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वो स्मार्टफोन जो बने यूज़र्स की मुसीबत — लोगों ने कहा, पैसे बरबाद!

नई दिल्ली दुनिया में भारतीय तकनीक का लोहा माना जाता है। अमेरिका की सिलिकॉन वैली में दुनिया की टॉप कंपनियों में भारतीय हुनर काम करता है। हालांकि स्मार्टफोन मार्केट में भारतीय ब्रैंड वो मुकाम हासिल नहीं कर पाए, जो चीन और अमेरिका की कंपनियों ने किया है। लावा इकलौती है जिसने भारतीय स्मार्टफोन मार्केट में स्वदेशी की पहचान को बचाकर रखा है। पिछले 10 साल में देश में कुछ ऐसे ब्रैंड आए, जिन्होंने दुनिया में भद प‍िटवा दी। लोगों ने भी इन कंपनियों को खूब कोसा क्योंकि सस्ता फोन पाने की उम्मीद में उन्होंने अपने पैसे लगा दिए थे। आज बात कुछ ऐसे स्मार्टफोन्स की, जिन्हें सबसे ‘मनहूस’ कहा जा सकता है। फ्रीडम 251 नोएडा की कंपनी रिंगिंग बेल्स ने साल 2016 में सनसनी मचा दी थी, जब उसने सिर्फ 251 रुपये में फोन लॉन्च किया। नाम था फ्रीडम 251। लॉन्च इवेंट में बड़े नेताओं ने शिरकत की थी, जिससे लोगों का भरोसा जगा। दावा किया गया कि करीब 3 हजार रुपये कीमत वाले फोन को 251 रुपये में बेचा जाएगा। फीचर्स बताए गए कि फोन में डुअल सिम सपोर्ट होगा। 4 इंच का डिस्प्ले मिलेगा। 1 जीबी रैम, 8 जीबी स्टोरेज होगा। फ्रंट-बैक दोनों साइड में कैमरा और 1450 एमएएच बैटरी के साथ फ्रीडम 251 की घोषणा फरवरी महीने में की गई। बुकिंग शुरू हुईं और लोगों ने धड़ाधड़ फोन को बुक भी कराया। लेकिन फ्रीडम 251 को लेकर कहा जाता है कि फोन कभी लोगों तक पहुंचा ही नहीं। कुछ सेट जरूर डिलिवर हुए लेकिन अधिकतम लोगों के हाथ मायूसी ही लगी। उनके 251 रुपये भी लौटाए गए या नहीं, कोई नहीं जानता। ठीक एक साल बाद 2017 में रिंग‍िग बेल्स के डायरेक्टर मोहित गोयल को अरेस्ट कर लिया गया था। ‘फ्रीडम 251’ कभी भारतीय बाजार में आ ही नहीं सका और सस्ते स्मार्टफोन का सपना पूरा नहीं हुआ। इमेज : एमेजॉन से। नमोटेल ‘फ्रीडम 251’ की चर्चाएं चल ही रही थीं कि साल 2016 मई महीने में ‘नमोटेल अच्छे दिन’ नाम से एक और फोन सिर्फ 99 रुपये में लॉन्च किया गया। उसे दुनिया का सबसे सस्ता फोन बताया गया था। उस फोन में भी 4 इंच की स्क्रीन, 1 जीबी रैम, 4 जीबी स्टोरेज, फ्रंट और बैक साइड में 2 कैमरा और 1325 एमएएच की बैटरी ऑफर की गई थी। 99 रुपये का नमोटेल सुर्खियां ताे बटोर गया, लेकिन लोगों की जेबों तक नहीं पहुंचा। इसकी वेबसाइट खोलने पर अलर्ट मिला कि यह डेजरेंस है और आपका डेटा चोरी या हैक हो सकता है। इमेज : नमोटेल के एफबी पेज से। Docoss X1 जयपुर बेस्ड Docoss ने भी साल 2016 में Docoss X1 को बहुत उम्मीदों के साथ पेश किया गया। 888 रुपये कीमत में उसे एक रियल फोन बताया गया। दावा हुआ कि यह पूरी तरह से फंक्शनल एंड्रॉयड स्मार्टफोन है। प्री ऑर्डर भी लिए गए। कंपनी तक एमएमएस के जरिए भी बुकिंग करवा रही थी। और जैसा हर बार होता आया है, लॉन्च की सुर्खियां तो खूब बनी, लेकिन फोन क‍िसी को मिला भी या नहीं, कोई नहीं जानता। फ्रीडम 251 और नमोटेल की तरह Docoss X1 भी भारत के लिए एक मनहूस स्मार्टफोन साबित हुआ जिसने लोगों का भरोसा तोड़ने का काम किया।  

विटामिन-सी की कमी दूर करने के लिए सप्लीमेंट्स लेने का सही तरीका

नई दिल्ली। विटामिन-सी शरीर के लिए काफी जरूरी होता है, लेकिन हमारा शरीर न तो इस विटामिन को खुद बना पाता है और न स्टोर कर पाता है। दरअसल, विटामिन-सी एक वॉटर सॉल्यूबल विटामिन है यानी ये पानी में घुल जाता है और यूरिन के जरिए शरीर से बाहर निकल जाता है। इसलिए अगर डाइट में विटामिन-सी पर ध्यान न दिया जाए, तो शरीर में इसकी कमी हो सकती है। इसकी कमी दूर करने के लिए कई लोग इसके सप्लीमेंट्स भी लेते हैं। अगर आप भी विटामिन-सी की गोलियां लेते हैं, तो आपको इन्हें लेने का सही समय और कुछ जरूरी बातें पता होनी चाहिए, ताकि बेहतर रिजल्ट मिल सके। आइए जानें इस बारे में। विटामिन-सी लेने का सबसे अच्छा समय क्या है? विटामिन-सी एक पानी में घुलने वाला विटामिन है, जिसका मतलब है कि यह शरीर में लंबे समय तक जमा नहीं होता और यूरिन के जरिए बाहर निकल जाता है। इसके अब्जॉर्प्शन को बेहतर बनाने के लिए इन बातों का ध्यान रखें-     सुबह के समय खाने के बाद- विटामिन-सी के सप्लीमेंट्स लेने का सबसे सही समय सुबह का नाश्ता करने के बाद का होता है। खाने के साथ लेने से पेट में एसिडिटी या गैस्ट्रिक परेशानी के रिस्क को कम करता है। विटामिन-सी का अब्जॉर्प्शन छोटी आंत में होता है। इसलिए खाने के साथ इसे लेना फायदेमंद साबित हो सकता है।     दिन के दो भागों में बांटकर- क्योंकि शरीर एक साथ ज्यादा मात्रा में विटामिन-सी को स्टोर नहीं कर पाता, इसलिए अगर आपको एक बड़ी खुराक (जैसे 1000mg) लेनी है, तो इसे दो भागों में बांटकर लेना ज्यादा फायदेमंद हो सकता है। उदाहरण के लिए, 500mg नाश्ते के बाद और 500mg दोपहर के खाने के बाद। इससे शरीर को लगातार विटामिन-सी मिलता रहता है और अब्जॉर्प्शन भी बेहतर होता है।     खाली पेट लेने से बचें- विटामिन-सी में एस्कॉर्बिक एसिड होता है, जो एसिडिक होता है। इसे खाली पेट लेने से पेट में जलन, एसिडिटी या अपच की समस्या हो सकती है। इसलिए, हमेशा इसे कुछ खाने के बाद ही लें। किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?     खुराक पर नजर रखें- विटामिन-सी की ज्यादा खुराक से दस्त, मतली, पेट में ऐंठन और गैस्ट्रिक की समस्या हो सकती है।     कुछ मेडिकल कंडीशन में सावधानी- जिन लोगों को किडनी की समस्या हो या किडनी में स्टोन बनने का इतिहास हो, उन्हें विटामिन-सी की हाई डोज लेने से पहले डॉक्टर से सलाह जरूर लेनी चाहिए, क्योंकि इससे ऑक्सोलेट स्टोन बनने का रिस्क बढ़ सकता है।     दवाओं के साथ इंटरेक्शन- विटामिन-सी कुछ दवाओं जैसे कि ब्लड थिनर, एस्ट्रोजन वाली दवाएं और कुछ प्रकार की कीमोथेरेपी दवाओं के साथ इंटरेक्ट कर सकता है। अगर आप कोई नियमित दवा ले रहे हैं, तो सप्लीमेंट शुरू करने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह लें।  

सुबह खाली पेट बस एक गिलास दालचीनी पानी—शुगर और फैट दोनों रहेंगे कंट्रोल में

सोचिए, रसोई के मसालों के डिब्बे में रखी एक चीज आपके दो सबसे बड़े हेल्थ इशूज का समाधान कर सकती है। जी हां, हम बात कर रहे हैं दालचीनी की। एक ऐसा मसाला जो न सिर्फ आपकी खीर या बिरयानी का स्वाद बढ़ाता है, बल्कि चुपके से आपके शरीर के अंदर कई जादू भी करता है। क्या आप जानते हैं कि रोज सुबह एक गिलास पानी में केवल चुटकी भर दालचीनी मिलाकर पीने से, आप अपने जिद्दी वजन को कम कर सकते हैं और बढ़ते शुगर लेवल पर लगाम लगा सकते हैं? आइए, इस मसाले के कुछ ऐसे फायदे जानते हैं जो आपकी सेहत का कायापलट कर सकते हैं। वजन कम करने में है जादूगर अगर आप अपना वजन कम करना चाहते हैं, तो दालचीनी का पानी आपकी मदद कर सकती है।     मेटाबॉलिज्म को बढ़ाए: दालचीनी आपके शरीर के मेटाबॉलिज्म को तेज करती है। जब मेटाबॉलिज्म तेज होता है, तो शरीर ज्यादा कैलोरी बर्न करता है, जिससे वजन घटाने में मदद मिलती है।     भूख को करे कंट्रोल: यह मसाला भूख और खाने की इच्छा को कंट्रोल करने में मददगार है। इसे पीने से आपका पेट लंबे समय तक भरा हुआ महसूस होता है, और आप अनहेल्दी स्नैक्स खाने से बच जाते हैं।     फैट को पिघलाए: कुछ शोध बताते हैं कि दालचीनी शरीर में फैट जमा होने की प्रक्रिया को धीमा कर सकती है और पहले से जमा चर्बी को पिघलाने में मदद करती है, खासकर पेट के आसपास की चर्बी को। शुगर के मरीजों के लिए रामबाण दालचीनी को डायबिटीज के रोगियों के लिए एंटी-डायबिटिक माना जाता है।     इंसुलिन सेंसिटिविटी में सुधार: दालचीनी शरीर की कोशिकाओं को इंसुलिन के प्रति अधिक संवेदनशील बनाती है। इंसुलिन वह हार्मोन है जो ब्लड शुगर लेवल को कंट्रोल करता है। बेहतर सेंसिटिविटी से शुगर कंट्रोल करना आसान हो जाता है।     ब्लड शुगर कम करे: यह मसाला भोजन के बाद ब्लडस्ट्रीम में ग्लूकोज के प्रवेश को धीमा करने में मदद करता है, जिससे शुगर लेवल अचानक से नहीं बढ़ता।     एंटीऑक्सीडेंट का भंडार: दालचीनी में भरपूर मात्रा में एंटीऑक्सीडेंट्स होते हैं, जो डायबिटीज से जुड़ी जटिलताओं के खतरे को कम करने में भी मदद करते हैं। दालचीनी का पानी सिर्फ वजन और शुगर ही नहीं, बल्कि कई अन्य स्वास्थ्य समस्याओं में भी लाभकारी है:     पाचन तंत्र को मजबूत बनाए: यह पाचन क्रिया को दुरुस्त रखता है। गैस, एसिडिटी और कब्ज जैसी समस्याओं से राहत दिलाने में यह बहुत कारगर है।     दिल को रखे स्वस्थ: दालचीनी खराब कोलेस्ट्रॉल (LDL) को कम करने में मदद करती है, जिससे दिल से जुड़ी बीमारियों का खतरा कम हो जाता है और आपका हृदय स्वस्थ बना रहता है।     इम्युनिटी बढ़ाए: इसमें एंटी-वायरल और एंटी-बैक्टीरियल गुण होते हैं, जो आपकी रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत बनाते हैं और आपको सर्दी-जुकाम जैसे मौसमी संक्रमणों से बचाते हैं। कैसे बनाएं दालचीनी का पानी? इसे बनाना बेहद आसान है और आप इसे अपनी दिनचर्या में आसानी से शामिल कर सकते हैं:     एक गिलास गुनगुना पानी लें। इसमें आधा या एक छोटा चम्मच दालचीनी का पाउडर मिलाएं। आप चाहें तो रात भर पानी में एक इंच दालचीनी की स्टिक भिगोकर, सुबह उस पानी को हल्का गुनगुना करके भी पी सकते हैं।     स्वाद के लिए आप इसमें थोड़ा सा नींबू का रस या एक चुटकी शहद (अगर शुगर के मरीज नहीं हैं तो) भी मिला सकते हैं। बता दें, इस जादुई ड्रिंक का सेवन सुबह खाली पेट करना सबसे ज्यादा फायदेमंद माना जाता है।  

GitHub पर भारत का जलवा: कोडिंग में अमेरिका को पछाड़ा, बने नंबर वन डेवलपर हब

भारत ने एक खास ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। GitHub की ऑक्टोवर्स 2025 रिपोर्ट के मुताबिक, भारत पहली बार अमेरिका को पीछे छोड़ते हुए दुनिया का सबसे बड़ा ओपन-सोर्स योगदान देने वाला देश बन गया है। यह सिर्फ एक तकनीकी उपलब्धि नहीं, बल्कि इस बात का सबूत है कि भारत अब ग्लोबल स्तर पर कोडिंग और सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट का हब बनता जा रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक 2025 में अकेले भारत से 50 लाख से ज्यादा नए डेवलपर्स GitHub से जुड़े। इससे साफ होता है कि देश में टेक्नोलॉजी के प्रति युवाओं की रुचि और स्किल्स कितनी तेजी से बढ़ रहे हैं। GitHub क्या है? भारत की उपलब्धी के बारे में जानने से पहले बता दें कि GitHub एक ऑनलाइन प्लेटफॉर्म है जहां प्रोग्रामर्स और डेवलपर्स कोड लिखते, शेयर करते हैं और साथ मिलकर सॉफ्टवेयर बनाते हैं। दरअसल यह एक ओपन-सोर्स सिस्टम पर काम करता है, जहां कोई भी कोड देख सकता है, सुधार सकता है और उसमें अपना योगदान दे सकता है। यह दुनियाभर के डेवलपर्स का सबसे बड़ा कम्युनिटी प्लेटफॉर्म है। तेजी से बढ़ रहा भारत GitHub की रिपोर्ट के मुताबिक, 2025 में भारत से 5.2 मिलियन यानी कि 52 लाख नए डेवलपर्स जुड़े। यह GitHub पर बनाए गए सभी नए अकाउंट्स का करीब 14% हिस्सा है। यानी हर सात में से एक नया डेवलपर भारत से है। वहीं अगर इसकी 2020 से तुलना करें, तो भारत की ग्रोथ चार गुना से ज्यादा हो चुकी है। रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत अब GitHub पर पब्लिक और ओपन-सोर्स रिपोजिटरीज में सबसे ज्यादा योगदान करने वाला देश बन गया है। यह बदलाव दिखाता है कि भारतीय डेवलपर्स अब सिर्फ अपने देश में ही नहीं बल्कि दुनियाभर के तकनीकी विकास का हिस्सा बन चुके हैं। उज्ज्वल है भविष्य GitHub ने अपनी रिपोर्ट में अनुमान लगाया है कि 2030 तक भारत में 5.7 करोड़ से ज्यादा डेवलपर्स होंगे। यानी दुनिया में बनने वाले हर तीन में से एक नया डेवलपर भारत से होगा। यह आंकड़ा भारत को सॉफ्टवेयर इनोवेशन और कोडिंग के भविष्य का लीडर बना देगा। हालांकि, योगदान के मामले में अमेरिका अभी भी एक्टिविटी लेवल में आगे है। हालांकि ऐसा अनुमान है कि भारत की बढ़ती संख्या और ताकत आने वाले सालों में इस फर्क को कम कर सकती है। AI से बढ़ी रफ्तार भारत में डेवलपर्स की यह तेजी AI टूल्स, इंटरनेट एक्सेस और सरकारी प्रोग्राम्स की वजह से संभव हुई है। रिपोर्ट बताती है कि 80% नए डेवलपर्स GitHub Copilot जैसे AI टूल्स का इस्तेमाल अपने पहले ही हफ्ते में करने लगते हैं। इससे कोडिंग सीखना आसान और तेज हो गया है। इसके अलावा सस्ते इंटरनेट, डिजिटल इंडिया जैसे अभियानों और नई टेक्नोलॉजी अपनाने की मानसिकता ने भारत को ग्लोबल डेवलपर हब बना दिया है।

ड्राइवरों के लिए खुशखबरी! बस इंस्टॉल करें ये ऐप और चालान से पाएँ छुटकारा

आजकल ऑनलाइन पेमेंट के चलन की वजह से लोगों ने पॉकेट में पर्स रखना बंद कर दिया है। इसकी वजह से ड्राइविंग करते समय साथ में ड्राइविंग लाइसेंस और आरसी रखना मुश्किल हो जाता है। अगर आप फोन में आरसी और डीएल की फोटो क्लिक करके रख भी लें, तो पुलिस उसे वैलिड नहीं मानती। ऐसे में आपके काम आती है एक सरकारी ऐप, जिसका नाम mParivahan है। अगर आप इस ऐप में अपना डीएल और आरसी रखते हैं, तो पुलिस भी आपके डीएल और आरसी को एक वैलिड डॉक्यूमेंट की तरह लेती है। चलिए फिर आज आपको बताते हैं कि किस तरह से आप mParivahan ऐप में अपना DL और RC स्टोर रख सकते हैं। ताकि कभी इस वजह से आपका चालान न कटे। mParivahan ऐप में अकाउंट बनाएं mParivahan ऐप में DL और RC रखने के लिए जरूरी है कि वह ऐप आपके फोन में हो और उस ऐप पर आपका अकाउंट हो। इसके लिए प्ले स्टोर या ऐप स्टोर से mParivahan ऐप को डाउनलोड कर लें।     इसके बाद ऐप पर अपना अकाउंट बना लें। इसके लिए आपको साइन-अप ऑपशन पर टैप करना होगा।     अकाउंट बनाते समय आपसे कुछ डिटेल्स मांगी जाएंगी जैसे कि आपका राज्य, मोबाइल नंबर, RC या DL के अनुसार लिखा नाम और mPin। इसके बाद आपके नंबर पर एक OTP आएगा।     OTP दर्ज करते के बाद आप अपने अकाउंट में लॉग-इन हो जाएंगे। RC ऐसे जोड़ें mParivahan ऐप पर आपको My Virtual RC और My Virtual DL का ऑप्शन नजर आएगा। इन पर क्लिक करके ही आपको अपना DL और RC ऐप में जोड़ना होगा।     My Virtual RC पर टैप करते ही आप से कुछ डिटेल्स मांगी जाएंगी। यहां अपना गाड़ी का नंबर , चेसिस नंबर और इंजन नंबर बताना होगा।     इसके बाद आपके नंबर पर एक OTP आएगा। वेरिफिकेशन के बाद आपका RC, mParivahan ऐप में जुड़ जाएगा।     जब आप इस ऐप में जोड़े गए RC को देखेंगे, तो RC की डिटेल के साथ एक QR कोड दिखाई देगा। इसे स्कैन ट्रैफिक पुलिस वाले आपकी RC को जांच सकते हैं। DL ऐसे जोड़ें     My Virtual DL पर टैप करें।     अपना ड्राइविंग लाइसेंस नंबर और डेट ऑफ बर्थ दर्ज करें।     इसके बाद आपको अपने नंबर पर एक OTP मिलेगा। उसे वेरिफाई करने के बाद आपका वर्चुअल डीएल ऐप में दिखने लग जाएगा।  

स्ट्रेच मार्क्स पर नारियल तेल का असर: मिथ या सच? जानिए विशेषज्ञ की राय

क्या आप भी उन लोगों में से हैं जो स्ट्रेच मार्क्स से छुटकारा पाने के लिए नारियल तेल का इस्तेमाल करते हैं? अगर हां, तो यह आर्टिकल आपके लिए ही है! कई लोगों का मानना है कि नारियल तेल लगाने से स्ट्रेच मार्क्स पूरी तरह से खत्म हो जाते हैं, लेकिन डर्मेटोलॉजिस्ट इस बारे में कुछ और ही कहते हैं। आइए, जानते हैं सच्चाई क्या है। क्यों होते हैं स्ट्रेच मार्क्स? स्ट्रेच मार्क्स तब होते हैं जब हमारी त्वचा बहुत तेजी से खिंचती है। इससे त्वचा की अंदरूनी परत थोड़ी फट जाती है। ऐसा अक्सर प्रेग्नेंसी, जवानी  और भारी वजन उठाने के दौरान होता है। नारियल तेल लगाने से क्या फायदा? नारियल तेल हमारी त्वचा को नमी देता है, उसे मुलायम बनाता है और हाइड्रेट रखता है। यह त्वचा को पोषण देता है, लेकिन यह स्ट्रेच मार्क्स को पूरी तरह से खत्म नहीं कर सकता क्योंकि ये त्वचा की अंदरूनी परत में बनते हैं। नारियल तेल सिर्फ स्किन को हेल्दी रखने में मदद करता है ताकि नए स्ट्रेच मार्क्स न बनें। क्या है स्ट्रेच मार्क्स का असली इलाज? डर्मेटोलॉजिस्ट का कहना है कि अगर आप स्ट्रेच मार्क्स से परेशान हैं, तो डर्मेटोलॉजिस्ट से सलाह लेना सबसे अच्छा है। इसके इलाज के लिए कुछ खास तकनीके अपनाई जा सकती हैं:     पीआरपी के साथ माइक्रोनीडलिंग : यह इलाज त्वचा की मरम्मत में मदद करता है।     फ्रैक्शनल लेजर्स : CO2 और एर्बियम ग्लास लेजर जैसे लेजर्स स्ट्रेच मार्क्स को हल्का करने में मदद करते हैं।     मॉर्फियस 8 : यह भी एक आधुनिक उपचार है जो स्ट्रेच मार्क्स को कम करने में असरदार है। कुछ डर्मेटोलॉजिस्ट खास तरह की क्रीम भी देते हैं, जो स्ट्रेच मार्क्स को हल्का कर सकती हैं, लेकिन पूरी तरह से गायब नहीं करती। याद रखें, आप जितनी जल्दी इनका इलाज शुरू करेंगे, रिजल्ट उतना ही बेहतर होगा।  

इन यूजफुल एप्स की मदद से बच्चे रहेंगे सेफ

पैरेंट्स को आजकल के असुरक्षित माहौल में हर वक्त बच्चों की चिंता लगी रहती है। बच्चों को लेकर पैरेंट्स हमेशा फिक्रमंद रहते हैं। वह घर की जिम्मेदारियों के बीच भी बच्चों की अच्छी परवरिश करने की पूरी कोशिश करते हैं। लेकिन फिर भी उनकी सुरक्षा और व्यवहार को लेकर परेशान रहते हैं। कई बार बच्चे पैरेंट्स से बातें छिपाते हैं, जिनका पता होना बहुत जरूरी होता है। लेकिन पैरेंट्स चाहें तो टेक्नोलॉजी का सहारा लेकर बच्चों को लेकर टेंशनफ्री हो सकते हैं।   लाइफ 360-फुट प्रिंट:- यह दोनों ऐसे एप हैं, जिन के जरिए आप अपने बच्चों की गतिविधियों पर नजर रख सकती हैं। लाइफ 360 के जरिए आप जीपीआरएस की मदद से एक ग्रुप बना सकती हैं, जिसमें आप अपने बच्चों को जोड़ कर एक दायरा निर्धारित कर सकती हैं। जैसे ही आपका बच्चा आपके द्वारा निर्धारित दायरे से बाहर जाता है या जब वो उस दायरे में वापस आता है, तो एक मैसेज आप के फोन पर आ जाता है, जिससे आपके लिए जानना आसान हो जाता है कि बच्चा कहां है। इसी तरह फुट प्रिंट भी एक ऐसा एप है, जिससे आप बच्चे की लोकेशन ट्रैक डाउन कर फैमिली और फ्रेंड्स के साथ बांट सकती हैं। इस तरह आप बच्चे पर आसानी से नजर रख सकती हैं। इस एप के जरिए आप पता लगा सकती हैं कि आप का बच्चा इस वक्त कहां है और पहले कहां था?   एंटी सोशल:- अगर आप का बच्चा दिन भर इंटरनेट ब्राउजिंग करता है और आप उसकी इस आदत से परेशान हो चुकी हैं, तो आप इस एप का इस्तेमाल कर सकती हैं। इस एप की मदद से आप एक समय तय कर सकती हैं। जिसके बाद इंटरनेट अपने आप बंद हो जाएगा। इस एप का इस्तेमाल कर आप अपने बच्चे की आदत में सुधार ला सकती हैं और चिंता मुक्त हो सकती हैं।   इग्नोर नो मोर:- अगर आप अपने बच्चे की फोन न उठाने की आदत से परेशान हैं, तो आप इस एप का इस्तेमाल कर सकती हैं। अगर आपका बच्चा आप का फोन नहीं उठाएगा, तो इस एप की वजह से उसका फोन लॉक हो जाएगा और फोन को दोबारा से अनलॉक करने के लिए बच्चे को आपके सेलेक्टेड नंबर्स पर फोन करना होगा। इस एप के जरिए आप बच्चों की फोन न उठाने की आदत को सुधार सकती हैं।   टीनसेफ:- यह एक तरह से सर्विलॉन्स एप है। यह आपको अपने बच्चों के मोबाइल पर नजर रखने में मदद करता है। इसकी मदद से आप बिना बच्चों की जानकारी में आए, उनके फोन पर नजर रख सकती हैं। यह एप बच्चे के फोन पर आने-जाने वाले मैसेज पढ़ने में मदद करता है। इस एप की मदद से आप डिलीट मैसेज भी पढ़ सकती हैं। आप उनके कॉल लॉग, फेसबुक और इंस्टाग्राम फीड्स पर भी पूरी नजर रख सकती हैं। इस एप के जीपीआरएस की मदद से बच्चे की पल-पल की हरकतों पर भी नजर रख सकती हैं।  

ऐसे दूर करें कोहनी और घुटनों के कालेपन को

जरा सोचिए! कैसा होगा अगर आपका चेहरा तो चमक रहा है लेकिन आपकी कोहनी और घुटने कालेपन से आपकी खूबसूरती में धब्बा लगा रहे हैं। ऐसे में न क्रीम काम आती है और न ही स्क्राब। कोहनी और घुटने की कालिमा इतनी आसानी से कहां जाती है। अब फिक्र न करें बस कुछ घरेलू उपाय और आपकी ये प्रॉब्लम हमेशा के लिए दूर हो जाएगी। नींबू और मलाई का पेस्ट: घुटने और कोहनी की सफाई के लिए सबसे लोकप्रिय घरेलू उपाय है नींबू और मलाई का पेस्ट।। नींबू को छील कर उसमें मलाई मिला लें, नींबू रस से त्वचा की गंदगी दूर होती है और आपकी कोहनी का कालापन धीरे-धीरे दूर हो जाएगा। शहद: घुटने और कोहनी की सफाई के लिए शहद एक अच्छात विकल्प है। ऐसे में आप शहद का उपयोग कर सकते हैं। शहद त्वबचा को नरम रखता है, जो बहुत लाभ पहुंचाता है। नारियल का तेल: नारियल का तेल मॉइस्चराइजिंग गुण से समृद्ध होता है और त्वचा के लिए एक अच्छा टॉनिक भी है। नहाने से पहले अपने पूरे शरीर और कोहनी एवं घुटनों पर नारियल तेल लगाएं। एलोवेरा: एलोवेरा भी घुटने और कोहनी की सफाई के लिए लिए एक अच्छाल विकल्पा है, काले पड़े घुटनों और कोहनी पर नियमित रूप से इसके जैल का उपयोग करने से त्वबचा के दाग-धब्बेप भी साफ होते है। स्क्ररबर: स्क्रेबर मृत त्वचा को हटाने में काफी प्रभावशाली होता है। नहाते समय झांवें को गीला करके उससे कोहनी और घुटने की सफाई करें।  

कोलेस्ट्रॉल क्या है और शरीर में इसकी क्या भूमिका होती है?

जब भी कोलेस्ट्रोल का नाम आता है तो हम सोचते हैं कि इसका वास्ता दिल से होता है और ये दिल को नुकसान भी पहुंचाता है। लेकिन कोलेस्ट्रोल हमेशा ही बुरा नहीं होता बल्कि एक निर्धारित मात्रा में कोलेस्ट्रोल होना बेहद जरूरी है। जानिए कैसे आपकी सेहत में कोलेस्ट्रोल असर करता है। कोलेस्ट्रोल वैक्स जैसा एक तत्व होता है, जो हमेशा बुरा नहीं होता। शरीर को सामान रूप से काम करने और इसके सिस्टम की बायोकेमिकल प्रक्रियाओं के लिए अच्छे कोलेस्ट्रॉल की हम सबको जरूरत होती है। अच्छा कोलेस्ट्रॉल है-हाई डेंसिटी लीपोप्रोटीन यानी एचडीएल और बुरा कोलेस्ट्रॉल है-लो डेंसिटी लीपोप्रोटीन यानी एलडीएल, ये दोनों ही शरीर में बनते हैं। एलडीएल कोलेस्ट्रॉल बुरा होता है क्योंकि यह प्लाक बनाता है, एचडीएल कोलेस्ट्रॉल अच्छा होता है क्योंकि यह बुरे कोलेस्ट्रॉल से लड़ता है और इसे हटाता है। खून में एलडीएल कोलेस्ट्रॉल की मात्रा का बढ़ना एक खतरनाक स्थिति होती है क्योंकि इसका परिणाम स्ट्रोक और हार्ट अटैक के रूप में सामने आ सकता है। बुरे कोलेस्ट्रॉल को कम करने के लिए खाने में इसकी मात्रा कम करें और अच्छे कोलेस्ट्रॉल की मात्रा बढ़ाएं। शरीर में एचडीएल कोलेस्ट्रॉल बढ़ाने का सबसे अच्छा तरीका है शारीरिक व्यायाम करना। तो अपने जीवनशैली में बदलाव लाएं-शारीरिक सक्रियता बढ़ाएं, खाने में सैचुरेटेड फैट और जंक फूड की मात्रा घटाएं-इससे आपका दिल स्वस्थ रहेगा।  

ड्रायर कर रहा है खटखट? अपनाएं ये 5 टिप्स और मशीन फिर से चल पड़ेगी स्मूदली

वॉशिंग मशीन का इस्तेमाल करने से काफी सहूलियत हो जाती है। टाइम भी बचता है और मेहनत भी। सेमी ऑटोमेटिक और फुल ऑटोमेटिक वॉशिंग मशीन के साथ ड्रायर भी आता है, जो कपड़े सुखाता है। लेकिन कभी-कभी इसमें समस्या आ जाती है। जैसे ड्रायर खटपट करता है और घूमता नहीं। इससे बहुत परेशानी होती है। कपड़े अच्छे से नहीं सूखते, शोर बहुत होता है और मशीन खराब हो सकती है। ड्रायर का ड्रम घूमना बंद हो जाए या धीमा हो जाए, तो कपड़े गीले रह जाते हैं। बिजली का बिल भी ज्यादा आता है क्योंकि मशीन ज्यादा लोड लेती है। लेकिन आप चाहें तो इस खटपट की आवाज से मुक्ति पा सकते हैं और खराब पड़े ड्रायर को ठीक कर सकते हैं। बेयरिंग चेक करें कूल ब्लू की रिपोर्ट बताती है कि अगर स्पिन करते समय खटखट की आवाज आ रही है तो बेयरिंग खराब हो सकते हैं। बेयरिंग मशीन के ड्रम को सहारा देते हैं। खाली ड्रम को हाथ से घुमाकर देखें। अगर आसानी से घूमता है तो बेयरिंग ठीक हैं। अगर ड्रम हिलता है या जंग लगा महसूस होता है तो बेयरिंग बदलने का समय है। वारंटी में है तो सप्लायर को फोन करें। वे मुफ्त ठीक कर देंगे। शॉक एब्जॉर्बर चेक करें शॉक एब्जॉर्बर और स्प्रिंग कमजोर हो जाएं तो ड्रम ज्यादा हिलता है। ड्रम को आगे-पीछे हिलाकर देखें। अगर आवाज आए तो ये खराब हैं। इन्हें बदलकर समस्या ठीक हो जाएगी। फिल्टर साफ करें टिकटिक की आवाज अक्सर फिल्टर से आती है। जेब में छोड़ी बटन या हेयर क्लिप ड्रम में चली जाती हैं। हर कुछ महीने में फिल्टर साफ करें। इससे आवाज बंद हो जाएगी। वॉटर हैमर अरेस्टर लगाएं पानी की पाइप से आवाज या कंपन आ रहा है तो पाइप में हवा ज्यादा है। इसे वॉटर हैमर कहते हैं। वॉटर हैमर अरेस्टर खरीदें। पहले मैन वाल्व बंद करें। मशीन का पानी बंद कर फिर खोलें। टी-यूनिट से अरेस्टर लगाएं। टी-यूनिट पर सीलिंग टेप लगाएं। सेफ्टी बोल्ट हटाकर देखें जब आप नई मशीन खरीदते हैं तो इसमें सेफ्टी के लिए बोल्ट लगे आते हैं. यदि इन्हें नहीं हटाया जाता है तो वॉशिंग मशीन स्पिन करते हुए जोर-जोर से हिलने लगती है। इसलिए जरूरी है कि पहले ही यूजर मैनुअल को ध्यान से पढ़ते हुए इसके बोल्ट निकाल लें। बता दें कि ऐसा बार-बार नहीं करना पड़ेगा। आप जब मशीन खरीदकर लाएं और इसे इंस्टॉल करें, तभी ही ये काम कर लें। मोटर में हो सकती है खराबी अगर ड्रायर का ड्रम बिल्कुल नहीं घूमता, लेकिन मशीन चालू होती है, तो मोटर में दिक्कत हो सकती है। पुरानी मशीनों में मोटर के ब्रश घिस जाते हैं। इससे मोटर चलती है लेकिन ड्रम को नहीं घुमाती। मशीन बंद करके पीछे का पैनल खोलें और बेल्ट देखें। नई बेल्ट सस्ती मिलती है। ब्रश चेक करने के लिए मोटर निकालें। ब्रश छोटे होते हैं, घिसे हों तो नए लगाएं।