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भाजपा ने दो नगर परिषदों में मारी बाजी, राजेश्वरी दुबे और पलक ग्रोवर विजयी

विजयराघवगढ़ मध्यप्रदेश में दो नगर परिषदों विजयराघवगढ़ और कैमोर में  अध्यक्ष पद के लिए हुए उपचुनाव में बीजेपी ने एक बार फिर जीत दर्ज की। ढाई-ढाई साल के कार्यकाल वाले फॉर्मूले के तहत विजयराघवगढ़ से राजेश्वरी दुबे और कैमोर से पलक ग्रोवर निर्विरोध अध्यक्ष चुनी गईं। ढाई साल का कार्यकाल पूरा करने के बाद विजयराघवगढ़ की मनीषा शर्मा और कैमोर की वसुधा मिश्रा ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद दोनों नगर परिषदों में नई अध्यक्ष के लिए चुनाव प्रक्रिया शुरू हुई। निर्वाचन की तय समय सीमा में केवल बीजेपी प्रत्याशियों ने नामांकन दाखिल किया। कैमोर में संयुक्त कलेक्टर महेश मंडलोई और विजयराघवगढ़ में संयुक्त कलेक्टर संस्कृति शर्मा ने नामांकन पत्रों की जांच कर राजेश्वरी दुबे और पलक ग्रोवर को निर्विरोध निर्वाचित घोषित किया। इसके बाद विधायक संजय पाठक और बीजेपी जिलाध्यक्ष दीपक सोनी टंडन की मौजूदगी में दोनों को प्रमाणपत्र सौंपा गया। विजय जुलूस भी निकाला गया, जिसमें बड़ी संख्या में भाजपा कार्यकर्ता और स्थानीय नागरिक शामिल हुए। विजयराघवगढ़ विधानसभा को बीजेपी का गढ़ माना जाता है, जहां से विधायक संजय पाठक लगातार पांच बार चुनाव जीत चुके हैं। कैमोर नगर परिषद में सभी 15 पार्षद बीजेपी समर्थित हैं, जबकि विजयराघवगढ़ में 30 में से केवल 3 पार्षद कांग्रेस के हैं। ऐसे में दोनों परिषदों में बीजेपी का पलड़ा भारी रहा और कांग्रेस उम्मीदवार उतारने में भी असफल रही। विधायक संजय पाठक ने कहा कि दोनों नगर परिषदों में अध्यक्ष पद की कुर्सी ढाई-ढाई साल के कार्यकाल के फॉर्मूले पर चलती है, और उसी समझौते के तहत पूर्व अध्यक्षों ने इस्तीफा दिया। इस बार भी दोनों सीटें बीजेपी के खाते में गईं।  

एमपी बीजेपी में नेतृत्व बदलाव के बाद कार्यकारिणी गठन पर अटकलें तेज

भोपाल भारतीय जनता पार्टी को पिछले दिनों सभी जिला अध्यक्षों के साथ ही राज्य अध्यक्ष भी मिल चुका है। वहीं, अब तक जिला कार्यकारिणी का गठन नहीं किया जा सका है। पार्टी संगठन अब प्रदेश और संभाग के दो-दो पदाधिकारी जिलों में भेजकर जिला कार्यकारिणी का गठन कराने पर विचार कर रही है। ये वरिष्ठ पदाधिकारी जिला कार्यकारिणी गठन के लिए कार्यकर्ताओं का चयन कराएंगे। संभागीय प्रभारियों की बैठक हुई गुरुवार को भाजपा प्रदेश कार्यालय भोपाल में प्रदेश और संभाग प्रभारियों बैठक बुलाई गई थी। इस बैठक में प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल, प्रदेश प्रभारी महेंद्र सिंह, प्रदेश संगठन महामंत्री हितानंद सहित कई नेता मौजूद रहे। इस बैठक में जिला कार्यकारिणी गठन का मुद्दा उठा। हेमंत खंडेलवाल ने कहा कि जिला कार्यकारिणी का गठन जल्द से जल्द पूरा किया जाए ताकि इसके बाद प्रदेश कार्यकारिणी के गठन की प्रक्रिया शुरू की जाए। जिलों में जाएंगे पार्टी के पदाधिकारी पार्टी का प्लान है कि जिला कार्यकारिणी गठन के लिए दो-दो पदाधिकारी जिलों में जाकर कार्यकारिणी गठन के लिए आम सहमति बनाएंगे, ताकि निर्विरोध कार्यकारिणी का गठन हो सके। कार्यकारिणी में एक प्रदेश स्तरीय पदाधिकारी होगा और एक अन्य पदाधिकारी संभाग का होगा। इन दो पदाधिकारियों को दो जिलों की कमान सौंपी जाएगी। विभाजन की विभीषिका से युवाओं को कराएंगे परिचित भाजपा ने पूरे प्रदेश में स्वतंत्रता दिवस के लिए विशेष कार्ययोजना बनाई है। 14 अगस्त को भारत विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस पर मौन जुलूस निकालने के साथ प्रदर्शनी लगाने की कार्ययोजना है। बैठकों का आयोजन कर देश के विभाजन के समय पीड़ितों के परिजनों से भेंट करने के साथ प्रदर्शनी और अन्य माध्यमों से युवाओं को देश के विभाजन की विभीषिका से अवगत कराया जाएगा।  

बीजेपी में उपराष्ट्रपति पद को लेकर मंथन, इस जाट नेता का नाम चर्चा में

नई दिल्ली उपराष्ट्रपति पद से जगदीप धनखड़ के इस्तीफे के बाद अब चुनाव का शेड्यूल आ गया है। इसके बाद से ही चर्चाएं तेज हैं कि आखिर एनडीए का उम्मीदवार अब कौन होगा। लोकसभा और राज्यसभा के सदस्यों की संख्या को देखते हुए स्पष्ट है कि एनडीए का कैंडिडेट ही जीतने की स्थिति में है। इसलिए एनडीए की ओर से किसे कैंडिडेट बनाया जाएगा। इस पर कयासों का दौर चल रहा है। दिल्ली और जम्मू-कश्मीर के एलजी वीके सक्सेना और मनोज सिन्हा का नाम चर्चा में है। इसके अलावा राज्यसभा के डिप्टी चेयरमैन हरिवंश का नाम भी रेस में बताया जा रहा है। इसका कारण बिहार का विधानसभा चुनाव भी है। उनके बिहार कनेक्शन का फायदा भाजपा और जेडीयू उठाना चाहेंगे। इसके अलावा अब एक और नाम तेजी से चर्चा में है। यह नाम है, गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत का। आचार्य देवव्रत उसी जाट बिरादरी से हैं, जिससे जगदीप धनखड़ आते हैं। ऐसे में जाट समाज के बीच संदेश देने के लिए आचार्य देवव्रत को मौका दिया जा सकता है। वह आर्य समाज से जुड़े रहे हैं और प्रखरता से विचारधारा का प्रचार करने में जुटे रहे हैं। उन्होंने लंबे समय तक कुरुक्षेत्र स्थित एक गुरुकुल में प्रिंसिपल के तौर पर काम किया है। इससे पहले वह हिमाचल प्रदेश के भी राज्यपाल रह चुके हैं। वह हरियाणा के ही समालखा के रहने वाले हैं। खबर है कि 18 से 20 अगस्त के बीच किसी भी दिन भाजपा की ओर से उपराष्ट्रपति पद के कैंडिडेट के नाम का ऐलान हो सकता है। बता दें कि जेडीयू, टीडीपी और शिवसेना जैसे एनडीए के दलों ने पीएम नरेंद्र मोदी को अधिकार दिया है कि वे किसी भी नेता का नाम प्रस्तावित कर सकते हैं। इस तरह एनडीए में आम सहमति बन गई है कि भाजपा की ओर से दिए गए नाम के पक्ष में ही मतदान किया जाएगा। बता दें कि चुनाव आयोग की ओर से इलेक्शन की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। किरेन रिजिजू का कहना है कि एनडीए के दलों ने पीएम मोदी और जेपी नड्डा को अधिकृत किया है कि वे जिस नेता पर भी मुहर लगाएंगे, उस पर उनकी सहमति रहेगी।

एमपी की दो नगर परिषदों में फिर से भगवा रंग, बीजेपी ने हासिल किया अध्यक्ष पद

भोपाल BJP- एमपी में भगवा दल ने फिर परचम लहराया है। प्रदेश की दो नगर परिषदों में बीजेपी के अध्यक्ष बने हैं। दोनों ही अध्यक्ष महिलाएं हैं। कटनी जिले की नगर परिषद विजयराघवगढ़ में बीजेपी की राजेश्वरी दुबे अध्यक्ष चुनी गई हैं वहीं कैमोर नगर परिषद में बीजेपी की ही पलक ग्रोवर अध्यक्ष निर्वाचित हुई हैं। पार्टी की नवनिवार्चित नगर परिषद अध्यक्षों को बीजेपी प्रदेशाध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने बधाई दी है। इससे पहले कटनी जिले की दोनों नगर परिषदों के अध्यक्ष पद के लिए पार्टी प्रत्याशियों की घोषणा की गई। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के जिलाध्यक्ष दीपक टण्डन ने बताया कि प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने विजयराघवगढ़ से राजेश्वरी दुबे व कैमोर से पलक ग्रोवर को पार्टी प्रत्याशी घोषित किया। नगर परिषद अध्यक्षों के इस्तीफों के कारण पद रिक्त थे कटनी की कैमोर तथा विजयराघवगढ़ में नगर परिषद अध्यक्षों के इस्तीफों के कारण पद रिक्त थे जिस पर आज निर्वाचन हुआ। दोनों जगहों पर एक ही नामांकन दाखिल होने की उम्मीद थी और आखिरकार वही हुआ भी, दोनों अध्यक्षों का सर्वसम्मति से निर्वाचन हुआ। नगर परिषदों में चुनाव को लेकर गहमागहमी बनी रही। निर्वाचन प्रक्रिया आज करीब 12 बजे से प्रारम्भ हुई। कलेक्‍टर दिलीप कुमार यादव ने नगर परिषद कैमोर में निर्वाचन हेतु पीठासीन अधिकारी एसडीएम विजयराघवगढ़ महेश मंडलोई को बनाया। वहीं नगर परिषद विजयराघवगढ़ के लिए पीठासीन अधिकारी संयुक्त कलेक्टर संस्कृति मुदित लटोरिया बनाई गईं। पीठासीन अधिकारियों को पूरी चुनाव प्रक्रिया सुचारू रूप से संपन्न कराकर पालन प्रतिवेदन प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए थे। परिषद के नोटिस बोर्ड पर एक प्रति प्रदर्शित करने का निर्देश अध्यक्ष के चुनाव को देखते हुए कैमोर और विजयराघवगढ़ नगर परिषदों के मुख्य नगर पालिका अधिकारियों को सभी निर्वाचित पार्षदों को व्यक्तिगत रूप से नोटिस और आदेश की प्रतियां तामील करने को कहा गया था। इस संबंध में पावती प्राप्त करने और संबंधित परिषद के नोटिस बोर्ड पर एक प्रति प्रदर्शित करने का निर्देश भी दिया।

महापौर का बयान: अनवर कादरी को पार्षद पद से हटाने की सिफारिश, परिषद में जाएगा प्रस्ताव

इंदौर  लव जिहाद के लिए फंडिंग के आरोपी पार्षद अनवर कादरी को हटाने का प्रस्ताव लाने का निर्णय लिया है। महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने कहा कि अनवर कादरी को हटाने का प्रस्ताव एमआईसी में पारित करेंगे और उस प्रस्ताव को परिषद में रखने का निर्णय लिया है। जल्द अगली परिषद में हम दो-तिहाई बहुमत और जिन मुद्दों पर उनको हटाना जरूरी है उन पर चर्चा करेंगे। पार्षद अनवर कादरी को भी सुनवाई का मौका देंगे। पार्षदी समाप्त करने का प्रस्ताव अगली परिषद में लेकर आने का भी एमआईसी में शिकायत के आधार पर निर्णय लिया गया है। महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने बताया कि अनवर कादरी जैसे पार्षद ने न केवल अपनी पार्षदी का, बल्कि इस निगम और शहर का मान कम करने का काम किया है। डिविजनल कमिश्नर को भी लिखा लेटर महापौर ने बताया कि कई प्रकरणों के कारण, कब्जों के कारण, लव जिहाद की फंडिंग करने के आरोपों के कारण फरार चल रहा है। इस पार्षद का पार्षद बने रहना न तो शहर हित में है न ही निगम हित में। हमने एक लेटर डिविजनल कमिश्नर को लिखा था कि वह धारा 19 के प्रावधान के तहत तत्काल कार्र‌वाई करें। वो अपनी कार्रवाई कर रहे होंगे। मैं मानता हूं कि वो कार्रवाई करेंगे, नहीं करेंगे तो इंदौर की जनता और हमारे पार्षद उनसे सवाल जरूर करेंगे, लेकिन जो काम हमारी सीमा में है हम वो करेंगे। जानलेवा हमले पर 14 साल पहले काटी एक साल की सजा 2011 में कांग्रेस पार्षद अनवर कादरी, उसके भाई और एक अन्य आरोपी को जानलेवा हमले के मामले में अदालत ने एक-एक साल के कारावास की सजा सुनाई थी। यह हमला 6 मई 2009 को इंदौर के आजादनगर चौराहे के पास अनवर हुसैन पर किया गया था। अनवर हुसैन आरोपियों पर चल रहे एक अन्य मामले में गवाह था। पुलिस ने कादरी समेत कुल 9 आरोपियों को गिरफ्तार किया था। उनके पास से पिस्तौल, कट्टा, तलवार और चाकू बरामद किए गए थे। उज्जैन में डकैती का केस, इसी से मिला डकैत नाम अनवर कादरी पर 1996 में उज्जैन के महाकाल थाने में डकैती का केस दर्ज किया गया था। इसके बाद उसे अनवर डकैत के नाम से पहचाना जाने लगा। अनवर ने इंदौर में भी मारपीट, घर में घुसकर धमकाने जैसी कई घटनाओं को अंजाम दिया। अनवर कांग्रेस से तीन बार पार्षद रह चुका है। उसकी पत्नी दो बार पार्षद रही है। प्रमोद टंडन के शहर कांग्रेस अध्यक्ष रहते हुए अनवर को शहर कांग्रेस का महामंत्री भी नियुक्त किया गया था। उसने एक बार निर्दलीय चुनाव भी लड़ा था। ‘पाकिस्तान जिंदाबाद’ के नारे, जेल जाना पड़ा 28 अप्रैल 2025 को अनवर ने इंदौर के वार्ड 58 स्थित बड़वाली चौकी पर पहलगाम हमले के विरोध में पाकिस्तान और आतंकवाद का पुतला दहन किया था। कार्यक्रम के दौरान जैसे ही कादरी ने 'पाकिस्तान' शब्द बोला, वहां मौजूद उसके कुछ समर्थकों ने 'जिंदाबाद' के नारे लगा दिए। इस मौके पर बड़ी संख्या में मुस्लिम महिलाएं, पुरुष और बच्चे शामिल थे। घटना के वीडियो को लेकर बीजेपी विधायक गोलू शुक्ला ने एफआईआर दर्ज कराई थी। इस पर अनवर कादरी को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था।

बीजेपी फिलहाल नहीं करेगी अध्यक्ष का खुलासा, क्या VP चुनाव बना देरी की वजह?

नई दिल्ली नए बीजेपी अध्यक्ष के चुनाव की चर्चा लंबे समय से चल रही है। वहीं पार्टी का संविधान कहता है कि राष्ट्रीय अध्यक्ष का चुनाव तभी हो सकता है जब कम से कम 50 फीसदी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में संगठन के चुनाव पूरे हो जाते हैं। बीच में ही उपराष्ट्रपति रहे जगदीप धनखड़ के इस्तीफे के बाद पार्टी का पूरा फोकस अब शिफ्ट हो गया है। रिपोर्ट्स की मानें तो राष्ट्रपति चुनाव के बाद ही अब बीजेपी अपने नए राष्ट्रीय अध्यक्ष का चुनाव करेगी। कब है उपराष्ट्रपति का चुनाव? पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने मॉनसून सेशन शुरू होते ही अचानक इस्तीफा दे दिया था। उन्होंने कहा था कि स्वास्थ्य कारणों से वह पदमुक्त होना चाहते हैं। वहीं चुनाव आयोग ने राष्ट्रपति चुनाव का ऐलान भी कर दिया है। 9 सितंबर को उपराष्ट्रपति पद के लिए चुनाव होंगे और इसी दिन शाम तक परिणाम भी घोषित कर दिया जाएगा। यह भी तय माना जा रहा है कि विपक्ष इंडिया गठबंधन का कोई साझा उम्मीदवार उतार सकता है। 21 अगस्त नामांकन दाखिल करने का आखिरी तारीख है। ऐसे में विपक्ष और सत्तापक्ष दोनों के पास उम्मीदवार घोषित करने के लिए पर्याप्त समय है। नंबरगेम की बात करें तो लोकसभा और राज्यसभा में कुल 782 सांसद हैं। एनडीए के पास लोकसभा में 293 तो इंडिया गठबंधन के पास 232 सांसद हैं। वहीं राज्यसभा में एनडीए के पास 133 और इंडिया गठबंधन के पास 107 सांसद हैं। ऐसे में सदन में एनडीए का पलड़ा भारी है। बीजेपी चीफ के चुनाव में देरी के पीछे कारण मौजूदा बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा का कार्यकाल 2024 के लोकसभा चुनाव के बाद ही खत्म हो रहा था हालांकि उनकी सफलताओं को देखते हुए उनका कार्यकाल बढ़ा दिया गया। अब माना जा रहा है कि बीजेपी राष्ट्रीय अध्यक्ष के ऐलान के लिए उपराष्ट्रपति चुनाव पूरे होने का इंतजार कर रही है। बिहार चुनाव से पहले बीजेपी को राष्ट्रीय अध्यक्ष का ऐलान कर देना है। फिलहाल बीजेपी उपराष्ट्रपति चुनाव के लिए फ्लोर मैनेजमेंट में लगी हुई है। इस बार के चुनाव में लोकसभा में एनडीए के बहुमत का आंकड़ा कम हो गया था और राज्यसभा में । ऐसे में यह फाइट आसान नहीं माना जा सकती। उपराष्ट्रपति चुनाव के लिए निर्वाचक मंडल में राज्यसभा के 233 निर्वाचित सदस्य, राज्यसभा के 12 मनोनीत सदस्य और लोकसभा के 543 सदस्य शामिल होते हैं। राज्यसभा में पांच और लोकसभा में एक सीट रिक्त है, जिससे निर्वाचक मंडल की प्रभावी संख्या 782 है और जीतने वाले उम्मीदवार को 391 मतों की आवश्यकता होगी, बशर्ते सभी पात्र मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करें। लोकसभा की 543 सीट में से एक सीट, पश्चिम बंगाल में बशीरहाट रिक्त है, जबकि 245 सदस्यीय राज्यसभा में पांच सीट खाली हैं। राज्यसभा में पांच खाली सीट में से चार जम्मू-कश्मीर से और एक पंजाब से है। लोकसभा में, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) को 542 सदस्यों में से 293 का समर्थन प्राप्त है। सत्तारूढ़ गठबंधन को राज्यसभा (प्रभावी सदस्य संख्या 240) में 129 सदस्यों का समर्थन प्राप्त है, बशर्ते कि मनोनीत सदस्य राजग उम्मीदवार के समर्थन में मतदान करें। सत्तारूढ़ गठबंधन को कुल 422 सदस्यों का समर्थन प्राप्त है।

60 लाख नए सदस्य जोड़े, भाजपा नेताओं को मिला सम्मान, सीएम हाउस बना मेगा इवेंट का गवाह

रायपुर भारतीय जनता पार्टी में छत्तीसगढ़ से 60 लाख नए सदस्यों को जोड़ने पर भाजपा रायपुर में विशेष कार्यक्रम करने जा रही है। इस अभियान में सक्रिय रहे नेताओं और कार्यकर्ताओं का CM साय सम्मान करेंगे। यह समारोह नवा रायपुर स्थित CM हाउस में होगा। इतनी बड़ी संख्या में नए सदस्य जुड़ने पर पार्टी इसे जश्न की तरह मनाएगी। पार्टी के आला नेताओं ने इसकी तैयारी भी शुरू कर दी है। सम्मान पाने वालों की लिस्ट में सांसद, विधायक, पार्षद, जिला संयोजक और कार्यकर्ता शामिल हैं। अब पढ़े किस विधायक ने सदस्य बनाने में किया टॉप, किस जिलों से कितने सदस्यों का सम्मान होगा। बीजेपी ने नवंबर में इसे अपने सोशल मीडिया पेज में शेयर किया था। बीजेपी ने नवंबर में इसे अपने सोशल मीडिया पेज में शेयर किया था। सबसे पहले पढ़े सदस्यता अभियान कब शुरू हुआ छत्तीसगढ़ बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष किरण सिंह देव ने 3 सितंबर 2024 को सदस्यता अभियान की शुरुआत की थी। अध्यक्ष ने सीएम विष्णुदेव साय को पहली सदस्यता दिलाई थी। सीएम के बाद प्रदेश स्तर पर अभियान चला। कार्यकर्ताओं-पदाधिकारियों ने मिलकर 60 लाख नए सदस्यों को जोड़ा। इस अभियान को लेकर किरण सिंहदेव ने भाजपा के सभी नगर अध्यक्षों, जिलाध्यक्षों और सदस्यता अभियान प्रभारियों को निर्देश जारी किए थे। इन निर्देशों में स्पष्ट था, कि पार्टी का सदस्य बनाते वक्त पूरी सावधानी बरतें। सदस्यता अभियान के दौरान बीजेपी नेताओं ने प्रदेश के अलग-अलग जिलों और मंडलों में बैठक लेकर केंद्र प्रभारी, बूथ प्रभारी और मंडल स्तर के पदाधिकारियों की लिस्ट जारी की थी। सदस्य बनाने में टॉप-3 में आए ये MLA संगठन के पदाधिकारियों से मिली जानकारी के अनुसार, संगठन में नए सदस्य जोड़ने पर बीजेपी विधायक रिकेश सेन, भावना बोहरा और अजय चंद्राकर टॉप 3 श्रेणी में आए है। वहीं रायपुर शहर से 12 नेता हैं, जिन्होंने 3 हजार से अधिक सदस्य बनाए हैं। इनमें विधायक पुरंदर मिश्रा, राजेश मूणत, मोतीलाल साहू, सहित अन्य लोग शामिल हैं। कार्यकर्ताओं के तप को हम सबका प्रणाम- किरण सिंह देव किरण सिंहदेव ने किया कार्यकर्ताओं का अभिनंदन भाजपा प्रदेश अध्यक्ष किरण देव सिंह ने कहा कि, प्रदेशभर के सभी कार्यकर्ताओं ने निर्धारित लक्ष्य से ज्यादा सदस्य बनाकर भाजपा के सांगठनिक आधार को दृढ़ करके कमाल कर दिखाया है। सदस्यता अभियान के लक्ष्य को आसानी से निर्धारित समय में हासिल करने के लिए सभी कार्यकर्ताओं का अभिनंदन करते हुए कहा कि 60 लाख के लक्ष्य से भी अधिक सदस्य बनाने वाले सभी कार्यकर्ताओं का सम्मान समारोह कार्यकर्ताओं की ऊर्जा और उत्साह को कई गुना बढ़ाएगा। इस तरह बीजेपी ने बनाए सदस्य भारतीय जनता पार्टी ने सदस्यता अभियान को सफल बनाने के लिए 2 सितंबर से ऑनलाइन माध्यम से काम शुरू कर दिया था। अभियान के तहत नए सदस्यों को जोड़ने के लिए मिस्ड कॉल, नमो एप, वेबसाइट और क्यूआर कोड स्कैन जैसे डिजिटल तरीकों का सहारा लिया गया। पार्टी के नियमों के मुताबिक, बीजेपी की सदस्यता की अवधि 5 साल होती है। इस अवधि के बाद सदस्यता समाप्त हो जाती है, और व्यक्ति को दोबारा सदस्यता लेनी होती है। इसी प्रक्रिया के तहत पार्टी हर पांच सालों में सदस्यता अभियान चलाकर पुराने सदस्यों का नवीनीकरण और नए सदस्यों को जोड़ने का कार्य करती है। इन जिलों में भी अलग-अलग नेताओं को दी गई थी जिम्मेदारी     सुकमा में ओजस्वी मंडावी, अरुण सिंह भदौरिया और हूंगाराम मरकाम, जी. वेंकट और सुखलाल पुजारी।     दंतेवाड़ा में श्रीनिवास राव मद्दी, विजय तिवारी, कुमार सिंह भदौरिया।     नारायणपुर में दिनेश कश्यप, बृजमोहन देवांगन और गौतम गोलछा।     कोंडागांव में महेश कश्यप, प्रवीण सिंह बदेशा और मनोज जैन, महावीर सिंह राठौर, निरंजन सिन्हा और सुमित्रा मारकोले।     बालोद में भोजराज नाग, प्रीतम साहू और यशवंत जैन।     बलौदाबाजार में पूर्व नेता प्रतिपक्ष नारायण चंदेल, प्रदेश उपाध्यक्ष लक्ष्मी वर्मा और श्याम बाई साहू।     महासमुंद में सांसद बृजमोहन अग्रवाल, विधायक योगेश्वर राजू सिन्हा, पूनम चंद्राकर और डॉ विमल चोपड़ा को जिम्मेदारी दी गई है।     जांजगीर-चांपा में विधायक धरमलाल कौशिक, कमला देवी पाटले, सौरभ सिंह और अंबेश जांगड़े।     सक्ती में प्रदेश उपाध्यक्ष शिवरतन शर्मा, मेघाराम साहू और जगन्नाथ पाणिग्रही।     मुंगेली में सांसद कमलेश जांगड़े और विधायक पुन्नूलाल मोहले।     कोरबा में कृषि मंत्री रामविचार नेताम और ननकीराम कंवर।     सारंगढ़-बिलाईगढ़ में मंत्री टंकराम वर्मा और निर्मल सिन्हा।     जशपुर में राधेश्याम राठिया और रणविजय सिंह जूदेव।     बलरामपुर में मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े और उद्धेश्वरी पैकरा।     सूरजपुर में सांसद चिंतामणि महाराज और रामसेवक पैकरा।     ​​​​​​कोरिया में विधायक रेणुका सिंह और भैयालाल राजवाड़े।     मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर में प्रदेश संगठन महामंत्री पवन साय और चंपादेवी पावले।     खैरागढ़-छुईखदान-गंडई में पूर्व विधानसभा अध्यक्ष गौरीशंकर अग्रवाल, प्रदेश महामंत्री रामजी भारती, कोमल जंघेल और विक्रांत सिंह।     मोहला-मानपुर- अंबागढ़ चौकी में प्रदेश उपाध्यक्ष मधुसूदन यादव, प्रदेश महामंत्री भरतलाल वर्मा और संजीव शाह     राजनांदगांव में विधायक अमर अग्रवाल, खूबचंद पारख और अशोक शर्मा।     बेमेतरा में पूर्व विधानसभा अध्यक्ष प्रेमप्रकाश पांडे, विधायक ईश्वर साहू, लाभचंद बाफना, विधायक दीपेश साहू और प्रदेश मंत्री अवधेश चंदेल को को जिम्मेदारी दी गई है।

‘2020 में जेटली ने धमकाया?’ राहुल गांधी के बयान पर उठा सवाल, BJP ने याद दिलाई मौत की तारीख

 नई दिल्ली कांग्रेस सांसद राहुल गांधी के हालिया बयान ने एक बार फिर सियासी भूचाल ला दिया है. शनिवार को कांग्रेस के वार्षिक लीगल कॉन्क्लेव को संबोधित करते हुए राहुल गांधी ने दिवंगत पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण जेटली को लेकर ऐसा दावा कर दिया, जिसे भाजपा ने 'फेक न्यूज' करार देते हुए तीखी प्रतिक्रिया दी और कहा कि जब अरुण जेटली का निधन 2019 में हो गया तो वह राहुल गांधी से मिलने 2020 में कैसे आ गए? लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी के इस दावे पर कि दिवंगत पूर्व केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने उन्हें कृषि कानूनों को लेकर धमकाया था, डीडीसीए प्रमुख रोहन जेटली ने शनिवार को कांग्रेस नेता को याद दिलाया कि उनके पिता का निधन इन कानूनों के लागू होने से पहले ही हो गया था। उन्होंने कहा, "मैं उन्हें याद दिला दूं कि मेरे पिता का निधन 2019 में हो गया था। कृषि कानून 2020 में लागू हुए थे।" एक्स पर एक पोस्ट में, रोहन जेटली ने लिखा, "राहुल गांधी अब दावा कर रहे हैं कि मेरे दिवंगत पिता अरुण जेटली ने उन्हें कृषि कानूनों को लेकर धमकाया था। मैं उन्हें याद दिला दूं कि मेरे पिता का निधन 2019 में हो गया था। कृषि कानून 2020 में लागू हुए थे। इससे भी महत्वपूर्ण बात यह है कि मेरे पिता के स्वभाव में किसी को भी विरोधी विचार के लिए धमकाना नहीं था। वह एक कट्टर लोकतांत्रिक व्यक्ति थे और हमेशा आम सहमति बनाने में विश्वास रखते थे।" उन्होंने आगे लिखा, "अगर ऐसी कोई स्थिति आती, जैसा कि राजनीति में अक्सर होता है, तो वह सभी के लिए पारस्परिक रूप से स्वीकार्य समाधान पर पहुंचने के लिए स्वतंत्र और खुली चर्चा का आह्वान करते। वह ऐसे ही थे और आज भी उनकी यही विरासत है। मैं राहुल गांधी से कहता हूं वे उन लोगों के बारे में बोलते समय सचेत रहें जो हमारे साथ नहीं हैं। उन्होंने मनोहर पर्रिकर जी के साथ भी कुछ ऐसा ही करने की कोशिश की, उनके अंतिम दिनों का राजनीतिकरण किया, जो भी उतना ही घटिया था। दिवंगत आत्मा को शांति मिले।'' इससे पहले दिन में, कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने दावा किया कि एनडीए सरकार ने दिवंगत केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली को नरेंद्र मोदी सरकार द्वारा पहले लाए गए कृषि कानूनों के खिलाफ लड़ने की कोशिश करने पर उन्हें धमकाने के लिए भेजा था। राहुल गांधी ने कहा, "मुझे याद है कि जब मैं कृषि कानूनों के खिलाफ लड़ रहा था, तो अरुण जेटली को मुझे धमकाने के लिए भेजा गया था। उन्होंने मुझसे कहा था, 'अगर आप सरकार का विरोध करते रहेंगे और कृषि कानूनों के खिलाफ लड़ते रहेंगे, तो हमें आपके खिलाफ कार्रवाई करनी होगी।' मैंने उनकी तरफ देखा और कहा, ''मुझे नहीं लगता कि आपको पता है कि आप किससे बात कर रहे हैं।'' दरअसल, कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने कार्यक्रम के दौरान कहा, "मुझे याद है जब मैं कृषि कानूनों के खिलाफ लड़ रहा था, वो (अरुण जेटली) अब नहीं हैं, इसलिए मुझे ऐसा नहीं कहना चाहिए लेकिन फिर भी कहूंगा, अरुण जेटली जी को मुझे मिलने और धमकी देने के लिए भेजा गया था." राहुल ने कहा कि जेटली जी ने मुझसे कहा, "अगर तुम इस रास्ते पर चलते रहे, सरकार का विरोध करते रहे और कृषि कानूनों पर हमसे लड़ते रहे, तो हमें तुम्हारे खिलाफ कार्रवाई करनी पड़ेगी. मैंने जवाब दिया कि मुझे नहीं लगता कि आपको अंदाजा है कि आप किससे बात कर रहे हैं. हम कांग्रेस वाले हैं, डरते नहीं हैं, झुकते नहीं हैं. हमें तो अंग्रेज नहीं झुका पाए." भाजपा का पलटवार: फर्जी बयानों से दूर रहें राहुल राहुल गांधी के इस बयान पर सबसे तीखा जवाब आया बीजेपी के आईटी सेल प्रमुख अमित मालवीय की ओर से. उन्होंने एक्स (पूर्व ट्विटर) पर लिखा, 'Fake News Alert!' उन्होंने आगे लिखा, "राहुल गांधी दावा कर रहे हैं कि अरुण जेटली ने उन्हें 2020 में लाए गए कृषि कानूनों को लेकर धमकाया था. लेकिन तथ्य यह है कि अरुण जेटली का निधन 24 अगस्त 2019 को हो गया था, जबकि कृषि कानूनों का मसौदा पहली बार 3 जून 2020 को केंद्रीय मंत्रिमंडल के समक्ष पेश किया गया था और ये कानून सितंबर 2020 में पास हुए." अमित मालवीय ने आगे कहा, "ऐसे में यह दावा सरासर झूठा और भ्रामक है कि जेटली जी ने उन्हें किसी बात के लिए संपर्क किया. यह साफ है कि राहुल गांधी एक बार फिर टाइमलाइन को तोड़-मरोड़ कर अपनी राजनीतिक कहानी गढ़ने की कोशिश कर रहे हैं." पिता की आत्मा को शांति से रहने दें: रोहन जेटली अरुण जेटली के बेटे और दिल्ली एवं जिला क्रिकेट संघ (डीडीसीए) के अध्यक्ष रोहन जेटली ने भी राहुल गांधी की टिप्पणी पर तीखा पलटवार किया. उन्होंने एक्स पर लिखा, "राहुल गांधी अब यह दावा कर रहे हैं कि मेरे दिवंगत पिता अरुण जेटली ने कृषि कानूनों को लेकर उन्हें धमकी दी थी. मैं उन्हें याद दिलाना चाहता हूं कि मेरे पिता का निधन 2019 में हो गया था, जबकि कृषि कानून 2020 में लाए गए थे. और सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि मेरे पिता कभी किसी को किसी विचार के विरोध के लिए धमकाने वाले नहीं थे. वह एक सच्चे लोकतांत्रिक व्यक्ति थे जो हमेशा संवाद और सहमति में विश्वास रखते थे." उन्होंने आगे कहा, "मैं राहुल गांधी से आग्रह करता हूं कि जो अब हमारे बीच नहीं हैं, उनके बारे में बोलते समय थोड़ी संवेदनशीलता दिखाएं. उन्होंने मनोहर पर्रिकर जी के अंतिम दिनों को भी राजनीति से जोड़कर अपमानजनक हरकत की थी." हर बात में झूठ, कांग्रेस कब सुधरेगी: अनुराग ठाकुर बीजेपी सांसद और केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर ने भी राहुल गांधी पर जोरदार हमला बोला. उन्होंने कहा, "राहुल गांधी की हर बात झूठ है. हर साल झूठ बोलते हैं, वो सुधर नहीं सकते. रोज एक नया झूठ. कांग्रेस कब तक झूठ की राजनीति करेगी? अरुण जेटली बड़े नेता थे. उनका निधन 2019 में हुआ और कृषि कानून 2020 में संसद में आया. कितने झूठ बोलेंगे राहुल गांधी? जब जेटली जी 2019 में ही गुजर गए, तो वो उनसे 2020 में मिलने कैसे आ सकते हैं? राहुल गांधी को अरुण जेटली के परिवार … Read more

निगम-मंडलों में नियुक्तियों की तैयारी तेज, क्षेत्रीय और सामाजिक समीकरण होंगे अहम

भोपाल   मध्यप्रदेश में ओबीसी आयोग के अध्यक्ष पद पर रामकृष्ण कुसमारिया की नियुक्ति के बाद अब निगम-मंडल, बोर्ड, आयोग और प्राधिकरणों में राजनीतिक नियुक्तियों की प्रक्रिया को लेकर हलचल तेज हो गई है। जानकारी के अनुसार, दिल्ली से हरी झंडी मिलने के बाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और प्रदेश भाजपा अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल के बीच संभावित नामों को लेकर विस्तृत चर्चा हो चुकी है। इन नामों की सूची तैयार कर अनुमोदन के लिए केंद्रीय नेतृत्व को भेज दी गई है। अनुमति मिलते ही नियुक्तियों के आदेश जारी किए जाएंगे। सूत्रों के मुताबिक भाजपा नेतृत्व ने संगठनात्मक अनुभव, क्षेत्रीय संतुलन और सामाजिक समीकरणों को ध्यान में रखते हुए नामों को अंतिम रूप दिया है। इसमें पूर्व मंत्री, संगठन के वरिष्ठ पदाधिकारी, पूर्व विधायक, पूर्व सांसद तथा विभिन्न जातीय समूहों का प्रतिनिधित्व करने वाले प्रभावशाली चेहरों को शामिल किया गया है। फिलहाल राज्य में निगम-मंडल, बोर्ड और आयोगों के लगभग तीन दर्जन से अधिक अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के पद रिक्त हैं, जिन्हें भरने के लिए यह कवायद की जा रही है। क्षेत्रीय और सामाजिक संतुलन पर फोकस  सरकार की मंशा है कि इन नियुक्तियों के माध्यम से सभी वर्गों और क्षेत्रों को उचित प्रतिनिधित्व मिले, जिससे आगामी नगरीय निकाय और पंचायत चुनावों में पार्टी को राजनीतिक लाभ मिल सके। बता दें कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने लोकसभा चुनाव से पहले 45 निगम-मंडलों और बोर्डों में की गई पूर्ववर्ती नियुक्तियों को रद्द कर दिया था। तब से अब तक इन संस्थाओं में कोई नई नियुक्ति नहीं हुई है। 

यूपी बीजेपी अध्यक्ष पद के लिए तैयार लिस्ट, 6 नामों में पूर्व उपमुख्यमंत्री भी शामिल

लखनऊ  उत्तर प्रदेश में 2027 की शुरुआत में चुनाव होने वाले हैं। ऐसे में राज्य इकाई प्रमुख का चुनाव भाजपा के सामने प्रमुख फैसलों में से एक माना जा रहा है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की उत्तर प्रदेश इकाई ने राष्ट्रीय नेतृत्व को छह नामों की एक सूची भेजी है। इनमें दो ब्राह्मण, दो पिछड़े समुदाय से और दो दलित समुदाय से हैं। माना जा रहा है कि जल्द ही राज्य इकाई के अगले प्रमुख का चयन और ऐलान हो जाएगा। पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने  यह जानकारी दी। सुझाए गए नामों में पूर्व उपमुख्यमंत्री दिनेश शर्मा और बस्ती के पूर्व सांसद हरीश द्विवेदी (दोनों ब्राह्मण), उत्तर प्रदेश के वर्तमान मंत्री धर्मपाल सिंह और वर्तमान केंद्रीय राज्य मंत्री बीएल वर्मा (दोनों ओबीसी), और पूर्व केंद्रीय मंत्री रामशंकर कठेरिया और वर्तमान एमएलसी विद्या सागर सोनकर (दोनों दलित) शामिल हैं। नेता ने कहा, ‘हमने अपनी ओर से केंद्रीय नेतृत्व को उपयुक्त नाम सुझाए हैं जिन पर उत्तर प्रदेश भाजपा अध्यक्ष पद के लिए विचार किया जा सकता है और नेतृत्व सक्रिय रूप से उनका मूल्यांकन कर रहा है। अगले दो हफ़्तों में, संभवतः उससे भी पहले, कोई निर्णय होने की संभावना है।’ भारत के सबसे अधिक आबादी वाले राज्य में 2027 की शुरुआत में चुनाव होने वाले हैं और राज्य इकाई प्रमुख का चुनाव भाजपा के सामने प्रमुख फैसलों में से एक माना जा रहा है। भाजपा, यूपी में पिछले लोकसभा चुनाव की अपनी हार को पलटने और प्रदेश में लगातार तीसरी बार जीत हासिल करने की कोशिश करेगी। भाजपा ने पहले ही 37 संगठनात्मक इकाइयों में से 25 से अधिक में राज्य प्रमुखों का चयन कर लिया है। अपने अगले राष्ट्रीय अध्यक्ष के नाम की भी तैयारी कर रही है। वर्तमान में यूपी भाजपा की कमान पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जाट नेता भूपेन्द्र सिंह चौधरी संभाल रहे हैं। नए अध्यक्ष उनकी जगह लेंगे। लिस्ट में शामिल नामों की खासियत अपनी स्वच्छ छवि और शैक्षणिक योग्यता के लिए जाने जाने वाले पूर्व मुख्यमंत्री दिनेश शर्मा (ब्राह्मण) को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और शीर्ष नेतृत्व का विश्वास प्राप्त है। हरीश द्विवेदी भी ब्राह्मण हैं और अपने साथ संसदीय अनुभव लेकर आते हैं। वे बस्ती से सांसद और पार्टी में राष्ट्रीय सचिव रह चुके हैं। धर्मपाल सिंह और बीएल वर्मा दोनों ही प्रभावशाली लोध समुदाय से हैं। उत्तर प्रदेश मंत्रिमंडल में वरिष्ठ मंत्री सिंह को विधायी और मंत्री पद का दशकों का अनुभव है। वर्मा, जो वर्तमान में केंद्रीय राज्य मंत्री हैं, एक अनुशासित और साधारण संगठनकर्ता माने जाते हैं जिनके आरएसएस से गहरे संबंध हैं। संगठन के भीतर उन्हें विश्वास प्राप्त है। पूर्व केंद्रीय मंत्री और राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग के पूर्व अध्यक्ष कठेरिया हिंदुत्व और दलित पहचान के अपने आक्रामक रुख के लिए जाने जाते हैं। एमएलसी सोनकर एक साधारण लेकिन वफादार पार्टी कार्यकर्ता हैं जिनका पूर्वी उत्तर प्रदेश में प्रभाव है। उत्तर प्रदेश भाजपा अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी ने कहा, "हमने आलाकमान को अपने विचारों से अवगत करा दिया है। अब, केंद्रीय नेतृत्व को राज्य के नए अध्यक्ष के नाम की घोषणा करनी है और हमें उम्मीद है कि यह बहुत जल्द हो जाएगा।"