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CM योगी का बयान: काशी में मूर्ति तोड़ने का आरोप झूठा, AI के जरिए फैलाया जा रहा भ्रम

वाराणसी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ शनिवार को वाराणसी के दौरे पर हैं. इस दौरान मीडियाकर्मियों से बातचीत करते हुए काशी को लेकर फैलाए जा रहे कथित भ्रम और सोशल मीडिया पर वायरल दावों पर कड़ा बयान दिया है. उन्होंने कहा कि कुछ लोग योजनाबद्ध तरीके से काशी को बदनाम करने की कोशिश कर रहे हैं. मुख्यमंत्री के मुताबिक, टूटी हुई मूर्तियों की एआई तस्वीरें सोशल मीडिया पर डालकर यह झूठ फैलाया जा रहा है कि काशी में मूर्तियां तोड़ी जा रही हैं.  मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि काशी अविनाशी है. काशी के प्रति हर सनातन धर्मावलंबी और हर भारतवासी अपार श्रद्धा का भाव रखता है. लेकिन स्वतंत्र भारत में काशी को जो सम्मान मिलना चाहिए था, जो विकास होना चाहिए था और समग्र विकास के कार्यक्रमों को जो महत्व मिलना चाहिए था, वह आज़ादी के तत्काल बाद नहीं मिल सका. पिछले ग्यारह–साढ़े ग्यारह सालों के भीतर काशी ने एक बार फिर अपनी आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण करते हुए उसका संवर्धन किया है. साथ ही भौतिक विकास के कार्यों के माध्यम से काशी ने नई ऊंचाइयों को भी प्राप्त किया है. आज काशी को एक नई वैश्विक पहचान मिली है. यह हम सभी का सौभाग्य है कि काशी का प्रतिनिधित्व देश की संसद में स्वयं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कर रहे हैं. प्रारंभ से ही उनका साफ दृष्टिकोण रहा है कि काशी की पुरातन काया को संरक्षित करते हुए उसे नए कलेवर में देश और दुनिया के सामने प्रस्तुत किया जाए. इसी सोच के अनुरूप पिछले ग्यारह–साढ़े ग्यारह सालों में काशी के लिए योजनाएं तैयार की गईं. काशी के लिए 55 हजार करोड़ रुपये से अधिक की परियोजनाएं स्वीकृत की गईं, जिनमें से 36 हजार करोड़ रुपए की परियोजनाएं लोकार्पित हो चुकी हैं. शेष परियोजनाएं तेजी से प्रगति पर हैं. ये सभी परियोजनाएं काशी के समग्र विकास से जुड़ी हैं, जिनमें आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के साथ-साथ शिक्षा, स्वास्थ्य, इंफ्रास्ट्रक्चर, रोजगार और कनेक्टिविटी को प्राथमिकता दी गई है. इन योजनाओं का उद्देश्य यह भी है कि काशी में नए संस्थान खुलें, परंपरागत उद्यमियों द्वारा तैयार किए गए उत्पादों को जीआई टैग के माध्यम से वैश्विक पहचान मिले और स्थानीय लोगों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाया जा सके. इन सभी क्षेत्रों में पिछले ग्यारह–साढ़े ग्यारह सालों में युद्ध स्तर पर काम हुआ है. काशी की गलियों की स्थिति दो हजार चौदह से पहले कैसी थी, यह किसी से छुपी नहीं है. काशी विश्वनाथ धाम बनने से पहले औसतन श्रद्धालुओं की संख्या पांच हजार से लेकर अधिकतम पच्चीस हजार तक रहती थी. आज वही संख्या प्रतिदिन सवा लाख से डेढ़ लाख तक पहुंच चुकी है. सावन मास, महाशिवरात्रि और अन्य बड़े आयोजनों के दौरान यह संख्या छह लाख से लेकर दस लाख तक पहुंच जाती है. केवल पिछले साल ही काशी में ग्यारह करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं ने बाबा विश्वनाथ धाम में दर्शन किए. काशी विश्वनाथ धाम बनने के बाद से अब तक काशी ने देश की जीडीपी में लगभग एक लाख तीस हजार करोड़ रुपये का योगदान दिया है. इससे रोजगार के नए अवसर सृजित हुए हैं – चाहे वह गाइड के रूप में हो, पुरोहित्य कर्म के रूप में, व्यापार, फूल-पत्ती और प्रसाद की बिक्री, होटल, रेस्टोरेंट, नाविक, टैक्सी या अन्य सेवाओं के माध्यम से. आज काशी की सभी प्रमुख सड़कें फोर लेन से जुड़ी हैं. यातायात की स्थिति में व्यापक सुधार हुआ है और घंटों के जाम की जगह अब सुगम यातायात व्यवस्था है. काशी के लिए देश के विभिन्न हिस्सों से वंदे भारत, अमृत भारत सहित नई रेल सुविधाएं शुरू हुई हैं. एयर कनेक्टिविटी का विस्तार हुआ है और देश में पहली बार वाराणसी से हल्दिया के बीच इनलैंड वॉटरवे की सुविधा विकसित की गई है, जिससे व्यापार और परिवहन के नए आयाम खुले हैं.

खेलों के प्रोत्साहन पर सीएम योगी का जोर, प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को संवारने का संदेश

गोरखपुर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सभी विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों का आह्वान किया है कि वे किसी एक खेल को गोद लेकर उससे जुड़ी प्रतिभाओं को तराशें। खेल के जरिये स्वस्थ प्रतिस्पर्धा कराकर अनुशासन और खेल भावना को मजबूत करने में योगदान दें। सीएम योगी शुक्रवार को दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय में पूर्वी क्षेत्र अंतर विश्वविद्यालय बास्केटबॉल (महिला) प्रतियोगिता के औपचारिक उद्घाटन समारोह को बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री ने कहा कि खेल गतिविधियों को बढ़ाने से युवा नशे से दूर रहेंगे और तमाम विकृतियों से बचे रहेंगे। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि उत्तर प्रदेश ने खेलों के माध्यम से भी विकसित भारत बनाने के अभियान में भरपूर प्रयास किए हैं। प्रदेश की पहली स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी मेरठ में बन चुकी है। मेरठ में हर प्रकार के स्पोर्ट्स आइटम बन रहे हैं और इसे सरकार ने ओडीओपी में शामिल किया है। सीएम योगी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में विगत 11 वर्षों में देश में एक नई खेल संस्कृति ने जन्म लिया है। 2014 के पहले खेल की गतिविधियां और प्रतियोगिताएं सरकार के एजेंडे का हिस्सा नहीं होती थीं। खेल और खिलाड़ियों की उपेक्षा होती थी। अंतरराष्ट्रीय मानक के अनुरूप इंफ्रास्ट्रक्चर न होने से खिलाड़ी खेल से पलायन करने को विवश होते थे। कुंठित, हताश और निराश रहते थे। जबकि 2014 से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में खेल और खिलाड़ियों का प्रोत्साहन देखते ही बनता है। पीएम मोदी ने खेलो इंडिया, फिट इंडिया और सांसद खेल प्रतियोगिता जैसे अभियानों से स्वस्थ और सशक्त राष्ट्र की प्रेरणा दी है। गांव-गांव तक खेल प्रतिभाओं को मंच दिया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत की प्राचीन परंपरा ने खेलकूद को सदैव महत्व दिया है। भारत की ऋषि परंपरा के उद्घोष ‘शरीरमाद्यं खलु धर्मसाधनम्’ का उद्धरण देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा जीवन के जितने भी साधन हैं, उन्हें स्वस्थ शरीर से ही प्राप्त किया जा सकता है। शरीर स्वस्थ रखने के लिए खेलकूद की गतिविधियों से जुड़ना होगा। नियम, संयम और अनुशासन से शरीर पर ध्यान देना होगा। स्वस्थ शरीर से ही समाज और राष्ट्र को सशक्त बनाने के लिए प्रेरणा मिलेगी। मुख्यमंत्री ने इस बात पर प्रसन्नता व्यक्त की कि खेलकूद को तमाम परिवारों ने जीवन का हिस्सा बनाया है। उन्होंने कहा कि कई राज्यों में बेटे-बेटी में भेदभाव नहीं है। सीएम योगी ने कहा कि उत्तर प्रदेश में बड़े पैमाने पर खेल इंफ्रास्ट्रक्चर को आगे बढ़ाया गया है। प्रदेश की हर ग्राम पंचायत में खेल मैदान व ओपन जिम, ब्लॉक स्तर पर मिनी स्टेडियम, जिला स्तर पर स्टेडियम बनाने के कार्य युद्धस्तर पर आगे बढ़े हैं। खेल गतिविधियां अनौपचारिक न रहें, बल्कि दिनचर्या का हिस्सा बनें, इसके लिए सरकार ने 96000 से अधिक युवक मंगल दलों और महिला मंगल दलों को स्पोर्ट्स किट वितरित की हैं। खिलाड़ियों के प्रोत्साहन के लिए सरकार की तत्परता का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि ओलंपिक में प्रदेश के प्रतिभागी खिलाड़ी को सरकार 10 लाख रुपये देती है। ओलंपिक एकल स्पर्धा में स्वर्ण पदक विजेता को 6 करोड़ रुपये का पुरस्कार और क्लास वन जॉब देने की व्यवस्था बनाई गई है। ओलंपिक की टीम स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीतने वाले यूपी के खिलाड़ी को 3 करोड़ और एकल स्पर्धा में रजत पदक विजेता को भी 3 करोड़ रुपये का पुरस्कार दिया जाता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि 2030 कॉमनवेल्थ गेम्स गुजरात में होंगे। हर राज्य और खिलाड़ियों को इसके अनुरूप खुद को तैयार करना होगा। भारत 2036 के ओलंपिक गेम्स की मेजबानी के लिए भी आवेदन कर रहा है। उन्होंने गोरखपुर को आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत से समृद्ध धरा बताने के साथ आजादी के आंदोलन में चौरीचौरा की घटना, वैदिक साहित्य के विश्व में सबसे बड़े प्रकाशन केंद्र 'गीता प्रेस' की महत्ता बताई। साथ ही अमर सेनानी पंडित रामप्रसाद बिस्मिल तथा बंधु सिंह से इस जिले के किसी न किसी रूप में जुड़ाव का उल्लेख करते हुए गोरखपुर को महान उपन्यासकार मुंशी प्रेमचंद की कर्मभूमि बताया। मुख्यमंत्री ने कहा कि गोरखपुर अनेक विभूतियों की पावन धरा है। इस दौरान मुख्यमंत्री ने गोरखपुर विश्वविद्यालय क्रीड़ा परिषद की खेल विवरणिका का विमोचन भी किया।

सीएम योगी ने संक्रांति पर्व पर लॉन्च किया खास कैलेंडर, परंपरा और संस्कृति की दिखेगी झलक

गोरखपुर सीएम योगी आदित्यनाथ मकर संक्रांति के मौके पर गोरखपुर में हैं। यहां बुधवार की सुबह उन्होंने गोरखपुर नगर निगम के ‘वार्षिक स्वच्छता कैलेंडर 2026’ का विमोचन किया। इस दौरान गोरखपुर के महापौर डॉ मंगलेश कुमार श्रीवास्तव, नगर आयुक्त गौरव सिंह सोगरवाल, अपर नगर आयुक्त दुर्गेश मिश्र और कई पार्षद मौजूद रहे। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्वच्छ सर्वेक्षण 2024-25 की नगर निगम की उपलब्धियों के लिए महापौर और नगर आयुक्त समेत सभी पार्षदों और महानगरवासियों को शुभकामनाएं दीं। इसके साथ ही महानगर को गारबेज फ्री सिटी में 7 स्टॉर का लक्ष्य हासिल करने का लक्ष्य भी दिया। नगर निगम का वार्षिक स्वच्छता कैलेंडर 2026 सिर्फ तिथियों का संग्रह न होकर नगर निगम की उपलब्धियों और भविष्य की योजनाओं का दस्तावेज है, जिसमें स्वच्छ सर्वेक्षण 2024-25 में प्राप्त 5-स्टार रेटिंग और सफाई मित्र सुरक्षित शहर में देश के शीर्ष तीन शहरों में स्थान बनाने जैसी गौरवशाली उपलब्धियों को दर्शाया गया है। इसमें अर्बन फ्लड मैनेजमेंट, अर्बन फैसिलिटेशन सेंटर, और राप्ती नदी के संरक्षण के लिए फाइटोरेमेडिएशन जैसी आधुनिक तकनीकों के साथ-साथ 'वेस्ट टू वंडर' और लिगेसी वेस्ट निस्तारण जैसे महत्वपूर्ण कार्यों का विवरण दिया है। नगर आयुक्त गौरव सिंह सोगरवाल ने कहा कि इस कैलेंडर का मुख्य उद्देश्य प्रत्येक नागरिक को स्वच्छता के प्रति जागरूक करना और जन-भागीदारी के माध्यम से गोरखपुर को एक 'आदर्श एवं आधुनिक नगर' के रूप में विश्व पटल पर स्थापित करना है। महापौर डॉ मंगलेश कुमार श्रीवास्तव ने कहा कि यह कैलेंडर स्वच्छ सर्वेक्षण 2025-26 के थीम स्वच्छता की एक पहल – बढ़ाये हाथ करे सफाई साथ को जोड़ते हुए आम जनमानस में भी जागरूकता फैलाने का कार्य करेगा। कल बाबा गोरखनाथ को खिचड़ी चढ़ाएंगे सीएम योगी गोरक्षपीठाधीश्वर एवं सीएम योगी आदित्यनाथ मकर संक्रांति पर गुरुवार तड़के ब्रह्म मुहूर्त में शिवावतार महायोगी गुरु गोरखनाथ को लोक आस्था की खिचड़ी अर्पित करेंगे। साथ ही वे समूचे जनमानस की सुख-समृद्धि और कल्याण की मंगलकामना करेंगे। नाथपंथ की यह विशिष्ट व ऐतिहासिक परंपरा सदियों से आस्था का केंद्र रही है।  

ईज ऑफ डूइंग बिज़नेस, डिजिटल गवर्नेंस और बड़े पैमाने पर सुधारों ने बदली उत्तर प्रदेश की तस्वीर

पिछले साढ़े आठ वर्षों में प्रदेश भर में हुए संरचनात्मक सुधारों का परिणाम सामने आया “मिनिमम गवर्नमेंट–मैक्सिमम गवर्नेंस” के सिद्धांत को व्यवहार में उतारते हुए नीतियों, प्रक्रियाओं और डिजिटल प्रणालियों को किया लागू सरकार की नीतियों का उद्योग और निवेशकों के साथ ही आम नागरिकों को भी मिला सीधा लाभ विभागों के चक्कर घटे, मंजूरियां तेज हुईं और शासन व्यवस्था बनी अधिक पारदर्शी लखनऊ, उत्तर प्रदेश अब "बॉटलनेक" से "ब्रेकथ्रू" राज्य में परिवर्तित हो चुका है। और, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का प्रदेश के लिए ऐसा कहना केवल एक राजनीतिक वक्तव्य नहीं, बल्कि पिछले साढ़े आठ से अधिक वर्षों में हुए संरचनात्मक सुधारों का परिणाम है। राज्य सरकार ने प्रशासनिक बाधाओं, पुरानी प्रक्रियाओं और जटिल अनुमतियों की संस्कृति को बदलते हुए निवेश और विकास के लिए एक नया मॉडल खड़ा करने में सफलता हासिल की। “मिनिमम गवर्नमेंट–मैक्सिमम गवर्नेंस” के सिद्धांत को व्यवहार में उतारते हुए नीतियों, प्रक्रियाओं और डिजिटल प्रणालियों को इस तरह जोड़ा गया कि उद्योग, निवेशक और आम नागरिके, तीनों को सीधा लाभ हुआ। विभागों के चक्कर लगाने की परंपरा ध्वस्त हुई, त्वरित मंजूरी की व्यवस्था स्थापित की गई और शासन व्यवस्था अधिक पारदर्शी बनी। ईज ऑफ डूइंग बिजनेस में छलांग ईज ऑफ डूइंग बिजनेस के क्षेत्र में उत्तर प्रदेश ने 2017-18 में 12वें स्थान से आगे बढ़ते हुए 2019 में दूसरा स्थान हासिल किया। वर्ष 2022 और 2024 में राज्य को ‘टॉप अचीवर’ का दर्जा मिला, जबकि लॉजिस्टिक्स रैंकिंग में भी राज्य लगातार ‘अचीवर्स’ की श्रेणी में रहा। वाणिज्य एवं उद्योग श्रेणी में गुड गवर्नेंस इंडेक्स 2021 में उत्तर प्रदेश शीर्ष स्थान पर रहा, यानी सुधार केवल कागज़ों पर नहीं, राष्ट्रीय स्तर पर मान्य और मापनीय रहे। यही नहीं, सरलीकरण और भूमि प्रशासन में उत्तर प्रदेश को ‘टॉप अचीवर’ घोषित किया गया, जिसने निवेश के रास्ते की पारंपरिक बाधाओं को हटाने में बड़ी भूमिका निभाई। डिजिटल सिंगल विंडो सिस्टम बना गेमचेंजर ‘निवेश मित्र’ पोर्टल ने प्रदेश में औद्योगिक मंजूरियों की पूरी तस्वीर बदल दी। 45 विभागों की 525 से अधिक सेवाएं एक ही प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कराई गईं, 20 लाख से अधिक स्वीकृतियां डिजिटल रूप से जारी हुईं और 97% से अधिक आवेदनों का समयबद्ध निस्तारण हुआ। उपयोगकर्ताओं में 96% संतोष दर्ज होना इस व्यवस्था की विश्वसनीयता का प्रमाण है। अब निवेश मित्र 3.0 विकसित किया जा रहा है, जो AI आधारित डैशबोर्ड, रीयल-टाइम ट्रैकिंग, स्वचालित सूचनाओं और राष्ट्रीय सिंगल विंडो सिस्टम से एकीकृत व्यवस्था के साथ अगले स्तर का स्मार्ट गवर्नेंस मॉडल प्रस्तुत करेगा। नियामक अनुपालन का सरलीकरण उद्योग जगत की सबसे बड़ी शिकायत, जटिल अनुपालन प्रणाली को योगी सरकार ने व्यवस्थित तरीके से संशोधित किया। 65 विभागों में 4,675 अनुपालन कम किए गए। 4,098 अनुपालनों का डिजिटलीकरण एवं सरलीकरण किया गया। 577 अनुपालन अपराधमुक्त (डीक्रिमिनलाइज) किए गए। 948 पुराने अधिनियम/नियम/विनियम निरस्त किए गए। इसके साथ ही, ट्रेड लाइसेंस की अनिवार्यता समाप्त हुई, 20 से कम कर्मचारियों वाली दुकानों के लिए पंजीकरण आवश्यकता हटाई गई और श्रम, अग्निशमन, परिवहन, विधिक माप विज्ञान में अपराधों की कम्पाउंडिंग व्यवस्था लागू कर व्यवसाय-हितैषी वातावरण बनाया गया। यूपी की निवेश नीतियों को केंद्र ने भी दी मान्यता डी-रेगुलेशन के क्षेत्र में किए गए इन सुधारों को केंद्र सरकार ने भी औपचारिक रूप से मान्यता दी है। केंद्र द्वारा संचालित “डी-रेगुलेशन 1.0” कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश को राष्ट्रीय स्तर पर पहला स्थान प्राप्त हुआ है। यह रैंकिंग केवल कागजी मूल्यांकन नहीं, बल्कि जमीन पर लागू किए गए सुधारों के आधार पर दी गई है। अनावश्यक अनुपालन समाप्त करने, लाइसेंस प्रक्रियाओं को सरल बनाने और दंडात्मक प्रावधानों को घटाकर सुधारात्मक दृष्टिकोण अपनाने से उद्योगों के कामकाज में गति आई है। इस मान्यता ने निवेशकों का भरोसा मजबूत किया और उत्तर प्रदेश को एक स्थिर, पारदर्शी और एक ऐसे राज्य के रूप में स्थापित किया है, जहां निवेशकों को नियमों की अनिश्चितता नहीं झेलनी पड़ती। उद्योग स्थापना से बदली जमीनी तस्वीर एक्सप्रेसवे, डिफेंस कॉरिडोर, औद्योगिक पार्क, इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग, डेटा सेंटर और लॉजिस्टिक्स हब, इन सबने उत्तर प्रदेश को उभरते औद्योगिक पावरहाउस के रूप में स्थापित किया है। नए निवेश ने रोजगार, निर्यात और एमएसएमई क्षेत्र को नई ऊर्जा दी है और वैश्विक निवेशकों का विश्वास राज्य के प्रति बढ़ा है। आगे की दिशा उत्तर प्रदेश में सुधारों का दौर अब “नीति निर्माण” से आगे बढ़कर तेज क्रियान्वयन और परिणाम देने के चरण में प्रवेश कर चुका है। आने वाले समय में परियोजनाओं की निगरानी और भी सख्त होगी, निवेशकों को द्रुतगामी सुविधाएं मिलेंगी और युवाओं के लिए बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर तैयार किए जाएंगे। योगी सरकार ने बाधाओं को अवसर में बदलते हुए यह साबित किया कि उत्तर प्रदेश अब सचमुच ‘बॉटलनेक से ब्रेकथ्रू’ राज्य बन चुका है और अगला लक्ष्य इसे वैश्विक निवेश एवं विकास के अग्रणी केंद्र के रूप में स्थापित करना है।

अब कैश नहीं चलेगा! इतने रुपए से अधिक की रजिस्ट्री फीस ऑनलाइन जमा करने का आदेश

लखनऊ उत्तर प्रदेश में योगी सरकार ने जमीन और मकान की रजिस्ट्री प्रक्रिया को और पारदर्शी व सुविधाजनक बनाने की दिशा में बड़ा फैसला लिया है। अब 20 हजार रुपये से अधिक की रजिस्ट्रेशन फीस ऑनलाइन जमा कराई जाएगी। इस संबंध में महानिरीक्षक निबंधन नेहा शर्मा ने नया आदेश जारी कर दिया है।   सरकार का उद्देश्य रजिस्ट्री प्रक्रिया में नकद लेनदेन को कम करना, पारदर्शिता बढ़ाना और आमजन को सहूलियत प्रदान करना है। ऑनलाइन भुगतान की व्यवस्था लागू होने से समय की बचत होगी और रजिस्ट्री कार्यालयों में भीड़ कम होगी। महानिरीक्षक निबंधन ने निर्देश दिए हैं कि सभी संबंधित कार्यालय इस आदेश का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करें। नई व्यवस्था से जमीन-मकान की रजिस्ट्री प्रक्रिया अधिक सरल, सुरक्षित और डिजिटल होगी। यह व्यवस्था सोमवार से लागू हो गई है। पहले चरण मे आजमगढ़, बाराबंकी, रायबरेली, सुल्तानपुर, सीतापुर, हापुड़, मुजफ्फरनगर, अलीगढ़, बुलंदशहर, बरेली, अमरोहा, कानपुर नगर, फतेहपुर, देवरिया, चित्रकूट, बागपत, कासगंज, एटा, रामपुर, इटावा, महोबा, हरदोई, बस्ती, अंबेडकरनगर, जौनपुर, कौशांबी, भदोही, महाराजगंज, बहराइच और मऊ में यह व्यवस्था लागू होगी। सैनिक को आवास विकास की योजनाओं में छूट वहीं सशस्त्र सेनाओं और अर्धसैनिक बलों के सेवारत व सेवानिवृत्त कार्मिकों को नववर्ष पर बड़ी राहत मिली है। उत्तर प्रदेश आवास विकास परिषद ने ‘पहले आओ-पहले पाओ’ योजना के तहत फ्लैट बुकिंग पर उन्हें अतिरिक्त छूट देने का निर्णय लिया है। परिषद की 274वीं बैठक में लिए गए फैसले के बाद अब सैनिकों को फ्लैट बुकिंग पर अधिकतम 20 प्रतिशत तक की छूट का लाभ मिलेगा। यह सुविधा परिषद के पोर्टल पर ऑनलाइन मोड में शुरू कर दी गई है। वर्तमान में परिषद लखनऊ, गाजियाबाद, मेरठ, कानपुर, सहारनपुर, मुरादाबाद और आगरा में रिक्त रेडी टू मूव फ्लैट्स का आवंटन कर रही है। आम नागरिकों को जहां एकमुश्त भुगतान पर 15 प्रतिशत तक की छूट मिल रही है, वहीं अब सशस्त्र व अर्धसैनिक बलों के कार्मिकों के लिए यह छूट बढ़ा दी गई है। आवंटन तिथि से 60 दिनों के भीतर पूर्ण भुगतान करने पर 20 प्रतिशत, 61 से 90 दिनों में भुगतान पर 15 प्रतिशत तथा 91 से 120 दिनों के भीतर भुगतान करने पर 10 प्रतिशत की छूट दी जाएगी। योजना की अंतिम तिथि 31 जनवरी 2026 निर्धारित है।  

गोरखपुर महोत्सव के औपचारिक समापन समारोह में बोले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ

गोरखपुर, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि हम उत्तर प्रदेश में निहित संभावनाओं की सिर्फ बात नहीं करते, बल्कि दृढ़ इच्छाशक्ति से संभावनाओं के अनुरूप परिणाम भी देते हैं। सरकार की इच्छाशक्ति का ही परिणाम है कि आज उत्तर प्रदेश माफियामुक्त, दंगामुक्त होकर विकास के पथ पर तेजी से आगे बढ़ रहा है।   सीएम योगी मंगलवार अपराह्न गोरखपुर महोत्सव के औपचारिक समापन समारोह को बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रहे थे। रामगढ़ताल के सामने चंपा देवी पार्क में महोत्सव के मुख्य मंच से मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार की इच्छाशक्ति से प्रदेश में व्यापक परिवर्तन देखने को मिल रहा है। सरकार के प्रयासों से नौजवानों को रोजगार मिल रहा है। अन्नदाता किसानों के जीवन में सकारात्मक बदलाव आ रहा है। उद्यमियों, व्यापारियों को भयमुक्त वातावरण में कारोबार बढ़ाने का अवसर मिल रहा है। बहन-बेटियों को मुस्कुराते हुए स्कूल-बाजार जाने का माहौल मिल रहा है। आज किसी ने बहन-बेटियों की राह में बाधा डालने का दुस्साहस किया तो अगले चौराहे पर यमराज उसका टिकट काटने को तैयार मिलेंगे। यह तभी संभव हो रहा है जब सरकार में जनसेवा करने की दृढ़ इच्छाशक्ति है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि जीवन में सबसे बड़ी ताकत धैर्य और अनुशासन है। हमने कभी धैर्य नहीं खोया। उपेक्षा हुई तो संघर्ष का रास्ता अपनाया। इंसेफेलाइटिस की समस्या पर तत्कालीन सरकारों द्वारा की जा रही उपेक्षा का जिक्र करते हुए सीएम योगी ने कहा कि तब हमने सड़कों पर आंदोलन किया और जब सरकार में आए तो पूरी जिम्मेदारी की भावना के साथ दो वर्षों में इंसेफेलाइटिस का खात्मा कर दिखाया। विकास की नई बुलंदियों पर गोरखपुर और उत्तर प्रदेश मुख्यमंत्री ने कहा कि आज गोरखपुर और उत्तर प्रदेश विकास की नई बुलंदियों पर है। 2017 के पहले भी जब देश आगे बढ़ रहा था तो गोरखपुर पीछे छूट गया था। तुलना की जाए तो 2017 के पहले और इसके बाद के उत्तर प्रदेश और गोरखपुर में जमीन-आसमान का अंतर दिखेगा। 2017 तक प्रदेशभर की तरह गोरखपुर भी उपद्रव, गुंडागर्दी की चपेट में था। गुंडा टैक्स वसूला जाता था। सड़कें जर्जर थीं, बिजली नहीं मिलती थी। गंदगी, बीमारी और इंसेफेलाइटिस का कहर था। मच्छर और माफिया एक दूसरे के पूरक सीएम योगी ने कहा कि मच्छर और माफिया एक दूसरे के पूरक होते हैं। एक शरीर को अस्वस्थ करता है तो दूसरा समाज को। जब समाज हर प्रकार की स्वच्छता शारीरिक और सामाजिक, के प्रति जागरूक नहीं होता है तो उसे दुष्परिणाम भुगतने पड़ते हैं। गोरखपुर और पूर्वी उत्तर प्रदेश के कायाकल्प के अभियान का परिणाम धरातल पर मुख्यमंत्री ने गोरखपुर की वर्तमान और पूर्व स्थिति का उल्लेख करते हुए कहा कि कभी गोरखपुर माफियाराज और गुंडाराज के लिए कुख्यात था। प्रदेश की भी यही स्थिति थी। हर दूसरे-तीसरे दिन प्रदेश में दंगा होता था। व्यापारी, बहन, बेटियां सुरक्षित नहीं थीं। व्यापारी गुंडा टैक्स देने को मजबूर थे। इंसेफेलाइटिस बीमारी चरम पर थी और नौनिहालों को इससे बचाने के लिए कोई पुरसाहाल नहीं था। नौजवान पलायन को मजबूर थे। फिर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में डबल इंजन की उत्तर प्रदेश सरकार ने गोरखपुर और पूर्वी उत्तर प्रदेश के कायाकल्प के लिए जो अभियान शुरू किया, उसके परिणाम आज जमीनी धरातल पर नजर आ रहे हैं। आठ साल बाद आने वाले पहचान नहीं पाएंगे गोरखपुर सहित यूपी के शहरों को मुख्यमंत्री ने कहा कि आठ साल पहले यहां आया व्यक्ति यदि आज गोरखपुर आएगा तो यहां विकास से आए बदलाव के चलते शहर को पहचान नहीं पाएगा। ऐसी ही स्थिति अयोध्या, काशी, प्रयागराज को लेकर होगी। आठ साल बाद लखनऊ आए एक व्यक्ति द्वारा बताए गए संस्मरण को साझा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि वह व्यक्ति लखनऊ को पहचान ही नहीं पाए। आठ साल पहले जब वह लखनऊ आए थे तब बहुत गंदगी थी, सड़कें संकरी थीं। और, उन्हें सूर्यास्त के बाद घर से न निकलने की सलाह दी गई थी। अब वह देर रात में भी भयमुक्त होकर निकल रहे हैं। बदलाव ही समृद्धि और खुशहाली का आधार मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि बदलाव ही समृद्धि और खुशहाली का आधार है। इसी मंत्र को अपनाते हुए आज जब भारत आगे बढ़ रहा है तो उत्तर प्रदेश और गोरखपुर भी पीछे नहीं है। आज बिना मांगे विकास की योजनाएं लोगों तक पहुंचती हैं। उन्होंने कहा कि पहले कोई सोचता था कि क्या गोरखपुर का खाद कारखाना चल पाएगा, क्या गोरखपुर में एम्स बन पाएगा या क्या बीआरडी मेडिकल कॉलेज फिर से चिकित्सा का बेहतरीन केंद्र बन सकेगा। पर, आज ये सारी बातें हकीकत हैं। कभी अपराध के लिए बदनाम रामगढ़ताल आज बेहतरीन पर्यटन केंद्र बन चुका है। गोरखपुर में कनेक्टिविटी और इंफ्रास्ट्रक्चर शानदार मुख्यमंत्री ने कहा कि आज गोरखपुर में शानदार कनेक्टिविटी और इंफ्रास्ट्रक्चर है। यहां फोरलेन और सिक्सलेन सड़कों का संजाल है। 10 वर्ष पूर्व गोरखपुर से लखनऊ जाने में 8 से 10 घण्टे, अयोध्या और काशी जाने में 6 घण्टे लग जाते थे। आज शानदार रोड कनेक्टिविटी होने से गोरखपुर से लखनऊ की दूरी साढ़े तीन घण्टे में, काशी की दूरी ढाई घण्टे में और अयोध्या की दूरी डेढ़ घण्टे में पूरी हो जाती है। 2017 के पहले गोरखपुर से सिर्फ एक वायुसेवा थी, वह भी कभी कभार ही मिलती थी। आज गोरखपुर से दिल्ली, मुंबई सहित कई प्रमुख शहरों के लिए हवाई सेवा है और दूरी एक से डेढ़ घण्टे में पूरी हो जाती है। गोरखपुर में हजारों करोड़ रुपये के निवेश से 50 हजार युवाओं को मिली नौकरी मुख्यमंत्री ने कहा कि सुरक्षा का बेहतर वातावरण बना तो पिछले 8 वर्षों में गोरखपुर में हजारों करोड़ों रुपये का निवेश हुआ और इसके जरिए 50 हजार युवाओं को नौकरी मिली। यदि यह निवेश नहीं होता तो इन युवाओं को पलायन करना पड़ता। जबकि आज उन्हें अपने क्षेत्र में ही नौकरी मिल गई है। पहले गोरखपुर में एक विश्वविद्यालय था, आज चार विश्वविद्यालय हैं। गोरखपुर में प्रदेश सरकार का होटल मैनेजमेंट इंस्टीट्यूट भी बन गया है। अटल आवासीय विद्यालय में गरीबों के बच्चों को मुफ्त अत्याधुनिक शिक्षा प्राप्त हो रही है। उपलब्धियां विरासत के साथ विकास यात्रा का शो-केस सीएम योगी ने कहा कि गोरखपुर और प्रदेश की उपलब्धियां विरासत के साथ विकास की यात्रा का शो-केस हैं। इनकी शो-केसिंग … Read more

सीएम योगी ने समीक्षा बैठक के दौरान किया माघ मेला सेवा एप का उद्घाटन

मेला क्षेत्र के सभी बिजली के खंभों पर लगाए गए क्यूआर कोड से मिलेगी मदद प्रयागराज माघ मेला क्षेत्र में आने वाले श्रद्धालुओं की सहूलियत के लिए कई तरह के नवाचार इस बार मेला प्रशासन की तरफ से किए जा रहे हैं। माघ मेला आने वाले आगंतुकों के लिए मेला सेवा एप भी उसी सूची में शामिल हो गया है।  शनिवार को प्रयागराज के माघ मेला क्षेत्र पहुंचे सीएम योगी ने इसका उद्घाटन किया। प्रयागराज में चल रहे माघ मेले के आगामी स्नान पर्वो की समीक्षा करने  माघ मेला क्षेत्र पहुंचे सीएम योगी ने इसे लेकर अधिकारियों और जन प्रतिनिधियों के साथ एक समीक्षा बैठक की। सीएम योगी ने इस दौरान प्रयागराज में तीर्थयात्रियों को डिजिटल मार्गदर्शन देने के लिए माघ मेला सेवा एप का भी उद्घाटन किया। इस एप के जरिए मेले में आए श्रद्धालुओं को डिजिटल तरीके से सेवाएं उपलब्ध होंगी। मेला अधिकारी ऋषिराज बताते हैं कि इस एप को इस तरह डिजिटली डिजाइन किया गया है कि मेला क्षेत्र के किसी भी हिस्से में बैठा कोई भी श्रद्धालु या पर्यटक अपनी समस्या मेला प्रशासन को अवगत करा सकता है और मेला प्रशासन के कर्मचारी उसका समाधान कर सकेंगे। मेला क्षेत्र के सभी बिजली के खंभों में इसके लिए क्यूआर कोड चिपकाए गए हैं जिन्हें स्कैन करके उसमें खुलने वाले फॉर्म में अपनी समस्या बताकर प्रशासन के पास भेजा जा सकता है। मेला प्रशासन के विभिन्न विभागों की टीमें इसका संज्ञान लेते ही समस्या का निवारण कर देंगी। माघ मेला में पहली बार यह सुविधा दी गई है।

UP राजनीति में हलचल: SIR ड्राफ्ट लिस्ट जारी होते ही BJP एक्टिव, 4 करोड़ वोटर बनाने की तैयारी

लखनऊ उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआइआर) के तहत जारी हुई ड्राफ्ट मतदाता सूची के बाद भारतीय जनता पार्टी बेहद गंभीर हो गई है। भाजपा ने एक महीने में चार करोड़ नए मतदाता बनाने का लक्ष्य रखा है और मुख्यमंत्री इस अभियान को लेकर खासे सक्रिय हैं। उत्तर प्रदेश में मंगलवार को एसआईआर के तहत जारी ड्राफ्ट लिस्ट में बड़ी संख्या में वोटर कम होने के बाद भाजपा अब वोटर लिस्ट में नाम जुड़वाने की मुहिम में लगी है। ड्राफ्ट लिस्ट में 2.89 करोड़ वोटर के नाम कटे हैं। भाजपा एक महीने में चार करोड़ नए वोटर बनाने की कोशिश में है।   मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने पूरे मंत्रिमंडल को दी वोटर लिस्ट में नए सदस्य जुड़वाने की जिम्मेदारी दी है। मुख्यमंत्री ने सभी मंत्रियों को अपने प्रभार वाले जिलों में मोर्चे पर जम जाने की जिम्मेदारी दी है। मंत्रियों को अपने प्रभार वाले जिलों में जमीनी हकीकत जाननी होगी और ड्राफ्ट लिस्ट में मतदाताओं के नाम जुड़वाने का प्रयास करना होगा। मुख्यमंत्री ने मंत्रिमंडल में सहयोगियों को जमीन पर उतरने के साथ पात्र और अपात्र लोगों की पड़ताल करने का निर्देश दिया है। मानना है कि सूची में अपात्र लोगों को पात्र बनने की प्रक्रिया से भी अवगत कराना सरकार की जिम्मेदारी है। पात्र लोगों की पड़ताल कर उनका नाम भी सूची में जारी कराया जाए। मंत्रियों को उनके प्रभार के जिलों में जिम्मा दिया गया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इसे गंभीर बताते हुए संगठन को युद्धस्तर पर काम करने के निर्देश दिए हैं। पार्टी ने विधायकों और सांसदों से वोटर लिस्ट सुधार पर पूरा ध्यान देने को कहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सरकार के सभी मंत्रियों, विधायकों, पार्टी के पदाधिकारियों, जिला अध्यक्षों के साथ वर्चुअल मीटिंग की और कहा कि एक महीने में हर विधानसभा में कम से कम एक लाख वोट बढ़ाया जाए, इस तरह कम से कम चार करोड़ नए वोटर बन जाएंगे। मीटिंग में कहा गया कि नई ड्राफ्ट लिस्ट के मुताबिक, यूपी में 46.23 लाख वोटर की मृत्यु हो चुकी है। पार्टी के मंत्री, विधायक, नेता, कार्यकर्ता इन सभी की दुबारा जांच करें और देखें कि इस लिस्ट में कोई गड़बड़ी तो नहीं है। वर्चुअल मीटिंग में सभी मंत्रियों को भी बूथ में बैठने को कहा गया है। उनके साथ इस बैठक में भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी भी थे। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी ने पार्टी के सभी राज्य मंत्रियों, सांसदों, विधायकों, एमएलसी, पदाधिकारियों और जिला अध्यक्षों के बैठक में निर्देश दिया है कि वे पूरी तरह वोटर लिस्ट के काम में जुटें।  विधानसभा की सभी कमेटियों की बैठकें रद करने को कहा गया है, जिससे कि सभी मतदाता बनाने के काम में लगें। पार्टी का फोकस तीन प्रमुख वर्गों पर रखा गया है। पहला तो नए युवा मतदाता जो उम्र पूरी होने के बावजूद अब तक वोटर लिस्ट में शामिल नहीं हो पाए हैं। दूसरा, वे वे मतदाता जिनके नाम दस्तावेजों की कमी या तकनीकी त्रुटियों के कारण सूची से हट गए हैं। तीसरा, ऐसे मतदाता जिनका पता सत्यापन के दौरान नहीं मिल पाया या जिनकी मैपिंग नहीं हो सकी। लखनऊ में सबसे ज्यादा कटे वोट लखनऊ में सबसे ज्यादा 30 फीसदी वोट कम हुआ है। यहां 12 लाख से अधिक वोट कटे हैं। लखनऊ में सभी नौ विधानसभा सीट पर वोटर ड्राफ्ट लिस्ट की फोटो कॉपी निकाली गई है और पार्टी के कार्यकर्ता घर-घर जाकर छूटे हुए वोटरों की तलाश कर रहे हैं। जिला अध्यक्ष आनन्द द्विवेदी का कहना है कि जो लोग लखनऊ में रहते हैं, लेकिन वोटर लिस्ट में गांव में नाम लिखवाया है, उन्हें समझाया जा रहा है। बहुत सारे लोगों ने लापरवाही में फॉर्म जमा नहीं किए हैं। उनसे फॉर्म 6 भरवाया जा रहा है। लखनऊ कैंट क्षेत्र में पार्षद अपनी टीम के साथ घर-घर जाकर नए वोटरों को जोड़ने में जुटे हैं। उनकी टीम के पास ड्राफ्ट वोटर लिस्ट की कॉपी है। ये घर-घर जाकर छूटे हुए वोटरों की तलाश कर रहे हैं। प्रदेश के कुल 15.44 करोड़ मतदाताओं में एसआइआर के तहत दो करोड़ 88 लाख 75 हजार 230 ऐसे हैं जो अनुपस्थित, स्थानांतरित, मृत या डुप्लीकेट हैं। 1.04 करोड़ मतदाता ऐसे हैं, जिनके रिकार्ड वर्ष 2003 की मतदाता सूची से नहीं मिले हैं। अब इनको मतदाता बनाने का प्रयास होगा। चुनाव आयोग अब इन्हें नोटिस जारी करेगा।  

सीएम योगी ने किया पंचायती राज विभाग के मासिक न्यूजलेटर का शुभारंभ

“पंचायतों की प्रगति गाथा” से एक मंच पर आएंगी गांवों की विकास कहानियां महिलाओं के सशक्तिकरण पर विशेष कैलेंडर भी जारी लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गुरुवार को पंचायती राज विभाग के मासिक न्यूजलेटर “पंचायतों की प्रगति गाथा” का शुभारंभ किया। इस अवसर पर पंचायती राज मंत्री ओमप्रकाश राजभर ने महिलाओं के सशक्तिकरण पर आधारित विभाग का वार्षिक कैलेंडर “नारी शक्ति की नई उड़ान, गांव बदल रही महिला प्रधान” मुख्यमंत्री को भेंट किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि ग्राम पंचायतें लोकतंत्र की सबसे मजबूत इकाई हैं और इनके सशक्तिकरण से ही प्रदेश का समग्र विकास संभव है। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह मासिक न्यूजलेटर ग्राम पंचायतों में हो रहे सकारात्मक बदलावों, नवाचारों और जनकल्याणकारी कार्यों को जन-जन तक पहुंचाने का प्रभावी माध्यम बनेगा। इसके जरिए गांवों की सफल विकास कहानियां एक मंच पर सामने आएंगी और अन्य पंचायतों को भी प्रेरणा मिलेगी। न्यूजलेटर में प्रत्येक माह एक वंदनीय ग्राम पंचायत का चयन कर उसके उत्कृष्ट विकास कार्यों, पारदर्शी प्रशासन और जनभागीदारी को प्रमुखता से प्रस्तुत किया जाएगा। साथ ही पंचायती राज विभाग की किसी एक प्रमुख योजना, प्रदेशभर में चलाए गए अभियानों, प्रशिक्षण कार्यक्रमों और उपलब्धियों का संक्षिप्त विवरण भी शामिल रहेगा। पंचायती राज मंत्री ओमप्रकाश राजभर ने कहा कि यह न्यूजलेटर पंचायत प्रतिनिधियों के लिए प्रेरणादायी दस्तावेज सिद्ध होगा। प्रमुख सचिव पंचायती राज अनिल कुमार ने इसे सूचना साझा करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बताया। वहीं, निदेशक पंचायती राज अमित कुमार सिंह ने कहा कि यह न्यूजलेटर पंचायती राज व्यवस्था को और अधिक मजबूत करेगा।

योगी सरकार का कड़ा कदम, असिस्टेंट प्रोफेसर परीक्षा रद्द करने का आदेश

लखनऊ उत्तर प्रदेश सरकार प्रदेश में होने वाली सभी भर्तियों और चयन प्रक्रियाओं को स्वतंत्र, निष्पक्ष, पारदर्शी एवं शुचितापूर्ण बनाए रखने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। अभ्यर्थियों के उज्ज्वल भविष्य को ध्यान में रखते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक अहम निर्णय लेते हुए असिस्टेंट प्रोफेसर परीक्षा को निरस्त करने के आदेश दिए हैं। प्राप्त जानकारी के अनुसार, उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग, प्रयागराज द्वारा विज्ञापन संख्या 51 के अंतर्गत सहायक आचार्य पद के लिए अप्रैल 2025 में आयोजित परीक्षा में अनियमितताओं, धांधली और अवैध धन वसूली की शिकायतें सामने आई थीं। इन शिकायतों के आधार पर एसटीएफ यूपी को सूचनाएं प्राप्त हुईं, जिसके बाद मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री द्वारा गोपनीय जांच के आदेश दिए गए। जांच के दौरान एसटीएफ ने 20 अप्रैल 2025 को असिस्टेंट प्रोफेसर परीक्षा के फर्जी प्रश्नपत्र बनाकर अभ्यर्थियों से ठगी करने वाले गिरोह के तीन आरोपियों- महबूब अली, बैजनाथ पाल और विनय पाल को गिरफ्तार किया। आरोपियों के खिलाफ थाना विभूतिखंड, लखनऊ में भारतीय न्याय संहिता 2023 की विभिन्न धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया गया। पूछताछ में मुख्य आरोपी महबूब अली ने स्वीकार किया कि उसने मॉडरेशन प्रक्रिया के दौरान विभिन्न विषयों के प्रश्नपत्र निकालकर कई अभ्यर्थियों को धन लेकर उपलब्ध कराए थे। एसटीएफ की गहन विवेचना और डेटा विश्लेषण से उसकी स्वीकारोक्ति की पुष्टि हुई। जांच के दौरान अन्य संदिग्ध अभ्यर्थियों और व्यक्तियों के नाम भी सामने आए। आयोग से प्राप्त डाटा के मिलान में यह स्पष्ट हुआ कि परीक्षा की शुचिता भंग हुई है। इन सभी तथ्यों को ध्यान में रखते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने असिस्टेंट प्रोफेसर परीक्षा को निरस्त करने के आदेश दिए हैं। साथ ही उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग को निर्देशित किया गया है कि परीक्षा का आयोजन शीघ्र, पूर्णतः निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से दोबारा सुनिश्चित किया जाए, ताकि अभ्यर्थियों का भविष्य सुरक्षित रह सके।