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EC-SIR की रट पर राहुल गांधी, बिहार चुनाव रिव्यू में उम्मीदवारों ने उठाए सवाल

पटना  बिहार विधानसभा चुनाव में विपक्ष की सभी रणनीति धरी की धरी रह गईं. प्रदेश के लोगों ने 20 साल से चली आ रही सरकार पर ही भरोसा जताया. तेजस्‍वी यादव और राहुल गांधी की जोड़ी को करारी शिकस्‍त का सामना करना पड़ा. चुनाव से ठीक पहले बिहार में चुनाव आयोग ने वोटर लिस्‍ट को संशोधित करने के लिए विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान चलाया. चुनाव आयोग के इस कदम से मतदाता सूची से नाम कटे तो जुड़े भी. विपक्षी दलों ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग के इस कदम का मकसद उसके वोटर्स के नाम को काटना था. इसमें केंद्र सरकार को भी लपेटा गया. आयोग और विपक्ष के बीच इसको लेकर बयानबाजियां भी हुईं. चुनाव आयोग ने विपक्ष के सभी सवालों का जवाब भी दिया, पर विवाद थमा नहीं. इस बीच, विपक्ष इस मुद्दे को लेकर जनता के बीच भी गया. राहुल गांधी ने बकायदा वोटर्स अधिकार यात्रा भी की. विपक्ष के तमाम नेताओं का इसमें महाजुटान भी हुआ. यहां तक की तमिलनाडु के मुख्‍यमंत्री एमके स्‍टालिन ने भी इसमें शिरकत की थी. कांग्रेस नेता राहुल गांधी समेत पूरे आलाकमान ने इसमें जी जान लगा दी. ‘वोट चोरी’ का अभियान भी चलाया गया. कांग्रेस के नेता और आलाकमान इसी में उलझा रहा. जनता से जुड़े मुद्दे (जैसे बिजली, पानी, शिक्षा, सुरक्षा आदि) से विपक्ष कट सा गया. हार के बाद कांग्रेस ने समीक्षा बैठक की जिसमें टॉप लीडर्स के साथ ही बिहार चुनाव में उम्‍मीदवार रहे नेताओं ने भी शिरकत की. जमीन पर काम करने वाले नेताओं ने इस बैठक में जो बातें बताईं वे वास्‍तव में चौंकाने वाली रहीं. कांग्रेस हाईकमान और बिहार के नेताओं के बीच तकरीबन 4 घंटे तक बैठक चली. समीक्षा बैठक के बाद कांग्रेस के महासचिव (संगठन) केसी वेणुगोपाल ने एक्‍स पर पोस्‍ट कर इसके बारे में जानकारी दी. उन्‍होंने कहा, ‘आज हमारे उम्मीदवारों और बिहार के नेताओं के साथ कांग्रेस अध्यक्ष और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष की मौजूदगी में हुई 4 घंटे की बैठक में एक बात साफ सामने आई – बिहार चुनाव असली जनमत नहीं था, बल्कि पूरी तरह से मैनेज किया गया और मनमुताबिक बनाया गया नतीजा था. नेताओं ने बताया कि कैसे SIR के जरिए चुनिंदा वोटरों के नाम काटे गए और संदिग्ध नाम जोड़े गए. कैसे कथित MMRY योजना के नाम पर खुलेआम पैसे बांटकर वोटरों को प्रभावित किया गया, वह भी कई जगह मतदान केंद्रों पर. साथ ही कई सीटों पर एक जैसे अंतर से आए नतीजों ने यह पैटर्न दिखा दिया कि कोई भी स्वतंत्र चुनाव आयोग इसे नज़रअंदाज़ नहीं कर सकता था.’ दूसरी तरफ, वेणुगोपाल के बयान के उलट बिहार में मिली बड़ी चुनावी हार के बाद कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेताओं ने पार्टी की रणनीति पर गंभीर सवाल उठाए हैं. उनका कहना है कि पार्टी ने चुनाव के दौरान महंगाई, रोजगार, पलायन और भ्रष्टाचार जैसे असली स्थानीय मुद्दों को छोड़कर ज़रूरत से ज़्यादा ध्यान SIR/वोट चोरी पर लगा दिया. नेताओं का मानना है कि इससे मतदाताओं तक सही संदेश नहीं जा पाया और पार्टी को भारी नुकसान उठाना पड़ा. बिहार चुनाव में किस पार्टी को कितनी सीटें -:     BJP : 89     JDU : 85     RJD : 25     Congress : 6     AIMIM : 5     Others : 9 कांग्रेस नेताओं ने कौन सी 3 वजहें गिनाईं? कुछ स्थानीय पदाधिकारियों ने तीन बड़ी वजहें गिनाईं. इन नेताओं ने कहा कि चुनाव के दौरान सरकार की ओर से महिलाओं को ₹10,000 की आर्थिक मदद, बूथ स्तर पर गड़बड़ियां और गठबंधन दलों में तालमेल की कमी हार की बड़ी वजहें रहीं. वहीं, कई नेताओं ने AIMIM को सीमांचल और आसपास के इलाकों में अल्पसंख्यक वोटों के बंटवारे के लिए जिम्मेदार ठहराया. आरोप यह भी लगा कि बीजेपी ने चुनाव ठीक करने के लिए SIR, EVM, वोट खरीदने और प्रशासनिक दबाव जैसे कई तरीकों का इस्तेमाल किया. बिहार में हार के कुछ दिन बाद कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, राहुल गांधी और केसी वेणुगोपाल ने उम्मीदवारों और सांसदों से बैठक कर समीक्षा की. तकरीबन 70 लोगों ने अलग-अलग बैचों में आला नेतृत्व से मुलाकात की. बैठक शुरू होने से पहले ही दो हार चुके उम्मीदवारों के बीच बहस हो गई. एक उम्मीदवार को इस बात पर आपत्ति थी कि दूसरा बाहरी लोगों को टिकट देने पर हिंसा की बात उठा रहा था. बताया जा रहा है कि नेताओं को बैचों में बुलाने का मकसद भी संभावित टकराव से बचना था. सवालों का क्‍या जवाब? कुछ नेताओं ने टिकट बंटवारे की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए और कहा कि गलत चयन ने पार्टी को नुकसान पहुंचाया. मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, एक नेता ने राहुल गांधी से कहा कि जैसे उन्होंने 2019 की लोकसभा हार की जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा दिया था, वैसे ही बिहार में भी जिम्मेदारी तय होनी चाहिए. यह टिप्पणी राज्य के प्रभारी कृष्ण अल्लावरु पर अप्रत्यक्ष निशाना मानी गई. कई अन्य नेताओं ने भी इस मुद्दे को उठाया. पार्टी के एक धड़े ने राजद से गठबंधन पर भी सवाल खड़ा किया. उनका कहना था कि राजद कुछ वोट दिलाता है, लेकिन उसकी वजह से अन्य समुदाय कांग्रेस के खिलाफ पोलराइज हो जाते हैं. कई नेताओं ने कांग्रेस-राजद गठबंधन तोड़ने की मांग भी की. हालांकि, एक बैठक में राहुल गांधी ने इस तर्क को खारिज किया और पूछा कि जब उन सीटों पर कांग्रेस और राजद एक-दूसरे के खिलाफ लड़े और ‘फ्रेंडली फाइट’ हुई, तब कांग्रेस क्यों नहीं जीत सकी?

तेजस्वी की RJD को सबसे ज्यादा वोट, लेकिन NDA ने जीतीं ज्यादा सीटें

पटना बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में राष्ट्रीय जनता दल (RJD) केवल 25 सीटें जीत सका। राजद ने कांग्रेस के साथ मिलकर महागठबंधन की अगुवाई की और 143 सीटों पर उम्मीदवार खड़े किए थे। सीटों की संख्या के लिहाज से शर्मनाक प्रदर्शन के बावजूद तेजस्वी यादव के लिए एक अच्छा संकेत रहा। आरजेडी ने इन चुनाव में किसी भी दूसरी पार्टी की तुलना में सबसे अधिक वोट शेयर हासिल किए। राजद के खाते में 23 प्रतिशत वोट शेयर आए। पिछले विधानसभा चुनाव के 23.11 प्रतिशत से यह थोड़ा कम रहा, जब पार्टी ने 144 उम्मीदवार उतारे थे। भारतीय जनता पार्टी का वोट शेयर 19.46% से बढ़कर इस बार 20.07% हो गया। बीजेपी ने इस बार 101 सीटों पर चुनाव लड़ा, जबकि पिछले चुनाव में 110 निर्वाचन क्षेत्रों पर उम्मीदवार उतारे थे। वोट शेयर कुल डाले गए वोटों से किसी राजनीतिक पार्टी या उम्मीदवार को मिलने वाले मत का प्रतिशत होता है। वोट शेयर मतदाताओं के बीच पार्टी की लोकप्रियता या समर्थन के बारे में बहुत कुछ बताता है। तेजस्वी यादव की आरजेडी का वोट शेयर सबसे अधिक रहा तो फिर पार्टी ज्यादा सीटें क्यों नहीं जीत पाई? चलिए समझते हैं। कई सीटों पर रही टक्कर राजद का वोट शेयर दर्शाता है कि कई निर्वाचन क्षेत्रों में पार्टी दूसरे या तीसरे स्थान पर रही होगी, जहां उसने काफी वोट तो इकट्ठे किए लेकिन जीत की रेखा पार करने के लिए काफी नहीं था। इससे उसके कुल वोट शेयर में इजाफा होता है, लेकिन सीटों की संख्या में नहीं बढ़ती। इससे यह भी पता चलता है कि भले ही कुल मिलाकर उसे बहुत वोट मिले हों, लेकिन वे वोट उन निर्वाचन क्षेत्रों में जीत दिलाने के लिए काफी नहीं थे। तेजस्वी की पार्टी कई सीटों पर टक्कर देते हुए पीछे रह गई। सहयोगी दलों का खराब प्रदर्शन महागठबंधन में RJD के सहयोगियों का प्रदर्शन भी फ्लॉप रहा। कांग्रेस ने 61 सीटों में से सिर्फ 6 पर जीत दर्ज की। सीपीआई(एमएल)एल ने 2 सीटें और सीपीआई(एम) ने एक सीट पर जीत हासिल की। सीपीआई तो अपना खाता भी नहीं खोल पाई। मुकेश सहनी की वीआईपी का हाल भी ऐसा ही रहा। VIP ने 15 सीटों पर कैंडिडेट खड़े किए थे लेकिन एक पर भी विजय नहीं मिली। ऐसे में महागठबंधन को कुल 35 सीटों से संतोष करना पड़ा। वहीं, एनडीए ने 202 सीटें हासिल कीं, जिसमें भाजपा का योगदान 89 सबसे बड़ा रहा। इसके बाद जदयू को 85, चिराग पासवान की लोक जनशक्ति पार्टी (राम विलास) को 19, जीतन राम मांझी की हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा (HAM) को 5 और उपेंद्र कुशवाहा की राष्ट्रीय लोक मोर्चा को 4 सीटें मिलीं।  

एनडीए की ऐतिहासिक विजय पर योगी का संदेश—समर्पित कार्यकर्ताओं पर जताया गर्व

लखनऊ बिहार विधानसभा चुनावों में भाजपा और राजग को शानदार जीत मिलती दिख रही है। चुनाव आयोग के आंकड़ों के मुताबिक एनडीए गठबंधन 200 सीटों पर बढ़त बनाए हुए है। इसे लेकर बीजेपी कार्यकर्ताओं में जश्न का माहौल है। इसी कड़ी में सीएम योगी ने भाजपा की जीत पर खुशी जाहिर की है। उन्होंने एक्स पर पोस्ट कर कहा बिहार विधानसभा चुनाव में भाजपा-एनडीए गठबंधन की प्रचंड विजय की समर्पित कार्यकर्ताओं, पदाधिकारियों को हार्दिक बधाई एवं जनता-जनार्दन का अभिनंदन!  हालांकि अभी तक कुछ सीटों पर फाइनल नतीजे चुनाव  आयोग ने घोषित किए है।  यह ऐतिहासिक विजय आदरणीय प्रधानमंत्री श्री @narendramodi जी के विकासोन्मुख मार्गदर्शन और डबल इंजन सरकार की लोक-कल्याणकारी नीतियों पर बिहार की जनता के अटूट विश्वास की मुहर है। यह जनादेश विकास, सुशासन, समृद्धि और स्थिरता के उस मार्ग का समर्थन है, जिस पर नया बिहार आत्मविश्वास से आगे बढ़ रहा है। भाजपा ने सोशल मीडिया पर बिहार में मिली हार को लेकर कांग्रेस और राहुल गांधी को ‘ट्रोल' करते हुए पोस्ट किए। पूर्व केंद्रीय मंत्री वी. मुरलीधरन ने कहा कि बिहार में बड़ी संख्या में महिलाएं मतदान करने पहुंचीं थीं, जो भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) में उनके विश्वास तथा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के प्रति लगातार समर्थन को दर्शाता है। पूर्व भाजपा राज्य अध्यक्ष के. सुरेंद्रन ने कहा कि केरल को बिहार के जनादेश से सीख लेनी चाहिए, जहां जनता ने “जंगल राज” को अस्वीकार कर दिया। उन्होंने कहा कि बिहार के मतदाताओं ने एक “भ्रष्ट” सरकार को हटाया और कांग्रेस-राजद गठबंधन ने जाति कार्ड खेलने की कोशिश की, लेकिन असफल रहा। उन्होंने कहा, “मुस्लिम बहुल क्षेत्रों में भी राजद–कांग्रेस गठबंधन ध्वस्त हो गया। यह राजग की स्पष्ट जीत है।” उन्होंने कहा कि केरल में, जहां धार्मिक अल्पसंख्यकों का प्रभाव अधिक है, बिहार का परिणाम एक स्पष्ट संदेश साबित होगा।   

भाजपा कार्यकर्ताओं में उत्साह की लहर: विजय जश्न में गूँजे ढोल-नगाड़े, फूटे पटाखे

 रायपुर बिहार विधानसभा चुनाव में एनडीए को ऐतिहासिक जीत मिलते देख बीजेपी नेताओं में खुशी की लहर है. रायपुर के एकात्म परिसर में भाजपा नेताओं ने पटाखे फोड़ने के साथ ढोल-नगाड़ों के साथ डांस कर जश्न मनाया. बिहार विधानसभा के चुनाव में सामने आए रुझान को लेकर बीजेपी सांसद संतोष पाण्डेय ने कहा कि बिहार की जनता विकास चाहती हैं, इसलिए वहां एनडीए की सरकार बनेगी. पीएम मोदी ने बिहार की जनता का दिल चुरा लिया है. इस रुझान से स्पष्ट है कि बिहार की जनता चाहती है उनका भविष्य नीतीश कुमार और पीएम मोदी के साथ ही है. उन्होंने कहा कि एनडीए की सरकार ने बिहार में काफी विकास किया है. वहीं कांग्रेस पर टिप्पणी करते हुए कहा कि कांग्रेस अपना जनाधार खो रही हैं, उन्हें आत्ममंथन की जरूरत है. कभी ईवीएम तो कभी निर्वाचन आयोग को दोष देते हैं. ये उस विद्यार्थी की तरह हैं तो पढ़ाई नहीं करते, एग्जाम हॉल में जाते हैं तो खाली पन्ना छोड़ आते हैं, और एग्जाम लेने वालों को दोष देते हैं. भाजपा सांसद ने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल बिहार चुनाव में कांग्रेस की ओर से सीनियर ऑब्जर्वर बनाए गए थे. जहां-जहां उनके पैर पड़े, वहां बंटाधार हुआ. छत्तीसगढ़ में भी जिलाध्यक्षों को लेकर टिकट की खरीदी-बिक्री चल रही हैं, भूपेश बघेल जहां-जहां के प्रभारी बने, वहां-वहां की जनता ने कांग्रेस को अलविदा कर दिया, बिहार का भविष्य एनडीए के साथ है.

संजय राउत ने समझाया बिहार चुनाव परिणाम: क्यों बोले– चौंकिए मत, यही है महाराष्ट्र मॉडल

पटना  बिहार विधानसभा चुनाव के नतीजे लगभग साफ हो गए हैं। भाजपा और जेडीयू के नेतृत्व वाला एनडीए गठबंधन भारी बहुमत के साथ सत्ता में आता हुआ दिखाई दे रहा है। ऐसे में विपक्षी नेताओं ने एक बार फिर से निर्वाचन आयोग और वोट चोरी के मुद्दे को उठाना शुरू कर दिया है। शिवसेना नेता संजय राउत ने बिहार विधानसभा चुनाव पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए इसकी तुलना महाराष्ट्र चुनाव से की। उन्होंने कहा कि बिहार के नेताओं को नतीजों से चौंकने की जरूरत नहीं है।   सोशल मीडिया साइट एक्स पर शिवसेना यूबीटी नेता ने बिहार विधानसभा चुनाव नतीजों को लेकर चुनाव आयोग पर तंज कसा। उन्होंने भाजपा और निर्वाचन आयोग पर मिलीभगत का आरोप लगाते हुए कहा कि जो लोग सत्ता में आने वाले होते हैं, वह इनकी मिलीभगत की वजह से 50 सीटों के भीतर ही सिमट जाते हैं। उन्होंने लिखा, "बिहार विधानसभा चुनाव के नतीजों से चौंकने की जरूरत नहीं है। चुनाव आयोग और भाजपा मिलकर राष्ट्रीय एजेंडे को आगे बढ़ा रहे हैं, ऐसे में इससे अलग नतीजा आना नामुमकिन था!" बिहार चुनाव को 'पूरी तरह महाराष्ट्र जैसा पैटर्न' बताते हुए राउत ने आगे कहा, "जिनका सत्ता में आना तय था, वे 50 के अंदर ही खत्म हो गए!" शिवसेना (यूबीटी) और कांग्रेस सहित विपक्षी दलों ने पिछले साल महाराष्ट्र चुनाव के दौरान वोट चोरी का आरोप लगाया था। इन दलों ने फर्जी मतदाताओं और मतदाता सूची में अन्य गड़बड़ियों का दावा करते हुए कहा था कि इन सब वजहों के कारण ही एनडीए के पक्ष में नतीजे आए हैं। इसके बाद ही राज्य में देवेंद्र फडणवीस सरकार का रास्ता साफ हुआ।  

एनडीए की लहर में ‘लालटेन’ मंद पड़ी—पीएम मोदी का संदेश: जनता ने विकास को चुना

पटना पीएम मोदी ने सोशल मीडिया पर बिहार चुनाव के नतीजों पर लिखा कि 'सुशासन की जीत हुई है। विकास की जीत हुई है। जन-कल्याण की भावना की जीत हुई है। सामाजिक न्याय की जीत हुई है। बिहार के मेरे परिवारजनों का बहुत-बहुत आभार, जिन्होंने 2025 के विधानसभा चुनावों में एनडीए को ऐतिहासिक और अभूतपूर्व जीत का आशीर्वाद दिया है। यह प्रचंड जनादेश हमें जनता-जनार्दन की सेवा करने और बिहार के लिए नए संकल्प के साथ काम करने की शक्ति प्रदान करेगा।' 'मैं एनडीए के प्रत्येक कार्यकर्ता का आभार व्यक्त करता हूं, जिन्होंने अथक परिश्रम किया है। उन्होंने जनता के बीच जाकर हमारे विकास के एजेंडे को सामने रखा और विपक्ष के हर झूठ का मजबूती से जवाब दिया। मैं उनकी हृदय से सराहना करता हूं!' पीएम मोदी ने लिखा कि 'आने वाले समय में हम बिहार के विकास, यहां के इंफ्रास्ट्रक्चर और राज्य की संस्कृति को नई पहचान देने के लिए बढ़-चढ़कर काम करेंगे। हम यह सुनिश्चित करेंगे कि यहां की युवा शक्ति और नारी शक्ति को समृद्ध जीवन के लिए भरपूर अवसर मिले।'

बिहार में वोटों की रखवाली! स्ट्रॉन्ग रूम पर तीन चक्र की सख्त निगरानी, गिनती की पूरी तैयारी

पटना बिहार विधानसभा चुनाव में मंगलवार को अंतिम चरण के मतदान के बाद सभी लोगों की नजर 14 नवंबर को होने वाली मतगणना पर टिकी है। इससे पहले तमाम एजेंसियों द्वारा जारी एग्जिट पोल में फिर से एनडीए सरकार आने की संभावना जताई गई है। इधर, दूसरे चरण के मतदान के बाद मतगणना की तैयारी तेज कर दी गई है। सभी मतदान केंद्रों के समीप स्ट्रॉन्ग रूम की सुरक्षा सख्त रखी गई है। पटना में भी मतदान को लेकर आवश्यक तैयारी की जा रही है। पटना के जिलाधिकारी त्यागराजन एसएम ने कहा कि 14 नवंबर को मतगणना होनी है, जिसकी तैयारी चल रही है। स्ट्रॉन्ग रूम (वज्र गृह) में तीन चक्र की सुरक्षा व्यवस्था है। वज्रगृह की सुरक्षा के लिए केंद्रीय अर्द्धसैनिक (सीएपीएफ), बिहार विशेष सशस्त्र बल (बीएसएपी) तथा जिला सशस्त्र पुलिस (डीएपी) की व्यवस्था की गई है। सीसीटीवी कैमरों से लगातार निगरानी की जा रही है। तीन अपर पुलिस अधीक्षकों, पुलिस उपाधीक्षकों तथा 13 पुलिस पदाधिकारियों की तैनाती है। नियंत्रण कक्ष क्रियाशील है। अभ्यर्थियों को भी एसओपी के अनुसार स्ट्रॉन्ग रूम का भ्रमण कराया जाता है। मतगणना के दिन जो भी मतगणना अभिकर्ता होंगे, उन्हें जांच कर अंदर लाया जाएगा। उन्होंने बताया कि मतगणना के दिन क्षेत्र में पुलिसकर्मियों की मूवमेंट बढ़ाई जाएगी, जिससे उस दिन किसी तरह की विधि व्यवस्था की समस्या होने पर सख्ती से निपटा जा सके। मोकामा और दानापुर जैसे क्षेत्र पहले से हम लोगों की नजर में हैं। वहां किसी भी समस्या को सख्ती से निपटा जाएगा। बिहार निर्वाचन विभाग के मुताबिक, मतगणना केंद्रों पर तय समय पर सभी ईवीएम लाई जाएंगी और वोटों की गिनती की जाएगी। इसके लिए सभी जिलों के निर्वाचन पदाधिकारियों को चुनाव आयोग के दिशा निर्देशों का सख्ती से पालन करने के निर्देश दिए गए हैं। बता दें कि बिहार विधानसभा चुनाव के दूसरे चरण में मंगलवार को 122 सीटों के लिए मतदान हुआ। इससे पहले छह नवंबर को पहले चरण में 121 सीटों पर वोट डाले गए थे। मतगणना 14 नवंबर को होनी है।

वोटिंग में हुई तेजी, पप्पू यादव ने बिहार चुनाव में गड़बड़ी का आरोप लगाया

पटना  बिहार विधानसभा चुनाव के दूसरे और अंतिम चरण के लिए मतदान शुरू हो गया है. इस चरण में 3 करोड़ 70 लाख से अधिक मतदाता 122 सीटों पर 1302 उम्मीदवारों के भाग्य का फैसला करेंगे. इनमें मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अगुवाई वाली सरकार के आधा दर्जन से अधिक मंत्री भी शामिल हैं. बिहार चुनाव के दूसरे चरण में 45,399 मतदान केंद्रों पर वोट डाले जाएंगे, जिनमें से 40,073 मतदान केंद्र ग्रामीण इलाकों में हैं. कुल मतदाताओं में 1.75 करोड़ महिलाएं हैं. हिसुआ सीट (नवादा) में सबसे अधिक 3.67 लाख मतदाता हैं, जबकि लौरिया, चनपटिया, रक्सौल, त्रिवेणीगंज, सुगौली और बनमखी में प्रत्याशियों की संख्या सबसे ज्यादा (22-22) है. बिहार विधानसभा चुनाव के पहले चरण में 121 सीटों के लिए मतदान हुआ था, जिसमें 65% से अधिक पोलिंग दर्ज हुई थी. दूसरे चरण में पश्चिम चंपारण, पूर्वी चंपारण, सीतामढ़ी, मधुबनी, सुपौल, अररिया और किशनगंज सहित नेपाल सीमा से सटे जिलों में मतदान होगा. सुरक्षित और पारदर्शी मतदान सुनिश्चित करने के लिए राज्यभर में चार लाख से अधिक सुरक्षाकर्मी तैनात किए गए हैं. दूसरे चरण में ज्यादातर सीटें सीमांचल क्षेत्र की हैं, जहां मुस्लिम आबादी अधिक है, जिससे यह चरण एनडीए और इंडिया गठबंधन दोनों के लिए अहम बन गया है. एनडीए विपक्ष पर 'घुसपैठियों को संरक्षण देने' का आरोप लगा रहा है, जबकि विपक्ष अल्पसंख्यक मतदाताओं पर भरोसा कर रहा है. प्रमुख उम्मीदवारों में जेडीयू के वरिष्ठ नेता बिजेंद्र प्रसाद यादव (सुपौल), भाजपा के प्रेमेंद्र कुमार (गया टाउन), रेनू देवी (बेतिया), नीरेज कुमार सिंह 'बबलू' (छातापुर), लेशी सिंह (धमदाहा), शीला मंडल (फुलपरस) और जमा खान (चैनपुर) शामिल हैं. बिहार 9 बजे तक 14.55% वोटिंग बिहार चुनाव के दूसरे और अंतिम चरण में भी सुबह-सुबह मतदान को लेकर भारी उत्साह नजर आ रहा है. बिहार चुनाव के दूसरे चरण में सुबह 9 बजे तक 14.55% वोटिंग हुई है. यह पहले फेज में सुबह 9 बजे तक हुए मतदान से अधिक है. बिहार चुनाव के पहले चरण में 9 बजे तक 13.13% मतदान हुआ था. एलजेपीआर सांसद ने डाला वोट लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के सांसद राजेश वर्मा ने परिवार के साथ वोट डालने पहुंचे. चिराग पासवान की पार्टी के सांसद राजेश वर्मा ने परिवार के साथ मतदान किया. 'पहले फेज से भी ज्यादा वोट कीजिए', प्रशांत किशोर की अपील जन सुराज के सूत्रधार प्रशांत किशोर ने अपील की है कि पहले चरण से भी ज्यादा वोट कीजिए. व्यवस्था परिवर्तन कीजिए. उन्होंने दिल्ली ब्लास्ट को लेकर कहा है कि चुनाव के समय में ऐसी बातें हो रही हैं. राष्ट्रीय सुरक्षा का मामला है, उचित कार्रवाई होनी चाहिए.  'पहले मतदान, फिर जलपान', सीएम नीतीश ने की अपील मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर कहा है कि लोकतंत्र में मतदान केवल हमारा अधिकार ही नहीं, दायित्व भी है. आज बिहार विधानसभा चुनाव के दूसरे चरण का मतदान हो रहा है. सभी मतदाताओं से आग्रह है कि अपने मताधिकार का उपयोग अवश्य करें.

दूसरे चरण में 12 मंत्रियों की परीक्षा, बिहार चुनाव में सत्ता की चुनौती

पटना. बिहार विधानसभा चुनाव के दूसरे चरण में 20 जिलों की 122 सीटों पर मतदान होना है और यह चरण मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के लिए असली अग्निपरीक्षा साबित होने जा रहा है. इस चरण में 12 मंत्रियों की साख दांव पर है. खास बात यह है कि इनमें कई दिग्गज लगातार जीत दर्ज करते रहे हैं तो कुछ नए चेहरे हैं जिन्होंने कम समय में सत्ता तक सफर तय किया. जिन मंत्रियों की प्रतिष्ठा दांव पर है इनमें ऊर्जा, योजना एवं विकास मंत्री विजेंद्र प्रसाद यादव सुपौल से, उद्योग मंत्री नीतीश मिश्रा झंझारपुर से, परिवहन मंत्री शीला मंडल फुलपरास से, पीएचईडी मंत्री नीरज कुमार सिंह बबलू छातापुर से, गन्ना उद्योग मंत्री कृष्णानंदन पासवान हरसिद्धि से, आपदा प्रबंधन मंत्री विजय कुमार मंडल सिकटी से, खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री लेसी सिंह धमदाहा से, भवन निर्माण मंत्री जयंत राज अमरपुर से, सहकारिता मंत्री डॉ. प्रेम कुमार गया टाउन से, विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री सुमित कुमार सिंह चकाई से, अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री जमा खान चैनपुर से और पशुपालन मंत्री रेणु देवी बेतिया से शामिल हैं. विजेंद्र प्रसाद यादव: नीतीश सरकार के वरिष्ठतम मंत्री ऊर्जा, योजना एवं विकास मंत्री विजेंद्र प्रसाद यादव इस बार लगातार नौवीं बार चुनाव लड़ रहे हैं. वे नीतीश कुमार के सबसे भरोसेमंद और वरिष्ठ मंत्रियों में से एक हैं. उन्होंने कहा – 24 घंटे बिजली, हर घर नल-जल, सड़क और पुलिया का जाल हमने बिछाया है. जनता मालिक है और जनता विकास पर भरोसा करेगी. डॉ. प्रेम कुमार: 8 बार के MLA, एंटी-इंकम्बेंसी की चुनौती सहकारिता मंत्री डॉ. प्रेम कुमार गया टाउन से लगातार आठ बार जीत चुके हैं. पर्यटन, सड़क और शिक्षा पर उनके काम को सराहा गया, लेकिन इस बार एंटी-इंकम्बेंसी फैक्टर चुनौती बन सकता है. वे कहते हैं-जनता काम को पहचानती है, विकास की राजनीति पर ही भरोसा करेगी. रेणु देवी: पूर्व डिप्टी CM अब पशुपालन मंत्री, साख की लड़ाई पूर्व उपमुख्यमंत्री और मौजूदा पशुपालन मंत्री रेणु देवी बीजेपी की महिला शक्ति का प्रतीक मानी जाती हैं. दुर्गा वाहिनी से राजनीति की शुरुआत कर उपमुख्यमंत्री तक पहुंची रेणु देवी अब अपने गढ़ में साख की परीक्षा में हैं. वे कहती हैं- मैंने सेवा की राजनीति की है, पद की नहीं. जनता ने हमेशा स्नेह दिया है और इस बार भी वही आशीर्वाद मिलेगा. नीतीश मिश्रा: विरासत और विकास मॉडल की परीक्षा पूर्व मुख्यमंत्री जगन्नाथ मिश्रा के पुत्र नीतीश मिश्रा, उद्योग मंत्री के रूप में सरकार के योजनागत विकास की तस्वीर पेश कर रहे हैं. उन्होंने कहा-पिता की विरासत को आगे बढ़ाते हुए हमने उद्यम और निवेश बढ़ाने पर ध्यान दिया है. जनता भरोसा रखेगी. शीला मंडल: स्त्री शक्ति का फेस, कर्पूरी ठाकुर की सीट परिवहन मंत्री शीला मंडल फुलपरास से दोबारा चुनाव लड़ रही हैं. 2020 में उन्होंने कांग्रेस के कृपानाथ पाठक को 10,966 वोटों से हराया था. दिलचस्प है कि 1977 में कर्पूरी ठाकुर इसी सीट से मुख्यमंत्री बने थे. शीला मंडल कहती हैं-फुलपरास का नाम अब महिलाओं के सशक्तिकरण से जुड़ गया है. हमने जो काम किया है उस पर जनता भरोसा करेगी. नीरज सिंह बबलू: दबंग छवि और बाढ़ प्रबंधन पर परीक्षा पीएचईडी मंत्री नीरज कुमार सिंह बबलू लगातार जीतते रहे हैं. अपने क्षेत्र में वे विकास और सख्त प्रशासन के लिए जाने जाते हैं. बाढ़ प्रभावित क्षेत्र होने के बावजूद उन्होंने राहत और पुनर्निर्माण कार्यों में तेजी लाई है. बबलू का कहना है-हमने नल-जल, सड़क और बिजली की दिशा में ठोस काम किया है. कृष्णानंदन पासवान: गन्ना किसानों की उम्मीदों की कसौटी गन्ना उद्योग मंत्री कृष्णानंदन पासवान हरसिद्धि (SC) सीट से चुनाव लड़ रहे हैं. यह इलाका गन्ना किसानों का केंद्र माना जाता है. पासवान का कहना है- गन्ना किसानों की समस्याओं के समाधान और मिलों को पुनर्जीवित करने पर हमने काम किया है. जनता सब जानती है. विजय कुमार मंडल: आपदा प्रबंधन मंत्री की साख दांव पर भागलपुर जिले की सिटी सीट से आपदा प्रबंधन मंत्री विजय कुमार मंडल मैदान में हैं. बाढ़ और राहत कार्यों में इनकी भूमिका अहम रही है. मंडल कहते हैं-आपदा के समय हमने राहत और पुनर्वास का मजबूत तंत्र बनाया. जनता हमारी प्रतिबद्धता देख रही है. लेसी सिंह: नीतीश की ‘शक्ति स्तंभ’, छठी जीत की कोशिश खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री लेसी सिंह मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की सबसे भरोसेमंद महिला सहयोगियों में से हैं. धमदाहा से वे लगातार पांच बार जीत चुकी हैं और इस बार छठी बार मैदान में हैं. उनका कहना है-महिलाओं के सम्मान और सुरक्षा के मुद्दे पर हमने काम किया है, वही हमारी सबसे बड़ी पूंजी है. जयंत राज: युवा कुशवाहा चेहरा और विकास की राजनीति भवन निर्माण मंत्री जयंत राज अमरपुर से चुनाव लड़ रहे हैं. वे कुशवाहा समाज में मजबूत पकड़ रखते हैं और खुद को “काम करने वाला नेता” बताते हैं. उनका कहना है-प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री दोनों के विकास कार्यों से जनता प्रभावित है. इस बार भी विश्वास मिलेगा. सुमित कुमार सिंह: निर्दलीय से बने मंत्री, अब JDU से टिकट विज्ञान, प्रौद्योगिकी और तकनीकी शिक्षा मंत्री सुमित कुमार सिंह पिछली बार निर्दलीय जीते थे, लेकिन अब जदयू से चुनाव मैदान में हैं. दिग्गज समाजवादी नेता नरेंद्र सिंह के बेटे हैं. इस बार उनके खिलाफ जदयू के ही 2020 के प्रत्याशी संजय प्रसाद निर्दलीय मैदान में हैं. सुमित का कहना है-हमारे परिवार की राजनीति सेवा पर आधारित रही है, जनता उस पर भरोसा करेगी. जमा खान: एकमात्र मुस्लिम मंत्री, विकास के भरोसे मैदान में अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री जमा खान पिछली बार बसपा से जीते थे, अब जदयू से मैदान में हैं. उनका कहना है- हम भाईचारे और विकास की राजनीति करते हैं. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के काम पर वोट मांग रहे हैं. बिहार चुनाव में पूर्व मंत्रियों की फौज भी मैदान में इस चरण में पूर्व विधानसभा अध्यक्ष उदय नारायण चौधरी (सिकंदरा), पूर्व उपमुख्यमंत्री तारकेश्वर प्रसाद (कटिहार) समेत एक दर्जन से अधिक पूर्व मंत्री मैदान में हैं. भाजपा से सुनील कुमार पिंटू, कृष्ण कुमार ऋषि, विनोद नारायण झा, राम नारायण मंडल, जदयू से दामोदर रावत, आरजेडी से जयप्रकाश नारायण यादव, बीमा भारती, समीर महासेठ, कुमार सर्वजीत, शाहनवाज आलम, बृज किशोर बिंद, हम से अनिल कुमार और लोजपा (रामविलास) से मुरारी प्रसाद गौतम की साख भी दांव पर है. 14 नवंबर को फैसले का दिन, तय होगी बिहार … Read more

नेहा शर्मा ने दिखाया पिता के समर्थन में दम, चुनावी मैदान में लगा बॉलीवुड का रंग

पटना  बिहार विधानसभा चुनाव के दूसरे और आखिरी चरण की चुनावी सरगर्मी रविवार को अपने चरम पर रही। इस बीच भागलपुर में फिल्म एक्ट्रेस नेहा शर्मा ने अपने पिता और कांग्रेस के दिग्गज प्रत्याशी अजीत शर्मा के समर्थन में ऐसा रोड शो निकाला कि शहर का माहौल चुनावी रंग और बॉलीवुड ग्लैमर में रंग गया। सुबह भदनाथ मंदिर में पिता-पुत्री ने माथा टेककर जीत की कामना की, और यहीं से शुरू हुआ वो विशाल रोड शो जिसने शहर की फिजा बदल दी। खुले जीप पर सवार नेहा शर्मा और अजीत शर्मा की एक झलक पाने को सड़कों पर उमड़ पड़ी भीड़ हजारों वाहनों के काफिले के साथ आगे बढ़ती रही। हाथों में कांग्रेस के झंडे और गूंजते नारे, “अजीत शर्मा जिंदाबाद”, “कांग्रेस पार्टी जिंदाबाद” ने माहौल को रोमांचक बना दिया। नेहा शर्मा को देखने उतरी भीड़ नेहा शर्मा हर मोड़ पर ठहरकर लोगों का अभिवादन करती रहीं। भीड़ की तरफ हाथ हिलाते हुए उन्होंने अपील की। मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा, “भागलपुर ने हमेशा पापा को प्यार और आशीर्वाद दिया है। उन्होंने शहर की तरक्की के लिए कोई कसर नहीं छोड़ी। मैं भी इसी शहर की बेटी हूं, आप सब से एक बार फिर जीत का आशीर्वाद मांगती हूं।” लोगों की भीड़ नेहा शर्मा को देखने के लिए उमड़ पड़ी। जगह-जगह फूल, मालाएं और सेल्फी की होड़ ने रोड शो को सेलिब्रिटी-स्तर का आयोजन बना दिया। रैली नयाबाजार, सराय, नरगा चौक, चंपा नगर, मेदनी नगर और ततारपुर होते हुए रेलवे स्टेशन के पास जाकर समाप्त हुई। गौरतलब है कि अजीत शर्मा तीसरी बार मैदान में हैं और इस बार उनका मुकाबला एनडीए के उम्मीदवार बीजेपी के रोहित पांडेय से है।