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निरंकारी समागम का असर, करनाल में 34 ट्रेनों के ठहराव की व्यवस्था

करनाल. संत निरंकारी मंडल के 79वें वार्षिक अंतरराष्ट्रीय संत समागम को लेकर रेलवे ने बड़ी तैयारी की है। समागम 23 से 27 अक्टूबर तक पानीपत के समालखा स्थित संत निरंकारी आध्यात्मिक स्थल पर होगा। यह स्थल दिल्ली-अंबाला रेलखंड पर भोडवाल माजरी स्टेशन से सटा हुआ है। इसी कारण रेलवे ने समागम अवधि के दौरान 35 अप और 35 डाउन ट्रेनों का यहां पर दो मिनट का अस्थायी ठहराव देने का प्रस्ताव भेजा था। उत्तर रेलवे ने 20 सितंबर से 31 अक्टूबर तक 34 ट्रेनों के ठहराव को मंजूरी दे दी है। 34 ट्रेनों को मिला दो मिनट का अस्थायी ठहराव समागम को देखते हुए रेलवे के सामने 35 अप और 35 डाउन ट्रेनों को भोडवाल माजरी स्टेशन पर दो मिनट रोकने का प्रस्ताव भेजा गया था। उत्तर रेलवे ने फिलहाल 34 ट्रेनों के ठहराव को मंजूरी दी है। करनाल के यात्रियों को भी मिलेगा सीधा फायदा प्रस्तावित ट्रेनों में शामिल अधिकांश गाड़ियां करनाल रेलवे स्टेशन पर पहले से रुकती हैं। इससे करनाल और आसपास के श्रद्धालु इन ट्रेनों से यात्रा कर भोडवाल माजरी उतर सकेंगे और वहां से समागम स्थल तक आसानी से पहुंच सकेंगे। कई प्रमुख ट्रेनें सूची में शामिल भोडवाल माजरी में अस्थायी ठहराव मिलने वाली ट्रेनों में कई महत्वपूर्ण ट्रेनें शामिल हैं। इनमें 15707 कटिहार-अमृतसर, 12471 स्वराज, 12473 सर्वोदय, 12217 संपर्क क्रांति, 12497 शान-ए-पंजाब, 12925 पश्चिम, 14507 दिल्ली-फाजिल्का, 12715 सचखंड और 12057 जनशताब्दी प्रमुख हैं। इसके अलावा 20433 जम्मू मेल, 18101 टाटा-जम्मू, 12413 गालताधाम पूजा, 12445 उत्तर संपर्क क्रांति, 12449 गोवा संपर्क क्रांति, 11057 मुंबई-अमृतसर, 12919 मालवा, 11077 झेलम, 12311 नेताजी और 22455 कालका एक्सप्रेस भी सूची में शामिल हैं। करनाल स्टेशन पर पहले से रुकती हैं ज्यादातर ट्रेनें इनमें से अधिकांश ट्रेनों का करनाल रेलवे स्टेशन पर पहले से ठहराव है। ऐसे में करनाल के यात्री इन ट्रेनों में टिकट लेकर भोडवाल माजरी उतर सकते हैं और वहां से समालखा स्थित संत निरंकारी आध्यात्मिक स्थल तक पहुंच सकते हैं। हिमाचल एक्सप्रेस के ठहराव की मांग अभी बाकी रेलवे के फैसले के बाद भी संत निरंकारी मंडल की एक अहम मांग पूरी होना बाकी है। मंडल ने हिमाचल एक्सप्रेस को भी भोडवाल माजरी स्टेशन पर अस्थायी ठहराव देने की मांग की है। रात के समय यात्रियों को हो सकती है परेशानी संत निरंकारी मंडल के सचिव जोगिंद्र सुखीजा के अनुसार इस संबंध में उत्तर रेलवे के चीफ पैसेंजर ट्रैफिक मैनेजर को पत्र भेजा गया है। मंडल का कहना है कि हिमाचल क्षेत्र से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए यह ट्रेन बेहद महत्वपूर्ण है। 14054 डाउन हिमाचल एक्सप्रेस दिल्ली से आते हुए रात करीब 2 बजे करनाल पहुंचती है, जबकि 14053 अप हिमाचल एक्सप्रेस दिल्ली की ओर जाते समय करीब 1:30 बजे करनाल में रुकती है। यदि भोडवाल माजरी पर इसका ठहराव नहीं मिलता है तो हिमाचल और करनाल के हजारों श्रद्धालुओं को रात के समय करनाल या पानीपत उतरकर सड़क मार्ग से समालखा जाना पड़ सकता है। श्रद्धालुओं की सुविधा को लेकर रेलवे पर नजर 79वें अंतरराष्ट्रीय संत समागम में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है। रेलवे द्वारा भोडवाल माजरी पर अतिरिक्त ट्रेनों के ठहराव की व्यवस्था को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अब नजर इस बात पर है कि मंडल की मांग के बाद हिमाचल एक्सप्रेस को भी अस्थायी ठहराव की मंजूरी मिलती है या नहीं।

126 वर्षों से कायम अनोखी परंपरा, हरियाणा में मुस्लिम परिवार की 5वीं पीढ़ी बना रही रावण के पुतले

 पानीपत  पानीपत में मुस्लिम परिवार दशकों से रामलीला के पुतले बनाकर सांप्रदायिक सौहार्द की मिसाल पेश कर रहा है। यमुनानगर में रावलपिंडी से चली कारीगरी चार दशक बाद भी जारी है। कुरुक्षेत्र में कैथल से शुरू हुआ हुनर पांचवीं पीढ़ी के हाथों तक पहुंच गया है, जबकि भिवानी में वर्ष 1902 से चली आ रही परंपरा आज भी 100 फीट के रावण का चेहरा गढ़ रही है। इन परिवारों के लिए पुतले बनाना केवल रोजगार नहीं। यह उनके बुजुर्गों से मिला हुनर, परिवार की पहचान और उस सांस्कृतिक परंपरा को आगे बढ़ाने का संकल्प है, जिसमें दशहरा बुराई पर अच्छाई की जीत के साथ समाज को जोड़ने का संदेश भी देता है। बदलते समय में पुतलों के आकार और डिजाइन बदले, सामग्री महंगी हुई, काम का तरीका बदला, लेकिन बांस मोड़ने, कागज साधने और रावण के चेहरे में भाव भरने की कला पीढ़ी दर पीढ़ी चलती रही। मुस्लिम परिवार की गंगा-जमीनी तहजीब पानीपत में दशहरा सांप्रदायिक सौहार्द की ऐसी तस्वीर पेश करता है, जिसमें मुस्लिम परिवार के हाथों से रामलीला के रावण, मेघनाद और कुंभकर्ण आकार लेते हैं। असगर अली का परिवार दशकों से इस काम में जुटा है। उनके पिता हाजी अशरफ अली ने पानीपत में पुतले बनाने का काम शुरू किया था। अब असगर अली के साथ उनके बेटे भी इस विरासत को आगे बढ़ा है। खास बात यह है कि एमसीए पास सॉफ्टवेयर इंजीनियर इमरान और बीटेक सिविल इंजीनियर सोहेल भी नौकरी -पेशा दुनिया के विकल्पों के बावजूद पिता के साथ पुतले बनाने में हाथ बंटा रहा है 50 कारीगरों की टीम रामलीला मैदानों के लिए पुतले कर रही तैयार हर वर्ष दशहरे से करीब डेढ़-दो माह पूर्व परिवार पानीपत पहुंचता है। इस बार करीब 50 कारीगरों की टीम अलग-अलग रामलीला मैदानों के लिए पुतले तैयार कर रही है। सेक्टर-25 के लिए 100 फीट, सेक्टर-13-17 के लिए 90 फीट तथा श्री देवी मंदिर और माडल टाउन के लिए 70-70 फीट ऊंचे रावण के पुतले बनाए जा रहे हैं। पुतलों का ढांचा बांस की खपच्चियों से तैयार होता है। खुले मैदान में धूप, बारिश और तेज हवा के बीच कारीगर दिन-रात जुटे रहते हैं। असगर परिवार के लिए यह काम केवल कमाई नहीं, बल्कि पानीपत की रामलीला परंपरा और सामाजिक भाईचारे का हिस्सा है। यमुनानगर: रावलपिंडी से चली कारीगरी, चार दशक से जारी श्री सनातन धर्म मंदिर में इन दिनों रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतले आकार ले रहे हैं। इन्हें तैयार कर रहा है महेंद्र मनचंदा का परिवार, जिसके बुजुर्गों ने पाकिस्तान के रावलपिंडी में इस कला की हैं। अब उनके बेटे पंकज भी साथ हैं। इस बार रावण 70 फीट, कुंभकर्ण 60 फीट और मेघनाद 50 फीट का होगा। महंगाई ने इस बार पुतलों की लागत बढ़ा दी है। पिछले वर्ष 160 से 170 रुपये किलो मिलने वाली सुतली 300 रुपये किलो हो गई है। करीब 500 रुपये में मिलने वाली कौड़ी 1000 रुपये से अधिक की है, जबकि कपड़े की कीमत भी लगभग दोगुनी हो चुकी है। दशहरा ग्राउंड की 70 साल पुरानी परंपरा यमुनानगर के दशहरा ग्राउंड में रावण दहन की परंपरा 1950 के दशक से जुड़ी है। पुराने रिकॉर्ड के अनुसार वर्ष 1952 में यहां दशहरा दहन हुआ था। इसके बाद यह स्थान दशहरा ग्राउंड के नाम से पहचाना जाने लगा। कुरुक्षेत्र में रावण के पुतले बनाने वाले परिवार की कहानी कैथल से शुरू हुई और अब पांचवीं पीढ़ी तक पहुंच गई है। परिवार की चौथी पीढ़ी से जुड़े शमां खान बताते हैं कि उनके दादा छज्जु राम ने 1962-63 में कैथल में पुतले बनाने शुरू किए थे। इसके बाद उनके पिता मोहम्मद इस्लाम खान ने करीब 1985 में कुरुक्षेत्र में इस काम को आगे बढ़ाया। अब शमां खान और उनके बड़े भाई हाजी इसरार इस कारीगरी में जुटे हैं। चौथी पीढ़ी के शाहरुख और सादिक खान भी काम सीख रहे हैं, जबकि पांचवीं पीढ़ी के अजमत और अब्बूजर खान भी इस हुनर से जुड़ने की कोशिश कर रहे हैं। इस बार कुरुक्षेत्र में 101 फीट ऊंचा रावण तैयार किया जा रहा है। परिवार कुरुक्षेत्र के साथ कैथल, चीका, पाथड़ा, पिहोवा और खनौरी के लिए भी पुतले तैयार कर रहा है। भिवानी: 1920 में दादा ने पुतला बनाना शुरू किया भिवानी में रावण के पुतले बनाने की कहानी एक सदी से भी ज्यादा पुरानी है। महेंद्रगढ़ के बास मोहल्ला निवासी 76 वर्षीय मोहनलाल बताते हैं कि उनके दादा शिवदास ने वर्ष 1902 में पुतले बनाने शुरू किए थे। फिर उनके पिता मंगलसेन और उसके बाद उन्होंने इस हुनर को आगे बढ़ाया। अब उनके बेटे श्यामलाल, मनीष और हरीश भी इसी काम में जुटे हैं। पांचवीं पीढ़ी का कपिल भी बांस पकड़ना सीख रहा है। इस बार भिवानी में 100 फीट का रावण तथा 80-80 फीट के मेघनाद व कुंभकर्ण तैयार किए जा रहे हैं। परिवार हरियाणा के अलावा हिमाचल, दिल्ली और चंडीगढ़ समेत कई राज्यों में पुतले बनाता है। एक बड़े सेट को तैयार करने में चार लाख रुपये से अधिक खर्च आता है। इस परिवार की कारीगरी को 100 से अधिक मेडल मिल चुके हैं।

वायु सेना दिवस पर रेजांगला में गूंजा शौर्य का सम्मान, पूर्व सैन्य अधिकारियों ने शहीदों को दी श्रद्धांजलि

गुरुग्राम. आसमान की ऊंचाइयों से दुश्मन के मंसूबों को ध्वस्त करने वाली भारतीय वायु सेना के शौर्य और पराक्रम को वायु सेना दिवस पर सलाम किया गया। बृहस्पतिवार सुबह रेजांगला युद्ध स्मारक पर आयोजित समारोह में पूर्व सैन्य अधिकारियों और क्षेत्र के गणमान्य लोगों ने देश की रक्षा में सर्वोच्च बलिदान देने वाले वीर सैनिकों को नमन किया। इस दौरान वक्ताओं ने कहा कि देश की सुरक्षा के लिए अपने प्राण न्योछावर करने वाले सैनिकों का सम्मान करना प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है। पूर्व सैन्य अधिकारी कर्नल महावीर यादव ने कहा कि बलिदानियों का सम्मान ही राष्ट्र का सम्मान है। सैनिकों ने देश की सीमाओं की रक्षा के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर किया है। उनका साहस और त्याग देश की युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणा का स्रोत है। "अपने पूर्वजों की अस्थियों और अपने देवताओं के मंदिरों के लिए, भयंकर चुनौतियों का सामना करते हुए मरने से बेहतर मृत्यु और क्या हो सकती है?" थॉमस बैबिंगटन मैकाले के ये अमर शब्द सम्मान के सर्वोच्च रूप की बात करते हैं – एक ऐसा जीवन जो स्वेच्छा से बलिदान कर दिया जाता है, बहादुरी से खतरे का सामना करते हुए, जो सबसे पवित्र है उसकी रक्षा के लिए: अपने पूर्वजों, मातृभूमि, संस्कृति और विश्वासों की रक्षा के लिए। दक्षिणपूर्वी लद्दाख के लुभावने ऊंचे इलाकों में , जहां बर्फीली हवाएं बलिदान की कहानियां फुसफुसाती हैं और बर्फ से ढकी चोटियां मूक प्रहरी की तरह खड़ी हैं, वहां एक ऐसी जगह मौजूद है जहां यह अर्थ न केवल पत्थर पर उकेरा गया है, बल्कि स्वयं भूमि की आत्मा में समाया हुआ है। चुशुल के मैदानों में 15,000 फीट से अधिक की ऊंचाई पर स्थित , रेजांग ला युद्ध स्मारक मात्र कंक्रीट और संगमरमर की एक इमारत नहीं है; यह स्मृति की एक जीवंत लौ है। यहाँ इतिहास किताबों में नहीं पढ़ा जाता, बल्कि इसे सीने में महसूस किया जाता है, मौन में सुना जाता है और गहरे नीले आकाश में शान से लहराते तिरंगे में देखा जाता है। यह स्मारक मूल रूप से 1963 में चुशुल के मैदानों में, 15,000 फीट से अधिक की ऊंचाई पर , भारत-चीन सीमा पर उन असाधारण पुरुषों के समूह को सम्मानित करने के लिए बनाया गया था जिन्होंने साहस के अर्थ को फिर से परिभाषित किया। 18 नवंबर, 1962 को , भारत-चीन युद्ध के दौरान, 13 कुमाऊं रेजिमेंट की चार्ली कंपनी के 120 सैनिकों ने रेजांग ला दर्रे पर अंतिम मोर्चा संभाला। शून्य से नीचे के तापमान में भारी चीनी सेनाओं के खिलाफ लड़ते हुए, उन्होंने "आखिरी आदमी और आखिरी गोली" तक लड़ाई लड़ी। यह स्मारक उस दुर्भाग्यपूर्ण दिन की स्थायी स्मृति के रूप में खड़ा है जब मेजर शैतान सिंह (परमवीर चक्र) और 113 सैनिकों ने पूर्वी लद्दाख में कैलाश पर्वतमाला पर 16,500 फीट की ऊंचाई पर भारतीय क्षेत्र की रक्षा करते हुए सर्वोच्च बलिदान दिया था। जैसे ही आगंतुक स्मारक परिसर के पास पहुंचते हैं, उनका स्वागत विशाल भारतीय तिरंगे झंडे द्वारा किया जाता है जो हिमालय की भव्य चोटियों की पृष्ठभूमि में लहराता है। आज, यह स्मारक उस दुर्भाग्यपूर्ण दिन की एक स्थायी स्मृति के रूप में खड़ा है, जिसमें दूर से रेजांग ला दर्रा स्पष्ट रूप से दिखाई देता है – एक ऐसा दृश्य जो विस्मय और गहरी श्रद्धा दोनों को जगाता है। अहिर धाम, रेज़ांगला ऐतिहासिक युद्ध के ठीक एक साल बाद निर्मित मूल स्मारक एक सरल लेकिन शक्तिशाली संरचना थी जो सैनिकों के बलिदान के सार को दर्शाती थी। इसके प्रवेश द्वार पर अहीर धाम स्थित है , जो एक पवित्र श्मशान स्थल है जहाँ उन वीर शहीदों के पार्थिव शरीर को पूर्ण सैन्य सम्मान और श्रद्धा के साथ अग्नि के हवाले किया गया था। इस पवित्र भूमि पर उत्कीर्ण शिलालेख में एक ऐसा सशक्त संदेश है जो दशकों बाद भी आगंतुकों को भावुक कर देता है और उनकी आँखों में आँसू ला देता है। कई वर्षों तक, यह स्मारक सैन्य कर्मियों, पूर्व सैनिकों और उन नागरिकों के लिए एक तीर्थस्थल रहा है जो रेजांग ला की कहानी से गहरा जुड़ाव महसूस करते हैं। इसके दूरस्थ स्थान और वहां तक ​​पहुंचने की चुनौतीपूर्ण यात्रा के बावजूद, हजारों लोग भारत की संप्रभुता की अद्वितीय वीरता से रक्षा करने वाले वीरों को श्रद्धांजलि अर्पित करने के लिए यहां आते हैं।

हरियाणा में बदला मौसम का मिजाज, 5 जिलों में बारिश की चेतावनी; पंचकूला में ओलावृष्टि

हिसार. प्रदेश में मौसम फिर से बदलने लगा है। पंचकूला में मौसम में बदलाव के बाद वर्षा के साथ ओलावृष्टि हुई। इसके साथ ही यमुनानगर में भी वर्षा होने से मंडी में फसल भीग गई। ओलावृष्टि और वर्षा के चलते तापमान में भी गिरावट हो सकती है। आने वाले दिनों में 10 अक्टूबर तक वर्षा का यलो अलर्ट जारी किया गया है। वीरवार को ही पांच जिलों में वर्षा का यलो अलर्ट जारी किया गया है। भारत मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार मौसम में फिर से बदलाव हुआ है। मंगलवार रात के बाद पंचकूला में वर्षा के साथ ओलावृष्टि होने से मौसम ठंडा हो गया। वहीं, यमुना नगर में वर्षा हुई। इससे मंडियों में पहुंची फसल को बचाने के लिए किसानों को परेशानी का सामना करना पड़ा। मौसम में बदलाव के चलते वीरवार को पंचकूला, यमुनानगर, अंबाला, कुरुक्षेत्र और करनाल में वर्षा का यलो अलर्ट जारी किया गया है। इसी प्रकार 10 अक्टूबर तक प्रदेश के अनेक जिलों में वर्षा हो सकती है।

SIR नोटिस का जवाब नहीं देने वालों के लिए विशेष शिविर शुरू, 28 हजार मामले सुलझे

चंडीगढ़. हरियाणा में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के तहत मतदाता सूची से संबंधित नोटिस और सुनवाई मामलों के समयबद्ध निपटारे को लेकर निर्वाचन आयोग ने विशेष शिविर शुरू किए हैं। पहले दिन बुधवार को 28 हजार मामले निपटाए गए। वीरवार और शुक्रवार को भी विशेष शिविर आयोजित किए जाएंगे। साथ ही निर्वाचन आयोग के प्रतिनिधि घर-घर जाकर भी दस्तावेज जुटाएंगे। मुख्य निर्वाचन अधिकारी ए श्रीनिवास ने नोटिस प्राप्त करने वाले मतदाताओं से निर्धारित तिथि पर सुनवाई में अनिवार्य रूप से उपस्थित होने की अपील की है। निर्वाचन आयोग की ओर से कुल 44 लाख 91 हजार 923 लोगों को नोटिस जारी किए गए थे, जिनमें तीन लाख 15 हजार 173 के सुनवाई मामले लंबित हैं। आयोग द्वारा लंबित मामलों की नियमित समीक्षा करते हुए संबंधित अधिकारियों को लंबित सुनवाई मामलों के शीघ्र निस्तारण, प्रभावी मानिटरिंग व निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार कार्रवाई सुनिश्चित करने पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए गए हैं। नोटिस की सुनवाई समय पर समाप्त करने के लिए आयोग के प्रतिनिधि ऐसे मतदान केंद्रों पर विशेष शिविर व घर-घर सर्वे के दौरान दस्तावेज प्राप्त करेंगे, जहां पर नोटिस प्राप्त होने पर अभी तक संबंधित मतदाताओं द्वारा आवश्यक दस्तावेज जमा नहीं कराए गए हैं। सभी योग्य मतदाताओं के नाम छह नवंबर को प्रकाशित होने वाली अंतिम मतदाता सूची में शामिल होंगे।

ऑपरेशन सिंदूर से फलक तक छाईं व्योमिका सिंह, 21,650 फीट की ऊंचाई पर लहराया परचम

 भिवानी  व्योमिका का अर्थ आकाश है। छठी कक्षा में जब लखनऊ की बेटी व्योमिका सिंह ने अपने नाम का अर्थ जाना तो उसी दिन आकाश में उड़ने का सपना देख लिया। यह सपना आगे चलकर भारतीय वायुसेना की उड़ान बना। वर्ष 2004 में वायुसेना में शामिल होने के बाद उन्होंने चेतक और चीता हेलीकॉप्टर उड़ाए और जम्मू-कश्मीर से लेकर पूर्वोत्तर के दुर्गम व जोखिम भरे इलाकों में जिम्मेदारी निभाई। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान में आतंकी ठिकानों पर हुई कार्रवाई की जानकारी देश के सामने रखने वाली टीम का हिस्सा बनीं तो उनकी पहचान और व्यापक हुई। लखनऊ की बेटी विंग कमांडर व्योमिका सिंह हरियाणा में भिवानी के बापोड़ा गांव की बहू हैं। फौजियों के इस गांव में व्योमिका की उपलब्धि को स्वजन अपनी बहू के साथ पूरे गांव के गौरव के रूप में देखते हैं। 6वीं क्लास में ही कर लिया था पायलट बनेने का निश्चय व्योमिका कहती हैं कि छठी कक्षा में जब वह थीं, तो नाम के अर्थ पर चर्चा के दौरान उन्हें पता चला कि व्योम का अर्थ आकाश है। एक सहपाठी ने उनके नाम का अर्थ बताया तो उसी दिन उन्होंने पायलट बनने का निश्चय कर लिया। स्कूल के दिनों में वह राष्ट्रीय कैडेट कोर से भी जुड़ीं। इसके बाद उन्होंने बीटेक की पढ़ाई पूरी की। वायुसेना अकादमी, डुंडीगल से प्रशिक्षण के बाद उन्होंने चुनौतीपूर्ण क्षेत्रों में हेलीकॉप्टर उड़ाए। वर्ष 2017 में विंग कमांडर बनीं और 2019 में फ्लाइंग ब्रांच में स्थायी कमीशन मिला। उनके पास 2,500 घंटे से अधिक उड़ान का अनुभव है। वर्ष 2020 में अरुणाचल प्रदेश में कठिन परिस्थितियों के बीच नागरिकों को निकालने वाले बचाव अभियान का नेतृत्व किया। वर्ष 2021 में 21,650 फीट ऊंचे माउंट मणिरंग के पर्वतारोहण अभियान में भी हिस्सा लिया। मई 2025 में पहलगाम आतंकी हमले के बाद पाकिस्तान और गुलाम जम्मू-कश्मीर में आतंकी ठिकानों पर की गई सैन्य कार्रवाई के दौरान विंग कमांडर व्योमिका सिंह को विदेश सचिव और कर्नल सोफिया कुरैशी के साथ संयुक्त प्रेस वार्ता में अभियान की जानकारी देने की जिम्मेदारी मिली। सैन्य वर्दी में देश के सामने आईं व्योमिका के लिए यह भूमिका उनके लंबे सैन्य जीवन की एक अलग जिम्मेदारी थी। व्योमिका की करीब 69 वर्षीय बड़ी जेठानी संतोष देवी कहती हैं कि देवरानी ने बापोड़ा का नाम दुनिया में रोशन किया है। उन्हें अपनी छोटी देवरानी पर गर्व है और खुशी है कि उसने यह साबित कर दिया कि म्हारी बहू-बेटी की हिम्मत लड़क्या से कम कोनी। उनका कहना है कि पढ़ने वाली बेटियों को मेहनत कर व्योमिका की तरह साहसी बनना चाहिए।   स्वजन डॉ. अशोक, ईश्वर सिंह और एडवोकेट रामौतार सभ्रवाल भी उनकी उपलब्धि पर गर्व जताते हैं। वह अपने परिवार से भारतीय सशस्त्र बलों में जाने वाली पहली सदस्य हैं। उनके पिता आरएस निम हैं। सैन्य परंपरा की पहचान बना टी-55 टैंक बापोड़ा की करीब 20 हजार आबादी में दो हजार से अधिक सैनिक और पूर्व सैनिक हैं। पूर्व थल सेना अध्यक्ष जनरल वीके सिंह सहित कई सैन्य अधिकारी इस गांव से रहे हैं। गांव के प्रवेश द्वार पर 1971 के युद्ध में इस्तेमाल टी-55 टैंक इसकी सैन्य परंपरा की पहचान है। व्योमिका के पति दिनेश सिंह सभ्रवाल भी विंग कमांडर हैं। स्वजन के अनुसार परिवार के करीब 10 सदस्य सेना में सेवाएं दे चुके हैं।  

अटल कैंटीन पहुंचे हरियाणा के डिप्टी स्पीकर, ₹20 का खाना खाकर दिए ₹200

जींद/चंडीगढ़. हरियाणा के डिप्टी स्पीकर डॉ. कृष्ण मिढ़ा ने जींद की नई अनाज मंडी में अटल कैंटीन में भोजन किया।डिप्टी स्पीकर डॉ. कृष्ण मिढ़ा ने अटल कैंटीन में भोजन किया।कांग्रेस के 'वोट चोरी' आरोपों पर भाजपा का बचाव किया। नई अनाज मंडी में निरीक्षण के दौरान विधानसभा डिप्टी  स्पीकर डॉ. कृष्ण मिढ़ा ने अटल कैंटीन पर खाना खाया। उन्होंने खुद सहित 20 थालियों की 200 रुपये पेमेंट भी की। इस दौरान कैंटीन में काम करने वाली महिलाओं से भी बातचीत की। इसके साथ वहां खाना खा रहे प्रवासी कामगारों से भी बात की और खाने की गुणवत्ता के बारे में पूछा। इस दौरान कांग्रेस के वोट चोरी के आरोपों पर पत्रकारों के सवाल पर डिप्टी स्पीकर ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी अपने जनहितैषी कामों के दम पर लोगों के दिल जीत रहे हैं। भाजपा सरकार लोगों के वोट नहीं चुरा रही, बल्कि अपने अच्छे कामों से लोगों के दिल चुरा रही है। यही वजह है, कांग्रेस हताशा में वोट चोरी जैसे झूठे आरोप लगा रही है। अटल कैंटीन में 10 रुपये में मिलने वाले भोजन का जिक्र करते हुए कहा कि गरीब और जरूरतमंद लोगों को इतने कम दाम में भरपेट पौष्टिक भोजन उपलब्ध करवाना भी जनहित की सोच का उदाहरण है। कांग्रेस इसी तरह के कामों को देखकर परेशान है और जनता के बीच भ्रम फैलाने के लिए वोट चोरी के आरोप लगा रही है।

धूलकोट हादसे में बड़ा सवाल, अंबाला भवन का नक्शा पास था तो निर्माण अवैध कैसे?

अंबाला. धूलकोट में निर्माणाधीन तीन मंजिला अवैध भवन के गिरने से सात लोगों की मौत मामले में मानवाधिकार आयोग ने अंबाला के उपायुक्त, नगर निगम आयुक्त और पुलिस अधीक्षक से विस्तृत रिपोर्ट तलब की है। असिस्टेंट रजिस्ट्रार डॉ. पुनीत अरोड़ा के अनुसार संबंधित प्राधिकारियों की रिपोर्ट अगली सुनवाई से एक सप्ताह पहले आयोग को मिल जानी चाहिए। मामले की अगली सुनवाई 12 नवंबर को होगी। 27 सितंबर को धूलकोट में निर्माणाधीन तीन मंजिला अवैध भवन ढह गया था। मलबे में कई श्रमिक दब गए थे। हादसे में सात लोगों की मौत हो गई थी। 12 श्रमिक घायल हुए थे। घटना को लेकर अमनदीप सिंह भाटिया की शिकायत पर सुनवाई करते हुए हरियाणा मानवाधिकार आयोग के सदस्य (न्यायिक) कुलदीप जैन ने यह आदेश जारी किया।

अमित शाह ने गिनाईं मोदी सरकार की उपलब्धियां, बोले- करोड़ों लोगों को गरीबी से मिली मुक्ति

गुरुग्राम. नरेंद्र मोदी का मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री के तौर पर 25 साल का कार्यकाल पूरा हो गया है. इस उपलक्ष्य में बुधवार को गुरुग्राम में सेवा ज्योति यात्रा कार्यक्रम का आयोजन किया गया. कार्यक्रम में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह शामिल हुए. '25 साल, सेवाकाल' पर कार्यक्रम: अमित शाह ने कहा "7 अक्टूबर का दिन भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में बहुत महत्वपूर्ण है. गरीब परिवार में जन्मे एक व्यक्ति ने अपने गुणों के आधार पर करोड़ों लोगों को साथ लेकर 25 साल तक लगातार मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री रहने का रिकॉर्ड बनाया. ये व्यक्ति हमारे प्रिय नेता नरेंद्र मोदी हैं. जब भी भारत का इतिहास लिखा जाएगा, मोदी के ये 25 साल स्वर्णिम अक्षरों में लिखे जाएंगे." शाह ने कहा कि ये गरीबी से मुक्ति, सुरक्षित भारत, धारा 370 हटाना, नक्सलवाद खत्म करना, राम मंदिर और काशी विश्वनाथ का मंदिर बनाना, देश में इन्फ्रास्ट्रक्र और 25 करोड़ गरीबों को गरीबी रेखा से ऊपर उठाने की यात्रा है. हमने अभी-अभी प्रधानमंत्री को सुना. अमित शाह कार्यक्रम स्थल से 800 मीटर दूर चौराहे पर युवा सेवा ज्योति यात्रा लेकर पहुंचे और वहां मशाल को प्रतिस्थापित किया. स्मृति ईरानी भी रही मौजूद: हरियाणा बीजेपी प्रभारी बनने के बाद स्मृति ईरानी पहली बार हरियाणा पहुंचीं. वो गुरुग्राम में अमित शाह के साथ सेवा ज्योति यात्रा में शामिल हुईं. पार्टी ने उन्हें 23 सितंबर को हरियाणा प्रभारी बनाया. इससे पहले उन्हें 27 सितंबर को भिवानी में एक सम्मेलन में पहुंचना था, लेकिन वो नहीं आईं थी, फिर सेवा ज्योति यात्रा कार्यक्रम में जींद में उनके पहुंचने की जानकारी सामने आई. हालांकि वो गुरुग्राम में आईं. उनके साथ पार्टी के सह प्रभारी भोला सिंह भी रहे.

फल-सब्जियों की बर्बादी पर लगेगी रोक, भारत-ब्रिटेन के ग्रीन कोल्ड चेन नेटवर्क से होगा बड़ा फायदा

करनाल. भारत में हर साल मेहनत से उगाई गई करोड़ों टन फल और सब्जियां बाजार तक पहुंचने से पहले ही सड़ जाती हैं। इस राष्ट्रीय नुकसान से निपटने और किसानों को उपज का सही दाम दिलाने के लिए महाराणा प्रताप बागवानी विश्वविद्यालय करनाल और ब्रिटेन के ब्रुनेल विश्वविद्यालय लंदन ने हाथ मिलाया है। दोनों वैश्विक संस्थानों ने मिलकर सोल टेक नाम से एक महत्वाकांक्षी अनुसंधान परियोजना पर काम शुरू किया है। परियोजना का मुख्य उद्देश्य पूरी तरह से सौर ऊर्जा पर आधारित कोल्ड स्टोरेज और एक मजबूत हार्टिकल्चर कोल्ड चेन नेटवर्क तैयार करना है, जिससे दूरदराज के ग्रामीण इलाकों में भी बिना ग्रिड बिजली या महंगे डीजल के फसलों को लंबे समय तक सुरक्षित रखा जा सके। व्यापार से परे पूंजी का संचालन सरकार का इरादा हालिया व्यापार समझौतों को वस्तुओं और सेवाओं के बुनियादी आदान-प्रदान से आगे बढ़ाने का है। इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, अधिकारी इन द्विपक्षीय समझौतों का उपयोग भारत में पूंजी प्रवाह को सक्रिय रूप से बढ़ावा देने के लिए करना चाहते हैं। ब्रिटेन भारत में छठा सबसे बड़ा निवेशकर्ता बना हुआ है। ब्रिटिश कंपनियों ने सितंबर 2024 तक कुल मिलाकर 35 अरब डॉलर का इक्विटी निवेश किया। ब्रिटेन से भारत में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (इक्विटी) का प्रवाह 2025-26 वित्तीय वर्ष में 1 अरब डॉलर रहा। वर्तमान में भारत में लगभग 667 ब्रिटिश कंपनियां कार्यरत हैं, जिनमें 5 लाख से अधिक लोग कार्यरत हैं। पूंजी प्रवाह द्विपक्षीय होता है। मार्च 2024 तक ब्रिटेन में भारत का बाहरी निवेश 19 अरब डॉलर तक पहुंच गया। जुलाई 2025 के आंकड़ों से पता चलता है कि ब्रिटेन में 971 भारतीय कंपनियां कार्यरत हैं, जो 100,000 से अधिक लोगों को रोजगार प्रदान करती हैं। नए व्यापार समझौतों को उत्प्रेरित करना भारत-ब्रिटेन व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौते के लागू होने के बाद एक समर्पित निवेश डेस्क की स्थापना की मांग उठाई गई है। यह द्विपक्षीय समझौता औपचारिक रूप से 15 जुलाई, 2026 को लागू हुआ। इसी बीच, प्रस्तावित भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौता अंतिम चरण में है। इसे अक्सर "सभी समझौतों की जननी" कहा जाता है। इस समझौते की कानूनी प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और उम्मीद है कि 2026 के अंत तक इस पर हस्ताक्षर हो जाएंगे। ग्रीन चैनल घरेलू वित्तीय क्षेत्र में हाल ही में हुए संरचनात्मक परिवर्तनों के अनुरूप है। भारत ने हाल ही में बीमा क्षेत्र में 100% प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की अनुमति देने के लिए अपने नियमों को उदार बनाया है और बैंकिंग में निवेश सीमा को बढ़ाकर 74% कर दिया है। उदारीकृत लाइसेंसिंग ढांचे के तहत, पात्र विदेशी बैंक चार साल की अवधि में अधिकतम 15 शाखाएं स्थापित कर सकते हैं।