेकिन वर्तमान मामला इसका उल्टा उदाहरण है, जहां अधिकारियों ने अपने कर्तव्यों का सही ढंग से निर्वहन किया, फिर भी उन्हें निशाना बनाया गया। कोर्ट ने कहा कि बार-बार निराधार याचिकाएं दाखिल करने से न केवल न्यायिक संसाधनों की बर्बादी होती है, बल्कि वास्तविक मामलों की सुनवाई भी प्रभावित होती है। इसलिए ऐसे मामलों में सख्त संदेश देना जरूरी है। अदालत ने कहा कि न्यायिक प्रक्रिया की गरिमा बनाए रखने और उसके दुरुपयोग को रोकने के लिए याचिकाकर्ता पर तीन लाख का जुर्माना लगाया जाता है, ताकि भविष्य में इस प्रकार की प्रवृत्ति पर अंकुश लगाया जा सके।

67 करोड़ बकाया वसूली के लिए बिजली विभाग का बड़ा एक्शन प्लान

करनाल एक लाख रुपये से अधिक राशि के डिफाल्टरों को बिजली निगमों ने निशाने पर ले लिया है। करोड़ों रुपये की अपनी रिकवरी करने के लिए बिजली निगम पहली बार सख्ती बरतते हुए डिफाल्टर उपभोक्ताओं की संपत्ति नीलाम की प्रक्रिया अपनाएगा। सबसे पहले एसडीओ संबंधित उपभोक्ता को तीन नोटिस देगा और इसके बाद कार्यकारी अभियंता एक नोटिस देगा। इसके बाद भी उपभोक्ता द्वारा बिल अदा नहीं किया तो निगम बैंक की तर्ज पर तहसीलदार के माध्यम से संबंधित की प्रॉपर्टी नीलाम करेगा। गौर हो कि हरियाणा में निगमों का 8247 करोड़ रुपये बकाया है। इनमें उत्तर हरियाणा का 3573 और दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम का 4674 करोड़ रुपये शामिल है। करनाल जिले की बात करें तो ऐसे 2710 डिफाल्टर हैं जिन पर करीब 67 करोड़ रुपये का बकाया है। इनमें सबसे अधिक 1178 डिफाल्टर सब अर्बन और मेरठ रोड क्षेत्र के उपभोक्ताओं पर हैं। इसलिए ऐसे डिफाल्टरों से बकाया वसूलने के लिए निगम ने सख्ती से पेश आने का फैसला लिया है। सबसे पहले एसडीओ अपने स्तर पर तीन बार और एक्सईएन अपने स्तर पर एक बार नोटिस जारी करेंगे। इसके बावजूद भुगतान न करने पर मामला तहसीलदार के पास भेजा जाएगा, जहां से अंतिम नोटिस जारी होगा। यदि डिफाल्टर फिर भी भुगतान नहीं करते हैं तो लैंड रिकवरी एक्ट के तहत उनकी जमीन, वाहन, मशीनें और यहां तक कि गहनों की भी नीलामी की जा सकती है। बिजली अधिकारियों के अनुसार, एक लाख रुपये से अधिक राशि वाले डिफाल्टरों पर ही यह विशेष जांच की जाएगी। डिफाल्टर नहीं खरीद बेच सकेगा प्रॉपर्टी जिले में ऐसे जितने भी बिजली बिल डिफाल्टर हैं, जिन्होंने सालों से लाख से करोड़ों रुपये का अपना बिल जमा नहीं करवाया है। जब तक वह ऐसा नहीं करते हैं तो भविष्य में वह अपनी प्रॉपर्टी खरीद व बेच नहीं सकेंगे। इस पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। निगम 26 डिफाल्टरों के केस भेज चुका: एसई बिजली निगम के अधीक्षक अभियंता नसीब सिंह ने बताया कि निगम ने ऐसे 26 डिफाल्टरों के केस जिनके ऊपर दो करोड़ 27 लाख का बिजली बिल पेंडिंग है, उनको तहसीलदार के पास भेज दिया है। आगे भी ऐसे लोगों की लिस्ट बनाकर तहसीलदार को भेजे जाएंगे। दो हजार से अधिक ऐसे डिफाल्टर हैं, जिनके ऊपर करोड़ों में बिल पेंडिंग हैं। लैंड रिकवरी एक्ट के तहत जमीन कुर्क की जा सकती है। सालों से है बिल बकाया जिले के सभी सब डिवीजनों में हजारों की संख्या में बिजली बिल न भरने के कारण डिफाल्टर घोषित किए हुए हैं जिनकी बिल की राशि बड़ी है और जिन्होंने सालों से बिजली का बिल नहीं जमा करवाया है। ऐसी स्थिति में कईयों के कनेक्शन काट दिए गए हैं। लेकिन बावजूद इसके कुछ उपभोक्ताओं को छोड़कर अभी भी डिफाल्टर बकाया बिल नहीं जमा करवा रहे हैं।  

फर्जी डॉक्टर नेटवर्क का भंडाफोड़, आहूजा अस्पताल मामले में पुलिस की बड़ी कार्रवाई

कानपूर किडनी ट्रांसप्लांट के मामले  में 25 हजार के इनामिया सरगना फर्जी डॉक्टर रोहित को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। इस मामले में कमिश्नरी पुलिस ने तीन फर्जी डॉक्टर अली, डॉ अफजल के खिलाफ 25-25 रूपये का इनाम घोषित किया था। पुलिस अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए दबिश दे रही है। मसवानपुर स्थित आहूजा अस्पताल में किडनी ट्रांसप्लांट की सूचना पर पुलिस ने 31 मार्च को स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के साथ दबिश दी थी। जहां से साक्ष्य के बाद पुलिस ने पनकी कल्याणपुर के प्रिया अस्पताल में छापेमारी की थी। जहां पुलिस को पारुल तोमर भर्ती मिलीं। ट्रांसप्लांट कर उन्हें किडनी लगाई गई थी, जबकिआवास विकास कल्याणपुर के मेडलाइफ अस्पताल में बिहार के बेगूसराय का आयुष चौधरी भर्ती मिला। जिसने अपनी किडनी पारुल को दी थी। मामले में रावतपुर थाने के दारोगा मुकेश कुमार ने रिपोर्ट दर्ज कराई। पुलिस ने आहूजा अस्पताल के संचालक डॉ. प्रीति आहूजा, उसके पति डॉ. सुरजीत सिंह आहूजा, एम्बुलेंस चालक शिवम अग्रवाल और मेडलाइफ व प्रिया अस्पताल के संचालकों को गिरफ्तार किया था। आरोपियों से पूछताछ में गाजियाबाद के डॉ. रोहित, डॉ. वैभव मुद्गल, डॉ. अनुराग के साथ ही ओटी मैनेजर अली और डॉ. अफजाल का नाम सामने आया था। पुलिस ने इनमें से डॉ. रोहित, डॉ. अफजाल व ओटी मैनेजर अली पर 25-25 हजार का इनाम घोषित किया था। रावतपुर पुलिस ने फर्जी डॉक्टर रोहित को गिरफ्तार कर लिया है बाकी अन्य। आरोपियों के लिए दबिश दी जा रही है। इस मामले में पुलिस कमिश्नर रघुबीर लाल सोमवार शाम प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सकते हैं।  

द्वारका एक्सप्रेसवे पर बिजवासन टोल के पास यू-टर्न अंडरपास की तैयारी शुरू

गुरुग्राम द्वारका एक्सप्रेसवे स्थित बिजवासन टोल प्लाजा पर यू-टर्न अंडरपास निर्माण की तैयारी भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने शुरू कर दी है। मौजूदा वक्त में यहां यू-टर्न की सुविधा न होने के कारण वाहन चालकों को काफी परेशानी होती है। कई बार लोग टोल से बचने के लिए गलत दिशा में गाड़ी चलाते हैं, जिससे दुर्घटनाओं का खतरा बना रहता है। इस प्रोजेक्ट के लिए लगभग साढ़े आठ एकड़ जमीन की जरूरत है, जिसमें कुछ हिस्सा जीएमडीए का और कुछ निजी बिल्डरों का है। इस दो लेन के अंडरपास के बनने से यात्रियों का समय और ईंधन बचेगा। जमीन मिलने के बाद बनाया जाएगा इस्टीमेट इसमें कुछ जमीन गुरुग्राम महानगर विकास प्राधिकरण (जीएमडीए) की है तो कुछ बिल्डरों की है। जमीन मिलने के बाद इस्टीमेट तैयार करने की प्रक्रिया शुरू होगी। गत 28 जनवरी को एनएचएआई अध्यक्ष संतोष यादव की अध्यक्षता में एक बैठक हुई थी। इसमें जीएमडीए के मुख्य कार्यकारी अधिकारी, नगर निगम के आयुक्त और जिला उपायुक्त मौजूद थे। बिजवासन टोल प्लाजा के समीप यू-टर्न नहीं अधिकारियों ने बैठक में बताया था कि बिजवासन टोल प्लाजा के समीप यू-टर्न नहीं है। बजघेड़ा निकासी पर यदि वाहन चालक नहीं उतर पाता है तो वह बिजवासन टोल प्लाजा पर पहुंच जाता है। टोल से बचने के लिए वाहन चालक गलत दिशा में वाहन चलाते हैं। स्थानीय लोगों की तरफ से भी बिजवासन टोल प्लाजा पर यू-टर्न निर्माण का आग्रह किया है। मौके पर यदि नहीं होगी सरकारी जमीन तो होगा अधिग्रहण राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) अध्यक्ष ने इस बैठक में आदेश जारी किए थे कि यदि मौके पर सरकारी जमीन है तो उसे जीएमडीए के माध्यम से लिया जाए। निजी जमीन यदि यू-टर्न के निर्माण में आ रही है तो उसका अधिग्रहण किया जाए। इसको लेकर एनएचएआई के परियोजना अधिकारी ने एक सलाहकार कंपनी को यू-टर्न निर्माण के लिए सर्वे करने की जिम्मेदारी सौंपी थी। कंपनी से सर्वे कर के एनएचएआई को सौंपी रिपोर्ट सलाहकार कंपनी ने सर्वे करके रिपोर्ट राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) के हवाले कर दी है। इसके मुताबिक दो लेन के यू-टर्न अंडरपास के निर्माण के लिए जीएमडीए की करीब पौने सात एकड़ जमीन की जरूरत है। पौने दो एकड़ जमीन आसपास रिहायशी और व्यावसायिक परियोजना बना रहे बिल्डरों की है। लोगों को परेशानी हो रही सलाहकार कंपनी ने बताया कि यू-टर्न की कमी से दैनिक यात्रियों के लिए यात्रा की दूरी और समय में वृद्धि हुई है। अनावश्यक ईंधन की खपत और परिचालन अक्षमताएं बढ़ी हैं। टोल प्लाजा और विलय क्षेत्रों के पास यातायात बढ़ा है। गलत दिशा में चलने से हादसे की संभावना है। अचानक लेन बदलने से दुर्घटनाओं का खतरा है।

हरियाणा में निकाय चुनाव का ऐलान, जानें पूरा शेड्यूल

चंडीगढ़ हरियाणा निकाय चुनावों की तारीखों का ऐलान हो गया है। हरियाणा चुनाव आयोग ने पंचकूला में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर चुनावों की तारीखों की घोषणा की। हरियाणा चुनाव आयोग ने बताया कि सोनीपत-पंचकूला और अंबाला नगर निगम में 10 मई को वोटिंग होगी और 13 को रिजल्ट आएगा। बता दें कि पंचकूला, अंबाला और सोनीपत नगर निगम चुनाव होने हैं। इसके अलावा, रेवाड़ी नगर परिषद ,धारूहेड़ा सांपला और उकलाना नगर पालिका में भी चुनाव होना। वहीं, टोहाना, झज्जर, राजौंद, तरावड़ी, सढ़ौरा और कनीना नगरपालिका को लेकर भी लोग वोट डालेंगे। जानें हरियाणा निकाय चुनाव का पूरा शेड्यूल     21 अप्रैल से 25 अप्रैल तक के बीच नामांकन दाखिल किए जाएंगे।     27 अप्रैल को नामांकन की जांच की जाएगी।     28 अप्रैल को नामांकन वापस लेने की आखिरी तारीख होगी।     इसी दिन चुनाव चिन्ह भी उम्मीदवार को दिए जाएंगे।     10 मई को वोटिंग होगी।     पुनः मतदान की जरूरत पड़ी तो 12 मई को दोबारा वोटिंग होगी।     13 मई को चुनावी नतीजों का ऐलान होगा। लोकतंत्र मात्र चुनाव तक सीमित नहीं है, बल्कि यह हर दिन निभाई जाने वाली एक जिम्मेदारी है। नगर निगमों के साथ-साथ जिला परिषद और पंचायती राज संस्थाओं के खाली पड़े पदों के लिए उपचुनाव भी इसी समय सारणी के अनुसार कराए जाएंगे। हरियाणा के चुनाव आयुक्त ने क्या बताया हरियाणा के चुनाव आयुक्त देवेंद्र कल्याण ने बताया कि निगम मेयर के लिए 30 लाख खर्च सीमा तय की गई है। सदस्य के लिए यह 7.50 लाख रुपये है। निकाय चुनाव के लिए 10 मई को मतदान होगा। अगर दोबारा मतदान की जरूरत पड़ी तो वह 12 मई को होंगे। 13 मई को चुनाव के नतीजे घोषित कर दिए जाएंगे। बता दें कि इस बार बीजेपी, कांग्रेस, जेजेपी और आईएनएलडी के बीच कड़ा मुकाबला देखने को मिल सकता है। राज्य चुनाव आयोग द्वारा तारीखों की घोषणा से पहले ही सभी राजनीतिक दलों ने अपनी-अपनी रणनीति को अंतिम रूप देना शुरू कर दिया था।  

Ambala MC Election 2026: 10 मई को मतदान, 13 मई को रिजल्ट—हरियाणा में चुनावी सरगर्मी तेज

चंडीगढ़. हरियाणा से बड़ी खबर सामने आ रही है। प्रदेश में नगर निगम चुनाव को लेकर हरियाणा चुनाव आयोग ने तारीखों का ऐलान कर दिया है। चुनाव आयोग ने प्रेस कान्फ्रेंस शेडयूल जारी कर दिया है। हरियाणा चुनाव आयोग ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर बताया कि सोनीपत-पंचकूल और अंबाला नगर निगम में 10 मई को वोटिंग होगी और 13 को रिजल्ट आएगा। चुनाव का समय 8 से 6 बजे होगा। जानें क्या रहेगा शेड्यूल     नामांकन नोटिस-15 अप्रैल     नामांकन 21 से 25 अप्रैल तक     नामांकन पत्रों की जांच- 27 अप्रैल     नाम वापसी- 28 अप्रैल उसी दिन चुनाव चिन्ह मिलेंगे     वोटिंग-10 मई     दोबारा मतदान-12 मई     मतगणना-13 मई को होगी राज्य चुनाव आयुक्त देवेंद्र कल्याण ने बताया कि पंचायत के उपचुनाव भी नगर निकायों के साथ होंगे। पानीपत और करनाल जिला परिषद के 1-1 वार्ड, 12 ब्लॉक समिति सदस्यों, 29 सरपंच, 485 पंचों के लिए वोटिंग होगी। वोटिंग के ऐलान के साथ ही सभी जगह चुनाव आचार संहिता लागू कर दी गई है।  कहां-कहां चुनाव होंगे नगर निगमः अंबाला, पंचकूला व सोनीपत नगर परिषदः रेवाड़ी नगर पालिकाः सांपला (रोहतक), उकलाना (हिसार) व धारूहेड़ा (रेवाड़ी)

हरियाणा राजनीति में हलचल: नायब सिंह सैनी ने बंसीलाल परिवार की वारिस पर जताया भरोसा, बदले समीकरण

चंडीगढ़. हरियाणा की राजनीति में एक समय जिस क्षेत्र को चौधरी बंसीलाल का अटूट गढ़ माना जाता था, उसी भिवानी-चरखी दादरी बेल्ट में अब भारतीय जनता पार्टी अपनी पकड़ को और मजबूत करने में जुटी है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी इस रणनीति को जमीनी स्तर पर लागू करते हुए राजनीतिक संतुलन और सामाजिक समीकरणों का विशेष ध्यान रख रहे हैं। भिवानी, चरखी दादरी, हिसार और महेंद्रगढ़ जैसे क्षेत्रों में भाजपा पहले से मजबूत स्थिति में है, लेकिन इन्हें पूरी तरह “भाजपामय” करने के लिए सैनी लगातार सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। श्रुति चौधरी को प्रमुखता: संदेश साफ इस राजनीतिक रणनीति का सबसे अहम संकेत तब मिला जब मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी दादरी रैली के लिए श्रुति चौधरी को अपने साथ विमान में लेकर गए। यह केवल एक यात्रा नहीं, बल्कि एक स्पष्ट राजनीतिक संदेश माना जा रहा है। श्रुति चौधरी, जो किरण चौधरी की बेटी और सुरेंद्र सिंह की पुत्री हैं, बंसीलाल परिवार की नई पीढ़ी का प्रतिनिधित्व करती हैं। उन्हें लगातार मंच और महत्व देकर भाजपा इस क्षेत्र में पारंपरिक राजनीतिक प्रभाव को अपने पक्ष में करने की कोशिश कर रही है। तीन लालों से चौथे लाल तक: बदलती राजनीति हरियाणा की राजनीति लंबे समय तक तीन बड़े नेताओं—चौधरी देवीलाल, भजनलाल और चौधरी बंसीलाल—के इर्द-गिर्द घूमती रही। भाजपा के सत्ता में आने के बाद मनोहर लाल खट्टर के रूप में “चौथे लाल” का उदय हुआ और अब उसी राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाते हुए सैनी नई रणनीतियों पर काम कर रहे हैं। संतुलन की राजनीति: जातीय और क्षेत्रीय समीकरण मुख्यमंत्री सैनी की कार्यशैली का एक महत्वपूर्ण पहलू यह है कि वे केवल राजनीतिक विस्तार ही नहीं, बल्कि जातीय और भौगोलिक संतुलन को भी साध रहे हैं। अहीरवाल से लेकर बांगड़ बेल्ट तक विभिन्न क्षेत्रों में स्थानीय नेताओं को सम्मान और प्रतिनिधित्व देकर वे संगठन को मजबूत बना रहे हैं। उत्तराधिकार की घोषणा और भाजपा का लाभ हाल ही में किरण चौधरी ने अपनी बढ़ती आयु का हवाला देते हुए श्रुति चौधरी को अपना राजनीतिक उत्तराधिकारी घोषित किया है। इस फैसले के बाद सैनी द्वारा श्रुति को प्राथमिकता देना भाजपा के लिए एक रणनीतिक अवसर के रूप में देखा जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इससे भाजपा को भिवानी क्षेत्र में पारंपरिक वोट बैंक में सेंध लगाने और अपनी स्थिति को और मजबूत करने में मदद मिलेगी। निष्कर्ष: रणनीति, सम्मान और विस्तार का संगम भिवानी बेल्ट में भाजपा का विस्तार केवल संगठनात्मक मजबूती का परिणाम नहीं है, बल्कि यह एक सुनियोजित रणनीति का हिस्सा है जिसमें परंपरागत राजनीतिक परिवारों को सम्मान देकर नए समीकरण बनाए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी का यह दृष्टिकोण स्पष्ट करता है कि हरियाणा की राजनीति में अब केवल सत्ता नहीं, बल्कि संतुलन, सम्मान और सामंजस्य भी उतने ही महत्वपूर्ण हो गए हैं।