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मध्यप्रदेश सरकार की तैयारी, किरायेदारों के अधिकारों को सुरक्षित करेगा नया कानून

भोपाल   किरायेदार और मकान मालिक दोनों को सुरक्षित करने के लिए सरकार मॉडल किराएदारी बिल (Model Tenancy Bill) लागू करने जा रही है। बिल को अंतिम रूप देने के लिए नगरीय विकास एवं आवास विभाग ने फिर कवायद शुरू की है। विभाग ने संचालनालय से प्रदेश में बनाए बिल के ड्राफ्ट, लागू कानून और केंद्र के मॉडल किराएदारी एक्ट की तुलनात्मक रिपोर्ट मांगी है। नए कानून के ड्राफ्ट में किराएदार और मकान मालिक दोनों के हितों की रक्षा की व्यवस्था है। मकान पर कब्जा होने से रोकने के प्रावधान हैं। एग्रीमेंट खत्म होने पर किराएदार के मकान खाली न करने पर उसे पहले दो माह में दोगुना और तीसरे महीने से चार गुना किराया देना होगा। मकान भी प्रशासन खाली कराएगा। किराएदार की सुरक्षा के लिए मालिक द्वारा घर का नल कनेक्शन, गैस सप्लाई, मार्ग, लिफ्ट, सीढिय़ां, पार्किंग आदि बंद करने पाबंदी लगाई गई है। नगरीय विकास विभाग मॉडल किराएदारी बिल को दे रहा अंतिम रूप नगरीय विकास विभाग मॉडल किराएदारी बिल को अंतिम रूप देने के लिए बैठकें कर रहा है। अफसरों का कहना है, बिल जल्द वरिष्ठ सचिव समिति के पास भेजा जाएगा। वहां से अनुमति के बाद कैबिनेट में पेश होगा। बता दें, अभी प्रदेश में किराएदारी अधिनियम 2010 लागू है। यह सिर्फ शहरी क्षेत्रों तक सीमित है। नया एक्ट ग्रामीण-शहरी, व्यावसायिक सभी प्रॉपर्टी पर लागू होगा। शासकीय, धार्मिक संस्थान, ट्रस्ट या वक्फ बोर्ड के अधीन परिसरों पर लागू नहीं होगा। विवाद सुलझाने कोर्ट जाने की जरूरत नहीं -नए नियमों के तहत किराएदारी विवाद सुलझाने कोर्ट नहीं जाना होगा। – जिले में किराया प्राधिकारी डिप्टी कलेक्टर स्तर के अफसर होंगे। किराया अतिरिक्त कलेक्टर कोर्ट होगा। – अपील के लिए जिला जज की अध्यक्षता में रेंट ट्रिब्यूनल गठित होगा। – किराएदारी की पूरी जानकारी रखने के लिए अलग पोर्टल बनेगा। – मकान मालिक और किराएदार के बीच के एग्रीमेंट की सूचना किराया प्राधिकारी को 60 दिन में देनी होगी। – प्राधिकारी इसे पोर्टल पर अपलोड करेंगे। किराया वृद्धि या मकान खाली करने जैसी सूचना यहीं अपडेट होंगी। विवाद घटेंगे, भरोसा बढ़ेगा मध्यप्रदेश में वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार 27.7 फीसदी आबादी शहरों में रहती है। यह 40 फीसदी पहुंचने का अनुमान है। लोग बड़ी संख्या में पढ़ाई, नौकरी, व्यापार, बेहतर सुविधा के लिए शहरों में आ रहे हैं। कई लोग किराएदारों के विवाद से बचने के लिए खाली आवास होने के बावजूद किराए पर नहीं देते। लोग अपने कार्यस्थल के पास ही अफॉर्डेबल राशि का भुगतान कर किराए पर आवास लेना चाहते हैं। कई बार मकान मालिक मनमाना किराया मांगते हैं। अभी कानून (Model Tenancy Bill) में इसके प्रावधान नहीं हैं। नए कानून में मकान मालिक अधिकतम दो माह का एडवांस किराया ही ले सकेंगे। मनमानी पर रोक, क्षेत्र के हिसाब से किराया नए एक्ट में जहां मकान मालिक के हितों की रक्षा करने के लिए नए प्रावधान किए गए हैं. वहीं किराए पर दी जाने वाली संपत्तियों पर मनमानी किराया वसूलने से भी रोक लगाई गई है. इसमें क्षेत्र के आधार पर किराया तय किया जाएगा. जिससे किराएदारों को भी राहत मिलेगी और उन्हें मुंहमांगा किराया नहीं चुकाना पड़ेगा. वर्तमान में शहरों में संपत्ति कर के लिए अलग-अलग स्लैब हैं, इसी आधार पर अलग-अलग क्षेत्रों पर किराए की दर भी निर्धारित की जाएगी. अतिरिक्त निर्माण पर रोक, क्षतिपूर्ति देनी होगी एमटीए के तहत अब किराएदार संबंधित संपत्ति में अतिरिक्त निर्माण नहीं करा सकेगा. यदि वह ऐसा कराता है, तो उसके साथ बेदखली की कार्रवाई भी की जा सकेगी. इसके साथ उसके द्वारा किराए के लिए जमा की गई एडवांस राशि में से ही अतिरिक्त निर्माण को हटाने के साथ मकान को व्यवस्थित किया जाएगा. मकान या दुकान में टूट-फूट होने पर भी यही प्रावधान लागू होंगे. यानि क्षतिपूर्ति किराएदार को चुकानी होगी. एमटीए में एजेंट को मिलेगा कानूनी दर्जा मकान मालिक और किराएदारों के बीच में बड़ा रोल एजेंटो का भी होता है, लेकिन अब तक इनको एक्ट में नहीं लिया गया था, लेकिन नए मॉडल टेनेंसी एक्ट में एजेंटों को भी एक्ट के दायरे में लाया गया है. इनको हर साल अपना पंजीयन कराना होगा. एजेंट संबंधित जिले में कलेक्टर कार्यालय में जाकर अपना पंजीयन करा सकेंगे. इसके लिए एजेंटो को मामूली शुल्क भी चुकाना होगा. ऐसे में अब एजेंटो को भी कानूनी दर्जा मिलेगा. ट्रिब्यूनल के बाद ही सिविल कोर्ट में होगी सुनवाई बता दें कि नए एक्ट के तहत मकान मालिक और किराएदार के बीच आपसी विवाद निपटाने के लिए किराया प्राधिकरण का गठन किया जाएगा. इसकी अध्यक्षता अपर कलेक्टर स्तर के अधिकारी करेंगे. वहीं अलग से एक रेंट कोर्ट भी होगी, जिसमें अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट मामले की सुनवाई करेंगे. इसी प्रकार रेंट ट्रिब्यूनल का गठन किया जाएगा. जिसमें अतिरिक्त जिला न्यायाधीश या जिला न्यायाधीश सुनवाई करेंगे. वहीं रेंट ट्रिब्यूनल में विवाद नहीं सुलझ पाने के बाद ही इसकी सुनवाई सिविल कोर्ट में होगी. ग्रामीण क्षेत्रों की संपत्तियां भी एक्ट के दायरे में साल 2010 में जो किराएदारी का एक्ट बना था. उसमें केवल शहरी क्षेत्रों को लिया गया था, यानि ग्रामीण क्षेत्रों में यह कानून लागू नहीं होता था. लेकिन अब नया कानून शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में लागू होगा. खास बात यह है कि अब तक दूतावास, बहु राष्ट्रीय कंपनियां, आयोग और अंतराष्ट्रीय संगठन समेत कुछ संस्थाओं को इस एक्ट से छूट थी, लेकिन अब नए किराएदारी के एक्ट में इन सबको अधिनियम के तहत प्रावधानों का पालन करना होगा. अन्यथा इनके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी. विवाद निपटाने के लिए न्यायालय और ट्रिब्यूनल का गठन नगरीय विकास विभाग के अधिकारियों ने बताया कि मध्य प्रदेश में अब तक किराएदारी अधिनियम 2010 का पालन किया जा रहा है. लेकिन इसमें कई विसंगतियां है. ऐसे में अब नए एक्ट एमटीए बनाया गया है. इस एक्ट में कई बातें स्पष्ट हैं, जिससे मकान मालिक और किराएदार के बीच बार-बार विवाद की नौबत नहीं बनेगी. वहीं यदि ऐसा हुआ तो इसके लिए भी एक्ट में न्यायालय और ट्रिब्यूनल का प्रावधान है. यानि कि एक्ट के लागू होते ही मध्य प्रदेश में किराएदारी के विवाद निपटाने के लिए न्यायालय या ट्रिब्यूनल की स्थापना की जाएगी. विधानसभा सत्र में रखा जाएगा मॉडल टेनेंसी एक्ट नगरीय विकास एवं आवास विभाग के आयुक्त संकेत भोंडवे ने … Read more

आज उपराष्ट्रपति चुनाव का परिणाम, सांसदों की कल हुई मतदान ट्रेनिंग के बाद हुआ रोमांचक मुकाबला

नई दिल्ली उपराष्ट्रपति के लिए आज मंगलवार को मतदान होगा। उसी दिन शाम तक नतीजे घोषित होंगे। इसके साथ ही देश को 50 दिन बाद जगदीप धनखड़ की जगह नया उपराष्ट्रपति मिलेगा। 21 जुलाई को धनखड़ के अचानक इस्तीफा देने के चलते चुनाव हो रहा है। पिछले दो दशकों में उपराष्ट्रपति चुनाव में जीत का मार्जिन लगातार बढ़ा है। 2002 में भैरों सिंह शेखावत ने 149 वोट से जीत दर्ज की थी। वहीं, 2022 में धनखड़ ने विपक्ष की मार्गरेट अल्वा को 346 वोट से हराया था। NDA ने महाराष्ट्र के राज्यपाल सीपी राधाकृष्णन और विपक्षी गठबंधन इंडिया ने सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जस्टिस सुदर्शन रेड्‌डी को उम्मीदवार बनाया है। आंकड़ों में NDA को स्पष्ट बढ़त है। हालांकि संसद में विपक्ष की मजबूती से पिछले दो दशक में पहली बार मुकाबला करीबी हो सकता है।  भाजपा सांसदों को उपराष्ट्रपति पद के लिए वोटिंग की जानकारी दी गई । वहीं, इंडिया गठबंधन भी अपने सांसदों को मतदान प्रक्रिया समझाने के लिए मॉक पोल हुआ । कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे सहयोगी दलों को डिनर भी दिया । चुनाव का शेड्यूल: सुबह 10 बजे वोटिंग, 6 बजे नतीजे मतदान 9 सितंबर, सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक संसद भवन में होगा। वोटों की गिनती शाम 6 बजे से और तुरंत परिणाम घोषित होंगे। हर सांसद को विशेष पेन से बैलेट पर पहली वरीयता दर्ज करनी होगी। ऐसा न करने पर वोट अमान्य होगा। हर वोट का मूल्य एक समान होगा। 2017 में 11 और 2022 में 15 वोट अमान्य हुए थे। नियम: लोकसभा व राज्यसभा के सदस्य देते हैं वोट उपराष्ट्रपति पद के लिए लोकसभा व राज्यसभा के सदस्य वोट देते हैं। हालांकि इसके लिए व्हिप नहीं जारी हो सकती। सभी सांसद पार्टी लाइन पर वोट करें तो एनडीए उम्मीदवार राधाकृष्णन के 439 और विपक्ष के रेड्डी के 324 वोट माने जा रहे हैं। हालांकि गुप्त मतदान में क्रॉस वोटिंग दोनों तरफ से समीकरण बिगाड़ सकती है। इसलिए दोनों ओर से पूरी तैयारी की जा रही है। लोकसभा में कुल सांसदों की संख्या 542 है। एक सीट खाली है। एनडीए के 293 सांसद हैं। वहीं, राज्यसभा में 245 सांसद हैं। 5 सीट खाली हैं। एनडीए के पास 129 सांसद हैं। यह मानते हुए कि उपराष्ट्रपति के लिए नामांकित सदस्य भी एनडीए उम्मीदवार के पक्ष में मतदान करेंगे। इस तरह, सत्तारूढ़ गठबंधन को कुल 422 सदस्यों का समर्थन प्राप्त है। बहुमत के लिए 391 सांसदों के समर्थन की जरूरत है। अगस्त 2022 में एनडीए उम्मीदवार जगदीप धनखड़ को 528 वोट मिले थे। वहीं विपक्षी उम्मीदवार मार्गेट अल्वा को सिर्फ 182 वोट मिले थे। तब 56 सांसदों ने वोट नहीं डाला था। 2000 से लगातार बढ़ा जीत का अंतर 2002: भैरों सिंह शेखावत (एनडीए) ने सुशील शिंदे (कांग्रेस) को 149 वोट से हराया। 2007: हामिद अंसारी (यूपीए) ने नजमा हेपतुल्ला (एनडीए) को 233 वोट से हराया। 2012: अंसारी दोबारा निर्वाचित हुए। एनडीए के जसवंत सिंह को 252 वोट से हराया। 2017: एनडीए के वेंकैया नायडू ने विपक्ष के गोपालकृष्ण गांधी को 272 वोट से मात दी। 2022: धनखड़ ने एनडीए प्रत्याशी के तौर पर मार्गरेट अल्वा को 346 वोट से हराया। उपराष्ट्रपति चुनाव का 'नंबर गेम' समझें उपराष्ट्रपति के चुनाव में लोकसभा और राज्यसभा के सदस्य मतदान करते हैं. इस लिहाज से दोनों सदनों के कुल सांसदों की संख्या 781 है. इस लिहाज से जीत के लिए 392 सांसदों का समर्थन चाहिए. लोकसभा – 542 (अध्यक्ष को छोड़कर) एनडीए: 293 विपक्ष: 234 अन्य: 15 राज्यसभा – कुल संख्या 245-6 = 239 एनडीए: 132 विपक्ष: 77 अन्य: 30 'संख्यात्मक' लड़ाई बनाम 'नैतिक' लड़ाई! एनडीए ने महाराष्ट्र के राज्यपाल और तमिलनाडु से आने वाले सीपी राधाकृष्णन को मैदान में उतारा है. ऐसे में शुरू से ही यह बात स्पष्ट थी कि विपक्ष दक्षिण से एक उम्मीदवार उतारेगा. विपक्षी गठबंधन 'इंडिया' ब्लॉक ने तेलंगाना से आने वाले बी. सुदर्शन रेड्डी को उतारकर चुनावी लड़ाई को संख्यात्मक से ज़्यादा प्रतीकात्मक बना दिया है. 'इंडिया' ब्लॉक अपने घटक दलों को एकजुट रखने के साथ-साथ कुछ अतिरिक्त संख्या जुटाने की उम्मीद लगाए है, क्योंकि तेलुगु अस्मिता के ज़रिए वाईएसआरसीपी जैसी पार्टियों को लुभाने की कवायद है. सुदर्शन रेड्डी ने जगन मोहन रेड्डी से मुलाकात की, लेकिन जगन ने उनका समर्थन करने में असमर्थता जताई, क्योंकि जगन पहले ही रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह को एनडीए उम्मीदवार का समर्थन देने का वादा कर चुके थे. हालांकि, विपक्ष इस बात को समझने की कोशिश कर रहा है, क्योंकि उन्होंने संविधान की रक्षा और लोकतंत्र की भावना की रक्षा में महत्वपूर्ण योगदान देने के लिए न्यायमूर्ति सुदर्शन रेड्डी की प्रशंसा की. साथ ही जगन ने अनुरोध किया कि सुदर्शन की उम्मीदवारी का समर्थन करने में उनकी असमर्थता को गलत न समझा जाए. विपक्ष को 'अंतरात्मा की आवाज़' का सहारा विपक्ष उम्मीद कर रहा है कि उपराष्ट्रपति का चुनाव जितना साफ दिख रहा है, उतना है नहीं. कई सांसद अपनी अंतरात्मा की आवाज़ पर वोटिंग कर सकते हैं. बी. सुदर्शन रेड्डी कह भी चुके हैं कि उपराष्ट्रपति चुनाव में व्हिप नहीं होता है. ऐसे में कई विपक्षी सांसद अपनी अंतरात्मा की आवाज़ पर वोटिंग करेंगे. कांग्रेस नेता मणिकम टैगोर ने शराब घोटाले मामले के आरोपी सांसद मिथुन रेड्डी की रिहाई पर टीडीपी और वाईएसआरसी के बीच प्रतिद्वंद्विता का हवाला देते हुए कहा, 'अब अंतरिम ज़मानत पर वह कुछ समय के लिए आज़ाद हैं. इसलिए नहीं कि न्याय हुआ, बल्कि इसलिए कि उन्हें उपराष्ट्रपति चुनाव में अपना वोट देना है. असली सस्पेंस यह है कि क्या टीडीपी के लोग बीजेपी के उस उम्मीदवार को वोट देंगे जिसने उन्हें जेल भेजा? या न्यायमूर्ति सुदर्शन रेड्डी को वोट देंगे जो संविधान की रक्षा के लिए लड़ रहे हैं?' सत्ता पक्ष को 'नंबर गेम' से दिख रही उम्मीद सीपी राधाकृष्णन को एनडीए के 'नंबर गेम' पर अपनी जीत साफ दिख रही है. एनडीए के पास लोकसभा में 293 और राज्यसभा में 132 का समर्थन है. इस तरह 425 सांसदों का समर्थन साफ दिख रहा है. इससे एनडीए की जीत तय मानी जा रही है, लेकिन 2022 में एनडीए के उम्मीदवार जगदीप धनखड़ को मिले 528 वोटों की तुलना में यह कम है. हालांकि, बीजेपी का शीर्ष नेतृत्व सीपी राधाकृष्णन की जीत के मार्जिन को बढ़ाने के लिए … Read more

नए Pakistan Census में खुलासा, मस्जिदों की संख्या स्कूलों और अस्पतालों से बहुत ज्यादा

कराची  अपने पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान की आर्थिक बदहाली किसी से छुपी नहीं है. देश में हालात ऐसे हैं कि लोग दो वक्त की रोटी के लिए तरस रहे हैं. राशन के लिए घंटों लंबी कतारों में खड़े रहना आम बात हो गई है, जबकि महंगाई आसमान छू रही है. इन विपरीत परिस्थितियों के बीच पाकिस्तान पर एक पुरानी कहावत सटीक बैठती है 'घर में नहीं दाने, अम्मा चली भुनाने.' अब इसी बदहाली की असली तस्वीर सामने आई है. हाल ही में पाकिस्तान ने पहली बार अपनी आर्थिक जनगणना के आंकड़े सार्वजनिक किए हैं, और यह रिपोर्ट बहुत ही चौंकाने वाली है. आर्थिक रिपोर्ट से मिले आंकड़ों से स्पष्ट होता है कि देश की अर्थव्यवस्था किस कदर चरमरा चुकी है. पाकिस्तान में 6,00,000 से ज्यादा मस्जिदें और 36,000 मदरसे हैं, जबकि मात्र 23,000 कारखाने हैं। पाकिस्तान की पहली आर्थिक जनगणना में ये बात सामने आई है। इसे पाकिस्तान के योजना मंत्री अहसान इकबाल ने जारी किया है। यह रिपोर्ट ऐसे समय में आई है जब नकदी संकट से जूझ रहा पाकिस्तान करीब 61 हजार करोड़ रुपए के बेलआउट पैकेज की दूसरी समीक्षा के लिए अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) के साथ बातचीत कर रहा है। मात्र 2.42 लाख स्कूल और 214 यूनिवर्सिटी रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान में 2,42000 स्कूल, 11568 कॉलेज और मात्र 214 यूनिवर्सिटी हैं। कॉलेजों में प्राइवेट सेक्टर की हिस्सेदारी अपेक्षाकृत ज्यादा है। इससे पता चलता है कि शिक्षा और कल-कारखानों की जगह देश ने मस्जिदों और मदरसों पर निवेश किया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि देश में 27 लाख रिटेल शॉप्स, 1.88 लाख होलसेल की दुकानें, 2.56 लाख होटल और 1.19 लाख अस्पताल हैं। 250 से ज्यादा रोजगार वाले मात्र 7086 प्रतिष्ठान पाकिस्तान के अंदर सबसे ज्यादा विकसित राज्य पंजाब है, जहाँ देश की 58 फीसदी प्रतिष्ठान हैं। इसके बाद सिंध में 20 फीसदी, खैबर पख्तूनख्वा में 15 फीसदी और बलूचिस्तान में 6 फीसदी हैं। राजधानी इस्लामाबाद में 1 फीसदी से कम प्रतिष्ठान हैं। पंजाब में मदरसे और मस्जिदें भी सबसे ज्यादा हैं। देश में छोटे कारोबार का बोलबाला हैं। यहाँ 71 लाख ऐसे बिजनेस हैं जहाँ 1 से 50 लोग काम करते हैं। जबकि 35351 ऐसे प्रतिष्ठान हैं जहाँ 50 से 250 लोग काम करते हैं। सिर्फ 7086 ऐसे बिजनेस यूनिट्स हैं जहां 250 से ज्यादा कर्मचारी काम करते हैं। मस्जिदों- मदरसों की तुलना में फैक्ट्री काफी कम देश में कुल 400 लाख स्थाई यूनिट्स हैं जिनमें से 72 लाख रोजगार देती हैं। देश में 2023 तक 254 लाख लोग काम कर रहे थे। इनमें सबसे ज्यादा सर्विस सेक्टर में 113 लाख लोग हैं यानी करीब 45 फीसदी। 76 लाख लोग सोशल सेक्टर में हैं जो करीब 30 फीसदी हैं। जबकि 22 फीसदी लोग प्रोडक्शन सेक्टर में काम करते हैं। देश में करीब 6.04 लाख मस्जिदें हैं जबकि 36331 मदरसे हैं। पाकिस्तान के हालात को ये रिपोर्ट बयाँ कर रहा है। गंभीर आर्थिक संकट की एक अहम वजह पिछले कुछ दशकों में देश में इस्लामिक कट्टरता को माना जा रहा है। यही वजह है कि देश में मस्जिदों, मदरसों की संख्या, कारखानों से कहीं अधिक है। शिक्षण संस्थान कम हैं और जो हैं वहाँ की शिक्षा का स्तर भी विश्वस्तरीय नहीं है। जैसे राष्ट्रवादी विचारधारा के विरोधी वेबसाइट्स को कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें पाकिस्तान का हाल      देश भर में केवल 11,568 कॉलेज और 214 विश्वविद्यालय हैं। स्वास्थ्य सेवा भी लोगों के हिसाब से अपर्याप्त हैं। कुपोषण और बीमारी से जूझ रहे देश में 2,083 लोगों पर सिर्फ एक अस्पताल उपलब्ध है।     1.09 करोड़ लोग पशुपालन, सिलाई, खाद्य पैकेजिंग और ऑनलाइन सेवाओं जैसे क्षेत्रों में कार्यरत हैं, जो औपचारिक रोजगार के अवसरों की कमी को दर्शाता है।     आर्थिक जनगणना के अनुसार, 71.43 लाख व्यवसाय 253.44 लाख लोगों को रोजगार दे रहे हैं। इनमें केवल 2,50,000 ही औपचारिक रूप से प्रतिभूति और विनिमय आयोग में पंजीकृत हैं, जो अविकसित अर्थव्यवस्था की प्रकृति को दर्शाता है।     सूक्ष्म और लघु उद्यम व्यावसायिक पारिस्थितिकी तंत्र पर हावी हैं, जहां 95 प्रतिशत प्रतिष्ठान दस से कम लोगों को रोजगार देते हैं।     अकेले सेवा क्षेत्र में लगभग 58 प्रतिशत कार्यबल मौजूद है, जबकि उत्पादन और विनिर्माण क्षेत्र बहुत पीछे है। क्षेत्रीय असमानताएं भी उजागर हुई हैं, जहां आर्थिक प्रतिष्ठानों और सामाजिक बुनियादी ढांचे की संख्या के मामले में पंजाब और सिंध, खैबर पख्तूनख्वा और बलूचिस्तान से आगे हैं।  

MP में सड़क हादसों की स्थिति चिंताजनक, सावधानी के साथ चलें: आंकड़े बताते गंभीर स्थिति

भोपाल   केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने देशभर में वर्ष 2023 में हुए सड़क हादसों की विस्तृत रिपोर्ट जारी की है। अगस्त के अंतिम हफ्ते में जारी इस रिपोर्ट से मध्य प्रदेश में सड़कों की बदहाली और सड़क सुरक्षा व्यवस्था की बदइंतजामी खुलकर सामने आ गई है। रिपोर्ट के अनुसार, उक्त अवधि में देश में सबसे ज्यादा सड़क हादसों में तमिल नाडु के बाद मध्य प्रदेश दूसरे नंबर पर रहा। हादसों में सबसे ज्यादा मौत उत्तर प्रदेश और तमिल नाडु में हुईं, जबकि मध्य प्रदेश चौथे नंबर पर रहा। इतना ही नहीं, देश में तेज रफ्तार की वजह से हुए हादसों में मध्य प्रदेश पहले स्थान पर रहा। रिपोर्ट के अनुसार, 2023 में पूरे देश में चार लाख 80 हजार 583 सड़क हादसे हुए। इनसे एक लाख 72 हजार 890 लोगों की मौत हुई और चार लाख 62 हजार 825 लोग घायल हुए। देश में हुए कुल हादसों में से 14 प्रतिशत हादसे तमिल नाडु, 11.5 प्रतिशत मध्य प्रदेश, 10 प्रतिशत केरल, 9.39 प्रतिशत उप्र और 9 प्रतिशत हादसे कनार्टक में हुए। देश में यही पांच राज्य टाप-फाइव की सूची में शामिल हैं। टाप-पांच राज्य : कहां कितने हादसे     तमिलनाडु – 67 हजार 213     मध्य प्रदेश – 55 हजार 327     केरल – 48 हजार 091     उत्तर प्रदेश – 44 हजार 534     कर्नाटक – 43 हजार 440 सड़क हादसों में मौत : टाप-फाइव राज्य     उप्र – 23 हजार 652     तमिल नाडु – 18 हजार 347     महाराष्ट्र – 15 हजार 366     मप्र – 13 हजार 798     कर्नाटक – 12 हजार 321 नेशनल हाइवे पर हादसे     उत्तर प्रदेश – 8446     तमिलनाडु – 6258     मध्य प्रदेश – 5780 ट्रैफिक नियम तोड़ने के कारण सबसे ज्यादा हादसे मप्र में     रिपोर्ट में सड़क हादसों की अलग-अलग वजहों का भी विश्लेषण किया गया है। सामने आया है कि मध्य प्रदेश में सबसे ज्यादा हादसे ट्रैफिक नियम तोड़ने की वजह से हुए।     प्रदेश में ट्रैफिक नियम न मानने की वजह से 44 हजार 592 हादसे हुए। वहीं तेज रफ्तार की वजह से हुए हादसों में मरने वालों की संख्या मप्र में 11 हजार 380 रही, जो देश में सबसे ज्यादा है।     देश में 10 लाख से अधिक आबादी वाले शहरों में जबलपुर तीसरे नंबर पर है, जहां हादसों में 545 लोगों ने जान गंवाई है। दिल्ली 1457 मौत के साथ पहले नंबर पर है। टाप-10 शहर…जहां सबसे ज्यादा हादसे     दिल्ली – 5834     बेंगलुरु – 4974     जबलपुर – 4205     चेन्नई – 3653     इंदौर – 3566     मल्लपुरम – 3253     हैदराबाद – 2943     जयपुर – 2915     भोपाल – 2906     कोच्चि – 2803 शाम 6 से 9 बजे के बीच सबसे ज्यादा हादसे, मरने वालों में दो पहिया वाले ज्यादा रिपोर्ट में वर्ष 2020 से लेकर 2023 तक के आंकड़ों का विश्लेषण किया गया है। सामने आया कि शाम 6 से रात 9 बजे के बीच सबसे ज्यादा हादसे हुए। 2023 में इस समयावधि में 99 हजार 945 हादसे हुए हैं। यह कुल हादसों का 20.8 प्रतिशत है। ऐसे हादसों में जान गंवाने वाले सबसे ज्यादा दो पहिया सवार हैं। 2023 में सात हजार 591 दो पहिया सवारों की मौत हुई, जबकि पैदल चलने वालों की संख्या चार हजार 604 के साथ दूसरे नंबर पर है। एक हजार 593 कार सवारों की मौत हुई।

22 सितंबर से सस्ते होंगे प्रोडक्ट्स? GST कटौती पर दुकानदारों की प्रतिक्रिया

नई दिल्ली.  सरकार ने दिवाली से पहले देशवासियों को बड़ा तोहफा देते हुए रोजमर्रा में इस्तेमाल होने वाले घरेलू सामानों से लेकर कार-बाइक तक पर लागू जीएसटी को घटा दिया है। जीएसटी काउंसिल की बीते 3 सितंबर को हुई बैठक में चार की जगह सिर्फ दो जीएसटी स्लैब रखे गए हैं, जो 5% और 18% के हैं। जबकि 12% और 28% को हटा दिया गया है। इसके बाद तेल, साबुन, शैंपू, दूध, मक्खन, घी से लेकर टीवी, फ्रिज, एसी समेत तमाम सामानों का स्लैब चेंज हुआ है, जिससे इनपर टैक्स घट गया है और नई दरें 22 सितंबर 2025 से लागू होने वाली हैं। ऐसे में बड़ा सवाल ये है कि क्या इस तारीख से ग्राहकों को सस्ते रेट में सामान मिलने लगेगा? आजतक ने दुकानदारों की राय जानी और इसके असर को समझा।।। पुराने स्टॉक को लेकर बड़ी परेशानी मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक 3 सितंबर को जीएसटी रेट कट का ऐलान किए जाने के बाद ये जानने के लिए दुकानदारों से बात की कि क्या 22 सितंबर के बाद खुदरा दुकानदार नई लागू सस्ती दरों पर सामान को घाटा सहकर बेचेंगें और इससे दुकानदारों के बिजनेस पर क्या असर होगा? इस पर खुदरा दुकानदारों और रिटेलरों ने अपनी-अपनी राय रखी। नोएडा में किराने का दुकान चलाने वाले तेजपाल सिंह ने बताया कि रिटेलर के पास तो पुराने माल का स्टॉक भरा पड़ा है। क्योंकि हम इसे थोड़ा-थोड़ा करके बेचते हैं और जीएसटी रेट कट के बाद अभी तो पता ही नहीं रेट कितनी कमी आई है। उन्होंने कहा कि अगर समान आगे से महंगा आएगा, तो फिर हम महंगा बेचेंगे।उन्होंने कहा कि खुदरा दुकानदार 100 ग्राम से 500 ग्राम या किलो के भाव में बेंचते हैं, तो पूरी आने वाले समय में ही कीमतों के बारे में पूरी तस्वीर साफ हो पाएगी।  एक अन्य दुकानदार नरेश का जीएसटी सुधार को लेकर लिए गए फैसले पर कहना है कि सरकार का काम अच्छा है इससे हम लोगों को फायदा होगा, लेकिन आगे देखने वाली बात होगी कि यह कितना असरदार साबित होता है। हम लोग दाल, चीनी, चावल बेचते हैं, तो उनके रेट किस तरह रहेंगे, इसका पता तो नई दरें लागू होने के बाद हम तक पहुंचने वाले सामान के बाद ही सही से पता चल पाएगा। लेकिन जो माल स्टॉक में है, उस पुराने माल को तो हम लोग अभी इसी रेट पर बेचेंगे, जब पीछे से जीएसटी कम होकर आएगा, तो हम भी सस्ता कर देंगे।  सवाल- कितने तैयार हैं दुकानदार?  सरकार के जीएसटी कट के फैसले के बाद चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (सीटीआई) ने भी बड़ा सवाल खड़ा करते हुए कहा है कि केंद्र सरकार ने करीब 400 वस्तुओं और सेवाओं पर  GST दरों में बड़ी कटौती की है, जो 22 सितंबर से लागू होने वाली हैं। इनमें फूड प्रोडक्ट्स से लेकर रोजमर्रा में इस्तेमाल होने वाली चीजें, इलेक्ट्रॉनिक्स, कार-बाइक्स, बीमा पॉलिसी तक शामिल हैं, जो सस्ते हो जाएंगे। सीटीआई के मुताबिक, सरकार चाहती है कि इस बदलाव का सीधा फायदा आम जनता तक पहुंचे। लेकिन सवाल यह है कि आने वाले दिनों में लोगों को जीएसटी कटौती का फायदा देने के लिए व्यापारी और दुकानदार कितने तैयार हैं? इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया देते हुए सीटीआई के चेयरमैन बृजेश गोयल ने कहा कि यह बड़ा सवाल इसलिए उठ रहा है, क्योंकि पहले ही पुरानी दरों वाला हजारों टन माल दुकानों और गोदामों में भरा पड़ा है। उन्होंने कहा कि ऐसे में उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि वे पुराने सामान पर दाम कैसे घटाएं और ग्राहकों को इसका फायदा कैसे दे पाएं। 22 सितंबर से पहले के माल पर पुरानी दरों का ही टैग और दाम होगा, अब उसी माल को घटे हुए दाम पर बेचने के लिए कंपनियों, डिस्ट्रीब्यूटर्स और दुकानदारों को आपसी समन्वय करना होगा। इन तरीकों से हल्का होगा बोझ बृजेश गोयल ने दुकानदारों पर पड़ने वाले बोझ को हल्का करने के कुछ तरीके भी शेयर किए। उन्होंने कहा प्राइस एडजस्टमेंट से पुराने स्टॉक को लेकर पैदा हुई समस्या कम हो सकती है। इसके लिए कंपनियां पुरानी दरों वाले सामान के लिए डीलरों को क्रेडिट नोट देंगी। उदाहरण के तौर पर अगर किसी डीलर ने साबुन का एक कार्टून पुरानी GST की दरों के हिसाब से खरीदा है और अब उसकी कीमत घट गई है, तो फिर कंपनी उसे बराबर का क्रेडिट देगी, इससे डीलर नुकसान में नहीं रहेगा और ग्राहकों को सामान भी सस्ता मिलेगा। सीटीआई चेयरमैन के मुताबिक, रिटेल सेक्टर की दिग्गज कंपनियां रिलायंस, डीमार्ट के पास मजबूत तकनीकी सिस्टम है, वे अपने बिलिंग सॉफ्टवेयर और पीओएल मशीनों को तुरंत अपडेट भी कर सकते हैं, लेकिन दूसरी ओर छोटे दुकानदारों और मोहल्लों के दुकान चलाने वाले किराना व्यापारियों को यह बदलाव करने में थोड़ी दिक्कत पेश आ सकती है, क्योंकि उनके पास उस तरह का तकनीक उपलब्ध नहीं है। बृजेश गोयल के मुताबिक, कंपनियों को साबुन, शैंपू, टूथपेस्ट, बिस्कुट जैसे उत्पादों पर नई MRP वाले स्टीकर लगाने पड़ेंगे या फिर हो सकता है कुछ कंपनियां कीमत घटाने की जगह उस सामान के पैकिंग का वजन बढ़ा दें, जैसे 10 रुपये वाले बिस्किट के पैकेट में ज्यादा बिस्किट मिलने लगें, लेकिन प्राइस पुराना ही रहे।  दुकानदारों के लिए बड़ी चुनौती CTI चेयरमैन बृजेश गोयल की मानें, तो कुल मिलाकर सरकार द्वारा तय की गई नई दरें 22 सितंबर से ही लागू होंगी और आम उपभोक्ताओं को GST कटौती का लाभ पहुंचाना छोटे व्यापारियों और दुकानदारों के लिए बड़ी चुनौती साबित होने वाली है, क्योंकि पुरानी जीएसटी दरों का सामान नई दरों के हिसाब से बेचना दुकानदारों के लिए घाटे का सौदा भी साबित हो सकता है।

संचालन के लिए हो रही है विशेष पहल : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

माता-पिता, गुरुजनों के योगदान के प्रति हमेशा रहें कृतज्ञ : राज्यपाल पटेल दीक्षांत, शैक्षणिक यात्रा की पूर्णता के साथ, समाज और राष्ट्र की सेवा यात्रा का शुभारंभ अवसर विश्वविद्यालयों में कृषि संकाय, फैशन डिजाइनिंग जैसे रोजगारपरक कोर्स संचालन के लिए हो रही है विशेष पहल : मुख्यमंत्री डॉ. यादव दीक्षांत समारोह सिर्फ डिग्री प्राप्त करने का उत्सव नहीं, विद्यार्थियों की मेहनत, अनुशासन और गुरुजनों के मार्गदर्शन का है प्रतिफल राज्यपाल पटेल एवं मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विद्यार्थियों को उपाधि और स्वर्ण पदक प्रदान किए राज्यपाल पटेल ने बरकतउल्ला विश्वविद्यालय को ग्लोबल वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग में प्रदेश के एकमात्र विश्वविद्यालय के रूप में स्थान प्राप्त करने पर दी बधाई राज्यपाल पटेल एवं मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दीप प्रज्वलित कर दीक्षांत समारोह का किया शुभारंभ बरकतउल्ला विश्वविद्यालय के 78 हजार विद्यार्थियों को मिली पीएचडी, स्नातकोत्तर सहित अन्य उपाधि कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में हुआ बरकतउल्ला विश्वविद्यालय दीक्षांत समारोह भोपाल राज्यपाल एवं कुलाधिपति मंगुभाई पटेल ने कहा कि विद्यार्थी अपने माता-पिता और गुरूजनों के योगदान के प्रति हमेशा कृतज्ञ रहें। सफलता के बाद भी उनका हमेशा सम्मान करें। दीक्षांत शपथ का प्रतिदिन मनन करें और जीवन भर उसका अनुसरण भी करें। राज्यपाल पटेल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नए, डिजिटल और "विकसित भारत" के सपने को साकार करने में विश्वविद्यालयों की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण है। दीक्षांत, वह अवसर है जब शैक्षणिक यात्रा की पूर्णता के साथ, समाज और राष्ट्र की सेवा यात्रा का शुभारंभ होता है। यह केवल डिग्री प्राप्त करने का उत्सव नहीं, बल्कि विद्यार्थियों के वर्षों की मेहनत, अनुशासन और गुरुजनों के सफल मार्गदर्शन का प्रतिफल है। राज्यपाल पटेल सोमवार को बरकतउल्ला विश्वविद्यालय, भोपाल के दीक्षांत समारोह को संबोधित कर रहे थे। राज्यपाल मंगुभाई पटेल और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में दीप प्रज्ज्वलन और मां सरस्वती की प्रतिमा पर पुष्प अर्पण कर समारोह का शुभारंभ किया। विश्वविद्यालयीन स्मारिका और पुस्तक का लोकार्पण भी किया। राज्यपाल व कुलाधिपति पटेल तथा मुख्यमंत्री डॉ. यादव की अगुवाई में बरकतउल्ला विश्वविद्यालय की शोभा यात्रा ने मंत्रोच्चार के बीच सभागार में प्रवेश किया। राज्यपाल पटेल का विश्वविद्यालय के कुलगुरु सुरेश कुमार जैन ने पौधा, अंग वस्त्र और स्मृति चिन्ह भेंट कर अभिनंदन किया। कुलगुरु जैन ने दीक्षित विद्यार्थियों को दीक्षांत उपदेश दिया और दीक्षांत शपथ दिलाई। डिग्री और स्वर्ण पदक प्राप्त कर खिले विद्यार्थियों के चेहरे राज्यपाल पटेल ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति के माध्यम से युवाओं के लिए उनके कौशल, रुचि और क्षमता के अनुसार शिक्षा के प्रत्येक स्तर पर अनेक अवसर विद्यमान है। आज देश में कृषि, खाद्य, फिजिकल एजुकेशन, साइबर सिक्योरिटी, फोरेंसिक साइंस, ड्रोन तकनीक और विधि आदि विषयों में कैरियर की संभावनाएं तेजी से बढ़ी है। राज्यपाल पटेल ने युवाओं से अपने ज्ञान और कौशल से समाज और राष्ट्र उत्थान के लिए आगे आने का आह्वान किया है। राज्यपाल पटेल ने समारोह में विद्यार्थियों को डिग्री और स्वर्ण पदक प्रदान किए। दीक्षित विद्यार्थियों और स्वर्ण पदक प्राप्तकर्ताओं को बधाई दी। उन्होंने विश्वविद्यालय को शिक्षा, अनुसंधान और नवाचार के बेहतर प्रयासों के लिए नैक से "ए" ग्रेड प्राप्त करने और ग्लोबल वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिग में प्रदेश के एक मात्र विश्वविद्यालय के रूप में स्थान बनाने के लिए शुभकामनाएं दी। दीक्षांत समारोह अब भारतीय परंपरा के अनुरूप आयोजित किए जा रहे हैं : मुख्यमंत्री डॉ. यादव मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में भारतीय अपनी क्षमता से विश्व में पहचान बना रहे हैं। अतीत की गलतियों को सुधारते हुए दीक्षांत समारोह अब भारतीय परंपरा के अनुरूप आयोजित किए जा रहे हैं। प्रदेश में सबसे पहले वर्ष 2020 में शिक्षा नीति लागू की गई। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में सभी भाषाओं के अध्ययन पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। सभी राज्यों में बोली जाने वाली भाषाएं हमारी राष्ट्रभाषा हैं। मध्यप्रदेश सरकार ने राष्ट्रभाषा हिंदी में मेडिकल की पढ़ाई कराने की पहल की है, जिसे काफी सराहना मिल रही है। शिक्षा को केवल नौकरियों से न जोड़ा जाए, यह समाज में ज्ञान के सतत प्रसार का माध्यम है। राज्य में कुलपति को कुलगुरु की नई संज्ञा मिली है, जिसे जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय दिल्ली ने भी अपनाया है। प्रदेश के विश्वविद्यालयों में नवाचारों के साथ कृषि संकाय और फैशन डिजाइनिंग जैसे रोजगारपरक पाठ्यक्रम की पढ़ाई कराई जा रही है। नए मेडिकल कॉलेज और अस्पतालों में विश्वविद्यालयों की बड़ी भूमिका मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि बरकतउल्ला विश्वविद्यालय के माध्यम से आज 54 हजार से अधिक विद्यार्थियों को स्नातक, 23 हजार विद्यार्थियों को स्नातकोत्तर, 190 विद्यार्थियों को पीएचडी, 21 विद्यार्थियों को गोल्ड मेडल, इस प्रकार कुल 78 हजार विद्यार्थियों के सपने साकार हो रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सभी विद्यार्थियों एवं प्राध्यापकों को बधाई दी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में प्राइवेट कॉलेज और शासकीय विश्वविद्यालयों को मेडिकल कॉलेज और अस्पताल खोलने के लिए सरकार पूर्ण सहयोग प्रदान कर रही है। देवी अहिल्याबाई विश्वविद्यालय इंदौर के सहयोग से जनजातीय बहुल झाबुआ जिले में मेडिकल कॉलेज खुलने जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि देश में सुशासन की नई बयार आई है। देश के युवा, किसान, गरीब सभी वर्गों के कल्याण के साथ सरकार आगे बढ़ रही है। प्रधानमंत्री मोदी देश के स्वाभिमान और समाज के सभी वर्गों के हितरक्षक हैं। 21वीं सदी भारत की होगी और भारत दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनेगा। प्रदेश के विश्वविद्यालयों में डिजिटल वैल्यूएशन होगा शुरू : मंत्री परमार तकनीकी एवं उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने कहा कि आज विद्यार्थियों ने ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। हमें जीवनभर समाज और परिवार का ऋण उतारने के लिए कार्य करना चाहिए। देश में भारतीय परंपरा के अनुसार दीक्षांत समारोह आयोजित किए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के उच्च शिक्षा मंत्री रहते हुए सबसे पहले प्रदेश में शिक्षा नीति लागू की गई। राज्य सरकार सभी विश्वविद्यालयों में डिजिटल मूल्यांकन शुरू करेगी। विद्यार्थियों को ऑनलाइन कॉपी उपलब्ध कराएंगे। शिक्षा नीति के क्रियान्वयन के साथ प्रदेश के सभी विश्वविद्यालयों में 1 या 2 भाषाओं की पढ़ाई शुरू करेंगे। मध्यप्रदेश हृदय प्रदेश है। यहां भाषाओं को जोड़ने का कार्य शुरू होगा। विद्यार्थी अपनी ऊर्जा राष्ट्र और समाज के कल्याण में लगाएं कुलगुरु प्रो. सुरेश कुमार जैन ने विद्यार्थियों को शपथ दिलाते … Read more

SC ने सुनाया बड़ा आदेश, दुर्घटना के शिकार बच्चों और दिव्यांगों को मिले कुशल श्रमिक के बराबर मुआवजे

इंदौर सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश के एक दुर्घटना क्लेम मामले में सुनवाई करते हुए एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने कहा है कि दुर्घटना में बच्चे की मृत्यु या उसके स्थायी रूप से दिव्यांग होने पर क्षतिपूर्ति की गणना उसे कुशल श्रमिक मानते हुए की जाएगी। राज्य में दुर्घटना के समय कुशल श्रमिक का जो न्यूनतम वेतन होगा, उसे ही बच्चे की आय माना जाएगा। दावेदार व्यक्ति को न्यायाधिकरण के समक्ष न्यूनतम वेतन के संबंध में दस्तावेज पेश करने होंगे।  सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश के एक दुर्घटना क्लेम मामले में सुनवाई करते हुए महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है, जिसका असर देशभर में होगा। सर्वोच्च अदालत ने कहा है कि दुर्घटना में बच्चे की मृत्यु या स्थायी रूप से दिव्यांग होने पर क्षतिपूर्ति की गणना अब बच्चे को कुशल श्रमिक मानते हुए की जाएगी। राज्य में दुर्घटना के समय कुशल श्रमिक का जो न्यूनतम वेतन होगा, उसे ही बच्चे की आय माना जाएगा। दावेदार व्यक्ति को न्यायाधिकरण के समक्ष न्यूनतम वेतन के संबंध में दस्तावेज पेश करने होंगे, अगर वह ऐसा नहीं कर पाता है तो इन दस्तावेजों को पेश करने की जिम्मेदारी बीमा कंपनी की होगी। फैसले की प्रति सभी मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरणों को भेजी जाए, ताकि निर्देशों का सख्ती से पालन सुनिश्चित हो सके। बता दें, अब तक दुर्घटना में बच्चे की मृत्यु या स्थायी दिव्यांग होने की स्थिति में क्षतिपूर्ति की गणना नोशन इंकम (काल्पनिक आय, वर्तमान में 30 हजार रुपये प्रतिवर्ष) के हिसाब से की जाती है, लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। अब राज्य में कुशल श्रमिक के न्यूनतम वेतन के हिसाब से क्षतिपूर्ति मिलेगी। वर्तमान में मप्र में कुशल श्रमिक का न्यूनतम वेतन 14,844 मासिक, यानी 495 रुपये प्रतिदिन निर्धारित है। साल 2012 में हुई थी दुर्घटना, ऐसे सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा मामला 14 अक्टूबर 2012 को इंदौर निवासी आठ वर्षीय हितेश पटेल पिता के साथ सड़क पर खड़ा था, तभी गुजर रहे वाहन ने टक्कर मार दी। दुर्घटना में हितेश को गंभीर चोट आई। यह कहते हुए कि उसे स्थायी दिव्यांगता आई है, मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण (जिला न्यायालय) के समक्ष दस लाख रुपये का क्षतिपूर्ति दावा प्रस्तुत किया गया। जिला न्यायालय ने यह मानते हुए कि हितेश को 30 प्रतिशत दिव्यांगता आई है, उसे तीन लाख 90 हजार रुपये क्षतिपूर्ति देने के आदेश बीमा कंपनी को दिए। इस फैसले को हाई कोर्ट में चुनौती दी गई। हाई कोर्ट ने यह मानते हुए कि चूंकि हितेश की आयु सिर्फ आठ वर्ष है, क्षतिपूर्ति की राशि को बढ़ाकर आठ लाख 65 हजार रुपये कर दिया। इस फैसले से असंतुष्ट होकर सुप्रीम कोर्ट में अपील हुई। इसे स्वीकारते हुए कोर्ट ने क्षतिपूर्ति की राशि 35 लाख 90 हजार रुपये कर दी। सुप्रीम कोर्ट के आदेश में क्या? बता दें कि अब तक दुर्घटना में बच्चे की मृत्यु या उसके स्थायी दिव्यांग होने की स्थिति में क्षतिपूर्ति की गणना नोशन इनकम (काल्पनिक आय, वर्तमान में 30 हजार रुपये प्रतिवर्ष) के हिसाब से की जाती है। अब राज्य में कुशल श्रमिक के न्यूनतम वेतन के हिसाब से क्षतिपूर्ति मिलेगी। वर्तमान में मध्य प्रदेश में कुशल श्रमिक का न्यूनतम वेतन 14844 मासिक यानी 495 रुपये प्रतिदिन निर्धारित है।     कुशल श्रमिक के न्यूनतम वेतन को ही मानें बच्चे की आय     कोर्ट ने फैसले की प्रति सभी मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरणों को भेजने का दिया निर्देश ऐसे सुप्रीम कोर्ट पहुंचा मामला? 14 अक्टूबर 2012 को इंदौर निवासी आठ वर्षीय हितेश पटेल पिता के साथ सड़क पर खड़ा था, तभी एक वाहन ने उसे टक्कर मार दी। हितेश को गंभीर चोट आई। यह कहते हुए कि उसे स्थायी दिव्यांगता आई है, मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण के समक्ष 10 लाख रुपये का क्षतिपूर्ति दावा प्रस्तुत किया गया। न्यायालय ने यह मानते हुए कि हितेश को 30 प्रतिशत दिव्यांगता आई है, उसे तीन लाख 90 हजार रुपये क्षतिपूर्ति देने का आदेश बीमा कंपनी को दिया। इस फैसले को हाई कोर्ट में चुनौती दी गई। हाई कोर्ट ने यह मानते हुए कि चूंकि हितेश की आयु सिर्फ आठ वर्ष है, क्षतिपूर्ति की राशि को बढ़ाकर आठ लाख 65 हजार रुपये कर दिया। ऐतिहासिक फैसला, देशभर में लागू होगा     सुप्रीम कोर्ट का फैसला ऐतिहासिक है। पहली बार बच्चों की मृत्यु या स्थायी दिव्यांग होने पर उन्हें कुशल श्रमिक मानते हुए कुशल श्रमिक के न्यूनतम वेतन के हिसाब से क्षतिपूर्ति के लिए हकदार माना है। फैसले का असर पूरे देश में चल रहे क्लेम प्रकरणों पर पड़ेगा। -राजेश खंडेलवाल, दुर्घटना क्लेम प्रकरण के वकील  

प्रदेश में देसी नस्ल के गौपालन को किया जाए प्रोत्साहित: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

गौ-शालाऔं को स्वावलंबी बनाना जरूरी : मुख्यमंत्री डॉ. यादव प्रदेश में देसी नस्ल के गौपालन को किया जाए प्रोत्साहित: मुख्यमंत्री डॉ. यादव गौशालाओं के प्रबंधन में धार्मिक संस्थाओं और दानदाताओं को जोड़े: मुख्यमंत्री डॉ. यादव मुख्यमंत्री डॉ. यादव की अध्यक्षता में हुई मध्यप्रदेश गौसंवर्धन बोर्ड की बैठक भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि आत्मनिर्भर गौशाला, प्रदेश की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान दे सकती हैं। गौ-शालाएं गोबर, गौमूत्र आदि अपशिष्ट से धन अर्जित कर संपन्न बन सकती हैं। स्वावलंबी गौशालाएं विकसित करने के लिए दुग्ध उत्पादों सहित गौमूत्र-गोबर आदि से निर्मित सामग्री के विक्रय की व्यवस्था विकसित की जाए। साथ ही गौशालाओं में उपलब्ध स्थान का उपयोग सौर ऊर्जा से विद्युत उत्पादन के लिए भी किया जाए। प्रदेश के विभिन्न अंचलों में स्थानीय परिवेश के अनुरूप देसी नस्ल के गौपालन को प्रोत्साहित किया जाए। गौशालाओं के प्रबंधन में धार्मिक संस्थाओं और दानदाताओं को जोड़े। प्रदेश में उपलब्ध पशुधन के अनुपात में पशु चिकित्सकों की संख्या कम है। गौवंश के बेहतर प्रबंधन और दुग्ध उत्पादन में वृद्धि के लिए पशु चिकित्सकों की संख्या में बढ़ोतरी आवश्यक है। इस दिशा में आवश्यक कदम उठाए जाएं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने यह निर्देश मध्यप्रदेश गौसंवर्धन बोर्ड की मंत्रालय में सोमवार को हुई बैठक में दिए। पशुपालन एवं डेयरी विकास राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री लखन पटेल, मुख्य सचिव श्री अनुराग जैन सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की मंशा अनुसार प्रदेश में देसी नस्ल के गौपालन को प्रोत्साहित करने के लिए गिर, साहीवाल, मालवी और नागौरी नस्ल के पशुधन को प्रोत्साहित किया जाए। प्रदेश के जनजातीय अंचलों में भी गौपालन गतिविधियों को बढ़ाने के लिए आवश्यक नवाचार किए जाएं। प्रदेश में पशुपालन-कृषि-उद्यानिकी तथा नवकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में समन्वित रूप से कार्य करने से किसानों की आय में भी वृद्धि होगी और दुग्ध उत्पादन की दिशा में भी प्रदेश, देश के शीर्षस्थ राज्यों में शामिल हो सकेगा। बैठक में जानकारी दी गई कि गौसंवर्धन बोर्ड द्वारा गौशाला समितियों के बैंक खातों में राज्य स्तर से सीधे राशि अंतरित की जा रही है। बोर्ड द्वारा 937 नवीन गौशालाओं की स्थापना उपरांत पंजीयन किया गया है, जिसमें एक लाख 10 हजार गौवंश को आश्रय प्राप्त है। वर्ष 2024-25 में विदिशा, देवास, आगर-मालवा, ग्वालियर, दमोह, सतना तथा रीवा में बायोगैस सह जैविक खाद निर्माण संयंत्र स्थापित किए गए। नगर निगम ग्वालियर, इंदौर तथा उज्जैन ने वृहद गौशालाओं का संचालन आरंभ किया गया है। भोपाल और जबलपुर में गौशालाओं की स्थापना का कार्य जारी है। बैठक में स्वावलंबी गौशालाओं की स्थापना की नीति की प्रगति पर भी समीक्षा हुई।  

CM साय बोले: सौर ऊर्जा से उपभोक्ता बन रहे ऊर्जा उत्पादक और दाता

    रायपुर, प्रदेश में सौर ऊर्जा के उपभोक्ता अब केवल ऊर्जा उत्पादक ही नहीं, बल्कि ऊर्जा दाता भी बन रहे हैं. पीएम सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना जैसी महत्वाकांक्षी पहल के माध्यम से प्रदेश स्वच्छ ऊर्जा के लक्ष्य की प्राप्ति के संकल्प को तीव्र गति से पूर्ण करने की ओर अग्रसर है. मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज राजधानी रायपुर स्थित पंडित दीनदयाल उपाध्याय ऑडिटोरियम में आयोजित सौर ऊर्जा जागरूकता और प्रोत्साहन अभियान को संबोधित करते हुए यह बात कही. मुख्यमंत्री साय ने इस अवसर पर सौर ऊर्जा के फायदों, पीएम सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना और इसके अंतर्गत मिलने वाली सब्सिडी के विषय में लोगों को जानकारी देने और जागरूक करने के उद्देश्य से सूर्य रथ को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया. साथ ही मुख्यमंत्री ने 618 उपभोक्ताओं के खातों में प्रत्येक को 30 हजार रुपये की दर से कुल 1.85 करोड़ रुपये की राज्यांश सब्सिडी का ऑनलाइन अंतरण किया. मुख्यमंत्री ने कहा कि जलवायु परिवर्तन और लगातार बढ़ता प्रदूषण हम सभी के लिए गंभीर चिंता का विषय है. उन्होंने कहा कि यह हमारा सौभाग्य है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्ष 2070 तक नेट-जीरो कार्बन उत्सर्जन का लक्ष्य निर्धारित किया है और छत्तीसगढ़ इस लक्ष्य की प्राप्ति में पूरे समर्पण और क्षमता के साथ अपनी भूमिका निभा रहा है. मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रदेश में सौर ऊर्जा को बढ़ावा देते हुए हॉफ बिजली बिल से आगे बढ़ते हुए मुफ्त बिजली की ओर ले जाने का कार्य किया जा रहा है. उन्होंने इसे हर्ष का विषय बताते हुए कहा कि प्रदेशवासी इस योजना के महत्व को समझते हुए स्वच्छ ऊर्जा अपनाने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं. मुख्यमंत्री ने आमजन से आग्रह किया कि वे अपने आसपास के लोगों को भी इस योजना से जोड़ें और स्वच्छ ऊर्जा की दिशा में प्रदेश को अग्रसर बनाने में योगदान दें. मुख्यमंत्री ने बताया कि केंद्र और राज्य सरकार मिलकर उपभोक्ताओं को सब्सिडी उपलब्ध करा रही हैं. साथ ही बैंकिंग व्यवस्था के माध्यम से आसान वित्तीय सुविधा भी दी जा रही है. उन्होंने कहा कि आने वाले समय में उपभोक्ताओं को पूर्ण रूप से मुफ्त बिजली का लाभ मिलेगा. मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि प्रधानमंत्री कुसुम योजना के अंतर्गत आज लाभार्थियों को लेटर ऑफ अवार्ड प्रदान किए गए हैं. इन योजनाओं से उपभोक्ता स्वयं सौर ऊर्जा का उत्पादन कर बिजली का विक्रय कर रहे हैं और साथ ही सस्ती बिजली का लाभ भी प्राप्त कर रहे हैं. मुख्यमंत्री साय ने कहा कि वर्ष 2014 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदीने सौभाग्य योजना के माध्यम से हर घर बिजली पहुँचाने का संकल्प लिया था. उस समय देश के 18 हजार गाँव अंधेरे में थे और आज उन सभी गाँवों तक बिजली पहुँच चुकी है. उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में अब देश स्वच्छ और हरित ऊर्जा की दिशा में तेज़ी से आगे बढ़ रहा है. मुख्यमंत्री साय ने कहा कि वर्ष 2000 में छत्तीसगढ़ में बिजली उत्पादन क्षमता केवल 1,400 मेगावाट थी, जबकि आज प्रदेश 30,000 मेगावाट का उत्पादन कर रहा है और पड़ोसी राज्यों को भी बिजली उपलब्ध करा रहा है. उन्होंने बताया कि नई उद्योग नीति के अंतर्गत ऊर्जा क्षेत्र में 3.50 लाख करोड़ रुपये के एमओयू संपादित हुए हैं और आने वाले समय में प्रदेश की ऊर्जा उत्पादन क्षमता और भी बढ़ जाएगी. मुख्यमंत्री साय ने विश्वास व्यक्त किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कुशल मार्गदर्शन में छत्तीसगढ़ ऊर्जा उत्पादन के क्षेत्र में देश का अग्रणी राज्य बनेगा. उन्होंने सभी नागरिकों से अपील की कि वे पीएम सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना का लाभ उठाएँ और स्वच्छ ऊर्जा के लक्ष्य की प्राप्ति में अपनी सक्रिय भागीदारी निभाएँ. कार्यक्रम में मुख्यमंत्री के समक्ष राजनांदगांव से आए कक्षा 12वीं के छात्र प्रथम सोनी ने सौर ऊर्जा की विशेषताओं और शासन द्वारा इसे बढ़ावा देने के लिए किए जा रहे प्रयासों पर अपने विचार रखे. इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने ‘इम्पैक्ट ऑफ डिस्ट्रीब्यूटेड रिन्यूएबल एनर्जी ऑन ग्रिड स्टेबिलिटी’ और ‘एग्रीवोल्टाइक्स परफार्मर हैण्डबुक’ का भी विमोचन किया. इस अवसर पर पीएम सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना के क्रियान्वयन में विशेष भूमिका निभाने वाले उत्कृष्ट वेंडरों को भी सम्मानित किया गया. कार्यक्रम में विधायक मोतीलाल साहू, विधायक पुरंदर मिश्रा, क्रेडा के चेयरमैन भूपेंद्र सवन्नी, ऊर्जा विभाग के सचिव डॉ. रोहित यादव, क्रेडा के सीईओ राजेश राणा, भारतीय सौर ऊर्जा महासंघ के अध्यक्ष सुमन कुमार, तीनों पॉवर कंपनी के प्रबंध निदेशक सहित बड़ी संख्या में सौर ऊर्जा के उपभोक्ता उपस्थित थे.

एक्वीफर मैपिंग का लक्ष्य गंगा नदी के किनारे जल संचयन के उपायों को बनाना है बेहतर

नमामि गंगे मिशन: प्रयागराज में एक्वीफर मैपिंग प्रबंधन से नदियों को मिलेगा नया जीवन   एक्वीफर मैपिंग का लक्ष्य गंगा नदी के किनारे जल संचयन के उपायों को बनाना है बेहतर परियाेजना में स्मार्ट जल प्रबंधन प्रणाली, रिमोट सेंसिंग और ड्रोन तकनीकी का किया जा रहा उपयोग    अध्ययन के माध्यम से लगभग 200 किलोमीटर लंबी, लगभग 4 किलोमीटर चौड़ी तथा 15–25 मीटर गहरी दबी हुई प्राचीन नदी की पहचान की गई लखनऊ/ प्रयागराज  राष्ट्रीय गंगा मिशन (नमामि गंगे) के तहत प्रयागराज में एक्वीफर मैपिंग (Aquifer Management)परियोजना का लक्ष्य गंगा नदी के किनारे जल संचयन के उपायों को बेहतर बनाना और जल स्तर को नियंत्रित करने के लिए एक स्थायी प्रणाली विकसित करना है। इस परियोजना में नवाचार और तकनीकी दृष्टिकोण को शामिल किया गया है, जिसमें स्मार्ट जल प्रबंधन प्रणाली, रिमोट सेंसिंग और ड्रोन तकनीकी का उपयोग किया जा रहा है।  यह प्रणाली न केवल जल आपूर्ति में सुधार करेगी, बल्कि नदियों के प्राकृतिक प्रवाह को बनाए रखने में मदद करेगी। इसके अलावा, जल स्रोतों के संरक्षण के साथ-साथ क्षेत्रीय जल संकट को हल करने के लिए तकनीकी दृष्टिकोणों का कार्यान्वयन किया जा रहा है, जिससे आने वाले समय में पानी की स्थिर आपूर्ति सुनिश्चित हो सकेगी।     जलमग्न जलाशय प्रबंधन परियोजना से हुई प्राचीन नदी की पहचान  नमामि गंगे अभियान के तहत गंगा-यमुना दोआब क्षेत्र (प्रयागराज से कानपुर के मध्य) में पेलियो-चैनलों पर केंद्रित एक्वीफर मानचित्रण के दौरान एक उल्लेखनीय उपलब्धि प्राप्त हुई है। वैज्ञानिकों ने इस अध्ययन के माध्यम से लगभग 200 किलोमीटर लंबी, लगभग 4 किलोमीटर चौड़ी तथा 15–25 मीटर गहरी दबी हुई प्राचीन नदी की पहचान की है। यह उपलब्धि भारत के इतिहास और संस्कृति के अध्ययन में एक नया अध्याय जोड़ती है।इस परियोजना के अंतर्गत उपग्रह चित्रण तकनीक, भू-स्थानिक आंकड़ों तथा नवीनतम वैज्ञानिक उपकरणों का प्रयोग कर प्राचीन नदी मार्गों एवं भूगर्भीय जलाशयों का विस्तृत मानचित्रण किया गया।     भूजल मानचित्रण और स्थायी पुनर्भरण की दिशा में कदम  एक्वीफर अध्ययनों से पता चलता है कि यह प्राचीन नदी लगभग 3,500–4,000 मिलियन क्यूबिक मीटरतक जल भंडारण क्षमता रखती है। 150 से अधिक प्रबंधित एक्वीफर मैपिंग पुनर्भरण (MAR) स्थल चिह्नित किए गए हैं, जहां पुनर्भरण संरचनाएं बनाई जाएंगी ताकि भूजल स्तर बढ़ सके और नदी का आधार प्रवाहस्थायी बना रहे।  पहले चरण में 20–25 प्रबंधित एक्वीफर मैपिंग पुनर्भरण स्थल विकसित किए जाएंगे, जिन पर सीएसआईआर–एनजीआरआई द्वारा वैज्ञानिक निगरानी हेतु स्वचालित जल-स्तर संकेतक स्थापित किए जाएंगे। प्रस्तावित प्रबंधित एक्विफर पुनर्भरण संरचनाओं का आकार 5 मीटर × 5 मीटर × 3 मीटर होगा, जो प्रभावी पुनर्भरण सुनिश्चित करेगा। यह परियोजना उत्तर प्रदेश राज्य भूजल एवं सिंचाई विभागके सहयोग से संचालित की जा रही है, जो एक्विफर पुनर्जीवन की दिशा में एक निर्णायक कदम है।     गंगा की अविरल धारा हेतु सतत प्रयास  प्रयागराज में एक्विफर मानचित्रण परियोजना के सफल कार्यान्वयन से भूजल पुनर्भरण में वृद्धि होगी और नदी के प्रवाह में सुधार होगा, जिससे नमामिगंगे मिशनके अविरल गंगा की दृष्टि को बल मिलेगा। नवीनतम तकनीकों का उपयोग अधोसंरचना विकास में किया गया है, जिसके परिणामस्वरूप नदी प्रवाह और भूजल पुनर्भरण को बढ़ाने के बेहतर उपाय विकसित हुए हैं। भू-जलाशय प्रणालियों के माध्यम से आगामी वर्षों में जल-संकट की समस्या से निपटने के लिए स्थायी और तकनीकी समाधान प्रदान किए जा रहे हैं।     नदी पारिस्थितिकी तंत्र का पुनर्निर्माण और जल संरक्षण में नया मोड़  नमामि गंगे मिशन के तहत चलाए जा रहे शोध और प्रौद्योगिकी आधारित प्रयास नदी पारिस्थितिकी तंत्र के पुनर्निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। इन प्रयासों के तहत जलमग्न जलाशय प्रबंधन, उन्नत रिमोट सेंसिंग, जीआईएस आधारित डेटाबेस, और इन्फ्रास्ट्रक्चरल समाधान लागू किए जा रहे हैं, जो नदी के पारिस्थितिकी तंत्र को पुनः स्थापित करने के साथ-साथ जल संरक्षण के लिए स्थायी उपाय सुनिश्चित करेंगे। इन पहलों से न केवल जलवायु परिवर्तन और जल संकट के प्रभावों को कम किया जाएगा, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए गंगा और अन्य नदियों के संरक्षण की दिशा में ठोस कदम उठाए जाएंगे।     भविष्य के नदी संरक्षण के लिए मजबूत आधार  नमामि गंगे मिशन के तहत प्रयागराज में एक्वीफर मैपिंग परियोजना जैसे नवाचारी प्रयास न केवल गंगा नदी के संरक्षण के लिए महत्वपूर्ण हैं, बल्कि ये देशभर में जल संकट से निपटने के लिए भी एक मजबूत दिशा दिखा रहे हैं। अत्याधुनिक तकनीकी उपायों और वैज्ञानिक दृष्टिकोण से नदियों के पारिस्थितिकी तंत्र को पुनर्निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए जा रहे हैं। इन पहलों से जलवायु परिवर्तन के प्रभावों का मुकाबला करना, जल संसाधनों का प्रभावी प्रबंधन और जल पुनर्भरण के उपायों को लागू करना संभव हो रहा है।