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EPFO का बड़ा फैसला, अब UPI के जरिए आसानी से निकाल सकेंगे PF का पैसा

नई दिल्ली कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) ने लाखों कर्मचारियों के लिए बड़ा बदलाव किया है. अब PF खाते से पैसा निकालने के लिए लंबे फॉर्म और बैंक वेरिफिकेशन की झंझट नहीं रहेगी. नया नियम UPI आधारित निकासी को संभव बनाता है, जिससे सेकंडों में पैसा सीधे खाते में ट्रांसफर होगा. यह सुधार खासकर सैलरीड क्लास और मध्यम वर्ग के लिए राहत है, जो इमरजेंसी में PF पर निर्भर रहते हैं. NPCI के साथ साझेदारी से शुरू हुई यह सुविधा डिजिटल इंडिया की दिशा में एक अहम कदम है. अब तक PF निकालने की प्रक्रिया बेहद लंबी और पेपरवर्क से भरी होती थी. कर्मचारी को अलग-अलग फॉर्म भरने पड़ते थे, बैंक वेरिफिकेशन और कई स्तर की जांच से गुजरना पड़ता था. इस कारण निकासी में कई बार हफ्तों का इंतजार करना पड़ताथा. यही वजह थी कि EPFO ने तकनीकी बदलाव की ओर कदम बढ़ाया और UPI को PF निकासी से जोड़ने का फैसला किया. नए नियम से कर्मचारियों को सबसे बड़ा फायदा समय की बचत का होगा. अब मेडिकल खर्च, बच्चों की पढ़ाई या शादी जैसे अचानक आने वाले खर्चों में PF तुरंत मददगार बनेगा.पेपरवर्क खत्म होने से क्लेम रिजेक्शन की संभावना भी घटेगी. पारदर्शिता बढ़ेगी क्योंकि पैसा सीधे कर्मचारी के बैंक खाते में जाएगा. यह सुविधा PF को बैंक खाते जितना लिक्विड बना देगी. UPI आधारित निकासी NPCI के सहयोग से शुरू की गई है. शुरुआत BHIMUPI से होगी और धीरे-धीरे Paytm, PhonePe, GPay जैसे लोकप्रिय ऐप्स भी जुड़ेंगे. RBI की गाइडलाइन के अनुसार, सामान्य ट्रांजैक्शन की लिमिट ₹1 लाख प्रतिदिन होगी, जबकि मेडिकल, एजुकेशन और IPO से जुड़े मामलों में यह सीमा ₹5 लाख तक बढ़ाई जाएगी. इससे सुरक्षा और दुरुपयोग रोकने की गारंटी मिलेगी. लेबर मिनिस्टर मनसुख मंडाविया ने कहा कि यह बदलाव कर्मचारियों को पेपरवर्क से मुक्त करेगा और क्लेम रिजेक्शन कम करेगा. उद्योग जगत के विशेषज्ञ मानते हैं कि यह कदम डिजिटल इंडिया की रणनीति को मजबूत करेगा और कर्मचारियों को वित्तीय आत्मनिर्भरता देगा. फिनटेक सेक्टर के लिए भी यह एक बड़ा अवसर है क्योंकि UPI प्लैटफॉर्म पर PF निकासी जुड़ने से डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम और व्यापक होगा. EPFO ने संकेत दिया है कि शुरुआत छोटे अमाउंट से होगी और धीरे-धीरे बड़े अमाउंट पर भी यह सुविधा लागू होगी. कर्मचारियों को EPFOऐप पर अपनी UPI ID लिंक करनी होगी और KYC अपडेट रखना होगा. आने वाले समय में यह सुधार PF को रिटायरमेंट प्लानिंग का और भी मजबूत स्तंभ बना देगा.

PF से जुड़ी खुशखबरी: EPFO का नया फैसला नौकरी बदलते कर्मचारियों के लिए

नई दिल्ली कर्मचारियों और उनके परिवारों के लिए एक राहत भरी खबर सामने आई है। एम्प्लॉइज प्रोविडेंट फंड ऑर्गनाइजेशन (EPFO) ने नया सर्कुलर जारी किया है, जिससे नौकरी बदलने वाले कर्मचारियों और उनके आश्रितों को बड़ा फायदा मिलेगा। अब वीकेंड या सरकारी छुट्टियों की वजह से सर्विस में ब्रेक नहीं माना जाएगा, जिससे डेथ क्लेम से जुड़े विवाद काफी हद तक खत्म हो सकते हैं। क्यों लिया गया यह फैसला पहले कई मामलों में दो नौकरियों के बीच वीकेंड या छुट्टियों के कारण कर्मचारी की सर्विस को टूटा हुआ माना जाता था, जिससे उनके परिवार को बीमा और पेंशन से जुड़े फायदे नहीं मिल पाते थे। EPFO ने बताया कि कई ऐसे मामले सामने आए, जहां कर्मचारी की मौत के बाद EDLI क्लेम सिर्फ मामूली गैप की वजह से खारिज कर दिया गया या कम रकम दी गई। इस गड़बड़ी को खत्म करने के लिए नया सर्कुलर जारी किया गया है। लगातार सर्विस की नई परिभाषा अब यदि किसी कर्मचारी की एक नौकरी खत्म होने और दूसरी नौकरी शुरू होने के बीच केवल वीकली ऑफ, नेशनल हॉलीडे, गजटेड हॉलीडे, स्टेट हॉलीडे या रिस्ट्रिक्टेड हॉलीडे आते हैं, तो इसे लगातार सर्विस माना जाएगा। EPFO ने यह भी स्पष्ट किया कि नौकरी बदलते समय अधिकतम 60 दिनों तक का गैप होने पर भी सर्विस कंटिन्यूअल मानी जाएगी। EDLI क्लेम में परिवारों को बड़ी राहत EPFO ने EDLI स्कीम के तहत मिलने वाले न्यूनतम भुगतान को बढ़ा दिया है। अब नॉमिनी या कानूनी वारिस को कम से कम 50,000 रुपये का भुगतान किया जाएगा, भले ही कर्मचारी ने लगातार 12 महीने की सर्विस पूरी न की हो। यह लाभ तब भी मिलेगा जब कर्मचारी के पीएफ खाते में औसत बैलेंस 50,000 रुपये से कम हो। किन मामलों में मिलेगा न्यूनतम भुगतान नया नियम उन मामलों पर भी लागू होगा, जहां कर्मचारी की मौत उसके आखिरी पीएफ योगदान के छह महीने के अंदर होती है, बशर्ते वह नियोक्ता के रिकॉर्ड में दर्ज हो। इसका मतलब यह है कि अब परिवार को बीमा क्लेम के लिए लंबी कानूनी प्रक्रिया या विवाद का सामना नहीं करना पड़ेगा।

PF पर संकट? बड़े खर्चों में अब किस पर भरोसा करेंगे लोग

 नई दिल्ली हमारे देश में अधिकतर लोग रिटायरमेंट फंड को लेकर गंभीर नहीं हैं. पेंशन की व्यवस्था पर ज्यादातर नौकरी-पेशा लोग तो चर्चा ही नहीं करते, क्योंकि वो इसके प्रत‍ि न तो जागरुक है और न ही उन्हें इसकी पूरी जानकारी है. इसे आप पढ़े-लिखे लोगों की समस्या कहें या मजबूरी, लेकिन सच यही है. रिटायरमेंट फंड और पेंशन को लेकर सबसे ज्यादा उदासीनता तो प्राइवेट सेक्टर के कर्मचारियों में है. दरअसल, प्राइवेट नौकरी वालों के लिए PF का अमाउंट एक बड़ा सहारा होता है. छोटी-छोटी राशि हर महीने जुड़कर एक बड़ा फंड बन जाता है. प्राइवेट जॉब करने वालों के ल‍िए तो उनके लिए PF का पैसा मुसीबत का साथी होता है. नौकरी छूट गई तो PF के पैसे से आर्थिक चुनौतियां थोड़ी कम हो जाती हैं. परिवार में कोई बीमार है, कर्ज लेने से अच्छा है कि PF का पैसा निकालकर इलाज करवा लेते हैं. बच्चों की पढ़ाई या शादी में पैसे कम पड़ रहे हैं, तो PF अकाउंट से निकाल लेते हैं. घर खरीदना है, पीएफ खाते में वर्षों से पड़ी जमापूंजी को निकाल लेते हैं. देश में अधिकतर मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए PF के पैसे मौजूदा दौर में सबसे ज्यादा इन्हीं कामों में इस्तेमाल हो रहे हैं. यहां गौरतलब है क‍ि देश में जब सबसे अधिक लोग प्राइवेट जॉब करते हैं. PF में बड़े बदलाव की तैयारी आज PF राशि पर चर्चा का मूल कारण सरकार का नया कदम है. सरकार कह रही है कि चंद महीने के बाद से आप चुटकी में पीएफ फंड को निकाल सकते हैं, प्रक्रिया आसान हो जाएगी. EPFO खातों को UPI और ATM से लिंक कर दिया जाएगा. ये सबकुछ मार्च-2026 तक पूरा होने का दावा किया जा रहा है. PF निकासी प्रक्रिया को आसान बनाना अच्छी बात है. क्योंकि लोगों को अभी भी PF अमाउंट निकालने में परेशानी होती है. सरकार का कहना है कि जिस तरह से लोग अपने बैंक खाते से पैसे निकाले हैं, ठीक उसी तरह की व्यवस्था PF फंड को निकालने के लिए कर दी जाएगी, इसपर काम तेजी से चल रहा है.  यानी डिजिटल युग में PF खाते से पैसे निकालना तो बेहद आसान हो जाएगा, लेकिन इसका एक बड़ा साइड इफेक्ट भी द‍िखना तय है. लोगों की बचत पर ग्रहण लगने वाला है. जब मन करे PF अकाउंट से फंड निकालने की सुविधा मिल जाएगी तो जरा सोचिए- फिर कितने और कौन लोग होंगे, जो PF खातों में वर्षों तक राशि बचाकर रखेंगे. छोटी-छोटी जरूरतों पर लोग ATM पहुंच जाएंगे. ऐसे में PF अमाउंट कितने दिन तक अकाउंट में टिका रहेगा, ये बड़ा सवाल है? घर खरीदना, बीमारी, पढ़ाई या शादी जैसे मौकों पर जो PF फंड आज सहारा बन जाता है, भविष्य में ये व‍िकल्प आपके पास नहीं रहेगा.  फिर सेविंग को लेकर क्या विकल्प? तुरंत PF निकासी की सुविधा लागू होते ही कोई भी अपने आपको PF अमाउंट निकालने में सहज पाएगा. चाहे, जिनके पीएफ अकाउंट में 10 लाख रुपये जमा हो या फिर 10 हजार. मोबाइल खरीदना और शॉपिंग जैसे काम के लिए भी लोग बेधड़क PF से पैसे निकालने लग जाएंगे. आदत इतनी बिगड़ सकती है कि सैलरी की तरह ही जैसे ही हर महीने PF अकाउंट में अमाउंट डिपॉजिट होगी, चंद दिन के बाद खुद जाकर निकाल लिया करेंगे.  वैसे ही देश में रिटायरमेंट फंड को लेकर लोग जागरूक नहीं हैं. भले ही आज निकासी प्रोसेस में समस्या की वजह से लोग PF फंड नहीं निकाल पा रहे हैं, लेकिन इसी आड़ में मोटा अमाउंट जमा हो जा रहा है. तुरंत PF फंड निकासी की सुविधा से भले ही कोई 20 साल तक नौकरी कर लेगा, परंतु अधिकतर लोगों के EPFO खाते में जमापूंजी के नाम पर चंद रुपये बचेंगे, क्योंकि वो तो समय-समय पर UPI और ATM का लाभ लेकर PF के पैसे को निकाले जा चुके होंगे. अब कुछ आंकड़ों को देखते हैं, जिससे आपको पता चल जाएगा कि कैसे बचत पर ग्रहण लगने वाला है. नियम के मुताबिक, कर्मचारी और नियोक्ता, दोनों ही कर्मचारी के मूल वेतन का 12% पीएफ में योगदान करते हैं. जिसमें कुछ कुछ हिस्सा पेंशन फंड (EPS) में जाता है. वित्त वर्ष 2023-24 में EPFO के सदस्य 7.37 करोड़ थे, यानी मौजूदा समय में 8 करोड़ के आसपास लोग EPFO से जुड़े हैं. EPFO का कुल PF कॉर्पस (FY25) में करीब 25 लाख करोड़ रुपये है, जो कि भारत की सबसे बड़ी रिटायरमेंट सेविंग फंड में से एक है. यह राशि साल-दर-साल बढ़ रही है. लेकिन नई व्यवस्था लागू होते ही ये राशि घटने लगेगी, फिर ये पैसा कहां जाएगा?  PF की आड़ में जोखिम लेने से नहीं हिचकेंगे लोग ये भी हो सकता है कि लोग PF का पैसा शेयर बाजार और म्यूचुअल फंड में लगाना शुरू कर दे, क्योंकि PF पर फिलहाल 8.25 फीसदी ब्याज दर निर्धारित है. जबकि म्यूचुअल फंड में इससे ज्यादा की संभावना रहती है. शेयर बाजार से तो लोग PF के मुकाबले दोगुने-तिगुने ब्याज की कल्पना कर लेते हैं. ऐसे में एक सुरक्षित निवेश से पैसे निकालकर लोग जोखिम लेने से नहीं हिचकेंगे. अब PF की तुलना में म्यूचुअल फंड और शेयर बाजार से कितना फायदा होगा, वो तो समय ही बताएगा. सच्चाई ये भी है कि भारत में कुल सकल बचत दर करीब 31 फीसदी है. वहीं सेबी के हालिया सर्वे के मुताबिक केवल 10% भारतीय परिवार ही म्यूचुअल फंड, शेयर बाजार और बॉन्ड जैसे वित्तीय उत्पादों में निवेश करते हैं. शहरी इलाकों में यह आंकड़ा 15% का है, जबकि ग्रामीण इलाकों में महज 6% है. हालांकि युवा पीढ़ी में अब बचत का रुझान बढ़ा है. लेकिन वो तेजी से जोखिम भरे शेयर बाजार की ओर आकर्षित हो रहे हैं.  सरकारी आंकड़े बताते हैं कि अब भी करीब 69% भारतीय हाउसहोल्ड बैंक में डिपॉजिट या FD में पैसा रखना पसंद करते हैं. वहीं एक रिपोर्ट के मुताबिक, करीब 40% शहरी लोगों ने रिटायरमेंट प्लानिंग के लिए अब तक कोई निवेश नहीं किया है. ग्रामीण इलाकों में स्थिति और भी खराब है. यानी देश में आधी से ज्यादा आबादी के पास रिटायरमेंट फंड को लेकर कोई प्लान नहीं है. पेंशन की बात करें तो देश की आबादी 140 करोड़ से ज्यादा है, लेकिन अधिकतम … Read more

EPFO खाताधारकों को मिलेगा तोहफा, 2024-25 के लिए बढ़ सकती है पीएफ ब्याज दर, जानें ताजा अपडेट

नई दिल्ली कर्मचारी भविष्य निधि संगठन के कर्मचारियों और पीएफ खाताधारकों के लिए एक अच्छी खबर है। नए साल में केन्द्र सरकार कर्मचारियों को बड़ा तोहफा दे सकती है। मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो EPFO वित्त वर्ष 2025-26 के लिए कर्मचारी भविष्य निधि जमा पर ब्याज दर बढ़ सकती है। इसका फैसला नए साल 2026 में लिया जा सकता है ।हालांकि अभी अधिकारिक तौर पर पुष्टि होना बाकी है।अंतिम फैसला केंद्रीय न्यासी बोर्ड की बैठक में लिया जाएगा और फिर वित्त मंत्रालय मंजूरी देगा।वर्तमान में 8.25% ब्याज दर है। नए साल में बढ़ सकती है पीएफ ब्याज दर दरअसल, मई में वित्त मंत्रालय भारत सरकार ने कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO ) द्वारा वित्त वर्ष 2024-25 के लिए कर्मचारी भविष्य निधि जमा पर ब्याज दर 8.25 फीसदी तय की थी जिसका ब्याज कर्मचारियों के खातों में क्रेडिट कर दिया गया है।अब नए वित्तीय वर्ष के लिए ब्याज दर तय होना है, जिसका इंतजार है। मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए पीएफ पर ब्याज दर बढ़ाने पर विचार किया जा रहा है।सरकार इसे बढ़ाकर लगभग 8.75 प्रतिशत तक करने पर विचार कर रही है। यदि ब्याज दर 8.75 प्रतिशत तक बढ़ती है तो इसका असर पीएफ बैलेंस पर दिखाई देगा।अगर किसी कर्मचारी के खाते में लगभग 6 लाख रुपये जमा हैं, तो 8.75 प्रतिशत की दर से उसे तकरीबन 52,000 रुपये तक और 5 लाख रुपये की राशि जमा है, तो उसे 43,750 रुपये के आसपास ब्याज मिल सकता है। यह पूरी रकम सीधे रिटायरमेंट फंड में जोड़कर मिलेगी। यदि ब्याज दर बदलती नहीं है तो 6 लाख पर 49,500 रुपये और 5 लाख की रकम पर 41,250 रुपये तो मिलेंगे ही। EPFO : कब कब कितनी रही है ब्याज दर     वित्त मंत्रालय ने कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO ) द्वारा वित्त वर्ष 2024-25 के लिए ब्याज दर 8.25 फीसदी रखी है। वित्त वर्ष 2023-24 के लिए ईपीएफओ ने भविष्य निधि जमा पर ब्याज दर 8.25 प्रतिशत निर्धारित की थी, जो 2022-23 में 8.15 प्रतिशत से अधिक है।     इससे पहले 2021-22 में 8.10% 2020-21 EPF दर 8.5 फीसदी (PF Interest Rate), 2018-19 में 8.65 प्रतिशत और 2017-18 में 8.55 प्रतिशत थी। EPFO ने साल 2023-24 के लिए 1,07,000 करोड़ की इनकम पर 8.25% ब्याज दिया, जो लगभग 13 लाख करोड़ की मूल राशि के आधार पर इसका हाईएस्ट रिटर्न है, जबकि साल 2022-23 में 91,151.66 करोड़ की इनकम पर दिए गए 8.15% से बढ़ोतरी थी। EPFO : इन 4 तरीकों से चेक कर सकते है बैलेंस     Umang APP से: अपने फोन में UMANG (Unified Mobile Application for New-age Governance) ऐप को इंस्टॉल करें। अब ऐप को ओपन करके उसमें लॉग-इन करें।इसके बाद ‘EPFO Option’ पर क्लिक करें और ‘Employee Centric Services’ पर जाएं। अब ‘view passbook’ पर क्लिक करें। इसके बाद आपको UAN नंबर दर्ज करना होगा, जिसके बाद आपके मोबाइल नंबर पर ओटीपी (OTP) आएगा। ओटीपी डालने के बाद पीएफ अकाउंट लॉग-इन हो जाएगा। अब आपको पीएफ पासबुक शो होगी।     SMS से : SMS से PF बैलेंस जानने के लिए EPFO के पास रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर से 7738299899 पर SMS करें।इसके लिए EPFO UAN LAN (भाषा) टाइप करना होगा। अगर आपको अंग्रेजी में जानकारी चाहिए तो LAN की जगह ENG लिखें। हिंदी में जानकारी के लिए LAN की जगह HIN लिखें।हिंदी में अकाउंट की जानकारी लेने के लिए EPFOHO UAN HIN लिखकर इसे 7738299899 नंबर भेज दें और मैसेज आपके मोबाइल पर आ जाएगा।     Missed Call से: इन तरीकों के अलावा आपके पास मिस्ड कॉल का भी ऑप्शन है। इसके लिए आपको अपने UAN रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर से 7738299899 पर मिस्ड कॉल करना है। यहा आपको अपने नए योगदान और बैलेंस के विवरण के साथ एक SMS मिल जाएगा।     EPFO से : सबसे वेबसाइट पर लॉग इन कर ई-पासबुक पर क्लिक करें। ई-पासबुक पर क्लिक करने पर एक नए पेज पर आ जाएंगे। जहां आपको अपना यूजर नाम (UAN नंबर), पासवर्ड और कैप्चा भरना होगा और फिर नया पेज खुलेगा । यहां मेंबर आईडी का चुनाव करना होगा।यहां ई-पासबुक पर अपना ईपीएफ बैलेंस मिल जाएगा।  

ईपीएफओ में सुधार की तैयारी, सैलरी कैप बढ़ने से लाभार्थियों की संख्या बढ़ेगी

नई दिल्‍ली कर्मचारी भविष्‍य निधि संगठन (EPFO) को लेकर एक बड़ा अपडेट सामने आया है. रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि कर्मचारी भविष्य निधि संगठन अनिवार्य PF और पेंशन कंट्रीब्‍यूशन के लिए सैलरी लिमिट बढ़ाकर अपने पात्रता मानदंडों में बड़े बदलाव पर विचार कर रहा है.  सरल शब्‍दों में कहें तो EPFO वेतन की मौजूदा सीमा (Wage Ceiling) को मौजूदा 15000 रुपये से बढ़ाकर 25000 रुपये करने का प्रस्‍ताव है. पहले यह 6,500 रुपये थी.इस कदम के पीछे का मकसद 1 करोड़ से ज्‍यादा कर्मचारियों को पेंशन और पीएफ की सामाजिक सुरक्षा में लाने का है.  यह तय करती है कि कर्मचारी भविष्य निधि (EPF) और कर्मचारी पेंशन योजना (EPS) के तहत कौन स्वतः नामांकित है. मुंबई में एक कार्यक्रम के दौरान वित्तीय सेवा विभाग (DFS) के सचिव एम नागराजू ने कहा कि यह बहुत बुरी बात है कि 15,000 रुपये से थोड़ा ज़्यादा कमाने वाले इतने सारे लोगों के पास पेंशन कवर नहीं है और बुढ़ापे में उन्हें अपने बच्चों पर निर्भर रहना पड़ता है. उन्‍होंने पुरानी पेंशन सीमाओं को अपडेट करने पर जोर दिया.  अभी क्‍या है नियम?  मौजूदा नियमों के तहत, केवल 15,000 रुपये तक की बेसिक सैलरी पाने वाले कर्मचारियों को ही ईपीएफ और ईपीएस के दायरे में लाया जाना चाहिए. इससे थोड़ा भी ज्‍यादा कमाने वाले लोग इससे बाहर निकल सकते हैं और नियोक्ताओं को उन्हें रजिस्‍टर्ड करने की कोई बाध्यता नहीं है. इससे शहरी निजी क्षेत्र के कर्मचारियों का एक बड़ा हिस्सा मामूली वेतन पाने के बावजूद, औपचारिक सेवानिवृत्ति बचत के बिना रह जाता है. 25000 रुपये हो सकती है ये लिमिट रिपोर्टों से संकेत मिलता है कि ईपीएफओ इस सीमा को बढ़ाकर 25,000 रुपये कर सकता है और अगले साल की शुरुआत में केंद्रीय न्यासी बोर्ड द्वारा इस मामले पर विचार किए जाने की उम्मीद है. श्रम मंत्रालय के एक डाटा से पता चलता है कि सीमा में ₹10,000 की वृद्धि से एक करोड़ से अधिक अतिरिक्त कर्मचारी अनिवार्य ईपीएफ और ईपीएस कवरेज के अंतर्गत आ सकते हैं. ट्रेड यूनियनें लंबे समय से इस तरह के संशोधन की मांग कर रही हैं, उनका तर्क है कि बढ़ती जीवन-यापन लागत और वेतन स्तरों के बीच मौजूदा सीमा पुरानी हो चुकी है. ईपीएफओ फंड बढ़ेगा कर्मचारियों के लिए, इस बदलाव से मासिक अंशदान बढ़ेगा, ईपीएफ कोष बढ़ेगा और पेंशन भुगतान में सुधार होगा. वर्तमान में, कर्मचारी मूल वेतन का 12% योगदान करते हैं, जो नियोक्ता द्वारा बराबर किया जाता है, जो अपना हिस्सा ईपीएफ और ईपीएस के बीच विभाजित करते हैं. हाई सैलरी बेस से दोनों पक्षों का योगदान बढ़ेगा. नियोक्ताओं के लिए प्रति कर्मचारी लागत बढ़ेगी.

PF खाताधारकों के लिए खुशखबरी! EPFO ने दी 100% निकासी की मंजूरी, ऐसे करें क्लेम

पटना कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) ने अपने सदस्यों के लिए भविष्य निधि (पीएफ) की आंशिक निकासी प्रक्रिया को और सरल एवं उदार बनाया है। संगठन ने पूर्व में लागू 13 अलग-अलग प्रावधानों को घटाकर अब तीन मुख्य आवश्यकताओं – शिक्षा, गृह कार्य एवं विशेष परिस्थितियों – में वर्गीकृत किया है। नई व्यवस्था के तहत सदस्य अब अपनी भविष्य निधि शेष राशि (नियोक्ता और कर्मचारी के अंशदान सहित) का 100 प्रतिशत तक उपयोग इन तीनों जरूरतों में कर सकेंगे। शिक्षा से संबंधित निकासी की सीमा को 3 से बढ़ाकर 10 बार, जबकि विवाह के लिए निकासी की सीमा को 3 से बढ़ाकर 5 बार तक कर दिया गया है। इन सभी प्रकार की निकासी के लिए न्यूनतम सेवा अवधि 12 माह निर्धारित की गई है। पहले विशेष परिस्थितियों जैसे प्राकृतिक आपदा, कंपनी बंद होने, तालाबंदी, महामारी या सतत बेरोजगारी की स्थिति में दावे के साथ कारण बताना आवश्यक था। अब कारण बताने की अनिवार्यता समाप्त कर दी गई है, जिससे दावों के निरस्त होने की संभावना कम होगी। संगठन ने यह भी प्रावधान किया है कि सदस्यों के खातों में कम से कम 25 प्रतिशत राशि भविष्य निधि के रूप में सुरक्षित रखी जाए। इसके साथ ही, सम्पूर्ण पीएफ निकासी के न्यूनतम अंतराल को 2 माह से बढ़ाकर 12 माह और पेंशन फंड की निकासी के अंतराल को 2 माह से बढ़ाकर 36 माह कर दिया गया है। पहले सदस्य 2 माह बाद पूरी पेंशन राशि निकाल लेते थे, जिससे नई नौकरी लगने पर सेवा की निरंतरता टूट जाती थी और वे पेंशन लाभ से वंचित रह जाते थे। नई नीति से अब निरंतर सेवा सुनिश्चित होगी और अधिक सदस्य पेंशन के पात्र बन सकेंगे। ईपीएफओ के क्षेत्रीय भविष्य निधि आयुक्त-1 हेमन्त कुमार ने बताया कि इस सुधार से निकासी प्रक्रिया पारदर्शी होगी, दावों का शत प्रतिशत निपटारा सुनिश्चित किया जा सकेगा और सदस्यों की शिकायतों में उल्लेखनीय कमी आएगी।  

PF निकासी में बदलाव: नए नियम जानें, कर्मचारियों को अब होंगे ये लाभ

नई दिल्ली  कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) ने नौकरी छोड़ने के बाद पीएफ निकासी और ब्याज से जुड़े नियमों में बदलाव किया है। नए नियमों के अनुसार अब नौकरी छोड़ने के बाद 75% राशि तुरंत निकाली जा सकती है, जबकि शेष राशि निकालने के लिए एक साल का इंतजार करना होगा। इसके साथ ही EPF खाता नौकरी छोड़ने के बाद भी सक्रिय रहता है और तीन साल तक ब्याज मिलता रहेगा। क्या नौकरी छोड़ने के बाद EPF खाता बंद होता है? EPFO के नियमों के अनुसार, एक बार सदस्य बनने के बाद आपकी सदस्यता समाप्त नहीं होती। यानी नौकरी छोड़ने के बाद भी आपकी EPF सदस्यता जारी रहती है और आपका खाता निष्क्रिय नहीं होता। केवल योगदान बंद हो जाता है। तीन साल तक ब्याज यदि नौकरी छोड़ने के बाद खाते में कोई योगदान नहीं हो रहा है, तो खाते पर तीन साल तक ब्याज मिलता रहेगा। लगातार तीन साल तक कोई योगदान न होने पर खाता “निष्क्रिय” माना जाएगा और उसके बाद ब्याज मिलना बंद हो जाएगा। उदाहरण के लिए, यदि कोई कर्मचारी जून 2022 में नौकरी छोड़ देता है और उसके बाद कोई योगदान नहीं होता, तो जून 2025 तक खाते पर ब्याज मिलेगा। EPFO के नियमों के अनुसार, ब्याज मिलने पर रोक का मतलब यह नहीं कि आपका पैसा समाप्त हो गया है। आपका मूलधन और पूर्व में जमा ब्याज सुरक्षित रहेगा और आप जब चाहें ऑनलाइन दावा दायर करके इसे निकाल सकते हैं। नई नौकरी में जुड़ने पर क्या होगा? यदि आप नई नौकरी शुरू करते हैं और नया EPF खाता खोलते हैं, तो आपका पुराना PF खाता UAN के माध्यम से नए खाते में ट्रांसफर किया जा सकता है। ट्रांसफर के बाद आपकी सदस्यता और योगदान फिर से सक्रिय हो जाएंगे, जिससे न केवल आपकी सेवा अवधि निरंतर मानी जाएगी बल्कि खाते पर ब्याज भी मिलता रहेगा।

PF निकासी नियमों में बड़ा बदलाव, अब बिना झंझट पूरी राशि निकालना हुआ आसान!

नई दिल्ली  कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) ने अपने नियमों में बड़ा बदलाव कर दिया है। नए नियमों में अब कर्मचारी अपने भविष्य निधि (EPF) खाते से 100 प्रतिशत तक राशि निकाल सकते हैं। यह सुविधा कुछ शर्तों के जरिए पूरी होगी, जिससे सेवानिवृत्ति निधि पूरी तरह समाप्त न हो। 100% निकासी की सुविधा नए नियमों के अनुसार, कर्मचारी अब अपने ईपीएफ खाते से पूरी राशि (कर्मचारी और नियोक्ता का अंशदान) निकाल सकते हैं। यह निकासी केवल विशेष परिस्थितियों (बीमारी, शिक्षा, विवाह या आवास निर्माण जैसी जरूरतें) में ही संभव होगी। ईपीएफओ ने स्पष्ट किया है कि यह सुविधा आकस्मिक जरूरतों को पूरा करने के लिए दी है।   25% राशि खाते में रखना जरूरी फाइनेंस एक्सपर्ट्स के मुताबिक, सदस्यों को अपने कुल ईपीएफ बैलेंस का कम से कम 25 प्रतिशत हिस्सा खाते में बनाए रखना होगा। इस राशि पर ब्याज (अभी 8.25%) और चक्रवृद्धि ब्याज मिलता रहेगा। इससे सदस्य अपनी भविष्य की सेवानिवृत्ति निधि को सुरक्षित रख सकेंगे और समय के साथ उस पर अतिरिक्त लाभ भी प्राप्त करेंगे। शिक्षा और विवाह के लिए निकासी के नियम बदले पहले सदस्य शिक्षा के लिए तीन बार और विवाह के लिए तीन बार तक निधि निकाल सकते थे। अब यह सीमा बढ़ा दी गई है। नए प्रावधानों के तहत सदस्य शिक्षा के लिए 10 बार और विवाह के लिए 5 बार तक राशि निकाल सकते हैं। यह सुविधा परिवारों को बिना कर्ज लिए बड़े खर्चों को संभालने में मदद करेगी। बेरोजगारी और विशेष परिस्थितियों में राहत अब बेरोजगारी की स्थिति में सदस्य अपने खाते से 75 प्रतिशत राशि निकाल सकते हैं, जबकि शेष 25 प्रतिशत राशि अंतिम निपटान के समय मिलती है। पहले सदस्यों को प्राकृतिक आपदा या लॉकडाउन जैसे कारणों का प्रमाण देना पड़ता था, जिससे आवेदन अस्वीकार हो जाते थे। नए नियमों के बाद प्रक्रिया अधिक आसान और पारदर्शी हो गई है।  

EPFO का पूरा बैलेंस निकालना अब हुआ आसान, मोबाइल से करें सिर्फ कुछ मिनटों में

नई दिल्ली ईपीएफओ ने कर्मचारियों के लिए बड़ी राहत दी है। अब पीएफ सदस्य अपने खाते से 100% राशि निकाल सकते हैं। ईपीएफओ की वेबसाइट पर जाकर ऑनलाइन क्लेम किया जा सकता है। आगे आप इस प्रोसेस को स्टेप-बाय-स्टेप समझ सकते हैं। हाल ही में EPFO ने एक बड़ा बदलाव करते हुए कर्मचारियों को राहत दी है। अब कर्मचारी भविष्य निधि संगठन यानी कि EPFO के सदस्य अपने पीएफ खाते से 100% राशि निकाल पाएंगे। ऐसे में अगर आप भी एक नौकरी पेशा शख्स हैं, तो आपके लिए भी जान लेना जरूरी है कि किस तरह से पीएस से पैसा निकाला जा सकता है। इससे पहले कि हम मोबाइल से EPFO का सारा पैसा निकालने का तरीका समझें, इस बात पर ध्यान दें कि नौकरी छूटने के बाद पूरी राशि निकालने की समय सीमा अब 2 महीने से बढ़ाकर 12 महीने कर दी गई है। चलिए अब हम EPFO से पैसे निकालने का तरीका समझ लेते हैं। EPFO से सारा पैसा निकालने के स्टेप्स अपने PF अकाउंट से सारा पैसा निकालने के लिए आपको सबसे पहले आपको EPFO की ऑफीशियल साइट पर जाना होगा और अपने UAN नंबर और पासवर्ड की मदद से अपने अकाउंट में लॉग-इन करना होगा।     लॉग इन करने के बाद डैश बोर्ड पर दिख रहे Online Services के ऑप्शन पर क्लिक करें और Claims ऑप्शन पर क्लिक करें।     इसके बाद आपके सामने एक फॉर्म खुलेगा। यहां कुछ फील्ड्स पहले से भरी हुई होंगी और कुछ फील्ड्स में आपको अपनी डिटेल्स भरनी होंगी।     इस फॉर्म पर आपको अपना बैंक अकाउंट नंबर डालना होगा और नियमों और शर्तों को स्वीकार करना होगा।     इसके बाद आपको अपनी आखिरी जॉब की डिटेल्स दिखाई देंगी और साथ ही डेट ऑफ एग्जिट का भी जिक्र उसमें होगा। डेट ऑफ एग्जिट का मतलब आपकी पिछली जॉब के लास्ट वर्किंग डे से होता है। आगे के स्टेप्स     इसके बाद Proceed For Online Claim पर क्लिक करके अगले स्टेप्स पर जाएं।     इसके बाद आपको I want to apply for में Form 19 को चुनना होगा और इसी के साथ आपके सामने एक और फॉर्म खुल जाएगा।     इस ऑप्शन के नीचे आपको Form 15G जमा करने का ऑप्शन मिलेगा। इस फॉर्म को तब भरकर सबमिट किया जाता है जब विड्रॉल की जा रही अमाउंट 50 हजार से ज्यादा हो और आप न चाहते हों कि उस पर आपसे 10% टीडीएस या टैक्स लिया जाए।     इसके बाद आपको अपने आधार कार्ड पर दिया पता भरना होगा और फिर मांगा जाए, तो कैंसिल चेक की फोटो अपलोड करनी होगी।     इसके बाद शर्तों को स्वीकार करके Get Aadhaar OTP पर टैप करें और OTP वेरिफाई करके अपने फॉर्म को सबमिट कर दें।     इसके बाद कुछ ही दिन में आपको अपने अकाउंट में आपका PF का पैसा मिल जाएगा।  

पेंशन पाने के लिए अब कितनी सेवा जरूरी? बदल गए हैं नियम, जानें पूरी डिटेल

नई दिल्ली सैलरी पाने वाले कर्मचारियों के लिए कर्मचारी भविष्य निधि (EPFO) सिर्फ एक बचत योजना नहीं है, बल्कि यह उनकी रिटायरमेंट सुरक्षा का एक अहम साधन भी है। हर महीने आपकी सैलरी का एक छोटा हिस्सा और उतना ही आपका नियोक्ता EPF फंड में जमा करता है। ज्यादातर लोग इसे केवल एकमुश्त राशि के तौर पर देखते हैं, लेकिन इसका एक महत्वपूर्ण हिस्सा ‘कर्मचारी पेंशन योजना’ (EPS) में जाता है, जो भविष्य में हर महीने पेंशन देने का काम करता है। 10 साल की न्यूनतम सेवा जरूरी कई लोग नौकरी छोड़ने के बाद अपने EPS फंड के बारे में आशंकित रहते हैं। EPFO के नियमों के अनुसार, पेंशन पाने के लिए न्यूनतम 10 साल की सेवा आवश्यक है। यदि आपकी कुल नौकरी 10 साल से कम है, तो आप पेंशन के पात्र नहीं होंगे। वहीं, 10 साल या उससे अधिक नौकरी करने वाले कर्मचारी रिटायरमेंट के बाद पेंशन के हकदार बन जाते हैं। इसका मतलब यह नहीं कि नौकरी छोड़ते ही पेंशन मिल जाएगी। पेंशन का दावा तभी किया जा सकता है जब आप 58 साल की उम्र पूरी कर लें। इसका मतलब है कि आप चाहे 40 साल की उम्र में नौकरी छोड़ दें, पेंशन का लाभ 58 साल के बाद मिलेगा। EPF और EPS में पैसे का बंटवारा आपकी सैलरी का 12% EPF फंड में जाता है और कंपनी भी उतना ही योगदान देती है। इसमें से 8.33% EPS में जाता है, जो रिटायरमेंट के बाद पेंशन के लिए आरक्षित होता है। बाकी 3.67% EPF खाते में जमा होता है, जिसे घर खरीदने, बच्चों की पढ़ाई, शादी या मेडिकल इमरजेंसी में निकाला जा सकता है। मासिक पेंशन कैसे तय होती है? ➤ EPFO एक फॉर्मूला के आधार पर पेंशन राशि तय करता है: ➤ मासिक पेंशन = (पेंशन योग्य वेतन × पेंशन योग्य सेवा) ÷ 70 ➤ पेंशन योग्य सेवा: EPS खाते में कुल योगदान के साल। ➤ पेंशन योग्य वेतन: आखिरी 60 महीने (5 साल) की औसत सैलरी, जिसकी ऊपरी सीमा ₹15,000 प्रति माह है।