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मुख्यमंत्री साय ने ‘मोर गांव मोर पानी’ अभियान पर आधारित पुस्तिका का किया विमोचन

रायपुर, मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज विधानसभा परिसर स्थित अपने कक्ष में ‘मोर गांव मोर पानी’ महाअभियान पर आधारित पुस्तिका का विमोचन किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि पंचायती राज दिवस के अवसर पर प्रारंभ किए गए इस विशेष अभियान ने जल संरक्षण और संवर्धन के क्षेत्र में अभूतपूर्व चेतना उत्पन्न की है। विमोचन कार्यक्रम में उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा, प्रमुख सचिव पंचायत  निहारिका बारीक, आयुक्त मनरेगा और संचालक प्रधानमंत्री आवास योजना तारण प्रकाश सिन्हा सहित अनेक अधिकारी उपस्थित थे। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि ग्राम पंचायतों की सक्रियता और जनता की स्वप्रेरित भागीदारी के चलते यह अभियान अब एक जनआंदोलन का रूप ले चुका है। लोग स्वेच्छा से जल संरक्षण जैसे पुनीत कार्यों से जुड़ रहे हैं, जो सकारात्मक सामाजिक परिवर्तन का स्पष्ट संकेत है। उन्होंने कहा कि पुस्तिका में राज्य की विभिन्न पंचायतों द्वारा जल संरक्षण के क्षेत्र में किए गए उल्लेखनीय कार्यों और नवाचारों को संकलित किया गया है, जो अन्य पंचायतों के लिए प्रेरणास्रोत बनेंगे। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि अभियान के अंतर्गत सूचना, शिक्षा और संचार (IEC) गतिविधियों के माध्यम से जल संरक्षण के प्रति जनजागरूकता बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया गया है। प्रदेश की 11,000 से अधिक ग्राम पंचायत भवनों की दीवारों पर भूजल स्तर अंकित किया गया है, जिससे लोगों में जल के महत्व को लेकर व्यावहारिक चेतना जागृत हुई है। उन्होंने कहा कि ग्राम पंचायतों की भूमिका जल संरक्षण को जन-भागीदारी से जोड़ने में महत्वपूर्ण रही है, और यह चेतना आने वाले समय में और भी व्यापक स्वरूप लेगी। उल्लेखनीय है कि ‘मोर गांव मोर पानी’ अभियान के तहत रैली, दीवार लेखन जैसे माध्यमों से व्यापक स्तर पर जनसामान्य को जल संरक्षण के प्रति संवेदनशील और जागरूक किया गया है। 626 क्लस्टर्स में आयोजित प्रशिक्षणों के माध्यम से 56,000 से अधिक प्रतिभागियों को जल प्रबंधन और संरक्षण के लिए तैयार किया गया है। अभियान में GIS तकनीक का उपयोग कर जल संरक्षण कार्यों की प्रभावी योजना बनाई जा रही है, जबकि जलदूत ऐप के माध्यम से खुले कुओं का जल स्तर मापा जा रहा है। इसके अतिरिक्त, परकोलेशन टैंक, अर्दन डैम, डिफंक्ट बोरवेल रिचार्ज स्ट्रक्चर जैसे संरचनात्मक उपायों के माध्यम से जल पुनर्भरण और संरक्षण के स्थायी प्रयास किए जा रहे हैं। ग्राम पंचायतों के यह प्रयास छत्तीसगढ़ को जल संरक्षण के राष्ट्रीय मॉडल के रूप में स्थापित करेंगे।

सेपरेट हॉस्टल फॉर फ्रेशर्स: RGPV ने सीनियर्स-जूनियर्स को अलग-अलग आवास में रखा

भोपाल  राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (आरजीपीवी) ने वरिष्ठ और कनिष्ठ विद्यार्थियों के बीच रैगिंग और मारपीट की बढ़ती घटनाओं को देखेते हुए इस सत्र से एक नई पहल की है। इस बार कनिष्ठ विद्यार्थियों को अलग छात्रावास में रखा जाएगा। इसके अलावा इस बार मेरिट के आधार पर नवप्रवेशित विद्यार्थियों को छात्रावास आवंटित किया जाएगा। अब किसी भी छात्र संगठन की सिफारिश पर छात्रावास आवंटित नहीं होंगे। इसके अलावा सख्त नियम भी बनाए गए हैं। विवि प्रबंधन ने स्पष्ट किया है कि छात्र राजनीति, संगठनात्मक दबाव या किसी भी प्रकार के बाहरी प्रभाव से छात्रावास आवंटन नहीं होगा यह निर्णय विश्वविद्यालय के शैक्षणिक और अनुशासित माहौल को बनाए रखने के उद्देश्य से लिया गया है। बता दें, कि प्रदेश में सबसे अधिक आरजीपीवी में रैगिंग और मारपीट की घटनाएं यूजीसी की एंटी रैगिंग कमेटी में दर्ज हुई है। पुराने छात्रावास आवंटन को किया गया निरस्त विश्वविद्यालय ने सभी पुराने छात्रावास आवंटन को पूरी तरह निरस्त कर दिसंबर 2024 की परीक्षा में प्राप्त मेरिट और मध्यप्रदेश शासन की आरक्षण नीति के आधार पर नए सिरे से रूम आवंटन की प्रक्रिया शुरू की है। इसमें लिए द्वितीय, तृतीय और अंतिम वर्ष के बालक छात्रावास के लिए 690 और कन्या छात्रावास के लिए 510 आवेदन प्राप्त हुए हैं। विद्यार्थी भी इस नई व्यवस्था समर्थन कर रहे हैं। इस बार विवि प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि छात्रावास उन्हीं को मिलेंगे जो वास्तव में अध्ययनरत और पात्र हैं।इसके लिए न केवल आवेदकों की कक्षा व मेरिट आधारित पात्रता तय की जा रही है, बल्कि आवंटन को अस्थायी (प्रोविजनल) रूप में रखा गया है। नवप्रवेशित विद्यार्थियों के लिए अलग छात्रावास विश्वविद्यालय परिसर में कुल पांच छात्रावासों में लगभग 1460 विद्यार्थियों के रहने की व्यवस्था है, जबकि नवप्रवेषित 1200 समेत चार वर्षों के कुल 4500 छात्र-छात्राएं हैं।इस कारण प्रबंधन ने इस बार आवंटन मेरिट के आधार पर करने का निर्णय लिया है। इसमें नवप्रवेशित विद्यार्थियों को अलग छात्रावास में रखा जाएगा। छात्रों के लिए यह व्यवस्था इसमें लड़कों को चंद्रशेखर आजाद छात्रावास में करीब 270 और भास्कराचार्य में 135 छात्रों को कमरे आवंटित किए गए हैं। वहीं लगभग 450 लड़कियों के लिए रानी अहिल्याबाई छात्रावास आवंटित किया गया है। छात्राओं के लिए लक्ष्मीबाई छात्रावास नर्धारित वहीं द्वितीय, तृतीय और अंतिम वर्ष के 370 छात्रों के लिए एपीजे अब्दुल कलाम छात्रावास और 230 छात्राओं के लिए रानी लक्ष्मीबाई छात्रावास निर्धारित किए गए हैं। इसे लेकर प्रो. एस.एस भदौरिया, संचालक, यूआईटी, आरजीपीवी यह ने बताया कि यह व्यवस्था विवि में अनुशासन बनाए रखने के उद्देश्य से लागू की गई है। 1200 आवेदन मिले है, नियमों और मेरिट के आधार पर रूम आवंटित किए जा रहे हैं।

खेल अब केवल प्रतियोगिता नहीं, बल्कि भारत के युवाओं के व्यक्तित्व, करियर और वैश्विक पहचान से जुड़ चुका : CM यादव

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अपनी स्पेन यात्रा के पहले दिन की शुरूआत मैड्रिड स्थित विश्व प्रसिद्ध LaLiga मुख्यालय के भ्रमण से की और वरिष्ठ अधिकारियों से भेंट कर खेल, युवा सशक्तिकरण और निवेश सहयोग पर केंद्रित संवाद किया। उन्होंने कहा कि LaLiga की खेल विशेषज्ञता और वैश्विक पहुँच का लाभ मध्यप्रदेश के युवाओं तक पहुँचना चाहिए। यह यात्रा सिर्फ एक औपचारिक दौरा नहीं, बल्कि खेल के क्षेत्र में नवाचार, सामाजिक समावेशन और अंतरराष्ट्रीय साझेदारी की दिशा में प्रदेश के दृढ़ संकल्प का प्रतीक है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने LaLiga के पदाधिकारी और तकनीकी निदेशकों के समक्ष प्रस्ताव रखा कि मध्यप्रदेश में पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल पर फुटबॉल एक्सीलेंस सेंटर, स्पोर्ट्स इंफ्रास्ट्रक्चर अपग्रेडेशन और स्पेनिश कोचिंग आधारित यूथ ट्रेनिंग प्रोग्राम प्रारंभ किए जाएँ। उन्होंने यह भी कहा कि LaLiga के साथ यह साझेदारी केवल खेलों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि यह प्रदेश में रोजगार सृजन, सामाजिक भागीदारी, अंतरराष्ट्रीय ब्रांडिंग और सांस्कृतिक पर्यटन को नई दिशा दे सकती है। LaLiga मैचों में होगी म.प्र. की ब्राडिंग मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सुझाव दिया कि LaLiga मैचों के दौरान डिजिटल और ग्राउंड को-ब्रांडिंग अभियानों के माध्यम से मध्यप्रदेश की सांस्कृतिक विविधता, वन्यजीव, विरासत स्थलों और पर्यटन अवसरों का स्पेन और यूरोप के व्यापक दर्शकों के बीच प्रभावी प्रचार किया जा सकता है। इससे न केवल पर्यटन बल्कि स्पोर्ट्स टूरिज्म, फिटनेस, मीडिया ब्रॉडकास्टिंग और स्पोर्ट्स टेक जैसे सेक्टर्स में विदेशी निवेश आकर्षित करने की संभावनाएँ मजबूत होंगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मध्यप्रदेश की 18 सेक्टर-विशिष्ट औद्योगिक नीतियों और ‘स्टार्ट योर बिजनेस इन 30 डेज़’ जैसी दूरदर्शी पहलों का उल्लेख करते हुए LaLiga के साथ जुड़े वैश्विक निवेशकों को प्रदेश में निवेश के लिए आमंत्रित किया। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश अब भारत ही नहीं, बल्कि वैश्विक साझेदारियों के लिए एक भरोसेमंद और अनुकूल डेस्टिनेशन बनकर उभर रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने युवाओं के कौशल विकास, फुटबॉल अकैडमीज़ के ज़रिये प्रतिभा पहचान, और सामुदायिक भागीदारी जैसे क्षेत्रों में LaLiga की दीर्घकालिक विशेषज्ञता और भारत में उसकी सक्रियता की सराहना करते हुए कहा कि मध्यप्रदेश इस सहयोग के माध्यम से खेल को सामाजिक विकास का सशक्त माध्यम बनाएगा। LaLiga और मध्यप्रदेश: भविष्य के साझेदार LaLiga, स्पेन की प्रमुख पेशेवर फुटबॉल लीग, न केवल स्पोर्टिंग उत्कृष्टता का प्रतीक है, बल्कि यह वैश्विक स्तर पर युवाओं के लिए प्रशिक्षण, तकनीकी सहयोग और ब्रांड विस्तार का भी एक प्रभावशाली मंच है। भारत में LaLiga की सक्रियता, विशेषकर LaLiga Football Schools जैसी पहल, यह दर्शाती हैं कि स्पेनिश फुटबॉल का भारतीय युवाओं से गहरा संबंध बन चुका है। अब यह संबंध मध्यप्रदेश जैसे संभावनाशील राज्य के लिए नए अवसरों का द्वार खोल सकता है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव की यह यात्रा, वैश्विक खेल नेटवर्क से जुड़कर प्रदेश में निवेश, युवाओं के कौशल विकास और सांस्कृतिक पहचान को सशक्त करने की दिशा में एक दूरदर्शी पहल मानी जा रही है। स्पेन के राजनीतिक, कारोबारी और खेल जगत में इस दौरे को उत्साहजनक प्रतिक्रिया मिली है और यह भारत की स्पोर्ट्स डिप्लोमेसी को भी नई ऊँचाइयाँ देने वाला कदम सिद्ध हो रहा है। फुटबॉल के जरिए भविष्य की नीव और खेलों में अंतर्राष्ट्रीय भागीदारी का प्रारंभ होगा नया दौर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने स्पेन की राजधानी मैड्रिड में ला लीगा मुख्यालय में वरिष्ठ अधिकारियों से चर्चा करने के बाद मीडिया को संबोधित करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश में खेलों को लेकर जिस प्रकार से वातावरण बना है, उसने प्रतिभाओं को अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुँचने का अवसर दिया है। खेल अब केवल प्रतियोगिता नहीं, बल्कि भारत के युवाओं के व्यक्तित्व, करियर और वैश्विक पहचान से जुड़ चुका है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि भारत सरकार और खेल मंत्रालय के सहयोग से मध्यप्रदेश भी हर स्तर पर खेलों के विकास में अग्रसर है। उन्होंने बताया कि शहडोल के एक छोटे से गाँव में जब प्रधानमंत्री मोदी ने भारत की "फुटबॉल राजधानी" की उपमा दी, तो वह केवल एक प्रशंसा नहीं थी, बल्कि देश की उस छिपी हुई ताकत को पहचानने का संकेत था, जो ग्रामीण भारत में मौजूद है। मुख्यमंत्री ने कहा कि शहडोल से लेकर भोपाल तक, प्रदेश में फुटबॉल सहित सभी खेलों के लिए अधोसंरचना को मजबूत किया जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य सरकार खिलाड़ियों को आधुनिक सुविधाएं, प्रशिक्षण और वैश्विक प्रतियोगिताओं में भागीदारी के अवसर देने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि स्पेन जैसे देशों के अनुभवों से सीखकर, मध्यप्रदेश में भी फुटबॉल को नई दिशा दी जाएगी। प्रतिभाओं को तराशने के लिए तकनीकी सहयोग, प्रशिक्षण केंद्र, और अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंटों में सहभागिता की संभावनाओं पर कार्य किया जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मीडिया से चर्चा करते हुए कहा कि स्पेन प्रवास के दौरान औद्योगिक निवेश के कार्यक्रमों के साथ उन्होंने खेल क्षेत्र के लिए भी कई उच्च स्तरीय बैठकें की हैं। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश केवल उद्योग, पर्यटन या शिक्षा में ही नहीं, बल्कि खेलों के क्षेत्र में भी अग्रणी बने, यही हमारा लक्ष्य है। उन्होंने कहा कि प्रदेश के युवाओं को विश्वस्तरीय अवसर देने के लिए सरकार निरंतर कार्य कर रही है। फुटबॉल जैसे खेलों के माध्यम से न केवल शरीर, बल्कि भविष्य भी गढ़ा जा सकता है।  

केंद्रीय कैबिनेट की पीएम धन-धान्य कृषि योजना को मंजूरी, हर साल खर्च होंगे 24000 करोड़ रुपये

नई दिल्ली केंद्रीय कैबिनेट ने 36 योजनाओं को मिलाकर 24,000 रुपये प्रति वर्ष के परिव्यय वाली प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना को मंजूरी दी। सूचना व प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने यह एलान किया है। सरकार ने एनएलसीआईएल को नवीकरणीय ऊर्जा में निवेश के लिए 7,000 करोड़ रुपये की भी मंजूरी दे दी है। इसके अलावे कैबिनेट ने एनटीपीसी को नवीकरणीय ऊर्जा में निवेश के लिए 20,000 करोड़ रुपये की मंजूरी देने पर भी अपनी मुहर लगा दी है। क्या है प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना? मंत्रिमंडल ने बुधवार को छह साल की अवधि के लिए प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना को मंजूरी दी है। इसके तहत हर वर्ष 24,000 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे और इसमें 100 जिले शामिल होंगे। केंद्रीय बजट में घोषित यह कार्यक्रम 36 मौजूदा योजनाओं को एकीकृत करेगा और फसल विविधीकरण और टिकाऊ कृषि पद्धतियों को अपनाने मदद देगा। भंडारण और सिंचाई सुविधाओं में होगा सुधार केंद्रीय मंत्रिमंडल में लिए गए निर्णय के बारे में जानकारी साझा करते हुए, सूचना व प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि पीएम धन-धान्य कृषि योजना से फसल के बाद भंडारण में वृद्धि होगी, सिंचाई सुविधाओं में सुधार होगा और कृषि उत्पादकता में वृद्धि होगी। इस कार्यक्रम से 1.7 करोड़ किसानों को लाभ मिलने की संभावना है। एनएलसी इंडिया एनआईआरएल में कर सकेगा 7000 करोड़ रुपये का निवेश सरकार ने बुधवार को एनएलसी इंडिया को अपनी पूर्ण स्वामित्व वाली इकाई एनआईआरएल में 7,000 करोड़ रुपये निवेश करने की अनुमति दे दी। यह निर्णय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति की ओर से लिया गया। आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति ने एनएलसी इंडिया लिमिटेड (एनएलसीआईएल) को नवरत्न केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र उद्यमों (सीपीएसई) पर लागू मौजूदा निवेश दिशानिर्देशों से विशेष छूट देने को मंजूरी दे दी है। एक आधिकारिक बयान में कहा गया है, "इस रणनीतिक निर्णय से एनएलसीआईएल को अपनी पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी एनएलसी इंडिया रिन्यूएबल्स लिमिटेड (एनआईआरएल) में 7,000 करोड़ रुपये का निवेश करने में मदद मिलेगी। इसके तहत एनआईआरएल विभिन्न परियोजनाओं में सीधे या संयुक्त उद्यम का गठन कर निवेश कर सकेगी।इसके लिए पूर्व अनुमोदन की आवश्यकता नहीं होगी।" शुभांशु शुक्ला की पृथ्वी पर वापसी से जुड़ा प्रस्ताव भी पारित बुधवार को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला की अंतरिक्ष यात्रा पर भी एक प्रस्ताव पारित किया है। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इसकी जानकारी देते हुए बताया कि यह स्पेस की दिशा में हमारी बहुत बड़ी उपलब्धि  है। उन्होंने कहा, "आईएसएस (अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन) से ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला की वापसी पर मंत्रिमंडल ने एक बड़ा संकल्प पारित किया है। 15 जुलाई को भारत की अनंत आकांक्षाओं का प्रतिनिधित्व करते हुए ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला अन्तरिक्ष यात्रा से सकुशल धरती पर लौटे हैं। ये समूचे देश के लिए गर्व, गौरव और उल्लास का अवसर है। आज मंत्रिमंडल, देश के साथ मिलकर, ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला के सफलतापूर्वक पृथ्वी पर लौटने का अभिनंदन करता है। उन्होंने इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन पर 18 दिन का ऐतिहासिक मिशन पूरा किया।"  पीएम धन धान्य कृषि योजना, जिसपर सालाना 24000 करोड़ रुपये खर्च करेगी सरकार क्या है पीएम धन धान्य कृषि योजना? यह योजना खासतौर पर छोटे और सीमांत किसानों के लिए शुरू की गई है। इसका मुख्य उद्देश्य खेती में नई टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल बढ़ाना, किसानों को एक ही फसल पर निर्भर रहने की बजाय फसल विविधीकरण (Crop Diversification) के लिए प्रोत्साहित करना, जलवायु के अनुसार खेती को बढ़ावा देना, गांव स्तर पर भंडारण, सिंचाई और कृषि कर्ज की सुविधाओं को मजबूत बनाना और लागत घटाकर किसान की पैदावार बढ़ाना है जिससे उनकी आय में सुधार हो सके। किन किसानों को मिलेगा लाभ? इस योजना का सबसे ज़्यादा फायदा छोटे और सीमांत किसानों को मिलेगा। इन किसानों की जमीन कम होती है, लेकिन अगर उन्हें सही तकनीक, सिंचाई और भंडारण की सुविधा मिले, तो वे भी ज्यादा उत्पादन कर सकते हैं। इस योजना से करीब 1.7 करोड़ किसानों को सीधे फायदा मिलने की उम्मीद है। 100 ज़िलों को प्राथमिकता सरकार ने देश के 100 ऐसे ज़िलों की पहचान की है, जहां कृषि उत्पादकता कम है, फसल सघनता औसत से नीचे है और किसानों को पर्याप्त ऋण नहीं मिल पाता। इन जिलों में पीएम धन धान्य कृषि योजना को सबसे पहले लागू किया जाएगा। ₹24,000 करोड़ का वार्षिक खर्च सरकार इस योजना पर हर साल ₹24,000 करोड़ खर्च करेगी। यह राशि पहले से चल रही 36 कृषि योजनाओं के समन्वय से खर्च की जाएगी, जिससे न सिर्फ लागत घटेगी बल्कि योजनाओं का असर भी ज़्यादा होगा। कृषि में क्रांति लाने की तैयारी पीएम धन धान्य कृषि योजना से उम्मीद है कि यह देश में कृषि क्षेत्र में एक नई क्रांति लाएगी। टेक्नोलॉजी, विविधीकरण, और स्थानीय जरूरतों के अनुसार योजनाओं को लागू कर किसानों की आय को बढ़ाया जाएगा। पीएम धन धान्य कृषि योजना का उद्देश्य: इस योजना का मुख्य उद्देश्य कम फसल उत्पादन वाले क्षेत्रों में कृषि सुधार करना है। सरकार ने उन 100 जिलों को चिन्हित किया है, जहां खेती उन्नत नहीं है और आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल नहीं हो रहा है। इस योजना के तहत सरकार किसानों को बेहतर बीज, आधुनिक तकनीक और उन्नत उपकरण उपलब्ध कराएगी, जिससे किसान अपनी फसल में सुधार कर सकें। इसके साथ ही वित्तीय सहायता भी प्रदान की जाएगी, ताकि किसान बेहतर उपकरण और नए तरीके अपनाकर अपनी खेती को और अधिक उत्पादक बना सकें। इस योजना का उद्देश्य खेती को आसान और किसानों के लिए लाभकारी बनाना है, जिससे वे अधिक फसल उगा सकें और अपनी आय बढ़ा सकें। इस योजना से कृषि क्षेत्र को और अधिक मजबूत बनाया जाएगा, और देश भर के किसानों के जीवन स्तर में सुधार होगा। पीएम धन धान्य कृषि योजना के लिए पात्रता मापदंड: इस योजना का लाभ उन्हीं किसानों को मिलेगा जो निम्नलिखित पात्रता मापदंडों को पूरा करते हैं:     कम कृषि उत्पादन वाले 100 चयनित जिलों के किसान इस योजना के लिए आवेदन कर सकते हैं।     छोटे, सीमांत और बड़े पैमाने के किसान सभी पात्र होंगे।     आवेदक भारतीय नागरिक होना चाहिए।     किसान के पास वैध भूमि स्वामित्व दस्तावेज होना चाहिए।     पारंपरिक या पुरानी खेती के तरीकों का उपयोग करने वाले किसान इस … Read more

ऑपरेशन सिंदूर ने यह दर्शाया है कि स्वदेशी रूप से विकसित UAS और C-UAS हमारी जरूरतों के लिए महत्वपूर्ण

नई दिल्ली भारत के चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान ने कहा है कि दुनिया में हुईं हाल की लड़ाइयों ने दिखा दिया है कि कैसे ड्रोन जंगों में शक्ति के संतुलन को जबरदस्त तरीके से बदल सकते हैं. उन्होंने जोर देकर कहा कि यूएवी और काउंटर-अनमैन्ड एरियल सिस्टम (सी-यूएएस) में आत्मनिर्भरता भारत के लिए एक "रणनीतिक अनिवार्यता" है.  जनरल अनिल चौहान ने कहा कि ड्रोन वास्तविकता के प्रमाण हैं और हाल के संघर्षों में उनकी व्यापक उपयोगिता दर्शाती है कि कैसे ड्रोन अपने आकार या कीमत के अनुपात में सामरिक संतुलन को असमान रूप से बदल सकते हैं.  उन्होंने कहा, "असममित ड्रोन युद्ध बड़े प्लेटफार्मों को असुरक्षित बना रहा है और सेनाओं को एयर डॉक्ट्राइन, सी-यूएएस के विकास के वैचारिक पहलुओं पर पुनर्विचार करने के लिए प्रेरित कर रहा है." दिल्ली के मानेकशॉ सेंटर में आयोजित एक कार्यक्रम में अपने संबोधन में जनरल चौहान ने यह भी कहा कि ऑपरेशन सिंदूर ने यह दर्शाया है कि स्वदेशी रूप से विकसित मानवरहित हवाई प्रणालियां (यूएएस) और सी-यूएएस "हमारे इलाकों और हमारी जरूरतों के लिए क्यों महत्वपूर्ण हैं." बता दें कि दिल्ली में भारतीय सेना ने थिंक-टैंक सेंटर फॉर जॉइंट वारफेयर स्टडीज के सहयोग से UAV और C-UAS (काउंटर-अनमैंड एरियल सिस्टम) पर एक कार्यशाला का आयोजन किया है.  सीडीएस अनिल चौहान ने कहा कि भविष्य की लड़ाइयां आज की जंग को कल के हथियारों से नहीं जा सकता है.  उन्होंने कहा है कि अगर भारत को युद्ध क्षेत्र में बढ़त बनाकर रखनी है, तो हमें ‘भविष्य की तकनीक’ से लैस होना होगा. जनरल अनिल चौहान ने कहा है कि आज का युद्ध ‘कल की तकनीक’ से नहीं लड़ा जा सकता. हमें अपने भविष्य को सुरक्षित रखने के लिए अपनी तकनीकी क्षमता को स्वदेशी बनाना होगा. जनरल चौहान ने कहा कि अगर भारत को युद्ध क्षेत्र में बढ़त बनाकर रखनी है तो इंडियन आर्मी को ‘भविष्य की तकनीक’ से लैस होना होगा. सीडीएस ने कहा कि हमें अपने भविष्य को सुरक्षित रखने के लिए अपनी तकनीकी क्षमता का स्वदेशीकरण करना होगा.  लोअर एयर स्पेस में लड़ी जा रही हैं लड़ाइयां  अनिल चौहान ने कहा कि हम पहले सोचते थे कि एयर स्पेस एक है, इसे बांटा नहीं जा सकता है. पहले यहां मानव युक्त विमानों का बोलबाला था. लडाइयों में इन्ही का इस्तेमाल होता था. इसके बाद बैलेस्टिक और हाइपर सोनिक मिसाइल आए, इसने अपर स्पेस को खोल दिया. लेकिन अब लोअर एयर स्पेस भी खुल गए हैं. एयर स्पेस की बदलती लड़ाइयों पर उन्होंने कहा कि अपने लोअर एयर स्पेस पर जोर देना होगा. लोअर एयर स्पेस में ट्रैफिक बढ़ती जा रही है. ज्यादातर लड़ाइयां यही लड़ी जा रही हैं. इसलिए समय की जरूरत यह है कि अब लोअर एयर स्पेस में अपनी मारक क्षमता बढ़ाएं. इसके साथ ही दुश्मन को ऐसा करने से रोकने के लिए हमें काउंटर-अनमैंड एरियल सिस्टम विकसित करना होगा.  ऑपरेशन सिंदूर का जिक्र जंगों और ड्रोन्स की बात हो रही थी तो जनरल अनिल चौहान ने ऑपरेशन सिंदूर का जिक्र किया. उन्होंने कहा कि "ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान ने 10 मई को बिना हथियारों वाले ड्रोन और लॉइटर म्यूनिशंस का इस्तेमाल किया. लेकिन "इनमें से कोई भी वास्तव में भारतीय सैन्य या नागरिक बुनियादी ढांचे को कोई नुकसान नहीं पहुंचा सका." सीडीएस चौहान ने कहा, "इनमें से ज्यादातर को काइनेटिक और नॉन काइनेटिक तरीकों के इस्तेमाल से नष्ट कर दिया गया है. इनमें से कुछ को लगभग इनटैक्ट (साबूत) स्थिति में बरामद किया गया."  उन्होंने कहा कि भविष्य लड़ाइयों में हमें इसी लोअर एयर स्पेस पर फोकस करना होगा. सीडीएस ने जोर देकर कहा कि ऑपरेशन सिंदूर ने "हमें दिखाया है कि हमारे इलाके और हमारी जरूरतों के हिसाब से स्वदेशी रूप से विकसित यूएएस, सी-यूएएस क्यों महत्वपूर्ण हैं" आत्मनिर्भरता के सिद्धांत को रेखांकित करते हुए उन्होंने कहा कि "हम वैसे युद्ध के लिए आयातित तकनीकों पर निर्भर नहीं रह सकते हैं जो हमारे डिफेंसिव और ऑफेंसिव मिशन के लिए महत्वपूर्ण हैं. युद्ध में ड्रोन के इस्तेमाल पर जनरल चौहान ने कहा कि ड्रोन्स ने जंगों की तस्वीर बदल दी है. मुझे लगता है कि युद्ध में उनका इस्तेमाल बहुत क्रांतिकारी रहा है.  जैसे-जैसे ड्रोन्स की तैनाती बढ़ी इसका दायरा बढ़ा, सेना ने क्रांतिकारी तरीके से इनका इस्तेमाल शुरू कर दिया. इस कार्यशाला के लिए अपने संदेश में सीडीएस ने लिखा, "गैर-संपर्क युद्ध के तेजी से विकसित हो रहे परिदृश्य में, यूएवी एक परिवर्तनकारी शक्ति के रूप में उभरे हैं. भारत जैसे राष्ट्र के लिए, यूएवी और सी-यूएएस प्रौद्योगिकियों में आत्मनिर्भरता न केवल एक रणनीतिक अनिवार्यता है, बल्कि यह भारत को अपना भाग्य बनाने, अपने हितों की रक्षा करने और भविष्य के अवसरों का लाभ उठाने के लिए सशक्त बनाने के बारे में भी है."

करणी सेना–पुलिस झड़प: सीएम ने उच्चस्तरीय जांच के आदेश दिए, रिपोर्ट तलब

हरदा  हरदा में करणी सेना परिवार के प्रदर्शनकारियों पर पुलिस द्वारा राजपूत छात्रावास में घुसकर किए गए लाठीचार्ज पर सीएम ने संज्ञान लिया है।सीएम ने ट्वीट कर लिखा, हरदा छात्रावास प्रकरण का संज्ञान लेकर मैंने जिला प्रशासन से विस्तृत जांच रिपोर्ट तलब की है। हमारी सरकार के लिए सामाजिक न्याय और परस्पर सद्भाव सर्वोच्चय प्राथमिकता है। मप्र में सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने की किसी को अनुमति नहीं दी जाएगी। हरदा में विवाद की पूरी टाइम लाइन     विवाद की शुरुआत 11–12 जुलाई को हुई। करणी सेना परिवार के नेता आशीष सिंह राजपूत ने आरोप लगाया कि उनके साथ हीरा खरीदने के नाम पर ₹18 लाख की धोखाधड़ी हुई, जिसकी उन्होंने मोगली थाने में शिकायत दर्ज करवाई। आशीष राजपूत ने विकास लोधी, मोहित वर्मा, उमेश तपानिया के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी।     12–13 जुलाई को पुलिस ने आरोपी मोहित वर्मा को गिरफ्तार किया और उसे कोर्ट ले जाने का प्रयास किया। इस दौरान करीब 40–50 करणी सेना कार्यकर्ता कोर्ट परिसर और मुख्य मार्ग पर आकर अदालत के रास्ते पर आरोपी को सौंपने की मांग की इसको लेकर दोनों पक्षों में विवाद हुआ।     पुलिस ने कार्रवाई करते हुए बातचीत की कोशिश की, लेकिन जब प्रदर्शनकारी नहीं हटे तो आंसू गैस, वाटर कैनन और लाठीचार्ज किया। इस दौरान 4–5 कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया गया, जिनमें जिला अध्यक्ष सुनील राजपूत, आशीष राजपूत भी शामिल थे।     3 जुलाई रविवार सुबह प्रदर्शनकारियों ने खंडवा बायपास हाईवे और अन्य मार्गों को बंद कर दिया। जाम के कारण स्कूल, एम्बुलेंस प्रभावित हुए तो पुलिस ने तीन बार तक लाठीचार्ज किया, साथ में तीन बार वाटर कैनन, आंसू गैस फायरिंग की गई। पुलिस ने नियम तोड़ने के आरोप में सैकड़ों कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया गया। 60 से ज्यादा लोगों को जेल भेज दिया गया।     कोर्ट के बाहर और राजपूत छात्रावास में घुसकर क्षेत्र के साथ भी क्षेत्र को खाली कराने के लिए दोबारा बल प्रयोग किया गया।     14 जुलाई को 60 से ज्यादा गिरफ्तारियों की पुष्टि हुई। इसके बाद शांति बनाए रखने के लिए हरदा में प्रशासन ने Section 163 BNS (पूर्व 144) लागू कर दी गई।     पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह हरदा पहुंचे, उन छात्रों से मिले जिनके ऊपर लाठीचार्ज किया गया था। स्थानीय लोगों ने पुलिस पर बच्चों सहित महिलाओं को पीटने का आरोप लगाते हुए न्यायिक जांच की मांग की।     15 जुलाई को करणी सेना परिवार के राष्ट्रीय अध्यक्ष जीवन सिंह शेरपुर को शर्तों के साथ रिहा किया गया। उन्होंने आंदोलन शांतिपूर्ण रखने और आंदोलन जारी रखने का ऐलान किया     प्रशासन ने अधिकृत रिपोर्ट तैयार की और वीडियो फुटेज जारी कर यह दिखाने की कोशिश की कि पुलिस कार्रवाई समूह विशेष के खिलाफ नहीं, बल्कि स्थानीय कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए की गई थी ।

पहलगाम अटैक पर चौंकाने वाला खुलासा, 26 टूरिस्टों की हत्या के बाद आतंकियों ने किया था एक और कांड

 पहलगाम  22 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में आतंकी हमला हुआ था। इसके बाद लगातार एजेंसियां अपनी जांच में जुटी हुई हैं। आतंकी हमले के सबसे अहम चश्मदीद ने जांच करने वाली एजेंसियों के सामने चौंकाने वाला बयान दिया है। उसने बताया कि उसने 22 अप्रैल को घास के मैदानों में 26 लोगों की हत्या के बाद बंदूकधारियों को हवा में चार राउंड फायरिंग करते देखा था और वह जश्न मना रहे थे। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, इस स्टार प्रोटेक्टेड चश्मदीद गवाह को एनआईए ने जम्मू-कश्मीर पुलिस और सेंट्रल इंटेलिजेंस एजेंसी की मदद से ट्रैक किया था। इस गवाह का हमले के कुछ ही मिनटों के बाद बैसरन घाटी के मैदान में तीन पाकिस्तानी आतंकियों से सामना हुआ था। उसके बयान से वाकिफ एक सूत्र ने इंडियन एक्प्रेस को बताया, ‘उसे कलमा पढ़ने के लिए कहा गया और जब उसने अपने स्थानीय लहजे में बोलना शुरू किया, तो उन्होंने उसे छोड़ दिया। उन्होंने जश्न मनाने के लिए गोलियां चलानी शुरू कर दीं। उसने हवा में चार राउंड गोलियां चलाई गईं।’  चश्मदीद ने जांचकर्ताओं को बताया है कि उसने 22 अप्रैल को 26 टूरिस्टों की हत्या के बाद बंदूकधारियों को ‘जश्न’ में हवा में चार राउंड गोलियां चलाते देखा था. यह पता चला है कि ‘स्टार प्रोटेक्टेड गवाह, जिसे राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने जम्मू और कश्मीर पुलिस और केंद्रीय खुफिया एजेंसियों की मदद से ट्रैक किया था, हमले के कुछ मिनट बाद बैसरन घाटी में तीन पाकिस्तानी आतंकवादियों का सामना किया था. पिछले महीने एनआईए ने हमलावरों को कथित तौर पर पनाह देने के आरोप में दो स्थानीय लोगों परवेज अहमद जोथर और बशीर अहमद को गिरफ्तार किया था. एनआईए के एक प्रवक्ता ने कहा, ‘उन्होंने तीन सशस्त्र आतंकवादियों की पहचान उजागर की और पुष्टि की कि वे लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े पाकिस्तानी नागरिक थे. जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ी, एनआईए को एक स्थानीय व्यक्ति मिला. अब वह मुख्य गवाह है. उसने हमले के कुछ ही मिनटों बाद हुई घटनाओं की अहम जानकारी साझा की. बताया जा रहा है कि उसने जांचकर्ताओं को बताया कि नागरिकों की हत्या करने के बाद जब वे बैसरन से निकल रहे थे, तो बंदूकधारियों ने उसे रोक लिया. उसके बयान से वाकिफ एक सूत्र ने बताया, ‘उसे कलमा पढ़ने के लिए कहा गया और जब उसने अपने स्थानीय लहजे में बोलना शुरू किया, तो उन्होंने उसे छोड़ दिया. उन्होंने जश्न में गोलियां चलानी शुरू कर दीं. हवा में चार राउंड गोलियाँ चलाई गईं.’ उसके बयान के आधार पर जांच दल ने घटनास्थल से चार इस्तेमाल किए हुए कारतूस जब्त किए. बताया जा रहा है कि उस व्यक्ति ने जांचकर्ताओं को यह भी बताया कि उसने आतंकियों के मददगार परवेज और बशीर को कथित तौर पर एक पहाड़ी के पास खड़े होकर हमलावरों के सामान की देखभाल करते देखा था, जिसे बंदूकधारियों ने आखिरकार उनसे ले लिया था. जांचकर्ताओं ने परवेज और बशीर से भी लंबी पूछताछ की है. उसके आधार पर अब उन्हें पता चला है कि हमले से पहले क्या हुआ था. एक केंद्रीय खुफिया एजेंसी के सूत्र ने बताया, ‘परवेज ने दावा किया है कि घटना से एक दिन पहले तीनों आतंकी दोपहर करीब साढ़े तीन बजे उसके घर आए और खाना मांगा. उनके पास हथियार थे. उसकी पत्नी ने उन्हें खाना परोसा और वे करीब चार घंटे तक बैसरन में सुरक्षा व्यवस्था, पर्यटक स्थलों, रास्तों और टाइम टेबल से जुड़े सवाल पूछते रहे.’ सूत्रों के मुताबिक, जाने से पहले आतंकियों ने परवेज की पत्नी से कुछ मसाले और बिना पके चावल पैक करने को कहा और परिवार को 500 रुपये के पांच नोट दिए. सूत्र ने बताया, ‘इसके बाद वे बशीर से मिले. उन्होंने उनसे (दोनों स्थानीय परवेज और बशीर) 22 अप्रैल को दोपहर करीब साढ़े बारह बजे बैसरन पहुंचने को कहा. सूत्रों ने बताया कि हमलावरों में से एक सुलेमान शाह बताया जा रहा है, जो पिछले साल 20 अक्टूबर को श्रीनगर-सोनमर्ग राजमार्ग पर जेड-मोड़ सुरंग का निर्माण कर रही एक कंपनी के सात कर्मचारियों की हत्या में शामिल था. घटनास्थल से चार कारतूस बरामद पिछले महीने एनआईए ने हमलावरों को कथित तौर पर पनाह देने के आरोप में दो स्थानीय लोगों को अरेस्ट किया था। एनआईए के एक प्रवक्ता ने कहा, ‘उन्होंने तीन आतंकवादियों की पहचान का खुलासा किया और पुष्टि की कि वे लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े पाकिस्तानी थे।’ इस मामले में गवाहों के बयान के बाद जांच कर रही टीम ने घटनास्थल से चार कारतूस भी जब्त किए हैं। ऐसा बताया जा रहा है कि उस व्यक्ति ने जांच करने वाली टीम को यह भी बताया था कि उसने परवेज और बशीर को कथित तौर पर पहाड़ी के पास खड़े होकर हमलावरों के सामान की देखभाल करते हुए देखा था। बशीर और परवेज से एजेंसी ने की पूछताछ एजेंसी ने परवेज और बशीर से भी काफी लंबी पूछताछ की है। एक सेंट्रल एजेंसी के सूत्र ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया, ‘परवेज ने दावा किया है कि घटना से एक दिन पहले, तीनों हमलावर दोपहर करीब साढ़े तीन बजे उसके घर आए और खाना मांगा। उनके पास हथियार थे। उसकी पत्नी ने उन्हें खाना परोसा और वे करीब चार घंटे तक बैसरन में सिक्योरिटी अरेंजमेंट, टूरिस्ट प्लेस, रूट और टाइम से जुड़े हुए सवाल पूछते रहे।’ हमलावरों ने परवेज की पत्नी से कुछ मसाले और बिना पके चावल पैक करने को कहा और परिवार को 500 रुपये के पांच नोट दिए।    

खुलासा : छांगुर बाबा नेपाल सीमा से सटे गांवों में धर्मांतरण के अड्डे खोलने की तैयारी कर रहा था

 बलरामपुर उत्तर प्रदेश के बलरामपुर में एटीएस की गिरफ्त में आए छांगुर बाबा को लेकर लगातार चौंकाने वाले खुलासे हो रहे हैं. सूत्रों के मुताबिक, छांगुर नेपाल सीमा से सटे गांवों में इस्लामिक मूवमेंट फैलाने और धर्मांतरण के अड्डे खोलने की साजिश रच रहा था. इसके लिए उसने 46 गांवों के युवाओं को टारगेट किया था और एक पूरी टीम भी खड़ी कर ली थी.  छांगुर बाबा का मकसद सीमावर्ती युवाओं को कट्टर सोच और जिहाद की तरफ झुकाने का था, जिसके लिए वह जलसों में तकरीरें करता और परचे बांटकर उनकी मानसिकता समझने की कोशिश करता था. चिह्नित युवाओं को आर्थिक रूप से मजबूत करने के लिए वह उन्हें पैसों का लालच भी दे रहा था. सुरक्षा एजेंसियों का दावा है कि छांगुर ने इस्लामिक मूवमेंट फैलाने के लिए लगभग 10 करोड़ रुपये खर्च करने की योजना बना रखी थी. विदेशों से उसके पास लगातार पैसे आने लगे थे और वह नेपाल में भी अपनी पैठ बनाने की कोशिश में जुटा था. साल 2020 के बाद वह आर्थिक रूप से बेहद मजबूत हो गया. वर्ष 2015 तक जो छांगुर पुरानी बाइक से अंगूठियां और नग बेचता था, वह अब लग्जरी गाड़ियों में घूमने लगा था. उसके करीबियों की संपत्तियां भी तेजी से बढ़ीं. एटीएस की जांच में सामने आया है कि छांगुर बाबा ने सरकारी जमीनों पर भी कब्जा करने का खेल शुरू कर दिया था. उतरौला क्षेत्र में तालाब, चरागाह, खलिहान की जमीनों पर उसकी नजर थी. तहसील कर्मियों की मिलीभगत से उतरौला के एक तालाब की जमीन अपने नाम करा ली थी और बाद में उसे नीतू रोहरा के नाम एक करोड़ रुपये में बेच दिया गया. नगर पालिका के अधिशाषी अधिकारी ने इस तालाब की जमीन पाटने की रिपोर्ट भी प्रशासन को भेजी थी. उतरौला में छांगुर बाबा ने दो जगहों पर कब्जे किए थे, जिनमें से एक कोठी प्रशासन ने गिरा दी है, जबकि दूसरी जगह को लेकर जांच जारी है. छांगुर बाबा के नेटवर्क में 18 अन्य लोगों को भी आरोपी बनाया गया है. अगस्त 2024 में इसके खिलाफ एफआईआर दर्ज हुई थी, लेकिन करीब आठ महीने तक जांच ही चलती रही. अप्रैल 2025 में इसके बेटे और सहयोगी नवीन रोहरा की गिरफ्तारी के बाद छांगुर का नेटवर्क कमजोर पड़ने लगा और उसके करीबी उससे दूरी बनाने लगे. फिलहाल छांगुर एटीएस की रिमांड कस्टडी में है, जहां उससे पूछताछ जारी है. रिमांड की दो दिन की अवधि और बची है. एटीएस का मानना है कि पूछताछ में इससे और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं.

अलीराजपुर में सुबह 6 बजे से हो रही लगातार बारिश से उर नदी में जलस्तर तेजी से बढ़ रहा

भोपाल  मध्यप्रदेश में तेज बारिश का दौर जारी है। आज 18 जिलों में अति भारी या भारी बारिश का अलर्ट है। अलीराजपुर में सुबह 6 बजे से हो रही लगातार बारिश से उर नदी में जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। पुलिया से 3 फीट ऊपर पानी बह रहा है। पानी घरों में घुस गया है। बैतूल जिले के सारणी में सतपुड़ा बांध के 5 गेट 2 फीट तक खोले गए हैं। इन गेटों को आज सुबह 10:45 बजे खोलकर 8390 क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा है। डिंडौरी और मंडला में भी तेज बारिश जारी है। यहां नर्मदा नदी में पानी बढ़ रहा है। कई जगहों पर पुल डूब गए हैं। मंडला के सुभाष वार्ड में पानी निकासी नहीं होने के चलते सड़क पर तीन फीट के ऊपर पानी भर गया है। डिंडौरी में नर्मदा घाटों पर बने मंदिर डूब गए हैं। मंगलवार को 25 से ज्यादा जिलों में हुई बारिश मंगलवार को ग्वालियर, भोपाल, इंदौर समेत 25 से ज्यादा जिलों में बारिश हुई। सबसे ज्यादा ग्वालियर में 2.3 इंच पानी गिर गया। खरगोन में डेढ़ इंच, सीधी में 1 इंच और उमरिया में आधा इंच से ज्यादा पानी गिरा। शाजापुर और रायसेन में भी तेज बारिश का दौर चला। भोपाल, दतिया, इंदौर, नर्मदापुरम, श्योपुर, शिवपुरी, मंडला, सागर, सिवनी, बालाघाट, शाजापुर, राजगढ़, सीहोर, आगर-मालवा, देवास समेत कई जिलों में हल्की बारिश दर्ज की गई। हालांकि, बीते 24 घंटे में बारिश या वर्षाजनित हादसों में किसी मौत की खबर नहीं है। इस मानसूनी सीजन में मध्यप्रदेश में औसत 18.2 इंच बारिश हो गई है, जो कोटे से आधी है। अब तक की औसत बारिश से यह 72% यानी 5.6 इंच ज्यादा है। अब तक 10.6 इंच पानी गिरता है। निवाड़ी ऐसा जिला है, जहां एक महीने में ही बारिश का आंकड़ा 103% यानी 31.46 इंच पहुंच गया है। इस जिले की सामान्य बारिश साढ़े 30 इंच है। इंदौर और उज्जैन संभाग के जिले पिछड़े हुए हैं। 5 बड़े शहरों में भोपाल में 14.5 इंच, इंदौर में 7 इंच, ग्वालियर में 18.5 इंच, जबलपुर में 21.6 इंच और उज्जैन में 8 इंच पानी गिरा है। वहीं, टीकमगढ़ में 91% (33 इंच), छतरपुर में 75% (28 इंच), शिवपुरी में 82% (25.3 इंच) और मंडला में 75% (35 इंच) बारिश हो चुकी है।

UK के स्कूलों में पढ़ाया जाएगा भागवत गीता का पाठ, सीएम धामी ने कहा- इसकी तैयारी पहले से थी

देहरादून  स्कूलों में भागवत गीता पढ़ाए जाने को लेकर सीएम धामी का बड़ा बयान आया है. सीएम धामी ने कहा, ‘हमने शिक्षा विभाग की समीक्षा मीटिंग में तय किया था, उस पर अब काम शुरू हो गया है.’ सीएम ने कहा कि भागवत गीता में भगवान श्रीकृष्ण का अर्जुन को दिया गया ज्ञान हमारे बच्चों में अच्छे संस्कार पैदा करेगा. सीएम ने कहा कि इससे बच्चे न्यायशील बनेगे और जीवन में आगे बढ़ेंगे. प्रदेश के सरकारी स्कूलों की प्रार्थना सभा में श्रीमद् भागवत गीता के श्लोक पढ़ाए जाने के फैसले को लेकर अब राजनीति भी शुरू हो गई है. कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष करन महारा ने कहा कि किसी भी अच्छी चीज का स्वागत होना चाहिए. लेकिन सिर्फ श्रीमद् भागवत गीता को ही क्यों शामिल किया जाए. एक धर्म विशेष से जुड़े साहित्य को पढ़ाना सिर्फ वोटों की राजनीति लगती है. हर रोज सुनाना होगा एक श्लोक उत्तराखंड में एक आधिकारिक आदेश में कहा गया है कि राज्य के सरकारी स्कूलों की प्रार्थना सभा में विद्यार्थियों को श्रीमद् भगवद्गीता का एक श्लोक अर्थ सहित प्रतिदिन सुनाया जाए ताकि आधुनिक शिक्षा के साथ ही भारतीय ज्ञान परंपरा से छात्रों को अवगत कराकर उन्हें एक श्रेष्ठ नागरिक बनाया जा सके. उत्तराखंड माध्यमिक शिक्षा निदेशक डॉ. मुकुल कुमार सती द्वारा मुख्य शिक्षा अधिकारियों को इस संबंध में जारी एक आदेश में कहा गया है कि प्रार्थना सभा में सुनाए जाने वाले इस श्लोक के वैज्ञानिक दृष्टिकोण की जानकारी भी छात्रों को दी जाएगी. शिक्षकों को सप्ताह का श्लोक घोषित करना होगा इसके अलावा, शिक्षकों को प्रत्येक सप्ताह गीता के एक श्लोक को ‘सप्ताह का श्लोक’ घोषित कर उसे सूचना पटट पर अर्थ सहित लिखे जाने को कहा गया है जिसका छात्र अभ्यास करेंगे और सप्ताह के अंत में उस पर चर्चा कर उसका ‘फीडबैक’ लिया जाएगा . आदेश में शिक्षकों को समय-समय पर श्लोकों की व्याख्या करने तथा छात्रों को इस बात की जानकारी देने को कहा गया है कि श्रीमद् भगवद्गीता के सिद्धांत किस प्रकार मानवीय मूल्य, व्यवहार, नेतृत्व कौशल, निर्णय क्षमता, भावनात्मक संतुलन और वैज्ञानिक सोच विकसित करते हैं. केवल विषय के तौर पर ना पढ़ाया जाए छात्रों को यह भी बताया जाएगा कि गीता के उपदेश मनोविज्ञान, तर्कशास्त्र, व्यवहार विज्ञान एवं नैतिक दर्शन पर आधारित हैं जो धर्मनिरपेक्ष द्रष्टिकोण से संपूर्ण मानवता के लिए उपयोगी हैं. आदेश में कहा गया है कि विद्यालय स्तर पर यह सुनिश्चित किया जाए कि छात्रों को ये श्लोक केवल विषय या पठन सामग्री के रूप में नहीं पढ़ाए जाएं बल्कि ये उनके जीवन एवं व्यवहार में भी परिलक्षित हों. सती ने बताया कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के तहत विद्यार्थियों को विभिन्न विषयों के साथ-साथ भारतीय ज्ञान परंपरा का आधार एवं ज्ञान प्रणाली का अध्ययन कराया जाना है। इससे पहले उत्तराखंड में राज्य पाठ्यचर्या को लेकर छह मई को आयोजित एक बैठक में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने श्रीमद् भगवद्गीता और रामायण को भी इसमें शामिल करने के निर्देश दिए थे.