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PF खाताधारकों के लिए खुशखबरी! EPFO ने दी 100% निकासी की मंजूरी, ऐसे करें क्लेम

पटना कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) ने अपने सदस्यों के लिए भविष्य निधि (पीएफ) की आंशिक निकासी प्रक्रिया को और सरल एवं उदार बनाया है। संगठन ने पूर्व में लागू 13 अलग-अलग प्रावधानों को घटाकर अब तीन मुख्य आवश्यकताओं – शिक्षा, गृह कार्य एवं विशेष परिस्थितियों – में वर्गीकृत किया है। नई व्यवस्था के तहत सदस्य अब अपनी भविष्य निधि शेष राशि (नियोक्ता और कर्मचारी के अंशदान सहित) का 100 प्रतिशत तक उपयोग इन तीनों जरूरतों में कर सकेंगे। शिक्षा से संबंधित निकासी की सीमा को 3 से बढ़ाकर 10 बार, जबकि विवाह के लिए निकासी की सीमा को 3 से बढ़ाकर 5 बार तक कर दिया गया है। इन सभी प्रकार की निकासी के लिए न्यूनतम सेवा अवधि 12 माह निर्धारित की गई है। पहले विशेष परिस्थितियों जैसे प्राकृतिक आपदा, कंपनी बंद होने, तालाबंदी, महामारी या सतत बेरोजगारी की स्थिति में दावे के साथ कारण बताना आवश्यक था। अब कारण बताने की अनिवार्यता समाप्त कर दी गई है, जिससे दावों के निरस्त होने की संभावना कम होगी। संगठन ने यह भी प्रावधान किया है कि सदस्यों के खातों में कम से कम 25 प्रतिशत राशि भविष्य निधि के रूप में सुरक्षित रखी जाए। इसके साथ ही, सम्पूर्ण पीएफ निकासी के न्यूनतम अंतराल को 2 माह से बढ़ाकर 12 माह और पेंशन फंड की निकासी के अंतराल को 2 माह से बढ़ाकर 36 माह कर दिया गया है। पहले सदस्य 2 माह बाद पूरी पेंशन राशि निकाल लेते थे, जिससे नई नौकरी लगने पर सेवा की निरंतरता टूट जाती थी और वे पेंशन लाभ से वंचित रह जाते थे। नई नीति से अब निरंतर सेवा सुनिश्चित होगी और अधिक सदस्य पेंशन के पात्र बन सकेंगे। ईपीएफओ के क्षेत्रीय भविष्य निधि आयुक्त-1 हेमन्त कुमार ने बताया कि इस सुधार से निकासी प्रक्रिया पारदर्शी होगी, दावों का शत प्रतिशत निपटारा सुनिश्चित किया जा सकेगा और सदस्यों की शिकायतों में उल्लेखनीय कमी आएगी।  

PF निकासी में बदलाव: नए नियम जानें, कर्मचारियों को अब होंगे ये लाभ

नई दिल्ली  कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) ने नौकरी छोड़ने के बाद पीएफ निकासी और ब्याज से जुड़े नियमों में बदलाव किया है। नए नियमों के अनुसार अब नौकरी छोड़ने के बाद 75% राशि तुरंत निकाली जा सकती है, जबकि शेष राशि निकालने के लिए एक साल का इंतजार करना होगा। इसके साथ ही EPF खाता नौकरी छोड़ने के बाद भी सक्रिय रहता है और तीन साल तक ब्याज मिलता रहेगा। क्या नौकरी छोड़ने के बाद EPF खाता बंद होता है? EPFO के नियमों के अनुसार, एक बार सदस्य बनने के बाद आपकी सदस्यता समाप्त नहीं होती। यानी नौकरी छोड़ने के बाद भी आपकी EPF सदस्यता जारी रहती है और आपका खाता निष्क्रिय नहीं होता। केवल योगदान बंद हो जाता है। तीन साल तक ब्याज यदि नौकरी छोड़ने के बाद खाते में कोई योगदान नहीं हो रहा है, तो खाते पर तीन साल तक ब्याज मिलता रहेगा। लगातार तीन साल तक कोई योगदान न होने पर खाता “निष्क्रिय” माना जाएगा और उसके बाद ब्याज मिलना बंद हो जाएगा। उदाहरण के लिए, यदि कोई कर्मचारी जून 2022 में नौकरी छोड़ देता है और उसके बाद कोई योगदान नहीं होता, तो जून 2025 तक खाते पर ब्याज मिलेगा। EPFO के नियमों के अनुसार, ब्याज मिलने पर रोक का मतलब यह नहीं कि आपका पैसा समाप्त हो गया है। आपका मूलधन और पूर्व में जमा ब्याज सुरक्षित रहेगा और आप जब चाहें ऑनलाइन दावा दायर करके इसे निकाल सकते हैं। नई नौकरी में जुड़ने पर क्या होगा? यदि आप नई नौकरी शुरू करते हैं और नया EPF खाता खोलते हैं, तो आपका पुराना PF खाता UAN के माध्यम से नए खाते में ट्रांसफर किया जा सकता है। ट्रांसफर के बाद आपकी सदस्यता और योगदान फिर से सक्रिय हो जाएंगे, जिससे न केवल आपकी सेवा अवधि निरंतर मानी जाएगी बल्कि खाते पर ब्याज भी मिलता रहेगा।

PF निकासी नियमों में बड़ा बदलाव, अब बिना झंझट पूरी राशि निकालना हुआ आसान!

नई दिल्ली  कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) ने अपने नियमों में बड़ा बदलाव कर दिया है। नए नियमों में अब कर्मचारी अपने भविष्य निधि (EPF) खाते से 100 प्रतिशत तक राशि निकाल सकते हैं। यह सुविधा कुछ शर्तों के जरिए पूरी होगी, जिससे सेवानिवृत्ति निधि पूरी तरह समाप्त न हो। 100% निकासी की सुविधा नए नियमों के अनुसार, कर्मचारी अब अपने ईपीएफ खाते से पूरी राशि (कर्मचारी और नियोक्ता का अंशदान) निकाल सकते हैं। यह निकासी केवल विशेष परिस्थितियों (बीमारी, शिक्षा, विवाह या आवास निर्माण जैसी जरूरतें) में ही संभव होगी। ईपीएफओ ने स्पष्ट किया है कि यह सुविधा आकस्मिक जरूरतों को पूरा करने के लिए दी है।   25% राशि खाते में रखना जरूरी फाइनेंस एक्सपर्ट्स के मुताबिक, सदस्यों को अपने कुल ईपीएफ बैलेंस का कम से कम 25 प्रतिशत हिस्सा खाते में बनाए रखना होगा। इस राशि पर ब्याज (अभी 8.25%) और चक्रवृद्धि ब्याज मिलता रहेगा। इससे सदस्य अपनी भविष्य की सेवानिवृत्ति निधि को सुरक्षित रख सकेंगे और समय के साथ उस पर अतिरिक्त लाभ भी प्राप्त करेंगे। शिक्षा और विवाह के लिए निकासी के नियम बदले पहले सदस्य शिक्षा के लिए तीन बार और विवाह के लिए तीन बार तक निधि निकाल सकते थे। अब यह सीमा बढ़ा दी गई है। नए प्रावधानों के तहत सदस्य शिक्षा के लिए 10 बार और विवाह के लिए 5 बार तक राशि निकाल सकते हैं। यह सुविधा परिवारों को बिना कर्ज लिए बड़े खर्चों को संभालने में मदद करेगी। बेरोजगारी और विशेष परिस्थितियों में राहत अब बेरोजगारी की स्थिति में सदस्य अपने खाते से 75 प्रतिशत राशि निकाल सकते हैं, जबकि शेष 25 प्रतिशत राशि अंतिम निपटान के समय मिलती है। पहले सदस्यों को प्राकृतिक आपदा या लॉकडाउन जैसे कारणों का प्रमाण देना पड़ता था, जिससे आवेदन अस्वीकार हो जाते थे। नए नियमों के बाद प्रक्रिया अधिक आसान और पारदर्शी हो गई है।  

EPFO का पूरा बैलेंस निकालना अब हुआ आसान, मोबाइल से करें सिर्फ कुछ मिनटों में

नई दिल्ली ईपीएफओ ने कर्मचारियों के लिए बड़ी राहत दी है। अब पीएफ सदस्य अपने खाते से 100% राशि निकाल सकते हैं। ईपीएफओ की वेबसाइट पर जाकर ऑनलाइन क्लेम किया जा सकता है। आगे आप इस प्रोसेस को स्टेप-बाय-स्टेप समझ सकते हैं। हाल ही में EPFO ने एक बड़ा बदलाव करते हुए कर्मचारियों को राहत दी है। अब कर्मचारी भविष्य निधि संगठन यानी कि EPFO के सदस्य अपने पीएफ खाते से 100% राशि निकाल पाएंगे। ऐसे में अगर आप भी एक नौकरी पेशा शख्स हैं, तो आपके लिए भी जान लेना जरूरी है कि किस तरह से पीएस से पैसा निकाला जा सकता है। इससे पहले कि हम मोबाइल से EPFO का सारा पैसा निकालने का तरीका समझें, इस बात पर ध्यान दें कि नौकरी छूटने के बाद पूरी राशि निकालने की समय सीमा अब 2 महीने से बढ़ाकर 12 महीने कर दी गई है। चलिए अब हम EPFO से पैसे निकालने का तरीका समझ लेते हैं। EPFO से सारा पैसा निकालने के स्टेप्स अपने PF अकाउंट से सारा पैसा निकालने के लिए आपको सबसे पहले आपको EPFO की ऑफीशियल साइट पर जाना होगा और अपने UAN नंबर और पासवर्ड की मदद से अपने अकाउंट में लॉग-इन करना होगा।     लॉग इन करने के बाद डैश बोर्ड पर दिख रहे Online Services के ऑप्शन पर क्लिक करें और Claims ऑप्शन पर क्लिक करें।     इसके बाद आपके सामने एक फॉर्म खुलेगा। यहां कुछ फील्ड्स पहले से भरी हुई होंगी और कुछ फील्ड्स में आपको अपनी डिटेल्स भरनी होंगी।     इस फॉर्म पर आपको अपना बैंक अकाउंट नंबर डालना होगा और नियमों और शर्तों को स्वीकार करना होगा।     इसके बाद आपको अपनी आखिरी जॉब की डिटेल्स दिखाई देंगी और साथ ही डेट ऑफ एग्जिट का भी जिक्र उसमें होगा। डेट ऑफ एग्जिट का मतलब आपकी पिछली जॉब के लास्ट वर्किंग डे से होता है। आगे के स्टेप्स     इसके बाद Proceed For Online Claim पर क्लिक करके अगले स्टेप्स पर जाएं।     इसके बाद आपको I want to apply for में Form 19 को चुनना होगा और इसी के साथ आपके सामने एक और फॉर्म खुल जाएगा।     इस ऑप्शन के नीचे आपको Form 15G जमा करने का ऑप्शन मिलेगा। इस फॉर्म को तब भरकर सबमिट किया जाता है जब विड्रॉल की जा रही अमाउंट 50 हजार से ज्यादा हो और आप न चाहते हों कि उस पर आपसे 10% टीडीएस या टैक्स लिया जाए।     इसके बाद आपको अपने आधार कार्ड पर दिया पता भरना होगा और फिर मांगा जाए, तो कैंसिल चेक की फोटो अपलोड करनी होगी।     इसके बाद शर्तों को स्वीकार करके Get Aadhaar OTP पर टैप करें और OTP वेरिफाई करके अपने फॉर्म को सबमिट कर दें।     इसके बाद कुछ ही दिन में आपको अपने अकाउंट में आपका PF का पैसा मिल जाएगा।  

पेंशन पाने के लिए अब कितनी सेवा जरूरी? बदल गए हैं नियम, जानें पूरी डिटेल

नई दिल्ली सैलरी पाने वाले कर्मचारियों के लिए कर्मचारी भविष्य निधि (EPFO) सिर्फ एक बचत योजना नहीं है, बल्कि यह उनकी रिटायरमेंट सुरक्षा का एक अहम साधन भी है। हर महीने आपकी सैलरी का एक छोटा हिस्सा और उतना ही आपका नियोक्ता EPF फंड में जमा करता है। ज्यादातर लोग इसे केवल एकमुश्त राशि के तौर पर देखते हैं, लेकिन इसका एक महत्वपूर्ण हिस्सा ‘कर्मचारी पेंशन योजना’ (EPS) में जाता है, जो भविष्य में हर महीने पेंशन देने का काम करता है। 10 साल की न्यूनतम सेवा जरूरी कई लोग नौकरी छोड़ने के बाद अपने EPS फंड के बारे में आशंकित रहते हैं। EPFO के नियमों के अनुसार, पेंशन पाने के लिए न्यूनतम 10 साल की सेवा आवश्यक है। यदि आपकी कुल नौकरी 10 साल से कम है, तो आप पेंशन के पात्र नहीं होंगे। वहीं, 10 साल या उससे अधिक नौकरी करने वाले कर्मचारी रिटायरमेंट के बाद पेंशन के हकदार बन जाते हैं। इसका मतलब यह नहीं कि नौकरी छोड़ते ही पेंशन मिल जाएगी। पेंशन का दावा तभी किया जा सकता है जब आप 58 साल की उम्र पूरी कर लें। इसका मतलब है कि आप चाहे 40 साल की उम्र में नौकरी छोड़ दें, पेंशन का लाभ 58 साल के बाद मिलेगा। EPF और EPS में पैसे का बंटवारा आपकी सैलरी का 12% EPF फंड में जाता है और कंपनी भी उतना ही योगदान देती है। इसमें से 8.33% EPS में जाता है, जो रिटायरमेंट के बाद पेंशन के लिए आरक्षित होता है। बाकी 3.67% EPF खाते में जमा होता है, जिसे घर खरीदने, बच्चों की पढ़ाई, शादी या मेडिकल इमरजेंसी में निकाला जा सकता है। मासिक पेंशन कैसे तय होती है? ➤ EPFO एक फॉर्मूला के आधार पर पेंशन राशि तय करता है: ➤ मासिक पेंशन = (पेंशन योग्य वेतन × पेंशन योग्य सेवा) ÷ 70 ➤ पेंशन योग्य सेवा: EPS खाते में कुल योगदान के साल। ➤ पेंशन योग्य वेतन: आखिरी 60 महीने (5 साल) की औसत सैलरी, जिसकी ऊपरी सीमा ₹15,000 प्रति माह है।

पेंशन स्कीम में EPFO के 5 अहम अपडेट, जानें कैसे होगा फायदा

नई दिल्ली अगर आप नौकरीपेशा व्यक्ति हैं और हर महीने आपकी सैलरी से PF  कटता है, तो यह खबर आपके लिए बेहद अहम है। Employees’ Provident Fund Organisation (EPFO) ने Employee Pension Scheme (EPS) में कुछ बड़े बदलाव किए हैं, जो सीधे तौर पर आपकी पेंशन की राशि और प्रोसेस को प्रभावित करेंगे। आइए जानते हैं कौन से हैं ये 5 अहम बदलाव… अब औसत वेतन पर तय होगी पेंशन पहले पेंशन की गणना आखिरी वेतन के आधार पर की जाती थी। अब EPFO ने इसे बदलते हुए पिछले 60 महीनों (5 साल) के औसत वेतन को आधार बनाया है। इससे उन कर्मचारियों को फायदा होगा जिनकी सैलरी धीरे-धीरे बढ़ी है। यह नियम पहले से लागू है, लेकिन अब प्रोसेस को और आसान बना दिया गया है ताकि किसी को पेंशन कैलकुलेशन में नुकसान न हो। पेंशन की लिमिट बढ़कर ₹15,000 प्रति माह EPFO ने पेंशन लिमिट को बढ़ा दिया है। अब अधिकतम पेंशन ₹7,500 से बढ़ाकर ₹15,000 प्रति माह कर दी गई है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद लिया गया यह फैसला उन लोगों के लिए राहत लेकर आया है जिनकी सैलरी तो अधिक थी, लेकिन पेंशन लिमिट की वजह से उन्हें कम रकम मिलती थी। अब 50 साल की उम्र में भी मिलेगी पेंशन अब कर्मचारियों को 50 वर्ष की आयु पूरी होते ही पेंशन निकालने का विकल्प मिल गया है। पहले न्यूनतम उम्र 58 साल थी, लेकिन अब इसे घटा दिया गया है। हालांकि, जल्दी पेंशन लेने पर राशि थोड़ी कम हो सकती है। अब पेंशन क्लेम होगा ऑनलाइन EPFO ने डिजिटल क्लेम प्रोसेस को पूरी तरह से ऑनलाइन कर दिया है। अब फॉर्म भरने से लेकर दस्तावेज अपलोड करने तक की प्रक्रिया आप EPFO की वेबसाइट या मोबाइल ऐप से पूरी कर सकते हैं। इससे पहले जो काम महीनों में होता था, अब कुछ हफ्तों में पूरा हो जाएगा। नौकरी बदलने पर नहीं होगा नुकसान EPFO ने Pension Portability System को बेहतर बना दिया है। अब अगर आप नौकरी बदलते हैं, तो आपकी पुरानी सर्विस अपने आप नई कंपनी के रिकॉर्ड में जुड़ जाएगी। यानी पेंशन कंटिन्यूटी बनी रहेगी और पुरानी सर्विस का फायदा भी मिलेगा। EPFO के इन बदलावों से न सिर्फ कर्मचारियों को आर्थिक सुरक्षा मिलेगी बल्कि रिटायरमेंट के बाद मिलने वाली पेंशन भी ज्यादा पारदर्शी और आसान तरीके से प्राप्त होगी।  

PF नियमों पर ओवैसी की तीखी आलोचना, EPFO ने दिया जवाब

नई दिल्ली EPFO के नए नियमों पर असदुद्दीन ओवैसी भड़क गए और कई तरह के सवाल उठाने लगे। ओवैसी ने अपने ट्वीट में लिखा, "बेरोज़गारी में सरकार का “बचत उत्सव”: पहले बेरोज़गारी के 1-2 महीने में आप पूरा पीएफ निकाल सकते थे। अब सरकार की “दया” से अपने ही पैसे निकालने के लिए 1–3 साल तक इंतज़ार करना होगा। PF का 25% जबरदस्ती 1 साल तक लॉक। मतलब बेरोज़गारी में आपको एक साल का इंतज़ार करना होगा और तब भी आप अपना पैसा पूरा नहीं निकाल सकते।" ओवैसी ने अपने ट्वीट में आगे लिखा, "EPFO वैसे भी आपके पैसों का मालिक बना हुआ है: ₹54,658 करोड़ पीएफ “अनक्लेम्ड” पड़ा है। 25–35% पीएफ निकासी आवेदन रिजेक्ट हो जाते हैं।" ओवैसी के इस ट्वीट पर EPFO ने जवाब भी दिया। EPFO ने बताया कि, नौकरी छूटने पर EPF निकालने के लिए 2 महीने की जगह 12 महीने क्यो किया गया? EPFO ने अपने पोस्ट में लिखा, "नौकरी छूटने के तुरंत बाद लाभार्थी 75% अमाउंट तुरंत निकाल सकता हैं। ⁠12 महीने तक बेरोजगार रहने पे बाकी 25% राशि भी निकाल सकता हैं। 2 महीने में पूर्ण राशि निकालने से 3 महीने के बाद दूसरी नौकरी लग जाने से सर्विस continuous नहीं मानी जाती हैं और वे पेंशन पात्र नहीं होते। क्योंकि पेंशन के लिए 10 वर्ष continuous नौकरी जरूरी है। इन Reforms से EPFO के लाभार्थी को पेंशन हेतु पात्र बनाने में सुविधा होगी।"  

PF निकासी हुई आसान! नौकरी छोड़ने पर अब नहीं होगी फंड की दिक्कत, EPFO का बड़ा फैसला

नई दिल्ली  केंद्रीय युवा मामले एवं खेल तथा श्रम एवं रोजगार मंत्री मनसुख मंडाविया ने बुधवार को कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) के नियमों में भारी ढील दिए जाने पर प्रकाश डाला. इससे कर्मचारियों के लिए ईपीएफ निकासी आसान हो गई है. नए नियमों के अनुसार नौकरी छूटने वाले कर्मचारी अब अपनी ईपीएफ राशि का 75फीसदी तुरंत निकाल सकते हैं. शेष 25 प्रतिशत राशि एक वर्ष बाद निकाली जा सकती है. इससे यह सुनिश्चित होता है कि कर्मचारी का 10 साल का सेवाकाल बरकरार रहे. मंडाविया ने कहा, 'ईपीएफ निकासी अब आसान बना दी गई है. अगर किसी की नौकरी चली जाती है तो 75 फीसदी राशि तुरंत निकाली जा सकती है और एक साल बाद पूरी राशि निकालने की सुविधा उपलब्ध होगी. 25 फीसदी राशि एक वर्ष के लिए रखने के पीछे उद्देश्य यह है कि 10 साल का सेवाकाल बाधित न हो. इन नए सुधारों से कर्मचारी की सेवा निरंतरता बनी रहेगी और पेंशन प्राप्त करने से उनकी सामाजिक और आर्थिक सुरक्षा सुनिश्चित होगी. इसके अतिरिक्त सरकार ने नौकरी छूटने के बाद धनराशि निकालने की अवधि दो महीने से बढ़ाकर एक वर्ष कर दी है, जिससे सदस्यों को नया रोजगार खोजने और नौकरी जारी रखने के लिए अधिक समय मिल जाएगा. एक अन्य महत्वपूर्ण कदम के तहत जिन प्रतिष्ठानों ने पहले ईपीएफओ में योगदान नहीं किया है, वे अब मामूली जुर्माने के साथ नामांकन करा सकते हैं. इससे अधिक कर्मचारियों को सामाजिक सुरक्षा का लाभ उठाने के लिए प्रोत्साहन मिलेगा. इसके अलावा बुजुर्ग और दूरदराज के ईपीएफओ लाभार्थियों की सहायता के लिए डाक सेवाओं के साथ एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए हैं ताकि उनके घरों पर ही जीवन प्रमाण पत्र का प्रमाणीकरण और जारी करने की सुविधा प्रदान की जा सके. इससे यह सुनिश्चित होता है कि लाभार्थी ईपीएफओ कार्यालयों में जाए बिना ही अपना लाभ प्राप्त कर सकें.

सरकार ने PF नियम बदल दिए, दिवाली से पहले 7 करोड़ कर्मचारियों को मिलेगा बड़ा फायदा

नई दिल्ली  कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) के सेंट्रल बोर्ड ऑफ ट्रस्टीज (CBT) ने सोमवार को अपनी बैठक में कई ऐतिहासिक और सदस्य हितैषी निर्णय लिए। श्रम मंत्री मनसुख मांडविया की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में EPF आंशिक निकासी के नियमों में ढील, ‘विश्वास स्कीम’ की शुरुआत और डिजिटल रूपांतरण (EPFO 3.0) जैसे कई अहम फैसले लिए गए। बता दें कि इन निर्णयों से EPFO के 7 करोड़ से अधिक खाताधारकों को लाभ मिलने की उम्मीद है। अब 100% तक की आंशिक निकासी संभव EPFO बोर्ड ने भविष्य निधि (EPF) से आंशिक निकासी के प्रावधानों को सरल और उदार बना दिया है। अब सदस्य अपने खाते में जमा राशि (कर्मचारी और नियोक्ता दोनों का अंशदान) में से 100% तक की निकासी कर सकेंगे। पहले आंशिक निकासी के लिए 13 अलग-अलग जटिल प्रावधान थे, जिन्हें अब इंटीग्रेट कर तीन मुख्य कैटेगरीज में बांट दिया गया है- 1. आवश्यक जरूरतें: बीमारी, शिक्षा, विवाह आदि, 2. आवास संबंधी जरूरतें और 3. विशेष परिस्थितियां। इसका मतलब है कि अब ईपीएफओ मेंबर को किसी विशेष परिस्थिति (जैसे प्राकृतिक आपदा, लॉकआउट, महामारी आदि) के तहत निकासी के लिए कोई कारण बताने की आवश्यकता नहीं होगी। निकासी सीमा और सेवा अवधि में भी राहत शिक्षा और विवाह के लिए निकासी सीमा को बढ़ाकर क्रमशः 10 गुना और 5 गुना कर दिया गया है। (पहले कुल मिलाकर केवल 3 बार आंशिक निकासी की अनुमति थी।) सभी प्रकार की आंशिक निकासी के लिए न्यूनतम सेवा अवधि अब सिर्फ 12 महीने कर दी गई है। 25% न्यूनतम बैलेंस नियम लागू EPFO ने एक नया प्रावधान जोड़ा है, जिसके तहत सदस्यों को अपने खाते में कुल योगदान का कम से कम 25% बैलेंस बनाए रखना होगा। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सदस्य उच्च ब्याज दर (वर्तमान में 8.25%) और कंपाउंडिंग के लाभ का आनंद लेते हुए सेवानिवृत्ति के लिए पर्याप्त राशि संचित कर सकें। निकासी प्रक्रिया और दस्तावेजीकरण में सुधार नए नियमों के तहत आंशिक निकासी की प्रक्रिया को पूरी तरह स्वचालित बनाया जाएगा। अब सदस्यों को कोई दस्तावेज़ जमा करने की आवश्यकता नहीं होगी और दावे तेजी से ऑनलाइन निपटाए जा सकेंगे। साथ ही, अंतिम निपटान के लिए अवधि को भी बदला गया है: – EPF की अंतिम निकासी: 2 महीने से बढ़ाकर 12 महीने – पेंशन की अंतिम निकासी: 2 महीने से बढ़ाकर 36 महीने  

EPFO पेंशन में इज़ाफे की तैयारी, दिवाली से पहले प्राइवेट कर्मचारियों को मिल सकती है सौगात

नई दिल्ली इस दिवाली प्राइवेट कर्मचारियों को बड़ी खुशखबरी मिलने की उम्मीद है. अनुमान है कि EPFO यानी कर्मचारी भविष्य निधि संगठन कर्मचारियों की बेहतरी के लिए चलाए जाने वाली एम्प्लॉयी पेंशन स्कीम के तहत मिनिमम पेंशन राशि को बढ़ा सकता है. दरअसल, 10 और 11 अक्टूबर को EPFO के सेंट्रल बोर्ड ऑफ ट्रस्टीज की बैठक बेंगलुरु में होनी थी. इस मीटिंग में कर्मचारियों की पेंशन में बढ़ोतरी को लेकर गुड न्यूज मिलने की संभावनाएं लग रही है. कर्मचारी अब भी ईपीएफओ की तरफ से जानकारी मिलने का इंतजार कर रहे हैं. कितनी है मौजूदा पेंशन राशि? कर्मचारियों के मुताबिक, एम्पलॉयी पेंशन स्कीम में मिनिमम पेंशन राशि काफी कम है. साल 2014 में तय की गई एम्प्लॉयी पेंशन स्कीम (EPS) की मिनिमम पेंशन राशि 1000 रूपये पर मंथ है, जिसे एम्प्लॉयी लगातार बढ़ाने की मांग कर रहे हैं. मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो बीते दिनों हुई बैठक में इसे 1000 रुपये से बढ़ाकर 2500 रुपये करने के अनुमान है. ऐसे में इस पेंशन राशि के बढ़ने से कर्मचारियों को काफी राहत मिलेगी और उनकी कई साल की मांग पूरी हो जाएगी.   क्यों हो रही पेंशन बढ़ाने की मांग? एम्पलॉयीज का कहना है कि बदलते समय के साथ अब बाजार में हो रही महंगाई के हिसाब से पेंशन स्कीम से मिलने वाले 1000 रुपये काफी कम हैं. ऐसे में ट्रेड यूनियन और पेंशन का लाभ लेने वाले लोगों के यूनियंस काफी लंबे समय से इस राशि को बढ़ाकर 7500 रुपये करने की डिमांड कर रहे हैं. हालांकि, रिपोर्टस के अनुसार CBT ने पेंशन में सीधे 7.5 गुना की बढ़ोतरी से साफ इनकार कर दिया है.   कैसे डिसाइड होती है EPFO पेंशन? EPS स्कीम के तहत पेंशन को कैलकुलेट करने का भी अपना एक तरीका है. इसका फॉर्मूला (पेंशन = पेंशनेबल सैलरी × पेंशनेबल सर्विस)÷ 70 होता है. इसमें पेंशनेबल सैलरी यानी आपके आखिरी 60 महीनों का सैलरी एवरेज और पेंशनेबल सर्विस यानी सर्विस के कितने साल EPS में कॉन्ट्रीब्यूट किया. पेंशन पाने के लिए मैक्सिमम सैलरी लिमिट 15000 रुपये पर मंथ होती है. साथ ही, इस स्कीम का लाभ उठाने के लिए कम से कम 10 साल की नौकरी जरूरी होती है.