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सांस लेना हुआ मुश्किल: दिल्ली-NCR में प्रदूषण खतरनाक स्तर पर, AQI 400+

नई दिल्ली देश की राजधानी में ठंड की दस्तक के साथ ही प्रदूषण का कहर फिर से शुरू हो गया है। दिल्ली और उसके पड़ोसी इलाकों (NCR) में हवा की गुणवत्ता एक बार फिर खतरनाक स्तर पर पहुंच गई है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के ताज़ा आंकड़ों के मुताबिक दिल्ली का औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 390 दर्ज किया गया है जो बहुत खराब श्रेणी में आता है लेकिन शहर के कई हिस्सों में यह आंकड़ा 400 के पार चला गया है जो सीधे तौर पर स्वास्थ्य के लिए गंभीर (Severe) स्थिति है। प्रदूषण के हॉटस्पॉट: कहां कितनी जहरीली है हवा? दिल्ली के कई इलाकों में प्रदूषण का स्तर इतना बढ़ गया है कि वहां सांस लेना मुश्किल हो रहा है। नेहरू नगर इस समय दिल्ली का सबसे प्रदूषित इलाका बना हुआ है। इलाका     AQI स्तर     श्रेणी नेहरू नगर     442     गंभीर (Severe) पटपड़गंज     431     गंभीर (Severe) शादीपुर     429     गंभीर (Severe) आरके पुरम     412     गंभीर (Severe) सीरी फोर्ट     402     गंभीर (Severe) शिवाजी पार्क     400     गंभीर (Severe) सरकार का बड़ा फैसला: GRAP-4 की दो पाबंदियां अब स्थायी दिल्ली की हवा में बढ़ते जहर को देखते हुए दिल्ली सरकार ने सख्त कदम उठाए हैं। प्रदूषण नियंत्रण के लिए लागू होने वाले ग्रैप-4 (GRAP-4) के तहत दो महत्वपूर्ण पाबंदियों को अब स्थायी (Permanent) कर दिया गया है। इसका मतलब है कि अब हवा में सुधार होने के बावजूद भी ये दो नियम लागू रहेंगे ताकि भविष्य में प्रदूषण को बढ़ने से रोका जा सके। क्या होता है AQI का मतलब? वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) हवा में मौजूद प्रदूषकों की मात्रा को दर्शाता है।     0-50: अच्छा     51-100: संतोषजनक     301-400: बहुत खराब     401-500: गंभीर स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि 400 से ऊपर का AQI स्वस्थ लोगों को भी बीमार कर सकता है और पहले से बीमार लोगों के लिए जानलेवा साबित हो सकता है।  

कोहरे की चादर में दिल्ली-NCR, फ्लाइट ऑपरेशंस पर बड़ा असर

नई दिल्ली दिल्ली और आसपास के इलाकों में आज सुबह घना कोहरा और जहरीला स्मॉग छाया, जिससे विजिबिलिटी गंभीर रूप से प्रभावित हुई। सड़कें धुंधली दिखाई दीं, हवाई उड़ानें प्रभावित हुईं और सांस लेना भी मुश्किल हो गया। गुरुवार सुबह इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट से कुल 22 फ्लाइट्स को रद्द करना पड़ा। इनमें 11 अराइवल और 11 डिपार्चर उड़ानें शामिल हैं। एयरपोर्ट अधिकारियों के अनुसार, सुबह विजिबिलिटी ‘जीरो’ के करीब पहुँच गई थी, जिसकी वजह से कई उड़ानों को सुरक्षित संचालन के लिए रोकना पड़ा। यात्रियों को अपनी फ्लाइट की नवीनतम जानकारी एयरलाइन से लेने की सलाह दी गई है। एयरपोर्ट पर कई उड़ानें प्रभावित दिल्ली के इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट ने सुबह 8:10 बजे एक एडवाइजरी जारी की, जिसमें घने कोहरे के कारण उड़ानों में देरी या रुकावट की चेतावनी दी गई। एयरपोर्ट ने कहा, “घने कोहरे के चलते फ्लाइट ऑपरेशंस CAT III कंडीशंस में चल रहे हैं, जो देरी या बाधा पैदा कर सकते हैं। हम सभी स्टेकहोल्डर्स के साथ मिलकर पैसेंजर्स की असुविधा कम करने की कोशिश कर रहे हैं। लेटेस्ट फ्लाइट स्टेटस के लिए अपनी एयरलाइन से संपर्क करें। असुविधा के लिए खेद है।” एयर इंडिया और स्पाइसजेट जैसी एयरलाइंस ने भी यात्रियों को फ्लाइट स्टेटस चेक करने की सलाह दी। हालांकि, बाद में एयरपोर्ट ने बताया कि उड़ानें सामान्य रूप से चल रही हैं। उत्तर भारत के कई एयरपोर्ट्स पर देरी और रद्द की खबरें आईं। दिल्ली में जहरीली हवा का खेल केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के अनुसार, दिल्ली का औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 358 पर पहुंच गया है, जो ‘बहुत खराब’ कैटेगरी में आता है। हालांकि, कुछ इलाके ‘सीवियर’ यानी गंभीर स्थिति में हैं। आनंद विहार: AQI 415 (‘सीवियर’), आरके पुरम: 374, जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम: 349, आईएसबीटी कश्मीरी गेट: 384, नोएडा, ग्रेटर नोएडा और गुरुग्राम में भी हवा की गुणवत्ता खराब बनी रही। मौसम विभाग और CPCB का अनुमान है कि अगले छह दिनों तक AQI इसी रेंज में रहने की संभावना है। मौसम को लेकर अलर्ट आईएमडी के मुताबिक, गुरुवार सुबह उत्तर-पश्चिम दिशा से 10 किमी/घंटा की रफ्तार से हवाएं चलीं, जो दोपहर में बढ़कर 15 किमी/घंटा तक पहुंच सकती हैं। शाम होते-होते हवा की रफ्तार फिर कम होने की संभावना है। मौसम विभाग का कहना है कि ये हवाएं स्मॉग को थोड़ा फैलाने में मदद करेंगी, जिससे विजिबिलिटी में सुधार हो सकता है। न्यूनतम तापमान में अगले दो दिनों तक कोई बड़ा बदलाव नहीं होगा। उसके बाद पारा करीब 2 डिग्री तक बढ़ने का अनुमान है। बुधवार को दिल्ली का न्यूनतम तापमान 10.4 डिग्री रिकॉर्ड किया गया, जो सामान्य से 2.3 डिग्री कम है। अधिकतम तापमान 24.7 डिग्री दर्ज हुआ, जो सामान्य से 2.5 डिग्री अधिक रहा। प्रदूषण पर कड़ी कार्रवाई गंभीर प्रदूषण की स्थिति को देखते हुए CAQM ने दिल्ली-NCR में ग्रैप स्टेज-IV लागू कर दिया है। इसके तहत गुरुवार से बीएस-VI से नीचे के नॉन-दिल्ली रजिस्टर्ड वाहनों का प्रवेश पूरी तरह प्रतिबंधित कर दिया गया है। वहीं, जिन वाहनों के पास वैध पीयूसी सर्टिफिकेट नहीं है, उन्हें ईंधन भी नहीं मिलेगा। सरकार का कहना है कि यह कड़े कदम जहरीले स्मॉग पर काबू पाने और शहर की वायु गुणवत्ता में सुधार लाने के लिए अनिवार्य हो गए हैं। अधिकारियों को उम्मीद है कि इन उपायों से प्रदूषण के स्तर में गिरावट आएगी और हवा कुछ हद तक साफ हो सकेगी।

आने वाले दो दिन ठंड की मार, राजधानी में पारा गिरने की संभावना

नई दिल्ली राजधानी दिल्ली में आज शुक्रवार को शीत लहर के आसार हैं। मौसम विभाग ने इसके लिए येलो अलर्ट जारी किया है। विभाग के अनुसार, आज आसमान साफ रहेगा और सुबह हल्की धुंध देखने को मिल सकती है। कुछ इलाकों में शीत लहर चलने की संभावना भी जताई गई है। अधिकतम और न्यूनतम तापमान में गिरावट के संकेत हैं। हालांकि, फिलहाल शीत लहर का अलर्ट सिर्फ शुक्रवार के लिए ही प्रभावी रहेगा। मौसम विभाग ने आज के लिए तापमान और शीत लहर को लेकर विस्तृत पूर्वानुमान जारी किया है। मौसम विभाग के अनुसार, अगले 24 घंटों में न्यूनतम तापमान में करीब 1-2 डिग्री सेल्सियस की गिरावट हो सकती है। इसके बाद, अगले तीन दिनों में न्यूनतम तापमान में लगभग 3-4 डिग्री सेल्सियस की बढ़ोतरी की संभावना है। वहीं, अधिकतम तापमान अगले दो दिनों में 2-3 डिग्री सेल्सियस तक गिर सकता है। कुल मिलाकर, न्यूनतम और अधिकतम दोनों तापमान सामान्य से नीचे बने रहेंगे। दिल्ली में गुरुवार को दिसंबर की अब तक की सबसे ठंडी सुबह दर्ज की गई। इस दौरान न्यूनतम तापमान 5.6 डिग्री सेल्सियस रहा, जो इससे पहले 1 दिसंबर को दर्ज हुए 5.7 डिग्री से भी कम है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने शुक्रवार के लिए शीतलहर का येलो अलर्ट जारी किया है। विभाग ने अनुमान जताया है कि शुक्रवार को न्यूनतम तापमान गिरकर 4 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है। IMD ने नागरिकों को सलाह दी है कि घर से बाहर निकलते समय सर्द हवाओं से बचाव करें और गर्म कपड़े पहनकर ही बाहर निकलें। गुरुवार को दर्ज न्यूनतम तापमान में 3.9 डिग्री सेल्सियस की गिरावट देखी गई। वहीं, अधिकतम तापमान भी सामान्य से 2.2 डिग्री कम रहा और 23.1 डिग्री सेल्सियस पर दर्ज किया गया। IMD का कहना है कि शुक्रवार को न्यूनतम तापमान 1–2 डिग्री और गिरकर करीब 4 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है। अधिकतम तापमान 21 से 23 डिग्री सेल्सियस के बीच रहने का अनुमान है। सुबह के समय सतही सर्द हवाओं की रफ्तार 5–10 किलोमीटर प्रति घंटा रहेगी, जो दोपहर तक बढ़कर 10–15 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंच सकती है। मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, उत्तरी पंजाब में सक्रिय नया पश्चिमी विक्षोभ इस बदलाव की मुख्य वजह है और इसका असर दिल्ली में भी दिखाई देगा। गुरुवार सुबह राजधानी में हल्का कोहरा छाया रहा, लेकिन दोपहर में हवाएं तेज होने से आसमान साफ हुआ और धूप खिली रही। मौसम विभाग के अनुसार, शुक्रवार को आसमान साफ रहेगा और सुबह हल्की धुंध छा सकती है। कुछ इलाकों में शीतलहर चलने की संभावना भी बनी हुई है। विभाग ने अधिकतम और न्यूनतम तापमान में गिरावट के संकेत दिए हैं। हालांकि शीतलहर का अलर्ट केवल शुक्रवार के लिए ही प्रभावी है। शनिवार से बुधवार तक शीतलहर के लिए किसी तरह की चेतावनी जारी नहीं की गई है। दिल्ली-NCR का AQI बेहद खराब गुरुवार सुबह दिल्ली में दिन की शुरुआत धुंध और हल्के कोहरे के साथ हुई। आसमान में छाई धुंध की परत के कारण विजिबिलिटी कम रही। दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (DPCC) के अनुसार, सुबह राजधानी का एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 304 रिकॉर्ड किया गया, जो ‘बेहद खराब’ श्रेणी में आता है और स्वास्थ्य के लिए खतरनाक स्थिति दर्शाता है। बुधवार की तुलना में AQI में 38 अंकों की गिरावट दर्ज की गई, लेकिन इस मामूली सुधार से राहत नहीं मिल पाई। विशेषज्ञों का कहना है कि धुंध न केवल विजिबिलिटी प्रभावित करती है, बल्कि सांस संबंधी समस्याओं का खतरा भी बढ़ा देती है। ऐसे में लोगों को मास्क पहनकर बाहर निकलने और खुले में लंबे समय तक रुकने से बचने की सलाह दी जा रही है। गुरुवार सुबह AQI 299 के साथ हल्का सुधार दिखा था, लेकिन दोपहर तक वायु गुणवत्ता फिर बिगड़ गई। वायु गुणवत्ता प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली के अनुसार, अगले कुछ दिनों तक दिल्ली की हवा ‘बेहद खराब’ श्रेणी में ही रहने की संभावना है। दिल्ली में वायु प्रदूषण से हालात खराब सीपीसीबी के ‘समीर’ ऐप के आंकड़ों के अनुसार, दिल्ली के 40 निगरानी केंद्रों में से 27 केंद्रों पर पूरे दिन ‘बेहद खराब’ श्रेणी की वायु गुणवत्ता दर्ज की गई। इनमें नेहरू नगर सबसे प्रदूषित रहा, जहां AQI 362 तक पहुंच गया। पूरे हफ्ते के रुझान पर नजर डालें तो दिल्ली की वायु गुणवत्ता में लगातार उतार-चढ़ाव देखा गया। 30 नवंबर को AQI 279 था, जो 1 दिसंबर को बढ़कर 304 हो गया। 2 दिसंबर को यह स्तर 372 तक पहुंच गया, जो गंभीर श्रेणी की ओर बढ़ता संकेत था। इसके बाद हल्के सुधार के बावजूद गुरुवार की शाम फिर गिरावट देखी गई। 3 दिसंबर को AQI 342 दर्ज किया गया। वहीं, दिल्ली के वायु गुणवत्ता प्रबंधन के लिए निर्णय सहायता प्रणाली के अनुसार, गुरुवार को दिल्ली के कुल प्रदूषण में परिवहन क्षेत्र का योगदान 13.7% रहा, जो स्थानीय प्रदूषण स्रोतों में सबसे अधिक है।

SC की केंद्र को फटकार: WHO 50 को खतरनाक कहता है, दिल्ली-NCR 450 पर कैसे?

नई दिल्ली दिल्ली-NCR में खतरनाक स्तर पर पहुंच चुके वायु प्रदूषण के मामले में सुप्रीम कोर्ट  ने सोमवार को सुनवाई के दौरान कड़ा रुख अपनाया और केंद्र सरकार को महत्वपूर्ण निर्देश दिए। मुख्य न्यायाधीश बीआर गवई की अध्यक्षता वाली पीठ जिसमें जस्टिस विनोद चंद्रन और जस्टिस एनवी अंजारिया भी शामिल थे ने समस्या के समाधान के लिए दीर्घकालिक और व्यापक दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता पर बल दिया।  सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी CJI गवई ने मामले की सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार को स्पष्ट सलाह दी कि वह सभी हितधारकों को एक साथ बुलाकर इस गंभीर समस्या का समाधान निकाले। CJI ने कहा, "अल्पकालिक कार्रवाई से समस्या हल नहीं होगी। हमें व्यापक दीर्घकालिक समाधान चाहिए।" कोर्ट ने निर्माण कार्यों पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने जैसे अल्पकालिक उपायों पर चिंता व्यक्त की। CJI ने कहा, "हम निर्माण पूरी तरह बंद नहीं कर सकते… इससे यूपी-बिहार के मजदूरों पर सीधा असर पड़ता है। हम सिर्फ एक पक्ष को देखकर आदेश नहीं दे सकते। जमीन पर ऐसे निर्देशों से कई लोग प्रभावित होते हैं।" सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को सुझाव दिया कि वह पंजाब, हरियाणा, दिल्ली और अन्य NCR राज्यों को शामिल करके एक संयुक्त रणनीति तैयार करे।

प्रदूषण से बेहाल दिल्ली: खतरनाक स्तर पर AQI, स्मॉग में छिपी राजधानी की पहचानें

नई दिल्ली  राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली-एनसीआर में सर्दी की शुरुआत के साथ ही हवा की गुणवत्ता खतरनाक स्तर पर पहुंच गई है। शनिवार सुबह दिल्ली के कई हिस्सों में घना स्मॉग छाया रहा, जिससे लोगों को आंखों में जलन और सीने में घुटन महसूस हुई। इंडिया गेट पर विजिबिलिटी घटी दिल्ली के पॉपुलर प्लेस इंडिया गेट पर सुबह की सैर के लिए आने वाले लोगों को घने स्मॉग के कारण निराशा हाथ लगी। शनिवार सुबह इंडिया गेट स्मॉग की मोटी चादर में लगभग ओझल हो गया। सुबह 8 बजे यहां AQI 369 दर्ज किया गया, जो 'बेहद खराब' श्रेणी में आता है। हॉटस्पॉट में हवा 'गंभीर' श्रेणी के करीब CPCB के आंकड़ों के मुताबिक प्रदूषण के हॉटस्पॉट माने जाने वाले इलाकों में स्थिति काफी चिंताजनक है। आनंद विहार में सुबह 8 बजे AQI 424 दर्ज हुआ, जो 'गंभीर' श्रेणी की तरफ इशारा करता है। वजीरपुर की हवा का स्तर 447 तक पहुंच गया, जो किसी भी शहर के लिए बेहद खतरनाक है। इसके अलावा लोधी रोड, नजफगढ़, करोल बाग और आईजीआई एयरपोर्ट के पास भी हवा की गुणवत्ता 'बेहद खराब' श्रेणी में बनी हुई है। हवा में धूल कणों, धुएं और नमी के मिश्रण ने एक मोटी स्मॉग की परत बना दी है, जिससे विजिबिलिटी भी काफी कम हो गई है। NCR के हाल भी चिंताजनक दिल्ली से सटे NCR क्षेत्रों में भी हालात बेहतर नहीं हैं। नोएडा सेक्टर-1 में AQI 387 दर्ज किया गया। वहीं गुरुग्राम सेक्टर-51 में AQI 285 रहा। सेहत के लिए गंभीर खतरा इस जहरीली हवा का सबसे बुरा असर बच्चों, बुजुर्गों और सांस या हृदय रोग से पीड़ित मरीजों पर पड़ रहा है। उन्हें सांस लेने में तकलीफ, आंखों में जलन और गले में खराश जैसी शिकायतें हो रही हैं। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि लंबे समय तक इतनी खराब हवा में रहने से फेफड़ों को स्थायी नुकसान पहुंच सकता है और कैंसर जैसे गंभीर रोगों का खतरा बढ़ जाता है। लोगों के लिए जारी की सलाह दिल्ली सरकार प्रदूषण कम करने के लिए कच्चे ईंधन वाले वाहनों पर रोक, निर्माण स्थलों पर धूल-नियंत्रण के कड़े उपाय, एंटी-स्मॉग गन का उपयोग और सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देने जैसे कदम उठा रही है। आम जनता के लिए जारी की ये सलाह ·         सुबह और शाम के समय (जब प्रदूषण सबसे अधिक होता है) बाहर निकलने से बचें। ·         घर से बाहर निकलने पर N-95 मास्क का उपयोग करें। ·         घरों में एयर प्यूरीफायर का इस्तेमाल करें और शरीर को हाइड्रेट रखें। सरकारी एजेंसियां लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं, लेकिन दिल्ली और एनसीआर में हवा की यह गुणवत्ता यहां के निवासियों के लिए एक बड़ी चिंता का विषय बनी हुई है।

प्रदूषण पर सख्ती: दिल्ली-NCR में पारंपरिक वाहनों पर प्रतिबंध की संभावना, सुप्रीम कोर्ट का झुकाव ईवी की ओर

दिल्ली-NCR दिल्ली-NCR में बढ़ते प्रदूषण पर सुप्रीम कोर्ट लगातार चिंता जता रहा है। सरकार की एक याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अब बाजार में बड़े इलेक्ट्रिक वाहन (EV) आसानी से उपलब्ध हैं, इसलिए समान आकार के आंतरिक दहन इंजन (ICE) वाले पेट्रोल-डीजल वाहनों पर चरणबद्ध तरीके से प्रतिबंध लगाया जा सकता है। कोर्ट ने सरकार को इस दिशा में ठोस नीति तैयार करने और प्रदूषण नियंत्रण के लिए प्रभावी कदम उठाने पर जोर दिया। अदालत पहले भी कई बार पेट्रोल-डीजल वाहनों के उपयोग पर सख्ती दिखा चुकी है, खासकर जब दिल्ली-एनसीआर में AQI लगातार खतरनाक स्तर पर पहुंच जाता है। सुप्रीम कोर्ट ने देश में इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) को तेजी से अपनाने की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा है कि पेट्रोल-डीजल से चलने वाले महंगे लग्जरी वाहनों को चरणबद्ध तरीके से सड़क से हटाया जाना चाहिए। न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ गुरुवार को उस याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें सरकार की EV खरीद और उपयोग को बढ़ावा देने वाली नीतियों के प्रभावी कार्यान्वयन की मांग की गई है। पीठ ने कहा कि अब बड़े आकार के इलेक्ट्रिक वाहन भी बाजार में उपलब्ध हैं, इसलिए सरकार धीरे-धीरे ऐसे ICE वाहनों पर प्रतिबंध लगाने पर विचार कर सकती है। अदालत ने साफ किया कि बढ़ते प्रदूषण के बीच EV को बढ़ावा देना समय की जरूरत है। कई VIP और बड़ी कंपनियां कर रहीं EV का इस्तेमाल न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने सुनवाई के दौरान कहा कि कुछ मामलों से जुड़े अनुभवों के आधार पर यह विचार सामने आया है कि अब इलेक्ट्रिक वाहनों के क्षेत्र में भी बड़ी और प्रीमियम श्रेणी की कारें बाजार में उपलब्ध हैं। ये वाहन उतनी ही सुविधाजनक हैं जितनी कि परंपरागत ईंधन पर चलने वाली लग्जरी गाड़ियां, जिनका उपयोग कई VIP और बड़ी कंपनियों द्वारा किया जाता है। उन्होंने कहा, “मैं किसी का नाम नहीं लेना चाहता क्योंकि इससे कोई पूर्वाग्रह पैदा हो सकता है। लेकिन शुरुआत में महंगे वाहनों पर प्रतिबंध लगाने पर विचार किया जा सकता है। इससे आम आदमी पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा, क्योंकि देश की आबादी का बहुत छोटा हिस्सा ही ऐसे वाहनों को खरीदने में सक्षम है।” EV नीति की फिर से समीक्षा की जरूरत न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने यह भी संकेत दिया कि इलेक्ट्रिक वाहन (EV) नीति की दोबारा समीक्षा की आवश्यकता हो सकती है। अदालत ने कहा कि इस नीति को लागू हुए पाँच साल हो चुके हैं, इसलिए मौजूदा परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए इसे पुनः परखा जाना चाहिए। सुनवाई के अंत में अटॉर्नी जनरल ने पीठ को सूचित किया कि अब तक जारी की गई अधिसूचनाओं पर एक विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत की जाएगी। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले को चार सप्ताह बाद सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने का आदेश दिया। कोर्ट के सुझाव से सरकार सहमत अटॉर्नी जनरल ने सुप्रीम कोर्ट के सुझाव से सहमति जताते हुए कहा कि इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) के संबंध में अभी भी कई महत्वपूर्ण कार्य बाकी हैं। उन्होंने बताया कि सरकार के भीतर इस विषय पर कई बैठकों का आयोजन हो चुका है, और अब इसे गहनता से देखा जाना चाहिए। भविष्य की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए अटॉर्नी जनरल ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के सुझाव पर विस्तार से विचार करके EV नीति की सम्पूर्ण रूपरेखा तैयार की जाएगी।

एशिया की नई विकास राजधानी: जेवर से उड़ान भरेगा दिल्ली-NCR का भविष्य

नई दिल्ली दिल्ली-NCR क्षेत्र में अब तक लगभग 3.5 करोड़ लोग रहते हैं और यह संख्या लगातार बढ़ रही है। पिछले बीस सालों में यह क्षेत्र दक्षिण में गुड़गांव और पूर्व में नोएडा की तरफ काफी फैल चुका है। इस विस्तार के चलते दिल्ली-एनसीआर टोक्यो के बाद दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा शहरी इलाका बन गया है। संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट के अनुसार, अगले चार सालों में यह क्षेत्र टोक्यो को भी पीछे छोड़ देगा। दिल्ली-एनसीआर के तेजी से विकास में सबसे बड़ा योगदान नोएडा के जेवर में बनने वाले नए अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे का होगा। इस एयरपोर्ट का नाम नोएडा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा (NIA) रखा गया है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, दिसंबर से यहां से कॉमर्शियल उड़ानें शुरू होने वाली हैं। यह एयरपोर्ट उत्तर प्रदेश सरकार और स्विस कंपनी ज्यूरिख एजी के सहयोग से विकसित किया गया है। पूर्वी क्षेत्र के लिए खुलेंगे विकास के दरवाजे मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, नई दिल्ली के इंदिरा गांधी हवाई अड्डे की तरह, नोएडा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा (NIA) भी क्षेत्रीय विकास को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा। जहां इंदिरा गांधी हवाई अड्डा दक्षिणी दिल्ली के विकास का कारण बना, वहीं नोएडा एयरपोर्ट पूर्वी दिल्ली-एनसीआर के क्षेत्रों जैसे मेरठ, गाजियाबाद, मथुरा और आगरा को जोड़कर इस क्षेत्र के विकास को नई दिशा देगा। जेवर स्थित नोएडा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा शहर से लगभग 60 किलोमीटर दूर है। शुरुआत में इस एयरपोर्ट में एक रनवे और एक टर्मिनल (T1) होगा, जो सालाना 1.2 करोड़ यात्रियों को संभाल सकता है। भविष्य में इस एयरपोर्ट को बढ़ाकर सालाना 7 करोड़ यात्रियों की क्षमता तक ले जाया जाएगा। इसके साथ ही आने वाले वर्षों में यहां कार्गो हब, विमान मरम्मत केंद्र जैसी आधुनिक सुविधाएं भी विकसित की जाएंगी, जिससे यह क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय यात्रा के लिए महत्वपूर्ण केंद्र बन जाएगा। शुरुआती दौर में 10 शहरों से शुरू होंगी उड़ाने मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, केंद्रीय विमानन मंत्री राम मोहन नायडू ने कहा कि शुरुआती दौर में कम से कम 10 शहरों से नोएडा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे (NIA) के लिए सीधे उड़ानें शुरू होंगी। मंत्री ने बताया कि इससे यात्रियों को सुविधा मिलेगी और आसपास के इलाके आर्थिक रूप से मजबूत होंगे। इस पहल से दिल्ली-एनसीआर और उत्तर प्रदेश के पूर्वी क्षेत्रों के विकास को भी बल मिलेगा। नोएडा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा पूरी तरह से आधुनिक तकनीक से लैस होगा। यात्री यहां स्पर्शरहित (contactless) सफर की सुविधा का लाभ उठा सकेंगे, जिससे यात्रा और भी तेज और आरामदायक होगी। सुरक्षा जांच में 3डी स्कैनर और बॉडी स्कैनर जैसे अत्याधुनिक उपकरणों का उपयोग किया जाएगा। इसके अलावा, हवाई अड्डे में दो आरामदायक लाउंज और एक खास वीआईपी टर्मिनल भी मौजूद होगा, जो यात्रियों को बेहतर सुविधा और अनुभव प्रदान करेगा। यात्रियों को खास अनुभव देने के लिए तैयार मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, नोएडा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा (NIA) के सीईओ क्रिस्टोफ श्नेलमैन ने बताया कि यह एयरपोर्ट स्विस दक्षता और भारतीय गर्मजोशी के मिश्रण से डिजाइन किया गया है। यह हवाई अड्डा आधुनिक वास्तुकला और क्षेत्रीय सांस्कृतिक तत्वों को जोड़कर बनाया गया है, जिससे यात्रियों को यात्रा के दौरान एक खास और यादगार अनुभव मिलेगा। जब इंदिरा गांधी हवाई अड्डा और नोएडा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा (NIA) साथ मिलकर काम करेंगे, तो दिल्ली-NCR क्षेत्र में कॉमर्शियल, इंफ्रास्ट्रक्चर और ग्लोबल कनेक्टिविटी की गति दोगुनी हो जाएगी। इससे न केवल इस क्षेत्र का आर्थिक विकास होगा, बल्कि यहां रहने वाले लोगों की जीवनशैली भी बेहतर बनेगी। यह पहल दिल्ली-एनसीआर को वैश्विक स्तर पर और अधिक प्रतिस्पर्धी और सुलभ बनाएगी।

मौसम अपडेट: दिल्ली-NCR में झमाझम बारिश, उत्तर भारत के अन्य हिस्सों में भी बरसेंगे बादल

नई दिल्ली दिल्ली-एनसीआर में मौसम का मिजाज फिर बदलने वाला है। मौसम विभाग ने 6 अक्टूबर के लिए येलो अलर्ट जारी किया है। इस दिन 24 घंटे बारिश होने की संभावना है। साथ ही, तेज हवाएं चलेंगी और गरज-चमक भी होगी। इस बदलाव से तापमान में गिरावट आएगी। लोगों को उमस भरी गर्मी से काफी राहत मिलेगी। सुबह से ही हल्की से मध्यम बारिश का दौर शुरू हो जाएगा। यह बारिश दिनभर रुक-रुक कर जारी रह सकती है। इससे पहले आज दिल्ली-एनसीआर में कुछ जगहों पर गरज-चमक के साथ बारिश और तूफान देखने को मिल सकता है। वहीं 7 अक्टूबर को एनसीआर में बादल छाए रहने की संभावना है। इस दिन मध्यम बारिश हो सकती है। 8 और 9 अक्टूबर से मौसम धीरे-धीरे साफ होना शुरू होगा। 8 अक्टूबर को आसमान आंशिक रूप से बदला रहेगा। 9 अक्टूबर को मुख्य रूप से साफ मौसम की संभावना जताई गई है। इन दिनों अधिकतम तापमान 33 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 22 डिग्री सेल्सियस तक रह सकता है। मौसम विभाग के अनुसार, आज यूपी, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, पंजाब, हरियाणा और राजस्थान समेत उत्तर-भारत के अधिकांश हिस्सों में भी बारिश की संभावना बन रही हैं। इस दौरान तेज हवाएं भी चल सकती है। तमिलनाडु के 14 जिलों में भारी बारिश का अलर्ट तमिलनाडु के 14 जिलों में भारी बारिश की चेतावनी जारी की है, क्योंकि बंगाल की खाड़ी और अरब सागर के ऊपर मौसम प्रणालियां लगातार सक्रिय हो रही हैं। नए बुलेटिन के अनुसार, 2 अक्टूबर से बंगाल की खाड़ी के मध्य और उससे सटे उत्तर-पश्चिमी क्षेत्र में बना एक गहरा दबाव क्षेत्र उत्तर-पश्चिम की ओर बढ़ गया है और शाम तक दक्षिणी ओडिशा तट पर गोपालपुर के पास पहुंच गया है। शनिवार को तिरुवल्लुर, चेन्नई, चैंगलपट्टू, कांचीपुरम, विल्लुपुरम, रानीपेट, वेल्लोर, तिरुपत्तूर, तिरुवन्नामलाई, कृष्णागिरी, धर्मपुरी और रामनाथपुरम के कुछ इलाकों में भी भारी बारिश की उम्मीद है। राजस्थान में भी जमकर बरस सकते हैं बादल राजस्थान में मॉनसून की विदाई के बाद भी बारिश का दौर जारी है। मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि रविवार, 5 अक्टूबर से बारिश और तेज हो सकती है। विभाग के अनुसार, रविवार और सोमवार को राजस्थान के सभी जिलों में तेज बारिश होने की संभावना है। राज्य के 21 जिलों में बारिश के लिए येलो अलर्ट जारी किया गया है। यह बारिश पिछले तीन दिनों से हो रही है और अगले तीन दिनों तक जारी रहने का अनुमान है।

मेट्रो विस्तार का बड़ा प्लान: दिल्ली-NCR में 18 नए कॉरिडोर, जुड़ेंगे 5 शहर

नई दिल्ली  दिल्ली और एनसीआर के लाखों यात्रियों के लिए राहत की बड़ी खबर सामने आई है। जल्द ही मेट्रो नेटवर्क का दायरा और भी व्यापक होने जा रहा है। दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (DMRC) ने शहर और उससे जुड़े इलाकों में 18 नए मेट्रो कॉरिडोर विकसित करने की योजना पर काम शुरू कर दिया है। यह परियोजना सिर्फ कनेक्टिविटी नहीं बढ़ाएगी, बल्कि रोजगार के नए अवसर भी पैदा करेगी। दो चरणों में होगा मेट्रो विस्तार इस महापरियोजना को दो चरणों में विभाजित किया गया है: फेज-5A के तहत 3 कॉरिडोर की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार की जा चुकी है। फेज-5B में बाकी 15 कॉरिडोर को शामिल किया गया है, जिसकी प्रक्रिया प्रगति पर है। इस पूरे विस्तार को केंद्र सरकार के नेशनल मोबिलिटी प्लान के तहत आर्थिक सहायता से क्रियान्वित किया जा रहा है। दिल्ली-NCR के 5 बड़े शहर होंगे जुड़ाव का हिस्सा नई योजना के तहत गुरुग्राम, नोएडा, गाजियाबाद, फरीदाबाद और बहादुरगढ़ जैसे एनसीआर के प्रमुख शहरों को भी सीधे दिल्ली मेट्रो से जोड़ा जाएगा। गाजियाबाद में सबसे ज्यादा-5 नए मेट्रो रूट्स की योजना बनाई गई है, जो निम्नलिखित हैं: -वैशाली से मोहन नगर -नोएडा इलेक्ट्रॉनिक सिटी से साहिबाबाद -मयूर विहार फेज-3 से लोनी बॉर्डर -नया बस अड्डा से गाजियाबाद रेलवे स्टेशन -गोकुलपुरी से अर्थला -इसके अलावा कुछ अन्य प्रस्तावित रूट्स: -द्वारका सेक्टर-21 से उद्योग विहार, गुरुग्राम -तुगलकाबाद से नोएडा सेक्टर-142 -राजा नाहर सिंह से पलवल -बहादुरगढ़ से असुधा कुल नेटवर्क में 400+ किमी का इजाफा DMRC के मुताबिक, इन 18 प्रस्तावित रूट्स को मिलाकर करीब 404 किलोमीटर का नया नेटवर्क तैयार किया जाएगा। योजना के अनुसार, मेट्रो स्टेशनों को इस तरह डिजाइन किया जाएगा कि वो घर से सिर्फ 500 मीटर दूरी पर हों, जिससे आम जनता की सुविधा में जबरदस्त सुधार आएगा।    कहां तक पहुंचा फेज-4? वर्तमान में फेज-4 के तहत 6 कॉरिडोर में से 3 पर काम तेजी से चल रहा है: तुगलकाबाद से एयरोसिटी इंद्रप्रस्थ से आरके आश्रम मौजपुर से मजलिस पार्क तीनों मिलाकर कुल 65.15 किलोमीटर लंबे होंगे। साथ ही, इन रूट्स पर आधुनिक तकनीक से अंडरग्राउंड और एलिवेटेड स्टेशन बनाए जा रहे हैं। जैसे: इंद्रप्रस्थ से आरके आश्रम: 9.5 किमी लंबा, 8 भूमिगत स्टेशन एयरोसिटी से टर्मिनल: 2.3 किमी, 1 स्टेशन तुगलकाबाद से कालिंदी कुंज: 4 किमी, 3 एलिवेटेड स्टेशन क्या मिलेगा फायदा? दिल्ली-एनसीआर में ट्रैफिक जाम में भारी कमी यात्रियों को घर से मेट्रो तक आसान एक्सेस रोजगार के हजारों नए अवसर रियल एस्टेट सेक्टर को बूस्ट पर्यावरण पर भी सकारात्मक असर