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मानसून की बेरुखी: बड़ा तालाब अधूरा, कलियासोत को चाहिए आधे से ज्यादा पानी

भोपाल  भोपाल में अब तक 15.8 इंच बारिश हो चुकी है, जो अब तक की औसत बारिश 13 इंच से पौने तीन इंच ज्यादा है। बावजूद अब तक डैम या तालाब नहीं छलके हैं। बड़ा तालाब 6.6 फीट है। कलियासोत डैम को पूरा भरने में साढ़े 10 फीट पानी की जरूरत है। पिछले साल जुलाई में ही 3 डैम- कोलार, भदभदा और कलियासोत डैम ओवरफ्लो हो गए थे। वहीं, बड़ा तालाब भी लबालब भर गया था। मौसम विभाग के अनुसार, इस बार भोपाल में बारिश के स्ट्रॉन्ग सिस्टम की एक्टिविटी कम रही है। इस वजह से तालाब और डैम में ज्यादा पानी नहीं बढ़ा, लेकिन अगले सप्ताह से फिर से बारिश का दौर शुरू होगा। जिससे अगस्त के पहले सप्ताह तक अच्छा पानी आ सकता है। सीहोर में भी तेज बारिश की दरकार सीहोर में तेज बारिश होने से कोलांस नदी उफान पर आएगी, जिससे बड़ा तालाब में पानी और बढ़ेगा। यहां भी तेज बारिश की दरकार है। सीहोर में अब तक औसत साढ़े 17 इंच पानी गिर चुका है। बड़ा तालाब: इसकी जलभराव क्षमता 1666.80 फीट है। अभी इसमें 1660.20 फीट पानी है। इसे पूरा भरने में अभी 6.60 फीट पानी की और जरूरत है। पिछली बार बड़ा तालाब जुलाई में ही भर गया था, लेकिन इस बार अभी भी खाली है। बड़ा तालाब पूरा भरने के बाद भदभदा डैम के गेट खुलते हैं। इस बार कैचमेंट एरिया में कम बारिश हुई है। जिससे कोलांस नदी लबालब होकर नहीं कही। कोलार डैम: इसका वॉटर लेवल 1516.40 फीट है। अभी इसमें 1490.74 फीट पानी जमा है। इस हिसाब से यह काफी खाली है। कोलार डैम से ही भोपाल शहर के 40% हिस्से में पानी की सप्लाई की जाती है। पिछली बार जुलाई में इसके गेट खोलने पड़े थे। केरवा डैम: कुल 1673 फीट वाले केरवा डैम में अब तक 1653.08 फीट पानी आ चुका है। बारिश नहीं होने से आवक फिलहाल थमी हुई है। कलियासोत डैम: डैम का वॉटर लेवल 1648.62 फीट है। इसकी कुल जलभराव क्षमता 1659 फीट है। इसके चलते डैम अभी भी साढ़े 10 फीट खाली है। बड़ा तालाब के गेट खुलने पर कलियासोत डैम में पानी आएगा और गेट खुल जाएंगे। पिछले साल जुलाई में ही 3 डैम- कोलार, भदभदा और कलियासोत डैम ओवरफ्लो हो गए थे। वहीं, बड़ा तालाब भी लबालब भर गया था। मौसम विभाग के अनुसार, इस बार भोपाल में बारिश के स्ट्रॉन्ग सिस्टम की एक्टिविटी कम रही है। इस वजह से तालाब और डैम में ज्यादा पानी नहीं बढ़ा, लेकिन अगले सप्ताह से फिर से बारिश का दौर शुरू होगा। जिससे अगस्त के पहले सप्ताह तक अच्छा पानी आ सकता है।  

मानसून की बेरुखी: बड़ा तालाब अधूरा, कलियासोत को चाहिए आधे से ज्यादा पानी

भोपाल  भोपाल में अब तक 15.8 इंच बारिश हो चुकी है, जो अब तक की औसत बारिश 13 इंच से पौने तीन इंच ज्यादा है। बावजूद अब तक डैम या तालाब नहीं छलके हैं। बड़ा तालाब 6.6 फीट है। कलियासोत डैम को पूरा भरने में साढ़े 10 फीट पानी की जरूरत है। पिछले साल जुलाई में ही 3 डैम- कोलार, भदभदा और कलियासोत डैम ओवरफ्लो हो गए थे। वहीं, बड़ा तालाब भी लबालब भर गया था। मौसम विभाग के अनुसार, इस बार भोपाल में बारिश के स्ट्रॉन्ग सिस्टम की एक्टिविटी कम रही है। इस वजह से तालाब और डैम में ज्यादा पानी नहीं बढ़ा, लेकिन अगले सप्ताह से फिर से बारिश का दौर शुरू होगा। जिससे अगस्त के पहले सप्ताह तक अच्छा पानी आ सकता है। सीहोर में भी तेज बारिश की दरकार सीहोर में तेज बारिश होने से कोलांस नदी उफान पर आएगी, जिससे बड़ा तालाब में पानी और बढ़ेगा। यहां भी तेज बारिश की दरकार है। सीहोर में अब तक औसत साढ़े 17 इंच पानी गिर चुका है। बड़ा तालाब: इसकी जलभराव क्षमता 1666.80 फीट है। अभी इसमें 1660.20 फीट पानी है। इसे पूरा भरने में अभी 6.60 फीट पानी की और जरूरत है। पिछली बार बड़ा तालाब जुलाई में ही भर गया था, लेकिन इस बार अभी भी खाली है। बड़ा तालाब पूरा भरने के बाद भदभदा डैम के गेट खुलते हैं। इस बार कैचमेंट एरिया में कम बारिश हुई है। जिससे कोलांस नदी लबालब होकर नहीं कही। कोलार डैम: इसका वॉटर लेवल 1516.40 फीट है। अभी इसमें 1490.74 फीट पानी जमा है। इस हिसाब से यह काफी खाली है। कोलार डैम से ही भोपाल शहर के 40% हिस्से में पानी की सप्लाई की जाती है। पिछली बार जुलाई में इसके गेट खोलने पड़े थे। केरवा डैम: कुल 1673 फीट वाले केरवा डैम में अब तक 1653.08 फीट पानी आ चुका है। बारिश नहीं होने से आवक फिलहाल थमी हुई है। कलियासोत डैम: डैम का वॉटर लेवल 1648.62 फीट है। इसकी कुल जलभराव क्षमता 1659 फीट है। इसके चलते डैम अभी भी साढ़े 10 फीट खाली है। बड़ा तालाब के गेट खुलने पर कलियासोत डैम में पानी आएगा और गेट खुल जाएंगे। पिछले साल जुलाई में ही 3 डैम- कोलार, भदभदा और कलियासोत डैम ओवरफ्लो हो गए थे। वहीं, बड़ा तालाब भी लबालब भर गया था। मौसम विभाग के अनुसार, इस बार भोपाल में बारिश के स्ट्रॉन्ग सिस्टम की एक्टिविटी कम रही है। इस वजह से तालाब और डैम में ज्यादा पानी नहीं बढ़ा, लेकिन अगले सप्ताह से फिर से बारिश का दौर शुरू होगा। जिससे अगस्त के पहले सप्ताह तक अच्छा पानी आ सकता है।  

राजधानी भोपाल में नाम बदलने की शुरुआत, ‘राम बाग’ बना अशोका गार्डन, अन्य क्षेत्रों की सूची तैयार

भोपाल  राजधानी शहर के प्रमुख जगहों के नाम बदलकर शहर सरकार 'शुद्धिकरण अभियान' चला रही है। दावा किया जा रहा है कि, अब गुलामी और विदेशी आंक्राताओं के नाम से नहीं, बल्कि भोपाल की पहचान भारतीय संस्कृति के नामों से होगी। इसी के चलते नगर निगम द्वारा हमीदिया कॉलेज, हमीदिया अस्पताल, हबीबगंज के साथ-साथ शहर के कई प्रमुख इलाकों के नाम बदलने के लिए शासन से मांग की है। इसी के तहत मेयर इन काउंसिल (MIC) ने शहर के बड़े और प्रमुख इलाके में शामिल अशोका गार्डन का नाम बदल भी दिया है। इस इलाको को अब 'राम बाग' नाम से जाना जाएगा। मीडिया से बातचीत के दौरान नगर निगम अध्यक्ष किशन सूर्यवंशी ने कहा कि, गुलामी और विदेशी आक्रांताओं के नामों को बदलना जरूरी है। भारतीय संस्कृति के नामों से भोपाल को राजा भोजपाल की पहचान मिले। कई सड़कों और संस्थानों के नाम बदलने के लिए शासन को पत्र लिखा गया है। शहर सरकार की शक्तियों का उपयोग कर अशोका गार्डन का नाम बदलकर राम बाग का प्रस्ताव पारित हुआ है। निगम अद्यक्ष ने कहा कि, भोपाल का नवाब रहा हमीदुल्लाह खान के नाम की सड़कों के नाम बदले। भोपाल का हमीदुल्लाह खान पाकिस्तान में विलय चाहता था। इसलिए ये शुद्धिकरण का अभियान है। विपक्ष के मति में भ्रम और अशुद्धि है।

बिजली उपभोक्ताओं को बड़ी सौगात, कंपनियों में 50 हजार से अधिक नए स्थायी पद मिलेंगे

भोपाल   बिजली कंपनियों में 50 हजार से अधिक नए स्थायी पद मिलेंगे। मध्य, पूर्व और पश्चिम क्षेत्र की बिजली वितरण कंपनियों में कर्मचारी-अधिकारियों की भर्ती होगी। इसका फायदा 1.78 करोड़ उपभोक्ताओं को मिलेगा। दावा है, बिजली गुल होने या बिल में गड़बड़ी जैसी शिकायतों पर कम समय में सुनवाई होगी। अभी तीनों कंपनियां कर्मचारियों की कमी झेल रही है। इसका असर उपभोक्ता सेवा पर पड़ रहा है। समय पर सुनवाई नहीं होती। बार-बार टोल फ्री नंबरों पर गुहार लगानी पड़ती है। 14 साल बाद… सब ठीक रहा तो मोहन सरकार बुधवार को होने वाली कैबिनेट में ऑर्गेनाइजेशन स्ट्रक्चर (ओएस) के प्रस्ताव को स्वीकृत कर दे सकती है। ऐसा हुआ तो कंपनियों को 14 साल बाद नए पद मिलेंगे। इससे पहले 2011 में 48 हजार पदों को स्वीकृति दी थी। तब 91 लाख उपभोक्ता थे। ऊर्जा मंत्री ने रखी बात तो मुख्यमंत्री दे दी सहमति कंपनियों में पुराने अधिकारी-कर्मचारी रिटायर्ड हो रहे हैं। ऐसे में नियमित कर्मचारियों की कमी है। जिस अनुपात में उपभोक्ता बढ़े, पद स्वीकृत नहीं हुए। 75त्न काम आउटसोर्स कर्मचारियों के भरोसे है। सूत्र बताते हैं, ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने इन विषयों को अफसरों के साथ सीएम डॉ. मोहन यादव के सामने रखा था। इसे देखते हुए उन्होंने ओएस के प्रस्ताव को कैबिनेट में लाने पर सहमति दे दी थी। ये प्रस्ताव भी आएंगे कैबिनेट के सामने     जल संसाधन विभाग के अंतर्गत कृषि सिंचाई जलकर की ब्याज माफी के प्रस्ताव पर चर्चा कर निर्णय लिया जाएगा।     ग्रामीण सड़क विकास प्राधिकरण की साधिकार समिति की 63वीं बैठक में लिए गए निर्णयों का प्रजेंटेशन कैबिनेट के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा।     वन विभाग की प्रतिकरात्मक वन रोपण निधि (कैम्पा फंड) की वार्षिक कार्ययोजना को भी मंजूरी दी जाएगी।     प्राइस सपोर्ट स्कीम के अंतर्गत ग्रीष्मकालीन मूंग और उड़द की खरीदी के लिए सरकार द्वारा दी जाने वाली सिक्योरिटी, हानि की प्रतिपूर्ति और रबी सीजन 2024-25 में टारगेट से अधिक की गई खरीदी को स्वीकृति देने पर भी विचार होगा। नियमों और विधेयकों में संशोधन पर भी चर्चा     भारतीय स्टांप अधिनियम 1899 के अनुच्छेद 1क के तहत भारतीय स्टांप (मध्यप्रदेश संशोधन) विधेयक 2025 को कैबिनेट मंजूरी देगी।     स्थानीय निधि संपरीक्षा (राजपत्रित) सेवा भर्ती नियम 1991 में संशोधन को भी मंजूरी दी जाएगी। आंगनबाड़ी केंद्रों को लेकर हो सकता है फैसला     महिला और बाल विकास विभाग के अंतर्गत धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान के तहत 66 नए आंगनबाड़ी केंद्रों की स्थापना की स्वीकृति दी जाएगी।     इन केंद्रों के लिए पदों की स्वीकृति और आंगनबाड़ी भवनों के निर्माण का प्रस्ताव भी मंजूरी के लिए रखा जाएगा।

मुख्यमंत्री यादव ने कहा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के विजन के अनुरूप मध्यप्रदेश के शहरों में इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित हो रहा

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के विजन के अनुरूप मध्यप्रदेश के शहरों में इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित हो रहा है। इससे बढ़ती नगरीय जनसंख्या की आवश्यकताओं की पूर्ति होगी। समृद्ध और विकसित शहर, प्रदेश के समावेशी विकास की आधारशिला बनेंगे। इसे साकार करने के लिए मध्यप्रदेश ग्रोथ कॉन्क्लेव का आयोजन किया जा रहा है। 'नेक्स्ट होराइजन: बिल्डिंग सिटीज ऑफ टुमॉरो' थीम पर केन्द्रित कॉन्क्लेव में मध्यप्रदेश के शहरी विकास और निवेश पर देश की रियल एस्टेट सेक्टर के दिग्गज विकसित मध्यप्रदेश@2047 के लिए शहरी विकास के ब्लूप्रिंट पर चर्चा करेंगे। शहरी क्षेत्रों में विकास की प्रगति मध्यप्रदेश में शहरी अर्थव्यवस्था तेजी से विकसित हो रही है। प्रदेश में 4 शहर ऐसे हैं जिनकी जनसंख्या 10 लाख से अधिक है। साथ ही केन्द्र की स्मार्ट सिटी परियोजना में 7 शहर शामिल हैं। शहरी क्षेत्रों में अधो-संरचाना विकास के संबंधित 72 हजार करोड़ रुपये की परियोजनाओं पर कार्य किया जा रहा है। इसी के साथ करीब 88 हजार करोड़ रुपये की शहरी क्षेत्र से जुड़ी विकास योजनाएं प्रस्तावित है। मध्यप्रदेश ने स्वच्छता के लिये देश में अपनी विशिष्ट पहचान बनाई है। इंदौर देश में पिछले 7 वर्षों से स्वच्छतम शहरों की श्रेणी में पहले नम्बर पर रहा है। भोपाल को देश की दूसरे नंबर की स्वच्छतम राजधानी बनने का गौरव हासिल किया है। प्रदेश के बजट में शहरी क्षेत्र के विकास के लिए 15 हजार 780 करोड़ रुपये प्रतिवर्ष का प्रावधान किया गया है। प्रदेश के सकल घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) में शहरी क्षेत्र का योगदान 35.55 प्रतिशत है। शहरी क्षेत्रों में संचालित केन्द्र की फ्लैग शिप योजनाओं के क्रियान्वयन में प्रदेश सबसे अच्छा प्रदर्शन करने वाले राज्यों शामिल है। नगरीय विकास से जुड़ी योजनाओं की गति तेज बनाए रखने के लिए सिंगल-विंडो सिस्टम की प्रशासनिक व्यवस्था की गई है। हाउसिंग सेक्टर में बेहतर निवेश की संभावना प्रदेश में हाउसिंग सेक्टर में निवेश की अच्छी संभावना है। अफोर्डेबल हाउसिंग में8 लाख 32 हजार से अधिक किफायती आवास तैयार किये जा चुके है। प्रदेश में 10 लाख नए आवास तैयार किये जा रहे है। इनमें 50 हजार करोड़ रूपये का निवेश होगा। रियल एस्टेट की योजनाओं के क्रियान्वयन के लिये प्रदेश में मानव संसाधन की गुणवत्तापूर्ण वर्क फोर्स उपलब्ध है। प्रदेश के शहरी क्षेत्रों में 6 हजार किलोमीटर सड़क, 80 प्रतिशत शहरी क्षेत्र में पाईपलाइन वॉटर सप्लाई कवरेज की सुविधा और शत् प्रतिशत शहरी क्षेत्र सीवरेज सिस्टम उपलब्ध है। नगरीय क्षेत्रों में स्थानीय निकायों में 23 सेवाएं ऑनलाइन डिजिटल प्लेटफार्म पर उपलब्ध कराई गई है। नगरीय निकायों में सेन्ट्रलाईज पोर्टल के माध्यम से मंजूरी दी जा रही है। प्रदेश के शहरी क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं से जुड़ी योजनाओं पर 17 हजार 230 योजनाएं क्रियान्वित की जा रही है। शहरी क्षेत्रों में स्वच्छ पर्यावरण के लिये 2 हजार 800 करोड़ और वॉटर फ्रंट से संबंधित डेव्हलपमेंट में 2 हजार करोड़ रूपये की परियोजनाओं पर कार्य किया जा रहा है। प्रदेश में शहरी क्षेत्रों में सुगम परिवहन व्यवस्था के विस्तार के लिये 21 हजार करोड़ रूपये की परियोजनाएं संचालित हैं। वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने और पेट्रोलियम ईंधन के कार्बन फुट-फ्रंट रोकने के लिए इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा दिया जा रहा है। प्रदेश के बड़े शहरों में 552 इलेक्ट्रिक बसों का संचालन शुरू किया जा रहा है। प्रदेश में इलेक्ट्रिक वाहनों को प्रोत्साहित करने के लिए इलेक्ट्रिक व्हीकल पॉलिसी-2025 लागू की गई है।