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जिसका डर था वही हुआ: अजित पवार के प्रस्थान के बाद NCP में उठे नए कदम, BJP भी सतर्क

मुंबई   महाराष्ट्र की पॉलिटिक्स में जिसका डर था वही होता दिख रहा है. अजित पवार के निधन का अब उनकी पार्टी में साइड इफेक्ट दिखने लगा है. अजित पवार के जाते ही एनसीपी में दो फाड़ हो गया है. सूत्रों का कहना है कि अजित पवार की एनसीपी अब दो गुटों में बंट गई है. एक ग्रुप महायुति में साथ रहना चाहता है तो दूसरा शरद पवार के साथ जाना चाहते है. एनसीपी में इस बिखराव से भाजपा की टेंशन बढ़ गई है. अजित पवार गुरुवार को पंचतत्व में विलीन हुए. दरअसल, महाराष्ट्र की राजनीति में बड़ा उलटफेर हो गया है. डिप्टी सीएम अजित पवार का बुधवार यानी 28 जनवरी 2026 को बारामती में प्लेन क्रैश में निधन हो गया. अजित पवार के जाने के बाद उनकी एनसीपी गुट में खलबली मच गई है. सूत्रों के मुताबिक, अजित पवार गुट अब दो हिस्सों में बंट गया है. एक ग्रुप महायुति (बीजेपी-शिवसेना) के साथ रहना चाहता है, जबकि दूसरा ग्रुप शरद पवार के साथ वापस जाना चाहता है. यही वो डर था जो कई लोगों को सता रहा था कि अजित पवार के बिना उनका गुट बिखर सकता है. एनसीपी का होने वाला था मर्जर सूत्रों का कहना है कि अजित पवार के निधन से पहले खबरें थीं कि शरद पवार गुट और अजित पावर गुट फरवरी की दूसरे हफ्ते में साथ आने का ऐलान कर सकता है. सूत्रों का कहना है कि साथ आने की तारीख भी तय हो चुकी थी. आठ फरवरी को एनसीपी का मर्जर होना था. यह खबर तब से शुरू हो चुकी थी, जब अजित पवार गुट और शरद पवार गुट ने पुणे और पिंपरी चिंचवड़ के म्युनिसिपल चुनाव साथ में लड़ा. भाजपा की टेंशन क्यों बढ़ी? सूत्रों का कहना है कि दोनों के साथ आने की पूरी तैयारियां भी हो चुकी थी. मगर अचानक अजित पवार के निधन के बाद सब कुछ एक बार फिर बिखर गया है. अब सवाल है कि आखिर भाजपा क्या चाहती है? सूत्रों का कहना है कि बीजेपी चाहती है कि अजित पवार गुट उनके यानी महायुति में बना रहे. क्योंकि भाजपा को लगता है कि अगर अजित पवार गुट महायुति से बाहर होता है तो एकनाथ शिंदे की शिवसेना का बल बढ़ जाएगा. कौन होगा अजित वाली एनसीपी का चीफ? बहरहाल, अजित पवार के निधन के बाद शरद पवार गुट को मौका मिला है. कई लोग मानते हैं कि अब दोनों गुटों का मर्जर हो सकता है, क्योंकि अजित पवार की आखिरी इच्छा यही थी. लेकिन फैसला आसान नहीं है. अभी तो यह तय होना है कि आखिर अजित पवार वाली एनसीपी का लीडर बनेगा? अजित पवार की पत्नी सुनेत्रा पवार का नाम सबसे आगे बताया जा रहा है. हालांकि, एनसीपी चीफ के लिए प्रफुल पटेल, सुनील तटकरे का भी नाम चल रहा है. फिलहाल, अजित पवार वाली एनसीपी में लीडरशिप वैक्यूम है, और पार्टी को जल्द फैसला लेना होगा.

एनसीपी नेता अजित पवार की मौत, राजनीतिक गलियारों में छाया मातम, नेताओं ने कही संवेदनाएं

भोपाल महाराष्ट्र के पुणे जिले के बारामती में आज सवेरे पौने नौ बजे हुए प्लेन क्रेश में उपमुख्यमंत्री अजीत पवार का निधन हो गया। विमान में सवार अन्य चार लोग भी इस हादसे में नहीं बचे पाए। यह दुर्घटना तब हुई जब एनसीपी नेता अजित पवार (66) और अन्य लोगों को ले जा रहा विमान बारामती में रनवे के पास क्रैश लैंड हो गया। उपमुख्यमंत्री के निधन पर शोक व्यक्त करते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव समेत वरिष्ठ कांग्रेस नेता कमलनाथ और दिग्विजय सिंह ने शोक व्यक्त किया है। सीएम यादव ने जताया दुख मुख्यमंत्री मोहन यादव ने एक्स पर दिए अपने संदेश में कहा- महाराष्ट्र के माननीय उपमुख्यमंत्री अजीत पवार जी गरीबों, वंचितों और पिछड़ों की सेवा में सदैव समर्पित रहे। महाराष्ट्र के विकास में उनका अमूल्य योगदान रहा। वे जमीन से जुड़े नेता थे। उनके असामयिक निधन पर मैं श्रद्धांजलि व्यक्त करता हूं। बाबा महाकाल से प्रार्थना करता हूं कि उन्हें अपने श्रीचरणों में स्थान तथा शोकाकुल परिजनों को यह कष्ट सहने की शक्ति दें। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कमलनाथ ने जताया दुख कमलनाथ ने अपने संदेश में अजीत पवार को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि महाराष्ट्र के बारामती में एक विमान दुर्घटना में महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजीत पवार के दुखद निधन का समाचार प्राप्त हुआ। अजीत पवार के निधन से भारत की राजनीति को अपूरणीय क्षति हुई है। उन्होंने अपना पूरा जीवन महाराष्ट्र के लोगों की सेवा के लिए समर्पित किया। ईश्वर उनकी आत्मा को शांति प्रदान करे और परिवारजनों को यह दुख सहन करने की शक्ति दें। दिग्विजय सिंह ने भी जताया दुख पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने भी अजीत पवार के निधन पर अपनी शोक संवेदनाएं व्यक्त की हैं। उन्होंने एक्स पर अपने संदेश में कहा कि अजित दादा के विमान हादसे में दुखद निधन की खबर सुनकर अत्यंत व्यथित हूं। सुनेत्रा जी और पूरे परिवार के प्रति मेरी हार्दिक संवेदनाएं। ईश्वर उन्हें इस अपूरणीय क्षति को सहन करने की शक्ति प्रदान करें। 

अजित पवार की विमान दुर्घटना में मौत, बारामती में शोक की लहर, रोते-बिलखते पहुंचे समर्थक

 बारामती महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम अजीत पवार का बुधवार को एक विमान क्रैश में निधन हो गया. यह हादसा उनके गृह जिले बारामती में हुआ. शुरुआती रिपोर्ट के मुताबिक विमान में सवाल सभी छह लोगों की मौत हो गई. बताया जा रहा है कि बारामती में लैंडिंग के वक्त यह हादसा हुआ. अजीत पवार बारामती से ही विधायक हैं. यह पूरा इलाका पवार परिवार का गढ़ कहा जाता है. हादसे के बाद विमान आग का गोला बन गया. आसमान में धुंए के गुब्बारे देखे गए. शुरू में कहा गया कि इस क्रैश में अजीत पवार गंभीर रूप से जख्मी हुए. उनको बारामती के अस्पताल में भर्ती करवाया गया है. लेकिन थोड़ी देर बार उनको मृत बता दिया गया. विमान में अजीत पवार अपने सहयोगियों के साथ मौजूद थे. इस हादसे में पायलट की भी मौत हो गई है. यह विमान सुबह 8 से 9 बजे के बीच मुंबई से उड़ान भरा था. यह एक चार्टर प्लेन था. डॉक्टरों की एक टीम उनका इलाज कर रही थी लेकिन उनको नहीं बचाया जा सका. हादसे के बाद विमान आग का गोला बन गया. अजीत पवार बारामती में आज कई कार्यक्रमों में शिरकत करने वाले थे. बारामती की सांसद और उनकी बहन सुप्रिया सुले बारामती के लिए रवाना हो गई हैं. दिल्ली से पवार परिवार बारामती के लिए रवाना हो रहे हैं. उड़ान भरने के करीब एक घंटे बाद हादसा रिपोर्ट के बाद मुंबई से उड़ान भरने के करीब एक घंटे बाद यह हादसा हुआ. यह एक प्राइवेट जेट था. हादसे के बाद पूरे बारामती में शोक की लहर है. अजीत पवार कई बार राज्य के डिप्टी सीएम रहे थे. राज्य की राजनीति में वह एक बहुत बड़े कद के नेता थे. मौजूदा वक्त में उनके कद का बहुत कम सक्रिय नेता हैं. पवार परिवार में शोक की लहर अजीत पवार इस वक्त एनसीपी के प्रमुख थे. उन्होंने अपने चाचा शरद पवार से राजनीति के गुर सीखे थे. लेकिन करीब तीन साल पहले अजीत पवार और शरद पवार के रास्ते अलग-अलग हो गए थे. एनसीपी दोफाड़ हो गई और मूल एनसीपी पर उनका कब्जा हो गया. उनकी पत्नी सुनेत्रा पवार राज्यसभा सांसद हैं. उनकी चचेरी बहन सप्रिया सुले बारामती से सांसद हैं. वह एनसीपी-शरद गुट की नेता है. महाराष्ट्र की राजनीति खासकर मराठा राजनीति पर पवार परिवार का गहरा प्रभाव है. पूरे महाराष्ट्र में शोक की लहर महाराष्ट्र में अजीत पवार को दादा कहा जाता था. महाराष्ट्र की राजनीति में वह एक अपने चाचा की तरह ही सभी दलों के प्रिय नेता थे. सभी दलों में उनके दोस्त हैं. हर कोई उनके निधन पर शोक जता रहा है. बीते विधानसभा में चुनाव में अपने दम पर अपनी पार्टी को खड़ा कर साबित कर दिया था कि वह राजनीति के माहिल खिलाड़ी हैं. एनसीपी संगठन पर पकड़ अजीत पवार एनसीपी संगठन के नेता था. शरद पवार के उत्तराधिकारी के तौर पर अजीत पवार के साथ उनकी चचेरी बहन सुप्रिया सुले दावेदार थीं. लेकिन, शरद पवार ने एनसीपी के अध्यक्ष के तौर पर सुप्रिया सुले के हाथ में कमान दे दी. इसके बाद करीब तीन साल पहले एनसीपी दोफाड़ हो गया. अजीत पवार गुट ने राज्य में भाजपा के साथ गठबंधन कर सरकार में शामिल हो गया. वह देवेंद्र फडणवीस सरकार में डिप्टी सीएम बने. पीएम मोदी ने ली हादसे की जानकारी हादसे के बाद पीएम नरेंद्र ने महाराष्ट्र के सीएम देवेंद्र फडणवीस से बात की है. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी इस हादसे की जानकारी ली है. पीएम ने इस बारे में सीएम से बातचीत की है.

क्या फडणवीस सरकार से इस्तीफा देंगे अजीत पवार? BJP की हार के बाद उठे सवाल

 मुंबई महाराष्ट्र के सभी नगर निकाय चुनावों के परिणाम आ चुके हैं और भारतीय जनता पार्टी ने पुणे (PMC) और पिंपरी-चिंचवाड़ (PCMC) में अपना दबदबा न केवल बरकरार रखा है, बल्कि उसे और मजबूत किया है। अजीत पवार और शरद पवार की एकजुटता का दांव भाजपा के विजय रथ को रोकने में नाकाम रहा। भाजपा ने दोनों नगर निगमों में पूर्ण बहुमत हासिल कर लिया है। पुणे में भाजपा को 165 में से 110 सीटें मिली हैं। वहीं, एनसीपी और शरद पवार कैंप को मात्र 2 सीटें मिली हैं। पिंपरी-चिंचवाड़ (PCMC) की 128 सीटों में से भाजपा को 81 और अजीत गुट को सिर्फ 36 सीटें मिली हैं। भाजपा ने पहली बार इन दोनों नगर निगमों में अपने दम पर सत्ता हासिल की है। इससे पहले वह गठबंधन का हिस्सा रही थी। पवार फैमिली का भविष्य क्या है? अजीत पवार और शरद पवार के फिर से साथ आने के बावजूद मिली इस करारी हार ने दोनों गुटों के सामने अस्तित्व का संकट खड़ा कर दिया है। महायुति सरकार में रहते हुए भाजपा के खिलाफ चुनाव लड़ना और भ्रष्टाचार के आरोप लगाना उनके लिए उल्टा पड़ गया। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष रवींद्र चव्हाण ने यहां तक कह दिया कि पार्टी को अजीत पवार को साथ लेने पर पछतावा है। अब अजीत पवार को या तो भाजपा के सामने झुककर रहना होगा या फिर पूरी तरह अपने चाचा के साथ विलय की संभावना तलाशनी होगी। महाराष्ट्र शरद पवार की पार्टी 24 नगर निकायों में अपना खाता तक नहीं खोल पाई है। पुणे जैसे अपने गढ़ में मात्र 2 सीटें जीतना पार्टी के संगठनात्मक ढांचे के चरमराने का संकेत है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए दोनों NCP गुटों का स्थायी रूप से मिल जाना ही उनके बचने का एकमात्र रास्ता हो सकता है। कार्यकर्ताओं में भी अब स्थिरता की मांग बढ़ रही है। भाजपा की जीत के 4 कारण 1. परिवारवाद पर प्रहार: भाजपा ने नीति बनाई कि किसी भी मौजूदा विधायक या सांसद के रिश्तेदार को टिकट नहीं दिया जाएगा। इससे मुरलीधर मोहोल और मेधा कुलकर्णी जैसे बड़े नेताओं के रिश्तेदारों को भी टिकट नहीं मिला, जिससे आम कार्यकर्ताओं में सकारात्मक संदेश गया। 2. नए चेहरों को मौका: पुणे में भाजपा ने अपने 97 में से 30 मौजूदा पार्षदों के टिकट काटकर नए और जमीनी कार्यकर्ताओं को मैदान में उतारा। 3. विपक्ष के मजबूत चेहरों को तोड़ा: चुनाव से ठीक पहले भाजपा ने बापू पठारे के परिवार (NCP-SP) और अभिजीत शिवरकर (कांग्रेस) जैसे प्रभावी स्थानीय नेताओं को अपने पाले में कर लिया। 4. इंफ्रास्ट्रक्चर पर फोकस: मेट्रो विस्तार, रिंग रोड और कोस्टल रोड जैसे बड़े प्रोजेक्ट्स ने शहरी मतदाताओं को भाजपा की ओर आकर्षित किया। इस जीत के साथ देवेंद्र फडणवीस ने महाराष्ट्र की शहरी राजनीति में अपनी पकड़ और मजबूत कर ली है। अब सबकी नजरें जिला परिषद चुनावों पर हैं, जहां यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या अजीत पवार और शरद पवार का गठबंधन जारी रहता है या हार के बाद वे फिर से अलग रास्ते चुनते हैं।

पुणे भूमि घोटाला जांच: पार्थ पवार का नाम नहीं, तीन अधिकारियों पर गिरी गाज

पुणे    महाराष्ट्र में 300 करोड़ रुपये की विवादित जमीन डील को लेकर आखिरकार जांच रिपोर्ट सामने आ गई है. पुणे की मुंडवा स्थित सरकारी जमीन को कथित तौर पर निजी कंपनी को बेचने और स्टांप ड्यूटी में भारी छूट देने के मामले में संयुक्त इंस्पेक्टर जनरल ऑफ रजिस्ट्रेशन (IGR) की तीन सदस्यीय समिति ने सब रजिस्ट्रार रविंद्र तारू समेत तीन लोगों को जिम्मेदार ठहराया है. वहीं, सरकार ने संबंधित कंपनी को 42 करोड़ रुपये की स्टांप ड्यूटी की वसूली को लेकर नोटिस भेजते हुए सात दिन में जवाब मांग लिया है. संयुक्त IGR राजेंद्र मुंठे की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय समिति ने अपनी रिपोर्ट IGR रविंद्र बिनवाडे को सौंपी, जिन्हें इसे आगे पुणे डिविजनल कमिश्नर चंद्रकांत पुलकुंदवार को भेजना था. रिपोर्ट में बताया गया है कि पार्थ पवार का नाम किसी भी दस्तावेज में नहीं आया, इसलिए उन्हें दोषी नहीं ठहराया गया. एक वरिष्ठ अधिकारी ने न्यूज एजेंसी को बताया, चूंकि पार्थ पवार का नाम पूरे सेल डीड में कहीं नहीं है, उन्हें जांच में दोषी नहीं ठहराया जा सकता. रिपोर्ट में उन तीन लोगों को जिम्मेदार बताया गया है जो सीधे तौर पर डील में शामिल थे, जिनमें निलंबित सब रजिस्ट्रार रविंद्र तारू भी शामिल हैं. किन लोगों को दोषी ठहराया गया? रिपोर्ट में जिन तीन लोगों को जिम्मेदार ठहराया गया है, उनमें रविंद्र तारू- सब-रजिस्ट्रार (निलंबित), दिग्विजय पाटिल- पार्थ पवार के पार्टनर और रिश्तेदार, शीटल तेजवानी- सेलर्स की ओर से पावर ऑफ अटॉर्नी धारक का नाम है. ये तीनों पहले से ही पुलिस द्वारा दर्ज FIR में आरोपी हैं. सरकारी जमीन कैसे बेची गई? 40 एकड़ की यह जमीन मुंडवा के पॉश इलाके में स्थित है. यह जमीन सरकारी थी, जिसे बेचा ही नहीं जा सकता था. इसके बावजूद इसे अमाडिया एंटरप्राइजेज LLP को बेचा गया, जिसमें पार्थ पवार पार्टनर हैं. रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि कंपनी को 21 करोड़ रुपये की स्टांप ड्यूटी में गलत तरीके से छूट दी गई. भविष्य में ऐसे धोखाधड़ी से बचाव के उपाय बताए जांच रिपोर्ट में कई महत्वपूर्ण सिफारिशें की गई हैं. जहां भी स्टांप ड्यूटी छूट मांगी जाए, कलेक्टर (स्टांप) की अनुमति अनिवार्य हो. रजिस्ट्रेशन एक्ट की धारा 18-K के अनुसार, 7/12 एक्सट्रैक्ट एक महीने से पुराना नहीं होना चाहिए और पूरी ओनरशिप का दस्तावेज़ जरूरी है. 20 अप्रैल 2025 के नोटिफिकेशन का हवाला देते हुए कहा गया कि सरकारी जमीनों से जुड़े दस्तावेज़ों का रजिस्ट्रेशन सब-रजिस्ट्रार नहीं कर सकते. अभी यह नियम केवल स्पष्ट सरकारी स्वामित्व पर लागू होता है, इसे धुंधली या आंशिक सरकारी स्वामित्व वाली स्थितियों में भी लागू किया जाना चाहिए. 42 करोड़ रुपये की स्टांप ड्यूटी का नोटिस इसी बीच IGR दफ्तर ने अमाडिया एंटरप्राइजेज को 42 करोड़ रुपये की स्टांप ड्यूटी की वसूली पर अपना पक्ष रखने के लिए नोटिस भेजा है. एक अधिकारी ने बताया, कंपनी ने 15 दिन मांगे थे, लेकिन हमने उन्हें 7 दिन का ही समय दिया है. अन्य जांच रिपोर्टें भी आएंगी राजस्व विभाग और सेटलमेंट कमिश्नर की रिपोर्ट भी तैयार हो रही है. तीनों रिपोर्टें अतिरिक्त मुख्य सचिव (राजस्व) विकास खर्गे को भेजी जाएंगी. वे इस मामले की जांच के लिए मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस द्वारा बनाई गई छह सदस्यीय समिति के प्रमुख हैं. सरकार ने इस डील को पहले ही रद्द कर दिया है.

रायपुर में 3 दिन के लिए मिनी PMO तैयार, 500 अफसरों के साथ PM मोदी और गृहमंत्री करेंगे महत्वपूर्ण बैठक

रायपुर  छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में 28 से 30 नवंबर तक डीजी कांफ्रेंस का आयोजन होगा, जिसमें  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अलावा केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल, देशभर के डीजीपी और केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियों के प्रमुख भी शामिल होंगे. कॉन्फ्रेंस में आतंकवाद, नक्सल, साइबर क्राइम और पुलिस सुधार पर मंथन होगा, जिसकी तैयारियों के लिए प्रशासनिक अमला जुट गया है. बंगला M-01 तीन दिनों के लिए मिनी PMO रायपुर में डीजी कॉन्फ्रेंस के दौरान नवा रायपुर का बंगला M-01 तीन दिनों के लिए मिनी PMO में तब्दील होगा. यह बंगला विधानसभा अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री रमन सिंह का बंगला है. बैठक में पीएम मोदी, अमित शाह और अजित डोभाल के अलावा 70 डीजी, पैरामिलिट्री चीफ समेत 500 अफसर जुटेंगे. इसके लिए सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए जा रहे हैं और NSG की तैनाती की जा रही है. इसके अलावा 400 गाड़ियां तैयार की गई है. बैठक में किस रणनीति पर होगी चर्चा? डीजी कॉन्फ्रेंस (DG Conference) के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह मुख्य रूप से नक्सलवाद, आतंकवाद, साइबर क्राइम और पुलिस सुधार पर चर्चा करेंगे. नक्सलियों के खात्मे के लिए मार्च 2026 की डेडलाइन तय है, जिसमें अब सिर्फ पांच महीने का समय बचा है. ऐसे में यह बैठक नक्सलवाद के खात्मे को लेकर बेहद अहम मानी जा रही है. डीजी कॉन्फ्रेंस के दौरान देशभर के पुलिस महानिदेशकों और केंद्रीय बलों के प्रमुख अधिकारियों की मौजूदगी में नक्सलवाद खत्म करने पर चर्चा होगी और इसको लेकर रणनीति तय की जाएगी. इसके अलावा आधुनिक पुलिसिंग के तरीकों, तकनीक का उपयोग करके निगरानी (जैसे तकनीकी निगरानी), आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जुड़ी सुरक्षा चुनौतियों और राज्यों के बीच खुफिया जानकारी साझा करने (इंटेलिजेंस शेयरिंग) जैसे महत्वपूर्ण आंतरिक सुरक्षा के विषयों पर विस्तार से चर्चा होगी और योजनाएं बनाई जाएंगी. आईआईएम भवन में होग कॉन्फ्रेस! डीजी कॉन्फ्रेंस सम्मेलन का आयोजन नवा रायपुर स्थित भारतीय प्रबंधन संस्थान (IIM) भवन में होगा. प्रधानमंत्री नरेंद्रमोदी के रात्रि विश्राम के लिए बंगला M-01 के चुनाव के पीछे खास वजह हो सकती है. इस बंगले से आईआईएम और नया विधानसभा भवन बेहद नजदीक हैं, जिससे आवागमन में सहूलियत होगी.