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डिजिटल लोक अदालत से पुराने चालान का समाधान: घर बैठे पूरा प्रोसेस समझें आसान भाषा में

नई दिल्ली अगर आपके पुराने चालान बकाया हैं, तो अब डिजिटल ट्रैफिक लोक अदालत पोर्टल के जरिए आप घर बैठे उनका निपटारा कर सकेंगे। यह पोर्टल लोगों को अपनी गाड़ी का नंबर और ओटीपी दर्ज करके चालान देखने की सुविधा देता है। इस पोर्टल के जरिए लोग लोक अदालत के लिए तारीख और कोर्ट चुन सकेंगे। इसके बाद चुनी हुई तारीख को कोर्ट में जाकर पोर्टल पर मिलने वाले बारकोड को स्कैन करवाना होगा। इसके बाद जुर्माने की राशि को भरते ही रियल टाइम में चालान का निपटारा अपडेट हो जाएगा। डिजिटल ट्रैफिक लोक अदालत पोर्टल से क्या फायदा डिजिटल ट्रैफिक लोक अदालत पोर्टल का फायदा लोगों को प्रशासन दोनों को मिलेगा। इसके जरिए ट्रैफिक चालानों के निपटारे की रफ्तार तेज हो जाएगी। इसके अलावा पहले चालान का स्टेटस अपडेट होने में लंबा समय लग जाता था, जो कि अब रियल टाइम में तुरंत हो जाएगा। इसके अलावा इस पोर्टल की वजह से लोगों को बार-बार कोर्ट का चक्कर नहीं मारना पड़ेगा और वह अपने अनुसार घर या दफ्तर के पास की कोर्ट और टाइम स्लॉट चुनकर सभी चालान का निपटारा करा पाएंगे। समझें इस्तेमाल का पूरा प्रोसेस डिजिटल ट्रैफिक लोक अदालत पोर्टल का इस्तेमाल करना काफी आसान हैं। इसके लिए आपको:     सबसे पहले ऑफिशियल पोर्टल यानी कि     traffic.delhipolice.gov.in/lokadalat/ पर जाना होगा।     यहां होम पेज पर अपनी गाड़ी का नंबर और वेरिफिकेशन कोड डालकर सर्च बटन पर क्लिक करें।     इसके बाद आपको रजिस्टर्ड नंबर पर एक OTP मिलेगा। OTP को दर्ज करके वेरिफाई करें।     वेरिफिकेशन होने के बाद आपको स्क्रीन पर गाड़ी के सभी पेंडिंग नोटिस और चालान दिखने लगेंगे। आपको जिस किसी भी चालान का निपटारा करना है, उसे चुन लें।     अब अपनी सुविधा के अनुसार नजदीकी कोर्ट को चुनें और टाइप स्लॉट चुनें।     इसके बाद अंडरटेकिंग पर क्लिक करके सबमिट कर दें और चालान की रसीद का फ्रिंट लेकर उसे सेव कर लें। इसके बाद क्या करें?     इसके बाद तय तारीख और समय पर संबंधित कोर्ट में पहुंचें।     कोर्ट में मौजूद लोक अदालत की बेंच के सामने अपनी चालान की रसीद दिखाएं।     कोर्ट का स्टाफ रसीद का बारकोड स्कैन करेगा और आपको जुर्माने की रकम भरनी होगी।     इसके साथ ही मौके पर चालान का निपटारा कर दिया जाएगा।

iPhone 18 Pro फीचर्स हुए लीक, परफॉर्मेंस और AI में मचाएगा तहलका

नई दिल्ली Apple इस साल सितंबर में iPhone 18 लाइनअप को लॉन्च कर सकता है. कयास हैं कि कंपनी इस साल सिर्फ प्रो वेरिएंट को ही लॉन्च करेगी. लेटेस्ट लीक रिपोर्ट्स की मानें, तो ब्रांड Pro मॉडल्स में कई बड़े अपग्रेड करेगा. ऐपल दो स्मार्टफोन्स- iPhone 18 Pro और iPhone 18 Pro Max को लॉन्च कर सकता है. दोनों ही स्मार्टफोन्स में A20 Pro प्रोसेसर दिया जाएगा. कंपनी इन फोन्स में C2 मॉडम दे सकती है, जो ब्रांड का इन-हाउस चिप होगा. दोनों ही फोन्स में छोटा डायनैमिक आईलैंड मिलेगा. आइए जानते हैं इन फोन्स में क्या कुछ खास हो सकता है. मिलेंगे मैक्स अपग्रेड Macrumors की रिपोर्ट के मुताबिक, iPhone 18 Pro और iPhone 18 Pro Max में बड़ा अपग्रेड मिलेगा. दोनों ही फोन्स में डायनैमिक आईलैंड का साइज छोटा किया जा सकता है. स्मार्टफोन से कुछ फेस आईडी टेक्नोलॉजी को हटाया जा सकता है. दोनों ही स्मार्टफोन्स में A20 Pro प्रोसेसर मिलेगा. ये चिप 2nm प्रॉसेस पर तैयार किया जाएगा. प्रोसेसर नए आर्किटेक्चर और पैकेजिंग डिजाइन पर बेस्ड होगा. इसकी वजह से परफॉर्मेंस के साथ ही पावर एफिशिएंसी भी बेहतर होगी. इसके अलावा सेल्यूलर और नेटवर्किंग फीचर के मामले में भी कंपनी अपग्रेड्स करेगी. अपकमिंग स्मार्टफोन सीरीज में N2 चिप मिलेगा. कंपनी इन दोनों ही फोन्स में 48MP का प्राइमरी फ्यूजन कैमरा दे सकती है. नए अपग्रेड के बाद iPhone में लाइट को कंट्रोल करना आसान होगा. नॉन प्रो मॉडल्स नहीं होंगे लॉन्च रिपोर्ट्स की मानें, तो कंपनी इस साल iPhone 18 को लॉन्च नहीं करेगी. इस फोन को कंपनी अगले साल यानी 2027 में लॉन्च कर सकती है. वहीं iPhone 18 Pro और iPhone 18 Pro Max को कंपनी इस साल यानी 2026 सितंबर में लॉन्च कर सकती है. प्रो सीरीज के डिजाइन में इस बार कुछ नया देखने को संभवतः नहीं मिलेगा.

2050 का खतरा: दुनिया की 25% आबादी को हो सकती है कान की दिक्कत, WHO की चेतावनी

नई दिल्ली दुनिया भर में सुनने से जुड़ी समस्याएं तेजी से बढ़ रही है. वर्ल्ड हेल्थ आर्गेनाइजेशन की पहली वर्ल्ड रिपोर्ट ऑन हियरिंग के अनुसार साल 2050 तक दुनिया की करीब 2.5 अरब आबादी यानी हर चार में से एक व्यक्ति किसी न किसी स्तर की सुनने की समस्या से जूझ रहा होगा. इनमें से लगभग 70 करोड़ लोगों को कान और सुनने से जुड़ी विशेष हॉस्पिटैलिटी और पुनर्वास सेवाओं की जरूरत पड़ेगी. ‌ ऐसे में चलिए आज हम आपको बताते हैं कि 2050 तक हर चार में से एक शख्स को कान की दिक्कतें क्यों होगी और डब्ल्यूएचओ की रिपोर्ट में और क्या-क्या आया सामने आया. अभी क्या है स्थिति? डब्ल्यूएचओ की रिपोर्ट के अनुसार वर्तमान में दुनिया में हर पांच में से एक व्यक्ति को सुनने में किसी न किसी तरह की दिक्कत है. समय पर इलाज और देखभाल न मिल पाना मामलों के बढ़ने के बड़ी वजह है. डब्ल्यूएचओ का कहना है की कम आय वाले देशों में ऐसे 80 प्रतिशत मामले सामने आते हैं, जहां एक्सपर्ट्स और संसाधनों की भारी कमी है. इसके अलावा संक्रमण, जन्मजात बीमारियां, ध्वनि प्रदूषण, तेज आवाज में लंबे समय तक रहना और अनहेल्दी लाइफस्टाइल सुनने की क्षमता को प्रभावित कर रहे हैं. वहीं बच्चों में करीब 60 फीसदी मामलों को टीकाकरण, बेहतर मातृत्व, शिशु देखभाल और कान के संक्रमण के समय पर इलाज से रोका जा सकता है. वहीं युवाओं में तेज आवाज में संगीत सुनना बड़ा खतरा बनता जा रहा है. संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट के अनुसार 12 से 35 वर्ष के एक अरब से ज्यादा लोग स्मार्टफोन और हेडफोन के जरिए तेज आवाज में गाने सुनने के कारण खतरे में है. हेल्थ व्यवस्था में बड़ी कमी भी वजह डब्ल्यूएचओ की रिपोर्ट बताती है कि कई देशों में कान, नाक और गला एक्सपर्ट्स, ऑडियोलॉजिस्ट और स्पीच थेरेपिस्ट की भारी कमी है. वहीं प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं में कान और सुनने से जुड़ी देखभाल को अभी भी पर्याप्त जगह नहीं मिल पाई. इसके चलते शुरुआती पहचान और समय पर इलाज नहीं हो पाता है. इसके अलावा एक्सपर्ट का कहना है कि सुनने की समस्या की शुरुआती जांच बहुत जरूरी है. वहीं नई तकनीकों की मदद से अब कम संसाधनों में भी जांच संभव है. कई कान की बीमारियों का इलाज दवा या सर्जरी से हो सकता है. जहां सुनने की क्षमता वापस नहीं लाई जा सकती, वहां हियरिंग एड, कॉक्लियर इम्प्लांट और स्पीच थेरेपी जैसे ऑप्शन मददगार साबित होते हैं. डब्ल्यूएचओ का अनुमान है कि कान और सुनने से जुड़ी सेवाओं में निवेश करने पर सरकार को हर एक डॉलर के बदले करीब 16 डॉलर का सामाजिक और आर्थिक लाभ मिल सकता है. वहीं सुनने की समस्या का असर सिर्फ बातचीत तक सीमित नहीं रहता. यह पढ़ाई, रोजगार और मानसिक स्वास्थ्य पर भी असर डालता है. इसके अलावा डब्ल्यूएचओ के अनुसार इससे सामाजिक अलगाव और अवसाद का खतरा भी बढ़ सकता है.

टेक्नोलॉजी में नया अध्याय: Jio–Google–Microsoft की Trusted Tech Alliance, भारत के डिजिटल भविष्य पर क्या होगा असर?

नई दिल्ली अफ्रीका, एशिया, यूरोप और नॉर्थ अमेरिका की 15 बड़ी कंपनियों ने ‘ट्रस्टेड टेक एलायंस’ (TTA) के गठन की घोषणा की है। यह एक जैसी सोच वाली इंटरनेशनल टेक कंपनियों का एक समूह है, जो कनेक्टिविटी, क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर, सेमीकंडक्टर, सॉफ्टवेयर और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के लिए ऐसी तकनीक बनाने के लिए साथ आए हैं जिस पर दुनिया यकीन कर सके और जिसे परखा जा सके। इस एलायंस में भारत की ओर से Jio Platforms शामिल है। जर्मनी में आयोजित म्यूनिख सिक्योरिटी कॉन्फ्रेंस के दौरान इस एलायंस का ऐलान किया गया। ये दिग्गज कंपनियां हैं इस एलायंस का हिस्सा एलायंस के संस्थापक सदस्यों में अमेजन, वेब सर्विसेज, माइक्रोसॉफ्ट, गूगल क्लाउड, एरिक्सन, नोकिया, एसएपी और एनटीटी जैसी कुल 15 ग्लोबल टेक कंपनियां शामिल हैं। एलायंस का कहना है कि आगे और कंपनियों को इससे जोड़ा जाएगा। इसके साथ ही, देश और दुनिया के लेवल पर अपनी तकनीक को और बेहतर बनाने, दूसरी कंपनियों के साथ मुकाबले में बने रहने और एक मजबूत डिजिटल सिस्टम तैयार करने पर काम जारी रहेगा। जियो का बड़ा संकल्प लॉन्च के मौके पर जियो प्लेटफॉर्म्स के सीईओ किरण थॉमस ने कहा कि विश्व स्तर पर डिजिटल विकास को गति देने के लिए भरोसेमंद, सुरक्षित और पारदर्शी टेक्नोलॉजी जरूरी है। जियो प्लेटफॉर्म्स को गर्व है कि वह 'ट्रस्टेड टेक एलायंस' का हिस्सा बना है, ताकि टेक्नोलॉजी की दुनिया में मिलकर ऐसे नियम और तरीके बनाए जा सकें जो सुरक्षित हों और जिन पर सब भरोसा कर सकें। उन्होंने आगे बताया कि हम इस कोशिश के जरिए दुनिया भर के पार्टनर्स के साथ मिलकर आने वाले समय की इंटरनेट कनेक्टिविटी, क्लाउड और AI सिस्टम को इतना बेहतर बनाना चाहते हैं कि लोग लंबे समय तक उन पर भरोसा कर सकें। माइक्रोसॉफ्ट के वाइस चेयर और प्रेसिडेंट ब्रैड स्मिथ ने इस मौक पर कहा कि मौजूदा वैश्विक माहौल में समान सोच वाली कंपनियों का साथ आना जरूरी है, ताकि सीमाओं के पार तकनीक में भरोसा और उच्च मानक कायम किए जा सकें। वहीं एरिक्सन के सीईओ बोर्ये एकहोम ने कहा कि कोई एक कंपनी या देश अकेले सुरक्षित और भरोसेमंद डिजिटल ढांचा नहीं बना सकता, इसके लिए वैश्विक सहयोग जरूरी है। ग्लोबल मंच पर बढ़ेगी भारत की धाक इस एलायंस के तहत सदस्य कंपनियों ने पांच प्रमुख सिद्धांतों पर सहमति जताई है। इसमें कंपनियों को चलाने के ईमानदार तरीके, सुरक्षा की समय-समय पर जांच, सामान और सेवाओं की सप्लाई का मजबूत नेटवर्क, एक ऐसा सिस्टम जहां सब मिलकर काम कर सकें और कानून के हिसाब से लोगों के डेटा को सुरक्षित रखना शामिल है। इन नियमों के जरिए कंपनियां यह सुनिश्चित करेंगी कि टेक्नोलॉजी सुरक्षित, विश्वसनीय और जिम्मेदारी के साथ संचालित हो, चाहे उसका विकास या इस्तेमाल कहीं भी हो। एक्सपर्ट्स का मानना है कि जियो की भागीदारी से भारत को वैश्विक डिजिटल मानकों के निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने का मौका मिलेगा। इससे देश में क्लाउड, 5G और AI आधारित सर्विसेज को ग्लोबल स्तर की विश्वसनीयता मिल सकती है और डेटा सुरक्षा को लेकर ग्राहकों का भरोसा और मजबूत होगा।

डाइट में गेहूं की जगह शामिल करें यह अनाज, हार्ट हेल्थ को मिलेगी जबरदस्त मजबूती

चाहे घर में दाल बनी हो या कोई मसालेदार सब्जी, गेहूं की रोटी के बिना हमारी थाली अधूरी होती है। यह हमारे भोजन का अहम हिस्सा है, पर अब समय बदल रहा है। आजकल बदलती लाइफस्टाइल और फिटनेस के प्रति बढ़ती जागरूकता के कारण लोग अपनी डाइट में बदलाव कर रहे हैं। इसलिए, अब क्विनोआ रोटी लोगों की थाली में जगह बना रही है। क्विनोआ कैलोरी, प्रोटीन, फाइबर, आयरन, मैग्नीशियम, जिंक और अन्य जरूरी विटामिन से भरपूर होती है। यही वजह है कि इसे आज सुपरफूड कहा जाता है। बता दें कि अमेरिका और यूरोप जैसे देशों में क्विनोआ रोटी की मांग बढ़ी है, लेकिन सच यह है कि दक्षिण अमेरिका में इसे हजारों सालों से उगाया और खाया जाता रहा है। चलिए जानते हैं इसे डाइट में शामिल करने के कुछ फायदों के बारे में। दिल की सेहत के लिए अच्छा दिल के मरीजों के लिए क्विनोआ रोटी को डाइट में शामिल करना काफी फायदेमंद माना गया है। कुछ अध्ययनों में पाया गया है कि क्विनोआ खाने से मेटाबॉलिज्म बेहतर और दिल से जुड़ी बीमारियों का खतरा कम होता है। यह बैड कोलेस्ट्रॉल को कम करने में भी मददगार है। डायबिटीज के लिए फायदेमंद क्विनोआ की रोटी खाना डायबिटीज के मरीजों के लिए काफी फायदेमंद होती है। अगर आप रोजाना इसे डाइट में शामिल करते हैं, तो यह ब्लड शुगर के लेवल को कंट्रोल रखने में मदद करती है।   वजन घटाने में मददगार वजन घटाने की कोशिश कर रहे लोगों के लिए क्विनोआ की रोटी किसी वरदान से कम नहीं है। एक स्टडी में पाया गया है कि क्विनोआ मोटापे को भी कम करने का एक बेहतरीन सुपरफूड है। अगर आप भी बढ़ते वजन को लेकर परेशान हैं, तो क्विनोआ की रोटी को डाइट में जरूर शामिल करें। ग्लूटेन-फ्री रोटी का बेस्ट ऑप्शन जिन लोगों को ग्लूटेन से एलर्जी है या सीलिएक डिजीज है, तो उनके लिए गेंहू की रोटी की जगह क्विनोआ की रोटी एक सुरक्षित और पौष्टिक ऑप्शन माना जाता है। क्विनोआ को खरीदने से पहले मिलावट या गंदगी की जांच के लिए पैकेट पर लगे लेबल को ध्यान से जरूर पढ़ें। पाचन को बनाए हेल्दी क्विनोआ में कई अनाजों से ज्यादा फाइबर होता है, जो पेट से जुड़ी समस्याओं से राहत दिलाने में मदद करता है। यह पाचन तंत्र को दुरुस्त रखता है और कब्ज की समस्या कम करता है। साथ ही, क्विनोआ की रोटी खाने से पेट लंबे समय तक भरा महसूस होता है।  

चौंकाने वाला खुलासा: डायबिटीज में हार्ट फेलियर की असली वजह दवाएं नहीं, बल्कि फिजिकल एक्टिविटी की कमी

क्या आप जानते हैं कि डायबिटीज के मरीजों में हार्ट फेलियर और दिल की अन्य बीमारियों का एक बहुत बड़ा कारण केवल 'शारीरिक निष्क्रियता' है? हाल ही में हुए एक शोध ने इस बात की पुष्टि की है कि अगर डायबिटीज के मरीज फिजिकली एक्टिव नहीं रहते हैं, तो उनके लिए जानलेवा जोखिम काफी बढ़ जाते हैं। भारत के लिए चिंताजनक आंकड़े 'जर्नल ऑफ स्पोर्ट एंड हेल्थ साइंस' में प्रकाशित एक नए शोध के अनुसार, भारत में डायबिटीज के मरीजों में हार्ट फेलियर के 13 प्रतिशत से भी ज्यादा मामलों के पीछे मुख्य वजह शारीरिक गतिविधि की कमी है। यह शोध बताता है कि भारत में डायबिटीज पीड़ितों में: कोरोनरी हृदय रोग के 9.6 प्रतिशत मामले, और हृदय संबंधी अन्य जटिलताओं के 9.4 प्रतिशत मामले केवल इसलिए होते हैं क्योंकि मरीज पर्याप्त शारीरिक व्यायाम या गतिविधि नहीं करते। विशेषज्ञों की क्या है राय? ब्राजील के रियो ग्रांडे डो सुल संघीय विश्वविद्यालय की शोधकर्ता जेन फेटर ने इस विषय पर महत्वपूर्ण जानकारी दी है। उन्होंने बताया कि अक्सर लोग यह मान लेते हैं कि डायबिटीज होने के बाद अन्य जटिल बीमारियां होना तय है, लेकिन यह सच नहीं है। जेन फेटर के अनुसार, "हमारे निष्कर्ष इस पुरानी धारणा को चुनौती देते हैं। यह साफ है कि अगर डायबिटीज के मरीज अपनी शारीरिक गतिविधि को उचित तरीके से बढ़ा लें, तो इन गंभीर बीमारियों के एक बड़े हिस्से को रोका जा सकता है।" 23 लाख लोगों पर हुआ शोध शोधकर्ताओं ने इस अध्ययन के लिए दक्षिण एशिया सहित दुनिया भर के अलग-अलग क्षेत्रों से 23 लाख से अधिक वयस्क डायबिटीज मरीजों के डेटा का विश्लेषण किया। इसमें पाया गया कि वैश्विक स्तर पर भी बड़ी रक्त वाहिकाओं की समस्याओं और आंखों की बीमारी के दस में से एक मामले का कारण निष्क्रियता ही है। बीमारियों का खतरा कितना ज्यादा? विश्लेषण में यह बात सामने आई कि शारीरिक निष्क्रियता के कारण डायबिटीज मरीजों में कई गंभीर रोगों का खतरा बढ़ जाता है:     स्ट्रोक: 10 प्रतिशत से अधिक मामले     डायबिटिक रेटिनोपैथी : 9.7 प्रतिशत     हार्ट फेलियर: 7.3 प्रतिशत     कोरोनरी हार्ट डिजीज: लगभग 5 से 7 प्रतिशत क्या है बचाव का रास्ता? इस खतरे को कम करने का उपाय बहुत ही सरल है- व्यायाम। विश्व स्वास्थ्य संगठन की सलाह है कि हर व्यक्ति को प्रति सप्ताह कम से कम 150 मिनट मध्यम से तीव्र शारीरिक गतिविधि जरूर करनी चाहिए। थोड़ी-सी सक्रियता डायबिटीज के मरीजों को हार्ट फेलियर और स्ट्रोक जैसे बड़े खतरों से बचा सकती है।  

सस्ता और पावरफुल: मोटोरोला का 5G फोन 24GB RAM के साथ सिर्फ ₹12,500 में

मुंबई  मोटोरोला के फोन पर कमाल की डील मिल रही है। हम कंपनी के इस धांसू फोन की बात कर रहे हैं, उसका नाम Motorola G35 5G है। अमेजन की डील में आप 24जीबी तक की रैम (रैम बूस्ट फीचर के साथ) वाले इस फोन को 12500 रुपये से कम में खरीद सकते हैं। 8जीबी रैम और 128जीबी के इंटरनल स्टोरेज वाले इस फोन की कीमत अमेजन इंडिया पर 13225 रुपये है। फोन पर 1 हजार रुपये तक का बैंक डिस्काउंट दिया जा रहा है। इस डिस्काउंट के साथ यह फोन 12500 रुपये से कम में आपका हो सकता है। फोन पर 661 रुपये तक का कैशबैक भी दिया जा रहा है। आप इस डिवाइस को एक्सचेंज बोनस के साथ भी खरीद सकते हैं। ध्यान रहे कि एक्सचेंज ऑफर में मिलने वाला डिस्काउंट आपके पुराने फोन की कंडीशन, ब्रैंड और कंपनी की एक्सचेंज पॉलिसी पर निर्भर करेगा। फोन में कंपनी 50MP का कैमरा, 5000mAh की बैटरी और डॉल्बी साउंड जैसे धांसू फीचर दिए गए है। मोटोरोला G35 5G के फीचर और स्पेसिफिकेशन मोटोरोला के इस फोन में 2400 x 1080 पिक्सल रेजॉलूशन के साथ 6.72 इंच का फुल एचडी+ LCD पैनल दिया गया है। फोन में ऑफर किया जा रहा यह डिस्प्ले 120Hz के रिफ्रेश रेट को सपोर्ट करता है। इसका पीक ब्राइटनेस लेवल 1000 निट्स का है। डिस्प्ले प्रोटेक्शन के लिए फोन में गोरिल्ला ग्लास 3 दिया गया है। फोन 4जीबी LPDDR4x रैम और 128जीबी के UFS 2.2 स्टोरेज से लैस है। फोन रैम बूस्ट फीचर के साथ आता है। इससे इसकी रैम 24जीबी तक की हो जाती है। प्रोसेसर के तौर पर फोन में कंपनी Unisoc T760 दे रही है। फोटोग्राफी के लिए फोन में एलईडी फ्लैश के साथ दो कैमरे दिए गए हैं। इनमें 50 मेगापिक्सल के मेन लेंस के साथ एक 8 मेगापिक्सल का अल्ट्रावाइड ऐंगल कैमरा शामिल है। मोटोरोला के इस फोन में सेल्फी के लिए 16 मेगापिक्सल का फ्रंट कैमरा दिया गया है। फोन में दी गई बैटरी 5000mAh की है, जो 18 वॉट की चार्जिंग को सपोर्ट करती है। ओएस की बात करें, तो फोन ऐंड्रॉयड 15 पर काम करता है। फोन के ओएस को कंपनी दो साल तक सिक्योरिटी पैच ऑफर कर रही है। बायोमेट्रिक सिक्योरिटी के लिए आपको इस फोन में साइड-माउंटेड फिंगरप्रिंट सेंसर देखने को मिलेगा। दमदार साउंड के लिए फोन में कंपनी डॉल्बी ऐटमॉस ऑफर कर रही है। यह फोन IP52 डस्ट और वॉटर रेजिस्टेंट रेटिंग के साथ आता है।

सिर्फ फोटो-QR कोड से आधार वेरिफिकेशन! क्या नए आधार ऐप से बदल जाएगा पहचान का तरीका

नई दिल्ली आने वाले समय में हो सकता है कि आपके आधार कार्ड पर सिर्फ आपकी फोटो और QR कोड ही दिखाई दें। इसे लेकर खबरें आ रही हैं और कुछ टिप्सटर ने भी इस बारे में X पर पोस्ट किया है। इसका मतलब है कि आने वाले समय में UIDAI फिजिकल आधार कार्ड के डिजाइन में बड़ा बदलाव कर सकता है। ऐसे में आज जिस तरह से आधार कार्ड पर धारक की सारी जानकारी उपलब्ध रहती है, वैसे आगे शायद न हो। इसकी एक बड़ी वजह नई आधार ऐप को बताया जा रहा है, जिसे लाने का मकसद लोगों को उनके आधार कार्ड से जु़ड़ी जानकारी पर ज्यादा कंट्रोल देना और फिजिकल कार्ड की जरूरत को खत्म करना है। ऐसे में मौजूदा फिजिकल आधार कार्ड्स इस मकसद में बाधा बन सकते हैं क्योंकि उन पर सारी डिटेल्स मौजूद होती है। क्या बदलेगा आधार पर? अगर टिप्सटर और बाकी सूत्रों से आ रही खबरें सही साबित होती हैं, तो UIDAI आधार के फिजिकल कार्ड से सभी डिटेल्स को हटा कर, सिर्फ धारक की फोटो और एक QR कोड ही दिखाएगा। ऐसा धारक की प्राइवेसी की रक्षा के लिए और नए आधार ऐप के इस्तेमाल को बढ़ावा देनेे के लिए किया जा सकता है। सिर्फ फोटो-QR कोड से क्या फायदा होगा? आधार के फिजिकल कार्ड पर फोटो और QR कोड होने से आधार धारक की जानकारी लीक होने का खतरा खत्म हो जाएगा। दरअसल UIDAI ने नए आधार ऐप के जरिए आधार के इस्तेमाल को डिजिटल बना दिया है। हालांकि इसके पूरी तरह चलन में आने में समय लग सकता है और कई जगहों पर लोगों से उनका फिजिकल आधार कार्ड ही जमा करना पड़ सकता है। ऐसे में अगर कार्ड पर सिर्फ फोटो और QR कोड होगा, तो न ही धारक की गैर-जरूरी डिटेल्स लीक होंगी और कार्ड की फिजिकल कॉपी मांगने वालों को भी डिटेल्स वेरिफाई करने के लिए नए आधार ऐप पर शिफ्ट होना होगा। इस तरह से कह सकते हैं कि नए तरह के फिजिकल आधार कार्ड बनाकर UIDAI आधार ऐप के इस्तेमाल को पुश कर सकता है। नए आधार ऐप से क्या है लिंक? आधार के फिजिकल कार्ड पर सिर्फ फोटो और QR कोड देना, कहीं न कहीं नए आधार ऐप से लिंक हो सकता है। UIDAI ने नए आधार ऐप को भी इसी तरह बनाया है कि यूजर को अपनी सारी आधार डिटेल्स किसी के साथ शेयर न करनी पड़े। नए ऐप में यूजर आधार का QR कोड शेयर करके अपने आधार से जुड़े काम कर सकता है। सामने वाला भी उस ऐप के जरिए किसी का भी आधार वेरिफाई कर सकता है। ऐसे में आधार के फिजिकल कार्ड को शेयर करने की जरूरत खत्म हो जाती है। सरकार ने ऐसा इसलिए भी किया है क्योंकि नॉर्मल आधार कार्ड पर मौजूद ज्यादा डिटेल्स का साइबर फ्रॉड जैसे कामों में गलत इस्तेमाल होता था। नया कार्ड बनवाना जरूरी होगा? फिलहाल क्योंकि नए डिजाइन वाले आधार कार्ड को लेकर सरकार की ओर से पुख्ता जानकारी नहीं आई है। ऐसे में सिर्फ खबरों के आधार पर कुछ भी कह पाना संभव नहीं है। हालांकि अगर आप UIDAI का नया आधार ऐप इस्तेमाल कर रहे हैं, तो आपको शायद नया कार्ड न बनवाना पड़े। ऐसा इसलिए क्योंकि इस ऐप के जरिए आप डिजिटल आधार को किसी के साथ भी शेयर कर सकते हैं। इसके साथ ही आधार में किसी तरह के बदलाव या फिर शेयर की जाने वाली जानकारी पर कंट्रोल भी नए UIDAI ऐप के जरिए रखा जा सकता है। ऐसे में हो सकता है कि नए डिजाइन वाला आधार कार्ड सिर्फ उनके लिए हो, जो कि ऐप का इस्तेमाल करने में सक्षम नहीं हैं।

भर्ती के पुराने नियम होंगे खत्म! इस कंपनी में इंसानों से आगे निकले AI एजेंट

डेवलपर्स के लिए टूल बनाने वाली कंपनी StackBlitz ने बड़ा ऐलान किया है. कंपनी ने कहा है कि वह इस साल इंसानों से ज्यादा AI एजेंट्स को काम पर रखेगी. यानी कंपनी की ग्रोथ अब मानव कर्मचारियों से नहीं बल्कि डिजिटल वर्कर्स से होगी. कंपनी के सीईओ का कहना है कि AI एजेंट अब सिर्फ कोडिंग हेल्पर नहीं रहे, बल्कि बिजनेस के एक्टिव योगदानकर्ता बन रहे हैं. यह ट्रेंड आने वाले समय में पूरी सॉफ्टवेयर इंडस्ट्री की हायरिंग सोच बदल सकता है. इससे जॉब मार्केट पर भी गहरा असर पड़ने की संभावना जताई जा रही है. StackBlitz के सीईओ एरिक सिमंस ने साफ कहा है कि कंपनी अब पारंपरिक तरीके से टीम नहीं बढ़ाएगी. इंजीनियर, सेल्स और सपोर्ट स्टाफ जोड़ने के बजाय AI सॉफ्टवेयर एजेंट्स की संख्या बढ़ाई जाएगी. ये एजेंट एक साथ कई काम संभाल सकते हैं और टाइम जोन या काम के घंटों की सीमा में बंधे नहीं होते. कंपनी का मानना है कि डिजिटल एजेंट्स ऑपरेशन को ज्यादा स्केलेबल और तेज बनाते हैं. यह मॉडल लागत घटाने और स्पीड बढ़ाने दोनों में मदद कर सकता है. AI एजेंट सिर्फ कोड नहीं, फैसले भी लेंगे एरिक सिमंस के मुताबिक AI एजेंट भविष्य में यूजर की तरफ से दूसरे एजेंट्स से बात करेंगे. वे कीमतों पर बातचीत, बुकिंग चेक करना और ऑनलाइन राय बनाना जैसे काम भी कर सकेंगे. उनका कहना है कि लोग अपने AI एजेंट की सलाह पर खरीद, रिजर्व और फैसले लेने लगेंगे. यह AI को एक पर्सनल डिजिटल प्रतिनिधि के रूप में स्थापित करता है. यानी AI एजेंट यूजर का एक्सटेंशन बनकर काम करेंगे, सिर्फ टूल नहीं रहेंगे. AI एजेंट इकोसिस्टम के शुरुआती संकेत इस दिशा में शुरुआती उदाहरण भी सामने आ चुके हैं, जैसे ओपनक्लॉ नाम का ओपन सोर्स AI असिस्टेंट. यह व्हाट्सएप, स्लैक और आईमैसेज जैसे प्लेटफॉर्म के भीतर काम कर सकता है और सीमित मानव हस्तक्षेप के साथ एजेंट्स को आपस में समन्वय करने देता है. सिमंस ने सॉफ्टवेयर और SaaS शेयरों में हाल की गिरावट को भी इससे जोड़ा है. उनका मानना है कि जब AI हजारों गुना तेजी से सॉफ्टवेयर बना और बदल सकता है, तो पारंपरिक एक्सपर्ट आधारित मॉडल दबाव में आएंगे. अगर यह प्रयोग सफल रहा, तो कई टेक कंपनियां इसी रास्ते पर चल सकती हैं.

ज्यादा गरम चाय-कॉफी से हो सकता है फूड पाइप को नुकसान, विशेषज्ञों ने बढ़ते कैंसर रिस्क पर किया अलर्ट

क्या आपके दिन की शुरुआत भी कप से निकलती हुई 'गरमा-गरम' भाप वाली चाय या कॉफी के साथ होती है? अगर हां, तो जरा ठहरिए, क्योंकि जिसे आप सुकून का पल समझते हैं, वह असल में आपकी सेहत के लिए एक बड़ी मुसीबत बन सकता है। जी हां, न्यूट्रिशनिस्ट लीमा महाजन ने एक चौंकाने वाला खुलासा किया है। इस आर्टिकल में आप जानेंगे कि कैसे आपकी गरमागरम चीजें पीने की आदत आपको भविष्य में कैंसर के खतरे तक ले जा सकती है। चाय या कॉफी नहीं, तापमान है समस्या अक्सर लोगों को लगता है कि कुछ खास चीजों से ही कैंसर का रिस्क बढ़ता है, लेकिन लीमा महाजन का साफ कहना है कि समस्या चाय, कॉफी या खाने में नहीं, बल्कि उनके तापमान में है। जी हां, बहुत ज्यादा गरम चीजें पीना या खाना ही असली खतरा है। क्या होता है शरीर पर असर? जब हम बहुत ज्यादा गर्म खाना खाते हैं या खौलती हुई चाय पीते हैं, तो इससे हमारा फूड पाइप डैमेज होता है। अगर यह लगातार होता रहे, तो इससे 'इसोफेजस स्क्वैमस सेल कार्सिनोमा' नामक बीमारी हो सकती है, जो एक टाइप का कैंसर है। क्या कहती है रिसर्च? न्यूट्रिशनिस्ट की मानें, तो 'इंटरनेशनल एजेंसी फॉर रिसर्च ऑन कैंसर' (IARC) ने इसे स्पष्ट रूप से ग्रुप 2A कार्सिनोजेनिक की श्रेणी में रखा है। इसका मतलब है कि बहुत ज्यादा गरम चीजों का सेवन कैंसर पैदा करने वाले कारणों में शामिल है। भविष्य के लिए चेतावनी यह बीमारी रातों-रात नहीं होती। ऐसा नहीं है कि आज आपने गरम चाय पी और कल आपको कैंसर हो जाएगा, लेकिन अगर आप अपनी इस आदत को नहीं बदलते हैं और लगातार बहुत गरम चीजों का सेवन करते रहते हैं, तो भविष्य में इसके होने की संभावना बहुत ज्यादा बढ़ जाती है। इसलिए, लीमा महाजन का कहना है कि अपनी चाय को थोड़ा ठंडा होने दें और तभी उसका मजा लें।