samacharsecretary.com

छह लेन फ्लाईओवर से ट्रैफिक राहत, रोजाना 1.43 लाख वाहन प्रभावित

चंडीगढ़ ट्रिब्यून चौक पर फ्लाईओवर निर्माण के लिए आगे कदम बढ़े हैं। केंद्र सरकार ने इस प्रोजेक्ट की दिशा में प्रक्रिया तेज कर दी है। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने करीब 4.5 किलोमीटर लंबे फ्लाईओवर की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार करने के लिए सलाहकार एजेंसी नियुक्त कर दी है। अधिकारियों के अनुसार इस परियोजना पर लगभग 300 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। एजेंसी तीन महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट मंत्रालय को सौंपेगी। प्रस्तावित छह लेन फ्लाईओवर बनने के बाद ट्रिब्यून चौक से जीरकपुर बॉर्डर तक पूरा मार्ग सिग्नल फ्री हो जाएगा, जिससे रोजाना हजारों वाहन चालकों को राहत मिलने की उम्मीद है। दो हिस्सों में बनेगा फ्लाईओवर अधिकारियों के अनुसार सेक्टर-32 स्थित जीएमसीएच चौक से सीधे जीरकपुर बॉर्डर तक एकल फ्लाईओवर बनाना संभव नहीं था, क्योंकि पोल्ट्री फार्म चौक के पास रेलवे ओवरब्रिज पहले से मौजूद है। इसी कारण परियोजना को दो हिस्सों में बांटा गया है। योजना के तहत पहला फ्लाईओवर ट्रिब्यून चौक पर बनाया जाएगा, जबकि दूसरा फ्लाईओवर रेलवे ओवरब्रिज के पास से शुरू होकर जीरकपुर बॉर्डर पर बने फ्लाईओवर से जुड़ेगा। इससे पोल्ट्री फार्म चौक, हल्लोमाजरा लाइट प्वॉइंट और पुराने एयरपोर्ट लाइट प्वाॅइंट पर लगने वाले जाम में कमी आने की संभावना है। प्रतिदिन गुजरते हैं 1.43 लाख वाहन ट्रिब्यून चौक शहर के सबसे व्यस्त ट्रैफिक जंक्शनों में शामिल है। यहां से प्रतिदिन करीब 1.43 लाख वाहन गुजरते हैं, जिनमें 1.35 लाख से अधिक यात्री वाहन शामिल हैं। सुबह और शाम कार्यालय समय के दौरान इस मार्ग पर अक्सर लंबा जाम लग जाता है। प्रशासन का मानना है कि फ्लाईओवर बनने के बाद ट्रैफिक का दबाव कम होगा और लोगों का सफर तेज एवं सुरक्षित बनेगा। हाईकोर्ट ने पेड़ों की कटाई पर लगाई रोक इसी बीच पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने ट्रिब्यून चौक फ्लाईओवर परियोजना के लिए पेड़ों की कटाई पर रोक लगा दी है। अदालत में दायर याचिका में कहा गया कि फ्लाईओवर परियोजना शहर के मास्टर प्लान और हेरिटेज स्वरूप के खिलाफ है। वहीं यूटी प्रशासन ने अदालत में कहा कि मास्टर प्लान-2031 में फ्लाईओवर निर्माण की अनुमति है और पर्यावरणीय प्रभाव को कम करने के लिए 5:1 अनुपात में 2,799 पौधे लगाने की प्रक्रिया शुरू की जा चुकी है। उल्लेखनीय है कि ट्रिब्यून चौक फ्लाईओवर परियोजना का ठेका हाल ही में सिंगला कंस्ट्रक्शन को 147.98 करोड़ रुपये में दिया गया है। 1.6 किलोमीटर लंबे इस प्रोजेक्ट में रोटरी और अंडरपास भी शामिल होंगे। निर्माण कार्य मई 2026 से शुरू होकर दो वर्षों में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।  

57 हजार किसानों के ट्यूबवेल कनेक्शन लंबित, अगस्त तक जारी करने का लक्ष्य

चंडीगढ़  हरियाणा में अब 45 दिन के अंदर बोरवेल लगाने की अनुमति दी जाएगी। जल संसाधन (संरक्षण, विनियमन और प्रबंधन) प्राधिकरण ने भूजल निकालने के लिए अनापत्ति प्रमाणपत्र और अनुमति देने से जुड़े कार्यों को सेवा का अधिकार अधिनियम में शामिल कर लिया है। मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी ने इस संबंध में निर्देश जारी कर दिए हैं। पदाभिहित अधिकारी के रूप में मुख्य तकनीकी अधिकारी सुनिश्चित करेंगे कि निर्धारित समयावधि में अनापत्ति प्रमाणपत्र और अनुमति जारी कर दी जाए। 45 दिन में बोरवेल की अनुमति नहीं मिलने की स्थिति में प्रथम शिकायत निवारण प्राधिकारी मुख्य जल विज्ञानी के पास अपील की जा सकेगी। अगर फिर भी अनापत्ति प्रमाणपत्र जारी नहीं हुआ तो द्वितीय शिकायत निवारण प्राधिकारी के रूप में मुख्य कार्यकारी अधिकारी मामले को निपटाएंगे। वहीं, प्रदेश में अब भी 57 हजार किसानों के ट्यूबवेल कनेक्शन लंबित हैं। इनमें से 13 हजार 360 किसान पूरा शुल्क जमा करा चुके हैं, जिन्हें अगस्त अंत तक ट्यूबवेल कनेक्शन जारी करने का लक्ष्य रखा गया है। 31 दिसंबर 2023 तक किए गए आवेदनों के लिए मांग नोटिस जारी किए जा चुके हैं। पूरी लागत राशि जमा करा चुके उत्तर हरियाणा बिजली वितरण निगम के 4241 और दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम के 9119 किसानों को छह महीने में बिजली कनेक्शन जारी कर दिए जाएंगे। 10 बीएचपी तक आवेदन करने वालों को आफ-ग्रिड सोलर पंप दिए जा रहे हैं। इसके अलावा एक जनवरी 2024 से 31 जनवरी 2026 के बीच आवेदन करने वाले 43 हजार 527 किसानों के ट्यूबवेल कनेक्शन लंबित हैं। इनमें उत्तर हरियाणा बिजली वितरण निगम के 16 हजार 323 और दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम के 27 हजार 204 किसान शामिल हैं।  

‘मेक इन हरियाणा’ से निवेश और रोजगार पर फोकस, 500 करोड़+ प्रोजेक्ट्स को मिलेगा मेगा दर्जा

चंडीगढ़ हरियाणा सरकार ने राज्य को देश का अग्रणी औद्योगिक और मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए नई ‘मेक इन हरियाणा इंडस्ट्रियल पॉलिसी-2026’ लागू कर दी है। मंत्रिमंडल की बैठक में मंजूरी के बाद हरियाणा के उद्योग एवं वाणिज्य विभाग के आयुक्त व सचिव डा. अमित कुमार अग्रवाल ने बुधवार को इसकी अधिसूचना जारी कर दी। राज्यपाल की मंजूरी के पास जारी अधिसूचना के मुताबिक यह नीति अगले पांच वर्षों तक प्रभावी रहेगी। नई नीति में निवेश आकर्षित करने, उद्योगों को आधुनिक सुविधाएं देने, युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराने और प्रदेश के पिछड़े क्षेत्रों तक औद्योगिक विकास पहुंचाने पर विशेष फोकस किया गया है। हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने देश में पहली बार एक साथ 10 औद्योगिक पालिसी जारी की थी, जिसमें मेक इन हरियाणा इंडस्ट्रियल पालिसी-2026 सबसे महत्वपूर्ण और बड़ी पालिसी है। राज्य सरकार का मानना है कि यह नीति हरियाणा को केवल आटोमोबाइल और मैन्युफैक्चरिंग तक सीमित नहीं रखेगी, बल्कि इलेक्ट्रानिक्स, ई-व्हीकल, लाजिस्टिक्स, रिसर्च एंड डेवलपमेंट, वेयरहाउसिंग और नई तकनीक आधारित उद्योगों का भी बड़ा केंद्र बनाएगी। औद्योगिक विकास को संतुलित बनाने के लिए हरियाणा सरकार ने प्रदेश के जिलों को चार श्रेणियों कोर एरिया, इंटरमीडिएट एरिया, प्राइम एरिया और प्राइम फोकस एरिया में विभाजित किया है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सिर्फ एनसीआर क्षेत्र ही नहीं, बल्कि अपेक्षाकृत पिछड़े जिलों में भी बड़े उद्योग स्थापित होंगे और वहां रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। नई औद्योगिक नीति में बड़े निवेश को आकर्षित करने के लिए विशेष प्रविधान किए गए हैं। परिवार पहचान पत्र से होगी स्थानीय कर्मचारियों की पहचान नई औद्योगिक पालिसी के अनुसार हरियाणा में 500 करोड़ या उससे अधिक निवेश वाली इकाइयों को मेगा प्रोजेक्ट का दर्जा मिलेगा। इससे बड़े निवेश वाली परियोजनाओं को अल्ट्रा मेगा प्रोजेक्ट की श्रेणी में रखा जाएगा। ऐसे उद्योगों को भूमि आवंटन, बिजली कनेक्शन, टैक्स प्रोत्साहन, बुनियादी ढांचे और अन्य मंजूरियों में प्राथमिकता दी जाएगी। नीति में हरियाणा के युवाओं को रोजगार दिलाने पर खास जोर दिया गया है। स्थानीय कर्मचारियों की पहचान परिवार पहचान पत्र (पीपीपी) के माध्यम से की जाएगी। सरकार का उद्देश्य है कि प्रदेश में लगने वाले नए उद्योगों से अधिकतम लाभ हरियाणा के युवाओं को मिले। एमएसएमई और स्टार्टअप्स पर किया गया विशेष फोकस नई नीति में सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योगों को मजबूत करने के लिए कई रियायतें दी गई हैं। इनमें पूंजी निवेश सहायता, जीएसटी आधारित प्रोत्साहन, तकनीकी सहायता और इन्फ्रास्ट्रक्चर सपोर्ट शामिल हैं। साथ ही स्टार्टअप्स, इनोवेशन सेंटर और रिसर्च यूनिट्स को भी बढ़ावा देने का प्रविधान किया गया है। ई-व्हीकल, इलेक्ट्रानिक्स और लाजिस्टिक्स को बढ़ावा देने के लिए सरकार का ध्यान इलेक्ट्रानिक्स सिस्टम डिजाइन, ई-व्हीकल, ग्रीन एनर्जी, लाजिस्टिक्स और सप्लाई चेन सेक्टर को प्राथमिकता देने पर अधिक है। इससे हरियाणा को नई तकनीक और हाई-वैल्यू मैन्युफैक्चरिंग का केंद्र बनाने की कोशिश की जा रही है। प्रदूषण नियंत्रण, ग्रीन एनर्जी और टिकाऊ औद्योगिक विकास नई औद्योगिक नीति के तहत औद्योगिक पार्क, फ्लैटेड फैक्ट्री, वेयरहाउसिंग, निजी इंडस्ट्रियल टाउनशिप और स्किल डेवलपमेंट सेंटर विकसित किए जाएंगे। सरकार प्रदूषण नियंत्रण, ग्रीन एनर्जी और टिकाऊ औद्योगिक विकास को भी नीति का अहम हिस्सा बना रही है। हरियाणा सरकार का दावा है कि नई औद्योगिक नीति से प्रदेश में हजारों करोड़ रुपये का निवेश आएगा, लाखों रोजगार सृजित होंगे और हरियाणा देश के सबसे तेज औद्योगिक विकास वाले राज्यों में अपनी स्थिति और मजबूत करेगा। खासतौर पर एनसीआर से बाहर के जिलों में औद्योगिक गतिविधियां बढ़ने से क्षेत्रीय विकास को भी गति मिलने की उम्मीद है

पेशे से डॉक्टर, अब राजनीति में बड़ा चेहरा: जानिए डॉ. अर्चना गुप्ता की पूरी कहानी

चंडीगढ़. भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने हरियाणा में अपने संगठन को और मजबूत करने के उद्देश्य से एक बड़ा राजनीतिक कदम उठाया है। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने मोहन लाल बडौली को हटाकर उनकी जगह डॉ. अर्चना गुप्ता को हरियाणा भाजपा का नया प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त किया है। बता दें कि हरियाणा भाजपा के इतिहास में यह दूसरा मौका है, जब किसी महिला को प्रदेश अध्यक्ष की अहम जिम्मेदारी सौंपी गई है। आइए जानते हैं आखिर कौन है डॉ. अर्चना गुप्ता, जो अब हरियाणा में बीजेपी की कमान संभालेंगी। अर्चना गुप्ता राजनीतिक सफर डॉ. अर्चना गुप्ता का राजनीतिक और सामाजिक सफर चिकित्सा क्षेत्र से शुरू होकर भाजपा संगठन तक पहुंचा है। अर्चना गुप्ता पेशे से रेडियोलाजिस्ट हैं और उन्होंने पीजीआई रोहतक से एमडी की डिग्री हासिल की। वे लंबे समय से सामाजिक और संगठनात्मक गतिविधियों से जुड़ी रही हैं। वर्ष 2010 से 2016 तक उन्होंने विश्व हिंदू परिषद में जिला सह-संयोजिका, संयोजिका और हरियाणा की उपाध्यक्ष जैसी जिम्मेदारियां निभाईं। भाजपा में सक्रिय भूमिका निभाते हुए उन्होंने महिला मोर्चा में संगठनात्मक काम किया और पानीपत क्षेत्र में पार्टी को मजबूत करने में भूमिका निभाई। वर्ष 2019 के लोकसभा और विधानसभा चुनावों में भाजपा प्रत्याशियों के समर्थन में सक्रिय प्रचार किया। खास तौर पर महिला मतदाताओं के बीच उनकी मजबूत पकड़ मानी जाती है। अगस्त 2020 में उन्हें भाजपा का पानीपत जिला अध्यक्ष बनाया गया। वे पानीपत भाजपा की पहली महिला जिलाध्यक्ष बनीं। जनवरी 2024 में हरियाणा भाजपा संगठन में बड़े फेरबदल के दौरान उन्हें प्रदेश महामंत्री नियुक्त किया गया। उस समय पार्टी ने लोकसभा और विधानसभा चुनावों से पहले संगठन को मजबूत करने के लिए नई टीम बनाई थी। प्रदेश महामंत्री रहते हुए अर्चना गुप्ता ने संगठन विस्तार, महिला सशक्तीकरण और बूथ स्तर पर पार्टी को मजबूत करने के अभियान में सक्रिय भूमिका निभाई।

नई शिक्षा नीति लागू करना प्राथमिकता, बोर्ड चेयरमैन ने संभाला कार्यभार

भिवानी  वरिष्ठ भाजपा नेता शंकर लाल धूपड़ को हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड का चेयरमैन नियुक्त किया गया है। मंगलवार देर रात उनकी नियुक्ति और डा. पवन कुमार को रिलीव करने के आदेश जारी किए गए। जिसके बाद बुधवार को नवनियुक्त चेयरमैन शंकर लाल धूपड़ ने स्वजन और भाजपा नेताओं, कार्यकर्ताओं के बीच हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड चेयरमैन का कार्यभार संभाला। कार्यभार संभालते हुए उन्होंने कहा कि भारत सरकार की नई शिक्षा नीति को पूर्णरूपेण लागू करना मेरी प्राथमिकता होगी। इससे पूर्व उन्होंने बोर्ड की लाबी में स्थापित मां सरस्वती की पूजा की। बोर्ड अध्यक्ष शंकर लाल धूपड़ का पूर्व बोर्ड अध्यक्ष डॉ. पवन कुमार, बोर्ड अधिकारियों/कर्मचारियों, बीजेपी कार्यकर्ताओं व समाजसेवियों ने फूलों के गुलदस्ते देकर स्वागत किया गया। कार्यग्रहण उपरांत धूपड़ ने बताया कि शिक्षा के क्षेत्र में सुधार करना उनकी प्राथमिकता रहेगी। बोर्ड की कार्यप्रणाली को अधिकाधिक सुदृढ़ किया जाएगा शिक्षा-परीक्षा को सुधारवादी कदमों को और अधिक गति देते हुए बोर्ड की कार्यप्रणाली को अधिकाधिक सुदृढ़ किया जाएगा। वे शिक्षा बोर्ड के उन सभी क्षेत्रों में सकारात्मक बदलाव के हिमायती व पैरोकार रहे हैं, जिनसे शिक्षा जगत का बहुआयामी विकास हो। उन्होंने कहा कि शिक्षा-परीक्षा में गुणात्मक सुधार, परीक्षाओं में नकल पर अंकुश लगाने तथा शिक्षा बोर्ड की कार्यप्रणाली को और अधिक उत्तरदायी, त्वरित, पारदर्शी व विद्यार्थियों/शिक्षकों के लिए संतुष्टिपूर्ण बनाने के लिए सत्त व सार्थक प्रयास किए जाएंगे। उनका मानना है कि शिक्षा के माध्यम से व्यक्ति को गुणवान, सुशील, ज्ञानवान, समाज व देश के प्रति समर्पित बनाया जा सकता है। शंकर लाल धूपड़ ने अपनी नियुक्ति के लिए केन्द्रीय मंत्री व पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर लाल, मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी, शिक्षा मंत्री महीपाल सिंह ढांडा, प्रदेशाध्यक्ष मोहनलाल बड़ौली का आभार व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि सरकार ने उन पर जो विश्वास जताया है वह उसे सार्थक सिद्ध करेंगे तथा बोर्ड सचिव व अधिकारियों के साथ मिलकर बोर्ड को उच्च मुकाम पर ले जाएंगे। शंकर लाल धूपड़ मूल रूप से जिला भिवानी के रहने वाले है जो कि पेशे से वकील है। उन्होंने प्रारंभिक शिक्षा भिवानी में पूरी करने के बाद जयपुर विश्वविद्यालय से एलएलबी की पढ़ाई की। उनकी राजनीतिक शुरूआत 1975 में हुई तथा वे लगभग 04 वर्षों तक जिला भिवानी के बीजेपी के जिलाध्यक्ष भी रहे हैं।

बीजेपी ने हरियाणा में बदली कमान, अर्चना गुप्ता बनीं नई प्रदेश अध्यक्ष

चंडीगढ़. लंबे समय से चल रही अटकलों को विराम देते हुए भाजपा के शीर्ष नेतृत्व ने डॉ. अर्चना गुप्ता को हरियाणा भाजपा का नया अध्यक्ष बनाया है। निवर्तमान अध्यक्ष मोहन लाल बडौली के स्थान पर डॉ. अर्चना गुप्ता को प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी गई है। अर्चना गुप्ता अभी तक मोहन लाल बडौली की टीम में प्रदेश महामंत्री के रूप में काम कर रही थी। हरियाणा भाजपा के इतिहास में यह दूसरा मौका है, जब किसी महिला को प्रदेश अध्यक्ष की अहम जिम्मेदारी सौंपी गई है। सबसे पहले डॉ. कमला वर्मा को 1980 से 1983 के बीच भाजपा का पहला प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया था और वे पहली महिला भी थीं। डॉ. अर्चना गुप्ता को दी गई जिम्मेदारी को भाजपा द्वारा महिला नेतृत्व और संगठनात्मक अनुभव पर भरोसे के रूप में देखा जा रहा है। डॉ. अर्चना गुप्ता मूल रूप से पानीपत की रहने वाली हैं और व्यवसाय से रेडियोलाजिस्ट हैं। नौ जुलाई 2024 को जब राई के पूर्व विधायक मोहन लाल बडौली को प्रदेश अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी सौंपी गई थी, तब उनकी टीम में शामिल तीन महामंत्रियों कृष्ण कुमार बेदी और सुरेंद्र पुनिया के साथ डॉ. अर्चना गुप्ता को भी यह दायित्व सौंपा गया था। तब से उन्होंने संगठन को मजबूत करने के लिए लगातार मेहनत की। भाजपा के शीर्ष नेतृत्व ने अर्चना गुप्ता को उनके संगठन के प्रति समर्पण का पुरस्कार दिया है। डॉ. अर्चना गुप्ता की प्रदेश अध्यक्ष के पद पर नियुक्ति कई बड़े दावेदार नेताओं और धुरंधरों को पछाड़कर की गई है। महिलाओं में भाजपा की केंद्रीय चुनाव समिति की सदस्य डॉ. सुधा यादव, सिरसा की पूर्व सांसद सुनीता दुग्गल और पूर्व राज्यसभा सदस्य किरण चौधरी के नाम चल रहे थे। पुरुषों में पलवल के पूर्व विधायक दीपक मंगला, पूर्व मंत्री कैप्टन अभिमन्यु, पूर्व मंत्री मनीष ग्रोवर, पूर्व मंत्री डॉ. कमल गुप्ता, सांसद संजय भाटिया और कैबिनेट मंत्री कृष्ण कुमार बेदी को पीछे छोड़कर अर्चना गुप्ता प्रदेश अध्यक्ष के पद पर नियुक्ति पाने में कामयाब हो गई हैं। डॉ. अर्चना गुप्ता को मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी और केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल के आशीर्वाद से यह महत्वपूर्ण जिम्मेदारी मिली है। उनकी नियुक्ति के बाद अब प्रदेश कमेटी में नए सिरे से बदलाव होगा। भाजपा ने अर्चना गुप्ता को प्रदेश अध्यक्ष बनाकर जहां संगठन में महिलाओं को महत्व देने की अपनी नीति को उजागर किया है, वहीं वैश्यों का भरोसा जीतने में कामयाबी हासिल की है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के मंत्रिमंडल में एक ही वैश्य मंत्री विपुल गोयल हैं। भाजपा संगठन में प्रदेश अध्यक्ष का न्यूनतम कार्यकाल करीब तीन साल का होता है। ऐसे में निवर्तमान प्रदेश अध्यक्ष मोहन लाल बडौली को करीब दो साल के कार्यकाल के बाद ही हटा दिया गया है। हालांकि उनके नेतृत्व में हरियाणा में भाजपा तीसरी बार सरकार बनाने में कामयाब रही है। भाजपा के राष्टीय महासचिव एवं मुख्यालय प्रभारी अरुण सिंह ने डॉ. अर्चना गुप्ता की नियुक्ति के आदेश जारी किए हैं। हरियाणा के अब तक रहे अध्यक्ष डॉ. कमला वर्मा (1980 से 1983) (हरियाणा भाजपा की पहली अध्यक्ष) सूरज भान (1984 से 1985) डॉ. मंगल सेन (1986 से 1990) प्रो. रामबिलास शर्मा (1990 से 1993 और 2013 से 2014) रमेश जोशी (1994 से 1998) ओपी ग्रोवर (1998 से 2000) रतनलाल कटारिया (2000 से 2003) प्रोफेसर गणेशी लाल (2003 से 2006) आत्मप्रकाश मनचंदा (2006 से 2009) कृष्ण पाल गुर्जर (2009 से 2013) सुभाष बराला (2014 से 2020) ओमप्रकाश धनखड़ (2020 से 2024) मोहन लाल बडौली (2024 से 2026)

सोमनाथ स्वाभिमान पर्व: 60+ आयु वालों को मुफ्त यात्रा, सरल पोर्टल पर 6 जून तक पंजीकरण

सोनीपत  हरियाणा सरकार द्वारा बुजुर्गों को गुजरात के प्रसिद्ध सोमनाथ मंदिर के निशुल्क दर्शन करवाने के लिए सोमनाथ स्वाभिमान पर्व के तहत एक स्पेशल ट्रेन चलाई जा रही है। आठ जून को कुरुक्षेत्र से रवाना होने वाली इस स्पेशल ट्रेन को मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी हरी झंडी दिखाकर रवाना करेंगे। 6 जून तक सरल पोर्टल पर करें पंजीकरण जिला सूचना एवं जन संपर्क अधिकारी राकेश गौतम ने बताया कि योजना का लाभ उठाने के लिए पात्र वृद्धजन लाभार्थी 6 जून तक सरल पोर्टल (www.saraharyana.gov.in) पर अपना ऑनलाइन पंजीकरण करवा सकते हैं। कौन कर सकता है अप्लाई और कैसे होगा चयन? यात्रा के लिए लाभार्थी की उम्र 60 वर्ष से अधिक होनी चाहिए। परिवार की वार्षिक आय 1.80 लाख रुपये से कम होनी चाहिए। आवेदक हरियाणा का मूल निवासी होना चाहिए। सभी चयनित लाभार्थियों को यात्रा के दौरान अपना मेडिकल सर्टिफिकेट साथ लाना होगा। इस यात्रा के लिए सीटें सीमित हैं और लाभार्थियों का चयन पहले आओ, पहले पाओ के आधार पर किया जाएगा। इसलिए इच्छुक बुजुर्ग जल्द अपना पंजीकरण कराएं। अधिक जानकारी के लिए लघु सचिवालय की तीसरी मंजिल पर स्थित जिला सूचना एवं जन संपर्क कार्यालय में संपर्क किया जा सकता है।

पूर्व विधायक ईश्वर सिंह पलाका बने सफाई कर्मचारी आयोग के चेयरमैन, हरियाणा सरकार का फैसला

चंडीगढ़. हरियाणा में बोर्ड एवं निगमों के चेयरमैन, वाइस चेयरमैन और सदस्य बनाने की प्रक्रिया आरंभ हो गई है। सबसे पहले नियुक्ति हरियाणा राज्य सफाई कर्मचारी चयन आयोग में हुई है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की सरकार ने राज्य सफाई कर्मचारी आयोग का गठन करते हुए चेयरमैन, वाइस चेयरमैन और सदस्यों की नियुक्ति कर दी है। सामाजिक न्याय, अधिकारिता, अनुसूचित जाति एवं पिछड़ा वर्ग कल्याण तथा अंत्योदय (सेवा) विभाग की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार पूर्व विधायक ईश्वर सिंह पलाका को आयोग का चेयरमैन नियुक्त किया गया है। सरकार द्वारा जारी आदेशों में भारत भूषण टाक को वाइस-चेयरमैन बनाया गया है। इसके अलावा आयोग में मोहित वाल्मीकि, जितेंद्र वाल्मीकि, रेखा रानी, संजीव घरू और चंदर प्रकाश बोस्ती को सदस्य नियुक्त किया गया है। अधिसूचना के मुताबिक यह आयोग वर्ष 2017 में गठित हरियाणा राज्य सफाई कर्मचारी आयोग के तहत कार्य करेगा। सरकार ने कहा है कि नियुक्त सदस्यों की सेवा शर्तें और अन्य नियम अलग से जारी किए जाएंगे। यह नियुक्तियां सामाजिक न्याय एवं सफाई कर्मचारियों के कल्याण से जुड़े मुद्दों को मजबूती से उठाने और उनकी समस्याओं के समाधान के उद्देश्य से की गई हैं। आदेश 27 मई 2026 से प्रभावी माने जाएंगे। हरियाणा सरकार की ओर से जल्दी ही कई बोर्ड एवं निगमों के अध्यक्ष घोषित किया जा सकते हैं।

हरियाणा बोर्ड के नए चेयरमैन बने शंकर लाल धूपड़, नई शिक्षा नीति लागू करना पहली प्राथमिकता

भिवानी. वरिष्ठ भाजपा नेता शंकर लाल धूपड़ को हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड का चेयरमैन नियुक्त किया गया है। मंगलवार देर रात उनकी नियुक्ति और डा. पवन कुमार को रिलीव करने के आदेश जारी किए गए। जिसके बाद बुधवार को नवनियुक्त चेयरमैन शंकर लाल धूपड़ ने स्वजन और भाजपा नेताओं, कार्यकर्ताओं के बीच हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड चेयरमैन का कार्यभार संभाला। कार्यभार संभालते हुए उन्होंने कहा कि भारत सरकार की नई शिक्षा नीति को पूर्णरूपेण लागू करना मेरी प्राथमिकता होगी। इससे पूर्व उन्होंने बोर्ड की लाबी में स्थापित मां सरस्वती की पूजा की। बोर्ड अध्यक्ष शंकर लाल धूपड़ का पूर्व बोर्ड अध्यक्ष डॉ. पवन कुमार, बोर्ड अधिकारियों/कर्मचारियों, बीजेपी कार्यकर्ताओं व समाजसेवियों ने फूलों के गुलदस्ते देकर स्वागत किया गया। कार्यग्रहण उपरांत धूपड़ ने बताया कि शिक्षा के क्षेत्र में सुधार करना उनकी प्राथमिकता रहेगी। बोर्ड की कार्यप्रणाली को अधिकाधिक सुदृढ़ किया जाएगा शिक्षा-परीक्षा को सुधारवादी कदमों को और अधिक गति देते हुए बोर्ड की कार्यप्रणाली को अधिकाधिक सुदृढ़ किया जाएगा। वे शिक्षा बोर्ड के उन सभी क्षेत्रों में सकारात्मक बदलाव के हिमायती व पैरोकार रहे हैं, जिनसे शिक्षा जगत का बहुआयामी विकास हो। उन्होंने कहा कि शिक्षा-परीक्षा में गुणात्मक सुधार, परीक्षाओं में नकल पर अंकुश लगाने तथा शिक्षा बोर्ड की कार्यप्रणाली को और अधिक उत्तरदायी, त्वरित, पारदर्शी व विद्यार्थियों/शिक्षकों के लिए संतुष्टिपूर्ण बनाने के लिए सत्त व सार्थक प्रयास किए जाएंगे। उनका मानना है कि शिक्षा के माध्यम से व्यक्ति को गुणवान, सुशील, ज्ञानवान, समाज व देश के प्रति समर्पित बनाया जा सकता है। शंकर लाल धूपड़ ने अपनी नियुक्ति के लिए केन्द्रीय मंत्री व पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर लाल, मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी, शिक्षा मंत्री महीपाल सिंह ढांडा, प्रदेशाध्यक्ष मोहनलाल बड़ौली का आभार व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि सरकार ने उन पर जो विश्वास जताया है वह उसे सार्थक सिद्ध करेंगे तथा बोर्ड सचिव व अधिकारियों के साथ मिलकर बोर्ड को उच्च मुकाम पर ले जाएंगे। शंकर लाल धूपड़ मूल रूप से जिला भिवानी के रहने वाले है जो कि पेशे से वकील है। उन्होंने प्रारंभिक शिक्षा भिवानी में पूरी करने के बाद जयपुर विश्वविद्यालय से एलएलबी की पढ़ाई की। उनकी राजनीतिक शुरूआत 1975 में हुई तथा वे लगभग 04 वर्षों तक जिला भिवानी के बीजेपी के जिलाध्यक्ष भी रहे हैं।

नायब सैनी ने जताया पीएम मोदी का आभार, हरियाणा में दौड़ेगी ग्रीन एनर्जी ट्रेन

 जींद  हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने प्रदेश को देश की पहली हाइड्रोजन डेमू (DEMU) ट्रेन की सौगात मिलने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्र सरकार का विशेष रूप से आभार व्यक्त किया है। रेलवे बोर्ड द्वारा इस महत्वाकांक्षी परियोजना को हरी झंडी दिए जाने के बाद मुख्यमंत्री ने इसे राज्य के विकास में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर बताया। क्या होगा रूट यह देश की पहली पर्यावरण अनुकूल हाइड्रोजन डेमू ट्रेन होगी, जिसे हरियाणा के जींद से सोनीपत के बीच चलाया जाएगा। इसमें कुल 10 कोच होंगे। रेल इंफ्रास्ट्रक्चर को नई दिशा देने वाली इस परियोजना के बारे में बताते हुए मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कुशल नेतृत्व में हरियाणा विकास और रेल इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में नए आयाम स्थापित कर रहा है। भविष्य की परियोजनाओं के लिए 'मील का पत्थर': नायब सैनी मुख्यमंत्री ने इस ट्रेन की महत्ता को रेखांकित करते हुए कहा, "यह हाइड्रोजन डेमू ट्रेन न केवल प्रदूषण मुक्त सफर का एक आधुनिक विकल्प बनेगी, बल्कि भविष्य की हरित ऊर्जा (Green Energy) परियोजनाओं को देखते हुए एक मील का पत्थर (Milestone) साबित होगी।" हरित और आधुनिक हरियाणा का संकल्प इस ट्रेन के शुरू होने से हरियाणा देश में अत्याधुनिक और इको-फ्रेंडली रेल कनेक्टिविटी वाला पहला राज्य बन जाएगा। मुख्यमंत्री ने भरोसा जताया कि केंद्र सरकार के सहयोग से चल रहे ऐसे बड़े प्रोजेक्ट्स से आने वाले समय में राज्य के नागरिकों को विश्वस्तरीय सुविधाएं मिलेंगी और उद्योगों व रोजगार को भी बढ़ावा मिलेगा। हाइड्रोजन ट्रेन की खासियतें यह ट्रेन अधिकतम 75 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चलेगी। यह ट्रेन पारंपरिक डीजल या इलेक्ट्रिक ट्रैक्शन सिस्टम के बजाय हाइड्रोजन फ्यूल सेल तकनीक का उपयोग करेगी। ट्रेन कुल 1,200 किलोवाट बिजली उत्पन्न करेगी। नई ट्रेन में डिस्ट्रीब्यूटेड पावर रोलिंग स्टॉक (डीपीआरएस) तकनीक का भी उपयोग किया जाएगा। इस तकनीक की मदद से बिजली एक ही लोकोमोटिव पर निर्भर रहने के बजाय सभी डिब्बों में वितरित की जाती है। हाइड्रोजन से चलने वाली ट्रेनों को डीजल इंजनों का एक महत्वपूर्ण विकल्प माना जा रहा है।  इसके जरिए कम उत्सर्जन होता है और ये स्वच्छ परिवहन को दिशा मिलती हैं।  रेल मंत्रालय ने अनुसंधान डिजाइन और मानक संगठन (आरडीएसओ) से तकनीकी मंजूरी और रेल सुरक्षा आयुक्त (सीसीआरएस) द्वारा किए गए सुरक्षा परीक्षण के बाद इस परियोजना को मंजूरी दी।