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MP में नेताओं के लगातार दौरे, राहुल गांधी से पहले मोहन भागवत करेंगे Gen-Z से संवाद?

भोपाल अगले तीन-चार दिनों तक पूरे देश की निगाहें मध्यप्रदेश पर रहने वाली हैं. दरअसल, 17 से 19 सितंबर तक संघ प्रमुख मोहन भागवत, बीजेपी अध्यक्ष नितिन नबीन, नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी मध्य प्रदेश दौरे पर होंगे. इसके साथ ही संघ महासचिव दत्तात्रेय होसबोले भी मध्यप्रदेश दौरे पर आ रहे हैं. निगाहें आज उज्जैन में बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन और संघ प्रमुख मोहन भागवत की मुलाकात पर लगी हैं. मोहन भागवत गुरुवार दोपहर तक उज्जैन पहुंचेंगे, जहां उनकी बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन के साथ संगठनात्मक विषयों पर चर्चा हो सकती है. दोनों की इस मुलाकात को मध्य प्रदेश की सियासत से भी जोड़कर देखा जा रहा है. वहीं, आज पीएम मोदी के जन्मदिन के मौके पर मालवा से निकलने वाले सियासी संदेश पर पूरे देश की नजर होगी।  नबीन का पहला मध्यप्रदेश दौरा, क्या होगा भागवत संवाद? मध्यप्रदेश का मालवा यूं भी बीजेपी का गढ़ रहा है लेकिन पीएम मोदी के जन्मदिन के साथ अगले कुछ दिनों तक मालवा देश के केन्द्र में रहने वाला है. बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन के अध्यक्ष बनने के बाद उनके पहले मध्यप्रदेश दौरे की शुरुआत आज इंदौर से हो रही है. शाम को वे उज्जैन में रामघाट पर पीएम मोदी के जन्मदिन पर आयोजित कार्यक्रम में भी शामिल होंगे. संघ प्रमुख 18 सितम्बर से होने जा रही धर्म संसद को संबोधित करने आज दोपहर तक उज्जैन पहुंच रहे हैं. इस लिहाज से इन दोनों ही नेताओं की मुलाकात की पूरी संभावना है. माना जा रहा है कि ये मुलाकात बीजेपी के संगठनात्मक विषयों को लेकर नई दिशा तय कर सकती है।  राजनीतिक विश्लेषक प्रकाश भटनागर कहते हैं, '' इस तरह की मुलाकात के अमूमन कार्य्रक्रम जारी नहीं होते हैं. लेकिन स्वभाविक ही है कि जब संघ प्रमुख मोहन भागवत उज्जैन में हैं, तो नितिन नबीन उनसे मुलाकात करेंगे. लेकिन ये कोई एजेंडा मीटिंग होगी ये भी पूरी तरह से नहीं कहा जा सकता. चूंकि संघ प्रमुख सें संवाद एक दिशा तो देता ही है, उस लिहाज से इस मुलाकात को देखा जा सकता है  राहुल से पहले नबीन और भागवत का दौरा उधर कांग्रेस राहुल गांधी के इंदौर में होने जा रहे छात्रों की गूंज कार्यक्रम के ठीक पहले नितिन नबीन के मध्यप्रदेश आगमन और उज्जैन में होने जा रही धर्म संसद जैसे आयोजन के कई मायने निकाले जा रहे हैं. वहीं, कांग्रेस इसे बीजेपी की घबराहट बता रही है. कांग्रेस प्रवक्ता संगीता शर्मा कहती हैं, '' जैसे ही हमारे नेता राहुल गांधी जी का कार्यक्रम तय हुआ, उसके ठीक बाद नितिन नबीन का दौरा कार्यक्रम तय किया गया. बीजेपी ये भी तय नहीं कर पा रही थी कि वे आकर करेंगे क्या. ये सिर्फ राहुल गंधी जी की बढ़ती लोकप्रियता से हुई घबराहट का नतीजा है।  मालवा फिर बीजेपी की राजनीति का सेंटर पाइंट बना मालवा बीजेपी का मजबूत गढ़ माना जाता है, इंदौर में नगर निगम से लेकर सारे विधायक और सांसदों तक यहां बीजेपी का कब्जा है. इंदौर में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में आयोजित स्वामित्व अधिकार अभिलेख निष्पादन एवं पंजीयन योजना का शुभारंभ करेंगे. उधर उज्जैन में राष्ट्रीय स्वयंस सेवक संघ के सर संघचालक डॉ. मोहन भागवत धर्म संसद में हिस्सा लेने पहुंच रहे हैं. धर्म संसद 18 सितम्बर से है। 

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय बोले- पीएम मोदी का सेवा और समर्पण देशवासियों के लिए प्रेरणा

प्रधानमंत्री मोदी का राष्ट्र के प्रति समर्पण और राष्ट्र निर्माण का संकल्प हम सभी के लिए प्रेरणास्रोत : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय प्रदेशव्यापी ‘सेवा संकल्प अभियान’ का भव्य शुभारंभ, ‘आशीर्वाद के दीयों’ से जगमगा उठी राजधानी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिवस पर रायपुरवासियों ने जलाए 25 लाख से अधिक ‘आशीर्वाद के दीये’ जनभागीदारी के इस ऐतिहासिक आयोजन ने बनाया कीर्तिमान, गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज हुआ ‘आशीर्वाद का दीया’ मुख्यमंत्री साय ने स्वयं दीप प्रज्वलित कर बढ़ाया जनभागीदारी का उत्साह, शहर के विभिन्न चौक-चौराहों पर महापुरुषों की प्रतिमाओं पर किया माल्यार्पण मुख्यमंत्री ने ‘प्रोजेक्ट अक्षरा’ का किया शुभारंभ, स्क्रीन टाइम कम कर पुस्तकों से जुड़ने के लिए किया जाएगा प्रेरित रायपुर  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिवस पर आज राजधानी रायपुर लाखों दीपों की रोशनी से जगमगा उठी। प्रदेशव्यापी ‘सेवा संकल्प अभियान’ के शुभारंभ अवसर पर आयोजित ‘आशीर्वाद का दीया’ कार्यक्रम में समाज के सभी वर्गों की उत्साहपूर्ण भागीदारी देखने को मिली। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने स्वयं दीप प्रज्वलित कर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वस्थ, सुदीर्घ और यशस्वी जीवन की कामना की। राजधानी में 25 लाख से अधिक ‘आशीर्वाद के दीये’ प्रज्वलित कर रायपुरवासियों ने प्रधानमंत्री मोदी के प्रति अपना स्नेह और शुभकामनाएं व्यक्त कीं। जनभागीदारी के इस आयोजन को गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में भी स्थान मिला। मुख्यमंत्री साय शाम को अपने निवास कार्यालय से दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम के लिए रवाना हुए। छत्तीसगढ़ क्लब चौक से भगत सिंह चौक, घड़ी चौक, शारदा चौक, गौरव पथ और शंकर नगर होते हुए तेलीबांधा तालाब स्थित मुख्य समारोह स्थल तक पूरे मार्ग में ‘आशीर्वाद के दीयों’ की रोशनी दिखाई दी। सड़क के दोनों ओर बड़ी संख्या में नागरिकों ने दीप जलाए थे। मुख्यमंत्री साय ने विभिन्न स्थानों पर रुककर नागरिकों का उत्साहवर्धन किया और स्वयं भी उनके साथ दीप प्रज्वलित किए। मुख्यमंत्री साय ने इस दौरान घड़ी चौक स्थित भारत रत्न बाबा साहेब डॉ. भीमराव अम्बेडकर, शारदा चौक स्थित डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी तथा भगत सिंह चौक स्थित अमर शहीद भगत सिंह की प्रतिमाओं पर माल्यार्पण कर उनका स्मरण किया। मरीन ड्राइव में आयोजित मुख्य समारोह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री साय ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को उनके जन्मदिवस पर समस्त छत्तीसगढ़वासियों की ओर से हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि राष्ट्रसेवा को अपना संकल्प और जनसेवा को अपना ध्येय मानकर प्रधानमंत्री मोदी ने भारत की प्रतिष्ठा को विश्व पटल पर नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया है। मां भारती की सेवा के प्रति उनका समर्पण, दृढ़ संकल्प और राष्ट्र निर्माण के लिए निरंतर किया जा रहा परिश्रम हम सभी के लिए प्रेरणास्रोत है। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी की सार्वजनिक सेवा के 25 वर्षों की यात्रा सेवा, सुशासन, गरीब कल्याण और राष्ट्र निर्माण को समर्पित रही है। इस अवधि में देश ने विकास और जनकल्याण के अनेक क्षेत्रों में व्यापक परिवर्तन देखा है। गरीबों के पक्के आवास से लेकर स्वच्छ पेयजल, बिजली, स्वास्थ्य सुविधाओं, स्वच्छता, वित्तीय समावेशन और बुनियादी अधोसंरचना तक जनकल्याणकारी योजनाओं ने करोड़ों लोगों के जीवन में बदलाव लाने का कार्य किया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी 140 करोड़ देशवासियों को अपना परिवार मानकर ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास’ के मूलमंत्र के साथ निरंतर देश की सेवा कर रहे हैं। उनकी नीतियों के केंद्र में गरीब, किसान, युवा, महिलाएं, श्रमिक, वंचित और जनजातीय समाज सहित प्रत्येक वर्ग का कल्याण है। विकसित भारत के निर्माण का उनका संकल्प आज देशवासियों के सामूहिक संकल्प में परिवर्तित हो रहा है। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि आज का दिन रायपुर और पूरे छत्तीसगढ़ के लिए विशेष है। राजधानी में 25 लाख से अधिक ‘आशीर्वाद के दीये’ जलाकर नागरिकों ने प्रधानमंत्री मोदी के प्रति अपना स्नेह और शुभकामनाएं अभिव्यक्त की हैं। इस आयोजन में सामाजिक, सांस्कृतिक और विभिन्न जनसंगठनों सहित समाज के सभी वर्गों ने जिस उत्साह के साथ सहभागिता की, वह जनभागीदारी की शक्ति का सुंदर उदाहरण है। मुख्यमंत्री ने कहा कि ‘आशीर्वाद का दीया’ केवल एक दीप प्रज्वलित करने का आयोजन नहीं, बल्कि सेवा और जनभागीदारी के संकल्प से जुड़ने का अवसर है। दीप की यह ज्योति हमें समाज के अंतिम व्यक्ति के जीवन में आशा और खुशहाली का प्रकाश पहुंचाने की प्रेरणा देती है। इसी भावना के साथ 17 सितंबर से 17 अक्टूबर तक प्रदेशभर में ‘सेवा संकल्प अभियान’ के अंतर्गत सेवा, स्वच्छता, स्वास्थ्य, पोषण, पर्यावरण संरक्षण और जनकल्याण से जुड़े विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। कार्यक्रम के दौरान ‘आशीर्वाद का दीया’ आयोजन को गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में शामिल किए जाने की घोषणा की गई। मुख्यमंत्री साय ने इस उपलब्धि पर रायपुरवासियों, आयोजन से जुड़े सामाजिक संगठनों, जनप्रतिनिधियों, स्वयंसेवकों तथा जिला प्रशासन की पूरी टीम को बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि इतनी व्यापक जनभागीदारी ने इस आयोजन को यादगार बना दिया है। इस अवसर पर मुख्यमंत्री साय ने रायपुर जिला प्रशासन की अभिनव पहल ‘प्रोजेक्ट अक्षरा’ का भी शुभारंभ किया। इस पहल के माध्यम से विशेष रूप से बच्चों और युवाओं को स्क्रीन टाइम कम करने तथा पुस्तकों और अध्ययन की संस्कृति से अधिक जुड़ने के लिए प्रेरित किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि तकनीक आज हमारे जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा है, लेकिन पुस्तकों से जुड़ाव हमारी कल्पनाशक्ति, विचार क्षमता और व्यक्तित्व को समृद्ध करता है। नई पीढ़ी में पढ़ने की आदत विकसित करने की दिशा में ‘प्रोजेक्ट अक्षरा’ एक सार्थक पहल साबित होगी। कार्यक्रम में नॉन के अध्यक्ष संजय श्रीवास्तव, अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष अमरजीत छाबड़ा, वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष डॉ. सलीम राज, जिला पंचायत अध्यक्ष नवीन अग्रवाल, महिला आयोग की अध्यक्ष डॉ. ममता साहू सहित अनेक जनप्रतिनिधि, विभिन्न सामाजिक एवं सांस्कृतिक संगठनों के पदाधिकारी, गणमान्य नागरिक तथा बड़ी संख्या में आमजन उपस्थित थे।

महाकाल की नगरी उज्जैन के नाम नया विश्व रिकॉर्ड, 33,27,125 दीपों से जगमगाया शहर

उज्जैन  उज्जैन: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिवस पर सेवा संकल्प अभियान के तहत 'आशीर्वाद का दीया' नाम से उज्जैन में क्षिप्रा नदी के किनारे दीप जलाने का कार्यक्रम रखा गया था. इस दौरान उज्जैन ने 33,27,125 दीपक प्रज्वलित कर वर्ल्ड रिकॉर्ड बना दिया है. इससे पहले ये रिकॉर्ड उत्तर प्रदेश में अयोध्या के नाम था जहां साल 2025 में 26,17,215 दीप प्रज्वलित किए गए थे।  उज्जैन नगर निगम ने अपने आधिकारिक मीडिया ग्रुप में जानकारी दी है कि "31,15,630 दीपक क्षिप्रा नदी के किनारे प्रज्वलित किए गए. पूरे उज्जैन शहर में अलग अलग जगह मिलाकर टोटल 33,27,125 'आशीर्वाद के दिए' प्रज्वलित किए गए." हालांकि, इस रिकॉर्ड की घोषणा मंच से भी की गई है, जबकि वर्ल्ड रिकॉर्ड का सर्टिफिकेट अभी मिलना है. वहीं, उज्जैन नगर निगम कमिश्नर अभिलाष मिश्रा और स्मार्ट सिटी सीईओ नेहा जैन ने वर्ल्ड रिकॉर्ड की पुष्टि कर दी है।  कब से शुरु हुआ था उज्जैन में दीपउत्सव ? उज्जैन में दीप उत्सव की शुरुआत 2022 से तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के समय शिव ज्योति अर्पणम के नाम से महाशिवरात्रि पर्व के अवसर पर हुई थी. साल 2022 में उज्जैन ने साल 2021 के अयोध्या के 9,41,551 दीपों का रिकॉर्ड तोड़ते हुए 11,71,078 दीप प्रज्वलित कर गिनीज बुक ऑफ़ वर्ल्ड रिकॉर्ड में अपना नाम दर्ज करा लिया था।  कब-कब उज्जैन अयोध्या ने तोड़ा एक दूसरे का रिकॉर्ड इसके बाद फिर उत्तर प्रदेश में अयोध्या ने 2022 में ही 15,76,955 दीप जलाकर रिकॉर्ड तोड़ा. वहीं, उज्जैन ने साल 2023 में 18,82,229 दीप जलाकर अयोध्या का साल 2022 का रिकॉर्ड तोड़ दिया. इसी साल 2023 में अयोध्या ने 22,23,000 दीप जलाए जिसके बाद फिर उज्जैन का रिकॉर्ड टूट गया. 2024 में लोकसभा चुनाव की आचार संहिता के कारण उज्जैन में 5,51,000 दीप ही जलाए गये थे. अयोध्या ने 2024 में 25,12000 दीप जलाए, जबकि साल 2025 में 26,17,215 दीप प्रज्वलित किए. उज्जैन के रामघाट पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने ‘आशीर्वाद का दीया’ प्रज्ज्वलित किया. उनके साथ राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन, प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल और प्रदेश प्रभारी महेंद्र सिंह भी मौजूद रहे. इसके बाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और अन्य अतिथियों ने शिप्रा आरती में हिस्सा लिया. मां शिप्रा की आराधना कर प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि की कामना की गई. आयोजन से जुड़े लोगों के मुताबिक, दीप प्रज्ज्वलन को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सार्वजनिक जीवन के 25 वर्षों के दौरान राष्ट्र निर्माण और राष्ट्र सेवा से जोड़कर देखा गया. इसी भाव के साथ उज्जैन में ‘आशीर्वाद का दीया’ कार्यक्रम आयोजित किया गया।  उज्जैन में शिप्रा के विभिन्न घाटों और महाकाल महालोक में कुल 33 लाख 27 हजार दीये प्रज्ज्वलित किए गए. इस सामूहिक दीप प्रज्ज्वलन को आयोजकों ने विश्व रिकॉर्ड बताया है. इससे पहले कार्यक्रम के लिए 25 लाख से ज्यादा दीये जलाने की तैयारी की गई थी, लेकिन अंतिम आयोजन में यह संख्या 33.27 लाख तक पहुंची. दीप प्रज्ज्वलन के दौरान बड़ी संख्या में वॉलंटियर्स की भूमिका रही. घाटों पर पहले से दीयों को व्यवस्थित किया गया था. सायरन बजने के बाद सभी ने एक साथ दीप जलाना शुरू किया, जिससे कुछ ही समय में पूरा आयोजन क्षेत्र रोशनी से भर गया।  यह दीपोत्सव सिर्फ उज्जैन तक सीमित नहीं रहा. आयोजन के तहत मध्य प्रदेश के सभी जिलों और 845 आइकॉनिक प्लेस पर भी एक साथ दीये प्रज्ज्वलित किए गए. आयोजकों के अनुसार, पूरे प्रदेश में कुल 3 करोड़ 55 लाख दीये जलाए गए. इस तरह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिवस पर आयोजित ‘आशीर्वाद का दीया’ कार्यक्रम में प्रदेशभर के अलग-अलग स्थानों को दीपों से सजाया गया. उज्जैन इसका मुख्य केंद्र रहा, जहां शिप्रा तट और महाकाल महालोक में एक साथ 33 लाख 27 हजार दीये जलाए गए।  घाटों से महाकाल महालोक तक रोशनी शाम होते ही उज्जैन के प्रमुख घाटों का दृश्य बदल गया. रामघाट, दत्त अखाड़ा, केदारेश्वर घाट, सुनहरी घाट और भूखी माता घाट पर दीयों की कतारें नजर आईं. दूसरी तरफ महाकाल महालोक भी दीपों की रोशनी से जगमगा उठा. हजारों श्रद्धालुओं और नागरिकों की मौजूदगी में हुए इस आयोजन में एक साथ दीप प्रज्ज्वलित करने का दृश्य लोगों के लिए खास आकर्षण रहा. 25 हजार से अधिक वॉलंटियर्स ने इस आयोजन में हिस्सा लिया. उज्जैन में हुए इस दीपोत्सव के साथ आयोजकों के अनुसार विश्व रिकॉर्ड बनाया गया. वहीं पूरे मध्य प्रदेश में 845 आइकॉनिक प्लेस समेत अलग-अलग स्थानों पर 3.55 करोड़ दीये प्रज्ज्वलित किए गए. इस तरह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिवस पर आयोजित ‘आशीर्वाद का दीया’ कार्यक्रम के जरिए प्रदेशभर में सामूहिक दीप प्रज्ज्वलन किया गया। 

प्रेरणा स्थल पर जले ‘आशीर्वाद के दीये’, CM योगी ने शुरू किया सेवा संकल्प अभियान

प्रेरणा स्थल पर जले आशीर्वाद के दीये, सीएम योगी ने शुरू किया सेवा संकल्प अभियान पीएम मोदी के 76वें जन्मदिवस पर पं. दीनदयाल, डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी और अटल जी की प्रतिमाओं पर दीप जलाकर की अभियान की शुरुआत पीएम के जन्मदिन पर प्रदेशभर में सेवा संकल्प अभियान, सीएम बोले- नए भारत की पहचान दुनिया में मजबूत हुई विश्वकर्मा जयंती पर बोले सीएम योगी- नए भारत के शिल्पी हैं प्रधानमंत्री मोदी, यूपी की 25 करोड़ जनता उनके साथ लखनऊ  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 76वें जन्मदिवस के उपलक्ष्य में गुरुवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लखनऊ स्थित प्रेरणा स्थल पर आशीर्वाद का दीया कार्यक्रम का शुभारंभ किया। सेवा संकल्प अभियान के तहत आयोजित कार्यक्रम में सीएम योगी ने पंडित दीन दयाल उपाध्याय, डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी, पूर्व प्रधानमंत्री एवं भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी की प्रतिमाओं पर दीप जलाकर अभियान की शुरुआत की। इस दौरान मुख्यमंत्री ने प्रेरणा स्थल पर मौजूद छात्रों से संवाद किया। उन्होंने मोबाइल से वीडियो बनाया और वहां मौजूद छात्रों को चॉकलेट भी दी।  करोड़ों दीप सकारात्मक भाव और ऊर्जा के साथ प्रज्ज्वलित हो रहे मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री को जन्मदिन की बधाई देते हुए उनके स्वस्थ एवं दीर्घायु जीवन की कामना की और विश्वकर्मा पूजन की भी प्रदेशवासियों को शुभकामनाएं दीं। इस दौरान कहा कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व और मार्गदर्शन में देश को विकसित भारत की संकल्पना की दिशा में आगे बढ़ने का अवसर मिल रहा है। पीएम के जन्मदिन पर देशभर में करोड़ों दीप सकारात्मक भाव और ऊर्जा के साथ प्रज्ज्वलित हो रहे हैं। राष्ट्र प्रेरणा स्थल समेत प्रदेश के विभिन्न महत्वपूर्ण स्थलों और लोक कल्याणकारी योजनाओं के लाभार्थियों के घरों में भी दीप जलाए जा रहे हैं। उन्होंने अभियान से जुड़े कर्मयोगी कार्यकर्ताओं, लाभार्थियों और नागरिकों का अभिनंदन किया। प्रदेश की 25 करोड़ जनता पीएम मोदी के साथ खड़ी सीएम योगी ने कहा कि भगवान विश्वकर्मा की पावन जयंती भी है। भगवान विश्वकर्मा को सृष्टि का शिल्पी बताते हुए उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को नए भारत का शिल्पी बताते हुए कहा कि उनके नेतृत्व में पिछले 12 वर्षों में देश ने अपनी नई पहचान बनाई है और नए भारत का दर्शन हो रहा है। हर क्षेत्र के व्यक्ति को इस बदलाव पर गौरव की अनुभूति हो सकती है। भारत आज नई पहचान, नए इंफ्रास्ट्रक्चर और आधुनिक तकनीक में नेतृत्व देने वाले देश के रूप में आगे बढ़ रहा है। उन्होंने पीएम को देश की विकास यात्रा का नेतृत्व करने वाला बताते हुए कहा कि आत्मनिर्भर और विकसित भारत की संकल्पना के साथ उत्तर प्रदेश की 25 करोड़ जनता उनके साथ खड़ी है। इस दौरान डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक, राज्यसभा सांसद बृजलाल, विधान परिषद सदस्य डॉ. लाल जी निर्मल, विधान परिषद सदस्य डॉ. अविनाश सिंह, विधायक डॉक्टर नीरज बोरा, महानगर अध्यक्ष आनंद द्विवेदी आदि मौजूद रहे।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिवस पर CM साय का खास अंदाज, निवास पर प्रज्ज्वलित किया ‘आशीर्वाद का दीया’

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिवस पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने अपने निवास पर जलाया ‘आशीर्वाद का दीया’ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वस्थ, सुदीर्घ और यशस्वी जीवन की कामना की मुख्यमंत्री ने कहा – सेवा और राष्ट्र निर्माण को समर्पित प्रधानमंत्री के 25 वर्षों की यात्रा हम सभी के लिए प्रेरणा रायपुर  मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिवस के अवसर पर अपने निवास पर ‘आशीर्वाद का दीया’ प्रज्वलित कर उनके स्वस्थ, सुदीर्घ और यशस्वी जीवन की मंगलकामना की। मुख्यमंत्री साय ने इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के राष्ट्रसेवा और जनकल्याण के प्रति समर्पण को स्मरण करते हुए अपनी शुभकामनाएं व्यक्त कीं। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने सार्वजनिक जीवन के 25 वर्ष राष्ट्र और जनसेवा को समर्पित किए हैं। गरीब कल्याण से लेकर सुशासन, अंत्योदय से लेकर आत्मनिर्भर भारत और विरासत के सम्मान से लेकर आधुनिक भारत के निर्माण तक उनकी यह यात्रा देशवासियों के लिए प्रेरणा का स्रोत है। मुख्यमंत्री ने कहा कि आज प्रधानमंत्री जी के जन्मदिवस पर छत्तीसगढ़ सहित देशभर में सेवा और जनभागीदारी का भाव दिखाई दे रहा है। ‘आशीर्वाद का दीया’ इसी आत्मीय भावना की अभिव्यक्ति है। यह छोटा-सा दीप प्रधानमंत्री जी के प्रति प्रदेशवासियों के स्नेह, विश्वास और शुभकामनाओं का प्रतीक है। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के मार्गदर्शन में छत्तीसगढ़ विकसित भारत के निर्माण में अपनी भूमिका पूरी प्रतिबद्धता के साथ निभा रहा है। हमारा संकल्प है कि विकास की रोशनी प्रदेश के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे और गांव, गरीब, किसान, महिला, युवा तथा जनजातीय समाज की आकांक्षाएं विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण की शक्ति बनें।

मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन कॉरिडोर पर तेजी से काम, तैयार हो रहे शानदार स्टेशन और सुरंगें

अहमदाबाद देश में पहली बुलेट ट्रेन (India's First Bullet Train) चलाने की तैयारी जोरों पर है. इसके लिए जो रेलवे स्टेशन तैयार किए जा रहे हैं उनपर काम रॉकेट की रफ्तार से चल रहा है. रेलवे मंत्रालय से लेकर रेल मंत्री तक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्विटर (अब एक्स) पर इससे जुड़े अपडेट शेयर करते रहते हैं. Ministry Of Railway ने वापी-सूरत सेक्शन में बनाए जा रहे बुलेट ट्रेन रेलवे स्टेशन से लेकर इस ट्रैक पर सुरंगों के निर्माण से जुड़ा एक वीडियो शेयर किया है, जो तेजी से वायरल (Railway Viral Video) हो रहा है।  रेलवे के Video में क्या खास?  मिनिस्ट्री ऑफ रेलवे की ओर से एक एक्स पोस्ट में वापी-सूरत सेक्शन पर बुलेट ट्रेन के ट्रैक और स्टेशन पर जारी काम का वीडियो शेयर किया है. इसमें साफ देखने को मिल रहा है कि कैसे इस हाई स्पीड रेल रूट में ट्रैक पर तेज रफ्तार से बुलेट ट्रेन को चलाने के लिए पहाड़ों को काटकर सुरंगें बनाने का काम किया जा रहा है, कैसे नदी के ऊपर ब्रिज ट्रैक बिछाया जा रहा है और इलेक्ट्रिफिकेशन का काम युद्धस्तर पर जारी है. इसके साथ ही बुलेट ट्रेन के मल्टी स्टोरी स्टेशन (Multi Story Bullet Train Station) की भी झलक रेलवे ने दिखाई है. इस वीडियो के कैप्शन में रेलवे ने लिखा, 'बुलेट ट्रेन का काम बहुत तेजी के साथ चल रहा है।  सूरत-वापी बुलेट ट्रेन सेक्शन कितना लंबा?  भारत की पहली बुलेट ट्रेन अगले साल संभावित 15 अगस्त से ट्रैक पर तेज रफ्तार से दौड़ती हुई नजर आएगी और इसके संकेत रेल मंत्री ने भी दिए हैं. ये देश की अपनी पहली Bullet Train होगी और ये पहली बार 508 किलोमीटर लंबे मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन कॉरिडोर पर शुरू की जाएगी. इसका 348 किलोमीटर का हिस्सा गुजरात में आता है और जिस वापी-सूरत सेक्शन का वीडियो रेलवे मिनिस्ट्री ने शेयर किया है, वो करीब 100 किलोमीटर का है।  बुलेट ट्रेन रूट पर 12 स्टॉपेज  अहमदाबाद-मुंबई बुलेट ट्रेन कॉरिडोर जहां 508 किलोमीटर लंबा है, तो वहीं इस सेक्शन में रेलवे की ओर से बुलेट ट्रेन के 12 स्टॉपेज तय किए गए हैं. पहला Bullet Train स्टेशन साबरमती रखा गया है, तो वहीं आखिरी मुंबई है. इनमें साबरमती-मुंबई (BKC) के अलावा ठाणे, विरार, बोइसर, वापी, बिलिमोरा, सूरत, भरूच, वडोदरा, आनंद, अहमदाबाद शामिल हैं।  इस स्पीड से चलेगी बुलेट ट्रेन बुलेट ट्रेन जब फुल स्पीड में होगी, तो 320 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से चलेगी, जबकि अहमदाबाद से मुंबई के बीच औसतन 300 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से बुलेट ट्रेन अगले साल से दौड़ेगी. बता दें, फिलहाल सबसे हाई स्पीड ट्रेनों के जरिये मुंबई से अहमदाबाद के बीच यात्रा करने में लगभग 6 घंटे का समय लगता है. बुलेट ट्रेन की शुरुआत के बाद यह दूरी महज 2 घंटे में पूरी की जा सकेगी. इससे न केवल यात्रियों के कीमती समय की बचत होगी, बल्कि दोनों राज्यों के बीच व्यापारिक गतिविधियां भी बढ़ने वाली हैं। 

CBSE में तीसरी भाषा को लेकर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी, अगले साल से लागू करने को कहा

नईदिल्ली  सुप्रीम कोर्ट ने CBSE की 3 भाषा नीति को अचानक लागू करने पर एक बार फिर सवाल उठाया है. कोर्ट ने कहा कि छठी क्लास के बच्चों के लिए तीसरी भाषा को अगले साल से लागू किया जाना चाहिए. इससे बच्चों को मानसिक रूप से तैयार होने का समय मिलेगा. CBSE ने विचार के लिए समय मांगा। सुप्रीम कोर्ट में  सुनवाई के दौरान कक्षा 9 के छात्रों को भी राहत देने की मांग उठी। इस पर भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा, “हर कोई बिना कुछ पढ़े मुफ्त में डिग्री चाहता है। यही संस्कृति हम बढ़ावा दे रहे हैं… कक्षा 9 एक परिपक्व कक्षा है।” याचिका में क्या मांग की गई है? याचिकाकर्ताओं का कहना है कि यह व्यवस्था छात्रों और स्कूलों पर अतिरिक्त बोझ डाल सकती है तथा कुछ राज्यों की भाषा नीतियों से भी टकरा सकती है। वहीं, सीबीएसई का कहना है कि नई शिक्षा नीति (NEP) 2020 के अनुरूप यह कदम भारतीय भाषाओं को बढ़ावा देने और बहुभाषी शिक्षा को मजबूत करने के लिए उठाया गया है। यह मामला सीबीएसई की तीन भाषा नीति से जुड़ा है, जिसके तहत कक्षा 9 के छात्रों के लिए तीन भाषाओं की पढ़ाई का प्रावधान किया गया है। मामले में कक्षा 6 के छात्रों के लिए भी राहत पर पहले अदालत ने सीबीएसई से अपने रुख पर दोबारा विचार करने को कहा था। छटी क्लास के बच्चों को मिले छूट: SC पीठ ने सालिसिटर जनरल (एसजी) तुषार मेहता से कहा, 'इस वर्ष कक्षा-छह पर विचार करें… यदि उन्हें कुछ समायोजन दिया जा सकता है।' एसजी मेहता ने अदालत से याचिकाओं की सुनवाई को टालने का अनुरोध किया क्योंकि अतिरिक्त सालिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी उपलब्ध नहीं थीं। हालांकि, उन्होंने आश्वासन दिया कि संबंधित अधिकारी पीठ के सुझाव पर विचार करेंगे। एक याचिकाकर्ता के वरिष्ठ अधिवक्ता ने कहा कि इस मामले में अधिक स्थगन के कारण देरी नहीं होनी चाहिए क्योंकि छात्रों को अंततः परीक्षा देनी है और इससे उनके माता-पिता में चिंता बढ़ रही है। सुप्रीम कोर्ट एक समूह की याचिकाओं की सुनवाई कर रहा था जो कक्षा-नौ के छात्रों के लिए तीन भाषाओं का अध्ययन अनिवार्य करने वाली सीबीएसई की नीति को चुनौती दे रही थीं, जिसमें दो भारतीय भाषाएं शामिल हैं, जो एक जुलाई से लागू होनी थीं। क्या है सीबीएसई की 3 भाषा नीति? 20 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट ने सीबीएसई नीति से उत्पन्न समस्याओं के समाधान की आवश्यकता पर यह कहते हुए जोर दिया कि बच्चों को किसी भी प्रकार के दबाव में नहीं आना चाहिए। पीठ ने यह भी नोट किया कि एक पहलू जो विचार करने की आवश्यकता है, वह यह है कि उपलब्ध भाषा विकल्पों के संबंध में पर्याप्त मानव संसाधन बुनियादी ढांचा कैसे बनाया जाए। उसने कहा, 'यदि आपने कक्षा-छह को प्रारंभिक बिंदु के रूप में चुना है, तो आप इस वर्ष इसके छात्रों को राहत देने पर विचार कर सकते हैं। आप इसे अगले वर्ष से लागू कर सकते हैं।' सीबीएसई द्वारा जारी एक परिपत्र के अनुसार, कक्षा नौ के छात्रों के लिए तीन भाषाओं का अध्ययन, जिसमें कम से कम दो भारतीय भाषाएं शामिल हैं, एक जुलाई से अनिवार्य कर दिया गया है। क्या है मामला?     सीबीएसई ने 2026-27 शैक्षणिक सत्र से कक्षा 9 के छात्रों के लिए तीन भाषाओं की पढ़ाई अनिवार्य की है। इनमें कम से कम दो भारतीय भाषाएं शामिल करना जरूरी है।     इस फैसले को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिकाएं दायर की गई हैं।     याचिकाकर्ताओं ने नीति लागू करने के तरीके और सीबीएसई के अधिकार को लेकर सवाल उठाए।     मामले में कोर्ट ने केंद्र, सीबीएसई और एनसीईआरटी से जवाब मांगा और छात्रों पर अतिरिक्त पढ़ाई के दबाव को लेकर भी चर्चा हुई है।     आज इस मामले पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई है।  

क्रिकेट के मैदान से संसद-विधानसभा तक पहुंचे दिग्गज, पंजाब में क्यों बढ़ा राजनीतिक रुझान?

जालंधर  पंजाब में खेल और राजनीति का रिश्ता आजादी के बाद से ही गहरा रहा है। राज्य ने ऐसे खिलाड़ी दिए हैं जिन्होंने खेल के बाद सार्वजनिक जीवन और राजनीति में भी पहचान बनाई। पिछले एक दशक में खिलाड़ियों की राजनीतिक भागीदारी में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। यह बदलाव पंजाब की सियासत को एक नया आयाम दे रहा है। खिलाड़ियों का राजनीति से जुड़ाव हमेशा सीधे चुनाव लड़ने तक सीमित नहीं रहा है। अनेक खिलाड़ी पहले पुलिस, प्रशासन या खेल विभाग में जिम्मेदारियां संभालते थे। यह पृष्ठभूमि बाद में उनके चुनावी राजनीति में प्रवेश का आधार बनी। आजादी के बाद के शुरुआती चुनावों में भी खेल पृष्ठभूमि वाले जनप्रतिनिधि सामने आए। हॉकी, फुटबॉल और कबड्डी जैसे खेलों से जुड़े लोग सार्वजनिक जीवन में सक्रिय रहे। यह सिलसिला अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों के सीधे चुनावी राजनीति में आने तक पहुंचा। परगट सिंह, सुरिंदर सिंह सोढ़ी, सज्जन सिंह चीमा, राजबीर कौर, नवजोत सिंह सिद्धू, हरभजन सिंह, करतार सिंह, गुरलाल सिंह घनौर और जस्सा पट्टी इसके प्रमुख उदाहरण हैं। ये खिलाड़ी अब विधानसभा, संसद और राजनीतिक संगठनों तक पहुंच रहे हैं। उनकी मौजूदगी अब केवल प्रतीकात्मक नहीं रह गई है। पंजाब की ग्रामीण खेल संस्कृति से निकले चेहरे भी विधानसभा तक पहुंच रहे हैं।  हॉकी और बास्केटबॉल के दिग्गज भारतीय हॉकी टीम के पूर्व कप्तान और पद्मश्री परगट सिंह ने लंबी राजनीतिक पारी खेली है। वह जालंधर छावनी से लगातार विधानसभा चुनाव जीतकर मंत्री भी रहे हैं। 2022 के विधानसभा चुनाव में जालंधर छावनी में परगट सिंह और सुरिंदर सिंह सोढ़ी के बीच टक्कर हुई। सुरिंदर सिंह सोढ़ी 1980 मॉस्को ओलंपिक की स्वर्ण पदक विजेता टीम के सदस्य थे। वह आम आदमी पार्टी के उम्मीदवार थे और पंजाब पुलिस में वरिष्ठ अधिकारी भी रहे। बास्केटबॉल खिलाड़ी सज्जन सिंह चीमा ने भी आम आदमी पार्टी से सुल्तानपुर लोधी से चुनाव लड़ा। राजबीर कौर, भारतीय महिला हॉकी की पूर्व कप्तान और ‘गोल्डन गर्ल’, भी आम आदमी पार्टी से जुड़ीं। क्रिकेट और कुश्ती के सितारे क्रिकेट में नवजोत सिंह सिद्धू का नाम सबसे चर्चित रहा है। वह अमृतसर से लोकसभा चुनाव जीतकर संसद पहुंचे और पंजाब सरकार में मंत्री भी रहे। भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व गेंदबाज हरभजन सिंह को 2022 में आम आदमी पार्टी ने राज्यसभा भेजा। पद्मश्री और अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित पहलवान करतार सिंह ने भी राजनीति में कदम रखा। उन्होंने आम आदमी पार्टी के साथ राजनीतिक सफर शुरू किया और विधानसभा चुनाव लड़ा। अंतरराष्ट्रीय कबड्डी खिलाड़ी गुरलाल सिंह घनौर 2022 में घनौर से विधायक बने। वह पंजाब की ग्रामीण खेल संस्कृति से विधानसभा तक पहुंचे हैं। खिलाड़ियों के राजनीति में आने के कारण पहलवान जसकंवर सिंह उर्फ जस्सा पट्टी को जुलाई 2026 में आम आदमी पार्टी ने पट्टी विधानसभा हलके का प्रभारी नियुक्त किया। यह खिलाड़ियों के राजनीति में आने की नई कड़ी है। पंजाब में खेलों की सामाजिक प्रतिष्ठा बहुत मजबूत है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का प्रतिनिधित्व कर चुके खिलाड़ियों की सार्वजनिक पहचान पहले से बनी होती है। खेलों से जुड़े अनुशासन और प्रतिस्पर्धा की पृष्ठभूमि उन्हें सार्वजनिक जीवन में अलग पहचान देती है। खिलाड़ियों की लोकप्रियता राजनीतिक दलों के लिए युवा पीढ़ी से जुड़ने का माध्यम बन सकती है। हालांकि खेल की लोकप्रियता चुनावी सफलता की गारंटी नहीं होती, कई खिलाड़ी चुनाव हार भी चुके हैं। 

UPI चार्ज के खिलाफ इंदौर के व्यापारी लामबंद, ₹2,000 से ऊपर के भुगतान पर जताया विरोध

इंदौर  यूपीआइ आज देश की नियमित और वैध डिजिटल भुगतान व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है। लोगों को इसकी आदत लगने के बाद इस पर अतिरिक्त शुल्क लगाना उचित नहीं होगा। इससे बाजार में लेन-देन प्रभावित हो सकता है और व्यापारी वर्ग के सामने नई आर्थिक चुनौती खड़ी हो सकती है। भुगतान पर शुल्क बढ़ने पर व्यापारी उसे ग्राहक आधारित कर देने के लिए मजबूर होंगे, जिससे बाजार में लेन-देन की लागत बढ़ने की आशंका रहेगी। यूपीआइ भुगतान पर प्रस्तावित मर्चेंट फीस को लेकर व्यापार जगत ने चिंता जताई है। इंदौर के व्यापारियों ने जताया विरोध इंदौर में अहिल्या चेम्बर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज के संयुक्त सचिव एवं इंदौर रिटेल गारमेंट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष अक्षय जैन ने कहा कि अर्थव्यवस्था को अधिक पारदर्शी बनाने और नकदी आधारित लेन-देन को महंगा करना किसी भी स्थिति में ठीक नहीं है। 2,000 तक के भुगतान रोजमर्रा की छोटी खरीदारी के लिए पर्याप्त हो सकते हैं, लेकिन कपड़े, किराना, स्कूल फीस, इलेक्ट्रॉनिक्स, चिकित्सा, यात्रा और अन्य बड़े भुगतानों में राशि अक्सर इससे अधिक होती है। व्यापारी हर अतिरिक्त लागत अपनी जेब से वहन नहीं कर सकता। यदि यूपीआइ भुगतान पर शुल्क लगता है तो व्यापारी के सामने दो ही रास्ते रहेंगे मार्जिन कम करना या लागत को वस्तु अथवा सेवा की कीमत में शामिल करना। दूसरे विकल्प की स्थिति में इसका भार अंततः ग्राहक पर पड़ सकता है और महंगाई पर अतिरिक्त दबाव बन सकता है। नकद व्यवहार में बढ़ोतरी की आशंका यूपीआइ भुगतान पर प्रस्तावित मर्चेंट फीस इसके उपयोग को सीमित करेगा। योगेश मेहता, अध्यक्ष एआय एमपी के अनुसार इससे नकद व्यवहार में बढ़ोतरी की आशंका है अतः सरकार को अपने इस फैसले पर पुनर्विचार करना चाहिए और पूरे विश्व में एकमात्र यह यूपीआइ शुद्धतम स्वदेशी विचार से बना हुआ है जिसका उपयोग देश की 100 करोड़ से अधिक जनता कर रही है और इस पर शुल्क लगाना जनता के लिए इसके उपयोग को सीमित करेगा केंद्र सरकार से हम मांग करते हैं कि इस पर पुनर्विचार करें। बिजनेस के हिसाब से ये मुश्किल पैदा करेगा आदित्य कासलीवाल, महामंत्री कार डीलर एसोसिएशन के अनुसार यह बिजनेस के हिसाब से ये मुश्किल पैदा करेगा। यूपीआइ कम होगा और बिजनेस पर असर पड़ेगा। इसके साथ ही विवाद होगे। चार्ज किसी पर भी लगे, वसूला तो उपभोक्ता से ही जाएगा। मारोठिया बाजार के अध्यक्ष विशाल शमी ने कहा कि डिजिटल भुगतान व्यवस्था को प्रोत्साहित करने के बाद यूपीआइ लेन-देन पर अतिरिक्त शुल्क लगाने का प्रस्ताव व्यापारियों और आम उपभोक्ताओं के लिए चिंता का विषय है। अतिरिक्त वित्तीय भार पड़ेगा व्यवसायी राजदीप मल्होत्रा के अनुसार सरकार लंबे समय से डिजिटल और कैशलेस भुगतान को बढ़ावा देती रही है। यूपीआइ को व्यापक रूप से अपनाने के बाद आम जनता और व्यापारियों की दैनिक लेन-देन में इस व्यवस्था पर निर्भरता बढ़ी है। ऐसे में यूपीआइ भुगतान पर मर्चेंट चार्ज लगाने से छोटे एवं मध्यम व्यापारियों पर अतिरिक्त वित्तीय भार पड़ सकता है। सराफा बाजार व्यापारी संघ ने भी इसका विरोध किया है। सोना, चांदी, जवाहरात व्यापारिक एसोसिएशन के अध्यक्ष हुकुम सोनी के अनुसार यह सरासर गलत है, इससे बाजार और बिगड़ जाएगा एवं लोगों में असमंजस की स्थिति बनेगी एवं व्यापारी वर्ग पैसा नहीं ले पाएगा। जीजेसी ने सोने की हॉलमार्किंग शुल्क में 67% वृद्धि को अनुचित बताया। हॉल मार्किंग शुल्क को लेकर भी परेशानी ऑल इंडिया जेम एंड ज्वेलरी डोमेस्टिक कौंसिल ने सोने की हॉल मार्किंग शुल्क को प्रति आर्टिकल 45 से बढ़ाकर 75 रुपए करने पर गहरी चिंता व्यक्त की है और सरकार तथा भारतीय मानक ब्यूरो से इस निर्णय की तत्काल समीक्षा कर हितधारकों से परामर्श होने तक मौजूदा शुल्क बनाए रखने का आग्रह किया है। राजेश रोकड़े ने कहा कि जीजेसी और आभूषण उद्योग ने लगातार हॉलमार्किंग का समर्थन किया है, क्योंकि शुद्धता आश्वासन और उपभोक्ता विश्वास हमारे व्यापार के मूलभूत तत्व हैं। लेकिन हॉलमार्किंग का समर्थन करने का अर्थ यह नहीं है कि अनिवार्य अनुपालन लागत में लगभग 67% वृद्धि बिना जांच के स्वीकार कर ली जाए। हॉलमार्किंग की मात्रा अत्यधिक बढ़ चुकी है। इसलिए उद्योग को यह समझने का अधिकार है कि इस चरण में प्रति आर्टिकल शुल्क 45 रुपए से 75 रुपए क्यों बढ़ाना आवश्यक है। बढ़ेगी परेशानी नमकीन-मिठाई विक्रेता संघ के अनुराग बोथरा के अनुसार यूपीआइ का नया फैसला परेशानी बढ़ाएगा। हम लोग पहले ही कई तरह के टैक्स देते हैं। यहां तक कि चिल्लर भी लेते हैं। ऐसी स्थिति में कारोबार को सुगम बनाने की बजाय जटिल करना न्यायोचित नहीं है। दुकानों पर लगेंगे पोस्टर यूपीआइ भुगतान पर प्रस्तावित मर्चेंट फीस को लेकर व्यापारियों और ग्राहकों में नाराजगी अब बाजारों में दिखाई देने लगेगी। इंदौर रिटेल गारमेंट्स एसोसिएशन ने इस मुद्दे पर सरकार का ध्यान आकर्षित करने के लिए दुकानों पर विरोध के पोस्टर लगाने की मुहिम शुरू करने का निर्णय लिया है। 18 सितंबर से शहर की विभित्र दुकानों पर मर्चेंट फीस का विरोध' सबंधी पोस्टर लगाए जाएंगे। यह अभियान किसी राजनीतिक दल के विरोध में नहीं, बल्कि व्यापारियों और उपभोक्ताओं की चिंता सरकार तक पहुंचाने का शांतिपूर्ण प्रयास है। दुकानों पर लगाए जाने वाले पोस्टरों के माध्यम से ग्राहको को भी इस विषय की। 

हर माह दो दिन लगेंगे सेवा समाधान शिविर, आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं से अधिकारियों तक को मिलेगी सुविधा

आंगनवाड़ी कार्यकर्ता से अधिकारी तक, सबकी सेवा संबंधी समस्याओं का होगा त्वरित निराकरण संभाग-जिला स्तर पर हर माह प्रथम एवं तृतीय बुधवार को होंगे शिविर भोपाल  आयुक्त महिला एवं बाल विकास संदीप जी.आर. ने विभागीय अधिकारियों-कर्मचारियों की सेवा संबंधी समस्याओं के त्वरित एवं समयबद्ध निराकरण के लिए महत्वपूर्ण पहल की है। उनके निर्देशानुसार अब संभाग एवं जिला स्तर पर प्रत्येक माह के प्रथम एवं तृतीय बुधवार को दोपहर 2 से शाम 5 बजे तक नियमित समस्या निवारण शिविर आयोजित किए जाएंगे। इस संबंध में आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। शिविरों में आंगनवाड़ी कार्यकर्ता एवं सहायिका से लेकर जिला स्तर के अधिकारी-कर्मचारी तक अपनी सेवा संबंधी समस्याएं और आवेदन प्रस्तुत कर सकेंगे। नियुक्ति, समयमान वेतनमान, पदोन्नति, अनुकंपा नियुक्ति, सेवानिवृत्ति उपरांत पेंशन तथा अन्य देय स्वत्वों से संबंधित प्रकरणों की सुनवाई कर नियमानुसार समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। प्रत्येक प्राप्त प्रकरण का अभिलेख भी संधारित किया जाएगा, जिससे उसके निराकरण की नियमित निगरानी की जा सके। आयुक्त संदीप जी.आर. ने कर्मचारियों को उनके अधिकारों एवं देय स्वत्वों के लिए अनावश्यक कठिनाई से बचाने के साथ ही विभागीय व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनाने पर जोर दिया है। इसी क्रम में कर्मचारियों के वेतन का भुगतान प्रत्येक माह की पहली तारीख को सुनिश्चित करने तथा आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं एवं सहायिकाओं के मानदेय के साथ विभागीय कर्मचारियों के चिकित्सा देयक, यात्रा भत्ता और अन्य स्वत्वों का समय पर भुगतान करने के निर्देश भी दिए गए हैं। समस्या निवारण शिविरों की जानकारी सभी अधिकारियों-कर्मचारियों तक पहुंचाने के साथ प्राप्त प्रकरणों के निराकरण की नियमित समीक्षा और रिपोर्टिंग की व्यवस्था भी की जाएगी। विभाग का उद्देश्य है कि कर्मचारियों की सेवा संबंधी समस्याओं का समाधान उनके निकटतम स्तर पर, पारदर्शी प्रक्रिया के माध्यम से और निर्धारित समय-सीमा में सुनिश्चित हो।