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निर्माणाधीन एनसीसी ट्रेनिंग एकेडमी का निरीक्षण किया मुख्यमंत्री ने

गोरखपुर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि एनसीसी ट्रेनिंग एकेडमी गोरखपुर सहित समूचे पूर्वी उत्तर प्रदेश के लिए नया गौरव होगा। इसके निर्माण कार्य में तेजी लाकर लक्षित समय में इसे पूर्ण किया जाना सुनिश्चित किया जाय। साथ ही निर्माण में गुणवत्ता का विशेष ध्यान रखा जाय। निर्माण की गुणवत्ता और समयबद्धता में किसी भी तरह की शिथिलता या लापरवाही नहीं होनी चाहिए।  सीएम योगी रविवार दोपहर बाद गोरखपुर के ताल कंदला में निर्माणाधीन एनसीसी (राष्ट्रीय कैडेट कोर) ट्रेनिंग एकेडमी का निरीक्षण कर रहे थे। उन्होंने एकेडमी के मॉडल और ड्राइंग मैप का अवलोकन कर व्यवस्थाओं की जानकारी की तो निर्माणाधीन भवन का भ्रमण कर भौतिक प्रगति का भी जायजा लिया। इस अवसर पर उन्होंने हॉस्टल, स्टाफ आवास, मेस के निर्माण को लेकर जरूरी दिशानिर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने कार्यदायी संस्था को गुणवत्तापूर्ण और समयबद्ध तरीके से निर्माण करने के निर्देश दिए। प्रशासनिक अधिकारियों से कहा कि वे इसका आवधिक पर्यवेक्षण करते रहें। निरीक्षण के दौरान कार्यदायी संस्था की तरफ से बताया गया है 60 प्रतिशत निर्माण हो चुका है और निर्धारित समय तक इसे लोकार्पण के लिए तैयार कर दिया जाएगा।  47.88 करोड़ रुपये की लागत से हो रहा एकेडमी का निर्माण गोरखपुर के ताल कंदला में एनसीसी (राष्ट्रीय कैडेट कोर) की ट्रेनिंग एकेडमी का शिलान्यास सीएम योगी ने 9 मार्च 2024 को किया था। निर्माण कार्य जून 2024 में शुरू हुआ था और जून 2026 तक इसे पूरा किया जाना है। कार्यदायी संस्था कंस्ट्रक्शन एंड डिजाइन सर्विसेज, जल निगम, यूनिट-42, गोरखपुर द्वारा इसका निर्माण 10 एकड़ भूमि पर किया जा रहा है और इस पर 47.88 करोड़ रुपये की लागत आएगी। एकेडमी में प्रशासनिक भवन, 150 छात्रों की क्षमता के बालक छात्रावास, 100 छात्राओं की क्षमता के बालिका छात्रावास, डायनिंग हाल, टायलेट ब्लाक, विद्युत स्टेशन, आउटडोर मल्टीएक्टिविटिज एरिया, 50 मीटर के आउटडोर शूटिंग रेंज, ड्रिल प्रैक्टिस पथ, फुटबाल फील्ड, आप्टिकल कोर्स एवं पुशप बीम आदि की सुविधा होगी। इसके अलावा 7.17 करोड़ रुपये की लागत से चहारदीवारी के निर्माण, सभी किनारों पर संतरी पोस्ट, गार्ड रूम, हाईमास्ट फ्लड लाइट के कार्य कराए जाएंगे।  11 जिलों का प्रतिनिधित्व करता है एनसीसी गोरखपुर ग्रुप एकता और अनुशासन आदर्श वाक्य वाले एनसीसी ग्रुप गोरखपुर, उत्तर प्रदेश के पूर्वी भाग के 11 जिलों का प्रतिनिधित्व करता है। इसमें देवरिया, कुशीनगर, गोरखपुर, महराजगंज, सिद्धार्थनगर, बस्ती, संतकबीरनगर, गोडा, बलरामपुर श्रावस्ती एवं बहराइच शामिल हैं। इससे जुड़े विश्वविद्यालयों, स्कूलों और कालेजों के कैडेटों को प्रशिक्षण देने हेतु प्रति वर्ष औसतन 25 से 30 संयुक्त वार्षिक प्रशिक्षण शिविर, थल सेना शिविर, इंटर ग्रुप कम्पटीशन, गणत्रंत दिवस परेड की तैयारी के साथ ही अनेक सामाजिक गतिविधियां भी इस ग्रुप की तरफ से आयोजित की जाती हैं।

स्मार्ट मीटरिंग और निगरानी से मजबूत हुई बिजली वितरण प्रणाली

15,26,801 डीटी मीटर स्वीकृत, 2,29,898 स्थापित, बिजली वितरण प्रणाली में तकनीकी मजबूती 25,224 फीडर मीटर  स्थापित, फीडर स्तर पर निगरानी से लाइन लॉस पर नियंत्रण लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश ऊर्जा के क्षेत्र में जिस गति और स्तर पर तकनीकी परिवर्तन का साक्षी बन रहा है, वह न केवल प्रदेश का बल्कि पूरे देश के लिए एक मॉडल बनता जा रहा है। वर्ष 2025 में उत्तर प्रदेश की बिजली व्यवस्था में स्मार्ट मीटरिंग के जरिए पारदर्शिता, दक्षता और उपभोक्ता हितों के संरक्षण का वर्ष साबित हुआ है। यूपी में अब तक लगभग 68,24,654 (68 लाख, 24 हजार, 654) स्मार्ट मीटर स्थापित किए जा चुके हैं। वहीं सौर ऊर्जा के क्षेत्र में उत्तर प्रदेश लगातार अपनी दमदार उपस्थिति दर्ज करा रहा है। अभी तक प्रदेश में पीएम सूर्य घर योजना के अंतर्गत 3,20,187 सौर ऊर्जा इंस्टॉलेशन हो चुके हैं। यही नहीं यूपी सरकार ने ऊर्जा क्षेत्र में सुधार को प्राथमिकता देते हुए उपभोक्ताओं के हितों को केंद्र में रखकर काम किया है। डिजिटल तकनीक आधारित ‘स्मार्ट मीटरिंग प्रोजेक्ट’ के अंतर्गत न केवल बिजली वितरण प्रणाली में पारदर्शिता आई है, बल्कि राजस्व संग्रहण में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है। स्मार्ट मीटरिंग से पारदर्शिता और नियंत्रण उत्तर प्रदेश में 3,09,78,280 (3 करोड़, 9 लाख 78 हजार 280) स्मार्ट मीटर स्वीकृत किए जा चुके हैं। इनमें से 68,24,654 (68 लाख 24 हजार 654) मीटर स्थापित किए जा चुके हैं। प्रदेश सरकार ने बिजली उपभोग को डिजिटल रूप से ट्रैक करने और बिलिंग प्रक्रिया को सटीक बनाने की दिशा में ठोस कदम उठाया है। स्मार्ट मीटरों से उपभोक्ताओं को सटीक बिलिंग, वास्तविक खपत का आकलन और बिजली चोरी पर अंकुश जैसे अनेक लाभ मिल रहे हैं। पहले जहां अनुमान आधारित बिलिंग से उपभोक्ताओं को शिकायतें रहती थीं, वहीं अब वास्तविक उपयोग के आधार पर पारदर्शी बिल मिल रहे हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कई बार कहा है, “स्मार्ट मीटरिंग सिस्टम न केवल तकनीकी सुधार है, बल्कि उपभोक्ता के प्रति जवाबदेही का प्रतीक भी है।” डीटी मीटरों से बिजली वितरण में सुधार बिजली वितरण को और अधिक व्यवस्थित और तकनीकी रूप से उन्नत बनाने के लिए योगी सरकार ने डिस्ट्रिब्यूशन ट्रांसफॉर्मर (डीटी) मीटरिंग पर विशेष ध्यान दिया है। अब तक 15,26,801 (15 लाख 26 हजार 801) डीटी मीटर स्वीकृत किए गए हैं, जिनमें से 2,29,898 (2 लाख 29 हजार 898) मीटर स्थापित हो चुके हैं। यह व्यवस्था हर ट्रांसफॉर्मर पर बिजली के प्रवाह और खपत की निगरानी को सटीक बनाती है। डीटी मीटर से यह पता लगाना आसान होता है कि किन क्षेत्रों में बिजली की हानि सबसे अधिक है और कहां पर तकनीकी सुधार की आवश्यकता है? इस तकनीक के माध्यम से बिजली चोरी में कमी आई है और लाइन लॉस कम हो रहा है। फीडर मीटरिंग से मजबूत हुआ बिजली आपूर्ति नेटवर्क उत्तर प्रदेश में बिजली नेटवर्क को सशक्त बनाने के लिए 25,224 फीडर मीटर स्थापित किए जा चुके हैं। यह व्यवस्था यह सुनिश्चित करती है कि प्रत्येक फीडर स्तर पर बिजली आपूर्ति और उपभोग का रिकॉर्ड डिजिटल रूप से उपलब्ध रहे। फीडर मीटरिंग से आपूर्ति की गुणवत्ता में सुधार हुआ है और ग्रामीण व शहरी दोनों इलाकों में बिजली वितरण की विश्वसनीयता बढ़ी है। उपभोक्ताओं के हित में तकनीक मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सरकार का लक्ष्य केवल तकनीकी उन्नयन ही नहीं, उपभोक्ताओं के हितों को भी सशक्त बनाना है। स्मार्ट मीटर से अब उपभोक्ता अपने मोबाइल या ऑनलाइन पोर्टल के जरिए बिजली उपयोग का रियल टाइम डेटा देख सकते हैं। इससे बिलिंग विवाद घटे हैं और उपभोक्ता अपनी खपत पर खुद नियंत्रण रख पा रहे हैं। साथ ही भुगतान प्रणाली को भी ऑनलाइन और पारदर्शी बनाकर सरकार ने डिजिटल इंडिया के विजन को दृढ़ता प्रदान करने का काम किया है। बिजली बिल राहत योजना का उपभोक्ताओं को मिल रहा लाभ  बिजली बिल राहत योजना में 16 लाख से ज्यादा उपभोक्ताओं ने पंजीकरण कराया है। 1323 करोड़ की राजस्व धनराशि प्राप्त हुई। सबसे अधिक पूर्वांचल डिस्काम में 6 लाख से ज्यादा पंजीकरण हुआ है।

योगी सरकार का उद्देश्य, कोई भी पात्र छात्र आर्थिक कारणों से शिक्षा से वंचित न रह जाए

सामान्य वर्ग, अन्य पिछड़ा वर्ग, अल्पसंख्यक वर्ग के साथ-साथ अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति वर्ग के विद्यार्थियों पर समान रूप से लागू होगी व्यवस्था लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश सरकार ने छात्र हित में एक और महत्वपूर्ण कदम उठाया है। समाज कल्याण विभाग ने शैक्षिक सत्र 2025–26 के अंतर्गत संचालित दशमोत्तर छात्रवृत्ति योजना में समय पर मास्टर डेटा लॉक न हो पाने के कारण वंचित रह गए पात्र छात्र-छात्राओं को दोबारा अवसर प्रदान किया है। इसके लिए विभाग द्वारा संशोधित समय-सारिणी जारी की गई है। सभी वर्गों के विद्यार्थियों को मिलेगा लाभ यह संशोधित व्यवस्था सामान्य वर्ग, अन्य पिछड़ा वर्ग, अल्पसंख्यक वर्ग के साथ-साथ अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति वर्ग के विद्यार्थियों पर समान रूप से लागू होगी। योगी सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी पात्र छात्र आर्थिक कारणों से शिक्षा से वंचित न रह जाए। पारदर्शी और समयबद्ध होगी प्रक्रिया समाज कल्याण राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) असीम अरुण ने बताया कि संशोधित कार्यक्रम छात्रवृत्ति प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी, त्रुटिरहित एवं समयबद्ध बनाने की दिशा में एक ठोस पहल है। इससे पात्र विद्यार्थियों को योजना का लाभ समय पर मिल सकेगा। मास्टर डेटा लॉक और सत्यापन की समय-सीमा समाज कल्याण विभाग के उप निदेशक आनंद कुमार सिंह ने बताया कि संशोधित कार्यक्रम के तहत शिक्षण संस्थानों द्वारा मास्टर डेटा तैयार करने की प्रक्रिया 23 दिसंबर 2025 से 2 जनवरी 2026 तक की जाएगी। विश्वविद्यालयों एवं एफिलिएटिंग एजेंसियों द्वारा फीस एवं छात्र संख्या का सत्यापन 23 दिसंबर से 9 जनवरी 2026 तक तथा जिला समाज कल्याण अधिकारी द्वारा मास्टर डेटा और फीस का अंतिम सत्यापन 15 जनवरी 2026 तक पूरा किया जाएगा। सामान्य, ओबीसी और अल्पसंख्यक वर्ग के लिए आवेदन प्रक्रिया सामान्य, ओबीसी एवं अल्पसंख्यक वर्ग के छात्र 14 जनवरी 2026 तक ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे। आवश्यक अभिलेखों सहित हार्ड कॉपी 21 जनवरी 2026 तक शिक्षण संस्थानों में जमा करनी होगी। संस्थान स्तर पर सत्यापन 27 जनवरी तक, विश्वविद्यालय स्तर पर वास्तविक छात्र सत्यापन 28 जनवरी से 7 फरवरी 2026 तक तथा एनआईसी द्वारा डेटा स्क्रूटनी 9 फरवरी 2026 तक की जाएगी। छात्रवृत्ति एवं शुल्क प्रतिपूर्ति की धनराशि 18 मार्च 2026 तक पीएफएमएस के माध्यम से आधार-सीडेड बैंक खातों में अंतरित की जाएगी। अनुसूचित जाति/जनजाति वर्ग को विशेष राहत अनुसूचित जाति एवं जनजाति वर्ग के छात्र 31 मार्च 2026 तक आवेदन कर सकेंगे। सभी प्रक्रियाएं पूर्ण होने के बाद अंतिम भुगतान 22 जून 2026 तक किया जाएगा। यह व्यवस्था सामाजिक न्याय की दिशा में योगी सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाती है। तिथियों के पालन की अपील उपनिदेशक आनंद कुमार सिंह ने सभी शिक्षण संस्थानों, विश्वविद्यालयों और विद्यार्थियों से अपील की है कि वे निर्धारित समय-सारिणी का कड़ाई से पालन करें, ताकि छात्रवृत्ति प्रक्रिया सुचारू रूप से पूरी हो सके।

नेता प्रतिपक्ष ने की सीएम विवेकाधीन कोष की सराहना, सीएम योगी ने आभार के साथ गिनाए सपा काल के घोटाले

नेता प्रतिपक्ष बोले- कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों में जरूरतमंदों के लिए संजीवनी साबित हो रही है सरकार की योजना सत्ता–विपक्ष के साथ-साथ मुस्लिम समुदाय के लोग भी योजना से हो रहे हैं लाभान्वितः माता प्रसाद पांडे   लखनऊ, शीतकालीन सत्र के अंतिम दिन विधानसभा में अनुपूरक बजट पर चर्चा के दौरान सत्ता और विपक्ष के बीच सकारात्मक संवाद देखने को मिला। नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय द्वारा मुख्यमंत्री विवेकाधीन कोष की खुले मंच से प्रशंसा के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आभार जताते हुए पूर्ववर्ती सरकार की नीतिगत विफलताओं और घोटालों को सदन के सामने रखा। विधानसभा के शीतकालीन सत्र के अंतिम दिन अनुपूरक बजट पर चर्चा के दौरान नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मुख्यमंत्री विवेकाधीन कोष योजना की सराहना की। उन्होंने कहा कि कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों के उपचार में यह योजना अत्यंत लाभकारी सिद्ध हो रही है। इसके माध्यम से न केवल सत्ता पक्ष बल्कि विपक्ष के विधायकों की संस्तुतियों पर भी जरूरतमंदों को सहायता दी जा रही है। उन्होंने यह भी कहा कि इस योजना से मुस्लिम समाज के लोग भी समान रूप से लाभान्वित हो रहे हैं। नेता प्रतिपक्ष के वक्तव्य पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उनका आभार व्यक्त किया, लेकिन अपने संबोधन में उन्होंने समाजवादी पार्टी के कार्यकाल के दौरान हुए घोटालों और प्रशासनिक लापरवाहियों का उल्लेख भी किया। मुख्यमंत्री ने गिनाए घोटाले और अनियमितताएं मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछली सरकार के दौरान अनुसूचित जाति और जनजाति के छात्रों की छात्रवृत्ति में बड़े पैमाने पर घोटाले हुए। अनेक छात्रों की स्कॉलरशिप रोकी गई या समय पर नहीं दी गई, जिससे गरीब और वंचित वर्ग के विद्यार्थियों को गंभीर नुकसान उठाना पड़ा। उन्होंने पेंशन योजनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि पहले दिव्यांगजन, निराश्रित महिलाएं और वृद्धजन केवल ₹300 से ₹750 की अधूरी और अनियमित पेंशन पाते थे, जबकि वर्तमान सरकार डीबीटी के माध्यम से पारदर्शी व्यवस्था के तहत सालाना ₹12,000 सीधे उनके खातों में भेज रही है। मुख्यमंत्री योगी ने सड़क निर्माण योजनाओं में ‘टोकन मनी’ की व्यवस्था को भी गंभीर अनियमितता बताया। उन्होंने कहा कि 25 करोड़ रुपये की सड़क परियोजना को स्वीकृति देकर मात्र ₹1 लाख जारी किया जाता था, जिससे कार्य ठप रहता था और योजनाएं केवल कागजों तक सीमित रह जाती थीं। मुख्यमंत्री ने बिजली उत्पादन, स्वास्थ्य और रोजगार के क्षेत्रों में भी पिछली सरकार की नीतियों को विफल बताया और कहा कि 2017 से पहले की लापरवाही के कारण प्रदेश विकास की दौड़ में पीछे रह गया था।

अनुपूरक बजट चर्चा में सीएम योगी बोले- परंपरागत उत्पादों को ब्रांडिंग-पैकेजिंग से मिला नया बाजार, काला नमक बना उदाहरण

ब्रह्मोस मिसाइल के लखनऊ में निर्माण से डिफेंस कॉरिडोर को मिली मजबूतीः योगी आदित्यनाथ वेलफेयर योजनाओं और विकास कार्यों में कोई भेदभाव नहीं, हर विधानसभा तक पहुंच रहा विकास का पैसाः योगी आदित्यनाथ लखनऊ, विधान सभा के शीतकालीन सत्र में अनुपूरक बजट पर चर्चा में हिस्सा लेते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि प्रदेश में सरकारी नौकरियों के साथ-साथ परंपरागत उद्यमों को सशक्त कर एमएसएमई सेक्टर को नई मजबूती दी गई है, जिसका असर आज निवेश, निर्यात और रोजगार के रूप में साफ दिखाई दे रहा है। पहले किसी सरकार ने इन उत्पादों पर ध्यान नहीं दिया, जबकि मौजूदा सरकार ने इनकी ब्रांडिंग, पैकेजिंग और एक्सपोर्ट को बढ़ावा दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि गरीब के प्रति सरकार की संवेदना अडिग है। 25 करोड़ की आबादी के कल्याण और सुरक्षा के लिए सरकार बिना किसी भेदभाव के मजबूती से खड़ी है और आगे भी खड़ी रहेगी। काला नमक चावल की ब्रांडिंग, पैकेजिंग और एक्सपोर्ट को बढ़ावा मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि काला नमक चावल पर किसी ने ध्यान नहीं दिया।  हमारी सरकार ने इसकी ब्रांडिंग, पैकेजिंग और एक्सपोर्ट को बढ़ावा दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि शाही जी जहां भी जाते हैं, वहां के श्रेष्ठ स्थानीय खाद्य उत्पादों की जानकारी लेते हैं। उन्होंने चुटकी लेते हुए वाराणसी का किस्सा भी सुनाया और कहा कि शाही जी स्वयं परंपरागत उत्पादों के प्रति सजग हैं और काला नमक को विशेष ब्रांड के रूप में स्थापित करने में उनकी भूमिका सराहनीय रही है। वहीं, पिछली सरकारों पर तंज कसते हुए कहा कि उस समय इच्छाशक्ति की कमी के कारण ऐसे उत्पाद उपेक्षित रहे। सीएम योगी ने कहा कि प्रदेश के हर जनपद में एक-एक विशिष्ट उत्पाद था, लेकिन तकनीक, डिजाइन, मार्केट डिमांड और पैकेजिंग की जानकारी के अभाव में वे धीरे-धीरे बंद होते जा रहे थे। सरकार ने इन्हें सुविधाएं दीं और आज उत्तर प्रदेश के पास देश का सबसे बड़ा एमएसएमई नेटवर्क है। प्रदेश में करीब 96 लाख एमएसएमई इकाइयां हैं, जिनसे पौने दो करोड़ परिवारों की आजीविका चल रही है। एमएसएमई के जरिए यूपी दो लाख करोड़ रुपये से अधिक का निर्यात कर रहा है। 5 लाख करोड़ की जीबीसी होगी जल्द निवेश के मोर्चे पर भी उत्तर प्रदेश ने लंबी छलांग लगाई है। मुख्यमंत्री ने कहा कि अब तक 45 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव मिले हैं, जिनमें से 15 लाख करोड़ रुपये से अधिक जमीनी स्तर पर उतर चुके हैं। वहीं, 7 लाख से अधिक युवाओं को सीधे रोजगार मिला है। 5 लाख करोड़ रुपये की परियोजनाएं ग्राउंड ब्रेकिंग सेरेमनी के लिए तैयार हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह नए भारत का नया उत्तर प्रदेश है। अब प्रदेश का युवा रोजगार के लिए भटकने को मजबूर नहीं है। ब्रह्मोस मिसाइल का निर्माण अब लखनऊ में हो रहा है, जो डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग कॉरिडोर की बड़ी उपलब्धि है। इसमें काम करने वाले सभी युवा उत्तर प्रदेश के हैं। आईटीआई, पॉलिटेक्निक और इंजीनियरिंग पास युवाओं को यहीं रोजगार मिला है। कभी चेहरा देखकर योजनाओं का लाभ नहीं दिया वेलफेयर योजनाओं पर मुख्यमंत्री ने दो टूक कहा कि सरकार ने कभी चेहरा देखकर योजनाओं का लाभ नहीं दिया। आवास, राशन, उज्ज्वला गैस, आयुष्मान कार्ड और मुख्यमंत्री राहत कोष हर योजना बिना भेदभाव लागू की गई है। सूची में उन गरीबों को भी जोड़ा गया, जिन्हें पहले वंचित रखा गया था। सीएम योगी ने कहा कि 403 विधानसभा क्षेत्रों में कोई भी क्षेत्र विकास से वंचित नहीं रहेगा। पीडब्ल्यूडी समेत हर विभाग की नियमित समीक्षा होती है, जिलों में सांसद और प्रभारी मंत्री की मौजूदगी में बैठकें होती हैं और योजनाओं की प्रगति की रिपोर्ट शासन तक पहुंचती है। मुख्यमंत्री राहत कोष में किए गए नए प्रावधान का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि जिनके पास आयुष्मान कार्ड है, वे पहले उसका उपयोग करें, आवश्यकता होने पर जिला अधिकारी की रिपोर्ट के आधार पर राहत कोष से सहायता दी जाएगी। कुछ अस्पतालों में गलत बिलिंग की शिकायतों पर कार्रवाई भी की गई है।

लखनऊ, अयोध्या, बाराबंकी, सुल्तानपुर, सीतापुर की एक हजार से अधिक महिलाएं मोरिंगा के जरिए बन रहीं आत्मनिर्भर

एफपीओ के जरिए स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन के साथ ग्रामीण महिलाओं की बढ़ रही आमदनी सवा लाख रुपये तक की हो रही आय, बाजार में बढ़ रही उत्पादों की मांग लखनऊ, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के आत्मनिर्भर उत्तर प्रदेश के विजन का असर अब गांव-गांव दिखने लगा है। राजधानी लखनऊ, अयोध्या, बाराबंकी, सुल्तानपुर और सीतापुर समेत तमाम जिलों में मोरिंगा आधारित आजीविका मॉडल ने ग्रामीण महिलाओं को स्थायी रोजगार और सम्मानजनक आय का रास्ता दिया है। इन जिलों की एक हजार से अधिक महिलाएं मोरिंगा की पत्तियों, बीज और छाल की प्राथमिक प्रोसेसिंग से जुड़कर नियमित कमाई कर रही हैं। मोरिंगा को लेकर इस पहल की अगुवाई कर रहीं जेवीकेएस बायो एनर्जी फार्मर प्रोडूसर कंपनी लिमिटेड बीकेटी लखनऊ की डायरेक्टर डॉ. कामिनी सिंह बताती हैं कि सीतापुर जिले के सिधौली ब्लॉक के ग्राम गाजीपुर में सीमा देवी, बउआ देवी, शालिनी देवी, ममता देवी, पूनम देवी, प्रियंका, राजकुमारी सहित प्रदेश के अन्य जिलों की सैकड़ों महिलाएं इस मॉडल से जुड़ी हैं। इन्हें प्रतिमाह 10,000 तक और वार्षिक सवा लाख रुपये तक की आय हो रही है। महिलाओं ने समूह के रूप में काम सीखकर गुणवत्ता, पैकेजिंग और समयबद्ध सप्लाई पर फोकस किया, जिससे बाजार में उनके उत्पादों की मांग भी बढ़ रही है। प्राइमरी प्रोसेसिंग यूनिट्स के जरिए हो रहा काम यह पूरा प्रोजेक्ट एग्रीकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर फंड (AIF) के अंतर्गत संचालित किसान उत्पादक संगठन (एफपीओ) के माध्यम से चल रहा है। एफपीओ ने प्राइमरी प्रोसेसिंग यूनिट्स स्थापित की हैं, जहां मोरिंगा की पत्तियों, बीजों और छाल से वैल्यू-एडेड उत्पाद तैयार किए जा रहे हैं। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार का सृजन हुआ है और महिलाओं की आय में कई गुना वृद्धि दर्ज की गई है। घर के पास काम मिलने से महिलाओं की भागीदारी बढ़ी सीएम योगी के निर्देश पर मोरिंगा के जरिए स्थानीय रोजगार को बढ़ावा दिया जा रहा है। इसकी सबसे खास बात ये है कि घर के पास काम मिलने से महिलाओं की भागीदारी बढ़ी है। ग्रामीण महिलाएं पत्तियों की तुड़ाई, सुखाने, ग्रेडिंग और प्रोसेसिंग का प्रशिक्षण लेकर आय अर्जित कर रही हैं। डॉ कामिनी सिंह के अनुसार मोरिंगा से टैबलेट, पाउडर, मोरिंगा चाय, हैंडमेड साबुन, मोरिंगा सीड आयल और मोरिंगा लड्डू, मोरिंगा बिस्कुट बनते हैं। इसके माध्यम से प्रशिक्षित महिलाएं गांव की अन्य महिलाओं को अपने साथ जोड़कर उन्हें भी रोजगार के अवसर उपलब्ध करा रही हैं।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मेडिकल इंफ्रास्ट्रक्चर को सुदृढ़ करने, नए मेडिकल कॉलेज की स्थापना के लिए आवंटित की बड़ी रकम

अनुपूरक बजट 2025-26 योगी सरकार ने चिकित्सा शिक्षा और प्रशिक्षण को दिये 423.80 करोड़  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मेडिकल इंफ्रास्ट्रक्चर को सुदृढ़ करने, नए मेडिकल कॉलेज की स्थापना के लिए आवंटित की बड़ी रकम  अनुपूरक बजट से सुपर स्पेशियलिटी सेवाओं को मिलेगा विस्तार, स्वास्थ्य सेवाओं की बढ़ेगी गुणवत्ता लखनऊ  योगी सरकार ने वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए पेश अनुपूरक बजट में चिकित्सा शिक्षा और प्रशिक्षण को बड़ी प्राथमिकता दी है। प्रदेश में मेडिकल इंफ्रास्ट्रक्चर को सुदृढ़ करने, नए मेडिकल कॉलेजों की स्थापना, सुपर स्पेशियलिटी सेवाओं के विस्तार और स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता बढ़ाने के उद्देश्य से कुल 423.80 करोड़ रुपये की धनराशि का आवंटन किया गया है। यह बजट आवंटन प्रदेश के स्वास्थ्य तंत्र को मजबूती देने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है। एसजीपीजीआई लखनऊ को दिये 120 करोड़ योगी सरकार ने अनुपूरक बजट में प्रदेश के प्रमुख चिकित्सा संस्थानों को वेतन अनुदान, गैर-वेतन अनुदान, व्यावसायिक एवं विशेष सेवाओं तथा विभिन्न मदों के लिए अतिरिक्त धनराशि दी गई है। सीतापुर स्थित नेहरू इंस्टिट्यूट ऑफ ऑप्थल्मोलॉजी एंड रिसर्च को वेतन अनुदान के लिए 1.74 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बजट दिया है। वहीं कैंसर संस्थान लखनऊ को विभिन्न मदों के लिए 10 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बजट दिया है। लखनऊ के प्रमुख चिकित्सा संस्थानों पर भी सरकार का विशेष फोकस रहा है। संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान (SGPGI) लखनऊ को विभिन्न मदों के लिए अलग-अलग प्रस्तावों के तहत 120 करोड़ रुपये की अतिरिक्त आवश्यकता को बजट में शामिल किया गया है। इसके अलावा, सेंटर ऑफ बायोमेडिकल रिसर्च, लखनऊ को वेतन अनुदान के लिए 1 करोड़ रुपये दिए गए हैं। डॉ. राम मनोहर लोहिया इंस्टिट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज, गोमतीनगर को भी वेतन अनुदान के लिए 20 करोड़ रुपये की अतिरिक्त राशि स्वीकृत की गई है। वहीं, किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (KGMU)को वेतन अनुदान के लिए 25 करोड़ रुपये दिए गए हैं। मेरठ, झांसी, गोरखपुर और प्रयागराज मेडिकल कॉलेज को भी आवंटित की धनराशि  योगी सरकार ने सरकार ने गंभीर और दीर्घकालिक रोगों के उपचार पर भी ध्यान दिया है। हीमोफीलिया रोग की निःशुल्क चिकित्सा सुविधा के तहत औषधि और रसायनों की खरीद के लिए 10 करोड़ रुपये की अतिरिक्त व्यवस्था की गई है, जिससे हजारों मरीजों को राहत मिलने की उम्मीद है। प्रदेश के विभिन्न जिलों में स्थित राजकीय मेडिकल कॉलेजों को भी बड़ी धनराशि आवंटित की गई है। राजकीय मेडिकल कॉलेज, आजमगढ़ को व्यावसायिक एवं विशेष सेवाओं के लिए 50 लाख रुपये, बांदा मेडिकल कॉलेज को 2.18 करोड़ रुपये, सैफई (इटावा) स्थित रूरल इंस्टिट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज को गैर-वेतन अनुदान के लिए 73.09 लाख रुपये दिए गए हैं। मेडिकल कॉलेज आगरा को 9.5 करोड़, गणेश शंकर विद्यार्थी स्मारक मेडिकल कॉलेज, कानपुर को 8.75 करोड़ और मेडिकल कॉलेज, प्रयागराज को 6 करोड़ रुपये की अतिरिक्त आवश्यकता के तहत बजट मिला है। इसी क्रम में मेडिकल कॉलेज, मेरठ को 10.65 करोड़, झांसी को 3.85 करोड़, गोरखपुर को 5.07 करोड़ रुपये दिए गए हैं। कानपुर स्थित गणेश शंकर विद्यार्थी स्मारक मेडिकल कॉलेज में स्थापित कार्डियोलॉजिकल इंस्टिट्यूट को व्यावसायिक एवं विशेष सेवाओं के लिए 5 लाख रुपये का अतिरिक्त प्रावधान किया गया है। डिग्री पाठ्यक्रमों के लिए स्थापित नर्सिंग कॉलेजों को भी 8.97 लाख रुपये दिए गए हैं। अन्य मेडिकल कॉलेजों में एटा को वेतन अनुदान के लिए 2 करोड़, हरदोई को गैर-वेतन अनुदान के लिए 7.5 करोड़, प्रतापगढ़ को 15 करोड़, फतेहपुर को 5.5 करोड़, सिद्धार्थनगर को 15.5 करोड़, देवरिया को 6 करोड़, गाजीपुर को 15.5 करोड़ और मीरजापुर को गैर-वेतन अनुदान के लिए 5.5 करोड़ रुपये दिए गए हैं। जेके इंस्टिट्यूट ऑफ रेडियोलॉजी एंड कैंसर रिसर्च में विशेष सेवाओं पर फोकस योगी सरकार ने नोएडा में सुपर स्पेशियलिटी बाल चिकित्सालय एवं पोस्ट ग्रेजुएट शैक्षणिक संस्थान की स्थापना के लिए वेतन अनुदान के लिए 2 करोड़ रुपये तथा ग्रेटर नोएडा में चिकित्सा विश्वविद्यालय की स्थापना के लिए 7 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। बदायूं, फिरोजाबाद, बस्ती, अयोध्या, बहराइच और शाहजहांपुर के मेडिकल कॉलेजों को भी विभिन्न मदों के लिए करोड़ों रुपये की अतिरिक्त धनराशि दी गई है। फेज-थ्री के तहत स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालयों के संचालन के लिए 45 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इसके साथ ही जेके इंस्टिट्यूट ऑफ रेडियोलॉजी एंड कैंसर रिसर्च, कानपुर को भी विशेष सेवाओं के लिए अतिरिक्त धनराशि दी गई है। प्रदेश के कई जिलों जैसे एटा, हरदोई, प्रतापगढ़, फतेहपुर, सिद्धार्थनगर, देवरिया, गाजीपुर, मीरजापुर सहित अन्य जिलों में नए स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालयों की स्थापना के लिए प्रतीक रूप में राज्यांश की व्यवस्था की गई है।

लेखपाल भर्ती पर बड़ा फैसला: सीएम योगी ने दिखाई सख्ती, आरक्षण संबंधी खामियों पर लगेगी रोक

लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की नाराजगी और कड़े निर्देशों के बाद लेखपाल भर्ती प्रक्रिया में सामने आई आरक्षण संबंधी विसंगति अब दूर होने जा रही है। उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (यूपीएसएसएससी) ने 12 दिसंबर को लेखपाल के 7994 पदों पर भर्ती का विज्ञापन जारी किया था, लेकिन इसमें 27 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण का समुचित पालन न होने को लेकर सवाल खड़े हो गए थे। यूपीएसएसएससी को पत्र भेज दी गई जानकारी मुख्यमंत्री के हस्तक्षेप के बाद राजस्व परिषद ने यूपीएसएसएससी को पत्र भेजकर श्रेणीवार रिक्तियों में संशोधन की जानकारी दी है। परिषद ने स्पष्ट किया है कि संशोधित पदों का विवरण एक सप्ताह के भीतर आयोग को भेज दिया जाएगा। आरक्षण में विसंगति का मुद्दा उठाया गया था यूपीएसएसएससी द्वारा जारी विज्ञापन के अनुसार लेखपाल के स्थायी पदों में अनारक्षित (सामान्य) वर्ग के 4185, अनुसूचित जाति के 1446, अनुसूचित जनजाति के 150, अन्य पिछड़ा वर्ग के 1441 और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) के लिए 792 पद निर्धारित किए गए थे। इन्हीं आंकड़ों को लेकर आरक्षण में विसंगति का मुद्दा उठाया गया था।   मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर आपत्ति जताई थी इस संबंध में सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पंचायती राज मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने शुक्रवार को मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर आपत्ति जताई थी। पत्र पर संज्ञान लेते हुए मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को आरक्षण व्यवस्था का अक्षरशः पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए थे। चयन आयोग को प्रस्ताव भेजा गया राजस्व परिषद की आयुक्त एवं सचिव कंचन वर्मा ने यूपीएसएसएससी को भेजे पत्र में बताया कि मंडलायुक्तों द्वारा मंडल स्तर पर स्वीकृत पदों के सापेक्ष कार्यरत लेखपालों के आधार पर रोस्टरवार (लंबवत एवं क्षैतिज आरक्षण सहित) श्रेणीवार रिक्तियों की गणना कर अधियाचन उपलब्ध कराया गया था। इसी आधार पर चयन आयोग को प्रस्ताव भेजा गया। श्रेणीवार रिक्तियों में संशोधन की संभावना हालांकि, अब जिला स्तर पर कार्यरत और रिक्त लेखपाल पदों की श्रेणीवार गणना से जुड़े कुछ नए तथ्य सामने आए हैं। इसके चलते आयोग द्वारा जारी विज्ञापन में दर्शाई गई श्रेणीवार रिक्तियों में संशोधन की संभावना है। राजस्व परिषद ने स्पष्ट किया है कि संशोधित जानकारी एक सप्ताह के भीतर आयोग को भेज दी जाएगी। 

राष्ट्र प्रेरणा स्थल लोकार्पण समारोह के कारण लखनऊ का सामान्य यातायात प्रभावित न हो, इसका रखें ध्यान: मुख्यमंत्री

राष्ट्र प्रेरणा स्थल लोकार्पण कार्यक्रम की मुख्यमंत्री ने की समीक्षा, कहा सुरक्षा के हों पुख्ता इंतजाम, ठंड के बीच न हो किसी को समस्या दो लाख लोगों की उपस्थिति में होगा राष्ट्र प्रेरणा स्थल का लोकार्पण समारोह में आ रहे आम जन हेतु परिवहन, पार्किंग, भीड़ प्रबंधन व चिकित्सा व्यवस्था को अंतिम रूप देने के निर्देश लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को एक महत्वपूर्ण बैठक में आगामी 25 दिसंबर को आदरणीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के आगमन तथा नवनिर्मित ‘राष्ट्र प्रेरणा स्थल’ के लोकार्पण कार्यक्रम की तैयारियों की समीक्षा की। उन्होंने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न श्रद्धेय अटल बिहारी वाजपेयी जी की जयंती के अवसर पर प्रधानमंत्री जी द्वारा लखनऊ को प्रदान किया जा रहा यह उपहार राष्ट्रीय चेतना, सांस्कृतिक विरासत एवं गौरव का प्रतीक बनेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि राष्ट्र प्रेरणा स्थल पर स्थापित डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी जी, पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी एवं अटल जी की प्रतिमाएं आने वाली पीढ़ियों को राष्ट्रीय एकता, एकात्म मानववाद तथा आत्मनिर्भर भारत की संकल्पना को समझने और आत्मसात करने की प्रेरणा देंगी। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि प्रधानमंत्री जी की उपस्थिति को ध्यान में रखते हुए सुरक्षा, यातायात, प्रोटोकॉल, आतिथ्य एवं भीड़ प्रबंधन से संबंधित सभी व्यवस्था उच्चतम मानकों के अनुरूप सुनिश्चित की जाए और किसी भी स्तर पर लापरवाही की गुंजाइश न रहे।  मुख्यमंत्री ने राष्ट्र प्रेरणा स्थल की फाइनल टचिंग, लैंडस्केपिंग, उद्यान, संग्रहालय परिसर, एम्फीथिएटर एवं मार्गों के सुंदरीकरण कार्यों को निर्धारित समयसीमा में पूर्ण करने के निर्देश दिए। उन्होंने प्रदेश भर से आने वाले दो लाख से अधिक जनता के लिए तैयार की गई व्यवस्था; परिवहन, पार्किंग लेआउट, बस रूट प्लान, नियंत्रण कक्ष एवं चिकित्सा इकाइयों की समीक्षा की और कहा कि प्रत्येक बस, पार्किंग ब्लॉक और प्रवेश द्वार हेतु जिम्मेदार नोडल अधिकारी नामित किए जाएं। मुख्यमंत्री ने पुलिस एवं प्रशासन को वीवीआईपी रूट, हेलीपैड, कार्यक्रम स्थल एवं जनसभा क्षेत्र में बहुस्तरीय सुरक्षा व्यवस्था लागू करने तथा यातायात डायवर्जन, पार्किंग व पैदल मार्ग हेतु स्पष्ट साइनेज लगाने के निर्देश दिए। उन्होंने मीडिया प्रबंधन, स्वागत व्यवस्था, सांस्कृतिक प्रस्तुति और प्रोटोकॉल के सभी घटकों में समन्वय और समयबद्धता सुनिश्चित करने को कहा। राष्ट्र प्रेरणा स्थल : प्रमुख विशेषताएं ● लगभग 230 करोड़ रुपये की लागत से 65 एकड़ क्षेत्र में विकसित भव्य परियोजना। ● डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी, पंडित दीनदयाल उपाध्याय एवं भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी जी की 65 फीट ऊंची भव्य कांस्य प्रतिमाएं। ● राष्ट्रपुरुषों के जीवन, विचार एवं योगदान पर आधारित आधुनिक संग्रहालय। ● दो लाख की क्षमता वाला रैली स्थल एवं मंच। ● एम्फीथिएटर, मेडिटेशन सेंटर, विपश्यना–योग केंद्र, कैफेटेरिया एवं नागरिक उपयोगिता सुविधाएं। ● आकर्षक लैंडस्केपिंग, स्पष्ट ज़ोनिंग, पार्किंग एवं सुरक्षा प्रबंधन के साथ सुदृढ़ ले-आउट।

01 से 31 जनवरी, 2026 तक चलेगा प्रदेशव्यापी सड़क सुरक्षा अभियान

वर्ष 2025 में 46 हजार से अधिक दुर्घटनाएं और 24 हजार से ज्यादा मौतें गंभीर चेतावनी, एक भी मृत्यु पूरे परिवार के लिए आजीवन पीड़ा है: मुख्यमंत्री जागरूकता अभियान का केंद्र व्यवहार परिवर्तन, तहसील से जिला मुख्यालय तक प्रचार सामग्री, वास्तविक दुर्घटनाओं के उदाहरण और पब्लिक एड्रेस सिस्टम के उपयोग के निर्देश एनएसएस, एनसीसी, आपदा मित्र, स्काउट गाइड और सिविल डिफेंस की भागीदारी से युवाओं को जोड़कर अभियान को जनभागीदारी का स्वरूप देने पर बल ब्लैक स्पॉट सुधार, रोड सेफ्टी ऑडिट, ओवर स्पीडिंग और लेन ड्राइविंग पर नियंत्रण, एक्सप्रेसवे पेट्रोलिंग, क्रेन और एम्बुलेंस बढ़ाने के निर्देश गोल्डन ऑवर में उपचार सर्वोपरि, निजी ट्रॉमा सेंटरों को जोड़ने, 108 और एएलएस एम्बुलेंस का रिस्पॉन्स टाइम घटाने और स्कूल व भारी वाहनों की फिटनेस जांच के निर्देश लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 01 जनवरी से 31 जनवरी 2026 तक प्रदेशव्यापी “सड़क सुरक्षा माह” आयोजित करने के निर्देश देते हुए कहा है कि नए वर्ष की शुरुआत केवल औपचारिक आयोजनों से नहीं, बल्कि जनजीवन से सीधे जुड़े सड़क सुरक्षा जैसे अत्यंत संवेदनशील विषय पर ठोस संकल्प, व्यापक जनभागीदारी और व्यवहार परिवर्तन के लक्ष्य के साथ होनी चाहिए। शनिवार को शासन स्तर के वरिष्ठ अधिकारियों, मंडलायुक्तों तथा जनपदों के जिलाधिकारियों के साथ आयोजित उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि सड़क सुरक्षा अभियान किसी भी स्थिति में औपचारिकता बनकर न रह जाए, बल्कि यह प्रत्येक नागरिक के जीवन से जुड़ा जन आंदोलन बने। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि सड़क सुरक्षा माह को 4-ई मॉडल के आधार पर संचालित किया जाए, जिसमें शिक्षा, प्रवर्तन, इंजीनियरिंग और इमरजेंसी केयर चारों स्तंभों पर समान रूप से और समन्वित ढंग से कार्य किया जाए। उन्होंने कहा कि लोगों को केवल नियमों की जानकारी देना पर्याप्त नहीं है, बल्कि यह समझाना आवश्यक है कि यातायात नियमों का पालन उनके स्वयं के जीवन, उनके परिवार और समाज की सुरक्षा से सीधे जुड़ा है। शिक्षा के माध्यम से बच्चों, युवाओं और आम नागरिकों में सही सड़क व्यवहार विकसित किया जाए, प्रवर्तन के तहत नियमों का सख्ती से पालन सुनिश्चित हो, इंजीनियरिंग के माध्यम से सड़कों के ब्लैक स्पॉट और क्रिटिकल पॉइंट सुधारे जाएं तथा इमरजेंसी केयर के अंतर्गत त्वरित एम्बुलेंस सेवा और बेहतर ट्रॉमा सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं। मुख्यमंत्री ने कहा कि इन चारों स्तंभों पर संतुलित और एकसाथ काम किए बिना सड़क दुर्घटनाओं में वास्तविक कमी संभव नहीं है। बैठक में विभागीय अधिकारियों द्वारा प्रस्तुत आंकड़ों का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री को अवगत कराया गया कि वर्ष 2025 में नवंबर तक प्रदेश में कुल 46,223 सड़क दुर्घटनाएं दर्ज की गई हैं, जिनमें 24,776 लोगों की मृत्यु हुई है। मुख्यमंत्री ने इन आंकड़ों को अत्यंत गंभीर बताते हुए कहा कि सड़क दुर्घटनाएं केवल प्रशासनिक या तकनीकी समस्या नहीं हैं, बल्कि यह एक बड़ी सामाजिक चुनौती है। उन्होंने कहा कि एक भी दुर्घटना में किसी व्यक्ति की मृत्यु पूरे परिवार को जीवन भर का दर्द दे जाती है और इस पीड़ा को वही परिवार समझ सकता है। इसी दृष्टिकोण से सड़क दुर्घटनाओं को रोकने के लिए संवेदनशीलता के साथ-साथ कठोर निर्णय लेना भी आवश्यक है। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि सड़क सुरक्षा माह के अंतर्गत जनवरी के पहले सप्ताह में विशेष रूप से जागरूकता पर फोकस किया जाए और सभी विभाग अपनी-अपनी तैयारियां समय से पूरी करें। प्रदेश की प्रत्येक तहसील, ब्लॉक, जिला और सभी प्रमुख मुख्यालयों पर जागरूकता संबंधी प्रचार सामग्री अनिवार्य रूप से लगाई जाए। उन्होंने कहा कि किसी एक वास्तविक सड़क दुर्घटना के उदाहरण को सामने रखकर आमजन को यह समझाया जाए कि एक छोटी सी लापरवाही किस प्रकार पूरे जीवन की दिशा बदल देती है। पब्लिक एड्रेस सिस्टम का व्यापक और प्रभावी उपयोग किया जाए, ताकि यह संदेश हर व्यक्ति तक पहुंचे कि सड़क सुरक्षा किसी और की नहीं, बल्कि उनके अपने जीवन और परिवार से जुड़ा विषय है। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि इस अभियान में राष्ट्रीय सेवा योजना, राष्ट्रीय कैडेट कोर, आपदा मित्र, स्काउट गाइड और सिविल डिफेंस जैसे संगठनों की सक्रिय और प्रभावी भागीदारी सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि युवाओं और स्वयंसेवी संगठनों की सहभागिता से ही यह अभियान वास्तविक अर्थों में जन आंदोलन बन सकेगा। जब तक समाज स्वयं जिम्मेदारी नहीं लेगा, तब तक केवल सरकारी प्रयासों से अपेक्षित परिणाम नहीं मिल सकते। बैठक में मुख्यमंत्री ने कहा कि केवल चालान करना सड़क दुर्घटनाओं का स्थायी समाधान नहीं है। उन्होंने निर्देश दिए कि जो लोग आदतन यातायात नियमों का उल्लंघन करते हैं, उनके विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाए। ऐसे मामलों में ड्राइविंग लाइसेंस जब्त करने और वाहन सीज करने की स्पष्ट नियमावली तैयार कर उसका सख्ती से पालन कराया जाए। उन्होंने कहा कि सड़क सुरक्षा के मामलों में कठोरता अनिवार्य है, क्योंकि यह सीधे तौर पर लोगों की जान से जुड़ा विषय है। मुख्यमंत्री ने सड़क दुर्घटनाओं के प्रमुख कारकों पर विस्तार से चर्चा करते हुए ब्लैक स्पॉट और क्रिटिकल पॉइंट की पहचान कर उनके त्वरित और स्थायी सुधार के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सड़क इंजीनियरिंग की कमियां, खराब साइनज, अव्यवस्थित कट, अंधे मोड़ और अनुचित स्पीड ब्रेकर दुर्घटनाओं को बढ़ाते हैं। लोक निर्माण विभाग तथा अन्य रोड ओनिंग एजेंसियां समयबद्ध ढंग से सुधार कार्य सुनिश्चित करें। उन्होंने स्पष्ट किया कि केवल टेबल टॉप स्पीड ब्रेकर ही बनाए जाएं और सभी सड़कों का नियमित रोड सेफ्टी ऑडिट कराया जाए। मुख्यमंत्री ने एम्बुलेंस सेवाओं और स्कूल वाहनों की फिटनेस की विशेष जांच कराने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि किसी भी स्थिति में अनफिट वाहन सड़क पर न चलें। इसके साथ ही 300 किलोमीटर से अधिक दूरी की यात्रा करने वाले बड़े यात्री वाहनों में एकल चालक की व्यवस्था समाप्त कर अनिवार्य रूप से दो चालकों की तैनाती सुनिश्चित करने के निर्देश दिए, ताकि चालक की थकान से होने वाली दुर्घटनाओं को रोका जा सके। उन्होंने ओवर स्पीडिंग रोकने के साथ-साथ लेन ड्राइविंग के प्रति भी आमजन को जागरूक करने पर बल दिया तथा एक्सप्रेसवे पर पेट्रोलिंग, एम्बुलेंस और क्रेन की संख्या बढ़ाने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं को और सुदृढ़ करने पर विशेष बल देते हुए कहा कि सड़क दुर्घटना में जितनी जल्दी घायल को चिकित्सकीय सहायता मिलती है, क्षति की संभावना उतनी ही कम होती है। उन्होंने गोल्डन ऑवर की महत्ता को रेखांकित करते हुए निर्देश … Read more