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BJP की रणनीति और थलापति विजय की ताकत, तमिलनाडु में कांग्रेस की स्थिति पर सवाल

चेन्नई तमिलनाडु की सियासत में गजब ट्विस्ट आया है. थालापति विजय की टीवीके सरकार बनाने की कवायद में जुटी है. उसके पास बहुमत वाला नंबर नहीं है. इसलिए एक्टर विजय की पार्टी टीवीके को अन्य साथियों की जरूरत है. थलापति विजय को सरकार बनाने के लिए कुल 118 विधायकों की जरूरत है. टीवीके के पास हैं 108. अब ऐसे में कैसे 118 के आंकड़े तक पहुंचा जाए, अभी इस पर मंथन जारी है. इस बीच तमिलनाडु के सियासी गेम में अचानक भाजपा की एंट्री हो गई है. सरकार वाली फ्रेम में अब तक भाजपा नहीं थी. मगर अब भाजपा ने एआईएडीएमके को धर्मसंकट में डाल दिया है. मगर एक्टर विजय के लिए तब भी खुशखबरी ही है।  जी हां, भाजपा के नए दांव से टीवीके चीफ थलापति विजय की चांद ही चांदी है. भाजपा अब चाहती है कि टीवीके की ही तमिलनाडु में सरकार बने. इसके लिए भाजपा तमिलनाडु में अपनी सहोयगी एआईएडीएमके को थलापति विजय की TVK के साथ गठबंधन के लिए जोर दे रही है. भाजपा के इस दांव से एआईएडीएमके धर्मसंकट में है. एआईएडीएमके पर टूट यानी विभाजन का खतरा मंडरा रहा है. उसे भी उद्धव ठाकरे की शिवसेना जैसा खतरा महसूस हो रहा है।  भाजपा का चाणक्य वाला दांव इंडियन एक्सप्रेस की खबर के मुताबिक, तमिलनाडु रिजल्ट के बाद एआईएडीएमके (AIADMK) अपने सबसे गंभीर अंदरूनी संकट की ओर बढ़ती दिख रही है. एआईएडीएमके विजय की टीवीके के साथ गठबंधन को लेकर धर्मसंकट में है. पार्टी के भीतर इस बात पर गहरे मतभेद उभर आए हैं कि क्या थलापति विजय की पार्टी ‘तमिलगा वेट्री कझगम’ (TVK) को गठबंधन सरकार बनाने में समर्थन दिया जाए या नहीं. सूत्रों का कहना है कि इस पूरे घटनाक्रम के पीछे भाजपा बहै. भाजपा नहीं चाहती कि टीवीके और कांग्रेस का गठबंधन हो. इसके लिए भाजपा चाहती है कि एआईएडीएमके और टीवीके साथ मिलकर सरकार बनाए. इसकी वजह है भाजपा की जिद, सके तहत वह कांग्रेस को तमिलनाडु की सत्ता में आने से रोकना चाहती है।  क्यों भाजपा चाहती है टीवीके और AIADMK का गठबंधन खुद एआईएडीएमके के सूत्रों ने इस बात की पुष्टि की है कि भाजपा टॉप लीडरशिप इस बात से असहज है कि तमिलनाडु में कांग्रेस के सममर्थन से टीवीके की सरकार बन सकती है. वह भी ऐसी स्थिति में जब पड़ोसी राज्य केरल में कांग्रेस ने एक बार फिर से जोरदार वापसी की है. यही कारण है कि भाजपा नहीं चाहती कि तमिलनाडु की सत्ता में कांग्रेस की किसी भी तरह वापसी हो।  तमिलनाडु में सरकार का नंबर गेम समझिए थलापति विजय की TVK के पास 108 सीटें हैं. बहुमत के लिए चाहिए 118 सीटें. मतलब बहुमत के आंकड़े से 10 सीटें कम हैं. इसलिए तमिलनाडु में सरकार बनाने के लिए गठबंधन बनाना अब जरूरी हो गया है. ऐसे में भाजपा उन कोशिशों का समर्थन करती दिख रही है, जिनका मकसद AIADMK को विजय का साथ देने के लिए राजी करना है, ताकि कांग्रेस और वामपंथी दल को नई सरकार में आने से रोका जा सके।  भाजपा के दांव से एआईएडीएमके में धर्मसंकट हालांकि, भाजपा के दांव से एआईएडीएमके में धर्मसंकट है. यह संकट तब और गहरा गया, जब मंगलवार रात एआईएडीएमके की वरिष्ठ नेता लीमा रोज मार्टिन ने सार्वजनिक रूप से यह स्वीकार किया कि टीवीके और AIADMK के बीच बातचीत चल रही है. लीमा रोज मार्टिन लॉटरी किंग की पत्नी हैं. उनके बेटे पुडुचेरी से विधायक हैं और एनडीए गठबंधन का हिस्सा हैं. इसलिए एआईएडीएमके का एक खेमा चाहता है कि विजय की पार्टी संग गठबंधन हो. मगर एक खेमा चाहता है कि गठबंधन न हो. ऐसे में एआईएडीएमके में टूट का खतरा मंडरा रहा है।  इसके बाद भी 5 सीटें उसके पास कम हैं। वजह यह कि वीसीके, इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग, सीपीआई और सीपीएम जैसे दलों ने समर्थन देने से इनकार कर दिया है। एआईएडीएमके ने भी विजय के साथ जाने की बात खारिज की है। यही नहीं कई दलों के नेताओं ने बुधवार को एमके स्टालिन से मुलाकात की है। ऐसे में यह भी कयास लग रहे हैं कि क्या डीएमके और एआईएडीएमके मिलकर सरकार बनाने पर विचार कर रहे हैं। दोनों ही दल तमिलनाडु की राजनीति में कट्टर विरोधी रहे हैं। ऐसे में दोनों साथ आए तो यह उसी तरह होगा, जैसे सपा और बसपा यूपी में मिले थे। जम्मू-कश्मीर में भाजपा और पीडीपी ने भी सरकार साथ में बनाई तो ऐसा ही सवाल उठा था। इसके अलावा महाराष्ट्र में जब उद्धव की शिवसेना, कांग्रेस और शरद पवार की एनसीपी साथ आए तो वह भी राजनीति की उलटबासी थी। अब तमिलनाडु में ऐसा देखने को मिल सकता है। ऐसी स्थिति में कांग्रेस फंसा हुआ अनुभव करेगी, जिसने जल्दबाजी में ही विजय की टीवीके को समर्थन दे दिया। डीएमके की ओर से इसकी आलोचना भी की जा रही है। वहीं कांग्रेस ने इसे विचारधारा से समझौता मानने से इनकार किया है और कहा कि विजय की विचारधारा भी सेकुलर है। यही नहीं कांग्रेस की सांसद जोथीमणि सेन्निमलाई ने डीएमके को भी जवाब दिया है। कांग्रेस बोली- हमें तो चुनाव से एक सप्ताह पहले कर दिया था बाहर उन्होंने कहा कि राजनीति में गठबंधन बनना और टूटना सामान्य बात है। उन्होंने कहा कि 2014 में डीएमके ने कांग्रेस को गठबंधन से बाहर कर दिया था। वह अकेले ही लड़ी थी। तब हमने यह माना था कि डीएमके का यह कदम राजनीतिक है और इसकी हमने आलोचना नहीं की थी। उन्होंने कहा कि राजनीति में गठबंधन बनना या फिर अलग होना नेचुरल है। यहां तक कि 2014 के संसदीय चुनाव से एक सप्ताह पहले ही डीएमके ने कांग्रेस को अलायंस से बाहर कर दिया था। हमें अचानक से अकेले उतरना पड़ा था, लेकिन हमने उसकी मजबूरी को समझा था। विजय ने बुलाई अहम बैठक इस बीच टीवीके यानी तमिलगा वेत्री कड़गम के संस्थापक विजय ने सरकार गठन पर चर्चा के लिए आज यानी गुरुवार को यहां चुनाव जीतने वाले पार्टी के नेताओं की एक महत्वपूर्ण बैठक बुलाई. यह बैठक सरकार बनाने के लिए टीवीके के बहुमत से कुछ सीट पीछे रहने की पृष्ठभूमि में हो रही है. कांग्रेस के पांच विजयी उम्मीदवारों ने टीवीके को समर्थन देने की पेशकश की है, लेकिन विजय की … Read more

भाजपा प्रदेश कार्यसमिति होगी अपडेट, 75% नए सदस्य और कुल 106 सदस्य होंगे शामिल

भोपाल   भाजपा प्रदेश संगठन में बड़े बदलाव की तैयारी चल रही है। प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल के नेतृत्व में संगठन को अधिक प्रभावी और चुस्त बनाने के लिए प्रदेश कार्यसमिति के आकार में कटौती का प्रस्ताव तेजी से आगे बढ़ रहा है। सूत्रों के अनुसार, लंबे समय बाद कार्यसमिति के सदस्यों की संख्या को करीब 50 प्रतिशत तक कम करने पर गंभीरता से काम किया जा रहा है। वर्तमान में 62 संगठनात्मक जिलों में कुल 463 सदस्य हैं, जिनमें 187 प्रदेश कार्यसमिति सदस्य, 52 स्थायी आमंत्रित और 224 विशेष आमंत्रित सदस्य शामिल हैं। नए प्रस्ताव के तहत इस संख्या को घटाकर सिर्फ 106 तक सीमित करने की योजना है। इसके साथ ही विशेष आमंत्रित सदस्यों की संख्या को भी नियंत्रित करने का फार्मूला तैयार किया गया है। नई व्यवस्था के अनुसार, विशेष आमंत्रित सदस्य कुल संख्या के अधिकतम 30 प्रतिशत तक ही रखे जाएंगे, जिससे संगठन में संतुलन और कार्यक्षमता दोनों बढ़ाई जा सके। ओरछा में प्रस्तावित प्रदेश कार्यसमिति बैठक से पहले ही इस नए ढांचे को लागू करने की प्रक्रिया तेज कर दी गई है। खास बात यह भी सामने आ रही है कि इस बार कार्यसमिति में करीब 75 प्रतिशत नए चेहरों को मौका मिल सकता है, जिससे संगठन में नई ऊर्जा और ताजगी आने की उम्मीद है।

मोहन यादव के निर्देश: सरकारी निगम और प्राधिकरणों में नियुक्तियों के लिए BJP कार्यकर्ताओं की लिस्ट तैयार

इंदौर  दो दशक से अधिक की सत्ता में अब तक भाजपा के आम कार्यकर्ताओं ने सत्ता की रेवड़ी का स्वाद तक नहीं चखा, लेकिन मोहन सरकार में उनकी लॉटरी खुलने वाली है। मुख्यमंत्री की विशेष रुचि के चलते जिला स्तर पर बनने वाली समिति सहकारी समितियों का गठन होने जा रहा है। प्रदेश संगठन के निर्देश पर जिला इकाई ने सभी विधायकों से नाम मांग लिए हैं। माना जा रहा है कि इस माह सभी घोषणाएं हो जाएंगी। भाजपा की सत्ता और संगठन में नियुक्तियों का सिलसिला जारी है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव चाहते थे कि सरकारी के सभी निगम, मंडल और प्राधिकरणों में नियुक्ति हो जाए जिससे पार्टी नेताओं को भी सरकार के होने का अहसास रहे। उनके लगातार प्रयास और संगठन से चले लंबे मंथन के बाद बड़ी संख्या में नेताओं को उपकृत किया गया और बची हुई नियुक्तियां भी पाइप लाइन में है। जहां पर विवाद की स्थिति है उनका निराकरण कर वे घोषणाएं हो जाएगी। एक सप्ताह तक दें पूरी सूची ये नियुक्तियां बड़े नेताओं की हो रही है, लेकिन जल्द ही अब आम कार्यकर्ता को भी उपकृत करने की तैयारी है ताकि उन्हें भी लगे कि वे सत्ताधारी संगठन से ताल्लुक रखते हैं। इसको लेकर प्रदेश भाजपा अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने हाल ही में सभी जिला अध्यक्षों को 25 से अधिक समितियों में नियुक्तियों को लेकर नाम की फेहरिस्त मांग ली है। इसके चलते नगर भाजपा अध्यक्ष सुमित मिश्रा ने सभी विधायकों के अलावा कोर कमेटी के सदस्यों से कार्यकर्ताओं के नाम मांग लिए हैं। एक सप्ताह में पूरी सूची बनाकर देने का कहा गया है जिसमें सभी नेताओं का समन्वय होना चाहिए। ये हैं प्रमुख समितियां जिला स्तर पर बनने वाली समितियों में प्रमुख रूप से आरटीओ समिति, उद्यानिकी विभाग की समिति, जेल विभाग में अशासकीय संदर्शक समिति व विजिटर बोर्ड, पशु क्रूरता निवारण समिति, जिला पशु रोगी कल्याण समिति, मछुआ कल्याण व मत्स्य समिति, जिला शहरी विकास अभिकरण में प्रबंधकारिणी व निगरानी समिति, आइटीआइ में जिला कौशल समिति, शिक्षा विभाग में जिला स्तरीय अनुदान व निर्णायक समिति, खाद्य विभाग की सतर्कता समिति, जिला योजना समिति, अंत्योदय समिति, कॉलेज में जनभागीदारी समिति, पुलिस शिकायत बोर्ड, जिला व्यापार एवं उद्योग बोर्ड, सामाजिक न्याय व निशक्त जन समिति, खेल प्रशिक्षण समिति, जिला जल व स्वच्छता समिति, खनिज निधि समिति, मुख्यमंत्री ऋण माफी योजना, सिटी फॉरेस्ट योजना सहित कुल 25 समितियां हैं। अधिकांश समितियां उमा भारती के मुख्यमंत्री रहते बनी थीं। उसके बाद शिवराज सिंह चौहान के सीएम रहते कुछ समितियों का ही गठन हुआ था। हर बार कार्यकर्ताओं के नाम बुलाए गए, लेकिन घोषणा नहीं हो सकी। विधायक आधारित हुआ संगठन एक समय था जब संगठन आधारित सत्ता होती थी, लेकिन अब उल्टा हो गया है। सत्ता हो या संगठन की नियुक्ति उसमें विधायकों की पसंद से दिए गए नामों को ही उपकृत किया जाता है। बूथ से लेकर मंडल अध्यक्ष तक उनके समर्थक रहते हैं तो बची कसर अब सत्ता में भी पूरी हो जाएगी। उनके दिए गए नामों को ही पार्टी सत्ता में भी उपकृत करेगी। उन कार्यकर्ताओं की कोई पूछपरख नहीं है जो कि गुटबाजी में न पड़ कर संगठन के लिए समर्पित है। मजेदार बात ये है कि विधायक ऐसे कार्यकर्ताओं का विरोध कर हाशिए पर पहुंचा देते हैं। फिर मांगे एल्डरमैन के नाम वैसे तो महापौर पुष्यमित्र भार्गव के नेतृत्व वाली नगर निगम परिषद को एक साल ही शेष रह गया है। इस पर अब पार्टी एल्डरमैन की नियुक्ति करने जा रही है। इसको लेकर पहले भी दो बार नाम लिए जा चुके हैं, लेकिन संगठन में कुछ नाम ऐसे थे जो पदाधिकारी बन गए। इस वजह से फिर से सूची मांगी गई है। 12 पदों को लेकर विधायक चाहते हैं कि उनकी पसंद से ही बने, लेकिन सांसद शंकर लालवानी और महापौर भार्गव भी अपने समर्थकों को उपकृत करना चाहते हैं। उनका तर्क है कि एक-एक एल्डरमैन विधायकों की पसंद से हो जाए तो बाकी छह एल्डरमैन के लिए हमारे नामों को तवज्जो दी जाना चाहिए।

बंगाल के रिजल्ट से पहले यूपी में BJP की सक्रियता, PM मोदी समेत नेता जुटे मोर्चे पर

लखनऊ  पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजे भी नहीं आए थे और भारतीय जनता पार्टी ने साल 2027 में होने वाले चुनावों की तैयारियां शुरू कर दी थीं। इसके संकेत भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन समेत कई पार्टी दिग्गजों के दौरों और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भाषणों से मिल रहे हैं। बंगाल में भाजपा ने ऐतिहासिक जीत हासिल की है। वहीं, अगले साल उत्तर प्रदेश, पंजाब, गोवा, मणिपुर, उत्तराखंड, गुजरात और हिमाचल प्रदेश में चुनाव होने हैं। भाजपा को यूपी में भी असम की तरह हैट्रिक की उम्मीद है। UP में जुटे भाजपा के टॉप नेता 29 अप्रैल को बंगाल में दूसरे चरण का मतदान हुआ है। इससे एक दिन पहले ही भाजपा चीफ और पीएम मोदी 28 अप्रैल को उत्तर प्रदेश पहुंच गए थे। वहीं, जब पंजाब में सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी के 7 राज्यसभा सांसदों ने दल बदल किया, तो बंगाल में चुनावी ड्यूटी निभा रहे कई भाजपा नेता दिल्ली पहुंच गए थे। बंगाल के नतीजों के बाद कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए मोदी ने कहा कि नारी शक्ति वंदन (संशोधन) विधेयक का विरोध की कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस और अन्य दलों को कड़ी सजा मिली है। उन्होंने दावा किया कि सपा को भी जल्द ही महिलाओं के गुस्से का सामना करना पड़ेगा। उनका इशारा उत्तर प्रदेश में 2027 में होने वाले विधानसभा चुनावों की ओर था। क्यों अहम है उत्तर प्रदेश साल 2014 में जब भाजपा ने कुल 282 लोकसभा सीटें जीती थीं, तो इसमें यूपी की 71 सीटें भी शामिल थीं। खास बात है कि 80 सीटों वाला यूपी लोकसभा सीटों के लिहाज से सबसे बड़ा राज्य है। वहीं, 2024 के चुनाव में भाजपा को बड़ा झटका लगा था और पार्टी घटकर महज 33 सीटों पर आ गई थी। इससे पहले 2019 में भाजपा को यूपी में 62 लोकसभा सीटें मिली थीं। एक ओर जहां समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव PDA यानी पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक को मजबूत करने पर काम कर रहे हैं। वहीं, भाजपा गैर-यादव ओबीसी और गैर-जाटव दलित वर्गों को वापस जोड़ने की कोशिश कर रही है जो लोकसभा चुनाव में उनसे छिटक गए थे। अब बीजेपी अपने पुराने वोट बैंक को फिर से हासिल करने के लिए कई बड़े कदम उठा सकती है ताकि यादव और जाटव वोटों के अलावा अन्य जातियों में अपनी पकड़ फिर से बनाई जा सके। बंगाल का जीत बनेगी भाजपा का इंश्योरेंस बंगाल में जीत के साथ ही भाजपा ने उत्तर और पश्चिम की तरह पूर्व में भी मजबूती हासिल कर ली है। हालांकि, दक्षिण में कर्नाटक को छोड़ दिया जाए, तो भाजपा को लोकसभा में खास समर्थन नहीं मिलता है। साथ ही बंगाल की जीत को भाजपा इंश्योरेंस की तरह भी देख सकती है, जहां अगर उसे किसी मजबूत राज्य में लोकसभा चुनाव में झटका लगता है, तो बंगाल से भरपाई की जा सके। यहां कुल 42 लोकसभा सीटें हैं। पंजाब पर भी नजरें कहा जा रहा है कि पंजाब को हमेशा से प्रधानमंत्री मोदी सरकार चुनावी रूप से अहम मानती रही है। सिख बहुल राज्य में भाजपा लगातार समुदाय को अपनी ओर लाने के प्रयास करती रही है। वही, दल सत्तारूढ़ आप को भी कुर्सी से बेदखल करने की कोशिश में है। 7 राज्यसभा सांसदों का आना भाजपा को कुछ हद तक चुनावी रूप से मददगार साबित हो सकता है। चुनाव के नतीजे बंगाल में भाजपा ने ऐतिहासिक 206 सीटों पर जीत हासिल की। वहीं, असम में शतक लगाकर चुनावी जीत की हैट्रिक पूरी की। इधर, केरल में भी भाजपा की सीटों का ग्राफ बढ़ा है। जबकि, तमिलनाडु में एक्टर विजय की टीवीके सबसे बड़ी पार्टी बनी। पुडुचेरी में एनडीए ने जीत हासिल की।

नई सरकार के शपथ ग्रहण में 9 मई की तारीख क्यों है शुभ, BJP का फैसला

कोलकाता  भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने सोमवार को पश्चिम बंगाल में शानदार जीत दर्ज पूर्वी भारत के उस अहम गढ़ में प्रवेश कर लिया. इस शानदार जीत के बाद बीजेपी ने नई सरकार के शपथ ग्रहण समारोह के लिए 9 मई की तारीख तय की है. ऐसे में लोग जानना चाहते हैं कि बीजेपी ने इस दिन का चयन क्यों किया है. बताया जा रहा है कि बुधवार को रक्षामंत्री राजनाथ सिंह कोलकाता आएंगे. वह यहां बीजेपी के जीते हुए विधायकों से बातचीत करेंगे जिसके बाद विधायक दल का नेता और बंगाल के नये मुख्यमंत्री के नाम का फैसला होगा  बंगाल के लिए खास है 9 तारीख दरअसल, 9 मई को गुरुदेव रविंद्र नाथ टैगोर की जयंती होती है. बंगाल की संस्कृति से रविंद्र नाथ टैगोर के संगीत और साहित्य का क्या महत्व है यह किसी को बताने की जरूरत नहीं है. पूरे चुनाव प्रचार के दौरान तृणूमल कांग्रेस और ममता बनर्जी यही आरोप लगाती रहीं कि बीजेपी सत्ता में आते ही बंगाल की संस्कृति से खिलवाड़ करेगी. ऐसे बीजेपी नई सरकार के गठन के लिए रविंद्र नाथ टैगोर की जयंती का दिन चुना है, ताकि वह टीएमसी के आरोपों का जवाब दे सके कि बीजेपी बंगाल की सभ्यता और संस्कृति का कितना ख्याल करती है. पश्चिम बंगाल BJP अध्यक्ष समीक भट्टाचार्य ने भी 9 मई की तारीख पर मुहर लगाई है  बंगाल में बीजेपी की जीत है खास पश्चिम बंगाल में भाजपा की यह निर्णायक जीत सिर्फ चुनावी आंकड़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसने ममता बनर्जी के लंबे वर्चस्व को बड़ा झटका देते हुए राज्य की राजनीति को नया स्वरूप दिया है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे ‘जनता की शक्ति और सुशासन की जीत’ बताया. 2014 में सीमित उपस्थिति से शुरू हुई भाजपा की यात्रा 2019 में उभार, 2021 में चुनौतियों और अब 2026 में स्पष्ट जनादेश तक पहुंची है।  यह जीत राष्ट्रीय स्तर पर भाजपा की मजबूत होती राजनीतिक पकड़ को भी दर्शाती है. पार्टी ने अपनी रणनीति में राष्ट्रीय सुरक्षा, घुसपैठ रोकने, सीमा बाड़बंदी, सिलीगुड़ी कॉरिडोर की सुरक्षा, सीएए और यूसीसी जैसे मुद्दों को प्रमुखता दी. साथ ही, कानून-व्यवस्था, औद्योगिक विकास, महिलाओं की सुरक्षा और केंद्र की योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन पर जोर दिया।  प्रधानमंत्री मोदी और अमित शाह जैसे शीर्ष नेताओं के आक्रामक प्रचार ने सत्ता विरोधी लहर को मजबूत किया. हालांकि, जीत के बाद भाजपा के सामने ध्रुवीकृत समाज, क्षेत्रीय पहचान और तृणमूल कांग्रेस के मजबूत विपक्ष जैसी चुनौतियां बनी रहेंगी।  इसके बावजूद, यह परिणाम एक बड़े राजनीतिक बदलाव का संकेत है, जिसने भाजपा को चुनौती देने वाली पार्टी से सत्तारूढ़ शक्ति में बदल दिया है और बंगाल की राजनीति को नए दौर में पहुंचा दिया है। 

BJP के एमपी के बड़े नेता हार गए दक्षिण भारत में, केरल और तमिलनाडू में मिली हार

भोपाल  5 राज्यों के चुनाव परिणाम यूं मध्यप्रदेश की राजनीति को प्रभावित नहीं करते. लेकिन दक्षिण के दो राज्यों तमिलनाडु और केरल में मध्य प्रदेश से सीधा जुड़ाव रखने वाले बीजेपी नेताओं की हार का असर यहां तक आया है. मध्य प्रदेश में लंबे समय से बीजेपी दक्षिण के अपने नेताओं को राज्यसभा भेजती रही है।  एल मुरुगन केन्द्र सरकार में मंत्री हैं, वह मध्य प्रदेश से राज्यसभा सदस्य हैं. इनके अलावा जार्ज कुरियन ने भी विधानसभा चुनाव लड़ा. मुरुगन और कुरियन की हार की वजह से इन चुनावों का असर मध्य प्रदेश तक भी आया है. इन नेताओं के चुनाव हारने से मध्य प्रदेश बीजेपी के कुछ नेताओं की उम्मीदों पर पानी फिर गया है।  असली झटका लगा मुरुगन की हार से बीजेपी ने तमिलनाडु में केन्द्र सरकार में मंत्री रहे एल मुरुगन को भी चुनाव मैदान में उतारा. मुरुगन मध्य प्रदेश के कोटे से राज्यसभा में हैं. अप्रैल 2030 में उनका कार्यकाल खत्म होगा. इनके अलावा केरल से जार्ज कुरियन का कार्यकाल अप्रैल 2026 तक ही था. इन दोनों नेताओं के चुनाव जीतने की आस मध्यप्रदेश में भी बीजेपी नेताओं को थी. जार्ज कुरियन का कार्यकाल तो खैर पूरा ही हो रहा है. लेकिन मुरुगन अगर ये विधानसभा चुनाव जीत जाते तो उनकी राज्यसभा सीट खाली हो जानी थी. राज्यसभा सीट पर नजर जमाए मध्यप्रदेश के नेताओं को मौका मिल सकता था।  बीजेपी के दिग्गज दक्षिण में ऐसे हारे मध्य प्रदेश के रास्ते राज्यसभा में गए ये दोनों नेता तमिलनाडु और केरल से विधानसभा चुनाव के मैदान में उतरे. केन्द्रीय राज्य मंत्री जार्ज कुरियन केरल की कांरिजापल्ली सीट से बीजेपी के उम्मीदवार थे. चुनाव नतीजों में उन्हें कांग्रेस उम्मीदवार ने करीब 29 हजार वोटों से शिकस्त दी. तमिलनाडु की अविनाशी सीट से बीजेपी ने अपने वरिष्ठ नेता और केन्द्रीय राज्य मंत्री एल मुरुगन को मैदान में उतारा था. वे भी अपनी सीट नहीं बचा सके. वह टीवीके की आंधी में अपनी सीट नहीं बचा सके. इस सीट पर टीवीके के कमाली एस ने 84 हजार से ज्यादा मतों से जीत दर्ज की. मुरुगन दूसरे नंबर पर रहे. उन्हें 68 हजार से ज्यादा वोट मिले।  सभाओं में उमड़ी थी भी़ड़, मोहन यादव ने भी किया था प्रचार एल मुरुगन ने चुनाव प्रचार में पूरी ताकत झोंक दी थी. मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव भी उनके लिए चुनाव प्रचार में गए थे. रैलियां की थी. तमिलनाडु में चुनाव प्रभार संभाल रहे अरविंद मेनन ने ईटीवी भारत से बातचीत में कहा "दक्षिण में अभी हमें और मेहनत करनी है. यहां भी हमने पूरी रणनीति के साथ काम किया. हमें जो उम्मीद थी नतीजे वैसे नहीं आए हैं. लेकिन बीजेपी का कार्यकर्ता हर एक हार से सबक लेकर आगे बढ़ता है और फिर मैदान में जुटता है. हम भी जुटेंगे और लक्ष्य को प्राप्त करेंगे।  कौन हैं एल मुरुगन? एल. मुरुगन मौजूदा समय में तमिलनाडू की राजनीति में भाजपा का सबसे बड़ा चेहरा माने जाते हैं। वो तमिलनाडू में बीजेपी के अध्यक्ष रहे हैं और वर्तमान में मोदी सरकार में केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण और संसदीय कार्य राज्य मंत्री हैं। वो राज्यसभा में मध्य प्रदेश के कोटे से सांसद हैं। 2024 में उन्हें दूसरी बार राज्यसभा के लिए मध्य प्रदेश से चुना गया था। वो अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से जुड़े रहे हैं और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से भी उनका नाता है। वो मद्रास हाईकोर्ट में वकालत करते थे। 15 साल तक वकालत के बाद वो राजनीति में आए हैं। कौन हैं जॉर्ज कुरियन वहीं, जॉर्ज कुरियन की बात करें तो वो भी मध्य प्रदेश से राज्यसभा सांसद हैं। वर्तमान में वो मोदी सरकार में अल्पसंख्यक कल्याण और मत्स्य पालन राज्य मंत्री हैं। वह केरल में बीजेपी का पुराना चेहरा माने जाते हैं। 1980 से वो भाजपा से जुड़े हैं और अबतक कई पदों पर रह चुके हैं और विधानसभा चुनाव भी लड़ चुके हैं। उनकी केरल में ईसाई समुदाय में पैठ मानी जाती है। वह केरल में भी भाजपा में विभिन्न पदों पर रहे हैं। मजबूत उम्मीदवारों के तौर पर उतारे गए थे दोनों दिग्गज आपको बता दें कि, जॉर्ज कुरियन और एल. मुरुगन दोनों ही मध्य प्रदेश से राज्यसभा सांसद हैं। कुरियन का कार्यकाल 19 जून 2026 में खत्म हो रहा है, जबकि मुरुगन का कार्यकाल अप्रैल 2030 तक जारी रहेगा। इन दोनों नेताओं को भाजपा ने अलग-अलग राज्यों में मजबूत उम्मीदवार के तौर पर उतारा गया था, लेकिन चुनावी नतीजे उम्मीद के मुताबिक नहीं रहे। राज्यसभा चुनावों और पार्टी की रणनीति पर असर के आसार राजनीतिक जानकारों के अनुसार, इनकी हार का असर आने वाले राज्यसभा चुनावों और पार्टी की रणनीति पर भी पड़ने की संभावना है। खास बात ये है कि, मध्य प्रदेश से राज्यसभा की तीन सीटें जून 2026 में खाली होने वाली हैं, जिनमें दो भाजपा और एक कांग्रेस के पास है। कांग्रेस की ओर से दिग्विजय सिंह और भाजपा की ओर से सुमेर सिंह सोलंकी और जॉर्ज कुरियन का कार्यकाल भी उसी समय पूरा होने जा रहा है।

बीजेपी कार्यसमिति में बड़ा बदलाव, 106 सदस्य तय, क्षेत्रीय-जातीय संतुलन बनाने की चुनौती

भोपाल  बीजेपी की प्रस्तावित प्रदेश कार्यसमिति बैठक से पहले संगठन में बड़ा बदलाव तय माना जा रहा है। इस बार कार्यसमिति का आकार काफी छोटा किया जा रहा है, जिससे नए और पुराने नेताओं के बीच संतुलन बैठाना पार्टी नेतृत्व के लिए चुनौती बन गया है। ओरछा में इसी महीने प्रस्तावित बीजेपी की प्रदेश कार्यसमिति बैठक से पहले संगठन में सदस्यों के चयन को लेकर मंथन तेज हो गया है। प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने पार्टी संविधान के अनुसार कार्यसमिति को सीमित करते हुए केवल 106 सदस्यों तक रखने का निर्णय लिया है। इसके साथ ही विशेष आमंत्रित सदस्यों की संख्या भी कुल का अधिकतम 30 प्रतिशत रखने का फार्मूला तय किया गया है। यानी ऐसे सदस्यों की संख्या 32 से अधिक नहीं होगी। यह बदलाव पिछले कार्यकालों की तुलना में बड़ा माना जा रहा है। दरअसल, पूर्व प्रदेश अध्यक्षों वीडी शर्मा, नंदकुमार सिंह चौहान और राकेश सिंह के समय कार्यसमिति का आकार लगातार बढ़ता गया था। खासकर वीडी शर्मा के कार्यकाल तक आते-आते कार्यसमिति, स्थायी आमंत्रित और विशेष आमंत्रित मिलाकर कुल 463 सदस्यों की हो गई थी। जिलों का प्रतिनिधित्व बना मुश्किल प्रदेश में बीजेपी के 62 संगठनात्मक जिले हैं। ऐसे में 106 सदस्यों की सीमा के चलते एक जिले से दो प्रतिनिधि भी शामिल करना संभव नहीं हो पा रहा है। यही वजह है कि वरिष्ठ नेताओं को नामों के चयन में काफी मशक्कत करनी पड़ रही है। मौजूदा कार्यसमिति की स्थिति:     प्रदेश कार्यसमिति सदस्य: 187     स्थायी आमंत्रित सदस्य: 52     विशेष आमंत्रित सदस्य: 224     कुल सदस्य: 463 क्षेत्रीय, जातीय संतुलन बड़ी चुनौती नई कार्यसमिति में क्षेत्रीय और जातीय समीकरणों को ध्यान में रखते हुए चयन किया जाएगा। साथ ही महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने पर भी जोर रहेगा। बड़े शहरों का दबदबा इस बार कार्यसमिति का आकार छोटा होने से इन जिलों का प्रतिनिधित्व भी घट सकता है, जिससे संगठन में नई राजनीतिक समीकरण बनते नजर आएंगे। मौजूदा कार्यसमिति में बड़े शहरों का प्रभाव ज्यादा है। प्रमुख जिलों में सदस्य संख्या ये है –     भोपाल: 19     इंदौर: 17     ग्वालियर: 15     सागर: 10     जबलपुर: 9     सतना: 8     सिंगरौली: 7     छतरपुर: 6     नरसिंहपुर: 5     बालाघाट: 5 .

भाजपा क्षेत्रीय संगठन मंत्री का संदेश, ग्वालियर में कार्यकर्ताओं को समर्पण और प्रशिक्षण का महत्व बताया

ग्वालियर  अच्छे कार्यकर्ता के लिए समय सारिणी का पालन करना अति आवश्यक है। प्रशिक्षण कार्यकर्ता के निर्माण का साधन है। आगे भाजपा के उद्देश्य पर विचार रखते हुए उन्होंने कहा कि पार्टी का उद्देश्य राष्ट्र कि सत्ता हासिल करना नहीं, अपितु राष्ट्र के खोए हुए वैभव को वापस दिलाकर राष्ट्र को विश्व गुरु बनाने का है। 200 कार्यकर्ताओं ने कराए रजिस्ट्रेशन यह विचार भाजपा के क्षेत्रीय संगठन मंत्री अजय जामवाल ने जिले में आयोजित दो दिवसीय आवासीय प्रशिक्षण शिविर के उद्घाटन सत्र में व्यक्त किए। शिविर का शुभारंभ अपेक्षित श्रेणी के नेतृत्वगण के एकत्रीकरण के साथ हुआ। जहां श्रेणीबद्ध लगभग 200 कार्यकर्ताओं ने कार्यक्रम स्थल पर ऐप के माध्यम से शुल्क जमा कराया और रजिस्ट्रेशन करवाया। भाजपा के मूल विचार और मूल आधार स्तंभ व्यक्तित्व की प्रदर्शनी के उद्घाटन किया। शिविर में प्रवेश के साथ शिविरार्थियों से मोबाइल जमा करा लिए गए। शिवपुरी लिंक रोड स्थित एम्पायर रिसोर्ट में आयोजित इस प्रशिक्षण वर्ग के आज दोपहर सवा दो समापन सत्र में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव उपस्थित रहेंगे। उद्घाटन भाजपा के क्षेत्रीय संगठन मंत्री अजय जामवाल ने दीप प्रज्वलित कर किया। जिसमें जिलाध्यक्ष जयप्रकाश राजौरिया के साथ संभाग के प्रभारी निशांत खरे प्रशिक्षण अभियान के संभाग प्रभारी नरेंद्र बिरथरे, सह प्रभारी मधुसूदन भदौरिया, जिला प्रशिक्षण के प्रभारी महेंद्र सिसोदिया, सांसद भारत सिंह कुशवाह, मंत्री नारायण सिंह कुशवाहा, प्रद्युम्न सिंह तोमर प्रमुखता से उपस्थित रहे। विचारों से ही परिवार का विस्तार होता है प्रथम सत्र मे कार्य विस्तार पर विचार रखते हुए अनुसूचित मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष लाल सिंह आर्य ने बताया किस प्रकार के हम अपने विचारों से परिवार का विस्तार कर सकते है। हमें समाज में फैले जातिगत विष को समाप्त करने के लिए प्रत्येक समाज के लोक देवताओं और संतों की जयंती, पुण्यतिथि का कैलेंडर बनाकर कार्यक्रम आयोजित करना चाहिए। कार्य निर्णयों में मैं के भाव से निकलकर टोली के सामूहिक निर्णय से कार्य का विस्तार संभव है। गोवा मुक्ति आंदोलन से पुर्तगालियों से मुक्त कराया द्वितीय सत्र पूर्व विधायक नरेंद्र बिरथरे ने लिया भाजपा के इतिहास और विकास पर उद्बोधन देते हुए बताया कि किन परिस्थितियों में श्यामाप्रसाद मुखर्जी ने वर्ष 1951 में भारतीय जनसंघ की स्थापना हुई और 3.06 प्रतिशत के साथ तीन सांसद जीते और गठबंधन के साथ 38 सांसदों के साथ देश के पहले अनऔपचारिक नेता प्रतिपक्ष बने। वर्ष 1952 के कश्मीर आंदोलन में डा. श्यामाप्रसाद मुखर्जी ने राष्ट्र के लिए अपने प्राण आहूत किए। तृतीय सत्र में कार्यकर्ता का विकास, संभाल एवं दायित्व बोध पर उद्बोधन प्रदेश उपाध्यक्ष शैलेंद्र बरुआ ने बताया कि कार्यकर्ता एक लालटेन की तरह है जिसके कांच को निरंतर प्रशिक्षण के माध्यम से पोंछकर अंदर की रोशनी को फैलाया जा सकता है। नवाचार अपनाने वाला ही संगठन जीवित रह सकता है चौथे सत्र में प्रदेश मंत्री लोकेन्द्र पाराशर ने मीडिया और सोशल मीडिया पर विचार रखते हुए बताया कि पं. दीनदयालजी के विचार थे कि वही संगठन जीवित रह सकता है जो नवाचार को अपनाए। लोकतंत्र में जनता और सदन के मध्य मीडिया एक माध्यम है। इसी वर्ग में सोशल मीडिया की महत्ता पर कामना भदौरिया ने अपने विचार रखे और बताया कि सोशल मीडिया का सही उपयोग कैसे करें। पांचवें सत्र में ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने प्रदेश सरकार की उपलब्धियां बताईं और राज्य के विकास कार्यों का उल्लेख किया। छठवें सत्र में देश के सम्मुख चुनौतियां और उसके निदान के हमारे प्रयासों पर वेदप्रकाश शर्मा ने अपने विचार रखे। अंतिम सत्र में सांसद भारत सिंह कुशवाह ने बताया कि केंद्र सरकार का उद्देश्य योजनाओं से सरकार बनाना नहीं अपितु योजनाओं से जनकल्याण जन सशक्तिकरण हो यह सरकार का प्रयास है। चार अप्रैल को शिविर के अंतिम सत्र में मुख्यमंत्री मोहन यादव उपस्थित रहेंगे। शिविरार्थी सुबह करेंगे अटल गैलरी का अवलोकन भारतीय जनता पार्टी के प्रशिक्षण शिविर के दूसरे दिन चार अप्रैल को सुबह साढ़े छह बजे सभी प्रशिक्षु बस के माध्यम से पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को समर्पित अटल गैलरी का अवलोकन करने जाएंगे। इसके पश्चात साढ़े सात बजे दौलतगंज स्थित रामनारायण धर्मशाला जहां भाजपा के आधार स्तंभ और मूल विचारक पंडित दीनदयालजी ने राष्ट्रीय अधिवेशन में एकात्म मानववाद की प्रस्तावना रखी थी। वहां शिविर के आठवें वर्ग मे संभाग के प्रभारी सैद्धांतिक अधिष्ठान और एकात्व मानववाद पर प्रशिक्षुओं को संबोधित करेंगे।  

योगी की रैलियों में उमड़ी भीड़, बंगाल में जीत का बनता समीकरण

बंगाल भारतीय जनता पार्टी के संस्थापक में से एक पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की एक प्रसिद्ध कविता है, ‘अंधेरा छटेगा, सूरज निकलेगा, कमल खिलेगा.’ उनकी कविता की ये पंक्तियां आज बंगाल में साकार होती दिख रही है. भाजपा के मूल संगठन जनसंघ के संस्थापक श्यामा प्रसाद मुखर्जी की जन्मभूमि में अब कमल खिलने जा रहा है. पश्चिम बंगाल में मतगणना जारी है. खबर लिखे जाने तक जो रुझान सामने आए हैं, उनके मुताबक बीजेपी करीब 190 सीटों पर आगे चल रही है. इन नतीजों के पीछे पूरे संगठन की मेहनत है. लेकिन इन सबसे इतर एक फैक्टर है जिसने इन चुनावों में खासा प्रभाव डाला है. विशेषकर जिन सीटों पर सीएम योगी ने प्रचार किया उनमें से अधिकतर सीटों पर भाजपा कब्जा करती दिख रही है. यानी योगी फैक्टर ने अपना जादू चला दिया है. बंगाल चुनाव में उत्तर प्रदेश के नेताओं की महती भूमिका रही है. देशभर में किसी भी राज्य में चुनाव हों उसमें एक जोड़ी हमेशा हिट रही है. वो है मोदी और योगी की जोड़ी. इसी तरह बंगाल के चुनाव में भी उत्तर प्रदेश के प्रमुख चेहरों ने मोर्चा संभाला. जिसमें सबसे पहले खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हैं. उन्होंने लगातार जनसभाएं और रैलियां की. इतना ही नहीं, उन्होंने सीधे जनता से जुड़ने का प्रयास किया. दुकान पर जाकर झालमुड़ी खाना, लोगों के बीच जाना इसका उदाहरण है. जिसने लोगों को प्रभावित किया. वहीं उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी पार्टी के पक्ष में जमकर माहौल बनाया है. मुख्यमंत्री योगी की डिमांड हर राज्य में रही है. बिहार के चुनाव हों, महाराष्ट्र के चुनाव हों, ओडिशा के चुनाव हों, छत्तीसगढ़ के चुनाव हों, मध्यप्रदेश या राजस्थान के चुनाव हों, हर प्रदेश में सीएम योगी की अपनी फैन फॉलोविंग है. हिंदुत्व की छवि वाले योगी किसी भी क्षेत्र में जाकर वहां की जनता के बीच गहरी छाप छोड़ते हैं. बंगाल में भी इसका असर देखने को मिल रहा है. बंगाल में योगी की सभाओं में जबरदस्त भीड़ देखने को मिली. योगी को सुनने के लिए बड़ा जनसमूह उतरा. कई जगहों पर इतनी भीड़ दिखी कि वहां पैर रखने तक की जगह नहीं थी. कुल मिलाकर योगी ने इस भीड़ को वोट में तब्दील करने का पूरा प्रयास किया. जिसका नतीजा सकारात्मक दिख रहा है. जिन जिन क्षेत्र में योगी ने सभाएं की वहां अधिकतर सीटों पर कमल खिलता दिख रहा है. इन सीटों पर बीजेपी को बढ़त     कल्याणी विधानसभा में भाजपा को बढ़त मिल रही है. यहां अनुपम बिस्वास आगे चल रही हैं.     नंदकुमार सीट में खानरा निर्मल आगे चल रहे हैं.     बागदा विधानसभा में सोमा ठाकुर आगे चल रही हैं.     कटवा में कृष्णा घोष ने बढ़त बनाई हुई है.     माथाभांगा (कूच बिहार) में निशीथ प्रमाणिक जीत की ओर बढ़ रहे हैं.     धूपगुड़ी विधानसभा में नरेश चंद्र राय लीड लिए हुए हैं.     बांकुरा विधानसभा सीट पर नीलाद्री शेखर आगे चल रहे हैं.     कांथी दक्षिण सीट में भी अरुप कुमार दास बढ़त बनाए हुए हैं.     गोपालपुर विधानसभा सीट से तरुणज्योति तिवारी आगे चल रहे हैं.     दम दम विधानसभा सीट से अरिजीत बख्शी बढ़त बनाए हुए हैं.     जोरासांको सीट से विजय ओझा लीड बनाए हुए हैं.     चकदहा विधानसभा में बंकिम चंद्र घोष आगे चल रहे हैं.     उदयनारायणपुर सीट पर प्रभाकर पंडित बढ़त बनाए हुए हैं.     पिंगला विधानसभा में स्वागता मन्ना आगे चल रही हैं.     जॉयपुर सीट से बिस्वजीत महतो बढ़त बनाए हुए हैं.     गारबेटा विधानसभा में पारादीप लोधा जीत की ओर बढ़ रहे हैं.     बाराबनी सीट पर अरिजीत रॉय आगे चल रहे हैं.     रामपुरहाट विधानसभा में ध्रुब साहा बढ़त बनाए हुए हैं.     सोनामुखी विधानसभा में दिबाकर घरामी आगे चल रहे हैं. बता दें कि जिन विधानसभाओं में योगी ने धुंआधार प्रचार किया है उनके आसपास के क्षेत्रों में भी उनका प्रभाव पड़ा है. बिहार में चला था मोदी-योगी का जादू बता दें कि 5 महीने पहले हुए बिहार चुनाव में 202 सीटों के साथ NDA की प्रचंड जीत हुई थी. भाजपा ने अकेले 89 सीटें जीती थीं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 16 रैलियों से NDA को 97 सीटें दिलाई थीं. इसमें 44 नई सीटें थीं. पीएम का स्ट्राइक रेट 80% रहा था. इसी तरह सीएम योगी ने भी 80% स्टाइक रेट के साथ 98 सीटें जितवाई थीं. बिहार में सबसे ज्यादा डिमांड भी सीएम योगी की रैलियों, सभा और रोड शो की रही थी.

बंगाल में बीजेपी की बड़ी जीत, ममता दीदी की सत्ता पर खतरा, रुझानों में बहुमत के पार

नई दिल्ली पश्चिम बंगाल और असम समेत पांच राज्यों में अब तस्वीर धीरे-धीरे साफ हो रही है। बंगाल में बीजेपी बहुमत के आंकड़े के पार चल रही है और टीएमसी काफी पीछे हो गई है। असम में बीजेपी बंपर जीत की ओर आगे बढ़ रही है। बंगाल में बीजेपी के कार्यकर्ता जश्न मना रहे हैं। केरल में यूडीएफ अच्छे अंतर के साथ आगे हो गई है और तमिलनाडु में ऐक्टर विजय की पार्टी टीवीके 100 से ज्यादा सीटों पर बढ़त बना चुकी है। यह डीएमके के लिए बड़ा झटका साबित हो सकता है।। पुडुचेरी में फिर से एनडीए की सरकार रिपीट होती नजर आ रही है। पश्चिम बंगाल में संवेदनशील माहौल देखते हुए मतगणना केंद्रों पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। इस बार तमिलनाडु, केरल और पुडुच्चेरी में भी जमकर मतदान हुआ था। बंगाल की 293 सीटों के लिए 77 मतगणना केंद्रों पर गिनती हो रही है। मतगणना से पहले ही टीएमसी और बीजेपी ने एक दूसरे पर हेरफेर के आरोप लगाए थे। धन्यवाद हिंदू, धन्यवाद सनातनी- शुभेंदु अधिकारी पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी ने रुझानों में बड़ी लीड के बाद सभी सनातनी, सभी हिंदू मतदाताओं को धन्यवाद दिया है. उन्होंने कहा है कि पहले राउंड में मुस्लिम बाहुल्य बूथ थे, ममता बनर्जी आगे निकल गई थीं. भवानीपुर के हिंदू बाहुल्य बूथ की ईवीएम खुली, तो हमने अंतर कवर करते हुए बढ़त बना ली. तीन, चार, पांच, छह बूथ मुस्लिम बाहुल्य हैं. इन बूथों पर ममता बनर्जी लीड करेंगी. सात, आठ, नौ और 10 हिंदू बाहुल्य बूथ हैं. यहां फिर से अंतर कम कर लीड ले लूंगा।  आरजी कर पीड़िता की मां पनिहाटी सीट से आगे आरजी कर रेप पीड़िता की मां बीजेपी के टिकट पर पनिहाटी सीट से चुनाव लड़ रही हैं. पनिहाटी सीट पर आरजी कर पीड़िता की मां आगे चल रही हैं. बीजेपी उम्मीदवार आरजी कर पीड़िता की मां तीन हजार वोट से आगे चल रही हैं।  जनता ने हमारे संदेश को स्वीकार किया है- थरूर शशि थरूर ने कहा है कि हम 10 साल से इंतजार कर रहे थे. इतनी बड़ी मेजॉरिटी हमें मिली, तो हम स्टेबल रहेंगे. जनता ने हमारे संदेश को स्वीकार किया है और् इतना बड़ा समर्थन हमें मिलता नजर आ रहा है।     विजय की सुरक्षा बढ़ाई गई तमिलनाडु में विजय की अगुवाई वाली टीवीके 102 सीटों पर आगे चल रही है. एआईएडीएमके के उम्मीदवार 73 और डीएमके के उम्मीदवार 48 सीटों पर बढ़त बनाए हुए हैं. तमिलनाडु के रुझानों के बाद विजय की सुरक्षा बढ़ा दी गई है. विजय के घर के बाहर भी सुरक्षा घेरा कड़ा कर दिया गया है।  असम चुनाव में साफ तौर पर बीजेपी सरकार बनाती दिख रही है। असम, केरल, पुडुचेरी और तमिलनाडु के चुनाव परिणाम असम में लगातार तीसरी बार बीजेपी हैटट्रिक लगा रही है। राज्य की 126 विधानसभा सीट से 722 उम्मीदवारों के चुनावी भाग्य को समेटे हुए इईवीएम, 35 जिलों के 40 मतगणना केंद्रों पर खोली गईं। राज्य में मतदान 9 अप्रैल को हुआ था, जिसमें 85.96 प्रतिशत मतदान हुआ था।