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Apple ने भारत में बढ़ाई रफ्तार, उत्पादन 53% उछला, ग्लोबल iPhone प्रोडक्शन में बड़ी हिस्सेदारी

नई दिल्ली  दिग्गज अमेरिकी टेक्नोलॉजी कंपनी एप्पल ने 2025 में भारत में उत्पादन करीब 53 प्रतिशत बढ़ाया है और इस दौरान करीब 5.5 करोड़ यूनिट्स की असेंबली की है, यह आंकड़ा इससे पहले के वर्ष में 3.6 करोड़ यूनिट्स था। यह जानकारी रिपोर्ट्स में दी गई। ब्लूमबर्ग की ओर से जारी रिपोर्ट में कहा गया कि एप्पल अमेरिका में चीनी उत्पादों पर लगने वाले टैरिफ से बचने के लिए भारत में अपने करीब एक चौथाई फ्लैगशिप प्रोडक्ट्स का उत्पादन कर रहा है। रिपोर्ट में कहा गया कि एप्पल वैश्विक स्तर पर प्रतिवर्ष लगभग 22-23 करोड़ आईफोन का उत्पादन करता है, जिसमें भारत की हिस्सेदारी तेजी से बढ़ रही है। इसकी वजह सरकार द्वारा प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (पीएलआई) के तहत मिलने वाला प्रोत्साहन है। पीएलआई के तहत मिलने वाले प्रोत्साहन ने चीन की तुलना में कमजोर आपूर्ति श्रृंखलाओं और रसद संबंधी चुनौतियों जैसी संरचनात्मक लागत संबंधी कमियों को दूर करने में मदद की है। एप्पल अब भारत में फॉक्सकॉन टेक्नोलॉजी ग्रुप, टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स और पेगाट्रॉन कॉर्प जैसे आपूर्तिकर्ताओं के माध्यम से आईफोन 17 सीरीज के सभी मॉडल, जिनमें प्रो और प्रो मैक्स मॉडल भी शामिल हैं, का निर्माण करती है। आईफोन 15 और 16 जैसे पुराने मॉडल घरेलू बिक्री और निर्यात के लिए स्थानीय स्तर पर ही बनाए जा रहे हैं। भारत में बिक्री 9 अरब डॉलर से अधिक हो जाने के बाद, एप्पल अपने रिटेल नेटवर्क का विस्तार कर रहा है और अब इसके छह स्टोर हो चुके हैं। साथ ही, कंपनी इस साल के अंत में भारत में एप्पल पे लॉन्च करने की तैयारी कर रही है। इंडस्ट्री के आंकड़ों के अनुसार, 2025 में भारत से निर्यात होने वाली सबसे मूल्यवान वस्तु एप्पल का आईफोन बन गया है। इस दौरान देश में स्थित प्लांट्स से एप्पल ने लगभग 23 अरब डॉलर मूल्य के आईफोन निर्यात किए गए, जिनमें से अधिकतर अमेरिका भेजे गए। जनवरी-दिसंबर की अवधि में कुल 30.13 अरब डॉलर मूल्य के निर्यात के साथ, स्मार्टफोन पहली बार भारत की शीर्ष निर्यात श्रेणी बन गई है। कुल स्मार्टफोन निर्यात में एप्पल की हिस्सेदारी 76 प्रतिशत रही है। 

क्या आपको ऐपल का सबसे सस्ता मैकबुक लेना चाहिए? जानिए 4 फायदे और 3 नुकसान

नई दिल्ली होली की रात 4 मार्च को ऐपल ने भारतीय ग्राहकों के लिए बहुत बड़ी पेशकश कर दी। उसने अपना अबतक का सबसे सस्‍ता मैकबुक (MacBook Neo) लॉन्‍च कर दिया, जिसकी शुरुआती कीमत 69,900 रुपये है। आज के जमाने में इस कीमत में नॉर्मल विंडोज लैपटॉप आ रहे हैं। अगर कोई प्रीमियम एंड्रॉयड टैबलेट खरीदने जाए तो टैब+कीबोर्ड लेने में उसके भी 60 से 65 हजार रुपये चल जाएंगे। MacBook Neo इन सभी के लिए बहुत बड़ी चुनौती बन सकता है। ऐसे भारतीय ग्राहक जिन्‍हें मैकबुक खरीदने की चाहत है, लेकिन बजट टाइट है, उनके लिए MacBook Neo तोहफे जैसा होने वाला है। लेकिन क्‍या इसमें वो सब फीचर्स हैं जो मैकबुक एयर में मिलते हैं? MacBook Neo लेने की योजना बना रहे लोगों को इसे खरीदने के 4 कारण और ना खरीदने के 3 कारण जान लेने चाहिए। MacBook Neo मेटल बिल्‍ड MacBook Neo को ऐपल ने उसी तरह से डिजाइन और बिल्‍ड किया है जैसे वह मैकबुक एयर को करती है। यह देखने में ब‍िलकुल भी चीप या सस्‍ते नहीं लगेंगे। उसी प्रीमियनेस का एहसास होगा। एल्‍युमीनियम बिल्‍ड होने के कारण गिरने पर लैपटॉप में डेंट आ सकता है, लेकिन यह टूटेगा नहीं। इसके चारों तरफ से राउंडेड ऐज हैं तो मैकबुक निओ को पकड़ने में हैंडी बनाते हैं। इन्‍हें इस तरह से बनाया गया है कि सामने वालों को यह पता ही नहीं चलेगा कि आप कौन सा मैकबुक इस्‍तेमाल कर रहे हैं बशर्ते कि उसे कलर वेरिएंट की जानकारी ना हो। कलर ऑप्‍शंस बिलकुल अलग MacBook Neo के कलर ऑप्‍शंस एकदम अलग हैं। इसे सिल्‍वर, ब्‍लश, सिटरस और इंडिगो कलर्स में लाया गया है। वो यूजर्स जिन्‍हें चटख रंगों वाली डिवाइस पसंद हैं, उनके लिए MacBook Neo एक ट्रेंडी गैजेट बन सकता है। ऐसा लगता है क‍ि ऐपल ने यूथ और कॉलेज गोइंड स्‍टूडेंट्स को ध्‍यान में रखकर मैकबुक निओ के कलर ऑप्‍शंस का चुनाव किया है। आज तक नहीं चलाया मैकबुक तो बनेगा ग्रेट डील भारत में बहुत बड़ी आबादी अभी ऐपल के इकोसिस्‍टम से जुड़ी नहीं है। ऐसे यूजर्स जिन्‍होंने आज तक मैकबुक इस्‍तेमाल नहीं किया, लेकिन उसे चलाने की दिली ख्‍वाहिश है, उनके लिए लिए MacBook Neo ग्रेट डील बनेगा। फर्स्‍ट टाइम बायर्स मैकबुक निओ के साथ इसके यूजर इंटरफेस से परिच‍ित हो सकते हैं और भविष्‍य में एयर या प्रो मॉडल लेने के बारे में फैसला ले सकते हैं। लंबे समय तक अपडेट, परफॉर्मेंस भी बरकरार ऐपल अपने प्रोडक्‍ट्स को लंबे समय तक अपडेट देती है। मैकबुक निओ को लंबे समय तक अपडेट मिलने से यह नया बना रहेगा और खास बात है कि मैकबुक की परफॉर्मेंस जल्‍दी कमजोर नहीं पड़ती। वह कई साल तक भी पूरी क्षमता के साथ काम करते हैं। MacBook Neo में लगा A18 Pro चिपसेट सबसे पहले साल 2024 में आए आईफोन्‍स में देखा गया था। यह मैकबुक को चलाने के लिए भी पर्याप्‍त है। अगर आप बहुत हैवी यूजर नहीं हैं। बिजनेस जरूरतों के लिए मैकबुक चलाना चाहते हैं तो MacBook Neo निराश नहीं करेगा। इन 3 वजहों से कर सकते हैं रिजेक्‍ट     MacBook Neo में बैकलिट कीबोर्ड नहीं है। जिन्‍हें बैकलिट की आदत है यह जरूरी फीचर है, उन्‍हें इसे नहीं लेना चाहिए।     मैकबुक के लोकप्र‍िय फीचर्स में शामिल टच आईडी, MacBook Neo में सिर्फ 512 जीबी वेरिएंट में मिलती है। 256 जीबी वेरिएंट में यह नहीं मिलेगी।     MacBook Neo को लाइट वर्क के लिए लाया गया है। स्‍टूडेंट्स और बिजनेसेस के लिए यह बना है। बहुत ज्‍यादा हैवी टास्‍क करने हैं तो इसे खरीदने की योजना ना बनाएं। MacBook Neo Vs MacBook Air एक्‍सपर्ट के अनुसार, MacBook Neo और MacBook Air का डिस्‍प्‍ले लगभग एक जैसा है। प्रमुख फर्क चिपसेट का है। मैकबुक एयर में M सीरीज डेस्कटॉप-लेवल चिप इस्तेमाल की गई है। जबकि Neo में A18 Pro चिपसेट है, जिसे हमने आईफोन्‍स में देखा है। हालांकि दोनों ही Mac ऑपरेटिंग सिस्टम पर चलते हैं। Neo में बैकलिट कीबोर्ड कीज नहीं हैं। 512GB ऑप्शन में फिंगरप्रिंट स्कैनर यानी टच आईडी मिलती है। इसमें कम स्पीकर्स और माइक्रोफोन्स हैं। निओ में 3.5mm हेडफोन जैक तो है, लेकिन चार्जिंग के लिए कोई खास MagSafe पोर्ट नहीं है।

टेक जगत में हलचल: एपल के खास इवेंट में हो सकते हैं बड़े लॉन्च

नई दिल्ली एपल एक खास और स्पेशल इवेंट का आयोजन करने वाला है, इस इवेंट में आप लोगों के लिए कई नए प्रोडक्ट्स लॉन्च किए जा सकते हैं. इवेंट के दौरान सस्ते iPhone 17e, नए कम कीमत वाले Macbook, iPad प्रोडक्ट्स की जानकारी मिल सकती है. ऐसा लगता है कि कंपनी स्पेशल Apple एक्सपीरियंस पर फोकस करते हुए एक स्पेशल गैदरिंग कर रही है, इसलिए हो सकता है कि ऑनलाइन इवेंट होस्ट करते या बड़ी घोषणा न की जाए. कंपनी इन डिवाइस को न्यूयॉर्क शहर और दुनिया के दूसरे हिस्सों में कुछ खास लोगों को दिखा सकती है. 9to5Mac और कुछ और सोर्स की रिपोर्ट में इस इवेंट के इनवाइट का जिक्र किया गया है. दावा किया गया है कि Apple iPhone 17e, बजट MacBook, M5 Pro MacBook Pro और कुछ iPad मॉडल्स के अपग्रेड की घोषणा हो सकती है. ये प्रोडक्ट खीचेंगा सबका ध्यान बजट MacBook हर किसी का ध्यान अपनी ओर खींचेगा, उम्मीद है कि मैकबुक का सस्ता मॉडल iPhone 16e की तरह नहीं होगा और लाखों लोगों के लिए ये एक मजबूत ऑप्शन बनेगा. यहां आईफोन 16ई का जिक्र इसलिए किया गया है क्योंकि 16ई लोगों को कुछ खास पसंद नहीं आया है. Apple ने iPhone को कई लोगों के लिए आकर्षक बना दिया है. बजट MacBook की भारत में कीमत लगभग 60,000 हजार रुपए ($599) हो सकती है. अर्फोडेबल मैकबुक मॉडल को ए18 प्रो बायोनिक चिपसेट के साथ लॉन्च किया जा सकता है. इस डिवाइस में 12.9 इंच एलसीडी डिस्प्ले दी जा सकती है और इस मॉडल को ब्लू, येलो और पिंक कलर ऑप्शन्स में ग्राहकों के लिए उतारा जा सकता है. M5 MacBook Pro वर्जन में हार्डवेयर अपग्रेड होने की संभावना है लेकिन फिलहाल इस मॉडल के अगले महीने लॉन्च को लेकर किसी भी तरह का कोई संकेत नहीं मिला है.

युद्ध की आंच UAE तक: Apple ने सुरक्षा कारणों से ऑफिस और रिटेल स्टोर्स बंद किए

संयुक्‍त अरब अमीरात ईरान-अमेरिका-इस्राइल की जंग में घ‍िरे मिड‍िल ईस्‍ट में हालात को देखते हुए दिग्‍गज कंपनी ऐपल ने UAE (संयुक्‍त अरब अमीरात) में अपने कॉरपोरेट ऑफ‍िस और सभी ऐपल स्‍टोर्स को अस्‍थायी तौर पर बंद कर दिया है। MacRumours की रिपोर्ट में बताया गया है क‍ि कंपनी ने अपने स्‍टोर्स को कम से कम मंगलवार 3 मार्च तक के लिए बंद किया है। आगे की स्‍थ‍ित‍ि को देखते हुए स्‍टोर्स खोलने पर फैसला लिया जाएगा। दिलचस्‍प यह है कि कंपनी इस हफ्ते अपने कई नए गैजेट लॉन्‍च करने वाली है, जिनमें iphone 17e को भी शामिल बताया जा रहा है। UAE में 3 मार्च तक बंद रहेंगे ऐपल स्‍टोर्स रिपोर्ट के अनुसार, UAE में ऐपल स्‍टोर्स को 3 मार्च तक बंद रखा जाएगा। यूएई में बड़ी संख्‍या में भारतीय रहते हैं और ऐपल स्‍टोर्स उनके लिए तब पसंदीदा जगह हाे जाती है, जब उन्‍हें नया ऐपल गैजेट खरीदना होता है। ऐपल इस सप्‍ताह अपने कई नए गैजेट लेकर आने वाली है। इनमें नया आईपैड, आईफोन 17e, मैक शामिल हो सकता है। अगर ऐपल स्‍टोर्स को अधिक दिनों तक बंद रखा गया तो कंपनी की बिक्री पर भी इसका असर देखने को मिल सकता है। इन जगहों पर बंद रहेंगे ऐपल स्‍टोर्स     दुबई मॉल     मॉल ऑफ द ऐमिरेट्स     यास मॉल     अल जिमी मॉल     अल मरिया आईलैंड SIM स्‍कैम का खतरा बढ़ा मिडिल ईस्‍ट में बढ़ते तनाव के बीच यूएई में सिम स्‍कैम के मामलों का खतरा भी बढ़ गया है। दुबई पुलिस ने इसको लेकर अपने लोगों को चेतावनी दी है। बताया जा रहा है कि कुछ लोग क्राइसि‍स मैनेजमेंट अधिकारी बनकर लोगों से संपर्क करने की कोशिश कर रहे हैं। इससे बचने के लिए लोगों से उनकी पर्सनल डिटेल्‍स ना बताने की हिदायत दी गई है। साथ ही किसी संदिग्‍ध कॉल या मैसेज पर ना रिप्‍लाई करने को कहा गया है। पुलिस ने चेतावनी दी है कि मदद के नाम साइबर धोखेबाज लोगों की जरूरी जानकारी चुरा सकते हैं। भारत के संदर्भ में यह खबर इसलिए महत्‍वपूर्ण है क्‍योंकि दुबई में बड़ी संख्‍या में भारतीय रहते हैं। अगर आपका भी कोई जानकार, करीबी इन जगहों पर है तो उसे सिम स्‍कैम के बारे में सतर्क अवश्‍य करें।

Apple का नया आलीशान ऑफिस बेंगलुरु में, ₹2.84 करोड़ मासिक किराया

बेंगलुरु  Apple बेंगलुरु में 10 साल के लिए ऑफिस स्पेस लीज पर लेकर भारत में अपना विस्तार कर रहा है. रिपोर्ट के अनुसार, दिग्गज टेक कंपनी ने 'एम्बेसी जेनिथ' (Embassy Zenith) नाम की कमर्शियल ऑफिस टावर में 1.21 लाख वर्ग फुट का वर्कस्पेस हासिल किया है, जिसका मासिक किराया 2.84 करोड़ रुपये है. इस विस्तार के बाद, एप्पल अब इस पूरी इमारत में कुल 3.89 लाख वर्ग फुट क्षेत्र का उपयोग कर रहा है. रियल एस्टेट डेटा एनालिटिक्स फर्म 'प्रॉपस्टैक' (Propstack) द्वारा प्राप्त दस्तावेजों के मुताबिक, नया लीज समझौता सटीक रूप से 1,21,203 वर्ग फुट के चार्जेबल एरिया के लिए है. एप्पल ने पूरे 10 साल के लिए  ऑफिस लीज पर लिया है. इस जगह का कुल किराया लगभग 1,333 करोड़ रुपये होगा. यह ऑफिस स्पेस इमारत की ग्राउंड फ्लोर से लेकर चौथी मंजिल तक फैला हुआ है. 14.24 करोड़ की सिक्योरिटी जमा की यह प्रॉपर्टी मैक चार्ल्स (इंडिया) द्वारा लीज पर दी गई है और इस लीज की शुरुआत 25 सितंबर 2025 से हो चुकी है. आधिकारिक दस्तावेजों के अनुसार, एप्पल पहले ही सिक्योरिटी डिपोजिट के रूप में 14.24 करोड़ रुपये का भुगतान कर चुका है.  यह भी रिपोर्ट किया गया है कि 3 अप्रैल 2026 से किराए में हर साल 4.5% की वृद्धि होगी. समझौते में यह भी उल्लेख किया गया है कि एप्पल 2 अप्रैल 2030 से पहले इस लीज को समाप्त नहीं कर सकता है. इसके अलावा, एप्पल 123 पार्किंग स्लॉट के लिए अलग से मासिक शुल्क का भुगतान करेगा, जिसकी कीमत 11.07 लाख रुपये तय की गई है. हालांकि रियल एस्टेट डेटा एनालिटिक्स ने विस्तार के इस विवरण का खुलासा किया है, लेकिन एप्पल ने इस नए जोड़े गए स्पेस के बारे में अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की है. फिर भी, कंपनी धीरे-धीरे अपने ऑफिस और रिटेल स्टोर नेटवर्क को बढ़ाकर भारत में अपनी उपस्थिति का विस्तार कर रही है.

बिना टावर भी चलेगा फोन! ऐपल ला सकता है एंटीना वाला स्मार्ट कवर

एंटीना वाला फोन कवर, जी हां आपने सही सुना। लेटेस्ट रिपोर्ट के अनुसार, Apple एक नए स्मार्ट केस डेवलप करने पर विचार कर रहा है। इसमें एक बड़ा और ज्यादा एडवांस्ड एंटीना सिस्टम जोड़ जाएगा ताकि सैटेलाइट कम्युनिकेशन को काफी बेहतर बनाया जा सके। बता दें कि कंपनी ने अपने आईफोन में 2022 में सैटेलाइट के जरिए इमरजेंसी SOS फीचर लॉन्च किया था। इसके बाद अब ऐपल भविष्य में आने वाले फोन्स में कई बड़े अपग्रेड देने पर विचार कर रही है। लेटेस्ट पेटेंट से पता चलता है कि इमरजेंसी SOS फीचर में जल्द ही एक बड़ा अपग्रेड आ सकता है। इस फीचर को बेहतर बनाने के लिए नए स्मार्ट कवर का पेटेंट कराया गया है। फोन के एंटीना नहीं होते इतने पावरफुल Apple ने iPhone 14 के साथ सैटेलाइट के जरिए इमरजेंसी SOS की शुरुआत की थी। इस फीचर के साथ कंपनी ने लोगों को चौंका दिया था। यूजर्स अपने आईफोन को लो अर्थ ऑर्बिट सैटेलाइट की ओर पॉइंट करके इमरजेंसी सर्विस से संपर्क कर सकते हैं। लेकिन फोन के अंदर दिए गए एंटीना का सरफेस एरिया और पावर सीमित होती है, इसलिए डेटा ट्रांसमिशन भी सीमित हो जाता है। बिल्डिंग, पेड़ और जमीन के कारण सैटेलाइट के साथ कनेक्शन बनाए रखना में मुश्किल आती है। कवर बड़े ग्रुप के साथ बनाता है कनेक्शन इस समस्या को हल करने और अपनी सैटेलाइट SOS को और भी बेहतर बनाने के लिए Apple ने एक हटाने वाले कवर के लिए पेटेंट फाइल किया है। इसे फेज्ड ऐरे एंटीना के तौर पर काम करने के लिए डिजाइन किया गया है। यह इलेक्ट्रॉनिक तरीके से सिग्नल बीम बनाने और उन्हें चलाने के लिए कई ट्रांसमीटर और रिसीवर का इस्तेमाल करता है। कवर किसी एक सैटेलाइट पर लॉक होने के बजाय बड़े ग्रुप के साथ कनेक्शन बनाए रखता है। यह आसमान में घूमते हुए सैटेलाइट के बीच आसानी से शिफ्ट हो सकता है। पेटेंट के इलस्ट्रेशन में एक फोल्ड-आउट कवर दिखाया गया है। यह आसमान की ओर पॉइंट करता है और डेडिकेटेड रेडियो फ्रीक्वेंसी (RF) लिंक या नियर-फील्ड कम्युनिकेशन (NFC) के जरिए iPhone के साथ सिंक होता है। ज्यादा डेटा भेजने में मिलेगी मदद केस में एक बड़ा एंटीना लगा है, जो iPhone को ज्यादा डेटा भेजने में मदद कर सकता है। इसके बाद, फोन शायद ज्यादा सैटेलाइट कनेक्टिविटी को सपोर्ट कर सकता है। यह होने वाली रुकावट को कम कर सकता है और ट्रांसमिशन की ताकत को भी बढ़ा सकता है। हालांकि, इसे कब मार्केट में लाया जाएगा या नहीं, इस बारे में अभी कोई जानकारी नहीं है। लेकिन ये साफ है कि आईफोन कवर के साथ अगर एनटीना लगा होगा तो SOS सर्विस काफी बेहतर हो जाएगी।

iPhone खोना पड़ा भारी? नहीं! Apple ने थमा दिया 2TB का नया मॉडल

नई दिल्ली एक शख्स के लिए उसके iPhone का खो जाना बेहद फायदेमंद साबित हुआ। दरअसल Reddit यूजर 'ScienceFuture2300' ने आप बीती शेयर करते हुए बताया कि किस तरह उसका 256GB स्टोरेज वाला iPhone 17 Pro Max खो गया था। इसके बाद जब उसने AppleCare+ प्लान के तरह फोन के चोरी या गुमशुदगी का क्लेम फाइल किया, तो ऐपल ने उसे 8 गुना ज्यादा स्टोरेज वाला iPhone लौटा दिया। गौर करने वाली बात है कि इस शख्स का iPhone सिर्फ 256 GB का था लेकिन बदले में उसे 2TB वाला मॉडल मिल गया। सर्विस सेंटर की गलती से यूजर की मौज रेडिट पर शेयर किया गया ये मामला,(REF.) काफी दिलचस्प है। Reddit यूजर 'ScienceFuture2300' को उनके 256GB वाले iPhone 17 Pro Max के बदले 2TB वाला मॉडल थमा दिया गया। इसे लेकर यूजर ने अपने पोस्ट में फोन के सीरियल नंबर और स्टोरेज से जुड़ी तस्वीरें भी शेयर की हैं। बता दें कि iPhone के सीरियल नंबर के जरिए पता लगाया जा सकता है कि फोन नया है या Apple द्वारा रिप्लेस किया गया यूनिट। खोने पर क्यों मिला रिप्लेसमेंट? आपके मन में सवाल आ सकता है कि इस यूजर को आखिर फोन खोने पर रिप्लेसमेंट क्यों मिला। बता दें कि AppleCare+ प्लान लेने पर यूजर फोन खराब होने, टूटने और खो जाने पर ऐपल से रिप्लेसमेंट मांग सकता है। iPhone के टूटने या खराब होने पर अगर फोन रिपेयर हो सकता है, तो ऐपल फोन ठीक करके देता है। वहीं अगर फोन ठीक होने की हालत में न हो या खो जाए, तो AppleCare+ प्लान के तहत बदले में फोन उपलब्ध कराया जाता है। इसके लिए कुछ चार्ज ऐपल लेता है। हालांकि जिस फोन के खोने की शिकायत की जाती है, उसे ऐपल बैकएंड से ब्लॉक कर देता है ताकि उसका इस्तेमाल कोई न कर पाए। ऐपल ने क्यों दिया ज्यादा महंगा फोन? कई बार यूजर जिस फोन के लिए क्लेम करता है, वह अगर ऐपल के पास न हो तो ऐपल हर्जाने के तौर पर उससे बेहतर मॉडल अपने यूजर को उपलब्ध कराता है। ऐसा कयास लगाया जा रहा है कि संभव है इस यूजर के फोन का मॉडल ऐपल के पास स्टॉक में नहीं होगा। इसके साथ ही ऐसा होने पर ऐपल किसी तरह का एक्सट्रा चार्ज नहीं लेता। ऐसा ही इस यूजर के साथ भी हुआ है। Apple ने पहले भी दिखाई है उदारता ऐसा पहली बार नहीं है कि ऐपल ने किसी के साथ इतनी उदारता दिखाई हो। 2018 में इंटेल मैकबुक प्रो के मालिक को रिपेयर के बदले सीधे M4 Max चिप वाला मैकबुक प्रो दे दिया गया था। इसी तरह 2019 में मैकबुक प्रो के मालिक को M5 मॉडल वाला लेटेस्ट मैकबुक प्रो रिप्लेसमेंट में मिला था। यही वजह है कि अक्सर लोग ऐपल के प्रोडक्ट लेते समय Apple का Care+ प्लान जरूर लेते हैं।

भारत ने C+1 फॉर्मूला के लिए बिछाया रेड कारपेट, यही रणनीति बनाएगी सोने की चिड़ीया

नई दिल्ली ज‍ियोपॉल‍िट‍िक्‍स में अब खेल इकोनॉमी के जर‍िये खेला जा रहा है. आपको याद होगा, जब कोव‍िड आया तो पूरा का पूरा सप्‍लाई चेन ह‍िलने लगा. यूक्रेन संकट ने आग में घी का काम क‍िया.दुन‍िया को समझ नहीं आया क‍ि अब जाएं तो जाएं कहां.ज‍िन देशों के साथ वे कारोबार कर रहे थे,वे फंस चुके थे. रही सही कसर अमेर‍िकी टैर‍िफ ने पूरी कर दी. अब दुन‍िया को डर लग रहा क‍ि अगर चीन पर अमेर‍िकी सख्‍ती बढ़ी, ताइवान पर हमला हुआ तो मुश्क‍िल होगी. इसल‍िए ज्‍यादातर देश ‘चीन + 1’ (C+1) फार्मूला अपना रहे हैं. भारत यह भांप चुका है. इसील‍िए बजट में सरकार ने ऐसे देशों, ऐसी कंपन‍ियों के ल‍िए रेड कारपेट ब‍िछा द‍िए हैं. मोबाइल, लैपटॉप और सेमीकंडक्टर बनाने वाली कंपनियों को टैक्स में छूट दी गई है. ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ के लिए नेशनल सिंगल विंडो सिस्टम को बजट से ताकत दी है ताकि विदेशी कंपनियां चीन छोड़कर भारत आएं. मैसेज साफ है क‍ि अगर ताइवान या चीन में संकट आता है, तो भारत दुनिया की बैकअप फैक्ट्री बनने के ल‍िए पूरी तरह तैयार है. और यहीं से फ‍िर सोने की च‍िड़‍िया बनने का रास्‍ता खुलेगा. 5 ट्रिलियन डॉलर की इकोनॉमी बनने का एक्सप्रेसवे दुनिया की 40% मैन्युफैक्चरिंग पर चीन का कब्जा है. यहीं से पूरी दुन‍िया में जरूरत की बहुत सारी चीजें जा रही हैं. लेकिन साल 2026 ‘टर्निंग पॉइंट’होने जा रहा है. शी जिनपिंग की विस्तारवादी नीतियों और ब्लैक बॉक्स जैसी अर्थव्यवस्था से तंग आकर ग्लोबल कंपनियां अब एक ऐसे देश की तलाश में हैं, जो न केवल लोकतांत्रिक हो बल्कि जिसके पास चीन को टक्कर देने वाला स्केल भी हो.भारत ने इसी ‘चीन प्लस वन’ (C+1) मौके को भुनाने के लिए अपना ‘रेड कारपेट’ बिछा दिया है. यह सिर्फ एक नीति नहीं, बल्कि 5 ट्रिलियन डॉलर की इकोनॉमी बनने का वह एक्सप्रेसवे है जो भारत को फिर से ‘विश्व गुरु’ की गद्दी पर बैठाएगा. दुनिया को आखिर भारत की जरूरत क्यों है?     सप्लाई चेन का वेपनाइजेशन: कोरोना काल में चीन ने मेडिकल सप्लाई रोककर दुनिया को अपनी ताकत दिखाई. दुनिया समझ गई कि एक ही सप्लायर पर निर्भर रहना आत्मघाती है. अब एपल (Apple) और सैमसंग (Samsung) जैसी कंपनियों को अपनी सुरक्षा के लिए भारत जैसा भरोसेमंद पार्टनर चाहिए.     बूढ़ा होता चीन: चीन की वर्किंग पॉपुलेशन तेजी से घट रही है. वहां मजदूरी महंगी हो गई है. दूसरी ओर, भारत के पास 65% युवा आबादी है, जो अगले 30 साल तक दुनिया को सबसे सस्ती और कुशल लेबर दे सकती है.     ताइवान का साया: दुनिया की 90% एडवांस चिप्स ताइवान में बनती हैं. चीन की ताइवान पर नजर ने वैश्विक टेक कंपनियों को डरा दिया है. उन्हें एक ऐसा ‘बैकअप’ चाहिए जो युद्ध की स्थिति में भी ग्लोबल सप्लाई चेन को चालू रख सके. चीन की राह रुकी, तो भारत को कैसे होगा बंपर फायदा?     इलेक्ट्रॉनिक्स का नया गढ़: बजट 2026 में मोबाइल और लैपटॉप कंपोनेंट्स पर इम्पोर्ट ड्यूटी घटाना एक सोची-समझी चाल है. भारत अब केवल असेंबली नहीं, बल्कि कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग का हब बन रहा है. 2025 तक भारत का इलेक्ट्रॉनिक्स एक्सपोर्ट 120 बिलियन डॉलर पार करने का अनुमान है.     सेमीकंडक्टर: चीन की दुखती रग: चीन चिप वॉर में अमेरिका से पिछड़ रहा है. भारत ने इसका फायदा उठाते हुए 1.5 लाख करोड़ रुपये का ‘सेमीकंडक्टर मिशन’ शुरू किया है. टाटा और माइक्रोन (Micron) जैसी कंपनियों के प्लांट भारत को उस लिस्ट में खड़ा कर देंगे, जहाँ आज केवल ताइवान और चीन हैं.     केमिकल सेक्टर में ‘प्रिवी’ जैसे खिलाड़ियों का दबदबा: चीन में पर्यावरण नियमों की सख्ती के कारण वहां के केमिकल प्लांट बंद हो रहे हैं. इसका सीधा फायदा प्रिवी स्पेशलिटी और आरती इंडस्ट्रीज जैसी भारतीय कंपनियों को मिल रहा है, जो ग्लोबल सप्लाई चेन में चीन की जगह ले रही हैं. कंपनियों को क्या मिल रहा है? PLI स्कीम: जितना बनाओगे, उतना पैसा पाओगे. 14 से ज्यादा सेक्टरों में सरकार कंपनियों को कैश इंसेंटिव दे रही है. यह चीन की सब्सिडी का भारतीय जवाब है. नेशनल सिंगल विंडो सिस्टम: पहले भारत में जमीन से लेकर बिजली तक के लिए 50 दफ्तरों के चक्कर लगाने पड़ते थे. अब एक ही पोर्टल पर सारी क्लीयरेंस मिल रही है. ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ अब केवल कागजों पर नहीं, जमीन पर दिख रहा है. इंफ्रास्ट्रक्चर पर भारी निवेश: बजट 2026 में इंफ्रास्ट्रक्चर पर 11.11 लाख करोड़ रुपये का आवंटन किया गया है. पीएम गतिशक्ति के तहत नए पोर्ट्स और डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर बन रहे हैं, ताकि भारत से माल भेजना चीन से भी सस्ता पड़े.

भारत में Apple पर संकट के बादल, सरकार की चेतावनी से बढ़ी टेंशन

  नई दिल्ली भारत की प्रतिस्पर्धा नियामक संस्था यानी कि Competition Commission of India (CCI) ने Apple को एक कड़ी चेतावनी जारी की है। रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक ऐपल 2021 से चल रही एंटीट्रस्ट जांच में देरी करने की कोशिश कर रही है। इससे नाराज होकर CCI ने कंपनी को आखिरी चेतावनी दी है। यह मामला इन ऐप पेमेंट से जुड़ा है और कंपनी पर 38 बिलियन डॉलर यानी कि लगभग 32 लाख करोड़ रुपये का जुर्माना लग सकता है। रिपोर्ट के मुताबिक ऐपल बार-बार जवाब देने में देरी कर रही है, जिससे जांच प्रक्रिया बाधित हो रही है। अब CCI ने साफ कर दिया है कि अगर अगले हफ्ते तक Apple ने जवाब नहीं दिया, तो वह एकतरफा कार्रवाई करेगी। क्या है पूरा मामला? भारत में ऐपल 2021 से एक एंटीट्रस्ट मामले में फंसी है, जो कि इन-ऐप पेमेंट से संबंधित है। इस कानूनी लड़ाई में कंपनी पर 38 बिलियन डॉलर का जुर्माना लग सकता है। वहीं ऐपल ने भारत के नए एंटीट्रस्ट दंड कानून को चुनौती दी है। दरअसल यह कानून CCI को जुर्माने की राशि तय करने के लिए ऐपल के ग्लोबल टर्नओवर का इस्तेमाल करने की मंजूरी देता है। इसके जवाब में CCI ने ऐपल से जांच पर अपनी आपत्तियां दर्ज करने के लिए कहा था। इस पर ऐपल को लंबे समय से मौका दिया जा रहा है। CCI की सख्त चेतावनी 31 दिसंबर 2025 एक आदेश में CCI ने कहा है कि साफ निर्देश के बाद भी बार-बार समय बढ़ाना सही नहीं है और इससे नियम-कानून कमजोर होते हैं। साथ ही ऐसा करने से मामले को समय पर खत्म करने में समस्या आती है। ऐपल को लेकर CCI का यह भी कहना है कि ऐसी छूट हमेशा के लिए नहीं दी जा सकती। अब CCI ने फैसला किया है कि अगर अगले हफ्ते तक Apple की ओर से जवाब नहीं मिलता, तो वह खुद ही आगे बढ़ेगी और फैसला लेगी। बता दें कि लंबे समय से ऐपल सरकारी आदेश के जवाब देने में सुस्ती दिखा रही है, जिससे मामले को आगे बढ़ाने में समस्या हो रही है। ऐपल का रुख और आगे क्या? रिपोर्ट के मुताबिक Apple का मानना है कि CCI अदालती कार्यवाही को रोकने की कोशिश कर रही है। इस मामले में अगली सुनवाई 27 जनवरी को है और इससे पहले ऐपल की ओर से CCI को जवाब दिया जाना संभव नहीं है। ऐसे में साफ है कि ऐपल अदालत के फैसले के इंतजार में है। हालांकि अगर Apple जवाब नहीं देती है, तो भारत सरकार सख्त कदम उठा सकती है और भारी जुर्माना लगा सकती है।

2026 में लॉन्च हो सकता है फोल्डेबल iPhone, डिजाइन लीक होने पर Apple ने किया मुकदमा

 नई दिल्ली ऐपल उन गिनी चुनी कंपनियों में से है जो अपने आने वाले प्रोडक्ट्स को सालों तक पूरी तरह छुपाकर रखती है. इसलिए आपने दूसरी कंपनियों की तरह ऐपल के किसी प्रोडक्ट का टीजर कभी नहीं देखा होगा. हालांकि सालों से ऐपल के आईफोन लॉन्च से पहले लीक हो जाते हैं.  टेक इंडस्ट्री में एक सच्चाई यह भी है कि ऐपल से जुड़ी सबसे बड़ी कहानियां अक्सर लॉन्च से पहले ही बाहर आ जाती हैं. इस बार भी कुछ ऐसा ही हुआ है. फर्क बस इतना है कि इस बार लीक किसी अफवाह या सप्लाई चेन रिपोर्ट से नहीं, बल्कि उस शख्स से आया है जिसके खिलाफ ऐपल पहले ही कानूनी कार्रवाई कर चुका है. हाल के दिनों में ऐपल के Foldable iPhone को लेकर चर्चाएं फिर तेज़ हो गई हैं. यह वही प्रोडक्ट है जिसे लेकर सालों से कहा जाता रहा है कि ऐपल इस सेगमेंट में तब तक एंट्री नहीं करेगा जब तक टेक्नोलॉजी पूरी तरह तैयार न हो जाए. अब जो जानकारी सामने आई है, वह इसी सोच को मजबूत भी करती है और नए सवाल भी खड़े करती है. जॉन प्रॉसर नाम के यूट्यूबर ने एक बार फिर से Foldable iPhone का डिजाइन लीक किया है. लीक के मुताबिक ऐपल का फोल्डेबल आईफोन बुक स्टाइल डिजाइन में हो सकता है. यानी फोन बंद रहने पर यह एक नॉर्मल बार स्मार्टफोन जैसा दिखेगा और खोलने पर टैबलेट साइज स्क्रीन में बदल जाएगा. बताया जा रहा है कि बाहर की स्क्रीन कॉम्पैक्ट होगी ताकि रोज़मर्रा के इस्तेमाल में फोन भारी न लगे, जबकि अंदर की स्क्रीन बड़ी होगी जो वीडियो, पढ़ने और मल्टीटास्किंग के लिए बनाई गई है. रिपोर्ट के मुताबिक फोल्डेबल आईफोन में क्रीज ना के बराबर होगा. फोल्डेबल फोन की सबसे बड़ी कमजोरी यही रही है कि स्क्रीन के बीच एक लाइन साफ दिखती है. इंडस्ट्री में लंबे समय से चर्चा है कि ऐपल बिना क्रीज़ या बहुत कम क्रीज़ वाली डिस्प्ले टेक्नोलॉजी पर काम कर रहा है, और इसी वजह से वह अब तक फोल्डेबल फोन लॉन्च करने से बचता रहा. इस पूरे मामले को और दिलचस्प बनाता है कानूनी बैकग्राउंड. जिस व्यक्ति ने यह जानकारी शेयर की है, उसके खिलाफ ऐपल पहले ही ट्रेड सीक्रेट चोरी करने का आरोप लगा चुका है. कंपनी का दावा है कि उसके इंटरनल सॉफ्टवेयर और डिजाइन से जुड़ी जानकारी गैरकानूनी तरीके से बाहर लाई गई. इसके बावजूद नई जानकारी सामने आना यह दिखाता है कि ऐपल के लिए अपने सीक्रेट्स को पूरी तरह कंट्रोल में रखना अब पहले जितना आसान नहीं रहा. टेक इंडस्ट्री के जानकार मानते हैं कि फोल्डेबल आईफोन की टाइमिंग भी बेहद अहम होगी. अभी तक फोल्डेबल मार्केट में सैमसंग और कुछ हद तक गूगल जैसे ब्रांड्स मौजूद हैं, लेकिन यह सेगमेंट अभी भी नीश कैटेगरी में ही गिना जाता है. ऐपल की एंट्री इस कैटेगरी को मेनस्ट्रीम बना सकती है, ठीक वैसे ही जैसे उसने पहले स्मार्टफोन और स्मार्टवॉच के साथ किया था. यह भी मुमकिन है कि ऐपल फोल्डेबल आईफोन को एक अलग पहचान के साथ पेश करे. चर्चा है कि कंपनी इसे प्रो या अल्ट्रा कैटेगरी में रख सकती है ताकि यह एक प्रीमियम और लिमिटेड ऑडियंस के लिए बना प्रोडक्ट लगे. इससे ऐपल को टेक्नोलॉजी को धीरे धीरे स्केल करने का वक्त भी मिल जाएगा. फिलहाल ऐपल की तरफ से इस पर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है. कंपनी हमेशा से लीक और रूमर्स पर प्रतिक्रिया नहीं देती. लेकिन इतना साफ है कि फोल्डेबल आईफोन अब सिर्फ एक दूर की संभावना नहीं रह गया है. इस साल सितंबर में ऐपल iPhone 18 सीरीज के साथ ही फोल्डेबल लॉन्च कर सकता है.