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पुरंदर मिश्रा का कांग्रेस पर हमला, बोले– गांधी प्रतिमा का अपमान, विदेशी संस्कृति में पले नेता

रायपुर छत्तीसगढ़ की सियासत में भी गांधी और राम के नाम पर नेताओं की बयानबाजी जारी है. कांग्रेस आज वीबी- जी राम जी बिल को लेकर आजाद चौक स्थित गांधी प्रतिमा के सामने प्रदर्शन कर रही है, जिसे लेकर विधायक पुरंदर ने शर्मनाक बताया है. उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी की बुद्धि भ्रष्ट हो चुकी है, महात्मा गांधी की प्रतिमा के सामने धरना देना शर्मनाक है. महात्मा गांधी ने अंतिम समय में ‘हे राम’ कहा था. भाजपा ने उनके सिद्धांतों के अनुसार काम किया. उन्होंने सोनिया गांधी और राहुल गांधी पर हमला बोलते हुए कहा कि वे विदेश में पैदा हुए, इसलिए संस्कृति नहीं समझते हैं. कांग्रेस का दीया बहुत जल्द बुझने वाला है. केरल मॉब लिंचिंग को लेकर पुरंदर का बयान विधायक पुरंदर ने केरब मॉब लिंचिंग मामले पर बयान दिया है. उन्होंने कहा कि राज्य सरकार और नेता केरल सरकार से लगातार संपर्क में है. जो भी न्यायसंगत होगा, उसी अनुसार कार्रवाई की जाएगी.   त्योहारों के समय शांति और सौहार्द बनाए रखें : विधायक पुरंदर स्कूल में बच्चों को संता क्लॉज बनाने पर बजरंग दल ने चेतावनी दी थी, जिसे पर कांग्रेस वरिष्ठ नेता टीएस सिंह देव ने प्रतिक्रिया देते हुए बजरंग दल को क्रिसमस ट्री लगाने के लिए आमंत्रित किया था. अब इसे लेकर विधायक पुरंदर मिश्रा ने कहा कि कांग्रेस हर समय लोगों को उकसाने का काम करती है. भारत सर्वधर्म समभाव वाला देश है. सभी संगठनों से अपील है ऐसा कोई काम न करें, जिससे मनमुटाव बढ़े. उन्होने अपील करते हुए कहा कि त्योहारों के समय शांति और सौहार्द बनाए रखें. किसी की भावना आहत करने का इरादा नहीं होना चाहिए. प्रशासन सजग है, भ्रम फैलाकर लड़ाई कराने की कोशिशें हो रही हैं. कानून को हाथ में लेने का अधिकार किसी को नहीं है. युवक का ड्रग्स लेते वीडियो वायरल रायपुर में एक युवक का ड्रग्स लेते हुए वायरल हो रहे वीडियो के सवाल विधायक मिश्रा ने कहा कि किसी के बहकावे या लालच में आकर युवा नशा न करें. उन्होंने पुलिस विभाग से कड़ी कार्रवाई का आग्रह किया.

AAP वर्करों पर फायरिंग का मामला, लुधियाना में 18 कांग्रेस कार्यकर्ताओं के खिलाफ केस दर्ज

लुधियाना लुधियाना के बचितर नगर इलाके में ब्लाक समिति चुनाव में हुई जीत का जश्न मना रहे आप वर्करों पर कांग्रेसियों द्वारा चलाई गई गोलियों के मामले में कमिश्नरेट पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। इस मामले में महिला कांग्रेसी पंच सहित पूर्व सरपंच को भी पुलिस ने नामजद किया है। पुलिस ने इस गोलीकांड में अज्ञात सहित 18 के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं के साथ साथ आर्म्स एक्ट के तहत मामला दर्ज किया है।  पुलिस ने यह मामले बचित नगर के रहने वाले प्रवीण कुमार की शिकायत पर पूर्व सरपंच जसबीर सिंह, अजय वीर सिंह, उदयवीर सिंह, निंदा सरपंच, तजिंदर सिंह उर्फ लाडी, पूजा पंच और हरपाल सिंह बब्बू के साथ साथ अज्ञात पर दर्ज किए हैं।  सूत्रों की माने तो पुलिस ने तीन आरोपियों को हिरासत में ले लिया है, लेकिन अभी खुलासा नहीं किया है कि किन तीन लोगों को काबू किया गया है। बाकी आरोपियों की तलाश में पुलिस की टीमें लगातार छापामारी करने में जुटी है। उधर, गोली लगने से घायल हुए लोगों को देर रात सिविल अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। कुछ अब भी अस्पताल में दाखिल है।  प्रवीण कुमार द्वारा पुलिस के पास दर्ज कराई गई शिकायत के मुताबिक जीत के बाद पार्टी वर्कर धन्यवाद रैली निकाल रहे थे। इसी दौरान आरोपियों ने अपने एरिया में रैली नहीं आने दी। इसे लेकर बहसबाजी शुरू हो गई। जिसके बाद आरोपियों ने मारपीट की और सीधी गोलियां चलाई। इस गोलीकांड में पांच लोग घायल हो गए। जिन्हें तुरत इलाज के लिए अस्पताल दाखिल कराया गया। जबकि एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है। जिसमें आप वर्कर कांग्रेसियों को धमका भी रहे है और ललकारें मार कर चेतावनी दे रहे है। दोनों वर्करों के हाथ में तेजधार हथियार पकड़े हुए है। जिसके बाद दोनों पक्षों की तरफ से मारपीट हुई और पत्थरबाजी शुरु हो गई। इस दौरान महिला अपने साथियों को रोक रही है और पूर्व सरपंच जसबीर सिंह ने सीधी गोलियां चलानी शुरु कर दी। जो पांच लोगों की टांगों पर जा लगी। जिससे सभी घायल हो गए।  गोलीकांड के बाद इलाके में दहशत का माहौल बचितर नगर इलाके में हुए गोलीकांड के बाद दहशत का माहौल बना हुआ है। देर रात को भी एरिया में पुलिस का सख्त पहरा रहा और पुलिस की टीमें गश्त करती रही। शुक्रवार सुबह भी पुलिस ने इलाके में गश्त की और टीमें अलग अलग एंगलों से जांच करने में जुटी रही। पुलिस ने इलाके के कुछ लोगों से भी पूछताछ की है और उनके बयान नोट किए है। बाकी पुलिस का कहना है कि जांच जारी है और जल्द ही आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया जाएगा। कांग्रेस नेता को AAP नेता चैलेंज देते वीडियो में दिखे AAP ने झड़प के लिए कांग्रेस को जिम्मेदार ठहराया। हालांकि, इस झड़प और फायरिंग का वीडियो सामने आया है। जिसमें एक घर के बाहर गुट के साथ कांग्रेस नेता को AAP के वर्कर चैलेंज देते हुए नजर आ रहे हैं। इसके बाद उनमें बहस हुई और पहले पथराव और बाद में फायरिंग हुई। इस घटना से गुस्साए AAP के वर्करों ने लुधियाना-मलेरकोटला रोड पर मराडो पुलिस चौकी के पास बीती रात जाम लगा दिया था। AAP से ब्लॉक समिति चुनाव जीते सुखमीत सिंह खन्ना ने कहा था कि मैंने जसदेव नगर से चुनाव जीता। कांग्रेस के गुंडों को यह बात हजम नहीं हुई। इस सीट के लिए राजा वड़िंग उसका परिवार, कुलदीप वैद, उसका परिवार और बैंस ब्रदर्स, सभी ने जोर लगाया, फिर भी वह हार गए। अब सीधी गोलियां चला रहे। हिंसक झड़प के वीडियो में क्या दिख रहा… 1.57 मिनट के वीडियो में दिख रहा है कि आम आदमी पार्टी और कांग्रेस के वर्कर एक दूसरे को ललकार रहे हैं। आम आदमी पार्टी के वर्करों में सबसे आगे हाथ में तलवार लिए निहंग सिंह के बाणे में एक व्यक्ति है। लगातार दोनों गुट एक-दूसरे को धमकियां देते हुए नजर आ रहे है। दोनों गुटों के लोगों के हाथों में ईंट-पत्थर और डंडे नजर आ रहे है। दोनों गुट एक दूसरे को गालियां देने लगे। जब AAP के समर्थक करीब पहुंचे तो सबसे पहले ईंटें कांग्रेस की वर्करों की तरफ से चलाई गई। जिसके बाद आम आदमी पार्टी के वर्करों ने भी ईंटें बरसाई। आप वर्करों ने कांग्रसियों को ईंटें मार कर खदेड़ा। तभी अचानक से गोलियां चलने की आवाज आने लगी। क्रीम रंग की जैकेट पहने व्यक्ति ने आम आदमी पार्टी के वर्करों पर सीधे गोलियां चलाई। फायरिंग कर रहे व्यक्ति की वीडियोग्राफी आप वर्करों ने की। गोलीबारी में अचानक एक गोली बुजुर्ग गुरमुख सिंह के लगी जो जमीन पर गिर गया। जो गोली चला रहा, उसे कांग्रेस नेता जसबीर सिंह बताया जा रहा है। गोली बुजुर्ग को लगने के बाद एक महिला उसे खींचते हुए कहीं ले जाती नजर आई। इस वीडियो में 3 से 4 बार फायरिंग की आवाज सुनी गई।

780 ब्लॉक अध्यक्षों के साथ कांग्रेस की नई फौज तैयार, जीतू पटवारी ने किया बड़ा ऐलान

भोपाल   मध्यप्रदेश कांग्रेस ने ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्षों की सूची जारी कर दी है। प्रदेश प्रभारी हरीश चौधरी के अनुमोदन के बाद 780 ब्लॉक अध्यक्षों की नियुक्ति की गई। जानिए किसे कहां मिली जिम्मेदारी। पीसीसी चीफ जीतू पटवारी के प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बनने के ठीक दो साल बाद मंगलवार 16 दिसंबर को एमपी में कांग्रेस के 780 ब्लॉक अध्यक्ष घोषित किए गए हैं। मध्य प्रदेश कांग्रेस ने ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्षों की सूची जारी कर दी है। लंबी प्रक्रिया और गहन विचार-विमर्श के बाद यह सूची सामने आई है। पिछले लगभग दो महीनों से ब्लॉक अध्यक्षों की नियुक्ति को लेकर मंथन चल रहा था। एमपी के प्रदेश प्रभारी हरीश चौधरी के अनुमोदन के बाद ही इस सूची को अंतिम रूप दिया गया। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने जारी आदेश में कहा कि प्रदेश प्रभारी हरीश चौधरी की स्वीकृति के उपरांत जिलों के अंतर्गत संलग्न सूची के अनुसार नवीन ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्षों की नियुक्ति तत्काल प्रभाव से की जाती है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि सभी नवनियुक्त पदाधिकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, सोनिया गांधी और राहुल गांधी की मंशा के अनुरूप भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की नीतियों, सिद्धांतों और संगठनात्मक अनुशासन का पालन करते हुए कार्य करेंगे तथा ब्लॉक स्तर पर संगठन को सशक्त बनाने में सक्रिय भूमिका निभाएंगे।

16 दिसंबर को कांग्रेस विधायक दल की बैठक, विधानसभा सत्र के लिए रणनीति को मिलेगा अंतिम रूप

भोपाल  मध्यप्रदेश विधानसभा के एक दिवसीय विशेष सत्र से पहले कांग्रेस विधायक दल की महत्वपूर्ण बैठक आज मंगलवार, 16 दिसंबर को शाम 7:30 बजे भोपाल स्थित बी-12 (ए), 74 बंगला में आयोजित की जाएगी। बैठक की अध्यक्षता नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार करेंगे। इस बैठक में 17 दिसंबर को होने वाले विधानसभा के एक दिवसीय विशेष सत्र को लेकर कांग्रेस विधायक दल की रणनीति और कार्ययोजना को अंतिम रूप दिया जाएगा। जानकारी के लिए बतादें कि विशेष सत्र में मध्यप्रदेश को विकसित, आत्मनिर्भर और समृद्ध राज्य बनाने के विषय पर चर्चा प्रस्तावित है। आर्थिक स्थिति से लेकर सामाजिक वर्गों के मुद्दे एजेंडे में विधायक दल की बैठक में प्रदेश की मौजूदा आर्थिक स्थिति, किसानों की समस्याएं, युवाओं के रोजगार, महिलाओं की सुरक्षा, आदिवासी, दलित, पिछड़े और कमजोर वर्गों से जुड़े मुद्दों पर मंथन किया जाएगा। इसके साथ ही सरकार की नीतियों की समीक्षा करते हुए यह तय किया जाएगा कि विशेष सत्र में कांग्रेस किन मुद्दों को प्रमुखता से उठाएगी। उमंग सिंघार बोले-खोखले नारों से नहीं बनेगा आत्मनिर्भर प्रदेश नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा कि प्रदेश को वास्तव में विकसित और आत्मनिर्भर बनाने के लिए खोखले नारों के बजाय ठोस नीतियों और ईमानदार राजनीतिक इच्छाशक्ति की जरूरत है। उन्होंने कहा कि एक दिवसीय विशेष सत्र केवल औपचारिकता न बने, बल्कि इसमें किसानों की आय, युवाओं के रोजगार, महिलाओं की सुरक्षा और प्रदेश की बदहाल आर्थिक स्थिति पर गंभीर चर्चा होनी चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि कांग्रेस विधायक दल विशेष सत्र में जनता की वास्तविक समस्याओं और प्रदेश के भविष्य की ठोस रूपरेखा को मजबूती से विधानसभा में रखेगा। 16वीं विधानसभा का एक दिवसीय अष्टम सत्र विधानसभा सचिवालय ने जानकारी दी है कि राज्य की 16वीं विधानसभा का एक दिवसीय अष्टम सत्र बुधवार, 17 दिसंबर 2025 को आयोजित किया जाएगा। सत्र सुबह 11 बजे से शुरू होगा। यह सत्र भले ही एक दिन का हो, लेकिन इसे महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इसमें मध्य प्रदेश को विकसित, आत्मनिर्भर और समृद्ध राज्य बनाने की दिशा में सरकार की योजनाओं और भविष्य की रणनीति पर चर्चा की जाएगी। विभिन्न दलों के विधायकों को प्रदेश के विकास, अर्थव्यवस्था, रोजगार, किसानों, महिलाओं, युवाओं और बुनियादी ढांचे से जुड़े मुद्दों पर अपने सुझाव रखने का अवसर मिलेगा। 

छत्तीसगढ़ कांग्रेस ने किया जिलाध्यक्षों का बड़ा फेरबदल, नई सूची जारी

रायपुर अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) ने छत्तीसगढ़ के सभी जिला और शहर अध्यक्षों की नई सूची जारी कर दी है। एआईसीसी महासचिव के.सी. वेणुगोपाल के हस्ताक्षर से जारी इस सूची में कुल 41 जिलों/शहरों के लिए नए अध्यक्षों की घोषणा की गई है। संगठन में नई ऊर्जा लाने और आगामी चुनावी तैयारियों को मजबूती देने के उद्देश्य से कई जिलों में महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं। नई सूची के अनुसार— बलौद से श्री चन्द्रेश कुमार हिरवानी बलोदाबाजार से स्मृति सुमित्रा घृतलहरे जांजगीर-चांपा से श्री राजेश अग्रवाल सक्ती जिले से श्रीमती रश्मि गाभेल रायगढ़ सिटी से श्री शख़ा यादव रायगढ़ ग्रामीण से श्री नागेन्द्र नेगी रायपुर सिटी से श्री श्रीकुमार शंकर मेनन रायपुर ग्रामीण से श्री राजेन्द्र पप्पू बंजारे राजनांदगांव सिटी से श्री जितेन्द्र उदय मुदलियार राजनांदगांव ग्रामीण से श्री विपिन यादव इसके अलावा बस्तर, बिलासपुर, दुर्ग, जशपुर, कोरिया, सूरजपुर, सुकमा, नारायणपुर, धमतरी सहित लगभग सभी जिलों में नए अध्यक्ष नियुक्त किए गए हैं। कांग्रेस संगठन का मानना है कि यह नई नियुक्तियां जमीनी स्तर पर पार्टी की पकड़ को मजबूत करेंगी। नई टीम को आगामी राजनीतिक कार्यक्रमों, जनसंपर्क अभियानों और संगठन विस्तार की जिम्मेदारी सौंपी गई है। सूची जारी होते ही प्रदेश कांग्रेस कार्यकर्ताओं में उत्साह देखा जा रहा है, वहीं कुछ जिलों में नए चेहरों को लेकर चर्चा तेज हो गई है। नई जिलाध्यक्ष सूची के साथ ही कांग्रेस ने यह संकेत भी दे दिया है कि आने वाले महीनों में संगठनात्मक स्तर पर और भी बड़े बदलाव संभव हैं।

उदित राज का दिल्ली ब्लास्ट बयान वायरल, कांग्रेस नेता ने घटनाक्रम को बताया ‘आतंकियों का जलवा’

नई दिल्ली अक्सर अपने बयानों की वजह से सुर्खियों और विवादों में रहने वाले कांग्रेस नेता उदित राज ने आतंकी हमलों को दहशतगर्दों का 'जलवा' करार दिया है। उदित राज ने केंद्र की मोदी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि जब भी कहा जाता है कि आतंकवाद को दफन कर दिया, तब-तब आतंकवादी अपना कुछ जलवा दिखा देते हैं। उन्होंने दिल्ली धमाके का जिक्र करते हुए यह बात कही। 10 नवंबर की शाम लाल किले के पास i20 कार में हुए जोरधार धमाके में हमलावर समेत 15 लोगों की जान चली गई, जबकि 20 बुरी तरह घायल हो गए। धमाके को डॉक्टरों के एक आतंकी मॉड्यूल ने अंजाम दिया। जम्मू-कश्मीर के रहने वाले एक डॉक्टर आतंकी उमर नबी ने फिदायीन हमला किया था। जम्मू-कश्मीर की सुरक्षा को लेकर मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला की ओर से दिए गए एक बयान से जुड़े सवाल के जवाब में उदित राज ने कहा, 'क्या गलत कह रहे हैं, स्टेटहुड का प्रॉमिश था। कई बार बेईमानी हो रही है, लूट रहे हैं वहां। लूटने के लिए ही रखा गया है। संभल तो रहा नहीं है। अभी कश्मीर में भी बम ब्लास्ट हुआ था, जब भी यह कहते हैं कि हमने आतंकवाद को दफन कर दिया पाकिस्तान में घुसकर मारा तब आतंकवादी कुछ ना कुछ अपना जलवा दिखा देते हैं।' 'जलवा' कह जाने के बाद खुद को संभालते हुए उदित राज ने अपना वाक्य बदला और कहा कुछ ना कुछ आतंकवादी गतिविधि करके दिखा देते हैं कि तुम्हारी बात में दम नहीं है। उन्होंने कहा, ‘(मोदी सरकार ने) कुछ दिन पहले ही कहा था कि देखो जम्मू कश्मीर के बाहर देश में कहीं आतंकवादी हमला नहीं हुआ, धड़ाक से लाल किला में बम ब्लास्ट करके दिखा दिया। पहले भी यही कहते थे कि कश्मीर में आतंकवाद का सफाया हो गया, पहलगाम करके दिखा दिया।’

फटने वाला है कर्नाटक कांग्रेस का ज्वालामुखी, राहुल गांधी की चुप्पी पर सवाल

बेंगलुरु  कर्नाटक में कांग्रेस का ज्‍वालामुखी फटने के कगार पर है. सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार के बीच का संघर्ष अब सिर्फ राख ही नहीं, लावा भी उगल रहा है. इस सूबे के कांग्रेसी इंतेजार में हैं कि पार्टी 'हाईकमान' समय रहते फायरब्रिगेड की भूमिका निभाएगा, लेकिन सबसे बड़े फायर फाइटर राहुल गांधी ही सीन से गायब हैं. दिलचस्‍प, सिर्फ हाईकमान की भूमिका ही नहीं, इस फसाद की जड़ भी है. जिसका कांग्रेस के भीतर एक लंबा अतीत है. किस तरह दो नेता आपस में टकराते हैं, और पार्टी दो धड़े में बंट जाती है और बिखर जाती है. कर्नाटक में कांग्रेस की सरकार बने ढाई साल से ज्‍यादा हो चुका है, लेकिन माहौल स्थिर होने के उलट अब बेहद बेचैनी भरा है. राजनीतिक गलियारों में सबसे ज्‍यादा चर्चा इसी बात की है कि आखिर मुख्यमंत्री की कुर्सी को लेकर कांग्रेस के भीतर खींचतान कब खत्म होगी. सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार के बीच चली आ रही यह अंदरूनी टकराहट अब सिर्फ बैकग्राउंड की कहानी नहीं रह गई है. इस पूरे मामले में कांग्रेस हाईकमान की भूमिका बेहद अहम होने के बावजूद हाईकमान ही सबसे ज्‍यादा चुप है. और यही चुप्पी आज पूरे संकट का सबसे बड़ा कारण बन गई है. कर्नाटक से आने वाली हर खबर में एक बात बार-बार दोहराई जाती है कि चुनाव के समय किसी तरह का सत्ता-साझेदारी का फॉर्मूला बना था. जिसके मुताबिक सिद्धारमैया आधा कार्यकाल पूरा करेंगे और उसके बाद मुख्यमंत्री की कुर्सी शिवकुमार को मिल सकती है. हालांकि यह फॉर्मूला न तो कभी कांग्रेस ने आधिकारिक तौर पर स्वीकार किया, और न ही किसी दस्तावेज़ में इसका जिक्र है. लेकिन राजनीति में कई बातें कागज पर नहीं लिखी जातीं. बातें कमरे में होती हैं और भरोसे पर टिकी रहती हैं. यही भरोसा आज डगमगाया हुआ दिखता है. ऐसी ही हलचल कभी राजस्‍थान तो कभी छत्‍तीसगढ़ में देखी गई. राजस्‍थान में अशोक गेहलोत और सचिन पायलट के बीच खींचतान इस तरह बढ़ी थी कि लग रहा था कि सचिन भी ज्‍योतिरादित्‍य सिंधिया की तरह पार्टी छोड़ देंगे. ऐसा तो नहीं हुआ, लेकिन राज्‍य में कांग्रेस परोक्ष रूप से दो धड़ों में बंट गई. छत्‍तीसगढ़ में भी भूपेश बघेल और टीएस सिंहदेव के बीच 'पावर-शेयरिंग' फॉर्मूला अमल में नहीं लाया जा सका. कुलमिलाकर, जो एक बार सीएम की कुर्सी पर बैठा, वो फिर उठा नहीं. और कांग्रेस नेतृत्‍व की उस पर एक न चली. सिद्धारमैया और शिवकुमार में से किसका पलड़ा भारी  राजस्‍थान में जैसे अशोक गेहलोत थे, वैसे ही कुछ कर्नाटक में सिद्धारमैया अपने पक्ष में समीकरण साधकर बैठे हैं. वे इस राज्य में लंबे समय से एक लोकप्रिय नेता रहे हैं. कई समुदायों में उनकी पकड़ मजबूत है, उनकी छवि प्रशासनिक अनुभव वाले नेता की है. दूसरी ओर, शिवकुमार कांग्रेस के संगठन, संसाधन और राजनीतिक नेटवर्क के मामले में बेहद ताकतवर नेता माने जाते हैं. वोक्कालिगा समुदाय में उनकी पकड़ किसी से छिपी नहीं है और पार्टी को वापस सत्ता में लाने में उनके योगदान को कांग्रेस का कोई भी नेता नजरअंदाज़ नहीं कर सकता. शिवकुमार सिर्फ कर्नाटक तक ही नहीं, उन्‍हें महाराष्‍ट्र, हिमाचल के राजनीतिक संकट में भी ट्रबलशूटर की भूमिका में देखा गया. लेकिन, कर्नाटक की सियासत में दोनों नेताओं वजन बराबर हो जाता है. और यही बराबरी हाईकमान के लिए सबसे बड़ा सिरदर्द बन गई है. अब सवाल यह है कि हाईकमान क्या कर रहा है? इस सवाल के जवाब से पहले कांग्रेस अध्‍यक्ष मल्लिकार्जुन के बयान का जिक्र करना जरूरी हो जाता है. कर्नाटक के दौरे पर गए खरगे से वहां की कांग्रेस के सभी धड़ों ने मुलाकात की, जिस पर उनका जवाब था कि 'सब पार्टी हाईकमान तय करेगा'. भाजपा इस पर मजे ले रही है कि कांग्रेस अध्‍यक्ष होते भी खरगे पार्टी के हाईकमान नहीं बन पा रहे हैं. और भाजपा की इस दलील को महज राजनीति नहीं कहा जा सकता. खबर यह भी आई कि खरगे ने ढाई साल वाला फार्मूला आगे बढ़ाया था, लेकिन जब बात नहीं बनी तो पीछे हट गए. इधर, दिल्‍ली में डेरा डाले शिवकुमार समर्थक विधायक पार्टी महासचिव और राहुल गांधी के करीब केसी वेणुगोपाल से मुलाकात को तरसते रहे. लेकिन वेणुगोपाल केरल से लौटे ही नहीं. कांग्रेस हाईकमान की कार्यशैली अक्सर 'इंतजार' की होती है. वह दोनों पक्षों की नाराजगी और ताकत को तौलता है, फिर किसी मोड़ पर हस्तक्षेप करता है. लेकिन कर्नाटक के मामले में हाईकमान की चुप्पी काफी लंबी हो गई है. और यही दोनों धड़ों को उम्मीद भी देता है और बेचैनी भी. क्‍या हैं कर्नाटक में कांग्रेस के रिस्‍क फैक्‍टर्स अगर हाईकमान यह कह दे कि सिद्धारमैया पूरे पांच साल मुख्यमंत्री रहेंगे, तो शिवकुमार का धड़ा इसे धोखा मान सकता है और यह नाराजगी पार्टी में खलबली मचा सकती है. जैसा राजस्‍थान और छत्‍तीसगढ़ में हुआ. वहीं अगर हाईकमान यह संकेत दे कि सत्ता परिवर्तन होगा, तो सिद्धारमैया समर्थक खेमे में बेचैनी बढ़ सकती है. यानी एक नेता को खुश करने के चक्कर में दूसरे को नाराज करने का जोखिम बड़ा है, और हाईकमान फिलहाल ऐसा कोई जोखिम लेने के मूड में नहीं दिखता. दूसरी वजह चुनावी राजनीति है. कर्नाटक दक्षिण भारत में कांग्रेस का सबसे मजबूत राज्य है. केरल में कांग्रेस है, लेकिन वहां स्थिति हर चुनाव में पलटती रहती है. तमिलनाडु में कांग्रेस जूनियर पार्टनर है. तेलंगाना में लंबे अरसे बाद सत्‍ता पास आई है. ऐसे में कर्नाटक कांग्रेस के लिए सिर्फ एक राज्य नहीं बल्कि दक्षिण भारत में उसका ग्रोथ इंजन है और ईंधन भी. तीसरी बात यह है कि कर्नाटक में दोनों नेता अपनी-अपनी जगह बेहद महत्वाकांक्षी हैं. लेकिन हाईकमान को यह समझ में आता है कि यदि किसी एक की उम्मीदों को पूरी तरह दबाया गया, तो पार्टी को लंबे समय तक इसका खामियाजा भुगतना पड़ सकता है. इसलिए हाईकमान इस फैसला लेने में आनाकानी कर रहा है. यह संकट सुलझने वाला है या नहीं? फिलहाल राजनीतिक माहौल से ऐसा नहीं लगता कि हाल-फिलहाल कोई बड़ा फैसला होने वाला है. कांग्रेस उच्च नेतृत्व को शायद लग रहा है कि समय के साथ स्थिति खुद शांत हो जाएगी, या फिर कोई ऐसा मौका आएगा जब नेतृत्व परिवर्तन की दिशा में कदम उठाना आसान होगा, जैसे किसी बड़े चुनाव या कैबिनेट फेरबदल के … Read more

जिला प्रभारियों में कांग्रेस ने की नई नियुक्तियां, जीतू पटवारी का गृह जिला इंदौर ग्रामीण खाली

भोपाल  मध्य प्रदेश कांग्रेस ने जिला स्तर पर संगठन को फिर से व्यवस्थित करने के लिए व्यापक बदलाव किए हैं। प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने लगभग सभी जिलों में नए प्रभारी नियुक्त कर दिए हैं। दिलचस्प बात यह है कि पटवारी के गृह जिले इंदौर ग्रामीण की जिम्मेदारी फिलहाल खाली रखी गई है, जबकि बाकी 70 जिलों में प्रभारियों की घोषणा कर दी गई है। पार्टी के इस कदम को आगामी राजनीतिक गतिविधियों की तैयारियों से जोड़कर देखा जा रहा है। प्रमोट हुए नेताओं की जगह नए प्रभारी     पीसीसी अध्यक्ष ने खासतौर पर खंडवा सिटी, नरसिंहपुर और ग्वालियर सिटी जैसे अहम जिलों के प्रभारी बदले हैं। खंडवा सिटी की पूर्व प्रभारी रीना बौरासी, अब महिला कांग्रेस की प्रदेश अध्यक्ष बनाई गई हैं।     इनके स्थान पर खंडवा ग्रामीण के जिला प्रभारी आरके दोगने को प्रभारी बनाया गया है। ये हरदा के विधायक भी हैं। इनको दोनों जिलों का प्रभारी बनाया गया है। ग्वालियर सिटी की प्रभारी हिना कांवरे राष्ट्रीय सचिव बनी हैं। इसके बाद ग्वालियर शहर और ग्रामीण दोनों जिलों का जिम्मा पीसी शर्मा को सौंपा गया है। पीसी शर्मा पूर्व मंत्री हैं। वहीं, सुखदेव पांसे को कांग्रेस के संगठन प्रभारी के तौर पर नरसिंहपुर जिले का जिम्मा सौंपा गया था। इनकी जगह नरसिंहपुर की जिम्मेदारी आलोक मिश्रा को दी गई है। जीतू पटवारी का गृह जिला इसलिए खाली पीसीसी चीफ जीतू पटवारी का गृह जिला इंदौर ग्रामीण के जिला प्रभारी अवनीश भार्गव मध्य प्रदेश कांग्रेस सेवा दल के मुख्य संगठक बनाए गए हैं। भार्गव जैसे सीनियर और समन्वय बनाने वाले नेता का नाम तय नहीं हो पाया। इसलिए फिलहाल इंदौर ग्रामीण के जिला प्रभारी को घोषित नहीं किया गया है। अब जिले वार कांग्रेस के प्रभारियों की लिस्ट देखिए     मुरैना सिटी– राम किंकर गुर्जर     मुरैना ग्रामीण– लाखन सिंह यादव (उपाध्यक्ष)     श्योपुर– सुनील शर्मा (महासचिव)     भिंड शहर व ग्रामीण– बैजनाथ कुशवाह (महासचिव)     ग्वालियर शहर व ग्रामीण– पीसी शर्मा (पूर्व मंत्री)     अशोकनगर– रोशनी यादव (महासचिव)     दतिया- गुड्डू राजा (महासचिव)     शिवपुरी- देवेंद्र शर्मा     गुना- दिनेश गुर्जर (महासचिव)     सागर सिटी- मनोज कपूर (सचिव)     सागर ग्रामीण- घनश्याम सिंह (महासचिव)     छतरपुर- सुरेश राजे (महासचिव)     दमोह- हर्ष यादव (महासचिव)     पन्ना- राजभान सिंह (सचिव)     टीकमगढ़- राव यादवेंद्र सिंह यादव (महासचिव)     निवाड़ी– रामलखन दंडोतिया     रीवा शहर व ग्रामीण- संजय शर्मा (महासचिव)     मऊगंज– मकसूद अहमद     सतना सिटी– सुनील सर्राफ (सचिव)     सतना ग्रामीण- विनय सक्सेना (महासचिव)     मैहर– गुरमीत सिंह (मंगू) (महासचिव)     सीधी– दिलीप मिश्रा     सिंगरौली शहर व ग्रामीण- कविता पांडे (महासचिव)     शहडोल– नारायण पट्टा (महासचिव)     अनूपपुर– सुखेन्द्र सिंह बन्ना     उमरिया – नीरज बघेल (सचिव)     डिंडोरी – फुंदेलाल मार्को (महासचिव)     जबलपुर सिटी – राजकुमार खुराना     जबलपुर ग्रामीण- रजनीश सिंह (महासचिव)     कटनी शहर व ग्रामीण – वीरेंद्र द्विवेदी (महासचिव)     बालाघाट – लखन घनघोरिया (उपाध्यक्ष)     छिंदवाड़ा सिटी – सुनील जायसवाल (महासचिव)     पांढुर्ना – रामू टेकाम (महासचिव)     मंडला – किरण अहिरवार (महासचिव)     नरसिंहपुर – आलोक मिश्रा     सिवनी – सोहन वाल्मीकि (महासचिव)     नर्मदापुरम – ओम पटेल     बैतूल – सुनील उइके     हरदा – रचना जैन (संयुक्त सचिव)     भोपाल सिटी – रवि जोशी (उपाध्यक्ष)     भोपाल ग्रामीण – विनय बाकलीवाल (महासचिव)     रायसेन – शैलेन्द्र पटेल (महासचिव)     राजगढ़ – सुरेंद्र सिंह हनी बघेल (उपाध्यक्ष)     सीहोर – जयश्री हरिकिरण (महासचिव)     विदिशा – प्रभु सिंह ठाकुर (महासचिव)     उज्जैन सिटी – अमित शर्मा (महासचिव)     उज्जैन ग्रामीण – चंदर सौंधिया (महासचिव)     देवास सिटी – सुरेंद्र सिंह (शेरा)     देवास ग्रामीण – सदाशिव यादव     रतलाम शहर व ग्रामीण- प्रताप ग्रेवाल (महासचिव)     शाजापुर – निर्मल मेहता     मंदसौर – मनोज राजानी     नीमच – अरविंद बागड़ी     आगर–मालवा – आतिफ अकील (महासचिव)     इंदौर सिटी – संजीव सक्सेना (महासचिव)     इंदौर ग्रामीण- (रिक्त)     खंडवा शहर व ग्रामीण- आरके दोगने (महासचिव)     बुरहानपुर शहर व ग्रामीण- ग्यारसीलाल रावत (महासचिव)     धार – रघु परमार (महासचिव)     झाबुआ – अमन बजाज     खरगोन – जय सिंह ठाकुर (महासचिव)     अलीराजपुर – रामवीर सिकरवार (महासचिव)     बड़वानी – झूमा सोलंकी (उपाध्यक्ष) पदाधिकारियों के प्रमोशन से खाली हुई जगह कुछ जिलों में प्रभारी इसलिए बदले गए क्योंकि मौजूदा पदाधिकारी प्रदेश या राष्ट्रीय स्तर पर प्रमोट हो चुके हैं। खंडवा सिटी की प्रभारी रीना बौरासी महिला कांग्रेस की प्रदेश अध्यक्ष बनाई गई हैं। उनकी जगह खंडवा ग्रामीण के प्रभारी आरके दोगने को खंडवा शहर और ग्रामीण दोनों की जिम्मेदारी दी गई है। इसी तरह ग्वालियर शहर की प्रभारी हिना कांवरे के राष्ट्रीय सचिव बनने के बाद ग्वालियर ग्रामीण के प्रभारी पीसी शर्मा को शहर और ग्रामीण दोनों का प्रभार सौंपा गया है। नरसिंहपुर में भी बदलाव हुआ है। यहां संगठन प्रभारी सुखदेव पांसे के पास जिले का प्रभार था, जिसे अब आलोक मिश्रा को सौंप दिया गया है। गृह जिले इंदौर ग्रामीण का प्रभार खाली क्यों रखा गया इंदौर ग्रामीण के प्रभारी अवनीश भार्गव को मध्य प्रदेश कांग्रेस सेवा दल का मुख्य संगठक नियुक्त किया गया है। पार्टी अंदरूनी तौर पर ऐसे वरिष्ठ और सर्वमान्य नेता की तलाश में है, जो इस महत्वपूर्ण जिले में समन्वय कायम रख सके। इसी वजह से इंदौर ग्रामीण की जिम्मेदारी फिलहाल रिक्त रखी गई है। जिलों के हिसाब से नियुक्त किए गए नए प्रभारी मुरैना जिले में राम किंकर गुर्जर (सिटी) और लाखन सिंह यादव (उपाध्यक्ष, ग्रामीण) को प्रभार मिला है। श्योपुर में सुनील शर्मा (महासचिव), भिंड में बैजनाथ कुशवाह (महासचिव), ग्वालियर शहर और ग्रामीण दोनों में पीसी शर्मा (पूर्व मंत्री) की नियुक्ति की गई है। अशोकनगर में रोशनी यादव (महासचिव), दतिया में गुड्डू राजा (महासचिव), शिवपुरी में देवेंद्र शर्मा और गुना में दिनेश गुर्जर (महासचिव) को दायित्व दिया गया है। सागर सिटी में मनोज कपूर (सचिव) और सागर ग्रामीण में घनश्याम सिंह (महासचिव) को जिम्मेदारी … Read more

दिग्विजय सिंह ने इंदौर में जताई राहुल गांधी की तारीफ, कहा—‘कांग्रेस को मिली नई ऊर्जा’

इंदौर कांग्रेस कार्यकर्ताओं की SIR तैयारी को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री और राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह ने  इंदौर में अहम बैठक ली। बैठक में उन्होंने संगठन की कमियों, बूथ प्रबंधन, और आगामी चुनावी रणनीति पर खुलकर बात की। दिग्विजय सिंह ने कहा कि ‘कॉन्ग्रेस लंबे समय तक सोई रही, जबकि भाजपा बूथ स्तर तक पूरी तरह सक्रिय थी। लेकिन राहुल गांधी ने पार्टी को फिर से जगाया है। छह महीने पहले तक कांग्रेस के 90% नेताओं को बीएलए और बूथ एजेंट में अंतर तक नहीं पता था, जबकि भाजपा के पास बूथ की हर जानकारी रहती है।’ भाजपा पर प्रहार- जनता के पैसों से खरीद-फरोख्त उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा बूथ एजेंटों को लालच देकर अपने पक्ष में करने की कोशिश करती है। उन्होंने कहा कि भाजपा जनता के पैसे से खरीद-फरोख्त कर रही है, कांग्रेस को बूथ पर मजबूत तैयारी करने की जरूरत है।’ स्वागत से नाराज, ‘बैनर-पोस्टर पर मेरा फोटो न लगाएं’ दिग्विजय सिंह ने मंच से अपने स्वागत पर नाराजगी जताई और कहा कि ‘किसी भी बैनर या पोस्टर पर मेरा फोटो न लगाया जाए। न बैंड-बाजा चाहिए, न पटाखे। 22 साल से विपक्ष में हैं, लड़ाई गंभीर है, दिखावे में समय बर्बाद मत करो।’ उन्होंने कहा कि 2014 में डॉलर के मुकाबले रुपया 90 के आसपास था और अब 100 की ओर बढ़ रहा है। ये आर्थिक कुप्रबंधन का नतीजा है, उन्होंने कहा। ‘लोकतंत्र खतरे में, 26 नवंबर को बड़े आंदोलन की अपील’ दिग्विजय सिंह ने कहा कि भारत में विरोध करने वालों को नोटिस भेजे जा रहे हैं, जबकि न्यूयॉर्क का मेयर बेझिझक अपनी बात कह रहा है। उन्होंने कहा कि ‘लोकतंत्र और संविधान खतरे में हैं। 26 नवंबर संविधान दिवस पर कांग्रेस को बड़े स्तर पर आंदोलन करना चाहिए।’   2028 का लक्ष्य, 4% वोट शिफ्ट जरूरी- दिग्विजय उन्होंने कहा कि युवाओं, महिलाओं और गैर-भाजपा वोटरों से सीधा संवाद बढ़ाना होगा। चार प्रतिशत वोट का शिफ्ट सुनिश्चित करें, तभी 2028 में सरकार बनाई जा सकती है। अंत में दिग्विजय ने कार्यकर्ताओं से कहा कि ‘घर-घर जाओ, लोगों की समस्याएं समझो, विपक्ष की जिम्मेदारी निभाओ।’

सत्ता परिवर्तन पर कांग्रेस में घमासान: शिवकुमार समर्थक सक्रिय, हाईकमान के लिए बढ़ी मुश्किलें

बेंगलुरु कर्नाटक में सत्ता परिवर्तन की मांग अब बगावत की शक्ल लेती नजर आ रही है. डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार के समर्थक विधायकों के सीएम बदलने की मांग को लेकर दिल्ली कूच का सिलसिला जारी है. शिवकुमार समर्थक विधायकों के दो बैच पहले से ही दिल्ली में हैं और अब तीसरा बैच भी पहुंच चुका है. दिल्ली पहुंचे शिवकुमार समर्थक विधायकों के तीसरे बैच में छह से आठ विधायक शामिल बताए जा रहे हैं. जानकारी के मुताबिक, डीके शिवकुमार के खेमे के विधायक चाहते हैं कि कांग्रेस नेतृत्व उनसे संबंधित मुद्दों पर स्थिति स्पष्ट करे. यही वजह है कि विधायक दिल्ली में जमे हुए हैं, मुलाकात के लिए समय मांग रहे हैं. पिछले एक हफ्ते में यह तीसरी बार है, जब डीके शिवकुमार के गुट के विधायक दिल्ली पहुंचे हैं. शिवकुमार समर्थक विधायकों के रुख ने बेंगलुरु से दिल्ली तक सियासी तापमान बढ़ा दिया है. शिवकुमार समर्थक विधायक दिल्ली में जमे हुए हैं, वहीं कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे बेंगलुरु में हैं. कांग्रेस अध्यक्ष को बेंगलुरु से दिल्ली लौटना था, लेकिन फिलहाल उन्होंने दिल्ली वापसी का प्लान टाल दिया है और बेंगलुरु में ही रुक गए हैं. कांग्रेस सूत्रों के मुताबिक पार्टी अध्यक्ष खड़गे सूबे के वरिष्ठ नेताओं के साथ लगातार बैठकें कर रहे हैं. बेंगलुरु में बैठकों का दौर डीके समर्थक विधायकों का दिल्ली कूच, इसे कर्नाटक कांग्रेस के असंतोष से जोड़कर देखा जा रहा है. कर्नाटक में कांग्रेस विधायकों की लामबंदी ने पार्टी नेतृत्व की टेंशन बढ़ा दी है. पार्टी नेतृत्व इस मुद्दे पर किसी भी तरह की जल्दबाजी के मूड में नहीं है. कांग्रेस अध्यक्ष खड़गे की कर्नाटक यात्रा से पहले डिनर मीटिंग में नेताओं ने भी यह डिमांड की थी कि नेतृत्व को स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए. कर्नाटक कांग्रेस में जारी सियासी हलचल को लेकर नेता खुलकर कुछ भी बोलने से बचते नजर आ रहे हैं. डीके शिवकुमार ने भी हाल ही में कहा था कि सभी विधायक मेरे हैं.