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पूर्व सीएम भूपेश बघेल की सुप्रीम कोर्ट में अर्जी: गिरफ्तारी से बचने की कोशिश

रायपुर छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने खुद को गिरफ्तारी से बचाने के लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। उन्होंने शराब, कोयला और महादेव सट्टा एप घोटालों में नाम सामने आने के बाद अग्रिम जमानत याचिका दाखिल की है, जिस पर सोमवार पाँच अगस्त को सुनवाई होगी। इसी दिन शराब घोटाले में जेल में बंद उनके बेटे चैतन्य बघेल की जमानत याचिका पर भी सर्वोच्च न्यायालय सुनवाई करेगा। उल्लेखनीय है कि चैतन्य बघेल की गिरफ्तारी को लेकर भी विपक्ष और उनके समर्थकों के बीच राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है। राजनीतिक प्रतिशोध का आरोप अपनी याचिका में भूपेश बघेल ने दलील दी है कि उन्हें राजनीतिक द्वेष के चलते निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जैसे उनके बेटे की गिरफ्तारी राजनीतिक दुर्भावना के तहत की गई, वैसे ही उन्हें भी गिरफ्तारी का डर सता रहा है। भूपेश बघेल ने कोर्ट से यह अनुरोध किया है कि उन्हें गिरफ्तार न किया जाए और उन्हें जांच में सहयोग करने का पूरा अवसर दिया जाए। उन्होंने स्पष्ट किया है कि वे जांच से भाग नहीं रहे, बल्कि निष्पक्ष प्रक्रिया की उम्मीद कर रहे हैं। जांच एजेंसियों की बढ़ी सक्रियता यह याचिका ऐसे समय दाखिल की गई है, जब ईडी और अन्य केंद्रीय जांच एजेंसियों ने इन घोटालों की जांच तेज कर दी है। बीते कुछ हफ्तों में छत्तीसगढ़ के कई बड़े अफसरों और नेताओं से पूछताछ की जा चुकी है।

भारत आर्थिक रफ्तार पर, झगड़ा नुकसानदेह – ट्रंप को अमेरिकी कारोबारी की सख्त सलाह

नई दिल्ली अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने एकदम से बाजी पलटते हुए बीते सप्ताह भारत पर 25 फीसदी का हाई टैरिफ (25% Tariff On India) और रूस के साथ कारोबार करने पर अतिरिक्त जुर्माने का ऐलान कर हलचल मचा दी. इस बीच ट्रंप के इस कदम पर तमाम प्रतिक्रियाएं सामने आईं और इनमें उनकी कड़ी आलोचना भी की गई. इस क्रम में दिग्गज कनाडाई कारोबारी और टेस्टबेड के चेयरमैन किर्क लुबिमोव ने भारत के खिलाफ अमेरिकी राष्ट्रपति द्वारा भारी टैरिफ लगाए जाने पर तीखी आलोचना की है और कहा है कि, 'भारत से झगड़ा मोल लेना ट्रंप की बड़ी भूल है.'      'सबसे तेज इकोनॉमी से ट्रंप छेड़ रहे लड़ाई' टेस्टबेड के अध्यक्ष किर्क लुबिमोव सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्विटर (अब X) पर एक पोस्ट के जरिए US President डोनाल्ड ट्रंप के बारत के खिलाफ उठाए गए कदम की आलोचना करते हुए इसे एक बड़ी भू-राजनीतिक भूल करार दिया है, जो एशिया में अमेरिकी स्ट्रेटिजिक टारगेट पर प्रतिकूल प्रभाव डालने वाली साबित हो सकती है.  उन्होंने अपने पोस्ट में लिखा, 'मैंने पहले भी कहा है, और मैं फिर से कहूंगा, डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ विजन की सबसे बड़ी समस्या यह है कि इसमें भू-राजनीतिक रणनीति का बिल्कुल भी ध्यान नहीं रखा गया है. ट्रंप अब दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में से एक भारत (World's Fastest Growing Economy) के साथ लड़ाई छेड़ रहे हैं, जिसके प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) शायद दुनिया में सबसे ज्यादा सम्मानित हैं और कई प्रमुख देशों में उनका प्रभाव है.'  Trump को दे दी ये बड़ी सलाह कनाडाई कारोबारी नेता लुबिमोव ने इस पोस्ट के जरिए चेतावनी देते हुए कहा है कि ग्लोबल सप्लाई चेन में भारत की भूमिका को चीन के प्रभुत्व को कम करने के संदर्भ में देखा जाना चाहिए. उन्होंने कहा इसका उद्देश्य चीन (China) और ब्रिक्स (BRICS) के प्रभुत्व और विकास को कमजोर करना है, जिसका भारत भी एक हिस्सा है और ये चीन से प्रोडक्शन स्थानांतरित करने के लिए एक स्वाभाविक देश हो सकता है, क्योंकि अमेरिका 50 सेंट के टूथब्रश नहीं बनाने वाला है.  इस बीच उन्होंने सलाह देते हुए ये भी कहा कि डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) को भारत के साथ कील-हथौड़े का इस्तेमाल करने के बजाय, कनाडा (Canada) के साथ आर्थिक सहयोग करना चाहिए और उसे साथ लाना चाहिए, जिससे कि ताकि प्राकृतिक संसाधनों की जरूरतों को पूरा किया जा सके. Dead Economy वाले बयान पर प्रतिक्रिया किर्क लुबिमोव का यह पोस्ट Trump द्वारा भारत और रूस (India-Russia) पर सीधा हमला करने के कुछ दिनों बाद आया है, जिसमें उन्होंने कहा था, 'मुझे परवाह नहीं कि भारत रूस के साथ क्या करता है. वे अपनी डेड इकोनॉमी को मिलकर और गिरा सकते हैं, मुझे इससे कोई फर्क नहीं पड़ता.' उन्होंने भारत से आने वाले सभी सामानों पर 25% टैरिफ लगाने की भी घोषणा करने के साथ ही भारत द्वारा रूसी कच्चे तेल (Russian Crude Oil) और सैन्य उपकरणों की खरीद पर जुर्माना लगाने का भी ऐलान किया था.  यही नहीं अमेरिका के राष्ट्रपति ने तो भारत की व्यापार नीतियों पर भी तीखा हमला किया था और इन्हें अत्यंत कठोर बताया था. उन्होंने कहा था कि भारत दुनिया में अमेरिकी सामानों पर सबसे ज्यादा टैरिफ लगाने वाले देशों में सामिल है और उच्च टैरिफ और व्यापार बाधाओं के कारण अमेरिका ने भारत के साथ बहुत कम व्यापार किया है. चीन के बाद रूसी तेल का बड़ा खरीदार भारत बता दें कि भारत वर्तमान में चीन के बाद रूसी कच्चे तेल का दूसरा सबसे बड़ा खरीदार है और यूक्रेन युद्ध (Russia-Ukraine War) से पहले रूसी तेल आयात 1% से भी कम था, जो अब बढ़कर 35% से भी ज्यादा हो गया है. ट्रंप द्वारा लगाए गए जुर्माने के बाद भारत पहला ऐसा देश बन गया है जिसे अमेरिकी प्रतिबंधों के बावजूद रूस के साथ व्यापार जारी रखने के लिए सीधे निशाना बनाया जा रहा है. यही नहीं बीते दिनों रूस से अलग  ट्रंप प्रशासन ने ईरानी पेट्रोकेमिकल उत्पादों की खरीद और बिक्री में शामिल छह भारतीय कंपनियों पर प्रतिबंध लगा दिया था, जो 20 ग्लोबल संस्थाओं को टारगेट करने वाली व्यापक प्रवर्तन कार्रवाई का हिस्सा है. ट्रंप के बयान पर भारत का रुख Donald Trump के भारत को डेड इकोनॉमी करार दिए जाने वाले बयान पर भारत की ओर से भी तत्काल प्रतिक्रिया आई थी और वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल (Piyush Goyal) ने संसद को बताया कि भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था है और जल्द ही तीसरी सबसे बड़ी इकोनॉमी (3rd Larget Economy In World) बनने की उम्मीद है. उन्होंने कहा था कि भारत ग्लोबल ग्रोथ में करीब 16 फीसदी का योगदान दे रहा है, क्योंकि तमाम सुधारों और भारतीय उद्योग जगत के लचीलेपन ने देश की इकोनॉमी को कमजोर 5 देशों में से एक से वैश्विक विकास के ग्रोथ इंजन में तब्दील किया है. 

सभी छह संकेतकों में पूर्ण संतृप्ति हासिल करने वाले दो जिलों और छह विकासखंडों को मिला स्वर्ण पदक

रायपुर : दूरस्थ क्षेत्रों और विशेष पिछड़ी जनजातियों को विकास की सबसे ज्यादा जरूरत – विष्णु देव साय दूरस्थ क्षेत्रों और विशेष पिछड़ी जनजातियों को विकास की सबसे ज्यादा जरूरत संपूर्णता अभियान में उत्कृष्ट कार्य करने वाले आकांक्षी जिलों और विकासखंडों को मुख्यमंत्री ने किया पुरस्कृत सभी छह संकेतकों में पूर्ण संतृप्ति हासिल करने वाले दो जिलों और छह विकासखंडों को मिला स्वर्ण पदक रायपुर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने संपूर्णता अभियान में निर्धारित लक्ष्यों को हासिल करने में उत्कृष्ट कार्य करने वाले आकांक्षी जिलों और विकासखंडों को पुरस्कृत किया। उन्होंने आज राजधानी रायपुर के नवीन विश्राम भवन में आयोजित कार्यक्रम में जुलाई-2024 से सितम्बर-2024 तक राज्य के आकांक्षी जिलों और आकांक्षी विकासखंडों में तीन महीनों तक संचालित संपूर्णता अभियान में निर्धारित संकेतकों को संतृप्त करने और लक्ष्यों को हासिल करने वाले जिलों और विकासखंडों को पुरस्कार प्रदान किए। उन्होंने इन जिलों और विकासखंडों में उत्कृष्ट कार्य करने वाले विभिन्न विभागों के अधिकारियों-कर्मचारियों को भी पुरस्कृत किया। संपूर्णता अभियान के दौरान सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले आकांक्षी जिलों बस्तर और कोंडागांव तथा आकांक्षी विकासखंडों शंकरगढ़, मैनपुर, माकड़ी, कोयलीबेड़ा, ओरछा और प्रतापपुर को स्वर्ण पदक प्रदान किया गया। उप मुख्यमंत्री अरुण साव और विजय शर्मा, सांसद बृजमोहन अग्रवाल तथा विधायक सर्वसुनील सोनी, मोतीलाल साहू और गुरू खुशवंत साहेब भी सम्मान समारोह में शामिल हुए। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने सम्मान समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के विकसित भारत की संकल्पना में सभी वर्गों का विकास समाहित है। उन्होंने कहा कि दूरस्थ क्षेत्रों में रहने वालों और विशेष पिछड़ी जनजातियों (PVTGs) को विकास की सबसे ज्यादा जरूरत है। भारत सरकार ने इसे गहराई से समझकर प्रधानमंत्री जनमन योजना प्रारंभ की है। इस योजना से सुदूर वनांचलों में आवास, पेयजल, बिजली, सड़क और अन्य बुनियादी सुविधाएं पहुंच रही हैं। धरती आबा ग्राम उत्कर्ष अभियान जैसे कार्यक्रमों से जिसमें छत्तीसगढ़ के भी 6661 गांव शामिल हैं, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की दूरदर्शी सोच के अनुरूप विकास की रोशनी सुदूर गांवों तक पहुंच रही है। उन्होंने कहा कि राज्य में केंद्र सरकार की आकांक्षी जिलों और विकासखंडों में शामिल गांव तेजी से आगे बढ़ रहे हैं।  उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने अपने संबोधन में कहा कि देश में वर्ष 2018 से आकांक्षी जिलों में काम शुरू हुआ है। विकास की दौड़ में पिछड़े जिलों और विकासखंडों को आगे लाने का काम इसमें हो रहा है। इसके अंतर्गत शामिल गांवों में अलग-अलग सेक्टर में काम कर मानव सूचकांकों को सुधारा जा रहा है। उन्हें संतृप्ति के स्तर पर लाया जा रहा है। उन्होंने उम्मीद जताई कि एक-एक व्यक्ति के विकास और कल्याण से विकसित छत्तीसगढ़ और विकसित भारत का मार्ग प्रशस्त होगा।  उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने समारोह में कहा कि आकांक्षी जिलों और विकासखंडों में भौतिक प्रगति से अलग मानव सूचकांकों को बेहतर करने के लिए काम किए जा रहे हैं। लक्ष्य निर्धारित कर उन्हें संतृप्त करने अहम इंडीकेटर्स पर काम हो रहे हैं जिनकी तरफ सामान्यतः ज्यादा ध्यान नहीं जाता है। राज्य के आकांक्षी जिलों और विकासखंडों में और भी बेहतर काम हो, इसके लिए मैं सभी जिलों व विकासखंडों को शुभकामनाएं देता हूं। मुख्य सचिव अमिताभ जैन और योजना, आर्थिक एवं सांख्यिकी विभाग के सचिव अंकित आनंद ने समारोह में संपूर्णता अभियान के दौरान किए गए कार्यों तथा उपलब्धियों की जानकारी दी। नीति आयोग के सदस्य-सचिव आशीष भट्ट, सदस्य के. सुब्रमण्यम और योजना, आर्थिक एवं सांख्यिकी विभाग की संचालक श्रीमती रोक्तिमा यादव भी कार्यक्रम में मौजूद थीं।  छह सूचकांकों पर अच्छा काम करने वाले जिलों और विकासखंडों को किया गया पुरस्कृत आकांक्षी जिला कार्यक्रम के 49 संकेतकों में से छह और आकांक्षी विकासखंडों के 40 संकेतकों में से छह संकेतकों को चिन्हित कर इन्हें संतृप्त करने संपूर्णता अभियान संचालित किया गया था। इनमें एएनसी पंजीकरण, पूरक पोषण ले रही गर्भवती महिलाओं, मृदा स्वास्थ्य कार्ड, पूर्ण टीकाकरण वाले बच्चे, बिजली वाले स्कूल, शैक्षणिक सत्र शुरू होने के एक महीने के भीतर पाठ्यपुस्तकें उपलब्ध कराने वाले स्कूल, मधुमेह जांच, उच्च रक्तचाप जांच, परिक्रामी निधि प्राप्त करने वाले स्वसहायता समूहों की संख्या जैसे संकेतक शामिल थे।  संपूर्णता अभियान के दौरान सभी छह संकेतकों में पूर्ण संतृप्ति हासिल करने वाले आकांक्षी जिलों व विकासखंडों को आज स्वर्ण पदक से सम्मानित किया गया। पांच संकेतकों में पूर्ण संतृप्ति हासिल करने वाले जिलों व विकासखंडों को रजत पदक, चार संकेतकों में पूर्ण संतृप्ति हासिल करने वालों को कांस्य पदक तथा तीन संकेतकों में पूर्ण संतृप्ति हासिल करने वाले जिलों और विकासखंडों को ताम्र पदक से सम्मानित किया गया।   बस्तर और कोंडागांव जिले को स्वर्ण पदक संपूर्णता अभियान के दौरान सभी छह संकेतकों में पूर्ण संतृप्ति हासिल करने वाले आकांक्षी जिलों बस्तर और कोंडागांव तथा आकांक्षी विकासखंडों शंकरगढ़, मैनपुर, माकड़ी, कोयलीबेड़ा, ओरछा और प्रतापपुर को स्वर्ण पदक प्रदान किया गया। आकांक्षी जिलों दंतेवाड़ा, कोरबा, कांकेर, नारायणपुर तथा आकांक्षी विकासखंडों लखनपुर, बैकुंठपुर, दुर्गकोंदूल, गौरेला-2, कोरबा और पिथौरा को रजत पदक प्रदान किया गया। आकांक्षी जिला बीजापुर और आकांक्षी विकासखंडों गरियाबंद, उसूर, पोड़ी उपरोड़ा, बोड़ला, तोकापाल एवं कुआंकोंडा को कांस्य पदक तथा आकांक्षी जिलों मानपुर-मोहला-अंबागढ़ चौकी, महासमुंद, सुकमा एवं आंकांक्षी विकासखंड अंबागढ़ चौकी को ताम्र पदक से सम्मानित किया गया। संबंधित जिलों के वर्तमान और तत्कालीन कलेक्टरों ने ये पुरस्कार ग्रहण किए।

आपदा राहत दल द्वारा 432 बचाव अभियान चलाकर 3628 नागरिकों को किया गया रेस्क्यू

अतिवृष्टि से प्रभावितों के हर पल साथ है सरकार : मुख्यमंत्री डॉ. यादव राहत एवं बचाव के लिए उठाए जा रहे हैं सभी कदम आपदा राहत दल द्वारा 432 बचाव अभियान चलाकर 3628 नागरिकों को किया गया रेस्क्यू प्रभावितों को तेजी से बांटी जा रही है राहत राशि अब तक 28.49 करोड़ रूपए राहत राशि प्रभावितों को दी गई अतिवृष्टि से प्रभावितों को कोई कठिनाई न होने पाये मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सभी कलेक्टर्स को दिये निर्देश भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रदेश के कुछ जिलों में हाल ही में अतिवृष्टि हुई थी। राज्य सरकार ने अतिवृष्टि से प्रभावित लोगों को राहत देने में बेहद तत्परतापूर्ण कार्रवाई की है। उन्होंने कहा कि प्रदेश के अतिवृष्टि वाले जिलों में अब तक 3628 नागरिकों को सुरक्षित रूप से रेस्क्यू किया गया। उन्होंने बताया कि बारिश थमने के साथ कुछ नागरिक अपने-अपने घरों को चले गए हैं। परंतु अब भी 53 राहत शिविरों में 3065 प्रभावितों को रखकर उन्हें सभी प्रकार की जरूरी मदद जैसे खाना-पीना दवाइयां कपड़े आदि मुहैया कराए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार अतिवृष्टि प्रभावित हर व्यक्ति के साथ पूरी संवेदनशीलता के साथ खड़ी है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सभी कलेक्टर्स को निर्देश दिए हैं कि अतिवृष्टि या बाढ़ प्रभावितों को कोई भी कठिनाई न आने पाये। जल्द ही जल्द सर्वे पूरा कर पीड़ितों को उनके नुकसान की समुचित भरपाई की जाए। अतिवृष्टि वाले जिलों के कलेक्टर्स द्वारा अब तक 28.49 करोड़ रुपए राहत राशि वितरित कर दी गई है। उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव द्वारा लगातार यह प्रयास किए गए कि अतिवृष्टि से प्रदेश की जनता को किसी भी स्थिति में परेशानियों का सामना न करना पड़े। उन्होंने कहा है कि शासन संवेदनशील शासन वह होता है, जो हर समय समाज के अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति के हित के लिए हमेशा उपलब्‍ध रहे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के निर्देशों के तहत शासन द्वारा अतिवृष्टि/बाढ़ प्रबंधन की सभी तैयारियां पहले ही प्रारंभ कर दी गई थीं। मुख्य सचिव द्वारा विगत 9 जून को विस्‍तृत समीक्षा की गयी थी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने भी 22 जुलाई को सभी कलेक्टर्स को बाढ़ की पूर्व तैयारियों के संबंध में और जनता को लाभ पहुंचाने के दिशा-निर्देश दिए थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के निर्देशों के पालन में शासन द्वारा वृहद स्तर पर तैयारियां की गईं। NDRF की टीमों को भोपाल, ग्वालियर, जबलपुर और धार में तैनात किया गया। SDRF को प्रदेश भर में संवेदनशील स्थानों पर तैनात किया गया। पूरे प्रदेश में 259 संवेदनशील क्षेत्र चिन्‍हांकित करते हुए Disaster Response Centre स्थापित किए गए तथा 111 Quick Response Team तैनात की गयी। इन कार्यों में जन सामान्य को जोड़ने के लिए 3300 आपदा मित्रों को भी प्रशिक्षित किया गया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने निर्देश दिए थे कि आमजन को बाढ़ के खतरों के बारे में समय रहते सूचित किया जाये। इस कार्य के लिए राज्य आपदा नियंत्रण कक्ष के द्वारा लगातार रेड अलर्ट मोबाइल के माध्यम से भेजे गए। सिंचाई विभाग द्वारा विस्तृत व्यवस्थाएं की गई, जिससे बांधों के जल स्तर एवं छोड़े जाने वाले जल की जानकारी समय रहते कलेक्टर और संबंधित व्यक्तियों तक पहुंचाई जा सके। मौसम विभाग से मिली जानकारियों को भी सभी संबंधित अधिकारियों तथा बचाव दलों को लगातार उपलब्ध कराया जा रहा है। इन सभी कार्यों की निगरानी के लिए 24 घंटे चलने वाले राज्य स्तरीय कंट्रोल रूम स्थापित किए गए। शासन द्वारा यह भी सुनिश्चित किया गया कि प्रदेश के सभी अस्पतालों और स्वास्थ्य शिविरों में आवश्यक जीवन रक्षक दवाएं उपलब्ध रहें तथा 62 स्थानों पर अग्रिम खाद्यान्न का भण्डारण किया गया, जिससे आम जनता को आवश्यकता पड़ने पर किसी प्रकार की समस्या का सामना न करना पड़े। प्रदेश में अब तक लगातार 711.3 मिमी वर्षा हो चुकी है, जो सामान्य से 59 प्रतिशत अधिक है। यह सामान्य से अधिक वर्षा भी कम समय में तेजी से हुई है। मंडला में 1107 मिमी बारिश में से लगभग 51 प्रतिशत बारिश केवल 4 दिनों में हो गई है। प्रदेश के कुल 40 जिलों में सामान्‍य से अधिक वर्षा हुई है, शेष 9 जिलों में सामान्य वर्षा एवं 2 जिलों में सामान्‍य से कम वर्षा हुई है। अतिवृष्टि के कारण प्रदेश के प्रभावित लगभग 254 ग्रामीण सड़कों में से 212 सड़कों में तत्‍काल सुधार कार्य किया गया है। बैरीकेड्स के जरिए ये सुनिश्चित किया गया कि इसके कारण कोई मृत्‍यु न हो। प्रदेश के सभी छोटे-बड़े बांधों में जलभराव में तो वृद्धि हुई है, किंतु समय रहते हुई गेट ऐसे खोले और बंद किए गए, ताकि कहीं भी कोई जन-हानि न हो एवं भविष्‍य में सिंचाई के पानी की उपलब्‍धता बनी रहे। प्रदेश के सभी बांधों की सतत् रूप से नियमित निगरानी की जा रही है। बाढ़ के बचाव के लिए आवश्यकतानुसार सेना की मदद ली जा रही है। भारत सरकार से भी पूरा सहयोग मिल रहा है। प्रदेश में दवाईयों, खाद्य सामग्रियों की पूर्ति सुनिश्चित कर दी गयी है। सभी अस्पतालों को अलर्ट पर रखा गया है। मुख्‍यमंत्री डॉ. यादव के निर्देशानुसार बाढ़ आपदा में शासन ने बेहद संवेदनशीलता और तत्परता से राहत एवं बचाव अभियान चलाकर रेस्क्यू कार्यवाहियां की है। प्रदेश में अतिवृष्टि प्रभावित 2325 लोगों के लिए राहत शिविर अभियान चलाकर उन्हें सभी प्रकार की सुविधाएँ/राहतें प्रदान की जा रही है। इन राहत शिविरों में दवाइयां, भोजन तथा पेयजल त्‍वरित रूप से उपलब्‍ध कराया जा रहा है। इसके अलावा राजमार्ग एवं मुख्‍य मार्ग में 94 पुलियां क्षतिग्रस्‍त हुई थीं, लेकिन वैकल्पिक मार्ग तत्‍काल उपलब्‍ध कराये गए, ताकि आवागमन में कोई व्‍यवधान उत्‍पन्‍न न हो। प्रदेश में तैनात मोचन दलों/बचाव राहत दलों द्वारा 432 बचाव अभियान चलाए गए हैं, जिसमें 3628 नागरिकों तथा 94 मवेशियों को जीवित बचाया गया है। अतिवृष्टि से 47, नदी-नाले में दुघर्टनावश डूबने से 132, आकाशीय बिजली से 60 तथा दीवार/मकान/पेड़ गिरने से 13 लोगों की मृत्‍यु दर्ज हुई है। साथ ही 432 पशु हानि एवं 1200 मुर्गियां की मृत्‍यु हुई है और 128 मकानों को पूर्ण एवं 2333 मकानों को आंशिक क्षति हुई है। जिला कलेक्‍टर्स द्वारा प्रभावित व्‍यक्तियों को 28.49 करोड़ रुपए की राहत राशि वितरित कर दी गई है। शासन द्वारा लगभग 3600 करोड़ रूपए की व्‍यवस्‍था राहत मद में की गई है, … Read more

विकसित भारत बनाने के लिए युवा अपनी ऊर्जा का समुचित उपयोग करें : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

स्वदेशी अपनायें, स्वाध्यायी बनें, समय का प्रबंधन करें और हमेशा कुछ बड़ा करने की सोचें : मुख्यमंत्री डॉ. यादव खरगौन के कपास और मिर्ची आधारित रोजगारपरक उद्योगों के लिए सरकार दे रही है सहायता विकसित भारत बनाने के लिए युवा अपनी ऊर्जा का समुचित उपयोग करें रोजगार आधारित उद्योग लगाने में सरकार देगी मदद गौपालन को बढ़ावा देकर दुग्ध-उत्पादन के जरिये गौपालकों को बनाएंगे आत्मनिर्भर बड़ी गौशालाओं का प्रबंधन करेगी राज्य सरकार मुख्यमंत्री ने खरगौन में अभ्युदय विश्वविद्यालय का शुभारंभ कर विद्यार्थियों से किया संवाद भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ.  मोहन यादव ने कहा है कि भारत को विकसित बनाने में युवाओं का सबसे बड़ा योगदान होगा। इतिहास गवाह है कि क्रांतियों के सूत्रधार हमेशा युवा ही रहे हैं। भारत और मध्यप्रदेश को विकसित बनाने में हमारे युवाओं को अपनी असीम ऊर्जा का देश और समाज के नवनिर्माण में समुचित उपयोग करना सीखना होगा। यह हमारी जिम्मेदारी भी है और जरूरत भी। मुख्यमंत्री डॉ.  यादव ने कहा कि युवाओं को चाहिए कि वे देश से प्रेम करें। अपने ज्ञान, प्रतिभा का यहीं पर प्रदर्शन कर माटी का कर्ज चुकायें। उन्होंने युवाओं को प्रगति का मार्ग बताते हुए कहा कि युवा स्वदेशी अनपाने की ओर बढ़ें, रोजाना स्वाध्याय करें। अपने समय का समुचित तरीके से प्रबंधन करें जिससे एक-एक मिनिट का उपयोग हो सके। उन्होंने कहा कि यदि जीवन में कुछ बनना है तो हमेशा बड़ा करने की सोचें, बड़े सपने देखें और इन सपनों को पूरा करने के लिए प्राण-प्रण से जुट जायें। मुख्यमंत्री डॉ.  यादव शनिवार को खरगौन में रेनेसां ग्रुप इंदौर द्वारा स्थापित अभ्युदय विश्वविद्यालय के शुभारंभ कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ.  यादव ने दीप प्रज्ज्वलन एवं परिसर में श्रीराम दरबार की स्थापना कर विश्वविद्यालय का विधिवत् शुभारंभ किया। मुख्यमंत्री ने विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार डॉ.  विक्रम परमार को उनकी समर्पित सेवाओं के लिए सम्मानित भी किया। मुख्यमंत्री ने युवा संवाद में दिया छात्रों को मार्गदर्शन विश्वविद्यालय के छात्रों ने मुख्यमंत्री डॉ. यादव से विभिन्न विषयों पर मार्गदर्शन मांगा। कंप्यूटर साइंस के छात्र निखिल यादव ने मुख्यमंत्री से पूछा कि विकसित भारत 2047 की अवधारणा में मध्य प्रदेश के युवा अपनी क्या भूमिका निभा सकते हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि युवा अपनी पसंद के क्षेत्र में पढ़ाई पूरी करें और आदर्श किसान, शिक्षक, उद्योगपति अथवा राजनेता बनने का सपना देखें। आपके सपने सच करने के लिए राज्य सरकार आपके साथ खड़ी है। कृषि विज्ञान की छात्रा सीमा यादव ने पूछा कि जनजातीय समुदाय में आधुनिक कृषि को बढ़ावा देने के लिए सरकार क्या काम कर रही है। मुख्यमंत्री डॉ.  यादव ने बताया कि खरगोन जिले में दो कृषि विद्यालयों की स्थापना कर उन्नत खेती के गुर सिखाए जा रहे है। मिर्ची एवं अन्य स्थानीय कृषि उत्पादों के लिए खाद्य प्रसंस्करण उद्योग तथा टेक्सटाइल उद्योग लगाने में सरकार सहायता दे ही है। एमबीए के छात्र मयंक अधिकार ने मुख्यमंत्री से उनकी व्यस्त दिनचर्या के प्रबंधन कौशल के बारे में जानना चाहा। मुख्यमंत्री ने बताया कि पर्याप्त नींद लेना, अच्छा स्वास्थ्य बनाए रखन और प्रतिदिन पुस्तकें पढ़ कर नया सीखने की आदत डालना सफलता की कुंजी है। विद्यार्थी अपने लक्ष्यों के लिए चरणबद्ध रूप से काम करें और उन्हें समय पर पूरा करने के प्रयास करें। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों एवं अन्यजनों को मध्यप्रदेश सरकार की विभिन्न योजनाओं की जानकारी भी दी। उन्होंने कहा कि सरकार ने तय किया है कि प्रदेश में रोजगार आधारित उद्योग की स्थापना करने पर निवेशकों और उद्योगपतियों को भरपूर मदद दी जाएगी। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार प्रदेश के हर नागरिक को आत्मनिर्भर बनाना चाहती है, इसके लिए हमने गौपालन को बढ़ावा देने का निर्णय लिया है। दुग्ध उत्पादन में प्रदेश को अग्रणी बनाने के लिए वर्तमान दुग्‍ध उत्पादन 9 प्रतिशत से बढ़ाकर 20 प्रतिशत तक करने का लक्ष्य रखा है। उन्होंने कहा कि इस लक्ष्य के लिए हमने डॉ. भीमराव अंबेडकर कामधेनु योजना की शुरुआत की है। इसमें किसानों और गौपालकों को डेयरी शुरू करने के लिए भरपूर अनुदान दिया जा रहा है। इन सभी प्रयासों से दुग्ध उत्पादन में तेजी लाकर हम सभी गौपालकों को आत्मनिर्भर बनाना चाहते हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया‍ कि सरकार ने कामधेनु योजना में राज्य सरकार 25 से अधिक गायों पर 40 लाख के लोन पर 10 लाख रूपये का अनुदान दे रहीं है। उन्होंने कहा कि प्रदेश के सभी बड़ी ग्राम पंचायतों एवं नगर पालिका/नगर निगमों में बड़ी गौशालाएं स्थापित की जाएंगी। इन गौशालाओं का प्रबंधन सरकार अपने स्तर पर करेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ने गंभीर मरीजों के लिए एयर एंबुलेंस के साथ ही गौमाता के लिए भी गौ-एम्बुलेंस शुरू की है। अगर कोई संगठन बड़ी गौशालाएं बनाना चाहते हैं, तो उन्हें 130 एकड़ जमीन देंगे। प्रदेश में ऐसी 20 बड़ी गौशालाएं स्थापित की जा रही हैं।   मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा है कि अभ्युदय विश्वविद्यालय परिसर में राम दरबार स्थापित करने का मौका मिला। भारतीय परंपरा ऐसी है कि हम नदी, पहाड़, पेड़ को भी भगवान मानकर पूज लेते हैं। सरकार ने खरगौन में पहले टंट्या मामा के नाम से क्रांतिसूर्य टंट्या भील विश्वविद्यालय बनाया, अब दूसरे अभ्युदय विश्वविद्यालय की शुरुआत खरगौन में हो गई है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों से संवाद किया। मुख्यमंत्री ने विद्यार्थियों से पूछा कि त्यौहार और पर्व में क्या अंतर है? जवाब भी मुख्यमंत्री ने ही दिया। उन्होंने कहा कि भारतीय परंपरा में जब हम ईश्वर की उपवास करके आराधना करते हैं, तो उसे पर्व कहा जाता है और जब दूसरों के साथ खुशियां बांटने तथा खान-पान की पूरी छूट मिले, तो उसे त्यौहार कहते हैं। मुख्यमंत्री ने पूछा कि भगवान राम के जीवन का सबसे महत्वपूर्ण क्षण कौन सा था? जवाब में उन्होंने ही बताया कि जब महर्षि विश्वामित्र ने जंगल में राक्षसों को मारने के लिए महाराज दशरथ से उनके सुकुमारों राम और लक्ष्मण को मांग लिया। विश्वामित्रजी उनके गुरु थे और उन्होंने युवाशक्ति पर ही विश्वास जताया। भगवान श्रीराम ने निशाचरों का अंत किया। विश्वामित्र ने श्रीराम को समाज के हर वर्ग और उनकी पीढ़ा से परिचय कराया। उन्होंने कहा कि भगवान राम ने राजपाठ छोड़कर जंगल जाना स्वीकार किया। शबुरी के जूठे बेर खाकर उनके साथ प्रेम और निषादराज को गले लगाकर उनसे मित्रता … Read more

सड़क दुर्घटना में घायल तो घबराएं नहीं, अस्पताल करेगा फौरन इलाज, खर्च उठाएगा प्रशासन

भोपाल  सड़क दुर्घटना में घायल (road accident patients) व्यक्ति को तत्काल अस्पताल को उपचार देना होगा फिर भले ही पीड़ित की ओर से राशि जमा हुई हो या नहीं। उपचार शुल्क जमा होने या परिजनों के आने के इंतजार में अस्पताल पीड़ित का इलाज करने से इंकार नहीं कर सकता है। घायल के उपचार के एवज में उज्जैन कलेक्टर डेढ़ लाख रुपए तक अस्पताल को स्वीकृत कर सकेंगे।  कलेक्टर ने बुलाई बैठक सडक़ हादसे में घायलों की जान उपचार की कमी से न जाए, इसके लिए शासन ने दो महत्वपूर्ण योजना नकद रहित उपचार और राहवीर योजना शुरु की है। जीवन रक्षक उक्त योजनाओं के क्रियान्वयन और प्रचार-प्रसार के लिए शुक्रवार को कलेक्टर रौशनकुमार सिंह और एसपी प्रदीप शर्मा ने स्वास्थ्य व अन्य संबंधित विभागों के अधिकारियों के साथ बैठक की। कलेक्टर ने आपात स्थिति, ट्रॉमा सेंटर, एम्बुलेंस सेवा 108 के संचालकों, डायल 100 सेवा में कार्य करने वाले कर्मचारियों को संवेदनशीलता से कार्य करने और उक्त कार्य करने वाले कर्मचारियों को राहवीर योजना संबंधित जागरुक करने के निर्देश दिए। बैठक में सीएमएचओ डॉ. अशोक कुमार पटेल, आरटीओ संतोष मालवीय, सभी बीएमओ, निजी चिकित्सालयों के प्रबंधक मौजूद थे। ई-डार पोर्टल से संचालित होती है योजना ई-डार पोर्टल बनाया गया है। इस पर सभी आवश्यक जानकारियां अपलोड करना होती है। कलेक्टर सिंह ने स्वास्थ्य विभाग को सभी अस्पतालों की ई-डार पोर्टल की लॉग इन आईडी निर्मित बनाने, साथ ही पोर्टल के उपयोग के लिए प्रशिक्षण कार्यशाला करने के निर्देश दिए।   राहबीर योजना इसका उद्देश्य सड़क दुर्घटना में घायल व्यक्ति को गोल्डन ऑवर (पहले 1 घंटे) में तुरंत अस्पताल पहुंचाकर उसकी जान बचाने वाले सज्जन नागरिकों को प्रोत्साहन राशि 25 हजार रुपए व प्रशंसा पत्र प्रदान करना है। योजना अंतर्गत टॉप 10 राहवीरों को राष्ट्रीय स्तर पर 1 लाख रुपए, इनाम, ट्रॉफी और प्रमाण पत्र से भी सम्मानित किया जाएगा।  नकदरहित उपचार इसका उद्देश्य सड़क दुर्घटना में घायल व्यक्तियों को तुरंत और नकदरहित (कैशलेस) इलाज की सुविधा, गंभीर घायलों को शुरुआती गोल्डन ऑवर के दौरान समय पर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराना है। योजना में प्रारंभिक उपचार के लिए 1.5 लाख रुपए तक की राशि का नकदरहित उपचार प्रदान किया जाएगा। तत्काल इलाज के लिए दस्तावेज जरुरी नहीं।

शिवभक्ति का महासैलाब: सीहोर से निकलेगी विशाल कांवड़ यात्रा, पुष्पवर्षा से होगा स्वागत

सीहोर  सावन मास के पावन अवसर पर सीहोर का कुबेरेश्वरधाम देश की सबसे बड़ी कांवड़ यात्रा का साक्षी बनने जा रहा है। सीवन नदी से लेकर कुबेरेश्वरधाम तक का संपूर्ण मार्ग 'बोल बम' के नारों और शिवभक्तों के जयघोष से गूंज उठा है। पं. प्रदीप मिश्रा के मार्गदर्शन में आयोजित इस यात्रा के दौरान इस बार विशेष आकर्षण के रूप में हेलिकॉप्टर से श्रद्धालुओं पर पुष्पवर्षा की जाएगी। हर कदम पर सेवा, श्रद्धालुओं का पुष्पवर्षा से स्वागत यात्रा मार्ग पर विभिन्न स्थानों पर सेवा पंडाल लगाए गए हैं, जहां भक्तों को चाय, नाश्ता और पेयजल की सुविधा दी जा रही है। स्थानीय निवासी भी श्रद्धालुओं का पुष्पवर्षा कर स्वागत कर रहे हैं। इस बार यात्रा में देशभर से दो दर्जन से अधिक हाई-टेक डीजे शामिल किए गए हैं। इनमें सीहोर का बाबा डीजे, झारखंड का सार्जन डीजे, उत्तर प्रदेश का रावण डीजे, दिल्ली का कसाना डीजे, महाराष्ट्र का प्रशांत डीजे और इंदौर का श्याम बैंड प्रमुख हैं। ये डीजे भक्ति संगीत और धमाकेदार धुनों से भक्तों को झूमने पर मजबूर कर देंगे। भारत की सबसे बड़ी भोजनशाला से बंटेगी प्रसादी विठलेश सेवा समिति के व्यवस्थापक समीर शुक्ला ने बताया कि लाखों की संख्या में कांवड़िये देश के विभिन्न राज्यों से यहां पहुंच रहे हैं। इनके लिए देश की सबसे बड़ी भोजनशाला से प्रसादी वितरित की जाएगी। यह आयोजन शिवभक्ति के महाकुंभ का स्वरूप ले चुका है। विठलेश सेवा समिति के संयोजक मनोज दीक्षित ने कहा कि यह आयोजन कलियुग में शिव युग की वापसी जैसा प्रतीत हो रहा है। बीते 20-25 दिनों में 10 लाख से अधिक श्रद्धालु सीवन नदी से जल लेकर कुबेरेश्वरधाम पहुंच चुके हैं और भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक कर चुके हैं। हर आयु वर्ग में उमंग, लगातार बढ़ रही श्रद्धालुओं की भीड़ यात्रा में बड़ी संख्या में महिलाएं, युवा और बुजुर्ग शामिल हो रहे हैं। पूरे क्षेत्र में भगवान शंकर के भजन, ढोल-नगाड़ों, डमरू और डीजे की धुनें गूंज रही हैं। 6 अगस्त को सुबह 9 बजे मुख्य यात्रा निकाली जाएगी, जिसमें लाखों श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना है। जिला कलेक्टर बालागुरु के. और पुलिस अधीक्षक दीपक कुमार शुक्ला ने सीवन नदी घाट और यात्रा मार्ग का निरीक्षण किया। उन्होंने सुरक्षा व्यवस्था को पुख्ता बनाने के लिए होमगार्ड, मोटरबोट, फायर ब्रिगेड और सफाई व्यवस्था को लेकर विशेष निर्देश जारी किए हैं। यातायात सुचारु रखने के लिए पुलिस अधिकारियों को भी आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए हैं।  

साइबर खतरे की सुनामी! भारत में रिकॉर्ड तोड़ हमले, इन राज्यों पर सबसे ज्यादा अटैक

नई दिल्ली डिजिटल इंडिया के इस दौर में साइबर क्राइम के मामलों में बहुत तेजी से उछाल देखने को मिल रहा है. गृह मंत्रालय ने संसद में पेश आंकड़ों से साफ कर दिया है कि साइबर अपराधों का ग्राफ आसमान छू रहा है. बीते चार सालों में ऑनलाइन फ्रॉड, डिजिटल अरेस्ट, सेक्सटॉर्शन और साइबर अटैक जैसे मामलों में 401 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई है. साल 2021 में करीब 4.5 लाख साइबर क्राइम के केस दर्ज हुए थे. साल 2024 तक यह आंकड़ा बढ़कर 22 लाख से ज्यादा पहुंच गया. यानी साइबर क्राइम के मामलों में चार गुना से भी ज्यादा उछाल आया है. ये आंकड़ा यहीं नहीं रुका. साल 2025 के आधे साल खत्म होते-होते ही 30 जून तक 12 लाख से ज्यादा मामले दर्ज किए जा चुके हैं, जो 2021 और 2022 के सालाना आंकड़ों को भी पीछे छोड़ चुके हैं. साइबर क्राइम के केस में महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश सबसे ज्यादा प्रभावित राज्य हैं. इस साल अब तक महाराष्ट्र में 1.6 लाख मामले दर्ज किए जा चुके हैं. उत्तर प्रदेश 1.4 लाख के साथ दूसरे और कर्नाटक 1 लाख के साथ तीसरे स्थान पर है. बीते तीन साल से यही तीनों राज्य साइबर क्राइम से सबसे ज्यादा जूझ रहे हैं. बीते चार वर्षों में गुजरात, ओडिशा और कर्नाटक में सबसे ज्यादा उछाल देखा गया है. गुजरात में 824 फीसदी, ओडिशा में 783 फीसदी और कर्नाटक में 763 फीसदी का इजाफा दर्ज हुआ है. बच्चों पर मंडराता सबसे बड़ा खतरा साइबर क्राइम के सबसे ज्यादा शिकार बच्चे हो रहे हैं. गृह मंत्रालय के मुताबिक, साल 2018 से 2022 के बीच तीन हजार से ज्यादा चाइल्ड पोर्नोग्राफी के केस सामने आए हैं. से जुड़े रहे. 18 साल से कम उम्र के बच्चों के खिलाफ स्टॉकिंग के 500 केस सामने आए हैं. इन मामलों की रफ्तार लगातार बढ़ रही है. बच्चों के खिलाफ ऑनलाइन क्राइम साल 2021 में 25 फीसदी बढ़े. 2022 में यह आंकड़ा 32.5 फीसदी तक पहुंच गया. शेयर हो रही थी चाइल्ड पोर्नोग्राफी इनमें सोशल मीडिया, चैट रूम और ऑनलाइन गेमिंग से जुड़े अपराध प्रमुख रहे. पिछले साल इंडिया टुडे की OSINT टीम ने ऐसे टेलीग्राम चैनलों का खुलासा किया था, जो बड़े पैमाने पर चाइल्ड पोर्नोग्राफी शेयर कर रहे थे. इसके बाद टेलीग्राम को मजबूरन इन अकाउंट्स को हटाना पड़ा. भारत में हर मिनट 761 साइबर अटैक देश का सुरक्षा ढांचा भी लगातार साइबर हमलों की चपेट में है. डेटा सिक्योरिटी काउंसिल ऑफ इंडिया (DSCI) की रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2024 में भारत में हर मिनट औसतन 761 साइबर अटैक के प्रयास हुए. इनमें सबसे ज्यादा हेल्थकेयर, हॉस्पिटैलिटी और बैंकिंग सेक्टर पर साइबर अटैक हुए हैं. पहलगाम हमले के बाद साइबर अटैक साल 2025 में पहलगाम टेरर अटैक के बाद भारत में सबसे ज्यादा साइबर हमले हुए हैं. इस दौरान 15 लाख से ज्यादा साइबर अटैक हुए थे. इनमें सबसे ज्यादा निशाना देश के रक्षा, बिजली, दूरसंचार, वित्त और परिवहन जैसे अहम ढांचे बने. जांच एजेंसियों के मुताबिक ये हमले पाकिस्तान और उसके सहयोगी हैकिंग ग्रुप्स ने सुनियोजित तरीके से अंजाम दिए. ये है डिजिटल क्राइम का नया चेहरा इन आंकड़ों से साफ है कि भारत अब साइबर अपराध के सबसे खतरनाक दौर में प्रवेश कर चुका है. एक तरफ धोखाधड़ी और यौन शोषण जैसे अपराध आम लोगों को जकड़ रहे हैं, वहीं दूसरी ओर विदेशी हैकिंग नेटवर्क देश की रणनीतिक सुरक्षा पर निशाना साध रहे हैं.

बीजेपी फिलहाल नहीं करेगी अध्यक्ष का खुलासा, क्या VP चुनाव बना देरी की वजह?

नई दिल्ली नए बीजेपी अध्यक्ष के चुनाव की चर्चा लंबे समय से चल रही है। वहीं पार्टी का संविधान कहता है कि राष्ट्रीय अध्यक्ष का चुनाव तभी हो सकता है जब कम से कम 50 फीसदी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में संगठन के चुनाव पूरे हो जाते हैं। बीच में ही उपराष्ट्रपति रहे जगदीप धनखड़ के इस्तीफे के बाद पार्टी का पूरा फोकस अब शिफ्ट हो गया है। रिपोर्ट्स की मानें तो राष्ट्रपति चुनाव के बाद ही अब बीजेपी अपने नए राष्ट्रीय अध्यक्ष का चुनाव करेगी। कब है उपराष्ट्रपति का चुनाव? पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने मॉनसून सेशन शुरू होते ही अचानक इस्तीफा दे दिया था। उन्होंने कहा था कि स्वास्थ्य कारणों से वह पदमुक्त होना चाहते हैं। वहीं चुनाव आयोग ने राष्ट्रपति चुनाव का ऐलान भी कर दिया है। 9 सितंबर को उपराष्ट्रपति पद के लिए चुनाव होंगे और इसी दिन शाम तक परिणाम भी घोषित कर दिया जाएगा। यह भी तय माना जा रहा है कि विपक्ष इंडिया गठबंधन का कोई साझा उम्मीदवार उतार सकता है। 21 अगस्त नामांकन दाखिल करने का आखिरी तारीख है। ऐसे में विपक्ष और सत्तापक्ष दोनों के पास उम्मीदवार घोषित करने के लिए पर्याप्त समय है। नंबरगेम की बात करें तो लोकसभा और राज्यसभा में कुल 782 सांसद हैं। एनडीए के पास लोकसभा में 293 तो इंडिया गठबंधन के पास 232 सांसद हैं। वहीं राज्यसभा में एनडीए के पास 133 और इंडिया गठबंधन के पास 107 सांसद हैं। ऐसे में सदन में एनडीए का पलड़ा भारी है। बीजेपी चीफ के चुनाव में देरी के पीछे कारण मौजूदा बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा का कार्यकाल 2024 के लोकसभा चुनाव के बाद ही खत्म हो रहा था हालांकि उनकी सफलताओं को देखते हुए उनका कार्यकाल बढ़ा दिया गया। अब माना जा रहा है कि बीजेपी राष्ट्रीय अध्यक्ष के ऐलान के लिए उपराष्ट्रपति चुनाव पूरे होने का इंतजार कर रही है। बिहार चुनाव से पहले बीजेपी को राष्ट्रीय अध्यक्ष का ऐलान कर देना है। फिलहाल बीजेपी उपराष्ट्रपति चुनाव के लिए फ्लोर मैनेजमेंट में लगी हुई है। इस बार के चुनाव में लोकसभा में एनडीए के बहुमत का आंकड़ा कम हो गया था और राज्यसभा में । ऐसे में यह फाइट आसान नहीं माना जा सकती। उपराष्ट्रपति चुनाव के लिए निर्वाचक मंडल में राज्यसभा के 233 निर्वाचित सदस्य, राज्यसभा के 12 मनोनीत सदस्य और लोकसभा के 543 सदस्य शामिल होते हैं। राज्यसभा में पांच और लोकसभा में एक सीट रिक्त है, जिससे निर्वाचक मंडल की प्रभावी संख्या 782 है और जीतने वाले उम्मीदवार को 391 मतों की आवश्यकता होगी, बशर्ते सभी पात्र मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करें। लोकसभा की 543 सीट में से एक सीट, पश्चिम बंगाल में बशीरहाट रिक्त है, जबकि 245 सदस्यीय राज्यसभा में पांच सीट खाली हैं। राज्यसभा में पांच खाली सीट में से चार जम्मू-कश्मीर से और एक पंजाब से है। लोकसभा में, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) को 542 सदस्यों में से 293 का समर्थन प्राप्त है। सत्तारूढ़ गठबंधन को राज्यसभा (प्रभावी सदस्य संख्या 240) में 129 सदस्यों का समर्थन प्राप्त है, बशर्ते कि मनोनीत सदस्य राजग उम्मीदवार के समर्थन में मतदान करें। सत्तारूढ़ गठबंधन को कुल 422 सदस्यों का समर्थन प्राप्त है।

हाथियों से बचाव के लिए तकनीक का सहारा, MP सरकार ने लॉन्च किया ‘गजरक्षक’ ऐप

उमरिया जंगली हाथियों से जंगलों के नजदीकी गांवों की सुरक्षा के लिए मध्य प्रदेश वन विभाग ने गजरक्षक एप तैयार कराया है। इसे लांच कर दिया गया है। एप बताएगा कि हाथियों की लोकेशन कहां है। इससे मानव-हाथी द्वंद्व टाला जा सकेगा। बाघ दिवस (29 जुलाई) पर जारी एप को ग्रामीणों के साथ ही विभागीय अमले के मोबाइल फोन में डाउनलोड कराया जा रहा है। एप से आम लोगों को भी हर पल हाथियों की लाइव लोकेशन के साथ ही नोटिफिकेशन मिलेंगे। इससे उस क्षेत्र के लोग सतर्क हो सकेंगे। बता दें कि नवंबर 2024 में मप्र में पहली बार दो जंगली हाथियों को रेडियो कालर पहनाई गई थी। ये हाथी दल में शामिल रहते हैं। वन विभाग का दल इनकी लाइव लोकेशन भेजेगा। ग्रामीणों पर हमले की हो चुकी हैं घटनाएं यह भी बता दें कि पिछले कुछ दिनों में गांवों और ग्रामीणों पर हमले की तमाम घटनाएं हो चुकी हैं। हाथियों के हमले में कई लोग जान गंवा चुके हैं। इससे लोगों में हाथियों के प्रति गुस्सा है। अक्टूबर 2024 में उमरिया जिले में स्थित बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में तीन दिनों के अंदर दस हाथियों की रहस्यमय परिस्थितियों में मौत का मामला देशभर में सुर्खियों में रहा था। तब इस घटना को मानव-हाथी द्वंद्व का परिणाम कहा गया था। बाद में जांच में पता चला था कि हाथियों की मौत विषाक्त कोदो खाने से हुई थी। यही कारण है कि वन विभाग चाहता है कि द्वंद्व न हो। ग्रामीण और हाथी दोनों सुरक्षित रहें। इसके लिए अब एप का सहारा लिया जा रहा है। सात साल पहले झारखंड और छग से आया था 60 हाथियों का दल बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में अगस्त 2018 में झारखंड और छत्तीसगढ़ से आया 60 हाथियों का दल अब यहीं का हो गया है। दल के यहीं बसने से उमरिया, अनूपपुर, शहडोल, मंडला, डिंडौरी और बालाघाट जिलों के जंगली क्षेत्र से लगे गांवों में आए दिन इनकी दहशत की खबरें आती रहती हैं। खासकर कच्चे घरों में रहने वाले ग्रामीणों को हर समय बड़ी दुर्घटना की आशंका बनी रहती है। जब हाथी घर के पास पहुंच जाते हैं तब इनकी मौजूदगी पता चलती है। हाथी दल अनाज खाने के साथ ही घरों को तोड़कर भी चले जाते हैं। अब एप में आए नोटिफिकेशन के मिलते ही खतरे का आकलन हो सकेगा और बचाव के उपाय किए जा सकेंगे। इससे मानव-हाथी द्वंद्व की स्थिति से बचा जा सकेगा। मप्र के प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वाइल्ड लाइफ) सुभरंजन सेन का कहना है कि गजरक्षक एप न सिर्फ उन क्षेत्रों में रहने वालों की सुरक्षा के लिए है जहां जंगली हाथियों का ज्यादा प्रभाव है, बल्कि हाथी-मानव द्वंद्व में कमी लाने और हाथी-मानव सुरक्षा के लिए भी है। अब तक हुए यह प्रयास सोलर पावर फेंसिंग, सेंसर अलार्म, हाथी मित्र दलों का गठन, वॉट्सएप ग्रुप बनाकर मॉनीटरिंग, जागरूकता के लिए स्थानीय स्तर और राष्ट्रीय स्तर की कार्यशालाएं की जा चुकी हैं।