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गर्मियों में आयुर्वेदिक स्किनकेयर: वात, पित्त और कफ के अनुसार सही देखभाल

गर्मी ने धीरे-धीरे अपना प्रकोप दिखाना शुरू कर दिया है। इस मौसम में मेरे पास आने वाले कई लोग ऑयलीनेस बढ़ने, मुंहासे से लेकर टैनिंग होने, सेंसिटिविटी बढ़ने और स्किन डिहाइड्रेशन जैसी समस्याएं लेकर आते हैं। आयुर्वेद कहता है कि इसके लिए कॉस्मेटिक ट्रीटमेंट की जगह चंदन, उशीरा, लोध्र, त्रिफला और यष्टिमधु जैसी औषधीय गुणों से भरपूर चीजों का इस्तेमाल कर लंबे समय तक बरकरार रहने वाले सकारात्मक परिणाम पाए जा सकते हैं। ऐसा इसलिए संभव है क्योंकि आयुर्वेद सिर्फ ऊपरी चीजें देखकर इलाज नहीं करता, बल्कि वो पहले शरीर की प्रकृति को समझने पर जोर देता है और फिर उपचार शुरू करता है। यही वजह है कि इसका फायदा गहराई से मिलता है और प्रभाव लंबे समय तक नजर आता है। गर्मियों का स्किन पर असर अष्टाङ्गहृदयम् जैसे पौराणिक आयुर्वेदिक ग्रंथों के अनुसार, ग्रीष्म ऋतु एक ऐसा समय है, जब तेज गर्मी के कारण शरीर की ताकत और नमी धीरे-धीरे कम होती चली जाती है। इस दौरान शरीर में पित्त (शरीर की हीट एनर्जी) भी जमा होने लगता है। वातावरण में बढ़ती शुष्कता और पित्त का जमा होना, ये मिलकर ऐसा मेल बनाते हैं, जिससे त्वचा का प्राकृतिक संतुलन बिगड़ जाता है। इस मौसम में गर्मी के कारण पसीने भी ज्यादा आता है, जो स्रोतोरोध (स्किन के माइक्रोचैनल से जुड़े ब्लॉकेज) को जन्म देता है। अगर मौसम के अनुसार सही देखभाल न दी जाए, तो व्यक्ति को कई तरह की त्वचा संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। इनमें इन्फ्लेमेशन, रेडनेस, पिंपल्स और डलनेस आदि शामिल हैं। नतीजन अक्सर गर्मियों में लोगों की स्किन थकी, अनइवन और रिएक्टिव नजर आती है। प्रकृति के आधार पर कैसा हो गर्मियों में आयुर्वेदिक स्किनकेयर वात प्रधान वात प्रधान लोगों की त्वचा प्राकृतिक रूप से रूखी होती है। गर्मियों में बाहरी शुष्कता के कारण ये समस्या और ज्यादा बढ़ जाती है।     इस तरह की प्रकृति वाले लोग मुडगा (हरा चना) को जेंटल क्लीनिंग के लिए इस्तेमाल कर सकते हैं। ये बिना नैचरल ऑयल को डैमेज किए त्वचा की सफाई करता है।     यष्टिमधु (मुलेठी) को दूध में मिलाकर लगाने से स्किन के खोए हाइड्रेशन को वापस लाया जा सकता है। ये स्किन के टेक्सचर को भी बेहतर बनाता है।     लाइट टेक्सचर के ऑयल भी स्किन के मॉइस्चर को बनाए रखने में अहम भूमिका निभाते हैं। इससे गर्मी के कारण स्किन को कम नमी के चलते होने वाले नुकसान का जोखिम भी कम हो जाता है। पित्त प्रधान पित्त प्रधान स्किन आमतौर पर काफी ज्यादा सेंसिटिव होती है, जिस वजह से इन्हें मुंहासों की समस्या, रेडनेस, इन्फ्लेमेशन और पिगमेंटेशन होने की आशंका काफी ज्यादा रहती है। गर्मियों में ये जोखिम और बढ़ जाता है। इन समस्याओं को मैनेज करने के लिए स्किन को ठंडक देने वाले तरीके अपनाने की जरूरत होती है।   ठंडे पानी या गुलाब जल से चेहरा धोने पर जलन की समस्या कम करने में मदद मिलती है।   स्किन को शांत करने, गर्मी कम करने और रंगत को सुधारने के लिए चंदन, उशीरा और लोध्र (सिम्प्लोकोस रेसमोसा) के क्लासिक कॉम्बिनेशन को इस्तेमाल करने की सलाह दी जाती है। कफ प्रधान कफ प्रधान लोगों की स्किन काफी ऑयली होती है। इस वजह से स्किन के ऐसे पार्ट्स जहां पहले से ही ज्यादा नमी मौजूद होती है, वहां के पोर्स बंद होने का ज्यादा खतरा रहता है इस तरह की स्किन वाले आयुर्वेद लोध्र (सिम्प्लोकोस रेसमोसा)और त्रिफला (आंवला, हरीतकी, बिभीतकी) का पाउडर लगा सकते हैं। ये स्किन को साफ रखने और ऑयल को सोखने में मदद करता है। इस औषधीय पाउडर के इस्तेमाल से जेंटल एक्सफोलिएशन होता है, जो त्वचा की गंदगी को साफ करता है और प्राकृतिक संतुलन को फिर से स्थापित करता है। इससे स्किन कंजेशन को रोकने में मदद मिलती है। औषधीय लेप से रखें गर्मी में त्वचा का ख्याल शार्ंगधर संहिता जैसे ग्रंथों में लेप को स्किनकेयर का एक अहम पहलू बताया गया है। आम फेसपैक के उलट, ये औषधीय गुणों से भरा फॉर्मूलेशन खास स्किन कंडीशन को ध्यान में रखते हुए तैयार किया जाता है, ताकि असरदार रिजल्ट्स मिल सकें। उदाहरण के लिए:     चंदन-उशिरा-लोधरा से बना लेप शरीर की गर्माहट और गर्मी से हुई टैनिंग को मैनेज करने में मददगार साबित होता है।     लोधरा-त्रिफला का लेप मुंहासों वाली स्किन की समस्याओं के लिए असरदार माना जाता है।     रूखी त्वचा और डलनेस के लिए मुलेठी को दूध में मिलाकर लगाने की सलाह दी जाती है। इन्हें लगाने का सही तरीका भी काफी महत्व रखता है। लेप की पतली लेयर स्किन पर लगाएं और वो पूरी तरह से सूखे, उससे पहले उसे हटा लें। ऐसा करने से स्किन और ज्यादा ड्राई नहीं होगी।

गर्मी में बच्चों को हाइड्रेटेड रखने के 5 आसान ड्रिंक्स

न्यूट्रिशनिस्ट कहती हैं क‍ि बच्चे बड़ों की तुलना में जल्दी डिहाइड्रेशन का शिकार हो सकते हैं, क्योंकि उनका मेटाबॉलिज्‍म तेज होता है और वे पसीने के जरिए ज्यादा मात्रा में पानी खो देते हैं। 1- कंसंट्रेशन पर असर पड़ सकता है डॉक्‍टर भावना आगे बताती हैं क‍ि शोध बताते हैं कि अगर बच्चों के शरीर में थोड़ी भी पानी की कमी हो जाए, तो इसका सीधा असर उनकी एनर्जी, ध्यान लगाने की क्षमता और ओवर ऑल हेल्‍थ पर पड़ सकता है। 2-हीट एग्जॉशन का रहता है खतरा एक्‍सपर्ट कहती हैं क‍ि शरीर का तापमान बनाए रखने, बच्‍चों को पाचन में मदद करने और पोषक तत्वों को शरीर में पहुंचाने में पानी बहुत जरूरी होता है। गर्मी में ज्यादा पसीना आने से शरीर से पानी के साथ- साथ सोडियम और पोटेशियम जैसे जरूरी इलेक्ट्रोलाइट्स भी कम हो सकते हैं। अगर इनकी पूर्ति न की जाए, तो थकान, चक्कर आना और गंभीर मामलों में हीट एग्जॉशन (गर्मी से थकावट) जैसी समस्या हो सकती है। 1. नींबू पानी सामग्री: नींबू का रस, पानी, एक चुटकी नमक, चीनी या गुड़ विधि: सभी सामग्रियों को ठंडे पानी में मिलाकर अच्छे से मिक्स करें। लाभ: यह विटामिन C से भरपूर, इलेक्ट्रोलाइट्स की पूर्ति करता है और इम्यूनिटी बढ़ाता है। 2. छाछ सामग्री: दही, पानी, भुना जीरा पाउडर, नमक विधि: दही को पानी में मिलाकर उसमें मसाले डालें और अच्छे से फेंट लें। लाभ: पाचन में मदद करती है, शरीर को ठंडक देती है और प्रोबायोटिक्स से भरपूर होती है। नार‍ियल का पानी और आम पन्‍ना नार‍ियल का पानी और आम पन्‍ना 3. नारियल पानी सामग्री: ताजा नारियल पानी विधि: सीधे ताजा परोसें, किसी तैयारी की जरूरत नहीं। लाभ: प्राकृतिक इलेक्ट्रोलाइट्स से भरपूर, डिहाइड्रेशन से बचाता है और ऊर्जा बनाए रखता है। 4. आम पन्ना सामग्री: कच्चा आम, चीनी या गुड़, भुना जीरा पाउडर, काला नमक विधि: कच्चे आम को उबालकर उसका गूदा निकालें और बाकी सामग्री व पानी के साथ मिलाएं। लाभ: लू से बचाव करता है और विटामिन A व C से भरपूर होता है। 5. तरबूज का रस सामग्री: ताजे तरबूज के टुकड़े विधि: ब्लेंड करें और चाहें तो छान लें। लाभ: पानी की मात्रा अधिक होती है, शरीर को ठंडक देता है और एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर होता है। ​ 6- घर का बना फ्रूट स्मूदी​ सामग्री: केला, आम या सेब, दूध या दही विधि: सभी चीजों को ब्लेंड करके स्मूदी तैयार करें। लाभ: ऊर्जा देता है, पोषक तत्वों से भरपूर होता है और बच्चों को लंबे समय तक भरा हुआ महसूस कराता है। ​ बच्चों के डेली रूटीन में ये समर ड्रिंक्स शामिल करना उन्हें हाइड्रेटेड और पोषित रखने का एक आसान और असरदार तरीका है। कम सामग्री और सरल विधि से बने ये ड्र‍िंक्‍स गर्मी से प्राकृतिक रूप से बचाव करते हैं। इसलिए माता-पिता को चाहिए कि वे बच्चों को इन ताजगी भरे ड्रिंक्स का नियमित सेवन कराएं, ताकि वे पूरे मौसम में स्वस्थ, ऊर्जावान और फिट बने रहें।

स्मार्टफोन खरीदते समय 89% लोग AI फीचर्स को दे रहे हैं सबसे ज्यादा अहमियत

स्मार्टफोन खरीदते समय आप किन बातों या कहें कि किन फीचर्स का ध्यान रखते हैं. एक रिपोर्ट सामने आई है, जिसमें बताया है कि 89 परसेंट लोग स्मार्टफोन खरीदते समय आर्टिफीशियल इंटेलीजेंस (AI) फीचर्स पर ध्यान दे रहे हैं. पहले भले ही कैमरे, बैटरी, प्रोसेसर और डिस्प्ले पर ध्यान दिया जाता हो, लेकिन अब लोगों का फोकस AI पर है. काउंटरप्वाइंट रिसर्च ने फ्लिपकार्ट के साथ मिलकर एक रिपोर्ट तैयार की है. इस रिपोर्ट का नाम स्मार्टफोन इनसाइट रिपोर्ट 2026 है. भारतीय मार्केट में कंज्यूमर की बदलती आदत को दिखाया गया है. साथ ही बताया है कि अब यूजर्स स्पेसिपिकेशन्स से आगे बढ़कर AI पर ध्यान दे रहे हैं, जिसमे Gen-z भी हैं. रिपोर्ट के मुताबिक स्मार्टफोन चुनने में अब सबसे अहम भूमिका AI निभा रहा है. रिपोर्ट में बताया है कि 89 परसेंट यूजर्स ने बताया है कि AI फीचर्स उनके हैंडसेट खरीदने के फैसले को प्रभावित करता है. AI की मदद से यूजर्स अपने डेली के टास्क को आसान बना रहे हैं. सर्चिंग से लेकर वॉयस असिस्टेंट तक को AI बेहतर बना रहा है. कई मोबाइल कंपनियां खुद का AI मॉडल दे रहे हैं. सैमसंग से गूगल तक मार्केट में कई AI मॉडल मार्केट में गूगल के AI फीचर्स के अलावा भी कई मॉडल मौजूद हैं. जहां सैमसंग का Galaxy AI है. वहीं वीवो और शाओमी के भी AI मॉडल हैं. मोटोरोला का Moto AI नाम है. सैमसंग ने गूगल जेमिनी के कई फीचर्स को ऑप्टीमाइज करके अपने हैंडसेट को दिया है, जिससे उनकी उपयोगिता और बेहतर हो गई है. ये स्पीड 15-20 हजार रुपये के सेगमेंट में भी फैल रही है, जहां आमतौर पर प्रीमियम फीचर्स बहुत ही कम देखने को मिलते हैं. 33 परसेंट लोग EMI पर स्मार्टफोन खरीद रहे- रिपोर्ट रिपोर्ट में एक अन्य खुलासा ये भी किया है कि 33 परसेंट लोग ऐसे हैं, जो आसान किस्तों (EMI) का ऑप्शन लेकर प्रीमियम हैंडसेट को खरीद रहे हैं.

गर्मी में राहत देने वाला एसी कब बन सकता है सेहत के लिए खतरा

 ऑफिस हो या घर, बिना एसी के गर्मी में समय काटना मुश्किल हो जाता है. ऐसे में गर्मी और उमस से बचने के लिए लोग अपना अधिकतर समय एयर कंडीशनर (AC) में बिताते हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि एसी धीरे-धीरे आपको बीमार कर सकती है. डॉक्टर्स और हेल्थ एक्सपर्ट के मुताबिक, AC का गलत इस्तेमाल शरीर के मेटाबॉलिज्म से लेकर फेफड़ों तक समस्या पैदा कर सकता है. एयर कंडीशनिंग खुद बीमारी नहीं बनाती, लेकिन बहुत तेज़ ठंड, ड्राय हवा और गंदे फिल्टर शरीर पर असर डाल सकते हैं. तो आइए वो कौन सी बीमारियां हैं जो लंबे समय तक एसी में रहने से होती हैं और उनसे कैसे बचा जा सकता है, इस बारे में जान लीजिए. AC से कैसे बढ़ती हैं परेशानियां? एसी की ठंडी हवा न केवल नमी सोख लेती है बल्कि यह हमारे गले और नाक की म्यूकस मेम्ब्रेन को भी सुखा देती है. इससे सर्दी-खांसी और साइनस जैसी समस्याएं होने लगती हैं. मीडिया  के पल्मोनरी एक्सपर्ट के हवाले से कहा गया है कि अधिक सूखी हवा सांस की नली में जलन पैदा कर सकती है और खांसी, गले में खराश, नाक बंद होने जैसी दिक्कतें बढ़ा सकती है. वहीं डॉक्टरों का भी कहना है कि AC कमरे की नमी कम कर देता है, जिससे सांस की नली और गला सूखने लगते हैं. हेल्थलाइन के मुताबिक, गंदे एसी से निकलने वाली हवा सिक बिल्डिंग सिंड्रोम का कारण बनती है, जिससे सिरदर्द और थकान महसूस होती है. इसलिए अगर एसी की सर्विस समय पर न हो तो उसके फिल्टर में बैक्टीरिया और मोल्ड पनपने लगते हैं.  यदि किसी रूप में खराब वेंटिलेशन है तो उस रूम में सिक बिल्डिंग सिंड्रोम (Sick building syndrome) का जोखिम बढ़ सकता है जिससे सिरदर्द, चक्कर, थकान, नाक और सांस की तकलीफ हो सकती हैं. CDC भी साफ कहता है कि कम वेंटिलेशन और कमजोर एयर सर्कुलेशन इनडोर एयर क्वालिटी को बिगाड़ सकते हैं. जोड़ों का दर्द और ड्राई स्किन एक्सपर्ट्स के मुताबिक, लंबे समय तक कम तापमान में बैठने से मसल्स में खिंचाव और जोड़ों में अकड़न की समस्या देखी जाती है, खासकर उन लोगों के लिए जिन्हें पहले से ही अर्थराइटिस है. इसके अलावा एसी हवा की नमी पूरी तरह खत्म कर देता है जिससे स्किन और आंखों में सूखापन आ जाता है. मेडिकल न्यूज टुडे की रिपोर्ट बताती है कि एयर कंडीशनिंग से त्वचा की प्राकृतिक नमी छिन जाती है जिससे खुजली और डर्मेटाइटिस की समस्या बढ़ सकती है. थर्मल शॉक और थकान जब हम तपती धूप से सीधे बेहद ठंडे कमरे में आते हैं तो शरीर के तापमान में अचानक बदलाव आता है. इसे थर्मल शॉक कहा जा सकता है. तापमान में यह अचानक उतार-चढ़ाव शरीर में थकान पैदा कर देता है और कमजोरी महसूस कराता है. एक्सपर्ट्स का सुझाव है कि एसी का तापमान हमेशा 24 से 26 डिग्री के बीच रखना चाहिए ताकि बैलेंस बना रहे. गंदा AC भी बनता है वजह  पुराने या ठीक से साफ न किए गए एसी, मोल्ड और एलर्जी को हवा में फैला सकते हैं जिससे एलर्जी और सांस की समस्या बढ़ सकती है. एक्सपर्ट चेतावनी देते हैं कि गंदे फिल्टर, कॉइल और डक्ट्स में धूल, फफूंद और बैक्टीरिया जमा हो सकते हैं. साफ AC एलर्जी कम करने में मदद कर सकता है, लेकिन खराब रखरखाव वाला HVAC सिस्टम माइक्रोबियल एलर्जन का घर बन सकता है इसलिए फिल्टर समय पर बदलना और साल में एक बार सर्विस कराना जरूरी माना गया है.

OnePlus Pad 4 लॉन्च: 13.2 इंच डिस्प्ले और 13380mAh बैटरी वाला दमदार प्रीमियम टैबलेट

वनप्‍लस ने OnePlus Pad 4 को भारत में लॉन्‍च कर दिया है। यह कंपनी का प्रीमियम फ्लैगश‍िप टैबलेट है, जिसे ‘स्‍नैपड्रैगन 8 एलीट जेन 5 चिपसेट’ से पैक किया गया है। टैबलेट में 13.2 इंच का 3.4K रेजॉलूशन डिस्प्ले है और 13380 एमएएच की बड़ी बैटरी दी गई है। इतनी बड़ी बैटरी के बावजूद यह काफी पतला है और कंपनी दावा करती है कि इस टैबलेट के साथ यूजर्स को PC लेवल की परफॉर्मेंस मिलेगी। OnePlus Pad 4 के प्राइस और उपलब्‍धता     8GB+256GB मॉडल की कीमत 54,999 रुपये है।     12GB+512GB मॉडल के दाम 59,999 रुपये हैं।     इस टैबलेट की सेल 5 मई 2026 से Amazon, Flipkart, OnePlus.in और ऑफलाइन स्टोर्स पर शुरू होगी। कुछ बैंक कार्ड्स पर 5000 रुपये का डिस्काउंट दिया जा रहा है साथ ही 5,499 रुपये प्राइस वाला OnePlus Stylo Pro फ्री दिया जाएगा। OnePlus Pad 4 के स्‍पेस‍िफ‍िकेशंस और फीचर्स     OnePlus Pad 4 एक बड़े डिस्‍प्‍ले वाला पतला और प्रीमियम टैबलेट है।     इसमें 13.2 इंच का 3.4K डिस्प्ले, 144 हर्त्‍ज रिफ्रेश रेट और 1 हजार निट्स की ब्राइटनैस दी गई है।     टैब में 7:5 'ReadFit' आस्पेक्ट रेश्यो दिया गया है, जिससे डॉक्‍युमेंट्स पढ़ने और मल्‍टीटास्‍क‍िंग में आसानी होती है।     OnePlus Pad 4 में Snapdragon 8 Elite Gen 5 चिपसेट, 12GB RAM और 512GB स्टोरेज है।     यह वनप्‍लस का सबसे पावरफुल टैबलेट है और 13,380mAh बैटरी के साथ सबसे बड़े टैब्‍स में शामिल है।     इसे चार्ज करने के लिए बॉक्‍स में 80वॉट की सुपरवूक चार्जिंग मिलती है। दावा है कि फुल चार्ज के बाद यह 54 दिनों     का स्‍टैंडबाय और 20 घंटे का वीड‍ियो प्‍लेबैक दे सकता है।     हैवी परफॉर्मेंस के दौरान टैब में कोई रुकावट ना आए, इसके लिए टैब में 'Cryo-velocity Cooling System' दिया गया है, जो टैब को ठंडा रखता है।     ‘वनप्‍लस पैड 4’ रन करता है OxygenOS 16 पर। कंपनी ने इसमें माउस-कीबोर्ड शेयरिंग फीचर दिया है, जिससे यह लैपटॉप जैसा एक्‍सपीरियंस देता है। OnePlus Pad 4 के अन्‍य फीचर्स     मेटल यूनिबॉडी के साथ आने वाला OnePlus Pad 4 सिर्फ 5.94mm स्‍लीक है। इसका वेट 672 ग्राम है। इसमें 8 स्‍पीकर्स (4 वूफर्स और 4 ट्वीटर) का सेटअप है।     टैब में एआई फीचर्स दिए गए हैं। इनमें एआई राइटर, एआई समरी, एआई पेंटर, एआई क्‍लीयर कॉल आदि शामिल हैं। 50 हजार से अधिक प्राइस, क्‍या OnePlus Pad 4 खरीदना चाहिए? वनप्‍लस का प्रीमियम और फ्लैगश‍िप टैबलेट हर मोर्चे पर अडवांस, फास्‍ट और बेहतरीन नजर आता है। NBT टेक के पास यह डिवाइस मौजूद है। हम इसे र‍िव्‍यू कर रहे हैं। अब तक के एक्‍सपीरियंस में वनप्‍लस पैड 4 एक सॉलिड खिलाड़ी बनकर उभरा है। परफॉर्मेंस से लेकर डिस्‍प्‍ले और बैटरी क्षमता में यह दमदार है। वनप्‍लस का सबसे बड़ी बैटरी वाला टैब है। अगर बजट इजाजत देता है तो आप ब‍िना हिचक इसे खरीद सकते हैं।  

स्मार्टफोन मार्केट में बड़ा बदलाव, OnePlus और Realme ने मिलकर बनाई नई स्ट्रैटेजी

 पिछले कुछ समय से अफवाह थी कि OnePlus बंद हो सकता है। इसे लेकर अब बड़ा अपडेट आया है। दरअसल रिपोर्ट्स के मुताबिक OnePlus और Realme आपस में मर्ज हो गए हैं। बताया जा रहा है कि ऐसा चीन और ग्लोबल दोनों बाजारों के लिए किया गया है। ऐसे में यह एक अलग सब-प्रोडक्ट सेंटर बन गया है, जहां दोनों ब्रैंड्स की रिसर्च, डेवलपमेंट और मार्केटिंग टीमें एक साथ मिलकर काम करेंगी। ऐसे में सवाल उठने लगे हैं कि क्या OnePlus पूरी तरह से बंद होने वाला है, जिसका जवाब है नहीं। बताया जा रहा है कि यह विलय बदलते स्मार्टफोन मार्केट का नतीजा है। कुछ समय से स्मार्टफोन मार्केट में कंपोनेंट्स की बढ़ती कीमतें और चिप्स की कमी ने कंपनियों के लिए अस्तित्व में बने रहना मुश्किल कर दिया है। इसके अलावा बाजार में कंपटीशन की भी कमी नहीं है। यही वजह है कि बीबीके ग्रुप ने फैसला लिया है कि OnePlus और Realme एक साथ R&D, सप्लाई चेन और प्रोक्योरमेंट का काम देखेंगे। क्या बंद हो जाएगा OnePlus? इस मर्जर की खबरें आने के बाद से लोग सोशल मीडिया पर कयास लगा रहे हैं कि क्या यह OnePlus का अंत है? रिपोर्ट्स की मानें, तो ऐसा नहीं है। बताया जा रहा है कि इस मर्जर के बाद Oneplus प्रीमियम स्मार्टफोन्स पर और Realme बजट और मिड-रेंज स्मार्टफोन्स पर फोकस करेगा। ऐसा भी बताया जा रहा है कि भारत में वनप्लस अब ऑनलाइन-ओनली सेल्स मॉडल पर जोर दे रहा है, जो कि लागत कम करने का तरीका हो सकता है।(REF.) यूजर्स को इससे फायदा या नुकसान?     इस मर्जर से यूजर्स को कुछ फायदे होंगे, तो कुछ नुकसान भी। दरअसल:     अब दोनों ब्रांड्स की टीमें रिसर्च और टेक्नोलॉजी शेयर करेंगी। इससे संभव है कि पहले के मुकाबले सॉफ्टवेयर अपडेट्स और लेटेस्ट फीचर्स तेजी से यूजर्स को मिल सकें।     दोनों कंपनियों के रिसोर्स और सप्लाई चेन जुड़ने से प्रोडक्शन पर आने वाली लागत गिरेगी। कंपनी चाहे तो यह बचत ग्राहकों तक पहुंचा सकती है। Oneplus-Realme मर्जर से यूजर्स को ये नुकसान     इस मर्जर से बाजार में वैरायटी की कमी हो सकती है। दरअसल पहले ही ये ब्रैंड्स वनप्लस नॉर्ड CE6 लाइट और रियलमी P4X को एक जैसे हार्डवेयर के साथ पेश कर चुके हैं। ऐसे में आगे चलकर ऐसा और भी ज्यादा होने की संभावना है।     इस मर्जर से OnePlus की ब्रैंड वैल्यू पर फर्क पड़ सकता है। असल में OnePlus की एक प्रीमियम और अलग पहचान थी। अब Realme भी OnePlus जैसे फोन लॉन्च कर उसकी पहचान को धुंधला जरूर करेगा।     बताया जा रहा है कि भारत में वनप्लस ऑनलाइन-ओनली सेल्स मॉडल पर जोर देगा। ऐसे में वे यूजर्स जो ऑफलाइन फोन खरीदना पसंद करते हैं, वे OnePlus से दूर होने लगेंगे।  

ऑनलाइन शॉपिंग में नया साइबर खतरा, हजारों फर्जी अकाउंट से हो रही ठगी

भारत में ऑनलाइन शॉपिंग अब जिंदगी का हिस्सा बन चुकी है. लेकिन इसी के साथ ठगी का तरीका भी तेजी से बदल रहा है. अब फोन कॉल या OTP वाला पुराना स्कैम पीछे छूट रहा है. एक नया ज्यादा खतरनाक और बड़े स्तर पर होने वाला फ्रॉड OTP स्कैम से भी आगे निकल रहा है. इसे ही अब जामताड़ा स्टाइल ई-कॉमर्स फ्रॉड कहा जा रहा है, लेकिन फर्क ये है कि इस बार सब कुछ मशीनों से चल रहा है. जामताड़ा के बारे में नहीं पता तो बता दें कि ये जगह झारखंड में है. जामताड़ा नाम की वेब सीरीज भी बन चुकी है. दरअसल जामताड़ा से देश दुनिया भर में साइबर स्कैम होते आए हैं. वहां कई ऐसे ग्रुप्स हैं जो सालों से साइबर फ्रॉड कर रहे हैं. हाल ही में आई एक रिपोर्ट में सामने आया है कि ठग अब डिवाइस फार्मिंग का इस्तेमाल कर रहे हैं. आसान भाषा में समझें तो ये लोग एक साथ सैकड़ों-हजारों मोबाइल या वर्चुअल डिवाइस चलाते हैं. डिवाइस फार्मिंग और ई-कॉमर्स वेबसाइट को चूना इन डिवाइस से नकली अकाउंट बनाए जाते हैं और ई-कॉमर्स वेबसाइट्स को चूना लगाया जाता है. यह पूरा काम इंसान से ज्यादा सिस्टम और ऑटोमेशन के जरिए होता है. पहले जामताड़ा में बैठकर ठग लोगों को फोन करते थे, लिंक भेजते थे और OTP लेकर पैसे निकाल लेते थे. अब वही ठग या उसी तरह के नेटवर्क टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल कर रहे हैं. फर्क बस इतना है कि अब आपको कॉल नहीं आएगा, बल्कि ठगी पर्दे के पीछे चुपचाप हो रही होगी. मान लीजिए किसी शॉपिंग ऐप पर पहले ऑर्डर पर 500 रुपये की छूट मिल रही है. एक आम यूजर इसे एक बार इस्तेमाल करेगा. लेकिन ये गैंग क्या करता है? ये हजारों फर्जी अकाउंट बनाता है. हर अकाउंट को नया यूजर दिखाया जाता है और हर बार वही 500 रुपये की छूट ली जाती है. यानी जहां एक यूजर एक बार फायदा उठाता है, वहीं ये गैंग हजारों बार वही ऑफर ले लेता है. इससे कंपनी को बड़ा नुकसान होता है और पूरा सिस्टम गड़बड़ा जाता है. क्या होती है डिवाइस फार्मिंग? डिवाइस फार्मिंग दरअसल हजारों स्मार्टफोन्स का ग्रुप होता है. हजारों फोन यानी हजारों सिम और हजारों अकाउंट्स. इन अकाउंट्स के जरिए कई तरह के फर्जी काम किए जाते हैं. बॉट पंपिंग से लेकर फेक रिव्यू तक कराने के लिए स्कैमर्स इसी तरह के अकाउंट का सहारा लेते हैं. इनके जरिए फेक रिव्यू दे कर किसी प्रोडक्ट की रेटिंग को ऊपर किया जाता है. ऐसे ही किसी प्रोडक्ट की रेटिंग गिराने के लिए भी ये बल्क में कॉमेंट और डाउनवोट करते हैं. हाल ही में राघव चढ्ढा ने आम आदमी पार्टी छोड़ कर बीजेपी ज्वाइन किया है. उनके 1 मिलियन इंस्टाग्राम फॉलोअर्स कम हो गए. लेकिन इसके बावजूद इनके फॉलोअर्स तेजी से बढ़ने लगे. थोड़ा चेक करने के बाद पता चला कि ये काफी बॉट अकाउंट उन्हें फॉलो कर रहे हैं जो इसी महीने बनाए गए हैं.   प्रॉपर प्रोसेस होता है यूज इस फ्रॉड का स्केल इतना बड़ा है कि यह किसी छोटे ग्रुप का काम नहीं लगता. रिपोर्ट्स में कहा गया है कि इसके पीछे पूरा नेटवर्क काम करता है. कुछ लोग फर्जी सिम कार्ड जुटाते हैं, कुछ अकाउंट बनाते हैं, और कुछ लोग ऑर्डर प्लेस करके सामान को आगे बेच देते हैं. यानी यह अब ठगी नहीं, बल्कि एक पूरा बिजनेस मॉडल बन चुका है. इस पूरे खेल को जामताड़ा 2.0 इसलिए कहा जा रहा है क्योंकि सोच वही पुरानी है, लेकिन तरीका पूरी तरह नया है. पहले लोगों को बेवकूफ बनाकर पैसा निकाला जाता था, अब सिस्टम को ही बेवकूफ बनाया जा रहा है. इसका असर सिर्फ कंपनियों तक सीमित नहीं है. जब इस तरह के फ्रॉड बढ़ते हैं, तो कंपनियां अपने ऑफर्स कम कर देती हैं. डिस्काउंट घट जाते हैं और असली यूजर्स को नुकसान होता है. यानी आखिर में कीमत आम लोगों को ही चुकानी पड़ती है. फ्रॉड डिटेक्शन है मुश्किल सबसे बड़ी समस्या यह है कि इस तरह के फ्रॉड को पकड़ना आसान नहीं है. हर अकाउंट अलग दिखता है, हर डिवाइस नया लगता है और सब कुछ ऑटोमेटेड तरीके से चलता है. यही वजह है कि अब कंपनियां AI और एडवांस सिक्योरिटी सिस्टम का सहारा ले रही हैं. लेकिन यह एक तरह की दौड़ बन चुकी है. एक तरफ कंपनियां सिस्टम मजबूत कर रही हैं, तो दूसरी तरफ ठग नए तरीके निकाल रहे हैं. इस पूरे मामले से एक ये तो क्लियर है कि, जैसे-जैसे टेक्नोलॉजी आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे ठगी के तरीके भी स्मार्ट होते जा रहे हैं. अब खतरा सिर्फ फोन कॉल या लिंक से नहीं है, बल्कि बैकएंड में चल रहे उन सिस्टम्स से है जो दिखते नहीं, लेकिन बड़ा नुकसान कर देते हैं.

भीषण गर्मी में राहत देगा सौंफ का शरबत, शरीर को रखेगा ठंडा और हाइड्रेटेड

 पिछले कुछ दिनों से भारत के ज्यादातर शहरों में चिलचिलाती तपती गर्मी और लू चल रही है. लू और गर्मी में जब शरीर का तापमान बढ़ने लगता है तो उसे हाइड्रेटेड और ठंडा रखना बेहद जरूरी होता है. गर्मी में नींबू का शरबत तो सभी पीते हैं लेकिन क्या आपने कभी सौंफ का शरबत ट्राई किया है. बाजार में मिलने वाले शरबत अक्सर चीनी और प्रिजर्वेटिव्स से भरे होते हैं. ऐसे में सौफ का शरबत एक बेहतरीन प्राकृतिक विकल्प है. सौंफ की तासीर बेहद ठंडी होती है. ऐसे में बिना चीनी और बिना किसी आर्टिफिशियल मसाले वाला यह शरबत न केवल आपके शरीर को अंदर से ठंडा रखेगा बल्कि पाचन को दुरुस्त कर एसिडिटी और जलन जैसी समस्याओं को भी दूर भगाएगा. शरबत के लिए तैयार कर लें ये चीजें 1/2 कप मोटी सौंफ 2 कप पानी (भिगोने के लिए) 1/2 कप धागे वाली मिश्री मिश्री चीनी के विकल्प के रूप में जो प्रकृति में ठंडी होती है. आप चाहें तो शहद भी यूज कर सकते हैं. 8-10 ताजा पुदीने के पत्ते बर्फ के टुकड़े बिना चीनी-मसाले वाला सौंफ का शरबत कैसे बनाएं सबसे पहले सौंफ को अच्छी तरह साफ कर लें और इसे रात भर या कम से कम 4-5 घंटे के लिए पानी में भिगोकर रख दें. अब भीगी हुई सौंफ को उसी पानी के साथ मिक्सी जार में डालें. इसमें धागे वाली मिश्री और पुदीने के पत्ते डालकर एक महीन पेस्ट बना लें. तैयार पेस्ट को एक बारीक छलनी या सूती कपड़े की मदद से छान लें ताकि सौंफ के रेशे अलग हो जाएं. एक गिलास में बर्फ के टुकड़े डालें, तैयार सौंफ का अर्क डालें और ऊपर से ठंडा पानी मिलाएं. इसे अच्छी तरह चलाएं और ताजा पुदीने से सजाकर परोसें.

गर्मी में ककड़ी खाने के फायदे, शरीर को रखे ठंडा और हाइड्रेटेड

 गर्मियों के मौसम में शरीर को ऐसे फूड्स की जरूरत होती है जो पेट को ठंडा रखें, आसानी से पच जाएं और शरीर को हाइड्रेट रखें. ककड़ी यानी लंबा खीरा एक ऐसा ही आसान और हेल्दी ऑप्शन है जो न सिर्फ शरीर को ठंडक देता है बल्कि कई तरह से फायदा भी पहुंचाता है. यह सड़क किनारे मार्केट में आसानी से मिल जाती है और सेहत के लिए भी काफी फायदेमंद होती है. आप इसे ऐसे ही खा सकते हैं या सलाद में मिलाकर भी खा सकते हैं. आइए जानते हैं कि गर्मी के इस मौसम में ककड़ी खाना आपकी सेहत के लिए कितना फायदेमंद हो सकता है. शरीर को रखे हाइड्रेट गर्मियों में शरीर में पानी की कमी जल्दी हो जाती है लेकिन ककड़ी खाने से यह समस्या कम हो सकती है. इसमें लगभग 96% पानी होता है जो शरीर को ठंडा और हाइड्रेट रखने में मदद करता है. धूप में बाहर रहने पर इसे खाना बहुत फायदेमंद होता है. स्किन के लिए फायदेमंद गर्मी में धूप, पसीना और प्रदूषण का असर सबसे ज्यादा हमारी स्किन पर पड़ता है. ऐसे में ककड़ी स्किन को अंदर से ठंडक देती है और उसे फ्रेश बनाए रखने में मदद करती है. इसमें मौजूद विटामिन C और एंटीऑक्सीडेंट्स स्किन को ग्लोइंग बनाते हैं और झुर्रियों को कम करने में भी मदद करते हैं. शरीर को ठंडक देता है जब गर्मी बहुत ज्यादा होती है तो ऐसे खाने की जरूरत होती है जो शरीर को ठंडा रखे. ककड़ी में नेचुरल ठंडक होती है, इसलिए यह बॉडी टेंपरेचर कम करने में मदद करती है. इसमें पानी की मात्रा ज्यादा होने के कारण यह गर्मियों में शरीर को ठंडा और तरोताजा बनाए रखती है. वजन कम करने में मददगार अगर आप वजन कम करना चाहते हैं तो ककड़ी एक बेहतर ऑप्शन है. इसमें कैलोरी बहुत कम होती है और पानी ज्यादा होता है, जिससे पेट लंबे समय तक भरा हुआ महसूस होता है. इससे बार-बार खाने की आदत कम होती है और वजन कंट्रोल में रहता है. डाइजेशन को बेहतर बनाती है अगर आपको पेट भारी लग रहा है या ब्लोटिंग की समस्या है तो ककड़ी खाना फायदेमंद हो सकता है. इसमें फाइबर होता है जो डाइजेशन को बेहतर बनाता है और पेट को हल्का रखता है. यह आसानी से पच जाती है, इसलिए भारी खाना खाने के बाद भी इसे खाया जा सकता है.  

Aadhaar में DOB अपडेट रिक्वेक्ट हो गया? ऐसे करें सही और सफल अपडेट

Aadhaar कार्ड आज हर भारतीय के लिए एक जरूरी दस्तावेज है। बैंक, मोबाइल सिम हर जगह इसकी जरूरत पड़ती है। ऐसे में अगर Aadhaar में आपकी जन्मतिथि (Date of Birth) गलत हो, तो कई काम अटक सकते हैं। लोग अक्सर इसे ठीक कराने के लिए अपडेट रिक्वेस्ट डालते हैं, लेकिन कई बार यह रिक्वेस्ट रिजेक्ट भी हो जाती है। ऐसे में क्या करें यहां जानें: DOB अपडेट रिक्वेस्ट रिजेक्ट होने पर करें ये काम UIDAI ने साफ किया है कि अगर आपकी DOB अपडेट रिक्वेस्ट रिजेक्ट हो जाती है, तो आपको घबराने की जरूरत नहीं है। आप सीधे UIDAI की हेल्पलाइन 1947 पर कॉल कर सकते हैं या help@uidai.gov.in पर ईमेल भेजकर मदद ले सकते हैं। आगे आपको बताते हैं DOB अपडेट रिजेक्ट होने पर क्या करें, क्यों रिजेक्ट होता है और सही तरीका क्या है। क्यों होता है DOB अपडेट रिजेक्ट Aadhaar में जन्मतिथि अपडेट कराने के लिए सही डॉक्यूमेंट देना जरूरी होता है। अगर आपके द्वारा दिए गए दस्तावेज सही नहीं हैं या उनमें जानकारी मेल नहीं खाती, तो रिक्वेस्ट रिजेक्ट हो सकती है। कई बार डॉक्यूमेंट क्लियर नहीं होता, नाम और DOB में मिसमैच होता है या आपने गलत कैटेगरी में अपडेट डाल दिया होता है। ऐसे में सिस्टम रिक्वेस्ट को रिजेक्ट कर देता है। ईमेल करते समय किन बातों का रखें ध्यान जब आप UIDAI को ईमेल करें तो अपनी समस्या साफ-साफ लिखें। आपको अपनी Aadhaar संख्या (पूरी या masked), नाम, और समस्या का विवरण देना चाहिए। साथ ही जरूरी डॉक्यूमेंट भी अटैच करें, ताकि आपकी समस्या जल्दी समझी जा सके और समाधान मिल सके। घर बैठे Aadhaar में डेट ऑफ बर्थ बदलने का पूरा तरीका Step 1: सबसे पहले UIDAI की ऑफिशियल वेबसाइट पर जाएं और “My Aadhaar” सेक्शन में जाएं। वहां आपको “Update Your Aadhaar” का ऑप्शन मिलेगा। अब अपना 12-digit Aadhaar नंबर डालें और कैप्चा भरें। इसके बाद आपके रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर OTP आएगा, जिसे डालकर लॉगिन करना होगा। Step 2: लॉगिन करने के बाद “Update Aadhaar Online” पर क्लिक करें। यहां आपको अलग-अलग डिटेल्स अपडेट करने का ऑप्शन मिलेगा, जिसमें Date of Birth (DOB) भी शामिल है। अब अपनी सही जन्मतिथि (DOB) भरें। ध्यान रखें कि जो DOB आप डाल रहे हैं, वही आपके डॉक्यूमेंट में भी होना चाहिए। Step 3: DOB अपडेट करने के लिए आपको वैध डॉक्यूमेंट अपलोड करना होगा, जैसे: Birth Certificate, 10th Marksheet, Passport डॉक्यूमेंट साफ और readable होना चाहिए, वरना रिक्वेस्ट रिजेक्ट हो सकती है। अब आपको अपडेट के लिए छोटी-सी फीस (आमतौर पर ₹50) ऑनलाइन पे करनी होती है। पेमेंट आप UPI, डेबिट कार्ड या नेट बैंकिंग से कर सकते हैं।