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सागर के विकास को नई गति देगा 16000 करोड़ का एक्सप्रेस-वे, 75 किमी दूरी कम होगी

 सागर  आने वाले कुछ सालों में मध्य प्रदेश के सागर से हाईवे का जाल गुजरेगा. करीब चार हाईवे की सुविधा जिले को मिलेगी. इसका फायदा व्यापार में तो मिलेगा ही, शहर में विकास भी तेजी से होगा. जहां से नेशनल हाईवे गुजरेंगे, वहां पर उद्योग की नई-नई यूनिट स्थापित होंगी. होटल, रिसोर्ट, मॉल और बड़ी-बड़ी कालोनियां विकसित होंगी. जमीन के दाम बढ़ेंगे. इसी क्रम में एक और खुशखबरी सामने आई है. सागर, विदिशा और कोटा के बीच ग्रीन फील्ड एक्सप्रेस-वे बनने जा रहा है. इससे दोनों शहरों के बीच की दूरी में 75 किलोमीटर की कमी आ जाएगी. एक्सप्रेस-वे पर वाहन फर्राटा भरेंगे. जिससे 8 घंटे 45 मिनट का सफर 6 घंटे में ही पूरा हो जाएगा. बुंदेलखंड के मुख्यालय सागर, विदिशा होते हुए यह फोरलेन हाईवे कोटा तक जाएगा, जिससे सैकड़ों गांव से भी कनेक्टिविटी होगी. 405 किलोमीटर लंबा यह रास्ता महज 320 किलोमीटर का रह जाएगा. एक्सप्रेसवे बनने से यहां वाहनों की रफ्तार भी बढ़ेगी, जिससे समय की काफी बचत होगी. केंद्र सरकार के द्वारा 16,000 करोड़ के बजट से यह एक्सप्रेस-वे बनाया जा रहा है. बता दें, 17 जनवरी को केंद्रीय सड़क एवं परिवहन मंत्री नितिन गडकरी विदिशा जिले में पहुंचे थे, जहां उन्होंने मध्य प्रदेश के लिए एक लाख करोड़ के नए प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दी है. साथ ही उन्होंने 16,000 करोड़ से बनने वाले ग्रीन फील्ड एक्सप्रेस-वे की घोषणा की है. इस एक्सप्रेसवे के लिए सर्वे का कार्य पूरा हो चुका है. बीना-सिरोंज के बीच 52 km लंबी फोरलेन सड़क इसके अलावा ग्वालियर, भोपाल, नागपुर ग्रीन एक्सप्रेस-वे का भी निर्माण किया जाएगा. इस परियोजना में 40 हजार करोड़ की लागत आएगी. यह दोनों एक्सप्रेस-वे बनने से एमपी और राजस्थान, एमपी और नागपुर के बीच में बेहतर सड़क संपर्क हो सकेगा. साथ ही 1200 करोड़ की लागत से बीना से सिरोंज 52 किलोमीटर लंबी फोरलेन सड़क का निर्माण होगा. इसके बनने से दोनों एक्सप्रेस-वे से सीधी कनेक्टिविटी हो जाएगी. सड़कों के जाल से इतने फायदे  सागर की जनता को इन दोनों ही एक्सप्रेसवे का सीधे तौर पर फायदा मिलेगा. क्योंकि, राजस्थान के कोटा जाने के लिए सीधा सागर से एक्सप्रेस-वे होगा तो वहीं सागर से 75 किलोमीटर दूर बीना से सिरोंज मार्ग का इस्तेमाल कर ग्वालियर, भोपाल, नागपुर हाईवे पर पहुंच सकेंगे. इससे यात्रा बेहद सुगम और आरामदायक होगी. इसके अलावा सागर से देश का सबसे लंबा नेशनल हाईवे 44 करीब 154 किलोमीटर का हिस्सा गुजरता है, जिससे उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र पहुंच सकते हैं. इसी के साथ सागर कानपुर 4+2 लाइन का निर्माण कार्य चल रहा है, जिसका करीब 40 प्रतिशत काम भी पूरा हो चुका है. सागर दमोह के करीब 76 किलोमीटर हाईवे के लिए राज्य कैबिनेट से मंजूरी मिल चुकी है. इधर भोपाल-सागर नेशनल हाईवे का निर्माण कार्य भी जोरों पर है.

एमपी में 23,700 करोड़ की लागत से बनेगा एक्सप्रेस-वे, यूपी-राजस्थान की दूरी होगी कम, गांवों से ली जाएगी जमीन

  भिण्ड भिण्ड चंबल संभाग के तीनों जिलो के लिए क्रांतिकारी माने जा रहे अटल प्रोग्रेस-वे (Atal Progress Way) के निर्माण पर 26 माह से बंद प्रक्रिया फिर से शुरू होगी। राज्य सरकार ने फिर से कवायद तेज करने के निर्देश जारी किए तो जिले के की उम्मीदें जाग उठीं। तीन राज्यों और पांच जिलों को सीधे प्रभावित करने वाले अटल प्रोग्रेस-वे की एनएचएआई स्तर पर निरंतर प्रक्रिया चल रही है। यही वजह है कि 11500 करोड़ रुपए का यह प्रस्ताव अब 23 हजार 700 करोड़ तक पहुंच गया है। इस मार्ग के बन जाने से कोटा के लिए सडक मार्ग से 10-11 घंटे की यात्रा छह से सात घंटे रह जाएगी। 3 राज्यों के 5 जिलों से होकर गुजरेगी रोड उत्तरप्रदेश में इटावा जिले के ननावा से शुरू होने वाला अटल प्रोग्रेस-वे मप्र में भिण्ड, मुरैना और श्योपुर होकर राजस्थान के कोटा जिले में सीमाल्या पर जुड़ेगा। सर्वाधिक करीब 168 किलोमीटर मुरैना जिले में और सबसे कम करीब 22 किलोमीटर का हिस्सा राजस्थान के खाते में आएगा। किसानो के विरोध के बाद रोका गया था काम अटल प्रोग्रेस-वे को लेकर किसानों के तीखे विरोध के चलते अक्टूबर 2023 में तब के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह ने यह प्रक्रिया स्थगित कर दी थी। वर्ष 2017 से चंबल एक्सप्रेस के नाम से यह कवायद चल रही थी। वर्ष 2021 में भारत माला परियोजना में इसे शामिल करके नाम बदलकर अटल प्रगति पथ कर दिया गया है। मुख्यमंत्री ने दो दिन पहले भोपाल में हुई बैठक के बाद इसे फिर से शुरू करने के निर्देश संबंधित अधिकारियों को दिए हैं। चार हजार हेक्टेयर भूमि चाहिए कुल खेतों से होकर निर्माण के प्रस्ताव में मध्यप्रदेश में 188.1, उत्तरप्रदेश में 180.76 एवं राजस्थान में 492.51 हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण होना है। इसमें राजस्थान में 70.78, मप्र में 1604 एवं उत्तरप्रदेश में 36.35 हेक्टेयर शासकीय भूमि, राजस्थान में 380.93, मप्र 1180 एवं उत्तरप्रदेश में 134.7 हेक्टेयर निजी, जल संरचनाओं से लगी राजस्थान में 40.8 हेक्टेयर राजस्थान में, 404 हेक्टेयर एमपी में और 9.71 हेक्टेयर भूमि यूपी में अधिग्रहित की जानी है। लेकिन निजी भूमि के अधिग्रहण का भिण्ड में और निजी व वन भूमि का विरोध मुरैना में हो रहा है। 454 हेक्टेयर भूमि का होना है अधिग्रहण खेतों से होकर निर्माण पर वन विभाग की 454.51 हेक्टेयर भूमि अधिगृहित की जानी है। राजस्थान में कोटा जिले के सीमाल्या गांव के पास मुंबई-बड़ोदरा राष्ट्रीय राजमार्ग क्रमांक 27 से शुरू होकर मध्यप्रदेश के तीन जिलों को कवर करते हुए उत्तरप्रदेश के इटावा जिले में निनावा तक प्रस्तावित इस मार्ग के निर्माण भिण्ड और इटावा जिले के लोगों को कोटा जाने के लिए सीधा शॉर्टकट और सुगम आवागमन उपलब्ध हो सकेगा। इसके आसपास लॉजिस्टिक हथ, औद्योगिक क्षेत्र और चंबल पर्यटन की संभावनाएं तलाशी जा रही हैं। किस जिले में कितनी प्रस्तावित लंबाई अटल प्रौग्रेस वे में जिले की 29 ग्राम पंचायतों, दो जनपदों के 41 गांव प्रभावित हो रहे हैं। इनमें अटेर में कछपुरा, उदोतगढ़, कनेरा, अहरौली काली, शुक्लपुरा, खडेरी, चौम्हों, तरसोखर, निवारी, बलारपुरा, जम्होरा, प्रतापपुराः बड़पुरा, रिदौली, गोहदूपुरा, जौरी-कोतवाल, सुरपुरा, दुल्हागन, मटघाना, भिण्ड में गोपालपुरा, भववासी, भदाकुर, नाहरा एवं सराय गांव शामिल हैं। (MP News) शासन को इस मामले में जल्द कोई निर्णय लेना चाहिए, किसान असमंजस में हैं। किसान अपनी कृषि भूमि का भी सही उपयोग नहीं कर पा रहे हैं।- लक्ष्मण सिंह नरवरिया, किसान, अटेर शासन स्तर पर बैठक होने की सूचना तो मिली है. हमारे पास कोई अधिकृत जानकारी अभी नहीं आई है। अपडेट कोई होगा तो जानकारी दी जाएगी। – उमाकांत मीणा, ईई, एनएचएबाई, ग्वालियर।

पूर्व से उत्तर भारत तक नई रफ्तार: गोरखपुर–पानीपत 747 KM एक्सप्रेसवे से चमकेगा 100 से अधिक गांवों का भविष्य

गोरखपुर  पानीपत-गोरखपुर एक्सप्रेसवे के लिए गोरखपुर-बस्ती मंडल के 133 गांवों में जमीन अधिग्रहित की जाएगी। यह एक्सप्रेसवे सिद्धार्थनगर के बांसी से प्रवेश करते हुए संतकबीरनगर के मेंहदावल, गोरखपुर के सदर एवं कैंपियरगंज होते हुए कुशीनगर के हाटा तक बनेगा। गोरखपुर मंडल में इस एक्सप्रेसवे की लंबाई 86.24 किमी होगी। एनएचएआई ने भूमि अधिग्रहण के लिए चारों जिलों के जिलाधिकारियों को इस संबंध में पत्र भेज दिया है। जानकारी के अनुसार, एनएचएआई ने पानीपत एक्सप्रेसवे के लिए गोरखपुर-बस्ती मंडल में सर्वे शुरू कर दिया है। इसमें बांसी के 37 गांवों में 16.69 किमी, मेंहदावल के 29 गांवों में 22.5 किमी, गोरखपुर तहसील सदर के 24 एवं कैंपियरगंज के 22 गांवों में 34.22 किमी एवं हाटा के 21 गांवों में 12.8 किमी सड़क की लंबाई होगी। 747 किमी लंबी है एक्सप्रेसवे पानीपत गोरखपुर एक्सप्रेसवे की लंबाई 747 किमी है, जो सिद्धार्थनगर से आगे बलरामपुर, बहराइच, लखीमपुर खीरी के गोला गोकर्णनाथ होते हुए आगे बनेगा। संतकबीरनगर के 20.25 किमी के बाद 280 मीटर का एरिया गोरखपुर का कवर होगा, इसके बाद 1.98 किमी एरिया संतकबीरनगर का कवर होगा। फिर इसके बाद गोरखपुर में इस एक्सप्रेसवे की लंबाई 34 किलोमीटर होगी। नयनसर के पास पानीपत एक्सप्रेसवे गोरखपुर सोनौली हाईवे को पार करेगा। डीएम दीपक मीणा ने बताया कि पानीपत गोरखपुर एक्सप्रेसवे का एलाइन्मेंट तय हो गया है। गोरखपुर के 46 गांवों से होते हुए एक्सप्रेसवे आगे जाएगा। एनएचएआई के प्रस्ताव पर जल्द भूमि अधिग्रहण अधिकारी नामित कर दिया जाएगा। इन गांवों में होगा भू-अधिग्रहण कैंपियरगंज के लक्ष्मीपुर (पचवारा), लक्ष्मीपुर(भारीवैसी), मखनहा, ठकुरापार, भरोहिया, गंगापार, रामपुर कैथवलिया, बेलघाट बुजुर्ग, रमवापुर, दोनफा, भइयाराम, जरहद, नयनसर, हिरुआ, बढ़या, चकमाफी, भुइधरपुर, साखी, ताल कोमर, कानापार, नीबा, कंदरखावा। गोरखपुर सदर बढ़नी, फुलवरिया, सियारामपुर, महराजगंज, ठाकुरपुर नंबर एक, ठाकुरपुर नंबर दो, खुटहन खास, जंगल नाकिन, जंगल डुमरी नंबर एक, रामपुर खुर्द, भिस्वा, इस्मालपुर, रामपुर बुजुर्ग, मेंहदिया, जमुनिया, पोखर भिंडा उर्फ चकदहा, समस्तपुर उर्फ मुड़िला, कोटवा, खिरिया, आराजी बरवा, रामपुर थवईपार, गंभीरपुर कम्हरिया, परशुरामपुर, सोनराइच उर्फ बड़ा गांव। बांसी, सिद्धार्थनगर बंजारी, बिमौआ खुर्द तप्पा पचहर, पचमोहनी, कम्हरिया, बहादुरपुर, डोड़वार शुक्ल, जमोहनी, जमोहना, भावपुर, पिपरा भइया, भटुली, बरनवार, सोनवा माफी, सुहईरनपुरवा, मुड़िला हिर्दन, छपवा, बेलवा लगुनही, पड़िया बुजुर्ग, रोहुआ, महोखवा, बनकटा, कड़जा, बचलाखोर, अकोल्ही, परसा, ढुढ़नी, मझारिया तप्पा मजोरा, मंझरिया तप्पा हाटा, नगवा तप्पा हाटा, नगवा तप्पा कुदारन, सोनखर तप्पा कुदारन, सोनखर तप्पा चंवर, सोनवलिया तप्पा कुदारन, मिश्रौलिया तौफिर, सिरसिया तप्पा मजोरा, पिपरा शुक्ल। मेंहदावल, संतकबीरनगर बढ़या, फेउसा, परसा माफी, परसा शुक्ल, महला, पसाई, देवकली, प्रतापपुर, जसवल, रमवापुर, खजुरा खुर्द, नचनी, समोगर, गुदरिहवा, खजुराकला, सिक्टौर माफी, कुंडवा, जमुवरिया खुर्द, जमुवरिया कला, रक्सा, भरवलिया मिश्र, कुसोना कला, जमोहरा, मुड़ली, डुमरिया बाबू, इंदरपुर, कौवाठोर, पिड़ारी कला, चितरुखिया। कुशीनगर, हाटा, रामपुर, अगया, होलिया, रामपुर माफी, मगडिहा, सिंदुरिया विशुनपुर, घोड़ादेउर, खुरहुरिया, बलुआ, तुर्कडिहा, बिंदुआर, सहजौली, सेंदुआर, मुंडेरा, खोट्ठा, सिहुलिया, टिकर, छपिया, बेलवा खुर्द, महुअवा, अहिरौली।  

2080 करोड़ की लागत से बनेगा उज्जैन-जावरा ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे, दिल्ली-मुंबई सफर होगा और तेज

उज्जैन  उज्जैन-जावरा ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे कंट्रोल्ड हाइवे बनाने का टेंडर निरस्त होने के बाद मध्य प्रदेश रोड डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (MPRDC) ने इस 102 किलोमीटर के हाईवे को बनाने के लिए एक बार फिर से 2418.46 करोड रुपए का टेंडर जारी किया था। इसको भरने के लिए अंतिम तारीख 24 जुलाई थी। नए टेडर 20 जून को जारी किए गए थे, जो सितंबर माह में अब खाले गए। एलएलसी वोल्गाडोरस्ट्रॉय कंपनी ने 2080 करोड़ में हाईवे बनाने का टेंडर लिया है। 2 साल में कार्य पूरा करना है।  सिंहस्थ 2028 तक एक्सप्रेसवे होना है तैयार इस कार्य में 40 प्रतिशत राशि राज्य सरकार के द्वारा दी जाएगी और 60 प्रतिशत राशि ठेकेदार को व्यय करनी है। इस हाइवे के बनने से उज्जैन की मुंबई व दिल्ली से दूरी मात्र 10 घंटे में पूरी हो जाएगी। उज्जैन-जावरा ग्रीनफील्ड एक्सेस कंट्रोल्ड हाइवे को सिंहस्थ 2028 से पहले बनाना है। पूर्व में 102.80 किमी लंबे उज्जैन-जावरा फोरलेन परियोजना को मंजूरी दी गई थी जो ग्रीनफील्ड एक्सेस कंट्रोल्ड हाइवे के इस जगह पर बना था। तब शहरी क्षेत्र में इसका विरोध भी काफी हुआ था, इसके लिए संघर्ष समिति ने लगातार तीन माह तक धरना भी दिया था। अब इसको पीपीपी मोड पर हाइब्रिड एनयूटी आधार पर बनाया जाएगा।  7 बड़े और 26 छोटे पुल बनेंगे हाईवे पर इस हाइवे पर 7 बड़े और 26 छोटे पुल सहित 270 पुलिया, पांच लाई ओवर और दो रेलवे ओवरब्रिज होंगे। यह मार्ग जावरा के पास ग्राम भूतेड़ा से दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे से जुड़ेगा। अब मध्य प्रदेश रोड डेवलपमेंट कॉरपोरेशन ने एक बार फिर से इस कार्य के लिए टेंडर जारी किए हैं। दिल्ली मुंबई एक्सप्रेस वे व उज्जैन रोड यहां मिलेगा ग्रीन फील्ड एक्सप्रेस वे सफर 10 घंटे में पूरा इस हाइवे बनने के बाद उज्जैन से दिल्ली या मुंबई तक का सफर 10 घंटे में पूरा किया जा सकेगा। सितंबर 2024 में उज्जैन के गांवों से जमीन अधिग्रहण शुरु हुआ था और मार्च 2025 तक इसे पूरा करने का लक्ष्य था। मगर किसानों की तरफ से जमीन के बदले मुआवजा या रोड के डिजाइन को लेकर आए विरोध व तकनीकी कारणों के चलते काम रुक गया था। इसलिए इस मार्ग का दोबारा से टेंडर जारी किया गया है और जिस कंपनी ने इसे लिया है उसे 2 साल में यह कार्य पूरा करके भी देना है।  51 से अधिक गांवों से गुजरेगा हाइवे यह ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे जावरा तहसील के 12 गांव से होता हुआ उज्जैन तक 51 गांवों से गुजरेगा। इनमें नागदा, खाचरौद, उन्हेंल तहसील के 30 गांव शामिल है। इसमें जावरा तहसील के डोडियाना, ललियान सहित जावरा तहसील के 12 गांव इसमें समिलित हो रहे हैं। अन्य तहसील के गांव जैसे निबोदिया खुर्द, पांसलोद, भाटीसुडा, आक्यानजीक, झिरनिया, पिपलिया डाबी, लसुडिया चुवंड, पिपलियाशीष, नवादा, कुंडला, नागझिरी, भाटखेडी, बंजारी, दुमनी, मीण, घिनौदा आदि गांव शामिल है। फैक्ट फाइल     स्थान : मध्य प्रदेश     लंबाई: 98.73 किमी परियोजना     इस प्रकार : ग्रीनफील्ड राजमार्ग चार-लेन का बनेगा     इन कपनी ने लिया टेंडर एलएलसी वोल्गाडोरस्ट्रॉय     राशि- 2080 करोड़     कार्य – 2 साल में करना है पूरा     मेंटेनेंस – कार्य पूरा होने के बाद 15 साल तक करना है मेंटेनेंस खुल गया है टेंडर- एमपीआरडीसी ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे का टेंडर खुल गया है जिस कंपनी ने यह टेंडर लिया है वह जल्द ही ड्राइंग डिजाइन बनाकर इस कार्य को शुरु करने के लिए काम करेगी।-विजय सिंह, एमपीआरडीसी

दिल्ली-NCR के लिए बड़ी खबर: जेवर एयरपोर्ट से दिल्ली तक बनेगा सुपरफास्ट एक्सप्रेसवे

नई दिल्ली दिल्ली, नोएडा और ग्रेटर नोएडा वासियों के लिए एक बड़ी खुशखबरी है। क्षेत्र में कनेक्टिविटी को बेहतर बनाने के लिए एक नया 30 किलोमीटर लंबा एक्सप्रेसवे बनाया जाएगा, जो जेवर एयरपोर्ट से सीधे दिल्ली तक पहुंचेगा। यह नया एक्सप्रेसवे नोएडा-ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेसवे के समानांतर बनाया जाएगा और यमुना नदी को पार करते हुए पुस्ता रोड के जरिए दिल्ली तक पहुंचेगा। यह सड़क नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना एक्सप्रेसवे को जोड़ते हुए दिल्ली के यातायात को आसान बनाएगी। परियोजना को किसने बढ़ावा दिया? इस प्रोजेक्ट की शुरुआत गौतम बुद्ध नगर के सांसद डॉ. महेश शर्मा के प्रयासों से हुई थी। अब इस योजना को केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी का भी समर्थन मिल गया है। हाल ही में जेवर एयरपोर्ट के दौरे पर उन्होंने फंडिंग देने का ऐलान भी किया। यात्रा का समय घटेगा अभी जेवर से दिल्ली तक पहुंचने में करीब 2 घंटे लगते हैं। नए एक्सप्रेसवे से यह दूरी सिर्फ 30 मिनट में तय की जा सकेगी, जिससे यात्रियों को काफी राहत मिलेगी। 1.20 लाख करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट का हिस्सा नितिन गडकरी के अनुसार, यह एक्सप्रेसवे दिल्ली-NCR में चल रहे 1.20 लाख करोड़ रुपये के इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स का हिस्सा है। अब तक इनमें से आधा काम पूरा हो चुका है। आने वाले समय में सरकार यहां 40 से 50 हजार करोड़ रुपये और निवेश करने को तैयार है। भीड़भाड़ होगी कम नोएडा-ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेसवे पर रोजाना लगभग 5 लाख वाहन चलते हैं। इनमें से करीब 2 लाख वाहन डीएनडी से गुजरते हैं। चिल्ला बॉर्डर, कालिंदी कुंज और सेक्टर 15, 16, 18, 37 जैसे क्षेत्रों से भी भारी ट्रैफिक आता है। पीक ऑवर में अक्सर जाम लग जाता है, जिससे लोगों को भारी परेशानी होती है। नया एक्सप्रेसवे इन वाहनों को बायपास कराकर सीधे जेवर एयरपोर्ट तक ले जाएगा। जेवर एयरपोर्ट के लिए खास एक्सप्रेसवे यह एक्सप्रेसवे खासतौर पर जेवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट को ध्यान में रखकर बनाया जा रहा है। यूपी सरकार के अनुसार, 2025 के अंत तक एयरपोर्ट का संचालन शुरू हो जाएगा, जिसके बाद इस एक्सप्रेसवे की जरूरत और बढ़ जाएगी। कौन बनाएगा एक्सप्रेसवे? नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना एक्सप्रेसवे अथॉरिटी से फंडिंग को लेकर चर्चा की गई है। तीनों अथॉरिटीज़ का सुझाव है कि यह प्रोजेक्ट NHAI (राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण) को सौंपा जाए ताकि केंद्र सरकार और अन्य स्रोतों से मिलने वाली फंडिंग का सही उपयोग हो सके।  दिल्ली-NCR के लोगों को ट्रैफिक की परेशानी से राहत देने और जेवर एयरपोर्ट से दिल्ली की कनेक्टिविटी मजबूत करने के लिए यह नया एक्सप्रेसवे एक गेमचेंजर साबित हो सकता है।