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टेक्नोलॉजी में नया अध्याय: Jio–Google–Microsoft की Trusted Tech Alliance, भारत के डिजिटल भविष्य पर क्या होगा असर?

नई दिल्ली अफ्रीका, एशिया, यूरोप और नॉर्थ अमेरिका की 15 बड़ी कंपनियों ने ‘ट्रस्टेड टेक एलायंस’ (TTA) के गठन की घोषणा की है। यह एक जैसी सोच वाली इंटरनेशनल टेक कंपनियों का एक समूह है, जो कनेक्टिविटी, क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर, सेमीकंडक्टर, सॉफ्टवेयर और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के लिए ऐसी तकनीक बनाने के लिए साथ आए हैं जिस पर दुनिया यकीन कर सके और जिसे परखा जा सके। इस एलायंस में भारत की ओर से Jio Platforms शामिल है। जर्मनी में आयोजित म्यूनिख सिक्योरिटी कॉन्फ्रेंस के दौरान इस एलायंस का ऐलान किया गया। ये दिग्गज कंपनियां हैं इस एलायंस का हिस्सा एलायंस के संस्थापक सदस्यों में अमेजन, वेब सर्विसेज, माइक्रोसॉफ्ट, गूगल क्लाउड, एरिक्सन, नोकिया, एसएपी और एनटीटी जैसी कुल 15 ग्लोबल टेक कंपनियां शामिल हैं। एलायंस का कहना है कि आगे और कंपनियों को इससे जोड़ा जाएगा। इसके साथ ही, देश और दुनिया के लेवल पर अपनी तकनीक को और बेहतर बनाने, दूसरी कंपनियों के साथ मुकाबले में बने रहने और एक मजबूत डिजिटल सिस्टम तैयार करने पर काम जारी रहेगा। जियो का बड़ा संकल्प लॉन्च के मौके पर जियो प्लेटफॉर्म्स के सीईओ किरण थॉमस ने कहा कि विश्व स्तर पर डिजिटल विकास को गति देने के लिए भरोसेमंद, सुरक्षित और पारदर्शी टेक्नोलॉजी जरूरी है। जियो प्लेटफॉर्म्स को गर्व है कि वह 'ट्रस्टेड टेक एलायंस' का हिस्सा बना है, ताकि टेक्नोलॉजी की दुनिया में मिलकर ऐसे नियम और तरीके बनाए जा सकें जो सुरक्षित हों और जिन पर सब भरोसा कर सकें। उन्होंने आगे बताया कि हम इस कोशिश के जरिए दुनिया भर के पार्टनर्स के साथ मिलकर आने वाले समय की इंटरनेट कनेक्टिविटी, क्लाउड और AI सिस्टम को इतना बेहतर बनाना चाहते हैं कि लोग लंबे समय तक उन पर भरोसा कर सकें। माइक्रोसॉफ्ट के वाइस चेयर और प्रेसिडेंट ब्रैड स्मिथ ने इस मौक पर कहा कि मौजूदा वैश्विक माहौल में समान सोच वाली कंपनियों का साथ आना जरूरी है, ताकि सीमाओं के पार तकनीक में भरोसा और उच्च मानक कायम किए जा सकें। वहीं एरिक्सन के सीईओ बोर्ये एकहोम ने कहा कि कोई एक कंपनी या देश अकेले सुरक्षित और भरोसेमंद डिजिटल ढांचा नहीं बना सकता, इसके लिए वैश्विक सहयोग जरूरी है। ग्लोबल मंच पर बढ़ेगी भारत की धाक इस एलायंस के तहत सदस्य कंपनियों ने पांच प्रमुख सिद्धांतों पर सहमति जताई है। इसमें कंपनियों को चलाने के ईमानदार तरीके, सुरक्षा की समय-समय पर जांच, सामान और सेवाओं की सप्लाई का मजबूत नेटवर्क, एक ऐसा सिस्टम जहां सब मिलकर काम कर सकें और कानून के हिसाब से लोगों के डेटा को सुरक्षित रखना शामिल है। इन नियमों के जरिए कंपनियां यह सुनिश्चित करेंगी कि टेक्नोलॉजी सुरक्षित, विश्वसनीय और जिम्मेदारी के साथ संचालित हो, चाहे उसका विकास या इस्तेमाल कहीं भी हो। एक्सपर्ट्स का मानना है कि जियो की भागीदारी से भारत को वैश्विक डिजिटल मानकों के निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने का मौका मिलेगा। इससे देश में क्लाउड, 5G और AI आधारित सर्विसेज को ग्लोबल स्तर की विश्वसनीयता मिल सकती है और डेटा सुरक्षा को लेकर ग्राहकों का भरोसा और मजबूत होगा।

डाइट में गेहूं की जगह शामिल करें यह अनाज, हार्ट हेल्थ को मिलेगी जबरदस्त मजबूती

चाहे घर में दाल बनी हो या कोई मसालेदार सब्जी, गेहूं की रोटी के बिना हमारी थाली अधूरी होती है। यह हमारे भोजन का अहम हिस्सा है, पर अब समय बदल रहा है। आजकल बदलती लाइफस्टाइल और फिटनेस के प्रति बढ़ती जागरूकता के कारण लोग अपनी डाइट में बदलाव कर रहे हैं। इसलिए, अब क्विनोआ रोटी लोगों की थाली में जगह बना रही है। क्विनोआ कैलोरी, प्रोटीन, फाइबर, आयरन, मैग्नीशियम, जिंक और अन्य जरूरी विटामिन से भरपूर होती है। यही वजह है कि इसे आज सुपरफूड कहा जाता है। बता दें कि अमेरिका और यूरोप जैसे देशों में क्विनोआ रोटी की मांग बढ़ी है, लेकिन सच यह है कि दक्षिण अमेरिका में इसे हजारों सालों से उगाया और खाया जाता रहा है। चलिए जानते हैं इसे डाइट में शामिल करने के कुछ फायदों के बारे में। दिल की सेहत के लिए अच्छा दिल के मरीजों के लिए क्विनोआ रोटी को डाइट में शामिल करना काफी फायदेमंद माना गया है। कुछ अध्ययनों में पाया गया है कि क्विनोआ खाने से मेटाबॉलिज्म बेहतर और दिल से जुड़ी बीमारियों का खतरा कम होता है। यह बैड कोलेस्ट्रॉल को कम करने में भी मददगार है। डायबिटीज के लिए फायदेमंद क्विनोआ की रोटी खाना डायबिटीज के मरीजों के लिए काफी फायदेमंद होती है। अगर आप रोजाना इसे डाइट में शामिल करते हैं, तो यह ब्लड शुगर के लेवल को कंट्रोल रखने में मदद करती है।   वजन घटाने में मददगार वजन घटाने की कोशिश कर रहे लोगों के लिए क्विनोआ की रोटी किसी वरदान से कम नहीं है। एक स्टडी में पाया गया है कि क्विनोआ मोटापे को भी कम करने का एक बेहतरीन सुपरफूड है। अगर आप भी बढ़ते वजन को लेकर परेशान हैं, तो क्विनोआ की रोटी को डाइट में जरूर शामिल करें। ग्लूटेन-फ्री रोटी का बेस्ट ऑप्शन जिन लोगों को ग्लूटेन से एलर्जी है या सीलिएक डिजीज है, तो उनके लिए गेंहू की रोटी की जगह क्विनोआ की रोटी एक सुरक्षित और पौष्टिक ऑप्शन माना जाता है। क्विनोआ को खरीदने से पहले मिलावट या गंदगी की जांच के लिए पैकेट पर लगे लेबल को ध्यान से जरूर पढ़ें। पाचन को बनाए हेल्दी क्विनोआ में कई अनाजों से ज्यादा फाइबर होता है, जो पेट से जुड़ी समस्याओं से राहत दिलाने में मदद करता है। यह पाचन तंत्र को दुरुस्त रखता है और कब्ज की समस्या कम करता है। साथ ही, क्विनोआ की रोटी खाने से पेट लंबे समय तक भरा महसूस होता है।  

चौंकाने वाला खुलासा: डायबिटीज में हार्ट फेलियर की असली वजह दवाएं नहीं, बल्कि फिजिकल एक्टिविटी की कमी

क्या आप जानते हैं कि डायबिटीज के मरीजों में हार्ट फेलियर और दिल की अन्य बीमारियों का एक बहुत बड़ा कारण केवल 'शारीरिक निष्क्रियता' है? हाल ही में हुए एक शोध ने इस बात की पुष्टि की है कि अगर डायबिटीज के मरीज फिजिकली एक्टिव नहीं रहते हैं, तो उनके लिए जानलेवा जोखिम काफी बढ़ जाते हैं। भारत के लिए चिंताजनक आंकड़े 'जर्नल ऑफ स्पोर्ट एंड हेल्थ साइंस' में प्रकाशित एक नए शोध के अनुसार, भारत में डायबिटीज के मरीजों में हार्ट फेलियर के 13 प्रतिशत से भी ज्यादा मामलों के पीछे मुख्य वजह शारीरिक गतिविधि की कमी है। यह शोध बताता है कि भारत में डायबिटीज पीड़ितों में: कोरोनरी हृदय रोग के 9.6 प्रतिशत मामले, और हृदय संबंधी अन्य जटिलताओं के 9.4 प्रतिशत मामले केवल इसलिए होते हैं क्योंकि मरीज पर्याप्त शारीरिक व्यायाम या गतिविधि नहीं करते। विशेषज्ञों की क्या है राय? ब्राजील के रियो ग्रांडे डो सुल संघीय विश्वविद्यालय की शोधकर्ता जेन फेटर ने इस विषय पर महत्वपूर्ण जानकारी दी है। उन्होंने बताया कि अक्सर लोग यह मान लेते हैं कि डायबिटीज होने के बाद अन्य जटिल बीमारियां होना तय है, लेकिन यह सच नहीं है। जेन फेटर के अनुसार, "हमारे निष्कर्ष इस पुरानी धारणा को चुनौती देते हैं। यह साफ है कि अगर डायबिटीज के मरीज अपनी शारीरिक गतिविधि को उचित तरीके से बढ़ा लें, तो इन गंभीर बीमारियों के एक बड़े हिस्से को रोका जा सकता है।" 23 लाख लोगों पर हुआ शोध शोधकर्ताओं ने इस अध्ययन के लिए दक्षिण एशिया सहित दुनिया भर के अलग-अलग क्षेत्रों से 23 लाख से अधिक वयस्क डायबिटीज मरीजों के डेटा का विश्लेषण किया। इसमें पाया गया कि वैश्विक स्तर पर भी बड़ी रक्त वाहिकाओं की समस्याओं और आंखों की बीमारी के दस में से एक मामले का कारण निष्क्रियता ही है। बीमारियों का खतरा कितना ज्यादा? विश्लेषण में यह बात सामने आई कि शारीरिक निष्क्रियता के कारण डायबिटीज मरीजों में कई गंभीर रोगों का खतरा बढ़ जाता है:     स्ट्रोक: 10 प्रतिशत से अधिक मामले     डायबिटिक रेटिनोपैथी : 9.7 प्रतिशत     हार्ट फेलियर: 7.3 प्रतिशत     कोरोनरी हार्ट डिजीज: लगभग 5 से 7 प्रतिशत क्या है बचाव का रास्ता? इस खतरे को कम करने का उपाय बहुत ही सरल है- व्यायाम। विश्व स्वास्थ्य संगठन की सलाह है कि हर व्यक्ति को प्रति सप्ताह कम से कम 150 मिनट मध्यम से तीव्र शारीरिक गतिविधि जरूर करनी चाहिए। थोड़ी-सी सक्रियता डायबिटीज के मरीजों को हार्ट फेलियर और स्ट्रोक जैसे बड़े खतरों से बचा सकती है।  

सस्ता और पावरफुल: मोटोरोला का 5G फोन 24GB RAM के साथ सिर्फ ₹12,500 में

मुंबई  मोटोरोला के फोन पर कमाल की डील मिल रही है। हम कंपनी के इस धांसू फोन की बात कर रहे हैं, उसका नाम Motorola G35 5G है। अमेजन की डील में आप 24जीबी तक की रैम (रैम बूस्ट फीचर के साथ) वाले इस फोन को 12500 रुपये से कम में खरीद सकते हैं। 8जीबी रैम और 128जीबी के इंटरनल स्टोरेज वाले इस फोन की कीमत अमेजन इंडिया पर 13225 रुपये है। फोन पर 1 हजार रुपये तक का बैंक डिस्काउंट दिया जा रहा है। इस डिस्काउंट के साथ यह फोन 12500 रुपये से कम में आपका हो सकता है। फोन पर 661 रुपये तक का कैशबैक भी दिया जा रहा है। आप इस डिवाइस को एक्सचेंज बोनस के साथ भी खरीद सकते हैं। ध्यान रहे कि एक्सचेंज ऑफर में मिलने वाला डिस्काउंट आपके पुराने फोन की कंडीशन, ब्रैंड और कंपनी की एक्सचेंज पॉलिसी पर निर्भर करेगा। फोन में कंपनी 50MP का कैमरा, 5000mAh की बैटरी और डॉल्बी साउंड जैसे धांसू फीचर दिए गए है। मोटोरोला G35 5G के फीचर और स्पेसिफिकेशन मोटोरोला के इस फोन में 2400 x 1080 पिक्सल रेजॉलूशन के साथ 6.72 इंच का फुल एचडी+ LCD पैनल दिया गया है। फोन में ऑफर किया जा रहा यह डिस्प्ले 120Hz के रिफ्रेश रेट को सपोर्ट करता है। इसका पीक ब्राइटनेस लेवल 1000 निट्स का है। डिस्प्ले प्रोटेक्शन के लिए फोन में गोरिल्ला ग्लास 3 दिया गया है। फोन 4जीबी LPDDR4x रैम और 128जीबी के UFS 2.2 स्टोरेज से लैस है। फोन रैम बूस्ट फीचर के साथ आता है। इससे इसकी रैम 24जीबी तक की हो जाती है। प्रोसेसर के तौर पर फोन में कंपनी Unisoc T760 दे रही है। फोटोग्राफी के लिए फोन में एलईडी फ्लैश के साथ दो कैमरे दिए गए हैं। इनमें 50 मेगापिक्सल के मेन लेंस के साथ एक 8 मेगापिक्सल का अल्ट्रावाइड ऐंगल कैमरा शामिल है। मोटोरोला के इस फोन में सेल्फी के लिए 16 मेगापिक्सल का फ्रंट कैमरा दिया गया है। फोन में दी गई बैटरी 5000mAh की है, जो 18 वॉट की चार्जिंग को सपोर्ट करती है। ओएस की बात करें, तो फोन ऐंड्रॉयड 15 पर काम करता है। फोन के ओएस को कंपनी दो साल तक सिक्योरिटी पैच ऑफर कर रही है। बायोमेट्रिक सिक्योरिटी के लिए आपको इस फोन में साइड-माउंटेड फिंगरप्रिंट सेंसर देखने को मिलेगा। दमदार साउंड के लिए फोन में कंपनी डॉल्बी ऐटमॉस ऑफर कर रही है। यह फोन IP52 डस्ट और वॉटर रेजिस्टेंट रेटिंग के साथ आता है।

सिर्फ फोटो-QR कोड से आधार वेरिफिकेशन! क्या नए आधार ऐप से बदल जाएगा पहचान का तरीका

नई दिल्ली आने वाले समय में हो सकता है कि आपके आधार कार्ड पर सिर्फ आपकी फोटो और QR कोड ही दिखाई दें। इसे लेकर खबरें आ रही हैं और कुछ टिप्सटर ने भी इस बारे में X पर पोस्ट किया है। इसका मतलब है कि आने वाले समय में UIDAI फिजिकल आधार कार्ड के डिजाइन में बड़ा बदलाव कर सकता है। ऐसे में आज जिस तरह से आधार कार्ड पर धारक की सारी जानकारी उपलब्ध रहती है, वैसे आगे शायद न हो। इसकी एक बड़ी वजह नई आधार ऐप को बताया जा रहा है, जिसे लाने का मकसद लोगों को उनके आधार कार्ड से जु़ड़ी जानकारी पर ज्यादा कंट्रोल देना और फिजिकल कार्ड की जरूरत को खत्म करना है। ऐसे में मौजूदा फिजिकल आधार कार्ड्स इस मकसद में बाधा बन सकते हैं क्योंकि उन पर सारी डिटेल्स मौजूद होती है। क्या बदलेगा आधार पर? अगर टिप्सटर और बाकी सूत्रों से आ रही खबरें सही साबित होती हैं, तो UIDAI आधार के फिजिकल कार्ड से सभी डिटेल्स को हटा कर, सिर्फ धारक की फोटो और एक QR कोड ही दिखाएगा। ऐसा धारक की प्राइवेसी की रक्षा के लिए और नए आधार ऐप के इस्तेमाल को बढ़ावा देनेे के लिए किया जा सकता है। सिर्फ फोटो-QR कोड से क्या फायदा होगा? आधार के फिजिकल कार्ड पर फोटो और QR कोड होने से आधार धारक की जानकारी लीक होने का खतरा खत्म हो जाएगा। दरअसल UIDAI ने नए आधार ऐप के जरिए आधार के इस्तेमाल को डिजिटल बना दिया है। हालांकि इसके पूरी तरह चलन में आने में समय लग सकता है और कई जगहों पर लोगों से उनका फिजिकल आधार कार्ड ही जमा करना पड़ सकता है। ऐसे में अगर कार्ड पर सिर्फ फोटो और QR कोड होगा, तो न ही धारक की गैर-जरूरी डिटेल्स लीक होंगी और कार्ड की फिजिकल कॉपी मांगने वालों को भी डिटेल्स वेरिफाई करने के लिए नए आधार ऐप पर शिफ्ट होना होगा। इस तरह से कह सकते हैं कि नए तरह के फिजिकल आधार कार्ड बनाकर UIDAI आधार ऐप के इस्तेमाल को पुश कर सकता है। नए आधार ऐप से क्या है लिंक? आधार के फिजिकल कार्ड पर सिर्फ फोटो और QR कोड देना, कहीं न कहीं नए आधार ऐप से लिंक हो सकता है। UIDAI ने नए आधार ऐप को भी इसी तरह बनाया है कि यूजर को अपनी सारी आधार डिटेल्स किसी के साथ शेयर न करनी पड़े। नए ऐप में यूजर आधार का QR कोड शेयर करके अपने आधार से जुड़े काम कर सकता है। सामने वाला भी उस ऐप के जरिए किसी का भी आधार वेरिफाई कर सकता है। ऐसे में आधार के फिजिकल कार्ड को शेयर करने की जरूरत खत्म हो जाती है। सरकार ने ऐसा इसलिए भी किया है क्योंकि नॉर्मल आधार कार्ड पर मौजूद ज्यादा डिटेल्स का साइबर फ्रॉड जैसे कामों में गलत इस्तेमाल होता था। नया कार्ड बनवाना जरूरी होगा? फिलहाल क्योंकि नए डिजाइन वाले आधार कार्ड को लेकर सरकार की ओर से पुख्ता जानकारी नहीं आई है। ऐसे में सिर्फ खबरों के आधार पर कुछ भी कह पाना संभव नहीं है। हालांकि अगर आप UIDAI का नया आधार ऐप इस्तेमाल कर रहे हैं, तो आपको शायद नया कार्ड न बनवाना पड़े। ऐसा इसलिए क्योंकि इस ऐप के जरिए आप डिजिटल आधार को किसी के साथ भी शेयर कर सकते हैं। इसके साथ ही आधार में किसी तरह के बदलाव या फिर शेयर की जाने वाली जानकारी पर कंट्रोल भी नए UIDAI ऐप के जरिए रखा जा सकता है। ऐसे में हो सकता है कि नए डिजाइन वाला आधार कार्ड सिर्फ उनके लिए हो, जो कि ऐप का इस्तेमाल करने में सक्षम नहीं हैं।

भर्ती के पुराने नियम होंगे खत्म! इस कंपनी में इंसानों से आगे निकले AI एजेंट

डेवलपर्स के लिए टूल बनाने वाली कंपनी StackBlitz ने बड़ा ऐलान किया है. कंपनी ने कहा है कि वह इस साल इंसानों से ज्यादा AI एजेंट्स को काम पर रखेगी. यानी कंपनी की ग्रोथ अब मानव कर्मचारियों से नहीं बल्कि डिजिटल वर्कर्स से होगी. कंपनी के सीईओ का कहना है कि AI एजेंट अब सिर्फ कोडिंग हेल्पर नहीं रहे, बल्कि बिजनेस के एक्टिव योगदानकर्ता बन रहे हैं. यह ट्रेंड आने वाले समय में पूरी सॉफ्टवेयर इंडस्ट्री की हायरिंग सोच बदल सकता है. इससे जॉब मार्केट पर भी गहरा असर पड़ने की संभावना जताई जा रही है. StackBlitz के सीईओ एरिक सिमंस ने साफ कहा है कि कंपनी अब पारंपरिक तरीके से टीम नहीं बढ़ाएगी. इंजीनियर, सेल्स और सपोर्ट स्टाफ जोड़ने के बजाय AI सॉफ्टवेयर एजेंट्स की संख्या बढ़ाई जाएगी. ये एजेंट एक साथ कई काम संभाल सकते हैं और टाइम जोन या काम के घंटों की सीमा में बंधे नहीं होते. कंपनी का मानना है कि डिजिटल एजेंट्स ऑपरेशन को ज्यादा स्केलेबल और तेज बनाते हैं. यह मॉडल लागत घटाने और स्पीड बढ़ाने दोनों में मदद कर सकता है. AI एजेंट सिर्फ कोड नहीं, फैसले भी लेंगे एरिक सिमंस के मुताबिक AI एजेंट भविष्य में यूजर की तरफ से दूसरे एजेंट्स से बात करेंगे. वे कीमतों पर बातचीत, बुकिंग चेक करना और ऑनलाइन राय बनाना जैसे काम भी कर सकेंगे. उनका कहना है कि लोग अपने AI एजेंट की सलाह पर खरीद, रिजर्व और फैसले लेने लगेंगे. यह AI को एक पर्सनल डिजिटल प्रतिनिधि के रूप में स्थापित करता है. यानी AI एजेंट यूजर का एक्सटेंशन बनकर काम करेंगे, सिर्फ टूल नहीं रहेंगे. AI एजेंट इकोसिस्टम के शुरुआती संकेत इस दिशा में शुरुआती उदाहरण भी सामने आ चुके हैं, जैसे ओपनक्लॉ नाम का ओपन सोर्स AI असिस्टेंट. यह व्हाट्सएप, स्लैक और आईमैसेज जैसे प्लेटफॉर्म के भीतर काम कर सकता है और सीमित मानव हस्तक्षेप के साथ एजेंट्स को आपस में समन्वय करने देता है. सिमंस ने सॉफ्टवेयर और SaaS शेयरों में हाल की गिरावट को भी इससे जोड़ा है. उनका मानना है कि जब AI हजारों गुना तेजी से सॉफ्टवेयर बना और बदल सकता है, तो पारंपरिक एक्सपर्ट आधारित मॉडल दबाव में आएंगे. अगर यह प्रयोग सफल रहा, तो कई टेक कंपनियां इसी रास्ते पर चल सकती हैं.

ज्यादा गरम चाय-कॉफी से हो सकता है फूड पाइप को नुकसान, विशेषज्ञों ने बढ़ते कैंसर रिस्क पर किया अलर्ट

क्या आपके दिन की शुरुआत भी कप से निकलती हुई 'गरमा-गरम' भाप वाली चाय या कॉफी के साथ होती है? अगर हां, तो जरा ठहरिए, क्योंकि जिसे आप सुकून का पल समझते हैं, वह असल में आपकी सेहत के लिए एक बड़ी मुसीबत बन सकता है। जी हां, न्यूट्रिशनिस्ट लीमा महाजन ने एक चौंकाने वाला खुलासा किया है। इस आर्टिकल में आप जानेंगे कि कैसे आपकी गरमागरम चीजें पीने की आदत आपको भविष्य में कैंसर के खतरे तक ले जा सकती है। चाय या कॉफी नहीं, तापमान है समस्या अक्सर लोगों को लगता है कि कुछ खास चीजों से ही कैंसर का रिस्क बढ़ता है, लेकिन लीमा महाजन का साफ कहना है कि समस्या चाय, कॉफी या खाने में नहीं, बल्कि उनके तापमान में है। जी हां, बहुत ज्यादा गरम चीजें पीना या खाना ही असली खतरा है। क्या होता है शरीर पर असर? जब हम बहुत ज्यादा गर्म खाना खाते हैं या खौलती हुई चाय पीते हैं, तो इससे हमारा फूड पाइप डैमेज होता है। अगर यह लगातार होता रहे, तो इससे 'इसोफेजस स्क्वैमस सेल कार्सिनोमा' नामक बीमारी हो सकती है, जो एक टाइप का कैंसर है। क्या कहती है रिसर्च? न्यूट्रिशनिस्ट की मानें, तो 'इंटरनेशनल एजेंसी फॉर रिसर्च ऑन कैंसर' (IARC) ने इसे स्पष्ट रूप से ग्रुप 2A कार्सिनोजेनिक की श्रेणी में रखा है। इसका मतलब है कि बहुत ज्यादा गरम चीजों का सेवन कैंसर पैदा करने वाले कारणों में शामिल है। भविष्य के लिए चेतावनी यह बीमारी रातों-रात नहीं होती। ऐसा नहीं है कि आज आपने गरम चाय पी और कल आपको कैंसर हो जाएगा, लेकिन अगर आप अपनी इस आदत को नहीं बदलते हैं और लगातार बहुत गरम चीजों का सेवन करते रहते हैं, तो भविष्य में इसके होने की संभावना बहुत ज्यादा बढ़ जाती है। इसलिए, लीमा महाजन का कहना है कि अपनी चाय को थोड़ा ठंडा होने दें और तभी उसका मजा लें।  

Apple ला रहा है बजट MacBook, इतनी कम कीमत कि यकीन करना मुश्किल!

नई दिल्ली Apple MacBook की कीमत देख बहुत से लोग इसे खरीद ही नहीं पाते और फिर मन में आता है कि काश मैकबुक की कीमत होती… अब लोगों की इस ख्वाहिश को कंपनी पूरा कर सकती है. एक बार फिर से एपल कंपनी का सस्ता मैकबुक चर्चा में है. पिछले लंबे समय से चर्चा है कि Apple उन यूजर्स के लिए सस्ते लैपटॉप को तैयार कर सकता है जो बिना ज्यादा कीमत चुकाए macOS को एक्सपीरियंस करना चाहते हैं. आने वाला MacBook हल्का, भरोसेमंद नोटबुक होने की उम्मीद है जो रोजाना के काम, ब्राउज़िंग, स्ट्रीमिंग और पढ़ाई की जरूरतों को बिना किसी दिक्कत के पूरा करेगा. कई रिपोर्ट्स फिर से सामने आई हैं जिनमें कहा गया है कि यह लंबे समय से चर्चा में रहा डिवाइस अब लॉन्च से ज्यादा दूर नहीं है और इसकी कीमत अभी के MacBook Air से कम हो सकती है. रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि Apple एक MacBook बना रही है जिसे खास तौर पर लैपटॉप रेंज की शुरुआती कीमत कम करने के लिए डिजाइन किया जा रहा है. पहले इस लैपटॉप के इस साल जनवरी में अनाउंस होने की उम्मीद थी लेकिन अब इसे मार्च या अप्रैल के आसपास लॉन्च किया जा सकता है. भारत में इतनी हो सकती है कीमत कीमत की बात करें तो इस डिवाइस को US में लगभग $599 (लगभग 54298 रुपए) होने की उम्मीद है, लेकिन इससे पहले कि आप बहुत ज्यादा इस मैकबुक से उम्मीद कर रहे हो तो यहां ये भी ध्यान रखना जरूरी है कि टैक्स, इंपोर्ट ड्यूटी वगैरह जैसे कई फैक्टर्स की वजह से भारत में कीमत अक्सर US की तुलना में ज्यादा होती है. डिजिट की रिपोर्ट में बताया गया है कि भारत में, डिवाइस की कीमत लगभग 60,000 रुपए या 65,000 रुपए हो सकती है. इस कीमत के साथ भी, यह भारत में सबसे सस्ता MacBook होगा, जिससे ज्यादा यूजर्स को Apple इकोसिस्टम का हिस्सा बनने का मौका मिलेगा.

AI की दुनिया में अगला धमाका: OpenAI लॉन्च करेगा अपना स्पेशल डिवाइस

नई दिल्ली OpenAI का नाम आते ही लोगों के जेहन में एक सॉफ्टवेयर का ख्याल आता है. मगर कंपनी अब हार्डवेयर सेक्टर में एंट्री करना चाहती है. कंपनी ने कुछ वक्त पहले ही ऐलान किया है कि वो इस साल के अंत तक AI इनेबल हार्डवेयर प्रोडक्ट लॉन्च कर सकते हैं. कंपनी इससे पहले एक नया प्रोडक्ट लॉन्च कर सकती है.  2026 के अंत में कंपनी AI इनेबल डिवाइस को लॉन्च करेगी, जो लोगों के लिए 2027 में मिलेगा. अब एक लीक सामने आई है, जिसमें कंपनी के अपकमिंग हार्डवेयर की जरूरी डिटेल्स हैं. ये एक नॉन-AI डिवाइस हो सकता है. आइए जानते हैं इसकी डिटेल्स.  क्या होगा कंपनी का पहला डिवाइस? टिप्स्टर स्मार्ट पिकाचू के मुताबिक, OpenAI का पहला हार्डवेयर ईयरबड्स होंगे. इन ईयरबड्स का नाम Dime हो सकता है. हालांकि, कंपनी इसका बेसिक वर्जन रिलीज करेगी. ये संभवतः कंपनी के अपने ड्रीम डिवाइस के लॉन्च से पहले का वॉर्मअप हो सकता है.  OpenAI से जुड़ी एक पेटेंट फाइलिंग चीन में पब्लिक की गई है. इस फाइलिंग के मुताबिक प्रोडक्ट का नाम Dime होगा. टिप्स्टर का कहना है कि कंपनी पहले सिंपल ईयरबड्स लॉन्च करेगी. इसके अलावा OpenAI के स्मार्टफोन जैसे डिवाइस को लॉन्च होने में वक्त लगेगा.  फोन जैसा डिवाइस भी लाएगी कंपनी इसकी वजह HBM स्टोरेज है जो मैटेरियल की कीमत को बढ़ा सकती है. कंपनी का स्मार्टफोन जैसा डिवाइस कंप्यूटर जैसी पावर के साथ आएगा. इससे पहले OpenAI के चीफ ग्लोबल अफेयर ऑफिसर क्रिस लेहेन ने बताया था कि इस साल के अंत तक वे पहला AI डिवाइस लॉन्च करेंगे. हालांकि, लॉन्च की निश्चित तारीख की जानकारी अभी तक सामने नहीं आई हैं. OpenAI ने हाल में ही नया AI मॉडल एजेंटिक कोडिंग को लॉन्च किया है, जिसका नाम GPT-5.3-Codex है. ये मॉडल सभी पेड यूजर्स के लिए उपलब्ध है. कंपनी का कहना है कि ये डिवाइस पिछले वर्जन के मुकाबले 25 परसेंट फास्ट होगा.

डिजिटल जंग तेज: रूस ने अमेरिकी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर कसा शिकंजा

रूस टेलीग्राम पर रोक लगाने के बाद रूस की पुत‍िन सरकार ने अमेर‍िकी सोशल मीड‍िया प्‍लेटफॉर्म्‍स पर कार्रवाई शुरू कर दी है। मीड‍िया र‍िपोर्टों के अनुसार, रूस में वॉट्सऐप, यूट्यूब, इंस्टाग्राम और फेसबुक जैसे लोकप्रिय अमेर‍िकी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर रोक लगा दी गई है। कहा जा रहा है क‍ि वहां लोग इन पॉपुलर ऐप्‍स को इस्तेमाल नहीं कर पा रहे हैं। बुधवार को रूस ने पॉपुलर मैसेजिंग ऐप Telegram पर रोक लगा दी थी। सरकार ऐसा इसलिए कर रही है, ताकि लोग सरकारी प्लेटफॉर्म्स का इस्तेमाल करने लगें। रूस की नियामक संस्था 'रोसकोमनाडजोर' ने सुरक्षा का हवाला देते हुए टेलीग्राम पर प्रतिबंध लगाने का फैसला किया था। अब अमेरिका के बड़े सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर भी रोक लग गई है। इन वेबसाइट्स के डोमेन नाम को रूस के राष्ट्रीय डोमेन नेम सिस्टम (DNS) से हटा दिया गया है। मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो पुतिन सरकार ने सिर्फ अमेरिका के बड़े सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ही नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय मीडिया संस्थानों पर भी रोक लगाई है। इससे प्रभावित हुई वेबसाइट्स में बीबीसी, डॉउचा वेले, रेडियो फ्री यूरोप रेडियो लिबर्टी शामिल हैं। इसके अलावा, टॉर ब्राउजर (Tor Browser) को भी ब्लॉक कर दिया गया है, जिसका इस्तेमाल गुमनाम ब्राउजिंग के लिए किया जाता था। राष्ट्रीय DNS सिस्टम इस्तेमाल करना हुआ अनिवार्य बता दें कि रूस में इंटरनेट सेवा देने वालों के लिए देश के राष्ट्रीय DNS सिस्टम का इस्तेमाल करना अनिवार्य हो गया है। यह सिस्टम Roskomnadzor नाम की सरकारी एजेंसी की निगरानी में काम करता है। सिस्टम का काम “सॉवरेन इंटरनेट” कानून के तहत इंटरनेट कंट्रोल को लागू करना है। क्यों उठाया रूस ने ये कदम? कई रिपोर्ट्स में कहा जा रहा है कि रूस ने यह कदम देश में विदेशी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और मीडिया वेबसाइट्स के इस्तेमाल को लगभग खत्म कर देने के लिए उठाया है। हालांकि, इससे रूस में रहने वाले लोग कई ग्लोबल सर्विस और खबरों के सोर्स से दूर हो गए हैं। वॉट्सऐप कॉल‍िंंग फीचर पर पहले से बैन बता दें कि रूस में पहले से ही वॉट्सऐप की कई सर्विस पर बैन लगा हुआ है। पिछले साल WhatsApp और Telegram की कॉलिंग फीचर पर रोक लगा दी गई थी। इसके अलावा, रूस ने दिसंबर में ऐपल के फेसटाइम और स्नैपचैट को भी देश में बैन कर दिया था।