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जल संकट से निपटने की तैयारी, सभी जलघर और तालाब भरने के निर्देश

चंडीगढ़ हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि गर्मी के मौसम के मद्देनजर प्रदेश के सभी हिस्सों में पीने के पानी की आपूर्ति को प्राथमिकता के आधार पर सुनिश्चित किया जाए। सभी तालाब, जलघर और अन्य जलाशय भरकर रखे जाएं। यह निर्देश मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने शनिवार को सचिवालय में जन स्वास्थ्य विभाग व सिंचाई विभाग सहित अन्य विभागों के अधिकारियों के साथ पेयजल व कृषि सिंचाई के लिए पानी की स्थिति की समीक्षा करते हुए दिए। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश व उत्तर प्रदेश से संबंधित किशाऊ सहित अन्य जल परियोजनाओं के संबंध में जल्द ही जल शक्ति मंत्रालय के साथ बैठक की जाएगी जिसमें इन राज्यों के अधिकारी भी शामिल होंगे।  मुख्यमंत्री ने कहा कि गर्मी के मौसम को देखते हुए प्रदेश के ग्रामीण व शहरी क्षेत्रों में पेयजल व सिंचाई के पानी की कमी न रहने दी जाए। उन्होंने कहा कि पेयजल के लिए नहरों से जुड़े सभी जलघरों व तालाबों को भरकर रखा जाए। जहां ट्यूबवेल आधारित जलापूर्ति होती है वहां यदि कोई ट्यूबवेल खराब हो जाता है तो उसे प्राथमिकता के आधार पर ठीक करवाया जाए। उन्होंने निर्देश दिए कि यदि जरूरत पड़े तो लोगों को टैंकर से भी पानी उपलब्ध करवाया जाए। बैठक में अधिकारियों ने मुख्यमंत्री को बताया कि इस बार भाखड़ा बांध में पानी की स्थिति काफी अच्छी है। इस समय भाखड़ा बांध में पानी का लेवल 36 फुट अधिक है। हरियाणा ने भाखड़ा बांध से अपने कोटे का अभी तक केवल 75-76 प्रतिशत पानी ही इस्तेमाल किया है। मुख्यमंत्री ने ग्रामीण क्षेत्रों में जलघरों में पानी की उपलब्धता की समीक्षा की। अधिकारियों ने बताया कि प्रदेश के 4000 एकल गांव आधारित जलघर हैं जबकि 2500 जलघर एक से अधिक गांवों के लिए हैं। उन्होंने बताया कि ये सभी जलघर नहरों से जुड़े हैं और फिलहाल इनमें पर्याप्त पेयजल उपलब्ध है। मुख्यमंत्री ने नहरों की सफाई, मरम्मत व पुननिर्माण कार्यों की भी समीक्षा की और यह सभी कार्य त्वरित गति से करवाने के निर्देश अधिकारियों को दिए। नायब सिंह सैनी ने मुख्यमंत्री घोषणाओं से संबंधित कार्य भी प्राथमिकता के आधार पर करवाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि वे जल्द ही इस संबंध में अतिरिक्त मुख्य सचिवों के साथ मुख्यमंत्री घोषणाओं की प्रगति की समीक्षा करेंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि गांवों में स्ट्रीट लाइटें और फिरनी से संबंधित कार्य भी प्राथमिकता के आधार पर करवाए जाएं। मानसून सीजन के मद्देनजर गांवों को जाने वाले रास्तों तथा गांव की फिरनियों पर पौधे लगवाए जाएं। गांवों में सरपंचों से भी ऐसे स्थानों की सूची मांगी जाए जहां पौधे लगाए जा सकें। इस अवसर पर मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव अरुण गुप्ता, सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव अनुराग अग्रवाल, कृषि एवं किसान कल्याण विभाग तथा पंचायत विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव विजयेंद्र कुमार तथा जनस्वास्थ्य विभाग के आयुक्त एवं सचिव जे.गणेशन सहित अन्य विभागों के अधिकारी भी मौजूद रहे।

हरियाणा में पराली जलाने के मामले बढ़े, हजारों जगह खेतों में लगी आग

चंडीगढ़  हरियाणा-पंजाब सहित विभिन्न राज्यों में किसानों को फाने (गेहूं के फसल अवशेष) जलाने से रोकने के आदेश 'धुएं' में उड़ने लगे हैं। एक अप्रैल से अब तक पंजाब में 1759, हरियाणा में 1709, दिल्ली में 28, उत्तर प्रदेश में 13 हजार 378 और मध्य प्रदेश में 32 हजार 369 स्थानों पर गेहूं के फसल अवशेष जलाए जा चुके हैं। शुक्रवार को ही पंजाब में 341, हरियाणा में 144, दिल्ली में छह, उत्तर प्रदेश में 70 और मध्य प्रदेश में 158 स्थानों पर फाने जलाने के मामले सामने आए। हरियाणा में वर्ष 2023 के मुकाबले इस बार फसल अवशेष जलाने के मामले सात गुणा बढ़ गए हैं। धान सहित अन्य फसलों की बुआई के लिए खेतों को खाली करने की आपाधापी में किसान फसल अवशेषों को आग लगा रहे हैं। यह स्थिति तब है, जबकि फसल अवशेष जलाने वाले किसानों पर दो एकड़ तक पांच हजार रुपये, पांच एकड़ तक 10 हजार रुपये तथा इससे ज्यादा जमीन पर 30 हजार रुपये तक जुर्माने का प्रविधान है। साथ ही एफआईआर भी दर्ज कराई जा सकती है। प्रदेश सरकार ने अब तक मेरी फसल-मेरा ब्योरा पोर्टल पर 552 किसानों के रिकॉर्ड में रेड एंट्री दर्ज की है, जिससे यह किसान दो सीजन तक न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर अपनी फसल नहीं बेच सकेंगे। इन्हें सब्सिडी का लाभ भी नहीं मिलेगा और कृषि यंत्रों पर मिलने वाली छूट रोक दी जाएगी। फसल की कटाई के उपरांत बचे हुए अवशेषों में आग लगाना एक गंभीर पर्यावरणीय संकट है, जो मानव स्वास्थ्य के लिए खतरा पैदा कर रहा है। फसल अवशेषों को जलाने से हवा में हानिकारक गैसें फैलती हैं जिससे सांस लेने में तकलीफ, आंखों में जलन और अन्य स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं होती हैं। मिट्टी में मौजूद पोषक तत्व नष्ट हो जाते हैं। सूक्ष्म जीवों और केंचुओं की संख्या कम हो जाती है जिससे मिट्टी की उर्वरता घटती है।

अंबाला में सनसनीखेज वारदात: गो-तस्करों ने पुलिस समझकर चलाई गोली, युवक की गई जान

अंबाला. हरियाणा के अंबाला जिले के पंजोखरा थाना क्षेत्र में टुंडला के पास देर रात करीब दो बजे उस समय सनसनी फैल गई, जब गौ-तस्करों ने पुलिस से बचने के प्रयास में दो बाइक सवार युवकों पर अंधाधुंध फायरिंग कर दी। हमले में गरनाला निवासी गुरप्रीत सिंह उर्फ हैप्पी (25) की आंख पर गोली लगने से मौके पर ही मौत हो गई, जबकि दूसरा युवक किसी तरह जान बचाने में सफल रहा। पुलिस द्वारा गौ-तस्करी की सूचना के बाद घेराबंदी की गई थी। इसी दौरान एक पिकअप वाहन में सवार तस्कर पुलिस से बचने के लिए तेजी से भाग रहे थे। घबराहट में उन्होंने रास्ते में आ रहे दो युवकों को पुलिसकर्मी समझ लिया और बिना कुछ सोचे-समझे उन पर फायरिंग शुरू कर दी। गोलियां सीधे गुरप्रीत सिंह को जा लगीं, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। घटना के बाद इलाके में अफरा-तफरी मच गई। वहीं, दूसरा युवक इस हमले में सुरक्षित बच निकला और उसने ही घटना की सूचना पुलिस को दी। बताया जा रहा है कि तस्कर थोड़ी दूरी पर गाय और भैंस से लदी पिकअप को छोड़कर मौके से फरार हो गए। वाहन में करीब तीन तस्कर सवार थे। पुलिस ने पिकअप को कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी है और आसपास के इलाकों में आरोपियों की तलाश के लिए सर्च ऑपरेशन चलाया जा रहा है। इलाके में दहशत इस घटना के बाद से स्थानीय लोगों में दहशत का माहौल है। दिन-रात सक्रिय रहने वाले तस्करों के हौसले इस कदर बुलंद हैं कि अब आम लोगों की जान भी खतरे में पड़ने लगी है। जांच में जुटी पुलिस पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले की गंभीरता को देखते हुए विशेष टीमें गठित कर दी गई हैं। जल्द ही आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया जाएगा। साथ ही, घटनास्थल से सबूत जुटाए जा रहे हैं और आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज भी खंगाली जा रही है।

आंगनबाड़ी व्यवस्था में बड़ा बदलाव: 4000 केंद्र सरकारी इमारतों में शिफ्ट, बच्चों को बेहतर सुविधाएं

पंचकूला. हरियाणा के शहरी तथा ग्रामीण इलाकों में किराये के भवन में चल रहे चार हजार से अधिक आंगनबाड़ी केंद्रों को अब सरकारी इमारतों में स्थानांतरित किया जाएगा। इसके लिए प्रदेश सरकार ने महिला एवं बाल विकास विभाग को निर्देश जारी किए है। इसकी घोषणा मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने अपने बजट भाषण में की थी, जिसके बाद उसे पूरा किया जा रहा है। महिला एवं बाल विकास विभाग ने सभी जिलों के सरकारी भवनों में उपयुक्त जगह की पहचान करने के लिए दूसरे विभागों को पत्र लिखकर सहयोग मांगा है। हरियाणा सरकार ने बच्चों को पोषण के साथ उपयुक्त माहौल देने के लिए प्रदेश के करीब एक हजार आंगनबाड़ी केंद्रों को सक्षम आंगनबाड़ी केंद्र और एक हजार केंद्रों को प्ले-स्कूलों में अपग्रेड करने का फैसला इसी सत्र में किया है। ऐसे में परेशानी यह है कि केंद्र गांवों तथा शहरों में छोटे-छोटे कमरों या स्कूलों में बने एक कमरे में चलाए जा रहे हैं।

पानीपत में बुलडोजर एक्शन: अवैध कॉलोनियों पर चला प्रशासन का डंडा, 29 गलियां तोड़ी गईं

पानीपत. नगर निगम की डीटीपी ब्रांच की टीम ने शुक्रवार को शहर में 3 जगहों पर काटी जा रही अवैध कालोनियों में 29 कच्ची व पक्की गलियां और 18 प्लॉट में बनाई जा रही नींव को उखाड़ा। नगर निगम अधिकारियों ने बताया कि संबंधित अवैध कॉलोनियां काटने वालों को नगर निगम अधिनियम 1994 के तहत 3 बार नोटिस जारी किए गए थे। जिसके बाद भी इन अवैध कालोनियों में न तो कोई निर्माण कार्य हुए और न ही कॉलोनियां काटने वालों ने प्लॉट बेचने का काम बंद कराया। कच्ची सड़कों को अब पक्का बनाने का काम भी चल रहा था। जबकि नोटिस के माध्यम से कालोनाइजरों को बोला जा रहा था कि वे निर्माण कार्य बंद करवाकर इस भूमि को कृषि योग्य बनाए। ऐसा नहीं करने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। इसके बाद भी आदेशों की अनुपालना नहीं की गई। अब केस भी दर्ज होंगे हरियाणा नगर निगम अधिनियम 1994 की धारा 350-सी के तहत अवैध कॉलोनी काटने वाले मालिकों व डीलरों पर पुलिस केस दर्ज होंगे। साथ ही उचित कानूनी कार्यवाही करते हुए गिरफ्तार करने के निर्देश जारी किए गए हैं। अब इन अवैध कालोनियों को तोड़ने के लिए जिलाधीश पानीपत द्वारा नियुक्त डयूटी मैजिस्ट्रेट भी लगाया गया। साथ ही जिला नगर योजनाकार जितेंद्र, रिंकू व राजेश के अलावा पुलिस बल भी तैनात किया गया। कॉलोनियों में की गई कार्रवाई पावर हाउस के पास कुटानी रोड के नजदीक काटी जा रही अवैध कॉलोनी में 15 सड़कें व 8 नींव उखाड़ी गई। जगदीश कॉलोनी के सामने वर्मा चौक के पास काटी जा रही अवैध कॉलोनी में 6 गलियां और 3 नींव को उखाड़ा गया। कुटानी रोड पर ही पवन नाम के व्यक्ति द्वारा काटी जा रही अवैध कॉलोनी में 8 नींव और 5 नींव को उखाड़ा गया।

हरियाणा में नहीं थम रही पराली जलाने की घटनाएं, आदेश के बावजूद 7 गुना बढ़े केस

चंडीगढ़. हरियाणा-पंजाब सहित विभिन्न राज्यों में किसानों को फाने (गेहूं के फसल अवशेष) जलाने से रोकने के आदेश 'धुएं' में उड़ने लगे हैं। एक अप्रैल से अब तक पंजाब में 1759, हरियाणा में 1709, दिल्ली में 28, उत्तर प्रदेश में 13 हजार 378 और मध्य प्रदेश में 32 हजार 369 स्थानों पर गेहूं के फसल अवशेष जलाए जा चुके हैं। शुक्रवार को ही पंजाब में 341, हरियाणा में 144, दिल्ली में छह, उत्तर प्रदेश में 70 और मध्य प्रदेश में 158 स्थानों पर फाने जलाने के मामले सामने आए। हरियाणा में वर्ष 2023 के मुकाबले इस बार फसल अवशेष जलाने के मामले सात गुणा बढ़ गए हैं। धान सहित अन्य फसलों की बुआई के लिए खेतों को खाली करने की आपाधापी में किसान फसल अवशेषों को आग लगा रहे हैं। यह स्थिति तब है, जबकि फसल अवशेष जलाने वाले किसानों पर दो एकड़ तक पांच हजार रुपये, पांच एकड़ तक 10 हजार रुपये तथा इससे ज्यादा जमीन पर 30 हजार रुपये तक जुर्माने का प्रविधान है। साथ ही एफआईआर भी दर्ज कराई जा सकती है। प्रदेश सरकार ने अब तक मेरी फसल-मेरा ब्योरा पोर्टल पर 552 किसानों के रिकॉर्ड में रेड एंट्री दर्ज की है, जिससे यह किसान दो सीजन तक न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर अपनी फसल नहीं बेच सकेंगे। इन्हें सब्सिडी का लाभ भी नहीं मिलेगा और कृषि यंत्रों पर मिलने वाली छूट रोक दी जाएगी। फसल की कटाई के उपरांत बचे हुए अवशेषों में आग लगाना एक गंभीर पर्यावरणीय संकट है, जो मानव स्वास्थ्य के लिए खतरा पैदा कर रहा है। फसल अवशेषों को जलाने से हवा में हानिकारक गैसें फैलती हैं जिससे सांस लेने में तकलीफ, आंखों में जलन और अन्य स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं होती हैं। मिट्टी में मौजूद पोषक तत्व नष्ट हो जाते हैं। सूक्ष्म जीवों और केंचुओं की संख्या कम हो जाती है जिससे मिट्टी की उर्वरता घटती है।

90 दिन से बकाया चालान पर सख्ती, गुरुग्राम में वाहनों की जब्ती अभियान तेज

गुरुग्राम दिल्ली से सटे गुरुग्राम में वाहन चालकों को बार-बार नियम तोड़ने की आदत ऐसी है कि चालान कटने के बाद भी कोई सुधार नहीं। ट्रैफिक पुलिस की ओर से अब ऐसे वाहन चालकों पर कार्रवाई की जा रही है। 90 दिन से अधिक चालान बकाया वाले वाहन चालकों के खिलाफ अभियान जारी है। उनके वाहन जब्त किए जा रहे हैं। इसी कड़ी में सेक्टर 4/7 के चौक पर ट्रैफिक पुलिस की टीम ने गुरुवार को एक बाइक को जब्त कर लिया। इस बाइक के 26 चालान बकाया थे। इतना ही नहीं, इस पर एक लाख पांच हजार का जुर्माना बकाया था। पुलिस ने बाइक को किया जब्त सेक्टर 4/7 चौक पर तैनात एएसआई मदनपाल की टीम ने चेकिंग के दौरान एक बाइक चालक को रोका। ट्रैफिक पुलिस ने जांच के दौरान पाया कि वाहन चालक पर 26 चालान बाकी है। बिना पैटर्न नंबर प्लेट, बिना इंश्योरेंस, बिना डीएल आदि के यह चालान हैं। इस बाइक पर एक लाख पांच हजार का जुर्माना भी बकाया था। ट्रैफिक पुलिस ने टीम ने इस बाइक को जब्त कर लिया। एससीपी सत्यपाल यादव ने बताया कि यह ड्राइव जारी रहेगा। इसे लेकर लोगों को जागरुक किया जा रहा है। नियम तोड़ने वाले ई रिक्शा चालकों के खिलाफ यह अभियान जारी रहेगा। 366 ई रिक्शा चालकों पर सख्ती ट्रैफिक नियमों की अनदेखी करने वाले ई रिक्शा चालकों के खिलाफ भी ट्रैफिक पुलिस का अभियान जारी है। अप्रैल में नियम तोड़ने वाले ई रिक्शा चालकों के खिलाफ भी कार्रवाई की गई। जिलेभर में एक से 29 अप्रैल तक 366 ई रिक्शा चालकों के चालान किए गए। इसके एवज में जुर्माना भी लगाया गया। एसीपी ट्रैफिक सत्यपाल यादव ने बताया कि नियम तोड़ने वाले ई रिक्शा चालकों के खिलाफ यह अभियान जारी रहेगा।  

हुड्डा सरकार पर नियम बदलकर भूखंड आवंटन में गड़बड़ी के गंभीर आरोप

पंचकूला केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने पंचकूला औद्योगिक भूखंड आवंटन मामले में पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा व अन्य आरोपियों के खिलाफ विशेष अदालत में चार्जशीट दायर कर दी है। आरोपों में आपराधिक साजिश और धोखाधड़ी के साथ-साथ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराएं शामिल हैं। इसमें धोखाधड़ी से धन का गबन और स्वयं या दूसरों के लिए आर्थिक लाभ प्राप्त करने का आरोप है। सीबीआई ने आरोप पत्र के साथ हरियाणा सरकार की केस चलाने की मंजूरी को भी चार्जशीट के साथ अदालत में जमा कराया है। इसमें हुड्डा के अलावा हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (एचएसवीपी) के पूर्व उप अधीक्षक बीबी तनेजा का नाम शामिल है। इस मामले में अदालत ने संबंधित लिपिक को दस्तावेजों की जांच कर चार जून को रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए हैं। सीबीआई ने यह मामला 19 मई 2016 को दर्ज किया था। चार्जशीट के मुताबिक भूपेंद्र सिंह हुड्डा जब मुख्यमंत्री रहते हुए एचएसवीपी के अध्यक्ष थे तो उन्होंने पंचकूला में 14 औद्योगिक भूखंडों के लिए आवेदन मांगे थे। अपने चहेतों को प्लॉट देने के लिए हुड्डा ने आवेदन की तिथि बीत जाने के बाद नियमों में बदलाव कर दिया। इसमें अनुभव व योग्यता कम कर दी गई और मौखिक परीक्षा के अंक बढ़ा दिए गए। वित्तीय क्षमता के अंक 25 से घटाकर 10 कर दिए गए जबकि वाइवा-वॉइस के अंक 15 से बढ़ाकर 25 कर दिए गए। 14 भूखंडों के लिए 582 आवेदन आए थे। जांच के अनुसार 30.34 करोड़ रुपये के भूखंड 7.85 करोड़ रुपये में आवंटित किए गए। इससे सरकारी खजाने को भारी नुकसान हुआ। सीबीआई ने कोर्ट में यह भी बताया कि डीपीएस नांगल के खिलाफ धारा 197 के तहत तो स्वीकृति मिल चुकी है मगर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 19 के तहत मंजूरी का इंतजार है। मामले की सुनवाई के दौरान सीबीआई की ओर से एक गवाह नरेंद्र कुमार सोलंकी की धारा 164 सीआरपीसी के तहत दर्ज बयान भी सीलबंद लिहाफे में अदालत में पेश किया गया जिसे सुरक्षित रखने के आदेश दिए गए हैं। इन्हें बनाया गया आरोपी पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा : पूर्व मुख्यमंत्री व हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण के चेयरमैन धर्मपाल सिंह नांगल : पूर्व आईएएस व हुडा के पूर्व मुख्य प्रशासक सुभाष चंद्र कांसल : हुडा के पूर्व मुख्य वित्तीय नियंत्रक भारत भूषण तनेजा : हुडा के डिप्टी सुपरिटेंडेंट वाईपीटी इंटरटेनमेंट हाउस प्राइवेट लिमिटेड के मालिक रेनू हुड्डा : पूर्व सीएम की करीबी व उनके पैतृक गांव की निवासी अशोक वर्मा : कांग्रेस नेता अशोक काका के दामाद सिद्धार्थ भारद्वाज : कांग्रेस नेता संजीव भारद्वाज के बेटे कंवर प्रीत सिंह संधू : हुड्डा के सहपाठी डीडी संधू के बेटे डॉ. गणेश दत्त रतन : हुड्डा के दोस्त। मोना बेरी : हुड्डा के ओएसडी बलदेव राज बेरी डागर कात्याल : हुड्डा के दोस्त सुनील कात्याल के बेटे प्रदीप कुमार : हुड्डा के निजी सचिव राम सिंह के बेटे मनजोत कौर : हुड्डा की परिचित की बहू चंडीगढ़ साफ्टेक प्राइवेट लिमिटेड के मालिक नंदिता हुड्डा : हुड्डा के पैतृक गांव की निवासी व कांग्रेस नेत्री    

शहरी स्थानीय निकाय विभाग और कर्मचारी संघ में टकराव, सफाई व्यवस्था ठप होने की आशंका

चंडीगढ़ हरियाणा में शहरी स्थानीय निकाय विभाग और कर्मचारी संघ के बीच खींचतान अब बड़े टकराव का रूप ले चुकी है। चंडीगढ़ में निकाय विभाग के उच्च अधिकारियों और कर्मचारी नेताओं के बीच हुई मैराथन वार्ता बेनतीजा रहने के बाद, आज से प्रदेश के करीब 30 हजार निकाय कर्मी अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले गए हैं। वार्ता विफल होने के मुख्य कारण हरियाणा सर्व कर्मचारी संघ के राज्य प्रधान और नगर पालिका कर्मचारी संघ के प्रदेश अध्यक्ष नरेश शास्त्री के नेतृत्व में 11 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने शहरी स्थानीय निकाय विभाग के आयुक्त एवं सचिव अशोक मीना के साथ मुलाकात की। वार्ता के दौरान कर्मचारियों ने अपनी मांगों को पुरजोर तरीके से रखा, लेकिन सरकार की ओर से कोई ठोस आश्वासन न मिलने के कारण सहमति नहीं बन सकी। कर्मचारियों की प्रमुख मांगें     पक्का करने की मांग: सीवरेज से संबंधित ठेका कर्मचारियों को नियमित किया जाए।     ठेका प्रथा का अंत: सीवरेज कार्य से जुड़े सभी ठेकों को तुरंत समाप्त किया जाए।     वेतन वृद्धि: सीवरेज कर्मचारियों का न्यूनतम वेतन ₹30,000 निर्धारित हो।     बहाली की मांग: गुरुग्राम के 3,480 कर्मचारियों को वापस नौकरी पर रखा जाए और 26 आंदोलनकारी नेताओं की बर्खास्तगी रद्द हो। प्रशासन की अपील और संघ का रुख बैठक के दौरान विभाग के सचिव अशोक मीना ने प्रदेश में चल रहे विशेष सफाई अभियान का हवाला देते हुए कर्मचारियों से हड़ताल वापस लेने की भावुक अपील की। हालांकि, कर्मचारी नेताओं ने इसे सिरे से नकार दिया। नगर पालिका कर्मचारी संघ के प्रदेश अध्यक्ष नरेश शास्त्री ने बताया कि हमें लंबे समय से केवल आश्वासन दिए जा रहे हैं। अब हमारे पास आंदोलन के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा है। जब तक मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं होती, हड़ताल जारी रहेगी। आम जनजीवन पर असर की आशंका इस हड़ताल में सफाई कर्मचारी, सीवरेज कर्मी और अन्य निकाय कर्मचारी शामिल हैं, जिसके चलते प्रदेश के शहरों में सफाई व्यवस्था और सीवरेज प्रबंधन पूरी तरह ठप हो सकता है। वार्ता के दौरान निकाय विभाग के अतिरिक्त निदेशक वाईएस गुप्ता और कई दिग्गज कर्मचारी नेता भी मौजूद रहे। टोहाना में सफाई व्यवस्था ठप, 240 कर्मचारी दो दिन की हड़ताल पर नगर परिषद कार्यालय में दमकल कर्मचारियों की 24 दिन से जारी हड़ताल के बीच अब सफाई कर्मचारियों ने भी दो दिवसीय हड़ताल शुरू कर दी है। इसके चलते शहर में डोर-टू-डोर कचरा उठाने का काम पूरी तरह ठप हो गया है। कर्मचारी नेताओं का दावा है कि इस हड़ताल में नगर परिषद के कच्चे, पक्के और डोर-टू-डोर वाले करीब 240 कर्मचारी शामिल हैं। कर्मचारियों ने शुक्रवार को नगर परिषद परिसर में सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और चेतावनी दी कि जब तक मांगें नहीं मानी जातीं, परिवार सहित प्रदर्शन जारी रहेगा।   कर्मचारी नेता रविंद्र व सुरेश कुमार ने बताया कि ड्यूटी के दौरान दमकल कर्मचारी की मौत के बाद भी सरकार ने कोई सुनवाई नहीं की। परिवार को मुआवजा और नौकरी देने की मांग को लेकर दमकल कर्मचारी 24 दिन से धरने पर हैं, लेकिन सरकार का रवैया उदासीन है। इसी के विरोध में सफाई कर्मचारियों ने भी काम बंद कर दिया है। नेताओं ने कहा कि फिलहाल यह हड़ताल दो दिन के लिए है। अगर इसके बाद भी सरकार नहीं जागी तो आंदोलन को अनिश्चितकाल के लिए बढ़ाया जाएगा। हड़ताल के पहले दिन ही शहर की गलियों और बाजारों में कचरे के ढेर लगने शुरू हो गए हैं, जिससे लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। नगर परिषद बहादुरगढ़ के सफाई कर्मचारी हड़ताल पर, कामकाज प्रभावित बहादुरगढ़ में नगर परिषद के सभी कच्चे और पक्के सफाई कर्मचारी अपनी विभिन्न मांगों को लेकर आज हड़ताल पर चले गए। कर्मचारियों ने सुबह से ही काम बंद कर विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया, जिसके चलते शहर में सफाई व्यवस्था पूरी तरह प्रभावित रही। जगह-जगह कूड़े के ढेर लगने से आम लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। हड़ताली कर्मचारियों का कहना है कि वे लंबे समय से अपनी मांगों को लेकर प्रशासन को अवगत करा रहे हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकला है। उनकी प्रमुख मांगों में नौकरी की सुरक्षा, वेतन में बढ़ोतरी और ठेका प्रथा को खत्म करना शामिल है। कर्मचारियों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगें जल्द पूरी नहीं की गईं तो वे आंदोलन को और तेज करेंगे।

एचएसवीपी की 1.67 लाख एकड़ जमीन योजना, गुरुग्राम-फरीदाबाद समेत कई जिलों में सेक्टर विकसित होंगे

गुरुग्राम हरियाणा में नए सेक्टर विकसित करने का पहला चरण शुरू कर दिया है। हरियाणा के 69 शहरों में रिहायशी, व्यावसायिक और संस्थागत सेक्टर विकसित करने के लिए जमीन जुटाने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। सरकार की इस पहल को आम लोगों के हित से जोड़ कर देखा जा रहा है, क्योंकि इससे ना सिर्फ आवासीय विकल्प बढ़ेंगे वरन रोजगार, व्यापार और बुनियादी सुविधाओं का भी विस्तार होगा। हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (एचएसवीपी) ने इसके लिए 1 लाख 67 हजार एकड़ जमीन खरीदने की योजना बनाई है। ई-भूमि पोर्टल खोला गया जमीन खरीदने के लिए ई-भूमि पोर्टल भी खोल दिया गया है, जहां किसान और भूमि मालिकों से आवेदन मांगे गए हैं। हरियाणा के शहरी निकाय मंत्री विपुल गोयल ने कहा कि हिमाचल प्रदेश में नए सेक्टरों का विकास प्लान्ड अर्बन एक्सपेंशन के तहत किया जाएगा। इससे अवैध कालोनियों पर रोक लगेगी, लोगों को रैगुलेटेड और बेसिक सुविधाओं वाले प्लॉट/सेक्टर मिलेंगे। सरकार बड़ी जमीन चिन्हित करके फेज वाइज सैक्टर डिवैल्प करेगी। इंफ्रास्ट्रक्चर, सडक़, सीवर, बिजली के साथ सेक्टर बसाए जाएंगे। गुरुग्राम में खरीदी जाएगी जमीन, फरीदाबाद पर भी प्लान गुरुग्राम में 36 गांवों से 17,358 एकड़ जमीन खरीदी जाएगी, फरीदाबाद के 19 गांवों से 4500 एकड़ और होडल क्षेत्र के 3 गांवों से 1729 एकड़ जमीन ली जाएगी। पंचकूला-अंबाला क्षेत्र में कोट-कैहला के 8 गांवों से 2804 एकड़ जमीन खरीदी जाएगी। इन जिलों में भी खरीदी जाएगी जमीन कुरुक्षेत्र के लाडवा में 3 गांवों से 459 एकड़, करनाल के घरौंडा में 329 एकड़, अंबाला के 24 गांवों में 3668 एकड़, नारायणगढ़ में 7 गांवों से 512 एकड़, फतेहाबाद के पिहोवा में 3 गांवों से 687 एकड़, पानीपत के समालखा में 3 गांवों से 499 एकड़, हांसी (नया जिला) में 5 गांवों से 1495 एकड़, जींद के नरवाना में 2172 एकड़, पिंजौर-कालका के चंडी मंदिर क्षेत्र में 3914 एकड़ जमीन खरीदी जाएगी। पहले चरण में 13 शहरों में कटेंगे सेक्टर पहले चरण में 13 शहरों में करीब 40 हजार एकड़ जमीन खरीदी जाएगी, जिसके लिए 104 गांवों के किसान शामिल होंगे। इनमें पहले चरण में गुरुग्राम, फरीदाबाद, पंचकूला, हिसार, पानीपत, सिरसा और यमुनानगर जैसे शहरों में सेक्टर विकसित किए जाएंगे। हिसार, पानीपत, सिरसा और यमुनानगर समेत कई जिलों में जमीन की नीलामी की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। इस नीलामी में बिचौलियों की कोई भूमिका नहीं होगी, जिससे प्रक्रिया पारदर्शी बनी रहेगी और किसानों को सीधा लाभ मिलेगा। एक ही जगह मिलेंगी जरूरी सुविधाएं नए सेक्टरों के विकास से अनियोजित कालोनियों पर अंकुश लगेगा। साथ ही, नए व्यावसायिक क्षेत्रों में एक ही स्थान पर खुदरा बाजार, कार्यालय, सेवाएं, स्कूल, अस्पताल और सरकारी इमारतें जैसी सुविधाएं उपलब्ध करवाई जाएंगी। इससे लोगों को बेहतर शहरी जीवन मिलेगा और शहरों का संतुलित विकास होगा। इन सेक्टरों में बिल्डिंग कोड में बदलाव के तहत, नए आवासीय और व्यावसायिक क्षेत्रों में इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग प्वाइंट अनिवार्य होंगे। बेहतर कनेक्टिविटी और औद्योगिक सुविधाएं होंगी इसके अलावा बिजली, सीवरेज, पानी की आधुनिक व्यवस्था और स्मार्ट सड़कों का प्रावधान होगा। सैक्टरों में रहने के लिए आधुनिक आवासीय प्लॉट के साथ-साथ व्यावसायिक (कमर्शियल) और औद्योगिक इकाइयां भी विकसित की जाएंगी। औद्योगिक मॉडल टाऊनशिप (आईएमटी) को बढ़ावा देने के लिए बेहतर कनेक्टिविटी और औद्योगिक सुविधाएं होंगी। सेक्टरों को पर्यावरण के अनुकूल बनाने के लिए पार्क और हरित क्षेत्र विकसित किए जाएंगे।