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ईरान संकट गहराया: भारत में बढ़ी हलचल, केंद्र ने बुलाई सर्वदलीय मीटिंग

नई दिल्ली मध्य एशिया में जारी तनाव का असर भारत पर भी देखने को मिल रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक दिन पहले ही कहा है कि हमें भी तैयार रहने की जरूरत है। वहीं अब सूत्रों का कहना है कि सरकार ने बुधवार को सर्वदलीय बैठक बुलाई है। जानकारी के मुताबिक बुधवार को शाम पांच बजे सर्वदलीय बैठक होगी। इससे पहले रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने एक बैठक करके क्षेत्रीय सुरक्षा की समीक्षा की थी। उन्होंने सीडीएस जनरल अनिल चौहान, वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल अमर प्रीत सिंह और जनरल उपेंद्र द्विवेदी व ऐडमिरल डिनेश के त्रिपाठी के अलावा डीआरडीओ चेयरमैन के साथ बैठक करके तैयारियों की जानकारी ली। ईरान और इजरायल-ईरान के बीच जारी युद्ध अब चौथे सप्ताह में प्रवेश कर गया है। वहीं होर्मुज स्ट्रेट बंद होने की वजह से पूरी दुनिया ऊर्जा संकट से जूझने लगी है। बता दें कि अमेरिका और इजरायल ने अचानक ईरान पर हमला करके उसेक सुप्रीम लीडर अली खामेनेई की हत्या कर दी थी। इसी के बाद से तनाव बढ़ता ही चला गया और ईरान ने खाड़ी देशों को भी निशाना बनाना शुरू कर दिया। राज्यसभा में भी बयान दे सकते हैं पीएम मोदी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को लोकसभा में इस संकट को लेकर बयान दिया था। वहीं जानकारी के मुताबिक आज वह राज्यसभा में भी अपनी बात रख सकते हैं। पीएम मोदी ने लोकसभा में कहा था कि मध्य एशिया में जारी इस तनाव का असर भारत पर भी पड़ सकता है। ऐसे में भारत जिस तरह से कोरोना संकट के दौरान तैयार था, वैसे ही तैयार रहने की जरूरत है। पीएम मोदी ने कहा था कि पश्चिमी एशिया में जो कुछ भी हो रहा है वह बहुत ही दुखद और चिंतनीय है। उन्होंने कहा कि इसका असर वैश्विक अर्थव्यवस्था के साथ ही आम आदमी के जीवन पर भी पड़ रहा है। ऐसे में सारा विश्व यही चाहता है कि युद्ध जल्द रुके। पीएम मोदी ने कहा कि भारत में तेल और गैस की आपूर्ति ज्यादातर उन्हीं देशों से होती है जो कि युद्ध के चपेट में हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और इसके कारण भारत के सामने आई चुनौतियों पर लोकसभा में वक्तव्य देते हुए यह भी कहा था कि इस संकट का सामना देशवासियों को कोरोना संकट की तरह ही करना होगा। उन्होंने होर्मुज जलडमरूमध्य में रुकावट और व्यावसायिक जहाजों पर हमलों को अस्वीकार्य बताते हुए कहा था कि इस समस्या का समाधान कूटनीति और बातचीत से ही संभव है तथा भारत तनाव को कम करने व संघर्ष समाप्त करने के लिए हरसंभव प्रयास कर रहा है।  

सुबह 11:30 बजे से विद्यार्थी वेब पोर्टल पर देख सकेंगे परिणाम, क्यूआर कोड के माध्यम से पोर्टल की लिंक को कर सकेंगे स्कैन

भोपाल राज्य शिक्षा केन्द्र, स्कूल शिक्षा विभाग मध्यप्रदेश द्वारा बुधवार को कक्षा 5वीं एवं 8वीं का परीक्षा परिणाम घो‍षित किया जाएगा। विद्यार्थी सुबह 11.30 बजे से अपना परीक्षा परिणाम www.rskmp.in/result.aspx पोर्टल पर देख सकेंगे। राज्य शिक्षा केंद्र से मिली जानकारी अनुसार 25 मार्च को परीक्षा परिणाम घोषणा की प्रक्रिया सुबह 11 बजे से राज्य शिक्षा केन्द्र कार्यालय के सभाकक्ष में संचालित की जाएगी। इसके बाद सुबह 11:30 बजे परीक्षा परिणाम पोर्टल पर जारी किया जाएगा। विद्यार्थी, अभिभावक एवं शिक्षकगण राज्य शिक्षा केन्द्र की वेब पोर्टल www.rskmp.in/result.aspx पर अपना रोल नंबर/समग्र आईडी डालकर रिजल्ट देख सकेंगे। साथ ही इसी पोर्टल पर शिक्षक, संस्था प्रमुख अपनी शाला का विद्यार्थीवार परिणाम भी देख सकेंगे। राज्य शिक्षा केंद्र द्वारा वेब पोर्टल की लिंक भी क्यूआर कोड़ के माध्यम से उपलब्ध कराई गई है। प्रदेश में कक्षा 5वीं एवं 8वीं की परीक्षा बोर्ड पैटर्न पर कराई गई थी। यह विगत 20 से 28 फरवरी के बीच हुई थी। जिसमें प्रदेश की शासकीय, अशासकीय शालाओं एवं पंजीकृत मदरसों के कक्षा 5वीं के 12 लाख 76 हज़ार से अधिक तथा कक्षा 8वीं के 10 लाख 92 हज़ार से अधिक विद्यार्थी शामिल हुए थे। प्रदेश में लगभग 23 लाख 68 हजार से अधिक विद्यार्थियों की उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन के लिए कुल 322 केन्द्र बनाये गए थे। इन मूल्यांकन केन्द्रों में 1 लाख 10 हज़ार से अधिक मूल्यांकनकर्ताओं के द्वारा अंकों की ऑनलाइन प्रविष्टि पोर्टल पर दर्ज की गई है।  

ऑस्ट्रेलिया में 16 साल से कम उम्र के बच्चों के इलेक्ट्रिक मोबिलिटी डिवाइस चलाने पर लगेगा नया प्रतिबंध

सिडनी   ऑस्ट्रेलिया के क्वींसलैंड राज्य में नए सुरक्षा कानूनों के तहत 16 साल से कम उम्र के बच्चों को इलेक्ट्रिक मोबिलिटी डिवाइस (जैसे ई-बाइक और ई-स्कूटर) चलाने की अनुमति नहीं होगी। यह फैसला मंगलवार को घोषित किया गया। राज्य सरकार ने बताया कि ई-मोबिलिटी सुरक्षा पर बनी संसदीय समिति की सभी 28 सिफारिशों को पूरी तरह या सिद्धांत रूप में स्वीकार कर लिया गया है। इनमें 16 साल से कम उम्र के बच्चों पर प्रतिबंध भी शामिल है। क्वींसलैंड के परिवहन मंत्री ब्रेंट मिकेलबर्ग ने कहा कि सरकार जल्द ही इन सिफारिशों को कानून बनाने के लिए संसद में पेश करेगी। नए नियमों के मुताबिक, ई-बाइक और ई-स्कूटर चलाने के लिए कम से कम क्वींसलैंड का लर्नर ड्राइविंग लाइसेंस होना जरूरी होगा। यह लाइसेंस 16 साल की उम्र में मिलता है, जिससे यह सुनिश्चित किया जा सके कि चलाने वाले को ट्रैफिक नियमों की जानकारी हो। जांच में सामने आया कि साल 2025 में क्वींसलैंड में ई-मोबिलिटी से जुड़े हादसों में 12 लोगों की मौत हुई और 6,300 लोग घायल हुए। मिकेलबर्ग ने मंगलवार को कहा, "हम 16 साल से कम उम्र वालों पर इन डिवाइस के इस्तेमाल पर रोक लगा रहे हैं, क्योंकि बच्चों की सुरक्षा सबसे ज़्यादा ज़रूरी है।" समाचार एजेंसी सिन्हुआ की रिपोर्ट के अनुसार, नए कानूनों के तहत फुटपाथों पर ई-मोबिलिटी डिवाइस के लिए 10 किलोमीटर प्रति घंटे की गति सीमा भी तय की जाएगी। साथ ही, पुलिस को अवैध डिवाइस ज़ब्त करने और नष्ट करने के अतिरिक्त अधिकार दिए जाएंगे, और वे चालकों का अचानक 'ब्रीथ टेस्ट' (सांस की जांच) भी कर सकेंगे। पिछले साल, ऑस्ट्रेलिया में 16 साल से कम उम्र वालों के लिए सोशल मीडिया पर दुनिया का पहला प्रतिबंध लागू हुआ था। इसके तहत फेसबुक, यूट्यूब, टिकटॉक और एक्स जैसे बड़े प्लेटफॉर्म्स को ऐसे बच्चों के अकाउंट बनाने से रोकना होगा। प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज ने कहा कि यह कदम उन बच्चों की मदद के लिए उठाया गया है, जो एल्गोरिदम, लगातार चलने वाली सोशल मीडिया फीड और उसके दबाव के बीच बड़े हो रहे हैं। उन्होंने छात्रों से यह भी कहा कि वे छुट्टियों का सही उपयोग करें और पूरा समय मोबाइल पर न बिताएं। ऑस्ट्रेलिया के इस फैसले में दुनिया के कई देशों की दिलचस्पी देखी गई है। डेनमार्क, मलेशिया, ब्राजील, इंडोनेशिया और न्यूजीलैंड जैसे देश भी ऐसे कदम उठाने पर विचार कर रहे हैं।  

उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने दी निर्देश, लंबित भर्तियों की नियुक्ति प्रक्रिया जल्द पूरी हो

लंबित भर्तियों में नियुक्ति प्रक्रिया को शीघ्र करें पूर्ण: उप मुख्यमंत्री शुक्ल भोपाल  उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने मंत्रालय में लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग की समीक्षा कर आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने विभागीय भर्ती प्रक्रियाओं की प्रगति पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने निर्देश दिए कि सभी लंबित भर्तियों को निर्धारित समय-सीमा में पूर्ण किया जाए, जिससे स्वास्थ्य सेवाओं में मानव संसाधन की कमी को शीघ्र दूर किया जा सके। उन्होंने कर्मचारी चयन बोर्ड (ईएसबी) एवं मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग (पीएससी) के साथ निरंतर संपर्क एवं समन्वय बनाए रखने के निर्देश दिए, ताकि भर्ती प्रक्रिया में किसी प्रकार की अनावश्यक देरी न हो। साथ ही, सभी आवश्यक प्रशासनिक एवं तकनीकी औपचारिकताओं को समय पर पूर्ण करने को कहा। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने अस्पताल सहायक के रिक्त पदों की भर्ती के संबंध में प्रस्ताव को शीघ्र कर्मचारी चयन बोर्ड को भेजने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि अस्पताल सहायक के पद स्वास्थ्य संस्थानों के सुचारू संचालन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं, इसकी पदपूर्ति प्रक्रिया में विलंब न किया जाए। मेडिकल कॉलेजों एवं स्वास्थ्य विभाग में नर्सिंग टीचरों की नियुक्ति प्रक्रिया की भी समीक्षा की और प्राथमिकता के आधार पर शीघ्र कार्यवाही पूर्ण करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि प्रशिक्षित एवं योग्य नर्सिंग स्टॉफ स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने प्रदेश के स्वास्थ्य संस्थानों में आधुनिक एवं अत्याधुनिक चिकित्सा उपकरणों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए योजनाबद्ध एवं चरणबद्ध कार्यवाही करने के निर्देश दिए। बैठक में आयुक्त लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा धनराजू एस, अपर संचालक मनोज कुमार सरियाम उपस्थित रहे।  

कश्मीर केस में बड़ा फैसला: आसिया अंद्राबी को उम्रकैद, सहयोगियों पर भी कड़ी सजा

नई दिल्ली दिल्ली की एक अदालत ने कश्मीर की अलगाववादी नेता और दुख्तरान-ए-मिल्लत की प्रमुख आसिया अंद्राबी को उम्रकैद और उसकी दो सहयोगियों सोफी फहमीदा और नाहिदा नसरीन को 30-30 साल की सजा सुनाई है। तीनों आरोपियों को जनवरी में UAPA (गैरकानूनी गतिविधियों निवारण अधिनियम) के तहत दोषी ठहराया गया था। दिल्ली की कड़कड़डूमा कोर्ट के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश चंदर जीत सिंह ने सजा पर दलीलें पूरी होने के बाद अंद्राबी पर यह फैसला सुनाया। इससे पहले इस साल जनवरी में केस का फैसला सुनाते हुए अदालत ने कहा था कि आसिया अंद्राबी और उसकी दो अन्य सहयोगियों ने कश्मीर को भारत से अलग करने की साजिश रची थी। कोर्ट ने 14 जनवरी को अंद्राबी, फहमीदा और नसरीन को UAPA की धारा 20 (आतंकवादी गिरोह या आतंकवादी संगठन का सदस्य होने पर सजा), 38 (आतंकवादी संगठन की सदस्यता से जुड़ा अपराध) और 39 (आतंकवादी संगठन का समर्थन करना) के तहत दोषी ठहराया था।

SC का बड़ा फैसला: हिंदू, सिख या बौद्ध धर्म छोड़ने पर छिन सकता है अनुसूचित जाति का दर्जा

नई दिल्ली सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को एक ऐतिहासिक फैसले में साफ कर दिया है कि हिंदू, सिख या बौद्ध धर्म के अलावा किसी अन्य धर्म को अपनाने वाले व्यक्ति को अनुसूचित जाति (SC) का दर्जा नहीं मिल सकता. कोर्ट ने कहा कि धर्म परिवर्तन के बाद अनुसूचित जाति का दर्जा स्वतः समाप्त हो जाता है और ऐसे व्यक्ति को SC/ST अत्याचार निवारण कानून का संरक्षण भी नहीं मिलेगा. कोर्ट ने स्पष्ट करते हुए कहा कि ईसाई बने व्यक्ति को SC/ST एक्ट का लाभ नहीं मिलेगा।  दरअसल, आंध्र प्रदेश के रहने वाले एक पादरी चिंथाडा आनंद ने SC/ST एक्ट के तहत मामला दर्ज कराया था. उन्होंने आरोप लगाया था कि कुछ लोगों ने उन्हें जाति के नाम पर गाली दी, मारपीट की और जान से मारने की धमकी दी. जबकि आरोपी पक्ष ने कहना था कि आनंद ईसाई धर्म अपनाकर पादरी बन गए हैं, इसलिए उन्हें SC का दर्जा नहीं मिल सकता।  आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट ने इस दलील को सही माना और FIR रद्द कर दी. हाईकोर्ट ने कहा कि ईसाई धर्म अपनाने और सक्रिय रूप से उसका पालन करने वाले व्यक्ति को SC का दर्जा बरकरार नहीं रहता, भले ही उसके पास पुराना SC प्रमाणपत्र क्यों न हो।  आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट के इसी फैसले को आनंद ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी. इस पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति पी.के. मिश्रा और एन.वी. अंजारिया की पीठ ने हाईकोर्ट के उस फैसले को सही ठहराया, जिसमें कहा गया है कि ईसाई धर्म अपनाने और सक्रिय रूप से उसका पालन करने वाले व्यक्ति को अनुसूचित जाति समुदाय के सदस्य के रूप में मान्यता नहीं दी जा सकती।  स्वत: खत्म हो जाएगा SC का दर्जा सुप्रीम कोर्ट ने पाया कि आनंद पिछले एक दशक से रविवार की प्रार्थनाएं आयोजित कर रहे थे और घटना के समय भी वे ईसाई धर्म का पालन कर रहे थे, जिससे उनका एससी दर्जा स्वतः ही खत्म हो गया।  कोर्ट ने हाईकोर्ट के फैसले को पूरी तरह से सही ठहराते हुए कहा कि वर्तमान मामले में याचिकाकर्ता ये नहीं कह रहा है कि इस मामले में याचिकाकर्ता का ये दावा नहीं है कि उसने ईसाई धर्म से अपने मूल धर्म में पुनः धर्मांतरण किया है या उसे मादिगा समुदाय में पुनः स्वीकार कर लिया गया है. इससे ये सिद्ध होता है कि अपीलकर्ता ईसाई धर्म का पालन करता रहा है और एक दशक से अधिक वक्त से पादरी के रूप में कार्यरत है जो गांव के घरों में नियमित रूप से रविवार की प्रार्थनाएं आयोजित करता है।  'घटना के वक्त नहीं थे SC का कानूनन हिस्सा' कोर्ट ने आगे कहा, 'घटना के वक्त भी वह प्रार्थना सभा चला रहा था. इन तथ्यों से कोई संदेह नहीं रह जाता कि घटना के दिन वह ईसाई धर्म का अनुयायी था. इसलिए घटना की तारीख पर वह कानूनन अनुसूचित जाति का हिस्सा नहीं था और इसलिए उसे SC/ST एक्ट का लाभ नहीं मिल सकता।  सुप्रीम कोर्ट का ये फैसला उन सभी मामलों पर लागू होगा, जहां अनुसूचित जाति के व्यक्ति ने हिंदू, सिख या बौद्ध धर्म छोड़कर ईसाई या किसी अन्य धर्म को अपना लिया है. कोर्ट ने साफ किया कि SC का दर्जा केवल हिंदू, सिख और बौद्ध तक ही सीमित है। 

26 और 29 मार्च को दो नए मौसम सिस्टम एक्टिव, रीवा-सागर में बूंदाबांदी, आंधी-बारिश का अलर्ट

भोपाल   मध्यप्रदेश में मौसम के कई रंग एक साथ देखने को मिल रहे हैं. कहीं चिलचिलाती धूप ने पसीने छुड़ा दिए हैं, तो कहीं बादलों के डेरे ने तापमान में गिरावट दर्ज की है. मौसम विभाग के मुताबिक प्रदेश में एक बार फिर ‘वेस्टर्न डिस्टर्बेंस’ एक्टिव हो रहा है, जिसका असर ग्वालियर, चंबल, रीवा और सागर संभाग में देखने को मिलेगा. बीते दिन सोमवार को उज्जैन, सागर और ग्वालियर-चंबल संभाग में साइक्लोनिक सर्कुलेशन सिस्टम की वजह से आसमान में बादल छाए रहे. इसका सीधा असर पारे पर पड़ा और ग्वालियर में तापमान 30 डिग्री सेल्सियस से नीचे लुढ़क गया. हालांकि प्रदेश के बाकी हिस्सों में गर्मी का तीखा असर बरकरार रहा. वहीं 26 और 29 मार्च को उत्तर-पश्चिमी भारत में दो नए सिस्टम एक्टिव हो रहे है. जिसके चलते आंधी-बारिश का अलर्ट है. 26 और 27 मार्च को इन जिलों में बारिश के आसार फिलहाल 26 और 27 मार्च को प्रदेश के कई हिस्सों में तेज आंधी के साथ बारिश होने की संभावना है. जबकि 29 मार्च को एक और नया सिस्टम एक्टिव होगा, जिसका मतलब है कि अप्रैल की शुरुआत भी गरज-चमक और बौछारों के साथ हो सकती है. बहरहाल एक तरफ बारिश का अलर्ट है, तो दूसरी तरफ सूरज के तेवर भी कड़े हैं. सोमवार को प्रदेश के कई शहरों में भीषण गर्मी दर्ज की गई. जहां प्रदेश में सबसे ज्यादा अधिकतम तापमान नर्मदापुरम में 37.7° सेल्सियस, रायसेन में 37.6°, रतलाम में 37.2°, खरगोन 36.0°, खजुराहो और नरसिंहपुर 36.0° और धार में 35.0 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया. 24 घंटे में कई जिलों में बारिश और बादल पिछले 24 घंटे में प्रदेश के कुछ हिस्सों में हल्की बारिश दर्ज की गई। रीवा में 3 मिमी बारिश और सागर में 1 मिमी बारिश दर्ज की गई। ग्वालियर-चंबल संभाग समेत कई जिलों में बादल छाए रहे। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार यह बदलाव साइक्लोनिक सर्कुलेशन सिस्टम की वजह से हुआ है, जिसके कारण उत्तरी मध्य प्रदेश में मौसम अपेक्षाकृत ठंडा रहा। ग्वालियर में दिन का तापमान 30 डिग्री से नीचे दर्ज किया गया, जबकि बाकी हिस्सों में गर्मी का असर जारी रहा। 26 मार्च से फिर सक्रिय होगा नया सिस्टम मौसम विभाग के अनुसार 26 मार्च को उत्तर-पश्चिम भारत में नया पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होगा। इसका असर दो दिनों तक मध्य प्रदेश के कई जिलों में देखने को मिलेगा। इस सिस्टम के कारण तेज हवाएं, गरज-चमक के साथ बारिश और बादल छाए रहने की संभावना जताई जा रही है। इसके बाद 29 मार्च को भी एक नया सिस्टम सक्रिय हो सकता है, जिससे मार्च के आखिरी दिनों में मौसम अस्थिर बना रहेगा। 26 मार्च को इन जिलों में बारिश के आसार ग्वालियर, भिंड, दतिया, शिवपुरी, निवाड़ी, टीकमगढ़, छतरपुर, सागर, पन्ना, सतना, मैहर, रीवा, मऊगंज और सीधी. 27 मार्च को इन जिलों में बारिश के आसार पन्ना, सतना, रीवा, मऊगंज, सीधी, सिंगरौली, मैहर, अनूपपुर और शहडोल. इस तरह रहा बड़े शहरों अधिकतम तापमान  भोपाल में 34.2°C इंदौर में 34.9°C जबलपुर में 34.2°C ग्वालियर में 29.2°C उज्जैन में 35.0°C बड़े शहरों का न्यूनतम तापमान भोपाल में 17.0°C इंदौर में 18.2°C जबलपुर में 17.3°C ग्वालियर में 17.5°C उज्जैन में 16.3°C

सीएम विष्णुदेव साय का नुआपाड़ा दौरा, पत्नी कौशल्या साय व विधायक पुरंदर मिश्रा रहे साथ

नुआपाड़ा छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय आज धार्मिक यात्रा पर ओडिशा के नुआपाड़ा जिले में स्थित कोमना के वैष्णो देवी मंदिर पहुंचे। वहां उन्होंने विधिपूर्वक पूजा-अर्चना की और मंदिर परिसर का अवलोकन किया। मंदिर पहुंचने पर मुख्यमंत्री का स्थानीय श्रद्धालुओं और मंदिर प्रबंधन ने गर्मजोशी से स्वागत किया। इस दौरान उनके साथ पत्नी कौशल्या साय और विधायक पुरंदर मिश्रा भी मौजूद थे।

नई गाइडलाइन के तहत प्रदेश में LPG गैस सिलेंडर वितरण, कोटा निर्धारित

भोपाल  मध्यप्रदेश सरकार ने गैस सिलेंडरों के वितरण का कोटा तय कर दिया है। घरेलू उपभोक्ताओं को पहले की तरह 100 प्रतिशत आपूर्ति मिलती रहेगी। वहीं, शिक्षा और चिकित्सा क्षेत्रों को संबंधित जिले में उपलब्ध कमर्शियल गैस के कुल स्टॉक में से 30 प्रतिशत आपूर्ति देने के निर्देश दिए गए हैं। सरकार का मानना है कि ऐसे में दोनों क्षेत्रों की जरूरत पूरी हो सकेगी। खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग के उप सचिव बीके चंदेल ने सभी कलेक्टरों को इस संबंध में निर्देश जारी किए। इससे पहले विभागीय मंत्री गोविंद सिंह राजपूत और अपर मुख्य सचिव रश्मि अरुण शमी ने गैस व पेट्रोल-डीजल आपूर्ति की समीक्षा की। सरकार ने कहा कि जमाखोरी या कालाबाजारी पाए जाने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। तय कर दिया गया सबका कोटा केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल, सुरक्षा एजेंसियां, पुलिस, एयरपोर्ट, रेलवे, दीनदयाल रसोई, जेल, सामाजिक न्याय विभाग और महिला-बाल विकास को 35 प्रतिशत सिलेंडर मिलेगा। होटल क्षेत्र को 9 प्रतिशत, रेस्टोरेंट व केटरिंग को भी समान आपूर्ति तथा ढाबा व स्ट्रीट फूड वेंडरों को 7 प्रतिशत आपूर्ति होगी। उद्योगों में फार्मास्यूटिकल, फूड प्रोसेसिंग, पोल्ट्री फीड व सीड प्रोसेसिंग क्षेत्र को 5 प्रतिशत और अन्य उद्योगों को भी इतनी ही मात्रा में सिलेंडर दिए जाएंगे। किया जाएगा निरिक्षण सरकार ने स्पष्ट किया है कि जमाखोरी, अवैध भंडारण और कालाबाजारी को रोकने के लिए जिला प्रशासन द्वारा नियमित रूप से निरीक्षण किया जाएगा। आवश्यक वस्तु अधिनियम सहित अन्य संबंधित कानूनों के तहत नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। राज्य सरकार ने संस्थानों और प्रतिष्ठानों को अस्थायी रूप से वैकल्पिक ऊर्जा स्रोत अपनाने के लिए भी प्रोत्साहित किया है, ताकि गैस की उपलब्धता का संतुलन बनाए रखा जा सके। यह नई व्यवस्था अगले आदेश तक लागू रहेगी, जिससे आवश्यक सेवाओं को प्राथमिकता देते हुए आम आपूर्ति व्यवस्था को सुचारू रखा जा सके। कमर्शियल गैस सिलिंडरों की दिक्कत राजधानी में अभी भी कमर्शियल गैस सिलिंडरों की किल्लत हो रही है। बीते दो सप्ताह से अधिक समय बीत जाने के बावजूद आपूर्ति व्यवस्था सामान्य नहीं हो सकी है। अब इसका सीधा असर होटल, रेस्तरां और छोटे ढाबा संचालकों पर पड़ रहा है। कारोबार चौपट होने की कगार पर पहुंच चुका है, जिससे व्यापारियों में नाराजगी बढ़ रही है।

बस्तर में हिंसा के अंत का संकेत, नक्सली पापाराव और 17 साथी करेंगे सरेंडर

जगदलपुर इंद्रावती के घने जंगलों से एक ऐसी खबर सामने आ रही है, जो बस्तर के दशकों पुराने हिंसक अध्याय के अंत का संकेत देती नजर आ रही है। लंबे समय से सक्रिय शीर्ष माओवादी कमांडर पापा राव के आत्मसमर्पण की तैयारी ने सुरक्षा एजेंसियों और स्थानीय प्रशासन को सतर्क कर दिया है। बताया जा रहा है कि पापा राव अपने 17 साथियों के साथ हथियारों सहित समर्पण के लिए जंगल से बाहर निकल चुका है। उसे सुरक्षित लाने के लिए सुरक्षा बलों की विशेष टीम इंद्रावती राष्ट्रीय उद्यान के भीतर रवाना हो चुकी है। यदि यह आत्मसमर्पण सफल होता है, तो इसे बस्तर में माओवादी हिंसा के अंत की निर्णायक शुरुआत माना जा रहा है। पापाराव उर्फ मंगू (56) ये छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले का रहने वाला है। वर्तमान में DKSZCM मेंबर है। साथ ही पश्चिम बस्तर डिवीजन कमेटी का इंचार्ज और दक्षिण सब जोनल ब्यूरो का सदस्य है। अपने पास AK-47 राइफल रखता है। बस्तर के जल-जंगल जमीन से वाकिफ है इसलिए कई बार पुलिस की गोलियों से बचकर निकला है। इसने सरेंडर कर दिया या फिर एनकाउंटर में मारा गया तो नक्सलियों की पश्चिम बस्तर डिवीजन कमेटी खत्म हो जाएगी। देवा के सरेंडर करने के बाद अब पापाराव ही एक मात्र ऐसा नक्सली बचा है जो फाइटर है। बाकी बचे हुए अन्य टॉप कैडर्स के नक्सली उम्र दराज हो चुके हैं। पापाराव के सरेंडर करते ही बस्तर से माओवाद का सफाया तय माना जा रहा है। पापा राव का समर्पण     करीब 25 लाख रुपये के इनामी पापा राव वेस्ट बस्तर डिवीजन का सचिव और दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी का अहम सदस्य रहा है। लंबे समय तक बस्तर में माओवादी गतिविधियों की कमान उसके हाथों में रही।     ऐसे में उसका आत्मसमर्पण केवल एक व्यक्ति का सरेंडर नहीं, बल्कि पूरे संगठनात्मक ढांचे के कमजोर पड़ने का प्रतीक माना जा रहा है। सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि इससे शेष कैडर का मनोबल भी टूटेगा और वे भी आत्मसमर्पण के लिए प्रेरित होंगे। साल भर में ऐसे बिखरा संगठन पिछले साल ही नक्सल संगठन के सबसे खूंखार नक्सली माड़वी हिड़मा, नक्सल संगठन का सचिव बसवाराजू, गणेश उइके समेत 17 बड़े कैडर्स का एनकाउंटर किया गया। भूपति, रूपेश, रामधेर जैसे बड़े नक्सलियों ने अपने सैकड़ों साथियों के साथ हथियार डाल दिए हैं। जबकि मिशिर बेसरा और गणपति ये 2 बड़े टॉप के नक्सली बचे हैं, जो वर्तमान में संगठन चला रहे हैं। बस्तर में बटालियन नंबर 1 का कमांडर देवा ने भी हिंसा का रास्ता छोड़ दिया है। अब केवल पापाराव ही एक ऐसा नक्सली बचा है जो लड़ाकू है। अगर इसका एनकाउंटर होता है या फिर गिरफ्तारी और सरेंडर होता है तो निश्चित ही नक्सल संगठन खत्म है। लगातार ऑपरेशन से टूटा नेटवर्क पिछले कुछ वर्षों में सुरक्षा बलों ने माओवादी नेटवर्क पर लगातार सर्जिकल और रणनीतिक हमले किए हैं। बसव राजू, गुडसा उसेंडी, कोसा, हिड़मा और सुधाकर जैसे बड़े कमांडरों के मारे जाने से संगठन की रीढ़ पहले ही टूट चुकी थी। इसके अलावा भूपति, देवजी, मल्लाजी रेड्डी, रुपेश और सुजाता समेत करीब 2700 माओवादियों के आत्मसमर्पण ने संगठन को बिखेर दिया है। अब बस्तर में करीब 50 माओवादी ही सक्रिय बताए जा रहे हैं, जिनमें कोई बड़ा नेतृत्वकर्ता नहीं बचा है। विकास ने बदली तस्वीर माओवाद के कमजोर होने का सबसे बड़ा कारण ग्रामीणों का घटता समर्थन भी रहा है। जिन क्षेत्रों में कभी ‘जनताना सरकार’ का प्रभाव था, वहां अब सड़क, स्कूल, स्वास्थ्य सेवाएं और सुरक्षा कैंप स्थापित हो चुके हैं। सरकार की पुनर्वास नीति और रोजगार के अवसरों ने युवाओं को मुख्यधारा की ओर आकर्षित किया है। इससे माओवादियों का सामाजिक आधार लगभग समाप्त हो गया है। झारखंड में बची अंतिम चुनौती हालांकि बस्तर, ओडिशा और तेलंगाना में माओवादी प्रभाव काफी हद तक खत्म हो चुका है, लेकिन झारखंड अब भी एक चुनौती बना हुआ है। वहां पोलित ब्यूरो सदस्य मिसिर बेसरा अपने 70-80 साथियों के साथ सक्रिय है। सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, उसकी लोकेशन का पता लगाया जा चुका है, लेकिन उसने अपने ठिकानों के आसपास बारूदी सुरंगों का जाल बिछा रखा है, जिससे ऑपरेशन चुनौतीपूर्ण बना हुआ है। लक्ष्य के करीब सुरक्षा एजेंसियां केंद्रीय गृहमंत्री द्वारा 31 मार्च 2026 तक माओवादी हिंसा खत्म करने के लक्ष्य के बीच तेजी से बदले हालात सुरक्षा एजेंसियों के लिए बड़ी उपलब्धि माने जा रहे हैं। पापा राव का संभावित आत्मसमर्पण इस लक्ष्य की दिशा में एक निर्णायक कदम हो सकता है। यदि झारखंड में भी अंतिम अभियान सफल रहता है, तो देश माओवादी हिंसा के लंबे दौर से पूरी तरह मुक्त हो सकता है। जिनके सरेंडर या एनकाउंटर के बाद खत्म होगा एंटी नक्सल ऑपरेशन 1. मुपल्ला लक्ष्मण राव उर्फ गणपति उर्फ रमन्ना उर्फ राजन्ना, 3.5 करोड़ का इनाम 2. मिशिर बेसरा उर्फ भास्कर उर्फ सर्निमल उर्फ सुनील, 1.30 करोड़ का इनाम 1. मुपल्ला लक्ष्मण राव उर्फ गणपति, 3.6 करोड़ का इनाम गणपति भाकपा (माओवादी) का पूर्व महासचिव था। 1992 में वो पीपुल्स वॉर ग्रुप (PWG) का महासचिव बना और 2004 में CPI (माओवादी) बनने के बाद 2018 तक इसकी कमान संभाली। पोलित ब्यूरो मेंबर और सेंट्रल कमेटी में एडवाइजर है। 1992 से लेकर 2018 तक जितने नक्सली हमले हुए, सब इसी के नेतृत्व में हुए। गणपति पर छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र सरकार ने 1-1 करोड़ का इनाम रखा है। जबकि आंध्र ने 25 लाख, झारखंड ने 12 लाख और NIA ने 15 लाख का इनाम रखा है। ओडिशा, प. बंगाल और तेलंगाना ने भी गणपति पर इनाम की घोषणा कर रखी है। 2003 में आंध्र प्रदेश के CM रहे चंद्रबाबू नायडू पर हमले का आइडिया और स्ट्रैटजी दोनों गणपति की थी। नक्सलियों के संगठन में मौजूद हमारे सोर्स के मुताबिक, नायडू पर हमले का आइडिया पोलित ब्यूरो के कई मेंबर्स को जोखिम भरा लगा था। कई लोग इसके सपोर्ट में भी नहीं थे। हालांकि गणपति इससे पीछे हटने को राजी नहीं हुआ। नायडू पर हमले ने केंद्र से लेकर राज्य सरकार तक को बड़ा झटका दिया था। ये सिर्फ अकेली घटना नहीं है, जो गणपति के नेतृत्व में अंजाम दी गई हो। ऐसी 10 बड़ी घटनाएं हैं, गणपति जिनका मास्टरमाइंड रहा। 2. मिशिर बेसरा उर्फ भास्कर, 1.30 करोड़ का इनाम बेसरा झारखंड … Read more