samacharsecretary.com

काल बनकर बरसा मानसून, झारखंड में भारी बारिश ने मचाई तबाही

रांची  झारखंड में मानसून लगातार सक्रिय देखने को मिल रहा है। राज्य में लगातार हो रही भारी बारिश ने कहर बरपाया है। बारिश से हुई अलग-अलग घटनाओं में 5 लोगों की मौत हो गई है, जबकि 1 व्यक्ति लापता है। इसके अलावा कई लोग घायल बताए जा रहे हैं। बताया जा रहा है कि सरायकेला-खरसावां के राजनगर थाना क्षेत्र अंतर्गत डांडू गांव में पिछले कुछ दिनों से हो रही भारी बारिश से कच्चे मकान कमजोर हो गए हैं जिस वजह से घर ढह गया। घर के भीतर मौजूद पूरे परिवार और आए मेहमान सहित 10 लोग मलबे में दब गए। ग्रामीणों ने कड़ी मशक्कत के साथ मिट्टी हटाकर दबे लोगों को बाहर निकाला। सभी घायलों को अस्पताल पहुंचाया गया जहां 7 लोगों को बेहतर इलाज के लिए एमजीएम रेफर कर दिया गया। हादसे में एक महिला और उसके सात वर्षीय बेटे की मौत हो गई और 8 लोगों का इलाज चल रहा है। जिले में एक अन्य घटना में, शनिवार सुबह एक घर की दीवार गिरने से 5 साल के बच्चे की मौत हो गई और 3 अन्य घायल हो गए। यह घटना खरसावां थाना क्षेत्र के कोल शिमला में हुई। वहीं, चतरा जिले के कटघरा गांव में शुक्रवार को एक दंपति उफनती नदी में बह गए। गिधौर के बीडीओ राहुल देव ने बताया, ‘‘पति का शव बरामद कर लिया गया है, जबकि पत्नी अब भी लापता है।'' जिले के पत्थलगडा प्रखंड के खैराटोला गांव में भी बारिश से संबंधित घटना में एक व्यक्ति की मौत हो गई।  

पूजा पाल ने अखिलेश यादव को लिखी चिट्ठी, जताया खतरे का संकेत, सपा पर लगाया जिम्मेदारी का आरोप

कौशांबी  यूपी में कौशांबी जिले की चायल सीट से विधायक पूजा पाल ने समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव को चिट्ठी लिखी है. इस चिट्ठी में उन्होंने अपनी हत्या की आशंका जताई है. उन्होंने साफ कहा है कि यदि मेरी हत्या होती है तो इसके लिए समाजवादी पार्टी और अखिलेश यादव जिम्मेदार होंगे. पूजा पाल ने अपनी चिट्ठी में उल्लेख किया है कि उन्होंने जीवन का सबसे बड़ा लक्ष्य हासिल कर लिया है. उनके पति की हत्या के दोषियों को सजा मिल चुकी है. उन्होंने लिखा, मैंने अपना वास्तविक लक्ष्य प्राप्त कर लिया है, मेरे पति के हत्यारों को सजा मिल गई है. अब मुझे मौत भी मिले तो भी गर्व ही होगा. पत्र के अंतिम हिस्से में उन्होंने गंभीर आरोप लगाते हुए लिखा कि अखिलेश यादव ने उन्हें बीच रास्ते में अपमानित करके छोड़ दिया है. इस कारण समाजवादी पार्टी के अपराधी समर्थकों का मनोबल काफी बढ़ गया है और ठीक वैसे ही जैसे उनके पति की हत्या हुई थी, वैसे ही उनकी हत्या भी हो सकती है. पूजा पाल ने पत्र में कहा, यदि ऐसा होता है तो मैं सरकार और प्रशासन से मांग करती हूं कि मेरी हत्या की वास्तविक दोषी समाजवादी पार्टी और अखिलेश यादव को ही माना जाए. कौन हैं पूजा पाल? पूजा पाल की शादी 16 जनवरी 2005 को राजू पाल से हुई थी. राजू इलाहाबाद (पश्चिमी) विधानसभा सीट से बसपा विधायक थे. शादी के महज 9 दिन बाद 25 जनवरी 2005 को राजू की दिनदहाड़े हत्या कर दी गई. यह हत्या इलाहाबाद की सियासत में भूचाल लाने वाली घटना थी. पूजा पाल ने अपने पति की हत्या के बाद अतीक अहमद और उसके गुर्गों के खिलाफ FIR दर्ज कराई, जिसके चलते वो 'अतीक गैंग से लोहा लेने वाली' नेता के रूप में उभरीं. पति की हत्या के बाद उन्होंने उपचुनाव लड़ा लेकिन हार गईं. उसके बाद 2007 और 2012 में इलाहाबाद शहर (पश्चिम) से BSP से विधायक चुनी गईं. हालांकि 2017 में वे हार गईं. बाद में 2022 में सपा के टिकट पर चायल विधानसभा सीट से विधायक बनीं.

कमलनाथ सरकार गिरने की वजह बताते हुए दिग्विजय सिंह ने किया व्यक्तिगत खुलासा

भोपाल  पूर्व मुख्यमंत्री और राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह ने मध्य प्रदेश में 5 साल पहले कांग्रेस सरकार गिरने पर खुलकर बातचीत की और कमलनाथ को जिम्मेदार ठहराया है. दिग्विजय ने आरोप लगाया कि कमलनाथ ने ज्योतिरादित्य सिंधिया की वो मांग नहीं मानी, जिस पर डिनर के दौरान सहमति बनी थी. इसी कारण सरकार गिर गई. बातचीत में दिग्विजय ने कहा, इस बात का दुख है कि हमें जिन पर पूरा भरोसा था, उन लोगों ने धोखा दे दिया. आइडियोलॉजिकल क्लैश नहीं था. ये क्लैश ऑफ पर्सनालिटी हो गया. दिग्विजय से जब पूछा गया कि अगर कमलनाथ ग्वालियर-चंबल संभाग से जुड़ी मांगें मान लेते तो शायद यह नौबत नहीं आती? इस पर उन्होंने स्वीकार किया कि शायद फिर यह नौबत नहीं आती.  दरअसल, मध्य प्रदेश में 2018 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने बहुमत हासिल किया था और 15 साल के लंबे इंतजार के बाद सत्ता में वापसी की थी. पार्टी ने तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष कमलनाथ को मुख्यमंत्री बनाया था. हालांकि, अंदरखाने नाराजगी की खबरें आती रहीं. इस बीच, 15 महीने बाद सिंधिया ने बगावत कर दी और बीजेपी में शामिल हो गए. कई विधायकों ने भी कांग्रेस छोड़ दी और सिंधिया खेमे में चले गए. जिससे कांग्रेस सरकार अल्पमत में आ गई और कमलनाथ को मुख्यमंत्री पद छोड़ना पड़ा. दिग्विजय ने बताया- कैसे गिरी थी कमलनाथ सरकार? सियासी गलियारों में यह चर्चा जोरों पर रही कि दिग्विजय और सिंधिया के बीच लड़ाई के कारण कांग्रेस सरकार गिर गई. अब कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने कयासों पर विराम लगाया है. MPTak के साथ विशेष पॉडकास्ट में दिग्विजय ने पहली बार इस मामले में चुप्पी तोड़ी और बताया कि कमलनाथ की सरकार कैसे गिरी थी. उन्होंने एक इंडस्ट्रियलिस्ट के घर सिंधिया और कमलनाथ के डिनर की वो कहानी भी बताई. दिग्विजय से जब पूछा गया कि कहा जाता है कि आपकी वजह से कमलनाथ सरकार गिरी? इस पर उन्होंने कहा, ये प्रचारित किया गया कि मेरी और सिंधिया की लड़ाई की वजह से कमलनाथ की सरकार गिर गई. लेकिन सच्चाई ये नहीं है. मैंने चेताया था कि ऐसी घटना हो सकती है. दिग्विजय का कहना था कि मेरा दुर्भाग्य है कि शायद मेरी कुंडली में यह है कि मुझ पर हमेशा वह आरोप लगेगा जिसमें मैं दोषी नहीं हूं.  दिग्विजय ने सुनाई डिनर की वो कहानी दिग्विजय का कहना था कि एक बड़े इंडस्ट्रियलिस्ट हैं. मैं उनका नाम नहीं लेना चाहूंगा. कमलनाथ और सिंधिया दोनों से उनके अच्छे संबंध हैं. मैं उनके पास गया और कहा कि देखिए इन दोनों की लड़ाई में हमारी सरकार गिर जाएगी. आप जरा संभालिए, क्योंकि आपके दोनों से अच्छे संबंध हैं. दिग्विजय ने बताया कि उनके घर डिनर रखा गया और मैं भी उसमें शामिल हुआ. मैंने बहुत कोशिश की कि ये मामला निपट जाए. वहां पर सभी इश्यूज को लेकर एक लिस्ट तैयार हुई, लेकिन उसका पालन नहीं हो पाया. ये बात सच है कि तमाम प्रयासों के बावजूद कमलनाथ सरकार नहीं बच पाई. मेरा ना माधवराव सिंधिया से कोई विवाद था, ना ज्योतिरादित्य से कोई विवाद था. दिग्विजय से पूछा गया कि डिनर मीटिंग में कौन-कौन मांगें रखी गईं थीं? उन्होंने कहा, छोटी-मोटी बातें हुईं थी. ये हुआ था कि ग्वालियर-चंबल संभाग में जैसा हम दोनों कहेंगे, वैसा कर देंगे. हम दोनों ने दूसरे दिन विशलिस्ट बनाकर दे दिया, मैंने भी दस्तखत किए. लेकिन विशलिस्ट का पालन नहीं हुआ. 

मध्यप्रदेश माइनिंग कॉन्क्लेव: कटनी में आज होगा आयोजन, मुख्यमंत्री निवेशकों से वन-टू-वन चर्चा करेंगे

 कटनी मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की उपस्थिति में शनिवार को कटनी में माइनिंग कॉन्क्लेव 2.0 का आयोजन होगा। इनमें मुख्य फोकस कोयला एवं ऊर्जा, ऊर्जा एवं हाइड्रोकार्बन, प्रौद्योगिकीय प्रगति, महत्वपूर्ण खनिज (क्रिटिकल मिनरल्स) और चूना पत्थर एवं सीमेंट पर होगा। मुख्यमंत्री समिट में शामिल होने वाले विषय-विशेषज्ञों और निवेशकों के साथ वन-टू-वन चर्चा करेंगे। कॉन्क्लेव में दो हजार से अधिक प्रतिभागी शामिल होंगे। कॉन्क्लेव में मिनरल एवं माईनिंग से संबंधित विभिन्न सत्रों के दौरान चर्चा होगी। खनन क्षेत्र में राष्ट्रीय उत्पादन में मध्य प्रदेश का महत्वपूर्ण योगदान हैं। यहां राष्ट्रीय उत्पादन का 73 प्रतिशत तांबा, 29 प्रतिशत राक फास्फेट, 26 प्रतिशत मैंगनीज, नौ प्रतिशत चूना पत्थर, आठ प्रतिशत कोयला, तीन प्रतिशत बाक्साइट और एक प्रतिशत लोह अयस्क मिलता है। प्रदेश में मौजूद खनिज संपदा को प्रदर्शित करते हुए कॉन्क्लेव स्थल पर प्रदर्शनी भी लगाई जाएगी। कटनी माइनिंग कॉन्क्लेव में देशभर के बड़े औद्योगिक घरानों ने दिलचस्पी दिखाई है। बता दें कि प्रदेश में पहली खनिज कॉन्क्लेव 17 एवं 18 अक्टूबर को कुशाभाऊ ठाकरे इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर भोपाल में आयोजित की गई थी, जिसमें विभिन्न 11 औद्योगिक संस्थानों की ओर से 19 हजार 650 करोड़ रूपये के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए। होंगे एमओयू माइनिंग कॉन्क्लेव में कोयला, चूना पत्थर, तेल और गैस, सहित अन्य महत्वपूर्ण खनिजों की संभावनाओं पर चर्चा होगी। साथ ही खनन में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) और मशीन लर्निंग की भूमिका पर भी जोर दिया जाएगा। इस आयोजन में डिजिटल परिवर्तन, ऊर्जा सुरक्षा, और स्थिरता पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा, जिसमें खनन कार्यों में ऑटोमेशन के साथ एआई और मशीन लर्निंग के उपयोग पर चर्चा होगी। कोल गैस (सीबीएम) जैसे वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों की संभावनाओं का भी अन्वेषण किया जाएगा। सीमेंट, ऊर्जा, और खनिज-आधारित उद्योगों से संबंधित मुद्दों पर गहन चर्चा होगी। कॉन्क्लेव में कई संस्थानों के साथ एमओयू भी होंगे, जिससे राज्य के खनन बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के उद्देश्य से किए गए सभी निवेश प्रस्ताव फलीभूत होंगे।

उत्तराखंड के थराली में बादल फटने से हड़कंप, मलबे में दबे कई घर और लोग

चमोली  उत्तराखंड के चमोली जिले के थराली क्षेत्र में शुक्रवार की आधी रात के बाद बादल फटने की घटना ने भारी तबाही मचाई. इस घटना से थराली कस्बे, आसपास के गांवों और बाजारों में जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया. भारी बारिश और मलबे से कई घरों, दुकानों और सड़कों को नुकसान पहुंचा है. प्रशासन और एसडीआरएफ की टीमें राहत और बचाव कार्य में जुटी हुई हैं. बादल फटने का सबसे ज्यादा असर थराली बाजार, कोटदीप और तहसील परिसर में देखने को मिला. यहां तहसील परिसर, एसडीएम आवास और कई घरों में मलबा घुस गया. तहसील परिसर में खड़ी कई गाड़ियां मलबे में दब गईं. कस्बे की सड़कों पर इतना मलबा भर गया कि वह तालाब जैसी नजर आने लगीं. पास के सागवाड़ा गांव में मलबे के कारण एक युवती की दबकर मौत हो गई. इस घटना से क्षेत्र में अफरा-तफरी मच गई और लोग अपने घरों से बाहर निकल आए. पुलिस और प्रशासन की टीमें तुरंत गांव में राहत कार्य के लिए पहुंचीं. चेपड़ों बाजार में मलबे की चपेट में आने से कई दुकानें क्षतिग्रस्त हुईं. साथ ही, एक व्यक्ति के लापता होने की सूचना भी है, जिससे स्थानीय लोगों की चिंता और बढ़ गई है. यातायात पूरी तरह बाधित भारी बारिश और मलबे के कारण थराली-ग्वालदम मार्ग मिंग्गदेरा के पास बंद हो गया है. इनके अलावा, थराली-सागवाड़ा मार्ग भी बाधित है. इन दोनों मार्गों के बंद होने से क्षेत्र में आवाजाही ठप हो गई है और लोगों को काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है. गौचर से स्टेट डिजास्टर रिस्पॉन्स फोर्स (SDRF) की टीम घटनास्थल पर है. प्रशासन ने राहत और बचाव कार्यों को तेज करने के निर्देश दिए हैं. बॉर्डर रोड्स ऑर्गनाइजेशन (BRO) की टीम मिंग्गदेरा के पास सड़क खोलने की कोशिशों में जुटी है, ताकि यातायात और राहत कार्यों को जल्द सुचारू किया जा सके. स्कूल और आंगनबाड़ी बंद जिला प्रशासन ने सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए थराली तहसील के सभी स्कूलों और आंगनबाड़ी केंद्रों को शनिवार (23 अगस्त 2025) के लिए बंद रखने का आदेश दिया है. जिलाधिकारी डॉक्टर संदीप तिवारी ने बताया कि पुलिस और प्रशासन की टीमें लगातार मौके पर मौजूद हैं और राहत एवं बचाव कार्य में तेजी से जुटी हैं. उत्तरकाशी से रुद्रप्रयाग तक बादल फटने से तबाही उत्तराखंड में इस मॉनसून सीजन के दौरान कई बड़े बादल फटने की घटनाओं ने भारी तबाही मचाई है. सबसे गंभीर घटना 5 अगस्त 2025 को उत्तरकाशी के धराली और हर्षिलल क्षेत्रों में हुई. उत्तरकाशी में बादल फटने से आई अचानक बाढ़ (फ्लैश फ्लड) ने धराली और हर्षिल इलाके को तहस-नहस कर दिया. कई घर, होटल और इंफ्रास्ट्रक्चर पानी में बह गए. इस हादसे में कम से कम चार लोगों की मौत हुई, जबकि दर्जनों लोग लापता हुए. सुखी और बगोरी समेत कई गांव प्रभावित हुए, जहां घरों और कृषि संपत्तियों को भारी नुकसान हुआ. वही रुद्रप्रयाग में जुलाई के आखिर में केदारघाटी क्षेत्र में बादल फटने से आई बाढ़ ने यहां भी कहर बरपाया. कई घर और गाड़ियां मलबे में दब गईं और नदियां उफान पर आ गईं.

बोर्ड परीक्षा फॉर्म में APAAR ID अनिवार्यता हटाई गई, छात्रों के लिए राहत

भोपाल माध्यमिक शिक्षा मंडल (माशिमं) की 10वीं व 12वीं की परीक्षा सात फरवरी से आयोजित होने वाली है। इस बार 10वीं व 12वीं बोर्ड परीक्षा के फॉर्म भरने के लिए अपार आईडी (ऑटोमेटेड परमानेंट एकेडमिक अकाउंट रिकॉर्ड) को अनिवार्य किया था। इसे लेकर विद्यार्थियों के आवेदन आ रहे थे। उनके पास दस्तावेज नहीं पूरे हो रहे थे। इस कारण मंडल ने इसकी अनिवार्यता को समाप्त कर दिया है। अब मंडल ने शैक्षणिक सत्र 2025-26 में बोर्ड परीक्षा के फॉर्म भरने के लिए खत्म किया है। अगले सत्र से अनिवार्य की जाएगी अपार आईडी अगले सत्र 2026-27 में बोर्ड परीक्षाओं में अपार आईडी अनिवार्य की जाएगी। मंडल द्वारा जारी आदेश के अनुसार पिछले निर्देशों में नौवीं से 12वीं तक के विद्यार्थियों के लिए ऑनलाइन आवेदन पत्र भरते समय अपार आईडी का उल्लेख जरूरी किया गया था। स्कूलों और विद्यार्थियों को इसे बनाने में समस्या आ रही हैं। प्रदेश में मप्र बोर्ड 10वीं व 12वीं परीक्षा में 17 लाख से अधिक विद्यार्थी शामिल होते हैं। इनमें से लाखों विद्यार्थी परीक्षा फॉर्म भरने से वंचित रह सकते हैं। विद्यार्थी हित को देखते हुए मप्र बोर्ड ने अपार आईडी की अनिवार्यता को इस साल खत्म करते हुए वैकल्पिक कर दिया है।   अधूरे दस्तावेजों से विद्यार्थियों को हो रही है परेशानी अपार आईडी बनवाने में विद्यार्थियों को परेशानी आ रही है। कई विद्यार्थियों के दस्तावेज आधे-अधूरे या गलत जमा किए गए हैं। इससे दस्तावेज सत्यापन में समस्या आ रही है। आधार कार्ड और समग्र पोर्टल के रिकॉर्ड स्कूल के दस्तावेजों से मेल नहीं खा रहे हैं, इसलिए अपार आईडी तैयार नहीं हो पा रही है। इसके चलते स्कूल में 15 से 20 प्रतिशत विद्यार्थियों की आईडी ही तैयार हो पाई है। इससे अपार आईडी के बिना दोनों परीक्षाओं की नामांकन प्रक्रिया पूरी नहीं हो पा रही है। सामान्य शुल्क के साथ 15 सितंबर तक आवेदन कर सकेंगे 10वीं व 12वीं बोर्ड परीक्षा के लिए आवेदन 15 सितंबर तक सामान्य शुल्क 1200 रुपये जमा कर सकते हैं। 16 सितंबर से 25 अक्टूबर तक सामान्य शुल्क 1200 रुपये और विलंब शुल्क 100 रुपये जमा कर आवेदन कर सकते हैं। वहीं 26 अक्टूबर से 10 नवंबर तक दो हजार रुपये विलंब शुल्क के साथ और 11 नवंबर से 25 नवंबर तक विलंबर शुल्क पांच हजार और 26 नवंबर से 10 दिसंबर तक 10 हजार रुपये के साथ आवेदन कर सकते हैं।

पटना में दर्दनाक हादसा: ऑटो और हाइवा की टक्कर, 8 की मौत, 5 घायल

पटना पटना सिटी अनुमंडल के शाहजहांपुर थाना क्षेत्र के सिगरियामा के पास रविवार को बड़ा सड़क हादसा हो गया. यहां एक ऑटो और हाइवा ट्रक की आमने-सामने टक्कर में 8 लोगों की मौत हो गई, जिनमें 7 महिलाएं और एक पुरुष शामिल हैं. ग्रामीण एसपी ने बताया कि हादसे में 5 लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं, जिन्हें इलाज के लिए अस्पताल भेजा गया है. सभी लोग ऑटो से गंगा स्नान करने फतुहा जा रहे थे, तभी यह हादसा हो गया. पुलिस ने मौके पर पहुंचकर स्थिति को संभाला और घायलों को तुरंत अस्पताल पहुंचाया. मरने वालों की पहचान की जा रही है. दुर्घटनाग्रस्त गाड़ी को भी जब्त कर लिया गया है, जबकि ट्रक लेकर ड्राइवर भाग निकला। घटना पटना सिटी की है। दनियावां थाने की पुलिस ने मौके पर पहुंचकर छानबीन की। टक्कर इतनी जोरदार थी कि ऑटो के परखच्चे उड़ गए। दुर्घटना के शिकार लोग नालंदा जिले के रहने वाले बताए जाए रहे हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक हादसे में मरने वालों में 7 महिलाएं शामिल हैं। शाहजहांपुर के दनियावां हिलसा स्टेट हाइवे 4 पर सिगरियावा स्टेशन के पास ऑटो की ट्रक से टक्कर हो गई। सभी घायलों को इलाज के लिए पटना के पीएमसीएच भेजा गया। ये लोग नालंदा के रेरा मलामा गांव के निवासी हैं। एक ऑटो पर सवार होकर पटना आए हुए थे। जानकारी के मुताबिक उन्हें गंगा स्नान करना था और इसके लिए वे फतुहा जा रहे थे। हादसे के बाद घटनास्थल पर कोहराम मच गया। पुलिस ने शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा है। हादसे की जांच की जा रही है। घटना के बाद ट्रक लेकर चालक फरार हो गया। पुलिस सीटीटीवी की मदद से पहचान और तलाश कर रही है। टक्कर की आवाज सुनकर आसपास के लोग घटना स्थल पर जुटे और घायलों की मदद की। बताया जा रहा है कि सात लोगों की मौत मौके पर ही हो गयी जबकि एक घायल ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। मृतकों की संख्या बढ़ सकती है।

रक्षा और एयरोस्पेस में मध्यप्रदेश की अगुवाई, मेक इन इंडिया को मिलेगा नया आयाम

भोपाल  मध्यप्रदेश रक्षा और एयरोस्पेस मैन्युफैक्चरिंग के क्षेत्र में आत्मनिर्भर भारत के विजन को साकार करने के लिए नई पहचान बना रहा है। अनुकूल औद्योगिक माहौल, मजबूत बुनियादी ढांचा और अग्रणी नीतियों के बल पर राज्य रक्षा उत्पादन और तकनीकी नवाचार का नया केंद्र बनता जा रहा है। इसी उद्देश्य से रक्षा उद्योग को बढ़ावा देने और नए अवसरों पर चर्चा के लिए रक्षा इंडस्ट्री इंटरेक्शन प्रोग्राम का आयोजन किया गया। रक्षा उत्पादन विभाग, भारत सरकार की संयुक्त सचिव डॉ. गरिमा भगत ने कहा कि मध्यप्रदेश में रक्षा और एयरोस्पेस निर्माण का हब बनने की अपार संभावनाएं हैं। हमारा प्रयास है कि एमएसएमई और स्टार्टअप को मजबूत सहयोग देकर उन्हें राष्ट्रीय रक्षा आपूर्ति श्रृंखला में महत्वपूर्ण भागीदार बनाया जाए। उद्योग, अकादमिक संस्थानों और अनुसंधान संगठनों के बीच निरंतर सहयोग ही इस क्षेत्र में नवाचार को गति देगा और आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को आगे बढ़ाएगा। संयुक्त सचिव डॉ. भगत ने कहा कि ऐसे कार्यक्रम एमएसएमई को रक्षा पीएसयू और बड़े प्राइवेट सेक्टर से सीधे जोड़ते हैं जिससे टेक्नोलॉजी ट्रांसफर, जॉइंट वेंचर और महत्वपूर्ण प्रणालियों के सह-विकास के अवसर बढ़ते हैं। उन्होंने बताया कि एसआरआईजन पोर्टल पर अब तक 39 हजार से अधिक प्रोडक्ट स्वदेशीकरण के लिए सूचीबद्ध हैं, जो निवेशकों और स्टार्टअप के लिए बड़े अवसर पैदा करते हैं। कार्यक्रम के दौरान जबलपुर के रक्षा उद्योग के मजबूत ईकोसिस्टम और वेंडर बेस पर विशेष चर्चा हुई। डॉ. गरिमा भगत ने बताया कि जबलपुर में 300 करोड़ रु. की लागत से एक मैन्युफैक्चरिंग, रिपेयर एंड ओवरहाल (एमआरओ) सुविधा स्थापित की जा रही है, जिससे स्थानीय उद्योगों के लिए बड़े अवसर तैयार होंगे। औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन प्रमुख सचिव राघवेंद्र सिंह ने कहा कि मध्यप्रदेश अपनी भौगोलिक स्थिति और अनुकूल औद्योगिक वातावरण के कारण रक्षा निर्माण में निवेश के लिए देश का सबसे स्वाभाविक और सर्वोत्तम स्थान है। राज्य में ऑटो क्लस्टर, ड्रोन टेक्नोलॉजी, तकनीकी वस्त्र और इलेक्ट्रॉनिक्स सैक्टर रक्षा क्षेत्र की जरूरतों को पूरा करने के लिए तेजी से विकसित हो रहे हैं। राज्य की एयरोस्पेस एंड डिफेंस पॉलिसी 2025 के अंतर्गत भूमि रियायती दरों पर उपलब्ध कराई जा रही है, साथ ही पूंजीगत निवेश पर 40 प्रतिशत तक की सब्सिडी और आरएंडडी, टेस्टिंग जैसी सुविधाओं पर आकर्षक प्रोत्साहन दिए जा रहे हैं। मध्यप्रदेश अपनी प्रगतिशील नीतियों, सुदृढ़ औद्योगिक ढांचे और भारत सरकार के साथ मजबूत साझेदारी के माध्यम से रक्षा उत्पादन और नवाचार का अग्रणी केंद्र बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। आयुक्त एमएसएमई सुप्रीति मैथिल ने भी एमएसएमई में डिफेंस सैक्टर के संबंध में जानकारी साझा की। कार्यक्रम में 100 से अधिक प्रतिभागियों ने भाग लिया, जिनमें रक्षा पीएसयू, निजी क्षेत्र की अग्रणी कंपनियां, एमएसएमई, स्टार्टअप, शिक्षाविद और शोध संस्थान शामिल थे। प्रतिभागियों में अदाणी डिफेंस, बीईएल, हिंदुस्तान शिपयार्ड, गन कैरिज फैक्ट्री, ऑर्डनेंस फैक्ट्रीज, फोर्स मोटर्स, एचईजी, जेबीएम, विनायक इंजीनियरिंग, सीआईपीईटी भोपाल, आईआईएसईआर भोपाल और सीएसआईआर-एएमपीआरआई जैसी अग्रणी इकाइयां शामिल रहीं। संवाद सत्र में उद्योग प्रतिनिधियों ने वाहनों, पुर्जों, प्रोटेक्टिव गियर, टेलीकॉम सिस्टम, एम्युनिशन और एडवांस मटेरियल्स के क्षेत्र में सहयोग के अवसरों पर बातचीत की।  

टोल प्लाजा पर नई राहत: इलेक्ट्रिक वाहन अब बिना टोल भुगतान के कर सकेंगे सफर

नई दिल्ली मुंबई के अटल सेतु पर अब इलेक्ट्रिक गाड़ियों को टोल टैक्स नहीं देना होगा। राज्य सरकार ने शुक्रवार को यह जानकारी दी। अटल सेतु को पहले मुंबई ट्रांस हार्बर लिंक या MTHL कहा जाता था और यह देश का सबसे लंबा समुद्री-पुल है। किन गाड़ियों को मिलेगी छूट शहरी विकास विभाग ने गुरुवार को नोटिफिकेशन जारी कर बताया कि यह छूट इलेक्ट्रिक चार-पहिया गाड़ियों और इलेक्ट्रिक बसों पर लागू होगी। इसमें राज्य परिवहन की बसों के साथ-साथ निजी ऑपरेटरों की इलेक्ट्रिक बसें भी शामिल हैं। पुराने नियम में बदलाव महाराष्ट्र मोटर व्हीकल टैक्स एक्ट, 1958 के तहत यह फैसला लिया गया है। इससे पहले 31 जनवरी 2024 को जारी नोटिफिकेशन में अटल सेतु पर चलने वाले सभी तरह के वाहनों पर टोल लगाने का नियम बना था। लेकिन अब उसमें आंशिक बदलाव करते हुए इलेक्ट्रिक गाड़ियों को टोल से राहत दी गई है। मई में हुआ था फैसला, अब लागू दरअसल, इस साल मई में ही राज्य के गृह विभाग ने सार्वजनिक हित में इलेक्ट्रिक कार और बसों को टोल छूट देने का निर्णय लिया था। अब गुरुवार को जारी आदेश के बाद यह नियम शिवाजी नगर और गावन टोल प्लाजा पर लागू कर दिया गया है। यातायात के लिए अहम कड़ी अटल सेतु का उद्घाटन जनवरी 2024 में हुआ था। यह पुल मुंबई के दक्षिणी हिस्से सेवरी को नवी मुंबई के न्हावा शेवा से जोड़ता है। 21.8 किलोमीटर लंबा यह सी-ब्रिज अब यात्री और मालवाहक ट्रैफिक के लिए बेहद अहम कड़ी बन चुका है।

इंदौर में मुख्यमंत्री को मिलेगी फिल्म स्टार्स जैसी सुविधा, मोहन यादव की नई रहन-सहन व्यवस्था

इंदौर   मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव अब फिल्म स्टार्स की तरह वैनिटी वैन में नजर आएंगे. दरअसल, क्लीन और ग्रीन शहर इंदौर में फिल्म स्टार्स की तरह सीएम के लिए वैनिटी वैन फैसिलिटी उपलब्ध होगी. दरअसल, इंदौर नगर निगम ने मुख्यमंत्री के कार्यक्रमों के दौरान व्यक्तिगत चर्चा, आराम और प्रसाधन जैसी जरूरत को ध्यान में रखते हुए एक अत्याधुनिक वैनिटी वैन बनाई है. मध्य प्रदेश के इंदौर में मुख्यमंत्री के कार्यक्रमों के दौरान हर समय ये वैनिटी वैन उपलब्ध रहेगी. मोहन यादव का चलता फिरता घर इंदौर में नगर निगम द्वारा तैयार किया गया यह वीआईपी कक्ष किसी फाइव स्टार होटल के कमरे की तरह नजर आता है. इसे खास तौर पर मुख्यमंत्री मोहन यादव के कार्यक्रमों के लिए तैयार किया गया है, जिसमें वे कार्यक्रमों के दौरान बिना कहीं जाए आराम करने से लेकर प्रसाधन जा सकें. इस वैनिटी वैन में मीटिंग रूम भी तैयार किया गया है, जहां सीएम लोगों से चर्चा कर सकते हैं. प्रोटोकॉल ध्यान रखकर तैयार की गई लग्जरी वैनिटी वैन इंदौर नगर निगम द्वारा तैयार की गई ये वैनिटी वैन सर्वसुविधा युक्त, एयर कंडीशन्ड, लग्जरी और ईको फ्रेंडली है. इसमें लग्जरी फर्नीचर, बाथरूम के अलावा अन्य एमेनिटीज मौजूद हैं. वैनिटी वैन को लेकर इंदौर के महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने बताया, '' प्रदेश के किसी नगर निगम में मुख्यमंत्री के लिए तैयार हुई यह पहले वैनिटी वैन है. प्रोटोकॉल के तहत हर बार मुख्यमंत्री के लिए जो टेंट रूम तैयार किया जाता है, उस पर एक बार का खर्च 5 लाख से भी ज्यादा आता है. ऐसी स्थिति में नगर निगम वर्कशॉप के प्रभारी मनीष पांडे को ख्याल आया कि हर बार मुख्यमंत्री के दौरे के दौरान टेंट रूम बनाने से बेहतर है कि तमाम सुविधाओं के साथ एक वैनिटी वैन बना दी जाए. इस वैन को बनाने में 5 लाख रु खर्च आया है, लेकिन अब ये सीएम के हर दौरे में उपलब्ध रहेगी.'' इस वैनिटी वैन को मुख्यमंत्री के प्रोटोकॉल के तहत तैयार कराया गया है और इसे कहीं भी ले जाया जा सकता है. नगर निगम वर्कशॉप के प्रभारी मनीष पांडे के मुताबिक इंदौर के राजवाड़ा में कैबिनेट बैठक के बाद हाल ही में मुख्यमंत्री के कार्यक्रम में इसी वैनिटी वैन का उपयोग किया गया, जिसे आगे भी मुख्यमंत्री की जरूरत के लिए उपयोग में लाया जाएगा. फिल्म स्टार रखते हैं वैनिटी वैन दरअसल, वैनिटी वैन रखने का ट्रेंड फिल्म स्टार्स का है, जो अपनी शूटिंग साइट पर वैनिटी वैन में ही रहने, सजने संवरने और आराम के लिए इसका इस्तेमाल करते हैं. इसी कॉन्सेप्ट पर आधारित यह वैनिटी वैन अब मुख्यमंत्री को भी फिल्म स्टार्स की तरह आराम और सुविधाएं देगी. बता दें कि इस वैनिटी वैन को महज 9 दिन में तैयार किया गया था और इसे सबसे पहले इंदौर में हुई कैबिनेट बैठक के दौरान इस्तेमाल किया जा चुका है.