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780 ब्लॉक अध्यक्षों के साथ कांग्रेस की नई फौज तैयार, जीतू पटवारी ने किया बड़ा ऐलान

भोपाल   मध्यप्रदेश कांग्रेस ने ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्षों की सूची जारी कर दी है। प्रदेश प्रभारी हरीश चौधरी के अनुमोदन के बाद 780 ब्लॉक अध्यक्षों की नियुक्ति की गई। जानिए किसे कहां मिली जिम्मेदारी। पीसीसी चीफ जीतू पटवारी के प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बनने के ठीक दो साल बाद मंगलवार 16 दिसंबर को एमपी में कांग्रेस के 780 ब्लॉक अध्यक्ष घोषित किए गए हैं। मध्य प्रदेश कांग्रेस ने ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्षों की सूची जारी कर दी है। लंबी प्रक्रिया और गहन विचार-विमर्श के बाद यह सूची सामने आई है। पिछले लगभग दो महीनों से ब्लॉक अध्यक्षों की नियुक्ति को लेकर मंथन चल रहा था। एमपी के प्रदेश प्रभारी हरीश चौधरी के अनुमोदन के बाद ही इस सूची को अंतिम रूप दिया गया। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने जारी आदेश में कहा कि प्रदेश प्रभारी हरीश चौधरी की स्वीकृति के उपरांत जिलों के अंतर्गत संलग्न सूची के अनुसार नवीन ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्षों की नियुक्ति तत्काल प्रभाव से की जाती है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि सभी नवनियुक्त पदाधिकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, सोनिया गांधी और राहुल गांधी की मंशा के अनुरूप भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की नीतियों, सिद्धांतों और संगठनात्मक अनुशासन का पालन करते हुए कार्य करेंगे तथा ब्लॉक स्तर पर संगठन को सशक्त बनाने में सक्रिय भूमिका निभाएंगे।

16 दिसंबर को कांग्रेस विधायक दल की बैठक, विधानसभा सत्र के लिए रणनीति को मिलेगा अंतिम रूप

भोपाल  मध्यप्रदेश विधानसभा के एक दिवसीय विशेष सत्र से पहले कांग्रेस विधायक दल की महत्वपूर्ण बैठक आज मंगलवार, 16 दिसंबर को शाम 7:30 बजे भोपाल स्थित बी-12 (ए), 74 बंगला में आयोजित की जाएगी। बैठक की अध्यक्षता नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार करेंगे। इस बैठक में 17 दिसंबर को होने वाले विधानसभा के एक दिवसीय विशेष सत्र को लेकर कांग्रेस विधायक दल की रणनीति और कार्ययोजना को अंतिम रूप दिया जाएगा। जानकारी के लिए बतादें कि विशेष सत्र में मध्यप्रदेश को विकसित, आत्मनिर्भर और समृद्ध राज्य बनाने के विषय पर चर्चा प्रस्तावित है। आर्थिक स्थिति से लेकर सामाजिक वर्गों के मुद्दे एजेंडे में विधायक दल की बैठक में प्रदेश की मौजूदा आर्थिक स्थिति, किसानों की समस्याएं, युवाओं के रोजगार, महिलाओं की सुरक्षा, आदिवासी, दलित, पिछड़े और कमजोर वर्गों से जुड़े मुद्दों पर मंथन किया जाएगा। इसके साथ ही सरकार की नीतियों की समीक्षा करते हुए यह तय किया जाएगा कि विशेष सत्र में कांग्रेस किन मुद्दों को प्रमुखता से उठाएगी। उमंग सिंघार बोले-खोखले नारों से नहीं बनेगा आत्मनिर्भर प्रदेश नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा कि प्रदेश को वास्तव में विकसित और आत्मनिर्भर बनाने के लिए खोखले नारों के बजाय ठोस नीतियों और ईमानदार राजनीतिक इच्छाशक्ति की जरूरत है। उन्होंने कहा कि एक दिवसीय विशेष सत्र केवल औपचारिकता न बने, बल्कि इसमें किसानों की आय, युवाओं के रोजगार, महिलाओं की सुरक्षा और प्रदेश की बदहाल आर्थिक स्थिति पर गंभीर चर्चा होनी चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि कांग्रेस विधायक दल विशेष सत्र में जनता की वास्तविक समस्याओं और प्रदेश के भविष्य की ठोस रूपरेखा को मजबूती से विधानसभा में रखेगा। 16वीं विधानसभा का एक दिवसीय अष्टम सत्र विधानसभा सचिवालय ने जानकारी दी है कि राज्य की 16वीं विधानसभा का एक दिवसीय अष्टम सत्र बुधवार, 17 दिसंबर 2025 को आयोजित किया जाएगा। सत्र सुबह 11 बजे से शुरू होगा। यह सत्र भले ही एक दिन का हो, लेकिन इसे महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इसमें मध्य प्रदेश को विकसित, आत्मनिर्भर और समृद्ध राज्य बनाने की दिशा में सरकार की योजनाओं और भविष्य की रणनीति पर चर्चा की जाएगी। विभिन्न दलों के विधायकों को प्रदेश के विकास, अर्थव्यवस्था, रोजगार, किसानों, महिलाओं, युवाओं और बुनियादी ढांचे से जुड़े मुद्दों पर अपने सुझाव रखने का अवसर मिलेगा। 

छत्तीसगढ़ कांग्रेस ने किया जिलाध्यक्षों का बड़ा फेरबदल, नई सूची जारी

रायपुर अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) ने छत्तीसगढ़ के सभी जिला और शहर अध्यक्षों की नई सूची जारी कर दी है। एआईसीसी महासचिव के.सी. वेणुगोपाल के हस्ताक्षर से जारी इस सूची में कुल 41 जिलों/शहरों के लिए नए अध्यक्षों की घोषणा की गई है। संगठन में नई ऊर्जा लाने और आगामी चुनावी तैयारियों को मजबूती देने के उद्देश्य से कई जिलों में महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं। नई सूची के अनुसार— बलौद से श्री चन्द्रेश कुमार हिरवानी बलोदाबाजार से स्मृति सुमित्रा घृतलहरे जांजगीर-चांपा से श्री राजेश अग्रवाल सक्ती जिले से श्रीमती रश्मि गाभेल रायगढ़ सिटी से श्री शख़ा यादव रायगढ़ ग्रामीण से श्री नागेन्द्र नेगी रायपुर सिटी से श्री श्रीकुमार शंकर मेनन रायपुर ग्रामीण से श्री राजेन्द्र पप्पू बंजारे राजनांदगांव सिटी से श्री जितेन्द्र उदय मुदलियार राजनांदगांव ग्रामीण से श्री विपिन यादव इसके अलावा बस्तर, बिलासपुर, दुर्ग, जशपुर, कोरिया, सूरजपुर, सुकमा, नारायणपुर, धमतरी सहित लगभग सभी जिलों में नए अध्यक्ष नियुक्त किए गए हैं। कांग्रेस संगठन का मानना है कि यह नई नियुक्तियां जमीनी स्तर पर पार्टी की पकड़ को मजबूत करेंगी। नई टीम को आगामी राजनीतिक कार्यक्रमों, जनसंपर्क अभियानों और संगठन विस्तार की जिम्मेदारी सौंपी गई है। सूची जारी होते ही प्रदेश कांग्रेस कार्यकर्ताओं में उत्साह देखा जा रहा है, वहीं कुछ जिलों में नए चेहरों को लेकर चर्चा तेज हो गई है। नई जिलाध्यक्ष सूची के साथ ही कांग्रेस ने यह संकेत भी दे दिया है कि आने वाले महीनों में संगठनात्मक स्तर पर और भी बड़े बदलाव संभव हैं।

उदित राज का दिल्ली ब्लास्ट बयान वायरल, कांग्रेस नेता ने घटनाक्रम को बताया ‘आतंकियों का जलवा’

नई दिल्ली अक्सर अपने बयानों की वजह से सुर्खियों और विवादों में रहने वाले कांग्रेस नेता उदित राज ने आतंकी हमलों को दहशतगर्दों का 'जलवा' करार दिया है। उदित राज ने केंद्र की मोदी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि जब भी कहा जाता है कि आतंकवाद को दफन कर दिया, तब-तब आतंकवादी अपना कुछ जलवा दिखा देते हैं। उन्होंने दिल्ली धमाके का जिक्र करते हुए यह बात कही। 10 नवंबर की शाम लाल किले के पास i20 कार में हुए जोरधार धमाके में हमलावर समेत 15 लोगों की जान चली गई, जबकि 20 बुरी तरह घायल हो गए। धमाके को डॉक्टरों के एक आतंकी मॉड्यूल ने अंजाम दिया। जम्मू-कश्मीर के रहने वाले एक डॉक्टर आतंकी उमर नबी ने फिदायीन हमला किया था। जम्मू-कश्मीर की सुरक्षा को लेकर मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला की ओर से दिए गए एक बयान से जुड़े सवाल के जवाब में उदित राज ने कहा, 'क्या गलत कह रहे हैं, स्टेटहुड का प्रॉमिश था। कई बार बेईमानी हो रही है, लूट रहे हैं वहां। लूटने के लिए ही रखा गया है। संभल तो रहा नहीं है। अभी कश्मीर में भी बम ब्लास्ट हुआ था, जब भी यह कहते हैं कि हमने आतंकवाद को दफन कर दिया पाकिस्तान में घुसकर मारा तब आतंकवादी कुछ ना कुछ अपना जलवा दिखा देते हैं।' 'जलवा' कह जाने के बाद खुद को संभालते हुए उदित राज ने अपना वाक्य बदला और कहा कुछ ना कुछ आतंकवादी गतिविधि करके दिखा देते हैं कि तुम्हारी बात में दम नहीं है। उन्होंने कहा, ‘(मोदी सरकार ने) कुछ दिन पहले ही कहा था कि देखो जम्मू कश्मीर के बाहर देश में कहीं आतंकवादी हमला नहीं हुआ, धड़ाक से लाल किला में बम ब्लास्ट करके दिखा दिया। पहले भी यही कहते थे कि कश्मीर में आतंकवाद का सफाया हो गया, पहलगाम करके दिखा दिया।’

फटने वाला है कर्नाटक कांग्रेस का ज्वालामुखी, राहुल गांधी की चुप्पी पर सवाल

बेंगलुरु  कर्नाटक में कांग्रेस का ज्‍वालामुखी फटने के कगार पर है. सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार के बीच का संघर्ष अब सिर्फ राख ही नहीं, लावा भी उगल रहा है. इस सूबे के कांग्रेसी इंतेजार में हैं कि पार्टी 'हाईकमान' समय रहते फायरब्रिगेड की भूमिका निभाएगा, लेकिन सबसे बड़े फायर फाइटर राहुल गांधी ही सीन से गायब हैं. दिलचस्‍प, सिर्फ हाईकमान की भूमिका ही नहीं, इस फसाद की जड़ भी है. जिसका कांग्रेस के भीतर एक लंबा अतीत है. किस तरह दो नेता आपस में टकराते हैं, और पार्टी दो धड़े में बंट जाती है और बिखर जाती है. कर्नाटक में कांग्रेस की सरकार बने ढाई साल से ज्‍यादा हो चुका है, लेकिन माहौल स्थिर होने के उलट अब बेहद बेचैनी भरा है. राजनीतिक गलियारों में सबसे ज्‍यादा चर्चा इसी बात की है कि आखिर मुख्यमंत्री की कुर्सी को लेकर कांग्रेस के भीतर खींचतान कब खत्म होगी. सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार के बीच चली आ रही यह अंदरूनी टकराहट अब सिर्फ बैकग्राउंड की कहानी नहीं रह गई है. इस पूरे मामले में कांग्रेस हाईकमान की भूमिका बेहद अहम होने के बावजूद हाईकमान ही सबसे ज्‍यादा चुप है. और यही चुप्पी आज पूरे संकट का सबसे बड़ा कारण बन गई है. कर्नाटक से आने वाली हर खबर में एक बात बार-बार दोहराई जाती है कि चुनाव के समय किसी तरह का सत्ता-साझेदारी का फॉर्मूला बना था. जिसके मुताबिक सिद्धारमैया आधा कार्यकाल पूरा करेंगे और उसके बाद मुख्यमंत्री की कुर्सी शिवकुमार को मिल सकती है. हालांकि यह फॉर्मूला न तो कभी कांग्रेस ने आधिकारिक तौर पर स्वीकार किया, और न ही किसी दस्तावेज़ में इसका जिक्र है. लेकिन राजनीति में कई बातें कागज पर नहीं लिखी जातीं. बातें कमरे में होती हैं और भरोसे पर टिकी रहती हैं. यही भरोसा आज डगमगाया हुआ दिखता है. ऐसी ही हलचल कभी राजस्‍थान तो कभी छत्‍तीसगढ़ में देखी गई. राजस्‍थान में अशोक गेहलोत और सचिन पायलट के बीच खींचतान इस तरह बढ़ी थी कि लग रहा था कि सचिन भी ज्‍योतिरादित्‍य सिंधिया की तरह पार्टी छोड़ देंगे. ऐसा तो नहीं हुआ, लेकिन राज्‍य में कांग्रेस परोक्ष रूप से दो धड़ों में बंट गई. छत्‍तीसगढ़ में भी भूपेश बघेल और टीएस सिंहदेव के बीच 'पावर-शेयरिंग' फॉर्मूला अमल में नहीं लाया जा सका. कुलमिलाकर, जो एक बार सीएम की कुर्सी पर बैठा, वो फिर उठा नहीं. और कांग्रेस नेतृत्‍व की उस पर एक न चली. सिद्धारमैया और शिवकुमार में से किसका पलड़ा भारी  राजस्‍थान में जैसे अशोक गेहलोत थे, वैसे ही कुछ कर्नाटक में सिद्धारमैया अपने पक्ष में समीकरण साधकर बैठे हैं. वे इस राज्य में लंबे समय से एक लोकप्रिय नेता रहे हैं. कई समुदायों में उनकी पकड़ मजबूत है, उनकी छवि प्रशासनिक अनुभव वाले नेता की है. दूसरी ओर, शिवकुमार कांग्रेस के संगठन, संसाधन और राजनीतिक नेटवर्क के मामले में बेहद ताकतवर नेता माने जाते हैं. वोक्कालिगा समुदाय में उनकी पकड़ किसी से छिपी नहीं है और पार्टी को वापस सत्ता में लाने में उनके योगदान को कांग्रेस का कोई भी नेता नजरअंदाज़ नहीं कर सकता. शिवकुमार सिर्फ कर्नाटक तक ही नहीं, उन्‍हें महाराष्‍ट्र, हिमाचल के राजनीतिक संकट में भी ट्रबलशूटर की भूमिका में देखा गया. लेकिन, कर्नाटक की सियासत में दोनों नेताओं वजन बराबर हो जाता है. और यही बराबरी हाईकमान के लिए सबसे बड़ा सिरदर्द बन गई है. अब सवाल यह है कि हाईकमान क्या कर रहा है? इस सवाल के जवाब से पहले कांग्रेस अध्‍यक्ष मल्लिकार्जुन के बयान का जिक्र करना जरूरी हो जाता है. कर्नाटक के दौरे पर गए खरगे से वहां की कांग्रेस के सभी धड़ों ने मुलाकात की, जिस पर उनका जवाब था कि 'सब पार्टी हाईकमान तय करेगा'. भाजपा इस पर मजे ले रही है कि कांग्रेस अध्‍यक्ष होते भी खरगे पार्टी के हाईकमान नहीं बन पा रहे हैं. और भाजपा की इस दलील को महज राजनीति नहीं कहा जा सकता. खबर यह भी आई कि खरगे ने ढाई साल वाला फार्मूला आगे बढ़ाया था, लेकिन जब बात नहीं बनी तो पीछे हट गए. इधर, दिल्‍ली में डेरा डाले शिवकुमार समर्थक विधायक पार्टी महासचिव और राहुल गांधी के करीब केसी वेणुगोपाल से मुलाकात को तरसते रहे. लेकिन वेणुगोपाल केरल से लौटे ही नहीं. कांग्रेस हाईकमान की कार्यशैली अक्सर 'इंतजार' की होती है. वह दोनों पक्षों की नाराजगी और ताकत को तौलता है, फिर किसी मोड़ पर हस्तक्षेप करता है. लेकिन कर्नाटक के मामले में हाईकमान की चुप्पी काफी लंबी हो गई है. और यही दोनों धड़ों को उम्मीद भी देता है और बेचैनी भी. क्‍या हैं कर्नाटक में कांग्रेस के रिस्‍क फैक्‍टर्स अगर हाईकमान यह कह दे कि सिद्धारमैया पूरे पांच साल मुख्यमंत्री रहेंगे, तो शिवकुमार का धड़ा इसे धोखा मान सकता है और यह नाराजगी पार्टी में खलबली मचा सकती है. जैसा राजस्‍थान और छत्‍तीसगढ़ में हुआ. वहीं अगर हाईकमान यह संकेत दे कि सत्ता परिवर्तन होगा, तो सिद्धारमैया समर्थक खेमे में बेचैनी बढ़ सकती है. यानी एक नेता को खुश करने के चक्कर में दूसरे को नाराज करने का जोखिम बड़ा है, और हाईकमान फिलहाल ऐसा कोई जोखिम लेने के मूड में नहीं दिखता. दूसरी वजह चुनावी राजनीति है. कर्नाटक दक्षिण भारत में कांग्रेस का सबसे मजबूत राज्य है. केरल में कांग्रेस है, लेकिन वहां स्थिति हर चुनाव में पलटती रहती है. तमिलनाडु में कांग्रेस जूनियर पार्टनर है. तेलंगाना में लंबे अरसे बाद सत्‍ता पास आई है. ऐसे में कर्नाटक कांग्रेस के लिए सिर्फ एक राज्य नहीं बल्कि दक्षिण भारत में उसका ग्रोथ इंजन है और ईंधन भी. तीसरी बात यह है कि कर्नाटक में दोनों नेता अपनी-अपनी जगह बेहद महत्वाकांक्षी हैं. लेकिन हाईकमान को यह समझ में आता है कि यदि किसी एक की उम्मीदों को पूरी तरह दबाया गया, तो पार्टी को लंबे समय तक इसका खामियाजा भुगतना पड़ सकता है. इसलिए हाईकमान इस फैसला लेने में आनाकानी कर रहा है. यह संकट सुलझने वाला है या नहीं? फिलहाल राजनीतिक माहौल से ऐसा नहीं लगता कि हाल-फिलहाल कोई बड़ा फैसला होने वाला है. कांग्रेस उच्च नेतृत्व को शायद लग रहा है कि समय के साथ स्थिति खुद शांत हो जाएगी, या फिर कोई ऐसा मौका आएगा जब नेतृत्व परिवर्तन की दिशा में कदम उठाना आसान होगा, जैसे किसी बड़े चुनाव या कैबिनेट फेरबदल के … Read more

जिला प्रभारियों में कांग्रेस ने की नई नियुक्तियां, जीतू पटवारी का गृह जिला इंदौर ग्रामीण खाली

भोपाल  मध्य प्रदेश कांग्रेस ने जिला स्तर पर संगठन को फिर से व्यवस्थित करने के लिए व्यापक बदलाव किए हैं। प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने लगभग सभी जिलों में नए प्रभारी नियुक्त कर दिए हैं। दिलचस्प बात यह है कि पटवारी के गृह जिले इंदौर ग्रामीण की जिम्मेदारी फिलहाल खाली रखी गई है, जबकि बाकी 70 जिलों में प्रभारियों की घोषणा कर दी गई है। पार्टी के इस कदम को आगामी राजनीतिक गतिविधियों की तैयारियों से जोड़कर देखा जा रहा है। प्रमोट हुए नेताओं की जगह नए प्रभारी     पीसीसी अध्यक्ष ने खासतौर पर खंडवा सिटी, नरसिंहपुर और ग्वालियर सिटी जैसे अहम जिलों के प्रभारी बदले हैं। खंडवा सिटी की पूर्व प्रभारी रीना बौरासी, अब महिला कांग्रेस की प्रदेश अध्यक्ष बनाई गई हैं।     इनके स्थान पर खंडवा ग्रामीण के जिला प्रभारी आरके दोगने को प्रभारी बनाया गया है। ये हरदा के विधायक भी हैं। इनको दोनों जिलों का प्रभारी बनाया गया है। ग्वालियर सिटी की प्रभारी हिना कांवरे राष्ट्रीय सचिव बनी हैं। इसके बाद ग्वालियर शहर और ग्रामीण दोनों जिलों का जिम्मा पीसी शर्मा को सौंपा गया है। पीसी शर्मा पूर्व मंत्री हैं। वहीं, सुखदेव पांसे को कांग्रेस के संगठन प्रभारी के तौर पर नरसिंहपुर जिले का जिम्मा सौंपा गया था। इनकी जगह नरसिंहपुर की जिम्मेदारी आलोक मिश्रा को दी गई है। जीतू पटवारी का गृह जिला इसलिए खाली पीसीसी चीफ जीतू पटवारी का गृह जिला इंदौर ग्रामीण के जिला प्रभारी अवनीश भार्गव मध्य प्रदेश कांग्रेस सेवा दल के मुख्य संगठक बनाए गए हैं। भार्गव जैसे सीनियर और समन्वय बनाने वाले नेता का नाम तय नहीं हो पाया। इसलिए फिलहाल इंदौर ग्रामीण के जिला प्रभारी को घोषित नहीं किया गया है। अब जिले वार कांग्रेस के प्रभारियों की लिस्ट देखिए     मुरैना सिटी– राम किंकर गुर्जर     मुरैना ग्रामीण– लाखन सिंह यादव (उपाध्यक्ष)     श्योपुर– सुनील शर्मा (महासचिव)     भिंड शहर व ग्रामीण– बैजनाथ कुशवाह (महासचिव)     ग्वालियर शहर व ग्रामीण– पीसी शर्मा (पूर्व मंत्री)     अशोकनगर– रोशनी यादव (महासचिव)     दतिया- गुड्डू राजा (महासचिव)     शिवपुरी- देवेंद्र शर्मा     गुना- दिनेश गुर्जर (महासचिव)     सागर सिटी- मनोज कपूर (सचिव)     सागर ग्रामीण- घनश्याम सिंह (महासचिव)     छतरपुर- सुरेश राजे (महासचिव)     दमोह- हर्ष यादव (महासचिव)     पन्ना- राजभान सिंह (सचिव)     टीकमगढ़- राव यादवेंद्र सिंह यादव (महासचिव)     निवाड़ी– रामलखन दंडोतिया     रीवा शहर व ग्रामीण- संजय शर्मा (महासचिव)     मऊगंज– मकसूद अहमद     सतना सिटी– सुनील सर्राफ (सचिव)     सतना ग्रामीण- विनय सक्सेना (महासचिव)     मैहर– गुरमीत सिंह (मंगू) (महासचिव)     सीधी– दिलीप मिश्रा     सिंगरौली शहर व ग्रामीण- कविता पांडे (महासचिव)     शहडोल– नारायण पट्टा (महासचिव)     अनूपपुर– सुखेन्द्र सिंह बन्ना     उमरिया – नीरज बघेल (सचिव)     डिंडोरी – फुंदेलाल मार्को (महासचिव)     जबलपुर सिटी – राजकुमार खुराना     जबलपुर ग्रामीण- रजनीश सिंह (महासचिव)     कटनी शहर व ग्रामीण – वीरेंद्र द्विवेदी (महासचिव)     बालाघाट – लखन घनघोरिया (उपाध्यक्ष)     छिंदवाड़ा सिटी – सुनील जायसवाल (महासचिव)     पांढुर्ना – रामू टेकाम (महासचिव)     मंडला – किरण अहिरवार (महासचिव)     नरसिंहपुर – आलोक मिश्रा     सिवनी – सोहन वाल्मीकि (महासचिव)     नर्मदापुरम – ओम पटेल     बैतूल – सुनील उइके     हरदा – रचना जैन (संयुक्त सचिव)     भोपाल सिटी – रवि जोशी (उपाध्यक्ष)     भोपाल ग्रामीण – विनय बाकलीवाल (महासचिव)     रायसेन – शैलेन्द्र पटेल (महासचिव)     राजगढ़ – सुरेंद्र सिंह हनी बघेल (उपाध्यक्ष)     सीहोर – जयश्री हरिकिरण (महासचिव)     विदिशा – प्रभु सिंह ठाकुर (महासचिव)     उज्जैन सिटी – अमित शर्मा (महासचिव)     उज्जैन ग्रामीण – चंदर सौंधिया (महासचिव)     देवास सिटी – सुरेंद्र सिंह (शेरा)     देवास ग्रामीण – सदाशिव यादव     रतलाम शहर व ग्रामीण- प्रताप ग्रेवाल (महासचिव)     शाजापुर – निर्मल मेहता     मंदसौर – मनोज राजानी     नीमच – अरविंद बागड़ी     आगर–मालवा – आतिफ अकील (महासचिव)     इंदौर सिटी – संजीव सक्सेना (महासचिव)     इंदौर ग्रामीण- (रिक्त)     खंडवा शहर व ग्रामीण- आरके दोगने (महासचिव)     बुरहानपुर शहर व ग्रामीण- ग्यारसीलाल रावत (महासचिव)     धार – रघु परमार (महासचिव)     झाबुआ – अमन बजाज     खरगोन – जय सिंह ठाकुर (महासचिव)     अलीराजपुर – रामवीर सिकरवार (महासचिव)     बड़वानी – झूमा सोलंकी (उपाध्यक्ष) पदाधिकारियों के प्रमोशन से खाली हुई जगह कुछ जिलों में प्रभारी इसलिए बदले गए क्योंकि मौजूदा पदाधिकारी प्रदेश या राष्ट्रीय स्तर पर प्रमोट हो चुके हैं। खंडवा सिटी की प्रभारी रीना बौरासी महिला कांग्रेस की प्रदेश अध्यक्ष बनाई गई हैं। उनकी जगह खंडवा ग्रामीण के प्रभारी आरके दोगने को खंडवा शहर और ग्रामीण दोनों की जिम्मेदारी दी गई है। इसी तरह ग्वालियर शहर की प्रभारी हिना कांवरे के राष्ट्रीय सचिव बनने के बाद ग्वालियर ग्रामीण के प्रभारी पीसी शर्मा को शहर और ग्रामीण दोनों का प्रभार सौंपा गया है। नरसिंहपुर में भी बदलाव हुआ है। यहां संगठन प्रभारी सुखदेव पांसे के पास जिले का प्रभार था, जिसे अब आलोक मिश्रा को सौंप दिया गया है। गृह जिले इंदौर ग्रामीण का प्रभार खाली क्यों रखा गया इंदौर ग्रामीण के प्रभारी अवनीश भार्गव को मध्य प्रदेश कांग्रेस सेवा दल का मुख्य संगठक नियुक्त किया गया है। पार्टी अंदरूनी तौर पर ऐसे वरिष्ठ और सर्वमान्य नेता की तलाश में है, जो इस महत्वपूर्ण जिले में समन्वय कायम रख सके। इसी वजह से इंदौर ग्रामीण की जिम्मेदारी फिलहाल रिक्त रखी गई है। जिलों के हिसाब से नियुक्त किए गए नए प्रभारी मुरैना जिले में राम किंकर गुर्जर (सिटी) और लाखन सिंह यादव (उपाध्यक्ष, ग्रामीण) को प्रभार मिला है। श्योपुर में सुनील शर्मा (महासचिव), भिंड में बैजनाथ कुशवाह (महासचिव), ग्वालियर शहर और ग्रामीण दोनों में पीसी शर्मा (पूर्व मंत्री) की नियुक्ति की गई है। अशोकनगर में रोशनी यादव (महासचिव), दतिया में गुड्डू राजा (महासचिव), शिवपुरी में देवेंद्र शर्मा और गुना में दिनेश गुर्जर (महासचिव) को दायित्व दिया गया है। सागर सिटी में मनोज कपूर (सचिव) और सागर ग्रामीण में घनश्याम सिंह (महासचिव) को जिम्मेदारी … Read more

दिग्विजय सिंह ने इंदौर में जताई राहुल गांधी की तारीफ, कहा—‘कांग्रेस को मिली नई ऊर्जा’

इंदौर कांग्रेस कार्यकर्ताओं की SIR तैयारी को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री और राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह ने  इंदौर में अहम बैठक ली। बैठक में उन्होंने संगठन की कमियों, बूथ प्रबंधन, और आगामी चुनावी रणनीति पर खुलकर बात की। दिग्विजय सिंह ने कहा कि ‘कॉन्ग्रेस लंबे समय तक सोई रही, जबकि भाजपा बूथ स्तर तक पूरी तरह सक्रिय थी। लेकिन राहुल गांधी ने पार्टी को फिर से जगाया है। छह महीने पहले तक कांग्रेस के 90% नेताओं को बीएलए और बूथ एजेंट में अंतर तक नहीं पता था, जबकि भाजपा के पास बूथ की हर जानकारी रहती है।’ भाजपा पर प्रहार- जनता के पैसों से खरीद-फरोख्त उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा बूथ एजेंटों को लालच देकर अपने पक्ष में करने की कोशिश करती है। उन्होंने कहा कि भाजपा जनता के पैसे से खरीद-फरोख्त कर रही है, कांग्रेस को बूथ पर मजबूत तैयारी करने की जरूरत है।’ स्वागत से नाराज, ‘बैनर-पोस्टर पर मेरा फोटो न लगाएं’ दिग्विजय सिंह ने मंच से अपने स्वागत पर नाराजगी जताई और कहा कि ‘किसी भी बैनर या पोस्टर पर मेरा फोटो न लगाया जाए। न बैंड-बाजा चाहिए, न पटाखे। 22 साल से विपक्ष में हैं, लड़ाई गंभीर है, दिखावे में समय बर्बाद मत करो।’ उन्होंने कहा कि 2014 में डॉलर के मुकाबले रुपया 90 के आसपास था और अब 100 की ओर बढ़ रहा है। ये आर्थिक कुप्रबंधन का नतीजा है, उन्होंने कहा। ‘लोकतंत्र खतरे में, 26 नवंबर को बड़े आंदोलन की अपील’ दिग्विजय सिंह ने कहा कि भारत में विरोध करने वालों को नोटिस भेजे जा रहे हैं, जबकि न्यूयॉर्क का मेयर बेझिझक अपनी बात कह रहा है। उन्होंने कहा कि ‘लोकतंत्र और संविधान खतरे में हैं। 26 नवंबर संविधान दिवस पर कांग्रेस को बड़े स्तर पर आंदोलन करना चाहिए।’   2028 का लक्ष्य, 4% वोट शिफ्ट जरूरी- दिग्विजय उन्होंने कहा कि युवाओं, महिलाओं और गैर-भाजपा वोटरों से सीधा संवाद बढ़ाना होगा। चार प्रतिशत वोट का शिफ्ट सुनिश्चित करें, तभी 2028 में सरकार बनाई जा सकती है। अंत में दिग्विजय ने कार्यकर्ताओं से कहा कि ‘घर-घर जाओ, लोगों की समस्याएं समझो, विपक्ष की जिम्मेदारी निभाओ।’

सत्ता परिवर्तन पर कांग्रेस में घमासान: शिवकुमार समर्थक सक्रिय, हाईकमान के लिए बढ़ी मुश्किलें

बेंगलुरु कर्नाटक में सत्ता परिवर्तन की मांग अब बगावत की शक्ल लेती नजर आ रही है. डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार के समर्थक विधायकों के सीएम बदलने की मांग को लेकर दिल्ली कूच का सिलसिला जारी है. शिवकुमार समर्थक विधायकों के दो बैच पहले से ही दिल्ली में हैं और अब तीसरा बैच भी पहुंच चुका है. दिल्ली पहुंचे शिवकुमार समर्थक विधायकों के तीसरे बैच में छह से आठ विधायक शामिल बताए जा रहे हैं. जानकारी के मुताबिक, डीके शिवकुमार के खेमे के विधायक चाहते हैं कि कांग्रेस नेतृत्व उनसे संबंधित मुद्दों पर स्थिति स्पष्ट करे. यही वजह है कि विधायक दिल्ली में जमे हुए हैं, मुलाकात के लिए समय मांग रहे हैं. पिछले एक हफ्ते में यह तीसरी बार है, जब डीके शिवकुमार के गुट के विधायक दिल्ली पहुंचे हैं. शिवकुमार समर्थक विधायकों के रुख ने बेंगलुरु से दिल्ली तक सियासी तापमान बढ़ा दिया है. शिवकुमार समर्थक विधायक दिल्ली में जमे हुए हैं, वहीं कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे बेंगलुरु में हैं. कांग्रेस अध्यक्ष को बेंगलुरु से दिल्ली लौटना था, लेकिन फिलहाल उन्होंने दिल्ली वापसी का प्लान टाल दिया है और बेंगलुरु में ही रुक गए हैं. कांग्रेस सूत्रों के मुताबिक पार्टी अध्यक्ष खड़गे सूबे के वरिष्ठ नेताओं के साथ लगातार बैठकें कर रहे हैं. बेंगलुरु में बैठकों का दौर डीके समर्थक विधायकों का दिल्ली कूच, इसे कर्नाटक कांग्रेस के असंतोष से जोड़कर देखा जा रहा है. कर्नाटक में कांग्रेस विधायकों की लामबंदी ने पार्टी नेतृत्व की टेंशन बढ़ा दी है. पार्टी नेतृत्व इस मुद्दे पर किसी भी तरह की जल्दबाजी के मूड में नहीं है. कांग्रेस अध्यक्ष खड़गे की कर्नाटक यात्रा से पहले डिनर मीटिंग में नेताओं ने भी यह डिमांड की थी कि नेतृत्व को स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए. कर्नाटक कांग्रेस में जारी सियासी हलचल को लेकर नेता खुलकर कुछ भी बोलने से बचते नजर आ रहे हैं. डीके शिवकुमार ने भी हाल ही में कहा था कि सभी विधायक मेरे हैं.

कांग्रेस में SIR को लेकर मंथन, उपमुख्यमंत्री साव बोले—बिहार की जनता ने दिखा दिया आईना

रायपुर छत्तीसगढ़ में हो रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) पर मंथन को लेकर प्रदेश प्रभारी सचिन पायलट 24 को रायपुर पहुचेंगे. एसआईआर प्रक्रिया के मंथन में जुटी कांग्रेस पर उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने तंज कसा है. उन्होंने कहा कि बिहार में कांग्रेस ने एसआईआर को लेकर खूब हल्ला मचाया था. कांग्रेस ने वोट चोरी का आरोप लगाया था, लेकिन बिहार की जनता ने मुंहतोड़ जवाब दिया. इसके बावजूद कांग्रेस बेबुनियाद बातें कर के भ्रम फैलाने की कोशिश कर रही है. उन्होंने कहा कि एसआईआर पहली बार नहीं, बल्कि बरसों से होते आ रहा है. कांग्रेस अपना जनाधार खो चुकी है, इसलिए अब जनता को भ्रमित करने की कोशिश कर रही है. जैसे बिहार की जनता ने कांग्रेस को जवाब दिया है, उसी तरह अन्य राज्यों की जनता भी उन्हें जवाब देगी. भारत-दक्षिण अफ्रिका का मैच छत्तीसगढ़ के लिए होगा यादगार : उपमुख्यमंत्री रायपुर में 3 दिसंबर को होने वाले भारत बनाम दक्षिण अफ्रिका के दूसरे वनडे मैच को लेकर उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने कहा कि बड़ी संख्या में क्रिकेट प्रेमी मौजूद है. राजधानी रायपुर में इंटनेशनल वनडे मैच होना छत्तीसगढ़ के लिए सौभाग्य और गर्व का विषय है. 3 दिसंबर को अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट मैच का आगाज होगा. ये मैच छत्तीसगढ़ के लिए यादगार होने वाला है. ACB-EOW की रेड, उपमुख्यमंत्री बोले- जांच एजेंसी अपना काम कर रही हैं प्रदेशभर में आबकारी और डीएमएफ घोटाला मामले में लगभग 18 ठिकानों पर एसीबी-ईओडब्ल्यू की रेड कार्रवाई को लेकर उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने कहा कि दोनों मामलों में लंबे समय से इन्वेस्टिगेशन चल रही है. दोनों ही मामलों की जांच पहले से ही की जा रही. जांच के आधार पर यह कार्रवाई हो रही है. जांच एजेंसी अपना काम कर रही है. ऐतिहासिक होगा डीजी कॉन्फ्रेंस : उपमुख्यमंत्री डीजी कॉन्फ्रेंस को लेकर उपमुख्यमंत्री ने कहा कि भारत सरकार ने डीजी कॉन्फ्रेंस के लिए इस वर्ष छत्तीसगढ़ को चुना है. देशभर के वरिष्ठ अधिकारी एक मंच पर जुटेंगे. आने वाले समय की कार्ययोजना पर चर्चा होगी. यह बहुत ऐतिहासिक कॉन्फ्रेंस होने जा रही है.

कांग्रेस संगठन विस्तार: 45 जिलाध्यक्षों की सूची जारी, 5 पद खाली

जयपुर कांग्रेस ने संगठनात्मक पुनर्गठन के तहत 50 में से 45 जिलाध्यक्षों की नई नियुक्ति कर दी है, जबकि 5 जिलों में नाम का ऐलान अभी बाकी है। नई सूची में 12 मौजूदा विधायकों को जिलाध्यक्ष बनाकर महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई है। कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा के गृह जिले सीकर सहित 8 जिलों में पुराने जिलाध्यक्षों को दोबारा मौका दिया गया है। वहीं, 37 जिलों में नए जिलाध्यक्ष नियुक्त किए गए हैं। ये नियुक्तियां राहुल गांधी के दिशा-निर्देशों के तहत की गई रायशुमारी प्रक्रिया के आधार पर अंतिम रूप से तय की गई हैं, जिसे संगठनात्मक पारदर्शिता और स्थानीय समीकरणों को साधने की रणनीति माना जा रहा है। कांग्रेस ने 12 जिलों में अपने मौजूदा विधायकों को संगठन की कमान सौंपते हुए जिलाध्यक्ष नियुक्त किया है। इनमें अजमेर ग्रामीण से विधायक विकास चौधरी, बांसवाड़ा से अर्जुन सिंह बामणिया, डीडवाना-कुचामन से जाकिर हुसैन गैसावत, धौलपुर से संजय जाटव, जयपुर ग्रामीण वेस्ट से विद्याधर सिंह चौधरी, डूंगरपुर से गणेश घोघरा, झुंझुनूं से रीटा चौधरी, जोधपुर ग्रामीण से गीता बरवड़, करौली से घनश्याम मेहर, सवाई माधोपुर से इंदिरा मीणा, श्रीगंगानगर से रूपिंदर सिंह कुन्नर और चूरू से मनोज मेघवाल शामिल हैं।                                                                                                                            पूरी लिस्ट — कौन नया, कौन रिपीट अजमेर ग्रामीण – विकास चौधरी (नए) अजमेर शहरी – राजकुमार जयपाल (नए) अलवर – प्रकाश गंगावत (नए) बालोतरा – प्रियंका मेघवाल (नए) बांसवाड़ा – अर्जुन बामनिया (नए) बाड़मेर – लक्ष्मणसिंह गोदारा (नए) ब्यावर – किशोर चौधरी (नए) भरतपुर – दिनेशसिंह सूपा (रिपीट) भीलवाड़ा ग्रामीण – रामलाल जाट (नए) भीलवाड़ा शहरी – शिवराम खटीक (नए) बीकानेर ग्रामीण – बिशनाराम सियाग (रिपीट) बीकानेर शहरी – मदनगोपाल मेघवाल (नए) बूंदी – महावीर मीणा (नए) चित्तौड़गढ़ – प्रमोदसिंह सिसोदिया (नए) चूरू – मनोज मेघवाल (नए) दौसा – रामजीलाल ओड (रिपीट) डीडवाना-कुचामन – जाकिर हुसैन गैसावत (रिपीट) डीग – राजीव सिंह (नए) धौलपुर – संजय कुमार जाटव (नए) डूंगरपुर – गणेश घोघरा (नए) हनुमानगढ़ – मनीष मकासर (नए) जयपुर ग्रामीण ईस्ट – गोपाल मीणा (रिपीट) जयपुर ग्रामीण वेस्ट – विद्याधर चौधरी (नए) जैसलमेर – अमरदीन फकीर (नए) जालौर – रमीला मेघवाल (नए) झुंझुनूं – रीटा चौधरी (नए) जोधपुर ग्रामीण – गीता बरवड़ (नए) जोधपुर शहरी – ओमकार वर्मा (नए) करौली – घनश्याम मेहर (नए) खैरथल-तिजारा – बलराम यादव (नए) कोटा ग्रामीण – भानुप्रताप सिंह (रिपीट) कोटा शहरी – राखी गौतम (नए) कोटपूतली-बहरोड़ – इंद्रराज गुर्जर (नए) नागौर – हनुमानराम बांगड़ा (कार्यकारी को प्रमोशन) पाली – शिशुपाल सिंह (नए) फलौदी – मोहम्मद सलीम नागौरी (नए) सलूंबर – परमानंद मेहता (नए) सवाई माधोपुर – इंदिरा मीणा (नए) सीकर – सुनीता गठाला (रिपीट) सिरोही – लीलाराम गरासिया (नए) श्रीगंगानगर – रुपिंदर सिंह कुन्नर (नए) टोंक – सैयद सउद सैदी (नए) उदयपुर ग्रामीण – रघुवीर मीणा (नए) उदयपुर शहर फतेह सिंह राठौड़ 5 जिलों में पूर्व विधायकों को जिम्मेदारी कांग्रेस ने 5 जिलों में पूर्व विधायकों को जिलाध्यक्ष नियुक्त किया है। भीलवाड़ा ग्रामीण में पूर्व मंत्री रामलाल जाट, जयपुर ग्रामीण पूर्व में गोपाल मीणा, कोटपूतली–बहरोड़ में इंद्राज गुर्जर, उदयपुर ग्रामीण में रघुवीर मीणा और अजमेर शहर में राजकुमार जयपाल को नई जिम्मेदारी सौंपी गई है।