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निकाय चुनाव को लेकर पंजाब में घमासान: भाजपा का आरोप- नियमों के खिलाफ हो रही प्रक्रिया

बरनाला  पंजाब में होने जा रहे नगर निगम चुनावों को लेकर राजनीतिक माहौल पूरी तरह गरमा गया है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पंजाब के एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने राज्य चुनाव आयुक्त को ज्ञापन सौंपकर वर्तमान चुनावी प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। भाजपा ने आरोप लगाया है कि राज्य सरकार और चुनाव आयोग मिलकर लोकतांत्रिक नियमों की धज्जियां उड़ा रहे हैं। भाजपा का यह प्रतिनिधिमंडल पंजाब भाजपा की राज्य कोर कमेटी के सदस्यों और राज्य उपाध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों के नेतृत्व में चुनाव आयुक्त से मिला। इस प्रतिनिधिमंडल में परमपाल कौर, रंजीत सिंह गिल, एन.के. वर्मा और मोहित गर्ग भी शामिल थे। भाजपा नेताओं ने कहा कि चुनाव आयोग ने स्वयं 30 अप्रैल 2026 को एक शेड्यूल जारी किया था, जिसके अनुसार आपत्तियों के निपटारे के लिए 11 मई 2026 और मतदाता सूची के अंतिम प्रकाशन के लिए 12 मई 2026 की तारीख तय की गई थी। क्यों लगे कानून के उल्लंघन के आरोप? लेकिन हैरानी की बात यह है कि कई जिलों में इस अवधि के समाप्त होने से पहले ही अंतिम अधिसूचना जारी कर दी गई, जो सीधे तौर पर कानून का उल्लंघन है। भाजपा नेताओं ने कहा कि माननीय पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय में सरकार ने आश्वासन दिया था कि वार्डबंदी और मतदाता सूची के संबंध में सभी आपत्तियों का निपटारा किया जाएगा। लेकिन बिना किसी सुनवाई के अधिसूचना जारी करना अदालत की अवमानना है। भाजपा ने दावा किया है कि कई वार्डों में पंजीकृत मतदाताओं की संख्या वहां की कुल जनसंख्या से भी अधिक दिखाई गई है, जो कि एक 'जनसांख्यिकीयअसंभव' बात है। उन्होंने आरोप लगाया कि वार्डों के आरक्षण में रोटेशन के नियमों को ताक पर रख दिया गया है। जहां एससी जनसंख्या अधिक है, उन वार्डों की अनदेखी कर कम जनसंख्या वाले वार्डों को आरक्षित कर दिया गया है। पार्टी ने कहा कि चुनाव आयोग द्वारा दिखाई जा रही जल्दबाजी विपक्षी दलों को तैयारी का मौका न देने की एक साजिश है ताकि चुनावों की निष्पक्षता को खत्म किया जा सके। भाजपा के वरिष्ठ नेताओं ने क्या कहा? भाजपा के वरिष्ठ नेताओं ने स्पष्ट किया है कि यदि चुनाव आयोग ने तुरंत इन अवैध अधिसूचनाओं को वापस नहीं लिया और आपत्तियों का निपटारा नहीं किया, तो पार्टी उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाएगी और पूरी चुनावी प्रक्रिया पर रोक लगाने की मांग करेगी। उन्होंने मांग की है कि चुनावी प्रक्रिया को तुरंत स्थगित किया जाए। आपत्तियों के निपटारे के लिए ''स्पीकिंग ऑर्डर'' जारी किए जाएं। मतदाता सूची के संशोधन के बाद उम्मीदवारों के चयन के लिए नया और उचित समय दिया जाए।  

सिंधिया समर्थक कृष्णा घाड़गे पर BJP सख्त: केपी यादव पर बिना नाम लिए टिप्पणी पड़ी भारी

भोपाल केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के समर्थक माने जाने वाले कृष्णा घाड़गे को भाजपा भोपाल शहर अध्यक्ष रविंद्र यति ने कारण बताओ नोटिस जारी किया है। नोटिस एक फेसबुक पोस्ट को लेकर दिया गया, जिसमें पूर्व सांसद केपी यादव का नाम लिए बिना उन्हें “बालक बुद्धि नेता” बताया गया था। भाजपा संगठन की ओर से जारी नोटिस में कृष्णा घाड़गे से तीन दिन के भीतर जवाब मांगा गया है। पार्टी ने सोशल मीडिया पर की गई टिप्पणी को अनुशासनहीनता की श्रेणी में माना है। केपी यादव के बयान के बाद बढ़ा विवाद दरअसल, नागरिक आपूर्ति निगम के अध्यक्ष पद का कार्यभार संभालने के बाद अशोकनगर पहुंचे केपी यादव ने एक कार्यक्रम के दौरान कहा था कि उन्हें प्रदेश नेतृत्व ने नई जिम्मेदारी सौंपी है और अब अगले दो वर्षों तक वे हर मंच पर दिखाई देंगे। उन्होंने मंच से कहा कि जनता का स्नेह और समर्थन उन्हें लगातार ऊर्जा देता है और क्षेत्र के विकास के लिए वे हर चुनौती का सामना करने को तैयार हैं। केपी यादव ने यह भी कहा कि अशोकनगर शांतिप्रिय क्षेत्र है, जहां लोग भाईचारे के साथ रहते हैं। “फूट डालकर राज करने वालों” पर साधा निशाना अपने संबोधन में केपी यादव ने बिना किसी का नाम लिए कहा कि कुछ लोग समाज में फूट डालकर राजनीति करने की कोशिश करते हैं। उन्होंने ऐसे लोगों से क्षेत्र के विकास के लिए सकारात्मक राजनीति करने की अपील की। उन्होंने कहा कि 2019 में जनता के आशीर्वाद से उन्हें संसद पहुंचने का अवसर मिला और पांच वर्षों तक उन्होंने क्षेत्र, प्रदेश और देश के विकास के लिए काम किया। साथ ही उन्होंने दावा किया कि उनके कार्यकाल में उन पर किसी प्रकार का आरोप नहीं लगा और उन्होंने बिना भेदभाव के सभी वर्गों के लिए काम किया। केपी यादव के इस बयान के बाद कृष्णा घाड़गे की सोशल मीडिया पोस्ट सामने आई, जिसके बाद भाजपा संगठन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए उन्हें नोटिस जारी कर दिया।

सादगी और पर्यावरण का संदेश: लाव-लश्कर छोड़ ई-रिक्शा में पहुंचे निगम अध्यक्ष

भोपाल इजराइल-ईरान युद्ध के कारण उत्पन्न वैश्विक परिस्थितियों को देखते PM मोदी ने देशवासियों से पेट्रोल-डीजल का संयमित उपयोग करने की अपील की है। जिसका असर अब स्थानीय तौर पर नजर आने लगा है। इसी कड़ी में मध्य प्रदेश में नवनियुक्त अध्यक्ष सत्येंद्र भूषण लाव लश्कर छोड़ ई रिक्शा से पदभार ग्रहण करने पहुंचे। उनकी सागदी की तस्वीरे अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है।दरअसल, सत्येंद्र भूषण को मध्य प्रदेश लघु उद्योग निगम का अध्यक्ष बनाया गया है। ऐसे में पदभार ग्रहण करने के लिए सत्येंद्र भूषण लग्जरी गाड़ियों की बजाय बैटरी चलित ई-रिक्शा से रवाना हुए। वे भोपाल के अवधपुरी स्थित अपने निजी आवास से ई-रिक्शा में सवार होकर भाजपा कार्यालय पहुंचे। हालांकि उनके साथ कई समर्थक गाड़ियों से पहुंचे। बता दें कि इससे पहले मध्य प्रदेश पाठ्य पुस्तक निगम के अध्यक्ष BJP नेता सौभाग्य सिंह ठाकुर के पदभार ग्रहण को लेकर जमकर किरकिरी हुई थी। पीएम मोदी की अपील को दरकिनार करते हुए भौकाल जमाने के लिए सौभाग्य सिंह ने उज्जैन से भोपाल तक 700 गाड़ियों का लंबा काफिला निकाल दिया। जिसे लेकर सोशल मीडिया पर जमकर सवाल उठे और उनकी तस्वीरें वायरल हुई। कांग्रेस ने आरोप लगाए कि एक तरफ नरेंद्र मोदी देश को पेट्रोल-डीजल कम इस्तेमाल करने का ज्ञान देते हैं, दूसरी तरफ उनकी ही पार्टी के नेता अपील की धज्जियां उड़ाते हैं।

BJP में राष्ट्रीय कार्यकारिणी के लिए छत्तीसगढ़ से पांच नामों पर नजर, 12 मई को होगी बैठक

रायपुर भारतीय जनता पार्टी (BJP) की राष्ट्रीय कार्यकारिणी का गठन इस महीने के आखिरी सप्ताह तक होने की संभावना है। सूत्रों के अनुसार, छत्तीसगढ़ से पांच नेताओं को राष्ट्रीय कार्यकारिणी में शामिल किया जा सकता है। भाजपा के राष्ट्रीय सह संगठन महामंत्री शिव प्रकाश 12 मई को प्रदेश दौरे पर आ रहे हैं। इस दौरान वे मुख्यमंत्री सहित प्रदेश के शीर्ष नेताओं से बैठक कर इस विषय पर चर्चा कर सकते हैं। कई नेताओं के नाम चर्चा में जानकारी के मुताबिक, छत्तीसगढ़ के क्षेत्रीय संगठन महामंत्री अजय जामवाल और भाजपा संगठन महामंत्री पवन साय कार्यकारिणी के पदेन सदस्य रहेंगे। इसके अलावा राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन अन्य पांच सदस्यों के नाम तय करेंगे। कोंडागांव विधायक और पूर्व मंत्री लता उसेंडी को राष्ट्रीय कार्यकारिणी में बड़ी जिम्मेदारी मिलने की चर्चा है। वहीं खनिज विकास निगम के अध्यक्ष सौरभ सिंह, बस्तर सांसद महेश कश्यप, रेणुका सिंह और भावना बोहरा के नाम भी संभावित सूची में बताए जा रहे हैं। उपमुख्यमंत्री अरुण साव और विजय शर्मा को भी कार्यकारिणी में शामिल किए जाने की संभावना जताई जा रही है। 12 और 13 मई को अहम बैठकें छत्तीसगढ़ भाजपा की महत्वपूर्ण बैठकें 12 और 13 मई को रायपुर स्थित कुशाभाऊ ठाकरे परिसर में आयोजित होंगी। 12 मई को शाम छह बजे कोर कमेटी की बैठक होगी, जबकि शाम 7:30 बजे प्रदेश पदाधिकारियों की चर्चा आयोजित की जाएगी। 13 मई को सुबह 10 बजे प्रदेश कार्यसमिति की बैठक होगी। भाजपा प्रदेश महामंत्री डॉ. नवीन मार्कंडेय ने बताया कि बैठकों में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, प्रदेश अध्यक्ष किरण देव और राष्ट्रीय सह संगठन महामंत्री शिव प्रकाश वरिष्ठ नेताओं का मार्गदर्शन मिलेगा।

वीडी और मुख्यमंत्री के सामने चुनौतियां, एमपी में राजनीतिक नियुक्तियों पर ब्रेक

भोपाल मध्यप्रदेश भाजपा के भीतर इन दिनों निगम-मंडलों, बोर्डों और विकास प्राधिकरणों के खाली पदों को भरने को लेकर भारी कशमकश देखी जा रही है। राजनीतिक नियुक्तियों की प्रतीक्षा लंबी होती जा रही है, क्योंकि पार्टी के अंदर प्रभावशाली पदों पर काबिज होने के लिए अलग-अलग गुटों में खींचतान चरम पर है। स्थिति यह है कि प्रदेश के 31 से अधिक महत्वपूर्ण संस्थानों में अध्यक्ष और उपाध्यक्षों की नियुक्ति का मामला ठंडे बस्ते में चला गया है, जिससे संगठन और सरकार के बीच सामंजस्य बैठाना चुनौती बन गया है। भोपाल विकास प्राधिकरण पर वर्चस्व की लड़ाई राजधानी (MP) के सबसे महत्वपूर्ण संस्थानों में से एक, भोपाल विकास प्राधिकरण (BDA) के अध्यक्ष पद को लेकर सबसे ज्यादा खींचतान मची हुई है। हालांकि पहले चेतन सिंह का नाम लगभग तय माना जा रहा था, लेकिन मंत्रियों और विधायकों की निजी महत्वाकांक्षाओं ने इस प्रक्रिया को उलझा दिया है। हर गुट चाहता है कि इस प्रभावशाली पद पर उनका अपना व्यक्ति बैठे ताकि शहर के बुनियादी ढांचे और विकास कार्यों पर उनका नियंत्रण बना रहे। इंदौर की नियुक्ति में दिल्ली का हस्तक्षेप इंदौर विकास प्राधिकरण के मामले में पेच और भी पेचीदा हो गया है। बताया जा रहा है कि हरिनारायण यादव का नाम चयन के बेहद करीब था, लेकिन ऐन वक्त पर इंदौर के ही एक रसूखदार नेता ने दिल्ली दरबार में अपनी पहुंच का इस्तेमाल करते हुए इस पर रोक लगवा दी। इस ‘वीटो’ के बाद अब नए समीकरण तलाशे जा रहे हैं, जिससे कार्यकर्ताओं और दावेदारों में बेचैनी बढ़ गई है। 50 दिग्गज नेताओं की सक्रिय लॉबिंग पार्टी के भीतर लगभग 50 से ज्यादा कद्दावर नेता ऐसे हैं जो अब तक सत्ता की मुख्यधारा में कोई पद हासिल नहीं कर पाए हैं। ये सभी नेता अब बचे हुए निगमों और आयोगों में अपनी जगह सुनिश्चित करने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा रहे हैं। नेताओं का यह दबाव ही है कि सरकार और संगठन चाहकर भी अंतिम सूची पर मुहर नहीं लगा पा रहे हैं। इन प्रमुख संस्थानों में खाली पड़ी हैं कुर्सियां प्रदेश (MP) के कई बड़े और प्रभावकारी संस्थानों में नेतृत्व का अभाव है। इनमें नीति एवं योजना आयोग, खनिज विकास निगम, पर्यटन बोर्ड, कृषि विपणन बोर्ड, और पिछड़ा वर्ग कल्याण आयोग जैसे महत्वपूर्ण नाम शामिल हैं। इसके साथ ही गौपालन एवं पशु संवर्धन बोर्ड, मदरसा बोर्ड, और विभिन्न क्षेत्रीय विकास प्राधिकरणों (जैसे महाकौशल और बुंदेलखंड) में भी नियुक्तियां न होने से कामकाज प्रभावित हो रहा है। राजस्व पर बढ़ता अतिरिक्त वित्तीय भार इन राजनीतिक नियुक्तियों का एक पहलू सरकारी खजाने पर पड़ने वाला बोझ भी है। एक अध्यक्ष या उपाध्यक्ष की नियुक्ति के साथ ही आलीशान कार्यालय, सरकारी वाहन, ड्राइवर और स्टाफ का लंबा-चौड़ा अमला जुड़ जाता है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि एक राजनीतिक नियुक्ति से सरकारी खजाने पर हर महीने औसतन 3 से 5 लाख रुपये का अतिरिक्त खर्च आता है, जो अंततः जनता के टैक्स के पैसे से ही वहन किया जाता है। पुराने चेहरों की वापसी ? हाल की कुछ नियुक्तियों ने पार्टी के भीतर असंतोष की आग को और हवा दी है। विनोद गोटिया, सत्येंद्र भूषण सिंह और महेंद्र सिंह यादव जैसे नेताओं को दोबारा अहम जिम्मेदारियां मिलने से नए और ऊर्जावान कार्यकर्ता खुद को उपेक्षित महसूस कर रहे हैं। फिलहाल मध्यप्रदेश भाजपा में नियुक्तियों का पूरा मामला सत्ता और संगठन के बीच संतुलन बनाने की कोशिशों में उलझा हुआ है।

2024 की राह में बीजेपी की भरपाई: बंगाल की सफलता और राष्ट्रपति चुनाव

नई दिल्ली भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) 2024 लोकसभा चुनाव में अपने दम पर बहुमत नहीं ला पाई थी, इसके बाद माना जा रहा था कि उसका दबदबा घटने लगेगा. लेकिन अब हालात फिर बदले हैं. पश्चिम बंगाल में दो-तिहाई से ज्यादा सीटों पर जीतना हो, या फिर दूसरे राज्यों के विधानसभा चुनाव, सब में बीजेपी का प्रदर्शन दमदार रहा. ऐसे में अगले साल के राष्ट्रपति चुनाव में पार्टी को अपर हैंड मिलेगा।  महाराष्ट्र, बंगाल और बिहार जैसे बड़े राज्यों में सहयोगी दलों के साथ बीजेपी ने चुनाव जीते. ये तीनों राज्य राष्ट्रपति चुनाव में उत्तर प्रदेश के बाद सबसे अधिक महत्व वाले माने जाते हैं।  तीनों में NDA की जीत ने मानो लोकसभा में हुए नुकसान की भरपाई कर दी है. क्योंकि विधानसभा चुनावों में खराब प्रदर्शन से सहयोगियों के साथ भी शर्तों को तय करने की उसकी शक्ति कमजोर हो सकती थी।  बता दें कि 2024 में बीजेपी की सीटों की संख्या 303 से घटकर 240 हो गई थी. इस गिरावट से 2022 में 10,86,431 की कुल संख्या वाले निर्वाचक मंडल (राष्ट्रपति चुनने वाले) में बीजेपी के वोटों को 44,100 का झटका लगा था. तब बीजेपी बहुमत के लिए 272 का आंकड़ा पार करने के लिए टीडीपी और जेडीयू पर निर्भर थी, तब विपक्ष ने दावा किया था कि सरकार जल्द ही गिर जाएगी।  हालांकि, दो साल से अधिक समय बीत जाने के बाद, बीजेपी की स्थिति काफी मजबूत है. कैसे मिलेगा फायदा राष्ट्रपति चुनाव के लिए संसद और विधानसभाओं के सभी निर्वाचित सदस्य निर्वाचक मंडल बनाते हैं. इसमें हर एक सांसद के वोट की वैल्यू बराबर (2022 में 700 थी) होती है. लेकिन विधायक के वोट का महत्व उसकी विधानसभा की जनसंख्या (1971 की जनगणना के अनुसार) के आकार पर निर्भर करता है।  जैसे, 2022 में उत्तर प्रदेश के एक विधायक के वोट की वैल्यू 208 थी, जो सिक्किम के एक विधायक के वोट की वैल्यू (7) से लगभग 30 गुना अधिक थी. 2027 राष्ट्रपति चुनाव में भी यह नंबर कमोबेश उतना ही रहने के आसार हैं. ऐसे में बड़े राज्यों में जीत से बीजेपी को सीधा फायदा होगा।  जैसे, हरियाणा में बीजेपी ने बड़ी जीत हासिल. महाराष्ट्र विधानसभा में एनडीए की संख्या, जो 288 सदस्यों वाली है, पिछले राष्ट्रपति चुनाव के दौरान 150 से अधिक से बढ़कर 237 विधायक हो गई है. बिहार विधानसभा में भी उसकी संख्या 125 से बढ़कर 202 हो गई है. पश्चिम बंगाल में अब उसके पास 77 विधायकों के मुकाबले 207 विधायक हैं।  ऐसे में अगले साल जुलाई में होने वाले राष्ट्रपति चुनाव से पहले, उत्तर प्रदेश सबसे महत्वपूर्ण है, क्योंकि निर्वाचक मंडल में उसके 83,800 से अधिक वोटों का भारी दबदबा है।   

सालों से अटकी योजनाओं का होगा आरंभ, बंगाल में डबल इंजन सरकार की योजना

 कोलकाता पश्चिम बंगाल में नई सरकार के गठन में भले अभी कुछ समय हो, लेकिन चुनाव परिणाम सामने आते ही केंद्र सरकार ने राज्य में सालों से अटकी केंद्रीय योजनाओं और परियोजनाओं को तेजी से आगे बढ़ाने की तैयारी शुरू कर दी है. सूत्रों के अनुसार केंद्र सरकार ने सभी मंत्रालयों से उन योजनाओं और परियोजनाओं की सूची मांगी है जो पिछले लगभग 12 सालों से ममता बनर्जी सरकार के विरोध, देरी या प्रशासनिक अड़चनों के कारण लंबित पड़ी थीं।  सूत्रों का कहना है कि इस पूरी कवायद की जिम्मेदारी रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह सौंपी गई है. उन्होंने कई मंत्रालयों से ऐसी योजनाओं का विस्तृत ब्यौरा मांगा है, जो पश्चिम बंगाल में बाधित रही हैं. मंत्रालयों ने संबंधित सूचनाएं भेजना भी शुरू कर दिया है. केंद्र सरकार का उद्देश्य नई सरकार के गठन के तुरंत बाद इन परियोजनाओं के रास्ते की बाधाएं दूर कर तेज गति से काम शुरू करना है।  पिछले एक दशक में केंद्र और पश्चिम बंगाल सरकार के बीच कई योजनाओं को लेकर लगातार टकराव देखने को मिला. कई केंद्रीय योजनाएं राज्य में लागू नहीं की गईं या फिर उनके नाम बदलकर लागू किया गया. कई परियोजनाओं को जमीन आवंटन, प्रशासनिक अनुमति या अन्य कारणों से लंबे समय तक रोके रखा गया. अब केंद्र सरकार इन्हें प्राथमिकता के आधार पर आगे बढ़ाने की तैयारी कर रही है।  कई प्रमुख योजनाओं का मिलेगा लाभ सबसे प्रमुख योजना आयुष्मान भारत है जिसे पश्चिम बंगाल सरकार ने लागू करने से इनकार कर दिया था. इस योजना के तहत पात्र परिवारों को 5 लाख रुपये तक का स्वास्थ्य बीमा मिलता है. ममता बनर्जी सरकार का कहना था कि राज्य की ‘स्वास्थ्य साथी’ योजना बेहतर है, केंद्र की 60:40 फंडिंग व्यवस्था और प्रधानमंत्री की तस्वीर वाले स्वरूप पर भी आपत्ति थी।  पीएम मोदी पहले ही कह चुके हैं कि नई सरकार की पहली कैबिनेट बैठक में ही आयुष्मान भारत योजना को मंजूरी दी जाएगी।  प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना को लेकर भी लंबे समय तक केंद्र और राज्य सरकार के बीच विवाद रहा. ममता सरकार अपनी ‘कृषक बंधु’ योजना को प्राथमिकता देती रही. हालांकि बाद में इसे आंशिक रूप से लागू किया गया, लेकिन लाभार्थियों के सत्यापन को लेकर खींचतान जारी रही. अब केंद्र सरकार इसे पूरी क्षमता के साथ लागू कराने की तैयारी में है।  इसी तरह  महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोज़गार गारंटी एक्ट यानी मनरेगा के फंड को कथित अनियमितताओं के कारण केंद्र ने रोक दिया था. इसे लेकर राज्य सरकार ने केंद्र पर आर्थिक नाकेबंदी का आरोप लगाया था. अब केंद्र इसे नए ढांचे के साथ आगे बढ़ाने की तैयारी में है।  प्रधानमंत्री आवास योजना नाम बदलकर ‘बांग्ला आवास योजना’ किए जाने और उसमें कथित अनियमितताओं के बाद 2022 से फंडिंग रुकी हुई थी. अब इस योजना को दोबारा सक्रिय करने की तैयारी की जा रही है।  केंद्र सरकार के अनुसार प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना को पश्चिम बंगाल में काफी देर से लागू किया गया और आवंटित राशि का सीमित उपयोग हुआ. वहीं जल जीवन मिशन के तहत आवंटित फंड के बेहतर उपयोग और प्रभावी तरीके से लागू करने पर जोर दिया जाएगा।  शिक्षा क्षेत्र में पीएम श्री स्कूल नई शिक्षा एवं भाषा नीति और ‘उल्लास’ जैसी योजनाओं को लागू करने की तैयारी है. साथ ही प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत रुकी परियोजनाओं को भी मंजूरी मिलने की संभावना है. नमामि गंगे प्रोग्राम के तहत गंगा सफाई से जुड़े कई सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट भूमि उपलब्ध न होने के कारण वर्षों से लंबित हैं।  केंद्र सरकार कई बार संसद में यह मुद्दा उठा चुकी है कि पश्चिम बंगाल में जमीन नहीं मिलने से परियोजनाओं में देरी हुई. अब इन प्रोजेक्ट्स को तेजी से पूरा करने की तैयारी है।  इसी तरह अंतरराष्ट्रीय सीमा पर संवेदनशील क्षेत्रों में बॉर्डर फेंसिंग को लेकर भी केंद्र और राज्य सरकार के बीच विवाद रहा. केंद्र का आरोप था कि आवश्यक भूमि उपलब्ध नहीं कराई गई. अब इसे प्राथमिकता के साथ आगे बढ़ाने की योजना बनाई गई है।  प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना को छोड़कर पश्चिम बंगाल सरकार ने अपनी ‘बांग्ला शस्य बीमा’ योजना शुरू की थी. राज्य सरकार का तर्क था कि उसका मॉडल किसानों के लिए अधिक लाभकारी है, जबकि केंद्र ने इसे राजनीतिक श्रेय लेने की कोशिश बताया।  मृदा स्वास्थ्य कार्ड, और पीएम-प्रणाम जैसी योजनाओं को लागू करने की गति को लेकर भी केंद्र ने राज्य सरकार पर उदासीनता का आरोप लगाया।  केंद्र सरकार की रणनीति साफ है कि लंबे समय से रुकी परियोजनाओं को तेज गति से पूरा कर जमीन पर ‘डबल इंजन सरकार’ का असर दिखाया जाए. साथ ही केंद्रीय योजनाओं का दायरा बढ़ाकर लाभार्थियों की संख्या में विस्तार किया जाए, ताकि केंद्र सरकार की योजनाओं का सीधा लाभ अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचे। 

यूपी में नई रणनीति तैयार कर रही भाजपा, बंगाल जीत के बाद बंसल को सौंपा जा सकता है अहम काम

लखनऊ   यूपी की अगली चुनावी लड़ाई को लेकर भारतीय जनता पार्टी के भीतर हलचल तेज हो गई है। पार्टी के अंदर यह चर्चा जोर पकड़ रही है कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव सुनील बंसल को प्रदेश में अधिक सक्रिय और प्रत्यक्ष भूमिका दी जा सकती है, ताकि 2027 विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी के जातीय समीकरणों को फिर से मजबूत किया जा सके। यह अटकलें पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में भाजपा की हालिया सफलता के बाद तेज हुई हैं, जहां बूथ स्तर की मजबूत रणनीति और संगठनात्मक समन्वय ने पार्टी को बड़ी जीत दिलाई और 15 वर्षों से सत्ता में रही तृणमूल कांग्रेस सरकार को सत्ता से बाहर कर दिया। हालांकि भाजपा के भीतर यह समझ भी है कि उत्तर प्रदेश की राजनीतिक परिस्थितियां पश्चिम बंगाल से कहीं अधिक जटिल हैं। पार्टी नेताओं का मानना है कि केवल संगठनात्मक मजबूती से यूपी की चुनौती का समाधान संभव नहीं होगा, क्योंकि यहां जातीय समीकरण चुनावी राजनीति का सबसे अहम आधार बने हुए हैं। फिलहाल उत्तर प्रदेश में भाजपा के संगठनात्मक मामलों की निगरानी बी एल संतोष और विनोद तावड़े कर रहे हैं, लेकिन पार्टी के एक वर्ग का मानना है कि यूपी की सामाजिक और जातीय संरचना को देखते हुए ऐसे नेताओं की जरूरत है जिन्हें राज्य की चुनावी जमीन का गहरा अनुभव हो। भाजपा के एक राष्ट्रीय पदाधिकारी ने कहा, 2017 में पार्टी को ऐतिहासिक जीत दिलाने में अहम भूमिका निभाने वाले अमित शाह और संगठनात्मक नेटवर्क को मजबूत करने वाले सुनील बंसल को फिर से बड़ी जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है। यूपी की राजनीति पर नजर रख सकते हैं अमित शाह उन्होंने साफ तौर पर कहा कि अमित शाह यूपी की राजनीति पर पहले से ज्यादा सीधी नजर रख सकते हैं, जबकि सुनील बंसल को राज्य का प्रभारी बनाकर चुनावी तैयारियों की कमान दी जा सकती है। उत्तर प्रदेश में भाजपा की ताकत लंबे समय तक सवर्ण, गैर-यादव पिछड़ा वर्ग और गैर-जाटव दलितों के व्यापक सामाजिक गठजोड़ पर आधारित रही है। इसके साथ पार्टी ने मजबूत हिंदुत्व एजेंडे के जरिए अपनी पकड़ बनाई। लेकिन हालिया चुनावों में इस सामाजिक समीकरण में कमजोरी के संकेत दिखाई दिए हैं। दरअसल अखिलेश यादव के नेतृत्व में समाजवादी पार्टी ने पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) रणनीति के जरिए जातीय राजनीति को नए तरीके से संगठित किया है, जिससे मुकाबला और कड़ा हो गया है। बीजेपी के लिए उम्मीद से कठिन था 2022 चुनाव का मुकाबला 2022 के विधानसभा चुनाव में भाजपा सत्ता तो बचाने में सफल रही, लेकिन पार्टी के भीतर यह स्वीकार किया गया कि मुकाबला उम्मीद से कहीं ज्यादा कठिन था। वहीं 2024 लोकसभा चुनाव ने भाजपा के सामने नई चुनौती को और स्पष्ट कर दिया। समाजवादी पार्टी ने उत्तर प्रदेश की 80 में से 37 सीटें जीतकर भाजपा के पारंपरिक वोट बैंक में भी सेंध लगाई। भाजपा का आंकड़ा 2019 की 62 सीटों से घटकर 2024 में 33 पर पहुंच गया। भाजपा के वरिष्ठ पदाधिकारी ने कहा कि, 2022 और 2024 के अनुभव अभी भी पार्टी के लिए चेतावनी की तरह हैं और संगठन किसी भी तरह की आत्मसंतुष्टि से बचना चाहता है। इसलिए अमित शाह जी और सुनील बंसल जी का दखल उत्तर प्रदेश में बढ़ सकता है। सीएम योगी की कानून व्यवस्था को सबसे बड़ी ताकत मानती है भाजपा करीब एक दशक से उत्तर प्रदेश की सत्ता में रहने के कारण भाजपा को स्थानीय स्तर पर एंटी-इंकम्बेंसी और विभिन्न समुदायों में प्रतिनिधित्व की बढ़ती मांग जैसी चुनौतियों का भी सामना करना पड़ रहा है। हालांकि पार्टी अब भी अपनी कल्याणकारी योजनाओं, बुनियादी ढांचे के विकास और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की कानून-व्यवस्था की छवि को अपनी सबसे बड़ी ताकत मानती है। हालांकि राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि पश्चिम बंगाल की जीत भाजपा के लिए बड़ी उपलब्धि है, लेकिन पार्टी को यह समझना होगा कि उत्तर प्रदेश की राजनीति कहीं अधिक जटिल है। भाजपा के राष्ट्रीय पदाधिकारी ने बताया कि, हिंदी पट्टी में जातीय राजनीति बेहद पेचीदा है। भाजपा को अपना सामाजिक गठबंधन दोबारा मजबूत करने, स्थानीय मुद्दों पर काम करने और विपक्ष के नैरेटिव का प्रभावी जवाब देने के लिए गंभीर मेहनत करनी होगी, जो 2024 में कमजोर पड़ती दिखाई दी थी। इस लिहाज से उत्तर प्रदेश में ऐसे नेताओं की जरूरत पड़ेगी जो यहाँ की चुनावी गणित को बेहतर तरीक़े से समझते हों।

सूचना-संदेश पर बैन, बीजेपी का कड़ा फैसला सोशल मीडिया पर लागू

इंदौर  भाजपा में बैठक व अन्य आयोजनों की सूचना वाट्सऐप पर डालकर जिम्मेदार इतिश्री कर लेते थे, लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। शीर्ष नेतृत्व ने साफ कर दिया है कि कोई भी कार्यक्रम हो उसकी जानकारी फोन लगाकर दी जाएगी। यहां तक कि पैमाना भी तय किया गया है कि कौन किसको फोन लगाएगा। पार्टी का मानना है कि वरिष्ठों के लिए कार्यकर्ताओं में सम्मान का भाव जरूरी है। बैठकों का दौर आज खत्म भाजपा नेतृत्व ने संगठनात्मक कसावट और कार्यकर्ताओं में परिवार भाव बनाए रखने के लिए हर माह विभिन्न स्तर की बैठकों का फॉर्मूला दिया है। 1 से 6 तारीख के बीच जिला, 7 से 11 मंडल और 11 से 15 मोर्चा-प्रकोष्ठ और 21 से 25 के बीच बूथों की बैठकें होंगी। इंदौर नगर में मंडल स्तर की बैठकों का दौर आज खत्म हो जाएगा। बड़ी बात ये है कि सभी मंडलों में नगर अध्यक्ष सुमित मिश्रा व उनके कुछ प्रमुख पदाधिकारी जा रहे है। बैठकों में नगर से राष्ट्रीय पदाधिकारी, मोर्चा प्रकोष्ठ के नेता, मंडल अध्यक्ष से पदाधिकारी, मंडल व शक्ति केंद्र प्रभारी और वार्ड संयोजक व पालकों को बुलाया गया। बैठक में मंडल अध्यक्ष व उनकी टीम को निर्देश दिए गए कि अब बैठक हो या अन्य आयोजन की सूचना सोशल मीडिया यानी वाट्सऐप पर नहीं होगी। अब सभी को सूचना फोन लगाकर देना होगी। मंडल अध्यक्ष को नगर से ऊपर के पदाधिकारियों को फोन लगाएंगे तो अन्य पदाधिकारियों को भी ये काम दिया जाए। नगर अध्यक्ष मिश्रा का कहना था कि वाट्सऐप पर सूचना डालकर हम औपचारिकता पूरी नहीं करना है। फोन लगाने से संपर्क और आत्मीयता भी बढ़ेगी जो संगठन की मंशा है। कार्यकर्ताओं के बूते पर बंगाल की जीत कल लक्ष्मण सिंह गौड़ मंडल व भगत सिंह मंडल में बैठक हुई। विधायक मालिनी गौड़ ने कहा कि हमें अपने अपने बूथों पर प्रवास और समीक्षा करना चाहिए। आज पश्चिम बंगाल की ऐतिहासिक जीत में बूथ के कार्यकर्ताओं की अहम भूमिका रही है, इसलिए कार्यकर्ता मेरा बूथ – सबसे मजबूत के मंत्र के साथ काम करें। पूर्व विधायक गोपीकृष्ण नेमा ने कहा कि हमारे कार्यपद्धति के तीन मूलमंत्र रहे हैं प्रवास, संपर्क और संवाद। मंडल, शक्ति केन्द्रों और बूथों पर कार्यकर्ता इन मूल मंत्रों को लेकर जाए, जिससे संगठन और अधिक मजबूत हो। कार्यकर्ता के घर जाने का अभियान भाजपा संगठन ने कार्यकर्ताओं के बीच आपसी तालमेल बढ़ाने और सक्रिय रहने का एक फॉर्मूला और दिया है। अब वार्ड स्तर पर टोली बनाई जाए जो मंडल अध्यक्ष व अन्य पदाधिकारी को लेकर कार्यकर्ताओं को घर मिलने भी जाए। मिश्रा ने कहा कि हम सिर्फ काम के समय ही जाते हैं जो ठीक नहीं है। हमको मालूम नहीं कि कार्यकर्ता किस परिस्थिति में रहकर काम कर रहा है।

बीजेपी विधायक पर महिला उत्पीड़न का आरोप लगाने पर महिला कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष को 10 करोड़ का नोटिस

रतलाम  विधायक ने अपने वकील के माध्यम से रीना बोरासी को 10 करोड़ रुपए का मानहानि नोटिस दिया है। रीना बोरासी द्वारा मीडिया में दिए गए उन बयानों को लेकर यह नोटिस भेजा गया है जिनमें बोरासी ने विधायक पर यौन शोषण और अवैध कब्जे जैसे गंभीर आरोप लगाए थे। विधायक ने एक स्थानीय चैनल को भी लीगल नोटिस भेजा है। राज्यपाल से की थी शिकायत रीना बोरासी ने कुछ दिन पहले राज्यपाल मंगुभाई पटेल से लोकभवन भोपाल में मुलाकात के बाद मीडिया को बयान दिया था। जिसमें उन्होंने विधायक पर गंभीर आरोप लगाए थे। उन्होंने एक महिला को लेकर कहा था कि उस महिला ने मुझे एफिडेविट के साथ सुबूत दिए हैं। वही राज्यपाल को देने आई हूं। मप्र का एक नेता, विधायक और पूर्व सांसद इस तरह से महिलाओं पर अत्याचार करेगा। उनका योन शोषण करेगा, उसके घर और पैतृक जमीन पर कब्जा करेगा। अपने 25-30 गुंडों काे भिजवाकर यशटर तोड़े, 70 साल की महिला पर अत्यावार किया। मेरी सरकार और राज्यपाल से मांग है कि संबंधित की विधायकीर रद्द की जाए। विधायक से चुनावी रंजिश रखती हैं रीना नोटिस में विधायक की ओर से कहा गया है कि वे एक उच्च शिक्षित जनप्रतिनिधि हैं और समाज में उनकी प्रतिष्ठा है। रीना बोरासी ने बिना किसी ठोस प्रमाण के केवल चुनावी रंजिश और राजनीतिक द्वेष के चलते उनकी छवि धूमिल करने के उद्देश्य से ये झूठे आरोप लगाए हैं। विधायक का तर्क है कि 'पृथ्वीचक्र' चैनल और सोशल मीडिया पर प्रसारित यह इंटरव्यू पूरी तरह से षड्यंत्र का हिस्सा है। 7 दिन की मोहलत और कानूनी चेतावनी एडवोकेट शेखर श्रीवास्तव द्वारा भेजे गए इस नोटिस में रीना बोरासी को 7 दिन का समय दिया गया है। इन 7 दिनों के भीतर उन्हें उन सभी दस्तावेजों और साक्ष्यों की प्रमाणित प्रतियां उपलब्ध करानी होंगी, जिनके आधार पर उन्होंने ये आरोप लगाए हैं। यदि वे ऐसा करने में विफल रहती हैं, तो उनके विरुद्ध 10 करोड़ रुपए की क्षतिपूर्ति का दीवानी मामला और आपराधिक मानहानि का केस दर्ज किया जाएगा। मध्यप्रदेश में महिलाओं के साथ हो रहे कथित शोषण और प्रताड़ना के मामलों को लेकर सियासत गर्मा गई है। महिला कांग्रेस की प्रदेश अध्यक्ष रीना बोरासी ने भाजपा के आलोट विधायक और पूर्व सांसद चिंतामणि मालवीय के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने गुरुवार को राज्यपाल से मुलाकात कर विधायक पर गंभीर आरोप लगाए और उन पर तुरंत कार्रवाई की मांग की है। रीना बोरासी का कहना है कि विधायक के रसूख के आगे पीड़ित महिलाओं की सुनवाई नहीं हो रही है और प्रशासन मौन बना हुआ है।