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MP में कांग्रेस का संगठन सृजन अभियान फेल? गुटों में बंटी पार्टी में नहीं दिखी एकजुटता

भोपाल  मध्य प्रदेश में कांग्रेस की गुटबाजी एक बार फिर सुर्खियों में है. 2020 में सरकार गिरने का जख्म अभी तक भरा नहीं है और 2025 में भी पार्टी के अंदर आपसी मतभेद फिर से सामने आ गए हैं. हाल ही में अनूपपुर में आयोजित कांग्रेस कार्यक्रम में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार के समर्थकों ने उन्हें आगामी मुख्यमंत्री के रूप में प्रोजेक्ट किया, लेकिन सिंघार ने मुस्कुराते हुए कहा, '2028 अभी दूर है', जिससे पार्टी की अंदरूनी खींचतान और उजागर हो गई. जबकि दूसरी ओर ओबीसी नेता कमलेश्वर पटेल ने संगठन सृजन अभियान पर सवाल उठाते हुए प्रदेश अध्यक्ष और संगठन प्रभारी पर समन्वय न बना पाने के आरोप लगाए हैं. ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि क्या कांग्रेस का ये अभियान गुटबाजी को खत्म करने में नाकाम रहा है? दरअसल, अनूपपुर में आयोजित कांग्रेस कार्यक्रम में उमंग सिंघार के समर्थकों ने उन्हें मुख्यमंत्री पद का चेहरा बनाने की कोशिश की. हालांकि, सिंघार ने साफ किया कि 2028 का चुनाव अभी दूर है, लेकिन ये बयान पार्टी के अंदर सत्ता की होड़ को दिखाता है. प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी और उमंग सिंघार के बीच पहले भी मतभेद की खबरें रही हैं, और ये नाराजगी अब खुलकर सामने आ रही है. ओबीसी वर्ग के प्रभावशाली नेता कमलेश्वर पटेल ने नई जिला अध्यक्षों की नियुक्ति को लेकर असंतोष जताया. उन्होंने आरोप लगाया कि संगठन में निर्णय कुछ चुनिंदा नेताओं के इशारे पर हो रहे हैं. पटेल ने कहा, 'प्रदेश अध्यक्ष और संगठन प्रभारी का काम पार्टी में समन्वय बनाना है, न कि खुद पार्टी बनना.' नई पीढ़ी में भी मतभेद गुटबाजी नई पीढ़ी तक सीमित नहीं है. पिछले महीने पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह और कमलनाथ के बीच सोशल मीडिया पर तीखी नोकझोंक देखने को मिली थी. दिग्विजय ने कमलनाथ पर 2020 में सरकार गिरने का आरोप लगाया, जिसमें उन्होंने ज्योतिरादित्य सिंधिया की मांग पूरी न करने की बात कही. वहीं, कमलनाथ ने दिग्विजय को ही जिम्मेदार ठहराया. बाद में दोनों ने रिश्तों की गरिमा बनाए रखने के लिए मुलाकात की और तस्वीरें सोशल मीडिया पर शेयर कीं, लेकिन यह कदम गुटबाजी की गहराई को छिपा नहीं पाया. BJP ने साधा निशाना कांग्रेस की अंदरूनी खींचतान पर भाजपा ने तीखा हमला बोला है. सरकार में मंत्री विश्वास कैलाश सारंग ने कहा, “कांग्रेस संगठन कमजोर हो चुका है. नेता आपस में झगड़ रहे हैं और मुख्यमंत्री बनने का दावा कर रहे हैं. सरकार बनना तो दूर, जनता ने उन्हें दो अंकों में भी जगह नहीं दी. कांग्रेस को मध्य प्रदेश की जनता पूरी तरह नकार चुकी है और उसकी हालत दिन-ब-दिन बद से बदतर होती जा रही है.” क्या है संगठन सृजन अभियान कांग्रेस ने मध्य प्रदेश में पार्टी को फिर से सक्रिय करने और चुनाव तौर पर मजबूत बनाने, नए नेता को आगे लाने और बूथ स्तर पर संगठन को मजबूत करने लिए संगठन सृजन अभियान शुरू किया है. खासकर 2023 के विधानसभा चुनावों में हार के बाद मध्य प्रदेश में इस अभियान की शुरुआत की गई.

तेजस्वी ने क्यों चुनी राहुल से अलग राह? कांग्रेस बहिष्कार के बाद महागठबंधन पर मंडराया संकट

पटना  क्या बिहार महागठबंधन में सब कुछ ठीक है? यह सवाल तब से खड़ा होना शुरू हुआ है जब से तेजस्वी यादव ने अपनी अलग ‘बिहार अधिकार यात्रा’ निकालने की घोषणा की है. अब तक महागठबंधन के प्रमुख दल राजद और कांग्रेस के बीच की खटपट साफ तौर पर सियासी सतह पर दिखाई देने लगी है. हाल में ही इसकी एक बानगी बिहार के औरंगाबाद में तब दिखी जब कांग्रेस के अध्यक्ष राजेश राम के आमंत्रण के बावजूद राजद का कोई भी नेता वहां नहीं पहुंचा. जानकारी के अनुसार, औरंगाबाद के कुटुंबा विधानसभा क्षेत्र में बीते 13 दिसंबर को एक सम्मेलन बुलाया गया था. कांग्रेस अध्यक्ष के बुलाए गए इस सम्मेलन में राजद नेताओं के नहीं आने से कांग्रेस के अंदर इसको लेकर भारी नाराजगी देखी जा रही है. खास बात यह है कि अब इसी विवाह भवन में आरजेडी सम्मेलन अपना सम्मेलन कर रहा है. सवाल यह है कि क्या कांग्रेस और राजद के भीतर तल्खी इतनी बढ़ गई हैं कि दोनों दलों के बीच की दरारें साफ-साफ नजर आने लगी हैं! कांग्रेस का आमंत्रण और राजद का बहिष्कार दरअसल, कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम के आयोजित सम्मेलन में राजद के नेताओं के नहीं पहुंचने की खबर ने गठबंधन के उठापटक को और हवा दी है. बता दें कि राजद के नेता तेजस्वी यादव 16 सितंबर से अपनी अलग राजनीतिक यात्रा निकाल रहे हैं. बताया जा रहा है कि यह स्थिति कांग्रेस के तेवरों को भांपते हुए गठबंधन में राजद के अलगाव की स्थिति की ओर इशारा कर रही है. तेजस्वी यादव के अलग कार्यक्रम और इससे पहले औरंगाबाद में कांग्रेस के कार्यक्रम का राजद नेताओं के बायकाट के साथ ही राजद की ‘एकला चलो’ वाली सक्रियता यह संकेत दे रही है कि महागठबंधन में कुछ तो गड़बड़ है. बताया जा रहा है कि तेजस्वी यादव को महागठबंधन का सीएम फेस घोषित नहीं किये जाने से आरजेडी असंतुष्ट है. जानकारों की नजर में कांग्रेस-आरजेडी की इस तल्खी से महागठबंधन में समन्वय बिगड़ रहा है और सहयोगी दलों के बीच दूरियां बढ़ रही हैं. तेजस्वी की बिहार यात्रा का रोडमैप तेजस्वी यादव की मंगलवार से शुरू हो रही 'बिहार अधिकार यात्रा' का आगाज़ जहानाबाद से होगा. इसके बाद तेजस्वी नालंदा, पटना, बेगूसराय, खगड़िया, मधेपुरा, सहरसा, सुपौल, समस्तीपुर के रास्ते वैशाली तक का सफर तय करेंगे. इस तरह तेजस्वी यादव अपनी यात्रा के दौरान नीतीश कुमार के गढ़ नालंदा जिले से होकर गुजरेंगे तो गिरिराज सिंह के गढ़ बेगूसराय और पप्पू यादव के मधेपुरा और सुपौल की यात्रा भी करेंगे. बिहार के जिन जिलों से होकर तेजस्वी यादव गुजरेंगे, वो इलाका बीजेपी और जेडीयू का मजबूत गढ़ माना जाता है. इस तरह से एक बात साफ है कि तेजस्वी 'बिहार अधिकार यात्रा' के जरिए अपने कमज़ोर माने जाने वाले गढ़ में अपनी उपस्थिति दर्ज कराकर आरजेडी के पक्ष में सियासी माहौल बनाने की कवायद करेंगे. तेजस्वी को क्यों निकालनी पड़ रही यात्रा? राहुल गांधी की यात्रा समाप्त हुए अभी 15 दिन ही गुज़रे हैं कि तेजस्वी यादव अकेले बिहार यात्रा पर निकलने जा रहे हैं. राहुल गांधी के साथ तेजस्वी ने वोटर अधिकार यात्रा के जरिए 1300 किलोमीटर का सफर तय किया है और अब तेजस्वी अकेले दस जिलों की यात्रा पर निकल रहे हैं. राजनीतिक विश्लेषकों की मानें तो राहुल गांधी ने अपनी वोटर अधिकार यात्रा से बिहार कांग्रेस में एक नई जान फूँक दी है. राहुल गांधी के साथ यात्रा के दौरान तेजस्वी यादव को भी प्रमुखता मिली, लेकिन कांग्रेस के बड़े नेताओं ने भी जनता का ध्यान अपनी तरफ खींचा. राहुल की यात्रा का सियासी लाभ आरजेडी को कम, कांग्रेस को ज़्यादा मिला है. यात्रा से कांग्रेस के हौसले बुलंद हैं और सीट शेयरिंग से लेकर मुख्यमंत्री चेहरे के सवाल पर अपनी मर्ज़ी की बात रख रही है. कांग्रेस यह बताने में जुट गई है कि वो आरजेडी के बैसाखी के सहारे नहीं, बल्कि उसका अपना जनाधार और राजनीतिक कद है. राहुल गांधी ने अपने भाषणों से जनता को यह संदेश दिया कि कांग्रेस बिहार के मुद्दों को लेकर गंभीर है. तेजस्वी यादव अकेले यात्रा निकालकर आरजेडी नेताओं और कार्यकर्ताओं का हौसला बढ़ाने की रणनीति अपनाए हैं. यही वजह है कि आरजेडी की तरफ से तेजस्वी के यात्रा का संदेश सिर्फ पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं को भेजा गया है. ऐसे में माना जा रहा है कि तेजस्वी यादव अपनी खुद की यात्रा से यह साबित करना चाहते हैं कि वह महागठबंधन के निर्विवाद नेता हैं और मुख्यमंत्री पद के चेहरे के रूप में जनता की पहली पसंद हैं. तेजस्वी जनता से सीधे जुड़ने का प्लान तेजस्वी यादव अपनी यात्रा के जरिए एक तरफ जहां अपनी पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं के साथ-साथ जनता से जुड़ने की कोशिश कर रहे हैं. आरजेडी नेता संजय यादव कहते हैं कि राहुल गांधी के साथ जो यात्रा थी, वो एसआईआर के मुद्दे पर रही है. वह वोटर अधिकार यात्रा थी और अब तेजस्वी बिहार के अधिकार के लिए यात्रा पर निकल रहे हैं. संजय कहते हैं कि तेजस्वी यादव अपनी यात्रा के दौरान किसान, नौजवान, महिलाएं, बुजुर्ग और रोज़गार के मुद्दे को उठाएंगे और लोगों के साथ संवाद करेंगे. चुनाव के दौरान हर पार्टी अपने लिहाज़ से रणनीति बनाती है, उसी तरह आरजेडी ने अपनी रणनीति बनाई है. तेजस्वी की लोकप्रियता बिहार में सबसे ज़्यादा है और वे प्रदेश के सभी क्षेत्रों में पहुंच रहे हैं, जनता से सीधे संवाद कर रहे हैं. वहीं, राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि तेजस्वी का यह कदम सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है. तेजस्वी अपने पिता आरजेडी प्रमुख लालू प्रसाद यादव की तरह जनता से सीधे तौर पर संवाद और उनसे जुड़ना चाहते हैं. लालू यादव भी हमेशा यात्राओं और रैलियों के जरिए लोगों से सीधे संवाद करते थे. तेजस्वी की यह यात्रा लालू की उस विरासत को आगे बढ़ाने की दिशा में एक कदम माना जा रहा है. आरजेडी ने तेजस्वी की यात्रा को लेकर पूरी ताकत झोंक दी है. पार्टी ने सभी जिलाध्यक्षों और विधायकों को साफ निर्देश दिया है कि वे तैयारी में कोई कसर न छोड़ें. यात्रा जिन-जिन विधानसभा क्षेत्रों से गुज़रेगी, वहाँ पर भीड़ जुटाएँ ताकि तेजस्वी यादव जनता से सीधे संवाद कर सकें. खास बात यह होगी कि … Read more

MP में कांग्रेस का जनाधार परीक्षण, जानचे जाएंगे विधायकों और नेताओं के रिपोर्ट कार्ड

 भोपाल  विधानसभा और लोकसभा चुनाव में भाजपा के हाथों मिली करारी हार से सबक लेते हुए कांग्रेस पहली बार मध्य प्रदेश में अपने निर्वाचित जनप्रतिनिधियों की लोकप्रियता का आकलन कराएगी। इसकी शुरुआत नगरीय निकायों से होगी और दूसरे चरण में विधायकों की लोकप्रियता का आकलन करवाया जाएगा। पहले चरण में नगरीय निकायों को इसलिए लिया गया है क्योंकि इसके चुनाव सबसे पहले वर्ष 2027 में प्रस्तावित हैं। इनके परिणाम के बाद प्रदेश में चुनावी वातावरण बनने लगेगा। पार्टी ने तय किया है कि कार्यकर्ताओं के माध्यम से जनप्रतिनिधियों का मतदाताओं से संपर्क, संवाद और कामकाज के आधार पर पता लगाया जाएगा कि क्षेत्र में उनकी छवि कैसी है। यह भी आकलन किया जाएगा कि यदि वे लोकप्रिय या अलोकप्रिय हैं तो इसकी वजह क्या है। इसके आधार पर कांग्रेस संगठन निकायवार जनप्रतिनिधियों को बुलाएगा और उन्हें आगामी तैयारी के लिए सचेत करने के साथ मार्गदर्शन भी दिया जाएगा। कांग्रेस के पांच महापौर जीतकर आए थे प्रदेश में नगरीय निकायों के चुनाव वर्ष 2022 में हुए थे। पहली बार कांग्रेस के पांच महापौर (छिंदवाड़ा, ग्वालियर, मुरैना, रीवा और जबलपुर) जीतकर आए थे। हालांकि, नगर पालिका और नगर परिषद में अप्रत्यक्ष प्रणाली से होने के कारण अधिकतर स्थानों पर भाजपा के अध्यक्ष चुने गए। पार्टी की उम्मीद थी कि इन परिणामों का लाभ विधानसभा चुनाव में मिलेगा लेकिन ऐसा नहीं हुआ। वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस केवल 66 सीटों पर सिमटकर रह गई। लोकसभा चुनाव में तो पार्टी का खाता भी नहीं खुला। अब फिर 2027 से नगरीय निकायों के साथ चुनावों का क्रम प्रारंभ होना है। इसे देखते हुए पार्टी ने तय किया है कि वह अपने निर्वाचित जनप्रतिनिधियों की स्थिति का आकलन कराएगी। यही आगामी चुनाव में टिकट का आधार भी बनेगा। कार्यकर्ताओं के फीडबैक पर तैयार होगी रिपोर्ट प्रदेश संगठन महामंत्री संजय कामले का कहना है कि पहले चरण में नगरीय निकायों के प्रतिनिधियों की जनता के बीच छवि, उनके कामकाज, मतदाताओं से संपर्क और संवाद, पार्टी की गतिविधियों में भागीदारी के आधार पर आकलन किया जाएगा। इसके लिए फीडबैक स्थानीय कार्यकर्ताओं से लिया जाएगा। इसके आधार पर बनी रिपोर्ट को सामने रखकर जनप्रतिनिधियों से बात होगी। ठीक इसी तरह विधायकों के कामकाज का आकलन होगा। जो प्रत्याशी चुनाव हार गए थे, उनसे भी फीडबैक लिया जाएगा। इसमें वर्तमान स्थिति के साथ-साथ सुधार के लिए उठाए जाने वाले कदमों पर फोकस रहेगा।

सुरजेवाला का BJP पर हमला – कहा, राहत नहीं, किसानों को मिला धोखा

हरियाणा  कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव एवं राज्यसभा सांसद रणदीप सिंह सुरजेवाला ने कहा कि हरियाणा के किसान और गरीब एससी-बीसी परिवार इस समय दोहरी मार झेल रहे हैं। एक ओर बाढ़ की भीषण तबाही, दूसरी ओर भाजपा सरकार की बेरुख़ी और धोखाधड़ी। सरकारी आंकड़े खुद गवाही दे रहे हैं कि प्रदेश के 6,017 गांवों के 3,80,156 किसानों ने 22 लाख 41 हजार 637 एकड़ से अधिक भूमि में फसलों के नुकसान की जानकारी पोर्टल पर दर्ज कराई है। उन्होंने कहा कि इन दुखों के बीच किसानों को राहत के नाम पर केवल पोर्टल की लंबी प्रक्रियाओं और मज़ाक़ जैसे मुआवज़े का सामना करना पड़ रहा है। भूमिहीन मज़दूरों को अब तक एक फूटी कौड़ी तक नहीं मिली। किसान संगठन आरोप लगा रहे हैं कि भाजपा सरकार ने त्रासदी में भी गरीब परिवारों को उनके हाल पर छोड़ दिया है। सुरजेवाला ने कहा कि सबसे बड़ी समस्या धान किसानों की है। उन्होंने बाक़ायदा बीमा प्रीमियम भरा, मगर न तो बीमा कंपनियां क्लेम दे रही हैं और न ही सरकार अपने पोर्टल पर आवेदन स्वीकार कर रही। हालत यह है कि 12 जिलों में लाखों एकड़ धान की फसल तबाह हो गई, फिर भी किसान मुआवज़े और बीमा क्लेम से वंचित हैं। उन्होंने कहा कि भाजपा एंड कंपनी ने हर सीजन बीमा कंपनियों के ज़रिए किसानों को लूटने का एक सुनियोजित तंत्र खड़ा कर दिया है। सुरजेवाला ने कहा कि बाढ़ जैसी आपदा में भी राहत देने की जगह सरकार और बीमा कंपनियां किसानों से दुश्मनों जैसा सलूक कर रही हैं। सुरजेवाला ने कहा कि प्रदेश के किसान भी भाजपा की नीतियों से परेशान हैं। कई जिलों में दौरे के दौरान किसानों से बातचीत की तो किसानों ने कहा, ‘भाजपा का डबल इंजन इस बार लूट और धोखे के डबल बुलडोज़र में बदल चुका है, जिसने लाखों किसानों और गरीब परिवारों को संकट के दलदल में धकेल दिया है।’ उन्होंने तुरंत नुकसान की भरपाई करने की मांग सरकार से की है।

कांग्रेस की किसान न्याय यात्रा आज उज्जैन में, दिग्गज नेताओं की जुटेगी ताकत

उज्जैन मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के गृह जिले उज्जैन में शुक्रवार को कांग्रेस किसान न्याय यात्रा निकालेगी। रैली के बाद जनसभा होगी। इसमें राजस्थान के पूर्व उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट, पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी, विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार सहित सभी वरिष्ठ नेता भाग लेंगे। सभा में पार्टी वोट चोरी, सिंहस्थ के लिए किसानों की भूमि अधिग्रहण, भ्रष्टाचार, कानून व्यवस्था का मुद्दा उठाएगी।प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री का गृह क्षेत्र होने के बाद भी किसानों की कोई सुनने के लिए तैयार नहीं है। वे कर्ज, महंगाई और खाद संकट से जूझ रहे हैं। यह न्याय यात्रा भाजपा सरकार की जनविरोधी नीतियों, किसानों की उपेक्षा, युवाओं की बेरोजगारी और महिलाओं की असुरक्षा के विरुद्ध है। प्रदेश की अर्थव्यवस्था कर्ज के दलदल में फंस गई है। ऐसा कोई महीना नहीं बीतता है जब सरकार कर्ज न ले। किसानों को सरकार ने खाद की लाइन में लगा दिया है। उन पर पुलिस लाठियां बरसा रही है। सिंहस्थ के नाम पर किसानों की भूमि लेकर स्थायी निर्माण का रास्ता बनाया जा रहा है, जिसका विरोध हो रहा है। वोट चोरी की बात अब जगजाहिर हो चुकी है। प्रदेश के कई विधानसभा क्षेत्रों की मतदाता सूची में गड़बड़ी की गई है। कानून व्यवस्था का बुरा हाल है। अनुसूचित जाति-जनजाति, पिछड़ा वर्ग या महिला, सबके साथ अत्याचार हो रहा है। ये सब मुद्दे उज्जैन में आयोजित किसान न्याय यात्रा में उठाए जाएंगे।

एमपी कांग्रेस में संगठनात्मक बदलाव, जिला अध्यक्षों को अधिकार, 1004 ब्लॉक अध्यक्ष बनाए जाएंगे

भोपाल  वरिष्ठ कांग्रेस नेता राहुल गांधी की मंशा के अनुरूप मध्य प्रदेश में जिला कांग्रेस अध्यक्षों को ब्लॉक अध्यक्षों की नियुक्तियों के लिए फ्री-हैंड यानी सर्वाधिकार दिया गया है। वे संगठन सृजन अभियान के माध्यम से क्षेत्रों के जातीय और स्थानीय समीकरणों को ध्यान में रखते हुए नियुक्तियां करेंगे। इसके लिए प्रदेश कांग्रेस ने उन्हें जिले के जातिगत समीकरण का डेटा भी भेजा है। प्रदेश में कांग्रेस के 1,004 ब्लॉक हैं नियुक्ति प्रक्रिया पूरी करने के लिए 40 दिन का समय दिया गया है। प्रदेश में कांग्रेस के 1,004 ब्लॉक हैं। विधानसभा और लोकसभा चुनाव में भाजपा के हाथों कांग्रेस को मिली करारी हार का बड़ा कारण संगठन की कमजोरी को माना गया था। संगठन को सशक्त बनाने के लक्ष्य को लेकर वर्ष 2025 को संगठन वर्ष के रूप में मनाया जा रहा है। जिला इकाइयों को मजबूत बनाने के लिए जिला अध्यक्षों का चयन किया गया। अब इन अध्यक्षों को अब अपने नीचे की इकाइयां बनानी हैं। कांग्रेस की प्रदेश इकाई ने जिला अध्यक्षों से कहा है कि वे स्थानीय परिस्थितियों को देखते हुए ऐसी टीम बनाएं जो विपरीत परिस्थितियों में भी विचारधारा से डिगे नहीं। संघर्षशील हो और भाजपा व सरकार का डटकर मुकाबला करे। जिला इकाई सबसे महत्वपूर्ण मध्य प्रदेश कांग्रेस के संगठन महामंत्री संजय कामले का कहना है कि संगठन में सबसे महत्वपूर्ण जिला इकाई है। इस नाते जिला अध्यक्षों की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है। ब्लाक अध्यक्षों की नियुक्ति के लिए जिला अध्यक्ष नाम निर्धारित करके प्रदेश कांग्रेस को भेजेंगे और यहां से सूची जारी की जाएगी। जिला अध्यक्षों की पहली परीक्षा ब्लॉक स्तर पर नियुक्तियां जिला अध्यक्षों की पहली परीक्षा होगी। इसमें उन्हें न केवल वरिष्ठ नेताओं के साथ जातीय और स्थानीय समीकरणों को साधना होगा बल्कि ऐसी टीम तैयार करनी होगी जो राहुल गांधी की मंशा के अनुरूप हो यानी जिनके लिए नेता नहीं पार्टी प्रथम हो। इस काम में जिला अध्यक्षों का सहयोग समन्वय समिति करेंगी, जिनकी बैठकें 26 सितंबर तक करने के निर्देश प्रदेश कांग्रेस ने दिए हैं।  

कांग्रेस का नया अभियान: प्रभात फेरी और गौ सेवा, भाजपा ने साधा निशाना

भोपाल   मध्य प्रदेश में कांग्रेस को मजबूत करने के लिए तरह-तरह के प्रयोग किया जा रहे हैं। प्रदेश में अब कांग्रेस प्रभात फेरी निकालेगी साथ ही गौ सेवा और श्रमदान भी करेंगी। यह राहुल गांधी के संगठन सृजन अभियान से जोड़ा गया हिस्सा माना जा रहा है। हालही में नवनियुक्त 71 ग्रामीण और शहर जिला अध्यक्षों को इसकी ट्रेनिंग दी जाएगी। प्रदेश के सभी जिला अध्यक्षों को 10 दिन की ट्रेनिंग देने की तैयारी कांग्रेस कर रही है। जिसमें राहुल गांधी से लेकर कांग्रेस की कई दिग्गज नेता शामिल होंगे। इस दौरान जिला अध्यक्षों को इसकी ट्रेनिंग दी जाएगी। और उन्हें प्रैक्टिकल भी कराया जाएगा। इधर भाजपा ने इसे लेकर तंज कसा है। मंत्री विश्वास सारंग में कहा है कि कांग्रेस की यह महज चुनावी नौटंकी है। कांग्रेस की पहले से रही है परंपरा एमपी कांग्रेस के संगठन प्रभारी डॉ. संजय कामले ने बताया कि यह कोई नया नहीं है। कांग्रेस की पहले से परंपरा रही है। हमारा सेवादल इस पर पहले से काम कर रहा है। उन्होंने बताया कि कांग्रेस जिला अध्यक्षों 10 दिन की ट्रेनिंग में सिखाया जाएगा कि किस समय प्रभात फेरी निकालना है।  क्या गीत रहेंगे। साथ ही श्रमदान और गौ सेवा की भी जानकारी दी जाएगी। सभी जिलाध्यक्षों को प्रेक्टिकल कराया जाएगा और उसके बाद वे  अपने-अपने जिले में करने के लिए का जाएगा। बीजेपी के एजेंडें पर कांग्रेस कर रही काम गौरतलब है कि एमपी में कांग्रेस 2003 के बाद के 22 साल में से 2 साल छोड़ दे तो सत्ता से बाहर है। यही वजह है कि लंबे वनवास के बाद कांग्रेस अब राहुल गांधी की महत्वाकांक्षी संगठन सृजन अभियान के तहत चुने गए जिला अध्यक्षों के द्वारा गांव-गांव शहर प्रभात फेरी निकालना श्रमदान और गौ सेवा कराने जा रही है। बतादें कि कांग्रेस जन जन तक पहुंचने के लिए उन कार्यक्रमों का सहारा ले रही है जो बरसों से बीजेपी का एजेंडा रहे हैं। गौ सेवा और प्रभात फेरी के जरिये भाजपा ने गांव से लेकर शहर तक हिंदुत्व और सनातन का झंडा फहराया है यही वजह है।  

कांग्रेस की दोहरी रैली: किसान न्याय यात्रा और वोट चोर गद्दी छोड़ का आयोजन उज्जैन में 12 सितंबर

उज्जैन  मध्य प्रदेश के उज्जैन में 12 सितंबर को कांग्रेस एक बड़ा राजनीतिक आयोजन करने जा रही है। इस दिन ‘किसान न्याय यात्रा’ और ‘वोट चोर गद्दी छोड़’ रैली का आयोजन होगा। इसी दिन कांग्रेस के इस अभियान का समापन भी किया जाएगा। कार्यक्रम में कांग्रेस के कई दिग्गज नेता शामिल होंगे। जानकारी के अनुसार, सचिन पायलट, केसी वेणुगोपाल, कमलनाथ समेत प्रदेश के कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहेंगे। संभावना जताई जा रही है कि इस रैली के समापन में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी भी शामिल हो सकते हैं। MP के कई जिलों में निकली यात्रा दरअसल, कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने केंद्र सरकार पर वोट चोरी का गंभीर आरोप लगाते हुए इस अभियान की शुरुआत की थी। इसके बाद प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी के नेतृत्व में ‘वोट चोर गद्दी छोड़’ यात्रा कई जिलों में निकाली गई। इन सभाओं और रैलियों को कई जगह समर्थन मिला, तो कुछ स्थानों पर विरोध का भी सामना करना पड़ा। राहुल गांधी की प्रेस कॉन्फ्रेंस से गरमाई राजनीति गौरतलब है कि राहुल गांधी ने हाल ही में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर वोट चोरी के आरोप लगाए थे। इसी बयानबाजी के बाद मध्यप्रदेश में कांग्रेस ने बड़े पैमाने पर यह अभियान शुरू किया, जो अब उज्जैन में समापन की ओर बढ़ रहा है। 

ट्रंप के बयान ने कांग्रेस को भड़का दिया, कहा- ‘हम झुकेंगे नहीं

नई दिल्ली  भारत के खिलाफ खूब बयानबाजी करने के बाद अब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के तेवर नरम नजर आ रहे हैं। शनिवार को उन्होंने भारत के साथ रिश्ते को बेहद अहम बताते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उनके हमेशा ही दोस्त रहेंगे, इसमें कोई चिंता की बात नहीं है। ट्रंप के बयान के बाद प्रधानमंत्री ने भी सराहना करते हुए कहा कि वह अमेरिकी राष्ट्रपति की भावनाओं का पूर्ण समर्थन करते हैं। पीएम मोदी ने कहा कि भारत और अमेरिका के बीच बेहद सकारात्मक और दूरदर्शी व्यापक एवं वैश्विक रणनीतिक साझेदारी है। वहीं इससे पहले ट्रंप ने कहा था कि ऐसा लगता है हमने भारत और रूस को चीन के हाथों खो दिया है। कांग्रेस ने भी ट्रंप के इस बयान पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। कांग्रेस नेता मनीष तिवारी ने सोशल मीडिया पर पोस्ट करके कहा, डोनाल्ड ट्रंप और नावारो जिस तरह के बयान दे रहे हैं, वह केवल टैरिफ तक सीमित नहीं है बल्कि हमारे आत्मसम्मान से जुड़ा हुआ है। हमने ब्रिटिशर्स का भी सामना किया और उन्हें भागने पर मजबूर कर दिया। भारत एक रोटी खाएगा लेकिन कभी घुटने नहीं टेकेगा। डोनाल्ड ट्रंप ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग और व्लादिमीर पुतिन की एससीओ सम्मेलन वाली तस्वीर शेयर करते हुए बयान दिया था। बता दें कि चीन के तियानजिन में हुए एससीओ सम्मेलन में हिस्सा लेने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी पहुंचे थे। इस बैठक में भारत-रूस और चीन की तिकड़ी दिखाई दी थी। भारत और चीन ने मिलकर संबंधों को सुधारने और व्यापारिक संबंधों को मजबूत करने की प्रतिबद्धता भी जताई थी। वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने डोनाल्ड ट्रंप को संदेश भी दे दिया था कि वह किसी के सामने झुकने वाले नहीं हैं। वाइट हाउस में पत्रकारों से बात करते हुए भी डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था कि भारत रूस से तेल आयात करके बहुत गलत कर रहा है और इसीलिए उसपर 50 फीसदी का टैरिफ लगाया गया है। डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि भारत जिस तरीके से रूस के साथ व्यापार कर रहा है, उससे हमें काफी निराशा है। इसीलिए भारत पर इतना ज्यादा टैरिफ लगाया गया है। लेकिन हमारे संबंध भारत के साथ बहुत अच्छे थे। खास तौर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ। कुछ महीने पहले ही रोज गार्डन गए थे और प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी।  

मध्य प्रदेश: कांग्रेस 12 सितंबर को उज्जैन में बड़े प्रदर्शन के लिए तैयार, सीएम के गृह क्षेत्र से भिड़ेगी

 उज्जैन   वर्ष 2023 में विधानसभा और वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव में मध्य प्रदेश में करारी हार के बाद फिर से खड़ा होने की कोशिश कर रही कांग्रेस राज्य की भाजपा सरकार को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के गृह क्षेत्र उज्जैन से ललकारेगी। सरकार को घेरने कांग्रेस 12 सितंबर को उज्जैन में बड़ा प्रदर्शन करेगी। बड़ी रैली के बाद सभा भी होगी। इसमें सिंहस्थ क्षेत्र के भूमि अधिग्रहण, कानून-व्यवस्था, वोट चोरी, अवैध शराब के कारोबार सहित तमाम मुद्दों को उठाया जाएगा। पार्टी के वरिष्ठ नेता केसी वेणुगोपाल, सचिन पायलट, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी, विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार, प्रदेश प्रभारी हरीश चौधरी सहित कई वरिष्ठ नेता उपस्थित रहेंगे। बता दें, सिंहस्थ-2028 के लिए किसानों की जमीन लैंड पुलिंग के जरिये लिए जाने का किसान संगठन विरोध कर रहे हैं। संगठन के प्रतिनिधि भाजपा के बड़े नेताओं से भी मिल चुके हैं। प्रदेश में वर्ष 2027 से नगरीय निकायों के साथ चुनाव की शुरुआत होनी है। इसके बाद वर्ष 2028 में विधानसभा और वर्ष 2029 में लोकसभा चुनाव होंगे। कांग्रेस इसके लिए खुद को तैयार कर रही है। दरअसल, विधानसभा और लोकसभा चुनाव से पहले वरिष्ठ नेताओं से नाराजगी के चलते कांग्रेस से बड़ी संख्या में नेता और कार्यकर्ता भाजपा में चले गए थे। इसका असर यह हुआ कि कई मतदान केंद्रों पर बैठाने के लिए कार्यकर्ता तक नहीं मिले। यह स्थिति आगे न बने और कार्यकर्ता हतोत्साहित न रहें, इसके लिए पीढ़ी परिवर्तन पर काम प्रारंभ किया गया। वोट चोर-गद्दी छोड़ अभियान के जरिये पूरे प्रदेश में माहौल बनाया जा रहा है। इसी क्रम में उज्जैन में बड़े विरोध प्रदर्शन की तैयारी है। प्रदर्शन को प्रभावी बनाने का जिम्मा उज्जैन से लगे जिलों की टीम को दिया है। इसकी सफलता के आधार पर नए अध्यक्षों की क्षमता का आकलन भी होगा। नेतृत्व नए नेताओं के हाथ दे रही कांग्रेस मध्य प्रदेश में भाजपा से मुकाबला करने कांग्रेस नया नेतृत्व तैयार कर रही है। ओबीसी वर्ग से आने वाले जीतू पटवारी को जहां प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया तो आदिवासी वर्ग के उमंग सिंघार को विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बनाकर मौका दिया। संगठन सृजन अभियान चलाकर जिला अध्यक्ष बनाए गए। जयवर्धन सिंह, प्रियव्रत सिंह, ओमकार सिंह मरकाम जैसे वरिष्ठ नेताओं को जिला अध्यक्ष बनाकर संदेश दिया कि जिला इकाई सबसे महत्वपूर्ण है। जिले के बाद अब ब्लाक इकाइयों में परिवर्तन की तैयारी है। कार्यकर्ताओं को मिशन 2028 में जुटने का संदेश दिया जाएगा     अधिकतर जिलों में 'वोट चोर-गद्दी छोड़' अभियान के अंतर्गत प्रदर्शन हो चुके हैं इसलिए अब राज्य स्तरीय प्रदर्शन उज्जैन में होना है। मुख्यमंत्री का गृह क्षेत्र होने के साथ-साथ उज्जैन मालवा अंचल का महत्वपूर्ण केंद्र है। यहां बड़ा प्रदर्शन करके पूरे प्रदेश के कार्यकर्ताओं को मिशन-2028 (विधानसभा चुनाव) में जुटने का संदेश दिया जाएगा। – संजय कामले, प्रदेश संगठन महामंत्री, कांग्रेस