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गैंगस्टर नेटवर्क में टर्किश हथियारों की बढ़ती पैठ, जिगाना और PX-5 पिस्टल पर एजेंसियों की नजर

कुरुक्षेत्र  गांव रतनगढ़ के पास एसटीएफ द्वारा मुठभेड़ के बाद गिरफ्तार किए गए दोनों शूटरों से बरामद हथियार एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय हथियार नेटवर्क की ओर गंभीर संकेत दे रहे हैं। बताया जा रहा है कि आरोपितों के कब्जे से पीएक्स-5 टर्किश पिस्टल बरामद की गई हैं। पिछले कुछ समय से भारत में सक्रिय गैंगस्टर नेटवर्क में टर्किश हथियारों का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है। जानकारी के अनुसार, जोराकी, रेटे और जिगाना जैसी टर्किश पिस्टल्स अब अलग-अलग राज्यों में अपराधियों के बीच लगातार देखी जा रही हैं। हथियारों के प्रवेश के लिए एक संगठित सप्लाई चेन सक्रिय सूत्रों के अनुसार, ये टर्किश पिस्टल्स मूल रूप से तुर्किये में स्पोर्ट्स शूटिंग और सेल्फ-डिफेंस के लिए वैध रूप से तैयार की जाती हैं, लेकिन बाद में इनका बड़ा हिस्सा अवैध तस्करी नेटवर्क के जरिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में पहुंच जाता है। यहां से यह हथियार यूरोप, पश्चिम एशिया और बाल्कन देशों के रास्ते होते हुए दक्षिण एशिया तक लाए जाते हैं। भारत में इन हथियारों के प्रवेश के लिए एक संगठित सप्लाई चेन सक्रिय है, जिसमें हथियारों को छोटे-छोटे खेपों में अलग-अलग देशों के डीलरों तक पहुंचाया जाता है। इसके बाद इन्हें सीमा पार तस्करी, कोरियर नेटवर्क, फर्जी बिलिंग और छिपे हुए लाजिस्टिक चैनलों के जरिए भारत लाया जाता है। कई मामलों में इन्हें पार्ट्स में अलग-अलग भेजकर बाद में असेंबल करने की भी बात सामने आई है। गैंगस्टरों की पसंद बनी टर्की मेड जिगाना पिस्टल जिगाना पिस्टल, जिसे तुर्किये की ड्यूरेबल और हाई-रिलायबिलिटी सेमी-आटोमैटिक पिस्टल माना जाता है और हाल के वर्षों में गैंगस्टर नेटवर्क में खास तौर पर चर्चित रही है। सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि इन टर्किश हथियारों का बढ़ता उपयोग संगठित अपराध के बदलते स्वरूप और अंतरराष्ट्रीय हथियार सप्लाई नेटवर्क की सक्रियता को दर्शाता है। सुरक्षा एजेंसियां अब इस पूरे नेटवर्क की तह तक पहुंचने में जुटी हैं कि आखिर ये आधुनिक टर्किश हथियार किन अंतरराष्ट्रीय रास्तों से भारत में प्रवेश कर रहे हैं और किन स्थानीय संपर्कों के जरिए गैंगस्टरों तक पहुंच रहे हैं। टीटी-30 और ग्लाक इससे पहले थी मनपसंद विदेशी हथियारों के मामले में इससे पहले गैंगस्टरों के बीच टीटी-30 और ग्लाक पिस्टल सबसे ज्यादा लोकप्रिय मानी जाती थीं। लंबे समय तक रूस के टीटी-30 (स्टार-30 के नाम से भी जाना जाता) के चाइनीज माडल भारत के गैंग नेटवर्क में खूब इस्तेमाल हुए। वहीं पिछले कुछ सालों से आस्ट्रिया मेड ग्लाक गैंगस्टरों के बीच काफी लोकप्रिय थी। हालांकि अब पुराने टीटी और ग्लाक की जगह अब टर्की मेड पिस्टल्स जैसे जिगाना और अन्य हाई-एंड माडल तेजी से ले रहे हैं।

करनाल: खट्टर का गांवों का दौरा, 10 गांवों में योजनाओं की प्रगति का लिया जायजा

करनाल करनाल में केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने नीलोखेड़ी विधानसभा क्षेत्र के तहत कई गांवों का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने विकास कार्यों की प्रगति का जायजा लिया और अधिकारियों के साथ विस्तृत समीक्षा बैठक भी की। मंत्री ने बताया कि उनका यह दौरा 10 गांवों को कवर करने के लिए तय किया गया है, जिसमें यह देखा जा रहा है कि क्षेत्र में विकास योजनाएं किस तरह आगे बढ़ रही हैं, कहां दिक्कतें हैं और किन जगहों पर सुधार की जरूरत है। उन्होंने कहा कि हर बार करनाल आने पर वे इसी तरह जमीनी स्तर पर कामकाज की समीक्षा करते हैं। आरक्षण और सुप्रीम कोर्ट टिप्पणी पर प्रतिक्रिया IAS अधिकारियों के बच्चों को आरक्षण से जुड़े सुप्रीम कोर्ट के मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए मनोहर लाल खट्टर ने कहा कि आरक्षण का लाभ केवल वास्तविक जरूरतमंदों को ही मिलना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि नीतियों का उद्देश्य कमजोर वर्गों को सशक्त बनाना है, न कि पहले से सक्षम वर्गों को अतिरिक्त लाभ देना। पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर विपक्ष को जवाब पेट्रोल और डीजल की बढ़ती कीमतों पर विपक्ष के आरोपों का जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि यह मुद्दा वैश्विक परिस्थितियों से जुड़ा हुआ है। अंतरराष्ट्रीय बाजार, आपूर्ति श्रृंखला और भू-राजनीतिक तनावों का असर तेल की कीमतों पर पड़ता है। उन्होंने कहा कि अमेरिका-ईरान जैसे वैश्विक हालात और सप्लाई बाधाओं को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। साथ ही उन्होंने विपक्ष पर केवल आलोचना करने का आरोप लगाते हुए कहा कि कई देशों में ईंधन कीमतें भारत से कहीं अधिक बढ़ी हैं। सरकार की योजनाओं पर जोर उन्होंने प्रधानमंत्री आवास योजना सहित कई सरकारी योजनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि सरकार लगातार विकास और गरीबों के कल्याण के लिए काम कर रही है।

खिलाड़ियों के पक्ष में हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, ग्रुप-D भर्ती रद्द करने पर लगी रोक

चंडीगढ़. हरियाणा में ग्रुप-डी भर्ती के तहत एक्सीलेंट स्पोर्ट्स पर्सन (ईएसपी) श्रेणी में चयनित उम्मीदवारों को पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। हाई कोर्ट ने चयन रद करने की कार्रवाई पर फिलहाल रोक लगाते हुए याचिकाकर्ताओं की सेवाओं के संबंध में यथास्थिति बनाए रखने के आदेश दिए हैं। अदालत ने यह अंतरिम राहत उस समय प्रदान की, जब राज्य सरकार की ओर से जारी संशोधित चयन सूची के आधार पर पहले से नियुक्त उम्मीदवारों की उम्मीदवारी समाप्त करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई थी।मामले की सुनवाई जस्टिस संदीप मौदगिल की अदालत में हुई। राजेंद्र और अन्य उम्मीदवारों द्वारा दायर याचिका में कहा गया कि हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग द्वारा ग्रुप-डी भर्ती के तहत ईएसपी श्रेणी में उनका चयन किया गया था और वे पिछले कई महीनों से विभिन्न विभागों में सेवाएं दे रहे हैं। याचिकाकर्ताओं के अनुसार नियुक्ति प्रक्रिया पूरी होने और जाइनिंग के बाद अब संशोधित सूची जारी कर चयन रद करना पूरी तरह मनमाना और कानून के विपरीत है।याचिकाकर्ताओं की ओर से वकील जसबीर मोर ने अदालत को बताया कि 18 मई 2026 को जारी संशोधित सूची के माध्यम से उन उम्मीदवारों की उम्मीदवारी निरस्त कर दी गई, जो पहले ही चयनित होकर नौकरी जाइन कर चुके हैं। उन्होंने कहा कि यह पूरा विवाद स्पोर्ट्स ग्रेडेशन सर्टिफिकेट के सत्यापन से जुड़ा है। खेल विभाग हरियाणा द्वारा उपलब्ध कराई गई जानकारी के आधार पर संशोधित सूची तैयार की गई और उसी आधार पर चयन रद करने की कार्रवाई शुरू कर दी गई।याचिका में यह भी कहा गया कि भर्ती प्रक्रिया के दौरान सभी दस्तावेजों और प्रमाणपत्रों की जांच की जा चुकी थी। ऐसे में लंबे समय तक सेवा लेने के बाद उम्मीदवारों को हटाने का प्रयास न केवल प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ है, बल्कि इससे चयन प्रक्रिया की पारदर्शिता पर भी गंभीर सवाल खड़े होते हैं। सुनवाई के दौरान हरियाणा सरकार की ओर से जवाब दाखिल करने के लिए समय मांगा। वहीं याचिकाकर्ताओं के वकील ने अदालत को बताया कि सभी याचिकाकर्ता वर्तमान में नियमित रूप से सेवाएं दे रहे हैं और अचानक की गई कार्रवाई से उनके रोजगार पर संकट खड़ा हो गया है। मामले के तथ्यों और परिस्थितियों को देखते हुए हाई कोर्ट ने निर्देश दिया कि याचिकाकर्ताओं की सेवाओं के संबंध में वर्तमान स्थिति को बरकरार रखा जाए। अदालत ने स्पष्ट किया कि आदेश पारित होने के समय जो स्थिति थी, वही अगली सुनवाई तक जारी रहेगी। साथ ही अदालत ने राज्य सरकार और अन्य प्रतिवादियों को निर्देश दिए कि वे अगली तारीख से कम से कम एक सप्ताह पहले अपना जवाब दाखिल करें और उसकी अग्रिम प्रति याचिकाकर्ताओं के अधिवक्ता को भी उपलब्ध कराएं। मामले की अगली सुनवाई अब 2 सितंबर 2026 को होगी। हाई कोर्ट के इस अंतरिम आदेश से फिलहाल उन खिलाड़ियों को राहत मिली है, जिनकी नियुक्ति संशोधित सूची के बाद खतरे में पड़ गई थीं।

भीषण गर्मी में गुरुग्राम को झटका, 7 बिजली घर ठप होने से सप्लाई बाधित

गुरुग्राम  दिल्ली से सटे हरियाणा के गुरुग्राम से बड़ी खबर सामने आ रही है। यहां बिजली संकट गहरा गया है। गुरुग्राम में सेक्टर-72 के 220 केवीए बिजली घर का मुख्य ट्रांसफार्मर फूंक गया। ऐसे में इससे जुड़े 7 बिजली घर ठप गए। इस कारण इन बिजली घरों से अटैच कई सेक्टर की बत्ती गुल हो गई है। वहीं बिजली संकट के चलते रैपिड मेट्रो सेवा भी एकक घंटे प्रभावित रही। इसके चलते लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। 220 KVA बिजली घर का मुख्य ट्रांसफार्मर जला जानकारी के मुताबिक, गुरुग्राम के सेक्टर 38 से 57 तक पावर सप्लाई ठप हो गई है। वहीं सेक्टर 72 में भी ट्रांसफार्मर जल गया। यहां 220 KVA बिजली घर का मुख्य ट्रांसफार्मर फूंकने से 7 बिजली घर ठप हो गए हैं। इसके अलावा गुरुग्राम सेक्टर 18 भी बिजली नहीं आने से प्रभावित हुआ है। भीषण गर्मी के बीच बिजली संकट से लोग परेशान हो गए हैं। गुरुग्राम के सेक्टर-72 स्थित 220 KVA पावर स्टेशन के मुख्य ट्रांसफॉर्मर में आग लगने के बाद बिजली गुल हो गई। इससे शहर के कई इलाकों में बिजली सप्लाई बाधित हो गई। 7-8 घंटे में फॉल्ट दुरुस्त होगा बिजली विभाग के अनुसार, तत्काल राहत की उम्मीद नहीं है, देर रात तक बिजली सप्लाई शुरू हो सकती है। वहीं ट्रांसफार्मर ठीक होने में 8 से 10 घंटे लगेंगे। देर रात तक सप्लाई बहाल होने की उम्मीद है। मेट्रो ने क्या कहा? DMRC प्रवक्ता ने बताया कि गुरुग्राम के सेक्टर-72 स्थित HVPNL के सबस्टेशन से बिजली सप्लाई बाधित होने के कारण रैपिड मेट्रो प्रभावित हुई। HVPNL सबस्टेशन गुरुग्राम शहर और येलो लाइन के गुरुग्राम सेक्शन को बिजली सप्लाई करता है। रैपिड मेट्रो में शाम 7:50 बजे से 8:33 बजे तक ट्रेन सेवाएं उपलब्ध नहीं थीं। हालांकि, येलो लाइन पर सेवाएं स्टैंडबाय सबस्टेशन के माध्यम से नियंत्रित रहीं और इस दौरान सामान्य रूप से चलती रहीं। सेक्टर-72 सबस्टेशन के माध्यम से HVPNL द्वारा बिजली सप्लाई बहाल किए जाने के बाद रैपिड मेट्रो की सामान्य सेवाएं भी पुनः शुरू कर दी गईं।  

संशोधित चयन सूची पर विवाद के बीच हाईकोर्ट का यथास्थिति बनाए रखने का आदेश

चंडीगढ़ चंडीगढ़ से बड़ी खबर सामने आई है। Punjab and Haryana High Court ने हरियाणा ग्रुप-D भर्ती में एक्सीलेंट स्पोर्ट्स पर्सन (ESP) श्रेणी के चयनित उम्मीदवारों को बड़ी राहत देते हुए उनकी सेवाएं समाप्त करने की कार्रवाई पर फिलहाल रोक लगा दी है। अदालत ने याचिकाकर्ताओं की सेवाओं के संबंध में “यथास्थिति बनाए रखने” के आदेश दिए हैं। यानी अगली सुनवाई तक चयनित उम्मीदवार अपनी नौकरी जारी रख सकेंगे। संशोधित सूची के बाद बढ़ा था विवाद यह मामला उस समय सामने आया जब Haryana Staff Selection Commission द्वारा 18 मई 2026 को संशोधित चयन सूची जारी की गई। नई सूची के आधार पर उन उम्मीदवारों की उम्मीदवारी रद्द करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई, जो पहले ही चयनित होकर विभिन्न विभागों में नौकरी जॉइन कर चुके थे। स्पोर्ट्स ग्रेडेशन सर्टिफिकेट बना विवाद की वजह याचिकाकर्ताओं ने अदालत में कहा कि भर्ती प्रक्रिया के दौरान उनके सभी दस्तावेज और प्रमाणपत्रों की जांच पहले ही हो चुकी थी। इसके बावजूद महीनों तक सेवा लेने के बाद अब चयन रद्द करना पूरी तरह मनमाना और कानून के खिलाफ है। मामला मुख्य रूप से स्पोर्ट्स ग्रेडेशन सर्टिफिकेट के सत्यापन से जुड़ा बताया गया। खेल विभाग की रिपोर्ट के आधार पर संशोधित सूची तैयार की गई थी। हाई कोर्ट ने क्या कहा? मामले की सुनवाई जस्टिस Sandeep Moudgil की अदालत में हुई।याचिकाकर्ताओं की ओर से वकील Jasbir Mor ने दलील दी कि चयनित उम्मीदवार नियमित रूप से सेवाएं दे रहे हैं और अचानक की गई कार्रवाई से उनका रोजगार खतरे में पड़ गया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए हाई कोर्ट ने आदेश दिया कि फिलहाल वर्तमान स्थिति बरकरार रखी जाए। अदालत ने राज्य सरकार और अन्य पक्षों को जवाब दाखिल करने के निर्देश भी दिए हैं। अगली सुनवाई 2 सितंबर को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 2 सितंबर 2026 तय की है। फिलहाल इस अंतरिम आदेश से उन खिलाड़ियों को बड़ी राहत मिली है, जिनकी सरकारी नौकरी संशोधित चयन सूची के बाद खतरे में पड़ गई थी।

HSSC सचिव के रवैये पर हाई कोर्ट नाराज, कोर्ट में पेश न होने पर थमाया अवमानना नोटिस

चंडीगढ़. हरियाणा की सरकारी भर्ती प्रक्रिया से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने हरियाणा स्टाफ सलेक्शन कमीशन के सचिव चिन्मय गर्ग के खिलाफ कड़ा रुख अपनाते हुए अवमानना कार्रवाई शुरू करने के संकेत दिए हैं। अदालत ने सचिव को कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए पूछा है कि न्यायालय के आदेशों की अवहेलना करने पर उनके खिलाफ अवमानना की कार्रवाई क्यों न की जाए। हाई कोर्ट ने यह भी स्पष्ट कर दिया कि मामलों में अदालत के आदेशों को हल्के में लेने की अनुमति किसी को नहीं दी जा सकती। मामला हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग की भर्ती प्रक्रिया से जुड़ी याचिका पर सुनवाई के दौरान सामने आया। सुनवाई के समय हरियाणा सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता दीपक बाल्यान अदालत में पेश हुए। उन्होंने न्यायालय को बताया कि आयोग के सचिव की ओर से जो हलफनामा दाखिल किया गया है, वह अदालत द्वारा उठाए गए सवालों और निर्देशों का संतोषजनक उत्तर नहीं देता। राज्य पक्ष ने कहा कि कुछ तथ्यों को और स्पष्ट करने की आवश्यकता है तथा विस्तृत जवाब तैयार करने के लिए एक सप्ताह का अतिरिक्त समय दिया जाए। इस पर जस्टिस संदीप मौदगिल ने राज्य सरकार को राहत देते हुए नया हलफनामा दाखिल करने के लिए एक सप्ताह का समय तो दे दिया, लेकिन साथ ही सख्त टिप्पणी भी की। अदालत ने स्पष्ट कहा कि यह “अंतिम अवसर” होगा और इसके बाद किसी प्रकार की ढिलाई स्वीकार नहीं की जाएगी। कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 29 मई 2026 तय कर दी। सुनवाई के दौरान सबसे गंभीर पहलू तब सामने आया जब अदालत ने पाया कि एचएसएससी सचिव चिन्मय गर्ग स्वयं अदालत में उपस्थित नहीं हुए हैं। न्यायालय ने इस पर तुरंत राज्य के वकील से स्पष्टीकरण मांगा। अदालत को बताया गया कि सचिव उस समय एडवोकेट जनरल, हरियाणा के कार्यालय में मौजूद थे। यह जानकारी मिलते ही हाई कोर्ट ने तीखी नाराजगी व्यक्त की। कोर्ट ने कहा कि पिछली सुनवाई में सचिव को व्यक्तिगत उपस्थिति से कोई छूट नहीं दी गई थी। इसके बावजूद उनका अदालत में उपस्थित न होना न्यायिक आदेशों की अनदेखी माना जाएगा। न्यायालय ने यह भी कहा कि जब कोई अधिकारी अदालत के समक्ष जवाबदेह होता है, तब उसका यह दायित्व बनता है कि वह स्वयं उपस्थित होकर स्थिति स्पष्ट करे। केवल हलफनामा दाखिल कर देने से जिम्मेदारी समाप्त नहीं हो जाती। हाई कोर्ट ने अपनी टिप्पणी में कहा कि प्रथम दृष्टया यह प्रतीत होता है कि सचिव ने न्यायालय के आदेशों की “जानबूझकर और इरादतन अवहेलना” की है। अदालत ने माना कि न केवल समय पर स्पष्ट जवाब दाखिल नहीं किया गया बल्कि न्यायालय में अनुपस्थित रहकर सुनवाई प्रक्रिया को भी प्रभावित किया गया। इसी आधार पर सचिव के खिलाफ अवमानना कार्यवाही प्रारंभ करने के लिए कारण बताओ नोटिस जारी किया गया।अदालत ने यह भी निर्देश दिए कि मामले को अत्यावश्यक श्रेणी में सूचीबद्ध किया जाए ।

महिला की गुहार सुन भावुक हुए CM नायब सैनी, लापरवाह अधिकारियों पर बरसे

कुरुक्षेत्र. विधानसभा हलके लाडवा के शिवाला रामकुंडी में मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने वीरवार को जन संवाद कार्यक्रम किया। इस दौरान मेहरा गांव निवासी धूप सिंह और महिला प्रियंका ने शिकायत रखते हुए बताया कि उनके खेत के रास्ते में ट्रांसफार्मर और खंभे लगाकर रास्ता रोक दिया है, जिससे वे खेती भी नहीं कर पा रहे हैं। इस दौरान महिला रोने लगी और कहा कि वह 19 शिकायतें दे चुकी है लेकिन रास्ता खाली नहीं हुआ। उन्हें धमकियां भी दी जा रही हैं। अब रास्ता नहीं मिला तो वह बेटे के साथ जहर खा लेगी। इस पर मुख्यमंत्री ने महिला को शांत कराया और फिर अधिकारियों को फटकार लगाई। मामले में एक्सईएन को फटकार लगाई तो उन्होंने कहा कि एक महीने पहले ही यहां ज्वाइन किया है। इसके बाद मुख्यमंत्री ने एसडीएम लाडवा को मामले की जांच करने के निर्देश दिए। एसपी को धमकी देने वालों के खिलाफ केस दर्ज कर कार्रवाई करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री सैनी ने जन संवाद कार्यक्रम में अधिकारियों को सख्त लहजे में कहा कि आम नागरिकों को कार्यालयों के बार-बार चक्कर लगवाने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने शिक्षा विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए जल्द ऑनलाइन नाम ठीक करने की प्रक्रिया को पूरा करने के बाद आरटीई के तहत बच्चे का प्राइवेट स्कूल में दाखिला करवाना सुनिश्चित किया जाए। कार्यक्रम के लिए 338 शिकायतें रजिस्टर्ड की गई थीं। मुख्यमंत्री करीब 10 शिकायकर्ताओं से ही मंच के माध्यम से सीधा संवाद कर पाए। उसके बाद उन्होंने नीचे उतर कर शिकायतकर्ताओं के पास जाकर उनकी शिकायतें लीं और अधिकारियों को समाधान के निर्देश दिए। 74 सीएम अनाउंसमेंट में से 38 का काम हो चुका पूरा मुख्यमंत्री सैनी ने कहा कि लाडवा हलके के विकास को गति देने के लिए उनके साढ़े 11 वर्षों के कार्यकाल में 74 सीएम अनाउंसमेंट हुई हैं। इनमें से 38 का काम पूरा हो चुका और बाकी पर काम जारी है। सरकार ने लाडवा विधानसभा क्षेत्र में विकास कार्यों पर पिछले साढ़े 11 वर्षों में 807 करोड़ रुपये खर्च किए हैं, जबकि कांग्रेस के 10 साल के शासनकाल में मात्र 310 करोड़ रुपये खर्च किए गए थे। गंभीर मैटर हो तो बताओ, सबने हाथ उठाए तो सीएम वहीं पहुंचे मुख्यमंत्री शिवाला रामकुंडी में आयोजित जनसंवाद कार्यक्रम में शिकायतें सुनने पहुंचे। 338 शिकायतें रजिस्टर्ड हुई थीं, लेकिन शुरू की 10 शिकायतें सुनने और उनका समाधान करने के बाद मुख्यमंत्री मंच पर माइक से लोगों से मुखातिब होते हुए बोले- किसे का गंभीर मैटर हो तो बताओ। इस पर शिकायत लेकर पहुंचे सभी लोगों ने हाथ उठाए। मुख्यमंत्री मुस्कुराए और अपनी कुर्सी छोड़ खड़े हो गए। इसके बाद मुख्यमंत्री सुरक्षा घेरे को तोड़ते हुए हलके के लोगों के समीप पहुंच गए।

गुरु-शिष्य परंपरा योजना से पारंपरिक कलाओं को बढ़ावा, हरियाणा सरकार देगी छात्रवृत्ति

फरीदाबाद. गुरु शिष्य परंपरा प्रशिक्षण योजना के तहत गुरु, संगतकार और शिष्यों को छात्रवृत्ति प्रदान की जाएगी। इस योजना का लाभ पाने के लिए लुप्त होती विधाओं का प्रशिक्षण देने वाले गुरुओं और शिष्यों की जानकारी कला एवं सांस्कृतिक कार्य विभाग को भेजी जाए। उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र प्रयागराज द्वारा प्रदेश में लुप्त होती विधाओं का प्रशिक्षण देने वालों को प्रोत्साहित किया जा रहा है। क्या होगी छात्रवृत्ति की राशि? गुरु शिष्य परंपरा प्रशिक्षण योजना के तहत गुरु को प्रति माह 7500 रुपये, प्रति संगतकार को प्रति माह 3750 रुपये और प्रत्येक शिष्य को प्रति माह 1500 रुपये की राशि छात्रवृत्ति के तौर पर प्रदान की जाएगी। इस योजना का लाभ अधिक से अधिक पात्र नागरिकों तक पहुंचाने के लिए गुरुओं तथा शिष्यों के नामों की सूची कला एवं सांस्कृतिक कार्य विभाग हरियाणा को भेजी जाए, ताकि भारत सरकार की इस नीति के प्रति जागरूक होकर अधिक से अधिक लोग लाभान्वित हो सकें। इस योजना के बारे में कला एवं सांस्कृतिक कार्य विभाग के सेक्टर-सात, एससीओ नंबर-29, दूसरा तल स्थित कार्यालय में संपर्क किया जा सकता है।

खनन माफिया पर प्रशासन की सख्ती, यमुना नगर में 100+ वाहन पकड़े गए

यमुना नगर. यमुनानगर में लगातार उजागर हो रहे अवैध खनन के नेटवर्क पर आखिरकार बड़ी कार्रवाई हुई है। दैनिक जागरण द्वारा लगातार प्रकाशित खबरों के बाद करनाल स्पेशल टास्क फोर्स और माइनिंग विभाग की संयुक्त टीम ने इंद्री और लाडवा क्षेत्र में अवैध खनन सामग्री से भरे 100 से अधिक वाहनों को पकड़कर खनन माफिया पर बड़ा शिकंजा कसा है। जांच में अब तक 25 से अधिक वाहनों के पास ई-रवन्ना, रॉयल्टी और परिवहन संबंधी वैध दस्तावेज नहीं मिले हैं। कार्रवाई की सूचना मिलते ही कई चालक हाईवे और ढाबों पर वाहन छोड़कर फरार हो गए। बेलगढ़ क्षेत्र, यमुना नदी और आसपास के इलाकों में अवैध खनन नेटवर्क चल रहे है। खबरों में बार-बार सामने लाया गया कि किस प्रकार यमुनानगर से प्रतिदिन भारी संख्या में खनन सामग्री से भरे वाहन प्रदेश के विभिन्न जिलों तक पहुंच रहे हैं। इसके बावजूद प्रशासनिक दावे केवल कागजों तक सीमित दिखाई दे रहे थे। सबसे बड़ा सवाल यह खड़ा हो गया है कि जिले में 20 से अधिक माइनिंग नाके होने के बावजूद अवैध खनन सामग्री से भरे वाहन यमुनानगर से निकलकर करनाल तक कैसे पहुंच गए। यदि सीमाओं पर निगरानी और जांच व्यवस्था सक्रिय थी तो इतने बड़े स्तर पर वाहन पकड़े जाने से पूरे सिस्टम की कार्यप्रणाली पर सवाल उठना स्वाभाविक है। खनन विभाग के अधिकारियों के अनुसार पकड़े गए अधिकांश वाहनों के पास वैध दस्तावेज नहीं मिले। कई वाहनों के नंबर, रजिस्ट्रेशन और परिवहन रिकॉर्ड की जांच भी की जा रही है। प्रारंभिक जांच में आशंका जताई जा रही है कि अवैध खनन का यह नेटवर्क लंबे समय से सक्रिय है और इसमें बड़े स्तर पर मिलीभगत की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। वैध खनन कारोबारियों का कहना है कि एक ओर वे करोड़ों रुपये खर्च कर सरकार से खनन ब्लॉक लेते हैं और नियमित राजस्व जमा करते हैं, वहीं दूसरी ओर अवैध खनन माफिया सरकार को प्रतिदिन करोड़ों रुपये का नुकसान पहुंचा रहे हैं। कारोबारियों के अनुसार अवैध खनन के कारण वैध एजेंसियों का कारोबार लगातार प्रभावित हो रहा है। जानकारी के अनुसार जिले में 30 के करीब माइनिंग ब्लॉक समय पर भुगतान न होने और अन्य कारण से पहले ही बंद हो चुके हैं, जबकि कई अन्य ब्लॉक भी बंद होने की स्थिति में पहुंच गए हैं। कारोबारियों का कहना है कि यदि अवैध खनन पर प्रभावी रोक नहीं लगी तो वैध खनन उद्योग गंभीर संकट में आ सकता है। जिले में केवल दो ही साइट चल रही है। यमुना सेवा समिति के प्रधान किरण पाल राणा का कहना है कि करनाल में हुई इस बड़ी कार्रवाई ने यह साफ कर दिया है कि यमुनानगर से संचालित अवैध खनन का नेटवर्क केवल जिला स्तर तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका दायरा दूसरे जिलों तक फैला हुआ है। मामले की जांच होनी चाहिए। जिन नाको से वाहन निकले उन पर कार्रवाई होनी चाहिए।

हरियाणा: ग्रामीण विकास पर फोकस, फतेहाबाद को मिलेगा करोड़ों का बजट

 फतेहाबाद  जिले में विकास कार्यों को गति देने के लिए शनिवार को जिला विकास एवं निगरानी समिति (डीडीएमसी) की बैठक आयोजित होगी। इस बैठक की अध्यक्षता सामाजिक न्याय, अधिकारिता मंत्री कृष्ण कुमार बेदी करेंगे। बैठक में वर्ष 2026-27 की जिला योजना के तहत तैयार वार्षिक कार्य योजना को मंजूरी दी जाएगी। जिला योजना के अंतर्गत जिले के लिए कुल 14.86 करोड़ रुपये का बजट स्वीकृत किया गया है। इसमें 8.91करोड़ रुपये सामान्य वर्ग तथा 5.94 करोड़ रुपये अनुसूचित वर्ग के विकास कार्यों के लिए निर्धारित किए गए हैं। पिछले वित्तीय वर्ष के लंबित कार्यों के 1.56 करोड़ रुपये के बिलों के भुगतान के बाद शेष 13.29 करोड़ रुपये की राशि जिले में विभिन्न विकास कार्यों पर खर्च की जाएगी। बैठक को जिले की विकास योजनाओं के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों पर रहेगा सबसे ज्यादा फोकस बैठक में प्रस्तुत होने वाले प्रस्तावित बजट के अनुसार इस बार भी ग्रामीण क्षेत्रों के विकास को प्राथमिकता दी गई है। ग्रामीण इलाकों के लिए 10.33 करोड़ रुपये जबकि शहरी क्षेत्रों के लिए 2.95 करोड़ रुपये का प्रावधान रखा गया है। ब्लाक स्तर पर सबसे अधिक 2.39 करोड़ रुपये फतेहाबाद ब्लाक को मिलने का प्रस्ताव है। इसके अलावा टोहाना ब्लाक के लिए 1.81 करोड़ रुपये, रतिया के लिए 1.52 करोड़ रुपये, भट्टू कलां के लिए 1.46 करोड़ रुपये, भूना के लिए 1.38 करोड़ रुपये, नागपुर के लिए 1.02 करोड़ रुपये तथा जाखल ब्लाक के लिए 72.53 लाख रुपये निर्धारित किए गए हैं। शहरी निकायों में खर्च होगी इतनी राशि वहीं, शहरी निकायों के विकास कार्यों के लिए भी अलग से बजट तय किया गया है। नगर परिषद फतेहाबाद को 99.88 लाख रुपये, टोहाना को 52.43 लाख रुपये, भूना को 42.47 लाख रुपये, रतिया को 39.90 लाख रुपये तथा जाखल को 10.99 लाख रुपये दिए जाने का प्रस्ताव है। बैठक में इन प्रस्तावों पर चर्चा के बाद अंतिम मंजूरी दी जाएगी। बता दें कि सड़कों, गलियों, पेयजल, सामुदायिक भवनों और अन्य मूलभूत सुविधाओं से जुड़े कार्यों को इस बजट से गति मिलेगी। पिछले कार्यों की भी होगी समीक्षा बैठक में पिछले वित्तीय वर्ष 2025-26 में हुए विकास कार्यों की प्रगति रिपोर्ट भी रखी जाएगी। रिकार्ड के अनुसार पिछले वर्ष भी जिले को 14.86 करोड़ रुपये का बजट मिला था। 31 मार्च 2026 तक 13.54 करोड़ रुपये की राशि विकास कार्यों पर खर्च की जा चुकी है। इसमें सामान्य वर्ग के कार्यों पर 7.65 करोड़ रुपये तथा अनुसूचित वर्ग के विकास कार्यों पर 5.88 करोड़ रुपये व्यय किए गए। पिछले वर्ष कुल 142 कार्य स्वीकृत किए गए थे भौतिक प्रगति रिपोर्ट के अनुसार पिछले वर्ष कुल 142 कार्य स्वीकृत किए गए थे। इनमें से 80 कार्य पूरे हो चुके हैं जबकि 119 कार्य अभी विभिन्न चरणों में प्रगति पर हैं। बैठक में इन परियोजनाओं की स्थिति पर विस्तार से चर्चा होगी और लंबित कार्यों को जल्द पूरा करने के निर्देश भी मंत्री द्वारा दिए जाएंगे।साथ ही 10 जुलाई 2025 को हुई पिछली बैठक की कार्यवाही की पुष्टि भी सदन में की जाएगी। जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों की रहेगी मौजूदगी डीडीएमसी की इस बैठक में शामिल होने के लिए प्रशासन की तरफ से जिले के कई प्रमुख जनप्रतिनिधि को निमंत्रण भेजा गया है। बैठक में राज्यसभा सांसद सुभाष बराला, सिरसा लोकसभा सांसद कुमारी शैलजा, फतेहाबाद विधायक बलवान सिंह दौलतपुरिया, रतिया विधायक जरनैल सिंह तथा टोहाना विधायक परमवीर सिंह, जिप चेयरपर्सन सुमन खिचड़ को आमंत्रित किया गया है।