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Sam Altman का बड़ा कदम: OpenAI रोबोटिक्स में ऐपल के Ex-इंप्लॉइज और ATLAS के साथ

नई दिल्ली OpenAI ने हाल ही में अपना पहला Agentic AI ब्राउजर ATLAS लॉन्च किया. इसके तुरंत बाद गूगल के शेयर गिरे और बताया गया कि 150 बिलियन डॉलर्स का नुकसान हो गया. लेकिन असली कहानी सिर्फ ब्राउजर की नहीं है, बल्कि इससे कहीं आगे की है. OpenAI एक ऐसा मार्केट कैप्चर करने की तैयारी में है जो फिलहाल एग्जिस्ट ही नहीं करता है. Agentic AI अभी भी शुरुआती स्टेज में है, लेकिन सैम ऑल्टमैन अगले कुछ सालों में इस स्पेस को कैप्चर कर लेंगे और गूगल फिर से पिछड़ सकता है.  लगभग 4 साल पहले जब ChatGPT शुरू हुआ था तब हमने आपको बताया था कि कैसे ये कंपनी गूगल को टक्कर देगी और मोनॉपली तोड़ेगी. अभी कमोबेश वैसा हो चुका है. गूगल सर्च में लगाार गिरावट देखी जा रही है और कंपनी को भारी नुकसान भी हो रहा है. लोगों की डिपेंडेंसी गूगल पर कम हो चुकी है,  Agentic AI – कंप्यूटर खुद से करेगा सबकुछ ATLAS ब्राउजर Google Chrome वाले तमाम फीचर्स देता है, लेकिन साथ ही इसमें दिया गया ऐसिस्टेंट आपके कमांड पर खुद से काम करता है. निश्चित तौर पर ये ब्राउजर गूगल क्रोम को टक्कर देगा.  ATLAS लॉन्च के दूसरे दिन ही OpenAI ने ऐलान किया कि उन्होंने Apple Shortcut बनाने वाली टीम को खरीद लिया यानी उनका अधिग्रहण कर लिया. दरअसल जिस टीम ने ऐपल का बड़ा ऑटोमेशन ऐप Shortcut बनाया था अब वो OpenAI के पास है. इस टीम ने सबसे पहले Workflow बनाया था जिसके बाद ऐपल ने इस टीम को खरीदा और उनसे Shortcut ऑटोमेशन बनवाया था.  मैकबुक में ऑटोमेशन का डीप इंटीग्रेशन करती है Sky टीम  ऐपल की वो टीम जिन्होंने 'शॉर्टकट' बनाया था उन्होंने पहले ही ऐपल छोड़ दिया था. यही टीम SKY AI चला रही थी. Sky की टीम AI पावर्ड नैचुरल लैंगवेज इंटरफेस पर काम कर रही थी. दरअसल ये इंटरफेस भी ऐपल के मैक कंप्यूटर्स के लिए है जो डेस्कटॉप पर आपके एजेंट की तरह काम करता है और यूजर्स इसके जरिए कोडिंग से प्लानिंग तक कर सकते हैं.  जैसे ChatGPT जैसा टूल वेब पर काम करता है उसी तरह Sky मैकबुक में नेटिव लेवल पर काम करता है और बिना यूजर के इंटरवेंशन के खुद से टास्क कंपलीट करता है. उदाहरण के तौर पर आप मैकबुक से सिर्फ Sky के जरिए कोई भी टास्क परफॉर्म करा सकते हैं.  खुद से काम करेगा कंप्यूटर  ये पूरा खेल ऑटोमेशन का है. यानी अब तक कंप्यूटर को आप चलाते हैं, लेकिन फ्यूचर में कंप्यूटर खुद से सबकुछ करेगा आपको बस कमांड देना है. क्या कम्प्यूटिंग का मॉडल वाकई बदलने वाला है? तीन दशक तक हमारा रिश्ता कंप्यूटर से एक ही तरह का रहा. हम क्लिक करते हैं, टाइप करते हैं, और सिस्टम उसका जवाब देता है. Open AI उस व्यवस्था को उलटने की कोशिश कर रहा है. जहां इंसान सिर्फ बताता है कि उसे क्या चाहिए, और सिस्टम खुद सबकुछ संभालता है. यह बदलाव जितना तकनीकी है, उतना ही प्रैक्टिकल भी, क्योंकि डिजिटल दुनिया में समय, ध्यान और नेविगेशन से जुड़ी थकान एक प्रॉब्लम बन चुकी है.  ATLAS और SKY मिल करेंगे धमाल  ATLAS ब्राउजर लॉन्च हो ही चुका है और अब SKY की टीम यानी 12 पूर्व ऐपल इंप्लॉइज भी अब OpenAI के पास है. ओपनएआई ने SKY को इसलिए एक्वायर किया है ताकि ChatGPT जैसे टूल्स सिर्फ चैटबॉट न रहें, बल्कि आपका कंप्यूटर एजेंट की तरह सारे काम खुद कर सके. ओपनएआई का मकसद है, AI को आपके OS, ऐप्स, ब्राउज़र और फाइल्स के अंदर गहराई से इंटीग्रेट करना ताकि आप कोई भी टास्क कहें और AI उसे अंजाम दे दे. Sky टीम, जो ऑटोमेशन में एक्सपर्ट है, अब OpenAI के साथ मिलकर अगले जनरेशन का कंप्यूटिंग मॉडल तैयार कर रही है.  रेस में OpenAI के पीछे क्यों दिख रहा Google? AI रेस में कुछ समय तक के लिए गूगल पिछड़ जरूर गया था, लेकिन अब तेजी से कैचअप कर रहा है. हालांकि अब भी देखें तो ऐसा लगता है कि गूगल लगतार दूसरी AI कंपनियां को टक्कर दे रही हैं जिनमे से एक बड़ा नाम Perplexity का भी है. हाल ही में Perplexity ने Comet एजेंटिक ब्राउजर लॉन्च किया था और तुरंत बाद गूगल ने भी क्रोम ब्राउजर में ऐसिस्टेंट दे दिया. अब मार्केट में OpenAI का ATLAS आ गया है और इसका पूरा नुकसान Google Chrome को होगा. क्योंकि माइक्रोसॉफ्ट ने भी एजेंटिक AI ब्राउजर लॉन्च किया है जो सीधी टक्कर गूगल को ही देगा.  Open AI में माइक्रोसॉफ्ट ने भी काफी निवेश किया है, इसलिए गूगल के लिए ये पूरा डेवेलपमेंट परेशानी का सबब बन सकता है. इसलिए अगर आपका ऐसा लगता है कि गूगल की मोनोपली कोई तोड़ नहीं सकता तो गलत हैं. गूगल की मोनॉपली ऑलरेडी कई टेक कंपनियां तोड़ रही हैं.  दो साल पहले तक कोई ये नहीं सोच रहा था कि गूगल सर्च को कोई टक्कर दे ही नहीं सकता. लेकिन अब सबकुछ बदल चुका है और गूगल सर्च का ट्रैफिक हर दिन गिर रहा है. अब ये देखना दिलचस्प होगा कि एजेंटिक AI की रेस में गूगल दूसरों से आगे निकलने के लिए क्या बड़ा करता है. 

स्मार्टवॉच बनी जीवनरक्षक: हादसे के बाद खुद बुलाई एंबुलेंस, पिता की बची जान

इस बात में तो दोराय नहीं कि टेक्नोलॉजी हमारी जिंदगी को आसान बनाती है लेकिन कभी-कभी यह जीवनरक्षक का काम भी कर सकती है। दरअसल ऐसा ही एक दावा सोशल मीडिया साइट X पर किया गया है, जिसमें बताया गया है कि ऐपल वॉच ने एक्सीडेंट में बुरी तरह से घायल एक शख्स की जान बचा ली। X पर किए गए पोस्ट के अनुसार सड़क दुर्घटना में घायल जब वह शख्स बेहोश पड़ा था, तो उसकी कलाई पर बंधी स्मार्टवॉच ने संजीवनी की तरह उसकी जान बचा ली। चलिए डिटेल में जानते हैं कि क्या रहा पूरा मामला? स्मार्चवॉच बनी संजीवनी X पर किए गए पोस्ट के अनुसार एक शख्स को एक्सीडेंट के बाद उसकी स्मार्टवॉच के खास फीचर्स की मदद से बचा लिया गया। जिस समय सड़क पर घायल पड़े उस शख्स के पास कोई नहीं था, तो ऐपल वॉच के फॉल डिटेक्शन फीचर ने दुर्घटना की सूचना घायल शख्स के परिवार वालों और इमरजेंसी सर्विस तक पहुंचाई। इसके बाद वॉच ने ही इमरजेंसी सर्विस को दुर्घटना की सटीक लोकेशन भी शेयर की। इसके बाद स्मार्टवॉच ने इमरजेंसी कॉन्टैक्ट लिस्ट में शामिल शख्स के बेटे को भी अलर्ट मैसेज भेजा। पोस्ट के अनुसार इस मैसेज में लिखा था कि “आपके पिता को एक्सीडेंट हुआ है, मैंने एंबुलेंस बुलाई है।" इसके बाद जब लड़का एक्सीडेंट की लोकेशन पर पहुंचा, तो उसके पिता को पहले ही अस्पतासल पहुंचाया जा चुका था। समय पर इलाज मिल जाने की वजह से उस शख्स की जान बच गई। Apple वॉच के खास फीचर्स दुनिया की टॉप स्मार्टवॉच में से एक ऐपल वॉच में इस तरह के कई इमरजेंसी फीचर्स आते हैं जो मुसीबत के समय में जान बचा सकते हैं। फॉल डिटेक्शन और क्रैश डिटेक्शन जैसे फीचर इन्हीं में से एक है। यह फीचर इस बात का पता लगा सकता है कि कब आप दुर्घटना के शिकार हुए हैं या गिरे हैं। इसके बाद ऐपल वॉच इस चीज को मॉनिटर करती है कि आपने किसी तरह की मूवमेंट की है या नहीं। साथ ही वह आपके दिल की धड़कन और ब्लड ऑक्सीजन आदि के जरिए शरीर के वाइटल साइन चेक करती है। इन तमाम फैक्टर्स के आधार पर वॉच आपको खतरे में पाती है, तो Emergency SOS फीचर एक्टिवेट होता है। इसके बाद लोकल अथॉरिटीज और इमरजेंसी कॉन्टैक्ट्स को अलर्ट भेजा जाता है। इसके लिए यूजर को वॉच और फोन में इमरजेंसी कॉन्टैक्ट्स को सेव करना पड़ता है। पहले भी फरिश्ता बनी है ऐपल वॉच यह पहला ऐसा मामसला नहीं है जब ऐपल वॉच ने किसी की जान बचाई हो। हाल ही में भारत में ही ऐसे दो मामले सामने आए थे जहां दिल की धड़कन में किसी तरह की अनियमितता होन के चलते वॉच ने यूजर को अलर्ट किया और समय रहते डॉक्टर की मदद लेने की सलाह दी। इसी तरह विदेशों में भी ऐपल वॉच द्वारा जान बचाने के कई मामले सामने आए हैं और कुछ को ऐपल अपने लॉन्च इवेंट में दुनिया भर के सामने रख भी चुका है।

उच्च रक्तचाप वालों के लिए डाइट अलर्ट: क्या न खाएँ और क्यों?

दुनियाभर में हाई ब्लड प्रेशर के मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है. वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन (WHO) के आंकड़ों के अनुसार करीब हर 4 में से 1 व्यक्ति हाई बीपी की समस्या से जूझ रहा है. ब्लड प्रेशर बढ़ने पर हार्ट पर दबाव बढ़ जाता है, जिससे हार्ट अटैक, स्ट्रोक और किडनी डैमेज का खतरा बढ़ सकता है. यह समस्या सिर्फ उम्रदराज़ लोगों तक सीमित नहीं है, कम उम्र में भी हाई बीपी के केस बढ़ रहे हैं. खासकर गलत डाइट, तनाव, कम नींद, मोटापा और एक्सरसाइज की कमी इसके प्रमुख कारण बनते हैं. हाई ब्लड प्रेशर के खास कारणों में खानपान बहुत बड़ा फैक्टर है. ऐसे में हाई बीपी वालों के लिए डाइट कंट्रोल करना सबसे जरूरी कदम है. सही खानपान से दवा की जरूरत भी कम हो सकती है और ब्लड प्रेशर को बैलेंस रखने में आसानी होती है. खाना अगर बार-बार बाहर का, जंक बेस्ड और इंस्टेंट फूड वाला हो तो शरीर में सोडियम और खराब कोलेस्ट्रॉल बढ़ता है, जिससे बीपी तेजी से ऊपर जाता है. इसलिए हाई बीपी वाले मरीजों को खानपान का ध्यान रखना चाहिए हाई बीपी के मरीजों को कौन सी चीजें नहीं खानी चाहिए? दिल्ली एमसीडी में डॉ. अजय कुमार बताते हैं कि हाई बीपी वाले लोगों को सबसे पहले ज्यादा नमकीन चीजों से दूरी बनाने की जरूरत होती है. चिप्स, नमकीन स्नैक्स, अचार, पापड़, प्रोसेस्ड मीट, इंस्टेंट नूडल्स, और पैक्ड सूप जैसे आइटम्स में सोडियम की मात्रा बहुत अधिक होती है. ऐसे फूड ब्लड वेसल्स को सख्त करते हैं और बीपी को तेजी से ऊपर ले जाते हैं. साथ ही, ज्यादा तली-भुनी चीजें, बेकरी प्रोडक्ट्स, मैदा बेस्ड स्नैक्स और हाई शुगर वाली मिठाइयां भी हार्ट पर भार बढ़ाती हैं. रेड मीट और ट्रांस फैट्स वाले फास्ट फूड का नियमित सेवन भी नुकसानदायक है. कार्बोनेटेड ड्रिंक्स, पिज्जा, बर्गर, फ्रेंच फ्राइज जैसे फूड भी हाई बीपी वालों के लिए गलत विकल्प हैं. ऐसे में जितना हो सके, फ्रेश और लो-सोडियम भोजन को प्राथमिकता देना जरूरी है. हाई बीपी वाले क्या खाएं? कम नमक वाला खाना लें. ताजे फल और सब्जियां रोज खाएं. ओट्स, दलिया, मल्टीग्रेन रोटी जैसे फाइबर वाले अनाज लें. लो फैट डेयरी प्रोडक्ट्स चुनें. ऑलिव ऑयल, सरसों तेल जैसे हेल्दी ऑयल का इस्तेमाल करें. पानी ज्यादा पीएं, पर्याप्त नींद लें.  

ठंड के मौसम में गर्म पानी से बाल धोने के फायदे और नुकसान

सर्दी के मौसम में कई लोग बहुत ज्यादा गर्म पानी से नहाते हैं. इससे भले ही शरीर को आराम मिलता है, लेकिन यह स्किन और बालों के लिए सही नहीं होता है. एक्सपर्ट से जाने बहुत ज्यादा गर्म पानी से हेयर वॉश के कारण बालों को क्या नुकसान पहुंचता है और सही हेयर केयर के बारे में, जो सर्दी में हमारे लिए मददगार हो सकता है. सर्दी के मौसम में खानपान और कपड़ों से लेकर रहन-सहन हर चीज में बदलाव हो जाता है. इस दौरान नहाने और हेयर वॉश के लिए गर्म पानी का उपयोग किया जाता है. लेकिन कई लोग गर्म पानी से नहाते हैं, इससे शरीर को राहत मिलती है, ठंड से बचाव होता है और थकान कम होती हैं. लेकिन ज्यादा गर्म पानी से नहाना या बाल धोना हमारी स्किन और बालों के लिए कई तरह से नुकसानदायक हो सकता है. इसलिए हेल्थ एक्सपर्ट हमेसा गुनगुने पानी से नहाने की सलाह देते हैं. गर्म पानी से नहाना से भले ही आपके शरीर को आराम मिलता है. लेकिन इससे बालों को नुकसान पहुंच सकता है. आइए जानते हैं एक्सपर्ट से कि ज्यादा गर्म पानी से बालों को क्या नुकसान हो सकता है और इसे किस तरह से बचाव किया जा सकता है. क्या कहते हैं एक्सपर्ट? एक्सपर्ट ने बताया कि बाल धोते समय ज्यादा गर्म पानी का उपयोग लंबे समय तक करना बालों और स्कैल्प दोनों के लिए नुकसानदायक हो सकता है. क्योंकि गर्म पानी बालों में मौजूद नेचुरल ऑयल यानी की सेबम को हटाकर उन्हें ड्राई और कमजोर बना देता है, इसके कारण हेयर फॉल भी हो सकता है. इसके अलावा स्कैल्प पर नमी कम हो जाने के कारण सिर में खुजली, ड्राइनेस और डैंड्रफ जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं.जो लोग बालों को कलर करते हैं, उनके लिए यह और भी ज्यादा नुकसानदायक होता है क्योंकि गर्म पानी बालों का रंग जल्दी फीका कर सकता है. हेयर केयर टिप्स इन सभी समस्याओं से बचने और बालों को हेल्दी बनाए रखने के लिए कुछ खास बातों का ख्याल रखना बहुत जरूरी होता है. सबसे पहले तो सर्दी में बाल धोते समय गर्म पानी की जगह पर हल्के गुनगुने पानी का उपयोग करना सही रहेगा. माइल्ड शैंपू और कंडीशनर का नियमित रूप से उपयोग करें. तौलिये बालों को रगड़ने की बजाय धीरे-धीरे सुखाएं. इसके साथ ही हफ्ते में 1 से 2 बार बहुत ज्यादा गर्म पानी से बाल धोने से बचें, ताकि बालों की नमी और नेचुरल चमक बनी रहे. बाल धोने के कुछ घंटे पहले आप तेल लगा सकते हैं. इससे बालों में नमी बनाए रखने में मदद मिलती है. बहुत ज्यादा गर्म पानी से बाल धोने सही नहीं माना जाता है. लेकिन उसके तापमान को मैनेज रखना जरूरी है. बहुत गर्म पानी बालों में नेचुरल ऑयल और नमी को छीन लेता है. जिससे बाल ड्राई हो जाते हैं. ऐसे में मॉइस्चराइजिंग के लिए माइड शैंपू और कंडीशनर का उपयोग जरूर करें. बाल पहले से ही फ्रिजी या ड्राई हैं, तो हेयर वॉश से पहले ऑयलिंग करें. अगर आप इन छोटी-छोटी बातों का ध्यान रखेंगे, तो सर्दी में भी आपके बाल मजबूत और सॉफ्ट बने रहेंगे. अगर बालों में खुजली, जलन और ड्राइनेस की समस्या ज्यादा हो रही है, तो एक्सपर्ट से इसका बारे में सलाह करें. इसके अलावा अपनी हेयर टाइप के मुताबिक ही प्रोडक्ट्स का उपयोग करना ज्यादा सही रहेगा.

Apple का नया कारनामा: अब iPhone भी पहनेगा मोजे, कीमत ₹20,300

नई दिल्ली ऐपल अपने महंगे प्रोडक्ट्स के लिए काफी मशहूर है। अपनी इस पहचान को कायम रखते हुए ऐपल ने एक खास किस्म का मोजा यानी कि सॉक्स को लॉन्च किया है। कमाल की बात ये है कि इसकी कीमत 13 हजार रुपये से शुरू होकर 20 हजार रुपये तक जाती है। बात सिर्फ यहीं खत्म नहीं हो जाती। इस मोजे या मोजे जैसी एक्सेसरी को आपके लिए नहीं बल्कि आपके iPhone के लिए लॉन्च किया गया है। चलिए इस अजीबो-गरीब एक्सेसरी आईफोन पॉकेट के बारे में डिटेल में जानते हैं। क्या है आईफोन पॉकेट? आईफोन का मोजा या फिर जिसे ऐपल iPhone Pocket बता रहा है एक 3D-निटेड स्ट्रेचेबल फैब्रिक से बनी हुई लग्जरी एक्सेसरी है। यह iPhone को अच्छे से कवर कर लेती है और यह दिखने में ही नहीं अपने काम में भी बेहद खास है। इस एक्सेसरी का फैब्रिक इतना लचीला है कि अपने फोन को इसमें से निकाले बिना ही आप उसकी स्क्रीन की झलक देख सकते हैं। ऐपल ने इसे वियरेबल पॉकेट कहा है, जिसमें अपने iphone को रखकरआप पहनकर इसे कैरी भी कर सकते हैं। कीमत और डिजाइन इससे पहले भी ऐपल ने 2004 में अपने iPod के लिए 29 डॉलर यानी कि 2,400 रुपये का iPod Socks नाम से एक एक्सेसरी लॉन्च की थी। वहीं इसके मुकाबले iPhone Pocket एक लग्जरी प्रोडक्ट है। इसके शॉर्ट-स्ट्रैप वर्जन की कीमत 149.95 डॉलर या फिर 12,900 रुपये से होती है। वहीं इसके लॉन्ग-स्ट्रैप वर्जन की कीमत 229.95 डॉलर यानी कि करीब 20,300 रुपये है। बता दें कि ऐपल की इस लेटेस्ट एक्सेसरी को Issey Miyake Studio ने डिजाइन किया है। यह वही टीम है जिसने स्टीव जॉब्स के लिए मशहूर ब्लैक टर्टलनेक बनाया था। iPhone Pocket को बेहद मिनिमल डिजाइन के साथ फ्लेक्सिबल फैब्रिक का इस्तेमाल करते हुए बनाया गया है। इसे आप कंधे, कलाई या हैंडबैग से अटैच करके पहन सकते हैं। किन देशों में मिलेगा ऐपल की ओर से यह साफ किया गया है कि iPhone Pocket एक लिमिटेड एडिशन प्रोडक्ट है। इसे कुछ ही देशों में उपलब्ध कराया जाएगा। इनमें अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, इटली, जापान, चीन, सिंगापुर और दक्षिण कोरिया जैसे देश शामिल हैं। iPhone Pocket के रंगों की बात करें, तो इसका शॉर्ट स्ट्रैप वाला मॉडल lemon, mandarin, purple, pink, peacock, sapphire, cinnamon और black जैसे रंगों में खरीदा जा सकेगा। वहीं इसका लॉन्ग स्ट्रैप वाला वेरिएंट सिर्फ sapphire, cinnamon और black कलर में मिलेगा।

Apple ला रहा है iPhone Fold — 24MP कैमरा और एडवांस फीचर्स के साथ होगा सबसे खास

लॉन्च से पहले ही Apple का आने वाला फोल्डेबल स्मार्टफोन चर्चा में बना हुआ है। इसे आईफोन फोल्ड के नाम से लाया जा सकता है। हालिया लीक से पता चला है कि इस फोन में 24MP का अंडर-डिस्प्ले कैमरा सेंसर मिलेगा। अगर यह रिपोर्ट सही हुई तो यह 24MP अंडर डिस्प्ले कैमरे वाला इंडस्ट्री का पहला फोन होगा। इससे पहले भी कई खबरें आई थीं कि ऐपल अपने फोल्डेबल फोन में डिस्प्ले के अंदर कैमरा देगा। यह अंडर-डिस्प्ले कैमरा तकनीक एंड्रॉयड फोन्स में काफी पहले से मौजूद है, लेकिन उनकी इमेज क्वालिटी अक्सर उतनी अच्छी नहीं होती है। इसका कारण उनके लेंस का रेजोल्यूशन कम होना है, जो आमतौर पर 4 से 8MP तक होता है। हालांकि, इस बार ऐपल आईफोन फोल्ड के फ्रंट कैमरे में छह प्लास्टिक लेंस एलिमेंट होंगे। इससे साफ है कि यह अंडर-डिस्प्ले कैमरा काफी एडवांस होगा। ऐसा लग रहा है कि ऐपल ने लाइट ट्रांसमिशन और इमेज क्वालिटी को बेहतर बनाने में बड़ी सफलता हासिल की है। आइये, फोन की अन्य डिटेल के लिए आगे पढ़ते हैं। एडवांस फीचर के कारण हो सकती है खामियां ऐपल के फोल्डेबल स्मार्टफोन में कई एडवांस फीचर देखने को मिलेंगे। हालांकि, एडवांस फीचर के कारण फोन में कई चीजों की कमी भी हो सकती है। लीक रिपोर्ट्स की मानें तो फोन को कॉम्पैक्ट रखने के लिए OIS (ऑप्टिकल इमेज स्टेबिलाइजेशन) और LiDAR (लाइट डिटेक्शन एंड रेंजिंग) जैसी सुविधाओं को हटाया जा सकता है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि OIS, कैमरे को हिलने-डुलने पर भी स्टेबल फोटोज लेने में मदद करता है, जबकि LiDAR गहराई का पता लगाने में काम आता है। ऐपल एनालिस्ट Ming Chi Kuo ने बताया है कि आईफोन फोल्ड में फोन के मुड़े हुए और खुले हुए दोनों ही स्टेट में डुअल-लेंस कैमरा हो सकता है। वहीं, मार्क गुरमन का कहना है कि इस डिवाइस में कुल चार सेंसर होंगे। एक सामने की तरफ, एक अंदर की तरफ और दो पीछे की तरफ। लीक रिपोर्ट्स के अनुसार, आईफोन फोल्ड में पीछे की तरफ दो 48MP के कैमरे हो सकते हैं। इसके अलावा, फोन में पावर बटन के साथ टच आईडी (फिंगरप्रिंट सेंसर) भी दिया जा सकता है। यह अंडर-डिस्प्ले कैमरा एक बड़ी बात है, क्योंकि यह फोन के डिजाइन को और भी स्लीक बना देगा। डिस्प्ले के नीचे कैमरा होने से फोन का फ्रंट लुक बिना किसी नॉच या पंच-होल के एकदम साफ दिखेगा। यह उन लोगों के लिए बहुत अच्छा होगा जो फुल-स्क्रीन का एक्सपीरियंस पसंद करते हैं। एंड्रॉयड फोन में अंडर-डिस्प्ले कैमरे का इस्तेमाल तो हुआ है, लेकिन अक्सर उनकी क्वालिटी उतनी अच्छी नहीं होती। ऐसा इसलिए है, क्योंकि डिस्प्ले की लेयर्स से होकर लाइट को सेंसर तक पहुंचना पड़ता है, जिससे इमेज क्वालिटी पर असर पड़ता है। ऐपल का 24MP का सेंसर और छह प्लास्टिक लेंस एलिमेंट इस समस्या को दूर करने में मदद कर सकते हैं। आईफोन फोल्ड एक ऐसा डिवाइस होने की उम्मीद है, जो फोल्डेबल फोन की दुनिया में कुछ नए स्टैंडर्ड सेट कर सकता है। हालांकि, इसकी कीमत और अन्य स्पेसिफिकेशन्स के बारे में अभी और जानकारी का इंतजार करना होगा।

सांसों पर संकट: प्रदूषण से बच्चों की सेहत बिगड़ रही, सावधानी ही बचाव

  वायु प्रदूषण केवल वयस्कों के लिए ही खतरा नहीं है, बल्कि छोटे बच्चों के स्वास्थ्य पर इसका असर कहीं अधिक गहरा और दीर्घकालिक हो सकता है। जन्म से पहले और बचपन के शुरुआती वर्षों में प्रदूषण के संपर्क में आने वाले बच्चों के लिए यह गंभीर स्वास्थ्य चुनौतियों को जन्म दे सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, गर्भावस्था में माताओं का प्रदूषित वातावरण में रहना और बचपन में दूषित हवा में सांस लेना बच्चों के फेफड़ों के विकास को प्रभावित कर सकता है। इससे उनके फेफड़ों की वृद्धि रुक सकती है और सामान्य से कम कार्यशील फेफड़े विकसित होते हैं। इसके अलावा, छोटे बच्चों में अस्थमा जैसी श्वसन संबंधी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। वे अक्सर निम्न श्वसन संक्रमणका शिकार हो सकते हैं। मानसिक और मोटर विकास पर भी प्रदूषण का नकारात्मक असर पड़ता है, जिससे व्यवहार संबंधी समस्याएँ और सीखने की क्षमता प्रभावित हो सकती है। गर्भवती महिलाओं से होने वाले शिशु पर भी पड़ रहा असर गर्भवती महिलाओं में प्रदूषण के संपर्क से कम वजन के बच्चों का जन्म, असामयिक प्रसव और शिशु मृत्यु दर में भी बढ़ोतरी देखी गई है। लंबी अवधि में, बच्चों में हृदय रोग, मधुमेह और स्ट्रोक जैसी गंभीर बीमारियों का जोखिम भी बढ़ सकता है। कुछ अध्ययनों में यह भी संकेत मिला है कि प्रदूषण बच्चों में कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ा सकता है।  प्रदूषण का छोटे बच्चों के फेफड़ों पर गंभीर प्रभाव विशेष रूप से छोटे बच्चों के फेफड़े अभी विकसित हो रहे होते हैं, इसलिए वे प्रदूषण के प्रति अधिक संवेदनशील होते हैं। प्रदूषण से बचाव के लिए बच्चों को साफ और सुरक्षित वातावरण में रखना बेहद जरूरी है। सावधानी और जागरूकता से ही हम बच्चों को इस अदृश्य लेकिन गंभीर खतरे से बचा सकते हैं और उनके स्वस्थ भविष्य को सुनिश्चित कर सकते हैं। प्रदूषण से बच्चों में दिखाई देने वाले पांच प्रमुख लक्षण     लगातार खांसी और गले में खराश – प्रदूषित हवा गले और नलियों को प्रभावित कर बार-बार खांसी और आवाज बैठने का कारण बन सकती है।     सांस लेने में तकलीफ या सीने में जकड़न – हवा के हानिकारक कण श्वसन मार्ग को संकुचित कर देते हैं, जिससे खेलते समय सांस फूलना या सीने में भारीपन महसूस हो सकता है।     नाक बहना और छींक आना – बच्चों की नाक और आंखें संवेदनशील हो जाती हैं, जिससे बार-बार नाक बहना, छींक या आंखों में जलन होती है।     नींद में खलल और थकान – ऑक्सीजन की कमी से नींद बाधित होती है और बच्चे दिन में सुस्त या थके हुए महसूस करते हैं।     अस्थमा और एलर्जी की तीव्रता बढ़ना – जिन बच्चों को पहले से अस्थमा या एलर्जी है, उनमें प्रदूषण लक्षणों को और बढ़ा देता है। बच्चों को सुरक्षित रखने के उपाय     सुबह के समय बच्चों को बाहर खेलने से रोकें, क्योंकि उस समय AQI सबसे खराब होता है।     घर में एयर प्यूरीफायर या गीले कपड़े रखें, ताकि धूल कम हो।     N95 या KN95 मास्क पहनाने की आदत डालें, खासकर स्कूल जाने के समय।     आहार में विटामिन C, E और एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर चीजें शामिल करें, जैसे संतरा, पालक और टमाटर।     पर्याप्त पानी पिलाएं ताकि शरीर से टॉक्सिन बाहर निकल सकें। डॉक्टर को कब दिखाएं     लगातार तीन-पांच दिनों तक खांसी, सांस फूलना या सीने में जकड़न हो।     खेलने के बाद अत्यधिक थकान या सिरदर्द महसूस हो।     अस्थमा के बच्चों को नियमित दवा और जांच कराना आवश्यक।  

New Aadhaar App: बेहतर सिक्योरिटी और आसान एक्सेस के साथ आपके फोन में

 नई दिल्ली  न्यू आधार ऐप लॉन्च हो गया है. इस ऐप की मदद से कई नए फीचर्स मिलेंगे और सिक्योरिटी भी बेहतर होगी. इसकी जानकारी खुद Aadhaar (@UIDAI) अकाउंट ने X प्लेटफॉर्म पर पोस्ट करके दी है. इस ऐप का लंबे समय से इंतजार हो रहा था. न्यू आधार ऐप आने के बाद हर जगह आधार कार्ड की फोटो कॉपी लेकर घूमने की जरूरत नहीं होगी.  पोस्ट के मुताबिक, New Aadhaar App में नए फीचर्स मिलेंगे. इसमें सिक्योरिटी इनहेंस्ड, ईजी एक्सेसस और पूरी तरह से पेपर लेस एक्सपीरियंस होगा. साथ ही पोस्ट में Android और iOS यूजर्स को न्यू आधार ऐप डाउनलोड करने का लिंक भी प्रोवाइड किया गया है.  प्ले स्टोर पर आया न्यू आधार ऐप   प्ले स्टोर पर न्यू आधार ऐप के फीचर्स की जानकारी दी है और फोटो को लिस्टेड किया है. फोटो में दिखाया गया है कि मोबाइल ऐप पर ही आधार कार्ड को दिखाया जा सकेगा. इसमें डेट ऑफ बर्थ और आधार नंबर की सिक्योरिटी को बेहतर किया है. डेट ऑफ बर्थ का सिर्फ ईयर और आधार नंबर के के लास्ट चार डिजिट नजर आएंगे. बायोमैट्रिक को लॉक कर सकेंगे न्यू आधार ऐप की मदद से मोबाइल से ही आधार नंबर होल्डर्स बायोमैट्रिक को लॉक कर सकेंगे. इसके लिए सिंपल का प्रोसेस फॉलो करना होगा. मोबाइल ऐप पर आधार कार्ड डाउनलोड करने के भी दो ऑप्शन मिलेंगे, जिसमें एक फुल आईडी डिटेल्स और दूसरा माक्स्ड आईडी डिटेल्स है.  आधार डिटेल्स शेयर करना हुआ आसान और सिक्योर न्यू आधार ऐप की मदद से आधार डिटेल्स शेयर करना आसान बना दिया. ऐप में शेयर का ऑप्शन है, जिसपर क्लिक करनेके बाद आपको कुछ ऑप्शन मिलेंगे. इसमें वह कंप्लीट शेयर, सिलेक्टिव शेयर और डाउनलोड आधार के ऑप्शन पूछता है. इसके बाद जब आप सिलेक्टिव शेयर के ऑप्शन पर क्लिक करते हैं तो कुछ नए ऑप्शन मोबाइल स्क्रीन पर सामने आ जाते हैं. बताना होगा कि आधार की कौन सी डिटेल्स को शेयर किया है, उसके सामने बने बॉक्स पर चेक करना होगा. इसके बाद कंटीन्यू करना होगा. फिर कंफर्मेशन करने के बाद उस फाइल को मैसेजिंग ऐप या ईमेल की मदद से शेयर किया जा सकता है.  फैमिली के लिए भी यूजफुल  न्यू आधार ऐप के अंदर फैमिली मेंबर्स के आधार कार्ड नंबर को भी एक ही डिवाइस में रखा जा सकता है, जिसकी जानकारी ऐप ऐप स्टोर पर दी है. इसके लिए आधार नंबर होल्डर्स को फिजिकल कॉपीज लेकर घूमने की जरूरत नहीं होगी. सेफ्टी के लिए फेस ऑथेंटिकेशन का यूज किया जाएगा.   आधार कार्ड क्या होता है?  आधार कार्ड भारत सरकार की तरफ से जारी किए जाने वाला यूनिक आईडी नंबर है.  इस नंबर को  भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) तैयार करता है. आधार कार्ड में 12 अंकों का एक यूनिक नंबर होता है और यही नंबर हर एक भारतीय की अलग-अलग पहचान की जानकारी देता है.   

बाल झड़ने से रोकना है? तो, ये रोज़मर्रा की गलतियाँ तुरंत बदलें

अक्सर हम बालों की समस्या के लिए प्रदूषण या जीन्स को जिम्मेदार ठहराते हैं, जबकि सच तो यह है कि हमारे रोजमर्रा की जिंदगी की 5 ऐसी 'छोटी-छोटी' आदतें हैं, जिन्हें हम पूरी तरह से अनदेखा कर देते हैं और यही गलतियां खामोशी से हमारे स्कैल्प और बालों की जड़ों को कमजोर कर रही हैं। जी हां, यह समस्या बाहरी नहीं, बल्कि आपकी अपनी लाइफस्टाइल की 'अंदरूनी' गड़बड़ी है। आइए, विस्तार से जानते हैं इसके बारे में। स्ट्रेस लेना और खराब नींद आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में तनाव एक आम समस्या है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि यह आपके बालों का सबसे बड़ा दुश्मन है? जब आप लंबे समय तक तनाव में रहते हैं, तो शरीर "कोर्टिसोल" नामक हॉर्मोन रिलीज करता है। यह हॉर्मोन बालों को 'विश्राम चरण'में धकेल देता है, जिससे वे समय से पहले झड़ने लगते हैं।     समाधान: रोजाना 7-8 घंटे की गहरी नींद लें। मेडिटेशन और हल्की एक्सरसाइज को अपनी दिनचर्या में शामिल करें ताकि तनाव कम हो सके। पानी कम पीना और पोषण की कमी बालों के विकास के लिए हाइड्रेशन उतना ही जरूरी है जितना कि पौधे के लिए पानी। अगर आप पर्याप्त पानी नहीं पीते हैं, तो आपके बाल रूखे और कमजोर हो जाते हैं। इसके अलावा, बालों को मजबूत बनाने के लिए प्रोटीन, आयरन और बायोटिन जैसे पोषक तत्वों की जरूरत होती है। जंक फूड पर निर्भर रहने से ये जरूरी तत्व नहीं मिल पाते।     समाधान: दिन भर में कम से कम 8-10 गिलास पानी जरूर पिएं। अपनी डाइट में हरी सब्जियां, फल, अंडे और नट्स को शामिल करें। बालों को कसकर बांधना और हीट स्टाइलिंग महिलाएं अक्सर टाइट पोनीटेल या जूड़ा बनाना पसंद करती हैं, जबकि पुरुष जेल या वैक्स लगाकर बालों को कसकर सेट करते हैं। बालों को बहुत कसकर खींचने से 'ट्रैक्शन एलोपेसिया' नामक समस्या हो सकती है, जिसमें हेयरलाइन के बाल तेजी से झड़ने लगते हैं। साथ ही, हेयर ड्रायर, स्ट्रेटनर और कर्लर की अत्यधिक गर्मी बालों की जड़ों को कमजोर कर देती है।     समाधान: ढीले हेयर स्टाइल चुनें। हीट स्टाइलिंग टूल्स का इस्तेमाल कम करें, और अगर करें भी तो हमेशा हीट प्रोटेक्टेंट स्प्रे का इस्तेमाल करें। जरूरत से ज्यादा शैंपू और गलत कंघी का यूज कुछ लोग सोचते हैं कि रोजाना शैंपू करने से बाल साफ रहते हैं, लेकिन ज्यादा शैंपू करने से स्कैल्प का नेचुरल ऑयल खत्म हो जाता है, जिससे रूखापन और कमजोरी आती है। इसके अलावा, गीले बालों में जोर से कंघी करना एक आम गलती है। गीले बाल सबसे कमजोर होते हैं।     समाधान: शैंपू जरूरत के हिसाब से करें, हर दिन नहीं। गीले बालों में हमेशा चौड़े दांतों वाली कंघी का इस्तेमाल करें और हल्के हाथों से सुलझाएं। धूम्रपान और शराब स्मोकिंग और शराब का सेवन केवल फेफड़ों या लिवर को ही नहीं, बल्कि बालों की सेहत को भी नुकसान पहुंचाता है। धूम्रपान करने से सिर की त्वचा में ब्लड सर्कुलेशन कम हो जाता है, जिससे बालों की जड़ों तक जरूरी ऑक्सीजन और पोषण नहीं पहुंच पाता।     समाधान: अगर आपको हेल्दी और घने बाल चाहिए, तो धूम्रपान की आदत को तुरंत छोड़ दें और शराब का सेवन सीमित करें।  

केला + काली मिर्च: जानिए रोज़ाना खाने से मिलने वाले 6 अनोखे लाभ

  केला और मसालों के डिब्बे में रखी चुटकी भर काली मिर्च- जी हां, यह कॉम्बिनेशन भले ही आपको अजीब लग रहा हो, मगर इसके फायदे जानकर आप भी इसे खाने से पीछे नहीं हटेंगे। दरअसल, जब इन दोनों को सही मात्रा में मिलाया जाता है, तो यह मिश्रण पाचन से लेकर मूड तक, कई समस्याओं पर जादू की तरह असर करता है। आइए, इस पुराने नुस्खे के पीछे की साइंस को समझते हैं और जानते हैं। पाचन शक्ति में जबरदस्त सुधार केला फाइबर का भंडार है, जो पेट को साफ रखने में मदद करता है। वहीं, काली मिर्च में 'पाइपेरिन' नामक एक तत्व होता है, जो पाचन एंजाइम्स को एक्टिव करता है। जब आप इन दोनों को साथ खाते हैं, तो यह मिश्रण पाचन तंत्र को मजबूत बनाता है, कब्ज को दूर करता है और पेट फूलने की समस्या को कम करने में मददगार हो सकता है। इंस्टेंट एनर्जी का खजाना केला नेचुरल शुगर जैसे ग्लूकोज, फ्रुक्टोज और सुक्रोज से भरपूर होता है, जो शरीर को तुरंत ऊर्जा देते हैं। काली मिर्च इस एनर्जी को तेजी से अवशोषित करने में मदद करती है। रोजाना सुबह या वर्कआउट से पहले इस कॉम्बिनेशन को लेने से आपको लंबे समय तक ताकत महसूस होगी और थकान कम होगी। वजन कंट्रोल करने में मददगार केला पेट को भरा हुआ महसूस कराता है, जिससे आप ओवरईटिंग से बचते हैं। काली मिर्च थर्मोजेनेसिस की प्रक्रिया को बढ़ाती है, यानी यह आपके शरीर के तापमान को थोड़ा बढ़ाती है, जिससे कैलोरी तेजी से बर्न होती हैं। इस प्रकार, यह मिश्रण एक हेल्दी वेट बनाए रखने में काफी मदद कर सकता है। हड्डियों को बनाता है मजबूत केला मैग्नीशियम और पोटैशियम जैसे जरूरी मिनरल्स का एक अच्छा सोर्स है, जो बोन डेंसिटी को बनाए रखने के लिए जरूरी हैं। काली मिर्च में भी कुछ मात्रा में मैंगनीज होता है, जो हड्डियों की सेहत के लिए अच्छा है। इन पोषक तत्वों का सही मिश्रण आपकी हड्डियों को मजबूत और स्वस्थ रखने में मदद करता है। बेहतर मूड और तनाव में कमी केले में ट्रिप्टोफैन नामक एक अमीनो एसिड होता है, जिसे शरीर 'सेरोटोनिन' में बदलता है। सेरोटोनिन को 'फील-गुड' हार्मोन भी कहा जाता है, जो मूड को बेहतर बनाने और तनाव को कम करने में मदद करता है। काली मिर्च इन पोषक तत्वों के बेहतर अवशोषण में मदद करती है, जिससे आपको मानसिक शांति मिलती है। इम्यून सिस्टम को रखे स्ट्रॉन्ग काली मिर्च एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर होती है, जो शरीर को हानिकारक फ्री रेडिकल्स से बचाते हैं। केला विटामिन C और B6 जैसे जरूरी विटामिन देता है। यह शक्तिशाली कॉम्बिनेशन आपकी इम्युनिटी को बूस्ट करता है, जिससे आप मौसमी बीमारियों और इन्फेक्शन्स से बचे रहते हैं। कैसे खाएं? बस एक पका हुआ केला लें और उस पर एक चुटकी ताजी पिसी हुई काली मिर्च डालें और रोजाना खाएं।